एमडीडीए 29 घंटों अंदर दे रहा नक्शों की स्वीकृतिः श्रीवास्तव

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) के 36वें स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम का दीप प्रज्ज्वलित कर शुभारम्भ किया। प्राधिकरण को 36वें स्थापना दिवस की बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्राधिकरण द्वारा पिछले दो वर्षों में सराहनीय कार्य किया गया है। इससे सरकार की भी प्रतिष्ठा बढ़ी है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में प्रत्येक क्षेत्र का विकास हो सके इसके लिए जिला विकास प्राधिकरणों का गठन किया गया है। आम जन को हर प्रकार की सुविधा समय से उपलब्ध करा सकें इसके लिये प्रयास किये जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए हमने विभिन्न नीतियों में छोटे-छोटे विभिन्न नीतिगत परिवर्तन किए हैं। इससे आमजन को कम से कम समय में ज्यादा से ज्यादा सुविधाएं एवं सेवाएं प्रदान प्राप्त हो सकेंगी। इन नीतिगत परिवर्तनों का प्रभाव आने वाले समय में दिखाई देगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रत्येक राज्य की अपनी अलग पहचान व संस्कृति होती है। पर्यटक भी इससे प्रभावित होते हैं। पर्यटकों को आकृषित करने के लिये उत्तराखण्ड में किये जा रहे निर्माण कार्यों में यहां की कला एवं संस्कृति की झलक दिखनी चाहिए। उन्होंने कहा कि राज्य में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए हम सभी को सहयोग देना होगा। राज्य का पर्यटन अधिक से अधिक विदेशी पर्यटकों को आकर्षित कर सके इसके लिए भी प्रयास करने होंगे।
मुख्यमंत्री ने स्मार्ट सिटी के क्षेत्र में एमडीडीए द्वारा तेजी से कार्य करने पर बधाई दी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्रदेशवासियों को मूलभूत सुविधाएं प्रदान करने के लिये लगातार प्रयास कर रही है। प्रदेश में गुरूत्व आधारित पेयजल की आपूर्ति के लिये विभिन्न योजनाएं शुरू की गयी हैं। सौंग बाँध निर्माण कार्य शुरू होने के 350 दिन में कार्य पूर्ण करने लिये प्रयासरत् हैं। सूर्यधार झील निर्माण कार्य भी शीघ्र पूर्ण हो जाएगा।
शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक ने प्राधिकरण को बधाई देते हुए कहा कि देहरादून मसूरी विकास प्राधिकरण राज्य के अन्य प्राधिकरणों के लिये मार्गदर्शक का कार्य करता है। उन्होंने कहा कि समय की जरूरतों के अनुसार एमडीडीए हेतु 10 पाॅलिसीज में नीतिगत परिवर्तन किये हैं। साथ ही, राज्य सरकार व्यवस्थित वैंडिंग जोन विकसित करने के प्रयास कर रही है। वेंडर्स और आमजन को इससे लाभ मिलेगा।
कार्यक्रम के दौरान उपाध्यक्ष एमडीडीए आशीष कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि एमडीडीए द्वारा लगातार नई तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसके लिये एमडीडीए ने नेशनल ई-गवर्नेंस अवार्ड (2018-19) प्राप्त किया है। उन्होंने कहा कि एमडीडीए द्वारा 29 घंटों के अन्दर नक्शे की स्वीकृति दी जा रही है। स्मार्ट सिटी की संकल्पना को ध्यान में रखते हुए विभिन्न प्रोजेक्ट्स पर तेजी से कार्य कर रही है।

यदि आवंटित खनन पट्टे से 80 प्रतिशत खनन न हुआ तो पट्टा होगा निरस्त

राज्य सरकार प्रदेश में हो रहे अवैध खनन से राजस्व वसूली कम मिलने पर चिंताजनक है, उन्होंने अवैध खनन पर लगाम लगाने के लिए नई खनन नीति लाने जा रही है। इसके तहत क्रेशर का लाइसेंस उसी को दिया जाएगा, जिसके पास खनन का पट्टा है। अभी तक बिना खनन पट्टे के क्रेशर का लाइसेंस जारी किया जा रहा है, इससे धड़ल्ले से अवैध खनन किया जा रहा है। इसके अलावा नई नीति में आवंटित पट्टे से 80 प्रतिशत खनन नहीं होने की स्थिति में उसे निरस्त कर दिया जाएगा। प्रदेश सरकार का खनन से राजस्व नहीं बढ़ रहा है, जिसके लिए अवैध खनन को सबसे बड़ा कारण माना गया है।

खनन नीति में मौजूद प्रावधानों से खनन माफिया पर नकेल कसने में कामयाबी नहीं मिल पाई है। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने खनन विभाग की समीक्षा के दौरान खनन से होने वाले राजस्व को दोगुना करने के निर्देश दिये।

इसके लिए उन्होंने मौजूद खनन नीति में सख्त प्रावधान करने के प्रस्तावों पर सहमति जताई है। विभाग ने अवैध खनन रोकने का नया फार्मूला बनाया है। इसके तहत क्रेशर लाइसेंस को सख्त बनाया जा रहा है।

अभी तक बिना खनन सामग्री निकालने का पट्टा होने पर भी क्रेशर लाइसेंस जारी कर दिया जाता था, लेकिन नई संशोधित नीति में उसी को क्रेशर का लाइसेंस मिलेगा, जिसके पास स्वीकृत पट्टा होगा।

ऐसा नहीं करने वाले क्रेशर मालिकों के लाइसेंस कैंसल होंगे। इससे विभाग के खनन पट्टों का आवंटन बढ़ेगा और राजस्व में भी वृद्धि होगी। इसके साथ अवैध खनन को रोकने के लिए इतना ही नहीं बल्कि स्वीकृत पट्टों पर प्रतिवर्ष निर्धारित खनन सामग्री का अस्सी प्रतिशत दोहन क्रेशर मालिक को करना होगा। ऐसा नहीं करने पर पट्टा कैंसल हो जाएगा।

कई कंपनियों का निजीकरण करने की तैयार कर रही सरकार

केंद्र सरकार ने अपनी कई कंपनियों का निजीकरण करने की पूरी तैयारी कर ली है। दिपावली से पहले इसका खाका तैयार किया जा रहा है। वहीं अब नई पॉलिसी के तहत नीति आयोग, विनिवेश और पब्लिक असेट मैनेजमेंट विभाग (दीपम) को नोडल विभाग बना दिया गया है।
पब्लिक असेट मैनेजमेंट विभाग की भूमिका बढ़ने के बाद अब जिन मंत्रालयों के अंदर यह कंपनियां आती हैं, उनकी किसी तरह की कोई भूमिका नहीं रहेगी। दीपम, नीति आयोग के साथ मिलकर के उन कंपनियों को देखेगा, जिनमें सरकार अपनी हिस्सेदारी घटा सकती है। वहीं दीपम विभाग के सचिव विनिवेश के लिए बने अंतर-मंत्रालय समूह के उपाध्यक्ष बनाए गए हैं। अधिकारियों के मुताबिक, जिन कंपनियों में सरकार अपनी हिस्सेदारी बेचेगी, उनकी दो चरणों में बोली लगेगी। पहले चरण में एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (ईओआई) मंगाया जाएगा और दूसरे चरण में वित्तीय बोलियां मांगी जाएंगी। पहले चरण के लिए सरकार इच्छुक कंपनियों के साथ बैठक और रोड शो भी करेगी। विनिवेश का पूरा चरण चार से पांच माह में पूरा हो जाएगा।
जिन कंपनियों में सरकार अपनी हिस्सेदारी को बेचने जा रही है, उनमें प्रमुख तेल मार्केटिंग कंपनी भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) भी शामिल है। इसके अलावा भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड (बीईएमएल), कंटेनर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (कॉनकोर) और शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया शामिल हैं। कंटेनर कॉरपोरेशन में 30 फीसदी हिस्सा बेचने को मंजूरी दी गई है।
केंद्र सरकार इसके अलावा टीएचडीसी और नीपको में अपनी हिस्सेदारी को एनटीपीसी को बेचने जा रही है। विनिवेश पर हुई सचिवों की बैठक में कुल आठ सचिव शामिल थे. इनमें दीपम, कानून सचिव, रेवेन्यू सेक्रेटरी, एक्सपेंडिचर सेक्रेटरी, कॉरपोरेट अफेयर सेक्रेटरी भी शामिल रहे।
इस विनिवेश को करने के बाद सरकार एयर इंडिया के विनिवेश के लिए एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (ईओआई) का प्रारुप तैयार करेगी। इसके लिए गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में बने मंत्रियों का समूह एक पखवाड़े में फैसला लेगा। सरकार एयर इंडिया की 30 हजार करोड़ रुपये की उधारी को अपने ऊपर लेगी। ईओआई से निवेशकों को पूरी तरह से पारदर्शिता मिलेगी।
बीपीसीएल की नेटवर्थ फिलहाल 55 हजार करोड़ रुपये है। अपनी पूरी 53.3 फीसदी बेचकर के सरकार का लक्ष्य 65 हजार करोड़ रुपये की उगाही करने का है। इसके लिए ससंद से भी मंजूरी नहीं लेनी पड़ेगी। पिछले साल सरकार ने ओएनजीसी पर एचपीसीएल के अधिग्रहण के लिए दबाव डाला था। इसके बाद संकट में फंसे आईडीबीआई बैंक के लिए निवेशक नहीं मिलने पर सरकार ने पिछले वित्त वर्ष में एलआईसी को बैंक का अधिग्रहण करने को कहा था। सरकार विनिवेश प्रक्रिया के तहत संसाधन जुटाने के लिये एक्सचेंज ट्रेडिड फंड (ईटीएफ) का भी सहारा लेती आई है।

जीएसटी की दरों में संसोधन से टूरिज्म और सर्विस बेस्ड इंडस्ट्री को बढ़ावा मिलेगाः सीएम

सीएम आवास में आयोजित प्रेसवार्ता को सम्बोधित करते हुए मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि हालही में केंद्र सरकार द्वारा इकोनॉमी में उठाए गए सुधारवादी कदमों से उत्तराखंड को भी बड़ा फायदा होगा। पिछले एक डेढ़ साल से उत्तराखंड में निवेश और उद्योगों को मजबूत करने के लिए की गई पहल को अब और मजबूती मिलेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में निवेश को बढ़ावा देने के लिए हमने अनेक नई नीतियां बनाई हैं और अनेक नीतियों मे आवश्यक संशोधन किए हैं। सिंगल विंडो क्लीयरेंस सिस्टम को मजबूती दी है, निवेश के अनुकूल माहौल बनाया है। इन्वेस्टर्स समिट के बाद अब तक 17 हजार करोड़ रुपए का निवेश ग्राउंडेड हो चुका है। केंद्रीय वित्तमंत्री जी ने आर्थिक सुधारों की जो घोषणाएं की हैं, उसके बाद हमारे प्रयासों को और भी ज्यादा बल मिलने वाला है। इन घोषणाओं का सीधा फायदा उत्तराखंड के उद्योग जगत को मिलने वाला है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड एक पर्यटन राज्य है। हमने पर्यटन को बूस्ट करने के लिए नई पर्यटन नीति बनाई है। जीएसटी की दरों में संशोधन से टूरिज्म और सर्विस बेस्ड इंडस्ट्री को बढ़ावा मिलेगा। पहले 2500 से 7500 रुपये तक के होटल कमरों पर 18 प्रतिशत टैक्स लगता था, जिसे घटाकर 12 प्रतिशत किया गया है। इसी तरह 7500 से ऊपर के होटल कमरों पर पहले 28 प्रतिशत जीएसटी लगता था जिसे घटाकर 18 प्रतिशत किया गया है। एक हजार रुपये से कम के होटल कमरों पर 5 प्रतिशत तक जीएसटी लगता था, लेकिन अब कोई जीएसटी नहीं लगेगा। राज्य के होटल व्यावसायियों का कहना है इससे राज्य में होटल व्यवसाय में 15 से 20 प्रतिशत तक ग्रोथ होगी। इससे उत्तराखंड में हॉस्पिटैलिटी सेक्टर मजबूत होगा, ज्यादा पर्यटक आने से होटल व्यवसाय मजबूत होगा जो राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूती देगा, रोजगार की नई संभावनाएं पैदा करेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भंडारण योग्य खाद्य पदार्थों पर भंडारण के समयानुसार छूट दी जाएगी, इससे उत्तराखंड में भी फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्री को छूट मिल सकेगी। यहां के उत्पादों को भंडारण की उचित व्यवस्था मिलेगी, उत्पादों की खपत बढ़ेगी तो स्थानीय काश्तकारों को फायदा मिलेगा। इलेक्ट्रिक वाहनों पर जीएसटी 12 प्रतिशत से घटकर 5 प्रतिशत हुआ है, राज्य सरकार ने इलेक्ट्रिक व्हीकल पॉलिसी लागू की है, जिसके तहत इलेक्ट्रिक वाहनों का प्रचलन बढ़ेगा, लोगों को रोजगार मिलेगा, इलेक्ट्रिक वाहनों से प्रदूषण पर नियंत्रण लगेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा दी जाने वाली राहत से उत्तराखंड में ऑटोमोबाइल, फार्मा, मैनुफैक्चरिंग सेक्टर के लिए भी यह एक बड़ा बूस्ट होगा। स्किल्ड मैनपावर, प्रभावी सिंगल विंडो सिस्टम, बेहतर कानून व्यवस्था, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र से निकटता आदि कारणों से उत्तराखण्ड को विशेष लाभ होगा।

वित्त मंत्री के प्रबंधन से बाजार में आई तेजी, राहत मिलने की उम्मीद

सुस्ती की शिकार अर्थव्यवस्था में नई जान फूंकने के लिए केन्द्र सरकार ने एक महीने के भीतर पांच बड़े कदम उठाए। सुधार के इन कदमों की शुरुआत बीती 23 अगस्त को हुई थी, जबकि देशी-विदेशी निवेशकों को राहत देते हुए कर उपकर में बढ़ोतरी का फैसला वापस लिया था। बीती 23 अगस्त को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने विदेशी और घरेलू निवेशकों पर उपकर में बढ़ोतरी का फैसला वापस लेने की घोषणा की थी। उसी दिन बैंकों में 70,000 करोड़ रुपये की नई पूंजी देने, रिजर्व बैंक द्वारा रेपो दरों में कटौती का फायदा ग्राहकों को तुरंत देने जैसी घोषणा की गई थी।
28 अगस्त को वित्त मंत्रालय ने अर्थव्यवस्था से जुड़ी दूसरी बड़ी घोषणा की थी। सीतारमण ने कोयला खदान और कॉन्ट्रैक्ट मैन्यूफैक्चरिंग क्षेत्र में 100 फीसदी प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) को मंजूरी दी थी। यही नहीं, गन्ना किसानों और चीनी मिलों को राहत देने के लिए चीनी के निर्यात पर 6,268 करोड़ की सब्सिडी का ऐलान भी किया। डिजिटल मीडिया में भी प्रिंट मीडिया की तरह 26 फीसदी एफडीआई को मंजूरी मिली थी। 30 अगस्त को ही सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र के 10 बैंकों को मिला कर चार बैंक बनाने की घोषणा की थी। उस समय कहा गया था कि विलय के बाद ये बैंक न सिर्फ आकार में बड़े होंगे बल्कि इनका कुल कारोबार भी बढ़ कर 55.81 लाख रुपए करोड़ का हो जाएगा। बड़े बैंक अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर विदेशी बैंकों से मजबूती से प्रतिस्पर्धा कर सकेंगे।
बीते 19 सितंबर को वित्त मंत्री ने कहा कि सरकारी बैंक अभी से अक्टूबर तक 400 जिलों में लोन बांटने के लिए शामियाना बैठक का आयोजन करेंगे। इन बैंठकों में खुदरा ग्राहक के साथ साथ नॉन बैंकिंग फाइनेंस कंपनियों (एनबीएफसी) की भी उपस्थिति होगी। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को घरेलू कंपनियों और नई मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों के लिए अध्यादेश के जरिए कॉरपोरेट कर घटाने की घोषणा की।

बिना लाइसेंस ठेली नहीं लगा सकेंगे वेंडर्स

शहर में फेरी नीति लागू करने के लिए गठित कमेटी की बैठक नगर निगम में हुई। बैठक में निर्णय लिया गया कि क्षेत्र में नगरीय फेरी नीति लागू होने के बाद परिवार के एक सदस्य को ही लाइसेंस जारी किया जाएगा। साथ ही इनकी जगह, समय और दूूरी भी निश्चित की जाएगी। इन्हें निगम की ओर से पथ प्रकाश, पानी और शौचालय की भी सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। बैठक में मुख्य नगर आयुक्त चतर सिंह चौहान ने फेरी संगठनों के नामित सदस्यों को 20 दिन के भीतर निगम क्षेत्र के वेंडर्स की सूची उपलब्ध कराने को कहा।

सूची में वेंडर्स का नाम, फोटो, मोबाइल और पता भी उपलब्ध कराना होगा। उन्होंने कहा कि 20 दिनों के बाद किन जगहों पर आपत्ति है, यह समिति के सभी सदस्य निश्चय करेंगे। एनएनए ने बताया कि वेंडर्स को लेकर तीन क्षेत्र चयनित किए जाएंगे। इसमें पहला गैर प्रतिबंधित ठेली क्षेत्र (बिना रोक टोक वेडर्स ठेली लगा सकते है), दूसरा नियंत्रित ठेली क्षेत्र (कुछ ही लोगों को ठेली लगाने की परमिशन दी जाएगी, इसमें दिन, दूरी और समय निश्चित किया जाएगा) और तीसरा ठेली रहित क्षेत्र (इस क्षेत्र में कोई भी ठेली खड़ी नहीं हो पाएगी)। इस दौरान सहायक नगर आयुक्त उत्तम सिंह नेगी, डॉ. संतोष पंत, सब इंस्पेक्टर कुलदीप, ट्रैफिक सब इंस्पेक्टर राजेंद्र, राजू गुप्ता, राहुल पाल, मुसाफिर साहनी, कुसुम गुप्ता, लता देवी आदि उपस्थित रहे।

एक साल के लिए होगा पंजीकरण
एमएनए चतर सिंह चौहान ने बताया कि वेंडर्स के लिए पंजीकरण एक साल के लिए ही मान्य होगा। हर साल पंजीकरण को नवीनीकरण कराना होगा। उन्होंने बताया कि पंजीकरण का शुल्क वेंडर्स की सूची आने के बाद ही तय किया जाएगा। उन्होंने बताया कि जो वेंडर्स इस सूची से वंचित रह जाएगा। उसका नाम अगले पांच साल बाद ही जुड़ सकेगा।

बैठक में यह भी तय हुआ
– जिस स्थान का लाइसेंस वेंडर्स को मिलेगा, वह उसी स्थान पर ठेली लगाएगा।
– एक स्थान पर सीमित संख्या से ज्यादा आवेदन आने पर, लॉटरी से चयन किया जाएगा।
– स्थिर, चलायमान और साइकिल से वस्तु विक्रय करने वालों को भी लाइसेंस दिया जाएगा।
– जिसके नाम लाइसेंस उपलब्ध होगा, वही व्यक्ति कार्य करेगा।
– एक व्यक्ति एक से ज्यादा ठेली नहीं लगा सकेगा।
– ठेली और फड़ के आसपास गंदगी करने पर पेनल्टी लगेगी।
– वेंडर्स को कूड़ा उठान की सुविधा, पथ प्रकाश, शौचालय, पानी आदि की सुविधा निगम उपलब्ध कराएगा।
– शर्तों का उल्लंघन करने पर शुरूआती दो चरणों में चालान वसूला जाएगा, तीसरे चरण में लाइसेंस निरस्त कर दिया जाएगा।

निवेश के लिए उत्तराखंड सबसे उपयुक्त राज्य, तेजी से बढ़ रही उत्तराखंड की अर्थव्यवस्थाः त्रिवेन्द्र रावत

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने बैंगलोर में आयोजित आठवें इनवेस्ट नाॅर्थ कार्यक्रम में प्रतिभाग करते हुए उत्तराखण्ड में निवेश के लिए उद्यमियों को आमंत्रित किया। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड में सेवा क्षेत्र विशेष तौर पर पर्यटन, बायो टेक्नोलाॅजी, नवीकरणीय ऊर्जा, फिल्म शूटिंग व सूचना प्रौद्योगिकी में निवेश की काफी सम्भावनाएं हैं। उत्तराखण्ड सरकार, निवेशकों को आवश्यक सुविधायें प्रदान करने के लिए तत्पर है। गत दो वर्षों राज्य में निवेश के लिए सुनियोजित प्रयास किए गए हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड राज्य तेजी से निवेश के लिये मुख्य गंतव्य स्थल के रूप में विकसित हुआ है। यह देश की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। राज्य सरकार ने डीपीआईआईटी और विश्व बैंक द्वारा प्रस्तावित विभिन्न व्यावसायिक सुधार किए हैं। पर्वतीय राज्यों द्वारा किए गए व्यापार सुधारों के मामले में उत्तराखण्ड अग्रणी है। लाॅजिस्टिक बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और व्यापार को सुविधाजनक बनाने के लिए अनेक बुनियादी अवसंरचनात्मक परियोजनाएं प्रारम्भ की हैं। राज्य में निर्यात को बढ़ावा देने के लिए आईसीडी और एलसीएस की स्थापना की गई हैं। आल वेदर रोड़ व जौलीग्रांट एयरपोर्ट की क्षमता विस्तार का काम प्रगति पर है। केन्द्र सरकार द्वारा प्रस्तावित अमृतसर-कोलकाता इण्डस्ट्रियल काॅरिडोर से उत्तर प्रदेश व उत्तराखण्ड में स्थित उद्योगों को लाॅजिस्टिक्स के लिए सुगमता होगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड में अक्टूबर, 2018 में प्रथम इन्वेस्टर्स समिट ‘‘डेस्टिनेशन उत्तराखण्ड’’ का आयोजन किया गया था, जिसमें देश व विदेश के 4000 से अधिक प्रतिनिधियों, निवेशकों, उद्योगपतियों ने प्रतिभाग किया था। शिखर सम्मेलन के दौरान 600 से अधिक निवेशकों के साथ विभिन्न क्षेत्रों में पूंजी निवेश के लिए रू. 1,24,000 करोड़ (एक लाख चैबिस हजार करोड़) से अधिक के प्रस्तावों के एमओयू किये गये। इन एमओयू के क्रियान्वयन के लिए ठोस पहल की गई है। इन्वेस्टर्स समिट के बाद के 10 माह में लगभग रू. 17 हजार करोड़ से अधिक के पूंजी निवेश के प्रस्तावों की ग्राउण्डिंग की जा चुकी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य का ध्यान ऐसी परियोजनाओं पर भी केंद्रित है, जिससे राज्य के पर्वतीय क्षेत्रों के निवासियों को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराकर उनकी आर्थिकी को मजबूत किया जा सके। पाइन निडिल से ऊर्जा उत्पादन इनमें से एक है, जिससे पर्वतीय क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों को रोजगार के अवसर सुलभ हो सकें। राज्य सरकार ने अब तक 20 परियोजनाआं की स्थापना के लिए विकासकर्ताओं का चयन किया है, जो लगभग 675 किलोवाट की बिजली उत्पादन कर सकेंगे और आने वाले समय में इस परियोजना की क्षमता को 5 मेगावाट तक बढ़ाये जाने की योजना है।

मुख्यमंत्री ने राज्य में पर्यटन के क्षेत्र में निवेश की सम्भावनाओं के बारे में बताते हुए कहा कि उत्तराखण्ड भारत के प्रमुख पर्यटन स्थलों में से एक है। राज्य में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिये नयी पर्यटन नीति-2018 लागू की गयी है, जिसका मुख्य उद्देश्य रिवर्स माइग्रेशन को सुगम बनाने, ग्रामीण पर्यटन को प्रोत्साहित करने और पारिस्थितिक पर्यटन, वैलनेस व साहसिक पर्यटन को बढ़ावा देना है। राज्य के प्रत्येक जनपद में एक नया थीम बेस्ड डेस्टिनेशन विकसित किया जा रहा है। राज्य में पर्यटक रोप-वे निर्माण की व्यापक सम्भावनायें हैं, जिनमें से कुछ चिन्हित परियोजनायें देहरादून-मसूरी, जानकी चट्टी-यमुनोत्री, गोविन्दघाट-हेमकुण्ड साहिब, भैरव गढ़ी, देव का डाण्डा, बिनसर प्रमुख हैं। हाल ही में देहरादून को मसूरी से जोड़ने वाले रोप-वे प्रोजेक्ट का शिलान्यास किया गया है, जिससे सड़क मार्ग से यात्रा मंे लगने वाला समय एक घण्टा तीस मिनट से घटकर केवल 15-20 मिनट हो जायेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा 66 वें राष्ट्रीय फिल्म फेयर अवाड्र्स में उत्तराखण्ड का चयन मोस्ट फिल्म फेंडली स्टेट के लिए किया गया है। राज्य सरकार की फिल्म नीति के कारण ही पिछले वर्ष 180 से अधिक फिल्मों की शूटिंग राज्य में की गईं, जो एक समर्पित क्षेत्र नीति का ही परिणाम है। उत्तराखण्ड, सूचना प्रौद्योगिकी एवं समर्थित सेवाओं के क्षेत्र के विकास पर भी अपना ध्यान केंद्रित कर रहा है और इस क्षेत्र के लिए राज्य सरकार ने आवश्यक बुनियादी ढांचे के विकास के लिए विशेष पहल की है। राज्य ने अपनी सूचना प्रौद्योगिकी नीति को अधिसूचित कर दिया है। इस अवसर पर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज ने भी सम्बोधित किया।

पार्क की सौंदर्यता देख सीएम बोले, प्रकृति को संरक्षित करने का बेहतर प्रयास

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने सोमवार को कुठाल गेट के समीप स्थित आनन कानन एजुकेशनल एम्यूजमेंट पार्क का भ्रमण किया। डॉ. योगी एरन द्वारा विकसित किये गये इस पार्क को उन्होंने प्रकृति को संरक्षित करने का बेहतर प्रयास बताया। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस पार्क में प्रकृति से जुड़ कर जिस प्रकार तालाबों, गुफाओं व म्यूजियम के साथ ही बड़ी संख्या में बरगद के पेड़ो को संजोकर उन्हें आकर्षक स्वरूप प्रदान करने का कार्य भी निश्चित से सराहनीय है। पार्क में बरगद के पेड़ पर कमरो के निर्माण को भी उन्होंने नया प्रयोग बताया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पार्क विद्यार्थियों को प्रकृति एवं पर्यावरण को संरक्षित करने की प्रेरणा प्रदान करने के साथ ही प्रकृति विज्ञान से भी उन्हें परिचित कराने में मदद करेगा। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने ऐसे प्रयासों को समाज के लिए भी हितकर बताया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने पार्क को देखने आये स्कूली छात्रों से भी बातचीत की।

डॉ योगी ऐरन ने मुख्यमंत्री को अवगत कराया कि 5 एकड़ में निर्मित यह पार्क स्कूली छात्रों के आकर्षण का केन्द्र बना है। इस पार्क में शारारिक व मानसिक रूप से कमजोर छात्रों के लिये विशेष व्यवस्था की गई है। उन्होंने कहा कि प्रकृति से जुड़ा यह पार्क छात्रों को प्रकृति से जोड़ने तथा पर्यावरण के प्रति जागरूक करने में भी मदद करता है।

डायरेक्ट सेलिंग के लिए प्रदेश में निर्धारित की जायेगी गाईड लाइनः मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने उत्पादकों एवं उपभोक्ताओं के मध्य बेहतर तालमेल पर बल दिया है। उन्होंने उपभोक्ता एवं उत्पादकों को और अधिक नजदीक लाने के प्रयास किये जाने तथा उपभोक्ताओं की सुविधा के लिए व्यापार में किस प्रकार बिचैलियों की भूमिका को कम किया जाय इस पर भी चिन्तन करने की जरूरत बतायी। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में भी प्रत्यक्ष बिक्री (डायरेक्ट सेलिंग) के सम्बन्ध में भारत सरकार द्वारा जारी गाइड लाइन के दृष्टिगत समिति का गठन किया जायेगा। उन्होंने बदलते दौर में विकसित हो रही नई सोच के साथ इसके लिये प्रभावी तंत्र विकसित करने पर भी बल दिया।
राजपुर रोड स्थित एक होटल में पी.एच.डी चेम्बर ऑफ कॉमर्स द्वारा आयोजित डायरेक्ट सेलिंग इंडस्ट्री से सम्बन्धित सेमिनार को सम्बोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उपभोक्ता एवं उत्पादकों को और अधिक नजदीक लाने के प्रयास किये जाने तथा व्यापार में किस प्रकार बिचैलियों की भूमिका को कम किया जाय इस पर भी चिन्तन की जरूरत है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्पादकों द्वारा व्यापार में नई-नई विद्याओं के साथ अवस्थापना सुविधाओं के विकास में किये जा रहे व्यय के दृष्टिगत भी इसे नियमित करने के लिये तंत्र विकसित करने की प्रक्रिया पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि डायरेक्ट सेलिंग की दिशा में उपभोक्ताओं को कोई परेशानी न हो, उन्हें धोखाधड़ी जैसी घटनाओं का सामना न करना पड़े, उत्पादक के प्रति उपभोक्ता का विश्वास बना रहे, इसके कारगर प्रयास होने चाहिए। उन्होंने कहा कि किसानों द्वारा अपने उत्पादों को सीधे उपभोक्ताओं तक पहुंचाने की प्रक्रिया में भी उपभोक्ताओं को फायदा होगा तथा इससे किसानों को भी अच्छा मूल्य मिलेगा। मुख्यमंत्री ने प्रोसेसिंग की दिशा में भी विशेष ध्यान देने की जरूरत बतायी, उनका कहना था कि पश्चिम के तौर-तरीकों को आज का युवा अपनाने लगा है अतः जरूरी है कि इसकी व्यवस्था में सुधार लाया जाय। बाजार की गुणवत्ता, उपभोक्ता की सन्तुष्टि व विश्वास के लिये जरूरी है कि इस दिशा में समग्र सोच के साथ हम आगे बढ़ें। उन्होंने पी.एच.डी चेम्बर से इस सम्बन्ध में सुझाव भी देने को कहा। सभी के सुझावों के आधार पर तैयार की गई नीति इस दिशा में सुधार लाने के साथ ही व्यापक व्यवस्था बनाने में मददगार रहेगी।
सचिव खाद्य एवं उपभोक्ता मामले सुशील कुमार ने कहा कि प्रदेश में उपभोक्ताओं के व्यापक हित में राज्य सरकार द्वारा कारगर प्रयास किये हैं। उन्होंने इस सम्बन्ध में पर्वतीय क्षेत्रों के साथ ही ग्रामीण उपभोक्ताओं पर भी ध्यान दिये जाने एवं इस दिशा में सकारात्मक सोच के साथ कार्य करने की बात कही।
इंटरनेशनल कंज्यूमर पॉलिसी एक्सपर्ट विजोन मिश्रा ने कहा कि डाइरेक्ट सेलिंग क्या है, इसकी जानकारी आम आदमी को होनी चाहिए। उन्होंने इसके लिये राज्य सरकार व पी.एच.डी चेम्बर को संयुक्त रूप से आगे आने की अपेक्षा की। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड मोस्ट कन्ज्यूमर फ्रेंडली स्टेट है। उपभोक्ताओं के व्यापक हित में राज्य सरकार के प्रयास सराहनीय हैं। इस अवसर पर चेयरमैन उत्तराखण्ड पी.एच.डी चेम्बर वीरेन्द्र कालरा आदि ने भी अपने विचार रखे।

नेगी दा ने कहा, हिलटाॅप से किसानों को मिलेगा रोजगार

सरकार के लिए राहत की खबर है। हिलटाॅप शराब पर राज्य सरकार को अब लोक गायक नरेन्द्र सिंह नेगी का साथ मिल गया है। नरेन्द्र सिंह नेगी ने कहा है कि जब राज्य में शराब की बिक्री और खपत बहुत ज्यादा है तो शराब की फैक्ट्री पर बैन क्यों लगना चाहिए? इस बयान के बाद राजनीतिक अर्थ निकाले जाने लगे है। सरकार के समर्थन में बयान देने के बाद सरकार के फैसले और बुलंद होने का अनुमान लगाए जाने लगे है।
दरअसल, आज मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत लोक गायक नरेन्द्र सिंह नेगी के आवास पर पहंुचे। उन्होंने श्री नेगी को साहित्य अकादमी के द्वारा सर्वोच्च सम्मान दिये जाने के लिए नामित होने पर बधाई दी। इसके बाद कुछ पत्रकारों ने श्री नेगी से सवाल किए। जिसमें उन्होंने हिलटाॅप शराब की फैक्ट्री पर उनकी राय जानी। जिस पर लोक गायक नरेन्द्र सिंह नेगी ने खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि क्या आपको पता है कि हमारे यहां शराब की खपत और बिक्री कितनी बढ़ गई है। ऐसे में हम बाहरी राज्यों से शराब मगांकर पी रहे है। या तो सरकार शराब पर पूर्ण पांबदी लगा दे। नही तो शराब फैक्ट्री लगाने का विरोध नही होना चाहिए। उन्होंने कहा कि राज्य में शराब बनेगी तो किसानों और काश्तकारों को भी फायदा पहुंचेगा। माल्टा और अन्य पहाड़ी उत्पादों को अच्छा दाम मिलेगा। सरकार राजस्व भी कमायेगी और राज्य की शराब राज्य में ही बिकेगी। उन्होंने अप्रत्यक्ष कहा कि ऐसे में शराब का गुण कम से कम रोजगार देने के काम तो आयेगा। वरना सभी जानते है कि शराब स्वास्थ के लिए हानिकारक है।
इस बयान के बाद नेगी दा के लिए आम लोगों की सोच कितनी बदलती है। यह तो समय ही बतायेगा। लेकिन अपनी स्पष्ट बात रखकर श्री नेगी ने सरकार को अप्रत्यक्ष रुप से बड़ी राहत दे दी है। कुछ लोग श्री नेगी के बयान को सही भी ठहरा रहे है। लोगों का कहना है कि उत्तराखंड केवल शराब का कंज्यूमर ही बन गया है। ऐसे में शराब से रोजगार और राजस्व बढ़ता है तो दिक्कत कहां है। या तो सरकार शराब राज्य में शराब पर प्रतिबंध लगा दे। नही तो शराब पर राजनीति नही होनी चाहिए।

आप भी सुनिए श्री नरेन्द्र सिंह नेगी ने क्या कहा…