सीएस ने प्रमुख सचिव सिंचाई को 16 क्लस्टर के लिए निश्चित सिंचाई व्यवस्था उपलब्ध कराए जाने के दिए निर्देश

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने उत्तराखण्ड इंटीग्रेटेड हॉर्टिकल्चर डेवलपमेंट प्रोजेक्ट के संबंध में अधिकारियों के साथ बैठक ली। बैठक के दौरान प्रदेश के उत्तराखंड इंटीग्रेटेड हॉर्टिकल्चर डेवलपमेंट प्रोजेक्ट के सभी घटकों पर विस्तार से चर्चा हुई एवं विभिन्न दिशा निर्देश दिए गए।

मुख्य सचिव ने जाइका से वित्तपोषित उत्तराखण्ड एकीकृत बागवानी विकास योजना (परियोजना अवधि – अप्रैल 2022 – दिसंबर 2029) को पीएम गतिशक्ति पर अपलोड किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इससे इस प्रोजेक्ट की जीआईएस आधारित डिजिटल मैपिंग हो सकेगी। इससे परियोजना के अन्य घटकों से एकीकरण और समन्वय आसानी से हो सकेगा। उन्होंने इस योजना के वर्षवार लक्ष्य निर्धारित करते हुए, कार्ययोजना प्रस्तुत किए जाने के निर्देश दिए। साथ ही, उन्होंने प्रोजेक्ट के तहत् 4 जनपदों नैनीताल, पिथौरागढ़, टिहरी और उत्तरकाशी के 16 विकासखण्डों के 16 क्लस्टर आधारित बिजनेस ऑर्गनाईजेशन (सीबीबीओ) का अलग-अलग समीक्षा किए जाने की बात कही। कहा कि कौन सा क्लस्टर किस क्षेत्र में अच्छा कर रहा है, इसकी समीक्षा कर अवगत कराया जाए।

मुख्य सचिव ने कहा कि यहाँ अच्छा पोटेंशियल है, इन क्षेत्रों के लिए विशेष रूप से सिंचाई सुविधा विकसित करने की आवश्यकता है। उन्होंने प्रमुख सचिव सिंचाई को इन 16 क्लस्टर के लिए निश्चित सिंचाई व्यवस्था उपलब्ध कराए जाने के निर्देश दिए। इसके लिए सिंचाई एवं लघु सिंचाई विभाग व्यवस्था सुनिश्चित करेंगे। कहा कि वर्षा आधारित सिंचाई व्यवस्था से ही उत्तराखण्ड एकीकृत बागवानी विकास योजना को सफल बनाया जा सकेगा।

मुख्य सचिव ने नए कहा कि इन क्षेत्रों के लिए सप्लाई चेन विकसित की जाए। साथ ही छोटे कोल्ड स्टोरेज तैयार किए जाएं। उन्होंने योजना के अंतर्गत 30 मीट्रिक टन के कोल्ड स्टोरेज रूम को पर्वतीय क्षेत्रों में आवश्यकता के अनुरूप छोटा किया जा सकता है। और अलग-अलग साइज के बनाए जा सकते हैं। और अधिक आवश्यकता पड़ने पर इनकी संख्या बढ़ायी जा सकती है। उन्होंने इसके लिए जाइका से सहमति लेते हुए कोल्ड स्टोरेज चेन के लिए विभिन्न साइज के स्टोरेज बनाए जाने की बात कही। उन्होंने सोलर आधारित कोल्ड स्टोरेज की सम्भावनाएं तलाशे जाने की भी बात कही।

मुख्य सचिव ने पॉलीहाउस योजना की साप्ताहिक समीक्षा करते हुए निर्धारित समय पर परियोजना पूर्ण किए जाने के भी निर्देश दिए हैं। साथ ही, महक क्रांति के अंतर्गत 2026 से 2036 तक प्रत्येक वर्ष का वर्षवार लक्ष्य निर्धारित करते हुए योजनाएं तैयार किए जाने की बात कही। कहा कि महक क्रांति को सफल बनाने के लिए क्वालिटी मटेरियल की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।

हरिद्वार में मुख्यमंत्री ने विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर शहीदों को किया नमन

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी उत्तरांचल पंजाबी महासभा द्वारा प्रेम नगर आश्रम हरिद्वार में आयोजित विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस कार्यक्रम में सम्मिलित हुए। कार्यक्रम में भारत विभाजन की त्रासदी में शहीद हुए लाखों भारतीयों को श्रद्धांजलि अर्पित कर उनके बलिदान को याद किया गया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 1947 का विभाजन केवल भारत की भौगोलिक सीमाओं का बंटवारा नहीं था, बल्कि यह करोड़ों लोगों की साझा विरासत, संस्कृति, पहचान और भावनाओं का भी विस्थापन था। सदियों से साथ रहने वाले लोग रातों-रात एक-दूसरे से अलग हो गए और लाखों परिवारों को अपना घर-बार छोड़कर विस्थापन का दंश झेलना पड़ा। उन्होंने विभाजन के दौरान जान गंवाने वाले निर्दाेष लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि इस दर्दनाक इतिहास को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना आवश्यक है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 14 अगस्त को विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के रूप में मनाने का निर्णय ऐतिहासिक है। इसका उद्देश्य उन पीड़ित परिवारों के संघर्ष और बलिदान को स्मरण करना तथा नई पीढ़ी को देश की एकता, अखंडता और सामाजिक सद्भाव के प्रति जागरूक करना है। उन्होंने कहा कि आज देश अपनी सांस्कृतिक जड़ों और गौरवशाली विरासत से पुनः जुड़ रहा है। अयोध्या में श्रीराम मंदिर, केदारनाथ-बद्रीनाथ धाम के पुनर्निर्माण, महाकाल लोक और करतारपुर कॉरिडोर जैसे कार्यों का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत अपनी विरासत को दिव्यता और भव्यता के साथ पुनर्स्थापित कर रहा है। उन्होंने अनुच्छेद 370 के प्रावधानों में बदलाव, तीन तलाक की प्रथा पर रोक, नागरिकता संशोधन कानून, वक्फ कानून में संशोधन तथा 1984 के सिख दंगा पीड़ितों को न्याय दिलाने जैसे निर्णयों का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में यह सब संभव हो पाया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड के विकास, समृद्धि और स्वाभिमान के लिए राज्य सरकार निरंतर कार्य कर रही है। दूरस्थ क्षेत्रों से लेकर शहरी क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाओं, स्वच्छ पेयजल और आधारभूत ढांचे को मजबूत किया जा रहा है। साथ ही राज्य की सांस्कृतिक विरासत और धार्मिक स्थलों के संरक्षण एवं संवर्धन पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आगामी कुंभ को ऐतिहासिक, भव्य और सुरक्षित बनाने के लिए व्यापक स्तर पर तैयारियां की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा विकास के साथ-साथ उत्तराखंड की संस्कृति, परंपरा और पहचान को संरक्षित रखने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम स्थल पर ब्लड कैम्प का अवलोकन किया तथा रक्तदान करने वालों को प्रशस्ति पत्र प्रदान किया तथा इस अवसर पर विभाजन विभीषिका प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया तथा विभिन्न जनपदों से आए उत्तरांचल पंजाबी महासभा के बुजुर्गों को शॉल भेट कर सम्मानित भी किया गया।

कार्यक्रम में हरिद्वार सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत ने विभाजन की ऐतिहासिक परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए कहा कि 14 अगस्त 1947 तक भारत अखंड था और मध्यरात्रि के बाद देश का विभाजन हुआ। उन्होंने कहा कि विभाजन के समय एक बड़ी विडंबना यह थी कि देश का बंटवारा तो हो गया, लेकिन भारत और पाकिस्तान की सीमाएं तत्काल स्पष्ट नहीं थीं।

उन्होंने कहा कि भारत-पाकिस्तान की सीमा निर्धारित करने की जिम्मेदारी अंग्रेज अधिकारी सर सिरिल रेडक्लिफ को सौंपी गई, जिन्हें भारत की सामाजिक और सांस्कृतिक परिस्थितियों की पर्याप्त जानकारी नहीं थी। उन्होंने कहा कि जिस व्यक्ति ने भारत को पहले समझा तक नहीं था, उसे इतने बड़े और संवेदनशील कार्य की जिम्मेदारी सौंपना विभाजन की प्रक्रिया की गंभीरता को दर्शाता है।

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक एवं प्रदीप बत्रा ने भी अपने विचार व्यक्त किए।

कार्यक्रम में मेयर हरिद्वार किरण जैसल, नगर पालिका अध्यक्ष शिवालिक नगर राजीव शर्मा, विधायक आदेश चौहान, सविता कपूर, प्रदेश अध्यक्ष उत्तरांचल पंजाबी महासभा करण मल्होत्रा, प्रदेश महामंत्री राजकुमार फुटेला, जिला अध्यक्ष प्रमोद पांधी, जिला अध्यक्ष प्रवीण कुमार, प्रदेश उपाध्यक्ष राज ओबराय, गढ़वाल मंडल उपाध्यक्ष राजकुमार अरोड़ा, जिला महामंत्री प्रदीप कालरा राम अरोड़ा, राज्य मंत्री विश्वास डाबर सहित विभिन्न जनपदों से आए उत्तरांचल पंजाबी महासभा के लोग मौजूद रहे।

स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर शहीद अमित कुमार के परिजनों से मिले सीएम धामी

स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर शहीदों के परिजनों के सम्मान एवं उनसे आत्मीय संवाद की कड़ी में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी आज देहरादून के भाऊवाला स्थित शहीद अमित कुमार अणथ्वाल के निवास पर पहुंचे और उनके परिजनों से भेंट की। मुख्यमंत्री ने शहीद के पिता नागेंद्र प्रसाद अणथ्वाल सहित परिवार के अन्य सदस्यों से उनकी कुशलक्षेम जानी तथा वीर सपूत को श्रद्धापूर्वक नमन करते हुए शहीद के परिजनों को सम्मानित किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वतंत्रता दिवस केवल उत्सव का अवसर नहीं, बल्कि उन वीर सपूतों के सर्वाेच्च बलिदान को स्मरण करने का भी पावन पर्व है, जिन्होंने राष्ट्र की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व अर्पित किया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार शहीदों के परिवारों के प्रति गहरी संवेदना और सम्मान का भाव रखती है तथा उनके साथ सदैव खड़ी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि शहीद परिवारों का सम्मान पूरे समाज और राष्ट्र का सम्मान है।

विदित है कि पौड़ी गढ़वाल जनपद के कल्जीखाल विकासखंड के ग्राम क्वाला के वीर सपूत शहीद अमित कुमार अणथ्वाल ने राष्ट्र की रक्षा करते हुए सर्वाेच्च बलिदान दिया था। वे 9 दिसंबर 2011 को गढ़वाल राइफल्स में भर्ती हुए थे और बाद में 4 पैरा स्पेशल फोर्स में अपनी सेवाएं दे रहे थे। उनकी तैनाती जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा क्षेत्र में थी। अप्रैल 2020 में केरन सेक्टर में आतंकवादियों के साथ हुई मुठभेड़ के दौरान उन्होंने अद्वितीय वीरता का परिचय देते हुए अपने साथियों के साथ पाँच आतंकवादियों को मार गिराया। इस साहसिक अभियान में अमित कुमार अणथ्वाल सहित पाँच वीर जवानों ने मातृभूमि की रक्षा करते हुए सर्वाेच्च बलिदान दिया।

शहीद अमित कुमार अणथ्वाल की वीरता और पराक्रम को राष्ट्र ने सम्मानित करते हुए उन्हें सेना मेडल (मरणोपरांत) से अलंकृत किया है।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि उत्तराखंड की वीरभूमि ने देश को अनेक वीर दिए हैं और शहीद अमित कुमार अणथ्वाल का नाम भी उन अमर वीरों में सदैव सम्मान और गर्व के साथ लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार उनके बलिदान और वीरता को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने तथा शहीद परिवारों के सम्मान और कल्याण के लिए निरंतर प्रयासरत रहेगी।

दून विवि में सीएम धामी ने युवाओं से किया संवाद, कहा बदलती तकनीक के अनुरूप फ्यूचर के लिये रेडी हो युवा

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दून विश्वविद्यालय में छात्र-छात्राओं से संवाद किया। संवाद के दौरान विद्यार्थियों ने पलायन रोकने, युवाओं को रोजगार से जोड़ने, उत्तराखंड को उच्च शिक्षा का हब बनाने, विज्ञान, तकनीक एवं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के दौर में रोजगार की नई संभावनाओं तथा देहरादून में यातायात जाम की समस्या के समाधान को लेकर मुख्यमंत्री से सवाल पूछे।

पलायन रोकने और युवाओं को रोजगार से जोड़ने से संबंधित सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में अब रिवर्स माइग्रेशन की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ रही है। मुख्यमंत्री उद्यमशाला योजना, मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना एवं सौर स्वरोजगार योजना सहित पर्यटन, उद्योग और फिल्म नीति के माध्यम से युवाओं को रोजगार एवं स्वरोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि स्वयं सहायता समूहों को सशक्त बनाने और उनके माध्यम से स्थानीय स्तर पर आजीविका के अवसर बढ़ाने के लिए भी राज्य सरकार द्वारा निरंतर कार्य किया जा रहा है।

उच्च शिक्षा को मजबूत करने के संबंध में मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार उच्च शिक्षण संस्थानों के आधुनिकीकरण और आधारभूत सुविधाओं के विस्तार पर विशेष ध्यान दे रही है। देहरादून में देश की पांचवीं साइंस सिटी का निर्माण किया जा रहा है, जिससे प्रदेश में विज्ञान एवं अनुसंधान के क्षेत्र में नए अवसर उपलब्ध होंगे तथा युवाओं को आधुनिक वैज्ञानिक संसाधनों से जुड़ने का अवसर मिलेगा।

विज्ञान, तकनीक एवं एआई के दौर में रोजगार की संभावनाओं से जुड़े सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि तकनीकी बदलावों के साथ रोजगार के स्वरूप में परिवर्तन हो रहा है और नई संभावनाएं भी तेजी से सामने आ रही हैं। उन्होंने युवाओं से कहा कि उन्हें बदलती तकनीक के अनुरूप अपने कौशल को विकसित करते हुए ‘फ्यूचर रेडी’ बनना होगा। सरकार भी युवाओं को आधुनिक कौशल एवं नई तकनीकों से जोड़ने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है।

देहरादून में यातायात जाम की समस्या के संबंध में मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार इसके स्थायी समाधान की दिशा में गंभीरता से कार्य कर रही है। बिंदाल और रिस्पना नदी के ऊपर एलिवेटेड रोड के निर्माण की दिशा में कार्य किए जा रहे हैं। इन परियोजनाओं के पूरा होने से देहरादून शहर में यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने और जाम की समस्या के समाधान में मदद मिलेगी।

सीएम धामी ने दून विवि के बॉयोलॉजिकल साइंस प्रयोगशाला भवन और केंद्रीय पुस्तकालय भवन का किया लोकार्पण

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दून विश्वविद्यालय में दीक्षारम्भ सत्र 2026-27 एवं युवा संवाद कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने विश्वविद्यालय में प्रवेश लेने वाले नए विद्यार्थियों का स्वागत करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। मुख्यमंत्री ने कहा कि विश्वविद्यालय जीवन केवल कक्षा और परीक्षा तक सीमित नहीं होता, बल्कि यह व्यक्तित्व निर्माण, नई सोच विकसित करने और जीवन की दिशा निर्धारित करने का महत्वपूर्ण अवसर होता है।

मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर दून विश्वविद्यालय में 11 करोड़ 20 लाख रुपये की लागत से निर्मित बॉयोलॉजिकल साइंस प्रयोगशाला भवन तथा 17 करोड़ 39 लाख रुपये की लागत से निर्मित केंद्रीय पुस्तकालय भवन का लोकार्पण किया। साथ ही, दून यूनिवर्सिटी कम्युनिटी रेडियो स्टेशन 88.4 एफएम का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि ये संस्थागत सुविधाएं विश्वविद्यालय की शैक्षणिक एवं शोध गतिविधियों को नई गति देने के साथ ही विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।

मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर घोषणा की कि दून विश्वविद्यालय का केंद्रीय पुस्तकालय बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के नाम से जाना जायेगा। दून यूनिवर्सिटी कम्युनिटी रेडियो स्टेशन 88.4 एफएम के सफल संचालन के लिये कार्यक्रम समन्वयक एवं तकनीकी सहायक के 02 पद सृजित किये जायेंगे। दून विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों के लिए 02 इलेक्ट्रिक बसों की व्यवस्था की जायेगी। दून विश्वविद्यालय में विदेशी भाषा विभागों को सुदृढ़ किया जायेगा। ताकि वे राज्य के अन्य शिक्षण संस्थानों में अध्ययनरत विद्यार्थियों को कौशल आधारित शिक्षा प्रदान करने और राज्य के युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने में सहायक सिद्ध हो सके। विदेशी भाषाओं स्पेनिश, जर्मन, फ्रेंच, चाईनीज एवं जापानी भाषा विभागों के लिये यथोचित पदों का सृजन किया जायेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी राष्ट्र की सबसे बड़ी ताकत उसकी युवा शक्ति होती है। जिस देश का युवा सपने देखने का साहस, उन्हें पूरा करने का संकल्प और कठिन परिश्रम करने की क्षमता रखता है, उस देश को आगे बढ़ने से कोई नहीं रोक सकता। भारत की विशाल युवा आबादी विकसित भारत की सबसे मजबूत नींव है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में युवाओं को नए अवसर उपलब्ध कराने के लिए मेक इन इंडिया, डिजिटल इंडिया, स्टार्टअप इंडिया, स्किल इंडिया जैसी महत्वपूर्ण पहलें संचालित की जा रही हैं। आज युवा नौकरी तलाशने के साथ-साथ उद्यमिता और रोजगार सृजन की दिशा में भी आगे बढ़ रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज का युग नवाचार का है। राज्य सरकार प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक, गुणवत्तापूर्ण और भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप विश्वविद्यालयों और शोध संस्थानों में एआई, मशीन लर्निंग और बिग डेटा जैसे आधुनिक विषयों को बढ़ावा दिया जा रहा है। वैज्ञानिक अनुसंधान को प्रोत्साहित करने के लिए प्रदेश में साइंस सिटी और एस्ट्रो पार्क जैसी परियोजनाओं पर भी कार्य किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार उच्च शिक्षा के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के साथ ही शिक्षा और शोध की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दे रही है। प्रदेश में नए महाविद्यालयों और मॉडल कॉलेजों की स्थापना, महिला छात्रावास, आईटी लैब एवं परीक्षा भवन जैसी सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। शिक्षकों की कमी दूर करने के लिए नई भर्तियों के माध्यम से भी प्रयास किए जा रहे हैं । मुख्यमंत्री शोध प्रोत्साहन योजना के माध्यम से प्राध्यापकों को 18 लाख रुपये तक का शोध अनुदान उपलब्ध कराया जा रहा है तथा उत्कृष्ट शोध कार्यों को प्रोत्साहित किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए भी सरकार द्वारा आवश्यक सहयोग दिया जा रहा है। यूपीएससी, एनडीए और सीडीएस जैसी परीक्षाओं की लिखित परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले युवाओं को साक्षात्कार की तैयारी के लिए 50 हजार रुपये तक की सहायता प्रदान की जा रही है। उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता ऐसी पारदर्शी व्यवस्था स्थापित करना है, जिसमें युवाओं की मेहनत के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ न हो। राज्य में देश के सबसे सख्त नकल विरोधी कानूनों में से एक लागू कर भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित की गई है। उन्होंने कहा कि इसी पारदर्शी व्यवस्था के परिणामस्वरूप पिछले पांच वर्षों में 34 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी सेवाओं में नियुक्ति मिली है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का युवा विकास संबंधी विजन केवल सरकारी नौकरियों तक सीमित नहीं है। मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना सहित विभिन्न योजनाओं के माध्यम से युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं। होम-स्टे, ऑर्गेनिक फार्मिंग, पर्यटन और स्थानीय उद्यमों को बढ़ावा देकर युवाओं के लिए स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के अवसर सृजित किए जा रहे हैं, ताकि रोजगार की तलाश में युवाओं को अपनी मिट्टी और घर-परिवार से दूर न जाना पड़े। उन्होंने कहा कि सरकार का संकल्प है कि उत्तराखंड की जवानी और पानी दोनों उत्तराखंड के काम आएं।

मुख्यमंत्री ने युवाओं से आह्वान किया कि वे विश्वविद्यालय में उपलब्ध अवसरों का अधिकतम लाभ उठाएं, अपनी क्षमताओं को पहचानें, नई सोच के साथ आगे बढ़ें और राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका निभाएं। उन्होंने स्वामी विवेकानंद के संदेश का उल्लेख करते हुए युवाओं से लक्ष्य प्राप्ति तक निरंतर प्रयास करते रहने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड को देश का सर्वश्रेष्ठ राज्य बनाने के संकल्प में युवाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।

मुख्य सचिव ने दिए प्रदेश तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र के लिए रोड मैप तैयार करने के निर्देश

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने सचिवालय में तकनीकी शिक्षा विभाग की समीक्षा की। मुख्य सचिव ने प्रदेश के तकनीकी शिक्षण संस्थानों, फैकल्टी एवं विद्यार्थियों के विषय में विस्तार से जानकारी ली। बैठक के दौरान, उन्होंने गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर फोकस करने पर जोर दिया। साथ ही कहा कि हमें शिक्षण संस्थानों एवं इंडस्ट्री के बीच का गैप कम करने की आवश्यकता है। उन्होंने प्रदेश तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र के लिए रोड मैप तैयार किए जाने के निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने कहा कि इंजीनियरिंग और पॉलीटेक्निक कॉलेज से पासआउट होने वाले छात्रों को पीएम इंटर्नशिप योजना का लाभ दिलाने के लिए उनका मार्गदर्शन किए जाने की आवश्यकता है, इसके तहत युवाओं को देश की टॉप 500 कंपनियों में वास्तविक कार्य अनुभव मिलता है, साथ ही प्रति माह स्टाइपेंड और एकमुश्त जॉइनिंग अनुदान दिया जाता है। उन्होंने कहा कि हमारे युवाओं को विदेश में भी रोजगार मिल सके इसके लिए अपने कॉलेजों में ओवरसीज एम्प्लॉयर्स को प्लेसमेंट के लिए लगने वाले रोजगार मेलों में आमंत्रित किया जाए।

मुख्य सचिव ने प्रदेश में 5-6 स्थानों पर तकनीकी शिक्षा हब के रूप में विकसित किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि यहां लैब, लाइब्रेरी और हॉस्टल्स जैसी सभी प्रकार की सुविधाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध करायी जाएं। उन्होंने कहा कि नए प्रोजेक्ट्स का होलिस्टिक प्लान तैयार किया जाए, जिसमें लैब, लाइब्रेरी, होस्टल्स आदि का सम्पूर्ण प्लान उपलब्ध हो। उन्होंने पुराने इंजीनियरिंग और पॉलिटेक्निक कॉलेज भी सैचुरेशन प्लान तैयार किए जाने की बात कही। कहा कि फंडिंग कोई समस्या नहीं है, अच्छे प्रोजेक्ट्स तैयार किए जाने चाहिए।

मुख्य सचिव ने अपने कॉलेजों को मजबूत किए जाने की आवश्यकता पर जोर दिया। कहा कि विभागों को स्टडी और कंसल्टेंसी के लिए एजेंसियां बाहर से हायर करने पड़ते हैं। हम राज्य में ऐसे इंस्टीट्यूशंस तैयार कर सकते हैं, जो विभिन्न विभागों को स्टडी और कंसल्टेंसी उपलब्ध करायें। इसके लिए अपने कॉलेजों को मजबूत किया जाए।साथ ही, उन्होंने इसके लिए फैकल्टी रिक्रूटमेंट पर भी फोकस किए जाने पर जोर दिया।

इस अवसर पर सचिव डॉ. रंजीत कुमार सिन्हा, वीसी यूटीयू डॉ. तृप्ता ठाकुर सहित पॉलीटेक्निक कॉलेजों के प्रधानाचार्य उपस्थित थे।

बाल लिंगानुपात में सुधार और बेटियों के प्रति सकारात्मक सामाजिक वातावरण बनाने की डीएम की पहल

बाल लिंगानुपात में सुधार एवं बेटियों के प्रति समाज में सकारात्मक सोच विकसित करने के उद्देश्य से जनपद के समस्त शैक्षणिक संस्थानों में 15 अगस्त 2026 को कन्या भ्रूण संरक्षण प्रतिज्ञा दिलाई जाएगी।

जिला समुचित प्राधिकारी, पीसीपीएनडीटी/जिलाधिकारी डॉ0 आशीष चौहान ने इस संबंध में मुख्य शिक्षा अधिकारी को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए हैं। निर्देशों के क्रम में जनपद के समस्त डिग्री कॉलेजों, विद्यालयों एवं अन्य शैक्षणिक संस्थानों में 15 अगस्त को अपने-अपने स्तर पर कन्या भ्रूण संरक्षण प्रतिज्ञा दिलाया जाना सुनिश्चित किया जाएगा।

प्रतिज्ञा के माध्यम से विद्यार्थियों एवं शिक्षकों को लिंग भेद, कन्या भ्रूण हत्या जैसी सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध आवाज उठाने, बेटियों को बेटों के समान प्यार, पोषण, सुरक्षा एवं आगे बढ़ने के समान अवसर प्रदान करने तथा बेटियों की शिक्षा, स्वास्थ्य और स्वावलंबन के लिए सदैव प्रयासरत रहने का संकल्प दिलाया जाएगा।

प्रतिज्ञा में यह भी संकल्प लिया जाएगा कि घर, समाज एवं आसपास ऐसा वातावरण तैयार किया जाए, जहां प्रत्येक बेटी स्वयं को सुरक्षित महसूस करे तथा गरिमा और सम्मान के साथ जीवन जी सके।

जिला प्रशासन ने सभी शैक्षणिक संस्थानों से अपील की है कि वे इस अभियान में सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित करते हुए अधिक से अधिक विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं कार्मिकों को कन्या भ्रूण संरक्षण के प्रति जागरूक करें।

धामी सरकार में राज्य संपत्तियों के विकास को रफ्तार, टिहरी हाउस में 28 आवास, नवी मुंबई के वाशी और हल्द्वानी की योजनाओं की समीक्षा

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दिशा-निर्देशों में प्रदेश की सरकारी संपत्तियों को आधुनिक सुविधाओं से लैस करने, निर्माण कार्यों में गुणवत्ता सुनिश्चित करने और सरकारी धन के विवेकपूर्ण उपयोग पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इसी क्रम में सचिव आवास एवं राज्य संपत्ति विभाग डॉ. आर. राजेश कुमार के दिशा-निर्देशों में राज्य संपत्ति विभाग से जुड़ी तीन महत्वपूर्ण योजनाओं की समीक्षा की गई। देहरादून के राजपुर रोड स्थित टिहरी हाउस परिसर में प्रस्तावित 28 बहुमंजिला आवासों के निर्माण से लेकर नवी मुंबई के वाशी स्थित राज्य अतिथि गृह और हल्द्वानी सर्किट हाउस के विस्तारीकरण की योजनाओं पर अधिकारियों के साथ विस्तार से चर्चा की गई। बैठकों में योजनाओं को समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ाने के साथ गुणवत्ता और लागत नियंत्रण को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए।

राज्य संपत्ति विभाग के नियंत्रणाधीन देहरादून के राजपुर रोड स्थित टिहरी हाउस परिसर में श्रेणी-5 के 28 आवासों के बहुमंजिला निर्माण की योजना को लेकर विभागीय व्यय वित्त समिति की बैठक आयोजित की गई। सचिव, राज्य संपत्ति विभाग की अध्यक्षता में हुई बैठक में योजना के विस्तृत आगणन और प्रस्तावित निर्माण कार्यों की समीक्षा की गई। योजना की अनुशंसित लागत 4391.14 लाख रुपये निर्धारित की गई है। बैठक में कार्यदायी संस्था लोक निर्माण विभाग, देहरादून की ओर से कार्ययोजना का प्रस्तुतीकरण किया गया। प्रस्तुतीकरण के बाद सचिव ने निर्माण लागत को लेकर स्पष्ट निर्देश दिए कि प्रति वर्ग मीटर निर्माण लागत को न्यूनतम संभव स्तर पर रखा जाए, ताकि सरकारी धन का बेहतर उपयोग हो सके। इसके साथ ही लागत नियंत्रण के साथ निर्माण की गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं करने को कहा गया।

उत्कृष्ट सामग्री के इस्तेमाल पर जोर

सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रस्तावित आवासों के निर्माण में केवल उत्कृष्ट श्रेणी की निर्माण सामग्री का प्रयोग किया जाए। निर्माण कार्य शुरू होने से पहले इस्तेमाल की जाने वाली सामग्री के स्पेसिफिकेशन स्पष्ट रूप से निर्धारित किए जाएं। ठेकेदार के चयन के बाद सामग्री की गुणवत्ता और निर्धारित मानकों का विशेष ध्यान रखने को कहा गया। उन्होंने कार्ययोजना में आवश्यक डिजाइन संशोधन के भी निर्देश दिए। इसके तहत कैंप कार्यालय के क्षेत्रफल को कम करने और कैंप अटेंडेंट एरिया का क्षेत्रफल बढ़ाने को कहा गया। सचिव ने कहा कि सभी सुझावों और संशोधनों को शामिल करते हुए संशोधित विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार कर जल्द शासन के समक्ष प्रस्तुत की जाए, ताकि योजना को आगे बढ़ाने की प्रक्रिया में अनावश्यक देरी न हो।

वाशी स्थित राज्य अतिथि गृह की भी हुई समीक्षा

राज्य संपत्ति विभाग के नियंत्रणाधीन नवी मुंबई के वाशी स्थित राज्य अतिथि गृह की अद्यतन स्थिति को लेकर भी बुधवार को समीक्षा बैठक आयोजित की गई। सचिव राज्य संपत्ति विभाग की अध्यक्षता में हुई बैठक में अतिथि गृह से संबंधित वर्तमान स्थिति और व्यवस्थाओं पर चर्चा की गई। बैठक में अपर सचिव एवं राज्य संपत्ति अधिकारी अभिषेक रूहेला, संयुक्त सचिव सुरेंद्र सिंह रावत तथा लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता नीरज कुमार त्रिपाठी मौजूद रहे। अधिकारियों से राज्य अतिथि गृह की वर्तमान स्थिति से संबंधित जानकारी ली गई और आवश्यक कार्यों को प्राथमिकता के साथ आगे बढ़ाने पर चर्चा हुई। राज्य के बाहर स्थित सरकारी संपत्तियों के बेहतर रखरखाव और उनके प्रभावी उपयोग को लेकर विभाग की ओर से लगातार समीक्षा की जा रही है।

हल्द्वानी सर्किट हाउस में बढ़ेंगी सुविधाएं

जनपद नैनीताल के हल्द्वानी स्थित सर्किट हाउस के गेस्ट हाउस एवं गोदाम के विस्तारीकरण के तहत प्रथम तल पर अतिरिक्त कक्षों के निर्माण की योजना पर भी बैठक में चर्चा की गई। सचिव राज्य संपत्ति विभाग की अध्यक्षता में हुई बैठक में संबंधित कार्ययोजना का प्रस्तुतीकरण किया गया। प्रस्तुतीकरण के बाद सचिव ने अपर सचिव एवं राज्य संपत्ति अधिकारी को संबंधित व्यवस्थाधिकारी के साथ संयुक्त निरीक्षण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मौके की वास्तविक स्थिति का निरीक्षण करने के बाद आवश्यकताओं के अनुरूप आगे की कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। साथ ही पूरे प्रकरण पर समयबद्ध तरीके से अग्रेतर कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए गए, जिससे हल्द्वानी सर्किट हाउस में आवश्यक सुविधाओं के विस्तार का कार्य जल्द आगे बढ़ सके।

गुणवत्ता और लागत नियंत्रण पर सरकार का फोकस

तीनों योजनाओं की समीक्षा में सरकार की प्राथमिकता स्पष्ट नजर आई। एक ओर जहां सरकारी आवासों और अतिथि गृहों में आवश्यक सुविधाओं के विस्तार पर जोर है, वहीं दूसरी ओर निर्माण कार्यों में लागत नियंत्रण और गुणवत्ता को लेकर भी अधिकारियों को स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए जा रहे हैं। विभागीय अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि योजनाओं का क्रियान्वयन निर्धारित मानकों के अनुरूप हो और सरकारी धन का अधिकतम उपयोग जनहित में किया जाए। बैठक में अपर सचिव एवं राज्य संपत्ति अधिकारी अभिषेक रूहेला, संयुक्त सचिव सुरेंद्र सिंह रावत तथा लोक निर्माण विभाग हल्द्वानी के अधिशासी अभियंता प्रत्यूष कुमार उपस्थित रहे।

सचिव आवास डॉ. आर. राजेश कुमार का बयान

सचिव आवास एवं राज्य संपत्ति विभाग डॉ. आर. राजेश कुमार ने कहा कि राज्य संपत्ति विभाग के अंतर्गत आने वाली सभी परिसंपत्तियों और निर्माण योजनाओं में गुणवत्ता, लागत नियंत्रण और समयबद्धता को सर्वाेच्च प्राथमिकता दी जा रही है। टिहरी हाउस परिसर में प्रस्तावित आवासों के निर्माण में उच्च गुणवत्ता की सामग्री के प्रयोग और प्रति वर्ग मीटर लागत को न्यूनतम रखने के निर्देश दिए गए हैं। डिजाइन में आवश्यक संशोधन कर संशोधित डीपीआर जल्द प्रस्तुत करने को कहा गया है। वाशी स्थित राज्य अतिथि गृह और हल्द्वानी सर्किट हाउस की योजनाओं को भी आवश्यक निरीक्षण एवं कार्रवाई के साथ समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा।

मुख्यमंत्री धामी ने लोकगायक नरेंद्र सिंह नेगी के गीतों के अंग्रेजी अनुवाद की पुस्तक का किया विमोचन

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोशल बलूनी स्कूल, हरिद्वार बाईपास, देहरादून में लोकगायक नरेंद्र सिंह नेगी के जन्मदिवस के अवसर पर आयोजित ‘नरेंद्र सिंह नेगी संस्कृति सम्मान समारोह’ में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने नरेंद्र सिंह नेगी के गीतों के अंग्रेजी अनुवाद पर आधारित पुस्तक “Mountain Melodies of Narendra Singh Negi” का विमोचन किया तथा अरुणाचल प्रदेश के प्रख्यात अभिनेता, रंगकर्मी और नाटककार श्री ताई तुगुंग को ‘नरेंद्र सिंह नेगी संस्कृति सम्मान-2026’ प्रदान किया।

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में नरेंद्र सिंह नेगी को जन्मदिवस की हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए उनके उत्तम स्वास्थ्य एवं दीर्घायु की कामना की। उन्होंने कहा कि नेगी उत्तराखंड की लोक संस्कृति के ऐसे पुरोधा हैं, जिन्होंने अपने गीतों और संगीत के माध्यम से राज्य की सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विशिष्ट प्रतिष्ठा दिलाई है। उन्होंने कहा कि नेगी जी के गीतों में उत्तराखंड के जनजीवन, प्रकृति, संघर्ष, संवेदनाओं और सामाजिक सरोकारों की सशक्त अभिव्यक्ति देखने को मिलती है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि नरेंद्र सिंह नेगी के नाम पर दिया जाने वाला यह प्रतिष्ठित सम्मान हिमालयी राज्यों में संस्कृति, साहित्य, कला और सामाजिक सरोकारों के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले व्यक्तित्वों को समर्पित है। उन्होंने श्री ताई तुगुंग को सम्मान प्राप्त होने पर बधाई देते हुए कहा कि उन्होंने न्यीशी भाषा, अरुणाचली हिंदी, रंगकर्म, नाटकों और सिनेमा के माध्यम से अरुणाचल प्रदेश की लोक संस्कृति और परंपराओं को व्यापक पहचान दिलाई है। उनका चर्चित नाटक ‘लप्या’ और फिल्म ‘संगी माई’, जिसका प्रदर्शन कांस फिल्म फेस्टिवल में भी हुआ, उनकी रचनात्मक यात्रा के महत्वपूर्ण उदाहरण हैं।

मुख्यमंत्री ने पुस्तक “Mountain Melodies of Narendra Singh Negi” के विमोचन को उत्तराखंड की लोकभाषा और लोकसंस्कृति के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताया। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह पुस्तक आने वाली पीढ़ियों को नरेंद्र सिंह नेगी के जीवन, व्यक्तित्व और दशकों लंबी संगीत यात्रा से परिचित कराएगी तथा राज्य की सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक परिप्रेक्ष्य में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड की लोक संस्कृति अत्यंत समृद्ध और विविधतापूर्ण है। जागर, बेड़ा, मांगल, खुदेड़, छोपाटी जैसे पारंपरिक गीत तथा ढोल, दमाऊ, हुड़का, मशक, तुर्री और भंकोरा जैसे लोक वाद्य हमारी सांस्कृतिक पहचान के आधार हैं। उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त की कि प्रदेश के अनेक युवा आधुनिक संगीत के साथ लोकगीतों को नए कलेवर में प्रस्तुत कर उन्हें नई पहचान देने का कार्य कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में राज्य सरकार लोकभाषाओं, लोककलाओं, साहित्य और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि लोक कलाकारों को सम्मान और अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से सूचीबद्धकरण की प्रक्रिया को सरल बनाया गया है तथा अब तक 275 सांस्कृतिक दलों और 226 एकल कलाकारों को सूचीबद्ध किया जा चुका है, जिससे उन्हें अपनी प्रतिभा के प्रदर्शन के साथ-साथ रोजगार के अवसर भी प्राप्त हो रहे हैं।

उन्होंने कहा कि ढोल-दमाऊ जैसे पारंपरिक वाद्ययंत्रों और उनसे जुड़े कलाकारों को प्रोत्साहित करने के लिए पात्र कलाकारों को प्रतिवर्ष निःशुल्क वाद्ययंत्र एवं वेशभूषा उपलब्ध कराई जा रही है। साथ ही लोककला और साहित्य को जीवन समर्पित करने वाले वृद्ध एवं आर्थिक रूप से कमजोर कलाकारों, साहित्यकारों और लेखकों की मासिक पेंशन 3 हजार रुपये से बढ़ाकर 6 हजार रुपये प्रतिमाह की गई है, जिसका लाभ वर्तमान में 180 कलाकार प्राप्त कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि गुरु-शिष्य परंपरा को जीवंत बनाए रखने के लिए लोक कलाकारों के माध्यम से छह माह की प्रशिक्षण कार्यशालाओं का आयोजन किया जा रहा है, ताकि नई पीढ़ी अपनी लोककलाओं और परंपराओं को सीखकर आगे बढ़ा सके। उन्होंने बताया कि वर्ष 2025 में ‘दीर्घकालीन साहित्य सेवी सम्मान’ की शुरुआत की गई, जिसके अंतर्गत 5 लाख रुपये की सम्मान राशि प्रदान की जाती है। इसके अतिरिक्त ‘उत्तराखंड साहित्य गौरव सम्मान’ के माध्यम से अब तक हिंदी सहित विभिन्न भाषाओं के 57 साहित्यकारों को सम्मानित किया जा चुका है तथा ‘साहित्य भूषण पुरस्कार’ की भी शुरुआत की गई है, जिसकी सम्मान राशि 5 लाख 51 हजार रुपये निर्धारित की गई है। वर्ष 2022 से अब तक 102 लेखकों की पुस्तकों के प्रकाशन के लिए आर्थिक अनुदान भी प्रदान किया गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार लोकभाषाओं और बोलियों के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए विभिन्न स्तरों पर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य उत्तराखंड को केवल पर्यटन की दृष्टि से ही नहीं, बल्कि साहित्य और संस्कृति के राष्ट्रीय केंद्र के रूप में स्थापित करना है। इसी उद्देश्य से प्रदेश में दो ‘साहित्य ग्राम’ विकसित करने की योजना पर कार्य किया जा रहा है, जहाँ साहित्यकारों के लिए आवास, पुस्तकालय, अध्ययन केंद्र और संगोष्ठी जैसी सुविधाएँ उपलब्ध होंगी। देहरादून में हिमालय सांस्कृतिक केंद्र, आर्ट गैलरी और संग्रहालय जैसी पहलें भी इसी सांस्कृतिक दृष्टि का हिस्सा हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और लोक परंपराओं के संरक्षण के लिए ‘विकल्प रहित संकल्प’ के मूलमंत्र के साथ निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि समाज, कलाकारों और साहित्यकारों के सहयोग से उत्तराखंड की सांस्कृतिक धरोहर और अधिक सशक्त, समृद्ध और प्रेरणादायी बनेगी।

इस अवसर पर लोकगायक नरेंद्र सिंह नेगी, साहित्यकार, कलाकार, संस्कृति प्रेमी, विभिन्न सांस्कृतिक संगठनों के प्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने उत्तराखंड के ‘पूर्ण साक्षर राज्य’ बनने पर सीएम धामी को दी बधाई

केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने उत्तराखंड कोे ‘उल्लास-नव भारत साक्षरता कार्यक्रम’ के तहत ‘पूर्ण साक्षर राज्य’ घोषित किये जाने पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी तथा प्रदेशवासियों शुभकामनाएं दी हैं। ज्ञातव्य है कि उत्तराखंड को यह उपलब्धि 08 जुलाई 2026 को प्राप्त हुई।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को भेजे गये बधाई पत्र में केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा कि यह महत्वपूर्ण उपलब्धि मुख्यमंत्री के दूरदर्शी नेतृत्व, प्रशासनिक प्रतिबद्धता तथा प्रदेशवासियों के सामूहिक प्रयासों का परिणाम है। उन्होंने कहा कि कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद उत्तराखंड ने पूर्ण साक्षरता के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल कर देश के समक्ष एक प्रेरणादायी उदाहरण प्रस्तुत किया है।

केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने कहा कि जहाँ समग्र शिक्षा बाल्यावस्था की प्रारंभिक शिक्षा से लेकर बालवाटिका, पूर्व-प्राथमिक शिक्षा और कक्षा 12 तक स्कूली शिक्षा को सुदृढ़ करते हुए सभी के लिए शिक्षा की पहुँच, समानता और गुणवत्ता सुनिश्चित करती है। वहीं उल्लास उन वयस्क शिक्षार्थियों को सशक्त बनाता है, जो औपचारिक शिक्षा से वंचित रह गए हैं। यह उन्हें आधारभूत साक्षरता, जीवन कौशल और डिजिटल दक्षता भी प्रदान करता है।

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि उत्तराखंड की यह उपलब्धि अन्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी तथा वे समावेशी और समानतापूर्ण साक्षरता के लक्ष्य को प्राप्त करने के अपने प्रयासों को और अधिक गति देंगे।

केन्द्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि सतत शिक्षा, जीवन कौशल और व्यावसायिक प्रशिक्षण के माध्यम से नव-साक्षरों के समग्र सशक्तीकरण तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के उद्देश्यों को आगे बढ़ाने में उत्तराखंड की भूमिका महत्वपूर्ण रहेगी।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उत्तराखंड का ‘पूर्ण साक्षर राज्य’ बनना प्रदेश के लिए गौरव का विषय है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि राज्य सरकार, शिक्षा विभाग के अधिकारियों, शिक्षकों, स्वयंसेवकों और प्रदेशवासियों की सामूहिक प्रतिबद्धता एवं जनभागीदारी का परिणाम है। राज्य सरकार का लक्ष्य साक्षरता तक सीमित न रहकर प्रत्येक नागरिक को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, डिजिटल साक्षरता और आजीवन सीखने के अवसर उपलब्ध कराना है।