पत्रकार कल्याण कोष से चार दिवंगत पत्रकारों के आश्रितों को पांच लाख की आर्थिक सहायता की संस्तुति

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशानुसार सूचना महानिदेशक बंशीधर तिवारी की अध्यक्षता में पत्रकार कल्याण कोष (कॉरपस फंड) एवं मुख्यमंत्री पत्रकार सम्मान पेंशन योजना से संबंधित समितियों की बैठक सूचना निदेशालय में आयोजित की गई। सूचना महानिदेशक ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक की अध्यक्षता करते हुए विभिन्न प्रकरणों की समीक्षा की तथा पत्रकारों के कल्याण एवं सम्मान से संबंधित मामलों पर विचार-विमर्श किया।

बैठक में समिति द्वारा पत्रकार कल्याण कोष से चार दिवंगत पत्रकारों के आश्रितों को ₹5-₹5 लाख की आर्थिक सहायता स्वीकृत किए जाने की संस्तुति की गई। इसके अतिरिक्त गंभीर बीमारी से ग्रसित एक वरिष्ठ पत्रकार को उपचार हेतु ₹5 लाख की आर्थिक सहायता प्रदान किए जाने की संस्तुति भी की गई।

इसी क्रम में मुख्यमंत्री पत्रकार सम्मान पेंशन योजना के अंतर्गत चार वरिष्ठ पत्रकारों को ₹8,000 प्रतिमाह की दर से पेंशन प्रदान किए जाने की संस्तुति की गई।

इस अवसर पर सूचना महानिदेशक बंशीधर तिवारी ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशों के अनुरूप राज्य सरकार पत्रकारों के कल्याण, सम्मान एवं सहायता के लिए प्रतिबद्ध है। सूचना विभाग द्वारा संकटग्रस्त पत्रकारों तथा उनके आश्रितों को यथासंभव सहायता उपलब्ध कराने के लिए तत्परता से कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पत्रकारों के कल्याण से जुड़े प्रकरणों पर नियमित रूप से समिति की बैठकें आयोजित कर पूरी संवेदनशीलता के साथ विचार किया जा रहा है, ताकि पात्र पत्रकारों एवं उनके परिजनों को नियमानुसार सहायता उपलब्ध कराई जा सके।

बैठक में सूचना विभाग के अपर निदेशक आशीष कुमार त्रिपाठी, संयुक्त निदेशक के.एस. चौहान, मुख्य प्रशासनिक अधिकारी चंद्र सिंह तोमर, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी चेतन कुमार पाण्डेय तथा पत्रकार कल्याण कोष समिति के सदस्य गिरीश तिवारी, अमित शर्मा एवं शशि शर्मा उपस्थित रहे।

अगले वर्ष मई के प्रथम सप्ताह में माणा पास से औली तक आयोजित होगी 100 माइल्स हिमालयन एंड्योरेंस अल्ट्रा रनः धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जनपद पिथौरागढ़ के गुंजी में आयोजित आदि कैलाश परिक्रमा रन-2.0 में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने 70 किलोमीटर और 42 किलोमीटर की दौड़ के विजेताओं को पुरस्कृत किया तथा देश के विभिन्न राज्यों से पहुंचे धावकों का उत्साहवर्धन किया। मुख्यमंत्री का गुंजी पहुंचने पर रं समुदाय के लोगों ने पारंपरिक वेशभूषा पहनाकर स्वागत किया। इस दौरान स्थानीय समुदाय की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और विशिष्ट परंपराओं की झलक देखने को मिली।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आदि कैलाश परिक्रमा रन केवल एक मैराथन नहीं, बल्कि साहस, संकल्प, आत्मविश्वास और दृढ़ इच्छाशक्ति की परीक्षा है। उच्च हिमालयी क्षेत्र में कठिन रास्तों, विषम मौसम और सीमित ऑक्सीजन के बीच इस प्रकार की प्रतियोगिता में प्रतिभाग करना अपने आप में बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने सभी प्रतिभागियों के साहस और उत्साह की सराहना करते हुए उन्हें शुभकामनाएं दीं।

मुख्यमंत्री ने आयोजन को सफल बनाने में भारतीय सेना, भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) और सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) के सहयोग की सराहना की तथा उनके अधिकारियों एवं जवानों को सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि हमारे वीर जवान कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में देश की सीमाओं की सुरक्षा करने के साथ ही इस प्रकार के आयोजनों में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2025 में आयोजित आदि कैलाश परिक्रमा रन के प्रथम संस्करण में 700 से अधिक धावकों ने प्रतिभाग किया था। इस आयोजन की सफलता से आदि कैलाश क्षेत्र में साहसिक पर्यटन की संभावनाओं को नई पहचान मिली है। उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष आदि कैलाश क्षेत्र के लिए जारी इनर लाइन परमिट की संख्या में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जो इस क्षेत्र के प्रति पर्यटकों और श्रद्धालुओं के बढ़ते आकर्षण को दर्शाती है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश के सीमांत गांवों को अंतिम गांव के बजाय प्रथम गांव के रूप में विकसित करने की दिशा में निरंतर कार्य किया जा रहा है। सीमांत क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं के विकास के साथ ही पर्यटन गतिविधियों को प्रोत्साहित किया जा रहा है, ताकि स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर उपलब्ध हो सकें।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आदि कैलाश परिक्रमा रन जैसे आयोजन सीमांत क्षेत्रों की स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। ऐसे आयोजनों से होमस्टे संचालकों, स्थानीय गाइडों, परिवहन व्यवसायियों, होटल एवं खानपान से जुड़े लोगों को लाभ मिल रहा है। राज्य सरकार का प्रयास है कि पर्यटन विकास का सीधा लाभ स्थानीय समुदायों तक पहुंचे और सीमांत गांवों से पलायन रोकने में भी मदद मिले।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार उत्तराखण्ड को साहसिक पर्यटन के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए निरंतर प्रयासरत है। इस वर्ष नीति घाटी में भी अल्ट्रा रन का सफल आयोजन किया गया। राज्य में ट्रेकिंग, पर्वतारोहण, रिवर राफ्टिंग, कयाकिंग, पैराग्लाइडिंग, माउंटेन साइक्लिंग और एंगलिंग जैसी गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड की भौगोलिक विविधता साहसिक पर्यटन के लिए अनेक अवसर प्रदान करती है। औली, मुनस्यारी, ऋषिकेश और टिहरी सहित विभिन्न क्षेत्रों में साहसिक पर्यटन गतिविधियों का निरंतर विस्तार हो रहा है।

मई 2027 में आयोजित होगी 100 माइल्स हिमालयन एंड्योरेंस अल्ट्रा रन

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस अवसर पर घोषणा की कि अगले वर्ष मई के प्रथम सप्ताह में राज्य सरकार द्वारा ‘100 माइल्स हिमालयन एंड्योरेंस अल्ट्रा रन’ का आयोजन किया जाएगा। यह दौड़ लगभग 5,600 मीटर की ऊंचाई पर स्थित माणा पास से प्रारंभ होकर बदरीनाथ और जोशीमठ होते हुए औली तक पहुंचेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस आयोजन से देश-विदेश के धावकों को उत्तराखण्ड की प्राकृतिक सुंदरता, हिमालयी भूगोल और साहसिक पर्यटन की संभावनाओं से परिचित होने का अवसर मिलेगा। साथ ही सीमांत क्षेत्रों में पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा मिलने से स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार एवं स्वरोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार सीमांत क्षेत्रों को पर्यटन और आर्थिक गतिविधियों के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम के अनुरूप इन क्षेत्रों में पर्यटन, स्वरोजगार और आधारभूत सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है।

इस अवसर पर दर्जा राज्यमंत्री एवं उत्तराखण्ड जनजाति सलाहकार परिषद के उपाध्यक्ष अशोक सिंह नबियाल, सचिव पर्यटन धीराज सिंह गर्ब्याल, मुख्य विकास अधिकारी डॉ. दीपक सैनी, भारतीय सेना, आईटीबीपी एवं एसएसबी के अधिकारी, स्थानीय जनप्रतिनिधि तथा अन्य गणमान्य उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री ने सुनीं जनसमस्याएं, अधिकारियों को दिए त्वरित समाधान के निर्देश

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने खटीमा पहुंचकर हेलीपैड लोहियाहेड व कैंप कार्यालय में जनता व जनप्रतिनिधियों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं। उन्होंने अधिकारियों को प्राप्त शिकायतों/समस्याओं का प्राथमिकता के आधार पर त्वरित, पारदर्शिता से निस्तारण करने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आमजन की समस्याओं का समयबद्ध निस्तारण सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता है,ताकि लोगों को अनावश्यक कार्यालयों के चक्कर न काटने पड़ें। उन्होंने कहा कि सरकार सरलीकरण, समाधान और संतुष्टि के मूल मंत्र के साथ कार्य कर रही है,जहाँ प्रशासन की जवाबदेही और संतोषजनक समाधान सबसे महत्वपूर्ण हैं। मुख्यमंत्री ने जनप्रतिनिधियों से क्षेत्र की विकास आवश्यकताओं पर चर्चा करते हुए जनता की अपेक्षाओं के अनुरूप नागरिक सुविधाओं को सुदृढ़ करने की प्रतिबद्धता दोहराई।

इस दौरान अध्यक्ष जिला पंचायत अजय मौर्य, दर्जा मंत्री संतोष गौरव, फरजाना बेगम, अध्यक्ष नगर पंचायत नानकमत्ता प्रेम सिंह टूरना, जिला पंचायत सदस्य भास्कर सम्भल, रमेश चंद्र जोशी,रनदीप पोखरिया,अमित पाण्डे,भवानीभंडारी,जिलाधिकारी नितिन सिंह भदौरिया,एएसपी अजय गणपति,वी सी जय किशन, अपर जिलाधिकारी पंकज उपाध्याय सहित अन्य अधिकारी एवं जनप्रतिनिधि उपस्थित थे।

यहां के बाद सीएम पुष्कर सिंह धामी ने रविवार को खटीमा स्थित अपने निजी आवास नगला तराई एवं लोहियाहेड हेलीपैड पर आमजन और जनप्रतिनिधियों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं। मुख्यमंत्री ने संबंधित अधिकारियों को जनसमस्याओं का प्राथमिकता के आधार पर त्वरित, पारदर्शी एवं प्रभावी निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आमजन की समस्याओं का समयबद्ध समाधान राज्य सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता है। लोगों को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए अनावश्यक रूप से सरकारी कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें, इसके लिए अधिकारियों को संवेदनशीलता और तत्परता के साथ कार्य करना चाहिए।

सीएम ने दिखाई ड्रग फ्री उत्तराखण्ड वॉकथॉन को हरी झंडी, दिलाई नशामुक्त उत्तराखंड की शपथ

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने डॉ. बी.आर. अम्बेडकर ग्राउंड, ओएनजीसी, देहरादून में ओएनजीसी ऑफिसर्स एसोसिएशन द्वारा आयोजित ड्रग फ्री उत्तराखण्ड वॉकथॉन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया और नशामुक्त उत्तराखंड की शपथ भी दिलाई। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने युवाओं सहित सभी प्रतिभागियों से नशामुक्त उत्तराखण्ड के निर्माण में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि नशामुक्त उत्तराखण्ड वॉकथॉन केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि समाज को जागरूक करने और स्वस्थ एवं सशक्त उत्तराखण्ड के निर्माण का संदेश देने वाला महत्वपूर्ण अभियान है। इस प्रकार के आयोजनों से नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जनजागरूकता बढ़ने के साथ ही युवाओं को सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है। उन्होंने इस पहल के लिए ओएनजीसी ऑफिसर्स एसोसिएशन के पदाधिकारियों, आयोजकों एवं विशेष रूप से श्री देवेन्द्र सिंह बिष्ट की सराहना की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि नशा व्यक्ति के स्वास्थ्य और भविष्य के साथ ही उसके परिवार और समाज को भी प्रभावित करता है। जिस युवा के हाथों में किताबें होनी चाहिए, जिसे खेल के मैदान में अपनी प्रतिभा दिखानी चाहिए और अपने परिश्रम से भविष्य संवारना चाहिए, यदि वह नशे की गिरफ्त में आ जाता है, तो उसके सपनों के साथ ही परिवार की उम्मीदें भी प्रभावित होती हैं। इसलिए युवाओं को नशे से दूर रखकर उनकी ऊर्जा और प्रतिभा को सही दिशा देना हम सभी की जिम्मेदारी है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि युवा प्रदेश की सबसे बड़ी शक्ति हैं। युवाओं को अपनी प्रतिभा, आत्मविश्वास और मेहनत के बल पर जीवन में आगे बढ़ना चाहिए। नशे से दूर रहने के लिए खेल, योग और व्यायाम को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाना आवश्यक है। अच्छी संगति, सकारात्मक सोच और स्वस्थ जीवनशैली युवाओं को बेहतर भविष्य की ओर ले जाती है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे स्वयं नशे से दूर रहने के साथ ही अपने साथियों को भी इसके दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करें।

मुख्यमंत्री ने कहा कि नशे के खिलाफ लड़ाई केवल सरकार और पुलिस के प्रयासों से नहीं जीती जा सकती। इसके लिए अभिभावकों, शिक्षकों, सामाजिक संगठनों और समाज के प्रत्येक वर्ग को अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी। विद्यालयों, महाविद्यालयों, कार्यस्थलों और खेल मैदानों से नशामुक्ति का संदेश हर घर और हर गांव तक पहुंचाना होगा। उन्होंने युवाओं से कहा कि वे इस अभियान में केवल सहभागी बनकर न रहें, बल्कि इसका नेतृत्व करें और दूसरों के लिए प्रेरणा बनें।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश को नशामुक्त बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। नशे के अवैध कारोबार में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई के साथ ही जनजागरूकता, नशामुक्ति, उपचार और पुनर्वास पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि नशे की लत से प्रभावित व्यक्तियों को सही मार्गदर्शन, परामर्श, उपचार और परिवार का भावनात्मक सहयोग मिलना भी आवश्यक है। नशामुक्त उत्तराखण्ड के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए प्रभावी कार्रवाई के साथ ही सामाजिक जागरूकता और पुनर्वास के प्रयासों में बेहतर समन्वय जरूरी है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड देवभूमि होने के साथ ही वीरों, तपस्वियों और समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं की भूमि है। हमारी युवा पीढ़ी को इस गौरवशाली विरासत को आगे बढ़ाते हुए शिक्षा, कौशल विकास, खेल, स्टार्टअप, नवाचार और उद्यमिता के क्षेत्र में नई उपलब्धियां हासिल करनी हैं। सरकार का प्रयास है कि युवाओं की ऊर्जा का उपयोग प्रदेश और देश के विकास में हो तथा उन्हें अपनी प्रतिभा निखारने के अधिक से अधिक अवसर मिलें।

मुख्यमंत्री ने कहा कि नशामुक्त उत्तराखण्ड का संकल्प केवल किसी एक आयोजन तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसे अपने आचार, विचार और व्यवहार का हिस्सा बनाना होगा। उन्होंने सभी से श्नशे को ना, जिंदगी को हांश् का संदेश जन-जन तक पहुंचाने का आह्वान किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि सामूहिक प्रयासों और जनभागीदारी से ही एक ऐसे स्वस्थ, सशक्त और नशामुक्त उत्तराखण्ड का निर्माण किया जा सकता है, जहां प्रत्येक युवा अपनी प्रतिभा और परिश्रम से आगे बढ़े तथा प्रत्येक परिवार का भविष्य सुरक्षित और खुशहाल हो।

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री खजान दास, विधायक सविता कपूर,  उत्तराखण्ड राज्य पिछड़ा वर्ग कल्याण परिषद के उपाध्यक्ष अशोक वर्मा, डॉ. विकास लोईवाल, ओएनजीसी ऑफिसर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष देवेन्द्र सिंह बिष्ट सहित अन्य गणमान्य उपस्थित थे।

जीवन में व्यवहार, विनम्रता और संस्कार ही तय करते हैं हमारी असली पहचानः धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बिधौली, देहरादून स्थित यूपीईएस के 24वें दीक्षांत समारोह में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने विश्वविद्यालय के छह विद्यार्थियों को सिल्वर प्लेट पुरस्कार से सम्मानित किया।

मुख्यमंत्री ने उपाधि प्राप्त करने वाले सभी विद्यार्थियों को बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि आज से उनके जीवन के एक नए अध्याय की शुरुआत हो रही है। अब वे विश्वविद्यालय से निकलकर जीवन की वास्तविक चुनौतियों का सामना करेंगे। उन्होंने कहा कि जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए मेहनत, लगन और निरंतर सीखने की भावना आवश्यक है। विद्यार्थियों को अपने परिश्रम और क्षमताओं के बल पर निर्धारित लक्ष्य हासिल करने चाहिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जीवन में अच्छे कार्य करने और दूसरों की सहायता करने से वास्तविक खुशी एवं संतुष्टि मिलती है। व्यक्ति की असली पहचान उसके व्यवहार, विनम्रता और संस्कारों से होती है। उन्होंने विद्यार्थियों से जीवन में सदैव सीखने की भावना बनाए रखने और अपने ज्ञान एवं क्षमताओं का उपयोग समाज तथा देश की प्रगति में करने का आह्वान किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि यूपीईएस ने उच्च शिक्षा के क्षेत्र में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। विश्वविद्यालय ने पिछले दो दशकों में शिक्षा के क्षेत्र में अनेक महत्वपूर्ण कार्य किए हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का संकल्प लिया है। इस संकल्प को साकार करने में युवाओं की सबसे महत्वपूर्ण भूमिका होगी। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि देश के युवाओं की प्रतिभा, मेहनत और लगन से विकसित भारत का संकल्प अवश्य साकार होगा। उन्होंने कहा कि यूपीईएस से शिक्षा प्राप्त करने वाले विद्यार्थी देश-दुनिया में जहां भी जाएंगे, अपनी प्रतिभा, कार्यक्षमता और उपलब्धियों से उत्तराखण्ड सहित पूरे देश का नाम रोशन करेंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हाल ही में आयोजित निबंध प्रतियोगिता में ढाई लाख से अधिक विद्यार्थियों ने प्रतिभाग कर विभिन्न विषयों पर अपने विचार एवं सुझाव प्रस्तुत किए। इन सुझावों से स्पष्ट होता है कि उत्तराखण्ड के युवा विभिन्न विषयों के प्रति जागरूक हैं और समाज तथा देश से जुड़े मुद्दों पर अपनी सकारात्मक सोच रखते हैं। उन्होंने कहा कि जागरूक और प्रतिभाशाली युवा ही किसी भी राज्य और देश के उज्ज्वल भविष्य का आधार होते हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान समय आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा साइंस, ग्रीन एनर्जी और डिजिटल टेक्नोलॉजी का है। राज्य सरकार उत्तराखण्ड को शिक्षा, विज्ञान, तकनीक और अनुसंधान के क्षेत्र में अग्रणी राज्य बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 को लागू किया गया है। आधुनिक शिक्षा के साथ सांस्कृतिक विरासत और जीवन मूल्यों के समन्वय को बढ़ावा देने के उद्देश्य से दून विश्वविद्यालय में श्सेंटर फॉर हिंदू स्टडीजश् की स्थापना की गई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि युवाओं में वैज्ञानिक सोच और नवाचार को प्रोत्साहित करने के लिए देहरादून में साइंस सिटी का निर्माण किया जा रहा है। राज्य सरकार का प्रयास है कि प्रदेश के युवा केवल रोजगार प्राप्त करने तक सीमित न रहें, बल्कि स्वरोजगार और उद्यमिता के माध्यम से दूसरों को भी रोजगार देने वाले बनें। इसी उद्देश्य से राज्य में स्टार्टअप और नवाचार को प्रोत्साहित करने के साथ ही इन्क्यूबेशन सेंटर स्थापित किए गए हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए देश का सबसे सख्त नकल विरोधी कानून लागू किया है। उन्होंने कहा कि पारदर्शी भर्ती व्यवस्था के माध्यम से पिछले पांच वर्षों में प्रदेश के 35 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरियां प्रदान की गई हैं। सरकार युवाओं को उनकी योग्यता और मेहनत के आधार पर आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।

दीक्षांत समारोह में विद्यार्थियों और उनके परिजनों के बीच पहुंचे मुख्यमंत्री

दीक्षांत समारोह के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विद्यार्थियों और उनके परिजनों के बीच पहुंचकर उनसे आत्मीय मुलाकात की। मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों से बातचीत कर उन्हें उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने समारोह में देश के विभिन्न हिस्सों से आए विद्यार्थियों के परिजनों से भी संवाद किया और उनका कुशलक्षेम जाना। मुख्यमंत्री को अपने बीच पाकर विद्यार्थी और उनके परिजन उत्साहित नजर आए।

4,795 विद्यार्थियों को प्रदान की जा रही हैं उपाधियां

यूपीईएस के 24वें दीक्षांत समारोह में इस वर्ष कुल 4,795 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की जा रही हैं। इनमें नियमित पाठ्यक्रमों के 3,806 विद्यार्थी तथा यूपीईएस ऑनलाइन के 989 विद्यार्थी शामिल हैं।

इस अवसर पर यूकॉस्ट के महानिदेशक प्रो. दुर्गेश पंत, यूपीईएस के अध्यक्ष डॉ. राम के. शर्मा, कुलपति डॉ. सुनील राय, प्रो-वाइस चांसलर मनीष मदान सहित विश्वविद्यालय के शिक्षक, अधिकारी, विद्यार्थी एवं अन्य गणमान्य उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री की कुमाऊँनी वॉइस क्लिप से हुई अभियान की शुरुआत

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री कैम्प कार्यालय में एआई स्ट्रैटेजिक इंजीनियरिंग फाउंडेशन द्वारा विकसित भाषा एआई पहल के अंतर्गत गढ़वाली, कुमाऊँनी और जौनसारी लोकभाषाओं के वॉइस कलेक्शन पोर्टल का शुभारंभ किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री की कुमाऊँनी भाषा में रिकॉर्ड की गई वॉइस क्लिप से अभियान की शुरुआत की गई। इस पहल का उद्देश्य उत्तराखण्ड की लोकभाषाओं को एआई से जोड़कर उनके संरक्षण, संवर्धन और डिजिटल माध्यमों पर उपयोग को बढ़ावा देना है।

मुख्यमंत्री ने एआईएसई फाउंडेशन की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि हमारी बोली-भाषाएं हमारी पहचान हैं। अपनी पहचान को बनाए रखने तथा लोककला, संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण के लिए आधुनिक तकनीक का उपयोग करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है और भविष्य में इसका दायरा और व्यापक होगा। ऐसे में हमें अपनी क्षेत्रीय भाषाओं को भी इस तकनीक के अनुरूप विकसित करना होगा, ताकि हमारी समृद्ध भाषाई विरासत को वैश्विक स्तर पर पहचान मिल सके।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का प्रयास है कि प्रदेश के दूर-दराज के गांवों और क्षेत्रों में रहने वाला व्यक्ति भी अपनी बोली-भाषा के माध्यम से सरकारी योजनाओं की जानकारी प्राप्त कर सके और अपनी बात आसानी से सरकार तक पहुंचा सके। इसके लिए आवश्यक है कि एआई हमारी स्थानीय भाषाओं को सही ढंग से समझ सके। उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय भाषाओं के शब्दों का व्यापक संग्रह तैयार करने के साथ ही उनके सही उच्चारण और बोलने की शैली को भी एआई से जोड़ना होगा। इससे एआई हमारी बोली-भाषाओं को बेहतर ढंग से समझ सकेगा और लोगों को उनकी स्थानीय भाषा में सटीक जानकारी उपलब्ध करा सकेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड के विभिन्न क्षेत्रों में एक ही शब्द का उच्चारण अलग-अलग ढंग से किया जाता है। पोर्टल के माध्यम से जानकारी अपलोड करने से एआई को स्थानीय भाषाओं के शब्दों, उच्चारण और बोलने की विविध शैलियों को समझने में आसानी होगी। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि यह पहल हमारी लोकभाषाओं के संरक्षण के साथ ही आने वाली पीढ़ियों को अपनी लोककला, संस्कृति और परंपराओं से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उन्होंने इस कार्य से जुड़े सभी लोगों को शुभकामनाएं दीं।

इस अवसर पर पद्मश्री लोकगायक प्रीतम भरतवाण ने कहा कि हमारी लोकभाषाओं में लोकजीवन, लोकगीत, जागर और सांस्कृतिक परंपराओं की समृद्ध विरासत समाहित है। जागर अकादमी इस पहल में स्थानीय भाषाओं के सही उच्चारण और उनकी मौलिकता को बनाए रखने में सहयोग करेगी।

एआईएसई फाउंडेशन के संस्थापक सचिदानंद सेमवाल ने बताया कि भाषा एआई पहल के माध्यम से गढ़वाली, कुमाऊँनी और जौनसारी लोकभाषाओं के शब्दों एवं आवाजों का संग्रह तैयार किया जा रहा है। इसका उद्देश्य भविष्य में एआई आधारित तकनीक को इन लोकभाषाओं में संवाद करने में सक्षम बनाना है।

इस अवसर पर शक्ति प्रसाद भट्ट, गजेंद्र नौटियाल, अनिरुद्ध रैथवान, निधि सेमवाल, अनिल गोदियाल, डॉ. जे.के. पांडे एवं देव रतूड़ी सहित अन्य गणमान्य उपस्थित थे।

पुरानी एवं बार बार खराब हो रही 108 एम्बुलेंस वाहनों को तत्काल बदला जाएः बर्द्धन

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन की अध्यक्षता में सचिवालय में 108 एम्बुलेंस सेवा से सम्बन्धित व्यय वित्त समिति की बैठक संपन्न हुई। बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने एम्बुलेंस सेवा को अधिक प्रभावी, सुदृढ़ एवं जनोपयोगी बनाने के लिए विभिन्न दिशा-निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने कहा कि 108 एम्बुलेंस सेवा सीधे लोगों के जीवन से जुड़ी है। इसलिए निर्धारित मानकों के अनुरूप एम्बुलेंस को अद्यतन रखा जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि पुरानी और निर्धारित अवधि पूरी कर चुकी गाड़ियों को तत्काल बदलने की प्रक्रिया शुरू की जाए। उन्होंने तीन लाख किलोमीटर से अधिक चल चुकी लगभग 50 एम्बुलेंस (108) वाहनों को तत्काल बदले जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि एम्बुलेंस को चरणबद्ध तरीके से बदला जाए, लेकिन इसमें अनावश्यक विलंब नहीं होना चाहिए।

मुख्य सचिव ने एम्बुलेंस सेवा की प्रभावी निगरानी के लिए विभागीय स्तर पर भी मॉनिटरिंग मैकेनिज्म तैयार किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अलग अलग स्तर पर साप्ताहिक और मासिक आधार पर निगरानी की जाए। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) में इसके लिए एक डेडिकेटेड टीम गठित किया जाए, जो सेवा के विभिन्न पहलुओं की नियमित निगरानी एवं विश्लेषण करेगा, ताकि किसी भी प्रकार की कमी या असामान्य स्थिति सामने आने पर तत्काल आवश्यक कार्रवाई की जा सके।

मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि एम्बुलेंस के पहुँचने के समय का आकलन केवल एवरेज रिस्पांस टाइम के आधार पर न किया जाए, बल्कि प्रत्येक मामले में एम्बुलेंस के पहुँचने में लगे वास्तविक समय का विश्लेषण किया जाए। इससे देरी वाले मामलों की पहचान कर उनके कारणों का पता लगाया जा सके और आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए जा सकेंगे। उन्होंने एम्बुलेंस में उपलब्ध जीवनरक्षक उपकरणों की प्रत्येक माह अनिवार्य जाँच सुनिश्चित करने एवं इसके लिए सम्बन्धित अधिकारियों एवं कार्मिकों की जिम्मेदारी निर्धारित करने के निर्देश भी दिए।

मुख्य सचिव ने कहा कि एम्बुलेंस सेवा के लिए एक मोबाइल ऐप भी शीघ्र तैयार किया जाए, जिससे रोगी की स्थिति एवं स्थान की जानकारी के आधार पर एम्बुलेंस की आवाजाही और सेवा की निगरानी अधिक सुगमता से की जा सके। उन्होंने सरकारी एम्बुलेंसों को भी आवश्यक सुविधाओं युक्त करते हुए इस व्यवस्था में शामिल करने पर जोर दिया। इससे उपलब्ध एम्बुलेंस की संख्या एवं सेवा की क्षमता बढ़ेगी और आपातकालीन परिस्थितियों में लोगों को समय पर सहायता उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।

बैठक में बताया गया कि वर्तमान में 272 एम्बुलेंस, 108 सेवा के अंतर्गत प्रदेश में संचालित हैं, इसके साथ ही लगभग 250 से अधिक सरकारी एम्बुलेंस भी विभाग द्वारा संचालित की जा रही हैं।

आधुनिक शिक्षा के साथ भारतीय संस्कृति और परंपराओं का ज्ञान भी आवश्यकः धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देहरादून स्थित द टॉसब्रिज स्कूल में आयोजित संस्कार दिवस एवं स्थापना दिवस समारोह में बतौर मुख्य अतिथि प्रतिभाग किया। इस अवसर पर उन्होंने विद्यालय के विद्यार्थियों, शिक्षकों, अभिभावकों एवं उपस्थित अतिथियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि संस्कार दिवस केवल विद्यालय की स्थापना का उत्सव नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, परंपराओं और जीवन मूल्यों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराने का अवसर भी है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल शैक्षणिक और व्यावसायिक रूप से सफल बनाना नहीं, बल्कि उन्हें एक अच्छा इंसान बनाना भी है। ज्ञान व्यक्ति को आगे बढ़ने का मार्ग दिखाता है, जबकि संस्कार उसे सही दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं। जीवन में चरित्र, अनुशासन, ईमानदारी और नैतिक मूल्यों का विशेष महत्व है। उन्होंने विद्यालय द्वारा आधुनिक शिक्षा के साथ भारतीय संस्कृति और परंपराओं को महत्व दिए जाने की सराहना की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि द टॉसब्रिज स्कूल का उद्घाटन वर्ष 2015 में भारत के पूर्व राष्ट्रपति एवं महान वैज्ञानिक डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम द्वारा किया गया था। डॉ. कलाम का जीवन विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने अपने जीवन से यह संदेश दिया कि बड़े सपने देखने के साथ उन्हें साकार करने के लिए निरंतर परिश्रम और दृढ़ संकल्प भी आवश्यक है। मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों को डॉ. कलाम की आत्मकथा अग्नि की उड़ान पढ़ने के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि उनके जीवन के अनुभव विद्यार्थियों को अपने लक्ष्य निर्धारित करने और चुनौतियों का सामना करने की प्रेरणा देंगे।

मुख्यमंत्री ने भारतीय संस्कृति की विशेषताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत की परंपरा ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की भावना पर आधारित है। सभी के प्रति सम्मान, बड़ों का आदर, विविधताओं को स्वीकार करना और जरूरतमंदों की सहायता करना भारतीय संस्कारों के अभिन्न अंग हैं। यही जीवन मूल्य हमारी सांस्कृतिक पहचान को विशिष्ट बनाते हैं और समाज में आपसी सद्भाव एवं सहयोग की भावना को मजबूत करते हैं।

उन्होंने विद्यालय के ध्येय वाक्य ‘ज्ञानं भारः क्रियां बिना’ का उल्लेख करते हुए कहा कि कर्म के बिना ज्ञान अधूरा है। ज्ञान की सार्थकता तभी है, जब उसे व्यवहार में उतारकर समाज और राष्ट्र के हित में उपयोग किया जाए। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि विद्यालय के विद्यार्थी इस विचार को अपने जीवन में अपनाते हुए ज्ञान के साथ कर्म, जिम्मेदारी और सेवा की भावना को भी महत्व देंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत प्रौद्योगिकी, नवाचार और आधुनिक विज्ञान के क्षेत्रों में तेजी से आगे बढ़ रहा है। आने वाला समय नई तकनीकों, कौशल और रचनात्मकता का है। ऐसे में विद्यार्थियों को आधुनिक विषयों में दक्षता हासिल करने के साथ योग, ध्यान, अनुशासन और संस्कारों को भी अपने जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि आधुनिक ज्ञान और भारतीय जीवन मूल्यों का समन्वय ही विद्यार्थियों के व्यक्तित्व को मजबूत बनाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के माध्यम से विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास, कौशल विकास और रचनात्मकता को विशेष महत्व दिया गया है। राज्य सरकार भी उत्तराखंड की शिक्षा व्यवस्था को भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। सरकार का उद्देश्य प्रदेश के युवाओं को रोजगार प्राप्त करने तक सीमित न रखते हुए उन्हें स्वरोजगार और उद्यमिता के माध्यम से रोजगार सृजन करने के लिए भी प्रोत्साहित करना है, ताकि वे आत्मनिर्भर बनकर प्रदेश और देश की आर्थिक प्रगति में योगदान दे सकें।

मुख्यमंत्री ने युवाओं के भविष्य और भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार द्वारा उठाए गए कदमों का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं में नकल पर अंकुश लगाने के लिए सख्त नकल विरोधी कानून लागू किया गया है। पारदर्शी भर्ती व्यवस्था के माध्यम से पिछले पांच वर्षों में 35 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरियां प्रदान की गई हैं। यह उपलब्धि युवाओं को निष्पक्ष अवसर उपलब्ध कराने और उनके भविष्य को सुरक्षित बनाने के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि जीवन में सफलता प्राप्त करने का कोई शॉर्टकट नहीं होता। मेहनत, अनुशासन, ईमानदारी और निरंतर सीखने की इच्छा ही सफलता का वास्तविक आधार हैं। विद्यार्थियों को असफलताओं से निराश होने के बजाय उनसे सीख लेकर आत्मविश्वास के साथ अपने लक्ष्य की ओर आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक विद्यार्थी में अपनी प्रतिभा और क्षमता के अनुरूप आगे बढ़ने की अपार संभावनाएं हैं। आवश्यकता केवल उन्हें पहचानने, सही दिशा देने और निरंतर प्रयास करने की है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार उत्तराखंड को देश का सर्वश्रेष्ठ राज्य बनाने के अपने ‘विकल्प रहित संकल्प’ को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है। इस लक्ष्य की प्राप्ति में शिक्षित, संस्कारित, कुशल और आत्मनिर्भर युवा महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि विद्यालय के विद्यार्थी अपने ज्ञान, प्रतिभा और अच्छे संस्कारों के बल पर प्रदेश और देश का नाम रोशन करेंगे।

इस अवसर पर द टॉसब्रिज स्कूल के प्रबंधन एवं प्रशासन से जुड़े पदाधिकारी, शिक्षकगण, अभिभावक, विद्यार्थी तथा अन्य गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।

उत्तराखंडः राजीव गांधी नवोदय विद्यालयों का होगा संपूर्ण कायाकल्प

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने सचिवालय में राजीव गांधी नवोदय विद्यालयों को उत्कृष्टता केंद्र (सेंटर ऑफ एक्सीलेंस) के रूप में विकसित करने हेतु इनकी सम्पूर्ण कायाकल्प की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इन विद्यालयों को विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा केंद्र और बेहतर आवासीय सुविधायुक्त संस्थानों के रूप में विकसित किया जाए। उन्होंने इसके लिए अल्पकालिक एवं दीर्घकालिक कार्ययोजना तैयार करते हुए शिक्षकों, प्रधानाचार्यों, आधारभूत सुविधाओं से युक्त किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विद्यालयों के संचालन में व्यापक सुधार किए जाने की आवश्यकता है।

सोसाइटी के माध्यम से संचालित किए जाएं राजीव नवोदय विद्यालयः मुख्य सचिव
मुख्य सचिव ने राजीव गांधी नवोदय विद्यालयों का संचालन सोसाइटी के माध्यम से कराए जाने पर जोर दिया। कहा कि इसके लिए राज्य स्तर पर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में शासी निकाय एवं जिला स्तर पर जिलाधिकारियों की अध्यक्षता में समिति के गठन की व्यवस्था की जाए। उन्होंने सरकारी आवासीय विद्यालयों के संचालन के लिए एक लीगल फ्रेमवर्क तैयार करने के निर्देश दिए, ताकि विद्यालयों के प्रभावी संचालन, उत्तरदायित्व निर्धारण और नियमित निगरानी में सहायता मिल सके।

स्थायी प्रधानाचार्यों एवं समर्पित शिक्षकों की व्यवस्था हो सुनिश्चित

मुख्य सचिव ने विद्यालयों में नियमित एवं समर्पित शिक्षकों की नियुक्ति के साथ ही, स्थायी प्रधानाचार्यों की व्यवस्था सुनिश्चित करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि विद्यालयों में उच्च शैक्षणिक गुणवत्ता के अनुरूप योग्य एवं अनुभवी शिक्षकों की उपलब्धता होनी चाहिए। शिक्षकों की नियुक्ति के लिए निर्धारित शैक्षणिक एवं व्यावसायिक अर्हताओं के साथ उच्च शिक्षा और शोध की पृष्ठभूमि वाले अभ्यर्थियों को प्राथमिकता देने की संभावनाओं पर भी विचार किया जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि स्थायी नियुक्तियों की प्रक्रिया पूरी होने तक शिक्षण कार्य प्रभावित न हो, इसके लिए वैकल्पिक एवं अस्थायी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। विद्यालयों के कार्मिक ढांचे को भी आवश्यकता के अनुरूप मजबूत किया जाए।

प्रवेश प्रक्रिया नया सत्र प्रारम्भ होने से एक माह पूर्व हो जाए पूर्ण

मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि प्रवेश परीक्षा और प्रवेश प्रक्रिया का समयबद्ध निर्धारण किया जाए। उन्होंने कहा कि प्रवेश प्रक्रिया ऐसी हो कि नए शैक्षणिक सत्र के आरंभ होने से कम से कम एक माह पहले विद्यार्थियों के प्रवेश सुनिश्चित कर लिए जाएं।

शिक्षा के साथ एक्स्ट्रा करिकुलम और को-करिकुलम गतिविधियों पर भी जोर

मुख्य सचिव ने कहा कि विद्यालयों में विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ खेलकूद, सांस्कृतिक कार्यक्रमों तथा अन्य पाठ्य-सहगामी एवं पाठ्येतर गतिविधियों के पर्याप्त अवसर उपलब्ध कराए जाएं। विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए सभी आवश्यक शैक्षणिक एवं आवासीय सुविधाएं सुनिश्चित की जाएं। उन्होंने स्पष्ट किया कि विद्यार्थियों को सभी आवश्यक सुविधाएं निःशुल्क उपलब्ध कराई जानी चाहिए।

चिकित्सा सुविधा के लिए वाहन सहित आवश्यक व्यवस्थाएं विकसित हों

मुख्य सचिव ने विद्यालयों में विद्यार्थियों की सुरक्षा एवं स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आपातकालीन चिकित्सा आवश्यकताओं के लिए वाहन की व्यवस्था सहित अन्य जरूरी सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। साथ ही, विद्यालयों के लिए आवश्यक बजट का निर्धारण भी प्रस्तावित सुविधाओं, कार्मिकों और संचालन संबंधी जरूरतों के अनुरूप किया जाए।

शिक्षकों की नियुक्ति के लिए पारदर्शी व्यवस्था बनाई जाए

मुख्य सचिव ने शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए पारदर्शी एवं प्रतिस्पर्धात्मक चयन प्रक्रिया अपनाने पर जोर दिया। उन्होंने निर्देश दिए कि स्थायी भर्ती होने तक शिक्षण व्यवस्था बनाए रखने के लिए जिला स्तर पर वैकल्पिक प्रबन्ध किए जाएं। उन्होंने इस सम्बन्ध में जिलाधिकारियों को आवश्यकतानुसार शिक्षकों की अस्थायी व्यवस्था करने हेतु अधिकृत किए जाने के भी निर्देश दिए।

इस अवसर पर सचिव शि़क्षा ज्योति यादव, अपर सचिव नवनीत पाण्डेय एवं महानिदेशक आकांक्षा कोंडे सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री ने पुलिस विभाग के सुदृढ़ीकरण और कार्मिकों के कल्याण के लिए की आठ घोषणाएं

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पुलिस लाइन, देहरादून में पुलिस स्मृति दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। मुख्यमंत्री ने पुलिस एवं अर्धसैनिक बलों के शहीद जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित की तथा शहीद पुलिसकर्मियों के परिजनों को सम्मानित किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि देश की आंतरिक सुरक्षा में पुलिस एवं अर्धसैनिक बलों की महत्वपूर्ण भूमिका है। पिछले एक वर्ष में देशभर में 154 जवानों ने कर्तव्य पालन के दौरान सर्वाेच्च बलिदान दिया, जिनमें उत्तराखण्ड पुलिस के उपनिरीक्षक स्वर्गीय विनोद कुमार भी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि शहीद पूरे देश का गौरव होते हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में नई दिल्ली में राष्ट्र को समर्पित राष्ट्रीय पुलिस स्मारक वीर जवानों के त्याग और साहस का प्रतीक है।

मुख्यमंत्री ने पुलिस व्यवस्था के सुदृढ़ीकरण और पुलिसकर्मियों के कल्याण के लिए आठ महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। उन्होंने उत्तराखण्ड पुलिस की विभिन्न इकाइयों में करीब 1,600 रिक्त पदों पर भर्ती प्रक्रिया जल्द शुरू करने, थानों एवं चौकियों में कार्मिकों की आवश्यकता के अनुसार पदों की संख्या और व्यवस्था की समीक्षा करने तथा विवेचकों को आधुनिक जांच किट उपलब्ध कराने की घोषणा की। साथ ही थानों के आवश्यक कार्यों के लिए वार्षिक बजट 4 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 8 करोड़ रुपये किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने प्रदेश के सभी पुलिस मॉडर्न स्कूलों को बेहतर बनाने, देहरादून में पुलिसकर्मियों के लिए ट्रांजिट हॉस्टल और मल्टी स्टोरी बैरक का निर्माण कराने तथा देहरादून स्थित पुलिस अस्पताल के उच्चीकरण की भी घोषणा की। उन्होंने कहा कि सरकार पुलिसकर्मियों और उनके परिवारों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि खाकी वर्दी साहस, अनुशासन और राष्ट्रसेवा का प्रतीक है। पुलिसकर्मी त्योहारों पर भी परिवारों से दूर रहकर जनता की सुरक्षा करते हैं। उत्तराखण्ड की भौगोलिक परिस्थितियों और आपदाओं के बीच उनकी भूमिका अधिक महत्वपूर्ण है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि नशा और साइबर अपराध आज गंभीर चुनौतियां हैं। नशे की रोकथाम के लिए त्रिस्तरीय एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स गठित की गई है। ड्रग फ्री उत्तराखण्ड के संकल्प को साकार करने के लिए नशा तस्करों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कहा कि इंटरनेट और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के दौर में पुलिस को आधुनिक तकनीक, बेहतर प्रशिक्षण और अन्य एजेंसियों के समन्वय से साइबर अपराधियों से दो कदम आगे रहना होगा। करीब 32 करोड़ रुपये की लागत से स्टेट साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर का निर्माण गतिमान है। महिलाओं की सुरक्षा के लिए प्रत्येक थाने में महिला हेल्प डेस्क के अंतर्गत क्विक रिस्पॉन्स टीम गठित की गई है।

मुख्यमंत्री ने इस वर्ष लगभग 5 करोड़ कांवड़ यात्रियों तथा चारधाम यात्रा में अब तक 60 लाख से अधिक श्रद्धालुओं की सुरक्षित एवं सुगम यात्रा सुनिश्चित करने में उत्तराखण्ड पुलिस के योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस वर्ष उत्कृष्ट सेवाओं के लिए 319 पुलिसकर्मियों को विभिन्न पदकों एवं सम्मान चिह्नों से अलंकृत किया गया है। उत्तराखण्ड पुलिस का प्रतिष्ठित श्प्रेसिडेंट्स पुलिस कलर्सश् के लिए नामित होना प्रदेश के लिए गौरव की बात है।


मुख्यमंत्री ने कहा कि पुलिस आवास संतुष्टि दर 18 प्रतिशत से बढ़कर 22 प्रतिशत हुई है और लक्ष्य इसे 30 प्रतिशत तक पहुंचाने का है। इस वर्ष 785 पुलिसकर्मियों को पदोन्नति दी गई, नागरिक पुलिस में 1,573 तथा पीएसी में 370 आरक्षियों की सीधी भर्ती हुई। उपनिरीक्षक, प्लाटून कमांडर एवं अग्निशमन द्वितीय अधिकारी के 222 पदों की भर्ती प्रक्रिया पूरी हुई है। मृतक पुलिसकर्मियों के 24 आश्रितों को नियुक्तियां दी गई हैं। इस वित्तीय वर्ष में थानों, अग्निशमन केंद्रों, बैरकों, मैस तथा अन्य कार्यस्थलों के लिए 58 करोड़ रुपये से अधिक जारी किए गए हैं। पुलिसकर्मियों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। मुख्यमंत्री ने पुलिसकर्मियों के तनाव प्रबंधन के लिए नियमित कार्यक्रम आयोजित करने पर भी जोर दिया।

पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ ने जानकारी दी कि राज्य गठन से अब तक उत्तराखण्ड पुलिस के 206 कार्मिकों ने कर्तव्य पालन के दौरान प्राण न्योछावर किए हैं। इस वर्ष पुलिस शहीद कोष से आश्रित परिवारों को लगभग 50 लाख रुपये की सहायता दी गई, जबकि पुलिस सैलरी पैकेज के अंतर्गत अब तक करीब 31 करोड़ रुपये की अनुग्रह राशि प्रदान की गई है। एम्स ऋषिकेश में चौबीसों घंटे संचालित पुलिस हेल्प डेस्क स्थापित की जा रही है। इस वर्ष जीवन रक्षक निधि से 25 कार्मिकों को 1 करोड़ 16 लाख रुपये की सहायता तथा 446 मेधावी बच्चों को 34 लाख रुपये की छात्रवृत्ति दी गई।

इस अवसर पर हरिद्वार सांसद एवं पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत, कैबिनेट मंत्री खजान दास, राज्यसभा सांसद नरेश बंसल, विधायक सविता कपूर, जिला पंचायत अध्यक्ष देहरादून सुखविंदर कौर, ऋषिकेश के महापौर शंभू पासवान, राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष कुसुम कंडवाल आदि उपस्थित थे।