सीएम ने आवास परिसर में शहद निकालने की प्रक्रिया का किया अवलोकन

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री आवास परिसर में शहद निकालने की प्रक्रिया का अवलोकन किया। मुख्यमंत्री आवास परिसर में इस वर्ष मात्र 45 दिनों की अवधि में 520 किलोग्राम शहद का उत्पादन किया गया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड में शहद उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए अपार संभावनाएं मौजूद हैं, विशेषकर पर्वतीय और वन क्षेत्रों में। उन्होंने निर्देश दिए कि वन क्षेत्रों में बी-बॉक्स की स्थापना के लिए एक प्रभावी नीति तैयार की जाए, जिससे स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर मिल सकें। उन्होंने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के अंतर्गत मधुमक्खी पालन को प्राथमिकता दी जाएगी और इससे जुड़े किसानों एवं उद्यमियों को विशेष सब्सिडी प्रदान करने की व्यवस्था की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के पर्वतीय क्षेत्रों में मौन पालन को और अधिक प्रोत्साहित किया जाएगा तथा इसे ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जोड़ने के लिए तेजी से कार्य किया जाएगा। उन्होंने इसे स्वरोजगार का एक सशक्त माध्यम बताते हुए कहा कि इससे स्थानीय स्तर पर आय में वृद्धि के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण को भी बल मिलेगा।

इस दौरान मुख्यमंत्री ने उद्यान प्रभारी दीपक पुरोहित को निर्देश दिए कि मुख्यमंत्री आवास परिसर में वर्षभर शहद उत्पादन के लिए उपयुक्त पुष्पीय एवं परागयुक्त पौधों का रोपण किया जाए। साथ ही “थ्री-बी” (बर्ड फ्रेंडली, बी फ्रेंडली, बटरफ्लाई फ्रेंडली) गार्डन के निर्माण की दिशा में कार्य प्रारंभ किया जाए। मुख्यमंत्री ने विश्व पर्यावरण दिवस और हरेला पर्व जैसे अवसरों पर “थ्री-बी” आधारित पौधारोपण अभियान चलाने पर भी विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की पहलें न केवल पर्यावरण संरक्षण में सहायक होंगी, बल्कि मधुमक्खी पालन और शहद उत्पादन को भी स्थायी रूप से बढ़ावा देंगी, जिससे राज्य की अर्थव्यवस्था को नई दिशा मिलेगी।

फरियादियों की समस्या जानते हुए सीएम धामी ने अधिकांश का किया मौके पर निस्तारण

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय स्थित मुख्य सेवक सदन में प्रदेशभर से आए नागरिकों की समस्याएं सुनीं। इस दौरान उन्होंने आमजन से सीधे संवाद कर उनकी समस्याओं को गंभीरता से लिया तथा कई प्रकरणों का मौके पर ही समाधान किया।

मुख्यमंत्री ने सड़क, पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा एवं आर्थिक सहायता से संबंधित विभिन्न मामलों पर त्वरित कार्यवाही के निर्देश देते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए कि जनहित से जुड़े प्रकरणों का प्राथमिकता के आधार पर समयबद्ध एवं प्रभावी निस्तारण किया जाए। उन्होंने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिए कि समस्याओं के समाधान में अनावश्यक विलंब न हो तथा प्रत्येक प्रकरण की नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य शासन-प्रशासन को आमजन के प्रति संवेदनशील, जवाबदेह एवं पारदर्शी बनाना है, ताकि जनता को त्वरित राहत मिल सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि जनसुनवाई सरकार और जनता के बीच संवाद का सशक्त माध्यम है, जिससे न केवल समस्याओं का त्वरित समाधान होता है, बल्कि शासन की कार्यप्रणाली में भी निरंतर सुधार होता है।

इस अवसर पर उत्तराखंड फिल्म टेलीविजन एंड रेडियो एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने राज्य में प्रभावी एवं दूरदर्शी फिल्म नीति लागू किए जाने पर मुख्यमंत्री को अभिनंदन पत्र सौंपते हुए उनका आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि नई फिल्म नीति से उत्तराखंड फिल्म निर्माण के क्षेत्र में एक प्रमुख गंतव्य के रूप में उभर रहा है, जिससे स्थानीय कलाकारों, तकनीशियनों एवं युवाओं को नए अवसर प्राप्त हो रहे हैं।

जन जागरण अभियान समिति के तत्वाधान में विभिन्न विद्यालयों की छात्राओं ने राज्य सरकार द्वारा संचालित 15 उत्कृष्ट योजनाओं पर आधारित आकर्षक पोस्टर तैयार कर मुख्यमंत्री के समक्ष प्रस्तुत किए। छात्राओं ने इन योजनाओं के माध्यम से समाज के विभिन्न वर्गों को मिल रहे लाभ के प्रति आभार व्यक्त किया। मुख्यमंत्री ने छात्राओं के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार की रचनात्मक गतिविधियां न केवल विद्यार्थियों में जागरूकता बढ़ाती हैं, बल्कि उन्हें समाज और शासन से जुड़े विषयों के प्रति संवेदनशील भी बनाती हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार शिक्षा, महिला सशक्तिकरण एवं युवा विकास के क्षेत्र में निरंतर कार्य कर रही है और भविष्य में भी जनकल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से समाज के सभी वर्गों के उत्थान के लिए प्रतिबद्ध रहेगी।

इस अवसर पर आईजी गढ़वाल राजीव स्वरूप, अपर सचिव जे.सी कांडपाल, अपर आयुक्त गढ़वाल उत्तम सिंह चौहान एवं मुख्यमंत्री कार्यालय के अधिकारी मौजूद थे।

दूरभाष पर वार्ता कर सीएम धामी ने उत्तराखंड बोर्ड परीक्षा के मेधावियों का बढ़ाया हौसला

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा परिषद्, रामनगर (नैनीताल) द्वारा घोषित हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट परीक्षा परिणामों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले मेधावी विद्यार्थियों से दूरभाष पर वार्ता कर उन्हें हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं तथा उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने हाईस्कूल परीक्षा में शीर्ष स्थान प्राप्त करने वाले क्रमशः एम.पी. हिन्दू इंटर कॉलेज, रामनगर (नैनीताल) के अक्षत गोपाल, एस.वी.एम. इंटर कॉलेज, चिन्यालीसौड़ (उत्तरकाशी) के इशांत कोठारी, जी.बी. पंत राजकीय बालिका इंटर कॉलेज, खैरना (नैनीताल) की भूमिका तथा विवेकानंद विद्या मंदिर इंटर कॉलेज, मंडलसेरा (बागेश्वर) के योगेश जोशी से फोन पर संवाद कर उनकी उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त की।

इसी क्रम में मुख्यमंत्री ने इंटरमीडिएट परीक्षा में उत्कृष्ट स्थान प्राप्त करने वाली सरस्वती शिशु मंदिर इंटर कॉलेज बागेश्वर की गीतिका पंत, भंजूराम अमर इंटर कॉलेज, भूरारानी (उधमसिंह नगर) की सुशीला मेंदीरत्ता, सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज, आवास विकास ऋषिकेश के आर्यन तथा सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज, मायापुर (हरिद्वार) की वंशिका से भी दूरभाष पर वार्ता कर उन्हें बधाई दी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि विद्यार्थियों की यह उपलब्धि उनके परिश्रम, अनुशासन एवं समर्पण का परिणाम है। उन्होंने अभिभावकों एवं शिक्षकों के योगदान की भी सराहना करते हुए कहा कि उनके मार्गदर्शन से ही छात्र-छात्राएं इस प्रकार की सफलता प्राप्त कर पाते हैं।

मुख्यमंत्री ने सभी विद्यार्थियों को भविष्य के लिए शुभकामनाएं देते हुए कहा कि वे अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित रहकर निरंतर आगे बढ़ें तथा राज्य एवं देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दें। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार शिक्षा की गुणवत्ता में निरंतर सुधार के लिए प्रतिबद्ध है तथा मेधावी विद्यार्थियों को हरसंभव सहयोग प्रदान किया जाएगा।

केदारनाथ यात्रा की व्यवस्थाओं पर गलत जानकारी फैलाने वाले के खिलाफ सख्त कार्रवाई

चारधाम यात्रा को लेकर सोशल मीडिया पर भ्रामक एवं तथ्यहीन सूचनाएं प्रसारित करने वालों के विरुद्ध कार्रवाई लगातार जारी है। पूर्व में दर्ज प्रकरणों के क्रम में आज जनपद रुद्रप्रयाग के थाना सोनप्रयाग में एक और प्राथमिकी दर्ज की गई है।

सोशल मीडिया मॉनीटरिंग के दौरान इंस्टाग्राम आईडी जीमबनतसलचवमज के माध्यम से प्रसारित एक वीडियो संज्ञान में आया, जिसमें केदारनाथ धाम की व्यवस्थाओं को लेकर भ्रामक एवं निराधार दावे किए गए। वीडियो में यह गलत जानकारी दी गई कि एक वृद्ध श्रद्धालु को स्वास्थ्य खराब होने के बावजूद प्रशासन द्वारा सहायता नहीं दी गई तथा वीआईपी प्रोटोकॉल के चलते सामान्य श्रद्धालुओं की अनदेखी की जा रही है।

जबकि वास्तविकता में दिनांक 22.04.2026 को गुजरात निवासी एक श्रद्धालु की तबीयत खराब होने पर प्रशासन द्वारा तत्काल प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र, केदारनाथ पहुंचाया गया, जहां चिकित्सकों द्वारा उन्हें मृत घोषित किया गया। तत्पश्चात प्रशासन द्वारा आवश्यक कार्यवाही करते हुए हेलीकॉप्टर के माध्यम से शव को गुप्तकाशी भेजा गया।

उक्त वीडियो के माध्यम से तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर प्रस्तुत कर आमजन को भ्रमित करने एवं प्रशासन की छवि धूमिल करने का प्रयास किया गया, जिस पर संबंधित व्यक्ति के विरुद्ध विधिक कार्रवाई प्रारंभ कर दी गई है।

पुष्कर सिंह धामी ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि चार धाम यात्रा से जुड़ी किसी भी प्रकार की भ्रामक सूचना, अफवाह या दुष्प्रचार पर तत्काल, सख्त एवं प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

साथ ही, अन्य संदिग्ध वीडियो एवं सोशल मीडिया कंटेंट की भी सतत निगरानी की जा रही है और उन्हें चिन्हित कर कार्रवाई के दायरे में लाया जा रहा है। स्पष्ट किया जाता है कि चार धाम यात्रा की गरिमा, श्रद्धालुओं की आस्था एवं उत्तराखंड की छवि के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है। भ्रामक सूचना फैलाने वालों के विरुद्ध कार्रवाई की यह प्रक्रिया लगातार, सख्ती और पूरी सतर्कता के साथ जारी रहेगी।

सचिव, विभागाध्यक्ष एवं जिलाधिकारी अपने लक्ष्यों को निर्धारित करते हुए कार्ययोजना तैयार कर लेंः बर्द्धन

मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने सचिवालय में 25 बिंदु कार्यक्रम 2025-26 की समीक्षा की गई। मुख्य सचिव ने प्रत्येक जनपद के सभी बिंदुओं पर विस्तार से जानकारी ली। उन्होंने 25 बिंदु कार्यक्रम के वर्ष 2026-27 के लिए शीघ्र लक्ष्य निर्धारित किए जाने के भी निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि विभागों द्वारा वर्ष 2026-27 के लिए सभी जनपदों के लिए टारगेट अगले एक महीने में निर्धारित करते हुए पोर्टल में अपडेट कर लिए जाएँ। उन्होंने कहा कि सभी जनपदों की अपनी जनपदों में अलग अलग समस्याएं हैं, चौलेंज हैं। जनपदों को अपने फोकस एरिया निर्धारित करते हुए अपने लक्ष्य निर्धारित किए जायें।

मुख्य सचिव ने कहा कि सचिव, विभागाध्यक्ष एवं जिलाधिकारी अपने लक्ष्यों को निर्धारित करते हुए कार्ययोजना तैयार कर लें। उन्होंने कहा कि सभी इंडिकेटर्स के वर्षभर के लक्ष्य निर्धारित करते हुए मासिक लक्ष्य निर्धारित करें। मुख्य सचिव ने कहा कि प्रत्येक माह इसकी समीक्षा की जाएगी।

मुख्य सचिव ने कहा कि वन विभाग से सम्बन्धित लक्ष्यों को सभी जनपदों के लिए निर्धारित किए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि देशी व विदेशी पर्यटकों की संख्या के लक्ष्य बढ़ाए जाने पर फोकस किया जाए। उन्होंने विभाग को ऐसे जनपदों, जहां ईको टूरिज्म की योजनाएं नहीं चल रही हैं, को भी ईको टूरिज्म योजनाओं में शामिल किए जाने की बात कही। उन्होंने कहा कि प्रदेश में गवर्नेंस एंड जस्टिस के क्षेत्र में काफी सुधार हुआ है, परंतु अभी बहुत संभावनाएं हैं। इस दिशा में कार्य किए जाने की आवश्यकता है।

इस अवसर पर प्रमुख सचिव आर. मीनाक्षी सुंदरम एवं सचिव नितेश कुमार झा सहित सम्बन्धित विभागों के उच्चाधिकारी एवं जनपदों से जिलाधिकारी उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री आवास में हिमालयी राज्यों से समन्वय और नीति निर्धारण परिषद की हुई बैठक

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में मुख्यमंत्री आवास में हिमालयी राज्यों के मध्य आपसी समन्वय को सुदृढ़ करने, साझा चुनौतियों के समाधान हिमालयी राज्यों से समन्वय एवं नीति निर्धारण परिषद की प्रथम बैठक आयोजित की गई। बैठक के लिए समेकित रणनीति तैयार करने तथा क्षेत्रीय विकास को गति देने के विभिन्न बिंदुओं पर विस्तृत चर्चा की गई।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमालयी राज्यों की भौगोलिक, पर्यावरणीय एवं सामाजिक परिस्थितियाँ समान होने के कारण आपसी सहयोग और अनुभवों के आदान-प्रदान से प्रभावी नीति निर्माण संभव है। उन्होंने कहा कि जिन हिमालयी राज्यों में विभिन्न क्षेत्रों में अच्छे कार्य हुए हैं, उन कार्यों का विस्तृत अध्ययन बेस्ट प्रैक्टिस के रूप में राज्य में अपनाया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि इकॉनोमी और ईकोलॉजी में समन्वय के साथ मानव जीवन स्तर को बेहतर बनाना हमारा मुख्य उद्देश्य है। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड प्राकृति सम्पन्नता एवं जैव विविधता की दृष्टि से महत्वपूर्ण राज्य है। हिमालय और औषधियों के संरक्षण के क्षेत्र में राज्य में कार्य करने की अपार संभावनाएं हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जल संरक्षण के दिशा में राज्य सरकार द्वारा निरंतर प्रयास किये जा रहे हैं। जल स्रोंतों के पुनर्जीवीकरण की दिशा में अनेक प्रयास किये जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि हिमालय और पर्यावरण सरंक्षण के क्षेत्र में जो संस्थान अच्छा कार्य कर रहे हैं, उनका भी निरंतर सहयोग लिया जाए। हिमालयी राज्यों की विभिन्न चुनौतियों के समाधान के लिए हिमालयी राज्यों के विशेषज्ञों के साथ बैठक समय-समय पर बैठकों और विचार गोष्ठियों का आयोजन भी किया जाए। बैठक के दौरान जलवायु परिवर्तन, आपदा प्रबंधन, पर्यटन, जैव विविधता संरक्षण, जल स्रोतों के संरक्षण तथा सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज बैठक में जो भी सुझाव प्राप्त हुए हैं, उस दिशा में तेजी से काम आगे बढ़ाये जायेंगे।

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने कहा कि हिमालयी राज्यों की चुनौतियों को दूर करने के लिए हिमालयी राज्य कैसे एकीकृत रूप में कार्य कर सकते हैं, इस दिशा में प्रयास किये जायेंगे। उन्होंने कहा कि देश की बड़ी आबादी को हिमालय से फायदा होगा। हिमालय के संरक्षण और संवर्द्धन की दिशा में कार्य करने के लिए हमें इस क्षेत्र में कार्य करने वाले राष्ट्रीय संस्थानों का भी नियमित सहयोग लेना होगा।

हिमालयी राज्यों से समन्वय एवं नीति निर्धारण परिषद के सदस्य एवं विधायक किशोर उपाध्याय ने कहा कि हिमालय एवं मध्य हिमालय क्षेत्र की अद्यतन वैज्ञानिक एवं पारिस्थितिकि स्थिति का अध्ययन होना चाहिए। हिमालयी नदियों के जल स्तर और प्रवाह का आंकलन करना भी जरूरी है। सदस्य एवं पूर्व डीजीपी अनिल रतूड़ी ने कहा कि हिमालयी राज्यों को संगठित रूप से कार्य कर हिमालयी से संबंधित सभी सम्पदाओं और लोगों की आजीविका को बढ़ाने की दिशा में प्रयास करने होंगे। आचार्य डॉ. प्रशांत ने कहा कि हिमालयी राज्यों के लिए ज्वाइंट टास्क फोर्स बननी चाहिए। हिमालयी राज्यों की चुनौतियां लगभग एक जैसे होती हैं, इनके लिए मिलकर बेहमर नीति निर्धारण की दिशा में कार्य होने चाहिए। डॉ. जी.एस. रावत ने कहा कि प्रकृति और संस्कृति के संरक्षण की दिशा में निरंतर कार्य होने चाहिए। पद्मश्री कल्याण सिंह रावत ने कहा कि बुग्यालों का संरक्षण बहुत जरूरी है। जड़ी-बूटियों के क्षेत्र में राज्य में अनेक संभावनाएं हैं।

इस अवसर पर प्रमुख सचिव डॉ. आर.मीनाक्षी सुदंरम, सचिव शैलेश बगौली, यूकॉस्ट के महानिदेशक प्रो. दुर्गेश पंत एवं संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।

देश की आधी आबादी को उसका हक दिलाने के प्रयास को लोकसभा में विपक्ष ने किया विफलः धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने परेड ग्राउण्ड, देहरादून में महिला जन आक्रोश रैली में प्रतिभाग किया। इस दौरान मुख्यमंत्री, हजारों की संख्या में मौजूद महिलाओं के साथ परेड ग्राउंड से घंटाघर तक जन आक्रोश पदयात्रा में भी शामिल हुए।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में मातृशक्ति को देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था में उनका अधिकार दिलाने के लिए नारी शक्ति वंदन अधिनियम लाया गया था। परंतु लोकसभा में संख्या बल के कारण बिल पारित नहीं हो पाया। उन्होंने कहा विपक्ष ने षड्यंत्र करके नारी शक्ति का अधिकार छिनने का काम किया है। उन्होंने कहा देश की नारी, अन्याय के विरुद्ध अवश्य आवाज उठाएगी क्योंकि अब नारी अपने अधिकारों के प्रति सजग हो चुकी है।

मुख्यमंत्री ने कहा प्रधानमंत्री द्वारा देश की आधी आबादी को उसका हक दिलाने के प्रयास को लोकसभा में विपक्ष ने विफल करके देश के साथ महा पाप किया है। मुख्यमंत्री ने कहा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मातृशक्ति को नए भारत के निर्माण का आधार माना है। महिलाओं को सशक्त, सक्षम और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में कई ऐतिहासिक कार्य किए गए हैं। बेटी बचाओं-बेटी पढ़ाओं अभियान, उज्ज्वला योजना, एवं जन धन योजना द्वारा करोड़ों बहनों को बैंकिंग प्रणाली से जोड़ा, स्टार्टअप योजना के माध्यम से लाखों महिलाओं को सशक्त बनाने, लखपति दीदी योजना द्वारा महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और ट्रिपल तलाक जैसी कुप्रथा को समाप्त कर महिलाओं को आगे बढ़ने का काम किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा प्रधानमंत्री की प्रेरणा से देश के प्रत्येक क्षेत्र में महिलाएँ आगे आ रही हैं। आदिवासी समाज की बेटी, देश के सर्वाेच्च संवैधानिक पद तक पहुंची हैं। केंद्रिय मंत्री निर्मला सीतारमण को वित्त मंत्रालय जैसा महत्वपूर्ण मंत्रालय दिया गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा राज्य सरकार भी मातृशक्ति के कल्याण के लिए समर्पित होकर कार्य कर रही है। राज्य में महिलाओं के कल्याण एवं सशक्तिकरण के लिए सरकारी सेवाओं में 30 प्रतिशत आरक्षण लागू किया गया है। महिलाओं की सुरक्षा और उनके अधिकारों की रक्षा हेतु राज्य में समान नागरिक संहिता को लागू किया गया है। इसके साथ राज्य में ग्रामीण आजीविका मिशन, सशक्त बहना उत्सव योजना और मुख्यमंत्री महिला स्वयं सहायता समूह सशक्तिकरण योजना के माध्यम से महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ा जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा प्रदेश में अब तक 2 लाख 65 हजार से अधिक महिलाएं लखपति दीदी बन गई हैं।

इस अवसर पर राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट, सांसद माला राज्यलक्ष्मी शाह, विधायक सविता कपूर, आशा नौटियाल, रेनू बिष्ट, रुचि भट्ट, दीप्ति रावत, नेहा जोशी, हिमानी, रश्मि रस्तोगी एवं बड़ी संख्या में मातृशक्ति मौजूद थी।

आस्था पर प्रहार नहीं सहेंगे: चारधाम यात्रा पर अफवाह फैलाने वालों पर शिकंजा

पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड की चार धाम यात्रा सुव्यवस्थित, सुरक्षित और सफलतापूर्वक संचालित हो रही है। राज्य सरकार द्वारा यात्री सुविधाओं, स्वास्थ्य सेवाओं, ट्रैफिक प्रबंधन, आपदा सुरक्षा एवं डिजिटल मॉनीटरिंग को सुदृढ़ करते हुए प्रत्येक श्रद्धालु को सुगम एवं व्यवस्थित दर्शन सुनिश्चित किए जा रहे हैं।

कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर चार धाम यात्रा के संबंध में भ्रामक, अपुष्ट एवं तथ्यहीन वीडियो/सामग्री प्रसारित कर आम जनमानस को भ्रमित करने तथा राज्य की छवि धूमिल करने का प्रयास किया जा रहा है। जनपद रुद्रप्रयाग में सोशल मीडिया मॉनीटरिंग के दौरान एक ऐसा वीडियो संज्ञान में आया, जिसमें केदारनाथ धाम में श्रद्धालुओं को दर्शन से वंचित किए जाने संबंधी गलत जानकारी प्रसारित की जा रही थी।

उक्त प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए थाना सोनप्रयाग में संबंधित व्यक्ति के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कर विधिक कार्यवाही प्रारंभ कर दी गई है। मामले की जांच प्रचलित है। साथ ही, ऐसे अन्य 4–5 संदिग्ध वीडियो भी चिन्हित किए गए हैं, जिनकी गहन जांच की जा रही है और उनके विरुद्ध भी नियमानुसार कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि:

चार धाम यात्रा से जुड़ी व्यवस्थाएं पूर्णतः सुचारू हैं और श्रद्धालुओं को व्यवस्थित रूप से दर्शन कराए जा रहे हैं।

किसी भी प्रकार की भ्रामक सूचना, अफवाह या दुष्प्रचार को शून्य सहनशीलता (Zero Tolerance) के तहत लिया जाएगा।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की 24×7 निगरानी की जा रही है और दोषियों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट संदेश दिया है कि उत्तराखंड की आस्था, श्रद्धा एवं चार धाम यात्रा की गरिमा के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। प्रदेशवासियों, श्रद्धालुओं एवं सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं से अपील की जाती है कि वे केवल आधिकारिक स्रोतों से प्राप्त जानकारी पर ही विश्वास करें तथा किसी भी अपुष्ट, भ्रामक या संदिग्ध सामग्री को साझा करने से बचें।

वैदिक मंत्रोच्चार के साथ खुले भगवान श्री बद्रीनाथ के कपाट, आस्था और उल्लास से गूंजा धाम

भगवान श्री बद्रीनाथ के कपाट गुरुवार प्रातः 6 बजकर 15 मिनट पर विधिविधान एवं वैदिक मंत्रोच्चार के साथ ग्रीष्मकाल हेतु श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोल दिए गए। कपाट खुलते ही पूरा बद्रीनाथ धाम भक्ति और श्रद्धा के भाव से सराबोर हो उठा। इस पावन अवसर पर देश-विदेश से पहुंचे लगभग 15 हजार श्रद्धालुओं ने भगवान बद्री विशाल एवं अखंड ज्योति के दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित किया।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कपाट उद्घाटन के शुभ अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम से पहली महाभिषेक पूजा संपन्न कर देश एवं प्रदेश की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की। इस दौरान मुख्यमंत्री ने मंदिर परिसर स्थित लक्ष्मी मंदिर, गणेश मंदिर तथा आदि गुरु शंकराचार्य गद्दी सहित अन्य मंदिरों में विधिवत पूजा-अर्चना की।

मुख्यमंत्री ने धाम पहुंचे तीर्थयात्रियों का आत्मीय स्वागत एवं अभिनंदन करते हुए यात्रा व्यवस्थाओं का फीडबैक भी लिया। उन्होंने कहा कि चारधाम यात्रा को सुरक्षित, सुगम एवं सुव्यवस्थित बनाने के लिए राज्य सरकार द्वारा व्यापक स्तर पर तैयारियां की गई हैं। श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा और बेहतर अनुभव सुनिश्चित करने हेतु हर स्तर पर व्यवस्थाओं को सुदृढ़ किया गया है।

’मुख्यमंत्री ने देश विदेश से आने वाले सभी श्रद्धालुओं से हरित एवं स्वच्छ चारधाम यात्रा में सहयोग करने का आह्वान करते हुए पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया।

चारधाम यात्रा के शुभारंभ के साथ ही बद्रीनाथ धाम में आस्था, परंपरा और सुव्यवस्थित व्यवस्थाओं का अद्भुत संगम देखने को मिला, जो श्रद्धालुओं के लिए एक दिव्य और यादगार अनुभव बनेगा।

लोक संस्कृति की झलकरू जागरों पर झूम उठा बद्रीनाथ धाम

कपाट खुलने के इस ऐतिहासिक अवसर पर माणा एवं बामणी गांव की महिलाओं ने पारंपरिक जागरों के साथ मंदिर प्रांगण में झुमैलो नृत्य प्रस्तुत किया, जिससे संपूर्ण वातावरण लोक संस्कृति और आस्था के रंग में रंग गया। वहीं देश के विभिन्न हिस्सों से आए श्रद्धालुओं ने भी भजन-कीर्तन कर अपनी श्रद्धा अर्पित की।

भंडारे का शुभारंभ, श्रद्धालुओं के साथ किया प्रसाद ग्रहण
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने धाम में संचालित भंडारे का रिबन काटकर शुभारंभ किया तथा श्रद्धालुओं के साथ प्रसाद ग्रहण किया। उन्होंने भंडारा संचालकों से संवाद कर व्यवस्थाओं की जानकारी ली और मानव सेवा ईश्वर सेवा उत्थान समिति द्वारा संचालित विशाल भंडारे की सराहना की।

इस अवसर पर जिलाधिकारी गौरव कुमार, पुलिस अधीक्षक सुरजीत सिंह पंवार, बीकेटीसी के सीईओ विशाल मिश्रा, उपाध्यक्ष ऋषि प्रसाद सती, रावल अमरनाथ नंबूदरी, मुख्य प्रशासनिक अधिकारी गिरीश चौहान, मंदिर अधिकारी राजेंद्र चौहान, नायब रावल सूर्यराग नंबूदरी, धर्माधिकारी स्वयंबर सेमवाल, वेदपाठी रविंद्र भट्ट, आचार्य वाणी विलास डिमरी सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

दीक्षांत समारोह वर्षों के अनुशासित प्रयासों और त्याग की परिणति के साथ समाज के प्रति एक बड़ी जिम्मेदारी की शुरुआत भीः सीपी राधाकृष्णन

भारत के उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने आज ऋषिकेश स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के छठे दीक्षांत समारोह को संबोधित किया। ऋषिकेश को चिंतन और उपचार का वैश्विक केंद्र होने के साथ-साथ हिमालय का प्रवेश द्वार के रूप में आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व देते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि ऐसा वातावरण दीक्षांत समारोह की गंभीरता को और भी गहरा कर देता है।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि दीक्षांत समारोह न केवल वर्षों के अनुशासित प्रयासों और त्याग की परिणति है, बल्कि समाज और राष्ट्र के प्रति एक बड़ी जिम्मेदारी की शुरुआत भी है। उन्होंने स्नातकों से समर्पण और उद्देश्य की भावना के साथ अपने पेशेवर कर्तव्यों को निभाने का आग्रह किया।

कोविड-19 महामारी से उत्पन्न चुनौतियों पर विचार करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने सतत नवाचार और प्रतिबद्धता का प्रदर्शन किया है। उन्होंने भारत के व्यापक टीकाकरण अभियान पर प्रकाश डालते हुए कहा कि 14 करोड़ से अधिक नागरिकों को मुफ्त टीके लगाए गए, जिससे स्वास्थ्य सेवा तक समान पहुंच सुनिश्चित हुई। उन्होंने कहा कि भारतीय वैज्ञानिकों ने लाभ के लिए नहीं, बल्कि मानवता के कल्याण के लिए टीके विकसित किए हैं।

उपराष्ट्रपति ने भारत की वैक्सीन मैत्री पहल के माध्यम से वैश्विक जिम्मेदारी को भी रेखांकित किया, जिसके तहत 100 से अधिक देशों को टीके उपलब्ध कराए गए। उन्होंने कहा कि यह पहल ‘‘वसुधैव कुटुंबकम’’ की भावना को दर्शाती है और एक दयालु और जिम्मेदार वैश्विक भागीदार के रूप में भारत की भूमिका को मजबूत करती है।

स्वास्थ्य सेवा अवसंरचना के विस्तार पर प्रकाश डालते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि पिछले एक दशक में देश भर में स्थापित नए एम्स संस्थानों ने गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा और चिकित्सा शिक्षा तक पहुंच को मजबूत किया है, उन्होंने कहा कि सुशासन लोगों की जरूरतों को समझने और उनकी सेवा करने में निहित है।

एम्स ऋषिकेश की प्रशंसा करते हुए उन्होंने कहा कि यह संस्थान नैदानिक देखभाल, शैक्षणिक क्षमता, अनुसंधान, नवाचार और सामाजिक प्रतिबद्धता के क्षेत्र में उत्कृष्टता का एक आदर्श प्रस्तुत कर रहा है। उन्होंने विशेष रूप से टेलीमेडिसिन पहलों की सराहना करते हुए कहा कि स्वास्थ्य सेवा को अस्पताल परिसरों से आगे बढ़कर दूरस्थ और कम सुविधा प्राप्त आबादी तक पहुंचना चाहिए।

उपराष्ट्रपति ने हेली एम्बुलेंस सेवाओं और चार धाम यात्रा के दौरान तथा दूरस्थ क्षेत्रों में दवा वितरण के लिए ड्रोन के उपयोग जैसी नवोन्मेषी स्वास्थ्य सेवाओं की भी प्रशंसा की और इन्हें स्वास्थ्य सेवा वितरण में लंबे समय से चली आ रही चुनौतियों का प्रभावी समाधान बताया।

उपराष्ट्रपति ने दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे सहित क्षेत्र में अवसंरचना के तीव्र विकास पर प्रकाश डाला। उन्होंने समावेशी विकास को बढ़ावा देने, बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच में सुधार लाने के लिए मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड सरकार के प्रयासों की सराहना की।

उपराष्ट्रपति ने इस बात पर जोर दिया कि स्वास्थ्य सेवा एक सार्वजनिक जिम्मेदारी है और राष्ट्र निर्माण में चिकित्सा पेशेवरों की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने डिग्री प्राप्त करने वाले डॉक्टरों से निवारक देखभाल, ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंच, अनुसंधान और नवाचार के माध्यम से योगदान देने और सहानुभूति, ईमानदारी और सेवा के मूल्यों का पालन करने का आग्रह किया।

इस अवसर पर राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) ने उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन का देवभूमि उत्तराखण्ड में हार्दिक स्वागत करते हुए विश्वास जताया कि उनके मार्गदर्शन से युवा चिकित्सकों को राष्ट्रसेवा की नई ऊर्जा एवं दिशा प्राप्त होगी।

राज्यपाल ने कहा कि दीक्षांत समारोह विद्यार्थियों की साधना, समर्पण और सेवा भाव का उत्सव है तथा यह वह महत्वपूर्ण क्षण है, जब वर्षों की कठिन मेहनत एक नई जिम्मेदारी में परिवर्तित होती है। उन्होंने उपाधि प्राप्त करने वाले सभी विद्यार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि उनकी सफलता में माता-पिता के त्याग, गुरुजनों के मार्गदर्शन और राष्ट्र की अपेक्षाओं का महत्वपूर्ण योगदान है।

उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में चिकित्सा का क्षेत्र तेजी से बदल रहा है, जहाँ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल हेल्थ और आधुनिक अनुसंधान पद्धतियाँ स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी बना रही हैं। उन्होंने कहा कि एम्स ऋषिकेश इस दिशा में एक महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है, जो स्वास्थ्य तंत्र को भविष्य के लिए तैयार कर रहा है।

राज्यपाल ने युवा चिकित्सकों को संबोधित करते हुए कहा कि चिकित्सा केवल एक पेशा नहीं, बल्कि सेवा और संवेदनशीलता का क्षेत्र है। मरीज केवल उपचार ही नहीं, बल्कि विश्वास और आशा लेकर चिकित्सक के पास आता है। ऐसे में चिकित्सकों का व्यवहार, सहानुभूति और समर्पण ही मरीज को सुरक्षा और विश्वास प्रदान करता है।

उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड के पर्वतीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच अभी भी चुनौतीपूर्ण है और उन्होंने युवा चिकित्सकों से अपेक्षा है कि वे इन चुनौतियों को अवसर में परिवर्तित करते हुए दूरस्थ क्षेत्रों में सेवा प्रदान करें तथा समाज में विश्वास का संचार करें। उन्होंने आह्वान किया कि वे अपने जीवन में नैतिकता, ईमानदारी और सेवा के मूल्यों को सर्वाेपरि रखें तथा रोगी के विश्वास को अपनी सबसे बड़ी पूंजी मानें।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उपाधि प्राप्त करने वाले सभी छात्र-छात्राओं को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने कहा कि यह अवसर विद्यार्थियों के जीवन में एक नए अध्याय की शुरुआत है और चिकित्सा क्षेत्र में उनका योगदान समाज एवं राष्ट्र निर्माण में अत्यंत महत्वपूर्ण रहेगा।

मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित देश के उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन का देवभूमि उत्तराखंड की जनता की ओर से स्वागत एवं अभिनंदन किया। उन्होंने उपराष्ट्रपति के सादगीपूर्ण व्यक्तित्व, जनसेवा के प्रति समर्पण और प्रेरणादायी जीवन यात्रा की सराहना करते हुए कहा कि उनका मार्गदर्शन युवा चिकित्सकों के लिए प्रेरणास्रोत है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि चिकित्सा क्षेत्र केवल एक पेशा नहीं, बल्कि मानवता की सेवा का सर्वाेच्च माध्यम है, जिसे निष्ठा, संवेदनशीलता और करुणा के साथ निभाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा स्थापित एम्स ऋषिकेश आज प्रदेश के लिए एक महत्वपूर्ण जीवन रक्षक संस्थान के रूप में स्थापित हो चुका है। यहां कैंसर उपचार, न्यूरोसर्जरी, रोबोटिक सर्जरी और जॉइंट रिप्लेसमेंट जैसी अत्याधुनिक सुविधाएँ उपलब्ध हैं। साथ ही, हेली एम्बुलेंस सेवा राज्य के दुर्गम क्षेत्रों में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऊधमसिंह नगर में एम्स ऋषिकेश के सैटेलाइट सेंटर का निर्माण कार्य प्रगति पर है, जिससे कुमाऊं क्षेत्र की जनता को भी उच्च स्तरीय चिकित्सा सुविधाओं का लाभ मिलेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में राज्य सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिए प्रतिबद्ध है। प्रदेश के प्रत्येक जनपद में मेडिकल कॉलेज की स्थापना, टेलीमेडिसिन नेटवर्क का विस्तार, जन औषधि केंद्रों के माध्यम से सस्ती दवाइयों की उपलब्धता तथा निःशुल्क पैथोलॉजिकल जांच जैसी योजनाओं पर तेजी से कार्य किया जा रहा है।

समारोह केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने उपाधि प्राप्त कर रहे डॉक्टरों को संबोधित करते हुए कहा कि चिकित्सा पेशा केवल करियर नहीं, बल्कि मानव सेवा का सर्वाेच्च माध्यम है। उन्होंने मरीजों के विश्वास को बनाए रखने और हर परिस्थिति में उनके हित को सर्वाेपरि रखने का आह्वान किया, साथ ही नैतिकता और ईमानदारी को अपने कार्य का आधार बनाने पर बल दिया।

उन्होंने कहा कि चिकित्सा क्षेत्र में निरंतर हो रहे बदलावों के बीच डॉक्टरों के लिए आजीवन सीखते रहना आवश्यक है, ताकि बेहतर उपचार सुनिश्चित किया जा सके। साथ ही, मरीजों के साथ प्रभावी संवाद को भी उन्होंने अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि इससे विश्वास और उपचार के परिणाम बेहतर होते हैं।

इस अवसर पर पूर्व मुख्यमंत्री एवं सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत, सांसद नरेश बंसल, महेंद्र भट्ट, एम्स ऋषिकेश के अध्यक्ष प्रो. राज बहादुर, एम्स ऋषिकेश की कार्यकारी निदेशक प्रो. मीनू सिंह, डीन (अकादमिक) प्रो. सौरभ, संकाय सदस्यों, छात्रों और अन्य गणमान्य व्यक्तियों सहित कई गणमान्य लोगों ने प्रतिभाग किया।