देश में निर्यात तैयारी सूचकांक में समग्र रूप से उत्तराखंड को मिली 9वीं रैंक

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उत्तराखण्ड को निर्यात तैयारी सूचकांक 2022 में देश में नवां तथा हिमालयी राज्यों में प्रथम स्थान प्राप्त होना राज्य के लिए बड़ी उपलब्धि बताया है। उन्होंने इसे राज्य सरकार के प्रयासोें का भी प्रतिफल बताया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि निर्यात अर्थव्यवस्था की मजबूती के लिए राज्य सरकार द्वारा पिछले कुछ वर्षों में काफी प्रगति की है।ं

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में विश्व स्तरीय एकीकृत औद्योगिक एस्टेट विकसित किया गया है। राज्य में पंतनगर और काशीपुर में 2 आईसीडीएस और पंतनगर में 1 मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक्स पार्क है। राज्य के देहरादून और पंतनगर हवाई अड्डे को अंतरराष्ट्रीय स्तर का हवाई अड्डा बनाने के लिये प्रयास किये जा रहे हैं। हवाई यात्रा को बढ़ावा देने के लिये टर्बाे फ्यूल में 18 प्रतिशत की कमी की गई है। पड़ोसी राज्यों और राज्य के भीतर सड़क कनेक्टीवीटी में हाल के दिनों में काफी सुधार हुआ है। राष्ट्रीय औद्योगिक गलियारा, अमृतसर-कोलकाता औद्योगिक गलियारा और दिल्ली मुंबई औद्योगिक गलियारा से व्यापार और निर्यात को बढ़ावा मिलेगा।
उन्होंने कहा कि राज्य में अरोमा पार्क, इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्लस्टर, फार्मा सिटी 2, प्लास्टिक पार्क विकसित किये जा रहे है। राज्य से निर्यात को बढ़ावा देने के लिए, “उत्तराखंड निर्यात नीति“ का मसौदा भी तैयार किया गया है। राज्य ने निर्यात के लिए एक जिला दो उत्पाद (ओडीटीपी) चिन्हित फोकस क्षेत्रों की भी पहचान की है। राज्य ने निर्यात को बढ़ावा देने के लिए प्रमुख क्षेत्रों की पहचान की गई है उनमें कृषि और बागवानी, स्वास्थ्य और आयुष, फार्मास्यूटिकल्स, ऑटोमोबाइल, पर्यटन और आतिथ्य, हथकरघा और हस्तशिल्प एवं शैक्षिक सेवाएं प्रमुख है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारा लक्ष्य उत्तराखंड के स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देना है। प्रधान मंत्री ने बुनियादी ढांचा कनेक्टिविटी परियोजनाओं की योजना और कार्यान्वयन में सुधार के लिए पीएम गति शक्ति का उद्घाटन किया था। गति शक्ति योजना एक मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी योजना थी जिसका लक्ष्य लॉजिस्टिक्स लागत और समय को कम करने के लिए बुनियादी ढांचा परियोजना योजना और निष्पादन का समन्वय करना था। इसे लेकर उत्तराखंड एक जीआईएस राज्य मास्टर प्लान तैयार किया जा रहा है। इसका उद्देश्य उद्योग के लिए निवेश का माहौल तैयार करना है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत सरकार और राज्य सरकार द्वारा दिल्ली एनसीआर और उत्तराखंड राज्य के बीच यात्रा के समय को कम करने के लिए सक्रिय पहल की है, जिससे राज्य से निर्यात में प्रभावी वृद्धि होगी।

पीएम के नेतृत्व में 21वीं सदी का भारत पूरी दुनिया को दिशा देने का कर रहा कार्यः सीएम

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने निरंजनपुर, देहरादून स्थित नवीन मंडी में आयोजित कार्यक्रम में कृषि के क्षेत्र में सराहनीय कार्य करने वाले किसानों को सम्मानित किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि मण्डी से जुड़ी विभिन्न समस्याओं के समाधान के लिए जो भी सुझाव प्राप्त हुए हैं, इनका परीक्षण कराकर प्रस्ताव बनाये जायेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि कुआंवाला-डोईवाला मार्ग पर दण्डेश्वर मंदिर का सौन्दर्यीकरण किया जायेगा। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने वृक्षारोपण कर लोगों को वृक्षारोपण के लिये प्रेरित भी किया।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हजारों की संख्या में आये किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में 21वीं सदी का भारत पूरी दुनिया को दिशा देने का कार्य कर रहा है। सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास की भावना से कार्य हो रहे हैं। उनकी प्रेरणा से कृषि के क्षेत्र में तमाम अनुसंधान हो रहे हैं। ‘वोकल फॉर लोकल’ को बढ़ावा दिया जा रहा है। राज्य में भी ‘एक जिला और दो उत्पाद’ पर कार्य किया जा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी के प्रयासों से यह वर्ष अन्तरराष्ट्रीय मिलेट वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। हमारे श्री अन्न को वैश्विक स्तर पर पहचान मिली है। नवाचार के क्षेत्र में देश में अनेक कार्य हो रहे हैं। स्वरोजगार के प्रति लोगों का रूझान बढ़ा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत इस वर्ष जी-20 की अध्यक्षता कर रहा है। उत्तराखंड को जी-20 की तीन बैठकें आयोजित करने का अवसर मिला। देश के 50 से अधिक शहरों में इन बैठकों का आयोजन किया जा रहा है। इन बैठकों के माध्यम से अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर देश के छोटे शहरों को अन्तरराष्ट्रीय मंच पर नई पहचान मिली है। मुख्यमंत्री ने कहा कि कृषि क्षेत्र देश की बैक बोन की तरह है। देश को मजबूती से आगे बढ़ाने में हमारे किसानों की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। किसानों को सशक्त बनाने के लिए केन्द्र एवं राज्य सरकार द्वारा अनेक योजनाएं चलाई जा रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में किसानों को 03 लाख और महिला स्वयं सहायता समूहों को 05 लाख रुपये तक का ब्याज मुक्त ऋण दिया जा रहा है। फार्म मशनरी बैंक के तहत 80 प्रतिशत की सब्सिडी दी जा रही है। एप्पल, कीवी, तेजपत्ता, तिमूर मिशन पर कार्य किये जा रहे हैं। सगंध खेती को बढ़ावा देने के लिए 06 ऐरोमा वैली विकसित की जा रही हैं। काशीपुर में ऐरोमा पार्क बनाया जा रहा है। राज्य में कलस्टर आधारित खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। 01 साल में 18 हजार पॉलीहाउस बनाने का लक्ष्य रखा गया है। इससे एक लाख लोगों का रोजगार उपलब्ध होगा।

इस अवसर पर विधायक विनोद चमोली, खजानदास, सविता कपूर, मेयर सुनील उनियाल गामा, भाजपा के महानगर अध्यक्ष सिद्धार्थ अग्रवाल, भाजपा नेता अनिल गोयल, अध्यक्ष मण्डी समिति कुलदीप बुटोला, उपाध्यक्ष त्रिलोक सिंह बिष्ट, किसान मोर्चा के अध्यक्ष योगेंद्र सिंह पुंडीर आदि उपस्थित थे।

राष्ट्रीय सुरक्षा के संबंध में केंद्रीय मंत्री के साथ सीएम ने किया वर्चुअल प्रतिभाग

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में मादक पदार्थों की तस्करी एवं राष्ट्रीय सुरक्षा के सबंध में आयोजित बैठक में वर्चुअल प्रतिभाग किया। बैठक में विभिन्न राज्यों एवं केन्द्र शासित प्रदेशों के राज्यपाल, उपराज्यपाल एवं मुख्यमंत्री उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस अति महत्वपूर्ण विषय पर बैठक के आयोजन के लिए केन्द्रीय गृह मंत्री का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि भारत सरकार, पूरी सख्ती के साथ ड्रग ट्रैफिकिंग के खिलाफ कार्य कर रही है और इसके सार्थक परिणाम भी लगातार देखने को मिल रहे हैं। राज्य सरकार उत्तराखंड में भी ड्रग ट्रैफिकिंग को रोकने व इसके तंत्र को ध्वस्त करने के लिए कारगर प्रयास कर रही है। उत्तराखण्ड को 2025 तक ड्रग फ्री बनाने का लक्ष्य रखा है, इसके लिए हर स्तर पर कार्य योजना के साथ किये जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में जहां एक ओर लोगों और विशेषकर युवाओं में नशे के खिलाफ जागरूकता बढ़ाई जा रही है वहीं दूसरी ओर नशा तस्करी से जुड़े अपराधियों के खिलाफ कड़ी करवाई भी की जा रही है। इस वर्ष अभी तक एन.डी. पी.एस एक्ट के तहत 586 मामले पंजीकृत हुए हैं, जिनमें 742 आरोपित गिरफ्तार किए गए हैं। मादक पदार्थों की रोकथाम एवं इस सम्बन्ध में प्रभावी कार्यवाही हेतु उत्तराखण्ड राज्य में वर्ष 2022 में त्रिस्तरीय एन्टी नारकोटिक्स टास्क फोर्स का गठन किया गया है। उत्तराखण्ड में मानिसक स्वास्थ्य नियमावली को राज्य सरकार ने स्वीकृति दी है। नशे की प्रवृति को रोकने एवं नशाग्रस्त व्यक्तियों को मुख्यधारा से जोड़ने तथा पुनर्वास हेतु प्रदेश के समस्त जनपदों में नशा मुक्ति केंद्रों को प्रभावी बनाया जा रहा है। उत्तराखण्ड की जेलों में कैदियों को नशे से मुक्त कराने के लिए विशेष रूप से काउंसलिंग एवं सेमिनार भी आयोजित कराये जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान में राज्य में चार इंटीग्रेटेड रिहैबिलिटेशन सेंटर फॉर एडिटक्ट्स संचालित हैं। एम्स नई दिल्ली की सहायता से राज्य में एडिक्शन ट्रीटमेंट फेसिलिटी का भी संचालन किया जा रहा है और वर्तमान में एम्स ऋषिकेश में 10 बेड क्रियाशील है। केंद्र सरकार द्वारा उत्तरकाशी, चम्पावत, अल्मोडा एवं श्रीनगर में भी ए.टी.एफ के संचालन हेतु स्वीकृति प्रदान की गई है। उन्होंने केंद्र सरकार द्वारा उत्तराखंड को दिए जा रहे इस सहयोग के लिए आभार भी व्यक्त किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के प्रत्येक जनपद में संचालित शिक्षण संस्थानों में एंटी ड्रग क्लब कमेटी का गठन किया गया है जिसमें सदस्य के रूप में संस्थान के ही जागरूक छात्रों, अभिभावकों, शिक्षकों, प्रधानाचार्य को सम्मिलित किया गया है। राज्य सरकार द्वारा वर्ल्ड एंटी ड्रग्स डे के अवसर पर 01 लाख 25 हजार युवाओं को ’एंटी ड्रग ई-शपथ’ दिलाई गई। कक्षा 06 से लेकर 12वीं कक्षा के पाठ्यक्रम में ड्रग्स के विषय को सम्मिलित करने के लिए उत्तराखण्ड सरकार द्वारा एनसीईआरटी को प्रस्ताव भेजा गया है। नशे की रोकथाम एवं इसके सम्बन्ध में जानकारी तथा जन सामान्य को किसी भी प्रकार की सहायता हेतु हेल्पलाइन नम्बर भी जारी किए गए हैं और इन्हें प्रसारित भी किया जा रहा है।

पर्यावरण संरक्षण तथा प्रकृति को महत्व देने की है हमारी परम्पराः सीएम

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेशवासियों को हरेला पर्व की शुभकामनाएं दी है। उन्होंने कहा कि पर्यावरण को समर्पित लोक पर्व ‘‘हरेला‘‘ उत्तराखण्ड की सांस्कृतिक परम्परा का प्रतीक है। पर्यावरण संरक्षण तथा प्रकृति को महत्व देने की हमारी परम्परा रही है। यह पर्व समृद्धि, संस्कृति के महत्व हरियाली तथा पर्यावरण संरक्षण का भी संदेश देता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हरेला सुख-समृद्धि व जागरूकता का भी प्रतीक है। हमारी आने वाली पीढ़ी को शुद्ध वातावरण मिल सके इसके लिए सबको वृक्षारोपण व पर्यावरण संरक्षण के प्रति ध्यान देना होगा। ग्लोबल वार्मिंग की समस्या से आज दुनिया भर के देश चिंतित हैं। यह पर्व ग्लोबल वार्मिंग के खिलाफ लड़ने का भी संदेश देता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमें व्यापक स्तर पर वृक्षारोपण के साथ उनके संरक्षण के प्रति भी ध्यान देना होगा। वृक्षारोपण के लिये जन सहभागिता को जरूरी बताते हुए इसमें सभी संस्थाओं सामाजिक संगठनों से भी सहयोग की भी उन्होंने अपेक्षा की है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड धर्म, अध्यात्म एवं संस्कृति का केन्द्र है। उत्तराखंड जैव विविधताओं वाला राज्य है, यहां का प्राकृतिक सौन्दर्य पर्यटकों को आकर्षित करता है। पर्यावरण संरक्षण के लिए हमारी जिम्मेदारी और अधिक बढ़ जाती है। हम सभी को समर्पित भाव से प्रकृति संरक्षण की दिशा में आगे बढ़ना होगा।

पर्यावरण संरक्षण की दिशा में निरंतर प्रयासों की जरूरत बताते हुए मुख्यमंत्री ने प्रत्येक जनपद में जल स्रोतों एवं गदेरों के पुनर्जीवन एवं संरक्षण के लिए कार्य किए जाने पर भी बल दिया है। नदियों के संरक्षण एवं नदियों के पुनर्जीवन के प्रयास समय की जरूरत है। विकास एवं पर्यावरण में संतुलन के साथ आने वाली पीढ़ी को शुद्ध पर्यावरण मिले, इसके लिए भी पर्यावरण संरक्षण हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे लोक पर्व हमारी सांस्कृतिक विरासत की पहचान है। राज्य की समृद्ध लोक संस्कृति को आगे बढ़ाने के निरंतर प्रयास हो रहे हैं। इसमें हम सबको सामुहिक रूप से जिम्मेदारी निभानी होगी तभी हम अपनी संस्कृति एवं परम्पराओं की जड़ों से जुड पायेंगे।

अभिलेखागार का मुख्यमंत्री ने किया निरीक्षण, खामियां मिलने पर बैठाई एसआईटी जांच

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा उप निबंधक कार्यालय देहरादून व अभिलेखागार का औचक निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान मौके पर मौजूद जिलाधिकारी व अन्य अधिकारियों से की गई चर्चा और अभिलेखागार के निरीक्षण में यह पाया गया कि अभिलेख कक्ष जिसमें कई वर्षों के महत्त्वपूर्ण अभिलेख रखे गए हैं उनका रख-रखाव, सुरक्षा के मानक, नष्ट होने से बचाव के उपाय मानकों के अनुरूप नहीं है। अभिलेख कक्ष में प्रवेश एवं नकल प्राप्त करने की प्रकिया में गम्भीर लापरवाही पाई गई। विक्रय पत्रों के जिल्द, जिसमें पुराने विक्रय पत्रों की प्रतियां सुरक्षित रखी जाती है, में छेड़छाड़ कर भूमि का फर्जीवाड़ा किया जाना बताया गया है।

इस सम्बन्ध में मुख्यमन्त्री पुष्कर सिंह धामी ने निर्देश दिये हैं कि अभिलेखों में की गई जालसाजी की समयबद्ध विस्तृत एवं गहन जाँच हेतु कम से कम तीन सदस्यीय उच्च स्तरीय विशेष जाँच दल (एस०आई०टी०), जिसमें भारतीय प्रशासनिक सेवा का एक वरिष्ठ अधिकारी, निबन्धन विभाग का वरिष्ठ अधिकारी और एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी अथवा अन्य कोई भिज्ञ एवं योग्य व्यक्ति/अधिकारी को सम्मिलित कर गठित कर लिया जाए। जनपद देहरादून में पकड़े गए विक्रय विलेखों के फर्जीवाड़ा से जुड़े अभिलेखों की सुरक्षा के तत्काल कड़े प्रबन्ध सुनिश्चित कर लिए जाएं। उन्होंने कहा कि राज्य में सभी अभिलेखागारों में अभिलेखों के रख-रखाव, अभिलेखों की सुरक्षा अभिलेखों की नकल प्राप्त करने, अभिलेखों में प्रवेश को पूर्णतः नियंत्रित/प्रतिबन्धित करने की मानक प्रक्रिया निर्धारित करते हुए तत्काल प्रभावी कार्यवाही की जाए।

जल संरक्षण एवं जल धाराओं के पुनर्जीवन थीम पर आधारित प्रोग्राम में शामिल हुए सीएम

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हरेला पर्व के अवसर पर अन्तरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम, महाराणा प्रताप स्पोर्ट्स कॉलेज, रायपुर में ‘जल संरक्षण एवं जल धाराओं के पुनर्जीवन’ थीम पर आयोजित कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने पौधे लगाए। मुख्यमंत्री ने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में सराहनीय प्रयास करने वाले स्कूलों एवं वन पंचायतों को सम्मानित भी किया।

मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों को हरेला पर्व की शुभकामनाएं दी और सबके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने कहा कि हरेला पर्व सुख, समृद्धि, शान्ति, पर्यावरण और प्रकृति संरक्षण का प्रतीक है। यह पर्व सामाजिक सद्धभाव का पर्व एवं ऋतु परिवर्तन का भी सूचक है। यह दिवस प्रकृति व मानव के सह अस्तित्व को स्मरण करने व प्रकृति संरक्षण के हमारे प्रण को पुनः दोहराने का दिन है। उत्तराखण्ड प्राकृतिक रूप से समृद्ध राज्य है। हरेला एक ऐसा ही पर्व है, जो हमारी प्रकृति से निकटता को और अधिक प्रगाढ़ बनाता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी को प्रतिज्ञा लेनी होगी कि हम प्राकृतिक धरोहर एवं विरासत को संरक्षित कर भावी पीढ़ी को स्वच्छ पर्यावरण देंगे। इस बार राज्य में हरेला पर्व की थीम जल संरक्षण एवं जल धाराओं का पुनर्जीवन निर्धारित की गई है। उन्होंने जल संरक्षण एवं संवर्द्धन की दिशा में सभी को योगदान देने के लिए अपील की।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केन्द्र सरकार ने सर्कुलर इकोनॉमी पर काफी जोर दिया है। क्योंकि जल संरक्षण के क्षेत्र में भी सर्कुलर इकोनॉमी की बड़ी भूमिका है, जब ट्रीटेड जल को पुनः उपयोग किया जाता है, ताजा जल को संरक्षण किया जाता है तो उससे पूरे इकोसिस्टम को बहुत लाभ होगा। उन्होंने कहा कि राज्य की गैर हिम नदियों का ग्रीष्म कालीन प्रवाह बहुत कम रह गया है, जिसका प्रमुख कारण जलवायु परिवर्तन है। उत्तराखण्ड में अकेले पेयजल सैक्टर में जल की आवश्यकता की गणना की जाये, तो वर्ष 2052 की सम्भावित जल की मांग लगभग 1980 एम.एल.डी. आंकी गयी है, जो कि लगभग 23 क्यूमेक है। राज्य में मांग के सापेक्ष शतही श्रोतों पर आधारित मांग 70 प्रतिशत है, जो कि लगभग 1400 एम.एल.डी. ही है। कई विभागों द्वारा स्प्रिंगशेड सोर्स रिजूनिवेशन, कैचमेन्ट एरिया, सोर्स सस्टेनबलिटी, चाल-खाल, चौक डैम, कन्टूर ट्रैन्च आदि के कार्य कराये जा रहे है, जिसके अच्छे परिणाम भी सामने आये है। ऐसे में पूरे प्रदेश में एक मॉडल प्लान तैयार कर कार्य किये जाने की आवश्यकता है। इंडस्ट्री और खेती दो ऐसे क्षेत्र हैं, जिसमें पानी की आवश्यकता अत्यधिक होती है, इन दोनों क्षेत्रों को मिल कर जल संरक्षण अभियान चलाना होगा और लोगों को जागरूक करना होगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश में पिछले 9 साल से जो भी प्रमुख विकास योजनाएं संचालित हो रही हैं, उन सभी में किसी न किसी रूप से पर्यावरण संरक्षण के साथ ही जल संरक्षण का आग्रह भी है। चाहे स्वच्छ भारत मिशन हो या वेस्ट टू हेल्थ से जुड़े कार्यक्रम हो, अमृत मिशन के तहत शहरों में आधुनिक सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स का निर्माण हो, या सिंगल यूज प्लास्टिक से मुक्ति का अभियान हो या फिर नमामि गंगे अभियान के तहत गंगा स्वच्छता का अभियान हो, पर्यावरण रक्षा और जल संरक्षण के क्षेत्र में हमारे देश के प्रयास बहुआयामी रहे हैं। जल संरक्षण की दिशा में प्रधानमंत्री जी द्वारा देशभर में अमृत सरोवर की शुरुआत की गई है। अमृत सरोवर योजना के तहत जिला स्तर, नगर एवं ग्रामीण क्षेत्रों में जर्जर हो चुके तालाबों का जीर्णाेद्धार कर इन्हें पुनर्जीवित किया जा रहा है।

वन मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि हरेला पर्व के उपलक्ष्य में इस वर्ष प्रदेश में 08 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया है। यह अभियान 15 अगस्त तक चलेगा। वृक्षारोपण के साथ ही उनके संरक्षण की दिशा में विशेष ध्यान दिया जायेगा। जिस सेक्टर में वृक्षों का सक्सेस रेट सबसे अधिक होगा, उस सेक्टर के वन दरोगा को सम्मानित किया जायेगा। 15 अगस्त को 1750 गांवों में 75-75 पेड़ लगाये जायेंगे। वन मंत्री ने कहा कि जल स्रोतों के पुनर्जीवन की दिशा में भी विशेष ध्यान देना होगा। उन्होंने सभी प्रदेशवासियों से अपील की कि पर्यावरण के संरक्षण में सभी को एकजुट होकर कार्य करना होगा। उन्होंने अपील की कि पौधे लगाकर सेल्फी विद प्लांट पोस्ट करें, जिससे हम अपनी भावी पीढ़ी को बता सकें कि हमने पर्यावरण संरक्षण के लिए क्या योगदान दिया।

इस अवसर पर सांसद माला राज्यलक्ष्मी शाह, विधायक उमेश शर्मा काऊ, मेयर सुनील उनियाल गामा, प्रमुख सचिव आर.के सुधांशु, प्रमुख वन संरक्षक (हॉफ) अनूप मलिक एवं वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

विभिन्न प्रजाति के 51 पौधों का सीएम ने किया रोपण

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हरेला पर्व के अवसर पर मुख्यमंत्री आवास परिसर में पौधरोपण किया। उन्होंने आम की पूषा श्रेष्ठ प्रजाति का पौधा लगाया। मुख्यमंत्री ने कहा कि हरेला प्रकृति के संरक्षण एवं संवर्द्धन का पर्व है। हरेला पर्व के उपलक्ष्य में प्रदेश में सामाजिक संगठनों, संस्थाओं एवं विभागों के माध्यम से व्यापक स्तर से पौधारोपण किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा जल संरक्षण एवं जल धाराओं के पुनर्जीवन की दिशा में राज्य में अनेक प्रयास किए जा रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा देश में जल संरक्षण और संवर्द्धन के लिए सभी को आगे आने का आवाहन किया गया है। राज्य में इस दिशा में तेजी से कार्य हो रहे हैं। राज्य में 1200 से अधिक अमृत सरोवर बनाए गए हैं। इस दिशा में आगे भी लगातार कार्य होंगे।

हरेला पर्व के अवसर पर गीता पुष्कर धामी एवं कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने भी वृक्षारोपण किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री आवास में विभिन्न प्रजातियों के 51 पौधे लगाए गए।

इस अवसर पर अपर सचिव रणवीर सिंह चौहान, मुख्य वन संरक्षक वन पंचायत डॉ. पराग मधुकर धकाते, मुख्य उद्यान अधिकारी डॉ. मीनाक्षी जोशी, उद्यान प्रभारी दीपक पुरोहित उपस्थित थे।

वनवासी समुदाय के छात्रों ने की मुख्यमंत्री से मुलाकात

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय में पूर्व राज्यसभा सांसद तरुण विजय के नेतृत्व में वनवासी विद्यालय दून संस्कृति स्कूल में अध्ययनरत वनराजी समुदाय के छात्रों ने भेंट की। मुख्यमंत्री ने सभी बच्चों को पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम द्वारा लिखित पुस्तक ’अग्नि की उड़ान’ भेंट की। मुख्यमंत्री ने कहा कि जनजाति समाज के बच्चों का भविष्य बेहतर हो इसके लिए जनजाति कल्याण विभाग द्वारा लगातार प्रयास किये जा रहे हैं।
इस अवसर पर यूकॉस्ट के महानिदेशक प्रो. दुर्गेश पंत भी उपस्थित थे।

सीएम धामी ने देहरादून रजिस्ट्रार ऑफिस का औचक निरीक्षण किया

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देहरादून कलेक्ट्रेट स्थित रजिस्ट्रार ऑफिस का औचक निरीक्षण किया। उन्होंने रजिस्ट्रार ऑफिस में संचालित जमीनों की रजिस्ट्री की प्रक्रियाओं एवं रिकॉर्ड रूम का अवलोकन कर जिलाधिकारी देहरादून को निर्देश दिये कि जमीन के दस्तावेजों में भविष्य में किसी प्रकार की गड़बड़ी न हो इसकी कारगर व्यवस्था बनाई जाए। उन्होने जिलाधिकारी को निर्देश दिये कि भूमि के दस्तावेजों में फर्जीवाड़ा करने वालों के विरूद्ध सख्त कारवाई की जाए, ताकि भविष्य में इसकी पुनरावृत्ति न हो। इसके लिए व्यवस्थाओं में जो भी सुधारात्मक कदम उठाये जाने हैं, वो उठाये जाएं।

मुख्यमंत्री ने जिलाधिकारी देहरादून को जिले में जमीनों के रिकॉर्ड की सुरक्षा के दृष्टिगत रजिस्ट्रार ऑफिस की सभी व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने के निर्देश दिये और कार्यालय रिकार्ड के मेंटेन के लिए समुचित व्यवस्था बनाई जाए। उन्होंने कहा कि जमीनों के फर्जीवाड़ा की गहनता से जाँच की जाए और दोषियों पर इतनी सख्त कारवाई की जाए, कि भविष्य में इस तरह के फर्जीवाड़ा करने की कोई सोच भी न सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में कहीं भी जमीनों से संबंधित कोई भी फर्जीवाड़े की शिकायते आयेंगी तो उनकी जाँच कर दाषियों के विरूद्ध कारवाई की जायेगी।
इस अवसर पर जिलाधिकारी देहरादून सोनिका एवं अपर सचिव मुख्यमंत्री जगदीश चंद्र काण्डपाल भी उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री आवास से मौखिक निर्देश के लिए अधिकारी नियुक्त

मुख्यमंत्री सचिवालय अथवा आवास कार्यालय से आकस्मिकता एवं अपरिहार्य परिस्थितियों में दूरभाष या मौखिक रूप से दिए जाने वाले निर्देशों हेतु अधिकारियों को अधिकृत किया गया है। इसके लिए अपर मुख्य सचिव राधा रतूड़ी की ओर से आदेश जारी किए गए हैं।

मुख्यमंत्री सचिवालय अथवा आवास कार्यालय से किसी भी प्रकार के निर्देश- अनुदेश सामान्यतः लिखित रूप से प्रसारित किए जाते हैं। अपरिहार्य परिस्थितियों में एवं आकस्मिकता की स्थिति में उक्त कार्यालयों से मुख्यमंत्री के किसी भी निर्देश को दूरभाष के माध्यम से या मौखिक रूप से अवगत कराए जाने की आवश्यकता पड़ने पर, इस हेतु अपर मुख्य सचिव, मुख्यमंत्री के अतिरिक्त जिन अधिकारियों/महानुभावों को प्राधिकृत किये जाने के निर्देश हैं, इनमें सचिव, मुख्यमंत्री, उत्तराखण्ड शासन, अपर सचिव, मुख्यमंत्री, उत्तराखण्ड शासन, दिवस अधिकारी ( जिस तिथि/दिवस को दिवस अधिकारी के रूप में दायित्वों का निवर्हन किया जा रहा हो। ) तथा मुख्यमंत्री द्वारा प्राधिकृत अन्य सामाजिक व्यक्ति (जिसके सम्बन्ध में पृथक से अवगत कराया जाएगा।)