हमारा लक्ष्य समावेशी और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करनाः धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने को राजपुर रोड, देहरादून स्थित एक निजी होटल में शाइन अवी लर्निंग समावेशी शिक्षा मिशन-2030 का शुभारंभ किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने विशेष बच्चों के लिए विजुअल लर्निंग करिकुलम पर आधारित विभिन्न पुस्तकों एवं शिक्षण सामग्री का भी विमोचन किया।

मुख्यमंत्री ने कहा शाइन अवी लर्निंग की पहल, शिक्षा को और अधिक सरल, प्रभावी और समावेशी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा केंद्र एवं राज्य सरकार ने हमेशा शिक्षा को सर्वाेच्च प्राथमिकता दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 लागू की है। जिसका उद्देश्य बच्चों को पढ़ाने के साथ समझने, सोचने, नवाचार और आत्मविश्वास के साथ जीवन में आगे बढ़ने योग्य बनाना है।

मुख्यमंत्री ने कहा राज्य सरकार शिक्षा के क्षेत्र में निरंतर कार्य कर रही है। प्रदेश में स्मार्ट क्लास, आईसीटी लैब, पीएम श्री विद्यालय, अटल उत्कृष्ट विद्यालय, डिजिटल शिक्षण सामग्री और विज्ञान एवं नवाचार आधारित शिक्षा को बढ़ावा दिया जा रहा है। समावेशी शिक्षा को हर बच्चे तक पहुँचाने के लिए सरकार विद्यालयों में रैम्प, रेलिंग, सुगम शौचालय, अनुकूलित फर्नीचर, स्वच्छ पेयजल जैसी सुविधाओं को सुदृढ़ किया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में लगभग 5,800 विशेष आवश्यकता वाले बच्चे विभिन्न स्तरों पर विद्यालयों में पंजीकृत हैं। सरकार द्वारा संचालित 11 विशेष विद्यालयों के माध्यम से 1,300 से अधिक बच्चों को विशेष शिक्षण एवं पुनर्वास संबंधी सुविधाएँ उपलब्ध कराई जा रही हैं। उन्होंने कहा प्रारम्भिक एवं माध्यमिक स्तर पर 300 से अधिक विशेष शिक्षकों की नियुक्ति की है और शेष रिक्त पदों पर भी भर्ती की प्रक्रिया जारी है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारा लक्ष्य समावेशी और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करना है, जिसमें राज्य का प्रत्येक बच्चा, अपनी पूर्ण क्षमता के साथ आगे बढ़ सके और नए भारत के निर्माण में अपना योगदान दे सके। हमें अपने बच्चों को केवल परीक्षा के लिए नहीं, बल्कि जीवन के लिए तैयार करना है।

मुख्यमंत्री ने शिक्षाविद अनीता शर्मा और शाइन अवी लर्निंग की पूरी टीम को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि अनीता ने विदेश से रिवर्स पलायन कर उत्तराखंड में शिक्षा के क्षेत्र में नवाचार किया है। उन्होंने कहा यह कदम अन्य प्रवासियों के लिए भी एक उदाहरण है। मुख्यमंत्री ने कहा कि बीते सालों में कई प्रवासियों ने अपने गांव घर लौटकर काम करने की इच्छा जताई है और कई लोग ऐसा कर भी रहे हैं। उन्होंने हम सब ने अपनी विरासत को संरक्षित करना है और अपनी सभ्यता को आगे बढ़ाना है।

मुख्यमंत्री ने कहा उत्तराखंड राज्य, पूरे भारत के लोगों को आत्मसात करता है। हमारे राज्य के लोग व्यक्ति की सोच और उसके कामों को देखते है। तमाम चुनौतियों के बाद भी राज्य, निरंतर विकास के पथ पर आगे चला है। उत्तराखंड की जनता ने हमेशा सरकार को आगे बढ़ाने की प्रेरणा दी है। उन्होंने कहा हमारा राज्य पूरे देश के लिए कई मामलों में उदाहरण बन कर रहा है। राज्य में सर्वप्रथम समान नागरिक संहिता लागू हुआ। सतत विकास लक्ष्यों की सूची में उत्तराखंड में प्रथम स्थान हासिल किया। साथ ही सख्त नकल विरोधी कानून, जैसे कड़े फैसले भी राज्य सरकार ने लिए हैं।

इस अवसर पर विधायक मुन्ना सिंह चौहान, अपर सचिव बंशीधर तिवारी, मीडिया सलाहकार समिति के उपाध्यक्ष धीरेंद्र पंवार, अनीता शर्मा, रमेश भट्ट, सुधीर नौटियाल, पीसी नैनवाल, मनोज पंत, एवं अन्य लोग मौजूद रहे।

केंद्रीय मंत्री से सीएम धामी का पूर्वाेत्तर राज्यों की तर्ज पर जल विद्युत परियोजनाओं को विशेष वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने का अनुरोध

मुख्यमंत्री ने केंद्रीय विद्युत मंत्री से ऊर्जा परियोजनाओं एवं पिटकुल की एडीबी सहायतित पारेषण परियोजना पर की चर्चा

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नई दिल्ली में केंद्रीय विद्युत मंत्री मनोहर लाल खट्टर से भेंट कर उत्तराखण्ड की ऊर्जा आवश्यकताओं, जल विद्युत परियोजनाओं, पम्प्ड स्टोरेज परियोजनाओं, बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) तथा पिटकुल की एडीबी (ADB) सहायतित पारेषण परियोजना सहित विभिन्न विषयों पर चर्चा की।

मुख्यमंत्री ने राज्य की विद्युत आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए भारत सरकार द्वारा समय-समय पर केंद्रीय पूल से अतिरिक्त विद्युत उपलब्ध कराने में दिए जा रहे सहयोग के लिए केंद्रीय विद्युत मंत्री का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि मौसम विज्ञान विभाग के पूर्वानुमानों के अनुसार एल-नीनो की संभावित परिस्थितियों, वर्षा में कमी तथा जलाशयों में कम जलागम के कारण आगामी महीनों में जल विद्युत उत्पादन प्रभावित हो सकता है। वहीं चारधाम यात्रा एवं आगामी कांवड़ यात्रा के दौरान विद्युत मांग में और अधिक वृद्धि होने की संभावना है। इसे देखते हुए मुख्यमंत्री ने जुलाई 2026 की शेष अवधि के लिए 150 मेगावाट तथा अगस्त 2026 के लिए 200 मेगावाट अतिरिक्त विद्युत केंद्रीय पूल से उपलब्ध कराने का अनुरोध किया।

मुख्यमंत्री ने उत्तराखण्ड को पूर्वोत्तर राज्यों की तर्ज पर जल विद्युत परियोजनाओं के लिए विशेष वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने का अनुरोध भी किया।

मुख्यमंत्री ने राज्य में लगभग 10 गीगावाट पम्प्ड स्टोरेज क्षमता के विकास के लिए आगामी पांच वर्षों में 7,800 करोड़ रुपये की केंद्रीय वित्तीय सहायता अथवा वायबिलिटी गैप फंडिंग (VGF) उपलब्ध कराने का आग्रह किया। साथ ही उन्होंने राज्य की ऊर्जा आवश्यकताओं और ग्रिड स्थिरता को देखते हुए बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) की स्वीकृत क्षमता 500 मेगावाट आवर से बढ़ाकर 665 मेगावाट आवर किए जाने तथा उसके अनुरूप वायबिलिटी गैप फंडिंग उपलब्ध कराने का अनुरोध भी किया।

मुख्यमंत्री ने बैठक में पिटकुल की 3,638.26 करोड़ रुपये (US $425.78 मिलियन) लागत वाली एडीबी सहायतित पारेषण परियोजना के विषय पर भी चर्चा की। उन्होंने अनुरोध किया कि इस परियोजना के लिए मूल 80:20 एडीबी ऋण एवं राज्यांश (ADB Loan : Counterpart Funding) की वित्तीय व्यवस्था को यथावत रखा जाए। उन्होंने बताया कि परियोजना के अंतर्गत 2,910.61 करोड़ रुपये (US $340.62 मिलियन) का एडीबी ऋण प्रस्तावित है, जिसे उत्तराखण्ड जैसे विशेष श्रेणी के हिमालयी राज्य के लिए निर्धारित वित्तीय व्यवस्था के अनुरूप स्वीकृत किया जाना आवश्यक है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) द्वारा परियोजना को तकनीकी रूप से उपयुक्त माना गया है तथा विद्युत मंत्रालय ने भी एडीबी सहायता पर कोई आपत्ति नहीं जताई है। हालांकि एडीबी हिस्सेदारी को 60 प्रतिशत तक सीमित करने का सुझाव दिया गया है। उन्होंने कहा कि यदि वित्तीय पैटर्न में परिवर्तन किया जाता है तो उत्तराखण्ड को विशेष श्रेणी राज्य के रूप में मिलने वाले वित्तीय लाभ प्रभावित होंगे। इसलिए मूल 80:20 वित्तीय व्यवस्था को बरकरार रखते हुए परियोजना को स्वीकृति प्रदान की जाए।

मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत एवं ऊर्जा आत्मनिर्भरता के संकल्प को साकार करने में उत्तराखण्ड की जल विद्युत क्षमता महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उन्होंने कहा कि भारत सरकार का सकारात्मक सहयोग राज्य के ऊर्जा क्षेत्र, आधारभूत संरचना तथा सतत विकास को नई गति प्रदान करेगा।

केंद्रीय विद्युत मंत्री ने मुख्यमंत्री द्वारा प्रस्तुत प्रस्तावों पर सकारात्मक कार्यवाही का आश्वासन दिया।

उत्तराखंड में रेल की रफ्तार के साथ विकास की उड़ान, फ्रीज जोन समीक्षा से पहाड़ों में खुल सकती हैं नई संभावनाएं

उत्तराखंड में बहुप्रतीक्षित ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना केवल परिवहन व्यवस्था को बदलने वाली योजना नहीं है, बल्कि यह पहाड़ों के आर्थिक और सामाजिक भविष्य को भी नई दिशा देने वाली परियोजना मानी जा रही है। अब जब इस महत्वाकांक्षी रेल परियोजना का अधिकांश कार्य अंतिम चरणों में पहुंच चुका है, तो राज्य सरकार उन प्रतिबंधों की समीक्षा की ओर बढ़ रही है, जो निर्माण कार्य के दौरान सुरक्षा कारणों से लगाए गए थे। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर आवास विभाग ने रेलवे फ्रिज जोन में लागू 400 मीटर प्रतिबंध की समीक्षा प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस दिशा में आवास सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने संबंधित जिलाधिकारियों और विभागीय अधिकारियों को विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए हैं। सरकार का उद्देश्य यह पता लगाना है कि किन क्षेत्रों में रेलवे ट्रैक और संबंधित निर्माण कार्य लगभग पूरा हो चुका है तथा वहां विकास गतिविधियों को चरणबद्ध तरीके से अनुमति दी जा सकती है। यह पहल केवल प्रशासनिक निर्णय भर नहीं है, बल्कि उन हजारों लोगों की उम्मीदों से भी जुड़ी है, जो पिछले कई वर्षों से पर्यटन, आवासीय और व्यावसायिक गतिविधियों पर लगे प्रतिबंधों के कारण प्रभावित हो रहे हैं।

विकास की राह में बना था सुरक्षा कवच
ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना देश की सबसे चुनौतीपूर्ण पर्वतीय रेल परियोजनाओं में शामिल है। परियोजना के निर्माण के दौरान सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए उत्तराखंड सरकार ने 9 जनवरी 2024 को रेलवे कॉरिडोर से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों को फ्रीज जोन घोषित किया था। योगनगरी ऋषिकेश, शिवपुरी, व्यासी, सिराला, तिलवाड़ मल्ला, मलेथा, श्रीनगर, धारीदेवी, तिलनी, घोलतीर और गौचर जैसे क्षेत्रों में रेलवे परियोजना की परिसीमा से 400 मीटर तक के दायरे में निर्माण गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाए गए थे। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना था कि अनियंत्रित निर्माण कार्य रेलवे परियोजना की सुरक्षा, सुरंगों और अन्य तकनीकी ढांचों पर प्रतिकूल प्रभाव न डालें। इन प्रतिबंधों ने परियोजना को सुरक्षित तरीके से आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, लेकिन समय के साथ स्थानीय स्तर पर इसके प्रभाव भी सामने आने लगे। कई स्थानों पर होटल, होमस्टे, रिसॉर्ट, आवासीय भवन और व्यावसायिक परियोजनाएं ठहराव का शिकार हो गईं।

पर्यटन और निवेश को मिल सकती है नई संजीवनी
उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा पर्यटन पर आधारित है। विशेष रूप से गढ़वाल मंडल के वे क्षेत्र, जहां से रेल परियोजना गुजर रही है, धार्मिक और प्राकृतिक पर्यटन के महत्वपूर्ण केंद्र हैं। ऐसे में फ्रीज जोन प्रतिबंधों की समीक्षा को स्थानीय विकास के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। सरकार के पास विभिन्न जिलों से लगातार सुझाव पहुंच रहे थे कि रेलवे ट्रैक का अधिकांश कार्य पूरा होने के बाद वर्तमान व्यवस्था अब विकास गतिविधियों में बाधा बन रही है। इसी को ध्यान में रखते हुए आवास विभाग ने जमीनी स्तर पर स्थिति का आकलन शुरू किया है। यदि तकनीकी परीक्षण और सुरक्षा मानकों के अनुरूप प्रतिबंधों में आंशिक शिथिलता दी जाती है, तो रेलवे कॉरिडोर के आसपास होटल, रिसॉर्ट, होमस्टे, आवासीय कॉलोनियों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के विकास का रास्ता खुल सकता है। इससे निजी निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर बढ़ेंगे। रेल संपर्क शुरू होने के बाद इन क्षेत्रों में पर्यटकों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। ऐसे में पर्यटन आधारित बुनियादी ढांचे का विकास समय की आवश्यकता भी है। फ्रीज जोन समीक्षा इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।

जनहित और सुरक्षा के बीच संतुलन की कोशिश
राज्य सरकार स्पष्ट कर चुकी है कि किसी भी प्रकार की राहत रेलवे सुरक्षा से समझौता करके नहीं दी जाएगी। यही कारण है कि समीक्षा प्रक्रिया को तकनीकी और प्रशासनिक स्तर पर पूरी सावधानी के साथ आगे बढ़ाया जा रहा है। डॉ. आर. राजेश कुमार के निर्देश पर जिलों से ऐसे क्षेत्रों की पहचान कराई जा रही है, जहां रेलवे निर्माण कार्य लगभग पूरा हो चुका है और जहां विकास गतिविधियों को नियंत्रित एवं सुरक्षित तरीके से अनुमति दी जा सकती है। इसके साथ ही रेलवे से जुड़े सभी तकनीकी पहलुओं, भूगर्भीय परिस्थितियों और सुरक्षा मानकों का भी परीक्षण किया जाएगा। सरकार की मंशा केवल प्रतिबंध हटाने की नहीं, बल्कि ऐसी संतुलित व्यवस्था विकसित करने की है, जिससे रेलवे परियोजना के दीर्घकालिक हित सुरक्षित रहें और स्थानीय नागरिकों को भी विकास का लाभ मिल सके।

पहाड़ों की अर्थव्यवस्था को मिल सकता है नया आधार
ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना को उत्तराखंड की विकास यात्रा का गेम चेंजर माना जाता है। रेल संपर्क से जहां चारधाम यात्रा और पर्यटन को नई गति मिलेगी, वहीं इसके आसपास विकसित होने वाली आर्थिक गतिविधियां भी प्रदेश की तस्वीर बदल सकती हैं। फ्रीज जोन समीक्षा की यह पहल उसी व्यापक सोच का हिस्सा है, जिसमें धामी सरकार विकास, निवेश और रोजगार को नई गति देने के साथ-साथ स्थानीय जरूरतों को भी प्राथमिकता दे रही है। यदि प्रस्ताव को अंतिम मंजूरी मिलती है, तो लंबे समय से ठहरी विकास योजनाओं को नई रफ्तार मिलेगी और रेलवे कॉरिडोर से जुड़े क्षेत्रों में निवेश का अनुकूल माहौल तैयार होगा।

बयान
*डॉ. आर. राजेश कुमार, सचिव आवास *
“मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर रेलवे फ्रीज जोन में लागू प्रतिबंधों की समीक्षा की जा रही है। जहां रेलवे परियोजना का कार्य लगभग पूर्ण हो चुका है, वहां की स्थिति का तकनीकी और प्रशासनिक स्तर पर आकलन कराया जा रहा है। हमारा प्रयास है कि रेलवे सुरक्षा और तकनीकी मानकों से किसी प्रकार का समझौता किए बिना स्थानीय नागरिकों, उद्यमियों और निवेशकों को विकास के बेहतर अवसर उपलब्ध कराए जाएं। जनहित और परियोजना हित दोनों को समान प्राथमिकता देते हुए व्यावहारिक समाधान तैयार किए जाएंगे।”

जलभराव, डेंगू नियंत्रण और आपदा प्रबंधन को सभी विभागों को प्रभावी कार्ययोजना के साथ कार्य करने के निर्देश

जिलाधिकारी डॉ0आशीष चौहान ने मानसून अवधि में संभावित आपदाओं, डेंगू एवं मलेरिया की रोकथाम, जलभराव की समस्या तथा स्वच्छता व्यवस्था की प्रभावी मॉनिटरिंग को लेकर संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ कलेक्ट्रेट सभागार से वर्चुअल बैठक कर व्यापक समीक्षा की।

जिलाधिकारी डॉ0 आशीष चौहान ने कहा कि मानसून अवधि में सभी विभाग अलर्ट मोड पर कार्य करें तथा प्रतिदिन अपने-अपने क्षेत्रों की निगरानी करते हुए समस्याओं का तत्काल समाधान सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि मानसून के दौरान किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी तथा सभी विभाग समन्वय के साथ पूर्व तैयारी सुनिश्चित करें।

जिलाधिकारी ने संभावित बाढ़ एवं जलभराव की स्थिति से निपटने के लिए जनपद के नदी किनारे स्थित लो-लाइन क्षेत्रों में जीपीएस युक्त जेसीबी मशीनें पूर्व से ही तैनात रखने के निर्देश दिए, ताकि आवश्यकता पड़ने पर तत्काल राहत एवं बचाव कार्य शुरू किए जा सकें। मुख्य चिकित्साधिकारी को निर्देशित किया गया कि सभी आपदा संचालन केंद्रों (डीओसी) पर आवश्यक चिकित्सा संसाधनों के साथ एम्बुलेंस की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए, जिससे किसी भी आपात स्थिति में प्रभावित व्यक्तियों को तत्काल चिकित्सीय सहायता उपलब्ध कराई जा सके।

जिलाधिकारी ने वन विभाग के अधिकारियों को निर्देशित किया कि पर्वतीय, दुर्गम एवं वन क्षेत्रों में संभावित आपदा की त्वरित सूचना उपलब्ध कराने हेतु प्रभावी सूचना तंत्र विकसित किया जाए, जिससे राहत एवं बचाव कार्यों में किसी प्रकार की देरी न हो।

डीएम ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि आपदा प्रबंधन, स्वच्छता, जलभराव निस्तारण, डेंगू एवं मलेरिया नियंत्रण तथा जनजागरूकता अभियान को पूरी गंभीरता एवं जिम्मेदारी के साथ संचालित किया जाए, ताकि जनपदवासियों की सुरक्षा एवं स्वास्थ्य की प्रभावी रूप से रक्षा की जा सके।

जिलाधिकारी ने नगर निगम एवं सभी नगर निकायों को निर्देशित किया कि डेंगू, मलेरिया, जलभराव तथा संभावित आपदा की रोकथाम के लिए विस्तृत कार्ययोजना के साथ कार्य करें तथा और अधिक फागिंग मशीन क्रय करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि संवेदनशील क्षेत्रों का चिन्हीकरण कर नियमित फॉगिंग, एंटी लार्वा छिड़काव, नालियों की सफाई तथा जल निकासी की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

स्वास्थ्य विभाग को निर्देश देते हुए जिलाधिकारी ने कहा कि आशा कार्यकर्ताओं के माध्यम से घर-घर सर्वे अभियान में तेजी लाई जाए। प्रत्येक घर में संभावित डेंगू लार्वा की जांच, बुखार से पीड़ित व्यक्तियों की पहचान तथा आवश्यक स्वास्थ्य परामर्श उपलब्ध कराया जाए। संदिग्ध मामलों की तत्काल जांच एवं उपचार सुनिश्चित किया जाए।

शिक्षण संस्थानों में डेंगू से बचाव को सर्वाेच्च प्राथमिकता देते हुए जिलाधिकारी ने मुख्य शिक्षा अधिकारी, नगर निगम एवं नगर निकायों को निर्देश दिए कि अपने-अपने क्षेत्र के सभी विद्यालयों का निरीक्षण कर यह प्रमाणित किया जाए कि विद्यालय परिसर डेंगू की दृष्टि से सुरक्षित हैं। विद्यालयों में कहीं भी जलभराव, गंदगी अथवा मच्छरों के पनपने की स्थिति नहीं होनी चाहिए।

मुख्य शिक्षा अधिकारी को निर्देशित किया गया कि जनपद के सभी सरकारी एवं निजी विद्यालयों में यह सुनिश्चित कराया जाए कि छात्र-छात्राएं पूर्ण बाजू (फुल स्लीव) की वर्दी अथवा वस्त्र पहनकर विद्यालय आएं, जिससे मच्छरों के काटने से बचाव हो सके। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि इस संबंध में निर्देशों का पालन न करने वाले विद्यालयों के विरुद्ध एपिडेमिक एक्ट के अंतर्गत कार्रवाई की जाएगी। साथ ही सभी विद्यालयों एवं कार्यालय परिसरों में नियमित साफ-सफाई, फॉगिंग एवं डेंगू निरोधक उपाय सुनिश्चित किए जाएं।

जनपद में कूड़ा उठान की समीक्षा करते हुए जिलाधिकारी ने सभी उप जिलाधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में नए बने गार्बेज प्वाइंटों का चिन्हीकरण कर तत्काल सफाई कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इस कार्य में नगर निगम एवं नगर निकायों के साथ समन्वय स्थापित कर अभियान चलाया जाए। जिलाधिकारी ने चेतावनी दी कि यदि किसी क्षेत्र में कूड़े के ढेर अथवा नए गार्बेज प्वाइंट पाए जाते हैं तो संबंधित उप जिलाधिकारी एवं नगर निकाय के अधिकारियों की जवाबदेही तय करते हुए आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

बैठक में कलेक्ट्रेट सभागार अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व के के मिश्रा, जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी ऋषभ कुमार, सिंचाई विभाग लोक निर्माण के विभाग के अधिकारी उपस्थित रहे तथा समस्त उप जिलाधिकारी नगर निगम, नगर निकाय एवं समस्त संबंधित विभागों के अधिकारी वर्चुअल माध्यम से बैठक में जुड़े रहे।

180 नेचर गाइडों को मिला रोजगार पंजीकरण प्रमाण-पत्र, सीएम धामी ने दी बधाई

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री आवास सभागार से तराई पश्चिमी वन प्रभाग, रामनगर के फांटो जोन में आयोजित नेचर गाइड प्रशिक्षित युवाओं को रोजगार पंजीकरण प्रमाण-पत्र वितरण कार्यक्रम में वर्चुअल माध्यम से प्रतिभाग किया। इस अवसर पर 180 महिला एवं पुरुष नेचर गाइडों को रोजगार पंजीकरण प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए।

मुख्यमंत्री ने सभी नेचर गाइडों को बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि ये प्रमाण-पत्र केवल रोजगार का दस्तावेज नहीं हैं, बल्कि युवाओं के कौशल, मेहनत और प्रकृति संरक्षण के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का प्रमाण हैं। उन्होंने कहा कि नेचर गाइड स्थानीय युवाओं को रोजगार से जोड़ने के साथ ही आत्मनिर्भर उत्तराखंड के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें विशेष प्रसन्नता है कि प्रमाण-पत्र प्राप्त करने वाले अनेक युवा रिवर्स पलायन कर अपने गांव और प्रदेश लौटे हैं। उन्होंने कहा कि यह केवल इन युवाओं की व्यक्तिगत सफलता नहीं है, बल्कि उत्तराखंड के गांवों में लौटते विश्वास, समृद्धि और रोजगार के अवसरों का भी प्रतीक है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि फांटो जोन आज केवल एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि ईको-टूरिज्म और समुदाय आधारित पर्यटन का उत्कृष्ट मॉडल बन चुका है। क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता, समृद्ध जैव विविधता, घने वन, शांत वातावरण और वन्यजीव देश-विदेश के पर्यटकों को आकर्षित कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि फांटो जोन टाइगर साइटिंग के लिए भी तेजी से अपनी अलग पहचान बना रहा है। यहां विकसित ट्री हाउस पर्यटकों को प्रकृति के बीच अनूठा अनुभव प्रदान कर रहा है और पर्यटन गतिविधियों से प्रदेश को राजस्व प्राप्त होने के साथ-साथ स्थानीय लोगों को भी आर्थिक लाभ मिल रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता है कि प्रकृति का संरक्षण हो और प्रकृति से जुड़े स्थानीय समुदायों का जीवन भी समृद्ध बने। ईको-टूरिज्म के माध्यम से स्थानीय युवाओं, महिलाओं, होमस्टे संचालकों, छोटे व्यापारियों, वाहन चालकों, स्थानीय उत्पाद निर्माताओं और ग्रामीण परिवारों को रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध हो रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार के पांच वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर यह संतोष का विषय है कि उत्तराखंड ने विकास, सुशासन, रोजगार सृजन और जनकल्याण के क्षेत्र में अनेक नए आयाम स्थापित किए हैं। ईको-टूरिज्म और नेचर गाइड जैसी पहलें स्थानीय युवाओं को उनके गांवों में सम्मानजनक आजीविका उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। उन्होंने कहा कि मुख्य सेवक के रूप में उनका निरंतर प्रयास रहा है कि उत्तराखंड का युवा अपने ही प्रदेश में रोजगार प्राप्त करे, अपने गांव में रहे और अपने परिवार के साथ रहते हुए प्रदेश के विकास में सहभागी बने।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और प्रेरणा से राज्य सरकार पर्यटन को केवल पर्यटन गतिविधि तक सीमित न रखकर रोजगार, स्वरोजगार, स्थानीय अर्थव्यवस्था और रिवर्स पलायन से जोड़ने का कार्य कर रही है। होमस्टे, शीतकालीन पर्यटन, एडवेंचर टूरिज्म, ईको-टूरिज्म, वेलनेस टूरिज्म, डेस्टिनेशन वेडिंग और आध्यात्मिक पर्यटन जैसे क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर सृजित किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इन प्रयासों का परिणाम है कि प्रदेश में रिवर्स पलायन में 44 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। यह इस बात का संकेत है कि उत्तराखंड के गांव अब केवल पुरानी यादों के नहीं, बल्कि नई संभावनाओं के भी केंद्र बन रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि गांवों में रोजगार के अवसर उपलब्ध होने से पलायन को रोकने में मदद मिलेगी, पर्यटन बढ़ने से स्थानीय व्यापार को गति मिलेगी और स्थानीय समुदायों के समृद्ध होने से आत्मनिर्भर उत्तराखंड का सपना साकार होगा।

मुख्यमंत्री ने नेचर गाइडों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि उनका दायित्व केवल पर्यटकों को जंगल घुमाने तक सीमित नहीं है। वे उत्तराखंड की पहचान, जंगलों के प्रहरी, वन्यजीव संरक्षण के सहयोगी और प्रदेश की संस्कृति, परंपरा एवं अतिथि देवो भवः की भावना के ब्रांड एम्बेसडर हैं। उन्होंने कहा कि नेचर गाइड पर्यटकों को केवल वन्यजीवों का दर्शन नहीं कराते, बल्कि उन्हें प्रकृति के प्रति प्रेम और संवेदनशीलता का संदेश भी देते हैं। वे लोगों को यह समझाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं कि जंगल और वन्यजीव आने वाली पीढ़ियों की अमूल्य धरोहर हैं।

मुख्यमंत्री ने सभी नेचर गाइडों और प्रदेशवासियों से प्रकृति एवं वन्यजीवों के संरक्षण, पर्यावरण के प्रति जनजागरूकता, गांवों की समृद्धि और स्थानीय युवाओं को रोजगार से जोड़ने का संकल्प लेने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जनभागीदारी के माध्यम से पर्यटन को बढ़ावा देकर उत्तराखंड को देश का श्रेष्ठ और आत्मनिर्भर राज्य बनाने के सरकार के ‘विकल्प रहित संकल्प’ को साकार किया जाएगा।

इस अवसर पर वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, वन अधिकारी, जनप्रतिनिधि, नेचर गाइड तथा बड़ी संख्या में स्थानीय लोग उपस्थित रहे।

जिले में दुर्लभ बीमारी से पीड़ित बच्चों के चिन्हीकरण एवं उपचार की डीएम ने की समीक्षा, हर संभव सहायता के निर्देश

जनपद देहरादून में दुर्लभ (रेयर) बीमारियों से पीड़ित बच्चों को समयबद्ध एवं बेहतर उपचार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के अंतर्गत चिन्हित बच्चों के उपचार, आर्थिक सहायता, रेफरल प्रक्रिया तथा उपचार की प्रगति का विस्तृत परीक्षण किया गया।

बैठक में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. मनोज शर्मा ने अवगत कराया कि भारत सरकार के राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत जनपद में अब तक 16 बच्चों का चिन्हीकरण किया गया है, जो विभिन्न दुर्लभ बीमारियों से पीड़ित हैं। इन बच्चों का उपचार देश के विभिन्न विशेषज्ञ चिकित्सा संस्थानों में प्रस्तावित है। उन्होंने बताया कि इन बीमारियों के उपचार में अत्यधिक व्यय होता है तथा कई मामलों में उपचार की अवधि भी लंबी होती है, जिसके कारण निरंतर आर्थिक सहयोग की आवश्यकता रहती है।

जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने निर्देश दिए कि प्रत्येक पात्र बच्चे के उपचार की प्रक्रिया में किसी भी स्तर पर अनावश्यक विलंब न होने पाए। उन्होंने कहा कि आवश्यक दस्तावेजों की पूर्ति, अनुमोदन, रेफरल एवं वित्तीय सहायता से संबंधित समस्त औपचारिकताएं निर्धारित समय-सीमा में पूरी की जाएं ताकि बच्चों का उपचार बिना किसी बाधा के जारी रह सके।
उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि यदि आरबीएसके योजना के अंतर्गत उपलब्ध सहायता के उपरांत भी उपचार पर अतिरिक्त धनराशि व्यय होती है, तो ऐसे मामलों में जिला प्रशासन द्वारा राइफल क्लब फंड से आवश्यक आर्थिक सहयोग उपलब्ध कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि आर्थिक संसाधनों के अभाव में किसी भी बच्चे का उपचार प्रभावित नहीं होना चाहिए।

जिलाधिकारी ने कहा कि गंभीर एवं दुर्लभ बीमारियों से पीड़ित बच्चों को समय पर गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना जिला प्रशासन की सर्वाेच्च प्राथमिकता है। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग, जिला कार्यक्रम अधिकारी एवं संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि सभी प्रकरणों की नियमित मॉनिटरिंग की जाए, अभिभावकों के साथ सतत संपर्क बनाए रखा जाए तथा शासन स्तर पर आवश्यक स्वीकृतियां एवं सहायता समयबद्ध रूप से सुनिश्चित कराई जाए।
बैठक में प्रत्येक बच्चे के उपचार की वर्तमान स्थिति, आर्थिक सहायता की उपलब्धता, रेफरल प्रक्रिया, चिकित्सकीय प्रगति तथा अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं की बिंदुवार समीक्षा की गई। जिलाधिकारी ने सभी संबंधित विभागों को आपसी समन्वय, संवेदनशीलता एवं तत्परता के साथ कार्य करते हुए यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए कि किसी भी बच्चे के उपचार में किसी प्रकार की प्रशासनिक अथवा वित्तीय बाधा उत्पन्न न हो।

बैठक में अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) के.के. मिश्रा, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. मनोज शर्मा, जिला कार्यक्रम अधिकारी (बाल विकास) जितेंद्र कुमार सहित संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

रामनगर-देहरादून एक्सप्रेस रेल सेवा का सीएम धामी व रेल मंत्री वैष्णव ने वर्चुअल माध्यम से किया संयुक्त फ्लैग ऑफ

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी एवं केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने वर्चुअल माध्यम से रामनगर-देहरादून एक्सप्रेस रेल सेवा का संयुक्त रूप से फ्लैग ऑफ कर नियमित संचालन का शुभारंभ किया। यह रेल सप्ताह में दो बार चलेगी। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि यह नई रेल सेवा उत्तराखंड की विकास यात्रा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। यह केवल एक नई ट्रेन नहीं, बल्कि कुमाऊं और गढ़वाल मंडलों के बीच विकास, संपर्क और अवसरों की नई जीवनरेखा सिद्ध होगी।

मुख्यमंत्री ने इस महत्वपूर्ण सौगात के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव का प्रदेशवासियों की ओर से आभार व्यक्त करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री के दूरदर्शी नेतृत्व में उत्तराखंड में रेलवे अवसंरचना का तेजी से विस्तार हो रहा है। उन्होंने कहा कि रामनगर से देहरादून तक संचालित होने वाली यह रेल सेवा काशीपुर, रोशनपुर, पिपलसाना, मुरादाबाद, नजीबाबाद और हरिद्वार होते हुए चलेगी, जिससे कुमाऊं और गढ़वाल के साथ-साथ पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बड़े क्षेत्र से भी प्रदेश की सीधी और सुगम रेल कनेक्टिविटी स्थापित होगी। इससे यात्रियों, विद्यार्थियों, व्यापारियों, कर्मचारियों तथा पर्यटकों को सुरक्षित, सुविधाजनक और समयबद्ध यात्रा का लाभ मिलेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय रेलवे आधुनिकता के नए युग में प्रवेश कर चुकी है। रेलवे सुरक्षा, गति, तकनीकी उन्नयन और यात्री सुविधाओं के क्षेत्र में अभूतपूर्व परिवर्तन हुए हैं। वंदे भारत और नमो भारत जैसी अत्याधुनिक ‘मेड इन इंडिया’ ट्रेनों ने भारत की तकनीकी क्षमता और आत्मनिर्भरता को नई पहचान दी है। उन्होंने कहा कि रेलवे अब हरित एवं अत्याधुनिक तकनीकों की दिशा में भी तेजी से आगे बढ़ रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में उत्तराखंड की महत्वाकांक्षी ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना का कार्य अंतिम चरण में है। यह परियोजना राज्य के सामाजिक, आर्थिक, धार्मिक तथा पर्यटन विकास को नई गति प्रदान करेगी। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड को दो वंदे भारत ट्रेनों की सौगात मिल चुकी है तथा वर्ष 2026-27 में प्रदेश को रेलवे अवसंरचना विकास के लिए रिकॉर्ड 4,769 करोड़ रुपये का रेल बजट प्राप्त हुआ है। वर्तमान में राज्य में लगभग 39 हजार करोड़ रुपये की विभिन्न रेलवे परियोजनाओं पर कार्य प्रगति पर है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों से उत्तराखंड में सड़क, रेल, स्वास्थ्य, शिक्षा, डिजिटल कनेक्टिविटी तथा आधारभूत संरचना के क्षेत्र में तेजी से विकास कार्य हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि डबल इंजन सरकार के प्रयासों से विकास की गति दोगुनी हुई है और राज्य सरकार उत्तराखंड को देश का अग्रणी राज्य बनाने की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है।

केंद्रीय रेल मंत्री बोले- यात्रियों की संख्या बढ़ने पर रामनगर-देहरादून एक्सप्रेस का संचालन प्रतिदिन किया जाएगा

केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय रेल देश के सर्वांगीण विकास का मजबूत आधार बन रही है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में रेल संपर्क को सुदृढ़ करने के लिए केंद्र सरकार निरंतर कार्य कर रही है और नई रेल सेवाएं प्रदेश के आर्थिक विकास, पर्यटन और जनसुविधाओं को नई गति प्रदान करेंगी। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि रामनगर-देहरादून एक्सप्रेस क्षेत्रीय संपर्क को मजबूत करने के साथ-साथ आम नागरिकों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध होगी। अगर यात्रियों की संख्या बढ़ेगी तो इसे प्रतिदिन चलाया जायेगा। उन्होंने कहा कि यह एक्सप्रेस गढ़वाल और कुमाऊं के लिए सेतु का कार्य करेगी।

उत्तराखण्ड में रेलवे के विस्तार के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के प्रयासों की सराहना करते हुए केन्द्रीय रेल मंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड से देश के विभिन्न हिस्सों को जोड़ने के लिए प्रमुख नई और विस्तसारित 20 रेल सेवाएं शुरू की गई। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड के 11 रेलवे स्टेशनों का आधुनिकीकरण किया जा रहा है। उन्होंने राज्य में रेलवे के विस्तार के लिए पूरा सहयोग देने के लिए मुख्यमंत्री का आभार भी व्यक्त किया।
रेल मंत्रालय द्वारा वर्ष 2023 से अब तक उत्तराखंड से देश के विभिन्न हिस्सों को जोड़ने के लिए शुरू की गई प्रमुख नई/विस्तारित नियमित रेल सेवाओं की सूची-

1. देहरादून दृ आनंद विहार टर्मिनल वंदे भारत एक्सप्रेस
2. देहरादून दृ लखनऊ वंदे भारत एक्सप्रेस
3. योग नगरी ऋषिकेश दृ प्रयागराज एक्सप्रेस
4. योग नगरी ऋषिकेश दृ वीरभूमि (मालदा टाउन) एक्सप्रेस
5. योग नगरी ऋषिकेश दृ यशवंतपुर (बेंगलुरु) एक्सप्रेस
6. देहरादून दृ बनारस एक्सप्रेस
7. देहरादून दृ सुभेदारगंज (प्रयागराज) एक्सप्रेस
8. हरिद्वार दृ गोरखपुर एक्सप्रेस
9. हरिद्वार दृ अमृतसर एक्सप्रेस (विस्तारित/नई सेवा)
10. टनकपुर दृ दिल्ली (पूर्णागिरि जनशताब्दी सेवा का विस्तार/सुदृढ़ीकरण)
11. लालकुआँ दृ राजकोट एक्सप्रेस (विस्तारित सेवा)
12. लालकुआँ दृ कोलकाता एक्सप्रेस
13. काठगोदाम दृ जैसलमेर एक्सप्रेस
14. काठगोदाम दृ मुंबई (बांद्रा टर्मिनस) एक्सप्रेस (विस्तारित सेवा)
15. देहरादून दृ कोटा एक्सप्रेस (सुधारित/विस्तारित सेवा)
16. हरिद्वार दृ लोकमान्य तिलक टर्मिनस विशेष सेवा (बाद में नियमित संचालन)
17. लालकुआँ दृ किशनगंज एक्सप्रेस (विशेष से नियमित संचालन की दिशा में सेवा)
18. उत्तराखंड से विभिन्न राज्यों के लिए नई मौसमी/विशेष सेवाओं में से एक को बाद में नियमित सेवा के रूप में शामिल किया गया।
19. टनकपुर से नांदेड़ साप्ताहिक एक्सप्रेस।
20. रामनगर- देहरादून एक्सप्रेस रेल सेवा।

इस अवसर पर वर्चुअल माध्यम से हरिद्वार सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत, गढ़वाल सांसद अनिल बलूनी, विधायक दीवान सिंह बिष्ट, अरविंद पांडे और रेलवे के अधिकारी मौजूद थे।

आपदा प्रबंधन को लेकर बोले सीएम धामी, ग्राउंड जीरो पर उतरें अधिकारी, जनता की सुरक्षा सर्वाेच्च प्राथमिकता

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री आवास में राज्य के सभी जनपदों से अतिवृष्टि, मानसून की स्थिति, चारधाम यात्रा, डेंगू की रोकथाम तथा आपदा प्रबंधन की तैयारियों की विस्तृत समीक्षा करते हुए अधिकारियों को स्पष्ट शब्दों में निर्देश दिए कि जनता की सुरक्षा सर्वाेच्च प्राथमिकता है और किसी भी स्तर पर लापरवाही, शिथिलता अथवा उदासीनता किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि अधिकारी केवल बैठकों तक सीमित न रहें, बल्कि स्वयं ग्राउंड जीरो पर पहुंचकर व्यवस्थाओं का निरीक्षण करें तथा प्रत्येक स्थिति पर सतत निगरानी बनाए रखें।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मानसून के दौरान प्रत्येक अधिकारी को चौबीसों घंटे अलर्ट मोड में रहना होगा। किसी भी प्रकार की आपदा अथवा आपात स्थिति में राहत एवं बचाव कार्यों में एक क्षण की भी देरी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिए कि जिले में होने वाली प्रत्येक महत्वपूर्ण घटना की जानकारी तत्काल मुख्यमंत्री कार्यालय एवं राज्य आपदा नियंत्रण कक्ष को उपलब्ध कराई जाए तथा राहत एवं पुनर्वास कार्यों में किसी प्रकार की ढिलाई न बरती जाए।

मुख्यमंत्री ने सभी जिलाधिकारियों से जिलेवार सड़कों की स्थिति, भूस्खलन संभावित क्षेत्रों, चारधाम यात्रा मार्गों, यात्रियों की संख्या तथा विभिन्न धामों में व्यवस्थाओं की विस्तार से जानकारी प्राप्त की। उन्होंने कहा कि चारधाम यात्रा राज्य की आस्था और अर्थव्यवस्था दोनों से जुड़ी है। इसलिए यात्रा मार्गों पर यात्रियों की सुरक्षा, सुगम आवाजाही, चिकित्सा सुविधाएं, पेयजल, स्वच्छता तथा यातायात प्रबंधन में किसी प्रकार की कमी नहीं होनी चाहिए।

समीक्षा के दौरान अधिकारियों ने अवगत कराया कि इस वर्ष अब तक 44.65 लाख से अधिक श्रद्धालु चारधाम यात्रा कर चुके हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं का राज्य में आगमन उत्तराखण्ड के प्रति लोगों की आस्था का प्रमाण है। सरकार की जिम्मेदारी है कि प्रत्येक श्रद्धालु सुरक्षित, व्यवस्थित और संतोषजनक यात्रा का अनुभव लेकर लौटे।

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि जिन स्थानों पर भूस्खलन अथवा मार्ग अवरुद्ध होने की संभावना अधिक रहती है, वहां पहले से पर्याप्त संख्या में जेसीबी, पोकलैंड मशीनें, आवश्यक उपकरण तथा तकनीकी दल तैनात किए जाएं ताकि सड़क बंद होने की स्थिति में तत्काल यातायात बहाल किया जा सके। उन्होंने संवेदनशील क्षेत्रों में जीपीएस एवं आधुनिक संचार प्रणाली का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी जिलों में एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, पुलिस, स्वास्थ्य, लोक निर्माण, विद्युत, पेयजल, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति सहित सभी विभाग पूर्ण समन्वय के साथ कार्य करें। किसी भी विभाग द्वारा यह नहीं कहा जाना चाहिए कि सूचना समय पर नहीं मिली या संसाधन उपलब्ध नहीं थे। प्रत्येक विभाग अपनी जिम्मेदारी तय करते हुए समयबद्ध कार्य सुनिश्चित करे।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि यदि किसी भी स्थान पर भारी वर्षा अथवा भूस्खलन के कारण बिजली, पेयजल अथवा संचार सेवाएं बाधित होती हैं तो उनकी बहाली सर्वाेच्च प्राथमिकता के आधार पर की जाए। आमजन को मूलभूत सुविधाओं से लंबे समय तक वंचित नहीं रखा जा सकता। उन्होंने कहा कि आवश्यक होने पर अतिरिक्त टीमें भेजी जाएं और वैकल्पिक व्यवस्थाएं तत्काल लागू की जाएं।

मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से निर्देश दिए कि दूरस्थ एवं संवेदनशील क्षेत्रों में खाद्यान्न, दवाइयों, ईंधन तथा अन्य आवश्यक वस्तुओं का पर्याप्त भंडारण पहले से सुनिश्चित किया जाए ताकि सड़क बंद होने की स्थिति में स्थानीय नागरिकों को किसी प्रकार की कठिनाई का सामना न करना पड़े।

उन्होंने गर्भवती महिलाओं, वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांगजनों तथा गंभीर बीमारियों से पीड़ित व्यक्तियों की विशेष निगरानी के निर्देश देते हुए कहा कि संवेदनशील क्षेत्रों में रहने वाली गर्भवती महिलाओं को आवश्यकता के अनुसार समय रहते सुरक्षित स्थानों अथवा चिकित्सा सुविधाओं से युक्त स्थानों पर पहुंचाया जाए। जहां आवश्यकता हो वहां हेलीकॉप्टर सेवा भी उपलब्ध कराई जाए। किसी भी परिस्थिति में चिकित्सा सहायता के अभाव में जनहानि नहीं होनी चाहिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने संवेदनशील क्षेत्रों में आपातकालीन परिस्थितियों के लिए हेली सेवा उपलब्ध रखने का निर्णय लिया है, ताकि आवश्यकता पड़ने पर राहत एवं बचाव कार्यों में तत्काल सहायता पहुंचाई जा सके।

डेंगू की रोकथाम की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने इसे राज्य सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकताओं में शामिल बताते हुए सभी नगर निगमों, नगर पालिकाओं, नगर पंचायतों तथा ग्राम पंचायतों को युद्धस्तर पर अभियान चलाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जलभराव वाले सभी स्थानों की तत्काल पहचान कर वहां पानी की निकासी सुनिश्चित की जाए तथा नियमित फॉगिंग, एंटी लार्वा छिड़काव और विशेष स्वच्छता अभियान चलाया जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि केवल सरकारी विभागों के प्रयास पर्याप्त नहीं होंगे। डेंगू के विरुद्ध व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाते हुए स्वयंसेवी संगठनों, सामाजिक संस्थाओं, युवा मंडलों, महिला समूहों तथा स्थानीय जनप्रतिनिधियों को भी इस अभियान से जोड़ा जाए। प्रत्येक नागरिक को यह समझाया जाए कि अपने घरों एवं आसपास पानी जमा न होने दें।

उन्होंने स्वास्थ्य विभाग को निर्देश दिए कि सभी जिला अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में डेंगू जांच किट, पर्याप्त दवाइयां, रक्त की उपलब्धता, बेड तथा चिकित्सा कर्मियों की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। मरीजों को उपचार में किसी प्रकार की कठिनाई नहीं होनी चाहिए।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि आपदा प्रबंधन केवल कागजों पर नहीं, बल्कि धरातल पर दिखाई देना चाहिए। अधिकारी जनता के बीच जाएं, समस्याओं का समाधान करें और प्रत्येक स्थिति की व्यक्तिगत निगरानी करें। जनता का विश्वास ही सरकार की सबसे बड़ी पूंजी है और उस विश्वास को बनाए रखना प्रत्येक अधिकारी का दायित्व है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने समीक्षा बैठक के दौरान अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि राज्य में गत वर्ष आई आपदाओं से संबंधित जिन कार्यों को पूरा किया जाना था, उनमें से कोई भी कार्य लंबित नहीं रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि आपदा के बाद पुनर्निर्माण एवं सुरक्षात्मक कार्यों में किसी भी प्रकार की देरी भविष्य में बड़ी समस्या का कारण बन सकती है। सभी जिलाधिकारी यह सुनिश्चित करें कि पिछले वर्ष स्वीकृत सभी कार्य निर्धारित समयसीमा के भीतर पूर्ण हों तथा उनकी अद्यतन प्रगति रिपोर्ट नियमित रूप से शासन एवं मुख्यमंत्री कार्यालय को उपलब्ध कराई जाए।

मुख्यमंत्री ने अल्मोड़ा नगर में संचालित मास्टर प्लान के अंतर्गत विभिन्न विकास कार्यों की समीक्षा करते हुए अधिकारियों से प्रगति की जानकारी प्राप्त की। उन्होंने निर्देश दिए कि राज्य के सभी जनपदों में 15 अक्टूबर तक पूर्ण होने वाले सभी विकास कार्यों की विस्तृत सूची एवं उनकी वर्तमान प्रगति तत्काल मुख्यमंत्री कार्यालय को उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने कहा कि किसी भी परियोजना में अनावश्यक विलंब स्वीकार नहीं किया जाएगा। जिन कार्यों में बाधाएं हैं, उन्हें तत्काल चिन्हित कर उनका समाधान किया जाए।

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि राज्य सरकार द्वारा की गई सभी मुख्यमंत्री घोषणाओं की नियमित समीक्षा मुख्य सचिव की अध्यक्षता में की जाए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक घोषणा समयबद्ध ढंग से धरातल पर दिखाई देनी चाहिए। जनता के बीच की गई घोषणाएं केवल कागजों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि उनका लाभ समय पर आम नागरिकों तक पहुंचे। जिन विभागों में कार्यों की गति धीमी है, वे अपनी कार्यप्रणाली में सुधार लाएं और व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय करें।

बैठक में मुख्यमंत्री ने राज्यभर में संचालित ष्जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वारष् अभियान की सराहना करते हुए कहा कि इस कार्यक्रम ने सरकार और जनता के बीच संवाद को और अधिक मजबूत किया है। उन्होंने निर्देश दिए कि इस अभियान का तीसरा चरण आगामी 15 सितंबर से नए स्वरूप और अधिक प्रभावी तरीके से प्रारंभ किया जाएगा। इसके लिए अभी से विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जाए ताकि अधिक से अधिक लोगों को योजनाओं का लाभ मिल सके।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस अभियान का उद्देश्य केवल शिविर लगाना नहीं है, बल्कि सरकार को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना है। प्रत्येक पात्र व्यक्ति को सरकारी योजनाओं का लाभ मिले, उसकी समस्याओं का मौके पर समाधान हो तथा प्रमाण पत्र, पेंशन, आयुष्मान कार्ड, राजस्व संबंधी सेवाएं और अन्य सुविधाएं सरलता से उपलब्ध हों। उन्होंने कहा कि यही सुशासन की वास्तविक पहचान है।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि शिविरों को केवल औपचारिकता न बनाया जाए। प्रत्येक शिविर का परिणाम धरातल पर दिखाई देना चाहिए। आमजन को यह महसूस होना चाहिए कि सरकार स्वयं उनके द्वार तक पहुंची है। उन्होंने कहा कि अधिकारी जनता की समस्याओं को गंभीरता से सुनें और उनका समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करें।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि जनता के प्रति उत्तरदायी बनना ही सुशासन की पहली शर्त है। प्रत्येक अधिकारी अपने दायित्वों का ईमानदारीपूर्वक निर्वहन करे। यदि किसी स्तर पर लापरवाही या उदासीनता पाई गई तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी।

बैठक में मुख्यमंत्री ने मानसून के दौरान सभी पुलों का सेफ्टी ऑडिट कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिन पुलों की स्थिति कमजोर है, वहां तत्काल आवश्यक सुरक्षा उपाय किए जाएं तथा आवश्यकता पड़ने पर यातायात को नियंत्रित किया जाए। किसी भी प्रकार का जोखिम उठाने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

उन्होंने नगर निकायों एवं संबंधित विभागों को निर्देश दिए कि सभी शहरों, कस्बों एवं ग्रामीण क्षेत्रों में नालों की विशेष सफाई अभियान चलाया जाए ताकि जलभराव की समस्या उत्पन्न न हो। जहां भी जल निकासी बाधित है, वहां तत्काल कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि बरसात के दौरान जलभराव से होने वाली समस्याओं को हर हाल में रोका जाए।

मुख्यमंत्री ने दूरस्थ एवं दुर्गम क्षेत्रों में वैकल्पिक संचार व्यवस्था विकसित करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि यदि किसी स्थान पर प्राकृतिक आपदा के कारण मोबाइल अथवा अन्य संचार सेवाएं बाधित होती हैं तो तत्काल वैकल्पिक संचार माध्यम उपलब्ध कराए जाएं ताकि राहत एवं बचाव कार्यों में कोई बाधा न आए।

उन्होंने कहा कि प्रदेश के प्रत्येक जिले में एम्बुलेंस सेवाएं, जीवनरक्षक दवाइयां, चिकित्सकीय उपकरण तथा आपातकालीन संसाधन पूरी तरह तैयार रहें। स्वास्थ्य विभाग, आपदा प्रबंधन विभाग और जिला प्रशासन पूर्ण समन्वय के साथ कार्य करें।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वे स्वयं सरकार द्वारा विभिन्न जन सेवाओं के लिए चलाए जा रहे दूरभाष नंबरो पर संपर्क कर व्यवस्थाओं की जांच करते हैं और आवश्यकता पड़ने पर किसी भी समय समीक्षा करेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार प्रत्येक परिस्थिति पर सतत निगरानी बनाए हुए है और आमजन की सुरक्षा एवं सुविधाओं के साथ किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा।

बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने हरेला पर्व का उल्लेख करते हुए अधिकारियों से कहा कि ष्एक पेड़ मां के नामष् अभियान को व्यापक जनआंदोलन का स्वरूप दिया जाए। सभी अधिकारी स्वयं पौधारोपण करें तथा समाज को पर्यावरण संरक्षण का संदेश दें। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी कार्यक्रम नहीं बल्कि सामाजिक दायित्व है और इसमें प्रत्येक नागरिक की सहभागिता आवश्यक है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि अधिकारी केवल कार्यालयों तक सीमित न रहें बल्कि नियमित रूप से ग्राउंड जीरो पर पहुंचकर व्यवस्थाओं का निरीक्षण करें। उन्होंने कहा कि जनता को यह भरोसा होना चाहिए कि प्रशासन हर कठिन परिस्थिति में उनके साथ खड़ा है।

उन्होंने सभी विभागों को निर्देश दिए कि विभागीय समन्वय को और अधिक मजबूत बनाया जाए। किसी भी आपदा अथवा आपात स्थिति में सभी एजेंसियां एक टीम के रूप में कार्य करें ताकि राहत एवं बचाव कार्यों में तेजी लाई जा सके और जनधन की हानि को न्यूनतम किया जा सके।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य केवल आपदा आने के बाद राहत कार्य करना नहीं है, बल्कि आपदा से पूर्व प्रभावी तैयारी, त्वरित प्रतिक्रिया और समयबद्ध पुनर्वास सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड की भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए प्रत्येक विभाग को हर समय सतर्क रहना होगा। किसी भी चुनौती का सामना केवल बेहतर समन्वय, त्वरित निर्णय और जिम्मेदार कार्यशैली से ही किया जा सकता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में मानसून की स्थिति पर राज्य सरकार लगातार नजर बनाए हुए है। सभी जिलाधिकारी अपने-अपने जनपदों में नियमित रूप से फील्ड भ्रमण करें तथा संवेदनशील क्षेत्रों का स्वयं निरीक्षण करें। उन्होंने निर्देश दिए कि किसी भी आपदा अथवा आपात स्थिति में राहत एवं बचाव कार्यों के लिए ष्गोल्डन ऑवरष् का विशेष ध्यान रखा जाए और प्रभावित क्षेत्रों तक प्रशासन की पहुंच तत्काल सुनिश्चित हो।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि आमजन की समस्याओं का समाधान केवल फाइलों के माध्यम से नहीं, बल्कि धरातल पर दिखाई देना चाहिए। उन्होंने कहा कि जनता का विश्वास बनाए रखना प्रत्येक अधिकारी का दायित्व है और शासन की प्राथमिकता भी। उन्होंने दोहराया कि जनता की सुरक्षा और सुविधा से जुड़ा कोई भी विषय लंबित नहीं रहना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार प्रत्येक जिले के कार्यों की नियमित समीक्षा करेगी। जिन अधिकारियों द्वारा उत्कृष्ट कार्य किया जाएगा, उन्हें प्रोत्साहित किया जाएगा, वहीं अपने दायित्वों के निर्वहन में लापरवाही बरतने वालों के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई भी सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जनहित के मामलों में किसी भी स्तर पर शिथिलता, उदासीनता अथवा लापरवाही को कतई स्वीकार नहीं किया जाएगा द्य

मुख्यमंत्री ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिए कि वे स्थानीय जनप्रतिनिधियों, स्वयंसेवी संगठनों, ग्राम प्रधानों, महिला मंगल दलों, युवक मंगल दलों तथा सामाजिक संगठनों के साथ नियमित समन्वय स्थापित करें, ताकि आपदा की स्थिति में राहत एवं बचाव कार्यों को और अधिक प्रभावी बनाया जा सके। उन्होंने कहा कि समाज की सहभागिता से ही आपदा प्रबंधन को अधिक सशक्त बनाया जा सकता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य प्रत्येक नागरिक तक समय पर सहायता पहुंचाना है। इसके लिए सभी विभागों को उत्तरदायित्व, संवेदनशीलता और त्वरित निर्णय क्षमता के साथ कार्य करना होगा। उन्होंने कहा कि शासन और प्रशासन का प्रत्येक अधिकारी स्वयं को जनता के प्रति जवाबदेह समझे और अपने दायित्वों का पूर्ण निष्ठा से निर्वहन करे।

बैठक में कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक एवं सतपाल महाराज, आपदा प्रबंधन राज्य सलाहकार समिति के उपाध्यक्ष विनय कुमार रोहिल्ला, मुख्य सचिव विनोद कुमार सुमन, सचिव विनय शंकर पांडे, जिलाधिकारी देहरादून आशीष चौहान, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक देहरादून, अपर सचिव बंशीधर तिवारी, विनीत कुमार सहित विभिन्न विभागों के सचिव एवं वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। वर्चुअल माध्यम से राज्य के सभी जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक, आपदा प्रबंधन विभाग, स्वास्थ्य विभाग, लोक निर्माण विभाग, विद्युत, पेयजल, नगर निकायों तथा अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी भी बैठक में शामिल हुए।

रुद्रपुर में बनेगा अत्याधुनिक विकास प्राधिकरण कार्यालय, ग्रीन बिल्डिंग मानकों के साथ समयबद्ध निर्माण के निर्देश

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दिशा-निर्देशों के क्रम में आवास विभाग के
सचिव आवास डॉ. आर. राजेश कुमार की अध्यक्षता में राज्य सचिवालय में रानीखेत में प्रस्तावित दो बहुमंजिला पार्किंग परियोजनाओं की समीक्षा की गई। बैठक में गैस गोदाम/आशियाना पार्क क्षेत्र तथा रोडवेज स्टेशन के समीप प्रस्तावित मल्टीलेवल पार्किंग योजनाओं की तकनीकी और वित्तीय स्थिति पर विस्तार से चर्चा हुई। गैस गोदाम-आशियाना पार्क के निकट प्रस्तावित पार्किंग परियोजना का प्रारंभिक आंगणन ₹935.48 लाख था, जिसमें तकनीकी संपरीक्षा प्रकोष्ठ ने ₹861.73 लाख की धनराशि को औचित्यपूर्ण माना है। चार तल वाली इस पार्किंग में 59 वाहनों के खड़े होने की व्यवस्था के साथ महिला एवं पुरुष शौचालय भी प्रस्तावित हैं। यह क्षेत्र सदर बाजार के समीप स्थित है, जहां पार्किंग सुविधा के अभाव में मुख्य मार्ग पर वाहनों के खड़े होने से अक्सर जाम की स्थिति बनती है।

वहीं रोडवेज स्टेशन के निकट प्रस्तावित दूसरी मल्टीलेवल पार्किंग के लिए ₹499.92 लाख का आंगणन तैयार किया गया था, जिसमें तकनीकी समिति ने ₹480.23 लाख को उचित पाया है। इस पार्किंग में 13 चारपहिया और 141 दोपहिया वाहनों सहित कुल 154 वाहनों की पार्किंग की सुविधा विकसित की जानी है। परियोजना के लिए छावनी परिषद, रानीखेत द्वारा अनापत्ति भी प्रदान की जा चुकी है। निर्माण के बाद पार्किंग का संचालन जिला स्तरीय विकास प्राधिकरण, अल्मोड़ा द्वारा किया जाएगा। बैठक में निर्णय लिया गया कि दोनों परियोजनाओं की व्यवहार्यता, दोपहिया और चारपहिया पार्किंग के अनुपात, संभावित राजस्व, राजस्व साझेदारी मॉडल तथा प्रस्तावित स्थलों की उपयोगिता का विस्तृत परीक्षण किया जाए। सभी औपचारिकताएं पूर्ण कर संशोधित आंगणन शीघ्र शासन को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए।

वहीं दूसरी बैठक में सचिव आवास डॉ. आर. राजेश कुमार ने ऊधमसिंहनगर जिला स्तरीय विकास प्राधिकरण के नए कार्यालय भवन निर्माण परियोजना की विस्तृत समीक्षा की। समीक्षा बैठक में परियोजना की प्रगति पर संतोष व्यक्त करते हुए सचिव ने निर्माण कार्य को निर्धारित समयसीमा में पूर्ण करने तथा भवन को पर्यावरण अनुकूल ग्रीन बिल्डिंग मॉडल के रूप में विकसित करने के निर्देश दिए। वर्तमान में जिला स्तरीय विकास प्राधिकरण ऊधमसिंहनगर विकास भवन से संचालित हो रहा है और उसका कोई स्वतंत्र कार्यालय भवन नहीं है। ऐसे में जिले में संचालित मास्टर प्लान, प्रधानमंत्री आवास योजना, ट्रांसपोर्ट नगर और अन्य बड़ी अवसंरचना परियोजनाओं की निगरानी के लिए एक समर्पित एवं आधुनिक कार्यालय की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही थी। प्रस्तावित भवन बनने के बाद प्रशासनिक और तकनीकी कार्यों के संचालन में उल्लेखनीय सुविधा मिलेगी। बैठक में बताया गया कि ग्राम कल्याणपुर, तहसील रुद्रपुर में 8740 वर्गमीटर भूमि पर यह परियोजना विकसित की जा रही है। जिलाधिकारी ऊधमसिंहनगर द्वारा जुलाई 2024 में यह भूमि प्राधिकरण को आवंटित की गई थी। स्थल की विशेषता यह है कि यह पूरी तरह मैदानी क्षेत्र में स्थित है और इसके आसपास कई सरकारी कार्यालय मौजूद हैं। दो ओर से सड़क संपर्क होने के साथ विद्युत, पेयजल और अन्य आधारभूत सुविधाएं भी उपलब्ध हैं।

ग्रीन बिल्डिंग बनेगी पहचान
प्रस्तावित भवन को आधुनिक ग्रीन बिल्डिंग मानकों के अनुरूप तैयार किया जा रहा है। इसमें सोलर एनर्जी सिस्टम, रेन वाटर हार्वेस्टिंग और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट जैसी पर्यावरणीय सुविधाएं शामिल होंगी। कुल भूमि के लगभग 40 प्रतिशत हिस्से में भवन निर्माण होगा, जबकि शेष क्षेत्र का उपयोग लैंडस्केपिंग और पार्किंग के लिए किया जाएगा। वर्तमान में परियोजना की भौतिक प्रगति लगभग 50 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है, जबकि वित्तीय प्रगति 20 प्रतिशत दर्ज की गई है। परियोजना की कुल अनुमानित लागत 18.01 करोड़ रुपये है, जिसका तकनीकी परीक्षण नियोजन विभाग द्वारा किया जा रहा है।परियोजना के वित्त पोषण के लिए भारत सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 में स्वीकृत 93 परियोजनाओं की सूची में इसे भी शामिल किया है। केंद्र सरकार द्वारा इस परियोजना के लिए दो करोड़ रुपये की स्वीकृति प्रदान की गई है। शेष कार्यों के लिए वर्तमान में प्राधिकरण की अवस्थापना निधि से व्यय किया जा रहा है। बैठक में सचिव डॉ. राजेश कुमार ने निर्देश दिए कि रेन वाटर हार्वेस्टिंग, लैंडस्केपिंग और ग्रीन बिल्डिंग संबंधी सभी मानकों का पूर्ण पालन किया जाए।

सचिव आवास डॉ. आर. राजेश कुमार ने कहा रानीखेत जैसे महत्वपूर्ण पर्यटन एवं व्यापारिक नगरों में सुव्यवस्थित पार्किंग व्यवस्था समय की आवश्यकता है। दोनों प्रस्तावों का तकनीकी और वित्तीय परीक्षण किया गया है। हमने संबंधित विभागों को निर्देश दिए हैं कि परियोजनाओं की व्यवहार्यता, राजस्व मॉडल और स्थानीय आवश्यकताओं का गहन अध्ययन कर संशोधित प्रस्ताव शीघ्र उपलब्ध कराएं। इन योजनाओं के क्रियान्वयन से जाम की समस्या कम होगी, पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय नागरिकों को बेहतर शहरी सुविधाएं उपलब्ध हो सकेंगी।

ऊधमसिंहनगर विकास प्राधिकरण का नया कार्यालय भवन आधुनिक प्रशासनिक जरूरतों और पर्यावरणीय मानकों को ध्यान में रखकर विकसित किया जा रहा है। यह भवन न केवल प्राधिकरण की कार्यक्षमता बढ़ाएगा बल्कि ग्रीन बिल्डिंग अवधारणा का उत्कृष्ट उदाहरण भी बनेगा। निर्माण कार्य गुणवत्ता के साथ समयबद्ध तरीके से पूरा हो, इसके लिए अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं।

नीति आयोग ने जारी की निवेश अनुकूलता सूचकांक 2026 की रिपोर्ट, उत्तराखण्ड को मिली बड़ी सफलता

उत्तराखण्ड ने निवेश के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए नीति आयोग द्वारा जारी निवेश अनुकूलता सूचकांक-2026 में पर्वतीय एवं पूर्वाेत्तर राज्यों की श्रेणी में समग्र रूप से प्रथम स्थान प्राप्त किया है। वहीं, देश के सभी राज्यों एवं केन्द्रशासित प्रदेशों में 47.5 अंकों के साथ 11वां स्थान प्राप्त कर उत्तराखण्ड ने ‘‘फ्रंट रनर’’ श्रेणी में अपना स्थान बनाया है।

इस सूचकांक में राज्यों एवं केन्द्रशासित प्रदेशों का मूल्यांकन व्यावसायिक वातावरण, आधारभूत संरचना, संसाधनों की उपलब्धता तथा वित्तीय स्वास्थ्य जैसे प्रमुख मानकों के आधार पर किया गया है। इसमें पर्वतीय एवं पूर्वाेत्तर राज्यों में उत्तराखण्ड द्वारा समग्र निवेश अनुकूलता सूचकांक में प्रथम, वित्तीय स्वास्थ्य में प्रथम, व्यावसायिक वातावरण में द्वितीय, संसाधन में द्वितीय तथा आधारभूत संरचना में तृतीय रैंकिंग प्राप्त की है।

मुख्यमंत्री ने राज्य को नीति आयोग के विभिन्न सूचकांकों में प्राप्त रैंकिंग को बताया प्रदेश के लिए बड़ी उपलब्धि

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि ‘नीति आयोग’ के निवेश अनुकूलता सूचकांक-2026 में उत्तराखण्ड का पर्वतीय एवं पूर्वाेत्तर राज्यों में प्रथम स्थान प्राप्त करना पूरे प्रदेश के लिए गौरव का विषय है। यह उपलब्धि राज्य सरकार की निवेशक हितैषी नीतियों, पारदर्शी शासन व्यवस्था, त्वरित निर्णय प्रक्रिया और बेहतर औद्योगिक वातावरण का प्रतिफल है। राज्य सरकार ‘विकल्प रहित संकल्प’ के साथ उत्तराखण्ड को देश का अग्रणी निवेश गंतव्य बनाने की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार निवेशकों को विश्वस्तरीय सुविधाएं उपलब्ध कराने, उद्योगों के लिए अनुकूल वातावरण विकसित करने, आधारभूत संरचना को और अधिक सुदृढ़ बनाने तथा स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित करने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह उपलब्धि उत्तराखण्ड में निवेश, औद्योगिक विकास और समावेशी आर्थिक प्रगति को नई गति प्रदान करने में मददगार रहेगी।