वैदिक मंत्रोच्चार के साथ खुले भगवान श्री बद्रीनाथ के कपाट, आस्था और उल्लास से गूंजा धाम

भगवान श्री बद्रीनाथ के कपाट गुरुवार प्रातः 6 बजकर 15 मिनट पर विधिविधान एवं वैदिक मंत्रोच्चार के साथ ग्रीष्मकाल हेतु श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोल दिए गए। कपाट खुलते ही पूरा बद्रीनाथ धाम भक्ति और श्रद्धा के भाव से सराबोर हो उठा। इस पावन अवसर पर देश-विदेश से पहुंचे लगभग 15 हजार श्रद्धालुओं ने भगवान बद्री विशाल एवं अखंड ज्योति के दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित किया।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कपाट उद्घाटन के शुभ अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम से पहली महाभिषेक पूजा संपन्न कर देश एवं प्रदेश की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की। इस दौरान मुख्यमंत्री ने मंदिर परिसर स्थित लक्ष्मी मंदिर, गणेश मंदिर तथा आदि गुरु शंकराचार्य गद्दी सहित अन्य मंदिरों में विधिवत पूजा-अर्चना की।

मुख्यमंत्री ने धाम पहुंचे तीर्थयात्रियों का आत्मीय स्वागत एवं अभिनंदन करते हुए यात्रा व्यवस्थाओं का फीडबैक भी लिया। उन्होंने कहा कि चारधाम यात्रा को सुरक्षित, सुगम एवं सुव्यवस्थित बनाने के लिए राज्य सरकार द्वारा व्यापक स्तर पर तैयारियां की गई हैं। श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा और बेहतर अनुभव सुनिश्चित करने हेतु हर स्तर पर व्यवस्थाओं को सुदृढ़ किया गया है।

’मुख्यमंत्री ने देश विदेश से आने वाले सभी श्रद्धालुओं से हरित एवं स्वच्छ चारधाम यात्रा में सहयोग करने का आह्वान करते हुए पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया।

चारधाम यात्रा के शुभारंभ के साथ ही बद्रीनाथ धाम में आस्था, परंपरा और सुव्यवस्थित व्यवस्थाओं का अद्भुत संगम देखने को मिला, जो श्रद्धालुओं के लिए एक दिव्य और यादगार अनुभव बनेगा।

लोक संस्कृति की झलकरू जागरों पर झूम उठा बद्रीनाथ धाम

कपाट खुलने के इस ऐतिहासिक अवसर पर माणा एवं बामणी गांव की महिलाओं ने पारंपरिक जागरों के साथ मंदिर प्रांगण में झुमैलो नृत्य प्रस्तुत किया, जिससे संपूर्ण वातावरण लोक संस्कृति और आस्था के रंग में रंग गया। वहीं देश के विभिन्न हिस्सों से आए श्रद्धालुओं ने भी भजन-कीर्तन कर अपनी श्रद्धा अर्पित की।

भंडारे का शुभारंभ, श्रद्धालुओं के साथ किया प्रसाद ग्रहण
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने धाम में संचालित भंडारे का रिबन काटकर शुभारंभ किया तथा श्रद्धालुओं के साथ प्रसाद ग्रहण किया। उन्होंने भंडारा संचालकों से संवाद कर व्यवस्थाओं की जानकारी ली और मानव सेवा ईश्वर सेवा उत्थान समिति द्वारा संचालित विशाल भंडारे की सराहना की।

इस अवसर पर जिलाधिकारी गौरव कुमार, पुलिस अधीक्षक सुरजीत सिंह पंवार, बीकेटीसी के सीईओ विशाल मिश्रा, उपाध्यक्ष ऋषि प्रसाद सती, रावल अमरनाथ नंबूदरी, मुख्य प्रशासनिक अधिकारी गिरीश चौहान, मंदिर अधिकारी राजेंद्र चौहान, नायब रावल सूर्यराग नंबूदरी, धर्माधिकारी स्वयंबर सेमवाल, वेदपाठी रविंद्र भट्ट, आचार्य वाणी विलास डिमरी सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

चारधाम यात्रा की गरिमा से खिलवाड़ करने वालों पर सख्त कार्रवाई जारी, सोशल मीडिया पर हर समय निगरानी

चारधाम यात्रा के संबंध में भ्रामक एवं तथ्यहीन वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित करने के मामले में उत्तराखंड पुलिस द्वारा सख्त कार्रवाई की गई है। इस क्रम में थाना सोनप्रयाग में संबंधित व्यक्ति के विरुद्ध प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज कर विधिक कार्यवाही प्रारंभ कर दी गई है।

उत्तराखंड पुलिस ने स्पष्ट किया है कि चारधाम यात्रा पूरी तरह से सुचारू रूप से संचालित हो रही है तथा श्रद्धालु व्यवस्थित ढंग से दर्शन कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर प्रसारित की जा रही भ्रामक एवं अप्रमाणित सूचनाएं न केवल जनमानस में भ्रम उत्पन्न करती हैं, बल्कि यात्रा व्यवस्थाओं को भी प्रभावित कर सकती हैं।

पुलिस मुख्यालय के अनुसार, 4-5 अन्य संदिग्ध वीडियो की भी पुलिस टीम द्वारा गहन जांच की जा रही है। जांच के उपरांत दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध भी नियमानुसार कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

उत्तराखंड पुलिस द्वारा यह भी अवगत कराया गया है कि चारधाम यात्रा के दौरान सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की 24Û7 निगरानी की जा रही है, ताकि किसी भी प्रकार की अफवाह या भ्रामक सूचना का समय रहते संज्ञान लेकर उचित कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।

पुलिस ने आमजन से अपील की है कि वे किसी भी प्रकार की अप्रमाणित अथवा भ्रामक जानकारी को साझा करने से बचें तथा केवल आधिकारिक स्रोतों से प्राप्त सूचनाओं पर ही विश्वास करें। अफवाह फैलाने वालों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

दीक्षांत समारोह वर्षों के अनुशासित प्रयासों और त्याग की परिणति के साथ समाज के प्रति एक बड़ी जिम्मेदारी की शुरुआत भीः सीपी राधाकृष्णन

भारत के उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने आज ऋषिकेश स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के छठे दीक्षांत समारोह को संबोधित किया। ऋषिकेश को चिंतन और उपचार का वैश्विक केंद्र होने के साथ-साथ हिमालय का प्रवेश द्वार के रूप में आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व देते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि ऐसा वातावरण दीक्षांत समारोह की गंभीरता को और भी गहरा कर देता है।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि दीक्षांत समारोह न केवल वर्षों के अनुशासित प्रयासों और त्याग की परिणति है, बल्कि समाज और राष्ट्र के प्रति एक बड़ी जिम्मेदारी की शुरुआत भी है। उन्होंने स्नातकों से समर्पण और उद्देश्य की भावना के साथ अपने पेशेवर कर्तव्यों को निभाने का आग्रह किया।

कोविड-19 महामारी से उत्पन्न चुनौतियों पर विचार करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने सतत नवाचार और प्रतिबद्धता का प्रदर्शन किया है। उन्होंने भारत के व्यापक टीकाकरण अभियान पर प्रकाश डालते हुए कहा कि 14 करोड़ से अधिक नागरिकों को मुफ्त टीके लगाए गए, जिससे स्वास्थ्य सेवा तक समान पहुंच सुनिश्चित हुई। उन्होंने कहा कि भारतीय वैज्ञानिकों ने लाभ के लिए नहीं, बल्कि मानवता के कल्याण के लिए टीके विकसित किए हैं।

उपराष्ट्रपति ने भारत की वैक्सीन मैत्री पहल के माध्यम से वैश्विक जिम्मेदारी को भी रेखांकित किया, जिसके तहत 100 से अधिक देशों को टीके उपलब्ध कराए गए। उन्होंने कहा कि यह पहल ‘‘वसुधैव कुटुंबकम’’ की भावना को दर्शाती है और एक दयालु और जिम्मेदार वैश्विक भागीदार के रूप में भारत की भूमिका को मजबूत करती है।

स्वास्थ्य सेवा अवसंरचना के विस्तार पर प्रकाश डालते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि पिछले एक दशक में देश भर में स्थापित नए एम्स संस्थानों ने गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा और चिकित्सा शिक्षा तक पहुंच को मजबूत किया है, उन्होंने कहा कि सुशासन लोगों की जरूरतों को समझने और उनकी सेवा करने में निहित है।

एम्स ऋषिकेश की प्रशंसा करते हुए उन्होंने कहा कि यह संस्थान नैदानिक देखभाल, शैक्षणिक क्षमता, अनुसंधान, नवाचार और सामाजिक प्रतिबद्धता के क्षेत्र में उत्कृष्टता का एक आदर्श प्रस्तुत कर रहा है। उन्होंने विशेष रूप से टेलीमेडिसिन पहलों की सराहना करते हुए कहा कि स्वास्थ्य सेवा को अस्पताल परिसरों से आगे बढ़कर दूरस्थ और कम सुविधा प्राप्त आबादी तक पहुंचना चाहिए।

उपराष्ट्रपति ने हेली एम्बुलेंस सेवाओं और चार धाम यात्रा के दौरान तथा दूरस्थ क्षेत्रों में दवा वितरण के लिए ड्रोन के उपयोग जैसी नवोन्मेषी स्वास्थ्य सेवाओं की भी प्रशंसा की और इन्हें स्वास्थ्य सेवा वितरण में लंबे समय से चली आ रही चुनौतियों का प्रभावी समाधान बताया।

उपराष्ट्रपति ने दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे सहित क्षेत्र में अवसंरचना के तीव्र विकास पर प्रकाश डाला। उन्होंने समावेशी विकास को बढ़ावा देने, बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच में सुधार लाने के लिए मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड सरकार के प्रयासों की सराहना की।

उपराष्ट्रपति ने इस बात पर जोर दिया कि स्वास्थ्य सेवा एक सार्वजनिक जिम्मेदारी है और राष्ट्र निर्माण में चिकित्सा पेशेवरों की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने डिग्री प्राप्त करने वाले डॉक्टरों से निवारक देखभाल, ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंच, अनुसंधान और नवाचार के माध्यम से योगदान देने और सहानुभूति, ईमानदारी और सेवा के मूल्यों का पालन करने का आग्रह किया।

इस अवसर पर राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) ने उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन का देवभूमि उत्तराखण्ड में हार्दिक स्वागत करते हुए विश्वास जताया कि उनके मार्गदर्शन से युवा चिकित्सकों को राष्ट्रसेवा की नई ऊर्जा एवं दिशा प्राप्त होगी।

राज्यपाल ने कहा कि दीक्षांत समारोह विद्यार्थियों की साधना, समर्पण और सेवा भाव का उत्सव है तथा यह वह महत्वपूर्ण क्षण है, जब वर्षों की कठिन मेहनत एक नई जिम्मेदारी में परिवर्तित होती है। उन्होंने उपाधि प्राप्त करने वाले सभी विद्यार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि उनकी सफलता में माता-पिता के त्याग, गुरुजनों के मार्गदर्शन और राष्ट्र की अपेक्षाओं का महत्वपूर्ण योगदान है।

उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में चिकित्सा का क्षेत्र तेजी से बदल रहा है, जहाँ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल हेल्थ और आधुनिक अनुसंधान पद्धतियाँ स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी बना रही हैं। उन्होंने कहा कि एम्स ऋषिकेश इस दिशा में एक महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है, जो स्वास्थ्य तंत्र को भविष्य के लिए तैयार कर रहा है।

राज्यपाल ने युवा चिकित्सकों को संबोधित करते हुए कहा कि चिकित्सा केवल एक पेशा नहीं, बल्कि सेवा और संवेदनशीलता का क्षेत्र है। मरीज केवल उपचार ही नहीं, बल्कि विश्वास और आशा लेकर चिकित्सक के पास आता है। ऐसे में चिकित्सकों का व्यवहार, सहानुभूति और समर्पण ही मरीज को सुरक्षा और विश्वास प्रदान करता है।

उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड के पर्वतीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच अभी भी चुनौतीपूर्ण है और उन्होंने युवा चिकित्सकों से अपेक्षा है कि वे इन चुनौतियों को अवसर में परिवर्तित करते हुए दूरस्थ क्षेत्रों में सेवा प्रदान करें तथा समाज में विश्वास का संचार करें। उन्होंने आह्वान किया कि वे अपने जीवन में नैतिकता, ईमानदारी और सेवा के मूल्यों को सर्वाेपरि रखें तथा रोगी के विश्वास को अपनी सबसे बड़ी पूंजी मानें।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उपाधि प्राप्त करने वाले सभी छात्र-छात्राओं को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने कहा कि यह अवसर विद्यार्थियों के जीवन में एक नए अध्याय की शुरुआत है और चिकित्सा क्षेत्र में उनका योगदान समाज एवं राष्ट्र निर्माण में अत्यंत महत्वपूर्ण रहेगा।

मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित देश के उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन का देवभूमि उत्तराखंड की जनता की ओर से स्वागत एवं अभिनंदन किया। उन्होंने उपराष्ट्रपति के सादगीपूर्ण व्यक्तित्व, जनसेवा के प्रति समर्पण और प्रेरणादायी जीवन यात्रा की सराहना करते हुए कहा कि उनका मार्गदर्शन युवा चिकित्सकों के लिए प्रेरणास्रोत है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि चिकित्सा क्षेत्र केवल एक पेशा नहीं, बल्कि मानवता की सेवा का सर्वाेच्च माध्यम है, जिसे निष्ठा, संवेदनशीलता और करुणा के साथ निभाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा स्थापित एम्स ऋषिकेश आज प्रदेश के लिए एक महत्वपूर्ण जीवन रक्षक संस्थान के रूप में स्थापित हो चुका है। यहां कैंसर उपचार, न्यूरोसर्जरी, रोबोटिक सर्जरी और जॉइंट रिप्लेसमेंट जैसी अत्याधुनिक सुविधाएँ उपलब्ध हैं। साथ ही, हेली एम्बुलेंस सेवा राज्य के दुर्गम क्षेत्रों में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऊधमसिंह नगर में एम्स ऋषिकेश के सैटेलाइट सेंटर का निर्माण कार्य प्रगति पर है, जिससे कुमाऊं क्षेत्र की जनता को भी उच्च स्तरीय चिकित्सा सुविधाओं का लाभ मिलेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में राज्य सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिए प्रतिबद्ध है। प्रदेश के प्रत्येक जनपद में मेडिकल कॉलेज की स्थापना, टेलीमेडिसिन नेटवर्क का विस्तार, जन औषधि केंद्रों के माध्यम से सस्ती दवाइयों की उपलब्धता तथा निःशुल्क पैथोलॉजिकल जांच जैसी योजनाओं पर तेजी से कार्य किया जा रहा है।

समारोह केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने उपाधि प्राप्त कर रहे डॉक्टरों को संबोधित करते हुए कहा कि चिकित्सा पेशा केवल करियर नहीं, बल्कि मानव सेवा का सर्वाेच्च माध्यम है। उन्होंने मरीजों के विश्वास को बनाए रखने और हर परिस्थिति में उनके हित को सर्वाेपरि रखने का आह्वान किया, साथ ही नैतिकता और ईमानदारी को अपने कार्य का आधार बनाने पर बल दिया।

उन्होंने कहा कि चिकित्सा क्षेत्र में निरंतर हो रहे बदलावों के बीच डॉक्टरों के लिए आजीवन सीखते रहना आवश्यक है, ताकि बेहतर उपचार सुनिश्चित किया जा सके। साथ ही, मरीजों के साथ प्रभावी संवाद को भी उन्होंने अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि इससे विश्वास और उपचार के परिणाम बेहतर होते हैं।

इस अवसर पर पूर्व मुख्यमंत्री एवं सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत, सांसद नरेश बंसल, महेंद्र भट्ट, एम्स ऋषिकेश के अध्यक्ष प्रो. राज बहादुर, एम्स ऋषिकेश की कार्यकारी निदेशक प्रो. मीनू सिंह, डीन (अकादमिक) प्रो. सौरभ, संकाय सदस्यों, छात्रों और अन्य गणमान्य व्यक्तियों सहित कई गणमान्य लोगों ने प्रतिभाग किया।

उत्तराखंडः प्रधानमंत्री ने फिर व्यक्त की बाबा केदार में अटूट श्रद्धा

केदारनाथ धाम के कपाट खुलने के दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बार फिर बाबा केदार में अपनी गहन आस्था प्रकट की है। प्रधानमंत्री ने देर शाम सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए बाबा केदार की धरती पर पूर्व में बिताए पलों की भावुक तस्वीरों को जारी किया है।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने पूर्व के केदारनाथ प्रवास की स्मृतियों को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर तस्वीरों के माध्यम से साझा की हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा इन तस्वीरों को साझा करना उस आध्यात्मिक संबंध की अभिव्यक्ति है, जो भगवान शिव के इस ज्योतिर्लिंग और इस तपोभूमि से जुड़ा हुआ है। केदारनाथ धाम, जहां भक्ति, तप और श्रद्धा का संगम होता है, वहीं से प्रधानमंत्री का यह भावपूर्ण संदेश करोड़ों श्रद्धालुओं के हृदय को स्पर्श कर रहा है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि आध्यात्मिक दृष्टि से देखा जाए तो प्रधानमंत्री का यह संवाद करोड़ों देशवासियों के मार्गदर्शन के साथ ही चारधाम यात्रा को आत्मिक जागरण यात्रा के रूप में भी स्थापित करता है।
बाबा केदार के धाम में गूंजता “हर हर महादेव” का उद्घोष, प्रधानमंत्री की इस श्रद्धाभिव्यक्ति के साथ और अधिक भावपूर्ण हो उठा है, और देशभर के श्रद्धालुओं में भक्ति का उत्साह नई ऊंचाइयों पर पहुंच रहा है।
इससे पूर्व के अपने संदेश में प्रधानमंत्री ने चारधाम यात्रा को भारत की सांस्कृतिक एकात्मता का आधार बताया था। उन्होंने तीर्थयात्रियों से ‘डिजिटल उपवास’ रखते हुए आत्मिक शांति का अनुभव करने और पांच संकल्प स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण, सेवा, ‘वोकल फॉर लोकल’ तथा अनुशासन का पालन करने का आग्रह किया।

बद्रीनाथ में सीएम ने पीपीटी प्रस्तुतीकरण के माध्यम से कार्यों की प्रगति का लिया विस्तृत जायजा

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी आज चमोली स्थित बीआरओ गेस्ट हाउस पहुंचे, जहां उन्होंने बद्रीनाथ धाम मास्टर प्लान के अंतर्गत संचालित विभिन्न विकास कार्यों की विस्तृत एवं गहन समीक्षा की। इस अवसर पर आयोजित बैठक में पीपीटी प्रस्तुतीकरण के माध्यम से धाम में चल रहे निर्माण कार्यों, उनकी वर्तमान प्रगति, तकनीकी पहलुओं तथा आगामी कार्ययोजना की विस्तृत जानकारी मुख्यमंत्री को दी गई।

बैठक के दौरान अधिशासी अभियंता पीडब्ल्यूडी (पीआईयू) योगेश मनराल ने विभिन्न परियोजनाओं की स्थिति, अब तक की उपलब्धियों तथा निर्धारित समयसीमा के सापेक्ष प्रगति से मुख्यमंत्री को अवगत कराया। उन्होंने बताया कि मास्टर प्लान के अंतर्गत अनेक महत्वपूर्ण कार्य तेजी से प्रगति पर हैं, जिनमें आधारभूत ढांचे का सुदृढ़ीकरण, यात्री सुविधाओं का विस्तार, आवागमन व्यवस्था में सुधार तथा आधुनिक सुविधाओं का विकास शामिल है। मुख्यमंत्री ने प्रस्तुतीकरण को देखते हुए विभिन्न बिंदुओं पर विस्तार से जानकारी ली और आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि बद्रीनाथ धाम मास्टर प्लान के अंतर्गत किए जा रहे सभी कार्य प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी विजन के अनुरूप संचालित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस योजना का मुख्य उद्देश्य बद्रीनाथ धाम को एक भव्य, दिव्य, सुरक्षित और अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त तीर्थस्थल के रूप में विकसित करना है, ताकि देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को उच्च स्तरीय सुविधाएं उपलब्ध हो सकें और उन्हें एक सुव्यवस्थित एवं सुखद अनुभव प्राप्त हो।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी कार्यों को समयबद्ध तरीके से पूर्ण करने के लिए समन्वित प्रयास किए जाएं तथा प्रत्येक परियोजना की नियमित समीक्षा सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि कार्यों की गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा और निर्माण कार्यों में उच्च मानकों का पालन अनिवार्य रूप से किया जाए। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि परियोजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता बनाए रखते हुए तकनीकी दक्षता का पूर्ण उपयोग किया जाए, ताकि कार्यों में तेजी और गुणवत्ता दोनों सुनिश्चित हो सकें।

उन्होंने आगे निर्देश दिए कि बद्रीनाथ धाम में विकसित की जा रही सभी सुविधाओं में तीर्थयात्रियों की सुरक्षा, सुविधा और सुगमता को सर्वाेच्च प्राथमिकता दी जाए। यात्री आवागमन, आवास, स्वच्छता, पेयजल, पार्किंग एवं अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने के लिए प्रभावी कार्ययोजना तैयार की जाए और उसका समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि धाम के विकास कार्यों के दौरान पारंपरिक स्वरूप, धार्मिक आस्था और प्राकृतिक सौंदर्य का विशेष ध्यान रखा जाए, ताकि विकास और विरासत के बीच संतुलन बना रहे।

मुख्यमंत्री ने बैठक के दौरान अधिकारियों को यह भी निर्देश दिए कि मास्टर प्लान के अंतर्गत आने वाले सभी कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग की जाए और किसी भी प्रकार की बाधा या विलंब की स्थिति में त्वरित समाधान सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि सभी विभाग आपसी समन्वय के साथ कार्य करें, ताकि परियोजनाएं निर्धारित समयसीमा के भीतर पूर्ण हो सकें और बद्रीनाथ धाम का समग्र विकास तेजी से आगे बढ़ सके।

मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि राज्य सरकार के सतत प्रयासों, अधिकारियों की प्रतिबद्धता और केंद्र सरकार के सहयोग से बद्रीनाथ धाम मास्टर प्लान के अंतर्गत सभी कार्य सफलतापूर्वक पूर्ण होंगे और यह धाम भविष्य में एक आदर्श, भव्य और विश्वस्तरीय तीर्थस्थल के रूप में अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित करेगा।

सीएम ने बद्रीनाथ मास्टर प्लान की समीक्षा कर विकास कार्यों की गुणवत्ता और समयसीमा पर पूर्ण करने के दिए सख्त निर्देश

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बद्रीनाथ धाम पहुंचकर ग्राउंड जीरो पर उतरते हुए मास्टर प्लान के अंतर्गत संचालित विभिन्न विकास कार्यों का व्यापक एवं गहन स्थलीय निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने निर्माण कार्यों की प्रगति, गुणवत्ता, समयबद्धता तथा व्यवस्थाओं की वास्तविक स्थिति का बारीकी से जायजा लिया। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों के साथ विभिन्न स्थलों का भ्रमण करते हुए मौके पर ही आवश्यक दिशा-निर्देश दिए और कार्यों की वर्तमान स्थिति पर संतोष व्यक्त करने के साथ-साथ उन्हें और अधिक प्रभावी एवं तीव्र गति से आगे बढ़ाने पर जोर दिया।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट रूप से निर्देशित किया कि बद्रीनाथ धाम से जुड़े सभी विकास कार्य जिलाधिकारी की प्रत्यक्ष निगरानी में तय समयसीमा के भीतर उच्च गुणवत्ता के साथ पूर्ण किए जाएं। उन्होंने कहा कि यह परियोजना केवल एक निर्माण कार्य नहीं, बल्कि आस्था, श्रद्धा और उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा एक अत्यंत महत्वपूर्ण अभियान है, इसलिए इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही या गुणवत्ता में कमी स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रत्येक कार्य की नियमित मॉनिटरिंग की जाए तथा कार्यों की प्रगति की समीक्षा समय-समय पर की जाए, ताकि किसी भी प्रकार की देरी या बाधा को तुरंत दूर किया जा सके।

निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने बीआरओ बाईपास रोड, लूप रोड, लेक, आईएसबीटी, सिविक एमिनिटी भवन, टीआईसीसी एवं अराइवल प्लाजा जैसे पूर्ण हो चुके महत्वपूर्ण कार्यों का भी जायजा लिया। उन्होंने इन परियोजनाओं के शीघ्र हस्तांतरण हेतु अग्रिम कार्यवाही सुनिश्चित करने के निर्देश देते हुए कहा कि इन सुविधाओं का लाभ तीर्थयात्रियों और स्थानीय लोगों को जल्द से जल्द मिलना चाहिए। मुख्यमंत्री ने यह भी निर्देश दिए कि हस्तांतरण की प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और समयबद्ध बनाया जाए, ताकि किसी प्रकार की प्रशासनिक देरी न हो।

मुख्यमंत्री ने संबंधित अधिकारियों से इन सभी परियोजनाओं के संचालन एवं रखरखाव की ठोस कार्ययोजना तैयार करने को कहा, जिससे दीर्घकालिक रूप से इन परिसंपत्तियों की गुणवत्ता और उपयोगिता बनी रहे। उन्होंने कहा कि बद्रीनाथ धाम में किए जा रहे विकास कार्यों का उद्देश्य केवल आधारभूत ढांचे का निर्माण नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं को एक सुव्यवस्थित, सुरक्षित और आधुनिक सुविधाओं से युक्त तीर्थ अनुभव प्रदान करना है।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से यह भी जोर दिया कि सभी कार्यों में पर्यावरणीय संतुलन और स्थानीय पारिस्थितिकी का संरक्षण प्राथमिकता में रखा जाए। उन्होंने निर्माण एजेंसियों को निर्देशित किया कि कार्य करते समय स्वच्छता, हरित मानकों और सतत विकास के सिद्धांतों का पालन सुनिश्चित किया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि बद्रीनाथ धाम की पवित्रता और प्राकृतिक सौंदर्य को अक्षुण्ण रखते हुए विकास कार्यों को आगे बढ़ाना राज्य सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता है।

मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि सभी संबंधित विभागों के समन्वित प्रयासों और सतत निगरानी से बद्रीनाथ धाम मास्टर प्लान के अंतर्गत संचालित कार्य समय पर पूर्ण होंगे और आने वाले समय में यह धाम देश-विदेश के श्रद्धालुओं के लिए एक आदर्श, भव्य और सुविधासंपन्न तीर्थस्थल के रूप में स्थापित होगा।

शत-प्रतिशत “लखपति दीदी” गांव माणा बना आत्मनिर्भरता का मॉडलः धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भारत के प्रथम सीमांत गांव माणा पहुंचकर क्षेत्र का भ्रमण किया तथा वहां आए श्रद्धालुओं एवं स्थानीय जनता से आत्मीय संवाद किया। इस अवसर पर उन्होंने चारधाम यात्रा को सुरक्षित, सुखद एवं प्लास्टिक मुक्त हरित यात्रा बनाने की अपील करते हुए सभी से पर्यावरण संरक्षण में सहयोग देने का आग्रह किया। मुख्यमंत्री के आगमन पर माणा गांव की महिलाओं ने पारंपरिक मांगलगीत गाकर एवं स्थानीय उत्पाद भेंट कर उनका भव्य स्वागत किया। मुख्यमंत्री ने इस आत्मीय स्वागत के लिए ग्रामीण महिलाओं का आभार व्यक्त किया और उनकी परंपराओं एवं संस्कृति की सराहना की।

इस दौरान मुख्यमंत्री ने गांव की शत-प्रतिशत “लखपति दीदियों” से मुलाकात कर उनके कार्यों की सराहना की। उन्होंने महिलाओं द्वारा तैयार किए जा रहे स्थानीय उत्पादों को गुणवत्तापूर्ण बताते हुए कहा कि ये उत्पाद न केवल स्थानीय आजीविका को सशक्त कर रहे हैं, बल्कि उत्तराखंड की पहचान को भी मजबूत कर रहे हैं। उन्होंने चारधाम यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं से अपील की कि वे स्थानीय उत्पादों की खरीद कर क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करें। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सीमांत गांवों के विकास को नई दिशा मिली है और जो गांव पहले “अंतिम गांव” कहे जाते थे, उन्हें अब “प्रथम गांव” की संज्ञा देकर उनके समग्र विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

उन्होंने आगे कहा कि वाइब्रेंट विलेज योजना के तहत उत्तराखंड के सीमांत गांवों में आधारभूत सुविधाओं का तेजी से विस्तार किया जा रहा है, जिससे इन क्षेत्रों में रोजगार, पर्यटन और आजीविका के नए अवसर सृजित हो रहे हैं। माणा गांव सहित अन्य सीमांत क्षेत्रों में हो रहे विकास कार्य प्रदेश के संतुलित और समावेशी विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि राज्य सरकार के निरंतर प्रयासों और केंद्र सरकार के सहयोग से सीमांत गांव विकास की नई ऊंचाइयों को प्राप्त करेंगे और आत्मनिर्भर उत्तराखंड के निर्माण में अहम भूमिका निभाएंगे।

ग्राम पंचायत माणा, विकासखण्ड ज्योतिर्मठ, जनपद चमोली, आज स्वयं सहायता समूहों और “लखपति दीदी” पहल के माध्यम से एक आदर्श मॉडल के रूप में उभर कर सामने आया है। यहां कुल 12 स्वयं सहायता समूह सक्रिय हैं, जिनसे 82 महिलाएं जुड़ी हुई हैं। ग्राम में एक ग्राम संगठन “घुंघटी महिला ग्राम संगठन” तथा एक क्लस्टर स्तरीय संगठन “योगबंदी क्लस्टर स्तरीय संगठन” कार्यरत है और विशेष बात यह है कि यहां सभी 82 महिलाएं “लखपति दीदी” के रूप में स्थापित हो चुकी हैं, जिससे माणा उत्तराखंड का प्रथम शत-प्रतिशत लखपति दीदी गांव बन गया है।

ग्राम की महिलाएं स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से पारंपरिक एवं गैर-कृषि कार्यों को बढ़ावा देते हुए आजीविका संवर्धन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। वे ऊनी वस्त्र, हैंडलूम, हैंडीक्राफ्ट उत्पाद, फर्नीचर, टोकरी निर्माण, दाल, कालीन, पापड़, मसाले तथा भोजनालय संचालन जैसे विविध कार्यों में संलग्न हैं और इन उत्पादों का विपणन कर अपनी आय में निरंतर वृद्धि कर रही हैं। इसके अतिरिक्त कृषि, पशुपालन, डेयरी, होमस्टे, मत्स्य पालन, मुर्गी पालन, मशरूम उत्पादन, खाद्य प्रसंस्करण तथा लघु एवं कुटीर उद्योगों के माध्यम से भी महिलाएं स्वरोजगार के अवसर विकसित कर रही हैं। स्थानीय उत्पादों को सरस मॉल एवं विभिन्न स्टॉलों के माध्यम से बाजार उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनने में सहायता मिल रही है और वे “लखपति दीदी” योजना से लाभान्वित हो रही हैं।

माणा गांव आज महिला सशक्तिकरण, आत्मनिर्भरता और सीमांत क्षेत्र के समग्र विकास का एक उत्कृष्ट उदाहरण बनकर उभरा है, जहां सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और स्थानीय महिलाओं के परिश्रम ने विकास की एक नई मिसाल प्रस्तुत की है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चारधाम यात्रा के संचालन को शुभकामना

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चारधाम यात्रा शुरु होने पर देशवासियों को शुभकामना संदेश देते हुए, उत्तराखंड आने वाले तीर्थयात्रियों से पांच संकल्पों का पालन करने का आग्रह किया है।
केदारनाथ धाम के कपाट खुलने पर प्रेषित अपने संदेश में प्रधानमंत्री ने कहा कि – देवभूमि उत्तराखंड की पावन धरती पर चारधाम यात्रा का शुभारंभ हो गया है। उन्होंने कहा कि बाबा केदार के दर्शन सहित चारों धामों की यह पावन यात्रा भारत की सनातन सांस्कृतिक चेतना का एक भव्य उत्सव है। जगद्गुरु आदि शंकराचार्य ने बद्रीनाथ और केदारनाथ की यात्राओं से भारतीय संस्कृति को एक नई दिशा दी थी। जगद्गुरु रामानुजाचार्य और जगद्गुरु माध्वाचार्य ने भी अपने धर्मविचारों को समृद्ध करने के लिए बद्रीनाथ की यात्रा की थी।
आज भी हिमालय की गोद में विराजमान ये चारों धाम हमारी शाश्वत आस्था और विश्वास के दिव्य केंद्र हैं। हर वर्ष विविध भाषाओं, परंपराओं और संस्कृतियों के लोग यहां पहुंचते हुए एक भारत, श्रेष्ठ भारत के भाव को और अधिक सशक्त करते हैं। इस वर्ष की यात्रा भी इसी परंपरा का विस्तार है।

विकसित भारत में विकसित उत्तराखंड की भूमिका
प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में कहा है कि विकसित भारत के संकल्प में विकसित उत्तराखंड की अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने कहा कि कुछ वर्ष पहले, उन्होंने बाबा केदार के द्वार पर खुद ये कहा था कि ये दशक उत्तराखंड का दशक होगा। आज उत्तराखंड की प्रगति इस विश्वास को साकार कर रही है। उत्तराखंड आज पर्यटन, आध्यात्मिकता और आर्थिक प्रगति, तीनों क्षेत्रों में नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है।
पिछले कुछ वर्षों से उत्तराखंड में विकास का जो महायज्ञ चल रहा है, उसने चारधाम यात्रा को पहले से अधिक सुगम, सुरक्षित और दिव्य बनाया है। जिससे श्रद्धालुओं, संतजनों और पर्यटकों को सुविधा हो रही है। प्रधानमंत्री ने उत्तराखंड आने वाले अतिथियों से अपील करते हुए कहा कि वे अपनी यात्रा के दौरान डिजिटल उपवास रखते हुए, उत्तराखंड की प्राकृतिक सुंदरता को जीने का प्रयास भी करें। इससे उन्हें एक अलग संतुष्टि भी मिलेगी।

पांच संकल्प

पहला संकल्प – स्वच्छता सर्वाेपरि
धाम और उसके आसपास स्वच्छता बनाए रखें। नदियों को साफ रखने के लिए अपना योगदान दें। सिंगल यूज प्लास्टिक से मुक्त यात्रा का संकल्प लें और इस पावन धरा की गरिमा को बनाए रखें।

दूसरा संकल्प – प्रकृति और पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता
हिमालय की इस दिव्य धरा के प्रति संवेदनशील रहे। प्रकृति के संतुलन को बनाए रखते हुए, एक पेड़ मां के नामश् जैसे प्रयासों के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण में योगदान दें।

तीसरा संकल्प – सेवा, सहयोग और एकता पर बल
पुरातन काल से तीर्थ यात्राएं सर्वजन की सेवा और सामाजिक समरसता को स्थापित करने का माध्यम रही हैं। आज भी लोग इसी सेवा भाव से तीर्थयात्रियों की सेवा करते हैं। इसीलिए तीर्थयात्री अपनी यात्रा के प्रत्येक दिन, किसी ना किसी रूप में, लोगों की सेवा का एक काम अवश्य करें।
सहयात्रियों की सहायता करें और देश की विभिन्न जगहों से आए लोगों से जुड़े। उनकी परंपराओं का सहभागी बनकर ष्एक भारत, श्रेष्ठ भारतश् की भावना को इस यात्रा के माध्यम से सशक्त करें।

चौथा संकल्प – वोकल फॉर लोकल को बढ़ावा
अपने मूल स्थान से चलकर घर लौटने तक अपने कुल खर्च का पांच प्रतिशत हिस्सा लोकल उत्पादों को खरीदने पर जरूर खर्च करें। अगर किसी स्थानीय चीज की जरूरत इस मौसम में नहीं भी है, तो भी उसे भविष्य के इस्तेमाल के भाव से ही खरीदने का प्रयास करें।

पांचवां संकल्प – अनुशासन, सुरक्षा और मर्यादा का पालन
यात्रा के नियमों और यातायात निर्देशों का पालन करें। एक जिम्मेदार और सजग नागरिक के रूप में इस तीर्थ यात्रा को सुरक्षित और सुगम बनाएं। हम ये प्रयास करें कि हमारी यात्रा से, इस यात्रा के आयोजन और प्रबंधन में जितने भी लोग लगे हुए हैं, उन्हें कोई असुविधा ना हो। प्रधानमंत्री ने क्रिएटर्स, इंफ्लूएंसर्स से भी उत्तराखंड की स्थानीय कहानियों और यहां की छोटी-छोटी परंपराओं को भी जन-जन तक पहुंचाने की अपील की है।

हर हर महादेव के उद्घोष के साथ खुले बाबा केदारनाथ धाम के कपाट, सीएम बने साक्षी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी बने कपाट खुलने के दिव्य क्षणों के साक्षी हर हर महादेव, जय श्री केदार के उदघोष से प्रफुल्लित हुई बाबा केदार की नगरी

श्रद्धा, आस्था और दिव्यता की अद्भुत त्रिवेणी, ग्यारहवें ज्योर्तिलिंग श्री केदारनाथ धाम के कपाट आज बुधवार को विधि-विधान एवं वैदिक मंत्रोच्चार के साथ श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोल दिए गए हैं। प्रातः 8 बजे शुभ मुहूर्त में कपाट खुलते ही पूरा धाम “हर-हर महादेव” और “जय श्री केदार” के उद्घोष से गूंज उठा। धाम में पहली पूजा प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नाम से की गई।

इस पावन अवसर पर प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी भी उपस्थित रहे और उन्होंने बाबा केदारनाथ के दर्शन कर प्रदेश एवं देश की सुख, समृद्धि और शांति की कामना की। सिख रेजीमेंट के बैंड की भक्तिमय धुनों के बीच कपाट उद्घाटन का यह दिव्य क्षण और भी अलौकिक बन गया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने समस्त देशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि केदारनाथ धाम न केवल सनातन धर्मावलंबियों की आस्था का प्रमुख केंद्र है, बल्कि यह भारत की समृद्ध आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत का भी प्रतीक है। उन्होंने कहा कि चारधाम यात्रा हर वर्ष नए कीर्तिमान स्थापित कर रही है और इस वर्ष भी बाबा केदार के आशीर्वाद से यात्रा ऐतिहासिक होगी।

मुख्यमंत्री ने की अपील
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा चारधाम यात्रा को सुरक्षित, सुव्यवस्थित एवं सुगम बनाने के लिए व्यापक इंतजाम किए गए हैं। उन्होंने सभी उत्तराखंडवासियों से देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं के प्रति सेवा और आतिथ्य भाव बनाए रखने का आह्वान किया।
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी को बाबा केदारनाथ का अनन्य भक्त बताते हुए कहा कि वर्ष 2013 की आपदा के बाद उनके मार्गदर्शन में केदारनाथ धाम का भव्य एवं दिव्य पुनर्निर्माण हुआ है, जो आज विश्वभर के श्रद्धालुओं को आकर्षित कर रहा है।

फूलों से सजा बाबा केदार का धाम
भगवान केदारनाथ की पंचमुखी उत्सव डोली शीतकालीन गद्दीस्थल श्री ओंकारेश्वर मंदिर, उखीमठ से गुप्तकाशी, फाटा और गौरीकुंड होते हुए कल शाम ही धाम पहुंच चुकी थी। इसी क्रम में कपाट खुलने की प्रक्रिया आज प्रातः 5 बजे से प्रारंभ हुई। इसके बाद प्रातः 8 बजे रावल भीमाशंकर लिंग, पुजारी टी गंगाधर, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, विधायक केदारनाथ आशा नौटियाल, तीर्थ पुरोहित उमेश चंद्र पोस्ती सहित धर्माचार्यों एवं वेदपाठियों ने मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश कर विधिवत पूजा-अर्चना की। देव आवाहन एवं लोककल्याण के संकल्प के साथ ठीक 8 बजे कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। कपाट उद्घाटन के अवसर पर श्री केदारनाथ मंदिर को 51 क्विंटल से अधिक फूलों से भव्य रूप से सजाया गया। कपाट खुलते ही हेलीकॉप्टर से पुष्प वर्षा की गई, जिससे श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे।

ये रहे मौजूद
कपाट खुलने के अवसर पर गीता धामी, बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी, विधायक केदारनाथ आशा नौटियाल, जिला पंचायत अध्यक्ष रुद्रप्रयाग पूनम कठैत, ब्लॉक प्रमुख ऊखीमठ पंकज शुक्ला, जिला पंचायत सदस्य अमित मैखंडी, पूर्व जिलाध्यक्ष महावीर पंवार, तीर्थ पुरोहित उमेश चंद्र पोस्ती, जिलाधिकारी रुद्रप्रयाग/मुख्य कार्याधिकारी बीकेटीसी विशाल मिश्रा, पुलिस अधीक्षक नीहारिका तोमर, सहित बड़ी संख्या में तीर्थ पुरोहितगण, हकहकूकधारी एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।

संवाद ही विश्वास की नींव, राष्ट्रीय जनसंपर्क दिवस पर देहरादून में विचार गोष्ठी हुई आयोजित

राष्ट्रीय जनसंपर्क दिवस के अवसर पर पब्लिक रिलेशंस सोसायटी ऑफ इंडिया देहरादून चौप्टर द्वारा राजपुर रोड स्थित हुडको सभागार में “लोकतंत्र में जनसंपर्क का महत्व” विषय पर विचार गोष्ठी आयोजित की गई।

कार्यक्रम में चौप्टर के अध्यक्ष एवं उपनिदेशक रवि बिजारनिया ने कहा कि लोकतंत्र में जनसंपर्क सरकार और जनता के बीच एक सशक्त सेतु का कार्य करता है। प्रभावी जनसंपर्क के माध्यम से संवाद स्थापित होता है और इसी संवाद से विश्वास का निर्माण होता है, जो समाज में आशाओं को साकार करता है।

हुडको के क्षेत्रीय प्रमुख संजय भार्गव ने कहा कि जनसंपर्क केवल शासन-प्रशासन तक सीमित नहीं है, बल्कि परिवार और समाज के स्तर पर भी इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने वर्तमान समय में संचार के बढ़ते माध्यमों के बीच जिम्मेदार संवाद की आवश्यकता पर जोर दिया।

चौप्टर के सचिव अनिल सती ने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए की गतिविधियों और उद्देश्यों की जानकारी दी।

कार्यक्रम में सदस्य मनीता हरि ने फेक न्यूज़ और डीप फेक जैसी चुनौतियों के प्रति सतर्क रहने की आवश्यकता बताई।

वक्ताओं ने जनसंपर्क के सकारात्मक, प्रामाणिक और प्रभावी स्वरूप पर बल देते हुए इसे संस्थागत के साथ-साथ व्यक्तिगत स्तर पर भी राष्ट्र और समाज सेवा का सशक्त माध्यम बताया।

गोष्ठी का संचालन वरिष्ठ पत्रकार संजीव कंडवाल ने किया।

इस अवसर पर राकेश डोभाल, प्रियांक वशिष्ठ, सुशील कुमार, मनोज सती, रितिक, वैभव गोयल, विमल डबराल, दिनेश कुमार, दीपक शर्मा, संजय पांडेय, पुष्कर नेगी सहित अन्य सदस्यों ने भी अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।