सीएम निर्देश पर प्रदेशभर में मिलावटखोरों के खिलाफ अभियान तेज, पकड़े गये नकली उत्पाद

त्योहारी सीजन को देखते हुए प्रदेशभर में मिलावटखोरों के खिलाफ खाद्य संरक्षा एंव औषधि प्रशासन विभाग यानि एफडीए का सघन अभियान जारी है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने मिलावट करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के आदेश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा है कि त्योहारी मौसम में उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार्य नहीं होगा। इस अवसर पर उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि बाजार में बिक रहे मावा, पनीर, घी, दूध और मिठाइयों की गुणवत्ता पर सख्त निगरानी रखी जाए ताकि मिलावटखोरी पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सके।

सभी जनपदों में सघन छापेमारी अभियान जारी
स्वास्थ्य सचिव एवं आयुक्त, खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग, डॉ. आर. राजेश कुमार ने त्योहारी सीजन में अपर आयुक्त (खाद्य सुरक्षा) ताजबर सिंह जग्गी को निर्देशित किया है कि सभी जनपदों में निरंतर निरीक्षण और छापेमारी अभियान चलाया जाए। राज्य के सीमावर्ती जिलों में भी विशेष सतर्कता बरती जा रही है ताकि बाहरी राज्यों से नकली और बिना मानक खाद्य सामग्री की आपूर्ति पर रोक लगाई जा सके। विभागीय टीमें मोबाइल वैन के माध्यम से तेजी से सैंपलिंग कार्य कर रही हैं। डॉ. राजेश कुमार ने कहा कि प्रयोगशालाओं को निर्देश दिए गए हैं कि सैंपलों की जांच शीघ्रता से की जाए, जिससे दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई तुरंत सुनिश्चित हो सके।

त्योहारी सीजन में जांच की रफ्तार तेज
आयुक्त डॉ आर राजेश कुमार ने बताया कि मोबाइल फूड टेस्टिंग लैब्स लगातार बाजारों में जाकर मावा, खोया, पनीर, मिठाई और तेल जैसे उत्पादों की मौके पर जांच कर रही हैं। विभागीय टीमें प्रदेश के हर जिले, कस्बे और प्रमुख बाजारों में सैंपलिंग कर रही हैं ताकि हर उपभोक्ता तक सुरक्षित, शुद्ध और गुणवत्ता युक्त खाद्य पदार्थ पहुंच सकें। सरकार का स्पष्ट संदेश है “मिलावटखोरी के खिलाफ कोई रियायत नहीं, उपभोक्ता की सेहत सर्वाेपरि।”

अपर आयुक्त ताजबर जग्गी कर रहे हैं अभियान का नेतृत्व
अपर आयुक्त ताजबर सिंह जग्गी स्वयं विभिन्न जिलों में चल रहे छापेमारी अभियानों का नेतृत्व कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि देहरादून, हरिद्वार, उधमसिंह नगर और नैनीताल जिलों के साथ चारधाम यात्रा मार्गों व पर्यटन स्थलों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। इन क्षेत्रों में अतिरिक्त टीमें तैनात की गई हैं, जो मावा, पनीर, घी और मिठाइयों के सैंपल एकत्र कर प्रयोगशालाओं में जांच हेतु भेज रही हैं। जांच में दोषी पाए जाने वाले प्रतिष्ठानों के विरुद्ध तत्काल सीलिंग, लाइसेंस निरस्तीकरण और जुर्माने की कार्रवाई की जा रही है।

भगवानपुर में नकली डेयरी उत्पादों की बड़ी खेप पकड़ी गई
खाद्य सुरक्षा विभाग एवं पुलिस की संयुक्त टीम ने आज सुबह लगभग 5 बजे भगवानपुर के बालेकी युसुफपुर गांव में एक वाहन को रोककर जांच की। वाहन में बिना गुणवत्ता प्रमाणीकरण और स्वास्थ्य मानकों के पनीर सप्लाई की जा रही थी। जांच में यह भी पाया गया कि उत्पादों पर किसी प्रकार का एफएसएसएआई मानक अंकन या लेबलिंग नहीं थी, जो उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा है। टीम ने मौके पर ही उत्पादों को जब्त कर वाहन चालक और सप्लायर के खिलाफ खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत मामला दर्ज किया। अपर आयुक्त ताजबर सिंह जग्गी ने बताया कि भगवानपुर क्षेत्र में नकली डेयरी उत्पादों की आपूर्ति करने वाले गिरोहों पर विभाग की विशेष नजर है। आने वाले दिनों में लगातार कार्रवाई की जाएगी।

ऋषिकेश में भी मिली नकली घी और मिल्क पाउडर की खेप
इसी क्रम में ऋषिकेश में भी खाद्य सुरक्षा विभाग ने बड़ी कार्रवाई की। एक वाहन को रोककर जांच की गई, जिसमें 5 क्विंटल क्रीम, 35 किलोग्राम घी और 50 किलोग्राम स्किम्ड मिल्क पाउडर सप्लाई करते हुए पाया गया। इन सभी उत्पादों के पास गुणवत्ता प्रमाण पत्र या अनुमोदन दस्तावेज नहीं थे। टीम ने मौके पर उत्पाद जब्त किए और नमूने जांच हेतु भेज दिए हैं। प्रारंभिक जांच में संभावना है कि ये उत्पाद अन्य राज्यों से अवैध रूप से लाए गए नकली उत्पाद हैं। विभाग ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी और दोषियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कर कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।

उपभोक्ता हित में जीरो टॉलरेंस नीति-सीएम धामी
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि सरकार की प्राथमिकता जनस्वास्थ्य और उपभोक्ता सुरक्षा है। उन्होंने कहा कि राज्य में मिलावटखोरी के लिए कोई स्थान नहीं है। त्योहारी सीजन में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता पर समझौता करने वालों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति लागू की जाएगी। मुख्यमंत्री ने जनता से भी अपील की है कि वे गुणवत्ता वाले उत्पादों का उपयोग करें, असत्यापित उत्पाद खरीदने से बचें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी विभाग को दें।

स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत की अपील
स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि स्वच्छ और सुरक्षित भोजन न केवल व्यक्ति के स्वास्थ्य बल्कि समाज के समग्र विकास की नींव है। सरकार इस दिशा में पूरी गंभीरता से काम कर रही है। उन्होंने कहा कि मिलावटखोरी रोकने के लिए विभाग को हर संभव संसाधन उपलब्ध कराए गए हैं। साथ ही उन्होंने अधिकारियों से कहा कि वे “त्योहारी सीजन में चौकन्ने रहें और किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।”

जनजागरूकता अभियान भी जारी
अपर आयुक्त ने बताया कि खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग राज्यभर में जन जागरूकता अभियान भी चला रहा है, जिसमें स्कूली बच्चों, व्यापारियों और उपभोक्ताओं को सुरक्षित खाद्य पहचानने के तरीके बताए जा रहे हैं। इस अभियान के तहत विभाग द्वारा सुरक्षित भोजन-स्वस्थ जीवन थीम पर पोस्टर, सोशल मीडिया कैंपेन और स्थानीय कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। अपर आयुक्त एफडीए ताजबर सिंह जग्गी ने उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे खाद्य पदार्थ खरीदते समय पैकेजिंग, लेबलिंग और निर्माण तिथि की जांच अवश्य करें। उन्होंने कहा है कि हमारे उपभोक्ता हमारे लिए सर्वाेपरि हैं। किसी भी मिलावटखोर को बख्शा नहीं जाएगा। विभाग ने यह भी कहा कि उपभोक्ता किसी संदिग्ध खाद्य उत्पाद या विक्रेता की सूचना खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग की हेल्पलाइन या स्थानीय कार्यालय में तुरंत दें।

राइजिंग टिहरी का सीएम धामी ने किया शुभारंभ, अब गांवों में होगी जेईई-नीट की तैयारी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ऋषिकेश में आयोजित ’’सरस आजीविका मेले’’ में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के सी.एल.एफ. हेतु 1.20 करोड़ रुपये की 12 आर्थिक गतिविधियों का लोकार्पण किया, इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने 10 अन्य सी.एल.एफ. के लिए 1 करोड़ रुपये की प्रस्तावित आर्थिक गतिविधियों का शिलान्यास भी किया। उन्होंने आज Rising Tehri – Physics Wala Online Coaching Class का भी लोकार्पण किया गया है। इस कोचिंग क्लास में अब युवा जेईई और नीट आदि की प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी अपने गाँव-घर में रहते हुए भी कर सकेंगे।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मेले में ग्राम्य विकास विभाग और जिला प्रशासन द्वारा ’ग्रामोत्थान परियोजना’ के अंतर्गत की गई पहल की सराहना की।

मेले में बड़ी संख्या में उपस्थित स्वयं सहायता समूह के लोगों एवं ग्रामीण उद्यमियों को सम्बोधित करते हुए मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि यह मेला हमारे ग्रामीण क्षेत्रों की समृद्ध सांस्कृतिक परम्परा, कौशल और उद्यमिता को प्रदर्शित करने का एक अनूठा प्रयास है। आजीविका मेलों के माध्यम से, जहाँ एक ओर स्थानीय उत्पादों को प्रदर्शित करने का एक उत्कृष्ट मंच मिलता है, वहीं ये मेले आदरणीय प्रधानमंत्री जी के ’’आत्मनिर्भर भारत’’ और ‘’वोकल फॉर लोकल’’ के मंत्र को भी साकार करने में सहायक सिद्ध होते हैं। ऐसे मेलों के माध्यम से हम ग्रामीण कारीगरों, महिला स्वयं सहायता समूहों, हस्तशिल्पियों, ग्रामीण उद्यमियों के साथ साथ कृषि उत्पादों और ग्रामीण कौशल को भी राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों से जोड़ने का प्रयास कर रहे हैं। इस मेले में स्वयं सहायता समूहों द्वारा लगाए गए स्टॉल ’’स्वदेशी अपनाओ’’ के उस संदेश को आगे बढ़ा रहे हैं, जिसमें हमें अपने गाँव, अपने प्रदेश और अपने देश में बने उत्पादों को प्राथमिकता देने का संकल्प लेना है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जब हम स्वदेशी उत्पाद खरीदते हैं तो वो सिर्फ एक सामान की खरीद नहीं होती, बल्कि वो हमारे ग्रामीण कारीगरों, मातृशक्ति और उद्यमियों के सपनों में निवेश होता है। इसलिए स्वदेशी अपनाना न केवल हमारी संस्कृति और परंपरा को जीवित रखता है, बल्कि यह हमारे किसानों, हस्तशिल्पियों और स्थानीय उद्यमियों की आजीविका को भी सुरक्षित करता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री ने कहा है कि आत्मनिर्भर भारत की नींव स्वदेशी पर टिकी है। यह मेला उसी दिशा में एक सशक्त कदम है, जो हमारे स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने का माध्यम बनेगा। प्रधानमंत्री जी के इस आव्हान को हमारी मातृशक्ति ने सबसे पहले आत्मसात किया और आज हमारे स्वयं सहायता समूहों की दीदियाँ अपने श्रम और कौशल से स्वदेशी उत्पादों को नए आयाम दे रही हैं। आप सभी से अपील करता हूँ कि इस मेले में लगे स्टॉल से स्वदेशी उत्पादों को खरीद कर ’’स्वदेशी अपनाओ’’ के अभियान को और मजबूती प्रदान करने के साथ महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाएं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जब एक महिला आर्थिक रूप से सशक्त होती है तो वो न केवल अपने परिवार बल्कि पूरे समाज को सशक्त बनाने का कार्य करती है। इसी को देखते हुए हमने ’‘लखपति दीदी योजना’’, ‘’मुख्यमंत्री सशक्त बहना उत्सव योजना’’ और ‘’मुख्यमंत्री महिला स्वयं सहायता समूह सशक्तिकरण योजना’’ के माध्यम से महिलाओं के सशक्तिकरण पर विशेष फोकस किया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि लखपति दीदी योजना के तहत अब तक हमारे राज्य की 1.65 लाख रुपए से अधिक महिलाओं ने लखपति बनने का गौरव प्राप्त किया है।साथ ही, ’’मुख्यमंत्री सशक्त बहना उत्सव योजना’’ के अर्तंगत महिलाओं द्वारा लगभग 2000 स्टाल लगाकर लगभग 5.5 करोड़ रुपये के विपणन ने उद्यमशीलता की एक नई मिसाल कायम की है। इतना ही नहीं, हमारी सरकार द्वारा लॉन्च किए गए ’‘हाउस ऑफ हिमालयाज’’ ब्रांड के माध्यम से भी हमारी बहनों द्वारा बनाए जा रहे विभिन्न स्थानीय उत्पाद अब विश्व के कोने-कोने तक पहुंच रहे हैं। राज्य में ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत 68 हजार से अधिक स्वयं सहायता समूहों में 5 लाख से अधिक सदस्य जुड़े हैं, साथ ही, साढ़े सात हजार से अधिक ग्राम संगठन और 534 क्लस्टर स्तर के संगठन भी बनाए गए हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार महिला किसानों को भी सशक्त बनाने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। हमने फार्म लाइवलीहुड और महिला किसान सशक्तिकरण योजना के तहत राज्य की लगभग 3 लाख से अधिक महिला किसानों की क्षमता एवं कौशल का विकास करने का काम किया है। इसके अलावा हमने 2.5 लाख एग्रीन्यूट्री गार्डन और किचन गार्डन की स्थापना की है और लगभग 500 फार्म मशीनरी बैंक भी उपलब्ध कराए हैं। इतना ही नहीं हमारी सरकार राज्य की 5 हजार से अधिक महिला किसानों को आर्गेनिक खेती से जोड़ने का कार्य भी कर रही है। इन सभी प्रयासों के माध्यम से आज हमारे प्रदेश की महिलाओं की आर्थिक स्थिति में सुधार आया है।आज मातृशक्ति आत्मनिर्भरता की नई कहानी लिख रही हैं, जो इस सरस मेले में भी स्पष्ट रूप से परिलक्षित हो रहा है।

कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी, सुबोध उनियाल, स्वयं सहायता समूह के सदस्य, ग्रामीण उद्यमी तथा स्थानीय लोग उपस्थित रहे।

भरणपोषण एक्ट में दायर किया था बुजुर्ग दंपति ने डीएम न्यायालय में केस, बेदखल न करने का डीएम ने किया आग्रह

देहरादून के जिलाधिकारी सविन बंसल के सम्मुख एक बुजुर्ग दम्पति ने अपने पुत्र एवं पुत्र वधु को बेदखली करने की फरियाद लगाई कि उनको अपने घर से बेदखल करने का डीएम से अनुरोध किया।
जिलाधिकारी सविन बंसल ने 2 सुनवाई में ही कैस समझते हुए परिजनों के आपसी विवाद जो परिवार के विखण्डन का कारण बन रहा था को अपनी सूजबूझ से बुजुर्ग दंपत्ति को समझाते हुए अपने तीन नौनिहालों वाले बेटे बहु को बेदखल न करने का आग्रह किया। दोनों पक्षों को समझाया जिससे परिवार को टूटने से बचाने का प्रयास किया है। जहां जिलाधिकारी ने परिजनों को एक-दूसरे के कर्तव्य एवं जिम्मेदारियों का स्मरण कराया वहीं परिजनों को आपस में साथ रहने का अनुरोध किया। जिलाधिकारी ने परिजनों को साथ-साथ रहने का अनुरोध किया था निर्धन बेटा-बहु को बुजुर्गों को साथ रखने तथा बुजुर्ग दम्पति को इस अवस्था में पुत्र एवं उसके परिवार का साथ नही छोड़ने के प्रेरित किया। बजुर्ग दम्पति ने बेटे-बहुुुुु से नाराज होकर न्यायालय जिला मजिस्टेªट कोर्ट में भरणपोषण अधिनियम में वाद दर्ज कराया था।
22 अगस्त 2025 को खुड़बुड़ा निवासी बुजुर्ग दम्पति जसंवत सिंह व उनकी पत्नी जिलाधिकारी कार्यालय कक्ष में उनसे मिलकर जिल पुत्र तथा पुत्रवधु द्वारा प्रताड़ित करने की शिकायत की तथा पुत्रवधु को बेदखल करने का अनुरोध किया।
जिलाधिकारी सविन बसंल ने दोनो पक्षों को सुना तथा परिजनों का आपसी मनमुटाव दूर कराते हुए आपस में मिलजुलकर रहने की सलाह दी है। जिला प्रशासन की इसकी निरंतर मॉनिटिरिंग करेगा तथा दोनो पक्षों को आपस में मिलजुलकर रहने तथा एक- दूसरे के अधिकारों का अतिक्रमण नही करने का आग्रह किया गया। निर्धन पुत्र व पुत्रवधु एवं बुजुर्ग माता-पिता में सुलह से एक परिवार टूटने से बचने का प्रयास किया।

बुजुर्ग दंपति के 4 पुत्र है जिनमें दो पुत्र अपने परिवार संग अलग रहते हैं, तथा एक दिव्यांग पुत्र तथा पुत्र बंसी जिसके विरुद्ध दंपति ने भरण पोषण अधिनियम में केस दर्ज किया था, उसके 3 नाबालिग बच्चे हैं, जिनमें 2 बालिका तथा 1 बालक है, बेटे का कपड़े का अल्प व्यवसाय है तथा आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है। जिलाधिकारी ने बुजुर्ग दंपति से आग्रह किया कि अपने बेटे बहु तथा नाबालिग नौनिहालों को अपनी घर कुटिया से ना निकाले साथ ही बेटे बहु को बुजुर्गों के प्रति उनके कर्तव्य एवं जिम्मेदारियां भी स्मरण कराई।

जनपद चमोली के सवाड़ गांव में केन्द्रीय विद्यालय खोले जाने पर मिली स्वीकृति

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जनपद चमोली के सवाड़ गांव में केन्द्रीय विद्यालय की स्वीकृति प्रदान करने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केन्द्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान के साथ ही केन्द्रीय मंत्रीमण्डल का आभार व्यक्त किया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जनपद चमोली के प्रसिद्ध सवाड़ गांव में क्षेत्रीय जनता की मांग पर केन्द्रीय विद्यालय की स्थापना के लिये उनके द्वारा निरन्तर अनुरोध किया जा रहा था। उन्होंने कहा कि जनपद चमोली के सीमांत क्षेत्र में केन्द्रीय विद्यालय की स्थापना से इस क्षेत्र के छात्र-छात्राओं को बेहतर गुणात्मक शिक्षा उपलब्ध हो पायेगी तथा क्षेत्र को नई पहचान भी मिल सकेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश में शिक्षा का अनुकूल शैक्षिक वातावरण बनाने के लिए निरन्तर प्रयासरत है, इसके लिए शिक्षकों को प्रशिक्षण के साथ नवाचार से जोडा जा रहा है ताकि छात्रों को अच्छी शिक्षा के साथ शिक्षा का उचित माहौल उपलब्ध हो सके।

मेडिकल स्टोर्स पर एफडीए की छापेमारी शुरू, सीएम ने प्रतिबंधित कफ सिरप पर सख्त कार्रवाई के दिए थे निर्देश

बच्चों की सुरक्षा और जनस्वास्थ्य को सर्वाेच्च प्राथमिकता देते हुए उत्तराखंड सरकार ने प्रदेशभर में प्रतिबंधित कफ सिरप और औषधियों के खिलाफ सख्त अभियान शुरू कर दिया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, स्वास्थ्य मंत्री डॉ धन सिंह रावत के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग और खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफ.डी.ए.) की संयुक्त टीमें प्रदेश के सभी जिलों में मेडिकल स्टोर्स, थोक विक्रेताओं और अस्पतालों की औषधि दुकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी कर रही हैं। यह अभियान हाल ही में राजस्थान और मध्य प्रदेश में खांसी की दवा (कफ सिरप) के सेवन से बच्चों की मौत की घटनाओं के बाद शुरू किया गया है। उत्तराखंड सरकार ने इसे जनस्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर मामला मानते हुए तत्परता से कार्रवाई प्रारंभ की है।

केंद्र की एडवाइजरी पर तुरंत कार्रवाई
स्वास्थ्य सचिव एवं आयुक्त, खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफ.डी.ए.) डॉ. आर. राजेश कुमार ने सभी मुख्य चिकित्साधिकारियों को आदेश जारी करते हुए कहा कि भारत सरकार की एडवाइजरी को प्रदेश में तत्काल प्रभाव से लागू कराया जाए। उन्होंने कहा कि बच्चों की सुरक्षा और जनस्वास्थ्य से बड़ा कोई विषय नहीं हो सकता। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि औषधि निरीक्षक चरणबद्ध तरीके से कफ सिरपों के नमूने एकत्र करें और उनकी गुणवत्ता की प्रयोगशाला जांच कराएं, ताकि किसी भी दोषपूर्ण या हानिकारक दवा को बाजार से तत्काल हटाया जा सके।

बच्चों के लिए प्रतिबंधित सिरप न लिखें डॉक्टर
डॉ. आर. राजेश कुमार ने प्रदेश के सभी चिकित्सकों से आग्रह किया है कि केंद्र सरकार की एडवाइजरी का संज्ञान लेते हुए वे बच्चों के लिए प्रतिबंधित कफ सिरप न लिखें। डॉ. आर. राजेश कुमार ने कहा यदि चिकित्सक इन सिरपों को लिखेंगे तो मेडिकल स्टोर भी उन्हें बेचेंगे। इसलिए ज़रूरी है कि डॉक्टर स्वयं भी जिम्मेदारी दिखाएं और प्रतिबंधित दवाओं से परहेज़ करें।

कौन-सी दवाएं प्रतिबंधित हैं

भारत सरकार की एडवाइजरी के अनुसार कृ

दो वर्ष से कम आयु के बच्चों को बिना डॉक्टर की सलाह के किसी भी प्रकार की खांसी या जुकाम की दवा नहीं दी जानी चाहिए।

पाँच वर्ष से कम आयु के बच्चों में इन दवाओं का सामान्य उपयोग अनुशंसित नहीं है।

केवल विशेषज्ञ चिकित्सक की सलाह, सही खुराक और न्यूनतम अवधि के लिए ही इनका उपयोग किया जा सकता है।

सरकार ने विशेष रूप से Dextromethorphan युक्त सिरप और Chlorpheniramine Maleate + Phenylephrine Hydrochloride संयोजन वाली दवाओं को चार वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए प्रतिबंधित किया है।

प्रदेशभर में छापेमारी और सैंपलिंग अभियान
प्रदेश में इस आदेश के बाद अपर आयुक्त, खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन एवं ड्रग कंट्रोलर ताजबर सिंह जग्गी के नेतृत्व में राज्यभर में युद्धस्तर पर छापेमारी की जा रही है। स्वयं अपर आयुक्त ने देहरादून के जोगीवाला, मोहकमपुर समेत कई क्षेत्रों में औषधि दुकानों का निरीक्षण किया। सभी जिलों में औषधि निरीक्षकों को निर्देश दिए गए हैं कि वे इस माह के भीतर सरकारी अस्पतालों, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों और खुदरा दुकानों से सिरपों के नमूने लेकर प्रयोगशाला परीक्षण करवाएँ। ताजबर सिंह जग्गी ने कहा कि एफ.डी.ए. की टीमें प्रदेशभर में सक्रिय हैं। यदि किसी भी स्तर पर दोष पाया गया तो संबंधित कंपनी या विक्रेता के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का सख्त संदेश दृ जनस्वास्थ्य सर्वाेपरि
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा और जनता के स्वास्थ्य से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा हम यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं कि प्रदेश में बिकने वाली हर दवा सुरक्षित और मानक गुणवत्ता वाली हो। जनस्वास्थ्य हमारी सर्वाेच्च प्राथमिकता है, और बच्चों की सुरक्षा पर किसी प्रकार की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने आगे कहा कि सरकार प्रदेश में औषधि गुणवत्ता निगरानी प्रणाली को और सुदृढ़ करने की दिशा में भी काम कर रही है।

बच्चों की दवा में लापरवाही अस्वीकार्य- डॉ. धन सिंह रावत
स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा राज्य सरकार केंद्र की एडवाइजरी का पूरी गंभीरता से पालन कर रही है। बच्चों की दवाओं से जुड़ी किसी भी लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सभी चिकित्सकों और औषधि विक्रेताओं को निर्देश दिए गए हैं कि वे प्रतिबंधित सिरप को न लिखें और न बेचें। यह कदम बच्चों की सुरक्षा और जनस्वास्थ्य को सुरक्षित रखने के लिए अत्यंत आवश्यक है।

जनता से अपील दृ डॉक्टर की सलाह के बिना बच्चों को दवा न दें
एफ.डी.ए. ने राज्यभर में कफ सिरप की सैंपलिंग शुरू कर दी है। अपर आयुक्त, खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन एवं ड्रग कंट्रोलर ताजबर सिंह जग्गी ने जनता से अपील की है कि वे बच्चों को कोई भी दवा देने से पहले डॉक्टर की सलाह अवश्य लें। यदि किसी दवा के सेवन से कोई प्रतिकूल प्रभाव दिखाई दे तो तत्काल नजदीकी स्वास्थ्य केन्द्र या अस्पताल से संपर्क करें।

पहली बार देवभूमि उत्तराखंड में सब-जूनियर नेशनल बास्केटबॉल प्रतियोगिता का होना ऐतिहासिकः सीएम

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने परेड ग्राउंड, देहरादून में 50वीं सब-जूनियर राष्ट्रीय बास्केटबॉल चौंपियनशिप का शुभारंभ किया। 10 अक्टूबर तक चलने वाली इस प्रतियोगिता में देश के 28 राज्यों से 54 टीमों के लगभग एक हजार से अधिक खिलाड़ी प्रतिभाग कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने बास्केटबॉल फेडरेशन ऑफ इंडिया एवं उत्तराखंड बास्केटबॉल एसोसिएशन को इस आयोजन के लिए बधाई दी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पहली बार देवभूमि उत्तराखंड में सब-जूनियर नेशनल बास्केटबॉल चौंपियनशिप का आयोजन हो रहा है, जो राज्य के लिए गौरवपूर्ण एवं ऐतिहासिक अवसर है। उन्होंने कहा कि खेल केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण, धैर्य, अनुशासन व टीम भावना भी सिखाता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा खेलो इंडिया एवं फिट इंडिया मूवमेंट जैसी पहलों से देश में खेलों के प्रति नई जागरूकता आयी है और भारत खेल के क्षेत्र में नई ऊँचाइयों को स्पर्श कर रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि 38वें राष्ट्रीय खेलों के सफल आयोजन के बाद उत्तराखंड तेजी से खेलभूमि के रूप में अग्रसर है। राज्य में 517 करोड़ रुपये की लागत से विश्वस्तरीय खेल अवसंरचना विकसित की जा रही है। शीघ्र ही आठ प्रमुख शहरों में 23 खेल अकादमियों के साथ स्पोर्ट्स लेगेसी प्लान लागू किया जाएगा तथा हल्द्वानी में प्रथम खेल विश्वविद्यालय और लोहाघाट में महिला स्पोर्ट्स कॉलेज की स्थापना की जा रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘नई खेल नीति’ के तहत राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय पदक विजेताओं को आउट ऑफ टर्न सरकारी नौकरी, ‘खिलाड़ी प्रोत्साहन योजना’, खेल किट, राज्य स्तरीय पुरस्कार तथा 4 प्रतिशत खेल कोटा की बहाली जैसे अनेक कदम खिलाड़ियों के हित में उठाए गए हैं। हाल ही में राष्ट्रीय खेल दिवस पर उत्कृष्ट खिलाड़ियों को 50-50 लाख रुपये की सम्मान राशि भी दी गई है।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने देहरादून में बास्केटबॉल खिलाड़ियों के प्रशिक्षण (बास्केटबॉल प्रशिक्षण अकादमी) के लिए जिलाधिकारी देहरादून को भूमि चिन्हित करने तथा हल्द्वानी में निर्माणाधीन खेल विश्वविद्यालय के पास बास्केटबॉल प्रशिक्षण अकादमी की व्यवस्था करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने बास्केटबॉल प्रतियोगिताओं के लिए खेल विभाग को आवश्यक कदम उठाने तथा अन्य खेलों की भांति बास्केटबॉल की भी समय-समय पर प्रतियोगिताएं आयोजित करने की बात कही।

इस अवसर पर विधायक खजान दास, अध्यक्ष उत्तराखंड बास्केटबॉल एसोसिएशन सुशील कुमार, महासचिव बास्केटबॉल फेडरेशन ऑफ इंडिया कुलविंदर सिंह गिल, उपाध्यक्ष उत्तराखंड बास्केटबॉल एसोसिएशन आदित्य चौहान, मंदीप सिंह ग्रेवाल एवं अन्य गणमान्य उपस्थित थे।

सीएम धामी ने आपदा में सहयोग वाले कर्मियों को सम्मानित किया

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पटेलनगर स्थित राजकीय दून मेडिकल कॉलेज में अर्पित फाउंडेशन द्वारा आयोजित ’’प्राइड मूवमेंट सम्मान समारोह’’ में आपदा के दौरान राहत एवं बचाव अभियान में योगदान देने पर एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, पुलिस, आईटीबीपी के कर्मियों को सम्मानित किया गया।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि ये सम्मान ऐसे कर्मियों के प्रति कृतज्ञता का प्रतीक है, जिन्होंने आपदा के दौरान राहत एवं बचाव अभियान में अपनी जान की परवाह किए बिना योगदान दिया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जब हम उत्तराखंड की बात करते हैं, तो केवल इसके प्राकृतिक सौंदर्य और आध्यात्मिकता की ही नहीं, बल्कि इसकी भौगोलिक कठिनाइयों और प्रत्येक वर्ष होने वाली आपदाओं की चुनौती भी स्वतः ही सामने आ जाती है। उन्होंने कहा कि हिमालय की गोद में बसे हमारे राज्य में भूस्खलन, बाढ़, अतिवृष्टि और अन्य प्राकृतिक आपदाएँ आना आम बात हैं। देवभूमि में रहते हुए हम ये जानते हैं कि प्रकृति का सौंदर्य जितना मनोहारी है, उतनी ही यहां चुनौतियाँ भी अप्रत्याशित हैं।
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि हम सबने 2013 की केदारनाथ आपदा की त्रासदी को देखा है, जब जय प्रलय में हजारों लोगों की जानें चले गईं थी। इसी प्रकार 2021 में चमोली की ऋषिगंगा और धौलीगंगा घाटी में आई आपदा ने पूरे देश को झकझोर दिया था। 2023 में जोशीमठ का धंसाव भी एक बड़ी चुनौती के रूप में हमारे सामने आया। इस वर्ष भी उत्तरकाशी, चमोली और देहरादून के विभिन्न क्षेत्रों में भारी बारिश, बादल फटने और भूस्खलन की अनेक घटनाओं का हमने सामना करना पड़ा। इन आपदाओं में कई लोगों की मृत्यु हुई, कई लोग लापता हुए और संपत्ति को भारी नुकसान पहुंचा। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन कठिन परिस्थितियों में हमारे सामने सबसे बड़ी चुनौती मानव जीवन की रक्षा करने की थी, यही समय था जब एसडीआरएफ, एनडीआरएफ सहित पुलिस- प्रशासन के लोगों ने आपदा में घायल और मलबे में फंसे हुए लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए ग्राउंड जीरो पर लगातार काम किया।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि आपदा के समय हमारे राहत कर्मियों ने न केवल प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया, बल्कि पुनर्वास और राहत शिविरों का भी संचालन किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि हम सिल्क्यारा टनल में फंसे मजूदरों के लिए चलाए गए अभियान को नहीं भूल सकते। तब दिन-रात चलने वाले बचाव अभियान पर पूरे देश की निगाह थी। परंतु बाबा बोखनाग के आशीर्वाद और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन ने हमारे अभियान को सफल बनाया।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि वो जब भी आपदा प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करते हैं, तो बचाव और राहत कर्मियों के जज्बे को देखकर उन्हें विश्वास हो जाता है कि हम प्रत्येक चुनौती का सामना करने में सक्षम हैं। मुख्यमंत्री ने आपदा राहत कार्यों में सहयोग प्रदान करने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री ने स्वयं देहरादून आकर आपदा पीड़ितों से मिलकर उनका दर्द बाँटा, उनकी समस्याएँ सुनीं और समीक्षा बैठक कर त्वरित निर्णय भी लिए। उन्होंने उत्तराखंड की जनता के लिए 1200 करोड़ रुपये की विशेष राहत राशि की घोषणा भी की, जिससे पुनर्वास और पुनर्निर्माण कार्य में हमें बड़ी सहायता मिली।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आपदा केवल इमारतें या सड़कें ही नहीं तोड़ती, आपदा लोगों के आत्मविश्वास और भविष्य को भी चोट पहुंचाती है। इसलिए राज्य सरकार ने ये सुनिश्चित किया है कि आपदा पीड़ितों को केवल मुआवज़ा ही न दिया जाए, बल्कि उनके पुनर्वास और उनकी आजीविका पर भी विशेष ध्यान दिया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने एसडीआरएफ जवानों को ड्रोन, सैटेलाइट आधारित मॉनिटरिंग और अत्याधुनिक रेस्क्यू गियर जैसे अत्याधुनिक उपकरण उपलब्ध कराए हैं। साथ ही, आपदा मित्र योजना के अंतर्गत गांव-गांव में स्थानीय युवाओं को प्रशिक्षित किया जा रहा है। इसके साथ ही सड़क और पुल निर्माण में डिजास्टर रेज़िलिएंट तकनीक का उपयोग भी अनिवार्य किया गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण को स्कूल-कॉलेजों में शामिल करने की प्रक्रिया भी प्रारंभ की है, ताकि हमारी आने वाली पीढ़ी आपदा के खतरों से और बेहतर तरीके से निपट सके। समारोह में नकल विरोधी कानून लागू करने के लिए छात्रों द्वारा मुख्यमंत्री धामी का विशेष तौर पर स्वागत करते हुए आभार व्यक्त किया।

इस अवसर पर विधायक प्रेमचंद अग्रवाल, स्वामी रूपेन्द्र प्रकाश, कृष्ण गिरी महाराज, अपर पुलिस महानिदेशक वी. मुरूगेशन, कार्यक्रम की संयोजक हनी पाठक मौजूद थे।

राधेश्याम जी का संपूर्ण जीवन समाज, संगठन और राष्ट्र के लिए समर्पित रहाः सीएम

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी आज रेसकोर्स स्थित स्वर्गपपुरी आश्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक राधेश्याम जी की श्रद्धांजलि सभा में सम्मिलित हुए। मुख्यमंत्री ने श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उन्हें विनम्र नमन किया और उनके निधन को समाज एवं राष्ट्र के लिए अपूरणीय क्षति बताया।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि राधेश्याम जी का संपूर्ण जीवन समाज, संगठन और राष्ट्र के लिए समर्पित रहा है। वे संघ की मूल भावना दृ निःस्वार्थ सेवा, अनुशासन और राष्ट्रभक्ति दृ के जीवंत प्रतीक थे। उन्होंने अपने व्यक्तित्व और कृतित्व से हजारों युवाओं और कार्यकर्ताओं को प्रेरित किया। उनके मार्गदर्शन में असंख्य कार्यकर्ताओं ने समाज सेवा का संकल्प लिया और आज भी उनकी शिक्षाएं संगठन और समाज को ऊर्जा प्रदान कर रही हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राधेश्याम जी का त्यागमय जीवन, सरलता, तपस्या और राष्ट्रहित के प्रति उनकी निष्ठा हम सभी के लिए प्रेरणास्रोत रहेगी। उन्होंने कहा कि संगठन को सशक्त बनाने और समाज को जोड़ने के लिए उनका योगदान अविस्मरणीय रहेगा। उनकी प्रेरणा आने वाली पीढ़ियों के लिए भी पथप्रदर्शक का कार्य करेगी।

मुख्यमंत्री ने शोक संतप्त परिजनों एवं संघ परिवार के सभी कार्यकर्ताओं के प्रति अपनी गहरी संवेदना प्रकट की। मुख्यमंत्री ने दिवंगत आत्मा की शांति और उन्हें ईश्वर के श्रीचरणों में स्थान मिलने की प्रार्थना की।

राज्य स्थापना दिवस पर होने वाले कार्यक्रमों की भी प्रभावी कार्ययोजना तैयार करेंः सीएम

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री आवास में उच्च स्तरीय बैठक के दौरान अधिकारियों को निर्देश दिए कि आगामी 09 नवंबर को राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित होने वाले कार्यक्रमों की भी प्रभावी कार्ययोजना तैयार कर इस अवसर पर होने वाले कार्यक्रमों में जन सामान्य की भागीदारी सुनिश्चित किये जाने के निर्देश दिये।

मुख्यमंत्री ने नन्दा राज जात यात्रा मार्गों के रख रखाव तथा यात्रा के रात्रि पडावों पर अवस्थापना सुविधाओं के विकास से संबंधित कार्य योजना भी शीघ्र तैयार किये जाने के निर्देश दिये। मुख्यमंत्री ने बैठक में प्रदेश में हाल ही में आई आपदा के दौरान राहत एवं बचाव कार्यों में सभी संबंधित संस्थानों एवं अधिकारियों द्वारा किये गए प्रयासों की भी सराहना की।

मुख्यमंत्री ने शहरों में बढते यातायात के दबाव को कम करने के लिये प्रभावी कार्ययोजना तैयार करने, साफ सफाई के साथ खाद्य सामग्री में मिलावट खोरी रोकने के लिये जांच अभियान सघनता से संचालित किये जाने के साथ प्रदेश में पूर्ण होने वाली फ्लैगशिप योजनओं व कार्यक्रमों का भी पूर्ण विवरण तैयार किये जाने के भी निर्देश दिये हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में निर्माण और नव निर्माण कार्यों में तेजी लाई जाए। उन्होंने कहा कि सड़क निर्माण और मरम्मत कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। क्षतिग्रस्त सड़कों के पुनर्निर्माण एवं मरम्मत कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूर्ण किया जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन क्षेत्रों से बार-बार सड़क संबंधी शिकायतें प्राप्त हो रही हैं, वहां विशेष निगरानी रखी जाए और कार्यों की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया जाए। मुख्यमंत्री ने गड्ढा मुक्त सड़क अभियान की कार्य प्रगति की साप्ताहिक समीक्षा करने तथा 31 अक्टूबर तक पैच वर्क पूर्ण का कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने सड़क मरम्मत कार्यों का स्थलीय निरीक्षण के भी निर्देश दिये हैं।

बैठक में प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु, आर. मीनाक्षी सुंदरम, सचिव शैलेश बगोली, विनय शंकर पांडेय, अपर पुलिस महानिदेशक ए.पी. अंशुमान, विशेष सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते एवं अपर सचिव बंशीधर तिवारी उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री धामी ने सीएम हेल्पलाइन 1905 की समीक्षा कर दिए निर्देश

श्रीदेव सुमन विश्वविद्यालय टिहरी की छात्रा साक्षी द्वारा विवि के स्तर से डिग्री नहीं दिए जाने की शिकायत सीएम हेल्पलाइन किए जाने के बावजूद इस प्रकरण का निस्तारण नहीं किया गया।
सचिवालय में सीएम हेल्पलाइन 1905 की समीक्षा के दौरान उक्त प्रकरण जब मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के संज्ञान में आया तो उन्होंने इस पर सख़्त नाराज़गी व्यक्त करते हुए सचिव आईटी और सचिव उच्च शिक्षा एक सप्ताह में इस प्रकरण की जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के साथ ही संबंधित अधिकारी पर सख़्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि अभ्यर्थी को एक सप्ताह के अंदर डिग्री उपलब्ध कराई जाए। छात्र-छात्राओं की शिकायतों के निस्तारण के लिए विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में हेल्प डेस्क बनाई जाए। सेवा के अधिकार के तहत दी जाने वाली सेवाओं को कार्यालयों के डिस्प्ले बोर्ड पर दर्ज किया जाए। सीएम हेल्पलाइन पर दर्ज बिजली, पानी, सड़क और अन्य मूलभूत सुविधाओं से संबंधित शिकायतों का त्वरित निस्तारण तेजी से किया जाए। इसके लिए संबंधित अधिकारी कार्यालय के नोटिस बोर्ड पर चस्पा करें कि वे किस निर्धारित दिन समस्याओं के समाधान के लिए बैठेंगे।

समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शिकायतकर्ताओं से बात कर उनकी समस्याओं के यथाशीघ्र समाधान के निर्देश अधिकारियों को दिए। मुख्यमंत्री ने बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिए कि आपदा से प्रभावित क्षेत्रों के लोगों की शिकायतों और समस्याओं का समाधान प्राथमिकता पर किया जाए। उन्होंने सभी जिलाधिकारियों को प्रत्येक सप्ताह, सचिवगणों को माह में दो बार और मुख्य सचिव को प्रत्येक माह में सीएम हेल्पलाइन की समीक्षा करने के निर्देश दिए, साथ ही कहा कि 3 माह से अधिक लंबित प्रकरणों को अभियान चलाकर निस्तारित किया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि जन समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए जिलाधिकारियों को जनता मिलन कार्यक्रमों का आयोजन नियमित तौर पर करना होगा, साथ ही शिकायतों का समाधान निर्धारित समयसीमा के भीतर न करने वाले अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करते हुए कार्रवाई की जाएगी। आपदा से क्षतिग्रस्त लाइनों, सुरक्षा दीवारों का कार्य प्राथमिकता के आधार पर करने के साथ ही रिपोर्ट शीघ्र प्रस्तुत करने के निर्देश मुख्यमंत्री ने दिए। उन्होंने कहा कि समस्या का समाधान तभी माना जाएगा, जब शिकायतकर्ता पूर्ण रूप से संतुष्ट होगा। प्रत्येक माह की 5 तारीख तक सभी विभागों को हेल्पलाइन 1905 पर प्राप्त शिकायतों की स्थिति रिपोर्ट मुख्यमंत्री कार्यालय में प्रस्तुत करने के निर्देश मुख्यमंत्री ने दिए हैं।

निदेशक आईटीडीए गौरव कुमार ने सीएम हेल्पलाइन पर प्राप्त शिकायतों और विभागों द्वारा समाधान के लिए की गई कार्यवाही के बारे में विस्तार से जानकारी दी। बैठक में जानकारी दी गई कि उत्तराखंड पेयजल, गृह विभाग, ऊर्जा से संबंधित लोगों की अधिक शिकायतें प्राप्त हो रही हैं।

बैठक में अवस्थापना अनुश्रवण परिषद के उपाध्यक्ष विश्वास डाबर, मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन, प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु, आर. मीनाक्षी सुंदरम, सचिवगण, विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष एवं वर्चुअल माध्यम से सभी जिलाधिकारी उपस्थित थे।