साढ़े चार लाख की स्मैक के साथ धर दबोचा

मंगलवार को थाना मुनिकीरेती में पुलिस क्षेत्राधिकारी नरेंद्रनगर रविंद्र कुमार चमोली ने बताया कि सोमवार रात मुनिकीरेती पुलिस और एसओजी की ने मुखबिर की सूचना पर खारास्त्रोत के पास एक स्कूटर सवार को रोका। उसके पास से साढ़े चार लाख की स्मैक बरामद की गई। हत्थे चढ़े आरोपी की पहचान कमल वाधवा पुत्र सुरेंद्र कुमार बाधवा निवासी गली नंबर, 2 गंगानगर, ऋषिकेश के रूप में हुई है।
पुलिस क्षेत्राधिकारी चमोली ने बताया कि यह आरोपी ऋषिकेश, मुनिकीरेती और तपोवन क्षेत्र में स्मैक को बेचने का काम कर रहा था। उसके बारे में काफी से पुलिस डिटेल खंगाल कर रही थी, सोमवार रात को आरोपी को पकड़ने में पुलिस को सफलता मिली। बताया की आरोपी मूल रूप से सहारनपुर का रहने वाला है। कोर्ट में पेश करने के बाद उसे जेल भेजा गया है।

ठगी के आरोपी दो सगे शातिर भाईयों को पुलिस ने किया गिरफ्तार

कोतवाली पुलिस के मुताबिक दो माह पूर्व डबल सिंह रावत निवासी पुत्र स्व. उत्तम सिंह रावत निवासी ग्राम व पोस्ट गंगा भोगपुर, चीला, यमकेश्वर, पौड़ी गढ़वाल ने पुलिस को एक तहरीर दी। जिसमें उन्होंने बताया कि ऋषिकेश बाजार में दो व्यक्तियों ने उनसे एक डॉक्टर का पता पूछा। इसी दौरान उनमें से एक व्यक्ति ने अपने आप को वृंदावन का पुरोहित बताकर धोखे से उनके बैग में रखे 32 हजार रूपये की रकम व कागजात लेकर फरार गया। पीड़ित की तहरीर पर पुलिस ने मामले में धोखाधड़ी का केस दर्ज कर जांच पड़ताल शुरू कर दी। इसीबीच घटनास्थल के आसपास के 35 सीसीटीवी कैमरों की फुटेज गहनता से खंगाली। साथ मुखबिर तंत्रों को भी सक्रिय किया गया। मामले पुलिस को गुरूवार को सफलता मिली, मुखबिर की सूचना पर दो व्यक्तियों को पुलिस ने धर लिया। पुलिस हिरासत में आरोपियों ने धोखाधड़ी करने का जुर्म कबूला। वरिष्ठ उपनिरीक्षक डीपी काला ने हत्थे चढ़े आरोपियों की पहचान अमजद और कबीर अंसारी दोनों पुत्र मोहिउद्दीन निवासी ग्राम गोपालपुर मोहर टोला थाना ठाकुरगंगती जिला गोड़ा, झारखड के रूप में हुई है। दोनों आरोपियों को कोर्ट में पेश किया गया। जहां उन्हें जेल भेजा गया है।

महिला से ठगी में भी थे ये शामिल
पुलिस ने दो माह पूर्व चोपड़ा फार्म, ग्राम खदरी निवासी चंदा सिलस्वाल पत्नी दीपक के साथ हुई ठगी के मामले का भी खुलासा किया।बताया कि दोनों भाई इस घटना में भी शामिल थे, उन्होंने अपना जुर्म कबूल लिया।

लोगों की समस्या का समाधान करने के बहाने ठगते थे आरोपी
पुलिस पूछताछ में दोनों भाईयों ने बताया कि पैसे कमाने के चक्कर के साधुओं के तरीके अपना लेते और समस्या का समाधान करने के बहाना बनाकर धोखा देकर उनका पैसा और ज्वेलरी लेकर फरार हो जाते है। इसी तरह तीन दिन पूर्व भी ऋषिकेश बाजार में एक बुर्जुग को धोखा दिया था।

खोये हुए मोबाईल पाकर खुश हुए 35 लोग

पुलिस ने गुरुवार 35 लोगों के गुम हुए मोबाइल उन्हें सौंपे। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक टिहरी गढ़वाल तृप्ति भट्ट ने गुरुवार को ढालवाला में एसओजी कार्यालय में खोए मोबाइलों को उनके मालिकों को सौंपा। उन्होंने बताया कि ये सभी महंगे मोबाइल हैं, जिनकी कीमत 4 लाख 75 हजार रुपये के आसपास होगी। इन मोबाइलों को खोजने में एओजी प्रभारी एलएम बुटोला और उनकी साइबर सेल की टीम का अहम योगदान रहा। कहा कि मोबाइल के खोने की रिपोर्ट के आधार पुलिस उन्हें विभिन्न राज्यों से खोजकर निकाला।
मौके पर सीओ नरेंद्रनगर रविंद्र कुमार चमोली, मुनिकीरेती थाना निरीक्षक कमल मोहन भंडारी, यातायात निरीक्षक सिद्धार्थ कुकरेती, उपनिरीक्षक विक्रम बिष्ट, हेड कांस्टेबल योगेंद्र सिंह चौहान, कांस्टेबल विकास सैनी आदि मौजूद रहे।

रिटायर फौजी ने पहले की पत्नी की हत्या, फिर खुद को भी गोली से उड़ाया

रानीपोखरी थाना क्षेत्र के रखवाल गांव में रिटायर फौजी ने घर में आपसी विवाद के चलते पहले अपनी पत्नी की अपनी लाइसेंसी बंदूक से गोली मारकर हत्या कर दी। इसके बाद रिटायर फौजी ने खुद को भी गोली मारकर आत्महत्या कर ली। वारदात के बाद पूरे क्षेत्र में सनसनी फैल गई है। घटना की सूचना के बाद मौके पर रानीपोखरी थाना पुलिस पहुंची। पुलिस ने मौके पर जांच पड़ताल शुरू कर दी है।
जानकारी के अनुसार रिटायर फौजी वीर सिंह अपने रिश्तेदारों के घर से आया था। नहाने के लिए पानी गर्म करने के दौरान पत्नी से किसी बात को लेकर विवाद हो गया। इसके बाद गुस्से में रिटायर फौजी ने लाइसेंसी बंदूक से पहले पत्नी को गोली मारकर मौत के घाट उतार दिया। बाद में खुद को भी गोली मारकर आत्महत्या कर ली।

ईमानदारी-महिला बैंक कर्मी की अगुंठी लौटाई

बदलते दौर में ईमानदारी की मिसाल कम ही देखने को मिलती है। लेकिन इसका मतलब यह नही कि ईमानदारी बिल्कुल खत्म ही हो चकी है। समाज में ऐसे लोग है जो अपने कर्तव्यों का सही पालन कर रहे है। इन्ही की बदौलत ईमानदारी आज भी जिन्दा है।
एक महिला बैंक कर्मी देहरादून से रोज ऋषिकेश विश्वनाथ बस सेवा के माध्यम से अपडाउन करती है। रोजमर्रो की जिन्दगी में उनकी अगुंठी कब उंगली से निकलकर बस कहीं गिर गई उन्हें पता ही नही चला। ऐसे में जब उन्हें इसका अहसास हुआ तो वह बहुत परेशान हो गई। उन्होंने इसकी सूचना घर वालों को भी दी। ऐसे में कई जगह ढ़ूढ़ंने के बाद भी उन्हें नही मिली तो उन्होंने थक हारकर बस सेवा कों सपंर्क कर अगुंठी खोने की बात कही।
वहीं, उससे पहले ही बस आपरेटर ने बस में अगुंठी मिलते ही इसे संभाल लिया कि जिस भी यात्री की यह अगुंठी होगी संपर्क करने पर वह दे देंगे। क्यो कि वह इतने यात्रियों की पहचान नही कर सकते है। फिर क्या था था, महिला की आपबीती बताने और पहचान बताने पर अगले दिन महिला बैंक कर्मी की अंगूठी वापिस लौटाई गई। अगुंठी मिलने पर महिला की खुशी का कोई ठिकाना नही रहा और उन्होंने विश्वनाथ बस सेवा के अध्यक्ष कुंवर सिंह नेगी और बस स्टाफ का धन्यवाद दिया।

कागज की गड्डी देकर ठगी करने वाले शातिर ठग पुलिस गिरफ्त में

कोतवाल महेश जोशी ने बताया कि शिवा पुत्र स्व. वीरेंद्र ठाकुर निवासी सुभाष नगर, बनखंडी ने पुलिस को तहरीर देकर बताया कि 20 नवंबर को वे बैंक में पैसा जमा करवाने के लिए गए थे। इस बीच अजनबी लोगों ने उन्हें अपनी बातों में उलझा लिया और रूमाल के अंदर कागज की गड्डी हाथ में थमा दी। बताया कि उनसे शातिर ठगों ने 30 हजार रुपये ठग लिए। तहरीर के आधार पर धोखाधड़ी का केस दर्ज कर एसओजी की टीम के साथ संयुक्त रूप से जांच शुरू कर दी। इस दौरान उक्त बैंक और आसपास के करीब 35 सीसीटीवी कैमरों की डिटेल चेक की गई। साथ ही मुखबिर तंत्र को सक्रिय किया गया।
मंगलवार को मुखबिर की सूचना पर तीन आरोपियों को पुलिस ने बस अड्डे के पास गोपाल नगर के पीछे ग्राउंड से गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के मुताबिक हिरासत में आरोपियों ने अपना जुर्म कबूल कर लिया है। हत्थे चढ़े आरोपियों की पहचान शिवकुमार पुत्र रनछोड़ भाई निवासी पालईया रोड, रेलवे पटरी के सामने, डहग्राम, गांधीनगर, गुजरात, सोमनाथ पुत्र हुकुम सिंह निवासी ग्राम नगली, मेहनाज, नागल, सहारनपुर, यूपी हाल निवासी दोनों रुड़की, सुरेंद्र कुमार पुत्र रंजीत कुमार निवासी ग्राम बगेड़ी, रविदास मंदिर सिविल लाइन, रुड़की के रूप में हुई है। आरोपी शिवकुमार पर पहले भी कोतवाली में ठगी के मामले में मुकदमा दर्ज है। आरोपियों को पुलिस ने कोर्ट में पेश किया, जहां से तीनों को जेल भेज दिया गया है।

सरकार सख्त, 150 से अधिक डॉक्टरों के खिलाफ कुर्की के नोटिस जारी

उत्तराखंड में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए सरकार ने मेडिकल कॉलेजों में बांड की व्यवस्था लागू की है। इसके एवज में डॉक्टरों को कुछ साल पहाड़ के अस्पतालों में सेवाएं देनी होती हैं। इसके उलट सैकड़ों डॉक्टर सस्ती पढ़ाई का लाभ लेकर पहाड़ पर सेवाएं देने से मुकर गए। बांड की शर्तों का उल्लंघन करने पर राज्य के 150 से अधिक डॉक्टरों के खिलाफ प्रशासन ने कुर्की के नोटिस जारी कर दिए हैं। इससे बांड वाले डॉक्टरों में हड़कंप मच गया है।
इन डॉक्टरों को अस्पतालों में तैनात करने के कई जतन किए गए पर सफलता नहीं मिली। अब इन डॉक्टरों के खिलाफ कुर्की की कार्रवाई शुरू कर दी गई है। श्रीनगर मेडिकल कॉलेज की ओर से ऐसे 30 डॉक्टरों की सूची संबंधित जिलों के डीएम को दी गई थी। इस पर जिलाधिकारियों की ओर से उक्त डॉक्टरों को कुर्की के नोटिस जारी कर दिए गए हैं। ऐसे ही हल्द्वानी से मिली सूची के आधार पर भी कई जिलों में कार्रवाई शुरू कर दी गई है। स्वास्थ्य मंत्री डॉ.धन सिंह रावत का कहना है कि सभी सीएमओ से अस्पतालों से गायब बांड वाले डॉक्टरों की सूची मांगी गई है। ऐसे डॉक्टरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही अन्य डॉक्टर भी जो अस्पताल से गायब होंगे, उन्हें तत्काल हटाया जाएगा। बांड वाले डॉक्टरों से ज्वाइन न करने पर हर हाल में वसूली करने को कहा गया है।

डॉक्टरों के गायब होने से सरकार को हो रहा नुकसान
उत्तराखंड में डॉक्टरों के साथ समय-समय पर संशोधित नियमों के अनुसार बीस लाख से एक करोड़ रुपये तक के बांड साइन किए गए। एमबीबीएस डॉक्टर जहां 20 लाख से पचास लाख रुपये तक बांड के दायरे में हैं वहीं, पीजी वाले बांडधारी डॉक्टरों के साथ एक करोड़ रुपये तक के बांड साइन किए गए हैं। इन डॉक्टरों के गायब रहने से सरकार को नुकसान हो रहा है।

एक डॉक्टर ने जमा कराए 34 लाख रुपये
बांड वाले डॉक्टरों पर कुर्की के शिकंजे के बाद इसका असर दिखना भी शुरू हो गया है। श्रीनगर मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. सीएमएस रावत ने बताया कि मेडिकल कॉलेज के एक डॉक्टर, बांड के 34 लाख रुपये जमा करा चुके हैं जबकि कई डॉक्टरों ने ज्वाइन कर लिया है।

अज्ञात वाहन की टक्कर से महिला की मौत

रायवाला थाना पुलिस के मुताबिक शुक्रवार सुबह पुलिस को कंट्रोल रूम से सूचना मिली कि मोतीचूर फ्लाईओवर के पास एक महिला बेसुध हालत में पड़ी है। उसके बाद घटनास्थल पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे लिया और मृतका की शिनाख के प्रयास किए, लेकिन सफलता नहीं मिली। फिलहाल शव को पुलिस ने हरिद्वार स्थित राजकीय चिकित्सालय की मोर्चरी में पहचान 72 घंटे के लिए रखवा दिया है।
रायवाला थानाध्यक्ष भुवन चंद्र पुजारी ने बताया जांच पड़ताल में पता चला कि कार नंबर यूके07 डीटी 6853 के सामने आने से महिला की मौत हुई है। चालक फरार चल रहा है। जिसकी तलाश की जा रही है। बताया जा रहा है कि महिला मानसिक रूप से विक्षिप्त थी, उसकी पहचान के लिए आसपास के थाना क्षेत्रों में सूचना प्रेषित कर दी गई है।

तहसीलदार के ड्राइवर और दिल्ली के टैक्सी चालक का विवाद थाने में पहुंचा

कोतवाली पुलिस के मुताबिक टिहरी जनपद के जाखणीधार तहसील में तैनात तहसीलदार के सरकारी ड्राइवर दौलत राम नैथानी ने पुलिस को तहरीर देकर बताया कि शुक्रवार दोपहर करीब एक बजे वे सरकारी वाहन से हरिद्वार जा रहे थे। इसी बीच तहसील रोड स्थित गौरा देवी चौक पर मामूली विवाद में दिल्ली नंबर की टैक्सी डीएल12सी 5877 के चालक ने उन पर धारधार हथियार से हमला कर लहूलुहान कर दिया। साथ ही लात घूसों भी मारे।
वहीं, इस मामले में टैक्सी चालक सर्वेंद्र रावत ने भी आरोप लगाया कि दोनों गाड़ियां आपस में टच हो गई थी। जिस वजह से विवाद हुआ। प्रशासन की हनक दिखाते हुए तहसीलदार के ड्राइवर ने 20 से 30 लोगों के साथ मिलकर उनके साथ मारपीट की।
कोतवाली वरिष्ठ उपनिरीक्षक डीपी काला ने बताया कि मामले में दोनों पक्ष कोतवाली में पहुंचे। उनकी शिकायत पर जांच की जा रही है।

आरोप सही नही पाये जाने पर न्यायालय ने आरोपित को किया दोषमुक्त

अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ऋषिकेश मन मोहन सिंह की अदालत ने धोखाधड़ी के आरोप से एक आरोपी को दोषमुक्त किया है।
दरअसल, देवेंद्र सूद की ओर से न्यायालय में परिवाद दायर किया गया था। जिसमें बताया गया था कि उनकी आरोपी कय्यूम निवासी ग्राम करौंदी भगवानपुर रूड़की जिला हरिद्वार से वर्षों पुरानी दोस्ती है। 4 नवंबर 2008 को कय्यूम उनकी देहरादून रोड ऋषिकेश स्थित फैक्ट्री के कार्यालय पर आया और रूड़की में जमीन को लेकर 35 लाख रूपये उधार मांगे। साथ ही उधार की रकम ब्याज सहित 10 दिसंबर 2008 तक देने की बात कही। इसके अलावा यह बात भी कही कि तय समय तक उधार की रकम न दे पाने पर 70 लाख रूपये देगा और रूड़की में खरीदी गई जमीन भी देवेंद्र सूद के नाम करेगा। परिवादी देवेंद्र सूद ने अपने परिवाद में न्यायालय को मौके पर प्रत्यक्ष गवाह की बात भी कही थी। परिवाद में इस बात का भी जिक्र किया गया कि कय्यूम ने न ही तय समय पर उधार की रकम वापस दी। बल्कि साफ मना करने के साथ जान से मारने तक की धमकी तक दी गई। इस पर उन्होंने अपने अधिवक्ता के जरिए न्यायालय में कय्यूम के खिलाफ धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज कराया।
अधिवक्ता कपिल शर्मा और उनके सहयोगी राजेश साहनी ने न्यायालय को बताया कि कय्यूम एक निर्धन व्यक्ति है अतः उसकी हैसियत इतनी नहीं है कि वह इतनी भारी भरकम धनराशि से जमीन खरीद सके। न्यायालय ने अधिवक्ता कपिल शर्मा और राजेश साहनी की दलील को सही पाया। इसके अलावा परिवादी देवेंद्र सूद की ओर से न्यायालय में प्रस्तुत गवाह भी अपनी बात को बता पाने में असमर्थ रहे।
न्यायालय ने अधिवक्ता कपिल शर्मा और राजेश साहनी की मजबूत पैरवी की बदौलत आरोपी कय्यूम को दोषमुक्त किया है।