सीएम ने मानव-वन्यजीव संघर्ष कम करने के लिए और अधिक प्रभावी प्रयास करने के दिए निर्देश

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में सचिवालय में उत्तराखंड राज्य वन्यजीव बोर्ड की 22वीं बैठक आयोजित की गई। बैठक में मुख्यमंत्री ने मानव-वन्यजीव संघर्ष की बढती घटनाओं पर चिंता व्यक्त करते हुए इसके नियंत्रण के लिए और अधिक प्रभावी कदम उठाए जाने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि भालू, गुलदार, बाघ तथा हाथी से संबंधित क्षेत्रों में सतर्कता बढ़ाई जाए और वन विभाग एवं जिला प्रशासन द्वारा संयुक्त निगरानी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि संवेदनशील क्षेत्रों में नियमित पेट्रोलिंग, डिजिटल निगरानी और अर्ली वार्निंग सिस्टम को पूरी तरह सक्रिय रखा जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रभावित ग्रामों में सोलर फेंसिंग, बायो-फेंसिंग, हनी बी फेंसिंग, वॉच टावर एवं अन्य सुरक्षात्मक उपाय अनिवार्य रूप से स्थापित किए जाएँ। उन्होंने ग्रामीणों को सतर्कता और सुरक्षा के प्रति जागरूक करने के लिए जागरूकता शिविरों के आयोजन और रैपिड रिस्पॉन्स टीम को निरंतर सक्रिय रखने के भी निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में हाथी एवं बाघ कॉरिडोर सहित सभी वन्यजीव कॉरिडोरों के संरक्षण को शीर्ष प्राथमिकता दी जाए। वन्यजीवों के आवागमन वाले मार्गों पर एनिमल पास, अंडरपास और ओवरपास निर्माण की व्यवस्था को और प्रभावी ढंग से लागू किया जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि यदि वर्तमान वन्यजीव संरक्षण नियमों या प्राविधानों में संशोधन की आवश्यकता हो, तो संबंधित विभाग आवश्यक परीक्षण कर संशोधन प्रस्ताव शीघ्र शासन को भेजें।

बैठक में मुख्यमंत्री ने निर्देश दिये कि जिला स्तर पर जिलाधिकारी की अध्यक्षता में वन्यजीव समन्वय समिति को सक्रिय बनाए रखने के साथ ही संवेदनशील जिलों, ब्लॉकों एवं ग्रामों की हॉट स्पॉट मैपिंग तत्काल पूरी की जाए। उन्होंने स्कूलों, आंगनबाड़ियों, जलस्रोतों और पैदल मार्गों के आसपास सुरक्षा प्रबंध मजबूत करने के निर्देश दिये। मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में ठोस कचरा प्रबंधन को सख्ती से लागू किया जाए, ताकि भालू और अन्य वन्यजीव आबादी वाले क्षेत्रों की ओर आकर्षित न हों।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ईको-टूरिज्म व्यवस्था को और अधिक सृदृढ़ बनाने के लिए रिजर्व फारॅरेस्ट के अलावा प्रदेश की वाइल्डलाइफ सेंचुरी एवं कंजरर्वेशन रिजर्व क्षेत्रों में भी कार्य किये जाएं। मानव वन्यजीव संघर्ष को कम करने तथा जन सुरक्षा की दृष्टि से टेरिटोरियल फॉरेस्ट डिविजन में पशु चिकित्सकों की व्यवस्था भी की जाए।

बैठक में वन भूमि हस्तांतरण से संबंधित कुल 9 प्रस्तावों पर सहमति प्रदान की गई। इनमें जनपद रुद्रप्रयाग स्थित केदारनाथ वन्यजीव अभयारण्य की 4 विविध पेयजल योजनाएं और 2 पेयजल योजनाएं, राजाजी नेशनल पार्क क्षेत्र से जुड़ी 2 मोटरमार्ग योजनाएं तथा रामनगर वन प्रभाग से संबंधित एक ऑप्टिकल फाइबर प्रस्ताव शामिल है। इसके अलावा संरक्षित क्षेत्रों की 10 किलोमीटर परिधि में उपखनिज चुगान से जुड़े 22 प्रस्तावों को राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड के विचारार्थ संदर्भित किए जाने का निर्णय लिया गया।

वन मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि राज्य वन्यजीव बोर्ड की बैठक में लिए गए निर्णय वन्यजीव संरक्षण और मानव सुरक्षा के बीच संतुलन स्थापित करने की दिशा में एक समग्र और दूरदर्शी कदम हैं, जिनसे उत्तराखंड में वन्यजीव प्रबंधन व्यवस्था और अधिक सुदृढ़ होगी।

बैठक में उत्तराखंड राज्य वन्यजीव बोर्ड की 21वीं बैठक में लिए गए निर्णय पर की गई कार्यवाही की जानकारी देते हुए प्रमुख वन संरक्षक श्री रंजन कुमार मिश्र ने बताया कि चौरासी कुटिया के पुनर्विकास, मंसादेवी मन्दिर एवं पहुंच मार्ग में आपदा से हुई क्षति के कार्यों के पुनःनिर्माण के प्रथम चरण, ऋषिकेश नीलकंठ महादेव रोपवे परियोजना के निर्माण एवं लालढ़ांग -चिल्लरखाल वन मोटरमार्ग के विशेष पुनरूद्वार के लिए स्टैंडिंग कमेटी राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड द्वारा स्वीकृति प्रदान की गई है। जुलाई 2025 से दिसबंर 2025 तक वन भूमि हस्तान्तरण के 56 प्रस्तावों के वाइल्डलाईफ मैनेजमेंट प्लान स्वीकृत किये गये हैं, जबकि 29 प्रस्तावों पर अनापत्ति प्रमाण पत्र निर्गत किये गये हैं। वन्यजीवों द्वारा मानव मृत्यु के प्रकरणों पर अनुग्रह राशि 6 लाख से बढ़ाकर 10 लाख की गई है। 32 वन प्रभागों के अन्तर्गत मानव -वन्यजीव संघर्ष पर त्वरित कार्यवाही के लिए 93 क्यू.आर.टी का गठन किया गया है। पिथौरागढ़, चम्पावत और रुद्रप्रयाग में वन्यजीव रेस्क्यू सेंटर की स्थापना हेतु केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण को प्रस्ताव भेजने की भी स्वीकृति दी गई है।

बैठक में राज्य वन्यजीव बोर्ड के सदस्य विधायक दीवान सिंह बिष्ट, सुरेश सिंह चौहान, बंशीधर भगत, प्रमुख सचिव वन आर.के. सुधांशु, प्रमुख वन संरक्षक रंजन कुमार मिश्र, पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ अन्य सदस्यगण एवं वन विभाग के अधिकारी उपस्थित थे।

वीबी-जी राम जी अधिनियम केवल मनरेगा का नाम बदलना नहीं, बल्कि ग्रामीण रोजगार नीति की संरचनात्मक पुनर्रच: धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मीडिया सेंटर, सचिवालय में मीडिया से वार्ता करते हुए विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन ग्रामीण (VB-G RAM G अधिनियम) को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि यह नया अधिनियम केवल मनरेगा का नाम बदलना नहीं, बल्कि ग्रामीण रोजगार नीति की संरचनात्मक पुनर्रचना है। जिससे कि ग्रामीण क्षेत्र एवं इकाइयां मजबूत हो सकेंगी। उन्होंने इसे गांव को विकसित बनाने के लिए महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि यह अधिनियम किसानों को सुरक्षा, श्रमिकों को रोजगार, महिलाओं को सम्मान, गांवों का विकास और विकसित गाँव के माध्यम से विकसित भारत के लिए मजबूत नींव बनाने में महत्वपूर्ण साबित होगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वीबी-जी राम जी, विकास आधारित गारंटी प्रदान के साथ अब ग्रामीण परिवारों को 100 की जगह 125 दिन के रोजगार का अधिकार प्रदान करेगा। जो पहले से 25% अधिक होगा। इसके तहत 15 दिन में काम नहीं मिलने पर बेरोजगारी भत्ता अनिवार्य रूप से दिए जाने की व्यवस्था बनाई गई है, साथ ही इसके लिए अधिकारी की जिम्मेदारी भी तय की गई है। उन्होंने बताया कि इस व्यवस्था के तहत दिए जाने भुगतान साप्ताहिक होगा और विलंब होने पर मुआवजे का प्रावधान किया गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वीबी-जी राम जी के तहत होने वाले कार्यों में तकनीक आधारित पारदर्शिता रखी गई है। इसमें बायोमेट्रिक हाजिरी, जियो-टैगिंग और GIS मैपिंग, मोबाइल ऐप और सार्वजनिक डैशबोर्ड, AI आधारित फ्रॉड डिटेक्शन, साल में दो बार अनिवार्य सोशल ऑडिट जैसे विभिन्न तकनीकों के प्रयोग का प्रावधान किया गया है। इन सभी तकनीकों का प्रयोग इस योजना को भ्रष्टाचार-मुक्त रोजगार गारंटी योजना बनाता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वीबी-जी राम जी में किसान हितों की स्पष्ट रूप से सुरक्षा सुनिश्चित की गई है। खेती के बुवाई और कटाई के मौसम में अधिकतम 60 दिन तक योजना के काम कानूनी रूप से रोके जा सकेंगे। जिससे किसानों को मजदूरों की कमी नहीं होगी एवं खेती की लागत भी नहीं बढ़ेगी साथ ही ग्रामीण अर्थव्यवस्था संतुलित रहेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वीबी-जी राम जी के तहत ग्राम पंचायत और ग्राम सभा को असली ताकत प्रदान की गई है। उन्होंने कहा इस योजना में काम थोपे नहीं जाएंगे बल्कि विकास कार्यों का चिन्हीकरण ग्राम सभा द्वारा ही तय किया जाएगा। उन्होंने कहा कम से कम 50% कार्य सीधे ग्राम पंचायतों के स्तर पर कराए जा सकेंगे। इसके तहत जॉब कार्ड, पंजीकरण, योजना निर्माण जैसे कार्य ग्राम सभा के स्थानीय स्तर पर तय होंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा वीबी-जी राम जी के तहत काम की गुणवत्ता और उपयोगिता का विशेष प्रावधान रखा गया है। इसके तहत अब जल संरक्षण, ग्रामीण अवसंरचना, आजीविका परिसंपत्तियाँ, आपदा प्रबंधन के अंतर्गत आने वाले कामों को किया जाएगा। जिसमें मुख्य रूप से तालाब, चेकडैम, स्टॉपडैम, सड़क, नाली, स्कूल, अस्पताल, SHG शेड, स्किल सेंटर, हाट, रिटेनिंग वॉल, ड्रेनेज, पिचिंग जैसे कार्य होंगे। इससे सबको काम भी मिलेगा और गाँव भी मजबूत होगा।

मुख्यमंत्री ने कहा वीबी-जी राम जी के तहत महिला सशक्तिकरण पर विशेष फोकस किया गया है। स्वयं सहायता समूह से जुड़ी बहनों के लिए स्किल सेंटर, शेड निर्माण, ग्रामीण हाट आदि बनाए जाएंगे जिससे महिलाओं को गाँव में ही रोजगार मिलेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वीबी-जी राम जी के अंतर्गत प्रशासनिक ढांचे को मजबूती प्रदान की गई है। उन्होंने कहा ग्राम रोजगार सहायक, फील्ड असिस्टेंट, तकनीकी सहायक आदि इस योजना की रीढ़ हैं। इनके प्रशिक्षण, मानदेय और निगरानी के लिए प्रशासनिक खर्च 6% से बढ़ाकर 9% किया गया है। जिसके कारण काम की गुणवत्ता बढ़ेगी, भुगतान समय पर होगा एवं निगरानी मजबूत हो सकेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा वीबी-जी राम जी के अंतर्गत निष्पक्ष वित्तीय प्रबंधन पर भी ध्यान दिया गया है। इसमें सामान्य राज्यों के लिए 60:40 का अनुपात एवं हिमालयी और पूर्वोत्तर राज्यों के लिए 90:10 का अनुपात किया गया है। इसके तहत अब स्पष्ट वार्षिक बजट का प्रावधान होगा जिसमें पहले अनिश्चितता रहती थी। *मुख्यमंत्री ने कहा इस अधिनियम के अंतर्गत उत्तराखंड जैसे हिमालयी राज्य को केंद्र सरकार द्वारा 90 प्रतिशत वित्तीय सहयोग मिलेगा, जिससे राज्य पर अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा और ग्रामीण क्षेत्रों का विकास और तेज़ी से होगा।*

*मुख्यमंत्री ने कहा कि VB-G RAM G उत्तराखंड राज्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। पर्वतीय और आपदा-संवेदनशील राज्य के रूप में उत्तराखंड में जल संरक्षण, आपदा प्रबंधन और ग्रामीण अवसंरचना में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। यह अधिनियम उत्तराखंड के गाँवों को आत्मनिर्भर और सुरक्षित बनाने के साथ ही ग्रामसभाओं के विकास को और मजबूती प्रदान करेगा।*

मुख्यमंत्री ने कहा कि SBI द्वारा किए गए विश्लेषण के अनुसार इस अधिनियम से राज्यों को करीब ₹17,000 करोड़ का शुद्ध लाभ होगा। मुख्यमंत्री ने कहा यह योजना गरीब-विरोधी नहीं, बल्कि गरीबी के मूल कारणों पर प्रहार है। मुख्यमंत्री ने कहा VB-G RAM G में श्रमिकों को ज्यादा दिन का काम मिलेगा, तय समय पर वेतन मिलेगा, कानूनी जवाबदेही तय और तकनीक आधारित पारदर्शिता होगी।

इस अवसर पर राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट, विधायक दलीप रावत मौजूद रहे।

गुणवत्ता आधारित संस्कृति को बढ़ावा देना जरूरी: धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भारतीय मानक ब्यूरो के 79वें स्थापना दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय स्थित मुख्य सेवक सदन में आयोजित कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय मानक ब्यूरो ने बीते आठ दशकों में गुणवत्ता, विश्वसनीयता और उपभोक्ता संरक्षण की दिशा में उल्लेखनीय कार्य कर गुणवत्ता ही पहचान के मंत्र को साकार किया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 1947 में भारतीय मानक संस्था के रूप में शुरू हुई यह यात्रा आज देश की औद्योगिक, वैज्ञानिक और आर्थिक प्रगति की मजबूत आधारशिला के रूप में स्थापित हो चुकी है। उन्होंने कहा कि बीआईएस द्वारा मानकीकरण, प्रमाणीकरण और गुणवत्ता परीक्षण के माध्यम से न केवल उद्योगों को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के योग्य बनाया गया है, बल्कि उपभोक्ताओं के जीवन में भरोसे और सुरक्षा की भावना को भी सुदृढ़ किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज मानकीकरण का क्षेत्र केवल उद्योग जगत तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि कृषि, स्वास्थ्य, सड़क सुरक्षा, ऊर्जा, जल संरक्षण, आपदा प्रबंधन एवं डिजिटल सेवाओं तक विस्तृत हो चुका है। उन्होंने कहा कि भारतीय मानक ब्यूरो द्वारा डिजिटल सुरक्षा, मेडिकल डिवाइस, ड्रोन, इलेक्ट्रिक वाहन, रिसाइकिल सामग्री एवं हरित ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में समयानुकूल मानक तय कर भविष्य की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई जा रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय मानक ब्यूरो सतत विकास के लक्ष्य के अनुरूप इकोलॉजी और इकॉनमी के बीच संतुलन स्थापित करने की दिशा में सराहनीय योगदान दे रहा है। राज्य में बीआईएस द्वारा लोक निर्माण विभाग, आपदा प्रबंधन, एमडीडीए, यूपीसीएल सहित विभिन्न विभागों के साथ समन्वय करते हुए मानकीकरण संबंधी जागरूकता और सहयोगात्मक कार्य किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया जैसे अभियान देश की आर्थिक और तकनीकी प्रगति के आधार स्तंभ बन चुके हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय उत्पाद विश्व में गुणवत्ता का मानदंड बनें यह प्रधानमंत्री का स्पष्ट दृष्टिकोण है और इस लक्ष्य की प्राप्ति में बीआईएस की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार भी अपने स्थानीय उत्पादों हस्तशिल्प, जैविक कृषि उत्पाद, औषधीय जड़ी-बूटियाँ एवं स्थानीय खाद्य उत्पाद के लिए उच्च गुणवत्ता मानक स्थापित करने की दिशा में कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि ‘‘हाउस ऑफ हिमालयाज’’ ब्रांड राज्य के पारंपरिक उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाने के उद्देश्य से स्थापित किया गया है। उन्होंने कहा कि गुणवत्ता को केवल मानक नहीं बल्कि आदत बनाना आवश्यक है, ताकि गुणवत्ता आधारित संस्कृति एक जन आंदोलन के रूप में विकसित हो सके। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि भारतीय मानक ब्यूरो वन नेशन, वन स्टैंडर्ड की नीति के तहत देश को वैश्विक मानकों की प्रतिस्पर्धा में अग्रणी बनाएगा और वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संकल्प में अपनी अहम भूमिका निभाता रहेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में वैज्ञानिक सोच और तकनीकी नवाचार को सुदृढ़ करने के लिए सरकार ने कई ऐतिहासिक कदम उठाए हैं। उन्होंने कहा कि राज्य में पहली बार विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार नीति 2025 लागू की गई है। राज्य के सभी 13 जनपदों के 95 ब्लॉकों में लगभग 180 विज्ञान, तकनीक इंज्ीनियरिंग एवं गणित आधारित प्रयोगशालाएँ स्थापित की गई हैं। सभी जिलों में साइंस एंड टेक्नोलॉजी प्रीमियर लीग प्रारंभ की गई है, जिससे सैकड़ों छात्र लाभान्वित हो रहे हैं। प्रत्येक जनपद में एक-एक ‘लैब-ऑन-व्हील्स’ संचालित की जा रही है। विभिन्न विश्वविद्यालयों व केन्द्रों में 60 पेटेंट सूचना केंद्र स्थापित किए गए हैं। सीमांत क्षेत्रों में विज्ञान आधारित विकास के लिए ‘सीमांत क्षेत्र विकास परिषद’ का गठन किया गया है। साइंस महोत्सवों का आयोजन अब पर्वतीय जनपदों तक विस्तारित किया गया है, इस वर्ष यह महोत्सव रुद्रप्रयाग में हुआ। वैज्ञानिक नवाचार को बढ़ावा देने के लिए प्रत्येक जनपद में विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार केन्द्रों की स्थापना हेतु बजट आवंटित किया गया है। राज्य में शीघ्र विज्ञान व नवाचार आधारित प्रसारण प्रारंभ किए जाएंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि देहरादून में बनने वाली देश की पाँचवीं साइंस सिटी के निर्माण कार्य को उल्लेखनीय गति मिली है। भारत सरकार और राज्य सरकार के संयुक्त सहयोग से 175 करोड़ रुपये की लागत से यह परियोजना आकार ले रही है। महिला प्रौद्योगिकी केन्द्रों की स्थापना भी प्रारंभ की जा चुकी है। राज्य में केन्द्रीय संस्थानों से विज्ञान व नवाचार संवाद को नई गति दी गई है। सिलक्यारा के अभियान में अपनाए गए विज्ञान-प्रौद्योगिकी आधारित रेस्क्यू मॉडल को अंतरराष्ट्रीय मान्यता मिली है और इसी पर आधारित विश्व आपदा प्रबंधन सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है। आज राज्य के हर कोने विज्ञान और प्रौद्योगिकी से जोड़ा गया है।

इस अवसर पर विधायक खजान दास, उमेश शर्मा काऊ, सविता कपूर, निदेशक भारतीय मानक ब्यूरो सौरभ तिवारी, महानिदेशक यू-कॉस्ट प्रो. दुर्गेश पंत, ब्रिगेडियर के.जी बहल (सेनि), उद्योग एवं व्यापार संघ के प्रतिनिधि उपस्थित थे।

सीएस ने दिए स्वास्थ्य विभाग को खराब व जर्जर हो चुकी 108 एवं विभागीय एम्बुलेंसों को शीघ्र बदलने के निर्देश

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने सचिवालय में जिलाधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक की। इस अवसर पर जनपद स्तर पर पुराने समय से लंबित प्रकरणों पर सम्बन्धित विभागीय सचिवों के चर्चा कर विभिन्न प्रकरणों का निस्तारण किया गया।

इसके साथ ही मुख्य सचिव ने उत्तराखण्ड गवर्नमेंट एसेट मैनेजमेंट सिस्टम पर सभी विभागों को अपनी संपत्तियों को मैप करने के निर्देश दिए। उन्होंने सभी विभागीय सचिवों और विभागाध्यक्षों को 31 मार्च, 2026 तक सभी विभागों के अंतर्गत सरकारी संपत्तियों की मैपिंग कराए जाने के निर्देश दिए।

मुख्य सचिव द्वारा स्वास्थ्य विभाग को खराब एवं जर्जर हो चुकी 108 एवं विभागीय एम्बुलेंसों को शीघ्र बदले जाने के निर्देश दिए गए।

मुख्य सचिव ने एग्री स्टैक के अंतर्गत अंश निर्धारण, डिजिटल क्रॉप सर्वे और किसानों के पंजीकरण कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि इस दिशा में कुछ जनपदों द्वारा अच्छा प्रदर्शन किया गया है, जबकि कुछ जनपदों को काफी मेहनत करने की आवश्यकता है।

इस अवसर पर प्रमुख सचिव विधायी धनंजय चतुर्वेदी, सचिव शैलेश बगौली, नितेश कुमार झा, डॉ. रंजीत कुमार सिन्हा, चंद्रेश कुमार यादव, दीपक रावत, विनय शंकर पाण्डेय, विनोद कुमार सुमन, रणवीर सिंह चौहान एवं धीराज सिंह गर्ब्याल सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी एवं जनपदों से जिलाधिकारी उपस्थित थे।

केंद्रीय मंत्री की अध्यक्षता में आयोजित राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं की हुई समीक्षा

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी की अध्यक्षता में आयोजित राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं की समीक्षा बैठक में प्रतिभाग किया।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बैठक में ऋषिकेश बाईपास, अल्मोड़ा-दन्या-पनार-घाट मार्ग, ज्योलिकोट-खैरना-गैरसैंण-कर्णप्रयाग मार्ग और अल्मोड़ा-बागेश्वर-काण्डा-उडियारी बैंड मार्ग के निर्माण से संबंधित प्रस्तावों के साथ ही राष्ट्रीय राजमार्ग से संबंधित राज्य के अनेक महत्वपूर्ण मामलों को प्रमुखता से उठाते हुए राज्य के प्रस्तावों को स्वीकृति दिए जाने का अनुरोध किया।

बैठक में राज्य की प्रस्तावित सड़क परियोजनाओं पर हुई चर्चा में बताया गया कि ऋषिकेश बाईपास परियोजना-राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-07 के अंतर्गत तीनपानी से योगनगरी होते हुए खारास्रोत तक 12.67 किमी लंबाई में चार लेन बाईपास का निर्माण प्रस्तावित है। जिसकी अनुमानित लागत 1161.27 करोड़ रुपये है। इस परियोजना के अंतर्गत 4.876 किमी लंबाई में तीन हाथी कॉरिडोर हेतु एलिवेटेड मार्ग, चन्द्रभागा नदी पर 200 मीटर लंबा सेतु तथा रेलवे पोर्टल पर 76 मीटर लंबाई का आरओबी प्रस्तावित है। इसके अतिरिक्त श्यामपुर रेलवे क्रॉसिंग पर 318 करोड़ रुपये की लागत से 76 मीटर लंबाई का आरओबी प्रस्तावित किया गया है। जिससे नेपाली फार्म से ऋषिकेश नटराज चौक तक यातायात निर्बाध हो सकेगा। अल्मोड़ा-दन्या-पनार-घाट मार्ग-राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-309बी के 76 किमी लंबाई वाले हिस्से में 988 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से दो लेन चौड़ीकरण का प्रस्ताव किया गया है।
ज्योलिकोट-खैरना-गैरसैंण-कर्णप्रयाग मार्ग-राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-109 के अंतर्गत 235 किमी लंबाई में दो लेन चौड़ीकरण का संरेखण प्रस्ताव है।
अल्मोड़ा-बागेश्वर-काण्डा-उडियारी बैंड मार्ग-राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-309ए के अंतर्गत पैकेज 1, 2 और 5 में कुल 84.04 किमी लंबाई में 1001.99 करोड़ रुपये की लागत से कार्य प्रस्तावित हैं। काण्डा से बागेश्वर खंड (पैकेज-02) के लिए वनभूमि हस्तांतरण प्रस्ताव पर भारत सरकार की स्वीकृति मिल चुकी है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड में सड़क अवसंरचना को विकास की दिशा में उल्लेखनीय कार्य हुए हैं। उत्तराखण्ड की सड़कें केवल तीर्थाटन और पर्यटन को ही नहीं, बल्कि उद्योग, सीमावर्ती सुरक्षा, आपदा प्रबंधन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी सशक्त बना रही हैं। यह परिवर्तन केवल सड़क निर्माण का नहीं, बल्कि दूरदर्शी नेतृत्व और स्पष्ट विज़न का परिणाम है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के सतत प्रयासों से उत्तराखण्ड सुगम, सुरक्षित, आधुनिक और भविष्य उन्मुख सड़क नेटवर्क के साथ विकास पथ पर तेजी से आगे बढ़ रहा है।

चारधाम यात्रा को सुगम, सुलभ एवं सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से राष्ट्रीय राजमार्गों पर 12,769 करोड़ रुपये की चारधाम महामार्ग परियोजना स्वीकृत की गई है। उत्तराखण्ड में कुल 3,723 किलोमीटर का राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क राज्य को देश के विभिन्न हिस्सों से जोड़ रहा है। इनमें से लगभग 597 किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्ग एनएचएआई द्वारा डिज़ाइन एवं क्रियान्वित किए गए हैं, जिनमें से 336 किलोमीटर से अधिक परियोजनाएं पूर्ण हो चुकी हैं। लगभग 193 किलोमीटर सड़कों का निर्माण कार्य प्रगति पर है, जिसकी अनुमानित लागत 15,890 रुपये करोड़ से अधिक है। इन परियोजनाओं के माध्यम से हरिद्वार, ऋषिकेश, देहरादून, रुद्रपुर, काशीपुर, हल्द्वानी और काठगोदाम जैसे धार्मिक, शहरी और औद्योगिक केंद्रों को चौड़ी, सुरक्षित एवं सुगम सड़कों से जोड़ा गया है। काशीपुर-सितारगंज (77 किमी), रुद्रपुर-काठगोदाम (50 किमी) तथा हरिद्वार-नगीना (67 किमी) जैसे चार-लेन कॉरिडोर से औद्योगिक क्षेत्रों, कृषि मंडियों और पर्यटन स्थलों तक पहुंच में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।

दिल्ली-देहरादून कॉरिडोर के अंतर्गत गणेशपुर-देहरादून खंड में लगभग 30 किमी लंबा छह-लेन एक्सेस कंट्रोल्ड हाईवे विकसित किया गया है, जिसमें सुरंग और 18 किमी लंबा एलिवेटेड सेक्शन भी शामिल है। इस परियोजना पर 1,995 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया गया है। इसके अतिरिक्त देहरादून बाईपास (12 किमी, 716 करोड़ रुपये) और हरिद्वार बाईपास (15 किमी, 1,603 करोड़ रुपये) जैसी परियोजनाओं से शहरी क्षेत्रों में यातायात दबाव में कमी लाने में प्रभावी सिद्ध होंगे। भारत-नेपाल सीमा पर बनबसा आईसीपी कनेक्टिविटी को 4 किमी लंबाई और 366 करोड़ रुपये की लागत से विकसित किया जा रहा है, जिससे अंतरराष्ट्रीय आवागमन और व्यापार को बढ़ावा मिलेगा। वहीं रुद्रपुर-काशीपुर बाईपास तथा हरिद्वार से दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे उत्तराखण्ड को राष्ट्रीय एक्सप्रेसवे नेटवर्क से सीधे जोड़ रहे हैं।

सड़क सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए राज्य में ब्लैक स्पॉट सुधार, क्रिटिकल जंक्शनों पर एक्सेस कंट्रोल, प्रभावी साइनेज और आधुनिक रोड सेफ्टी उपाय लागू किए जा रहे हैं। पर्वतीय क्षेत्रों में ऑपरेशन और मेंटेनेंस परियोजनाओं के माध्यम से सड़कों को वर्षभर सुरक्षित और सुचारू बनाए रखने की व्यवस्था की गई है। भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए मसूरी-देहरादून कनेक्टिविटी (40 किमी, 4,000 करोड़ रुपये), हरिद्वार-हल्द्वानी हाई-स्पीड कॉरिडोर (197 किमी, 10,000 करोड़ रुपये), ऋषिकेश बाईपास (13 किमी, 1,200 करोड़ रुपये), देहरादून रिंग रोड तथा लालकुआं-हल्द्वानी-काठगोदाम बाईपास जैसी परियोजनाएं तैयारी एवं डीपीआर चरण में हैं। इनसे गढ़वाल और कुमाऊं क्षेत्रों की आपसी कनेक्टिविटी को नई गति मिलेगी। पर्यावरणीय संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए राजाजी टाइगर रिजर्व जैसे क्षेत्रों में एलिवेटेड रोड, वाइल्डलाइफ अंडरपास और न्यूनतम भूमि उपयोग जैसे उपाय अपनाए जा रहे हैं, जिससे विकास और प्रकृति के बीच संतुलन बना रहे।
सिलक्यारा-पोलगांव सुरंग में सिविल कार्य लगभग 90 प्रतिशत पूरा हो चुका है। इस प्रतिशत सिविल कार्य में सुरंग के बीचों-बीच दीवार निर्माण का काम पांच-छह माह में पूरा कर लिया जाएगा और इसके बाद इलेक्ट्रिकल व मैकेनिकल कार्य शुरू किया जाएगा। मार्च 2027 तक निर्माण कार्य पूरा करने का लक्ष्य है।

बैठक में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि मुख्यमंत्री धामी द्वारा दिए गए प्रस्तावों पर समुचित कार्यवाही की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि राज्य में गतिमान परियोजनाओं को गुणवत्ता बनाए रखते हुए तेज गति से निर्धारित समय-सीमा के अंतर्गत पूर्ण किया जाए।

बैठक में केंद्रीय राज्य मंत्री अजय टम्टा, हर्ष मल्होत्रा सहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

ऐसे स्पॉट चिन्हित कर विकसित करें, जो इको टूरिज्म के लिए इको सिस्टम तैयार करें: वर्धन

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन की अध्यक्षता में सचिवालय में वन विभाग के अंतर्गत इको टूरिज्म के संबंध में उच्च अधिकार प्राप्त समिति की बैठक संपन्न हुई। मुख्य सचिव ने कहा कि प्रदेश का अधिकतर भूभाग वनाच्छादित होने से प्रदेश में इको टूरिज्म की अत्यधिक सम्भावनाएं हैं। उन्होंने कहा कि इको टूरिज्म की सम्भावनाओं को तलाशते हुए ऐसे स्पॉट चिन्हित कर विकसित किए जाएं जो इको टूरिज्म के लिए इको सिस्टम तैयार करें।

मुख्य सचिव ने ट्रैकिंग और माउंटेनियरिंग के लिए पॉलिसी तैयार किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने ट्रैकिंग और माउंटेनियरिंग की एक इंटीग्रेटेड पॉलिसी 15 जनवरी तक फाइनल करते हुए शासन को प्रस्तुत किए जाने की बात कही। कहा कि पॉलिसी तैयार किए जाने से पूर्व प्राईवेट स्टैक होल्डर्स से भी संवाद कर लिया जाए, ताकि पॉलिसी बनने के बाद आने वाली व्यवहारिक समस्याओं से बचा जा सके। मुख्य सचिव ने ट्रैकिंग के लिए नई चोटियां खोले जाने की दिशा में कार्य किए जाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि इसके लिए पर्यावरण ऑडिट सहित अन्य सभी आवश्यक औपचारिकताएं पूर्ण कर ली जाएं। उन्होंने शीघ्र ही इसकी एसओपी भी जारी किए जाने की बात भी कही है।

मुख्य सचिव ने चौरासी कुटिया के जीर्णोद्धार का कार्य शीघ्र पूर्ण किए जाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कार्यदायी संस्था को समय से कार्य पूर्ण करने हेतु सभी कार्यों की टाइम लाइन निर्धारित किए जाने की बात कही। कहा कि कार्य समय से पूर्ण हो सके इसके लिए कार्यदायी संस्था को लक्ष्य दिए जाएं। मुख्य सचिव ने इको टूरिज्म के लिए जबरखेत मॉडल को अन्य चिन्हित इको टूरिज्म स्थलों पर भी लागू किए जाने की बात कही। कहा कि इनको और ससमय पूर्ण किए जाने के लिए संभागीय वन अधिकारियों (डीएफओ) को टास्क प्रदान किए जाएं कि वे किस प्रकार से अपने क्षेत्र में इको टूरिज्म को बढ़ावा दे सकते हैं। उन्होंने 10 चिन्हित साइट्स का प्लान एक माह में तैयार करके शासन को भेजे जाने के निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने वन क्षेत्र के अंतर्गत पर्यटन गतिविधियों के संचालन के लिए मैकेनिज्म तैयार किए जाने की बात कही। उन्होंने कहा कि इनके संचालन की जिम्मेदारी इको टूरिज्म डेवलपमेंट बोर्ड को दी जा सकती है। उन्होंने कहा कि इसका गठन ही इसी उद्देश्य से किया गया है। उन्होंने इसके लिए इको टूरिज्म डेवेलपमेंट बोर्ड को मजबूत करने, मैन पावर बढ़ाने एवं बजट में प्रावधान किए जाने की बात भी कही। उन्होंने अपर सचिव वन को ईटीडीबी के लिए नया हैड खोले जाने के निर्देश भी दिए, ताकि यूटीडीबी की भांति ईटीडीबी को भी ग्रांट दी जा सके। इको टूरिज्म साइट्स के इको टूरिज्म डेवेलपमेंट बोर्ड के माध्यम से संचालन हेतु शीघ्र ही एमओयू भी किया जाए।

मुख्य सचिव ने ईको टूरिज्म से सम्बन्धित हाईपावर समिति की बैठक प्रत्येक माह आयोजित कराए जाने की बात भी कही। उन्होंने प्रदेशभर में पर्यटन के लिए फॉर्मल ट्रेनिंग प्रोग्राम शुरू किए जाने के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण के बाद सर्टिफिकेट भी प्रदान किया जाए। उन्होंने कहा कि सर्टिफिकेशन को एक ही जगह एंकर किए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने प्रशिक्षण प्रमाणीकरण के लिए पर्यटन विभाग को जिम्मेदारी दिए जाने की बात कही। कहा कि उच्च शिक्षा विभाग से भी इसके लिए सुझाव लिए जाएं।

इस अवसर पर सचिव दीपेन्द्र कुमार चौधरी, पीसीसीएफ रंजन कुमार मिश्रा, सीसीएफ ईको टूरिज्म पी.के. पात्रो एवं अपर सचिव हिमांशु खुराना सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

राज्य सरकार सेना और अर्धसैनिक बलों के जवानों और उनके परिवारों के कल्याण के लिए लगातार नए निर्णय ले रही: धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री कैम्प कार्यालय स्थित मुख्य सेवक सदन में अर्पित फाउंडेशन द्वारा आयोजित प्राइड मूवमेंट सम्मान समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने सशस्त्र सीमा बल के अधिकारियों एवं जवानों का सम्मान करते हुए उनके साहस, समर्पण और राष्ट्र सेवा भावना की सराहना की।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि सशस्त्र सीमा बल ने पिछले छह दशकों से आंतरिक सुरक्षा, सीमा प्रबंधन, आतंकवाद, नक्सलवाद तथा आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में अदम्य साहस और समर्पण के साथ कार्य करते हुए देश की सुरक्षा सुनिश्चित की है। उन्होंने कहा कि एस.एस.बी. के जवान जहां एक ओर राष्ट्रीय सीमाओं की रक्षा में दिन-रात तत्पर रहते हैं, वहीं खेल, सामाजिक सरोकारों और आपदा राहत कार्यों में भी उत्कृष्ट योगदान दे रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है और आज भारत रक्षा सामग्री निर्यात करने वाले प्रमुख देशों में शामिल है। उन्होंने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर के माध्यम से भारत के स्वदेशी हथियारों की शक्ति को विश्व ने देखा और सराहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार सेना और अर्धसैनिक बलों के जवानों और उनके परिवारों के कल्याण के लिए लगातार नए निर्णय ले रही है। शहीदों के परिजनों को मिलने वाली अनुग्रह राशि को 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 50 लाख रुपये किया गया है, वहीं वीरता पदक से अलंकृत जवानों को मिलने वाली सम्मान राशि में भी वृद्धि की गई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम के अंतर्गत हमारे सीमावर्ती गांवों के विकास और सशक्तिकरण की दिशा में विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। सीमावर्ती क्षेत्रों में सड़कों का व्यापक नेटवर्क तैयार किया जा रहा है। जिससे न केवल सीमांत क्षेत्रों में आवागमन सुगम हुआ है, बल्कि पर्यटन, व्यापार और सामरिक विकास को भी नई मजबूती मिली है। उन्होंने कहा कि मोदी जी स्वयं सीमांत क्षेत्रों का दौरा कर स्थानीय नागरिकों और सुरक्षा बलों के साथ संवाद स्थापित करते हैं, उनकी समस्याओं को समझते हैं और विकास की दिशा में निर्णायक कदम उठाते हैं।

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल, राज्यसभा सांसद नरेश बंसल, निरंजनी पीठाधीश्वर आचार्य कैलाशानन्द जी महाराज, डी.आई.जी एस.एस.बी सुधांशु नौटियाल, अर्पित फाउण्डेशन से हनी पाठक एवं एस.एस.बी के जवान मौजूद थे।

सीएम ने समाज कल्याण के लाभार्थियों के खातों में 140 करोड़ 26 लाख 97 हजार रुपये की राशि ऑनलाइन की जारी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने समाज कल्याण विभाग के अंतर्गत चलाई जा रही विभिन्न पेंशन योजनाओं के लाभार्थियों के बैंक खातों में डी.बी.टी. प्रणाली के माध्यम से दिसंबर माह की पेंशन किश्त का भुगतान किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने 09 लाख 43 हजार 964 लाभार्थियों के खातों में कुल 140 करोड़ 26 लाख 97 हजार रुपये की राशि ऑनलाइन जारी की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार समाज के कमजोर वर्गों, वृद्धजनों, विधवाओं, दिव्यांगजनों एवं निराश्रितों के सामाजिक एवं आर्थिक सशक्तीकरण के लिए निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में पारदर्शी शासन व्यवस्था को मजबूत करने के लिए सभी प्रकार के भुगतान अब डी.बी.टी. प्रणाली से सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में किए जा रहे हैं, जिससे समयबद्धता और पारदर्शिता सुनिश्चित हुई है।

मुख्यमंत्री ने समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिये कि वृद्धावस्था पेंशन के लिए 60 साल की आयु होते ही राज्य के जो लोग पात्रता की श्रेणी में आ रहे हों, उनका 59 साल की आयु से ही चिन्हीकरण कर लिया जाय, ताकि पात्रता की श्रेणी में आने पर उन्हें शीघ्र पेंशन का भुगतान किया जा उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य है कि समाज के प्रत्येक पात्र लाभार्थी को किसी भी प्रकार की कठिनाई के बिना योजनाओं का लाभ मिले। उन्होंने निर्देश दिए कि पेंशन योजनाओं के अंतर्गत कोई भी पात्र व्यक्ति वंचित न रहे, इसके लिए नियमित सत्यापन एवं निगरानी की प्रक्रिया को और अधिक सुदृढ़ किया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार जनहित की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए पूर्ण रूप से प्रतिबद्ध है।

इस असवर पर निदेशक समाज कल्याण डॉ. संदीप तिवारी, अपर सचिव प्रकाश चन्द्र एवं समाज कल्याण विभाग के अधिकारी उपस्थित थे।

सीएम से सेवानिवृत्त कार्मिक समन्वय समिति के प्रतिनिधिमंडल ने की मुलाकात

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से सेवानिवृत्त कार्मिक समन्वय समिति के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री आवास पर भेंट कर राज्य के पेंशनरों की विभिन्न मांगों के समाधान का अनुरोध किया। मुख्यमंत्री ने समिति द्वारा प्रस्तुत मांगों पर पूरी संवेदनशीलता के साथ समुचित कार्यवाही करने का आश्वासन दिया।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि राज्य सरकार सेवानिवृत्त कार्मिकों के हितों की रक्षा एवं कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि सेवानिवृत्त वरिष्ठ नागरिक हमारी धरोहर हैं और उनकी बेहतरी के लिए हरसंभव कदम उठाए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने 30 जून और 31 दिसम्बर को सेवानिवृत्त कार्मिकों को नोशनल वेतनवृद्धि दिये जाने से संबंधित समिति की मांग पर शीघ्र उचित निर्णय लेने का आश्वासन देते हुए समिति की मांगों पर कार्मिक सचिव को कार्यवाही करने के निर्देश दिए।

सेवानिवृत्त कार्मिक समन्वय समिति के मुख्य संयोजक सुमन सिंह वाल्दिया के नेतृत्व में मिले इस प्रतिनिधिमंडल ने सेवानिवृत्त कार्मिकों को जनवरी 2006 से नोशनल वेतनवृद्धि का लाभ दिए जाने के साथ ही राशिकरण की कटौती, हिमांचल की तर्ज पर पेंशन बढोत्तरी तथा गोल्डन कार्ड से संबंधित मांग प्रस्तुत की। प्रतिनिधिमंडल में समिति के संयोजक सचिव नवीन नैथानी, हरीश चन्द्र नौटियाल, आर.पी.पन्त आदि भी सम्मिलित थे।

समिति के पदाधिकारियों ने सेवानिवृत्त कार्मिकों की मांगों पर मुख्यमंत्री द्वारा दिखाई गई संवेदनशीलता के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार के स्तर से हुई संवाद की पहल सराहनीय है। राज्य के समूचे बुजुर्ग पेंशनर्स के बीच एक उत्साहजनक संदेश गया है।

परिवार रजिस्टर में अनियमितता पर धामी सरकार ने दिए प्रदेशव्यापी जांच के निर्देश

देहरादून। उत्तराखंड में परिवार रजिस्टर में सामने आ रही गंभीर अनियमितताओं को लेकर माननीय मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में आज एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक में राज्य स्तर पर व्यापक, निष्पक्ष एवं समयबद्ध जांच तथा दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई के स्पष्ट निर्देश दिए गए।

मुख्यमंत्री ने निर्देशित किया कि प्रदेश के सभी जिलों में उपलब्ध परिवार/कुटुंब रजिस्टरों की प्रतियां तत्काल संबंधित जिलाधिकारी (DM) के पास सुरक्षित रखी जाएं, जिससे अभिलेखों में किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ की संभावना समाप्त हो। साथ ही, परिवार रजिस्टरों की गहन जांच CDO/ADM स्तर पर कराए जाने का निर्णय लिया गया।
बैठक में यह भी तय किया गया कि जांच का दायरा वर्ष 2003 से अब तक रखा जाएगा, ताकि पूर्व वर्षों में हुई संभावित अनियमितताओं की भी पहचान हो सके। फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नाम दर्ज कराने वालों के विरुद्ध नियमानुसार विभागीय व कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने अवगत कराया कि परिवार रजिस्टर का पंजीकरण एवं प्रतिलिपि सेवाएं पंचायत राज (कुटुंब रजिस्टरों का अनुरक्षण) नियमावली, 1970 के अंतर्गत संचालित होती हैं। नियमों के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करने वाले प्रत्येक परिवार का नाम परिवार/कुटुंब रजिस्टर में दर्ज होना अनिवार्य है। वर्तमान प्रविष्टियों के शुद्धिकरण तथा नए नामों को जोड़ने की प्रक्रिया का प्रावधान भी नियमावली में निहित है, जिसे अब और अधिक सख़्त व पारदर्शी बनाए जाने की तैयारी है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि परिवार रजिस्टर में नाम दर्ज करने का अधिकार सहायक विकास अधिकारी (पंचायत) को प्राप्त है, जबकि अपील का अधिकार उप जिलाधिकारी (SDM) के पास निहित है। वर्तमान में परिवार रजिस्टर से संबंधित सेवाएं अपणी सरकार पोर्टल के माध्यम से भी उपलब्ध कराई जा रही हैं।
बैठक में यह तथ्य भी सामने आया कि बीते वर्षों में राज्य की सीमा से लगे मैदानी जनपदों के ग्रामीण क्षेत्रों में अनधिकृत बसावट के आधार पर परिवार रजिस्टर में नाम दर्ज होने से जनसांख्यिकीय संतुलन प्रभावित होने की आशंका रही है। इसी पृष्ठभूमि में सरकार द्वारा परिवार रजिस्टर से संबंधित नियमावली में आवश्यक संशोधन की आवश्यकता महसूस की गई है।
पंचायती राज विभाग द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2025 में परिवार रजिस्टर से जुड़ी सेवाओं हेतु प्रदेशभर में बड़ी संख्या में आवेदन प्राप्त हुए। 01 अप्रैल से 31 दिसंबर 2025 के बीच नए परिवार जोड़ने के लिए 2,66,294 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से 2,60,337 आवेदन स्वीकृत तथा 5,429 आवेदन नियमों के उल्लंघन एवं अपूर्ण दस्तावेजों के कारण निरस्त किए गए। विशेषज्ञों के अनुसार निरस्त आवेदनों की संख्या फर्जी प्रविष्टियों की आशंका की ओर संकेत करती है, जिसके दृष्टिगत प्रक्रिया को और अधिक सुदृढ़ करने का निर्णय लिया गया है।

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि सीमावर्ती जिलों सहित प्रदेश के सभी जिलों में समान रूप से जांच की जाए, ताकि किसी भी क्षेत्र में भेदभाव या ढिलाई न हो। भविष्य में परिवार रजिस्टर में नाम दर्ज किए जाने की प्रक्रिया को स्पष्ट नीति के अंतर्गत नियंत्रित कर कैबिनेट में प्रस्तुत किए जाने का भी निर्णय लिया गया।

मुख्यमंत्री ने दो टूक कहा कि सरकारी अभिलेखों से खिलवाड़ किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

इस उच्चस्तरीय बैठक में सचिव गृह शैलेश बगौली, डीजीपी दीपम सेठ, डीजीपी इंटेलिजेंस अभिनव कुमार, विशेष सचिव पंचायती राज डॉ. पराग धकाते तथा निदेशक पंचायती राज निधि यादव उपस्थित रहे।