जोशीमठ में आई आपदा को लेकर हरीश रावत व प्रीतम सिंह ने की सीएम त्रिवेंद्र से मुलाकात

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत से पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत एवं प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष प्रीतम सिंह ने भेंट की। उन्होंने मुख्यमंत्री से जोशीमठ के रैणी क्षेत्र में आयी आपदा के सबंध में संचालित किये जा रहे राहत एवं बचाव कार्यों पर चर्चा की।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्य तेजी से चल रहे हैं। एनटीपीसी की सुरंग में मलवा अधिक भरने की वजह से उसे हटाने में समय अधिक लग रहा है। राहत एवं बचाव कार्यों में और तेजी आ सके इसके लिए अलग-अलग फोर्स एवं अधिकारियों को जिम्मेदारियां दी गई है। केन्द्र सरकार का भी इस आपदा में बचाव एवं राहत कार्यों में राज्य को पूरा सहयोग मिल रहा है। जवानों द्वारा जोखिम में कार्य कर समय पर पहुंचकर स्थिति को संभाला। गृह मंत्रालय भारत सरकार द्वारा भी राहत कार्यों की निरंतर समीक्षा की जा रही है।

पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने रैणी क्षेत्र में आपदा के बाद मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र के द्वारा राहत एवं बचाव कार्यों के लिए किये गये प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि जिस तेजी से मुख्यमंत्री ने सभी सबंधित राहत दलों एवं विभागों को त्वरित कार्यवाही के निर्देश दिये उससे स्थिति काफी हद तक नियंत्रित हुई है। आपदा पीड़ितों को भी आवश्यक सहायता समय पर उपलब्ध कराने के लिए भी उन्होंने मुख्यमंत्री के प्रयासों को सराहा। आपदा की सूचना प्राप्त होते ही मुख्यमंत्री ने प्रभावित क्षेत्रों का भ्रमण कर स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने इस आपदा में पीड़ितों को मदद करने के लिए शासन, जिला प्रशासन एवं एसडीआरएफ के साथ आर्मी, आईटीबीपी एवं एनडीआरएफ की टीमों के प्रयासों की भी सराहना की। राहत एवं बचाव कार्यों की लिए जल्द ही प्रभावित क्षेत्रों में इन बचाव दलों के पहुंचने से लोगों को राहत भी मिली है। उन्होंने का कि आपदाओं में त्वरित कार्यवाही से समाज में अच्छा प्रभाव पड़ता है। संकट के इस समय सभी लोग सरकार के साथ हैं।

पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र को इस संबंध में 06 सूत्री ज्ञापन दिया। उन्होंने सुझाव दिये कि प्रभावित क्षेत्रों के लोगों को विस्थापन की व्यवस्था की जाय। इस आपदा के कारणों की तह तक जाना भी जरूरी है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटना दुबारा न हो। राज्य की विभिन्न परियोजनाओं का सेफ्टी ऑडिट करने का भी उन्होंने सुझाव दिया। इस अवसर पर पूर्व विधायक गणेश गोदियाल सहित अन्य लोग उपस्थित थे।

वनाग्नि को बुझाने में मृतक फॉरेस्ट स्टॉफ के आश्रितों को दी जाएगी 15 लाख रूपए की आर्थिक मदद

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने वन मुख्यालय देहरादून में वनाग्नि प्रबंधन एवं सुरक्षा की बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिये कि वन मुख्यालय पर तत्काल इन्टीग्रेटेड फायर कमांड एण्ड कन्ट्रोल सेंटर की स्थापना की जाय। वनाग्नि प्रबंधन के लिए यह देश का पहला सेंटर होगा। इस सेंटर के माध्यम से सैटेलाईट से सीधे फायर संबंधित सूचनाओं को एकत्रित कर फील्ड लेबल तक पहुंचाने की व्यवस्था की जायेगी। इसमें फॉरेस्ट टोल फ्री नम्बर 1926 की व्यवस्था के साथ ही अन्य आधुनिक व्यवस्थाएं की जायेंगी। 15 फरवरी से 15 जून तक फायर सीजन के दृष्टिगत सभी व्यवस्थाएं तैयार रखी जाय। वनों एवं वन्यजीवों की रक्षा करना सबका दायित्व है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कैम्पा मद से प्राप्त बाईकों को हरी झण्डी दिखाई एवं स्टेट फायर प्लान प्रति का अनावरण भी किया।

कहा कि वनाग्नि को बुझाने में जान गंवाने वाले फ्रंटलाईन फॉरेस्ट स्टॉफ के आश्रितों को दी जाने वाली धनराशि 2.5 लाख से बढ़कार 15 लाख रूपये की जायेगी। गढ़वाल वन प्रभाग, पौड़ी के वनकर्मी हरिमोहन सिंह एवं फॉरेस्टर दिनेश लाल को वनाग्नि बुझाते समय कार्यों के निर्वहन के दौरान अपनी जान गंवानी पड़ी। बैठक शुरू होने से पूर्व इन दोनों कार्मिको के निधन पर दो मिनट का मौन रखा गया।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने निर्देश दिये कि वनाग्नि प्रबंधन के लिए एक अपर प्रमुख वन संरक्षक स्तर के अधिकारी को जिम्मेदारी दी जाय। राज्य में वनाग्नि की घटनाओं को रोकने के लिए इनके द्वारा मॉनिटरिंग की जायेगी। वनाग्नि प्रबंधन हेतु समय कंट्रोल बर्निंग (पहाड़ के टॉप से नीचे की ओर) तथा फॉरेस्ट फायर लाइंस के रख-रखाव पर विशेष ध्यान दिया जाय। इसमें आ रही बाधाओं का जल्द निराकरण किया जाय। मुख्यमंत्री ने कहा कि फ्रंटलाईन फॉरेस्ट स्टॉफ वन सुरक्षा एवं प्रबंधन की महत्वपूर्ण कड़ी हैं। उनके लिए आवासीय फॉरेस्ट लाईन्स का निर्माण किया जाय। उन्होंने प्रमुख सचिव वन एवं प्रमुख वन संरक्षक को निर्देश दिये कि एक सप्ताह में कैंपा परियोजना से सबंधित कार्ययोजना तैयार कर उसका प्रस्तुतीकरण दिया जाय। टोंगिया ग्रामों का प्रस्ताव भी एक सप्ताह में दिया जाय। वन्य जीवों से सुरक्षा के लिए सुरक्षा दीवार के बजाय सोलर फेंसिंग पर अधिक ध्यान दिया जाय। यह कम लागत पर अधिक परिणामकारी है। वनाग्नि को रोकने के लिए लगातार प्रशिक्षण कार्यक्रम एवं जागरूकता के कार्यक्रम किये जाए। स्थानीय लोगों को भी वनाग्नि को रोकने के लिए भागीदार बनाया जाय। वन पंचायतो को सक्रिय रखा जाय।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से जुड़े सभी जिलाधिकारियों एवं डीएफओ को निर्देश दिये कि वनाग्नि प्रबंधन के लिए सभी व्यवस्थाएं तैयार रखी जाय। आवश्यक उपकरणों की पूर्ण व्यवस्था के साथ ही एसडीआरएफ मद से भी उपकरण ले सकते हैं। वनाग्नि को रोकने के लिए पिरूल एकत्रीकरण की व्यवस्था की जाए एवं समय-समय पर जिलाधिकारी के स्तर पर बैठकें आयोजित की जाय। यह सुनिश्चित किया जाय कि वनाग्नि में जान गंवाने वालों को शीघ्र मानकों के अनुसार मुआवजा मिल जाय। उन्होंने जिलाधिकारियों को निर्देश दिये कि फायर सीजन के दौरान वन विभाग के नियंत्रणाधीन वाहनों को अधिग्रहण न किया जाय।

महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने गुरूवार को मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत से मुख्यमंत्री आवास में भेंट की। उन्होंने मुख्यमंत्री से राज्य से सम्बन्धित विभिन्न विषयों एवं जनपद चमोली के रैणी क्षेत्र में उत्पन्न आपदा की स्थिति पर चर्चा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि आपदा स्थल पर राहत एवं बचाव कार्य तेजी से संचालित किये जा रहे हैं जिसमें सभी संबंधित एजेंसियों एवं विभागों का सक्रिय सहयोग प्राप्त हो रहा है। इस अवसर पर उच्च शिक्षा राज्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत भी उपस्थित थे।

श्रद्धांजलि सभा के जरिए चमोली आपदा में मृतकों की आत्मशांति की गई प्रार्थना

चमोली में आई आपदा में लापता लोगी की सलामती के लिए प्रार्थना की गई। ग्राम सभा हरिपुर कलां में सत्यमेव जयते समिति एवं गढ़वाल महासभा से जुड़े पदाधिकारियों ने सामूहिक रूप से मां गंगा तट पर एकत्रित होकर चमोली जिले के रेणी गांव के पास ग्लेशियर टूटने से आई आपदा में हुए जानमाल के नुकसान पर गहरा दुःख व चिंता जताते हुए मृतकों की आत्मिक शांति हेतु केंडल जलाकर एवं लापता लोगो की सलामती के लिए मां गंगा से प्रार्थना की।

इस मौके पर सत्यमेव जयते समिति के अध्यक्ष अनिल जोशी ने कहा कि केदारनाथ आपदा के जख्म अभी भरें भी नही थे कि कोरोनाकाल के बीच दिल को दहलाने वाली ये भीषण आपदा आ गयी। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड के पर्वतीय क्षेत्रों में इस प्रकार घटनाएं दुःखद है। गढ़वाल महासभा के अध्यक्ष डॉ राजे सिंह नेगी ने कहा कि उत्तराखंड में प्रस्तावित और निर्माणधिन सभी जल विधुत परियोजनाओं की पुनःसमीक्षा होनी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो पाए।

उन्होंने उत्तराखंड आपदा के मृतकों को श्रद्वांजलि अर्पित करते हुए कहा कि कंक्रीट के जंगल बनाने से प्राकृतिक आपदाओं को लोगों को झेलना पड़ रहा है। इस पर विचार करते हुए पर्यावरण रक्षा की दिशा में बड़े कदम उठाए जाने की आवश्यकता है। ग्लेशियर के मुहाने पर बांधों के निर्माण पर उन्होंने रोक लगाने की मांग भी की। श्रद्धांजलि अर्पित करने वालों में मनोज जखमोला, राजन बडोनी, दिनेश थपलियाल, रवि बाबू शर्मा, कमल शर्मा, आनंद रानाकोटी, विष्णु,गोकुल डबराल, सुमन गौड़, सुनील जुगलान, अशोक रयाल, राकेश कुकरेती, शशि कंडवाल, सीमा देवी, अनिता सिलस्वाल, सुबोध बडोला, संगीता सिलस्वाल, अनिता गुप्ता शामिल थे।

ऋषिकेशः झंडारोहण के साथ हुआ बसंतोत्सव पर्व का आगाज

श्रीभरत मंदिर प्रांगण में प्रातःकाल झंडारोहण के साथ बंसतोत्सव 2021 का आगाज हुआ। झंडारोहण के दौरान स्कूल सोसाइटी के सचिव हर्षवर्धन शर्मा, विनय उनियाल, दीप शर्मा, वरुण शर्मा, प्रधानाचार्य मेजर गोविंद सिंह रावत, प्रधानाचार्य धीरेन्द्र जोशी, जयेंद्र रमोला, विमला रावत, पूर्व प्रधानाचार्य डीबीपीएस रावत, मीडिया प्रभारी रवि शास्त्री आदि शामिल रहे।

इसके बाद सुबह दस बजे से ऋषिकेश आयुर्वेदिक डॉक्टर्स एसोसिएशन ने एक वृहद आयुर्वेदिक निशुल्क चिकित्सा शिविर का आरंभ किया, जो तीन दिनो तक चलेगा। इसका उद्घाटन महंत वत्सल प्रपन्नाचार्य, सोसाइटी के सचिव हर्षवर्धन शर्मा, भारतीय चिकित्सा परिषद के उपाध्यक्ष संकाय डॉ डीके श्रीवास्तव, पूर्व पालिकाध्यक्ष दीप शर्मा, विनय उनियाल, जयेंद्र रमोला, मीडिया प्रभारी रवि शास्त्री आदि ने किया। शिविर का नगर एवं आसपास के करीब 200 लोगों ने अपनी निशुल्क जांच कराकर लाभ उठाया।

शिविर में डॉ एनडी सेमवाल, डॉ एसएन रतूड़ी, डॉ डीके श्रीवास्तव, डॉ जी एल अरोड़ा, डॉ शरद चंद्र मिश्रा, डॉ जेपी राठी, डॉ प्रतीक सिंह रावत, डॉ सीमा सक्सेना, डॉ मधु आनंद, डॉ निवेदिता श्रीवास्तव, डॉ विंतेश्वरी नौटियाल, डा भास्करानंद, डॉक्टर अरुण कुमार, डॉ डीपी बलोदी, डॉ मीनाक्षी जगजापे, डा वर्षा कुरियाल, ने अपनी विशिष्ट निदान द्वारा सभी रोगियों का चिकित्सा एवं औषधि प्रदान की। मौके पर मीडिया प्रभारी रवि शास्त्री, जितेन्द्र बिष्ट, अभिषेक शर्मा, रंजन अंथवाल आदि शामिल रहे।

स्वच्छता ही सेवा है, गन्दगी जानलेवा हैः मेयर अनिता ममगाई

स्वच्छता सर्वेक्षण में शानदार प्रदर्शन करने के लिए नगर निगम का महास्वच्छता अभियान जारी है। मौनी अमावस्या का पर्व निपटने के पश्चात नगर निगम ने दून तिराहे से लेकर चन्द्रभागा पुल तक सफाई अभियान चलाया।

आज मेयर अनिता ममगाईं की अगुवाई में निगम की तमाम स्वच्छता टीम अभियान में उतरी और स्वच्छता अभियान चलाया। समाजिक संस्थाओं के बाद आज शहर के संत समाज ने स्वच्छता के ब्रांड एंबेसडर पंडित रवि शास्त्री के नेतृत्व में निगम प्रशासन को अपना सहयोग देते हुए न सिर्फ अभियान मे सहयोग किया बल्कि लोगों से भी निगम की स्वच्छता मुहिम में सहयोग की अपील की।

तीर्थ नगरी में स्वच्छता अभियान को लेकर नगर निगम का मिशन जारी है। महाकुंभ के दौरान सफाई व्यवस्था चाकचैबंद रहे ,साथ ही स्वच्छता सर्वेक्षण में भी अव्वल आने का सपना साकार हो सके इसको लेकर निगम प्रशासन संजीदा कोशिशों में जुटा हुआ है।मौनी अमावस्या पर्व निपटने के बाद नगर निगम प्रशासन ने ऋषिकेश -बद्रीनाथ मार्ग पर दून तिराहे से चन्द्रभागा पुल तक महासभा सफाई अभियान चलाया। जिसके तहत जगह-जगह बिखरे पड़े कूड़े-करकट को एकत्रित कर उनका निस्तारण कराया गया। मेयर अनिता ने बताया कि स्वच्छता सर्वेक्षण में नंबर वन रैंकिंग दिलाने और शहर को स्वच्छ रखने के लिए निगम प्रशासन लगातार जुटा हुआ है। शहर की कॉलोनियां और सड़को को साफ रखने की मुहिम जारी है।प्रचार प्रसार के माध्यम से भी इस दिशा में हर मुमकिन प्रयास किए जा रहे हैं। शहर की विभिन्न संस्थाओं से मिल रहे सहयोग के चलते जनता में भी जागरूकता आई है।

अभियान मेें स्वामी महामंडलेश्वर दयाराम दास, महामंडलेश्वर स्वामी शंकर तिलक, मंडलेश्वर उपेंद्र गिरी महाराज, चंद्रवीर पोखरियाल, दिनेश डबराल, स्वतंत्रता चैतन्य, गौरी चैतन्य, आरती चैतन्य, संकरी चैतन्य, शिवा साधक, उमाया साधिका, विनोद शर्मा, नरेश अग्रवाल, नवल कपूर, अमित गोयल, भारत भूषण, चेतन शर्मा, संदीप शास्त्री, हितेंद्र पंवार, डीपी रतूड़ी, देव पाल, रवि चैहान, पवन शर्मा, पंकज शर्मा, राजीव खुराना, हैप्पी सेमवाल, रोमा सहगल, अनिता रैना, रमेश अरोड़ा, अमरीक सिंह, राजपाल ठाकुर, देवदत्त शर्मा, अजय कालरा, मदन कोठारी, राजीव गुप्ता, यशवंत रावत, प्रकान्त कुमार, अक्षय खैरवाल, विपिन कुकरेती, किरण त्यागी, सुनील उनियाल, गौरव केथोला, रणवीर सिंह, शैलेन्द्र रस्तोगी, कुलदीप टंडन, राजेश गौत्तम, रूपेश गुप्ता, अभिषेक मल्होत्रा, धीरेंद्र सेमवाल, अभिषेक मल्होत्रा, नरेश खेरवाल, महेंद्र आदि शामिल रहे।

महाकुंभ के दौरान आपात स्थिति के लिए एम्स ऋषिकेश का ट्राॅमा सेंटर रिजर्व

कुंभ मेले में श्रद्धालुओं को मेडिकल सुविधा प्रदान करने के लिए अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान ऋषिकेश पूरी तरह से तैयार है। संस्थान की ओर से चिकित्सकों की टीम भी हरिद्वार में तैनात की जाएगी। इसके अलावा आपात स्थिति से निपटने के लिए एम्स के ट्राॅमा सेंटर को आरक्षित रखा गया है। जिसमें श्रद्धालुओं के उपचार के लिए ट्राॅमा सेंटर में 24 घंटे मेडिकल सुविधाएं उपलब्ध रहेंगी।

निदेशक प्रो. रवि कांत की देखरेख में महाकुंभ में स्नान पर्वों पर श्रद्धालुओं को स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए संस्थान की ओर से विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं। आगामी 27 फरवरी को माघ पूर्णिमा और उसके बाद के प्रमुख स्नान पर्वों पर हरिद्वार कुंभ मेला क्षेत्र में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटने की संभावना है। लिहाजा इसके मद्देनजर एम्स ऋषिकेश अस्पताल प्रशासन ने संपूर्ण कुंभमेला अवधि तक हरिद्वार में ही चिकित्सकों की टीम तैनात करने का निर्णय लिया है। जिसके लिए संस्थान के चि​कित्सकीय दल हरिद्वार स्थित बैरागी कैंप में बनाए जा रहे मेला अस्पताल में तैनात रहेंगे।
मेलाकाल में किसी प्रकार की अप्रिय घटना, भगदड़ व श्रद्धालुओं की स्वास्थ्य संबंधी अन्य आपात स्थितियों के दौरान चिकित्सकीय दल द्वारा मौके पर ही पेशेंट का प्राथमिक उपचार कर ग्रीन काॅरीडोर के माध्यम से उन्हें अविलंब एम्स ऋषिकेश के ट्राॅमा सेंटर भेजा जाएगा।

उन्होंने बताया कि कुंभ मेले में देश-दुनिया से शिरकत करने वाले श्रद्धालुओं को वर्ल्डक्लास स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए एम्स ऋषिकेश पूरी तरह से राज्य सरकार का सहयोग करेगा। मेले के दृष्टिगत की गई तमाम तैयारियों के बाबत संस्थान के डीन हॉस्पिटल अफेयर्स प्रोफेसर यूबी मिश्रा ने बताया कि कुंभ मेले के मद्देनजर एम्स के ट्राॅमा सेंटर में 12 बेड का आईसीयू तैयार किया गया है। साथ ही किसी भी प्रकार की आपात स्थिति से निपटने के लिए ट्राॅमा सेंटर में एक डिजास्टर वार्ड भी बनाया गया है। इस वार्ड में कुंभ मेले के श्रद्धालुओं के उपचार केलिए 22 बेड रिजर्व रखे गए हैं।

उन्होंने बताया कि यदि आवश्यकता पड़ी तो ट्राॅमा सेंटर में बनाए गए डिजास्टर वार्ड के अलावा ट्राॅमा सेंटर के अतिरिक्त आईसीयू को भी उपयोग में लाया जाएगा। उन्होंने बताया कि कुंभ के लिए विशेषतौर से चिकित्सकों और नर्सिंग स्टाफ की कई टीमें गठित की जा चुकी हैं। जो कि कुंभ मेले में आने वाले श्रद्धालुओं को स्वास्थ्य सेवाएं देने के लिए हर समय हरिद्वार मेलाक्षेत्र में उपलब्ध रहेंगी।

गुमानीवाला में मोबाइल की दुकान में 12 फोन लेकर चोर रफू चक्कर

नगर में तमाम सीसीटीवी और पुलिस की गश्त के बावजूद आपराधिक प्रवृति के लोगों में पुलिस का खौफ देखने को नहीं मिल रहा। यही कारण है कि गुमानीवाला में पिछले एक हफ्तें में तीन से अधिक चोरी की घटनाएं घट चुकी है। बीते रोज भी एक मोबाइल की शाॅप को चोरों ने निशाना बनाया और 12 मोबाइल फोन लेकर रफू चक्कर हो गए।

दरअसल, गली नंबर तीन, अमितग्राम निवासी महेश उनियाल पुत्र दिनेश उनियाल की इसी क्षेत्र में मोबाइल की दुकान है। बीती रात्रि करीब दो बजे पुलिस की गश्त के दौरान दुकान के शटर के टूटे ताले पर पड़ी तो उन्होंने महेश उनियाल को फोन किया। सूचना पाकर पुलिस की मौजूदगी में ही महेश उनियाल ने अपनी दुकान का शटर खोला तो भीतर कांच का दरवाजा टूटा मिला। साथ ही 12 फोन भी कम मिले। दुकान मालिक के अनुसार सभी गायब फोन कीपैड के है।

वहीं, क्षेत्रीय पार्षद विपिन पंत ने बताया कि गुमानीवाला में इन दिनों चोरी की घटनाएं लगातार बढ़ रही है। बताया कि दो दिन पूर्व डीजे संचालक के स्पीकर और लैपटाॅप चोरी कर लिए गए थे। वहीं, क्षेत्र के ही एक ओम मेडिकल स्टोर में भी चोरी का असफल प्रयास किया गया। कहा कि क्षेत्र में बढ़ती चोरी की घटनाओं से लोग सहमे हुए हैं। वह जल्द मामले में पुलिस क्षेत्राधिकारी से मुलाकात करेंगे।

आपदा के तहत अति संवेदनशील प्रभावितों को पुनर्वास की सीएम से मिली मंजूरी

चार जिलों में आपदा के दृष्टिगत अत्यधिक संवेदनशील प्रभावित परिवारों को मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने सुरक्षित स्थानों पर विस्थापन और पुनर्वास की अनुमति दी है। इसके लिए आपदा प्रबंधन की ओर से भेजे गए प्रस्ताव के अनुसार मानक मदों के अनुसार धनराशि भी जारी करने की मंजूरी दी है।

टिहरी जिले के अत्यधिक संवेदनशील ग्राम बेथाण नामे तोक के चार प्रभावित परिवारों के विस्थापन-पुनर्वास नीति के तहत विस्थापित करने के राज्य स्तरीय पुनर्वास समिति की बैठक में पारित प्रस्ताव को मुख्यमंत्री ने अनुमोदित कर दिया है। इसके तहत चार परिवारों को नए स्थान पर पुनर्वास किया जाना है। इन परिवारों के भवन निर्माण, गौशाला निर्माण और विस्थापन भत्ता के लिए मुख्यमंत्री ने 17 लाख की धनराशि की संस्तुति की है। इनमें से दो परिवार वर्तमान में संयुक्त रूप से एक ही मकान में रहते हैं लेकिन विस्थापन में इन्हें अलग-अलग पुनर्वास की सुविधा मिलेगी।

बागेश्वर जिले के तहसील कपकोट के अंतर्गत अत्यधिक संवेदनशील ग्राम मल्लादेश के चार परिवारों के आवासीय भवनों को खतरा उत्पन्न होने के कारण पुनर्वास किए जाने के प्रस्ताव को मुख्यमंत्री ने अनुमोदित कर दिया है। जिलाधिकारी बागेश्वर की ओर से 2018 की बरसात के दौरान इन परिवारों के मकान अतिवृष्टि और भूस्खलन के कारण अत्यधिक संवेदनशील की श्रेणी में आ गए थे। पुनर्वास नीति,2011 के अनुसार शासन को भेजे प्रस्ताव पर राज्य पुनर्वास समिति की बैठक में मुहर लग चुकी है।

चमोली जिले के तहसील थराली के आपदा प्रभावित अति संवेदनशील ग्राम फल्दिया गांव के 12 परिवारों को अन्यत्र सुरक्षित स्थान पर पुनर्वासित किए जाने के लिए 51 लाख की धनराशि के प्रस्ताव पर मुख्यमंत्री ने सहमति दी है। इसमें पुनर्वास नीति के तहत मानक मदों के अनुसार प्रति परिवार भवन निर्माण के लिए 4 लाख रुपए, गौसाला निर्माण के लिए 15 हजार तथा विस्थापन भत्ता 10 हजार रुपए की संस्तुति की गई है।

चमोली जिले के ही तहसील गैरसैंण के आपदाग्रस्त ग्राम सनेड लगा जिनगोडा के प्रभावित परिवार के पुनर्वास के प्रस्ताव को भी उचित पाया गया। राज्य आपदा पुनर्वासन समिति की बैठक में पहले ही इस पर अनुमोदन दिया गया है। मुख्यमंत्री ने भी इस प्रस्ताव को सहमति देते हुए प्रभावित परिवार को सुरक्षित स्थान पर विस्थापित करने की संस्तुति दी है।

उत्तरकाशी के तहसील डूंडा के अत्यंत संवेदनशील ग्राम अस्तल के 30 प्रभावित परिवारों को अन्यत्र सुरक्षित स्थान पर विस्थापित किए जाने के लिए मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने 1 करोड़ 25 लाख 10 हजार की राशि के प्रस्ताव पर सहमति दी है। पुनर्वास नीति के तहत प्रति परिवार भवन निर्माण के लिए 4 लाख, गौशाला निर्माण के लिए 15 हजार और विस्थापन भत्ता 10 हजार रुपए दिया जाएगा।

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने राज्य में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रुड़की के सहयोग से भूकंप पूर्व चेतावनी तंत्र के संचालन पर होने वाले व्यय के लिए 45 लाख जारी करने पर सहमति दी है। मुख्यमंत्री की सहमति के बाद आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के सचिव एस.ए. मुरूगेशन की ओर से इसका जीओ भी जारी कर दिया गया है।

उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के माध्यम से यह प्रस्ताव मुख्यमंत्री को भेजा गया था। राज्य में भूकंप पूर्व चेतावनी तंत्र के क्रियान्वयन के लिए भारतीय प्रौद्योगिक संस्थान रुड़की द्वारा 15 भूकंप सेंसर लगाए गए थे। जो वर्तमान में खराब हो गए हैं। इन्हें बदलने के लिए 45 लाख का प्रस्ताव शासन को भेजा गया था। इसमें यह साफ किया गया है कि इस धनराशि का गलत उपयोग होने पर निदेशक आईआईटी रुड़की का उत्तरदायित्व होगा।

सिंचाई नहर निर्माण में हुई अनियमितता की होगी जांच, सीएम ने दिए निर्देश

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने हरिद्वार और रुद्रप्रयाग जिले में सिंचाई नहर निर्माण में हुई करोड़ों की अनियमितता के मामले में जांच के निर्देश दिए हैं। इस पर सचिव सिंचाई की ओर से तीन सदस्यीय जांच कमेटी बनाई गई है।

नाबार्ड के माध्यम से रुद्रप्रयाग के जखोली ब्लाक में ग्रामीण अवसंरचना विकास निधि के अंतर्गत 18 किलोमीटर लंबी लस्तर बायें नहर निर्माण परियोजना के लिए 9.84 करोड़ की मार्च, 2012 में स्वीकृति दी गई थी। इसके सापेक्ष पाइपों पर खर्च 2.42 करोड़ की राशि निष्क्रिय व्यय किए जाने व परियोजना के अन्य घटकों पर 46.31 लाख का निष्फल व्यय किए जाने में अनियमितता की शिकायत शासन के पास आई थी। इस पर मुख्यमंत्री के अनुमोदन के बाद सिंचाई विभाग के संयुक्त सचिव जे.एल. शर्मा की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय जांच कमेटी गठित की गई है। इसमें सिचांई विभाग के मुख्य अभियंता जयपाल सिंह और वित्त नियंत्रक कविता नाम्बियाल को सदस्य बनाया गया है। यह कमेटी दो सप्ताह में इन अनियमितताओं की प्रारंभिक जांच कर शासन को रिपोर्ट सौंपेगी।
हरिद्वार के लक्सर मे विकासखंड में स्थित सुभाषगढ़ सिंचाई नहर की निर्माण के लिए एआईवीपी के अंतर्गत 695.98 लाख की स्वीकृति दी गई थी। योजना में प्रस्तावित कार्यों के सापेक्ष किए गए भौतिक कार्यों का लाभ किसानों को नहीं मिल सका। यानी नहर निर्माण के बावजूद किसानों को पानी नहीं मिल सका। इस शिकायत पर मुख्यमंत्री के निर्देश पर जांच बिठाई गई है। शर्मा की अध्यक्षता वाली कमेटी को ही यह जांच दी गई है। उनसे दो सप्ताह में प्रारंभिक जांच कर रिपोर्ट मांगी गी है।

तहसील भवनों के निर्माण हेतु मुख्यमंत्री ने स्वीकृत की धनराशि

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने राजकीय इंटर कॉलेज बगियाल विकास खण्ड थौलधार एवं राजकीय इंटर कॉलेज क्यारी में 2 कक्षा कक्षों के निर्माण हेतु कुल 84.56 लाख की धनराशि स्वीकृत की है।

मुख्यमंत्री ने तहसील कीर्तिनगर की 6 राजस्व उप निरीक्षक चैकियों की मरम्मत एवं अवशेष निर्माण कार्यों हेतु 30.93 लाख की धनराशि स्वीकृत की है। इसके साथ ही तहसील रानीखेत के क्षतिग्रस्त आवासों के पुनर्निर्माण, मरम्मत एवं तहसील के कॉफ्रेंस हॉल के निर्माण हेतु 4.14 करोड़ की वित्तीय स्वीकृति प्रदान करने के साथ ही प्रथम किस्त के रूप में एक करोड़ की स्वीकृति प्रदान की है।
मुख्यमंत्री ने बंजारावाला में शहीद जीत बहादुर की स्मृति में निर्मित किये जाने वाले शहीद द्वार के निर्माण हेतु 28.99 लाख की धनराशि स्वीकृत की है। इसके अतिरिक्त मुख्यमंत्री ने श्रीनगर गढ़वाल में पार्किंग एवं ऑडिटोरियम के निर्माण हेतु 9.76 लाख की धनराशि स्वीकृत की है। मुख्यमंत्री ने कपीरी छाँतेश्वर महादेव के सौन्दर्यीकरण एवं पैदल मार्ग निर्माण हेतु 46.15 लाख की धनराशि स्वीकृत की है।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने नगर पालिका परिषद टनकपुर कलस्टर की ठोस अपशिष्ट प्रबंधन परियोजना एवं विकेन्द्रीकृत सेग्रीगेशन हॉल निर्माण हेतु 4.70 करोड़ की धनराशि स्वीकृत की है।

औद्योगिक आस्थान रूद्रपुर एवं काशीपुर में अवस्थापना सुविधाओं हेतु 3.97 करोड़ स्वीकृत
मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने औद्योगिक आस्थान रूद्रपुर एवं काशीपुर से अवस्थापना विकास कार्यों हेतु 3.97 करोड़ की धनराशि स्वीकृत की है। इसके साथ ही मुख्यमंत्री द्वारा मेगा इंडस्ट्रियल व मेगा टेक्सटाईल नीति के तहत सिडकुल को 6 करोड़ की धनराशि भी स्वीकृत की है।

मुख्यमंत्री ने ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन हेतु भारतीय रेल को भूमि हस्तान्तरण की दी स्वीकृति
मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन परियोजना हेतु जनपद रूद्रप्रयाग के ग्राम रतूड़ा में सुरंगध्पोर्टल के निर्माण हेतु 1.455 हेक्टेयर भूमि भारतीय रेल को हस्तान्तरित करने की स्वीकृति प्रदान की है। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने उक्त योजना हेतु जनपद टिहरी गढ़वाल के अन्तर्गत ग्राम लक्षमोली की 0.110 हेक्टेयर एवं रानीहार की 0.041 हेक्टेयर की अधिसूचना निर्गत करने की भी स्वीकृति प्रदान कर दी है।

कोविड-19 के दृष्टिगत कुम्भ मेले में डी.आर.डी.ओ. बनायेगा 2 हजार बेड का अस्पताल
इससे सम्बन्धित एम.ओ.यू को भी मुख्यमंत्री ने किया अनुमोदित
कुम्भ मेला 2021 में कोविड-19 के दृष्टिगत दो हजार बेड का हास्पिटल डी.आर.डी.ओ. द्वारा निर्मित किया जायेगा। इसकी सहमति रक्षा मंत्रालय भारत सरकार से भी प्राप्त हो गयी है। इस सम्बन्ध में होने वाले एमओयू को मुख्यमंत्री द्वारा अनुमोदित कर दिया गया है। इस हॉस्पिटल के निर्माण से कुम्भ में आने वाले श्रद्धालुओं के बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध हो सकेगी। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने चिकित्सा प्रबन्ध समिति के अधीन क्रियाधीन चिकित्सालयों के लिये आवश्यक व्यवस्थाओं के लिये 10 करोड़ की धनराशि अनुमोदित की है।