उत्तराखंड फिल्मांकन के लिए एक बेस्ट डेस्टिनेशन हैः सीएम

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 69वें राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कारों की सूची में उत्तराखंड की दो लघु फिल्म “पाताल-ती“ के लिए के लिए बिट्टू रावत को बेस्ट सिनेमैटोग्राफी एवं बेस्ट नॉन फीचर फिल्म हेतु सृष्टि लखेड़ा की गढ़वाली फ़िल्म “एक था गाँव“ को चयनित किए जाने पर दोनों फिल्मों के सभी परिश्रमी सदस्यों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैँ।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के इन युवाओं ने अपनी प्रतिभा के बल पर हिमालयी सरोकारों एवं पलायन जैसी गंभीर समस्या को राष्ट्रीय फलक पर लाने का कार्य किया है। ये फिल्में समाज को दिशा देने के साथ ही युवाओं को प्रेरणा देने का भी कार्य करेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन युवाओं को मिला पुरस्कार राज्य का भी सम्मान है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड का नैसर्गिक सौंदर्य फिल्मकारों को देवभूमि उत्तराखण्ड के लिए आकर्षण का केन्द्र बना है। राज्य में फिल्मकारों को सुविधा प्रदान करने के लिये उनके हित में कई निर्णय लिये गये हैं। उन्होंने कहा कि फिल्मांकन के लिये पूरा उत्तराखण्ड एक डेस्टिनेशन है।
मुख्यमंत्री ने फिल्मजगत से जुड़े प्रदेशवासियों से अपेक्षा की कि उन्हें उत्तराखण्ड की इस पावन भूमि ने इस मुकाम तक पहुंचाने का अवसर दिया है। देश व दुनिया के साथ अपने प्रदेश का नाम रोशन करने में भी वे मददगार बने। उन्होंने कहा कि हमें अपनी संस्कृति परिवेश एवं पूर्वजो द्वारा दिये गए संस्कारों से जुड़ा रहना होगा। ये हमारी जड़े हैं। अपनी जड़ों से जुड़ा रहकर ही हम जीवन में सफल होंगे तथा हमारी पहचान बनी रहेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि एक भारतीय दुनिया में कहीं भी रहे, कितनी ही पीढ़ियों तक रहे, उसकी भारतीयता, उसकी भारत के प्रति निष्ठा, कभी कम नहीं होती। इसका कारण हमारी विशिष्ट सांस्कृतिक चेतना है, जिसमें भारत उसके दिल में हमेशा जीवंत रहता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज देश के साथ ही विदेश में रहने वाले भारतीयों के मन में पुनः सनातन संस्कृति की अलख जगाने का भी कार्य किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार न सिर्फ देश का भौतिक विकास कर रही है, बल्कि दुनियाभर में भारत की सनातन संस्कृति की कीर्ति पताका को फहराने का कार्य भी कर रही है।
सूचना महानिदेशक बंशीधर तिवारी ने भी राज्य के इन यूवा फिल्मकारों को बधाई दी है। उत्तराखण्ड फिल्म विकास परिषद के नोडल अधिकारी डॉ. नितिन उपाध्याय के साथ अन्य अधिकारियों ने भी इसे राज्य के लिये बड़ी उपलब्धि बताया है।

देहरादून गढ़ी कैंट में शहीद दुर्गा मल्ल को मुख्यमंत्री ने दी श्रद्धांजलि

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गढ़ी कैंट स्थित शहीद दुर्गा मल्ल पार्क में आजाद हिंद फौज के शहीद मेजर दुर्गा मल्ल की प्रतिमा एवं चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने विभिन्न क्षेत्रों में सराहनीय कार्य करने वाले गोरखा समुदाय के लोगों को सम्मानित भी किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि अल्प आयु में ही मेजर दुर्गा मल्ल ने देश की रक्षा के लिए अपने सभी सुख, सुविधाओं को त्याग कर अंग्रेजों के विरुद्ध लड़ने का जो दृढ़ साहस दिखाया था, उसे हमेशा याद किया जाएगा। उन्होंने विपरीत परिस्थितियों में भी राष्ट्र प्रथम की भावना से प्रेरित होकर अपना सर्वस्व देश को अर्पण कर दिया। 1931 में दुर्गा मल्ल जी गोरखा राइफल्स में भर्ती हुए और यहीं से उन्होंने द्वितीय विश्व युद्ध में भी हिस्सा लिया। 1942 में वे नेताजी सुभाष चन्द्र बोस के आह्वान पर आजाद हिन्द फौज में भर्ती हो गये। 27 मार्च 1944 में अंग्रेज सैनिकों द्वारा दुर्गा मल्ल को युद्धबंदी बना लिया गया और सैनिक अदालत द्वारा उन्हें फांसी पर चढ़ाने का हुक्म दिया गया। 25 अगस्त 1944 को दिल्ली की तिहाड़ जेल में स्वाधीनता के इस दीवाने ने हंसते हंसते फांसी का फन्दा अपने गले में स्वीकार किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड देवभूमि एवं वीरों की भूमि है, बलिदानियों की भूमि है। यह बात हमारे सैनिकों ने आज तक हुए सभी युद्धों में सिद्ध भी की है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयासों से सेना ना केवल पहले से और अधिक सक्षम और सशक्त हो रही है बल्कि उसकी यश और कीर्ति पताका चारों ओर फहरा रही है। केन्द्र सरकार जहां एक ओर सेना के आधुनिकीकरण पर बल दे रही है, वहीं दूसरी ओर सैनिकों और उनके परिवारों को मिल रही सुख-सुविधाओं का भी ख्याल रख रही हैं। प्रधानमंत्री निरंतर सैनिकों के साहस और मनोबल को बढ़ा रहे है। राज्य सरकार भी नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में सैनिकों एवं उनके परिवार को मिलने वाली सुविधाओं में वृद्धि करने के लिए पूर्ण रूप से प्रतिबद्ध है। सैनिकों या उनके आश्रितों को मिलने वाली अनुदान राशि बढ़ाने से लेकर शहीद सैनिकों के आश्रितों को राज्य सरकार के अधीन आने वाली नौकरियों में वरीयता के आधार पर नियुक्ति देने का निर्णय भी इसी आशय से राज्य सरकार ने लिया है।

कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने शहीद मेजर दुर्गा मल्ल को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि उन्हें आजाद हिन्द फौज में गुप्तचर का कार्य दिया गया था। उन्होंने अपनी जिम्मेदारियों को कर्तव्यनिष्ठा से पूरा किया और देश के लिए अपना सर्वाेच्च बलिदान दिया। हम सबको उनके जीवन से प्रेरणा लेनी चाहिए। गणेश जोशी ने कहा कि गुनियालगांव, देहरादून में हमारे शहीद सैनिकों की स्मृति में भव्य सैन्य धाम का निर्माण किया जा रहा है। इस पर तेजी से कार्य किया जा रहा है।

इस अवसर पर विधायक सविता कपूर, पूर्व विधायक राजेश शुक्ला एवं अन्य गणमान्य उपस्थित थे।

राज्य सरकार किसानों के सभी हितों को ध्यान में रखकर ले रही फैसलेः सीएम

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुख्यमंत्री कैम्प कार्यालय में भारतीय किसान यूनियन तोमर के अध्यक्ष संजीव तोमर के नेतृत्व में किसान यूनियन के प्रतिनिधिमण्डल ने भेंट की। इस अवसर पर उन्होंने मुख्यमंत्री को किसानों की समस्याओं से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि जनपद हरिद्वार में अतिवृष्टि से हुए जलभराव के कारण फसलों को काफी नुकसान हुआ। उन्होंने कहा कि अभी कुछ लोगों को मुआवजा नहीं मिल पाया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन लोगों को अभी तक मुआवजा नहीं मिला है, उनको जल्द मुआवजा दिया जायेगा। उन्होंने अतिवृष्टि से फसलों को हुए नुकसान का पूरा आकलन कर क्षतिपूर्ति करने के लिए मुख्यमंत्री से आग्रह किया।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि राज्य सरकार किसानों के सभी हितों को ध्यान में रखकर कार्य कर रही है। अतिवृष्टि से फसलों को हुई क्षति का पूरा आकलन किया जा रहा है। केन्द्र सरकार को भी अतिवृष्टि से हुए नुकसान के लिए पत्र भेजा जा रहा है। केन्द्र सरकार की टीम द्वारा भी राज्य में हुए नुकसान का प्रारंभिक तौर पर आकलन किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि केन्द्र एवं राज्य सरकार द्वारा किसानों के कल्याण के लिए अनेक योजनाएं चलाई जा रही है। राज्य में मिलेट मिशन पर तेजी से कार्य किया जा रहा है। जैविक खेती को भी तेजी से बढ़ावा दिया जा रहा है।
इस अवसर पर प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु, सचिव विजय कुमार यादव, दीपेन्द्र चौधरी, किसान यूनियन प्रतिनिधिमण्डल से पवन त्यागी, अजब सिंह, संदीप चौहान, विकेश वालियान, तालिब हसन एवं अन्य प्रतिनिधि उपस्थित थे।

सचिवालय में लगी राखी की स्टॉलें, सीएम की कलाई पर बहनों ने बांधी राखी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सचिवालय में महिला स्वयं सहायता समूहों द्वारा लगाये गये राखी के स्टॉलों का अवलोकन किया। महिला स्वयं सहायता समूहों द्वारा बनाए जा रहे स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने और उन उत्पादों की अच्छी बिक्री हो, इस उद्देश्य से राज्य में ‘मुख्यमंत्री सशक्त बहना उत्सव योजना’ शुरू की गई है। इस योजना के तहत प्रदेश के सभी विकासखण्डों में महिला स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से 24 से 28 अगस्त 2023 तक राखियों के स्टॉल लगाये जा रहे हैं। स्टॉलों के अवलोकन के दौरान स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं ने मुख्यमंत्री की कलाई में राखी भी बांधी।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इसके बाद सचिवालय से वर्चुअल माध्यम से सभी जनपदों से जुड़ी महिला स्वयं सहायता समूहों की बहनों से संवाद किया। मुख्यमंत्री ने सभी से उनके द्वारा बनाये जा रहे उत्पादों एवं उनकी बिक्री की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि जो भी स्थानीय उत्पाद बनाये जा रहे हैं, उनमें हमें गुणवत्ता और पैकेजिंग का विशेष ध्यान रखना है। उन्होंने कहा कि हमारी बहनों ने जब भी कोई संकल्प लिया है, उसे सिद्धि तक पहुंचाया है। ‘मुख्यमंत्री सशक्त बहना उत्सव योजना’ को और बेहतर बनाया जायेगा। जिसमें महिला स्वयं सहायता समूहों द्वारा बनाये जा रहे उत्पादों को बढ़ावा देने के साथ ही उनके लिए अच्छे मार्केट की व्यवस्था भी की जायेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में महिला स्वयं सहयता समूहों द्वारा नये उत्पाद बनाने के लिए अनेक नवाचार किये गये हैं। उनके द्वारा बनाये जा रहे उत्पादों की मांग भी तेजी से बढ़ रही है। मुख्यमंत्री ने सभी प्रदेशवासियों से अपील भी की है कि त्योहारों एवं विशेष पर्वों पर महिला स्वयं सहायता समूहों द्वारा बनाये गये स्थानीय उत्पादों को जरूर खरीदें। ‘वोकल फॉर लोकल’ से जहां हमारे उत्पादों को बढ़ावा मिलेगा, स्थानीय स्तर लोगों की आजीविका भी बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में महिला सशक्तिकरण की दिशा में सराहनीय कार्य हो रहे हैं।
संवाद के दौरान महिला स्वयं सहायता समूहों की बहनों ने बताया कि रक्षा बंधन के अवसर पर उनके द्वारा भोजपत्र, ऐपण, वैजयंती माला, पिरूल एवं अन्य स्थानीय उत्पादों पर आधारित राखियां बनाई गई हैं। जिनकी बाजार में मांग भी बहुत है। सभी जनपदों में जिला प्रशासन द्वारा स्थानीय उत्पादों पर आधारित राखियों की बिक्री के लिए स्टॉल भी लगाये गये हैं। महिला स्वयं सहायता समूहों ने स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के प्रयासों की सराहना की एवं उनका आभार भी व्यक्त किया।
सचिवालय में गीता पुष्कर सिंह धामी ने भी महिला स्वयं सहायता समूहों द्वारा लगाये गये राखी के स्टॉलों का अवलोकन किया।
इस अवसर पर अपर कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी, प्रेमचन्द अग्रवाल, डॉ. धन सिंह रावत, रेखा आर्या, अपर मुख्य सचिव राधा रतूड़ी, सचिव ग्राम्य विकास राधिका झा, आयुक्त ग्राम्य विकास आनन्द स्वरूप, वर्चुअल माध्यम से सभी जिलाधिकारी एवं सीडीओ उपस्थित थे।

मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने विभागीय अधिकारियों को दिये निर्देश

स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ एवं सुलभ बनाने के उद्देश्य से राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के अंतर्गत संचालित विभिन्न परियोजनाओं की वर्ष 2026 तक की कार्ययोजना तैयार कर शीघ्र भारत सरकार को भेजी जायेगी। इसके लिये विभागीय अधिकारियों को विभागीय आवश्यकताओं एवं प्रदेश के भौगोलिक परिवेश को ध्यान में रखते हुये कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दे दिये गये हैं। इसके अतिरिक्त जिन परियोजनाओं की प्रगति धीमी चल रही है उनमें तेजी लाने को कहा गया है।

चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने आज स्वास्थ्य महानिदेशालय स्थित सभागार में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत संचालित विभिन्न परियोजनाओं की प्रगति एवं अन्य राज्यों के साथ तुलनात्मक समीक्षा की। डा. रावत ने बताया कि केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के तत्वाधान में गत माह प्रदेश में आयोजित तीन दिवसीय चिंतन शिविर में केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. मनसुख मंडाविया जी ने सभी राज्यों से एनएचएम के अंतर्गत वर्ष 2026 तक की विस्तृत कार्य योजना प्रस्तुत करने को कहा। जिसके तहत राज्य सरकार ने प्रदेश की विषम भौगोलिक परिस्थितियों एवं आवश्यकताओं को देखते हुये राज्य में संचालित लगभग दो दर्जन परियोजनाओं का विस्तृत कार्ययोजना तैयार कर भारत सरकार को भेजने का निर्णय लिया है ताकि आने वाले समय में प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को और बेहतर एवं लोक प्रिय बनाया जा सके। इसी क्रम में एनएचएम के अधिकारियों को प्रत्येक जनपद से स्वास्थ्य विभाग की आवश्यकताओं का विवरण मंगवाकर वर्ष 2026 तक का रोड़मैप तैयार करने के निर्देश दे दिये गये हैं। वर्तमान में संचालित कतिपय योजनाओं की धीमी प्रगति पर नाराजगी जताते हुये विभागीय मंत्री ने अधिकारियों को कार्यप्रणाली में सुधार लाने व योजनाओं की प्रगति में तेजी लाने के निर्देश दिये। डा. रावत ने कहा कि राज्य एवं जिला स्तरीय अधिकारियों के मध्य बेहतर समन्वय होना जरूरी है तभी योजनाओं का क्रियान्वयन तेजी से किया जा सकता है।

समीक्षा बैठक में डॉ. मुकेश राय, डॉ. फरीद व डॉ. अर्चना के द्वारा एनएचएम के अंतर्गत संचालित विभिन्न योजनाओं मैटरनल हेल्थ चाइल्ड हेल्थ, फेमिली प्लानिंग, पीसीएनडीटी, टीबी उन्मूलन, एनपीएनसीडी, पीएमएनडीपी, टेली कांस्लटेशन, फुटफॉल सहित डेढ़ दर्जन परियोजनाओं का पावर प्वाइंट प्रस्तुतिकरण दिया गया।

बैठक में अपर सचिव स्वास्थ्य एवं मिशन निदेशक एनएचएम रोहित मीना, अपर सचिव स्वास्थ्य अमनदीप कौर, नमामि बंसल, महानिदेशक स्वास्थ्य डॉ विनीता शाह, निदेशक चिकित्सा शिक्षा डॉ आशुतोष सायना, निदेशक स्वास्थ्य डॉ. सुनीता टम्टा, वित्त अधिकारी दीपाली भरणे, डॉ. अजीत जौहरी, डॉ. अमित शुक्ला सहित अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।

यू कोट वी पे मॉडल को मिले रिस्पांस से स्वास्थ्य विभाग खुश, डॉक्टरों ने दिखाया उत्साह

प्रदेश में विशेषज्ञ और सुपर विशेषज्ञ डाक्टरों की नियुक्ति के लिए आज इंटरव्यू का तीसरा चरण आयोजित किया गया। इस साक्षात्कार में 40 विशेषज्ञ डाक्टरों ने भाग लिया। इन डाक्टरों को ‘यू कोट, वी पे‘ योजना के तहत संविदा पर तैनाती दी जाएगी। विशेषज्ञ डाक्टरों को 4 लाख से 6 लाख रुपये महीने का वेतन दिया जाएगा। स्वास्थ्य सचिव डा. आर राजेश कुमार का कहना है कि इन डाक्टरांे की तैनाती जल्द होगी। साक्षात्कार टीम में एचएनबी मेडिकल विश्वविद्यालय के कुलपति डा. हेमचंद्र पंत, अपर सचिव स्वास्थ्य डा. अमनदीप कौर, स्वास्थ्य महानिदेशक डा. विनीता शाह, अपर सचिव मेडिकल एजूकेशन डा. आशुतोष सयाना शामिल थे।
स्वास्थ्य विभाग ने पर्वतीय जिलों में स्पेश्यलिस्ट और सुपर स्पेश्यलिस्ट डाक्टरों की कमी को दूर करने की कवायद कर रहा है। पर्वतीय क्षेत्रों में भी विशेषज्ञ डाक्टरों की तैनाती के लिए स्वास्थ्य विभाग के प्रयास रंग ला रहे हैं। देहरादून में आज हुए इंटरव्यू में पैथोलॉजिस्ट, गायनोलॉजिस्ट, एनेस्थेटिक, सर्जन, पीडियाट्रिश, ऑर्थाेपेडिक डॉक्टर समेत कुल 40 डॉक्टरों ने हिस्सा लिया। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत ‘यू कोट, वी पे’ के माध्यम से स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की संविदा पर तैनाती की जानी है। साक्षात्कार प्रोफेसर हेम चंद्र, कुलपति, एचएनबी उत्तराखंड चिकित्सा शिक्षा विश्वविद्यालय की अध्यक्षता में आयोजित किये गये।
सचिव स्वास्थ्य डा. आर राजेश कुमार ने बताया कि यह सारी भर्तियां राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत संविदा पर की जा रही हैं। उन्होंने बताया कि प्रदेश के पहाड़ी जिलों में स्वास्थ्य विभाग की ओर से बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर, दवाईयां, आधुनिक चिकित्सा उपकरण की सुविधाएं तो है, लेकिन प्रदेश के कुछ स्थानों पर स्पेशलिस्ट डाक्टरों के रिक्त पदों के कारण आमजन को पूर्णता सुविधाओं का लाभ नही मिल पा रहा था। शीघ्र ही इन रिक्त पदों पर स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की नियुक्ति हो जाएगी, जिससे आम जन को गुणवत्ता पूर्ण उच्च स्वास्थ्य सुविधा अपने नजदीकी चिकित्सालय में मिल सकेगी ताकि स्थानीय निवासियों को स्वास्थ्य संबंधी सेवाओं का लाभ अपने ही क्षेत्र में मिल सके।
स्वास्थ्य सचिव ने बताया कि तृतीय चरण में 40 स्पेशलिस्ट डॉक्टर जिसमें पैथोलॉजिस्ट, गायनोलॉजिस्ट, एनेस्थेटिक, सर्जन, पीडियाट्रिशन, रेडियोलॉजिस्ट, ऑर्थाेपेडिक आदि ने साझात्कार में प्रतिभाग किया गया है। आवश्यकतानुसार ‘यू कोट, वी पे’ मॉडल का चतुर्थ चरण भी किया जा सकता है। उन्होंने बताया चयनित डॉक्टरों की सूची तैयार कर जल्द नियुक्ति दी जाएगी जिससे की आमजन को स्वास्थ्य लाभ मिल सके।
गौरतलब है कि उत्तराखंड के पहाड़ी जनपदों में स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की कमी दूर करने के लिए धामी सरकार ने यू कोट वी पे फार्मूले के तहत प्लान बनाया है। इस योजना के तहत विशेषज्ञ डाक्टरों को 4 लाख और सुपर स्पेश्यलिस्ट डाक्टरों को 6 लाख रुपये तक प्रति माह वेतन देने की योजना है।

उत्तराखण्ड समान नागरिक संहिता लागू करने वाला देश का पहला राज्य बनेगा-धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखण्ड में समान नागरिक संहिता लागू करने के लिये हमने प्रदेश की जनता से वादा किया था। इसके लिये प्रदेश की देवतुल्य जनता ने हमें मैनडेट दिया है। जन अपेक्षाओं के अनुरूप हमने इस दिशा में कदम उठाये हैं। इसमें समुदाय विशेष की कोई हानि नहीं है। उत्तराखण्ड देवभूमि है राज्य का मूल स्वरूप न बिगडे यह देखना हमारी जिम्मेदारी है। मंगलवार को समाचार एजेन्सी ए.एन.आई. को दिये गये साक्षात्कार में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि राज्य में कोई भी किसी पंथ, समुदाय, धर्म, जाति का हो सबके लिये एक समान कानून हो, इसके प्रयास किये गये है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि शीघ्र ही उत्तराखण्ड समान नागरिक संहिता लागू करने वाला देश का पहला राज्य बनेगा। समान नागरिक सहिंता सबका साथ सबका विकास सबका विश्वास के मूलमंत्र की दिशा में बढ़ाया गया महत्वपूर्ण कदम है। आमजन का दृष्टिकोण भी इस विषय पर सकारात्मक है। समान नागरिक संहिता लागू करने के लिये गठित समिति द्वारा डेढ़ साल में 2 लाख से भी ज्यादा लोगों के सुझाव, विचार लिये। हमारा ड्राफ्ट अन्य राज्यों को भी पसंद आएगा। रिटायर्ड जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में गठित ड्राफ्ट कमेटी प्रदेश में हर वर्ग, हर समुदाय, हर जाति के प्रमुख हितधारकों से वार्ता कर ड्राफ्ट तैयार कर चुकी है। ड्राफ्ट मिलते ही इसे विधानसभा में प्रस्तुत कर लागू कर दिया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड देवभूमि है। दो-दो अंतरराष्ट्रीय सीमा से लगा है। धर्म, अध्यात्म एवं संस्कृति का केन्द्र है। राज्य हित में उत्तराखण्ड में धर्मांतरण को लेकर सख्त कानून बनाया गया है। प्रदेश में अब धर्मांतरण कराने वालों के विरूद्ध इस कानून के तहत कार्यवाही की जा सकेगी। राज्य में जबरन धर्म परिवर्तन संज्ञेय एवं गैर जमानती होगा। इसमें 2 से 7 साल तक जेल और 25 हजार रुपये जुर्माने का प्रावधान किया गया है।

सीएम ने राज्य आपातकालीन परिचालन केन्द्र से प्रदेश में अतिवृष्टि से हुए नुकसान की ली जानकारी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दिल्ली से वापस आते ही सचिवालय स्थित राज्य आपातकालीन परिचालन केन्द्र पहुंचकर प्रदेश में हो रही अतिवृष्टि एवं नुकसान की अधिकारियों से जानकारी ली। उन्होंने जिलाधिकारी टिहरी एवं पौड़ी से फोन पर वार्ता कर इन जनपदों में हुए नुकसान की जानकारी ली। मौसम विभाग का पूर्वानुमान है कि अगले दो दिनों में राज्य के अधिकांश जनपदों में भारी से बहुत भारी वर्षा होने की संभावना है। मुख्यमंत्री ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिये हैं कि मौसम विभाग के पूर्वानुमान को दृष्टिगत रखते हुए जिला प्रशासन को अलर्ट मोड पर रखें एवं सभी सहयोगी संस्थाओं से निरन्तर समन्वय बनाये रखें। मुख्यमंत्री ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिये हैं कि जनपदों में खाद्यान्न से संबंधित सभी वस्तुओं के साथ ही दवाओं की भी पर्याप्त उपलब्धता रखी जाएं। शासन के उच्चाधिकारियों एवं सचिव आपदा प्रबंधन को भी जिलाधिकारियों से निरन्तर समन्वय बनाये रखने के मुख्यमंत्री ने निर्देश दिये हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अतिवृष्टि से प्रदेश में बहुत लोग प्रभावित हुए हैं। कुछ लोगों ने अपने परिवार के लोगों को खोया है। काफी लोग बेघर हुए हैं। ऐसे लोगों के लिए जल्द ही एक योजना लाई जा रही है। बेघर हुए लोगों को पुनर्वास की व्यवस्था, उनके रोजगार के लिए प्रशिक्षण की व्यवस्था की जायेगी। जिन बच्चों ने इस आपदा में अपने माता-पिता को खो दिया है, उन बच्चों के लिए शिक्षा का इस योजना के तहत प्रबंध किया जायेगा। अतिवृष्टि के कारण प्रदेश में आपदा की स्थिति है। सड़कों, पुलों, मकानों, फसलों, बिजली एवं पानी की लाईनों का भी काफी नुकसान हुआ है। मुख्यमंत्री ने कहा राज्य में अतिवृष्टि से एक हजार करोड़ से भी अधिक की परिसम्पति का प्रदेश को नुकसान हुआ है। भारत सरकार की टीम ने राज्य में हो रहे नुकसान का प्रारंभिक रूप में सर्वे भी किया है। आपदा से हो रहे नुकसान का आकलन करने के लिए राज्य सरकार से भी भारत सरकार को पत्र भेजा रहा है।
इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव राधा रतूड़ी, सचिव शैलेश बगोली, सचिव आपदा प्रबंधन डॉ. रंजीत सिन्हा, अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी, राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण रिद्धिम अग्रवाल, अपर सचिव सविन बंसल एवं विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

उद्यमियों से उत्तराखण्ड को अपनी कर्मभूमि बनाने का किया आह्वान

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को नई दिल्ली में देश के उद्योग जगत से जुड़े उद्यमियों से संवाद कर उद्यमियों का उत्तराखण्ड को अपनी कर्मभूमि बनाने का आह्वान किया। उत्तराखण्ड को देश में तेजी से विकास करने वाला राज्य बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे उद्यमी राज्य के ब्रांड एम्बेसडर है। संवाद के दौरान बड़ी संख्या में विभिन्न उद्योगों के प्रतिनिधियों ने अपने सुझाव रखने के साथ राज्य में निवेश की भी सहमति जताई।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा देश की अर्थ व्यवस्था को USD 5 ट्रिलियन बनाये जाने का लक्ष्य रखा है। इसी को ध्यान में रखते हुये उत्तराखण्ड राज्य द्वारा राज्य की आर्थिकी को सुदृढ़ करने के लिये सशक्त उत्तराखण्ड मिशन लॉच किया गया है, जिसके अन्तर्गत अगले 5 वर्षों में राज्य की जीएसडीपी दोगुना करने का लक्ष्य रखा गया है। राज्य द्वारा इस लक्ष्य की प्राप्ति की कड़ी के रूप में उत्तराखण्ड ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट-2023 का आयोजन किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य की निवेशक केन्द्रित नीतियां, बुनियादी ढांचे में निवेश, कुशल जनशक्ति की उपलब्धता और गुड गवर्नेस के द्वारा राज्य में स्वस्थ निवेश के वातावरण की नींव रखी है। बेहतर योजना संरचना, प्रभावी नीति निर्धारण, नवाचारों का प्रोत्साहन एवं अन्तर्विभागीय समन्वय तथा विकास कार्यों के अनुश्रवण एवं मूल्यांकन हेतु नीति आयोग की तरह राज्य में सेतु (State Institute for Empowering and Transforming Uttarakhand) का गठन किया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत सरकार की भांति राज्य सरकार द्वारा भी अनुपयोगी अधिनियमों को हटाने/बदले जाने की कार्यवाही की जा रही है। अब तक लगभग 1250 ऐसे अधिनियमों को चिन्हित किया गया है, जिनमें से लगभग 500 अधिनियमों को सिंगल रिपील एक्ट के माध्यम से विलोपित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा निवेशकों को बेहतर एवं समयबद्ध सुविधायें देने हेतु प्रक्रियाओं का सरलीकरण किया जा रहा है। राज्य में अवस्थापना सुविधाओं के सृजन तथा निवेशकों को आकर्षित करने हेतु उत्तराखण्ड इन्वेस्टमेंट एण्ड इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट बोर्ड (UIIDB) का गठन किया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आर्थिक दृश्टि से सशक्त राज्य की परिकल्पना आज सभी राज्य कर रहे हैं। हमने भी उत्तराखण्ड को वर्श 2025 तक देष का सर्वश्रेष्ठ राज्य बनाने का लक्ष्य रखा है। इस उद्देश्य की पूर्ति हेतु हम सामुहिक प्रयासों के द्वारा प्रधानमंत्री जी की अवधारणा ’’सबका साथ सबका विकास और सबका विश्वास’’ इस मूल मंत्र को साकार करने की दिशा में कार्य कर रहे है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का देवभूमि उत्तराखण्ड से विशेष लगाव है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में पिछले 9 सालों में उत्तराखण्ड राज्य में हर क्षेत्र में तेजी से विकास कार्य हुए हैं। प्रधानमंत्री द्वारा उत्तराखण्ड राज्य को विभिन्न विकास योजनाएं दी गई है। चार धाम ऑल वेदर रोड पर तीव्र गति से काम किया जा रहा है। ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन पर तेजी से कार्य हो रहा है। केदारनाथ पुनर्निर्माण कार्य पर तेजी से कार्य चल रहा है। बद्रीनाथ में मास्टर प्लान के तहत कार्य प्रगति पर हैं। प्रधानमंत्री जी ने गौरीकुण्ड-केदारनाथ और गोविंदघाट-हेमकुण्ट साहिब रोपवे का शिलान्यास किया है। इससे आने वाले समय में यात्रा सुगम होगी। ऋषिकेश को सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक नगरी के रूप में विकसित किया जा रहा है। उत्तराखण्ड भारत की आध्यात्मिक राजधानी के रूप में भी जाना जाता है। पवित्र चारधाम मंदिर, हरिद्वार व ऋशिकेष में मोक्षदायिनी गंगा के साथ-साथ मानसखण्ड मंदिर मिशन प्रमुख हैं। उन्होंने कहा कि फिल्मांकन की दृष्टि से पूरा उत्तराखण्ड ही एक डेस्टिनेशन है। उन्होंने कहा कि राज्य में ’’ईज आफ डूईंग बिजनेस’’ के साथ-साथ ’’पीस आफ डूईंग बिजनेस’’ भी है। उत्तराखण्ड राज्य में कार्यरत उद्योगों में श्रमिक असंतोष की घटनायें न के बराबर हैं। श्रमिक असंतोष के कारण उद्योगों में मानव श्रम का ह्रास देश में सबसे कम है। उत्तराखण्ड में अपराध दर राष्ट्रीय औसत से 22 प्रतिशत कम अपराध दर है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि नीति आयोग द्वारा जारी वर्ष 2022 के निर्यात तैयारी सूचकांक में उत्तराखण्ड राज्य हिमालयी राज्यों में प्रथम स्थान पर, जबकि सम्पूर्ण देष में 9वें स्थान पर है। उद्योग संवर्द्धन और आन्तरिक व्यापार विभाग की ’’ LEADS’’ रैंकिंग में वर्श 2022 की रैंकिंग में उत्तराखण्ड राज्य एचीवर्स श्रेणी में शामिल है। इसी प्रकार स्टार्टअप रैंकिंग में ’’लीडर’’ श्रेणी में शामिल है। राज्य में निवेश प्रोत्साहन एवं संवर्द्धन हेतु उद्योग निदेशालय स्तर पर एक समर्पित ’’इन्वेस्टर फैसिलिटेशन सेल’’ की स्थापना की है, जो निवेशकों/व्यवसायियों के लिये ’’वन स्टॉप शॉप’’ के रूप में डेडीकेटेड हैण्डहोल्डिंग सपोर्ट। रू0 5.00 करोड़ से अधिक के पूंजी निवेश करने वाले उद्यमियों के लिये एक डेडीकेटेड रिलेशनशिप मैनेजर की सुविधा उपलब्ध है। निवेशकों को उद्योगों की स्थापना के लिये अपेक्षित अनुमोदन/अनुज्ञा/स्वीकृति हेतु राज्य में ऑनलाईन सिंगल विण्डो क्लीयरेंस पोर्टल www.investuttarakhand.uk.gov.in की स्थापना की गई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड में 2003 के बाद पूर्व प्रधानमंत्री स्व.अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा स्वीकृत किये गये विशेष औद्योगिक पैकेज से औद्योगीकरण में तेजी आई है। राज्य में तीन बडे औद्योगिक पार्क बनाये गये हैं। राज्य की नीति संरचना में पर्यटन नीति-2023, एमएसएमई नीति-2023, स्टार्टअप नीति-2023, लॉजिस्टिक्स नीति-2023, निजी औद्योगिक क्षेत्रों की स्थापना हेतु नीति-2023 शामिल हैं। हमने विभिन्न क्षेत्रों में 27 नीतियां प्रख्यापित की हैं। राज्य की सभी नीतियां निवेशक अनुकूल हैं और हमने अन्य राज्यों की तुलना में अपनी नीतियों को आकर्षक बनाया है। राज्य में वर्तमान में लगभग 6000 एकड़ का लैण्ड बैंक विभिन्न सैक्टर के उद्योगों की स्थापना हेतु बना लिया है। इसके साथ-साथ उद्योगों के लिये आवश्यक भूमि की उपलब्धता सुनिश्चित किये जाने हेतु निजी औद्योगिक आस्थानों/क्षेत्रों की स्थापना हेतु नीति-2023 लागू की है। निजी क्षेत्र में उद्योग स्थापना हेतु यदि 80 प्रतिशत भूमि उद्यमी द्वारा क्रय कर ली जाती है और शेष भूमि क्रय करने में बाधा उत्पन्न होती है, तो राज्य सरकार द्वारा उक्त भूमि का अधिग्रहण कर उपलब्ध कराया जायेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के उद्यमियों, हितधारकों तथा सम्बन्धित विभागों से निरन्तर संवाद के माध्यम से ही समस्याओं के निस्तारण का प्रारम्भ सितम्बर, 2021 से किया गया है। विभिन्न बैठकों में उद्यमियों द्वारा उठाई गई समस्याओं में से 90 प्रतिशत से अधिक समस्याओं का निस्तारण किया जा चुका है। विभिन्न उद्योगों एवं राज्य सरकार के विभागों के मध्य विवाद की स्थिति के सम्मानजनक निस्तारण हेतु सुलह समिति बनाई है। इस समिति के माध्यम से बातचीत एवं आपसी सुलह के द्वारा ऐसे विवादों के समाधान की व्यवस्था है। हमारी नीतियों की संरचना प्रगतिषील है और इनका उद्देश्य सतत् और समग्र विकास है। हामारी नितियां महिलाओं, एस0सी0, एस0टी0 और युवा के विकास पर केन्द्रित हैं। सम्पन्न पारिस्थितिक तंत्र, कुषल और प्रतिभाशाली कार्यबल, उच्च तकनीकी विषेशज्ञता, निरन्तर इनोवेषन और व्यापार अनुकूल नीतियों के संयोजन द्वारा हम राज्य को सभी तरह के व्यवसाय एवं व्यवसायियों हेतु एक आदर्ष गंतव्य के रूप में स्थापित करने के लिये संकल्पित हैं। मुख्यमंत्री ने उद्यमियों के उत्साहजन सुविधाओं के प्रति आभार जताते हुए उत्तराखण्ड राज्य के ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट-2023 ’’डेस्टिनेशन उत्तराखण्ड-2.0’’ के अन्तर्गत देष के विभिन्न शहरों में आयोजित होने वाले रोड शो में सम्मिलित होने व इस आयोजन के मुख्य कार्यक्रम में सहभागी बनने की भी अपेक्षा की।
इस अवसर पर मुख्य सचिव डॉ एस.एस संधु, सचिव मुख्यमंत्री आर मीनाक्षी सुन्दरम, शैलेश बगोली ने भी राज्य में निवेशकों के हित में की गई पहल की जानकारी दी। सचिव उद्योग विनय शंकर पाण्डे ने आभार व्यक्त किया तथा महानिदेशक उद्योग रोहित मीणा द्वारा प्रस्तुतिकरण के माध्यम से उद्योगों को दी जा रही सुविधाओं की जानकारी दी। संवाद के दौरान असोचेम के अध्यक्ष अजय सिंह ने उत्तराखण्ड की स्टार्टअप पॉलिसी की सराहना करते हुए, राज्य में होटल टूरिज्म को बढ़ावा देने का सुझाव दिया। ऑटोमोटिव कॉम्पोनेन्ट मनुफैचतुरर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के डारेक्टर जनरल विन्नी मेहता ने उत्तराखंड सरकार और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को बधाई देते हुए उनकी औद्योगिक नीतियों को सराहा। आल इंडिया मोटर्स ट्रंसपोर्ट (कांग्रेस) ए.पी. उनियाल ने कहा कि उत्तराखंड में अब काम करना आसान है। पी एच डी चौम्बर ऑफ कॉमर्स ने कहा उत्तराखंड सरकार पूरे भारत में औद्योगिक गतिविधियों के लिए बहुत सक्रिय है और उन्होंने उत्तराखंड सरकार को सस्टेनेबल डेवलपमेंट की दिशा में किये जा रहे प्रयासों के लिये बधाई दी है।
इस संवाद कार्यक्रम में पीएचडी चेम्बर ऑफ कॉमर्स एण्ड इंडस्ट्री के महासचिव सौरभ सनयाल, ऑटोमोटिव कम्पोनेंट मैनुफैक्चर्स एसोसिएशन ऑफ इण्डिया के महानिदेशक विन्नी मेहता, हेल्थकेयर फेडरेशन ऑफ इण्डिया के महासचिव सिद्धार्थ भट्टाचार्य, लघु उद्योग भारती के अध्यक्ष बलदेवभाई प्रजापति, इण्डियन एसोसिएशन ऑफ टूर ऑपरेटरस् के अध्यक्ष राजीव मेहरा, ऑल इण्डिया मोटर ट्रॉसपोर्ट कांग्रेस के महासचिव नवीन गुप्ता, ऑल इण्डिया फूड प्रोसेसर्स एसोसिएषन के अध्यक्ष राघव जदली, एसोएिसशन ऑफ कन्टेनर ट्रेन ऑपरेटर्स के अध्यक्ष मनीष पुरी, द फेडरेशन ऑफ इण्डियन चौम्बर्स ऑफ कॉमर्स एण्ड इंडस्ट्री के अध्यक्ष शुभ्रकांत पाण्डा, एसोसिएटेड चौम्बर्स ऑफ कॉमर्स एण्ड इंडस्ट्री ऑफ इण्डिया के अध्यक्ष अजय सिंह, कॉन्फेड्रेशन ऑफ रियल स्टेट डेवलपर्स एसोसिएशन ऑफ इण्डिया के सचिव पंकज गोयल, होटल एसोसिएशन ऑफ इण्डिया के महासचिव एम.पी बेजबरूवा, नेशनल एसोसिएशन ऑफ सॉफ्टवेयर एण्ड सर्विस कम्पनीज के अध्यक्ष देबजानी घोष, सोसाइटी ऑफ इण्डिया ऑटोमोबाइल मैनुफैक्चर्स के महानिदेशक राजेश मेनन सहित लगभग तीन दर्जन से अधिक उद्यमियों ने अपने सुझाव एवं विचार रखे।
इस अवसर पर महानिदेशक सूचना बंशीधर तिवारी के साथ अन्य अधिकारी एवं पदाधिकारी उपस्थित थे।

राज्य में वैश्विक निवेश सम्मेलन का दिसम्बर में आयोजन, आज कई दिग्गजों से सीएम ने दिल्ली में की मुलाकात

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को नई दिल्ली में उत्तराखण्ड में आगामी दिसम्बर माह में आयोजित होने वाले वैश्विक निवेश सम्मेलन में निवेश की संभावनाओं के दृष्टिगत भारतीय उद्योग परिसंघ (सी.आई.आई) के उत्तरी क्षेत्र के अध्यक्ष दीपक जैन, सी.आई.आई. के उपाध्यक्ष माधव सिंघानिया से विचार विमर्श किया।
इस उच्च स्तरीय बैठक में सी.आई.आई. के अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष ने मुख्यमंत्री को उद्योग जगत के प्रमुखों की भागीदारी सुनिश्चित कर उत्तराखंड के विकास के लिए प्रतिबद्धता का आश्वासन दिया। इस आयोजन में सीआईआई ने निवेशकों और राज्य के बीच संबंधों को बढ़ावा देने में अपनी सहयोगी की बात कही जिससे राज्य के विकास और प्रगति के लिए अनुकूल माहौल तैयार करने में मदद मिल सके। इसके अतिरिक्त, सीआईआई ने राज्य के साथ मिलकर काम करने, पारिस्थितिक संतुलन और समग्र विकास को प्राथमिकता देने के लिए सतत विकास के लिए सीआईआई-आईटीसी उत्कृष्टता केंद्र के माध्यम से अपनी विशेषज्ञता की उपलब्धता का आश्वासन दिया।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि राज्य ने हाल ही में राज्य के समग्र विकास को सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न क्षेत्रों में निवेश आकर्षित करने के लिए 27 क्षेत्रीय नीतियां बनाई गई हैं। सरकार राज्य की अर्थव्यवस्था में 41 प्रतिशत योगदान देने वाले सेवा क्षेत्र के लिए एक समर्पित नीति प्रेषित करने की भी योजना बनाई जा रही है। सीआईआई और उत्तराखंड सरकार के मध्य विविध निवेश अवसरों की खोज और सहयोगात्मक पहल इस बैठक के प्रमुख विषय थे, जिन्हें राज्य के विकास को गति देने और निवेश को बढ़ावा देने के लिए केंद्रित किया गया था।
मुख्यमंत्री ने भारतीय वाणिज्य एवं उद्योग महासंघ (फिक्की) के अध्यक्ष सुभ्रकांत पांडा से भी निवेश से संबंधित विषयों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि फिक्की के सहयोग से देश व विदेशों में शो आयोजित किये जायेंगे। उन्होंने फिक्की से उत्तराखण्ड में जमीनी सहयोग पर भी ध्यान देने को कहा। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड में पर्यटन को उद्योग का दर्जा दिया गया है। पर्यटन के क्षेत्र में राज्य के निवेश की असीम संभावनाएं है। राज्य में देश के साथ विदेशों से भी इस क्षेत्र में उद्यमी आए इसके प्रयास किये जा रहे है। योग और वेलनेस राज्य की पहचान है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में आकर्षक पर्यटन नीति तैयार की गई है जिसके तहत अनेक क्षेत्रों में सब्सिडी दी जा रही है। पर्यटन क्षेत्र राज्य की आर्थिकी का मजबूत आधार है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट से निवेश के लक्ष्य की पूर्ति हेतु सरकार प्रोएक्टिव एप्रोच के साथ साथ यह भी सुनिश्चित करेगी की निवेशकों के हित,ज़रूरतों को ध्यान में रखते हुए पर्यटन, कृषि, बाग़वानी, आयुष, योग, सर्विस सेक्टर और अन्य संभावित क्षेत्रों को और अधिक समृद्धशाली कैसे बनाया जाए इसका रोड मैप लेकर हम अधिक से अधिक निवेश कैसे सुनिश्चित करें, इस पर काम कर रहे हैं। इन्हीं उद्देश्यों के साथ हमने उत्तराखंड में एक निवेश क्रांति लाने का संकल्प लिया है। इन्वेस्टर समिट में 2.5 लाख करोड़ के निवेश का लक्ष्य रखा गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में निवेश बढ़ाने के लिए औद्योगिक क्षेत्रों से जुड़े लोगों से लगातार संवाद किया जा रहा है। विभिन्न बैठकों में निवेशकों द्वारा उठाई गई समस्याओं के निस्तारण के लिए हर संभव प्रयास किये गये हैं। ग्लोबल इन्वेस्टर समिट-2023 से निवेश एवं रोजगार के अवसर बढ़ेगें एवं अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर उद्योग जगत में हो रहे नए नवाचारों से हमारे उद्यमियों को भी लाभ प्राप्त होगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा प्रारम्भ किये गये मेक इन इंडिया और पी. एम. गति शक्ति जैसी केन्द्र सरकार की विभिन्न परियोजनाओं में उत्तराखण्ड के उद्यमी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। आजादी के इस अमृत काल में उत्तराखण्ड को भी आगे बढ़कर अपना योगदान देना है, इसमें उद्योग जगत की सर्वाधिक महत्वपूर्ण भूमिका है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि औद्योगिक विकास के बैकबोन लॉजिस्टिक्स क्षेत्र को मजबूत करने और राज्य में व्यापार को सुविधाजनक बनाने के लिए कई बुनियादी ढांचा परियोजनायें शुरू की गयी है। निर्यात को बढ़ावा देने के लिए स्टेट ऑफ आर्ट के रूप में आई०सी०डी० की स्थापना की गयी है। शीघ्र ही अमृतसर कोलकाता इंडस्ट्रियल कॉरिडोर का कार्य आरम्भ होने वाला है। राज्य सरकार द्वारा उत्तराखण्ड लॉजिस्टिक्स नीति-2023 प्रख्यापित की गयी है, जिससे आधारभूत संरचना के विकास में मदद मिलेगी। राज्य सरकार ने विकसित उत्तराखंड को केंद्र में रख कर अपनी नीतियां बनाई हैं और यहीं कारण है कि आज उत्तराखंड तेजी से बिजनेस फ्रेंडली डेस्टिनेशन के तौर पर उभर रहा है।
इस अवसर पर मुख्य सचिव डॉ एस.एस संधु, सचिव मुख्यमंत्री आर मीनाक्षी सुन्दरम, विनय शंकर पाण्डेय, महानिदेशक उद्योग के साथ अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।