धामी सरकार के विजन को जमीन पर उतारने में जुटा आवास एवं राज्य संपत्ति विभाग

उत्तराखंड की विकास यात्रा अब केवल सड़कों, भवनों और बुनियादी ढांचे तक सीमित नहीं है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दिशा-निर्देशों में विकास की तस्वीर में प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान, धार्मिक विरासत, पर्यटन संभावनाओं और युवा शक्ति को भी समान महत्व दिया जा रहा है। इसी व्यापक विजन को धरातल पर उतारने की दिशा में सचिव आवास एवं राज्य संपत्ति डॉ. आर. राजेश कुमार ने राज्य सचिवालय में महत्वपूर्ण परियोजनाओं की समीक्षा की। समीक्षा बैठक में दो अलग-अलग शहरों से जुड़ी दो बड़ी परियोजनाएं केंद्र में रहीं। अयोध्याधाम में करीब 67.83 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से उत्तराखंड का भव्य राज्य अतिथि गृह प्रस्तावित है, जबकि उधमसिंहनगर के रुद्रपुर स्थित मोदी मैदान में 2332.05 लाख रुपये की संशोधित लागत से इंडोर एवं आउटडोर स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स विकसित करने की तैयारी है। दोनों परियोजनाओं का स्वरूप अलग है, लेकिन उद्देश्य एक, उत्तराखंड की पहचान और संभावनाओं को नई ऊंचाई देना।

अयोध्याधाम में बनने वाला उत्तराखंड का राज्य अतिथि गृह केवल सरकारी आवासीय सुविधा के रूप में विकसित नहीं किया जाएगा। इसकी कल्पना ऐसे भवन के रूप में की गई है, जहां प्रवेश करते ही उत्तराखंड की सांस्कृतिक और प्राकृतिक विविधता की झलक दिखाई दे। करीब 6783.33 लाख रुपये के विस्तृत आगणन वाले इस भवन की डिजाइन में पारंपरिक पहाड़ी वास्तुशैली को प्रमुखता देने के निर्देश दिए गए हैं। भवन की आंतरिक सज्जा में भी उत्तराखंड की विशिष्ट पहचान को प्रमुखता मिलेगी। सबसे खास बात यह है कि भवन के अलग-अलग तल अलग-अलग थीम पर आधारित होंगे। ओम पर्वत, ग्लेशियर, जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क और पंचाचूली पर्वत शिखर जैसे उत्तराखंड के प्रमुख प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक प्रतीकों को भवन की थीम का हिस्सा बनाने की योजना है। इसका मकसद साफ है-अयोध्या आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को केवल उत्तराखंड के अतिथि गृह में ठहरने का अनुभव न मिले, बल्कि उन्हें देवभूमि की संस्कृति, प्रकृति और स्थापत्य से भी परिचित होने का अवसर मिले।

बारात घर की जगह बनेगा बेहतर अतिथि गृह

प्रस्तावित भवन की मूल योजना में शामिल ‘बारात घर’ को हटाने का निर्णय भी लिया गया। इसके स्थान पर भवन को पूरी तरह अतिथि गृह के निर्धारित मानकों और आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित करने के निर्देश दिए गए हैं। भवन की गुणवत्ता, उपयोगिता और आकर्षक स्वरूप पर विशेष ध्यान देने को कहा गया है। यानी योजना में केवल निर्माण नहीं, बल्कि ‘उत्तराखंड की ब्रांडिंग’ का पहलू भी दिखाई देता है। बैठक में अपर सचिव/राज्य संपत्ति अधिकारी अभिषेक रुहेला, उप सचिव हनुमान प्रसाद तिवारी तथा कार्यदायी संस्था उत्तराखंड पेयजल संसाधन विकास एवं निर्माण निगम, निर्माण इकाई देहरादून के परियोजना प्रबंधक राकेश चंद्र तिवारी मौजूद रहे।

मोदी मैदान में खेलों का नया हब

जहां अयोध्या में उत्तराखंड की संस्कृति अपनी पहचान दर्ज कराने की तैयारी में है, वहीं रुद्रपुर में प्रदेश की युवा प्रतिभाओं को आधुनिक सुविधाएं देने की दिशा में बड़ा कदम बढ़ाया जा रहा है। रुद्रपुर विधानसभा क्षेत्र के मोदी मैदान में प्रस्तावित इंडोर एवं आउटडोर स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स के संशोधित प्रस्ताव को विभागीय व्यय समिति की प्रक्रिया में आगे बढ़ाया गया है। परियोजना का पूर्व आगणन 2374.56 लाख रुपये था, जिसे संशोधित कर 2332.05 लाख रुपये किया गया है।परियोजना में खेल सुविधाओं का दायरा भी व्यापक रखा गया है। इंडोर परिसर में पहले प्रस्तावित स्क्वैश और बिलियर्ड्स को हटाकर जिम, टेबल टेनिस और बैडमिंटन को शामिल किया गया है। वहीं आउटडोर परिसर में वॉलीबॉल, बास्केटबॉल, फुटबॉल, पिकलबॉल और टेनिस की सुविधाएं प्रस्तावित हैं। इसके साथ करीब एक किलोमीटर लंबा साइकिलिंग रूट और ट्रैक पाथ भी बनाया जाएगा। खिलाड़ियों और आगंतुकों की सुविधा के लिए पर्याप्त टॉयलेट एवं चेंजिंग रूम की व्यवस्था का भी प्रावधान किया गया है।

लागत में संतुलन, सुविधाओं में विस्तार

संशोधित योजना में लागत को नियंत्रित करने के साथ सुविधाओं को अधिक उपयोगी बनाने पर जोर दिया गया है। बाउंड्रीवाल की ऊंचाई कम कर उसके स्थान पर लोहे की ग्रिल लगाने का प्रावधान किया गया है। इससे परियोजना की लागत में कमी आई है। टीएसी और नियोजन विभाग द्वारा आगणन के परीक्षण के बाद 14 अगस्त 2026 को हुई विभागीय व्यय समिति की बैठक में दिए गए निर्देशों के अनुरूप संशोधन किए गए। कार्यदायी संस्था उत्तराखंड पेयजल संसाधन विकास एवं निर्माण निगम, उधमसिंहनगर की ओर से संशोधित प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया। समिति ने संशोधित आगणन पर सैद्धांतिक सहमति प्रदान करते हुए प्रस्ताव को व्यय वित्त समिति के अनुमोदन के लिए प्रस्तुत करने का निर्णय लिया।

फाइल से फील्ड तक-विकास का एक साझा सूत्र

इन दोनों परियोजनाओं में एक महत्वपूर्ण समानता दिखाई देती है। अयोध्या का अतिथि गृह उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान को प्रदेश से बाहर मजबूत करने का माध्यम बनेगा, तो रुद्रपुर का स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स प्रदेश के भीतर युवा प्रतिभाओं को आधुनिक अवसर देने का आधार तैयार करेगा। एक परियोजना में पहाड़ की संस्कृति और प्राकृतिक विरासत की झलक होगी, दूसरी में मैदान पर पसीना बहाते युवाओं के सपनों को नई दिशा मिलेगी। यही वह व्यापक दृष्टिकोण है जिसमें विकास को केवल निर्माण कार्य के आंकड़ों से नहीं, बल्कि उसके सामाजिक और सांस्कृतिक प्रभाव से भी देखा जा रहा है। अयोध्या में देवभूमि की पहचान और रुद्रपुर में युवा शक्ति, दोनों को एक साथ साधने वाली ये परियोजनाएं उत्तराखंड के बदलते विकास मॉडल की तस्वीर पेश करती हैं।

सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने कहा परियोजना बने तो ऐसी, जो दिखे भी और काम भी आए। सचिव आवास एवं राज्य संपत्ति डॉ. आर. राजेश कुमार ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दिशा-निर्देशों के अनुरूप राज्य की विकास परियोजनाओं को गुणवत्तापूर्ण, समयबद्ध और जनोपयोगी बनाने पर हमारा विशेष फोकस है। अयोध्या में प्रस्तावित राज्य अतिथि गृह उत्तराखंड की धार्मिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक विरासत को देश-दुनिया के सामने प्रस्तुत करने का महत्वपूर्ण माध्यम बनेगा। वहीं रुद्रपुर में प्रस्तावित इंडोर एवं आउटडोर स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स युवाओं और खिलाड़ियों को आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। दोनों परियोजनाओं की समीक्षा में गुणवत्ता, लागत का संतुलन, उपयोगिता और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखा गया है। हमारा प्रयास है कि स्वीकृत परियोजनाएं धरातल पर बेहतर परिणाम देने वाली साबित हों।

देवप्रयाग विधानसभा क्षेत्र के 68 मेधावी विद्यार्थियों का दल 16 सितंबर को भारत दर्शन शैक्षिक भ्रमण पर होगा रवाना

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कीर्तिनगर विकासखंड अंतर्गत स्वामी मनमथन प्रेक्षागृह में देवप्रयाग विधानसभा क्षेत्र से भारत दर्शन शैक्षिक भ्रमण के 10वें संस्करण के तहत भ्रमण पर जाने वाले 68 मेधावी विद्यार्थियों के दल से भेंट की।

मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों से संवाद कर उनकी यात्रा एवं तैयारियों की जानकारी ली तथा उन्हें शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि भारत दर्शन शैक्षिक भ्रमण विद्यार्थियों को देश की विविधता, इतिहास, संस्कृति, विज्ञान, तकनीक और विकास को करीब से समझने का अवसर प्रदान करता है। ऐसे अनुभव विद्यार्थियों के ज्ञान को कक्षा की सीमाओं से बाहर ले जाकर उनके दृष्टिकोण को व्यापक बनाने में सहायक होते हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि विद्यार्थी भ्रमण के दौरान देश के विभिन्न क्षेत्रों की विशेषताओं को समझें, वहां की उपलब्धियों से सीखें और अपने अनुभवों को अपने साथियों के साथ साझा करें। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को देश के बड़े एवं प्रतिष्ठित संस्थानों का भ्रमण करने का अवसर मिलना उनके भविष्य की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों से जीवन में उद्देश्य निर्धारित कर निरंतर प्रयास करने तथा गुरुजनों और माता-पिता के प्रति श्रद्धाभाव बनाए रखने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने इतिहास बनाया है, उन्होंने सामान्य से असामान्य बनने के लिए निरंतर प्रयास किया है। यदि संकल्प दृढ़ हो और प्रयास सच्चे मन से किया जाए तो कोई भी ताकत सफलता की राह में बाधा नहीं बन सकती।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विकसित भारत के निर्माण का संकल्प लिया है। इस दिशा में उत्तराखण्ड को विकास के विभिन्न क्षेत्रों में अग्रणी राज्य बनाने की दिशा में राज्य सरकार द्वारा निरंतर कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि नीति आयोग द्वारा जारी सतत विकास लक्ष्यों की सूची में उत्तराखण्ड ने देश में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। उत्तराखण्ड समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने वाला स्वतंत्र भारत का पहला राज्य बना है। प्रदेश में सख्त नकल विरोधी कानून भी लागू किया गया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा लिए गए अनेक महत्वपूर्ण निर्णय अन्य राज्यों के लिए भी उदाहरण बन रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने भारत दर्शन शैक्षिक भ्रमण की पहल के लिए विधायक श्री विनोद कंडारी को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि लगातार 10 वर्षों तक इस प्रकार के कार्यक्रम को संचालित करना अपने आप में बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि इस पहल से विद्यार्थियों में प्रतिस्पर्धा की भावना बढ़ी है और वे बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरित हो रहे हैं।

विधायक विनोद कंडारी ने कहा कि आज का दिन उनके लिए गर्व और ऐतिहासिक दिन है। उन्होंने कहा कि दूर-दराज क्षेत्रों के विद्यार्थियों का सीधे मुख्यमंत्री से संवाद करना उनके लिए बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि देवप्रयाग विधानसभा क्षेत्र के विकास में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का हमेशा सहयोग रहा है और क्षेत्र से जुड़ी आवश्यकताओं एवं अपेक्षाओं को पूरा करने के लिए राज्य सरकार द्वारा निरंतर प्रयास किए गए हैं। उन्होंने कहा कि भारत दर्शन शैक्षिक भ्रमण की शुरुआत में अनेक कठिनाइयां आईं, लेकिन आज इसके सकारात्मक परिणाम सामने हैं। इस पहल से विद्यार्थियों में प्रतिस्पर्धा की भावना विकसित हुई है और बच्चे बेहतर अंक प्राप्त करने के लिए मेहनत कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कई विद्यार्थी अब 96 प्रतिशत तक अंक प्राप्त कर रहे हैं।

सीएम धामी ने विद्यार्थियों से किया सीधा संवाद, कहा युवा ही देश और प्रदेश के भविष्य के निर्माता

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के चौरास परिसर स्थित प्रेक्षागृह में ‘मेरे सपनों का उत्तराखंड’ विषय पर आयोजित ‘मुख्यमंत्री युवा विद्यार्थी मंथन’ कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर उन्होंने प्रदेशभर से जुड़े विद्यार्थियों के साथ सीधा संवाद किया और विकसित उत्तराखंड को लेकर उनके विचारों, सुझावों, सपनों तथा भविष्य की परिकल्पनाओं को जाना। मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों की जिज्ञासाओं का समाधान करते हुए उनका मार्गदर्शन भी किया।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि विद्यार्थियों की ऊर्जा, उनकी सोच और विकसित उत्तराखंड के प्रति उनकी प्रतिबद्धता उत्साहवर्धक है। प्रदेश की भावी पीढ़ी को सशक्त, आत्मनिर्भर, जागरूक और जिम्मेदार नागरिक बनाना राज्य सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने कहा कि युवाओं के विचार और सुझाव उत्तराखंड के विकास की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। आज के विद्यार्थी ही कल के उत्तराखंड और भारत का नेतृत्व करेंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘मेरे सपनों का उत्तराखंड’ अभियान को प्रदेश के विद्यार्थियों का व्यापक समर्थन मिला है। अभियान के तहत प्रदेशभर से 2,67,744 विद्यार्थियों ने अपने निबंध एवं विचार भेजे हैं। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों द्वारा व्यक्त किए गए विचार उत्तराखंड के विकास, समृद्धि और उज्ज्वल भविष्य के प्रति उनकी सोच, संवेदनशीलता और संकल्प को दर्शाते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों द्वारा लिखे गए निबंधों की सराहना करते हुए कहा कि सभी ने इतनी अच्छी तरह अपने विचार व्यक्त किए हैं कि यह निर्णय करना कठिन है कि किसने अच्छा लिखा और किसने बहुत अच्छा लिखा।

संवाद के दौरान रुद्रप्रयाग की कक्षा 11 की छात्रा सीमा सेमवाल ने पलायन विषय पर लिखे अपने निबंध के बारे में मुख्यमंत्री को बताया कि उन्होंने इसे दो-तीन दिनों में लिखा है और पलायन को विषय इसलिए चुना, क्योंकि उन्होंने इसे स्वयं महसूस किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड में मुख्य रूप से दो प्रकार का पलायन देखा जाता है—स्थायी और अस्थायी। उन्होंने कहा कि शिक्षा और रोजगार के लिए घर से बाहर जाना हमेशा नकारात्मक नहीं होता। बाहर जाकर पढ़ने, सीखने और अनुभव प्राप्त करने से युवाओं को बेहतर एक्सपोजर मिलता है। हालांकि, पहाड़ों में माताओं-बहनों को अनेक कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है। इसके बावजूद वे कठिन परिस्थितियों में भी अपने परिवार और समाज को संभालते हुए स्वयं कार्य कर रही हैं तथा दूसरों को भी प्रेरित कर रही हैं।

देवप्रयाग की छात्रा श्रेया सेमवाल ने ‘पहाड़ रहें, अपने रहें, मेरे सपने रहें’ विषय पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने पहाड़ों में रोजगार और अवसरों के विस्तार के साथ अपनी जड़ों से जुड़े रहने की आवश्यकता पर विचार रखे। वहीं जीईसी पौड़ी की छात्रा प्रिया ने विकसित उत्तराखंड को लेकर अपने विचार साझा किए। मुख्यमंत्री ने कहा कि विकसित भारत का निर्माण तभी संभव है, जब देश का प्रत्येक गांव, प्रत्येक जिला और प्रत्येक राज्य विकास की मुख्यधारा से जुड़े और विकसित हो।

छात्रा तमन्ना ने पलायन और खेती से होने वाली कम आय की समस्या को रेखांकित करते हुए कहा—‘मेरा पहाड़, मेरा रोजगार, पत्थर की छाती पर बनेगा रोजगार।’ मुख्यमंत्री ने उनके विचार की सराहना करते हुए कहा कि यह सकारात्मक सोच का परिचायक है। परिस्थितियां चुनौतीपूर्ण हो सकती हैं, लेकिन हमारा संकल्प मजबूत होना चाहिए कि जीवन में हमें कुछ बेहतर करना है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के युवाओं को अपनी परिस्थितियों को अवसर में बदलने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।

छात्रा सृष्टि ने सरकारी स्कूलों और अस्पतालों के प्रति लोगों के भरोसे से जुड़े सवाल उठाए। मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जैसे व्यक्तित्व साधारण परिवारों से निकलकर देश के सर्वोच्च पदों तक पहुंचे हैं। उन्होंने कहा कि व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने में युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है। आज की पीढ़ी अच्छे और बेहतर की समझ रखती है। युवाओं को अपने जनपद और प्रदेश में हो रहे विकास कार्यों तथा विभिन्न व्यवस्थाओं की जानकारी रखनी चाहिए और सकारात्मक बदलाव के लिए अपनी भूमिका निभानी चाहिए।

रुद्रप्रयाग की छात्रा अनुष्का ने पलायन रोकने से जुड़े अपने विचार साझा किए। इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियां चुनौतीपूर्ण हैं, इसके बावजूद सरकार द्वारा गांव-गांव तक बिजली, पानी और अन्य मूलभूत सुविधाएं पहुंचाने के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी है और सरकार निरंतर इस दिशा में कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में 500 से अधिक स्मार्ट क्लास संचालित किए जा रहे हैं तथा रिवर्स माइग्रेशन भी हो रहा है। उन्होंने युवाओं का आह्वान किया कि वे केवल नौकरी खोजने वाले नहीं, बल्कि नौकरी देने वाले बनने का लक्ष्य रखें।

इशिका नेगी और गौरव बिष्ट ने पर्यटन, पर्यावरण संरक्षण तथा चारधाम यात्रा से जुड़े विषयों पर अपने सुझाव साझा किए। विद्यार्थियों ने उत्तराखंड की प्राकृतिक संपदा को संरक्षित रखते हुए पर्यटन को रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था से जोड़ने पर भी अपने विचार रखे।

छात्र मुकेश कुशवाहा ने स्वास्थ्य सुविधाओं को और बेहतर बनाने के लिए छोटे-छोटे गांवों तक हेलीकॉप्टर एंबुलेंस जैसी सुविधा पहुंचाने तथा विद्यालय स्तर पर कौशल विकास की ट्रेनिंग उपलब्ध कराने का सुझाव दिया। मुख्यमंत्री ने इसे महत्वपूर्ण सुझाव बताते हुए कहा कि सरकार का प्रयास है कि युवाओं को अपनी प्रतिभा और क्षमता का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने के लिए आवश्यक सुविधाएं और अवसर उपलब्ध कराए जाएं। उन्होंने कहा कि कौशल विकास और रोजगारपरक शिक्षा के माध्यम से युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि विद्यार्थियों द्वारा रखे गए सभी विचारों और सुझावों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। विकसित भारत और विकसित उत्तराखंड के निर्माण में प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका महत्वपूर्ण है। उन्होंने युवाओं से नशे से दूर रहने का आह्वान करते हुए कहा कि युवा अपनी ऊर्जा को सकारात्मक दिशा में लगाएं और राष्ट्र निर्माण में अपनी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करें।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज का दिन उनके लिए विशेष है, क्योंकि उन्हें विद्यार्थियों से सीधे संवाद करने का अवसर मिला। विद्यार्थियों के विचारों से उनकी परिकल्पना, ज्ञान, संवेदनशीलता और भविष्य को लेकर उनकी सोच का पता चलता है। उन्होंने कहा कि सभी विद्यार्थियों के भीतर आगे बढ़ने और कुछ बेहतर करने की तीव्र इच्छा दिखाई देती है। यही ऊर्जा विकसित उत्तराखंड के निर्माण की सबसे बड़ी ताकत है।

उन्होंने कहा कि देश का भविष्य युवा हैं और भविष्य का उत्तराखंड एवं भारत युवाओं के सपनों, संकल्प और मेहनत से बनेगा। वर्ष 2047 में भारत कैसा हो, उसमें युवाओं का क्या योगदान हो, उनकी क्या भूमिका हो और व्यवस्थाएं कैसी होनी चाहिए—इन सभी विषयों पर युवाओं की सोच और सहभागिता अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि विकास की इस यात्रा में प्रत्येक युवा की भूमिका अहम है और युवाओं को अपने सपनों को लक्ष्य में बदलकर निरंतर आगे बढ़ना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के युवा विभिन्न क्षेत्रों में बेहतर कार्य कर रहे हैं। टेक्नोलॉजी और इनोवेशन के क्षेत्र में युवाओं की प्रतिभा को आगे बढ़ाने के लिए मुख्यमंत्री युवा योजना जैसे प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि युवाओं की प्रतिभा और मेहनत के साथ खिलवाड़ करने वाले नकल माफियाओं के विरुद्ध भी राज्य सरकार ने सख्त कानून बनाए हैं, ताकि योग्य युवाओं को पारदर्शी और निष्पक्ष अवसर मिल सकें।

कार्यक्रम के दौरान छात्रा अदिति गौतम ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को उनके द्वारा बनाई गई एक चित्रकृति भेंट की। बेहतर सहभागिता के लिए नोडल अधिकारी शिक्षक अंकुश को सम्मानित किया गया। वहीं रुद्रप्रयाग जनपद से निबंध प्रतियोगिता में विद्यार्थियों की शत-प्रतिशत भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए जिलाधिकारी रुद्रप्रयाग श्री विशाल मिश्रा को भी सम्मानित किया गया।

मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि वे अपने सपनों को अपना लक्ष्य बनाएं, निरंतर मेहनत करें और अपनी प्रतिभा एवं ऊर्जा का उपयोग प्रदेश तथा देश के निर्माण में करें। उन्होंने कहा कि आने वाला उत्तराखंड युवाओं के सपनों का उत्तराखंड होगा और इसके निर्माण में प्रदेश के प्रत्येक युवा की महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी।

सरकारी भूमि का स्वामित्व राज्य सरकार के पास ही रहेगा: मीनाक्षी सुंदरम

राज्य में पूंजी निवेश को प्रोत्साहित करने, रोजगार के नए अवसर सृजित करने तथा उपलब्ध सरकारी भूमि एवं संसाधनों के सुनियोजित एवं आर्थिक उपयोग के उद्देश्य से गठित उत्तराखंड इन्फ्रास्ट्रक्चर एंड इन्वेस्टमेंट डेवलपमेंट बोर्ड (यूआईआईडीबी) की कार्यप्रणाली को लेकर हाल के दिनों में विभिन्न माध्यमों से सामने आई सूचनाओं के संबंध में राज्य सरकार ने स्थिति स्पष्ट की है। सरकार की ओर से कहा गया है कि यूआईडीबी को 7,000 बीघा भूमि उपलब्ध कराए जाने संबंधी जानकारी तथ्यात्मक नहीं है। वर्तमान में यूआईआईडीबी को चिन्हित भूमि में से मात्र 45 एकड़ भूमि ही उपलब्ध हो पाई है। न तो 7,000 बीघा भूमि यूआईआईडीबी को दी गई है और न ही इतनी भूमि प्राप्त करने की कोई प्रक्रिया संचालित है।

प्रमुख सचिव नियोजन एवं प्रबंध निदेशक यूआईआईडीबी श्री आर. मीनाक्षी सुंदरम ने कहा कि हाल ही में कुछ स्वतंत्र मीडिया संस्थानों तथा विभिन्न सार्वजनिक मंचों पर यूआईआईडीबी की परियोजनाओं एवं कार्यक्रमों को लेकर प्रश्न उठाए गए हैं। ऐसे में आवश्यक है कि इससे संबंधित सही और तथ्यात्मक जानकारी जनता के समक्ष रखी जाए, ताकि किसी प्रकार की भ्रांति अथवा भ्रम की स्थिति उत्पन्न न हो। उन्होंने स्पष्ट किया कि यूआईआईडीबी को 7,000 बीघा भूमि मिलने की बात सही नहीं है। यूआईआईडीबी को इतनी भूमि न तो प्राप्त हुई है और न ही इतनी भूमि प्राप्त करने का कोई प्रयास गया है। उन्होंने कहा कि अब तक चिन्हित भूमि में से केवल 45 एकड़ भूमि ही यूआईडीबी को उपलब्ध हुई है।

यूआईआईडीबी के गठन का उद्देश्य सेवा क्षेत्र में पूंजी निवेश को बढ़ावा देना

सुंदरम ने कहा कि यूआईआईडीबी के गठन के पीछे राज्य के दीर्घकालिक आर्थिक विकास से जुड़े स्पष्ट उद्देश्य हैं। राज्य सरकार का लक्ष्य आगामी पांच वर्षों में प्रदेश के सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) को दोगुना करना है। इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए राज्य में पूंजी निवेश को बढ़ावा देना, रोजगार के अवसर सृजित करना तथा निवेश परियोजनाओं को धरातल पर उतारने के लिए आवश्यक आधारभूत संसाधन उपलब्ध कराना महत्वपूर्ण है।

उन्होंने कहा कि राज्य में आयोजित इन्वेस्टर समिट के दौरान बड़ी संख्या में निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। इन निवेश प्रस्तावों को धरातल पर उतारने के लिए निवेशकों को आवश्यक सुविधाओं के साथ उपयुक्त भूमि एवं अन्य आधारभूत संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करना आवश्यक है। यूआईआईडीबी का गठन इसी व्यापक उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए किया गया है, ताकि विशेष रूप से सेवा क्षेत्र में निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए एक प्रभावी संस्थागत व्यवस्था उपलब्ध हो सके।

उन्होंने कहा कि औद्योगिक एवं विनिर्माण क्षेत्र में निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए राज्य में सिडकुल जैसी संस्थागत व्यवस्था पहले से कार्य कर रही है। इसी प्रकार यूआईडीबी के माध्यम से पर्यटन, हॉस्पिटैलिटी, वेलनेस, शिक्षा, स्वास्थ्य तथा अन्य सेवा क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण एवं बड़े स्तर के पूंजी निवेश को प्रोत्साहित करने का प्रयास किया जा रहा है। इन क्षेत्रों में निवेश के लिए उपयुक्त भूमि की आवश्यकता होती है। ऐसे में यूआईडीबी का उद्देश्य निवेशकों के लिए उपलब्ध संसाधनों को व्यवस्थित रूप से चिन्हित करना और नियमानुसार उपलब्ध कराते हुए निवेश की प्रक्रिया को सुगम बनाना है।

सुंदरम ने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत के साथ विकसित उत्तराखंड के निर्माण का लक्ष्य भी राज्य की विकास नीति का महत्वपूर्ण आधार है। इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए पूंजी निवेश, रोजगार सृजन और आर्थिक गतिविधियों का विस्तार आवश्यक है। उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था में सेवा क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका है और पर्यटन राज्य होने के कारण पर्यटन, आतिथ्य, वेलनेस, स्वास्थ्य, शिक्षा तथा अन्य सेवा क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण निवेश को बढ़ावा देना आवश्यक है।

पर्यटन, हॉस्पिटैलिटी एवं वेलनेस क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा देने का प्रयास

प्रमुख सचिव नियोजन ने कहा कि उत्तराखंड को एक प्रमुख पर्यटन एवं वेलनेस डेस्टिनेशन के रूप में विकसित करने की पर्याप्त संभावनाएं हैं। इसके लिए उच्च गुणवत्ता वाले होटल, रिसॉर्ट, वेलनेस सेंटर तथा अन्य पर्यटन सुविधाओं में पूंजी निवेश आवश्यक है। यूआईडीबी का उद्देश्य ऐसे निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए आवश्यक भूमि एवं आधारभूत संसाधनों की उपलब्धता को सुगम बनाना है, ताकि राज्य में पर्यटन आधारित आर्थिक गतिविधियों का विस्तार हो सके और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर सृजित हों।

उन्होंने कहा कि उत्तराखंड को एक प्रमुख वेडिंग डेस्टिनेशन के रूप में विकसित करने की भी व्यापक संभावनाएं हैं। देश में जयपुर और उदयपुर जैसे शहर वेडिंग डेस्टिनेशन के रूप में अपनी पहचान बना चुके हैं और इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी व्यापक लाभ मिला है। इसी प्रकार उत्तराखंड में भी उच्च गुणवत्ता वाले होटल एवं आतिथ्य सुविधाओं के विकास के लिए पूंजी निवेश को प्रोत्साहित किया जाना आवश्यक है। यूआईआईडीबी इसी प्रकार के सेवा क्षेत्र के निवेश के लिए आवश्यक भूमि एवं संसाधनों की उपलब्धता को आसान बनाने की दिशा में कार्य कर रहा है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के विजन के अनुरूप उत्तराखंड को देश के प्रमुख पर्यटन एवं वेडिंग डेस्टिनेशन के रूप में विकसित करने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है। इसके लिए राज्य में आवश्यक बुनियादी एवं आतिथ्य सुविधाओं के विकास में पूंजी निवेश को प्रोत्साहित करना आवश्यक है। इससे पर्यटन के साथ-साथ स्थानीय व्यवसाय, परिवहन, हस्तशिल्प, स्थानीय उत्पाद और अन्य संबद्ध सेवा क्षेत्रों को भी लाभ मिलेगा।

शिक्षा एवं स्वास्थ्य क्षेत्र में निवेश के लिए भी आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने पर जोर*

श्री सुंदरम ने कहा कि उत्तराखंड देश के महत्वपूर्ण शिक्षा केंद्रों में से एक है। प्रदेश में अनेक प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान कार्यरत हैं, लेकिन उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा के क्षेत्र में विस्तार की पर्याप्त संभावनाएं हैं। राज्य सरकार का प्रयास है कि शिक्षा के क्षेत्र में बड़े एवं गुणवत्तापूर्ण पूंजी निवेश को प्रोत्साहित किया जाए, ताकि उच्च शिक्षा एवं अन्य शैक्षणिक संस्थानों का विस्तार राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में हो सके।

उन्होंने कहा कि यूआईआईडीबी के गठन का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य ऐसे सेवा क्षेत्रों में निवेश को प्रोत्साहित करना भी है, जिनसे राज्य की अर्थव्यवस्था को दीर्घकालिक लाभ मिल सकता है। शिक्षा के क्षेत्र में बड़े निवेश के लिए उपयुक्त भूमि एवं आधारभूत सुविधाओं की आवश्यकता होती है। यूआईआईडीबी ऐसी आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए निवेश के लिए उपलब्ध सरकारी संसाधनों को नियमानुसार चिन्हित एवं व्यवस्थित करने की दिशा में कार्य कर रहा है, ताकि निवेशकों के लिए प्रक्रिया सुगम हो और राज्य में गुणवत्तापूर्ण संस्थानों का विस्तार हो सके।

उन्होंने कहा कि इससे उत्तराखंड के युवाओं को उच्च शिक्षा के लिए दिल्ली, बेंगलुरु और देश के अन्य बड़े शहरों की ओर जाने के बजाय राज्य में ही बेहतर शैक्षणिक अवसर उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। शिक्षा के क्षेत्र में निवेश से प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार के साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी गति मिलेगी। इसी प्रकार स्वास्थ्य, वेलनेस, पर्यटन और आतिथ्य जैसे सेवा क्षेत्रों में निवेश को प्रोत्साहित करने से राज्य के आर्थिक विकास को नई गति दी जा सकती है।

सेवा क्षेत्र में निवेश के लिए व्यवस्थित लैंड बैंक की आवश्यकता

प्रमुख सचिव नियोजन ने कहा कि उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य में निवेश के लिए उपयुक्त भूमि उपलब्ध कराना अपने आप में एक महत्वपूर्ण चुनौती है। राज्य में निजी स्तर पर भूमि खरीद की प्रक्रिया विभिन्न कारणों से जटिल है। ऐसे में सेवा क्षेत्र की निवेश परियोजनाओं के लिए आवश्यक भूमि उपलब्ध कराने के उद्देश्य से सरकारी भूमि का एक व्यवस्थित लैंड बैंक तैयार करना आवश्यक है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि इसका उद्देश्य सरकारी भूमि का अनियोजित हस्तांतरण अथवा विक्रय नहीं है, बल्कि ऐसी भूमि का चिन्हीकरण एवं नियमानुसार उपयोग सुनिश्चित करना है, जो वर्तमान में अनुपयोगी या आर्थिक गतिविधियों के लिए उपयोग में नहीं आ रही है। यूआईडीबी के माध्यम से ऐसी भूमि को नियमानुसार उपयोग में लाकर पर्यटन, हॉस्पिटैलिटी, वेलनेस, शिक्षा, स्वास्थ्य तथा अन्य सेवा क्षेत्रों में निवेश को प्रोत्साहित किया जा सकेगा।

उन्होंने कहा कि उपलब्ध सरकारी भूमि का उपयोग निर्धारित नियमों, प्रचलित कानूनों और पर्यावरणीय मानकों के अनुरूप ही किया जाएगा। इसका उद्देश्य निवेशकों के लिए आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता को सुगम बनाना है, ताकि राज्य में निवेश की प्रक्रिया अधिक प्रभावी और व्यवस्थित हो सके।

यूआईआईडीबी की भूमिका सर्विस सेक्टर में निवेश को प्रोत्साहित करना

श्री सुंदरम ने कहा कि औद्योगिक एवं विनिर्माण क्षेत्र में निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए राज्य में सिडकुल जैसी संस्थागत व्यवस्था कार्य कर रही है। इसी प्रकार सेवा क्षेत्र में निवेश को प्रोत्साहित करने तथा उत्तराखंड में बड़े और गुणवत्तापूर्ण निवेश को आकर्षित करने के उद्देश्य से यूआईआईडीबी का गठन किया गया है।

उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था में सेवा क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका है। पर्यटन, हॉस्पिटैलिटी, वेलनेस, शिक्षा, स्वास्थ्य, आईटी तथा अन्य सेवा क्षेत्रों में निवेश की व्यापक संभावनाएं हैं। इन क्षेत्रों में निवेश के लिए भूमि एवं अन्य संसाधनों की आवश्यकता होती है। यूआईडीबी का उद्देश्य इन्हीं आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए उपलब्ध सरकारी संसाधनों का व्यवस्थित चिन्हीकरण, नियोजन और नियमानुसार उपयोग सुनिश्चित करना तथा निवेशकों के लिए निवेश प्रक्रिया को सुगम बनाना है।

उन्होंने बताया कि उत्तराखंड से पहले पंजाब और गुजरात जैसे राज्यों में भी इसी प्रकार की संस्थागत व्यवस्था विकसित की जा चुकी है। उत्तराखंड देश का ऐसा तीसरा राज्य है, जहां सेवा क्षेत्र में पूंजी निवेश को प्रोत्साहित करने तथा उपलब्ध संसाधनों के बेहतर उपयोग के उद्देश्य से इस प्रकार के बोर्ड का गठन किया गया है।

ऑप्टिमल लैंड यूटिलाइजेशन कमेटी और यूआईआईडीबी अलग-अलग व्यवस्थाएं

प्रमुख सचिव नियोजन ने यह भी स्पष्ट किया कि यूआईआईडीबी को ऑप्टिमल लैंड एक्विजिशन कमेटी के साथ जोड़कर देखा जाना उचित नहीं है। उन्होंने बताया कि ऑप्टिमल लैंड यूटिलाइजेशन कमेटी का गठन यूआईआईडीबी से पहले वर्ष 2022 में किया गया था। इसका उद्देश्य मुख्य रूप से विभिन्न विभागों के बीच भूमि हस्तांतरण से जुड़ी प्रक्रियागत कठिनाइयों को दूर करना था, क्योंकि एक विभाग से दूसरे विभाग को सरकारी भूमि हस्तांतरित करने में कई बार व्यावहारिक एवं प्रशासनिक समस्याएं सामने आती थीं।

उन्होंने कहा कि दोनों व्यवस्थाओं की भूमिका एवं उद्देश्य अलग-अलग हैं और इन्हें एक ही व्यवस्था के रूप में देखना तथ्यात्मक रूप से उचित नहीं होगा।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि यूआईआईडीबी के माध्यम से निवेश को प्रोत्साहित करने का अर्थ सरकारी भूमि का विक्रय नहीं है। भूमि का स्वामित्व राज्य सरकार के पास ही रहेगा। निवेश परियोजनाओं के लिए भूमि का उपयोग निर्धारित नियमों एवं शर्तों के तहत लीज मॉडल के माध्यम से किया जाएगा। संबंधित परियोजनाओं में लागू पर्यावरणीय एवं अन्य वैधानिक मानकों का अनुपालन सुनिश्चित किया जाएगा।

सरकार का उद्देश्य अनुपयोगी सरकारी भूमि को किसी व्यक्ति अथवा निजी संस्था के पक्ष में स्थायी रूप से हस्तांतरित करना नहीं, बल्कि उपलब्ध संसाधनों का नियोजित तरीके से उपयोग करते हुए राज्य में आर्थिक गतिविधियों और सेवा क्षेत्र के निवेश को बढ़ावा देना है। कुछ लोगों द्वारा यह भ्रांति फैलाई जा रही है की भूमि लीज पर 90 वर्ष के लिए दी जा रही है जबकि लीज की अवधि अवधि 60 वर्ष है |

स्थानीय रोजगार एवं अर्थव्यवस्था को मिलेगा लाभ

यूआईआई डीबी के माध्यम से पर्यटन, हॉस्पिटैलिटी, वेलनेस, शिक्षा, स्वास्थ्य तथा अन्य सेवा क्षेत्रों में पूंजी निवेश को प्रोत्साहित किए जाने से राज्य में रोजगार एवं स्वरोजगार के नए अवसर सृजित होने की संभावना है। निवेश से स्थानीय स्तर पर परिवहन, होटल, होम स्टे, खान-पान, हस्तशिल्प, स्थानीय उत्पाद तथा अन्य संबद्ध गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा।

राज्य सरकार का मानना है कि उत्तराखंड की प्राकृतिक एवं मानवीय संसाधन क्षमता का बेहतर उपयोग करते हुए नियोजित एवं पर्यावरणीय रूप से संतुलित आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने से राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के साथ-साथ स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के व्यापक अवसर उपलब्ध कराए जा सकते हैं।

सरकार ने कहा कि यूआईआईडीबी से संबंधित सभी प्रक्रियाएं निर्धारित नियमों, पारदर्शिता और नियोजित विकास की अवधारणा के अनुरूप संचालित की जा रही हैं। 7,000 बीघा भूमि यूआईडीबी को उपलब्ध कराए जाने संबंधी तथ्य सही नहीं हैं। वर्तमान में बोर्ड को मात्र 45 एकड़ भूमि उपलब्ध हुई है। इसलिए इस संबंध में किसी भी प्रकार की भ्रांति से बचने के लिए आधिकारिक एवं तथ्यात्मक जानकारी को ही आधार बनाया जाना आवश्यक है।

राज्य सरकार का लक्ष्य उत्तराखंड को निवेश, पर्यटन, शिक्षा, स्वास्थ्य, वेलनेस एवं अन्य सेवा क्षेत्रों का प्रमुख केंद्र बनाते हुए स्थानीय स्तर पर रोजगार और आर्थिक गतिविधियों का विस्तार करना है। यूआईआईडीबी इसी उद्देश्य से सेवा क्षेत्र में पूंजी निवेश को प्रोत्साहित करने, निवेश परियोजनाओं के लिए आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता को सुगम बनाने तथा सरकारी संसाधनों के नियमानुसार एवं सुनियोजित उपयोग की दिशा में कार्य कर रहा है।

आवास विभाग की 63 परियोजनाओं का कार्य पूर्ण

देहरादून। प्रदेश में पर्यटकों और श्रद्धालुओं की साल दर साल बढ़ती संख्या को देखते हुए प्रदेश सरकार आधारभूत सुविधाओं के विस्तार में जुट गई है। ट्रैफिक जाम से निजात दिलाने और चारधाम यात्रा को और सुगम बनाने के लिए युद्धस्तर पर काम हो रहा है। आवास विभाग उत्तराखण्ड पार्किंग सुविधाओं के विकास में जुटा है। चार वर्षों में आवास विभाग ने 63 पार्किंग परियोजनाओं के तहत 4202 वाहनों की क्षमता की पार्किंग का निर्माण कराया है। धामी सरकार के इस कदम से जहां पर्वतीय जिलों में आम लोगों और पर्यटकों को जाम से राहत मिली है, वहीं स्थानीय लोगों की राह भी आसान हुई है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखण्ड में पर्यटक सुविधाओं के विकास पर विशेष जोर दिया जा रहा है। सड़क, रेल और हवाई कनेक्टिविटी का विस्तार किया जा रहा है। पर्यटकों और श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए पार्किंग सुविधाओं के विकास पर विशेष फोकस किया गया है। मुख्यमंत्री के दिशानिर्देश पर उत्तराखण्ड का आवास विभाग पर्वतीय जनपदों के प्रमुख शहरों, तीर्थ स्थलों और पर्यटन केंद्रों में पार्किंग नेटवर्क के विस्तार में जुटा है। स्थान की उपलब्धता के अनुसार सरफेस पार्किग, बहुमंजिला (मल्टीलेवल) पार्किंग और ऑटोमेटेड पार्किंग का निर्माण किया गया है।

आवास विभाग की विकसित पार्किंग एक नजर में

जनपद वाहन क्षमता
अल्मोड़ा 1087
नैनीताल 679
चंपावत 600
उत्तरकाशी 477
पिथौरागढ़ 309
रुद्रप्रयाग 304
पौड़ी 256
चमोली 201
टिहरी 163
बागेश्वर 126

हल होगी नैनीताल की पार्किंग समस्या
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की पहल पर अब सरोवर नगरी नैनीताल में पार्किंग की समस्या हल हो सकेगी। प्रदेश सरकार मेट्रोपोल होटल परिसर क्षेत्र में पार्किंग का निर्माण कर रही है। इस पार्किंग के तैयार होने पर लगभग 700 वाहन यहां पार्क किए जा सकेंगे।

कैंची धाम में बहुमंजिला पार्किंग
सुप्रसिद्ध कैंची धाम में श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए बहुमंजिला (मल्टी लेवल) पार्किंग का निर्माण किया जा रहा है। इस पार्किंग में एक बार में पांच सौ से अधिक वाहन पार्क किए जा सकेंगे।

हल हुई पार्किंग की समस्या : डॉ राजेश
उत्तराखण्ड सरकार के के सचिव, आवास एवं राज्य संपत्ति विभाग डॉ आर राजेश कुमार ने कहा कि मुख्यमंत्री जी के दिशानिर्देशों के क्रम में प्रदेश में पार्किंग सुविधाओं के विकास पर जोर दिया गया है। पर्वतीय जनपदों में 63 पार्किंग परियोजनाओं का कार्य पूर्ण होने के बाद पार्किंग की समस्या काफी हद तक हल हो गई है। इससे पर्यटकों और श्रद्धालुओं के साथ ही स्थानीय नागरिकों को भी राहत मिली है।

कोट———

उत्तराखण्ड देश-दुनिया के पर्यटकों और श्रद्धालुओं का पसंदीदा गंतव्य बन गया है। पिछले वर्ष ही छह करोड़ से अधिक लोग यहां पहुंचे हैं। इसको देखते हुए प्रदेश सरकार लगातार यात्री सुविधाओं का विस्तार कर रही है। जाम की समस्या से निपटने के लिए सभी प्रमुख पर्यटन स्थलों और चार धाम यात्रा मार्गों पर पार्किंग सुविधाएं विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है। आवास विभाग और अन्य एजेंसियां इस काम में जुटी हैं।

-पुष्कर सिंह धामी
मुख्यमंत्री, उत्तराखण्ड

कैबिनेट बैठक हुई संपन्न, डीजी सूचना ने किया ब्रीफ

1. ऊर्जा एवं वैकल्पिक ऊर्जा विभाग के विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 105 के अन्तर्गत उत्तराखण्ड विद्युत निमायक आयोग की वार्षिक रिपोर्ट को राज्य विवरण को विधान मण्डल पटल पर रखे जाने का प्राविधान है, जिसके अनुपालन में आयोग के वर्ष 2024-25 की वार्षिक रिपोर्ट को आगामी विधानसभा सत्र में विधानसभा पटल पर रखे जाने सम्बन्धी प्रस्ताव पर मा. मंत्रिमण्डल द्वारा अनुमोदन प्रदान किया गया।

2. ऊर्जा एवं वैकल्पिक ऊर्जा विभाग के अन्तर्गत विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 104(4) के अन्तर्गत उत्तराखण्ड विद्युत निमायक आयोग के वार्षिक लेखा विवरण को विधान मण्डल के पटल पर रखे जाने का प्राविधान है, जिसके अनुपालन में आयोग के वर्ष 2024-25 के वार्षिक लेखा विवरण को आगामी विधानसभा सत्र में विधानसभा पटल पर रखे जाने सम्बन्धी प्रस्ताव पर मा. मंत्रिमण्डल द्वारा अनुमोदन प्रदान किया गया।

3. उत्तराखण्ड कारागार प्रशासन एवं सुधार सेवा विभाग समूह ‘क‘ एवं ‘ख‘ सेवा नियमावली, 2026 संषोधन प्रस्ताव को कैबिनेट की सहमति

कारागार प्रशासन एवं सुधार विभाग, उत्तराखण्ड की संरचना में गृह विभाग के कारागार विभागान्तर्गत सुधारात्मक विंग हेतु अपर महानिरीक्षक कारागार के 01 नवसृजित पद को संवर्गीय ढांचे में समाहित किये जाने के उद्देश्य से वर्तमान में प्रचलित सेवा नियमावली में संशोधन हेतु प्रस्तावित किया गया। विभागीय एवं कर्मचारी हित में उत्तराखण्ड कारागार प्रशासन एवं सुधार सेवा विभाग समूह ‘क‘ एवं ‘ख‘ सेवा नियमावली, 2026 के प्रख्यापन प्रस्ताव पर मा. मंत्रीमण्डल द्वारा सहमति दी गई।

4. उच्वतम न्यायालय, उच्च न्यायालय एवं अधीनस्थ न्यायालयों में आबद्ध शासकीय अधिवक्ताओं को भुगतान किये जाने वाले शुल्क की दरों के पुनर्निधारण पर कैबिनेट का अनुमोदन*

उच्च न्यायालय, नैनीताल, उच्चतम न्यायालय, नई दिल्ली एवं उत्तराखण्ड राज्य के अधीनस्थ कार्यालयों में आबद्ध शासकीय अधिवक्ताओं को भुगतान किये जाने वाले शुल्क की दरों का पुनर्निधारण किये जाने के संबंध में मुख्य सचिव महोदय की अध्यक्षता में गठित सात सदस्यीय समीक्षा समिति की बैठक में लिये गये निर्णयानुसार शासकीय अधिवक्ताओं की फीस वृद्धि किये जाने के प्रस्ताव पर मा. मंत्रीमण्डल द्वारा अनुमोदन प्रदान किया गया।

5. विधिक माप विज्ञान अधिनियम, 2009 की धारा 53 की उपधारा (1) के प्राविधानुसार उत्तराखण्ड विधिक माप विज्ञान (प्रवर्तन) नियमावली, 2012 में सशोधन करते हुए उत्तराखण्ड विधिक माप विज्ञान (प्रवर्तन) (संशोधन) नियमावली, 2026 के प्रख्यापन को मंजूरी

भारत सरकार द्वाराEase of Doing Business Compliance Reduction, Trust Based Regulatory Framework के अंतर्गत Deregulation Phase-11 सुधार कार्यक्रम किये जा रहे हैं। केन्द्र सरकार द्वारा प्रख्यापित (उपबन्धों का संशोधन) को 01 मई, 2026 से सम्पूर्ण भारत में लागू कर दिया गया है. जिसमें विधिक माप विज्ञान अधिनियम, 2009 की धारा-23 में संशोधन करते हुए Deregulation Priority Area (PA-8) Ease Licensing for Weights & Measures under Legal Metrology Act, 2009 के अंतर्गत लाइसेंसिंग प्रक्रिया के सरलीकरण हेतु उत्तराखण्ड विधिक माप विज्ञान (प्रवर्तन) नियमावली 2012 में उक्तानुसार संशोधन हेतु उत्तराखण्ड विधिक माप विज्ञान (प्रवर्तन) (संशोधन) नियमावली 2026 के प्रख्यापन को मा. मंत्रीमण्डल द्वारा अनुमोदन प्रदान किया गया।

6. उत्तराखण्ड राज्य में वर्तमान में 05 राजकीय मेडिकल कॉलेज श्रीनगर, हल्द्वानी, देहरादून, हरिद्वार, अल्मोड़ा संचालित है, जिनमें एम.बी.बी.एस. तथा पी.जी. पाठ्क्रमों का संचालन किया जाता है। राज्य के दुर्गम दूरस्थ क्षेत्रों में जन-जन तक स्वास्थ्य सुविधायें उपलब्ध कराये जाने हेतु राज्य सरकार प्रतिबद्ध है। वर्तमान में एम.बी.बी.एस. इन्टर्नस् को रू. 17000/-प्रतिमाह Stipend दिया जा रहा है, जिसे 17000 से न्यूनतम रू. 25000 किये जाने पर मा. मंत्रीमण्डल द्वारा अनुमोदन प्रदान किया गया।

7. माध्यमिक शिक्षा विभाग के अन्तर्गत अपर सहायक अध्यापक व्यायाम (ग्रेड वेतन-4200) के 33 पद सृजित किए जाने पर कैबिनेट की लगी मुहर

खेलकूद विभाग के निर्धारित शासनादेश में वर्णित प्राविधानों के अन्तर्गत अन्तर्राष्ट्रीय/राष्ट्रीय खेलों में स्वर्ण पदक विजेता खिलाड़ियों को उत्तराखण्ड में राजपत्रित/अराजपत्रित पदों पर आऊट ऑफ टर्न सेवायोजन प्रदान किये जाने हेतु माध्यमिक शिक्षा विभाग के अन्तर्गत सहायक अध्यापक व्यायाम के लेवल-7 के कुल सृजित 1898 पदों में से 33 पदों को समर्पित करते हुए अपर सहायक अध्यापक व्यायाम लेवल-6 के 33 पद सृजित किए जाने पर मा. मंत्रीमणडल ने अनुमोदन दिया गया।

8. खेल नीति, 2021 के अन्तर्गत अन्तर्राष्ट्रीय/राष्ट्रीय खेलों में पदक विजेता खिलाड़ियों को उत्तराखण्ड में राजपत्रित/अराजपत्रित पदों पर आउट ऑफ टर्न सेवायोजन प्रदान किये जाने का प्रावधान है। आउट ऑफ टर्न सेवायोजन हेतु वर्तमान में खेल विभाग, युवा कल्याण विभाग, गृह विभाग, परिवहन विभाग, शिक्षा विभाग एवं वन विभाग के अन्तर्गत कुल 243 पदों पर नियुक्ति प्रदान किये जाने पर मा. मत्रिण्डल द्वारा अनुमोदन प्रदान किया गया।

9. मंत्रिमण्डल द्वारा देहरादून (पुरूकुल गांव) से मसूरी (लाईब्रेरी चौक) तक रोप-वे परियोजना के अपर टर्मिनल प्वांइट एवं पार्किंग निर्माण हेतु पर्यटन विभाग को प्राप्त भूमि पर स्थित, गढ़वाल सभा मसूरी को पूर्व में लीज पर दी गयी भूमि, के बराबर ही भूमि (972 वर्ग मी.) मसूरी स्थित गढ़वाल मण्डल विकास निगम की पार्किंग हेतु क्रय की गयी भूमि में से लीज पर दिये जाने की अनुमति प्रदान की गई।

10. मंत्रीमण्डल द्वारा कर्मचारी राज्य बीमा निगम, चिकित्सालय हरिद्वार के समीप चिन्ह्ति 15 एकड़ भूमि ई.एस.आई. के निर्माण हेतु आंवटित किये जाने का लिया गया।

सेवा संकल्प अभियान के तहत नागरिकों को ‘विकसित भारत 2047’ के संकल्प से जोड़ेंगे

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सचिवालय में प्रेस वार्ता के दौरान कहा कि प्रदेश में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन 17 सितम्बर से 17 अक्टूबर, 2026 तक सेवा संकल्प अभियान का आयोजन किया जायेगा। उन्होंने कहा सेवा संकल्प अभियान के माध्यम से सेवा, जनभागीदारी, संवाद और नवाचार को केंद्र में रखते हुए नागरिकों को ‘विकसित भारत 2047’ के संकल्प से जोड़ा जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में अभियान के अंतर्गत 11 प्रमुख कार्यक्रम प्रस्तावित हैं। इन कार्यक्रमों के माध्यम से विद्यार्थियों, युवाओं, महिलाओं, लाभार्थियों, अभिभावकों, जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों और नागरिकों की सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित की जाएगी। साथ ही राज्य सरकार द्वारा लिए गए निर्णयों को भी जन-जन तक पहुंचाया जाएगा। केंद्र एवं राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं से नागरिकों के जीवन में आए वास्तविक बदलाव और लाभार्थियों की कहानियों को भी प्रमुखता से सामने लाया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम के तहत सरकारी योजनाओं के केन्द्र, गैस वितरण केंद्रों, राशन दुकानों, प्रमुख धार्मिक स्थलों, गंगा तट, आदि पर दीप प्रज्वलन एवं सामूहिक कार्यक्रम किए जाएंगे। नए मेडिकल कॉलेज, बांध/पुल, अमृत सरोवर, जन औषधि केंद्र जैसे स्थलों पर भी सामूहिक कार्यक्रम किए जाएंगे। इसमें विभिन्न सामाजिक संगठनों की सहभागिता भी रहेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘मेरे सपनों का भारत–चित्र सेवा’ के अंतर्गत प्रदेश के शैक्षणिक संस्थानों में ‘विकसित भारत’ के संकल्प तथा 25 वर्षों के कार्यों और उपलब्धियों पर आधारित चित्रकला, निबंध एवं भाषण प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी। चयनित चित्र विद्यालयों में प्रदर्शित किए जाएंगे तथा अभिभावकों और नागरिकों को भी इन प्रदर्शनियों से जोड़ा जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि नमो सेवा–अनकही कहानियां के माध्यम से देश की उपलब्धियों पर आधारित नाटकों का विद्यालयों में मंचन किया जाएगा। साथ ही आंगन मिलन सेवा के अंतर्गत आंगनवाड़ी केंद्रों पर बच्चों, अभिभावकों, आंगनवाड़ी एवं आशा कार्यकर्ताओं की सहभागिता से गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। मातृ-बाल स्वास्थ्य, पोषण तथा मातृ-शिशु कल्याण से संबंधित जानकारी पर विशेष जोर रहेगा। अभिभावकों को व्यक्तिगत रूप से आमंत्रित करने की व्यवस्था भी की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सेवा की कहानियों के माध्यम से राष्ट्रीय एवं राज्य की योजनाओं से नागरिकों के जीवन में आए वास्तविक बदलाव को सामने लाया जाएगा। भाषण, चित्रकला और कहानियों के माध्यम से इन बदलावों को जनता तक पहुंचाने का काम किया जाएगा। एवं ‘सेवा ज्योति कलश यात्रा’ के तहत किसी प्रमुख चौराहे पर ‘विकसित भारत 2047’ से संबंधित कलश की स्थापना प्रस्तावित है। कलश यात्रा के साथ साइकिल एवं बाइक यात्रा का आयोजन किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सेवा : मेरा योगदान कार्यक्रम के माध्यम से नागरिकों को वृक्षारोपण, स्वच्छता अभियान, शिक्षण कार्य तथा अन्य समाजोपयोगी सेवा गतिविधियों से जोड़ा जाएगा। इसका उद्देश्य नागरिकों को अभियान में सक्रिय भागीदार बनाना है। एवं सेवा सेतु अभियान के अंतर्गत जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार कार्यक्रम के तहत शिविर आयोजित किए जाएंगे। इन शिविरों में केंद्र सरकार की योजनाओं के साथ राज्य सरकार की योजनाओं को भी शामिल किया जाएगा। स्वास्थ्य शिविर एवं बहुउद्देशीय शिविर भी आयोजित किए जाएंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सेवा के रंग, राष्ट्र के संग कार्यक्रम में रंगोली के माध्यम से विकसित भारत 2047 की दृष्टिकोण को प्रदर्शित किया जाएगा। एवं सेवा फर्स्ट इनोवेशन चैलेंज के माध्यम से केंद्र एवं राज्य सरकार के विभागों को जोड़कर उनसे वास्तविक जीवन से जुड़ी समस्या-विवरणियां प्राप्त की जाएंगी। IITs, IIMs एवं विशेषज्ञों को ज्यूरी/मेंटर के रूप में जोड़ने तथा चयनित नवाचारों को संरक्षण, मार्गदर्शन एवं परीक्षण की सुविधा देने की परिकल्पना है। अनुमोदन, परीक्षण एवं नियामकीय सहयोग के लिए आवश्यक सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सुशासन सेवा संवाद के तहत सेवा और सुशासन के विषय पर जनप्रतिनिधियों के साथ व्यापक संवाद किया जाएगा। अभियान के विभिन्न कार्यक्रमों से संबंधित फोटो, वीडियो, लाभार्थियों के अनुभव तथा सकारात्मक बदलाव की कहानियों को मीडिया के माध्यम से भी व्यापक रूप से प्रसारित किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि सेवा संकल्प अभियान का मूल भाव सरकार की योजनाओं और उपलब्धियों को केवल प्रदर्शित करना नहीं, बल्कि नागरिकों को सेवा, संवाद, नवाचार और जनभागीदारी के माध्यम से ‘विकसित भारत 2047’ के संकल्प का सक्रिय सहभागी बनाना है|

मुख्यमंत्री ने कहा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का उत्तराखंड राज्य से विशेष लगाव है। प्रधानमंत्री की मन भूमि – देवभूमि उत्तराखंड है। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में पूरे देश ने विकसित भारत का संकल्प लिया है। इस संकल्प को सिद्धि तक पहुंचाने में प्रत्येक देशवासी की महत्वपूर्ण भूमिका है। विकसित भारत के निर्माण में युवाओं की भागीदारी सबसे महत्वपूर्ण रहेगी। उन्होंने कहा सेवा संकल्प अभियान को हर जिले में विस्तृत रूप से मनाए जाएंगे, जिसमें हर जिले के प्रभारी मंत्री भी मौजूद रहेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा प्रधानमंत्री ने 21वीं सदी के तीसरे दशक को उत्तराखंड का दशक बताया था, जिसे जन समर्थन से आगे बढ़ाया जायेगा।

ऋषिकुल को आयुर्वेद, योग और भारतीय ज्ञान परंपरा के विशिष्ट केंद्र के रूप में विकसित किया जाए: धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री आवास में हरिद्वार स्थित मदन मोहन मालवीय प्राच्य शोध संस्थान, ऋषिकुल के समग्र विकास से संबंधित प्रस्तावित मास्टर प्लान की समीक्षा की। बैठक में मुख्यमंत्री के समक्ष संस्थान के प्रस्तावित स्वरूप एवं विभिन्न गतिविधियों से संबंधित प्रस्तुतीकरण किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऋषिकुल को आयुर्वेद, योग और भारतीय ज्ञान परंपरा के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित किया जाए। इसके समग्र विकास में आयुर्वेद, मेडिकल टूरिज्म, योग, ज्योतिष और वैदिक गणित को विशेष प्रमुखता दी जाए। इन क्षेत्रों में उच्च स्तरीय शैक्षणिक, शोध एवं अध्ययन की व्यवस्थाएं विकसित की जाएं, जिससे यह संस्थान भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक शोध के बीच प्रभावी सेतु बन सके।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आयुष, योग और संस्कृत देवभूमि उत्तराखण्ड की प्रमुख पहचान हैं। राज्य की इस विशिष्ट पहचान को ऋषिकुल के विकास में प्रमुखता से प्रतिबिंबित किया जाए। संस्थान में विकसित होने वाली शैक्षणिक गतिविधियां उच्च स्तरीय हों तथा यहां भारतीय ज्ञान, प्राच्य विद्याओं, आयुर्वेद और योग से संबंधित अध्ययन एवं शोध के लिए उत्कृष्ट वातावरण तैयार किया जाए।
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि परिसर का वास्तुशिल्प प्राच्य एवं पारंपरिक स्थापत्य शैली के अनुरूप हो। भवनों के बाह्य स्वरूप और फसाड में प्राचीन स्थापत्य परंपरा की झलक दिखाई दे, जबकि परिसर में उपलब्ध कराई जाने वाली व्यवस्थाएं एवं सुविधाएं आधुनिकतम हों। उन्होंने कहा कि प्राचीनता और आधुनिकता के संतुलित समन्वय से परिसर की विशिष्ट पहचान विकसित की जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि परियोजना के प्रत्येक पहलू में इसकी मूल अवधारणा स्पष्ट रूप से दिखाई दे। संपूर्ण परिसर को इस प्रकार विकसित किया जाए कि यहां आने वाले लोगों को भारतीय संस्कृति, ज्ञान और अध्यात्म की अनुभूति हो तथा यह उन्हें आध्यात्मिक, भौतिक और भावनात्मक रूप से आकर्षित करे। मुख्यमंत्री ने कहा कि मां गंगा के कारण हरिद्वार का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है। देश-दुनिया से बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक हरिद्वार आते हैं। इसलिए ऋषिकुल के विकास की अवधारणा में हरिद्वार की इस विशिष्टता को केंद्र में रखा जाए। यहां आने वाले लोगों को भारतीय ज्ञान परंपरा, आयुर्वेद, योग और अध्यात्म की समृद्ध विरासत को जानने और अनुभव करने का अवसर मिले।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि परियोजना से संबंधित सभी कार्यों को समयबद्ध किया जाए। विभिन्न कार्यों के लिए स्पष्ट चरण और समय-सीमा निर्धारित करते हुए इन्हें चरणबद्ध तरीके से दो वर्ष के भीतर पूर्ण किया जाए। उन्होंने कार्यों की नियमित समीक्षा सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए। प्रस्तुतीकरण में ऋषिकुल को योग एवं ध्यान, उच्च स्तरीय शैक्षणिक गतिविधियों, आयुर्वेद एवं समग्र स्वास्थ्य, भारतीय दर्शन, वैदिक एवं शास्त्रीय अध्ययन, कला-संस्कृति तथा शोध गतिविधियों के समन्वित केंद्र के रूप में विकसित करने की परिकल्पना प्रस्तुत की गई। प्रस्तावित मास्टर प्लान में अकादमिक, योग एवं ध्यान, आयुर्वेदिक चिकित्सा एवं वेलनेस सहित विभिन्न क्षेत्रों के समग्र विकास की अवधारणा रखी गई है।

मुख्य सचिव बोले, तकनीकी युग में साहित्य की भूमिका और भी महत्वपूर्ण

डीपीएस स्कूल रानीपुर के 50 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजित ‘द गोल्डन जुबली लिटरेसी फेस्टिवल-गोल्डन कंटिन्यूम : स्वर्ण अक्षर-2026’ में मुख्य अतिथि के रूप में मुख्य सचिव आनंद वर्द्धन ने प्रतिभाग किया। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य सचिव ने दीप प्रज्वलित कर एवं राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ के गायन के साथ किया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य सचिव आनंद वर्द्धन ने कहा कि ‘स्वर्ण अक्षर’ नाम अपने आप में विशेष अर्थ रखता है। स्वर्ण अनमोलता का प्रतीक है, जबकि अक्षर मानव मन के विचारों, कल्पना और शक्ति को अभिव्यक्त करने का माध्यम हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी संस्थान के लिए 50 वर्षों की यात्रा एक महत्वपूर्ण उपलब्धि और गौरव का विषय है।

उन्होंने कहा कि किसी संस्था का निर्माण केवल कक्षाओं और भवनों से नहीं, बल्कि छात्रों, शिक्षकों और उससे जुड़े लोगों के योगदान से होता है। आज का दौर तकनीकी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का है, ऐसे समय में साहित्य की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। उन्होंने कहा कि चारों ओर उपलब्ध सूचना को ज्ञान नहीं कहा जा सकता। साहित्य व्यक्ति को प्रश्न पूछना, चिंतन करना और अपने ज्ञान का विस्तार करना सिखाता है।

मुख्य सचिव ने कहा कि उत्तराखंड का हिमालय, लोक परंपराएं और सांस्कृतिक विरासत साहित्य के महत्व को रेखांकित करती हैं। उन्होंने छात्रों को पाठ्यक्रम तक सीमित न रहकर अधिक से अधिक साहित्य पढ़ने और निरंतर सीखने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने विद्यालय के विकास में योगदान देने वाले शिक्षकों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि डीपीएस के छात्र विकसित भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए तैयार हैं।

उन्होंने छात्रों से आह्वान किया कि वे समय-समय पर स्वयं से तीन सवाल जरूर पूछें—मैंने क्या सीखा, मैंने क्या योगदान दिया और मैंने किसकी मदद की। उन्होंने कहा कि आधुनिकता को अपनाते हुए अपनी संस्कृति, परंपराओं और जड़ों से जुड़े रहना आवश्यक है।

इस अवसर पर डीपीएस रानीपुर की 50 वर्षों की गौरवपूर्ण यात्रा पर आधारित शॉर्ट फिल्म का प्रदर्शन किया गया। विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने विभिन्न शास्त्रीय एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों की मनमोहक प्रस्तुतियां देकर दर्शकों की खूब तालियां बटोरीं।

अधिकारियों के साथ अरबेनिया वाहन में निर्माण स्थलों तक पहुंचे मुख्य सचिव, व्यवस्थाओं का लिया जायजा

कुंभ मेला-2027 की तैयारियों को धरातल पर परखने के लिए मुख्य सचिव उत्तराखण्ड शासन आनंद वर्द्धन ने हरिद्वार में विभिन्न निर्माण स्थलों का व्यापक स्थलीय निरीक्षण किया। मुख्य सचिव ने अधिकारियों के साथ अरबेनिया वाहन में बैठकर रोड़ी-बेलवाला से लेकर रोशनाबाद होते हुए कनखल- दक्षद्वीप-बैरागी कैंप से लेकर सीसीआर टावर तक एक निर्माण स्थल से दूसरे निर्माण स्थल तक पहुंचकर मौके पर चल रहे कार्यों की प्रगति, गुणवत्ता, तकनीकी पहलुओं, उपयोगिता तथा निर्धारित समयसीमा की जानकारी ली। इस दौरान उन्होंने निर्माण कार्यों के साथ ही मेले के दौरान श्रद्धालुओं के लिए प्रस्तावित सुविधाओं और व्यवस्थाओं को भी मौके पर परखा।

मुख्य सचिव ने स्पष्ट निर्देश दिए कि को कुंभ मेला-2027 से संबंधित सभी निर्माण कार्य निर्धारित समयसीमा में पूरे किए जाएं और गुणवत्ता से किसी भी स्तर पर समझौता न हो। उन्होंने कहा कि कार्यों की नियमित समीक्षा और स्थलीय निगरानी के साथ उन परियोजनाओं पर विशेष ध्यान दिया जाए, जिनकी गति अपेक्षा के अनुरूप नहीं है। कार्यों में आने वाली बाधाओं की तत्काल पहचान कर उनका समाधान सुनिश्चित करने तथा विभागों और कार्यदायी संस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय के साथ निर्माण कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए।

उन्होंने कहा कि कुंभ मेला-2027 में देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के हरिद्वार पहुंचने की संभावना है। ऐसे में सड़क, पुल, पैदल मार्ग, पेयजल, स्वास्थ्य, पार्किंग, प्रशासनिक एवं अन्य आधारभूत सुविधाओं से जुड़े सभी कार्य समय से पूरे होना आवश्यक है। निर्माण के दौरान आमजन और स्थानीय नागरिकों की सुविधा, यातायात व्यवस्था तथा सुरक्षा मानकों का भी पूरा ध्यान रखा जाए।

मुख्य सचिव ने रोड़ी-बेलवाला क्षेत्र में उत्तराखण्ड निवेश एवं अवस्थापना विकास बोर्ड (यूआईआईडीबी) की प्रशासनिक मार्ग परियोजना तथा रोड़ी-बेलवाला एवं हरकी पैड़ी क्षेत्र की पुनर्विकास परियोजनाओं का निरीक्षण किया। उन्होंने परियोजनाओं को तत्परता से पूरा करने के साथ श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा के अनुरूप उच्च स्तरीय व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि परियोजनाओं से निर्मित परिसंपत्तियों एवं विकसित व्यवस्थाओं के पांच वर्ष की अनुबंध अवधि पूरी होने के बाद उनके स्थायी रख-रखाव की जिम्मेदारी संबंधित विभाग अथवा निकाय को सौंपने की व्यवस्था अभी से सुनिश्चित की जाए। उन्होंने मेलाधिकारी को इस संबंध में संबंधित विभागों के उच्चाधिकारियों के साथ प्रस्तावित व्यवस्था का औपचारिक मसौदा शासन की स्वीकृति के लिए भेजने के निर्देश दिए।

उन्होंने हाथीपुल से अलकनंदा के मध्य घाटों के पुनर्निर्माण एवं सुधार कार्यों का भी जायजा लिया। घाटों पर श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए मजबूत रेलिंग और चेन की समुचित व्यवस्था करने तथा पैदल आवागमन को सुगम बनाने के निर्देश दिए। प्रशासनिक मार्ग निर्माण के लिए शासन द्वारा ₹4325.14 लाख तथा हरकी पैड़ी रिवाइटलाइजेशन कार्य के लिए ₹6677.21 लाख की धनराशि स्वीकृत है।

ऋषिकुल क्षेत्र में मुख्य सचिव ने ओल्ड दिल्ली-नीतिपास मार्ग के नवीनीकरण कार्य का निरीक्षण किया। उन्होंने यातायात एवं स्थानीय आवागमन को ध्यान में रखते हुए कार्य के दौरान आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने तथा सड़क किनारे विकसित किए जा रहे फुटपाथ एवं अन्य उपयुक्त स्थानों पर पौधरोपण कर हरियाली विकसित करने पर जोर दिया। दूधाधारी चौक से ज्वालापुर तक के हिस्से सहित लोक निर्माण विभाग के अधीन शहर की अन्य आंतरिक सड़कों के नवीनीकरण के लिए ₹2164.49 लाख की धनराशि स्वीकृत है।

इसके बाद मुख्य सचिव ने शिवमूर्ति चौक, शंकर आश्रम चौक तथा भगत सिंह चौक से विल्केश्वर तक चौराहों के सुधार एवं पैडेस्ट्रीयन फुटपाथ कार्य का निरीक्षण किया। ₹683.60 लाख की लागत वाले इस कार्य में पैदल यात्रियों की सुविधा, सुरक्षित आवागमन और यातायात के सुचारु संचालन को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए।

रोशनाबाद में मुख्य सचिव ने ₹251.98 लाख की लागत से निर्माणाधीन ड्रग वेयरहाउस का निरीक्षण किया। उन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी इस महत्वपूर्ण परियोजना को निर्धारित समयसीमा में पूरा करने के निर्देश दिए। इसके पश्चात दक्षद्वीप स्थित बैरागी क्षेत्र में निर्माणाधीन 60 मीटर स्पान के पुल का निरीक्षण किया। इस परियोजना के लिए ₹1246.09 लाख की धनराशि स्वीकृत है। उन्होंने पुल निर्माण की प्रगति एवं तकनीकी पहलुओं की जानकारी लेते हुए कार्य को गुणवत्ता के साथ निर्धारित समय में पूरा करने के निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने सीसीआर-2 भवन का भी निरीक्षण किया और कुंभ मेला शुरू होने से पहले भवन को तैयार करने के लिए कार्य में तेजी लाने तथा आवश्यकता के अनुसार दिन-रात कार्य कराने के निर्देश दिए। उन्होंने भवन निर्माण की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देने को कहा।

निरीक्षण के बाद मुख्य सचिव ने डाम कोठी में कुंभ मेला एवं जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक कर विभागवार निर्माण कार्यों और अन्य तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने कार्यदायी संस्थाओं को पर्याप्त मानव संसाधन एवं मशीनरी की उपलब्धता सुनिश्चित कर कार्यों की गति बढ़ाने के निर्देश दिए।

बैठक में मुख्य सचिव ने कुंभ मेला के निर्माण कार्यों की थर्ड पार्टी गुणवत्ता जांच के लिए नियुक्त टीयूवी एसयूडी साउथ एशिया प्रा. लि., क्वालिटी ऑस्ट्रिया सेंट्रल एशिया प्रा. लि. तथा ब्यूरो वेरिटास (इंडिया) प्रा. लि. के टीम लीडर्स से गुणवत्ता जांच की प्रगति की जानकारी ली। उन्होंने निर्देश दिए कि गुणवत्ता जांच निरंतर और सख्ती से की जाए तथा किसी भी स्तर पर कमी सामने आने पर उसे तत्काल दूर कराया जाए।

उन्होंने एनएच परियोजनाओं के निर्माण के कारण प्रभावित होने वाले पार्किंग स्थलों तथा डायवर्जन मार्गों तक पहुंच के लिए वैकल्पिक मार्ग एवं पुलों की योजनाओं की जानकारी भी ली। साथ ही भीड़ प्रबंधन की तैयारियों की समीक्षा करते हुए संभावित परिस्थितियों को ध्यान में रखकर ठोस एवं प्रभावी कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने कहा कि कुंभ मेला-2027 की सफलता के लिए सभी विभागों का समन्वित प्रयास आवश्यक है। अधिकारियों को टीम भावना के साथ कार्य करते हुए निर्धारित लक्ष्यों को समय से पूरा करना होगा, ताकि मेले के दौरान श्रद्धालुओं को सुरक्षित, सुगम और व्यवस्थित सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें। उन्होंने कहा कि श्रद्धालु हरिद्वार से बेहतर अनुभव लेकर लौटें, इसके लिए सुविधा, सुरक्षा, सुगमता और स्वागत से जुड़ी सभी आवश्यक व्यवस्थाएं समय रहते सुनिश्चित की जाएं।

मेलाधिकारी सोनिका ने मुख्य सचिव को कुंभ मेला से संबंधित निर्माण कार्यों एवं अन्य तैयारियों की जानकारी देते हुए बताया कि सभी कार्य निर्धारित टाइमलाइन के अनुरूप आगे बढ़ रहे हैं तथा प्रगति और गुणवत्ता की निरंतर बहुस्तरीय निगरानी की जा रही है। उन्होंने बताया कि कुंभ क्षेत्र के पुलों का सुरक्षा ऑडिट संबंधित विभागों द्वारा कराया जा चुका है तथा आईआईटी रुड़की से भी पुलों की जांच कराने का आग्रह किया गया है। उन्होंने बताया कि सीसीआर-2 भवन की गुणवत्ता जांच के लिए नियुक्त एजेंसी के अतिरिक्त केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान से भी गुणवत्ता जांच कराने का निर्णय लिया गया है।