डीएम देहरादून ने कन्ट्रोल रुम का निरीक्षण कर दिए निर्देश

देहरादून के जिलाधिकारी/मुख्य कार्यकारी अधिकारी स्मार्ट सिटी लि0 डॉ आर राजेश कुमार ने स्मार्ट सिटी के कन्ट्रोल रूम सहस्त्रधारा रोड आईटी पार्क में स्मार्ट सिटी परियोजना के अधिकारियों के साथ बैठक की। बैठक से पूर्व जिलाधिकारी/मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने कन्ट्रोलरूम का निरीक्षण कर कार्यप्रणाली का जायजा लेते हुए अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए।

जिलाधिकारी/मुख्य कार्यकारी अधिकारी स्मार्ट सिटी लि0 ने स्मार्ट सिटी कन्ट्रोलरूम में लगाये गये मॉनिटिरिंग सिस्टम के सम्बन्ध में जानकारी प्राप्त करने पर बताया गया कि वर्तमान समय में शहर के 129 स्थानों पर पर स्मार्ट सिटी लि0 के कैमरों द्वारा नजर रखते हुए मॉनिटरिंग की जा रही है, जिसमें 49 स्थानों पर ई चालन की व्यवस्था बनाई गई है। जिसमें मुख्यतः यातायात नियमों का उल्लंघन करने वाले, ओवर स्पीड, गलत दिशा में वाहन चलाना, यातायात सिग्नल तोड़ने, नो पार्किंग जोन में वाहन खड़ा करने वालो पर नजर रखी जा रही है तथा शेष स्थानों को भी ई-चालान प्रक्रिया से जोड़ने की प्रक्रिया गतिमान जिस पर जिलाधिकारी ने मॉनिटिरिंग सिस्टम को व्यवहारिक बनाते हुए सिग्नल तोड़ने वालो, ओवर स्पीड, गलत दिशा में वाहन चलाने, नो पार्किंग क्षेत्र में वाहन खड़ा करने तथा मॉनिटिरिंग के दौरान यदि किसी व्यक्ति की गतिविधि संदिग्ध लगा रही हैं इसकी तत्काल सूचना पुलिस विभाग को दी जाय।

उन्होंने कहा कि तकनीकी का इस प्रकार इस्तेमाल किया जाय कि समय रहते किसी समस्या से निपटा जाय ताकि दुर्घटना/घटना घटित होने के बाद। उनकी मॉनिटिरिंग की जा सके। उन्होंने कहा कि शहर में प्रमुख स्थानों, सड़कों मौहल्लों में और अधिक सीसीटीवी कैमरे लगाते हुए इसके मॉनिटिरिंग के लिए स्टाफ भी बढायें। उन्होंने कहा कि दूरसंचार कम्पनी से समन्वय करते हुए कनैक्टिविटी बढाई जाय ताकि नेटवर्क की समस्या के कारण मॉनिटिरिंग में व्यवधान उत्पन्न ना हो। उन्होंने कहा कि शहर के सभी चौराहों, मुख्य सड़कों, प्रमुख स्थानों को ई-चालान व्यवस्था से जोड़ा जाए। जिलाधिकारी/सीईओ स्मार्ट सिटी ने कहा कि लगाये गये कैमरों से शहर की प्रत्येक गतिविधि को मॉनिटिर किया जाय साथ ही शहर में गंदगी फैलाने, खुले स्थानों पर कूड़ा डालने वालों पर भी नजर रखी जाय निगरानी के दौरान ऐसे व्यक्तियों के विरूद्ध चालान की कार्यवाही करने हेतु नगर निगम को सूचना प्रेषित की जाय।

बैठक में स्मार्ट सिटी के अधिकारियों ने बताया कि शहर के कई स्थानों पर पेड़ बड़े होने से मॉनिटरिंग में दिक्कत आ रही है जिस पर जिलाधिकारी ने ऐसे स्थानों को चिन्हित करते हुए पेड़ों की लोपिंग के लिए प्रभागीय वनाधिकारी को पत्र प्रेषित करने के निर्देश दिये।

जिलाधिकारी/मुख्य कार्यकारी अधिकारी स्मार्ट सिटी लि0 डॉ आर राजेश कुमार ने स्मार्ट सिटी परियोजना के अधिकारियों को स्मार्ट सिटी परियोजना के अन्तर्गत हो रहे निर्माण कार्यों को गुणवत्ता के साथ प्रगति बढाने को कहा तथा निर्माण कार्यों के लिए खोदी गई सड़कों तेजी से कार्य पूर्ण करते हुए समतलीकरण एवं गड्डामुक्त करें ताकि जनमानस को किसी प्रकार की समस्या का सामना ना करना पड़े। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की योजना पर कार्य करें जिससे जनमानस को सहूलियत हो।

बैठक में स्मार्ट सीटी के सीजीएम श्रीराम मिश्रा, वित्तीय निंयत्रक अभिषेक आनन्द, एजीएम राम उनियाल सहित स्मार्ट सिटी के अधिकारी उपस्थित थे।

बड़ी योजनाओं में पेंडिंग मुद्दों को निस्तारित करने के निर्देश

मुख्य सचिव डॉ. एस. एस. संधु ने सचिवालय में प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग ग्रुप (पीएमजी) के तहत ऋषिकेश-कर्णप्रयाग न्यू रेलवे लाइन, देवबंद रुड़की न्यू रेल लाइन विष्णुगाड-तपोवन जल विद्युत परियोजना, विष्णुगाड-पीपलकोटी जल विद्युत परियोजना एवं टिहरी पंप स्टोरेज प्लांट के प्रगति की समीक्षा की। ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेलवे लाइन के संबंध में मुख्य सचिव ने रेलवे अधिकारियों एवं जिला प्रशासन को आपसी तालमेल के साथ सभी पेंडिंग मुद्दों को निस्तारित किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने रेलवे को पेंडिंग कंपनसेशन डिस्बर्समेंट को मामलों को शीघ्र निस्तारित करने के निर्देश दिए।
मुख्य सचिव द्वारा टिहरी पंप स्टोरेज प्लांट हेतु टीएचडीसी को माइनिंग प्लान शीघ्र उपलब्ध कराए जाने के निर्देश देते हुए जिलाधिकारी के साथ संयुक्त निरीक्षण किए जाने के निर्देश दिए गए। उन्होंने विष्णुगाड-पीपलकोटी जल विद्युत परियोजना में स्थानीय प्रतिरोध के हल के लिए ज्वाइंट विजिट कर निस्तारित किए जाने के निर्देश दिए। तपोवन विष्णुगाड जल विद्युत परियोजना के संबंध में मुख्य सचिव ने एनटीपीसी को निर्देश दिए कि आपदा से परियोजना कार्यों में हुई क्षति का आंकलन शीघ्र कराया जाए।
इस अवसर पर सचिव अपर मुख्य सचिव मनीषा पंवार सहित सम्बन्धित जनपदों के जिलाधिकारी एवं सम्बन्धित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

प्रदेश में सड़कों को पेचलैस मुक्त करे विभाग-मुख्य सचिव

मुख्य सचिव डॉ.एस.एस.सन्धु ने उनके सचिवालय सभागार में प्रदेश में सड़कों को पेचलैस मुक्त किये जाने के सम्बन्ध में आयोजित बैठक में सम्बन्धित विभागों को उपरोक्त दिशा-निर्देश दिये। उन्होंने लोक निर्माण विभाग, एनएचआई (डीसीएल), एनएचएआई और बीआरओ के विभागीय अधिकारियों को निर्देशित किया कि प्रदेश में जहा पर यातयात अधिक है और सड़कों की कंडीशन भी खराब हैं उनको उच्च प्राथमिकता में लेते हुए सड़क सुधारीकरण के कार्य पूर्ण करें। उसके पश्चात् सड़क की दशा के अवरोही (घटते) क्रम में सुधारीकरण के कार्य पूर्ण करें। उन्होंने चारों विभागों के अधिकारियों से सड़कों की वस्तुस्थिति की जानकारी लेते हुए प्रमुख अभियन्ता लोक निर्माण विभाग को निर्देशित किया कि राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (डीसीएल), राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एआई) और सडक सीमा संगठन (बीआरओ) तीनों विभागों की सड़कों की वस्तुस्थिति और सुधारीकरण कार्य की गुणवत्ता का ड्रोन सर्वे कराते हुए शीघ्रता से रिपोर्ट प्रस्तुत करें।
मुख्य सचिव ने निर्माणदायी विभागों और एजेंसियों को सड़क की वास्तविक दशा और सुधारीकरण की जरूरत के अनुसार पुनर्निर्माण और सुधारीकरण के प्रस्ताव बनाने के निर्देश दिये। साथ ही निर्माण कार्य के दौरान ये सुनिश्चित करने को कहा कि सडक पर यातायात के आवागमन में और लोगों को मूवमेंट के दौरान अनावश्यक परेशानी ना हो। अव्यवस्थित तरीके की कार्यप्रणाली को स्वीकार नहीं किया जायेगा। उन्होंने विभागों से सड़क को पेचलैस (गड्ढा मुक्त) करने और सुधारीकरण की हेतु टाइमलाइन तय करते हुए निर्धारित अवधि में उस कार्य को पूरा करने के निर्देश दिये। उन्होंने सडकों की रियल टाइम मॉनिटरिंग करने हेतु रोड असेस्मेंट सॉफ्टवेयर को एक्टिव करते हुए सभी स्टेटस को ऑनलाइन मोड पर प्रजेंट करने को कहा। उन्होंने प्रमुख सचिव आर.के.सुधांशु को निर्देशित किया कि पर्वतीय क्षेत्रों में पार्किंग की समस्या के संबंध में टिहरी हाइड्रो डेवलपमेंट कारपोरेशन से समन्वय करते हुए समाधान तलाशें।
इस दौरान बैठक में प्रमुख सचिव आर.के सुधांशु, अपर सचिव अतर सिंह, प्रमुख अभियंता लोक निर्माण विभाग हरिओम शर्मा, निदेशक बीआरओ विवेक श्रीवास्तव, परियोजना निदेशक एनएचएआई पी.एस गोसाईं, डीजीएम प्रोजेक्ट एनएच (डीसीएल) प्रेमचन्द सहित सम्बन्धित अधिकारी उपस्थित थे।

भूकम्प एलर्ट एप बनाने वाला उत्तराखंड पहला राज्य

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सचिवालय में मोबाइल एप्लीकेशन ‘‘उत्तराखण्ड भूकंप अलर्ट’’ एप का शुभारम्भ किया। उत्तराखण्ड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, आपदा प्रबंधन विभाग एवं भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, रूड़की के सौजन्य से बनाये गये इस एप के माध्यम से भूकम्प से पूर्व चेतावनी मिल जायेगी।
उत्तराखण्ड यह एप बनाने वाला पहला राज्य है। इससे जन सुरक्षा में मदद मिलेगी। इस एप के माध्यम से भूकंप के दौरान लोगों की लोकेशन भी प्राप्त की जा सकती है। भूकंप अलर्ट के माध्यम से भूकंप से क्षतिग्रस्त संरचनाओं में फँसे होने पर सूचना दी जा सकती है। उत्तराखण्ड भूकंप अलर्ट एप को गूगल प्ले स्टोर से डाउनलोड कर सकते हैं।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखण्ड भूकंप की दृष्टि से संवेदनशील राज्य है। इस एप के माध्यम से लोगों को भूकंप पूर्व चेतावनी मिल सके, इसके लिए इस एप की लोगों को जानकारी दी जाय। विभिन्न माध्यमों से व्यापक स्तर पर इसका प्रचार प्रसार किया जाय। आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा इसकी लघु फिल्म बनाकर जन-जन तक पहुंचाया जाय। स्कूलों में भी बच्चों को लघु फिल्म के माध्यम से इस एप के बारे में जानकारी दी जाय।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन लोगों के पास एंड्राइड फोन नहीं है, उनको भी भूकंप से पूर्व चेतावनी मैसेज पहुंच जाय, इस एप के माध्यम से यह सुविधा भी प्रदान की जाय। भूकंप पूर्व चेतावनी में सायरन एवं वायस दोनों माध्यमों से अलर्ट की व्यवस्था की जाय। भूकंप पूर्व चेतावनी के लिए सायरन टोन अलग से हो। मुख्यमंत्री ने कहा कि भूकंप पूर्व चेतावनी के लिए यह एक अच्छी पहल है।
इस अवसर पर आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास मंत्री डॉ. धन सिंह रावत, मुख्य सचिव डॉ. एस.एस.संधु, अपर मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन, सचिव आपदा प्रबंधन एस.ए. मुरूगेशन, आई.आई.टी. रूड़की के प्रो. कमल एवं आपदा प्रबंधन विभाग के अधिकारी उपस्थित थे।

मुख्य सचिव ने सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के दिए निर्देश

‘‘सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए इनोवेटिव विकल्पों और हरसंभव प्रयासों को संजीदगी से अमल में लायें‘‘। मुख्य सचिव एस.एस.संधु ने सचिवालय सभागार में राज्य स्तरीय सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में संबंधित अधिकारियों को उपरोक्त दिशा-निर्देश दिए।
मुख्य सचिव ने कहा कि लोगों का जीवन बचाना हमारी सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए और इसके लिए विभिन्न विभागों को अपने विभागीय स्तर पर तथा सामूहिक समन्वय से जरूरी कदम उठाये जाने चाहिए। सड़क सुरक्षा से संबंधित कार्यों में किसी भी प्रकार की देरी न की जाए और सुधारीकरण के कार्यों की तीव्र प्रगति के लिए नियमित मॉनिटरिंग की जाए।

लाइसेंस जारी करते समय पूरी प्रक्रिया का ठीक ने अनुपालन करें
परिवहन विभाग को निर्देश दिए कि विभिन्न श्रेणी के लाइसेंस बनाते समय ट्रायल-ट्रेस्टिंग की वीडियो रिकॉर्डिंग रखें तथा ट्रायल का डेटा पोर्टल पर अपलोड करें ताकि कोई भी व्यक्ति किसी भी मीडिएटर(मध्यस्थ) के माध्यम से लाइसेंस न बनवा सके। उन्होंने परिवहन विभाग और यातायात पुलिस को निर्देश दिए कि मुख्य चैराहों और मुख्य सार्वजनिक रूट पर सी.सी.टी.वी कैमरे के साथ ही राडार और स्पीड इन्टरसेप्टर तकनीक का इस्तेमाल करें और इस तकनीक को चैपहिया और दो पहिया वाहनों में भी लगाएं। साथ ही इसका नियमित सुपरविजन करते हुए ओवरस्पीडिंग, रैश डाइविंग और सड़क सुरक्षा के प्रावधानों का उल्लंघन करने वालों पर सक्रियता से एक्शन लेते हुए सड़क सुरक्षा के जोखिम को न्यूनतम करें।
मुख्य सचिव ने लोक निर्माण विभाग और राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण को ब्लैक स्पॉट और वलनरेबल (दुर्घटना की दृष्टि से जोखिम वाले) क्षेत्रों को ए, बी व सी श्रेणी में वर्गीकृत करते हुए तद्नुसार जोखिम की अधिकता के अनुसार सुधारीकरण से संबंधित सभी कार्य संपन्न करने के निर्देश दिये। निर्देशित किया कि जहां तक संभव हो सके सड़क मार्गों पर साईकिल ट्रैक का भी निर्माण करें, विशेषकर औद्योगिक क्षेत्रों में जहां पर कामगारों (श्रमिकों) का आना-जाना रहता है, वहां पर साईकिल ट्रैक जरूर बनायें। विभिन्न रूट पर स्पीड ब्रेकर व रम्बल स्ट्रीप इस तरह से बनायें ताकि औसतन गति से वाहन चलाने वाले को अनावश्यक परेशानी न हो। साथ ही तीव्र गति से वाहन चलाने वाले का वाहन धीमा हो जाए। उन्होंने सड़क सुरक्षा का अच्छी ऐजेंसी से थर्ड पार्टी ऑडिट करवाने और माननीय न्यायालय तथा सड़क सुरक्षा समिति के समय-समय पर प्राप्त होने वाले सुझावों को अमल में लाने के निर्देश दिए।
मुख्य सचिव ने अवैध मीडियन्स को तत्काल बंद करने, मुख्य मार्ग से 90 डिग्री पर सीधे मिलने वाले संपर्क मार्ग अथवा रास्तों पर जरूरी सुरक्षा उपाय करने और पहाड़ी क्षेत्रों में आवश्यकतानुसार क्रैश बैरियर लगाने के निर्देश दिए। परिवहन विभाग को निर्देशित किया कि सुरक्षा मानकों का दूसरी बार उल्लंघन करने वाले वाहन चालक के डाइविंग लाईसेंस को छः माह के लिए तथा तीसरी बार उल्लंघन करने पर एक वर्ष के लिए लाईसेंस को निलंबित करें। कहा कि बिना हेलमेट वाहन चलाने वालो से हेलमेट का चार्ज लेते हुए नया हेलमेट दें, साथ ही मानक के अनुरूप जुर्माना की जितनी धनराशि है, उसका 50 प्रतिशत धनराशि भी वसुले।
मुख्य सचिव ने कहा कि दुर्घटना होने के पश्चात् गोल्डन अवर में लोगों का जीवन बचाने में स्वास्थ्य विभाग की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इसके लिए उन्होंने स्वास्थ्य विभाग और परिवहन विभाग को संयुक्त रूप से पर्वतीय क्षेत्रों में दुर्घटना में घायल लोगों के त्वरित इलाज हेतु व्यवहारिक समाधान तलाशने के निर्देश दिए। मुख्य सचिव ने वीडियो कन्फ्रेसिंग के माध्यम से सभी जिलाधिकारियों को निर्देशित किया कि सड़क दुर्घटनाओं से संबंधित पूर्व की जितनी भी मजिस्ट्रेट जांच अभी तक लंबित है, उसका दो माह के भीतर निस्तारण करें, साथ ही आगे से प्रत्येक मजिस्ट्रियल जांच को प्रत्येक हाल में तीन माह के भीतर निस्तारित करें। ऑटोमेटेड टेस्टिंग लेन, डाइविंग स्कूल और फिटनेस टेस्ट लेन बनवाने के लिए भूमि का तत्काल सर्वे किया जाए तथा इस संबंध में यदि निजी संस्थानों का भी सहयोग लिया जा सकता है तो उस पर भी विचार करें। उन्होंने अग्रिम निर्देश देते हुए कहा कि सभी जनपदों में ‘इन्स्टिट्यूट सोशल रेस्पोंसिबिल‘ इनिशिएटिव प्रारंभ करें जिसके अंतर्गत विभिन्न इंजीनियरिंग संस्थानों में अध्यनरत छात्रों, रिटायरमेंट इंजीनियरों अथवा समाज के सक्रिय और रचनात्मक नागरिकों को सड़क सुरक्षा के संबंध में बेहतरीन सुझाव और फीडबैक देने के लिए मंच प्रदान करें। इसके लिए उन्होंने प्रत्येक विकासखण्ड स्तर पर भी उपजिलाधिकारियों की अध्यक्षता में सड़क सुरक्षा समिति गठित करने के निर्देश दिये जिसमें उपरोक्त सभी लोगों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित हो।
इस दौरान बैठक में पुलिस महानिदेशक अशोक कुमार, सचिव अरविन्द सिंह ह्यांकी, रंजीत सिन्हा, आयुक्त गढ़वाल रविनाथ रमन, प्रभार सचिव विनोद कुमार सुमन, वी. षणमुगम, आयुक्त परिवहन दीपेन्द्र कुमार चैधरी सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।

मनमानी का केन्द्र बना उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय

उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय में हुईं भर्तियों की शासन ने जांच बैठा दी है। शासन ने कुलसचिव से बिंदुवार सभी भर्तियों पर रिपोर्ट तलब की है। अपर सचिव राजेंद्र सिंह की ओर से कुलसचिव को भेजे गए आदेश में पिछले वर्षों में हुईं भर्तियों में की गई अनियमितता की जांच रिपोर्ट मांगी है। उन्होंने विवि में पीआरडी के माध्यम से की जा रहीं भर्तियों और पिछले दो माह में पीआरडी से हुईं भर्तियों की रिपोर्ट भी मांगी है।

इसके अलावा नर्सिंग भर्ती, प्रोफेसर पदों पर सीधी भर्ती, विवि द्वारा अपने स्तर से शासन द्वारा नियुक्त कुलसचिव को हटाते हुए नए कुलसचिव की नियुक्ति, लेखा अधिकारी, सहायक लेखा अधिकारी के पद प्रमोशन के पद एवं वित्त विभाग के पद विज्ञापन जारी करने की स्थिति स्पष्ट करने को कहा गया है।

शासन ने योग अनुदेशकों के पदों पर जारी रोस्टर को बदलने, माइक्रोबायोलॉजिस्ट के पदों पर भर्ती में नियमों का अनुपालन न करने, बायोमेडिकल संकाय व संस्कृत में असिस्टेंट प्रोफेसर एवं पंचकर्म सहायक के पदों पर विज्ञप्ति प्रकाशित करने और फिर रद्द करने, विवि में पद न होते हुए भी संस्कृत शिक्षकों को प्रमोशन एवं एसीपी का भुगतान करने, बिना शासन की अनुमति बार-बार विवि द्वारा विभिन्न पदों पर भर्ती के लिए विज्ञापन निकालने और रोक लगाने, विभिन्न पदों पर भर्ती के लिए विवि द्वारा गठित समितियों के गठन की विस्तृत सूचना देने के निर्देश दिए गए हैं। विवि में पिछले दो माह में 60 से अधिक युवाओं पीआरडी जवानों को भर्ती कर दिया गया है, जिस पर सवाल उठ रहे हैं।

मनमानी का अड्डा बना आयुर्वेद विवि
उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय मनमानी का अड्डा बन गया है। शासन से जिस अधिकारी को कुलसचिव बनाकर भेजा जाता है, उसे विवि प्रशासन की ओर से खुद ही हटाकर नए कुलसचिव की नियुक्ति की जाती है। भर्तियों में न रोस्टर का कुछ अता-पता है और न ही शासन का कोई संज्ञान। आखिरकार अब जांच के निशाने पर अब कई अधिकारी आ गए हैं।

आयुर्वेद विवि में वर्ष 2017 से लगातार नियमों की अनदेखी की जा रही है। पूर्व कुलसचिव मृत्युंजय मिश्रा के कार्यकाल में हुई नियुक्तियों के बाद से भी यहां मनमानी का सिलसिला जारी है। शासन ने 2017 से अब तक की नियुक्तियों को सवालों के घेरे में ला खड़ा किया है। फिर चाहे प्रोफेसर की भर्ती हो या नर्सिंग स्टाफ की। हद तो तब है कि जो पद विवि में हैं ही नहीं, उन पदों पर प्रमोशन और एसीपी का भुगतान किया जा रहा है।
नियमानुसार भर्तियों के लिए शासन की अनुमति जरूरी होती है लेकिन विवि के अधिकारी किसी की अनुमति की जरूरत ही महसूस नहीं कर रहे हैं। हालात यह हैं कि खुद ही विज्ञप्ति जारी की जाती है और खुद ही उसे रद्द कर दिया जाता है। युवा भटक रहे हैं लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है।

पीआरडी से भर्तियों की बरसात
आयुर्वेद विवि में ताजा मामला पीआरडी के माध्यम से होने वाली भर्तियों का है। यहां पिछले दो माह में ही बिना शासन की अनुमति, बिना नियमों का पालन किए 60 से अधिक नौजवानों को पीआरडी के माध्यम से भर्ती कर दिया गया है। सवाल उठ रहे हैं कि विवि के अधिकारी किसी शह पर यह भर्तियां कर रहे हैं।

मनमानी का आलम यह है कि एक अधिकारी को बुलाया, कार्यमुक्त किया फिर रख लिया गया। इसी तरह आयुर्वेद विवि में आयुष विभाग से एक अधिकारी को पहले बुलाया गया, फिर कार्यमुक्त किया गया और फिर वहीं रख लिया गया। इस पूरे प्रकरण में शासन को संज्ञान में ही नहीं लिया गया है। ऐसे तमाम प्रकरण हैं, जिसमें मनमानी खुलकर सामने आ रही है। 

अपना स्तर खुद घटा रहे मीडिया संस्थान, भ्रामक खबरों से बचना चाहिए

उत्तराखंड में आज दिनभर से एक खबर को लेकर जमकर चर्चा हो रही है। दरअसल इस चर्चा का विषय मीडिया की घटती विश्वसनीयता है। यह इसलिए क्यूंकि आज सुबह से ही राज्य सरकार के दो विज्ञापन को लेकर आधारहीन खबरें प्रकाशित की जा रही हैं। हैरानी की बात यह है कि बिना तथ्यों की जानकारी के एक मनगढ़ कहानी बनाकर खबर के रूप में प्रसारित किया जा रहा है। दरअसल ताजा मामला मुख्यमंत्री वात्सल्य योजना के विज्ञापन से जुड़ा हुआ है। जिस पर कतिपय समाचार पोर्टल पर मुख्यमंत्री के तस्वीर के साथ विभागीय मंत्री की फोटो न लगाए जाने को लेकर भ्रामक स्थिति उत्पन्न की जा रही है।

एक नजर कोर्ट के आदेश पर

दरअसल 13 मई 2015 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा एक मामले की सुनवाई करते हुए यह निर्णय दिया गया था कि सरकारी विज्ञापनों में राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मुख्य न्यायाधीश की फोटो ही लगाई जा सकती है। सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद कर्नाटक सरकार और पश्चिम बंगाल सरकार समेत कई राज्यों की सरकार ने इस बार सुप्रीम कोर्ट में एक बार फिर से पुनर्विचार याचिका दायर की, जिस पर सुनवाई करते हुए ’18 मार्च 2016 को मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई व न्यायाधीश पिनाकी चंद्र घोष की पीठ ने यह आदेश संशोधित करते हुए निर्णय दिया कि सरकारी विज्ञापन में मुख्यमंत्री की फोटो लगाई जा सकेगी, इसके अलावा कोर्ट ने इसी आदेश में विभागों के कैबिनेट मंत्री और राज्य मंत्रियों को भी फोटो लगाने हेतु अनुमति प्रदान की है. इस आदेश के तीसरे बिंदु में स्पष्ट कहा गया है कि यदि विभागीय मंत्री की फोटो लगती है तो उसमें मुख्यमंत्री की तस्वीर नहीं लगाई जाएगी यानी कि राज्य सरकार के विज्ञापन में या तो मुख्यमंत्री या फिर विभागीय मंत्री की तस्वीर ही लगाई जाएगी।

मनगढ़त खबरें लिखकर टीआरपी बटोरने की कोशिश
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद ज्यादातर राज्य सरकारों द्वारा सरकारी विज्ञापनों में मुख्यमंत्री की ही तस्वीर लगाई जाती हैं, यह बात अलग है कि अगर विभाग अलग से विज्ञापन प्रकाशित कर रहा है तो उसमें विभागीय मंत्री की तस्वीर लगाई जा सकती है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश की जानकारी के बिना कतिपय न्यूज पोर्टल इस तरह के मनगढ़त खबरें लिखकर टीआरपी बटोरने की कोशिश कर रहे हैं। लिहाजा जनता के बीच भी भ्रामक जानकारी दी जा रही है।

नई रोड धंसी, विस अध्यक्ष का चढ़ा पारा, मौके पर बुलाकर लगाई लताड़

एम्स रोड, ऋषिकेश में सामान से भरे ट्रक के रोड में धँस जाने की सूचना मिलते ही स्पीकर प्रेमचंद अग्रवाल मौके पर पहुंचे। उन्होंने लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता विपुल सैनी को दूरभाष पर एम्स रोड में डामरीकरण में हुई अनियमिता के लिए खूब फटकार लगायी और कहा कि विभाग की इस घोर लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने विभाग के अधिशासी अभियंता को निर्देशित करते हुए कहा है कि शीघ्र एम्स रोड का निरीक्षण कर खामियों का पता लगाया जाए और जानकारी दी जाए ताकि दोषियों पर दंडात्मक कार्रवाई की जा सके।
निरीक्षण के दौरान लोक निर्माण विभाग के सहायक अभियंता उपेंद्र गोयल को मौके पर बुलाया गया और स्पीकर ने ट्रक फंसने की वजह पूछी। उपेंद्र गोयल ने कहा है कि सड़क के नीचे पानी की पाइपलाइन की वजह से यह घटना हुई है जिस पर स्पीकर ने कहा कि मोटर मार्ग निर्माण से पूर्व तकनीकी जांच कराई जानी चाहिए थी ताकि इस प्रकार की घटना ना होती। इस दौरान स्पीकर ने सड़क मार्ग निरीक्षण करते हुए दोनों तरफ पानी से भरे हुए गड्ढों पर भी नाराजगी व्यक्त की।
ज्ञात हो कि नवंबर माह मे एम्स रोड के डामरीकरण का कार्य पूर्ण हुआ था। उस दौरान निर्माणाधीन कार्य का विधानसभा अध्यक्ष द्वारा बीच-बीच में निरीक्षण भी किया गया और साथ ही विभाग के अधिकारियों को कार्य में गुणवत्ता के सख्त निर्देश दिए थे। मौके पर लोक निर्माण विभाग के सहायक अभियंता उपेंद्र गोयल सामाजिक कार्यकर्ता सुरेंद्र सिंह नेगी आदि उपस्थित थे।

कुत्तों के आतंक से इंदिरानगरवासी परेशान, पार्षद ने नगरआयुक्त को लिखा पत्र


नगर निगम ऋषिकेश के वार्ड इंदिरा नगर व नेहरू ग्राम में इन दिनों मुख्य मार्ग पर कुत्तों का आतंक पसरा पड़ा है। मीट बाजार के आसपास तो यह आतंक और भी भयावह तब हो जाता है, जब यहां कोई पैदल राहगीर व दुपहिया वाहन से गुजरता है। लोग अब इस मार्ग से जाने को डर खाए बैैठे हैं।

पार्षद राजेंद्र बिष्ट ने नगर आयुक्त नरेंद्र सिंह क्वींरियाल को ज्ञापन सौंपा। अवगत कराया कि आवारा कुत्तों के आतंक से राहगीरों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कुत्ते यहां राहगीरों के पीछे दौड़ते हैं और उन्हें काटते भी हैं। साथ ही कुत्तों के द्वारा पीछा करने से और काटने से कई राहगीर चोटिल भी हो चुके हैं।

वहंी, नगर आयुक्त ने मामले का संज्ञान लेते हुए इस पर जल्द से जल्द कार्यवाही कर राहगीरों को आवारा कुत्तों से बचाने का आश्वासन दिया।

स्पीकर से मिले प्राथमिक शिक्षक, पुरानी पेंशन योजना लाभ देने की मांग की


प्रदेश के प्राथमिक विद्यालयों में वर्ष 2004 की विज्ञप्ति द्वारा नियोजित शिक्षकों ने पुरानी पेंशन की मांग करते हुए स्पीकर प्रेमचंद्र अग्रवाल को ज्ञापन सौंपा। शिक्षकों ने नई पेंशन योजना को कर्मचारियों के साथ धोखा बताते हुए विज्ञप्ति की शर्तों के अनुसार पुरानी पेंशन योजना के लाभ की मांग की है।

वर्ष 2004 में उत्तराखंड सरकार द्वारा राज्य में शिक्षकों के रिक्त पदों को भरने के लिए बीएड प्रशिक्षितों को विशिष्ट बीटीसी के तहत प्राथमिक शिक्षकों के रूप में भर्ती के लिए समाचार पत्रों के माध्यम से विज्ञप्ति जारी की थी। विज्ञप्ति के अनुसार इन शिक्षकों को पुरानी पेंशन योजना का लाभ मिलना था किंतु भर्ती प्रक्रिया में विलंब के कारण शिक्षकों की नियुक्ति के दौरान नई पेंशन योजना से आच्छादित कर दिया गया।

उल्लेखनीय है कि नई पेंशन योजना को लेकर देशभर के कर्मचारियों में नाराजगी है और कर्मचारी इसे उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ करार देते आ रहे हैं। वर्ष 2004 की विज्ञप्ति मैं पुरानी पेंशन योजना से आच्छादित किए जाने की शर्त होने के बावजूद शिक्षकों को पेंशन का लाभ ना मिलने से शिक्षक अपनी नियुक्ति के दौरान से ही नई पेंशन योजना का विरोध करते हुए उन्हें पुरानी पेंशन योजना का लाभ देने की मांग कर रहे हैं। इसी क्रम में आज प्राथमिक शिक्षकों के प्रतिनिधिमंडल ने विधानसभा अध्यक्ष श्री प्रेम चंद्र अग्रवाल से ऋषिकेश में मुलाकात कर उन्हें ज्ञापन सौंपा है। उक्त आशय की जानकारी देते हुए प्रतिनिधिमंडल में शामिल शिक्षिका कंचन उनियाल ने बताया है कि एक ही विज्ञप्ति के द्वारा नियुक्त कुमाऊं मंडल के कुछ जनपदों में शिक्षकों को पुरानी पेंशन योजना से लाभान्वित किया जा रहा है जबकि राज्य भर में करीब 2300 शिक्षकों को इस लाभ से वंचित कर उन पर उनकी इच्छा के विरुद्ध नई पेंशन योजना थोप दी गई है। उन्होंने कहा कि शिक्षक अपने भविष्य को लेकर चिंता एवं तनाव में हैं।

स्पीकर प्रेमचंद अग्रवाल ने शिक्षकों को नियमानुसार कार्यवाही का आश्वासन दिया है। ज्ञापन देने वाले शिक्षकों में मंजू रावत, प्रमोद रावत, संजय सिंह, दीवान सिंह आदि उपस्थित रहे।