चारधाम यात्रा की बुकिंग रद्द करवा रहे यात्रियों को जीएमवीएन दे रहा सुविधा

वैश्विक महामारी के कारण जहां देशव्यापी लाॅकडाउन हो रहा है, इसी बीच विश्व प्रसिद्ध चारधाम यात्रा की बुकिंग भी रद्द हो रही है। गढ़वाल मंडल विकास निगम को मिली बुकिंग में एक करोड़ 25 लाख की बुकिंग अभी तक रद्द हो चुकी है। जीएमवीएन के यात्रा कार्यालय को बुकिंग रद्द करने के लिए अभी तक दो हजार ईमेल मिल चुकी हैं। इसके अलावा रोजना काॅल आ रही हैं।
जीएमवीएन की ओर से यात्रियों को बुकिंग रद्द नहीं करने की अपील की जा रही है। जीएमवीएन ने यात्रियों को सुविधा दी है कि वे अपनी बुकिंग का अगले दो वर्षों में समयानुसार उपयोग कर सकते हैं। 26 अप्रैल को अक्षय तृतीया पर गंगोत्री एवं यमुनोत्री धाम के कपाट खुल रहे हैं। जबकि 29 अप्रैल को केदारनाथ व 30 अप्रैल को बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने के साथ ही चारधाम यात्रा शुरू हो जाएगी।

गणेश भगवान के कृपा चाहिए तो करें ये उपाय

घर में सुख-समृद्धि बनी रहे इसके लिए जरूरी है कि हम कुछ उपाय भी किरे। बुधवार का दिन बुध ग्रह को समर्पित रहता है। इस दिन किए गए उपाय आपको जिंदगी भर फल प्रदान करेंगे। आइए जानते है कि इन उपायो को जो आपकी जिंदगी समृद्ध कर देंगे। प्रत्येक बुधवार को गणेशजी की पूजा करनी चाहिए। इस दिन मंदिर में जाकर गणेश भगवान को दूर्वा की 11 या 21 गांठ चढ़ाएं। आपको जल्द ही शुभ फल देखने को मिलेंगे।
बुधवार को मूंग की दाल दान करने से कष्टों का निवारण होता है। किसी गरीब अथवा जरूरतमंद को मूंग दान करें और फिर देखें कि कैसे आपके सभी दुख दूर हो जाते हैं। जिनकी कुंडली में बुध ग्रह दोष है वे खासकर इस दिन गणेश भगवान को मोदक का प्रसाद चढ़ाएं। इससे ग्रह के दोष खत्म हो जाएंगे। गाय को हिंदू धर्म में पूजनीय माना गया है। बुधवार के दिन गाय को हरी घास खिलाने से सभी देवी-देवताओं की कृपा बनी रहती है। अगर हरी घास खिलाना संभव ंन हो तो गाय को सुबह की पहली रोटी खिलाएं।
बुधवार के दिन गणेश भगवान को सिंदूर चढ़ाने से लाभ मिलता है। ऐसा करने से सभी परेशानियों का भी निवारण होता है और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

कुंभ की व्यवस्थाएं अलौकिक और दिव्य बनाने की तैयारी

वर्ष 2021 में आयोजित हो रहे हरिद्वार महाकुंभ को प्रदेश सरकार भव्य और ग्रीन कुंभ परिकल्पना के आधार पर आयोजित करेगी। इस परिकल्पना को साकार करने के लिए सरकार ने बजट में 1205 करोड़ रुपये खर्च करना तय किया है। महाकुंभ में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए 450 करोड़ के स्थायी और एक हजार रुपये के अस्थायी कार्य किए जाएंगे।
सरकार की कोशिश है कि महाकुंभ में आने वाले श्रद्धालु चारधाम की यात्रा भी कर पाए। इसके लिए चारधाम और ऑलवेदर रोड को महाकुंभ से पहले पूरा करने का सरकार ने लक्ष्य निर्धारित किया है। कुंभ के लिए सरकार अलग से सुरक्षा व्यवस्था के तहत 60.12 करोड़ रुपये भी खर्च करेगी।
वहीं, महाकुंभ के आयोजन के लिए सरकार ने केंद्र से भी पांच हजार करोड़ की अलग से मांग की है। अभी तक सरकार ने कुंभ के कार्यों के लिए 250 करोड़ का बजट जारी किया है। शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक के मुताबिक महाकुंभ के लिए केंद्र से सहायता जल्द मिलने की उम्मीद है।

सरकार का अनुमान है कि महाकुंभ में करीब 10 करोड़ श्रद्धालु आएंगे। इतनी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने से सरकार ने भीड़ नियंत्रण पर भी फोकस किया है। सुरक्षा व्यवस्था पर 60 करोड़ की राशि खर्च की जाएगी। प्रदेश सरकार ने बजट में जनवरी 2021 में प्रस्तावित कुंभ मेले के लिए पुलिस विभाग के लिए 60.12 करोड़ का प्रावधान किया है। हालांकि कुंभ मेले को छोड़कर पुलिस आधुनिकीकरण और जेलों के उद्धार को कुल 174.33 करोड़ का प्रावधान किया गया है। इससे पुलिस महकमे में थाना और नई चैकियों के भवनों के निर्माण होने की उम्मीद जगी है।
सरकार ने बजट में प्रस्तावित कुंभ मेले में बेहतर व्यवस्थाओं और पुलिस आधुनिकीकरण के संकल्प को दोहराया है। कहा गया कि जनसहभागिता से शांति बनाए रखने, अपराध नियंत्रण और पर्यटन गतिविधियों को सुचारु बनाने को पुलिस विभाग का निरंतर आधुनिकीकरण किया जा रहा है।

पौराणिक मान्यताओं को आज भी निभा रहा श्री भरत मंदिर

वसंतोत्सव-2020 के तहत बसंत पंचमी के शुभमुहुर्त पर भगवान श्री भरत की शोभायात्रा धूमधाम से नगर क्षेत्र में निकाली गई। इस दौरान श्रद्धालुओं ने भगवान भरत के जयकारों से डोली का स्वागत कर पुष्पवर्षा की। पावन पर्व पर श्रद्घालुओं ने भगवान भरत के दर्शन कर पुण्य अर्जित किए।
बुधवार को झंडा चैक स्थित श्री भरत मंदिर परिसर से शोभा यात्रा का आयोजन हुआ। इससे पूर्व मंदिर में श्री भरत भगवान की पूजा अर्चना विधिवत रूप से की गई। शोभा यात्रा झंडा चैक स्थित मंदिर से शुरू होकर मायाकुंड होते हुए विभिन्न व्यापारिक प्रतिष्ठानों से गुजरकर मां गंगा के तट पहुंची। यहां पर श्री भरत भगवान की मूर्ति को गंगा स्नान करवाने के बाद पूजा अर्चना की गई। यहां से शोभा यात्रा सुभाष चैक, श्री भरत मंदिर रोड और झंडा चैक से होते हुए मंदिर परिसर में संपन्न हुई। शोभा यात्रा का नगर क्षेत्र के विभिन्न स्थानों पर व्यापारिक, राजनैतिक, धार्मिक संगठनों ने पुष्प वर्षा कर स्वागत किया। इस अवसर पर महंत अशोक प्रपन्न शर्मा, कार्यक्रम संयोजक हर्षवर्धन शर्मा, मेयर अनिता ममगाईं, पंडित वत्सल शर्मा, पंडित वरुण शर्मा आदि मौजूद थे।

मुख्यमंत्री ने किए दर्शन
मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत बसंत पंचमी के अवसर पर भरत मन्दिर ऋषिकेश में आयोजित बसन्तोत्सव कार्यक्रम में सम्मिलित हुए। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने सभी को बसन्त पंचमी की शुभकामनायें दी तथा भरत मन्दिर में पूजा अर्चना कर प्रदेश की खुशहाली की कामना की। मुख्यमंत्री ने कहा कि बसन्तोत्सव प्रकृति के श्रृगांर एवं नई ऊर्जा का संचार करने वाला पर्व है। यह पर्व हमें प्रकृति के संरक्षण एवं संवर्धन की भी प्रेरणा देता है। उन्होंने आयोजकों की इस आयोजन के लिए भी सराहना की।

उत्तराखंड देवस्थानम बोर्ड राज्य में धार्मिक पर्यटन की तस्वीर को बदल कर रख देगा

उत्तराखंड की त्रिवेंद्र सिंह रावत सरकार ने राज्य में स्थापित मंदिरों की व्यवस्था को एकरूपता देने और राज्य में चार धाम यात्रा को और बेहतर बनाने के लिए उत्तराखंड देवस्थानम बोर्ड बनाकर एक बड़ा कदम उठाया है। सरकार को उम्मीद है कि इस व्यवस्था के बाद राज्य में चार धाम यात्रा पहले के कहीं अधिक सुचारू रूप से चलेगी। राज्य में मंदिरों की देखभाल ठीक तरीके से हो सकेगी और देवसंस्कृति के वाहक पुरोहित समाज को भी पहले से अधिक सुविधाएं मिल दी जा सकेंगी। सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत इस बोर्ड के गठन के बाद न सिर्फ उत्साहित हैं बल्कि उम्मीद जता रहें हैं कि ये बोर्ड राज्य में धार्मिक पर्यटन की तस्वीर को बदल कर रख देगा।

इंफ्रास्ट्रक्चर होगा बेहतर
देवस्थानम बोर्ड बनाने के पीछे उत्तराखंड सरकार का प्रमुख उद्देश्य राज्य के  मंदिरों में आधारभूत ढांचागत विकास करना है। इस बोर्ड के अधीन राज्य के चारों धाम और 51 मंदिर आएंगे। इन मंदिरों में देश ही नहीं विदेशों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। ऐसे में इन मंदिरों में विश्व स्तरीय सुविधाओं का विकास भी किया जाएगा। सरकार अब राज्य में धार्मिक पर्यटन पर आने वालों के लिए सिंगल प्वाइंट अरेंजमेंट की ओर कदम बढ़ा रही है।

पुरोहितों के हित सुरक्षित
देवस्थानम बोर्ड के गठन के ऐलान के साथ ही इसका विरोध भी पटल पर आ गया। बड़ी संख्या में पुरोहित समाज के लोगों ने इस बोर्ड के गठन के विरोध में मोर्चा खोल दिया। हालांकि इस बोर्ड गठन के बाद अब पुरोहित समाज का बड़ा तबका इसके समर्थन में आ गया है। वहीं सरकार शुरुआत से इस बात का दावा करती रही है कि इस बोर्ड के गठन से पुरोहित समाज के हितों की अनदेखी किसी स्तर पर नहीं होगी। रावत और पुरोहितों की सदियों पुरानी व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं आएगा। प्रबंधन के स्तर पर बोर्ड व्यवस्थाओं को बेहतर करेगा। इसी लिहाज से सरकार ने बोर्ड में चारों धामों के प्रतिनिधियों को भी स्थान दिया है। सरकार की माने तो इस बोर्ड के गठन के बाद चारों धामों की व्यवस्था में समन्वय बनेगा।

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भविष्य के लिए जरूरी
त्रिवेंद्र सरकार राज्य में धार्मिक तीर्थाटन को भविष्य के लिहाज से व्यवस्थित करना चाहती है। वैष्णो देवी और तिरुपति बालाजी जैसे मंदिरों में की गई व्यवस्थाओं के मुताबिक ही त्रिवेंद्र सरकार उत्तराखंड के मंदिरों में भी व्यवस्थाएं करना चाहती है। सरकार को उम्मीद है कि इससे राज्य के मंदिरों में धार्मिक पर्यटन बढ़ेगा। हालांकि सरकार के प्रयासों से चार धामों में आने वाले यात्रियों का आंकड़ा तेजी से बढ़ा है। फिलहाल तकरीबन चालीस लाख पर्यटक पहुंच रहें हैं। राज्य में जारी ऑल वेदर रोड और ऋषिकेश कर्णप्रयाग रेल लाइन के निर्माण के बाद पर्यटकों की संख्या करोड़ों में पहुंच सकती है। ऐसे में राज्य के मंदिरों की व्यवस्थाओं को सुदृढ़ करने के लिए सरकार को इस तरह के बोर्ड के गठन की जरूरत महसूस हो रही थी।

2022 तक गुप्तकाशी व ऊखीमठ में हर घर में पानी का नल

मुख्यमंत्री ने सिंचाई विभाग की 288.25 लाख, शिक्षा विभाग की 457.67 लाख, स्वास्थ्य विभाग की 355.95 लाख, क्रीडा विभाग की 250.00 लाख, लोक निर्माण विभाग की 531.26 लाख, पेयजल निगम की 474.99 लाख योग 2358.12 लाख की योजनाओं का शिलान्यास किया। इसके साथ ही, सिंचाई विभाग 5334.24 लाख, शिक्षा विभाग 60.00 लाख, सैनिक कल्याण 48.80 लाख एवं लोक निर्माण विभाग की 298.26 लाख कुल मिलाकर 5741.30 लाख की योजनाओं का शिलान्यास किया। मुख्यमंत्री ने कुल 8099.42 लाख की योजनाओं का शिलान्यास व लोकार्पण किया।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि यह देवभूमि है यहाँ अतिथि देवो भव से स्वागत किया जाता है इसलिए भ्रष्टाचार करने वाले अधिकारी के खिलाफ सख्त कार्यवाही की जायेगी। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में प्रदेश के सभी 1200 माध्यमिक विद्यालयो में स्मार्ट कक्षाये शुरू की जायेगी जिससे नौनिहालो का पठन – पाठन सुव्यवस्थित ढंग से संचालित हो सके। उन्होंने कहा कि पौडी जनपद के फलस्वाडी गाँव में सीता सर्किट बनाने की योजना तैयार की जा रही है। मुख्यमंत्री ने कहां कि क्षेत्र की हर समस्या के निराकरण के लिए प्रदेश सरकार गम्भीर है।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने इस अवसर पर घोषणा की कि गौण्डार, चिलौण व तोषी को यातायात से जोड़ा जायेगा और 2022 तक गुप्तकाशी व ऊखीमठ में हर घर में पानी उपलब्ध कराया जायेगा। मुख्यमंत्री ने बाह्मणखोली के लिए दो किमी मोटर मार्ग के लिए भी स्वीकृति प्रदान की।

रविवार को गिरीया गाँव में प्रधान पुजारी बागेश लिंग व वेदपाठी यशोधर मैठाणी ने बह्म बेलापर पंचांग पूजन के तहत भगवान मदमहेश्वर की डोली व साथ चल रहे अनेक देवी – देवताओं के निशाणो की पूजा अर्चना व अभिषेक कर आरती उतारी तथा सैकड़ों श्रद्धालुओं ने भगवान मदमहेश्वर के निर्वाण दर्शन कर पुण्य अर्जित किया। ठीक नौ बजे भगवान मदमहेश्वर की डोली गिरीया गाँव से विदा होकर ऊखीमठ के लिए रवाना हुई तथा सैकड़ों श्रद्धालुओं ने डोली का फापज व सलामी में पुष्प वर्षा कर मन्नत माँगी। सलामी से सैकड़ों श्रद्धालुओं ने जय बोले के उदघोषो के साथ डोली की अगुवाई की। सैकड़ों श्रद्धालुओं की जयकारो व महिलाओ के मागल गीतों से ऊखीमठ क्षेत्र का वातावरण भक्तिमय बना रहा। भगवान मदमहेश्वर की चल विग्रह उत्सव डोली के मंगोलचारी पहुँचने पर रावल भीमा शंकर लिंग ने परम्परा अनुसार डोली पर सोने का छत्र अर्पित किया ग्रामीणों ने अर्घ्य लगाकर विश्व कल्याण की कामना की।

मेले से संबंधित जितने भी पुल है, उनका निर्माण समय सीमा के अंदर होः सीएम

बुधवार को सचिवालय में कुम्भ मेले के आयोजन से सम्बन्धित उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि कुम्भ मेले के निर्माण कार्यों में और अधिक तेजी लाने के लिये डबल शिफ्ट में कार्य करने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। कुम्भ मेले से सम्बन्धित जितने भी पुलों का निर्माण किया जाना है उनके निर्माण की समय सीमा निर्धारित कर उन्हें पूर्ण करने के प्रयास हों। उन्होंने कहा कि पुलों का समय पर निर्माण होने से सडकों के निर्माण में और अधिक सुविधा होगी।

मुख्यमंत्री ने यह भी निर्देश दिये कि यदि निजी संस्थायें स्वयं के व्यय पर स्नान घाटों का निर्माण करती है तो इसके लिये उन्हें डीपीआर एवं तकनीकी सहयोग उपलब्ध कराया जाए। मेला क्षेत्र से अतिक्रमण हटाने तथा स्वच्छता पर भी विशेष ध्यान देने पर भी उन्होंने बल दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि कुम्भ के आयोजन में ऐसी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए कि श्रद्धालु कुम्भ के सुखद अनुभव के साथ लौंटे। मुख्यमंत्री ने अखाड़ों के प्रमुख प्रतिनिधियों को सुरक्षा उपलब्ध कराने के भी निर्देश सम्बन्धित अधिकारी को दिये। मुख्यमंत्री ने कहा कि आगामी कुम्भ मेले की ऐसी व्यवस्थायें होनी चाहिए ताकि यह आयोजन भविष्य के आयोजनों के लिये भी मिसाल बन सके।

उन्होंने कुम्भ क्षेत्र के बिजली व गैस पाइप लाइन को अंडर ग्राउंड किये जाने में भी तेजी लाने को कहा। कुम्भ की व्यवस्थाओं के लिये जो भी जरूरत होगी वह उपलब्ध करायी जायेगी। सभी अधिकारी तालमेल से कार्य करें। मुख्यमंत्री ने हरिद्वार की देवभूमि के अनुरूप उसकी पहचान बनाये रखने पर भी ध्यान देने को कहा। उन्होंने निर्देश दिये कि असामाजिक गतिविधियों पर सख्ती बरती जाए। अतिक्रमण को हटाने की दिशा में भी उन्होंने प्रभावी कार्यवाही के निर्देश दिये। मुख्यमंत्री ने कहा कि हरिद्वार महाकुम्भ 2021, दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक व आध्यात्मिक मेला होगा। वैश्विक स्तर के इस मेले में दुनिया भर के देशों से करोड़ों श्रद्धालु आएंगे। तद्नुसार हमें इसकी व्यापक व्यवस्थायें सुनिश्चित करनी होंगी।

नगर विकास मंत्री मदन कौशिक ने कहा कि कुम्भ मेला की सफलता सभी के सामूहिक प्रयासों से जुड़ी है। इस कुम्भ में बेहतर व्यवस्थायें कर देश व दुनिया के श्रद्धालुओं को आवश्यक व्यवस्थायें करानी होंगी। उन्होंने कहा कि सभी अधिकारी अपनी जिम्मेदारी समझें। उन्होंने संत महात्माओं के सुझावों पर भी ध्यान देने को कहा। उन्होंने कुम्भ क्षेत्र के सीमांकन के साथ ही नये क्षेत्रों में आवश्यक अवस्थापना सुविधायें विकसित करने पर भी ध्यान देने को कहा।

बैठक में मेलाधिकारी दीपक रावत ने विस्तृत प्रस्तुतीकरण के माध्यम से मेलाक्षेत्र एवं मेले में की जाने वाली व्यवस्थाओं का व्यापक प्रस्तुतीकरण दिया। उन्होंने बताया कि कुम्भ मेले के सम्बन्ध में विभागों से प्राप्त प्रस्तावों का परीक्षण कर वांछित धनराशि के वास्तविक आगणन का प्रस्ताव शासन को शीघ्र उपलब्ध कराया जायेगा।

चुनाव परिणाम से पहले फडणवीस पहुंचे केदारनाथ, लिया जीत का आर्शीवाद

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने विधानसभा चुनाव के नतीजे आने से एक दिन पूर्व पत्नी सहित परिवारिक सदस्यों के साथ बुधवार को बाबा केदार के दर्शन किए। इस दौरान उन्होंने चुनाव में जीत के लिए बाबा का आशीर्वाद लिया।
सूत्रों के अनुसार, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री फडणवीस सुबह साढ़े दस बजे चार्टर हेलीकॉप्टर से केदारनाथ धाम पहुंचे। यह उनका निजी कार्यक्रम था, जिस कारण प्रशासन व पुलिस को इस बारे में कोई सूचना नहीं थी। मंदिर पहुंचने पर मुख्य पुजारी केदार लिंग ने उनकी पूजा संपन्न करवाई। रुद्राभिषेक करने के बाद फडणवीस ने मंदिर की परिक्रमा की और कुछ देर तक केदारनाथ की हिमाच्छादित चोटियों के सौंदर्य को निहारते रहे। इस दौरान मंदिर समिति की विजिटर बुक में फडणवीस ने लिखा कि वह बाबा केदार के दर्शनों से अभिभूत हैं और स्वर्ग में होने जैसा अहसास कर रहे है। करीब डेढ़ घंटा केदारनाथ धाम में रहने के बाद फडणवीस वापस लौट गए। गौरतलब है कि इसी वर्ष मई माह में लोकसभा चुनाव के सातवें एवं अंतिम चरण के मतदान से ठीक एक दिन पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी केदारनाथ धाम पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने गर्भगृह में रुद्राभिषेक किया तो मंदिर की परिक्रमा भी की और दोपहर बाद करीब दो बजे वह साधना के लिए एकांत स्थल, मंदिर से 1.5 किलोमीटर दूर ध्यान गुफा में चले गए थे। यहीं रात्रि विश्राम भी किया था।

महाकुंभ में भीड़ प्रबंधन की जो प्लानिंग हो, उसे कई बार परखा जाए

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने वर्ष 2021 में हरिद्वार में होने वाले महाकुम्भ की तैयारियों में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा है कि महाकुम्भ की व्यवस्थाएं, इसकी दिव्यता और भव्यता के अनुरूप हों। महाकुम्भ में देश-विदेश से आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं के लिए हर आवश्यक सुविधा जुटाई जाए। सुरक्षा में किसी तरह की चूक की गुंजाईश नहीं रहनी चाहिए। इसके लिए भीड़ प्रबंधन की जो भी प्लानिंग की जाए, उसे बार-बार परख भी लिया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि वे स्वयं महाकुम्भ की तैयारियों पर नजर रख रहे हैं। समय-समय पर तैयारियों के स्थलीय निरीक्षण के साथ इसकी समीक्षा भी करते रहेंगे।

हरिद्वार महाकुम्भ 2021, दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक व आध्यात्मिक मेला होगा। वैश्विक स्तर के इस मेले में दुनिया भर के देशों से करोड़ों श्रद्धालु आएंगे। इसमें किसी भी स्तर पर कोई लापरवाही क्षम्य नहीं हो सकती है। मुख्यमंत्री ने शासन स्तर पर भी महाकुम्भ की तैयारियों की नियमित मॉनिटरिंग करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने, कुम्भ मेलाधिकारी को दैनिक तौर पर तैयारियों का स्थलीय निरीक्षण करने को कहा है। शासन स्तर से किसी भी तरह की आवश्यकता होने पर तत्काल अवगत कराया जाए। महाकुम्भ की तैयारियों में संत महात्माओं का मार्गदर्शन लेना सुनिश्चित किया जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा है कि स्थाई प्रकृति के काम अक्टूबर 2020 तक पूरे कर लिए जाएं। समयबद्धता और गुणवत्ता सुनिश्चित की जाए। इस वैश्विक मेले में बड़ी संख्या में आने वाले श्रद्धालु, राज्य के दूसरे पर्यटन स्थलों में भी जा सकते हैं, इसलिए कुम्भ मेले के दौरान लोगों को प्रदेश के पर्यटन स्थलों की जानकारी देने के लिए पर्यटन सूचना केंद्र स्थापित किए जाएं। तमाम तरह की सुविधाएं विकसित करने मे आधुनिकतम तकनीक का प्रयोग किया जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सुरक्षा व भीड़ प्रबंधन मे तैनात किए जाने वाले पुलिसकर्मियों का व्यवहार कुशल होना जरूरी है। सुरक्षा के लिए हर आवश्यक व्यवस्था समय से कर ली जाए। रेलवे व निकटवर्ती दूसरे राज्यों के अधिकारियों से समन्वय रखा जाए। स्नान घाटों सहित पूरे कुम्भ क्षेत्र में सफाई की पूरी व्यवस्था रहे। श्रद्धालुओं के लिए स्वास्थ्य, पेयजल, पार्किंग, आवास व शौचालय की सम्पूर्ण सुविधा रहनी चाहिए।

चारधाम यात्राः सहायता केंद्र शुरू, प्रत्येक विभाग के एक कर्मी रहेगा मौजूद

उत्तराखंड की प्रसिद्ध चारधाम यात्रा में जाने के लिए अन्य राज्यों से तीर्थनगरी पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की दिक्कत न हो, इसके लिए एक मई से बीटीसी परिसर में हेल्प डेस्क शुरू होगी। इस डेस्क पर विभिन्न विभागों के कर्मचारी तैनात रहेंगे, जो अपने विभाग की शिकायतों का निस्तारण करेंगे। यह सहायता केंद्र सुबह छह से रात आठ बजे तक खुला रहेगा।

बस ट्रांजिट कंपाउंड स्थित पर्यटन विभाग के कार्यालय में उप जिलाधिकारी प्रेमलाल के नेतृत्व में बैठक आयोजित हुई। बैठक में सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी डॉ. अनिता चमोला ने बाहरी राज्यों की बसों में यहां से सवारियां बैठाने पर रोक लगाने की बात कही। उन्होंने कहा कि प्रत्येक बॉर्डर चौक पोस्ट पर वाहनों की चेकिंग कर यात्री सूची मांगी जाएगी। यदि ग्रीन कार्ड सही पाया गया तो चौकपोस्ट से परिवहन विभाग का होलोग्राम व मोहर लगाई जाएगी। यात्री सूची न दिखा पाने पर बाहरी राज्यों का ग्रीन कार्ड जब्त किया जाएगा। इसके अलावा बस को सीज कर पूरे यात्रा सीजन के लिए उसे ब्लैक लिस्ट किया जाएगा।

गढ़वाल आयुक्त वीबीआरसी पुरुषोत्तम ने पूर्व में हुई बैठक में सभी विभागों को यात्रियों की सुविधा के लिए एक कंट्रोल रूम बनाने को कहा था। इस मामले में सोमवार को हुई बैठक में यह तय हुआ कि एक मई से चारधाम यात्रा सीजनल सहायता केंद्र के नाम से हेल्प डेस्क शुरू होगी। इसमें प्रशासन सहित परिवहन, पर्यटन, पुलिस, संयुक्त रोटेशन यात्रा व्यवस्था समिति, नगर निगम, रोडवेज का एक-एक कर्मचारी बैठेगा। इससे जिस यात्री को जिस विभाग से शिकायत होगी। उससे वह विभाग मौके पर ही सुनवाई करेगा। यह सहायता केंद्र सुबह छह से रात आठ बजे तक खुला रहेगा।

स्लोगन बोर्ड से तीर्थ यात्रियों को करेंगे जागरूक
बैठक में यह सवाल उठा कि बीटीसी परिसर पर कुछ ट्रेवल एजेंसियों के एजेंट अनधिकृत रूप से घूमते हैं, जो यात्रियों को डायवर्ट करने का काम करते हैं। इसके लिए उप जिलाधिकारी प्रेमलाल ने कहा कि बीटीसी परिसर पर जगह-जगह अनधिकृत ट्रेवल एजेंटो से सावधान, कृप्या बस की बुकिंग रोटेशन के काउंटर से ही कराए आदि स्लोगन लिखे बोर्ड लगाए जाएंगे।
ड्राइविंग के इन बातों का ध्यान रखना होगा

एआरटीओ डॉ. अनिता चमोला ने कहा कि यात्रा शुरू होने में हफ्ते भर का समय शेष रह गया है। ऐसे में बस चालकों के लिए परिवहन विभाग ने कुछ जरूरी दिशा निर्देश जारी किए गए हैं। कोई भी बस चालक चप्पल पहनकर गाड़ी नहीं चलाएगा। चालक आठ घंटे से ज्यादा ड्राइविंग नहीं करेगा। बस में ओवर लोडिंग नहीं की जाएगी। इसके अलावा यात्रा को दस दिन के बजाये नौ दिन में पूरा करने के लिए ओवर स्पीड पर भी नियंत्रण करने को कहा गया है। यात्रा के दौरान बस चालकों को निर्देश दिए गए हैं कि वह नशा न करें। साथ ही ड्राइविंग के दौरान मोबाइल इस्तेमाल पर भी प्रतिबंध रहेगा।