एसडीएम यमकेश्वर ने की तीर्थनगरी की प्रतिभाओं की सराहना

वल्र्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड में हिस्सा लेने वाले चित्रकार राजेश चन्द्र व अमरजीत सिंह राणा को उप जिलाधिकारी यमकेश्वर मनीष कुमार सिंह ने लक्ष्मण झूला स्थित कैंप कार्यलय में पुष्पगुच्छ देकर सम्मानित किया।

बता दें कि हाल ही में चित्रकार राजेश चंद्र की अगुवाई में तीर्थनगरी के कलाकारों ने वल्र्ड बुक ऑफ रिकार्ड के प्रदर्शनी में हिस्सा लिया था। इस प्रदर्शनी को विश्व की सबसे बड़ी ऑनलाइन क्रिएटिव इवेंट के खिताब वर्ल्ड बुक ऑफ रिकार्ड यूनाइटेड किंगडम से मिला। उप जिलाधिकारी ने राजेश चंद्र, अमरजीत, मानसी, सानिया व सागर को शुभकामनाएं प्रेषित कर आगे भी इसी तरह राज्य व देश का नाम रोशन करने की शुभकामनाएं दी। बताया कि हमारा राज्य प्रतिभाओ से भरा हुआ है बस जरूरत है तो उन्हें पहचानने की।

इस मौके पर मनीष कुमार सिंह, राजेश चन्द्र, चंद्रप्रकाश भारती व अमरजीत सिंह राणा मौजूद रहे।

समरसता व समन्वय सामाजिक उन्नति का मूलमंत्रः प्रो. रविकांत

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान ऋषिकेश में आयोजित कार्यक्रम में शुक्रवार को अंतर्राष्ट्रीय मंच इंटिग्रेटेड एसोसिएशन ऑफ मेडिकल, बेसिक एंड सोशल साइंटिस्ट (आईएएमबीएसएस) की पुस्तिका विमोचन किया गया। इस अवसर पर वक्ताओं ने विज्ञान, चिकित्सा एवं सामाजिक समरसता विषय पर व्याख्यानमाला प्रस्तुत की। जिसमें उन्होंने कहा कि हमारे समाज में समरसता एवं एकीकृत होकर कार्य करने की इच्छा शक्ति दृढ़ होने से ही भारत को पुनरू विश्वगुरु की पदवी प्राप्त हो सकती है। कार्यक्रम के तहत आईएएमबीएसएस की ओर से आयोजित रक्तदान शिविर में 35 लोगों ने महादान किया।

आईएएसबीएसएस की ओर से आयोजित समारोह में मुख्य अतिथि राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की केंद्रीय कार्यकारिणी के सदस्य अशोक बेरी जी व कार्यक्रम अध्यक्ष एम्स निदेशक प्रो. रविकांत ने अन्य अतिथियों के साथ संस्था की वार्षिक पुस्तिका का विधिवत विमोचन किया।
समारोह की अध्यक्षता करते हुए निदेशक एम्स प्रो. रविकांत ने कहा कि चिकित्सा शिक्षा में मेडिकल साइंस के साथ- साथ व्यवहारिक ज्ञान को भी सम्मिलित किया जाना नितांत आवश्यक है, जिससे चिकित्सक व आम व्यक्ति के मध्य संवादहीनता नहीं हो। उन्होंने कहा कि कम्यूनिकेशन स्किल के ज्ञान के बिना आप अपनी बात को सही तरीके से दूसरे व्यक्ति तक नहीं पहुंचा सकते। निदेशक एम्स पद्मश्री रवि कांत जी ने कहा कि विदेशों में चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में कम्यूनिकेशन स्किल को पाठ्यक्रम में प्रमुखता से शामिल किया गया है,जिसमें उत्तीर्ण होना अनिवार्य शर्त रखी गई है। लिहाजा चिकित्सक को आम व्यक्तियों व मरीजों में अपनी छाप छोड़ने के लिए व्यवहार कुशल होना ही चाहिए। एम्स निदेशक प्रो. रवि कांत जी ने देश की उन्नति के लिए विज्ञान के साथ साथ तकनीकि के विषय पर ध्यान दिए जाने पर जोर दिया।
मुख्य अतिथि आरएसएस की केंद्रीय कार्यकारिणी के सदस्य अशोक बेरी ने कहा कि समाज में एक- दूसरे के प्रति भेदभाव से समाज बंट रहा है,लिहाजा इस मान​सिकता को सामुहिक प्रयासों से समाप्त किया जाना चाहिए, तभी किसी समाज व राष्ट्र की उन्नति हो सकती है। उन्होंने बताया कि कोरोना वायरस संक्रमण के बाद विश्व के वैज्ञानिक मनुष्य में रोगों के बढ़ने के कारणों के साथ साथ इम्युनिटी डेवलपमेंट विषय पर शोधकार्य में जुटे हुए हैं। खासकर कोविड19 का दुनिया के मुकाबले भारत में कम असर के मद्देनजर यहां के खान-पान पर खासतौर से अध्ययन कर रहे हैं। मुख्य अतिथि अशोक बेरी ने कहा कि शरीर, मन व बुद्धि के समन्वय के बिना हम जीवन में आगे नहीं बढ़ सकते हैं। उन्होंने सामाजिक उन्नति के लिए मन में भरे विद्वेष को समाप्त करने पर जोर दिया।
संस्थान के डीन एकेडमिक प्रोफेसर मनोज गुप्ता ने आईएएमबीएसएस की समाज के विभिन्न वर्गों में समन्वय के प्रयासों की सराहना की और इसे अच्छी पहल बताया। उन्होंने कहा कि हमारे समाज को इस तरह के रचनात्मक प्रयासों की नितांत आवश्यकता है। तभी हम प्रगति के पथ पर अग्रसर हो सकते हैं।
कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि उत्तराखंड आयुर्वेदिक विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सुनिल जोशी, हंस फाउंडेशन के राज्य प्रभारी पदमेंद्र सिंह बिष्ट ने भी विचार रखे।
समारोह में बताया गया कि आईएएमबीएसएस पिछले कई वर्षों से चिकित्सकों, वैज्ञानिकों एवं देश के नीति नियंताओं के मध्य एकीकृत होकर कार्य करने की भावना को उजागर करने को प्रयासरत है। संस्था द्वारा देश के सभी बड़े चिकित्सा संस्थानों एम्स दिल्ली, एम्स ऋषिकेश, एम्स भटिंडा, पीजीआई चंडीगढ़ एवं अन्य संस्थानों के चिकित्सकों को जोड़कर इस एकीकृत भाव को आयुर्विज्ञान के क्षेत्र में कार्यरत चिकित्सकों एवं वैज्ञानिकों को एक मंच पर लाने के लिए प्रयासरत है

कार्यक्रम के दौरान मुख्य अतिथि अशोक बेरी जी व निदेशक एम्स प्रो. रवि कांत जी ने संस्था की ओर से डा. मनिंदर, डा. अमित गुप्ता, डा. जितेंद्र गैरोला, डा. प्रमोद के अलावा संस्था के सदस्य संदीप, मिथलेश, अनमोल, अवधेश, सरोज भट्ट आदि को स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया। इस अवसर पर एम्स की प्रो. सत्यावती राना, डा. बलरामजी ओमर, सूरज भट्ट, डा. सुधांशु, डा. अनिरूद्ध उनियाल आदि मौजूद थे।

कार्यकताओं से सुझाव लेकर विस चुनाव की तैयारियों में जुटी कांग्रेेस


ब्लॉक कांग्रेस कमेटी रायवाला के तत्वावधान में रायवाला के होटल में एक बैठक आयोजित हुई। बैठक में कांग्रेस जिलाध्यक्ष गौरव सिंह,अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सदस्य जयेन्द्र रमोला,पूर्व मंत्री शूरवीर सिंह सजवाण, पूर्व ब्लॉक प्रमुख डा०केएस राणा, पीसीसी सदस्य जय सिंह रावत ने मुख्य रूप से शिरकत की ।

जिलाध्यक्ष गौरव सिंह ने कहा कि विधानसभा 2022 के चुनाव की तैय्यारियों को लेकर लगातार बैठकों का दौर जारी है और हम संगठन स्तर से हर कार्यकर्ता से बात कर संगठन की मजबूती व चुनाव की जीत सुनिश्चित करने के लिये सुझाव लेंगे ताकि जल्द ही उन सुझावों पर अमल हो और कार्यकर्ताओं की भावनाओं के अनुरूप संगठन और चुनाव में मजबूती मिल सके।

अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सदस्य जयेन्द्र रमोला ने कहा कि संगठन की मजबूती के लिये हम सभी को एक होकर कार्य करना पड़ेगा और जो आज हमारे कांग्रेस के नेता मुख्य धारा से अलग हो रखे हैं उनके पास जाकर उनको मुख्य धारा तक लाने के प्रयास करने चाहिये साथ ही बुजुर्ग कांग्रेस नेताओं के पास जाकर समय समय पर उनके हाल चाल लेने चाहिये ताकि वे कभी अपने को संगठन से अलग ना समझें।

पूर्व मंत्री शूरवीर सिंह सजवाण ने कहा कि हर कार्यकर्ता को गाँव या अपने क्षेत्र में जाकर लोगों को जोड़ने के प्रयास करने चाहिये और कांग्रेस की रीति नीति से लोगों को अवगत करवाना चाहिये ।
पूर्व ब्लॉक प्रमुख व पीसीसी सदस्य डा० केएस राणा ने कहा कि आज हमारी लड़ाई बहुरूपियों से है ये झूठ को सच और सच झूठ बनाने वाले लोग हैं बस जरूरत है कि हमें इनके झूठ का पर्दा फाश कर आम जन तक इनकी सच्चाई पहुँचाने की जरूरत है और यह कार्य हर बूथ स्तर का कार्यकर्ता कर सकता है ।

पीसीसी सदस्य व पूर्व मंडी समिति सभापति जय सिंह रावत ने कहा कि पार्टी को छरू माह पूर्व प्रत्याशी घोषित कर देना चाहिये ताकि आम कार्यकर्ता व खुद प्रत्याशी में असमंजस की स्तिथि ना रहे क्योंकि आख़िरी समय में प्रत्याशी घोषित होने पर उहापोह की स्तिथि बन जाती है और प्रत्याशी का समय रूठों को मनाने में चला जाता है जिससे चुनाव में असर पड़ता है ।

कार्यक्रम की अध्यक्षता ब्लॉक अध्यक्षता बर्फ सिंह पोखरियाल ने की व संचालन सत्येन्द्र सिंह रावत ने किया और धीरज थापा, अंशुल त्यागी, अलका क्षेत्री, केके थापा, प्रेम किशोर जुगलान, प्रकाश पांडे, पूरन रमोला, राकेश कंडियाल, मोहन डोबरियाल, आशा चैहान आदि ने सुझाव दिए।

कार्यक्रम में दीपा चमोली, देवेन्द्र रावत, गोकुल रमोला, राजाराम कोठियाल, आशा सिंह चैहान, पूरन चन्द रमोला, बसंत कंडवाल, रूकम सिंह पंवार, धीरज थापा, जितेन्द्र त्यागी, वीरेन्द्र सिंह प्रधान, धनबीर बेन्दवाल, प्रेम किशोर जुगलान, जगपाल असवाल, रघुनाथ चैहान, सुधीर डबराल, सूरत सिंह रांगड, दर्शन सिंह नेगी, विजय सिंह बिष्ट, शम्भू गुरूंग, कैलाश नौटियाल, मोहन सिंह डोबरियाल, रवि राणा, हरि सिंह राणा, राकेश कंडियाल, प्रकाश पांडे, यशपाल पंवार, जगबीर नेगी, मनोज गुसाँई, विजयपाल पंवार, पिन्टू प्रजापति आदि मौजूद थे।

प्राचीन शिक्षा प्रणाली में गुरूकुलों का बड़ा महत्वः त्रिवेंद्र सिंह रावत

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि स्कूल के भवनों के रूपान्तरण के साथ ही वहां पर शिक्षा एवं सुरक्षा का बेहतर वातावरण उपलब्ध कराने से ही हम छात्रों का वर्तमान के साथ ही भविष्य सुरक्षित करने में सफल हो सकेंगे। उन्होंने कहा कि हमारा राज्य आपदा की दृष्टि से संवदेनशील होने के कारण विद्यालयों में छात्रों एवं शिक्षकों को प्राकृतिक आपदा से बचाव की जानकारी दी जानी भी समय की जरूरत है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में मानव वन्य जीव संघर्ष की भी चुनौती रही है, इसे ध्यान में रखते हुए राज्य में मानव वन्य जीव संघर्ष से सम्बन्धित देश का पहला प्रशिक्षण केन्द्र खोला जायेगा। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड आपदा प्रबन्धन का अलग से मंत्रालय गठित करने वाला भी पहला राज्य है।

आज सस्टेनेबल इनवायरमेंट एण्ड इकोलॉजिकल सोसायटी (सीड्स) एवं हनीवेल सेफ स्कूल कार्यक्रम के तहत 15 स्कूलों का रूपान्तरण के पश्चात् शिक्षा विभाग को सौंपे जाने से सम्बन्धित कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि विद्यालयों में शिक्षा के अनुकूल माहौल से छात्रों में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होने के साथ ही उनके मानसिक विकास में मदद मिलती है। उन्होंने कहा कि हमारी प्राचीन शिक्षा प्रणाली में गुरूकुलों का बड़ा महत्व रहा है। आज के विद्यालयों को सुविधायुक्त बनाने से ही अच्छी शिक्षा छात्रों को उपलब्ध हो सकती है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि छात्रों का वर्तमान सुरक्षित रखने से ही उनका भविष्य भी सुरक्षित होगा। इसके लिए उन्हें विद्यालयों मे सकुशल, सुरक्षित एवं सहजता के साथ शिक्षा उपलबध कराने के प्रयास होने चाहिए। उन्होंने कोरोना महामारी का जिक्र करते हुए कहा कि इस वैश्विक महामारी का हम सर्तकता बरतने के कारण ही सामना करने में सफल हो पाये हैं। दुनिया के अनेक सुविधा सम्पन्न देशों के मुकाबले हम इससे अपना बचाव कर पाये हैं। मुख्यमंत्री ने विद्यालयों के रूपान्तरण के साथ ही छात्रों का सकुशल और सुरक्षित स्कूल के लिए आवश्यक सहयोग एवं सहायता के लिये सीड़स एवं हनीवेल के प्रयासों को सराहनीय बताया।

इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री की उपस्थिति में सीड्स एवं हनीवेल द्वारा देहरादून एवं हरिद्वार के 4 विकास खण्डो के 15 स्कूलों का रूपान्तरण के पश्चात् अपर निदेशक शिक्षा मुकुल सती एवं वन्दना गर्ब्याल, एडिशनल प्रोजेक्ट डायरेक्टर को सौंपा गया।

इस अवसर पर डॉ. मनु गुप्ता, सह-संस्थापक, सीड्स ने कहा कि हनीवैल सेफ स्कूल कार्यक्रम शुरू करने से पहले, सीड्स ने इन 100 स्कूलों पर एक आधार स्तर का सर्वेक्षण किया था, जिससे यह पता चला कि लगभग 40 प्रतिशत स्कूलों के भवनों को भूस्खलन, भूकंप और बाढ़ से उत्पन्न होनेवाले संरचनात्मक खतरों का सामना करना पड़ता है। संरचनात्मक नवीनिकरण का उद्देश्य इन जोखिमों को कम करना होता है। 2019 में शुरू किए गए हनीवैल सेफ स्कूल कार्यक्रम के जरिए हरिद्वार और देहरादून जिलों के 100 सरकारी स्कूलों में 11,000 से अधिक विद्यार्थियों, 3,000 अभिभावकों और 900 शिक्षकों को स्कूल की सुरक्षा पर प्रशिक्षण दिया है। देहरादून और हरिद्वार में राज्य सरकार के 15 के स्कूलों का जीर्णोद्धार, मरम्मत और विस्तारण किया।
इस अवसर पर हनीवेल के वीरेन्द्र मिश्रा एवं सीड्स की रिजनल मैनेजर अनिता चैहान ने भी विचार व्यक्त किये।

कार्यक्रम में डीआईजी एसडीआरएफ श्रीमती रिद्धिम अग्रवाल सहित विभिन्न विद्यालयों के अध्यापकगण आदि उपस्थित थे।

चाय विकास बोर्ड का मुख्यालय ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण में बनेगा, सीएम ने दिए निर्देश

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की अध्यक्षता में आज मुख्यमंत्री आवास में चाय विकास बोर्ड की बैठक आयोजित हुई। बोर्ड बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने निर्देश दिए कि चाय विकास बोर्ड का मुख्यालय ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण में स्थापित किया जाए। उन्होंने जिलाधिकारी चमोली को इसके लिए जमीन तलाशने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि किसानों को बाजार उपलब्ध कराने हेतु राज्य में 04 नई फैक्ट्रियाँ स्थापित की जाएं। साथ ही, चाय बागानों से उत्पादित हरी पत्तियों के न्यूनतम विक्रय मूल्य को निर्धारित करने हेतु एक समिति भी गठित की जाए। यह समिति प्रत्येक वर्ष हेतु न्यूनतम विक्रय मूल्य निर्धारित करेगी। उन्होंने कहा कि न्यूनतम विक्रय मूल्य फार्मगेट मूल्य होना चाहिए। उन्होंने कहा कि टी-गार्डन विकसित करने में चाय विशेषज्ञ अवश्य रखा जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि चाय विकास बोर्ड द्वारा टी-गार्डन विकसित कर काश्तकारों को सौंप दिया जाए। इसके लिए अगले एक माह में एक व्यवहारिक मॉडल तैयार करते हुए कार्ययोजना तैयार की जाए। इस मॉडल को तैयार करने में काश्तकारों के सुझावों को भी शामिल किया जाना चाहिए। टी-गार्डन विकसित कर काश्तकारों को दिए जाने के बाद उन्हें तकनीकी विशेषज्ञता भी उपलब्ध करायी जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में जो निजी चाय फैक्ट्रियाँ किसी भी कारण से बंद हैं, उन्हें चलाने हेतु प्रयास किए जाएं। यदि निजी फैक्ट्रियों के मालिक इन्हें चलाने में सक्षम नहीं हैं तो, बोर्ड द्वारा इन्हें चलाए जाने हेतु प्रयास किए जा जाएं। इससे स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर पैदा होंगे और उन्हें आजीविका का साधन मिलेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि चाय विकास बोर्ड की बैठक, वर्ष में 04 बार आयोजित की जाए। इससे बोर्ड और किसानों की समस्याओं से अवगत होने के अधिक अवसर बनेंगे। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार लगातार प्रदेश के किसानों की आर्थिकी को मजबूत करने के प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि राज्य में टी-गार्डन, पर्यटन के क्षेत्र में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने जिलाधिकारियों को राज्य में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए टी-टूरिज्म पर भी फोकस करने के निर्देश दिए।

बोर्ड बैठक में अवगत कराया गया कि उत्तराखण्ड चाय विकास बोर्ड द्वारा वर्तमान तक विभिन्न स्थानों कुल 1387 हैक्टेयर क्षेत्रफल पर चाय प्लान्टेशन किया जा चुका है। उत्तराखण्ड चाय विकास बोर्ड द्वारा वर्तमान में उत्तराखण्ड के 09 पर्वतीय जनपदों (बागेश्वर, चम्पावत, नैनीताल, अल्मोड़ा, पिथौरागढ़, चमोली, रुद्रप्रयाग, पौड़ी, टिहरी) के 28 विकास खण्डों में स्वयं संचालित योजना, स्पेशल कम्पोनन्ट प्लान, मनरेगा के अन्तर्गत चाय विकास कार्यक्रम संचालित कर 1387 हैक्टेयर भूमि में 3,882 काश्तकारध्राजकीयध्गैर राजकीय भूमि को लीज पर लेकर सफलतापूर्वक चाय प्लान्टेशन किया जा चुका है। जिसमें अनुमानित 4,000 श्रमिक कार्यनियोजित किये गये हैं जिसमें 70 प्रतिशत महिलाओं की भागीदारी हैं।

वर्तमान में बोर्ड द्वारा निर्मित की जा रही चाय को उत्तराखण्ड टी ब्राण्ड नेम से रजिस्स्ट करते हुए बिक्री किया जा रहा है। वर्तमान में बोर्ड द्वारा जैविक-अजैविक आर्थोडोक्स ब्लैक व ग्रीन टी तैयार कर, स्थानीय स्तर पर स्वयं के शो-रूम, दुकानदारों य पोस्टल सेवा एवं कोलकाता ऑक्सन हाउस के माध्यम से बिक्री की जा रही है, चाय की बिक्री बढ़ाने व अधिक से अधिक प्रचार-प्रसार हेतु शासन स्तर से शासकीय कैन्टीनों, व अन्य संस्थानों को चाय की मांग बोर्ड को उपलब्ध कराने हेतु आदेश निर्गत किये जा चुके है।

इस अवसर पर उद्यान मंत्री सुबोध उनियाल, उपाध्यक्ष चाय विकास बोर्ड गोविन्द सिंह पिल्खवाल, अपर मुख्य सचिव मनीषा पंवार, प्रमुख सचिव आनन्द वर्धन एवं सचिव उद्यान हरबंस सिंह चुघ आदि उपस्थित थे।

स्वयंसेवियों ने जानी गंगा की महत्वता

नमामि गंगे और राष्ट्रीय सेवा योजना प्रकोष्ठ ऋषिकेश परिक्षेत्र के माध्यमिक विद्यालयों के राष्ट्रीय सेवा योजना के स्वयं सेवकों तथा नमामि गंगे के संयुक्त तत्वाधान में आज स्पर्श गंगा दिवस पर कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें नमामि गंगे के प्रदेश संयोजक कपिल गुप्ता ने कहा कि मां गंगा स्वर्ग से अवतरित हैं तथा इनकी महत्ता को समझते हुए हमें इसको सदैव साफ एवं स्वच्छ रखना चाहिए।

कार्यक्रम के अध्यक्ष बंशीधर पोखरियाल ने कहा गंगा देवप्रयाग में अलकनंदा तथा भागीरथी के संगम से बनती है परंतु गोमुख से गंगासागर तक मां गंगा सबको आर्थिक आध्यात्मिक सांस्कृतिक एवं पुरातन संस्कृति को समेटे हुए सिंचित कर रही है

यमकेश्वर क्षेत्र के जिला पंचायत सदस्य आरती गौड़ ने कहा की राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई के छात्र छात्रा एवं कार्यक्रम अधिकारी पूरी लगन निष्ठा और सेवा भाव से समाज को संदेश दे रहे हैं तथा गंगा मैया की स्वच्छता के लिए अपना योगदान दे रहे हैं जो कि प्रेरणादाई है।

देहरादून जनपद के जिला समन्वयक दिले राम रवि ने कहा की जिसके स्पर्श क्षेत्र की राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई के छात्र छात्रा एवं कार्यक्रम अधिकारी बहुत अच्छे कार्यक्रमों के द्वारा समाज को स्वच्छता जन जागरूकता के लिए प्रेरित करते हैं जोकि अनुकरणीय कार्यक्रम का संचालन मनोज कुमार गुप्ता जी ने किया।

इस मौके जिला समन्वयक डा. दीलेराम रवि, नेहा नेगी (प्रदेश सह संयोजक), मनोज गुप्ता, विजय पाल सिंह, जयकृत रावत, रामगोपाल रतूड़ी, ज्योति सडाना, कमला शर्मा, महेश शर्मा, मोनिका रावत, अनिल नेगी, राजेश थपलियाल, पंकज गुप्ता, अनुराग अमोली, प्रकाश कुमार पूर्व सभासद महेश शर्मा, अमन हैदर, विश्व विख्यात शायर हैदर अमान हैदर आदि उपस्थित रहे।

शहीद राकेश डोभाल की पत्नी ने दिया पुत्र को जन्म

देवभूमि ऋषिकेश के लााल शहीद राकेश डोभाल के घर रत्न प्राप्ति को लेकर शहरवासियों में हर्ष का माहौल है। मेयर अनिता ममगाई ने भी शहीद के घर किलकारियां गूंजने पर खुशी का इजहार किया है।

आज दोपहर महापौर गंगा नगर स्थित शहीद के घर पर पहुंची। जहां शहीद की मां विमला डोभाल को बधाई दी। बीएसएफ के शहीद सब इंस्पेक्टर राकेश डोभाल के घर में पुत्ररत्न की प्राप्ति की सूचना के बाद समूची तीर्थ नगरी में हर्ष का माहौल है। शहीद राकेश डोभाल के घर में पुत्र रत्न की सूचना के बाद बधाइयां देने वालों का घर पर तांता लगा हुआ है। इस मौके पर शहीद के घर पहुंची मेयर ने कहा कि शहीद राकेश की शहादत व्यर्थ नहीं जाएगी ।उसके बलिदान को हमेशा याद रखा जाएगा। उन्होंने निगम की ओर से परिवार को हर संभव मदद देने का आश्वासन भी दिया। गौरतलब है कि करीब एक महीने पहले बीएसएफ के सब इंस्पेक्टर राकेश डोभाल जम्मू कश्मीर के बारामूला में आतंकवादियों से लोहा लेते हुए शहीद हो गए थे। विगत 16 नवंबर को उनका पार्थिव शरीर घर पर पहुंचा था। इसी दिन शहीद का राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार कर दिया गया था। इस दौरान क्षेत्रीय पार्षद उमा बृजपाल राणा, सुजीता रावत आदि मौजूद रहे।

नंदा तू राजी खुशी रैया अभियान के तहत बच्चों को वितरित की पोषाहार किट

आज नंदा तू राजी खुशी रेंया एक अभियान टीबी से मुक्ति की ओर में जिला पंचायत सदस्य संजीव चैहान ने सहयोगी बंशी रावत के द्वारा पोषाहार वितरण कराया। पोषाहार वितरण में लाभार्थी और उनके परिजनों के साथ टीबी विभाग से लंकेश भट्ट, देशराज नौटियाल, अभियान की ओर से सहयोगिनी पारुल, लक्ष्मी, नेहा, प्रिय बहन सोनी का सहयोग रहा।

कार्यक्रम में लाभार्थी बच्चों की संख्या 18 रही। पोषाहार वितरण में. दलिया, दाल, मूंगफली, गुड़, दूध, अंडे, फल में कीनू और अमरूद दिए गए।

बता दें कि आस परिवार पिछले पांच साल से लगातार इस नंदा तू राजी खुशी रेंया एक अभियान टीबी से मुक्ति की ओर. को चला रहा है जन सहयोग से यह पोषाहार 30 दिसंबर तक चलेगा। छह से सात माह प्रोटीन युक्त पोषण इसकी आवश्यकता होती है।

30 वर्षीय व्यक्ति की एम्स ऋषिकेश में सफल आरएसओवी सर्जरी

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान एम्स ऋषिकेश के चिकित्सकों ने दिल में छेद, आरएसओवी एवं काॅर्डियक वाॅल्व में रिसाव के कारण सांस लेने में अत्यधिक कठिनाई का सामना कर रहे एक 30 वर्षीय व्यक्ति की सफलतापूर्वक सर्जरी को अंजाम दिया गया है। ऑपरेशन के बाद मरीज पूरी तरह से स्वस्थ है,जिसे जल्दी ही अस्पताल से छुट्टी दे दी जाएगी। एम्स निदेशक प्रो. रविकांत ने मरीज की सफलतापूर्वक जटिल सर्जरी करने वाली टीम की प्रशंसा की है।

चमोली जनपद के जोशीमठ निवासी एक 30 वर्षीय व्यक्ति पिछले कई वर्षों से दिल में छेद की समस्या से ग्रसित था। दिल में छेद होने के कारण उसके काॅर्डियक वाॅल्व में रिसाव भी शुरू हो गया, जिससे उसका हार्ट सही ढंग से कार्य नहीं कर पा रहा था। इस पैदायशी समस्या के कारण उम्र बढ़ने के साथ साथ उक्त व्यक्ति की परेशानी भी लगातार बढ़ने लगी थी। जन्मजात दिल में छेद की वजह से उसे सांस लेने में अत्यधिक कठिनाई होने लगी थी,लिहाजा उसने समस्या से निजात पाने के लिए उत्तराखंड के विभिन्न छोटे-बड़े अस्पतालों में अपना उपचार कराया, मगर मरीज स्वस्थ होने के बजाए और अधिक गंभीर स्थिति में आ गया। थकहारकर उक्त मरीज ने इलाज के लिए एम्स ऋषिकेश की ओर रुख किया। जहां सघन परीक्षण के बाद एम्स के काॅर्डियोलाॅजी विभाग के विशेषज्ञ चिकित्सकों ने पाया कि उसके दिल में छेद है, जिससे उस स्थान पर दिल के वाॅल्व से रिसाव हो रहा है। इस छेद के कारण मरीज के दिल की बड़ी धमनी का एक हिस्सा भी फट गया था, जिसे रप्चर्ड साइनस ऑफ वॉलसाल्वा (आरएसओवी) कहते हैं। यह स्थिति मरीज के जीवन के लिए बड़ा गंभीर स्तर का था। विशेषज्ञ चिकित्सकों के अनुसार हालांकि उक्त व्यक्ति के दिल में छेद की समस्या जन्मजात थी, लेकिन समय पर उचित इलाज नहीं मिले के कारण मरीज गंभीर स्थिति में पहुंच गया था। जिसके चलते सांस लेने में कठिनाई और धड़कन तेज चलने के कारण वह कोई भी काम नहीं कर पा रहा था।

एम्स निदेशक प्रो. रविकांत ने बताया कि संस्थान के विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम ने इस व्यक्ति के दिल का ऑपरेशन कर उसे नया जीवन प्रदान किया है। उन्होंने बताया कि एम्स में मरीजों को अत्याधुनिक तकनीक से युक्त विश्वस्तरीय स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराई जा रही हैं। बताया कि हृदय संबंधी विकारों से जुड़े विभिन्न रोगों के समुचित इलाज व प्रबंधन के लिए ऋषिकेश एम्स में काॅर्डियोलॉजिस्ट, काॅर्डियक सर्जन, काॅर्डियक एने​स्थिटिक्स व रेडियोलॉजिस्ट विशेषज्ञों की पूरी टीम उपलब्ध है।

एम्स के काॅर्डियक थोरेसिक सर्जन डाॅ. अनीश गुप्ता के नेतृत्व में काॅर्डियोथोरेसिक विभाग की टीम ने इस जटिल हृदय शल्यक्रिया में सफलता हासिल की। इस बाबत डाॅ. गुप्ता ने बताया कि ऑपरेशन का सबसे कठिन हिस्सा मरीज के हृदय वाॅल्व की मरम्मत करना था। लिहाजा वाॅल्व की मरम्मत में बेहतद गंभीरता बरती गई। उन्होंने बताया कि उक्त मरीज का यह ऑपरेशन अटल आयुष्मान योजना के तहत निःशुल्क किया गया है। बहरहाल रोगी को वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया है व वह पूरी तरह से स्वस्थ है। बताया कि इस सर्जरी को आरएसओवी सर्जरी के नाम से जाना जाता है। जिसमें दिल के वाॅल्व एवं एन्यूरिज्म के टूटे हुए हिस्से को शल्य क्रिया विधि द्वारा ठीक किया जाता है।

डाॅ. अजय मिश्रा ने बताया कि यह संपूर्ण उपचार प्रक्रिया काॅर्डियोलॉजिस्ट विशेषज्ञों द्वारा टीम वर्क के आधार पर की गई। टीम में एंजियोग्राफी, रेडियोलॉजिस्ट, काॅर्डियक एनेस्थेटिस्ट आदि शामिल हैं। टीम नियमिततौर से मरीज की मॉनिटरिंग व देखभाल कर रही है। कॉर्डियोलॉजी विभागाध्यक्ष प्रो. भानु दुग्गल और डाॅ. यश श्रीवास्तव के अनुसार ऐसे रोगियों के दिल में यदि कोई छेद अथवा वाॅल्व लीक नहीं है, तो एंजियोग्राफी द्वारा इस स्थिति को ठीक किया जा सकता है। लेकिन इस तरह के मामलों में अक्सर ओपन हार्ट सर्जरी ही की जाती है। यह एक असामान्य समस्या है, जो शल्य क्रिया के रूप में एक चुनौतीपूर्ण कार्य होता है।

आरएलडीए और एमडीडीए के सहयोग से पुनर्विकसित होगा देहरादून का रेलवे स्टेशन

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने देहरादून रेलवे स्टेशन पुनर्विकास परियोजना की स्थिति की समीक्षा करते हुए रेल भूमि विकास प्राधिकरण (आरएलडीए) के अधिकारियों को समयबद्धता एवं गुणवतत्ता के साथ कार्य पूर्ण करने को कहा। आरएलडीए के वाइस-चेयरमैन वेद प्रकाश डुडेजा ने परियोजना के विकास के सम्बन्ध में मुख्यमंत्री को अवगत कराया और 83.5 मीटर ऊंची बिल्डिंग समेत डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) के लिए मंजूरी मांगी।

ज्ञातव्य है कि देहरादून रेलवे स्टेशन को आरएलडीए और एमडीडीए द्वारा संयुक्त रूप से विकसित किया जा रहा है और इस संबंध में दोनों संस्थाओं के बीच पिछले साल एमओयू साइन किया गया था। पुनर्विकास का उद्देश्य यात्री सुविधा के अनुरूप स्टेशन को अलग-अलग प्रवेश और निकास, फूड आउटलेट्स, अंडरग्राउंड पार्किंग समेत अन्य अत्याधुनिक सुविधाओं के साथ अपग्रेड करना है। इस योजना में देहरादून स्टेशन में प्रवेश-निकास के लिए वर्तमान यातायात समस्याओं को दूर किया जाएगा। यात्री-आगंतुक हाई-राइजिंग टॉवर के ऊपर रिवॉल्विंग रेस्टोरेंट से लगभग एक घंटे में पूरे दून घाटी के 360 डिग्री बर्ड आई व्यू का आनंद ले सकते हैं। यह उत्तराखंड राज्य में अपनी तरह का पहला रिवॉल्विंग रेस्टोरेंट होगा। प्रस्तावित स्टेशन की लागत स्टेशन के लिए 125 करोड़ व कमर्शियल डेवलपमेंट के लिए 400 करोड़ रुपया होगी।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने एमडीडीए को कैबिनेट की मंजूरी के लिए प्रस्ताव को जनवरी 2021 के तीसरे सप्ताह में होने वाली अगली कैबिनेट बैठक में रखने की सलाह दी। रेल भूमि विकास प्राधिकरण के वाइस-चेयरमैन डुडेजा ने कहा कि हमने राज्य सरकार से देहरादून रेलवे स्टेशन की डीपीआर पर जल्द मंजूरी के लिए अनुरोध किया है, ताकि जल्द से जल्द आरएफपी मंगाई जा सके। देहरादून रेलवे स्टेशन का पुनर्विकास, वैश्विक मानकों के अनुरूप किया जाएगा और यह यात्रियों को सुखद अनुभव प्रदान करेगा। स्टेशन का पुनर्विकास रियल एस्टेट की कीमतों को बढ़ाने के साथ-साथ पर्यटन की क्षमता और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा देगा। साथ ही यह सभी स्टेकहोल्डर्स के लिए भी फायदेमंद होगा।

बैठक में मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) के वाइस-चेयरमैन रणवीर सिंह चैहान, उत्तराखंड के आवास सचिव शैलेश बगौली और देहरादून के जिलाधिकारी डॉ. आशीष कुमार श्रीवास्तव भी उपस्थित थे।