महाकुंभ में भीड़ प्रबंधन की जो प्लानिंग हो, उसे कई बार परखा जाए

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने वर्ष 2021 में हरिद्वार में होने वाले महाकुम्भ की तैयारियों में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा है कि महाकुम्भ की व्यवस्थाएं, इसकी दिव्यता और भव्यता के अनुरूप हों। महाकुम्भ में देश-विदेश से आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं के लिए हर आवश्यक सुविधा जुटाई जाए। सुरक्षा में किसी तरह की चूक की गुंजाईश नहीं रहनी चाहिए। इसके लिए भीड़ प्रबंधन की जो भी प्लानिंग की जाए, उसे बार-बार परख भी लिया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि वे स्वयं महाकुम्भ की तैयारियों पर नजर रख रहे हैं। समय-समय पर तैयारियों के स्थलीय निरीक्षण के साथ इसकी समीक्षा भी करते रहेंगे।

हरिद्वार महाकुम्भ 2021, दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक व आध्यात्मिक मेला होगा। वैश्विक स्तर के इस मेले में दुनिया भर के देशों से करोड़ों श्रद्धालु आएंगे। इसमें किसी भी स्तर पर कोई लापरवाही क्षम्य नहीं हो सकती है। मुख्यमंत्री ने शासन स्तर पर भी महाकुम्भ की तैयारियों की नियमित मॉनिटरिंग करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने, कुम्भ मेलाधिकारी को दैनिक तौर पर तैयारियों का स्थलीय निरीक्षण करने को कहा है। शासन स्तर से किसी भी तरह की आवश्यकता होने पर तत्काल अवगत कराया जाए। महाकुम्भ की तैयारियों में संत महात्माओं का मार्गदर्शन लेना सुनिश्चित किया जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा है कि स्थाई प्रकृति के काम अक्टूबर 2020 तक पूरे कर लिए जाएं। समयबद्धता और गुणवत्ता सुनिश्चित की जाए। इस वैश्विक मेले में बड़ी संख्या में आने वाले श्रद्धालु, राज्य के दूसरे पर्यटन स्थलों में भी जा सकते हैं, इसलिए कुम्भ मेले के दौरान लोगों को प्रदेश के पर्यटन स्थलों की जानकारी देने के लिए पर्यटन सूचना केंद्र स्थापित किए जाएं। तमाम तरह की सुविधाएं विकसित करने मे आधुनिकतम तकनीक का प्रयोग किया जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सुरक्षा व भीड़ प्रबंधन मे तैनात किए जाने वाले पुलिसकर्मियों का व्यवहार कुशल होना जरूरी है। सुरक्षा के लिए हर आवश्यक व्यवस्था समय से कर ली जाए। रेलवे व निकटवर्ती दूसरे राज्यों के अधिकारियों से समन्वय रखा जाए। स्नान घाटों सहित पूरे कुम्भ क्षेत्र में सफाई की पूरी व्यवस्था रहे। श्रद्धालुओं के लिए स्वास्थ्य, पेयजल, पार्किंग, आवास व शौचालय की सम्पूर्ण सुविधा रहनी चाहिए।

चारधाम यात्राः सहायता केंद्र शुरू, प्रत्येक विभाग के एक कर्मी रहेगा मौजूद

उत्तराखंड की प्रसिद्ध चारधाम यात्रा में जाने के लिए अन्य राज्यों से तीर्थनगरी पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की दिक्कत न हो, इसके लिए एक मई से बीटीसी परिसर में हेल्प डेस्क शुरू होगी। इस डेस्क पर विभिन्न विभागों के कर्मचारी तैनात रहेंगे, जो अपने विभाग की शिकायतों का निस्तारण करेंगे। यह सहायता केंद्र सुबह छह से रात आठ बजे तक खुला रहेगा।

बस ट्रांजिट कंपाउंड स्थित पर्यटन विभाग के कार्यालय में उप जिलाधिकारी प्रेमलाल के नेतृत्व में बैठक आयोजित हुई। बैठक में सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी डॉ. अनिता चमोला ने बाहरी राज्यों की बसों में यहां से सवारियां बैठाने पर रोक लगाने की बात कही। उन्होंने कहा कि प्रत्येक बॉर्डर चौक पोस्ट पर वाहनों की चेकिंग कर यात्री सूची मांगी जाएगी। यदि ग्रीन कार्ड सही पाया गया तो चौकपोस्ट से परिवहन विभाग का होलोग्राम व मोहर लगाई जाएगी। यात्री सूची न दिखा पाने पर बाहरी राज्यों का ग्रीन कार्ड जब्त किया जाएगा। इसके अलावा बस को सीज कर पूरे यात्रा सीजन के लिए उसे ब्लैक लिस्ट किया जाएगा।

गढ़वाल आयुक्त वीबीआरसी पुरुषोत्तम ने पूर्व में हुई बैठक में सभी विभागों को यात्रियों की सुविधा के लिए एक कंट्रोल रूम बनाने को कहा था। इस मामले में सोमवार को हुई बैठक में यह तय हुआ कि एक मई से चारधाम यात्रा सीजनल सहायता केंद्र के नाम से हेल्प डेस्क शुरू होगी। इसमें प्रशासन सहित परिवहन, पर्यटन, पुलिस, संयुक्त रोटेशन यात्रा व्यवस्था समिति, नगर निगम, रोडवेज का एक-एक कर्मचारी बैठेगा। इससे जिस यात्री को जिस विभाग से शिकायत होगी। उससे वह विभाग मौके पर ही सुनवाई करेगा। यह सहायता केंद्र सुबह छह से रात आठ बजे तक खुला रहेगा।

स्लोगन बोर्ड से तीर्थ यात्रियों को करेंगे जागरूक
बैठक में यह सवाल उठा कि बीटीसी परिसर पर कुछ ट्रेवल एजेंसियों के एजेंट अनधिकृत रूप से घूमते हैं, जो यात्रियों को डायवर्ट करने का काम करते हैं। इसके लिए उप जिलाधिकारी प्रेमलाल ने कहा कि बीटीसी परिसर पर जगह-जगह अनधिकृत ट्रेवल एजेंटो से सावधान, कृप्या बस की बुकिंग रोटेशन के काउंटर से ही कराए आदि स्लोगन लिखे बोर्ड लगाए जाएंगे।
ड्राइविंग के इन बातों का ध्यान रखना होगा

एआरटीओ डॉ. अनिता चमोला ने कहा कि यात्रा शुरू होने में हफ्ते भर का समय शेष रह गया है। ऐसे में बस चालकों के लिए परिवहन विभाग ने कुछ जरूरी दिशा निर्देश जारी किए गए हैं। कोई भी बस चालक चप्पल पहनकर गाड़ी नहीं चलाएगा। चालक आठ घंटे से ज्यादा ड्राइविंग नहीं करेगा। बस में ओवर लोडिंग नहीं की जाएगी। इसके अलावा यात्रा को दस दिन के बजाये नौ दिन में पूरा करने के लिए ओवर स्पीड पर भी नियंत्रण करने को कहा गया है। यात्रा के दौरान बस चालकों को निर्देश दिए गए हैं कि वह नशा न करें। साथ ही ड्राइविंग के दौरान मोबाइल इस्तेमाल पर भी प्रतिबंध रहेगा।

इस ऐप के जरिए केदारनाथ की जानकारी मिल सकेगी

अब देश के विभिन्न प्रांतो से आने वाले श्रद्धालुओं को अपनी ही भाषा में केदारनाथ मंदिर व उसके आसपास की जानकारी प्राप्त हो सकेगी। इसके लिए जिला प्रशासन स्तर पर एक मोबाइल एप तैयार किया जा रहा है। इसको श्री केदारनाथ मंदिर के कपाट खुलने तक पूरा कर लिया जाएगा।

भविष्य में केदारपुरी के स्वरूप की जानकारी देने के लिए एक प्रतिकृति तैयार कर केदारनाथ में रखने की भी है। मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह ने कहा कि चारधाम यात्रा की तैयारियां तकरीबन पूरी हैं। इस बार सरकार की मंशा देशभर से आने वाले तीर्थयात्रियों को उनकी भाषा में ही केदारनाथ के संबंध में जानकारी देने की है। उन्होंने कहा कि यदि यह प्रयोग सफल रहा तो निकट भविष्य में इसमें अन्य धाम व तीर्थ स्थलों को भी जोड़ा जाएगा।

उन्होंने कहा कि इसके अलावा केदारनाथ में लेजर शो के जरिये केदारनाथ की कहानी प्रदर्शित की जाएगी। इतना ही नहीं, आपदा के बाद अब तक केदारनाथ पुनर्निर्माण के कार्यो के संबंध में भी जानकारी दी जाएगी। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि अभी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के केदारनाथ आने के संबंध में कोई सूचना नहीं मिली है।

मुख्य सचिव ने उत्तरकाशी के गंगोरी में हाल ही में टूटे पुल के संबंध मे कहा कि बीआरओ के अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि इस जगह ऐसी व्यवस्था की जाएगी। जिससे वाहनों के आवागमन में अव्यवस्था न हो। इसके अलावा पुलिस की व्यवस्था भी रहेगी, ताकि ओवरलोडेड ट्रक न जा सकें।

शांति की तलाश में तीर्थनगरी पहुंची लोस अध्यक्ष

लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन अपने दिन दिवसीय प्रवास पर उत्तराखंड में है। बुधवार को तीर्थनगरी स्थित परमार्थ निकेतन में भागवत कथा में पहुंची सुमित्रा महाजन ने यहां से अपना पुराना नाता बताया। उन्होंने कहा कि आत्म शांति की अनुभूति के लिये वह गंगा के पावन तट का रूख करती है। यहां स्वयं को जानने में मदद मिलती है।

एक सवाल के जवाब में लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन बोली, मेरी नजर में आध्यात्म और राजनीति एक ही है। यदि हम आध्यात्मिक यात्रा पर भी होते हैं, तो मन में राजनीतिक बातें चलती ही रहती है। परमार्थ निकेतन में लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि माँ गंगा की निर्मल लहरें मन को शान्ति, शीतलता और पवित्रता प्रदान करती हैं। कहा कि, उत्तराखंड से उनका पुराना लगाव है, जब भी समय मिलता है वह गंगा के तट पर शांति के लिए जरूर पहुंचती हैं। इस बार मैं लंबे समय बाद यहां भागवत कथा में शामिल होने आई हूं। कुछ दिन शांति से ऐसे माहौल में बैठना भी जरूरी होता है।

परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती ने मुलाकात कर वर्तमान में नारियों की दशा और उनके विरूद्ध बढ़ते अपराधों की ओर लोकसभा अध्यक्ष का ध्यान आकर्षित किया। साथ ही स्वच्छ भारत अभियान में नारियों की भूमिका, योग को समष्टि में समर्पित करना, महिला सशक्तीकरण, नदियों की स्वच्छता, पर्यावरण एवं जल संरक्षण जैसे अनेक सामाजिक विषयों पर चर्चा की।

इससे पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सुमित्र महाजन का जौलीग्रांट एयरपोर्ट पर पूर्व मुख्यमंत्री व सांसद डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक व विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल ने स्वागत किया। सांसद डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक ने इस दौरान लोकसभा अध्यक्ष सुमित्र महाजन को मां नंदा राजजात यात्रा पर लिखी अपनी पुस्तक भेंट की। लोकसभा अध्यक्ष ने इसके लिए डॉ. निशंक का आभार व्यक्त किया।

शनि के उदय होते ही किसे मिलेगा लाभ और किसे हानि?

न्याय के देवता शनि महाराज को उनके पिता सूर्य ने बीते पांच दिसंबर को 34 दिनों के लिये डूबा दिया था। जो सात जनवरी की शाम पांच बजकर चालीस मिनट पर उदय हो गये है। उदय भी उन्हीं के पिता सूर्य ने किया। शनि धनु राशि में डूबे थे।

शनि अपनी सम राशि में उदय हुए हैं इसलिए नुकसान कम करेंगे। शनि गुरु के धनु राशि में है। शनि हानिकारक कम हुआ है। आलस्य नहीं आएगा। सारे एग्जाम अच्छे होंगे। अच्छे नंबर आएंगे।
साढ़े साती वालों को परेशानी बढ़ेगी। फिलहाल शनि की साढ़ेसाती वृश्चिक, धनु और मकर राशिवाले पर है और इन राशि के लोग बहुत परेशान हैं। वृष, कन्या और मकर राशिवाले पर भी शनि का संकट है। पढ़ाई, नौकरी, व्यापार नहीं चल रहा है। कर्ज चढ़ा है, क्लेश और बीमारी बढ़ी है। लोहे के कढ़ाई का दान करने और चना गुड़ बांटने से कुछ राहत मिलेगी।

शनि की महादशा और दशा वालों को राहत नहीं मिलेगी। ऐसे में उन्हें शनिदेव पर गुलाब की माला चढ़ानी होगी और साथ ही सरसों के तेल का दीपक भी जलाना होगा। काले वस्त्र बांटने होंगे।

शनि महाराज के कारण चार राशियों को मिलेगा लाभ-
1. कर्क राशि के लिए यह अच्छा समय होगा। हर कार्य आसानी से संपन्न होंगे। आर्थिक समस्याएं दूर होंगी।
2. तुला राशि इन्हें भाग्यवर्धक यात्रा होगी। समाज में मान सम्घ्मान बढ़ेगा। परिवार का सहयोग प्राप्त होगा। साथ ही आर्थिक लाभ होगा।
3. कुंभ राशि वाले जातकों को आमदनी के स्रोत में वृद्धि होगी। व्यसाय में बड़ी सफलता का योग बन रहा है। रुका हुआ धन वापस मिलेगा।
4. मीन राशि वालों को धन-दौलत का लाभ तो होगा पर कुछ रुकावटें भी आ सकती हैं। हालांकि प्रयास करने पर आर्थिक लाभ कमाने में सफल रहेंगे।

चंडीगढ़ में ली शंकराचार्य स्वामी माधवाश्रम महाराज ने अंतिम सांसे

उत्तराखंड क्षेत्र से शंकराचार्य के पद पर सुशोभित होने वाले पहले संन्यासी शंकराचार्य स्वामी माधवाश्रम जी महाराज ने शुक्रवार को चंडीगढ़ में अंतिम सांसे ली।
शंकराचार्य स्वामी माधवाश्रम महाराज भारत के बदरीनाथ तीर्थ के समीप जोशीमठ तीर्थ स्थित ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य थे। वर्ष 1993 से ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य पद पर आसीन माधवाश्रम महाराज ने शुक्रवार को चंडीगढ़ में देह त्याग दिया। महाराज लंबे समय से बीमार चल रहे थे। उनके पार्थिव शरीर को देर शाम तक ऋषिकेश स्थित दंडीबाड़ा आश्रम में लाया जाएगा। पार्थिव शरीर को ऋषिकेश स्थित दण्डीबाड़ा श्रीजनार्दन आश्रम में आम लोगों के दर्शनार्थ के लिए रखा जाएगा। इसके बाद विधि विधान के साथ आश्रम में जलसमाधि दी जाएगी। उनके अनुयायियों का तीर्थनगरी पहुंचने का क्रम शुरू हो गया है। स्वामी जी उत्तराखण्ड मूल से शंकराचार्य के पद पर सुशोभित होने वाले पहले संन्यासी थे। वे अखिल भारतीय धर्म संघ समेत विभिन्न धार्मिक संस्थाओं के अघ्यक्ष एवं सदस्य रहे।
गढ़वाल मंडल के रूद्रप्रयाग जिले में जन्में थे शंकराचार्य माधवाश्रम महाराज
स्वामी माधवाश्रम महाराज का जन्म उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले के अन्तर्गत बेंजी ग्राम में हुआ था। इनका मूल नाम केशवानन्द था। आरम्भिक विद्यालयी शिक्षा के पश्चात इन्होंने हरिद्वार, अम्बाला में सनातन धर्म संस्कृत कॉलेज, वृंदावन में बंशीवट में श्री प्रभुदत्त ब्रह्मचारी जी के आश्रम एवं वाराणसी समेत देश के विभिन्न स्थानों पर वेदों एवं धर्मशास्त्रों की दीक्षा ली। विवाह के उपरान्त कुछ वर्ष पश्चात इन्होंने संन्यास ग्रहण किया। इनकी विद्वता को देखते हुए धर्म संघ के तत्वाधान में धर्मसम्राट स्वामी करपात्री जी के आशीर्वाद से जगन्नाथ पुरीपीठ के तत्कालीन शंकराचार्य स्वामी निरंजनदेव तीर्थ जी ने इन्हें ज्योतिष्पीठ का शंकराचार्य नियुक्त किया। तब से वे इस परम्परा का बखूबी पालन कर रहे थे। स्वामी माधवाश्रम महाराज धर्मप्रचार एवं गौहत्या विरोधी विभिन्न आंदोलनों एवं संगठनों से जुड़े थे।

अब फर्जी बाबाओं का सामूहिक बहिष्कार होगा, ये बाबा हैं लिस्ट में..

डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख गुरमीत को दुष्कर्म मामलों में 20 साल जेल की सजा होने के बाद अब अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने 11 बाबाओं को फर्जी मानते हुए उनकी सूची तैयार की है। इस सूची में आसाराम, राधे मां व निर्मल बाबा के भी नाम हैं। बताया जा रहा है कि यह सूची 10 सितंबर को इलाहाबाद के मठ बाघंबरी गद्दी में बुलाई गई बैठक में सार्वजनिक की जाएगी। बैठक में उनके सामूहिक बहिष्कार का भी फैसला किया जाएगा। परिषद अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि का कहना है कि फर्जी धर्मगुरुओं से सनातन धर्म के स्वरूप को काफी नुकसान पहुंचा है। हम फर्जी धर्मगुरओं की सूची बनाकर उसे केंद्र व सभी राज्य सरकारों, चारों पीठ के शंकराचार्य व 13 अखाड़ा के पीठाधीश्वरों को भेजकर सामूहिक बहिष्कार करेंगे। उन्होंने बताया कि सूची में शामिल शमिल फर्जी बाबाओं को कुंभ, अर्द्वकुंभ और अन्य धार्मिक मेलों में सरकारी सुविधा न मिले, यह पहल भी होगी।
सूची में ये हैं फर्जी बाबा
आसाराम बापू, नारायण साई, इच्छाधारी भीमानंद, राधे मां, बाबा ओमानंद, निर्मल बाबा, रामपाल, गुरमीत राम रहीम, बाबा ओम नमरू शिवाय, स्वामी अच्युतानंद तीर्थ और योगी सत्यम।

अगले माह यात्रियों की संख्या में होगा इजाफा

केदारनाथ यात्रा के लिये आपदा के बाद अच्छी खबर है। बहुत कम समय में चार लाख से अधिक तीर्थ यात्रियों ने बाबा केदार के दर्शन कर दिये हैं। बाबा के दर्शन करने वाले तीर्थ यात्रियों का आकंडा चार लाख पार पहुंच चुका है।
16-17 जून 2013 को केदारनाथ में आई भीषण आपदा के बाद इस बार केदारनाथ आने वाले तीर्थ यात्रियों की संख्या में भारी वृद्धि हुई है। बरसात के मौसम में भी यात्री बाबा के दर्शनों के लिये पहुंचे हैं, जिससे देश-विदेश में यात्रा को लेकर अच्छा संदेश गया है। मई माह में कपाट खुलने के बाद चार माह के समय में चार लाख से अधिक तीर्थ यात्री बाबा के दर्शनों को पहुंचे हैं। आगामी दो महीने में भी केदारघाटी के सभी होटल-लॉलों में एडवांस बुकिंग आ चुकी है, जिससे उम्मीद जताई जा रही है कि इस बार पांच लाख से अधिक यात्री बाबा के दर्शनों के लिये पहुंचेंगे।
इधर, पुलिस अधीक्षक प्रहलाद नारायण मीणा ने बताया कि यह यात्रा सीजन यात्रा के दृष्टिकोण से बहुत अच्छा गुजर रहा है। आपदा के बाद यात्रा पटरी पर लौट चुकी हैं बहुत कम समय में चार लाख से अधिक तीर्थ यात्री बाबा के दर्शनों के लिये पहुंचे हैं। उन्होंने कहा कि आगामी दो माह की यात्रा के लिये भी एडवांस बुकिंग आ चुकी हैं। मौसम भी खुल रहा है। बरसात का सीजन समाप्त होने वाला है। ऐसे में अधिक यात्रियों के आने की उम्मीदे हैं। उन्होंने कहा कि यात्रियों को किसी भी प्रकार की दिक्कतें नहीं होने दी जाएंगी। यात्रियों को बेहतर से बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।

कुमॉउ में नंदा देवी मेले की है अलग पहचान

कुमॉउ का प्रसिद्ध मॉं नंदा देवी मेले की आज विधिवत शुरुआत हो गई। यह मेला इस लिए भी खास है कि कुमॉउ में मां नन्दा देवी को अपनी आराध्य माना जाता है। मॉं नंदा देवी मंदिर में आज मॉं नंदा सुनंदा की मूर्तियों के लिए लाये गये कदली वृक्षों का पूजन किया गया। मौके पर चंद वंष के वंषज केसी बाबा पूर्व सांसद नैनीताल ने पूजा सम्पन्न कराई। प्रदेष के पर्यटन, सिंचाई व संस्कृति मंत्री सतपाल महाराज ने भी पूजा कार्यक्रम में षिरकत की। मॉं नंदा देवी मेला समिति के अध्यक्ष मनोज वर्मा ने बताया कि मॉं नंदा देवी उत्तराखण्ड की अधिष्ठात्री देवी के रुप में पूज्य है। अल्मोड़ा मॉं नंदा देवी मेला ऐतिहासिक पहचान रखता है। मेले को भव्य बनाने के लिए सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किये जा रहे हैं।

अगले साल के अंत तक पूरी हो जाएगी चार धाम सड़क परियोजना

केंद्रीय सड़क, परिवहन, राजमार्ग और जहाजरानी मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि उत्तराखंड में ‘चार धाम’ सड़क संपर्क परियोजना को सरकार 2018 के अंत तक पूरा कर लेगी। 12 हजार करोड़ रुपये की इस महत्वाकांक्षी परियोजना से जुड़े 10 प्रस्तावों को पर्यावरण मंजूरी भी मिल गई है।
उन्होंने बताया कि पर्यावरण मंजूरी मिलने के बाद सड़क एवं राजमार्ग मंत्रालय ने परियोजना पर काम तेज कर दिया है। जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार के एजेंडे में शीर्ष पर है। इस परियोजनाओं से जुड़े अन्य अटके प्रस्तावों को भी जल्द ही मंजूरी प्राप्त हो जाएगी। क्योंकि पर्यावरण एवं वन मंत्रालय समेत विभिन्न मंत्रालयों के साथ बैठकें जारी हैं। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यह लोगों को सबसे बड़ा उपहार होगा। क्योंकि आस्था से जुड़ी चार धाम यात्रा लोगों के एजेंडे में शीर्ष पर रहती है। विदेश से भी बड़ी संख्या में लोग चार धाम यात्रा के लिए आते हैं। उन्होंने बताया कि 900 किमी के नए अलाइनमेंट पर राजमार्गो का निर्माण किया जा रहा है और सुरंगों का निर्माण भी तेज गति से हो रहा है। यह मार्ग सभी मौसम में खुले रहेंगे।
मालूम हो कि इसी महीने की शुरुआत में गडकरी ने आधारभूत ढांचे पर एक बैठक की अध्यक्षता की थी। इसमें उन्होंने विभिन्न मंत्रालयों से मंजूरियों के अभाव में लटके चार धाम यात्रा के 18 प्रस्तावों में तेजी लाने का अनुरोध किया था। चार धाम परियोजना की आधारशिला पिछले साल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रखी थी।