2 अक्टुबर स्वच्छ भारत दिवस के रूप में मनेगा: रावत

उत्तराखंड की त्रिवेंद्र सरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर 17 सितंबर को सेवा दिवस के रूप में मनाएगी। इस दिन पूरे प्रदेश में सभी वर्गों और समुदाय के लोगों को शामिल करते हुए स्वच्छता के साथ ही श्रमदान किया जाएगा। साथ ही इसी दिन शहरी स्थानीय निकायों में शहरी विकास विभाग द्वारा तथा ग्रामीण क्षेत्रों में स्वजल परियोजना की जनपदीय इकाईयों के माध्यम से स्वच्छता अभियान चलाया जाएगा। इस संबंध में मुख्य सचिव एस.रामास्वामी ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश जारी कर पूरे प्रदेश में स्वच्छता कार्यक्रम को वृहद स्तर पर आयोजित करने की सफल बनाने अपेक्षा की गई है। स्वच्छता ही सेवा कार्यक्रम के तहत प्रदेश भर में 15 सितंबर से गांधी जयंती 2 अक्टूबर तक विशिष्ट दिवस घोषित किए गए हैं। इसके तहत ही 17 सितंबर को प्रधानमंत्री के जन्म दिवस के मौके पर प्रदेश के सभी विद्यालयों, कालेजों व विश्वविद्यालयों में राष्ट्रीय सेवा योजन, एनसीसी तथा नेहरू युवा केंद्र द्वारा स्वच्छता अभियान का संचालन किया जाएगा। इसी दिन ऋषिकेश में गंगा आर्ट मैराथन का आयोजन होगा। इसमें चित्रकला व आर्ट प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी। इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत भी प्रतिभाग करेंगे। हरिद्वार और ऋषिकेश में गंगा नदी के किनारे पर बने घाटों में सफाई अभियान चलाया जाएगा। इस अभियान के तहत पंडित दीन दयाल उपाध्याय के जन्म दिवस 25 सितंबर को सर्वत्र स्वच्छता दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया गया है। इस दिन अस्पताल, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, तालाबजल स्रोतों व शौचालयों आदि की सफाई के लिए वृहद स्तर पर स्वच्छता अभियान चलाया जाएगा। 24 सितंबर को समग्र स्वच्छता दिवस के तहत प्रदेश के नागरिकों, युवा, सुरक्षा कार्मिकों, महिला व बच्चों, खिलाड़ियों, स्वच्छ भारत मिशन के एम्बेसेडर, कारपोरेट तथा धार्मिक संस्थाओं द्वारा पंचायत व नगर निकायों में शौचालय निर्माण व श्रमदान किया जाएगा। गांधी जयंती के अवसर पर 2 अक्टूबर को स्वच्छ भारत दिवस का आयोजन किया जाएगा। इसमें जनपद और राज्य स्तर पर स्वच्छ शहरों और ग्रामीण इलाकों का चयन कर उन्हें प्रोत्साहन के लिए पुरस्कार दिया जाएगा। इससे पहले 1 अक्टूबर को कुछ विशिष्ट स्थानों का चयन कर वहां वृहद स्तर पर स्वच्छता अभियान चलाया जाए। इसके अलावा स्वच्छता ही सेवा कार्यक्रम के तहत राज्य के सभी स्कूलों व मदरसों के बच्चों में स्वच्छता के प्रति जागरूकता के लिए प्रतिस्पर्धा के उद्देश्य से मॉडल मेकिंग प्रतियोगिता, पेंटिंग, निबंध लेखन, वाद विवाद प्रतियोगिता कराई जाएगी। स्कूलों में प्रार्थना सभा के समय स्वच्छता की शपथ के साथ ही स्वास्थ्य व स्वच्छता विषय पर दैनिक चर्चा कराई जाएगी। स्कूलों व मदरसों के बच्चों द्वारा स्वच्छता संबंधी संदेशों के बैनर, नारे आदि के माध्यम से ग्राम पंचायत स्तर पर जागरूकता रैलियों का आयोजन करने के निर्देश जारी किए गए हैं। राज्य के रेलवे स्टेशनों, बस स्टेशनों, सार्वजनिक स्थानों पर भी स्वच्छता अभियान चलाया जाएगा। प्रत्येक जिले और विकासखंड स्तर पर स्वच्छता टास्क फोर्स का गठन किया जाएगा। नदी नालों, गदेरे व पेयजल स्रोतों की सफाई के लिए अभियान चलाया जाएगा।

बुलेट ट्रेन से भारत में नए अध्याय की शुरूआत: आबे

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान के पीएम शिंजो आबे ने अहमदाबाद में देश के पहली बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट का शिलान्यास कर दिया है। यह प्रोजेक्ट करीब 1 लाख करोड़ रुपए का है। बुलेट ट्रेन का यह प्रोजेक्ट अहमदाबाद से मुंबई तक का है। सरकार की ओर से कहा गया है कि इस प्रोजेक्ट को निर्धारित समय से एक साल पहले यानी 2022 में पूरा करे जाने की बात की है।
पीएम मोदी ने कहा कि आजादी के 70 साल बाद इस प्रोजेक्ट का भूमि पूजन हुआ है। जब 2022 में आजादी के 75 साल पूरे होंगे तब मैं और शिंजो आबे बुलेट ट्रेन में एक साथ बैठेंग।
पीएम मोदी बोले कि भले ही टेक्नोलॉजी जापान से मिल रही है, लेकिन बुलेट ट्रेन के संसाधन भारत में ही बनेंगे। देश की कंपनियों को नया रोजगार मिलेगा और मेक इन इंडिया को बल मिलेगा। 70 से अधिक छोटे शहरों को हवाई यात्रा शुरू की है। मोदी ने कहा कि जब मैं गुजरात का सीएम था तो लोग कहते थे कि मोदी बुलेट ट्रेन कब लाएंगे, अब बुलेट ट्रेन आ गई है तो लोग कह रहे हैं कि बुलेट ट्रेन क्यों ला रहे हो। जापान ने भारत को नई सौगात दी है। इस हाई स्पीड रेलवे सिस्टम से ना सिर्फ दो जगहों के बीच दूरी कम होगी बल्कि 500 किलोमीटर दूर बसे दो शहरों के लोग भी और पास आएंगे।
पीएम बोले कि बंधे हुए सपनों के साथ आगे बढ़ना मुश्किल है, रेलवे के बाद ही अमेरिका का भी विस्तार हुआ है। बुलेट ट्रेन ने ही जापान को बदला है। प्रयास के तरीकों में बदलाव जरुरी है। वक्त धीरे-धीरे बढ़ने का नहीं है। जापान ने बुलेट ट्रेने के लिए 88 हजार करोड़ रुपए का लोन दिया, जिस पर 0.1 प्रतिशत ब्याज लिया जा रहा है।
पीएम मोदी ने कहा कि बुलेट ट्रेन से रफ्तार और रोजगार दोनों आएगा, भारत-जापान की दोस्ती सीमाओं से परे है। तेज गति और प्रगति से तेज परिणाम आएगा। उन्होंने कहा कि इस प्रोजेक्ट के लिए शिंजो आबे ने निजी रूप से रुचि दिखाई, इसलिए तेजी से काम हो रहा है। जापान ने दिखा दिया है कि वो भारत का सबसे मजबूत दोस्त है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजराती भाषा में अपने भाषण की शुरुआत की। मोदी ने कहा कि मेरे करीबी मित्र शिंजो आबे का काफी बहुत धन्यवाद। मोदी ने कहा कि सपनों का विस्तार ही किसी भी देश को आगे बढ़ाता है, ये न्यू इंडिया है। शिंजो आबे बोले कि भारत और जापान की दोस्ती सिर्फ द्विपक्षीय नहीं है, यह विश्व व्यवस्था की है। जापान पूरी तरह से मेक इन इंडिया का समर्थन करता है. आबे ने कहा कि मैं और पीएम मोदी जय इंडिया, जय जापान का सपना साकार करेंगे। उन्होंने कहा कि अगली बार जब भारत आऊंगा तो बुलेट ट्रेन में बैठूंगा।
जापानी पीएम बोले कि जापान में बुलेट ट्रेन से कोई हादसा नहीं होता है, एक दिन पूरे भारत में बुलेट ट्रेन दौड़ेगी। जापान की बुलेट ट्रेन पूरी दुनिया में सबसे सुरक्षित बुलेट ट्रेन सेवा है।
शिंजो आबे ने कहा कि पीएम मोदी एक दूरदर्शी नेता हैं, मैंने खुद इस प्रोजेक्ट में रुचि ली है। जापान से 100 से अधिक इंजीनियर भारत में आए हुए हैं, मोदी की नीतियों का पूरा समर्थन करता हूं। जापानी पीएम शिंजो आबे ने नमस्कार से अपने भाषण की शुरुआत की। उन्होंने कहा कि भारत का ताकतवर होना जापान के हित में है। भारत में नए अध्याय की शुरुआत हुई है। मंच पर बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट की डेमो फिल्म दिखाई गई।

राहत: योगी सरकार ने बिल्डरों को कब्जा दिलवाने के दिए निर्देश

उत्तर प्रदेश सरकार ने नोएडा और ग्रेटर नोएडा में निवेशकों को राहत देते हुए निर्माणकर्ताओं को तीन महीने के अंदर 50 हजार मकानों पर कब्जा दिलवाने का निर्देश दिया हैै। ऐसा ना करने पर बिल्डरों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
नगर विकास मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संबंधित बिल्डरों को निर्देश दिये हैं कि वे नोएडा तथा ग्रेटर नोएडा में अगले तीन महीने के अंदर मकान अथवा फ्लैट निर्माण का कार्य पूरा करके कब्जा दिलवाएं। बिल्डरों ने भी इस पर सहमति दी है। उन्होंने कहा अगर बिल्डर इसमें सहयोग नहीं करेंगे तो हमारे सारे विकल्प खुले हैं, हम उनके खिलाफ आर्थिक कार्रवाई के साथ आपराधिक कार्रवाई भी करेंगे।
आपको बता दें कि मुख्यमंत्री का यह आदेश बिल्डरों तथा नोएडा एवं ग्रेटर नोएडा प्राधिकरणों के शीर्ष अधिकारियों और मंत्रियों के बीच हुई बैठक के बाद आया है। यह बैठक उच्चतम न्यायालय द्वारा रियल एस्टेट कम्पनी जेपी इंफ्राटेक की दिवालिया होने सम्बन्धी अर्जी पर सुनवाई के दौरान कम्पनी को खरीदारों के हितों की रक्षा के लिये दो हजार करोड़ रुपये जमा करने के आदेश के बाद बुलायी गयी थी।
उच्चतम न्यायालय ने जेपी इंफ्राटेक से कहा था कि वह निवेशकों के हितों की रक्षा के लिये दो हजार करोड़ रुपये जमा कराए। कम्पनी ने अपने द्वारा लिये गये कर्ज की अदायगी नहीं कर पाने के मद्देनजर दीवालिया होने की अर्जी दी है। अनेक निवेशक इस कम्पनी की एक परियोजना में मकान के लिये धन अदा करने के बावजूद कब्जे के लिये परेशान हैं।

पंचायती राज काम के जरिए काबू किया आतंकवाद

कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने अमेरिका के बर्कले, यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया में युवा छात्रों के साथ संवाद किया। कश्मीर मुद्दे पर राहुल ने एक सवाल का जवाब देते हुए कहा कि कश्मीर में आतंकवाद को कम करने के साथ-साथ एंटी इंडिया सोच को भी हमने खत्म किया है, लेकिन बीजेपी ने अपने फायदे के लिए कश्मीर का नुकसान किया। राहुल ने कहा, कश्मीर मुद्दे पर 9 साल मैंने, तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, पी. चिदंबरम और जयराम रमेश के साथ मिलकर काम किया। कश्मीर में मैंने जब काम शुरू किया था, तब वहां आतंकवाद चरम पर था। इसके बावजूद हमने आतंकी सोच को कम करके शांति का माहौल स्थापित करने का काम किया।
कश्मीर में पंचायती राज काम किया
राहुल ने कहा, 2013 में मैंने मनमोहन सिंह को गले लगाकर कहा कि आप की सबसे बड़ी सफलता कश्मीर में आतंकवाद को कम करना है। इस बात के लिए हमने बड़े-बड़े भाषण नहीं दिए हैं। उन्होंने कहा कि कश्मीर के अवाम का दिल जीतने के लिए छोटे स्तर पर लोगों से बात की और उनका विश्वास जीता। कश्मीर में हमने एंटी इंडिया की सोच को खत्म करके पंचायती राज काम किया।
2014 में फिर कश्मीर में हालात बिगड़े
राहुल ने कहा कि अगर कश्मीर में सुरक्षाकर्मी मेरे पास खड़े हैं, तो मतलब कश्मीर में सब कुछ ठीक नहीं है। जबकि 2013 में मेरे साथ सुरक्षाकर्मी नहीं बल्कि कश्मीरी लोग खड़े थे, लेकिन 2014 में फिर ऐसे हालात बने कि कश्मीर में सुरक्षाकर्मियों की जरूरत पड़ गई।

नुक्कड़ नाटकों के जरिए गंगा स्वच्छता को चलेगा अभियान

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत की उपस्थिति में सचिवालय में हेमवती नन्दन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय और उत्तराखण्ड में संचालित नमामि गंगे परियोजना के मध्य उत्तराखण्ड राज्य में गंगा संरक्षण हेतु प्रचारप्रसार और जन जागरूकता के लिए एक एम.ओ.यू. हस्ताक्षरित किया गया। एम.ओ.यू पर अपर सचिव डॉ.राघव लंगर एवं रजिस्ट्रार हेमवती नन्दन बहुगुणा विश्वविद्यालय ने हस्ताक्षर किये। इस एम.ओ.यू. के माध्यम से विश्वविद्यालय गंगा संरक्षण कार्यक्रम हेतु एक सक्रिय क्षेत्रीय सहयोगी की भूमिका निभाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि गंगा को निर्मल एवं अविरल बनाये रखने के लिए व्यापक स्तर पर जागरूकता अभियान चलाना होगा। जिसमें राज्य सरकार के साथ ही शैक्षिक एवं सामाजिक संस्थाओं को भी आगे आना होगा तथा जन सहयोग भी जरूरी है। नुक्कड़ नाटक, गंगा रथ एवं जागरूकता रेलियों के माध्यम से गंगा को स्वच्छ, निर्मल एवं अविरल बनाने के लिए अभियान चलाया जायेगा। उन्होंने कहा कि श्रीनगर विश्वविद्यालय के चौरास कैम्पस की लोकेशन नमामि गंगे अभियान के लिए हर प्रकार से उपयुक्त है।

जानिए, क्यों? आर्मी के 100 अफसर सुप्रीम कोर्ट पहुंचे

नवनियुक्त रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण के सामने नई चुनौती आ गयी है। अधिकारियों के प्रमोशन में कथित ‘भेदभाव व अन्याय’ की शिकायत के साथ आर्मी के 100 से भी ज्यादा लेफ्टिनेंट कर्नल और मेजर सुप्रीम कोर्ट पहुंचे।
भेदभाव व नाइंसाफी
आर्मी के अफसरों द्वारा दायर की गयी याचिका में कहा गया है, सेना और केंद्र सरकार के इस कृत्य (प्रमोशन में भेदभाव) से याचिकाकर्ताओं के प्रति अन्याय हुआ है, इससे अफसरों के मनोबल पर असर पड़ता है जिससे देश की सुरक्षा भी प्रभावित हो रही है।
सरकार की चिंता
सरकार के लिए चिंता की बात यह है कि याचिकाकर्ताओं का कहना है कि जब तक प्रमोशन में समानता न लाई जाए तब तक सर्विसेज कोर के अफसरों को कॉम्बैट ऑर्म्स के साथ तैनात न किया जाए।
याचिकाकर्ताओं का सवाल
लेफ्टिनेंट कर्नल पी. के. चौधरी के नेतृत्व में अपने संयुक्त याचिका में अफसरों ने कहा है कि सर्विसेज कोर के अफसरों को ऑपरेशनल क्षेत्र में तैनात किया गया है। कॉम्बैट ऑर्म्स कोर के अफसरों को भी ऐसी ही चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने अपनी वकील नीला गोखले के जरिए पूछा है कि तब कॉम्बैट ऑर्म्स के अफसरों को जिस तरह का प्रमोशन दिया जा रहा है, उससे उन्हें क्यों वंचित किया जा रहा है।
सेना और सरकार का दोहरा मापदंड
याचिका में कहा गया है, सेना और सरकार दोहरा मापदंड अपना रही है। ऑपरेशन एरियाज में तैनाती के वक्त तो सर्विसेज कोर के अफसरों को ऑपरेशनल के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है लेकिन जब बात प्रमोशन की आती है तो उन्हें नॉन-ऑपरेशनल मान लिया जाता है। यह याचियों और दूसरे मिड-लेवल आर्मी अफसरों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है।
याचिकाकर्ताओं ने अदालत से मांग की है कि सिग्नल्स जैसे दूसरे कोर के अफसरों को तैनाती के वक्त ऑपरेशनल जैसा माना जा रहा है। ऑपरेशनल एरियाज में तैनाती के बाद वे उन सभी कामों को करते हैं जिन्हें ऑपरेशनल कोर के अफसर करते हैं, ऐसे में उनके साथ भेदभाव क्यों हो रहा है। वो सेना और भारत सरकार को आदेश दे कि कॉम्बैट सर्विसेज भारतीय सेना की अभिन्न और सक्रिय अंग हैं और उन्हें नियमित सेना के समान ही सुविधाएं मिलनी चाहिए, अन्यथा सरकार और सेना आपद स्थिति को छोड़कर ‘सक्रिय इलाकों’ में सर्विसेज कॉर्प्स की तैनाती न किया करें।

गन्ने की फसल होने के चलते नहीं कर पाए सर्वे

भारत सरकार ने 1998 में रुड़की-देवबंद रेल मार्ग बनाने की घोषणा की थी, लेकिन इस पर काम वर्ष 2007 में शुरू हुआ। परियोजना के लिए 600 करोड़ रुपये मंजूर किए गए थे। 28 किमी लंबी इस परियोजना के बनने से दिल्ली से देहरादून का सफर 48 किमी कम हो जाएगा। रेलवे ने सर्वे का कार्य पूरा कर लिया था। साथ ही पिलर आदि भी लगा दिए थे। इसके बाद से इस परियोजना को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।
अब उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में भाजपा की सरकारें बनने के बाद इस परियोजना में तेजी आई। वर्ष 2012 में कराए गए सर्वे का जमीनी सच जानने के लिए रेलवे ने हाल ही में इस रेल लाइन का ड्रोन सर्वे कराया, जिसमें कई चौंकाने वाली जानकारियां सामने आई।
सर्वे में पाया गया कि वर्ष 2012 में लगाए गए सीमांकन पिलर गायब है और अधिग्रहण की गई भूमि पर किसान खेती कर रहे हैं। रेलवे के दिल्ली डिवीजन के सेक्शन इंजीनियर नीरज गुप्ता ने बताया कि रेल लाइन के लिए अधिग्रहित भूमि पर गन्ने की फसल के कारण सर्वे नहीं हो पा रहा था। ऐसे में ड्रोन के जरिए सर्वे कराया गया। अब इस सर्वे का सत्यापन शुरू कर दिया गया है।

भारतीय सेना के पास इतना विश्वास कहां से आया?

चीनी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने 8 सितम्बर के अपने संपादकीय में सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत पर इस हफ्ते दिए गए उनके युद्ध संबंधी बयान को लेकर जमकर निशाना साधा है। संपादकीय में कहा गया है कि यह बात स्वीकार की जानी चाहिए कि बिपिन रावत के पास बहुत बड़ा मुंह है, वे बीजिंग और नई दिल्ली के बीच आग भड़का सकते हैं। रावत का बयान यह दिखाता है कि भारतीय सेना में कितना अहंकार भरा है। संपादकीय में सवालिया तौर से लिखा गया है कि रावत ने बड़े ही हाईप्रोफाइल तरीके से दो मोर्च पर युद्ध की स्थिति की वकालत की है, लेकिन भारतीय सेना के पास इतना विश्वास कहां से आया?.
आपको बता दें कि एक सेमिनार में बोलते हुए रावत ने नई दिल्ली में चीन से संबंधित बयान दिया था, जहां तक हमारे उत्तरी विरोधी का सवाल है तो ताकत दिखाने का दौर शुरू हो चुका है। धीरे-धीरे भूभाग पर कब्जा करना और हमारी सहने की क्षमता को परखना हमारे लिए चिंता का सबब है। इस प्रकार की परिस्थिति के लिए तैयार रहना चाहिए जो धीरे-धीरे संघर्ष के रूप में बदल सकती है।
रावत का बयान ऐसे समय आया है जब एक दिन पहले ही ब्रिक्स सम्मेलन से इतर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने मुलाकात की थी और सीमा पर शांति बनाए रखने पर सहमति जताई थी। इन सबके बीच ग्लोबल टाइम्स ने बहुत ही तीखी प्रतिक्रिया दी है, जो दिखाता है कि आर्मी चीफ के बयान से बीजिंग कितना चिढ़ा हुआ है। ब्रिक्स समिट में मोदी और शी की मुलाकात के तुरंत बाद ही रावत ने सीमा पर चीन की सीनाजोरी की ओर ध्यान दिलाया है। चीनी मीडिया ने डोकलाम विवाद पर समझौते को शी जिनपिंग की कामयाबी के तौर पर पेश किया था। संपादकीय में कहा गया है कि रावत का बयान डोकलाम विवाद समाप्त होने के हफ्ते भर के भीतर ही आया है, जब चीन और भारत के नेताओं ने ब्रिक्स समिट के दौरान मुलाकात की और दोनों देशों के बीच संबंधों को लेकर सकारात्मक संकेत दिए।
चीनी अखबार ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा है कि भारतीय जनरलों को ताजा स्थिति के बारे में कुछ बेसिक जानकारी रखनी चाहिए। क्या भारत दो मोर्चों पर लड़ाई को झेल सकता है अगर चीन-पाकिस्तान एक साथ मोर्चा खोल दें?
अखबार ने लिखा है कि ऐसा लगता है वहां दो भारत हैं, एक जो ब्रिक्स समूह का हिस्सा है। चीन की तरह और दूसरा चीन के खिलाफ भड़काऊ बयान देते रहता है। क्या हमें पहले भारत को गले लगाकर दूसरे को सबक सिखाना चाहिए। ग्लोबल टाइम्स ने कहा कि पहले भारत को दूसरे भारत को अनुशासन सिखाना चाहिए और स्वाभिमानी भारतीयों को जनरल रावत जैसे अपने सीनियर अधिकारियों के मुंह का ख्याल रखना चाहिए, क्योंकि वे उनके शब्द और अहंकार भारतीयों की इमेज के साथ मेल नहीं खाते हैं।

2022 तक गरीबों को एक लाख आवास देने की मिली मंजूरी

2022 तक गरीब व कमजोर वर्गों को एक लाख आवास मुहैया कराने के लक्ष्य पर आगे बढ़ते हुए उत्तराखंड आवास नीति को मंजूरी दी गई है। निजी क्षेत्र की मदद से बनने वाले आवासों को राज्य सरकार प्रति आवास छह लाख रुपये की दर से खरीदेगी, जबकि आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को प्रति परिवार साढ़े तीन लाख रुपये पर आवास मुहैया कराया जाएगा।
राज्य खाद्य योजना के 11 लाख परिवारों को सरकारी सस्ते गल्ले की दुकानों पर चक्कर काटने से निजात रहेगी। आगामी एक नवंबर से इन परिवारों के बैंक खाते में खाद्यान्न सब्सिडी पहुंचेगी।
इसी तरह अंत्योदय परिवारों को भी चीनी की सब्सिडी उनके खाते में मुहैया कराई जाएगी। उक्त फैसले के साथ ही मंत्रिमंडल ने ऊर्जा के तीन निगमों को सातवां वेतनमान देने पर मुहर लगा दी।
सरकार के प्रवक्ता व काबीना मंत्री मदन कौशिक ने बताया कि राज्य के तीन नगर निगमों, 22 नगर पालिकाओं और 10 नगर पंचायतों की सीमा बढ़ाने का निर्णय लिया गया है।
भविष्य में अन्य निकायों की सीमा में भी इजाफा किया जाएगा। अगले नगर निकाय चुनाव में नए विस्तारित क्षेत्र भी शामिल होंगे। निकायों के विस्तारित क्षेत्रों में जन सुविधाओं के लिए केंद्रीय योजनाओं का अधिक फायदा मिलेगा।
साथ ही नए बनने वाले वार्डों को विकास के लिए अधिक धनराशि उपलब्ध होगी। उन्होंने बताया कि उत्तराखंड आवास नीति के तहत अगले पांच सालों में गरीबों को एक लाख आवास मुहैया कराने की कार्ययोजना को मंजूरी मिल गई है। इस कार्ययोजना को निजी भागीदारी से पूरा किया जाएगा। योजना में भागीदार निजी क्षेत्र को सरकार की ओर से रियायतें दी जाएंगी। राज्यभर में आवासहीन कमजोर वर्गों का चिह्नीकरण सर्वे नगर निकायों के जरिए कराया गया था। इस सर्वे के आधार पर ही निकायवार कमजोर वर्गों के लिए आवासों का निर्माण किया जाएगा। काबीना मंत्री ने कहा कि मंत्रिमंडल ने राज्य के गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले लघु व सीमांत किसानों को एक लाख ऋण मात्र दो फीसद ब्याज दर पर उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है। इस योजना को दीनदयाल सहकारिता सहभागिता योजना का नाम दिया गया है।

सुविधायुक्त घर को लोन का लाभ

प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत जहां एक ओर झोपड़ी और कच्चे घरों में रहकर गुजर-बसर करने वाले परिवारों को आवास बनाने के लिये योजना का लाभ मिल सकेगा। वहीं दूसरी ओर सरकार ने इस योजना में कुछ नई सौगाते भी दी है। जिसके तहत जहां लाभार्थी पक्का आवास बना सकेंगे, वहीं शौचालय के लिए भी उन्हें अनुदान भी मिलेगा। साथ ही बिजली और गैस कनेक्शन भी मुफ्त मिल सकेगा। इससे गरीब परिवारों को समस्याओं से निजात मिलेगी।
प्रधानमंत्री आवास योजना में लाभ पाने वाले गरीबों को अब एक साथ कई योजनाओं का लाभ मिल सकेगा। सरकार की ओर से पक्का आवास बनवाने के लिए निर्धारित 1.20 लाख रुपये तीन किस्तों में मिलेंगे। पहली किस्त में 40 हजार, दूसरी में 70 हजार, जबकि अंतिम किस्त 10 हजार की होगी। वहीं, जिला पंचायत राज विभाग से शौचालय के लिए 12 हजार रुपये का अनुदान का लाभ मिलेगा। नई व्यवस्था में लाभार्थियों को प्रधानमंत्री उज्जवला योजना के तहत रसोई गैस का कनेक्शन भी दिया जाएगा। दीनदयाल विद्युतीकरण योजना के तहत मुफ्त बिजली कनेक्शन मिलेगा। यही नहीं, गरीबों के लिए जिला पूर्ति विभाग से संचालित राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम की पात्र गृहस्थी में भी शामिल किया जाएगा। इससे उन्हें सस्ते दर में अनाज भी मिल सकेगा।
परिवार के सदस्यों को मिलेगा काम
योजना के तहत जहां आवास का लाभ मिलेगा। वहीं, घर के सदस्य जॉबकार्ड बनवा सकेंगे। साथ ही आवास में स्वयं काम भी कर सकेंगे। इसके तहत मनरेगा से 90 मानव दिवस का लाभ मिल सकेगा। इससे आर्थिक रूप से मजबूती मिलेगी।
सुविधायुक्त आवास के लिए लोन का भी लाभ
सरकार की ओर से प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 1.20 लाख दिए जाएंगे। यदि कोई लाभार्थी आवास को अधिक सुविधायुक्त बनाना चाहेगा और इसके लिए उसे अतिरिक्त धनराशि की जरूरत होगी तो शासन से निर्धारित धनराशि के अलावा बैंक से सस्ते ब्याज दर पर 70 हजार रुपये के लोन की भी सुविधा उपलब्ध हो सकेगी।
आपको बतो दें कि इस प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ गरीब परिवारों को दिया जाता है। इसमें 2011 की जनगणना के अनुसार आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को शामिल किया जाता है। प्राथमिकता पर उन लोगों को लाभ मिलता है, जो आवास विहीन अथवा कच्चे मकान में रहते हैं। साथ ही इससे पहले परिवार के किसी सदस्य को लोहिया, इंदिरा आवास या अन्य किसी आवास योजना का लाभ न मिला हो।