प्रतीत नगर में जन समस्याओं के निस्तारण को लगा शिविर, स्पीकर ने सुनी समस्यायें

प्रतीत नगर ग्राम पंचायत भवन में बहुउद्देशीय शिविर का आयोजन किया गया। शिविर का शुभारंभ उत्तराखंड विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल द्वारा विधिवत रूप से किया गया।
शिविर में विभिन्न विभागों की समस्या से संबंधित 140 आवेदन पत्र प्राप्त हुए जिसमें से संबंधित विभागों द्वारा 77 शिकायतों का समाधान मौके पर किया गया वहीं 63 शिकायतों के निस्तारण के लिए विभागीय अधिकारियों को 15 दिन का समय दिया गया। शिविर में पेंशन योजनाओं से संबंधित 10 आवेदन पत्रों को निस्तारित किया गया, 20 लाभार्थियों का दिव्यांग प्रमाण पत्र हेतु पंजीकरण किया गया जिसमें मौके पर 7 दिव्यांग प्रमाण पत्र निर्गत किए गए। 11 दिव्यांग लाभार्थियों के यूडीआईडी कार्ड हेतु पंजीकरण किया गया, राशन कार्ड संबंधी 30 आवेदन पत्र प्राप्त किए गए।शिविर में 55 परिवार रजिस्टर की नकल संबंधी कार्य हए जिसमें 48 परिवार रजिस्टर जारी की गई।
शिविर के दौरान समाज कल्याण, चिकित्सा विभाग, जिला दिव्यांग पुनर्वास केंद्र, पशुपालन विभाग, सहकारिता विभाग, खादी ग्रामोद्योग विभाग, कृषि एवं उद्यान विभाग, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग, ग्राम विकास एवं पंचायती राज विभाग, राजस्व विभाग, लीड बैंक अधिकारी देहरादून एवं बाल विकास विभाग के स्टाल लगाए गए।
शिविर में विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों से आए फरियादियों की शिकायतों को गंभीरता से सुना गया।यहां पर आए लोगों को सभी विभागों की योजनाओं की जानकारी दी गई और लोगों की समस्याओं का मौके पर ही निदान किया गया। परिसर में स्थापित विभागीय स्टॉलों से ग्रामीणों ने योजनाओं की जानकारी प्राप्त करते हुए योजनाओं का लाभ उठाया तथा प्रमाण पत्र आदि दस्तावेज प्राप्त किये।
बहुउद्देशीय शिविर का उद्घाटन करते हुए विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि राज्य सरकार जनता की समस्याओं के समाधान के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। सरकारी योजनाओं का सही तरीके से क्रियान्वयन हो सके, इसके लिए विभागीय स्तर पर किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि क्षेत्रवासियों को समस्याओं के समाधान के लिए विभागों के चक्कर नहीं काटने होंगे, इसके लिए बहुउद्देशीय शिविर लगाया गया है। इससे सभी समस्याओं का समाधान एक ही छत के नीचे किया जा सके।उन्होंने अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि जनता के प्रति समर्पित रहे और जिम्मेदारी से कार्यों को पूरा किया जाए। उन्होंने कहा की सरकार का उद्देश्य अच्छी कार्यप्रणाली के साथ जनता को बेहतर सेवा देना है ताकि जनता को उसका लाभ मिल सके।
बहुदेशीय शिविर में परियोजना निदेशक डीपीआरओ विक्रम सिंह, उप जिलाधिकारी विकासनगर परितोष कुमार, तहसीलदार ऋषिकेश अमृता सिंह, खंड विकास अधिकारी भगवान सिंह नेगी, जिला पंचायत सदस्य रीना रागड, जिला पंचायत सदस्य दिव्या बेलवाल, प्रधान सोवन सिंह कैंतूरा, प्रधान प्रतीत नगर अनिल कुमार, प्रधान गोहरी माफी रोहित नौटियाल, प्रधान चमन पोखरियाल, मंडल अध्यक्ष गणेश रावत, क्षेत्र पंचायत सदस्य कृष्णा जोशी, ज्योति जुगलान, बॉबी रागड, वीना डंगवाल, वेद ग्वाडी, कुंवर सिंह नेगी, रमन रागड, सतपाल सैनी, राजेश जुगलान आदि सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे।
बहुउददेशीय शिविर के दौरान 140 शिकायतें प्राप्त हुई जिनमें मौके पर 77 शिकायतों का निस्तारण किया गया।वहीं 63 शिकायतों के निस्तारण के लिए 15 दिन का समय विभागीय अधिकारियों को दिया गया।
बहुउददेशीय शिविर के दौरान 140 शिकायतें प्राप्त हुई जिनमें मौके पर 77 शिकायतों का निस्तारण किया गया। वहीं 63 शिकायतों के निस्तारण के लिए 15 दिन का समय विभागीय अधिकारियों को दिया गया।

नेटवर्क में सुधार लाने के लिए बीबीएनएल के महानिदेशक से चर्चा

अशोक कुमार मित्तल, आई.टी. एस. महानिदेशक दूरसंचार, दूरसंचार विभाग ने उत्तराखंड के मुख्य सचिव डॉ. एस.एस.सन्धु से मुलाकात करते हुए उत्तराखंड राज्य में दूरसंचार के बुनियादी ढांचे के विकास के लिए रणनीति पर चर्चा की। इस चर्चा में शहरी विकास प्राधिकरणों के उप कानूनों को उत्तराखंड राइट ऑफ वे पॉलिसी 2018 के अनुसार करने के लिए नीतिगत हस्तक्षेप, पंचायत संस्थानों द्वारा भारतनेट नेटवर्क का उपयोग, जिला और राज्य स्तरीय दूरसंचार समितियों की नियमित बैठक, ट्रांसमिशन लाइनों के साथ ऑप्टिकल ग्राउंड वायर (ओपीडब्ल्यूजी) की तैनाती आदि शामिल है।
महानिदेशक (दूरसंचार) ने उत्तराखंड क्षेत्र में नेटवर्क कवरेज में सुधार के लिए दूरसंचार टावरों की अनुमति की शीघ्र मंजूरी के महत्व पर जोर दिया। ऑप्टिकल फाइबर केबल के दोषों की मरम्मत के लिए सड़कों की खुदाई के लिए बी.बी.एन.एल. (भारत ब्रॉडबैंड नेटवर्क लिमिटेड) को अनुमति पर भी चर्चा की गई।
इस दौरान मुख्य सचिव ने प्रमुख सचिव सूचना प्रौद्योगिकी आर. के सुधांशु को निर्देशित किया कि उत्तराखण्ड में दूरसंचार सुविधाओं के विकास से सम्बन्धित जो भी प्रस्ताव आते हैं। उनका सम्बन्धित जिलाधिकारियों के माध्यम से तत्काल निस्तारण करवायें। साथ ही उन्होंने इस सम्बन्ध में महानिदेशक दूरसंचार को स्थानीय डाटा भी उपलब्ध करवाने को कहा।
महानिदेशक (दूरसंचार) ने सचिव (आपदा प्रबंधन) एस ए मुरुगेसन से भी मुलाकात करते हुए उत्तराखंड राज्य में आपदा के दौरान दूरसंचार के बुनियादी ढांचे की बहाली और प्रबंधन की रणनीति के बारे में चर्चा की। उन्होंने बचाव, राहत और पुनर्वास पद्धति शुरू करने में दूरसंचार सेवाओं की भूमिका पर जोर दिया और उन्हें आपदाओं से निपटने के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एस.ओ.पी.) 2020 के अनुसार दूरसंचार सेवा प्रदाताओं द्वारा आयोजित मॉक ड्रिल के बारे में जानकारी भी दी।

आमजन की समस्याओं को सुन सीएम ने दिए अधिकारियों को निस्तारण के निर्देश

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सीएम आवास में आयोजित जनता मिलन कार्यक्रम में बड़ी संख्या में आए लोगों की शिकायतों और समस्याओं को सुना और मौके पर ही अधिकारियों को उनके निस्तारण के निर्देश दिये। जनता मिलन कार्यक्रम में आए सभी लोगों की शिकायतों का पंजीकरण किया गया और उन्हें रजिस्टर में दर्ज किया गया। मुख्यमंत्री ने एक-एक कर सभी की शिकायतों को पूरी गंभीरता से सुना। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को जन समस्याओं और शिकायतों का निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिये। अपनी समस्याएं लेकर आने वालों में कुछ दिव्यांग भी थे। मुख्यमंत्री खुद उनके पास गए और उनकी शिकायतों की जानकारी ली।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जनता दर्शन कार्यक्रम में प्राप्त सभी जन शिकायतों की मॉनिटरिंग मुख्यमंत्री कार्यालय से की जाएगी। अधिकारी पूरी गंभीरता से सभी शिकायतों का निस्तारण समयबद्धता से करें। यदि किसी स्तर पर लापरवाही पाई गई तो जिम्मेदारी फिक्स करते हुए कङी कार्रवाई की जाएगी।

हरिद्वार के रवि सिंह रौथाण द्वारा यह बताए जाने पर कि उनके पिताजी की शिक्षा विभाग से सेवानिवृत्ति के बाद जीपीएफ की राशि देने में अनावश्यक विलम्ब किया जा रहा है, मुख्यमंत्री ने इसके जांच के निर्देश दिये और कहा कि जानबूझकर विलम्ब किया जाना पाया जाए तो संबंधित के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।

शक्तिफार्म के सुहास हलदर द्वारा प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की किश्त की राशि न आने की बात पर मुख्यमंत्री ने मामले का परीक्षण कर कार्यवाही करने के निर्देश दिये।
हरिद्वार के राजेश कुमार सैनी द्वारा पुलिस में उनके प्रकरण की सुनवाई न होने की शिकायत की गई। मुख्यमंत्री ने डीआईजी गढ़वाल को इसकी जांच करने के निर्देश देते हुए कहा कि शिकायतकर्ताओं को अनावश्यक चक्कर न लगाने पङे।

उम्मेद सिंह रावत द्वारा छूट गये राज्य आंदोलनकारियों के चिन्हीकरण की मांग पर मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने पहले ही राज्य आंदोलनकारियों के चिन्हीकरण की प्रक्रिया 31 दिसम्बर तक बढाने के निर्देश दे दिए हैं।

काशीपुर के कुंवर सिंह ने उनके बच्चे को एजुकेशन लोन दिलाने, देहरादून के कमलेश ने पीएम शहरी आवास में आवास दिलाने का अनुरोध किया। मुख्यमंत्री ने इनपर समुचित कार्यवाही करने को अधिकारियों को कहा।

प्रदीप कुमार ने आवास विकास परिषद में मकान का नक्शा पास न होने की बात कही जबकि व्यापार मंडल देहरादून के अभिषेक शर्मा ने भी उनके यहाँ नक्शा पास की व्यवस्था कराये जाने का आग्रह किया। जस्सोवाला के नंदकिशोर गौड़ द्वारा बारातघर के लिए अनुरोध करने पर मुख्यमंत्री ने डीएम देहरादून को इसका परीक्षण करने के निर्देश दिये।

सोमाल्टा के सरदार सिंह द्वारा क्षतिग्रस्त सड़क मार्ग को ठीक कराने के आग्रह पर मुख्यमंत्री ने कहा कि 15 सितंबर से पूरे प्रदेश में गड्ढा मुक्त सड़कों का अभियान शुरू किया जा रहा है। घनशाली के उम्मेद सिंह बिष्ट ने किसान सेवा केन्द्र में कम्प्यूटर दिये जाने की बात पर मुख्यमंत्री ने इसके प्रति उन्हें आश्वस्त किया।

इसके अतिरिक्त अनेक युवाओं द्वारा विभिन्न विभागों में भर्ती की बात कहे जाने पर मुख्यमंत्री ने कहा कि युवाओं को रोजगार के लिए बड़ी भर्ती प्रक्रिया शुरू की गई है। स्वरोजगार के लिए कैम्प लगाए जा रहे हैं। सीएम विवेकाधीन कोष से मदद संबंधी सभी आवेदनों का परीक्षण उपरांत समुचित कार्यवाही के निर्देश दिये।

इसके अलावा सड़क, बिजली, पानी आदि समस्याओं को लेकर भी लोगों ने मुख्यमंत्री के समक्ष अपनी बात रखी। आज के जनता मिलन कार्यक्रम में 300 के करीब लोगों ने अपनी शिकायतें और समस्याओं का पंजीकरण कराया।

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री डॉ धन सिंह रावत, विधायक खजानदास, दिलीप रावत, मुकेश कोहली, सचिव शैलेश बगोली, प्रभारी सचिव एसएन पाण्डेय, मंडलायुक्त रविनाथ रमन, डीआईजी नीरू गर्ग, जिलाधिकारी डॉ आर राजेश कुमार आदि उपस्थित थे।

धारचूला में आपदा प्रभावित क्षेत्र पहुंचकर सीएम ने लिया स्थिति का जायजा, प्रभावित परिवारों से मिलकर जताई शोक संवेदना


मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पिथौरागढ़ जनपद के सीमांत तहसील धारचूला के आपदा प्रभावित क्षेत्र ग्राम जुम्मा पंहुचकर विगत दिनों क्षेत्र में हुई भारी वर्षा से हुई क्षति का जायजा लिया गया तथा आपदा प्रभावितों से मिले व उनका हाल जाना। इस दौरान उन्होंने जुम्मा के जामुनी तोक में आपदा से लापता व्यक्तियों की खोजबीन हेतु चलाए जा रहे रेस्क्यू कार्य का भी जायजा लिया गया। इस दौरान उन्होंने आपदा प्रभावित क्षेत्र का हवाई सर्वेक्षण कर नुकसान का जायजा भी लिया गया। उन्होंने जुम्मा के एलागाड़ स्थित एसएसबी कैम्प में जुम्मा के जामुनी एवं सिरौउयार तोक के आपदा प्रभावितों से मिलकर शोक संवेदना व्यक्त करते हुए दुःख व्यक्त किया गया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार दुःख की इस घड़ी में उनके साथ खड़ी है। इस दौरान प्रभावित परिवारों को प्रति मृतक 4 लाख रुपए की आर्थिक सहायता का चेक प्रदान किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि 1 लाख रुपये की अतिरिक्त धनराशि प्रति मृतक मुख्यमंत्री आर्थिक सहायता कोष से भी परिवार को सहायता के रूप में उपलब्ध कराई जाएगी। उन्होंने आपदा पीड़ितों को आस्वस्त कराया कि सरकार इस दुःख की घड़ी में उनके साथ खड़ी है। उनकी हर संभव मदद की जाएगी।

इसके उपरांत मुख्यमंत्री पर्यटक आवास गृह धारचूला पहुंचकर स्थानीय लोगों से मिले और उनकी समस्याएं भी सुनी। इससे पूर्व जुम्मा में आपदा की घटना में मृतक व्यक्तियों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए उनकी आत्मा की शान्ति के लिए 2 मिनट का मौन रखा गया। इसके उपरांत उन्होंने धारचूला नगर के नो गांव(तरकोट), मल्ली बाजार के आपदा पीड़ित परिवार से मुलाकात कर उन्हें हर सम्भव मदद करने की बात करते हुए जिलाधिकारी को आवश्यक निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि क्षेत्र का भू गर्भीय परीक्षण कराते हुए सुरक्षा के कार्य कराए जाएंगे। इस दौरान उन्होंने क्षेत्रीय जनता की समस्याएं भी सुनी। उन्होंने बरम के गोगोई में भू कटाव को रोके जाने हेतु सुरक्षा दीवार का निर्माण करने की घोषणा भी की। उन्होंने कहा कि दुःख की घड़ी में सरकार प्रभावितों के साथ खड़ी है। हर सम्भव मदद की जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि आगामी एक माह हेतु क्षेत्र में हैलीसेवा को बढ़ा दिया गया है। आवश्यकता पड़ने पर इसे आगे भी बढ़ाया जाएगा। उन्होंने कहा कि पिथौरागढ़ से हवाई सेवा सुचारू किए जाने हेतु भी प्रयास जारी है। उन्होंने कहा कि धारचूला काली नदी किनारे तटबन्ध निर्माण हेतु सिंचाई विभाग द्वारा तैयार 42 करोड़ की धनराशि के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान हेतु शासन से कार्यवाही की जाएगी।

अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने कहा कि क्षेत्र में आपदा से बंद क्षतिग्रस्त सड़कों को शीघ्रता से खोलना हमारी प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में तीन मांह हेतु खाद्यान्न की आपूर्ति की जा चुकी है,जहां खाद्यान्न की कमी होगी उन क्षेत्रों में हैलीकॉप्टर से खाद्यान्न पंहुचाया जाएगा। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में चिकित्सकों की तैनाती की जाएगी। उन्होंने आपदा के दौरान प्रशासन द्वारा किए गए त्वरित कार्य हेतु जिलाधिकारी एवं उनकी समस्त टीम की सराहना करते हुए कहा कि आपदा विभाग 24 घंटे कार्य कर रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत दुनिया का पहला देश है जहां सबसे अधिक वैक्सीनेशन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कोरोना कम हुआ है पर खत्म नहीं हुआ है। सभी लोगों से अपील है कि वह कोविड नियमों का अनुपालन अवश्य करें। उन्होंने कहा कि अगले 4 महीने में प्रदेश में शत प्रतिशत कोविड वैक्सीनेशन कर लिया जाएगा। केन्द्र से उत्तराखंड को 20 लाख वैक्सीन उपलब्ध करा दिए गए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी अधिकारी कार्यों को सरलीकरण करते हुए उनका समाधान कर त्वरित निस्तारण करना सुनिश्चित करें ताकि निचले स्तर की समस्याओं के निस्तारण हेतु लोगों को तहसील, जिला एवं राज्य स्तर तक न आना पड़े। उन्होंने कहा कि आपदा प्रभावित क्षेत्रों का भू गर्भीय परीक्षण कर सुरक्षा एवं पुनर्वास की व्यवस्था की जाएगी।
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने कहा कि धारचूला के ग्वाल गांव में सुरक्षा के कार्य किए जाएंगे। व्यास खोतिला के भू कटाव की सुरक्षा हेतु धनराशि दी जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार जो भी घोषणा कर रही है उसे धरातल पर अवश्य ही साकार कर रही है। इस दौरान क्षेत्रीय सांसद अजय टमटा ने कहा कि सरकार इस दुःख की घड़ी में आपदा प्रभावितों के साथ है। उनकी हर संभव मदद की जाएगी।
भ्रमण के दौरान सांसद अजय टम्टा, जिलाधिकारी डॉ आशीष चौहान, पुलिस अधीक्षक सुखबीर सिंह, क्षेत्र प्रमुख धन सिंह धामी, अध्यक्ष नगर पालिका राजेर्श्वरी देवी, प्रभारी मुख्य विकास अधिकारी आशीष पुनेठा आदि मौजूद रहे।

बचाव और राहत कार्यों को सीएम ने युद्ध स्तर पर करने के दिए निर्देश

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जनपद पिथौरागढ़ के तहसील धारचूला के ग्राम जुम्मा में भारी वर्षा से हुए नुकसान के बारे में कुमाऊं कमिश्नर सुशील कुमार एवं अपर जिलाधिकारी पिथौरागढ़ फिंचाराम से वर्चुअल माध्यम से जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने प्रभावित क्षेत्र में मौजूद जिलाधिकारी आशीष चौहान से फोन पर राहत व बचाव कार्यों की जानकारी ली।
मुख्यमंत्री ने कुमाऊं कमिश्नर एवं जिलाधिकारी पिथौरागढ़ को निर्देश दिए कि प्रभावित क्षेत्र से लोगों को तत्काल सुरक्षित स्थानों पर लाया जाय। प्रभावितों को रहने के साथ ही खाद्य सामग्री, दवाइयों एवं बच्चों को दूध की पर्याप्त व्यवस्था की जाए। यह सुनिश्चित किया जाय की प्रभावित क्षेत्र में कोई न फंसे।
मुख्यमंत्री ने कुमाऊं कमिश्नर को निर्देश दिए की प्रभावित क्षेत्र में यातायात व्यवस्था को जल्द शुरू करने के लिए युद्धस्तर पर कार्य किया जाय। लोक निर्माण विभाग की टीम से जल्द रास्ते का मलवा हटाया जाय। एनएच के जो भी रूट बाधित हो रहे हैं, उनको शीघ्र खुलवाने के लिए जेसीबी एवं अन्य करण की पर्याप्त व्यवस्था रखी जाए।
मुख्यमंत्री ने कुमाऊं कमिश्नर एवं जिलाधिकारी पिथौरागढ़ से बारिश से हुए नुकसान की जानकारी ली । प्राप्त जानकारी के अनुसार 3 लोगों के मृत्यु एवं 4 लोगों के लापता होने की सूचना है। प्रशासन एवं एसएसबी की टीम घटना स्थल पर राहत एवं बचाव कार्य में जुटी है। जिलाधिकारी पिथौरागढ़ आशीष चौहान प्रभावित क्षेत्र में हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी फोन से जिलाधिकारी से लगातार अपडेट ले रहे हैं। मौसम साफ होते ही मुख्यमंत्री प्रभावित क्षेत्र का दौरा करेंगे।
इस अवसर पर केबिनेट मंत्री गणेश जोशी, विधायक चंद्रा पंत, खजान दास, अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी, आपदा प्रबंधन रिद्धिम अग्रवाल, अपर सचिव आपदा प्रबंधन डॉ. आनन्द श्रीवास्तव, पिथौरागढ़ से वर्चुअल माध्यम से एडीएम फिंचाराम चौहान मौजूद थे।

सुखरो नदी पर बने पुल के समीप हुए कटाव को लेकर मंत्री ने दिए निर्देश

वन मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत ने बाढ सुरक्षा को लेकर अधिकारियों को आवश्यक दिशा निर्देश दिए। इससे पूर्व उन्होंने आपदा से हुए लालढांग-चिलरखाल मार्ग पर हुए कटान का निरीक्षण जेसीबी मशीन में बैठकर किया। उन्होंने सुखरो नदी पर बने पुल के समीप हुए कटाव का देखते हुए अपने आवास पर अधिकारियों की बैठक ली। उन्होंने अधिकारियों को कटाव के कारण पुल को उत्पन्न खतरे को देखते हुए सिंचाई विभाग के अधिकारियों को आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए। साथ ही जेसीबी मशीन लगाकर चैनलाइज कर नदी का बहाव बीच में करने के निर्देश दिए। साथ ही पुल के पिलर की सुरक्षा के लिए वायरक्रेट लगा सुरक्षा दीवार बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों को बरसात बंद होने का इंतजार किए बगैर तुरंत बाढ सुरक्षा कार्य शुरू कराने के निर्देश भी दिए। साथ ही विधानसभा क्षेत्र में सभी जगहों का निरीक्षण कर जहां जहां नुकसान हुआ है, वहां भूकटाव रोकने और आपदा से नुकसान को रोकने के प्रबंध करने के निर्देश भी दिए।
इस मौके पर उपजिलाधिकारी योगेश मेहरा, सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता शिवराम जगूडी, लोनिवि दुगड्डा के अधिशासी अभियंता निर्भय सिंह, नगर निगम के सहायक नगर अधिकारी संजय कुमार, जेई अखिलेश खंडूडी, मीडिया प्रभारी धर्मवीर गुसाई आदि मौजूद रहे।

रानीपोखरी पुल टूटने से लोगों की परेशानी बढ़ी

ऋषिकेश से रानीपोखरी को जोड़ने वाले संपर्क मार्ग पर जाखन नदी पर बना पुल पानी के तेज बहाव में गिर गया। दोपहर करीब 12 बजे नदी में पानी का तेज बहाव था और यातायात उसके ऊपर से चल रहा था। उसी दौरान पानी के तेज बहाव को कुछ लोग पुल पर खड़े होकर देख रहे थे।
उसी समय पुल का एक बॉक्स कॉलम गिरने लगा, इसे देखकर लोगों में अफरा-तफरी मच गई। इसके बाद उसके साथ लगा दूसरा बॉक्स का पुल का गिर गया। उस समय पुल के ऊपर से दो लोडर और एक कार जा रही थी, जो पुल के साथ नीचे नदी में जा गिरी। इस घटना में दो लोगों को गंभीर चोटें आई। जिसे अस्पताल ले जाया गया है।
घटना के करीब 45 मिनट बाद देहरादून डीएम डॉ राजेश कुमार मौके पर पहुंचे और जैसे ही वह टूटे हुए फुल के हिस्से को देख रहे थे उसी दौरान पुल का एक बॉक्स कॉलम और गिर गया। करीब 4 से 5 बॉक्स कॉलम पानी के भाव में टूट कर गिर चुके थे बताया जा रहा है कि यह पुल वर्ष 1980 के आसपास बनाया गया था।

नेपाली फार्म सांग नदी का बढ़ा जलस्तर, टापू में फंसे ब्यक्तियों को निकाला
करीब साढ़े आठ बजे लगभग टीम को सूचना मिली कि नेपाली फार्म में सांग नदी में कुछ ब्यक्तियों की टापू में फंसे हैं। डीप डाइविंग टीम शीघ्र ही घटना स्थल के लिए रवाना हुई। उस जगह की रेकी की गई। इसके बाद राफ्ट को सांग नदी में उतारकर टापू तक पहुंचे। फंसे ब्यक्तियों एक महिला व 3 पुरुष को लाइफ जैकेट पहनाई गयी व सभी को सुरक्षित स्थान में लाया गया।
टीम में एसआई कवीन्द्र सजवाण, किशोर कुमार, संदीप सिंह, अनूप सिंह, रविन्द्र सिंह, दीपक जोशी, अमित कुमार, दबास आदि मौजूद रहे।

डीएम देहरादून पहुंचे चंद्रभागा नदी किनारे, अवैध बस्ती को हटाने को कहा

जिलाधिकारी देहरादून डा. आर राजेश कुमार आज चंद्रभागा नदी किनारे पहुंचे। यहां बीते रोज गंगा का जलस्तर और चंद्रभागा नदी के उफान में होने के चलते अलर्ट जारी किया गया था। साथ ही तट पर लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया था। जिलाधिकारी ने यहां अवैध रूप से बसे परिवारों को साफ तौर पर कहा कि आप सभी को यहां से जाना होगा। आपके पुनर्वास के लिए भी योजना पर काम शुरू किया जाएगा।

जिलाधिकारी देहरादून डा. आर राजेश कुमार को निरीक्षण के दौरान उप जिलाधिकारी डा. अपूर्वा सिंह ने बताया कि प्रशासन की ओर से यहां 90 परिवारों को चिन्हित किया गया है। हर वर्ष मानसून में इन पर खतरा मंडराता है। प्रशासन की मुनादी के बावजूद यह लोग यहां से जाने को तैयार नहीं होते हैं। उप जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि नदी किनारे के सभी क्षेत्र शासन के आदेशानुसार रिहायशी क्षेत्र नहीं है। उन्होंने जिलाधिकारी को बताया कि बाढ़ के खतरे को देखते हुए नगर निगम के यात्रा अड्डा स्थित रैन बसेरा और कबीर चौरा आश्रम में इनके रहने की व्यवस्था की गई है।

इस पर जिलाधिकारी ने कहा कि नगर निगम प्रशासन चंद्रभागा नदी किनारे बसे परिवारों का सत्यापन करें। जो लोग वर्षों से यहां रह रहे हैं उनके विस्थापन की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। उन्होंने बताया कि उनके लिए सरकारी भूमि का सर्वे करने के लिए तहसील प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं।
जिलाधिकारी ने कहा कि स्थानीय प्रशासन प्रतिदिन बाढ़ का अपडेट जिला प्रशासन को उपलब्ध कराएंगे।

इस मौके पर तहसीलदार डा. अमृता शर्मा, नायब तहसीलदार विजय पाल सिंह चौहान, सहायक नगर आयुक्त एलम दास, कर अधीक्षक निसात अंसारी, सहायक अभियंता सिंचाई अनुभव नौटियाल, अवर अभियंता एएस रावत आदि उपस्थित रहे।

एम्स ऋषिकेश में शुरू हुआ 11वां एटीसीएन प्रशिक्षण कार्यक्रम

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान ऋषिकेश में 13वां विश्वस्तरीय एटीएलएस एवं 11वां एटीसीएन प्रशिक्षण कार्यक्रम विधिवत शुरू हो गया। जिसमें एम्स के साथ ही अन्य मेडिकल संस्थानों के 16 चिकित्सक एवं 16 सीनियर नर्सिंग ऑफिसर व नर्सिंग ऑफिसर टर्सरी केयर सेंटर में भर्ती होने वाले दुर्घटना में घायल ट्रॉमा मरीजों के उपचार संबंधी प्रशिक्षण ले रहे हैं।

आज एडवांस सेंटर फॉर कंटिनिवस प्रोफेशनल डेवलपमेंट (एसीसीपीडी विभाग) में एम्स निदेशक प्रोफेसर रवि कांत की देखरेख में तीन दिवसीय एटीएलएस एवं एटीसीएन प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू हो गया है। निदेशक ने कहा कि दुनिया का कोई भी ट्रॉमा सिस्टम ट्रेंड ट्रॉमा चिकित्सकों एवं नर्सिंग ऑफिसर्स के बिना प्रभावी नहीं हो सकता। बताया कि पहाड़ी क्षेत्रों के लिए इस तरह का विश्वस्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम नितांत आवश्यक है, इसकी सबसे मुख्य वजह यह है कि पहाड़ी क्षेत्रों में विभिन्न तरह की दुर्घटनाओं के कारण ट्रॉमा के मामले सर्वाधिक होते हैं, लिहाजा प्रत्येक हैल्थ केयर वर्कर को टर्सरी केयर लेवल पर चिकित्सा कार्य करने के लिए यह प्रशिक्षण लेना जरुरी है, तभी वह दुर्घटना में घायल मरीजों की ठीक प्रकार से देखभाल कर सकते हैं।
उनका कहना है कि ट्रॉमा मैनेजमेंट एक टीमवर्क है, लिहाजा उसकी ट्रेनिंग भी विश्वस्तरीय मानकों के तहत कराई जानी जरुरी है। ट्रेनिंग प्रोग्राम डा. अजय कुमार व दीपिका कांडपाल के संयोजन में आयोजित किया जा रहा है।
ट्रॉमा सर्जरी विभागाध्यक्ष प्रो. कमर आजम की अगुवाई में आयोजित एटीएलएस प्रशिक्षण कार्यक्रम में बतौर प्रोग्राम डायरेक्टर डा. मधुर उनियाल व ट्रेनिंग फैकल्टी डा. फरहान उल हुदा, डा. अजय कुमार,डा. जितेंद्र चतुर्वेदी, डा. दिवाकर कोयल, डा. अंकिता काबि, दिल्ली एम्स ट्रामा सेंटर से डा. दिनेश बगराई ने प्रतिभागियों को प्रशिक्षण दिया, जबकि एटीसीएन कोर्स में महेश देवस्थले, डा. राजेश कुमार, चंदू राज बी., अरुण वर्गीस, जोमोन चाको ने प्रशिक्षणार्थियों को ट्रॉमा प्रबंधन का प्रशिक्षण दिया।

टिहरी विस्थापित प्रत्येक परिवार को मिलेगा 74.4 लाख का मुआवजा

प्रदेश के पर्यटन, सिंचाई, लोक निर्माण, धर्मस्व एवं संस्कृति मंत्री सतपाल महाराज के अथक प्रयासों से आखिरकार 20 वर्ष बाद टिहरी बांध परियोजना से प्रभावित 415 विस्थापित परिवारों को न्याय मिलना संभव हो पाया है।

टिहरी बांध परियोजना से प्रभावित 415 विस्थापित परिवारों के पुनर्वास संबंधी समस्याओं के निराकरण हेतु 22 जनवरी 2021 को प्रदेश के पर्यटन, सिंचाई, लोक निर्माण, धर्मस्व एवं संस्कृति मंत्री सतपाल महाराज ने टिहरी के जनप्रतिनियों और राज्य सरकार के अधिकारियों को साथ लेकर नई दिल्ली में केंद्रीय ऊर्जा मंत्री राजकुमार सिंह के साथ एक बैठक की थी। बैठक में सतपाल महाराज के साथ टिहरी सांसद माला राज्य लक्ष्मी शाह, विधायक धन सिंह नेगी, घनसाली विधायक शक्ति लाल शाह, प्रताप नगर विधायक विजय सिंह पवार सहित अनेक विभागीय अधिकारी मौजूद थे।

केंद्रीय ऊर्जा मंत्री राजकुमार सिंह के साथ हुई उस ऐतिहासिक बैठक में तय किया गया था कि टिहरी बांध परियोजना से प्रभावित 415 विस्थापित परिवारों के पुनर्वास संबंधी समस्याओं का समाधान न्यायालय की परिधि से बाहर किया जाएगा।

पर्यटन, सिंचाई, लोक निर्माण, धर्मस्व एवं संस्कृति मंत्री सतपाल महाराज की देखरेख में टिहरी बांध विस्थापित 415 परिवारों को न्याय दिलाने के लिए लगातार चल रहे प्रयासों के तहत जनवरी से मैराथन बैठकों का दौर जारी रहा। जनवरी से अब तक टीएचडीसी अधिकारियों, सचिव सिंचाई उत्तराखंड और जिलाधिकारी टिहरी के बीच हुई अनेक बैठकों का परिणाम यह रहा कि टीएचडीसी ने उत्तराखंड सरकार को एक अंडरटेकिंग दी है। जिसमें कहा गया है कि वह संपार्श्विक क्षति नीति 2013 के तहत गठित तकनीकी समिति की संरचना के लिए उत्तराखंड सरकार द्वारा संशोधित आदेश जारी होने के बाद माननीय उच्च न्यायालय उत्तराखंड में दायर अपनी रिट याचिका को वापस ले लेंगा।

साथ ही टिहरी बांध परियोजना प्रभावित 415 परिवारों के पुनर्वास को लेकर प्रदेश सरकार की ओर से जो मुआवजा राशि तय की गई है वह प्रभावित क्षेत्र के तत्समय बाजारी दरों, सोलेशशियम, एक्सग्रेशिया, ब्याज और विकास लागत को जोड़कर प्रति परिवार 74.4 लाख रूपये आंकी गई है। टीएचडीसी और उत्तराखंड सरकार दोनों की सहमति से तय हुआ है कि बांध प्रभावित 415 परिवारों के पुनर्वास हेतु 74.4 लाख का मुआवजा प्रति परिवार के अनुसार दिया जाएगा।

इस समझौते के तहत रौलाकोट गांव के पुनर्वास के बारे में भी तय हुआ है कि ग्राम रौलाकोट के विस्थापन हेतु पुनर्वास निदेशालय के पास लगभग 70 एकड़ भूमि रोशनाबाद, रायवाला, घमंडपुर, आदि गांव में उपलब्ध है जो कि पहले टिहरी बांध प्रभावित लोगों के पुनर्वास के लिए अधिग्रहित की गई थी। इसके अलावा लगभग 20 एकड़ भूमि विभिन्न स्थानों पर टीएचडीसी के स्वामित्व में है। क्योंकि उक्त भूमि को विकसित करने की आवश्यकता है इसलिए टीएचडीसी 10.5 करोड़ की राशि इसके लिए वहन करेगा।

कुल मिलाकर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज के अथक प्रयासों से 20 वर्षों के लम्बे इन्तजार के बाद अब कहीं जाकर टिहरी बांध परियोजना प्रभावित 415 परिवारों की पुनर्वास संबंधित समस्याओं को लेकर एक बड़ी सफलता मिलती दिखाई दे रही है।