एनएच घोटाले में आइएएस अधिकारी पंकज कुमार व चंद्रेश यादव हुये सस्पेंड

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने जीरो टॉलरेंस को सर्वोच्च प्राथमिकता पर रखते हुए भ्रष्टाचार के आरोप में दो आइएएस अधिकारियों को निलंबित कर दिया है। सरकार के निर्देश पर शासन ने हरिद्वार-ऊधमसिंह नगर-बरेली (एनएच-74) चौड़ीकरण मुआवजा मामले में आइएएस अधिकारी व प्रभारी सचिव डॉ. पंकज कुमार पांडेय और अपर सचिव चंद्रेश यादव को निलंबित कर दिया है।

प्रभारी सचिव डॉ. पंकज कुमार पांडेय और अपर सचिव चंद्रेश कुमार यादव पर जिलाधिकारी ऊधमसिंह नगर के पद पर रहते हुए आर्बिट्रेटर की भूमिका निभाने के दौरान नियम विरुद्ध मुआवजा वितरित करने का आरोप है। दरअसल, राष्ट्रीय राजमार्ग 74 के चौड़ीकरण के लिए सरकार ने रुद्रपुर में सड़क के दोनों ओर की भूमि का अधिग्रहण किया था। इसके लिए भूस्वामियों को मुआवजा दिया गया। इस दौरान कई तरह की अनियमितताएं सामने आई थीं। इसमें कृषि भूमि को अकृषि दिखाकर अधिक मुआवजा बांटने व नियम विरुद्ध मुआवजा निर्धारण करना आदि शामिल थे। सरकार ने शुरुआती जांच के बाद बीते वर्ष मार्च में सात एसडीएम (एक सेवानिवृत्त) निलंबित कर दिए थे। मामले की विस्तृत जांच के लिए एसआइटी का गठन किया गया।

कुछ समय पूर्व एसआइटी ने अपनी रिपोर्ट में आइएएस अधिकारी डॉ. पंकज कुमार पांडेय और चंद्रेश यादव के आर्बिट्रेटर के रूप में लिए गए फैसलों पर सवाल उठाए थे। इस पर शासन ने दोनों अधिकारियों से इस मामले में स्पष्टीकरण तलब किया। दोनों अधिकारियों के अनुरोध पर दो बार जवाब लेने का समय बढ़ाया गया। इनके जवाब का परीक्षण करने के बाद शासन ने दोनों को निलंबित कर दिया है।

अपर मुख्य सचिव राधा रतूड़ी की ओर से जारी आदेशों में साफ किया गया है कि एसआइटी की विवेचनात्मक जांच आख्या के आधार पर दोनों अधिकारियों को निलंबित किया गया है। आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि दोनों अधिकारियों के विरुद्ध अनुशासनिक कार्यवाही के लिए आरोप पत्र जारी करने और जांच अधिकारी की नियुक्ति के लिए अलग से आदेश जारी किए जाएंगे।
मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह ने कहा कि शासन की मंशा स्पष्ट है। इन अधिकारियों के खिलाफ जांच में सामने आए तथ्यों पर स्पष्टीकरण लिया गया था। विचार विमर्श के बाद दोनों को निलंबित करने का निर्णय लिया गया है।

अब शासन इन दोनों अधिकारियों को अलग से आरोप पत्र जारी करेगा। इसमें उनसे एसआइटी की रिपोर्ट पर उठाए गए सवालों के जवाब लिए जाएंगे। इसके साथ ही एक जांच अधिकारी की भी नियुक्ति की जाएगी। यह जांच अधिकारी वरिष्ठ आइएएस अधिकारी होगा। अधिकारियों का जवाब मिलने के बाद जांच अधिकारी इसकी जांच करेंगे। आरोप पुष्ट होने पर कार्रवाई के लिए डीओपीटी और संघ लोक सेवा आयोग को पत्र भेजा जाएगा।

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत का कहना है कि भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति पर सरकार कायम है। भ्रष्टाचार के मामलों में किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा। सरकार सबके खिलाफ समान रूप से कार्रवाई करेगी। इन दोनों अधिकारियों को भी प्रथम दृष्ट्या आरोप पुष्ट होने पर निलंबित किया गया है।

सहकारी विकास परियोजना से 50 हजार किसानों को होगा फायदा

किसानों की आय दोगुनी करने में समेकित सहकारी विकास परियोजना महत्वपूर्ण साबित होगी। इससे राज्य के 50 हजार किसानों को फायदा होगा। साथ ही ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने बताया कि राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम के सहयोग से 3632 करोड़ रूपये की समेकित सहकारी विकास परियोजना को प्रदेश में लाया जा रहा है। एनसीडीसी द्वारा वित पोषित इस योजना में 80 प्रतिशत ऋण के रूप में जबकि 20 प्रतिशत अनुदान के रूप में होगा। इसमें कॉपरेटिव व कार्पोरेट में समन्वय पर भी बल दिया जाएगा।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए राज्य में जल्द ही राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (एनसीडीसी) द्वारा सहायतित राज्य समेकित सहकारी विकास परियोजना की शुरूआत की जायेगी। राज्य सरकार द्वारा राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम के सहयोग से 3632 करोड़ रूपये की समेकित सहकारी विकास परियोजना को प्रदेश में लाया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2022 तक किसानों की आय दुगुनी करने के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के लक्ष्य को पूर्ण करने में यह परियोजना महत्वपूर्ण साबित होगी। इस परियोजना को सफल बनाने में सहकारी, कृषि, उद्यान, मत्स्य, डेयरी व सम्बन्धित विभागों की अहम भूमिका होगी। इस परियोजना से प्रदेश के 50 हजार किसानों को फायदा होगा। इस परियोजना से कॉपरेटिव से कॉपरेटिव व कॉपरेटिव से कॉर्पोरेट के रास्ते खुलेंगे। इस परियोजना के लिए परियोजना निदेशालय बनाया जायेगा।

इस कार्यक्रम को आईसीडीपी योजना के तहत राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (एनसीडीसी) से वित्त पोषण में सहायता मिलेगी, जहां प्राविधानित राशि का 80 प्रतिशत ऋण एवं 20 प्रतिशत अनुदान के रूप में होगा। यह कार्यक्रम तीन चरणों में चलाया जायेगा। पहले चरण में बहुद्देशीय सहकारी समितियों एवं उनके जिलास्तरीय व शीर्ष निकाय, कृषि, उद्यान, जड़ी-बूटी, रेशम, सगंध पौध आदि का सहकारी सामूहिक खेती द्वारा वृहद उत्पादन, परिवहन, विपणन, दुग्ध विकास, पशुपालन व मतस्य पालन की विशेष त्रिस्तरीय सहकारी संस्थाओं की आवश्यकताओं को शामिल किया गया है।

आईसीडीपी के माध्यम से उत्तराखण्ड राज्य के विकास के कार्यक्रम की विशिष्टता के दृष्टिगत परियोजना इस प्रकार तैयार की गई है कि मूल्य श्रृंखला में ‘खेतों से लेकर बाजार तक’ चुनौतियों को पहचाना जा सके और उनका उचित निदान किया जा सके। किसानों की छोटी-छोटी जोत को शामिल कर संयुक्त सहकारी खेती के माध्यम से वृहद स्तर पर फसलों की खेती में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित किया जायेगा। सहकारी संस्थाओं एवं निगमित निकायों (कॉर्पोरेट) के संयुक्त उद्यम द्वारा उत्पाद का उचित मूल्य दिलाने, बाजार पहुंच में सक्षम होने व किसानों को फसल मूल्य अधिक प्राप्त होने में कारगर साबित होगी। इस परियोजना द्वारा शीर्ष निकायों यूसीएफ, यूसीबी, और नव निर्मित पीसीयू को संरचनात्मक व प्रभावी रूप से मजबूत करने की व्यवस्था की गई है।

शहीदों को सलाम कर मनाया स्वतंत्रता दिवस

देशभर में आज स्वतंत्रता दिवस धूमधाम से मनाया जा रहा है। देश के विभिन्न शिक्षण संस्थानों में महापुरूषों के नक्शे कदम पर चलने का संकल्प लिया जा रहा है। महापुरूषों की झांकी के माध्यम से देश के लिये मर मिटने वालों को नमन किया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी लाल किले में तिरंगा फहराया। साथ ही देश की जनता को संबोधित किया।

पीएम ने कहा कि सभी भारतीयों को खाना, स्वास्थ्य, कनेक्टीविटी, कुशलता, स्वच्छता, सुरक्षा, जल मिले इसलिए वॉटर फॉर ऑल, सैनिटेशन फॉर ऑल, स्किल फॉर ऑल, हेल्थ पर ऑल, इंश्योरेंस फॉर ऑल, कनेक्टीविटी फॉर ऑल के मंत्र के साथ चलेंगे। उन्होंने आगे कहा कि देश में टैक्स न देने की हवा बनाई जा रही है, ईमानदार करदाताओं के टैक्स पर देश चलता है, डायरेक्ट टैक्स देने वालों की संख्या पौने सात करोड़ तक है।

प्रधानमंत्री बोले भारत को हमारे वैज्ञानिकों पर गर्व है, जो अपने शोध में उत्कृष्ट हैं और नवाचार में सबसे आगे हैं। आज मेरा सौभाग्य है कि इस पावन अवसर पर मुझे देश को एक और खुशखबरी देने का अवसर मिला है। साल 2022, यानि आजादी के 75वें वर्ष में और संभव हुआ तो उससे पहले ही, भारत अंतरिक्ष में तिरंगा लेकर जा रहा है। ऐसा करने वाल भारत चौथा देश बनेगा।

उन्होंने कहा, ‘मैं आज इस मंच से मेरी कुछ बहादुर बेटियों को खुशखबरी देना चाहता हूं। भारतीय सशक्त सेना में शॉर्ट सर्विस कमीशन के जरिए नियुक्त महिला अधिकारियों को पुरुष समकक्ष अधिकारियों की तरह पारदर्शी प्रक्रिया द्वारा स्थायी कमीशन देने की घोषणा करता हूं। अपनी उपलब्घ्धियों को गिनाते हुए उन्होंने कहा कि हमने ओबीसी आयोग को संवैधानिक दर्जा दिया, दिक्कतों के बावजूद जीएसटी लागू किया और सैनिकों के हित में वन रैंक वन पेंशन योजना लेकर आए। जन आरोग्घ्य योजना का ऐलान करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि आगामी 25 सितंबर से देश में यह योजना लागू कर दी जाएगी। महिलाओं की उपलब्धियां गिनाते हुए उन्होंने कहा कि खेत से लेकर खेल तक महिलाएं हमारा नाम ऊंचा कर रहीं हैं। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन के अंत में जय हिंद, भारत माता की जय व वंदे मातरम् के नारे लगाए।

स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने परेड ग्राउंड में तिरंगा फहराया और प्रदेश वासियों को बधाई दी। इस इस दौरान सीएम ने कहा कि उत्तराखंड वीरभूमि है। यहां हर परिवार से औसतन एक व्यक्ति सेना या सुरक्षा बलों में हैं। उत्तराखंड में पहले से ही शहादत की परंपरा रही है। वहीं सीएम ने सरकार की उपलब्धियों को गिनाते हुए सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार ने भ्रष्टाचार के खिलाफ प्रभावी कदम उठाए हैं। लोगों की सोच और कार्य संस्कृति बदली है। जो उत्तराखंड के विकास को गति देगी।

मुख्यमंत्री ने परेड ग्राउंड में तिरंगा फहराया और प्रदेश वासियों को बधाई दी। सीएम ने कहा कि उत्तराखंड वीरभूमि है। यहां हर परिवार से औसतन एक व्यक्ति सेना या सुरक्षा बलों में हैं। उत्तराखंड में पहले से ही शहादत की परंपरा रही है। सीएम ने सरकार की उपलब्धियों को गिनाते हुए सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार ने भ्रष्टाचार के खिलाफ प्रभावी कदम उठाए हैं। लोगों की सोच और कार्य संस्कृति बदली है। जो उत्तराखंड के विकास को गति देगी। बताया कि राज्य की जीडीपी में छह प्रतिशत से ज्यादा वृद्धि हुई है और प्रति व्यक्ति आय 16 हजार से ज्यादा बढ़ गई है। उन्होंने कहा ग्रोथ सेंटर्स की स्थापना से गांवो में रोजगार बढ़ा है। अब तक 103 ग्रोथ सेंटर्स स्थापित किए जा चुके हैं। सरकार लगातार किसानों की आय को दोगुना करने के प्रयास कर रही है।

त्रिवेंद्र सरकार का अहम निर्णय, धर्मान्तरण पर होगी ये सजा

अब राज्य में जबरन धर्मान्तरण किया गया तो दंडात्मक कार्यवाही होगी। कैबिनेट ने इस नियमावली पर अपनी मोहर लगा दी है। त्रिवेंद्र सरकार की मौजूदगी में हुयी बुधवार को कैबिनेट की बैठक में धर्म स्वतंत्रता एक्ट पास किया गया। धर्म परिवर्तन के मामले में आरोपित व्यक्ति को दोषमुक्त साबित करने के लिए खुद प्रमाण देने होंगे।

त्रिवेंद्र सरकार ने बीते मार्च माह में गैरसैंण विधानसभा सत्र में उत्तराखंड धर्म स्वतंत्रता विधेयक को पारित कराने के बाद उसे एक्ट की शक्ल दी थी। अब उक्त एक्ट की नियमावली पर मंत्रिमंडल की मुहर लग गई। सचिवालय में बुधवार को मंत्रिमंडल के फैसलों को काबीना मंत्री प्रकाश पंत ने ब्रीफ किया। उन्होंने बताया कि धर्म स्वतंत्रता एक्ट की नियमावली बनने के बाद इसका क्रियान्वयन सुनिश्चित हो जाएगा। अब धर्म परिवर्तन के इच्छुक व्यक्ति को पहले अपने स्थायी निवास स्थल क्षेत्र के जिला मजिस्ट्रेट को पूर्व सूचना देनी होगी। जिला मजिस्ट्रेट ऐसी सूचनाओं की 15 दिन के भीतर जांच कराएगा।

सात दिन में होगी जांच

इस जांच में यह भी देखा जाएगा कि धर्म परिवर्तन जबरन, प्रलोभन, उत्पीडन या कपटपूर्ण अथवा विवाह के जरिये किया जा रहा है अथवा नहीं। बिना सूचना के किसी ने भी धर्म परिवर्तन किया तो ऐसे मामलों की जांच होगी। जिला मजिस्ट्रेट ऐसे मामलों में सात दिन के भीतर जांच कराएंगे। सरकार ने नियमावली में यह प्रावधान भी किया है कि प्रत्येक जिलाधिकारी को हर महीने की दस तारीख तक पिछले माह के दौरान ऐसे मामलों की रिपोर्ट सरकार को देनी होगी।

यह है सजा का प्रावधान

यदि धर्म परिवर्तन के उद्देश्य से विवाह किया गया तो उस धर्म परिवर्तन को अमान्य घोषित किया जाएगा। धर्म परिवर्तन के लिए जिला मजिस्ट्रेट या कार्यपालक मजिस्ट्रेट के समक्ष एक माह पहले शपथपत्र देना होगा। धर्म परिवर्तन के लिए समारोह की भी पूर्व सूचना देनी होगी। सूचना नहीं देने की स्थिति में इसे अमान्य करार दिया जाएगा। धर्म स्वतंत्रता कानून का उल्लंघन होने की स्थिति में तीन माह से एक वर्ष की सजा होगी। अनुसूचित जाति-जनजाति के मामले में यह छह माह से दो वर्ष होगी।
धर्म परिवर्तन के एवज में किसी तरह का दान या अंशदान लेन-देन का मामला सामने आया तो जांच के बाद ऐसी राशि जब्त की जाएगी। साथ ही इसके लिए दोषी संस्था, व्यक्ति अथवा पुजारी को दंडित किया जाएगा। जबरन धर्म परिवर्तन के मामले में जेल जाने का प्रावधान भी किया गया है।

आखिर मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह क्यों भड़क उठे? जाने क्या है सच

भोपालपानी बड़ासी पुल निर्माण कार्य को देखकर मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह को गुस्सा आ गया। उन्होंने निर्माणाधीन पुल की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुये विभागीय अधिकारियों को फटकार लगाई। साथ ही लोक निर्माण विभाग को तत्काल जांच के आदेश दिए।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने मंगलवार को देहरादून में रायपुर – थानौ मार्ग के मध्य निर्माणधीन सौंडा-सरौली, बडासी भोपालपानी (मत्स्य पालन) विभाग के समीप बन रहे पुल का काफी मौके पर स्थलीय निरीक्षण किया। भोपालपानी के पुल की सड़क खस्ता हालत के साथ पुल की दीवारें दीवारों में पड़ी दरारों को देखकर गुस्से में नजर आए। उन्होंने मौके पर मौजूद लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों व कार्यदायी संस्था के प्रतिनिधियों को कड़ी फटकार लगाई व प्रमुख अभियन्ता लोक निर्माण विभाग को मामले की तत्काल जांच के आदेश दिए।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से पूछा कि क्या उनके ऊपर निर्माण कार्य को शीघ्र समाप्त करने का कोई दवाब था। इस प्रकार की घटनाओं में संलिप्त अधिकारी, कार्मिक व ठेकेदार सख्त कार्यवाही से बच नही सकते। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्यो में किसी भी प्रकार की लापरवाही व गुणवता में गिरावट बर्दाश्त नही की जाएगी। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने इस दौरान उपस्थित स्थानीय जनप्रतिनिधियों व लोगो से भी पुल व सड़कों की गुणवत्ता से संबंधित स्थिति की विस्तृत जानकारी ली। मालूम चला कि पुल के ऊपर सड़क के घटिया निर्माण कार्य को छिपाने के लिए कार्यदाई संस्था के ठेकेदार द्वारा जेसीबी से सड़क की खुदाई कर दी गई थी। जिसको देखकर मुख्यमंत्री भी गुस्से में नजर आए।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र रावत ने रायपुर-थानो मार्ग पर सौंडा सरौली पुल का भी विस्तृत स्थलीय निरीक्षण कर निर्माण कार्यो की अद्यतन जानकारी प्राप्त की। मुख्यमंत्री ने उपस्थित अधिकारियों को सौंडा सरौली पुल को समय पूरा करने तथा निर्माण कार्यो की गुणवता बनाए रखने के निर्देश भी दिए। अधिकारियों द्वारा बताया गया कि उक्त पुल का निर्माण कार्य आगामी 30 सितम्बर तक पूरा कर लिया जाएगा।

विद्यालय विशेष बच्चों के लिये अलग से हॉस्टल बनायें

शारीरिक व मानसिक रूप से विकलांग व विशेष आवश्यकता वालें बच्चों पर हाईकोर्ट नैनीताल ने आदेश पारित किया है। इस आदेश में इन बच्चों के लिये विद्यालय को विशेष सुविधायें मुहैया करायी जायेंगी। साथ ही विद्यालयों को अलग से शिक्षकों की नियुक्ति करने व अलग हॉस्टल बनाये जाने के आदेश दिए गये है।

वरिष्ठ न्यायाधीश न्यायमूर्ति राजीव शर्मा व न्यायमूर्ति लोकपाल सिंह की खंडपीठ ने कमल गुप्ता के पत्र पर स्वतः संज्ञान लेते हुए जनहित याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ता ने पत्र में कहा था कि प्रदेश के विद्यालयों में दिव्यांगों व विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की शिक्षा के लिए कोई सुविधा नहीं है। जिस कारण उन्हें दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। संविधान के अनुच्छेद 21 ए में छह से 14 साल तक के बच्चों को निरूशुल्क व अनिवार्य शिक्षा की बात कही गई है। खंडपीठ ने पिछले दिनों मामले में सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रख लिया था।

हाईकोर्ट ने जरूरतमंद बच्चों के लिए विशेष प्रशिक्षित शिक्षकों की नियुक्ति करने तथा बच्चों को हर माह एक हजार छात्रवृत्ति प्रदान करने के आदेश पारित किए हैं। आदेश में यह भी कहा है कि सरकार ऐसे बच्चों को शैक्षणिक सत्र से पहले यूनीफार्म, किताबें उपलब्ध कराई जाएं। राज्य सरकार विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए एक साल के भीतर राज्य के चार जिलों में छात्रवास बनाए। जिन विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के अभिभावक उनकी जरूरतें पूरी नहीं कर सकते, ऐसे अभिभावकों की मदद सरकार करे। सरकार सरकारी, गैर सरकारी, सहायता प्राप्त व गैर सहायता प्राप्त विद्यालयों के दिव्यांग बच्चों को स्वतंत्र विचरण के लिए मुफ्त में ट्रांसपोर्ट सुविधा प्रदान करे।

केंद्र सरकार ने चार वर्षों में दी जीरों टॉलरेंस की सरकारः त्रिवेन्द्र

केंद्र सरकार के चार वर्षों को सफल बताते हुये मुख्यमं़त्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने इन चार वर्षों को जनता के प्रति समर्पित रहा। प्रधानमंत्री की ठोस पहल से आज देशवासी अनेकों जन कल्याणकारी योजनाओं का लाभ उठा रहे है।

शुक्रवार को बातचीत में मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का न्यू इण्डिया का विजन देश को खुशहाली और तरक्की के रास्ते पर ले जाने के लिये एक बड़ा कदम है। देश ने आर्थिक, सामाजिक समृद्धि एवं विकास की नई ऊँचाइयों को छुआ है। स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत देश का स्वच्छता कवरेज 38 प्रतिशत से बढ़कर 83 प्रतिशत हो गया है। गत चार वर्षों में सड़क परिवहन में उल्लेखनीय तेजी से कार्य हो रहा है।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा मिशन के तहत गरीब परिवारों को पांच लाख रूपये तक का बीमा कवरेज दिया जा रहा है। मात्र दो वर्षों के भीतर ही उज्ज्वला योजना के अंतर्गत चार करोड़ महिलाओं को निःशुल्क रसोई गैस कनेक्शन देकर धुॅआ मुक्त जीवन दिया गया। प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत वर्ष 2022 तक सबको आवास दिए जाने का लक्ष्य रखा गया है। केन्द्र सरकार द्वारा 1200 अप्रासंगिक कानूनों को खत्म किया जा चुका है। प्रधानमंत्री द्वारा बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ कार्यक्रम को प्रभावी तरीके से बढ़ाया गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत चार वर्षों में केंद्र सरकार के किसी भी मंत्री पर भ्रष्टाचार संबंधी कोई आरोप नहीं है। जीएसटी से कर प्रणाली एवं व्यापार आसान हो रहा है।

वन विभागीय अधिकारियों को सीएम की फटकार, दिए ये निर्देश

राज्य में बढ़ते तापमान व गर्म हवाओं के चलते वन आग की ज्वाला में धधक रहे है। वनों के इस तरह जलने से आबादी क्षेत्र में रह रहे लोगों में भी दहशत है। वनों में आग बढ़ने पर आबादी क्षेत्र में आने का खतरा बना हुआ है। मुख्यमंत्री ने सभी जिलों के जिलाधिकारियों को वगाग्नि पर ठोस व प्रभावपूर्ण कदम उठाने के निर्देश दिए है।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने वन विभाग के अधिकारियों को आडे़ हाथों लेते हुए उनसे पूछा कि उन्होंने क्या तैयारी की थी ? अगर तैयारी पूरी थी तो परिणाम क्यों नहीं मिला ? मुख्यमंत्री ने वन विभाग के नोडल अधिकारी वीपी गुप्ता और डीएफओ पौड़ी को फटकार लगाते हुए कार्यप्रणाली में सुधार लाने के निर्देश दिए। उन्होंने सभी जिलाधिकारियों को भी हिदायत दी कि अपने जनपदों में वनाग्नि की घटनाओं की जवाबदेही उन्हीं की होगी। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि प्रभागीय वनाधिकारी की परफॉर्मेंस एप्रेजल रिर्पोट में वनाग्नि की रोकथाम के प्रयासों तथा उनके परिणामों को भी दर्ज किया जाय। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि जिलाधिकारियों और वन विभाग, स्थानीय समुदायों को अपने साथ जोड़ें। स्थानीय लोगों की मदद के साथ, वनों की प्रभावी सुरक्षा की जा सकती है।

मुख्यमंत्री ने वनाग्नि की रोकथाम के लिये कुल प्रावधानित बजट 12 करोड़ 37 लाख का 50 प्रतिशत ही जारी किये जाने पर भी सख्त नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने वन विभाग को फटकार लगाते हुए कहा कि, ‘‘आग अभी लगी है, आप पैसा कब के लिये बचा रहे हैं।’’ उन्होंने शेष राशि तत्काल जनपदों देने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी जिलाधिकारी आपदा प्रबंधन तंत्र तथा आपदा प्रबंधन मद में उपलब्ध धनराशि का भी समुचित प्रयोग करें। सभी जनपदों में आपाद प्रबंधन मद में पांच-पांच करोड़ की धनराशि दी गई है जिसकी 10 प्रतिशत राशि से उपकरण क्रय किये जा सकते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि वनों की आग सिर्फ वन विभाग की समस्या नहीं है। अन्तरविभागीय समन्वय कर इससे पूरी क्षमता के साथ लड़ा जाय।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वन विभाग वर्षा काल का इंतजार न करे और अभी से अपने प्रयासों को तेज करे। जिन जनपदों में एक्टिव फायर की रिपोर्ट नहीं है, उन्हें भी सजग रहने की जरूरत है।
वनाग्नि की घटनाओं में सम्बन्धित नोडल अधिकारी ने बताया कि अभी तक कुल 776 घटनाएं दर्ज हुई है, जिनमें 1271 हेक्टेयर क्षेत्रफल प्रभावित हुआ है। 40 मास्टर कंट्रोल रूम स्थापित किये गये है।

राज्य में आने वाले श्रद्धालु अच्छी छवि लेकर जायेंः त्रिवेन्द्र

उत्तराखंड पयर्टन राज्य है। यहां आने वाले श्रद्धालु राज्य की अच्छी छवि लेकर वापस जाये। शहरी क्षेत्रों की जनता की प्राथमिकता स्वच्छता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि योजनाएं धरातल पर दिखनी चाहिये। सभी प्रयासों का परिणाम क्या निकला, इस पर बात होनी चाहिये। जनता को परिणाम से सरोकार होता है।

मुख्यमंत्री ने स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के लिये निर्धारित गतिविधियों में शीर्ष चार-पांच गतिविधियां चिन्हित कर उन पर पूरा ध्यान केन्द्रित करने को कहा। मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि स्मार्ट सिटी के लिये पूर्व निर्धारित क्षेत्रफल में कुछ वृद्धि करने पडे तो उसका भी प्रस्ताव बनायें। उन्होंने कहा कि विभिन्न विभागों द्वारा विद्युत तार, पेयजल लाईन, सीवर, टेलीफोन आदि हेतु सड़कों की खुदाई कर दी जाती है। इसको रोकने के लिये सभी मुख्य मार्गों पर परमानेंट डक्ट बनाने पर विचार किया जाय। इस डक्ट में समय-समय पर आवश्यकतानुसार तारें-लाइनें डाली जा सकती हैं। उन्होंने मुख्य सचिव को इस दिशा में व्यापक विचार-विमर्श करने के निर्देश भी दिये।   
    
 मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को नसीहत दी कि वे चार पहिया वाहनों के स्थानों पर दो पहिया वाहनों के द्वारा भीडभाड वालों इलाकों में जाकर स्वच्छता, ट्रैफ़िक आदि का हाल जाने। मुख्यमंत्री ने मार्च 2019 तक प्रधानमंत्री आवास योजना हेतु एक लाख 4971 लाभार्थियों को आवास अनुमन्य करने के निर्देश दिये। मुख्यमंत्री ने कहा कि हर गरीब को घर देना सरकार की शीर्ष प्राथमिकता है। वर्ष 2022 तक सबके लिये आवास के प्रधानमंत्री के संकल्प को पूरा करना है। उन्होंने कहा कि यदि दिशा में मौजूदा आवास नीति में कोई प्रावधान आड़े आ रहे हो तो नीति में संसोधन भी किया जायेगा। मुख्यमंत्री ने मुख्य सचिव को राज्य स्तरीय बैंकर्स कमेटी तथा सभी जिलाधिकारियों को जिला स्तरीय बैंकर्स कमेटी की मीटिंग में इस तथ्य को को उठाने को कहा। उन्होंने कहा कि बैंकों द्वारा निरस्त किये गये आवदनों की रैण्डम जांच जिलाधिकारियों स्वयं करें।

वन पंचायतों की क्षमता विकास पर देंगे विशेष बलः सीएम

सचिवालय में वन विभाग की समीक्षा बैठक लेते वक्त सीएम त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि जो वन पंचायतें अच्छा कार्य कर रही है। उन्हें जिला व प्रदेश स्तर पर सम्मानित किया जायेगा। साथ ही वन पंचायतों की क्षमता विकास पर विशेष बल दिया जाये।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि उत्तराखण्ड वन संसाधन प्रबन्धन परियोजना के तहत जिन 750 वन पंचायतों का चयन किया गया है, इनमें जल संरक्षण, उन्नत किस्म के पौध रोपण एवं आर्गनिक उत्पादों को अधिक बढ़ावा दिया जाए। वन पंचायतों के लिए जो पौधे उपलब्ध कराए जा रहे हैं, उनमें फलदार वृक्ष, चारा प्रजाति, औषधीय वृक्ष उपलब्ध कराये जाएं। वृक्षों को पानी की उपलब्धता के लिए वर्षा जल संचय की व्यवस्था भी की जाए। परम्परागत तरीको से जल संरक्षण के लिए चाल-खाल, तालाब एवं चैक डेम बनाये जाएं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड के विभिन्न क्षेत्रों में वहां की पारिस्थितिकी के अनुसार वृक्षारोपण, मसालों की खेती, एरोमैटिक खेती आदि पर कार्य किया जाए। जिससे वन पंचायतों को आर्थिक लाभ हो सके एवं लोगों की आजीविका में वृद्धि हो सके। वन पंचायतों के अन्तर्गत पेयजल स्रोतों के पुनर्जीवीकरण का कार्य भी किया जाए। उन्होंने कहा कि जितने भी कार्य किये जा रहे हैं, उनकी जियो टैगिंग की जाए। इस प्रोजेक्ट को सफल बनाने के लिए सभी सम्बन्धित विभाग आपसी समन्वय से कार्य करें।

 मुख्यमंत्री ने कहा कि क्षतिपूरक वनीकरण निधि प्रबंधन एवं नियोजन प्राधिकरण (उत्तराखण्ड कैम्पा) के तहत वनों के संरक्षण, संवर्द्धन, मृदा एवं जल के संग्रहण तथा सूख रहे जल स्रोतों के पुनरोद्धार के लिए विशेष कार्ययोजना बनाई जाये। उन्होंने कहा कि कैम्पा के अन्तर्गत स्थानीय लोगों को रोजगार से जोड़ने के लिए वृक्षारोपण एवं उनका अनुरक्षण, जल संरक्षण से सम्बन्धित कार्यों पर अधिक बल दिया जाए।