भूकम्प एलर्ट एप बनाने वाला उत्तराखंड पहला राज्य

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सचिवालय में मोबाइल एप्लीकेशन ‘‘उत्तराखण्ड भूकंप अलर्ट’’ एप का शुभारम्भ किया। उत्तराखण्ड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, आपदा प्रबंधन विभाग एवं भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, रूड़की के सौजन्य से बनाये गये इस एप के माध्यम से भूकम्प से पूर्व चेतावनी मिल जायेगी।
उत्तराखण्ड यह एप बनाने वाला पहला राज्य है। इससे जन सुरक्षा में मदद मिलेगी। इस एप के माध्यम से भूकंप के दौरान लोगों की लोकेशन भी प्राप्त की जा सकती है। भूकंप अलर्ट के माध्यम से भूकंप से क्षतिग्रस्त संरचनाओं में फँसे होने पर सूचना दी जा सकती है। उत्तराखण्ड भूकंप अलर्ट एप को गूगल प्ले स्टोर से डाउनलोड कर सकते हैं।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखण्ड भूकंप की दृष्टि से संवेदनशील राज्य है। इस एप के माध्यम से लोगों को भूकंप पूर्व चेतावनी मिल सके, इसके लिए इस एप की लोगों को जानकारी दी जाय। विभिन्न माध्यमों से व्यापक स्तर पर इसका प्रचार प्रसार किया जाय। आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा इसकी लघु फिल्म बनाकर जन-जन तक पहुंचाया जाय। स्कूलों में भी बच्चों को लघु फिल्म के माध्यम से इस एप के बारे में जानकारी दी जाय।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन लोगों के पास एंड्राइड फोन नहीं है, उनको भी भूकंप से पूर्व चेतावनी मैसेज पहुंच जाय, इस एप के माध्यम से यह सुविधा भी प्रदान की जाय। भूकंप पूर्व चेतावनी में सायरन एवं वायस दोनों माध्यमों से अलर्ट की व्यवस्था की जाय। भूकंप पूर्व चेतावनी के लिए सायरन टोन अलग से हो। मुख्यमंत्री ने कहा कि भूकंप पूर्व चेतावनी के लिए यह एक अच्छी पहल है।
इस अवसर पर आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास मंत्री डॉ. धन सिंह रावत, मुख्य सचिव डॉ. एस.एस.संधु, अपर मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन, सचिव आपदा प्रबंधन एस.ए. मुरूगेशन, आई.आई.टी. रूड़की के प्रो. कमल एवं आपदा प्रबंधन विभाग के अधिकारी उपस्थित थे।

मुख्य सचिव ने सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के दिए निर्देश

‘‘सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए इनोवेटिव विकल्पों और हरसंभव प्रयासों को संजीदगी से अमल में लायें‘‘। मुख्य सचिव एस.एस.संधु ने सचिवालय सभागार में राज्य स्तरीय सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में संबंधित अधिकारियों को उपरोक्त दिशा-निर्देश दिए।
मुख्य सचिव ने कहा कि लोगों का जीवन बचाना हमारी सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए और इसके लिए विभिन्न विभागों को अपने विभागीय स्तर पर तथा सामूहिक समन्वय से जरूरी कदम उठाये जाने चाहिए। सड़क सुरक्षा से संबंधित कार्यों में किसी भी प्रकार की देरी न की जाए और सुधारीकरण के कार्यों की तीव्र प्रगति के लिए नियमित मॉनिटरिंग की जाए।

लाइसेंस जारी करते समय पूरी प्रक्रिया का ठीक ने अनुपालन करें
परिवहन विभाग को निर्देश दिए कि विभिन्न श्रेणी के लाइसेंस बनाते समय ट्रायल-ट्रेस्टिंग की वीडियो रिकॉर्डिंग रखें तथा ट्रायल का डेटा पोर्टल पर अपलोड करें ताकि कोई भी व्यक्ति किसी भी मीडिएटर(मध्यस्थ) के माध्यम से लाइसेंस न बनवा सके। उन्होंने परिवहन विभाग और यातायात पुलिस को निर्देश दिए कि मुख्य चैराहों और मुख्य सार्वजनिक रूट पर सी.सी.टी.वी कैमरे के साथ ही राडार और स्पीड इन्टरसेप्टर तकनीक का इस्तेमाल करें और इस तकनीक को चैपहिया और दो पहिया वाहनों में भी लगाएं। साथ ही इसका नियमित सुपरविजन करते हुए ओवरस्पीडिंग, रैश डाइविंग और सड़क सुरक्षा के प्रावधानों का उल्लंघन करने वालों पर सक्रियता से एक्शन लेते हुए सड़क सुरक्षा के जोखिम को न्यूनतम करें।
मुख्य सचिव ने लोक निर्माण विभाग और राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण को ब्लैक स्पॉट और वलनरेबल (दुर्घटना की दृष्टि से जोखिम वाले) क्षेत्रों को ए, बी व सी श्रेणी में वर्गीकृत करते हुए तद्नुसार जोखिम की अधिकता के अनुसार सुधारीकरण से संबंधित सभी कार्य संपन्न करने के निर्देश दिये। निर्देशित किया कि जहां तक संभव हो सके सड़क मार्गों पर साईकिल ट्रैक का भी निर्माण करें, विशेषकर औद्योगिक क्षेत्रों में जहां पर कामगारों (श्रमिकों) का आना-जाना रहता है, वहां पर साईकिल ट्रैक जरूर बनायें। विभिन्न रूट पर स्पीड ब्रेकर व रम्बल स्ट्रीप इस तरह से बनायें ताकि औसतन गति से वाहन चलाने वाले को अनावश्यक परेशानी न हो। साथ ही तीव्र गति से वाहन चलाने वाले का वाहन धीमा हो जाए। उन्होंने सड़क सुरक्षा का अच्छी ऐजेंसी से थर्ड पार्टी ऑडिट करवाने और माननीय न्यायालय तथा सड़क सुरक्षा समिति के समय-समय पर प्राप्त होने वाले सुझावों को अमल में लाने के निर्देश दिए।
मुख्य सचिव ने अवैध मीडियन्स को तत्काल बंद करने, मुख्य मार्ग से 90 डिग्री पर सीधे मिलने वाले संपर्क मार्ग अथवा रास्तों पर जरूरी सुरक्षा उपाय करने और पहाड़ी क्षेत्रों में आवश्यकतानुसार क्रैश बैरियर लगाने के निर्देश दिए। परिवहन विभाग को निर्देशित किया कि सुरक्षा मानकों का दूसरी बार उल्लंघन करने वाले वाहन चालक के डाइविंग लाईसेंस को छः माह के लिए तथा तीसरी बार उल्लंघन करने पर एक वर्ष के लिए लाईसेंस को निलंबित करें। कहा कि बिना हेलमेट वाहन चलाने वालो से हेलमेट का चार्ज लेते हुए नया हेलमेट दें, साथ ही मानक के अनुरूप जुर्माना की जितनी धनराशि है, उसका 50 प्रतिशत धनराशि भी वसुले।
मुख्य सचिव ने कहा कि दुर्घटना होने के पश्चात् गोल्डन अवर में लोगों का जीवन बचाने में स्वास्थ्य विभाग की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इसके लिए उन्होंने स्वास्थ्य विभाग और परिवहन विभाग को संयुक्त रूप से पर्वतीय क्षेत्रों में दुर्घटना में घायल लोगों के त्वरित इलाज हेतु व्यवहारिक समाधान तलाशने के निर्देश दिए। मुख्य सचिव ने वीडियो कन्फ्रेसिंग के माध्यम से सभी जिलाधिकारियों को निर्देशित किया कि सड़क दुर्घटनाओं से संबंधित पूर्व की जितनी भी मजिस्ट्रेट जांच अभी तक लंबित है, उसका दो माह के भीतर निस्तारण करें, साथ ही आगे से प्रत्येक मजिस्ट्रियल जांच को प्रत्येक हाल में तीन माह के भीतर निस्तारित करें। ऑटोमेटेड टेस्टिंग लेन, डाइविंग स्कूल और फिटनेस टेस्ट लेन बनवाने के लिए भूमि का तत्काल सर्वे किया जाए तथा इस संबंध में यदि निजी संस्थानों का भी सहयोग लिया जा सकता है तो उस पर भी विचार करें। उन्होंने अग्रिम निर्देश देते हुए कहा कि सभी जनपदों में ‘इन्स्टिट्यूट सोशल रेस्पोंसिबिल‘ इनिशिएटिव प्रारंभ करें जिसके अंतर्गत विभिन्न इंजीनियरिंग संस्थानों में अध्यनरत छात्रों, रिटायरमेंट इंजीनियरों अथवा समाज के सक्रिय और रचनात्मक नागरिकों को सड़क सुरक्षा के संबंध में बेहतरीन सुझाव और फीडबैक देने के लिए मंच प्रदान करें। इसके लिए उन्होंने प्रत्येक विकासखण्ड स्तर पर भी उपजिलाधिकारियों की अध्यक्षता में सड़क सुरक्षा समिति गठित करने के निर्देश दिये जिसमें उपरोक्त सभी लोगों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित हो।
इस दौरान बैठक में पुलिस महानिदेशक अशोक कुमार, सचिव अरविन्द सिंह ह्यांकी, रंजीत सिन्हा, आयुक्त गढ़वाल रविनाथ रमन, प्रभार सचिव विनोद कुमार सुमन, वी. षणमुगम, आयुक्त परिवहन दीपेन्द्र कुमार चैधरी सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।

मनमानी का केन्द्र बना उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय

उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय में हुईं भर्तियों की शासन ने जांच बैठा दी है। शासन ने कुलसचिव से बिंदुवार सभी भर्तियों पर रिपोर्ट तलब की है। अपर सचिव राजेंद्र सिंह की ओर से कुलसचिव को भेजे गए आदेश में पिछले वर्षों में हुईं भर्तियों में की गई अनियमितता की जांच रिपोर्ट मांगी है। उन्होंने विवि में पीआरडी के माध्यम से की जा रहीं भर्तियों और पिछले दो माह में पीआरडी से हुईं भर्तियों की रिपोर्ट भी मांगी है।

इसके अलावा नर्सिंग भर्ती, प्रोफेसर पदों पर सीधी भर्ती, विवि द्वारा अपने स्तर से शासन द्वारा नियुक्त कुलसचिव को हटाते हुए नए कुलसचिव की नियुक्ति, लेखा अधिकारी, सहायक लेखा अधिकारी के पद प्रमोशन के पद एवं वित्त विभाग के पद विज्ञापन जारी करने की स्थिति स्पष्ट करने को कहा गया है।

शासन ने योग अनुदेशकों के पदों पर जारी रोस्टर को बदलने, माइक्रोबायोलॉजिस्ट के पदों पर भर्ती में नियमों का अनुपालन न करने, बायोमेडिकल संकाय व संस्कृत में असिस्टेंट प्रोफेसर एवं पंचकर्म सहायक के पदों पर विज्ञप्ति प्रकाशित करने और फिर रद्द करने, विवि में पद न होते हुए भी संस्कृत शिक्षकों को प्रमोशन एवं एसीपी का भुगतान करने, बिना शासन की अनुमति बार-बार विवि द्वारा विभिन्न पदों पर भर्ती के लिए विज्ञापन निकालने और रोक लगाने, विभिन्न पदों पर भर्ती के लिए विवि द्वारा गठित समितियों के गठन की विस्तृत सूचना देने के निर्देश दिए गए हैं। विवि में पिछले दो माह में 60 से अधिक युवाओं पीआरडी जवानों को भर्ती कर दिया गया है, जिस पर सवाल उठ रहे हैं।

मनमानी का अड्डा बना आयुर्वेद विवि
उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय मनमानी का अड्डा बन गया है। शासन से जिस अधिकारी को कुलसचिव बनाकर भेजा जाता है, उसे विवि प्रशासन की ओर से खुद ही हटाकर नए कुलसचिव की नियुक्ति की जाती है। भर्तियों में न रोस्टर का कुछ अता-पता है और न ही शासन का कोई संज्ञान। आखिरकार अब जांच के निशाने पर अब कई अधिकारी आ गए हैं।

आयुर्वेद विवि में वर्ष 2017 से लगातार नियमों की अनदेखी की जा रही है। पूर्व कुलसचिव मृत्युंजय मिश्रा के कार्यकाल में हुई नियुक्तियों के बाद से भी यहां मनमानी का सिलसिला जारी है। शासन ने 2017 से अब तक की नियुक्तियों को सवालों के घेरे में ला खड़ा किया है। फिर चाहे प्रोफेसर की भर्ती हो या नर्सिंग स्टाफ की। हद तो तब है कि जो पद विवि में हैं ही नहीं, उन पदों पर प्रमोशन और एसीपी का भुगतान किया जा रहा है।
नियमानुसार भर्तियों के लिए शासन की अनुमति जरूरी होती है लेकिन विवि के अधिकारी किसी की अनुमति की जरूरत ही महसूस नहीं कर रहे हैं। हालात यह हैं कि खुद ही विज्ञप्ति जारी की जाती है और खुद ही उसे रद्द कर दिया जाता है। युवा भटक रहे हैं लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है।

पीआरडी से भर्तियों की बरसात
आयुर्वेद विवि में ताजा मामला पीआरडी के माध्यम से होने वाली भर्तियों का है। यहां पिछले दो माह में ही बिना शासन की अनुमति, बिना नियमों का पालन किए 60 से अधिक नौजवानों को पीआरडी के माध्यम से भर्ती कर दिया गया है। सवाल उठ रहे हैं कि विवि के अधिकारी किसी शह पर यह भर्तियां कर रहे हैं।

मनमानी का आलम यह है कि एक अधिकारी को बुलाया, कार्यमुक्त किया फिर रख लिया गया। इसी तरह आयुर्वेद विवि में आयुष विभाग से एक अधिकारी को पहले बुलाया गया, फिर कार्यमुक्त किया गया और फिर वहीं रख लिया गया। इस पूरे प्रकरण में शासन को संज्ञान में ही नहीं लिया गया है। ऐसे तमाम प्रकरण हैं, जिसमें मनमानी खुलकर सामने आ रही है। 

अपना स्तर खुद घटा रहे मीडिया संस्थान, भ्रामक खबरों से बचना चाहिए

उत्तराखंड में आज दिनभर से एक खबर को लेकर जमकर चर्चा हो रही है। दरअसल इस चर्चा का विषय मीडिया की घटती विश्वसनीयता है। यह इसलिए क्यूंकि आज सुबह से ही राज्य सरकार के दो विज्ञापन को लेकर आधारहीन खबरें प्रकाशित की जा रही हैं। हैरानी की बात यह है कि बिना तथ्यों की जानकारी के एक मनगढ़ कहानी बनाकर खबर के रूप में प्रसारित किया जा रहा है। दरअसल ताजा मामला मुख्यमंत्री वात्सल्य योजना के विज्ञापन से जुड़ा हुआ है। जिस पर कतिपय समाचार पोर्टल पर मुख्यमंत्री के तस्वीर के साथ विभागीय मंत्री की फोटो न लगाए जाने को लेकर भ्रामक स्थिति उत्पन्न की जा रही है।

एक नजर कोर्ट के आदेश पर

दरअसल 13 मई 2015 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा एक मामले की सुनवाई करते हुए यह निर्णय दिया गया था कि सरकारी विज्ञापनों में राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मुख्य न्यायाधीश की फोटो ही लगाई जा सकती है। सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद कर्नाटक सरकार और पश्चिम बंगाल सरकार समेत कई राज्यों की सरकार ने इस बार सुप्रीम कोर्ट में एक बार फिर से पुनर्विचार याचिका दायर की, जिस पर सुनवाई करते हुए ’18 मार्च 2016 को मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई व न्यायाधीश पिनाकी चंद्र घोष की पीठ ने यह आदेश संशोधित करते हुए निर्णय दिया कि सरकारी विज्ञापन में मुख्यमंत्री की फोटो लगाई जा सकेगी, इसके अलावा कोर्ट ने इसी आदेश में विभागों के कैबिनेट मंत्री और राज्य मंत्रियों को भी फोटो लगाने हेतु अनुमति प्रदान की है. इस आदेश के तीसरे बिंदु में स्पष्ट कहा गया है कि यदि विभागीय मंत्री की फोटो लगती है तो उसमें मुख्यमंत्री की तस्वीर नहीं लगाई जाएगी यानी कि राज्य सरकार के विज्ञापन में या तो मुख्यमंत्री या फिर विभागीय मंत्री की तस्वीर ही लगाई जाएगी।

मनगढ़त खबरें लिखकर टीआरपी बटोरने की कोशिश
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद ज्यादातर राज्य सरकारों द्वारा सरकारी विज्ञापनों में मुख्यमंत्री की ही तस्वीर लगाई जाती हैं, यह बात अलग है कि अगर विभाग अलग से विज्ञापन प्रकाशित कर रहा है तो उसमें विभागीय मंत्री की तस्वीर लगाई जा सकती है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश की जानकारी के बिना कतिपय न्यूज पोर्टल इस तरह के मनगढ़त खबरें लिखकर टीआरपी बटोरने की कोशिश कर रहे हैं। लिहाजा जनता के बीच भी भ्रामक जानकारी दी जा रही है।

नई रोड धंसी, विस अध्यक्ष का चढ़ा पारा, मौके पर बुलाकर लगाई लताड़

एम्स रोड, ऋषिकेश में सामान से भरे ट्रक के रोड में धँस जाने की सूचना मिलते ही स्पीकर प्रेमचंद अग्रवाल मौके पर पहुंचे। उन्होंने लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता विपुल सैनी को दूरभाष पर एम्स रोड में डामरीकरण में हुई अनियमिता के लिए खूब फटकार लगायी और कहा कि विभाग की इस घोर लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने विभाग के अधिशासी अभियंता को निर्देशित करते हुए कहा है कि शीघ्र एम्स रोड का निरीक्षण कर खामियों का पता लगाया जाए और जानकारी दी जाए ताकि दोषियों पर दंडात्मक कार्रवाई की जा सके।
निरीक्षण के दौरान लोक निर्माण विभाग के सहायक अभियंता उपेंद्र गोयल को मौके पर बुलाया गया और स्पीकर ने ट्रक फंसने की वजह पूछी। उपेंद्र गोयल ने कहा है कि सड़क के नीचे पानी की पाइपलाइन की वजह से यह घटना हुई है जिस पर स्पीकर ने कहा कि मोटर मार्ग निर्माण से पूर्व तकनीकी जांच कराई जानी चाहिए थी ताकि इस प्रकार की घटना ना होती। इस दौरान स्पीकर ने सड़क मार्ग निरीक्षण करते हुए दोनों तरफ पानी से भरे हुए गड्ढों पर भी नाराजगी व्यक्त की।
ज्ञात हो कि नवंबर माह मे एम्स रोड के डामरीकरण का कार्य पूर्ण हुआ था। उस दौरान निर्माणाधीन कार्य का विधानसभा अध्यक्ष द्वारा बीच-बीच में निरीक्षण भी किया गया और साथ ही विभाग के अधिकारियों को कार्य में गुणवत्ता के सख्त निर्देश दिए थे। मौके पर लोक निर्माण विभाग के सहायक अभियंता उपेंद्र गोयल सामाजिक कार्यकर्ता सुरेंद्र सिंह नेगी आदि उपस्थित थे।

कुत्तों के आतंक से इंदिरानगरवासी परेशान, पार्षद ने नगरआयुक्त को लिखा पत्र


नगर निगम ऋषिकेश के वार्ड इंदिरा नगर व नेहरू ग्राम में इन दिनों मुख्य मार्ग पर कुत्तों का आतंक पसरा पड़ा है। मीट बाजार के आसपास तो यह आतंक और भी भयावह तब हो जाता है, जब यहां कोई पैदल राहगीर व दुपहिया वाहन से गुजरता है। लोग अब इस मार्ग से जाने को डर खाए बैैठे हैं।

पार्षद राजेंद्र बिष्ट ने नगर आयुक्त नरेंद्र सिंह क्वींरियाल को ज्ञापन सौंपा। अवगत कराया कि आवारा कुत्तों के आतंक से राहगीरों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कुत्ते यहां राहगीरों के पीछे दौड़ते हैं और उन्हें काटते भी हैं। साथ ही कुत्तों के द्वारा पीछा करने से और काटने से कई राहगीर चोटिल भी हो चुके हैं।

वहंी, नगर आयुक्त ने मामले का संज्ञान लेते हुए इस पर जल्द से जल्द कार्यवाही कर राहगीरों को आवारा कुत्तों से बचाने का आश्वासन दिया।

स्पीकर से मिले प्राथमिक शिक्षक, पुरानी पेंशन योजना लाभ देने की मांग की


प्रदेश के प्राथमिक विद्यालयों में वर्ष 2004 की विज्ञप्ति द्वारा नियोजित शिक्षकों ने पुरानी पेंशन की मांग करते हुए स्पीकर प्रेमचंद्र अग्रवाल को ज्ञापन सौंपा। शिक्षकों ने नई पेंशन योजना को कर्मचारियों के साथ धोखा बताते हुए विज्ञप्ति की शर्तों के अनुसार पुरानी पेंशन योजना के लाभ की मांग की है।

वर्ष 2004 में उत्तराखंड सरकार द्वारा राज्य में शिक्षकों के रिक्त पदों को भरने के लिए बीएड प्रशिक्षितों को विशिष्ट बीटीसी के तहत प्राथमिक शिक्षकों के रूप में भर्ती के लिए समाचार पत्रों के माध्यम से विज्ञप्ति जारी की थी। विज्ञप्ति के अनुसार इन शिक्षकों को पुरानी पेंशन योजना का लाभ मिलना था किंतु भर्ती प्रक्रिया में विलंब के कारण शिक्षकों की नियुक्ति के दौरान नई पेंशन योजना से आच्छादित कर दिया गया।

उल्लेखनीय है कि नई पेंशन योजना को लेकर देशभर के कर्मचारियों में नाराजगी है और कर्मचारी इसे उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ करार देते आ रहे हैं। वर्ष 2004 की विज्ञप्ति मैं पुरानी पेंशन योजना से आच्छादित किए जाने की शर्त होने के बावजूद शिक्षकों को पेंशन का लाभ ना मिलने से शिक्षक अपनी नियुक्ति के दौरान से ही नई पेंशन योजना का विरोध करते हुए उन्हें पुरानी पेंशन योजना का लाभ देने की मांग कर रहे हैं। इसी क्रम में आज प्राथमिक शिक्षकों के प्रतिनिधिमंडल ने विधानसभा अध्यक्ष श्री प्रेम चंद्र अग्रवाल से ऋषिकेश में मुलाकात कर उन्हें ज्ञापन सौंपा है। उक्त आशय की जानकारी देते हुए प्रतिनिधिमंडल में शामिल शिक्षिका कंचन उनियाल ने बताया है कि एक ही विज्ञप्ति के द्वारा नियुक्त कुमाऊं मंडल के कुछ जनपदों में शिक्षकों को पुरानी पेंशन योजना से लाभान्वित किया जा रहा है जबकि राज्य भर में करीब 2300 शिक्षकों को इस लाभ से वंचित कर उन पर उनकी इच्छा के विरुद्ध नई पेंशन योजना थोप दी गई है। उन्होंने कहा कि शिक्षक अपने भविष्य को लेकर चिंता एवं तनाव में हैं।

स्पीकर प्रेमचंद अग्रवाल ने शिक्षकों को नियमानुसार कार्यवाही का आश्वासन दिया है। ज्ञापन देने वाले शिक्षकों में मंजू रावत, प्रमोद रावत, संजय सिंह, दीवान सिंह आदि उपस्थित रहे।

परिवहन व्यवसायियों ने पेट्रो पदार्थों में वृद्धि करने पर किया प्रदर्शन


ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस के आह्वान पर परिवहन संस्थाओं के सदस्यों ने काली बंधी बांध ऋषिकेश तहसील में प्रदर्शन किया।

उत्तराखंड परिवहन महासंघ के उपाध्यक्ष बलवीर सिंह रौतेला ने कहा कि केंद्र सरकार के पेट्रोल एवं डीजल के दामों में लगातार भारी वृद्धि के कारण वाहन मालिकों को वाहन चलाना मुश्किल हो गया है। डीजल मूल्य वृद्धि के कारण महंगाई भी अपने चरम पर है। केंद्र सरकार को पेट्रोल एवं डीजल को जीएसटी के दायरे में लाकर डीजल का अवमूल्यन करना चाहिए।

ऑटो विक्रम परिवहन महासंघ के अध्यक्ष महंत विनय सारस्वत ने कहा कि केंद्र सरकार और राज्य सरकार का कोरोनाकाल में डीजल-पेट्रोल की कीमतों में वृद्धि करना व ऑल इंडिया परमिट पॉलिसी एवं स्क्रैप पॉलिसी लाना निंदनीय है। उन्होंने डीजल की कीमतों को कम करने, परिवहन व्यवसायियों को राहत देने आदि मांगों को लेकर एसडीएम के माध्यम से पीएम को ज्ञापन भेजा।
ज्ञापन देने वालों में भगवान सिंह राणा जिला अध्यक्ष जीप कमांडर एसोसिएशन, बलवीर सिंह नेगी अध्यक्ष जीप कमांडर एसोसिएशन, विजय पाल सिंह रावत अध्यक्ष टैक्सी यूनियन, विनोद भट्ट संचालक गढ़वाल मंडल, योगेश उनियाल संचालक यातायात पर्यटन, मेघ सिंह चैहान संचालक टिहरी गढ़वाल मोटर, हेमंत ढंग अध्यक्ष डीलक्स टैक्सी मेक्सी, बालम सिंह मेहर संचालक रूपकुंड पर्यटन विकास, जयप्रकाश नारायण अध्यक्ष इनोवा टैक्सी, रामचंद्र व्यास सचिव जीप कमांडर यूनियन, ललित सक्सेना, कुलदीप धस्माना, बृजेश उनियाल, देवेश डोभाल, मुकेश नेगी आदि उपस्थित रहे।

छह दिन के साथ रात्रि तक बाजार खोलने पर विचार करे सरकारः ललित मोहन मिश्र

अन्य राज्यों की तर्ज पर उत्तराखंड में भी बाजार खोलने की मांग नगर उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल ऋषिकेश ने प्रदेश सरकार से की है।

प्रतिनिधिमंडल के अध्यक्ष ललित मोहन मिश्र ने प्रेस रिलीज जारी करते हुए कहा कि सप्ताहभर में छह दिन बाजार खोलने की अनुमति सरकार की ओर से दी जाएं। इसमें समय सीमा भी बढ़ाकर सुबह आठ से रात्रि आठ की जाए। उन्होंने कहा कि राज्य में कोविड की स्थिति अब पूर्व की तुलना में सुधर चुकी है, स्थिति पूरी तरह से नियंत्रित होने की वजह से व्यापारियों को राहत दी जानी चाहिए।

कहा कि व्यापारी वर्तमान दौर में आर्थिक समस्या से जूझ रहा है, व्यापारियों के हितों को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार बाजार खोलने की अनुमति प्रदान करें।

परिवहन महासंघ के आह्वान पर एकत्र हुए चालक, परिचालक व मालिक, किया बुद्धि शुऋि यज्ञ

सरकार द्वारा परिवहन व्यवसाईयों की अनदेखी करने और उनकी समस्याओं को नजरअंदाज किए जाने पर उत्तराखंड परिवहन महासंघ की ओर से बुद्धि शुद्धि यज्ञ किया गया। महासंघ के आह्वान पर समस्त परिवहन संस्थाओं के संचालकों, प्रतिनिधियों, वाहन स्वामियों एवं चालक, परिचालक एकत्र हुए और सरकार की शुद्ध बुद्धि के लिए हवन में आहूति दी। इस अभियान में उन्हें उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी मंच का भी साथ मिला।

महासंघ के अध्यक्ष सुधीर राय ने कहा कि सरकार परिवहन एवं पर्यटन व्यवसायियों के हित में कोई भी निर्णय नहीं लिया गया। सरकार से परिवहन व्यवसायियों को उबारने के लिए गुहार लगातार लगाई जा रही है लेकिन सरकार पूरी तरह मौन है। सरकार को चाहिए कि परिवहन व्यवसाई को बचाने के लिए शीघ्र अति शीघ्र कोई सकारात्मक कदम उठाए। टीजीएमओ के उपाध्यक्ष यशपाल राणा ने कहा कि सरकार हमारी मांगों को अनसुना कर रही है सरकार से लगातार मांग कर रहे हैं कि वाहन स्वामियों का 2 वर्ष का टैक्स और वाहनों की आयु सीमा में 2 वर्ष की वृद्धि यथाशीघ्र की जाए।

टेंपो विक्रम महासंघ के अध्यक्ष महंत विनय सारस्वत ने कहा कि सरकार संपूर्ण उत्तराखंड के लिए एवं संपूर्ण देश के लिए पर्यटन एवं परिवहन व्यवसायियों के हितों के लिए चार धाम यात्रा का संचालन शीघ्र अति शीघ्र शुरू करें, ताकि वाहन स्वामी अपनी रोजी-रोटी की व्यवस्था कर सकें। यूनियन के अध्यक्ष विजयपाल सिंह रावत ने कहा कि सरकार द्वारा वाहन स्वामी की उपेक्षा लगातार की जा रही है लेकिन यदि शीघ्र अति शीघ्र सरकार निर्णय नहीं लेती है, तो 1 लंबी लड़ाई सड़कों पर लड़ी जाएगी। साथ ही मौके पर ऋषिकेश विधायक द्वारा टोल प्लाजा के संबंध में जो मुकदमे दायर किए गए हैं उसे वापस लेने की भी मांग की गई। इस अवसर पर उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी मंच ने उत्तराखंड परिवहन महासंघ को अपना पूर्ण समर्थन दिया। मंच के सलाहकार विक्रम भंडारी ने कहा कि परिवहन महासंघ लगातार परिवहन विषयों के हित के लिए संघर्ष कर रहा है।

मौके पर भगवान सिंह राणा जिलाध्यक्ष जीप कमांडर यूनियन, बलवीर सिंह नेगी अध्यक्ष जीप कमांडर यूनियन, विनोद भट्ट संचालक गढ़वाल मंडल, नवीन चंद रमोला, बलवीर सिंह रौतेला, मेघ सिंह चैहान, आशुतोष शर्मा, ललित सक्सेना, चंदन सिंह पवार, दाताराम रतूड़ी, प्यार सिंह गुनसोला, मनोज आर्य, योगेश उनियाल, नवीन तिवारी, रामसिंह फरस्वान, करण सिंह पवार, मान सिंह पवार, रुकुमसिंह पोखरियाल, मदन कोठारी, बृजेश उनियाल, इंद्रेश बर्थवाल, नवीन तिवारी, धनेश कंडियाल, विक्रम भंडारी, राकेश सेमवाल, आशुतोष तिवारी, सुरेंद्र सेमवाल आदि मौजूद रहे।