जानिए त्रिवेन्द्र सरकार के बजट में किसको क्या मिला

त्रिवेंद्र रावत की सरकार ने बजट में राजस्व बढ़ाने के प्रयास किये है। जैविक खेती और किसानों की आय दोगुनी करने के वायदे को सरकार ने बजट के माध्यम से आगे बढाया है। पर्यटन में सरकार को केंद्र से खासी मदद मिलती रही है। इस सेक्टर को आगे बढ़ाने के लिए एडवेंचर टूरिज्म विभाग खोलने की तैयारी में है। इससे जुड़ी नई योजनाएं त्रिवेंद्र सिंह रावत के बजट में हैं।

विधेयक जो अधिनियम बन गए
– वर्ष 2019-20 का बजट
– माल एवं सेवा कर संशोधन अधिनियम
– उत्तराखंड शारीरिक रूप से विकलांग, स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के आश्रित और पूर्व सैनिकों के लिए आरक्षण अधिनियम
– उत्तराखंड मंत्री वेतन, वेतन, भत्ता 2019 अधिनियम
– उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद संशोधन अधिनियम
– उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश जमींदारी विनाश और भूमि व्यवस्था अधिनियम
– उत्तराखंड भूतपूर्व मुख्यमंत्री आवासीय एवं अन्य सुविधाएं
– उत्तराखंड चार धाम देवस्थानम प्रबंधन अधिनियम
– उत्तराखंड जैविक कृषि अधिनियम
– उत्तराखंड पंचायती राज संशोधन अधिनियम
– कृषि उत्पाद मंडी संशोधन अधिनियम
– फल पौधशाला अधिनियम

सदन में पेश हुए ये विधेयक
– संयुक्त प्रांत आबकारी अधिनियम 1910 संशोधन विधेयक
– यूनिवर्सिटी ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी रुड़की विधेयक
– उत्तराखंड-उत्तरप्रदेश नगर निगम अधिनियम 1959 संशोधन अधिनियम (संशोधन विधेयक)
– उत्तराखंड-उत्तर प्रदेश नगर पालिका अधिनियम 1959 संशोधन अधिनियम (संशोधन विधेयक)
– उत्तराखंड साक्षी संरक्षण विधेयक
– उत्तराखंड पंचायती राज संशोधन विधेयक
– उच्च शिक्षा परिषद अधिनियम, 1995 संशोधन विधेयक
– उत्तराखंड उपकर संशोधन विधेयक
– ग्राफिक एरा पर्वतीय विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक

किस मद के लिए कितना बजट…
राजस्व प्राप्तियां- 42439.33 करोड़ रुपये
कर्मचारियों के वेतन, भत्तों पर खर्च- 14673.96 करोड़
योजनाओं के लिए बजट- 11137.30 करोड़
घाटे को पूरा किया 460 करोड़ रुपये,पब्लिक अकाउंट से लेकर राजस्व घाटा पूरा

रिवर्स पलायन- 18 करोड़ रुपये
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन- 76 करोड़
राष्ट्रीय कृषि विकास योजना- 53 करेड़
गन्ना भुगतान- 240 करोड़
पैक्स कम्प्यूटराइजेशन- 10 करोड़
पशुपालन- 414.35 करोड़ रुपये
मुख्यमंत्री सीमांत क्षेत्र विकास योजना- 20 करोड़ रुपये

बुनियादी ढांचा
मुजफ्फरनगर रुड़की रेल मार्ग- 70 करोड़
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना- 1072 करोड़
सौंग पेयजल बांध परियोजना- 130 करोड़
नाबार्ड के सहयोग से पेयजल की 22 नई योजनाओं के लिए 190 करोड़

स्मार्ट सिटी-123 करोड़
प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी- 95 करोड़
शहरी विकास एडीबी योजना- 103 करेड़
राज्य वित्त आयोग से शहरी निकायों के लिएरू774.24 करोड़
जिला योजना के तहत 665 करोड़

स्वास्थ्य
हैल्थ एवं वेलनेस सेंटर- 380.50 करोड़
मेडिकल कालेज हल्द्वानी एवं संबद्ध अस्पताल- 110 करोड़
दून मेडिकल कालेज- 96.79 करोड़

समाज कल्याण
आंगनबाड़ी केंद्रों के भवन निर्माण- 48.60 करोड़
नंदा गौरा योजना- 80 करोड़
बाल पोषण योजना- 25 करोड़

विद्यालयी शिक्षा- 7867.99 करोड़
एअरोस्पेसे व रक्षा उद्योग- 50 करोड़
एमएसएमई सहायता योजना- 35 करोड़
वनों को आग से बचाने के लिए- 19.92 करोड़
जायका- 110 करोड़

होम स्टे- 11.50 करोड़
पर्यटन विकास बाह्य सहायता- 119 करोड़

सड़क सुरक्षा कोष- 06 करोड़
लोक निर्माण विभाग को सड़क सुरक्षा के लिए- 7 करोड़

जौलीग्रांट विस्तार- 295 करोड़
खेल एवं युवा कल्याण- 239.94
राष्ट्रीय खेल- 90 करोड़
विश्व बैँक की नई योजना- 315 करोड़

2019-20 में जीडीपी की रैंकिंग में उत्तराखंड को दूसरा स्थान
-केदारनाथ में 32 लाख श्रद्धालु आए

बजट के प्रावधान
-जमरानी बांध के अंतर्गत आ रहे लोगों के पुनर्वास के लिए 220 करोड़ का प्रावधान किया गया है।
-हर घर नल से जल के लिए 134 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
-हरिपुरा और तुमड़िया जलाशय के लिए पावर प्रोजेक्ट पर 20-21 में काम शुरू हो जाएगा।
-जंगली जानवरों द्वारा किए गए नुकसान प्राकृतिक आपदा की सूची में शामिल।
-गैरसैंण ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित।
-मंडुवा, उड़द, गहत, मसूर, आदि के लिए लिए कृषि उत्पादन सर्वेक्षण योजना
-कौशल विकास के लिए ऑनलाइन पोर्टल विकसित किया जाएगा।
-युवाओं को हुनर विशेष सिखाने लिए मुख्यमंत्री शिक्षुता योजना के तहत निश्चित राशि दी जाएगी।
-राज्य के 67 गांवों को सड़कों से जोड़ने का लक्ष्य।
-2021 में 3063 शिक्षा विभाग में नियुक्तियां की जाएगी।
-बाल विकास में 1224 कर्मियों की भर्ती की जाएगी।
-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के लिए 76 करोड़ की धनराशि का प्रावधान
-निवेशक सम्मेलन में 22 हजार करोड़ की पूंजी निवेश से 57314 रोजगार के अवसर मिलेंगे।
-विदेशों में बसे लोगों को निवेश से जोड़ने के लिए अलग से विभाग बनेगा।
-पुलिस के आधुनिकीकरण के लिए 2174 करोड़ की धनराशि प्रस्तावित की गई है।
-रबी खरीफ के लिए 23 करोड़ा का प्रावधान किया गया है।
-राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के अंतर्गत 53 करोड़ की धनराशि प्रस्तावित
-मिशन ऑन एग्रीकल्चर मैकनाइजेशन के तहत 500 फार्म मशीनरी बैंक, 800 कस्टम हायरिंग
सिस्टम स्थापित होंगे।
-किसानों के अवशेष गन्ना मूल्य के भुगतान के लिए वित्तीय वर्ष 2020-21 के लिए 240 करोड़
की धनराशि की व्यवस्था।
-राज्य समेकित सहकारी विकास परियोजना के लिए 100 करोड़ की धनराशि।
-दुग्ध सहकारिताओं के विकास के लिए 444.62 करोड़ का प्रावधान।
-सहकारी समिति में कंप्यूटराइजेशन के लिए 10 करोड़ का प्रावधान।
-दीनदयाल उपाध्याय सहकारिता किसान योजना के तहत 27 करोड़ का प्रावधान।

नई योजनाएं
– हल्द्वानी-अल्मोड़ा-पिथौरागढ़ के लिए हेली सेवा शुरू की जाएगी।
-दिव्यांग, वृद्धावस्था, विधवा पेंशन 1000 रुपये से बढ़ाकर 1200 रुपये प्रतिमाह करा दी गई है।
-स्कूलों में 3 लाख से अधिक छात्रों को फर्नीचर उपलब्ध कराया जाएगा।
-सबके लिए स्वास्थ्य- शीघ्र ही 314 डाक्टरों के पदों को भरने के लिए चिकित्सक चयन आयोग
बना लिया जाएगा।
-जायका परियोजना (वन पंचायतों के वन आवरण में वृद्धि, वनों के निक टवर्ती गांववालों की
-आजीविका में सुधार तथा वनों पर निर्भरता कम करने के लिए 110 करोड़ का प्रावधान।
-ईको टूरिज्म नीति जल्द लागू होगी।
-वीरचंद्र गढ़वाली योजना के लिए 17.50 करोड़ प्रावधान।
-पशुपालन विभाग के लिए 414.35 करोड़ का प्रावधान किया गया है।
-नरेगा के लिए 266.70 करोड़ का प्रावधान किया गया है।
-सामाजिक सुरक्षा की दृष्टि से डेढ़ सौ से अधिक जनसंख्या वाले सीमावर्ती गांवों में सड़क पहुंचाई जाएगी।

त्रिवेन्द्र के बजट में राजस्व बढ़ाने का संकल्प दिखा

उत्तराखंड में करीब 53 हजार करोड़ से अधिक का बजट पेश करते हुए मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने प्रदेश में विकास की बुनियाद को मजबूत करने और रोजगार को बढ़ाने का इरादा जताया। सरकार का ध्यान कुंभ मेले के आयोजन पर भी गया। 2021 में होने वाले हरिद्वार महाकुंभ को प्रदेश सरकार भव्य और ग्रीन कुंभ परिकल्पना के आधार पर आयोजित करेगी। इस परिकल्पना को पंख देने के लिए सरकार ने बजट में 1205 करोड़ रुपये खर्च करना तय किया है। महाकुंभ में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए 450 करोड़ के स्थायी और एक हजार रुपये के अस्थायी कार्य किए जाएंगे। सरकार की कोशिश है कि महाकुंभ में आने वाले श्रद्धालु चारधाम की यात्रा भी कर पाए। इसके लिए चारधाम और ऑलवेदर रोड को महाकुंभ से पहले पूरा करने का सरकार ने लक्ष्य निर्धारित किया है। कुंभ के लिए सरकार अलग से सुरक्षा व्यवस्था के तहत 60.12 करोड़ रुपये भी खर्च करेगी।

विकासपरक बजट पेश करते हुए बतौर वित्त मंत्री सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने एक ही मास्टर स्ट्रोक से विपक्ष को चारो खाने चित कर दिया। मुख्यमंत्री ने बजट पेश करने के तुरंत बाद सदन में गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित कर दिया। इसके साथ ही अब प्रदेश में दो राजधानी होंगी।
बजट में सरकार ने बेहतर रोड कनेक्टिविटी को प्राथमिकता दी है। 2020-21 में सड़कों और पुलों की मरम्मत के लिए 300 करोड़ रुपये रखे हैं। पिछले बजट में कुल 180 करोड़ का प्रावधान था। सीमा के 150 से अधिक जनसंख्या वाले गांवों को सड़कों से जोड़ा जाएगा। मार्च 2020 तक 67 गांवों को ग्रामीण मोटरमार्गों से जोड़ा जाएगा। बुनियादी ढांचे पर जोर देते हुए लोक निर्माण विभाग के लिए 2055 करोड़ का बजट रखा है। सड़क निर्माण में तेजी लाने के लिए प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना में 1072 करोड़ की व्यवस्था की है। ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेलवे लाइन के लिए सरकार ने 70 करोड़ रखे हैं।
सरकार रोजगार के मुद्दे पर भी संभली है। मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड युवा आयोग के गठन की घोषणा की। सहायक अध्यापक एलटी संवर्ग और प्रवक्ता संवर्ग में 3063 पदों 2020-21 में तैनाती की जाएगी। महिला सशक्तीकरण एवं बाल विभाग में 1224 नई भर्ती होंगी। इसके साथ ही नया हुनर सीखने वालों के लिए एक नई योजना मुख्यमंत्री शिक्षुता योजना शुरू करने का एलान बजट में किया गया। प्रदेश में 2022 तक सभी डिग्री कालेजों के पास अपना भवन होगा। सरकार ने वित्तीय वर्ष 2020-21 के लिए 78 करोड़ का बजट प्रस्तावित किया है। रूसा योजना एवं राज्य योजना के तहत यह बजट प्रस्तावित किया है।

प्रदेश के सात लाख से ज्यादा लोगों को 1165 करोड़ की योजनाओं से पीने का साफ पानी मिल सकेगा। जल जीवन मिशन, अर्द्धनगरीय क्षेत्रों के लिए पेयजल कार्यक्रम और नाबार्ड पोषित योजनाओं के लिए बजट प्रावधान किए गए हैं। रोडवेज बसों में सफर पहले की तुलना में और अधिक सुहाना होगा। इसके लिए वित्तीय वर्ष 2020-21 में 110 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। बजट में सरकार की ओर से परिवहन सेवाओं को बेहतर बनाने के साथ ही परिवहन निगम को वित्तीय संकट से उबारने के लिए कई कदम उठाए गए हैं। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, सांसद, विधायक, स्कूली छात्राएं, मान्यता प्राप्त पत्रकार, दिव्यांग परिवहन निगम बसों में मुफ्त यात्रा कर सकें, इसके लिए बजट में 24 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
जौलीग्रांट एयरपोर्ट पर यात्रियों को विश्वस्तरीय सुविधाएं मिलें। इसके लिए वित्तीय वर्ष 2020-21 में 295 करोड़ रुपये के बजट का प्रावधान किया गया है। सरकार की ओर से बजट जारी होने के साथ ही भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू की जाएगी ताकि एयरपोर्ट का विस्तार किया जा सके। बजट में देहरादून-श्रीनगर-टिहरी, हल्द्वानी-अल्मोड़ा- पिथौरागढ़ध्धारचूला के लिए हेली सेवाएं शुरू करने का प्रावधान किया गया है।
संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम के प्रोजेक्ट सिक्योर हिमालय के तहत गंगोत्री नेशनल पार्क में देश का पहला ‘स्नो लेपर्ड कंजर्वेशन सेंटर’ का निर्माण किया जाएगा। वित्तीय वर्ष 2020-21 में कैंपा योजना के तहत 215 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। बजट वृक्षारोपण व वर्षा जल संरक्षण योजनाओं के लिए होगा। इसके अलावा पर्यावरण निदेशालय के गठन व विशेषज्ञों की नियुक्ति के लिए 12.93 करोड़ रुपये के बजट का प्रावधान किया है।

प्रदेश सरकार की ओर से निराश्रित वृद्धजनों को आरामदायक जीवन देने के लिए वृद्धाश्रम खोले जाएंगे। वरिष्ठ नागरिकों के कल्याण के लिए राष्ट्रीय कार्ययोजना के तहत सरकार ने अलग से बजट का प्राविधान किया है। इस बजट से प्रत्येक जिले में वृद्धाश्रम तैयार किए जाएंगे। यहां वृद्ध लोगों के रहने, खाने-पीने व मनोरंजन की समुचित व्यवस्थाएं की जाएंगी। सरकार ने वित्तीय वर्ष 2020-21 में हर जरूरतमंद वृद्ध, दिव्यांग, विधवा, किसान, निराश्रित परित्यक्त महिलाओं को पेंशन का लाभ पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। इसमें 4 लाख 75 हजार वृद्धजनों, 78 हजार दिव्यांगों, 1 लाख 78 हजार विधवा, 30 हजार किसानों और 5500 निराश्रित परित्यक्त महिलाओं को पेंशन से जोड़ा जाएगा। इसके लिए 1048 करोड़ रुपये की धनराशि बजट में प्रस्तावित की है।प्रदेश सरकार ने बजट में गन्ना किसानों की होली खुशनुमा करने का प्रयास किया है। किसानों को बकाया गन्ना भुगतान के लिए बजट में 240 करोड़ रुपये का प्रस्ताव किया गया है। इसके साथ ही सरकारी, सहकारी और निजी चीनी मिलों को विभिन्न तरह के लोन की सुविधा भी दी गई है। ताकि, किसानों को बकाया और वर्तमान भुगतान त्वरित किया जा सके।
प्रदेश सरकार ने वित्तीय वर्ष 2020-21 में स्मार्ट सिटी के लिए 123 करोड़ रुपये का बजट रखा है। जिससे स्मार्ट सिटी के काम होंगे। वहीं अब तक देहरादून स्मार्ट सिटी लि. को लेकर एक हजार करोड़ से अधिक के वर्कआर्डर जारी हो चुके हैं। अब स्मार्ट सिटी का दायरा 10 से बढ़कर 100 वार्डों तक हो गया है।

उत्तराखंड में फल-सब्जी पर नहीं लगेगा मंडी शुल्क

उत्तराखंड में त्रिवेंद्र सरकार ने किसानों की आय दोगुनी करने के लिए केंद्र के फार्मूले को अपनाया है। प्रदेश में लागू उत्तराखंड कृषि उत्पादन मंडी विकास एवं विनियमन अधिनियम को खत्म कर इसकी जगह केंद्र का मॉडल एक्ट (कृषि उपज एवं पशुधन विपणन अधिनियम) को लागू किया है। मंत्रिमंडल ने इसकी मंजूरी दे दी है।
केंद्र ने किसानों की आय बढ़ानेे के लिए कृषि उत्पादों का व्यापार खुला करने के लिए मॉडल एक्ट को लागू किया है। अब किसानों को मंडियों में कृषि उत्पाद लाने की अनिवार्यता नहीं रहेगी। किसान अपने उत्पाद को उचित दामों पर मंडी से बाहर कहीं भी बेच सकेंगे। मंडी समिति की ओर से फल-सब्जी व अन्य कृषि उत्पादों के कारोबार पर शुल्क नहीं लिया जाएगा।
वर्तमान में लागू उत्तराखंड कृषि उत्पादन मंडी विकास एवं विनियमन अधिनियम (एपीएमसी) में यह व्यवस्था है कि मंडी समिति के अधीन आने वाले क्षेत्रों में फल-सब्जी के कारोबार पर एक प्रतिशत मंडी शुल्क लिया जाता है। लाइसेंस के बिना कोई भी आढ़ती कृषि उत्पादों का कारोबार नहीं कर सकता है। मॉडल एक्ट में बिना लाइसेंस के भी आढ़ती किसानों का उत्पाद खरीद सकते हैं।

कांट्रेक्ट फार्मिंग से बंजर होने से बचेगी कृषि भूमि
उत्तराखंड के किसान अब कांट्रेक्ट फार्मिंग (अनुबंध खेती) कर सकेंगे। मंत्रिमंडल ने कांट्रेक्ट फार्मिंग एक्ट 2018 को राज्य में लागू करने की मंजूरी दे दी है। इससे कृषि क्षेत्र में काम करने वाली कंपनियां अपनी जरूरत के अनुसार किसानों से खेती के लिए कांट्रेक्ट कर सकते हैं।


कर्नाटक और मैसूर की तर्ज पर राज्य में कांट्रेक्ट फार्मिंग को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने एक्ट बनाया है। इस एक्ट के आधार पर प्रदेश में अनुबंध खेती की मंजूरी दे दी है। इस एक्ट के लागू होने से जिन किसानों के काफी कृषि भूमि है और वे बुढ़ापे में खेेतीबाड़ी नहीं कर सकते हैं। ऐसे किसान अपनी कृषि भूमि को कांट्रेक्ट फार्मिंग के लिए कंपनी को लीज पर दे सकते हैं। किसान के हितों को सुरक्षित करने के लिए सरकार ने एक्ट में व्यवस्था की है। जिससे लीज पर दी जाने वाली जमीन को न तो ट्रांसफर किया जाएगा और न ही उस पर कोई कब्जा कर सकता है।

राज्य में तीन लाख हेक्टेयर भूमि बंजर
कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार राज्य में करीब सात लाख हेक्टेयर भूमि पर खेती होती है। जिसमें रबी और खरीफ फसलें उगाई जाती है। लगभग तीन लाख हेक्टेयर कृषि भूमि बंजर हो चुकी है। जंगली जानवरों और बंदरों की समस्या, सिंचाई का अभाव से किसान खेती छोड़ रहे हैं। राज्य गठन के बाद प्रदेश में लगभग 17 प्रतिशत कृषि योग्य भूमि का क्षेत्रफल कम हुआ है।

मुख्यमंत्री ने जिला प्रशासन को दिये निर्देश, उद्योग मित्र की बैठकें आयोजित कर समस्याओं का त्वरित समाधान हो

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने उद्यमियों से मेरा सामाजिक दायित्व (माई सोसियल रिस्पांसिबिलिटी) के तहत प्रदेश में शिक्षा एवं स्वास्थ्य की बेहतरी के लिये सहयोगी बनने की अपेक्षा की है। उन्होंने प्रदेश में उद्योगों को सुविधायुक्त वातावरण प्रदान करने, उद्यमियों की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिये भी सभी सम्बन्धित विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिये हैं।
सचिवालय में इंडस्टस्ट्रीज एशोसियेशन ऑफ उत्तराखण्ड (आई.ए.यू) के प्रतिनिधियों एवं शासन के उच्चाधिकारियों के साथ एशोसियेशन की समस्याओं एवं सुझावों पर कार्यवाही किये जाने सम्बन्धी बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में उद्योगों के अनुकूल नीतियां निर्धारित किये जाने के बावजूद भी उद्यमियों की कोई समस्या हो तो उसका त्वरित समाधान किया जाना चाहिए। उन्होंने आई.ए.यू द्वारा प्रदेश में एम.एस.एम.ई सेक्टर को बढ़ावा देने के साथ ही उद्यमियों की विभिन्न समस्याओं एवं सुझावों पर त्वारित कार्यवाही हेतु अधिकारियों को निर्देश दिये। उन्होंने श्रम, उद्योग एवं सिडकुल, सीडा से सम्बन्धित समस्याओं के निराकरण हेतु नियमित रूप से उद्योग मित्र की बैठक आयोजित करने के भी निर्देश दिये। मुख्यमंत्री ने सख्त निर्देश दिये है कि जिलास्तरीय अधिकारी उद्यमियों के साथ अच्छा व्यवहार करें उनकी समस्याओं का समाधान करें। उन्होंने श्रम, उद्योग एवं सिडकुल आदि, उद्यमिता विकास से जुड़े जिलास्तरीय अधिकारियों के कार्य व्यवहार की जांच करने के भी निर्देश दिये हैं। उन्होंने उद्यमियों से अपेक्षा की कि वे समय समय पर अपनी समस्याओं से विभागीय प्रमुखों को भी अवगत कराये ताकि औद्योगिक विकास मे तेजी आ सके।
मुख्यमंत्री ने उद्यमियों का ऊधम सिंह नगर की भांति मेरा सामाजिक दायित्व के तहत प्रदेश में शिक्षा व स्वास्थ्य की बेहतरी के लिये कार्य करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि उधमसिंह नगर में इस योजना के तहत 1100 स्कूलों को 528 स्कूलों में संयोजित कर उन्हें उद्यमियों द्वारा गोद लेकर इनमें परिवहन, स्मार्ट क्लास तथा अध्यापकों की संख्या दुगनी करने के साथ ही पढ़ाई का बेहतर वातावरण सृजित किया गया है। इसी प्रकार जनपद के 8 अस्पतालों का उच्चीकरण कर उन्हें हाईटेक बनाया गया है। उन्होंने अन्य जनपदों में भी इस प्रकार के प्रयास करने की उद्यमियों से अपेक्षा की।
मुख्यमंत्री ने एशोसियेशन की मांग पर प्रत्येक जनपद में ईएसआई अस्पताल के लिये भूमि उपलब्ध कराने के भी निर्देश दिये। उन्होंने हरिद्वार व उधम सिंह नगर में ईएसआई हास्पिटल की स्वीकृति के लिये केन्द्रीय श्रम मंत्री से वार्ता करने की भी बात कही। मुख्यमंत्री ने कहा कि उद्यमियों के व्यापक हित में ग्रिवास कमीटी भी गठित की गई है। यहां भी वे अपनी समस्याये रख सकते हैं।

दिल्ली लौटते ही शाह से की मुलाकात, त्रिवेन्द्र भी पहुंचे घर

उत्तराखण्ड से राज्यसभा सांसद और भाजपा के राष्ट्रीय मीडिया प्रमुख अनिल बलूनी मुम्बई में उपचार पूर्ण होने के पश्चात दिल्ली लौट आये हैं। उन्होंने आज प्रातः सोशल मीडिया पर उपचार पूर्ण होने और दिल्ली लौटने की जानकारी दी।
वहीं, बलूनी ने गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात की। बतातें चले कि सांसद बलूनी गत साढ़े चार माह से मुंबई में उपचार करा रहे थे। सूत्रों की मानें तो इस मुलाकात में कई विषयों पर चर्चा हुई। वहीं, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत और प्रदेश अध्यक्ष बंशीधर भगत ने भी आज दिल्ली प्रवास के दौरान अनिल बलूनी के आवास पर जाकर हालचाल लिया और उनके पूर्ण स्वस्थ होने की कामना की।
सांसद बलूनी ने सोशल मीडिया पर अपने मित्रों, शुभचिन्तकों का आभार जताया। अस्वस्थता के दौरान निरन्तर मनोबल बढ़ाने, स्वस्थ होने की कामना करने हेतु धन्यवाद दिया। हमारे ब्यूरो से बातचीत में बलूनी ने कहा कि दिल्ली लौटकर वह फिर से अपने कार्यों को गति दे रहे है। उत्तराखंड के विकास में कोई कमी नही रहे, इसका वह प्रयास करेंगे।

नगर निगम की टीम ने मांस विक्रेताओं को नोटिस जारी किये

स्वास्थ्य अधिकारियों से जांच करवाए बिना मांस बेचने वालों पर नगर निगम का डंडा चला। इस दौरान निगम की टीम ने यहां दो मांस विक्रेताओं का चालान काटकर दस हजार रुपये जुर्माना वसूला है। साथ ही छह लोगों को स्वास्थ्य विभाग ने नोटिस भी जारी किया गया है।
नगर निगम और खाद्य सुरक्षा विभाग की संयुक्त टीम इंद्रा नगर स्थित मीट मार्केट पहुंची। इस दौरान सफाई निरीक्षक सचिन रावत ने मांस विक्रेताओं के लाइसेंस और नालियों का निरीक्षण लिया। इसमें अधिकांश के लाइसेंस की वैधता समाप्त पाई गई। इस पर सफाई निरीक्षक ने शीघ्र ही ऑनलाइन लाइसेंस नवीनीकरण कराने का निर्देश दिया। इस दौरान उन्होंने दो मांस विक्रेताओं का चालान कर दस हजार रुपये का जुर्माना वसूला। खाद्य सुरक्षा अधिकारी संजय तिवारी ने यहां बिक रहे मांस का परीक्षण किया। इसमें उन्होंने छह मीट विक्रेताओं को बिना मांस की जांच कराए बिक्री करने पर नोटिस जारी किया है। उन्होंने कहा कि स्लाटर हाउस में मांस कटना चाहिए। साथ ही वहीं डॉक्टरों को मांस का निरीक्षण करवाना चाहिए। उनकी लिखित सहमति के बाद ही मांस को बेचा जा सकता है। इस अवसर पर सहायक नगर आयुक्त विनोद लाल भी उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री से जुड़ें फेसबुक लाइव में और बताएं कैसा हो बजट

नये बजट के स्वरूप को लेकर मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत मुख्यमंत्री आवास में फेसबुक लाईव के माध्यम से जनता से करेंगे सीधा संवाद।
प्रदेश के आगामी बजट में जन सुझावों पर भी ध्यान दिया जायेगा। इसके लिए आपका बजट आपका सुझाव कार्यक्रम के तहत मुख्यमंत्री आम जनता से शनिवार 8 फरवरी, 2020 को मुख्यमंत्री आवास में सांय 6ः30 बजे से 7ः30 बजे तक फेसबुक लाईव द्वारा जन-संवाद करेंगे। हर साल राज्य सरकार द्वारा बजट पर लोगों के सुझाव प्राप्त किये जाते हैं। सुझाव जनहित में पाए जाने पर बजट में शामिल भी किए जाते रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता जन आकांक्षाओं के अनुरूप प्रदेश का विकास है। उन्होंने सरकार में जनभागीदारी को भी जरूरी बताया है। मुख्यमंत्री ने प्रदेश की जनता से फेसबुक लाईव में शामिल होकर अपने अमूल्य सुझाव देने का आग्रह किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उपयोगी सुझावों को अमल में लाया जाएगा। प्रदेश के बजट को अंतिम रूप देने से पहले समाज के सभी वर्गों से सुझाव आमंत्रित किये जाने से समावेशी बजट की अवधारणा को भी मजबूती मिलेगी।
ज्ञातव्य है कि पहले यह कार्यक्रम 8 फरवरी को पूर्वाह्न 11ः00 बजे वीर चन्द्र सिंह गढ़वाली सभागार सचिवालय में निर्धारित था जिसे अब संशोधित कर मुख्यमंत्री आवास में शनिवार को सांय 6ः30 बजे से 7ः30 बजे निर्धारित किया गया है।

केन्द्रीय बजट में लॉजिस्टिक्स नीति जारी करने की घोषणा

ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के जरिये निवेशकों को आकर्षित करने, छोटे और मझोले कारोबारियों को उत्पीड़न से बचाने और प्रतिस्पर्धी बाजारों में उनके लिए मौका बनाए रखने की कोशिश कर रही केंद्र सरकार निवेश से लेकर निर्यात तक, नियमन, प्रमाणन और परिवहन संबंधी खर्चे घटाएगी। साथ ही इनसे संबंधित झंझट भी खत्म करेगी। हालांकि सरकार लॉजिस्टिक्स नीति बनाने की घोषणा कर इस दिशा में पहले ही आगे बढ़ चुकी है, लेकिन बजट में कुछ प्रावधान कर इसे जल्द ही अमली जामा पहनाने का भी संकेत दिया गया है। वित्त मंत्री ने सिंगल विंडो ई-लॉजिस्टिक्स मार्केटप्लेस की सुविधा के साथ लॉजिस्टिक्स नीति जारी करने की घोषणा बजट में की है।
सिंगल विंडो
सिंगल विंडो से नियमन-प्रमाणन में लगने वाला वक्त बचेगा, दुश्वारियां घटने के साथ लॉजिस्टिक्स मद में लागत कम होगी। अभी इस मद में सकल घरेलू उत्पाद का 14 फीसद से अधिक खर्च होता है, जिसे वर्ष 2022 तक 10 फीसद के नीचे लाने का लक्ष्य रखा गया है। भारत का लॉजिस्टिक्स सेक्टर 20 से अधिक सरकारी एजेंसियों, सरकार की 40 सहायक पार्टनर कंपनियों, 37 निर्यात संवर्धन परिषद और 500 से अधिक प्रमाणपत्रों के साथ बेहद जटिल है। अभी 16,000 करोड़ डॉलर (करीब 12 लाख करोड़ रुपये) के बाजार वाले इस सेक्टर में 200 शिपिंग कंपनियां, 36 लॉजिस्टिक्स सेवाएं, 129 इनलैंड कंटेनर डिपो, 168 कंटेनर फ्रेट स्टेशन और 50 से अधिक आइटी सिस्टम व बैंक शामिल हैं, जो 10 हजार से अधिक वस्तुओं के परिवहन में अपनी भूमिका निभाते हैं।
यह क्षेत्र 1.20 करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार देता है। इतनी अहम भूमिका निभाने वाले इस सेक्टर की जटिलता यहीं खत्म नहीं होती। आयात-निर्यात के मामले में भी 81 प्राधिकरणों और 500 प्रमाणपत्रों की जरूरत पड़ती है। नियमन, प्रमाणन के बाद ही परिवहन के जाल में उलझे इस सेक्टर से संबंधित कार्यशैली पर आर्थिक सर्वेक्षण में भी सवाल उठाए गए थे। निर्यात के लिए दिल्ली से जा रहे माल के बंदरगाह तक पहुंचने में 19 दिन लगने का उदाहरण देकर सर्वे रिपोर्ट में खामी से निजात पाने का सुझाव दिया गया था।
वित्त मंत्री ने बजट पेश करने के दौरान अलग-अलग क्षेत्रों के लिए लॉजिस्टिक्स के संबंध उन सभी उपायों और सुविधाओं की घोषणा की है, जिससे परिवहन, प्रमाणन और नियमन में खर्च घटेगा। बजट में ब्लॉकध्तालुका स्तर पर भंडारण गृह, गांव स्तर पर बीज भंडार गृह, रेल और हवाई सेवा से जुड़ी कोल्ड चेन की व्यवस्था की गई है। सरकार का मानना है कि इससे लॉजिस्टिक्स खर्च घटेगा और निर्यात में 5-8 फीसद की वृद्धि होगी। उद्यमी गुणवत्ता पूर्ण निर्माण करेंगे। इसके अलावा सरकार ने लॉजिस्टिक्स बाजार को 2022 तक 250 अरब डॉलर करने का लक्ष्य रखा है। वह मान रही है तब इस क्षेत्र में करीब 2.20 करोड़ लोगों को रोजगार मिलेगा।
इन्वेस्टमेंट क्लीयरेंस सेल
निवेशकों के लिए एंड-टु-एंड यानी शुरू से लेकर अंत तक हर स्तर पर सुविधाएं देने के लिए इस सेल का प्रावधान किया गया है। इसमें निवेशक को निवेश से पहले सलाह, भूमि की उपलब्धता के साथ केंद्र और राज्य से अनुमति दिलाने की सुविधा भी शामिल होगी। यह सेल भी फेसलेस होगा यानी इन्वेस्टमेंट क्लीयरेंस सेल का पोर्टल बनेगा और आवेदन से लेकर निस्तारण तक पूरी व्यवस्था ऑनलाइन होगी।
निर्यातकों के लिए ई-रिफंड
केंद्र, राज्य एवं स्थानीय स्तर पर निर्यातित वस्तु पर लिए गए शुल्क व कर की वापसी ई-रिफंड से होगी। निर्यातकों को विभागों के चक्कर नहीं काटने होंगे। इसके लिए सरकार योजना लांच करने जा रही है।

जून प्रथम सप्ताह में राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय हरित ऊर्जा विकास के आयामों पर होगी चर्चा

इस वर्ष जून के प्रथम सप्ताह में प्रदेश में अन्तर्राष्ट्रीय हरित ऊर्जा सम्मेलन का आयोजन किया जायेगा। इस सम्बन्ध में शुक्रवार को सचिवालय में मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में यह निर्णय लिया गया। सम्मेलन में केन्द्रीय नवीन एवं नवीकरणीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, वन एवं पर्यावरण, जलवायु परिवर्तन जलशक्ति मंत्रालय के मंत्रीगणों के साथ ही नीति आयोग के उपाध्यक्ष के साथ ही जिन देशों का रिनोवेशन इनर्जी पर ज्यादा फोकस है उनमें चौक रिपब्लिक, नार्वे, स्वीडन, कनाडा, नीदरलैंड, स्पेन, यू.ए.ई. आदि देशों के प्रतिनिधि भी प्रतिभाग करेंगे।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि रिनोवेशन एनर्जी भविष्य की जरूरत है। इस दिशा में गंभीरता से सोचने की जरूरत हैं। उन्होंने कहा कि इस दिशा में हम कैसे आगे बढ़े इस पर भी चिन्तन की जरूरत है। देहरादून को ग्रीन सिटी के रूप में चयनित होने से इस दिशा में हमारी जिम्मेदारी भी बढ़ी है। इस सम्मेलन के रूप में इस दिशा में यह प्रभावी पहल होगी। उन्होंने इस प्रकार के अन्तर्राष्ट्रीय सम्मेलन देश-विदेश के समय-समय पर आयोजित होते रहे है। हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने तथा अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर इस क्षेत्र में पहचान बनाने के प्रतिनिधियों को भी आमंत्रित किया जाना प्रस्तावित है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमे सम्मेलन में राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय हरित ऊर्जा विकास के आयामों, ऊर्जा परियोजनाओं के विकास हेतु वाध्यतायें एवं सीमायें, ऊर्जा परियोजनाओं के वित्तीय प्रबंधन इस क्षेत्र के विभिन्न अधिनियम एवं नीतियों के साथ ही ऊर्जा क्षेत्र में नवीन तकनीकि एवं आविष्कार जैसे विषयों पर हम क्षेत्र के विषय-विशेषज्ञों द्वारा अपने विचार व्यक्त किये जायेंगे। उनके सुझाव भी इस दिशा में कारगर साबित होंगे। उन्होंने कहा कि हाइड्रो व थर्मल पावर की सीमायें और सीमित हो रही है। अब भविष्य के लिए वैकल्पिक ऊर्जा के साधनों पर ही हमें ध्यान देना होगा। इस दृष्टि से भी यह सम्मेलन उपयोगी सिद्व होगी।