गैरसैंण के भूमिधर बन गये मुख्यमंत्री, बोले जनप्रतिनिधियों से ही होनी चाहिए रिवर्स पलायन की शुरुआत

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत गैरसैंण के भूमिधर बन गये हैं। यह जानकारी खुद मुख्यमंत्री ने ट्वीटर और फेसबुक के माध्यम से दी है। मुख्यमंत्री ने रिवर्स पलायन का बङा संदेश देते हुए कहा कि “गैरसैंण जनभावनाओं का प्रतीक है। गैरसैंण हर उत्तराखंडी के दिल में बसता है। लोकतंत्र में जनभावनाएं सर्वोपरि होती हैं। गैरसैंण के रास्ते ही समूचे उत्तराखण्ड का विकास किया जा सकता है। सबसे पहले जनप्रतिनिधियों को ही रिवर्स पलायन करना होगा। रिवर्स पलायन से ही सुधरेगी पहाड़ों की तस्वीर और तकदीर। स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर मैं भी गैरसैंण का विधिवत भूमिधर बन गया हूँ।“
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार उत्तराखंड में स्वरोजगार को बढ़ावा दे रही है। हम अपने युवा को स्वरोजगार की राह पर ले जाने को कृतसंकल्प हैं और ऐसा करने से पहाड़ बसेगा। राज्य सरकार ने पूरी ईमानदारी से उत्तराखंड को उसके प्राकृतिक स्वरूप की तरफ ले जाने और प्रदेश के चहुमुखी विकास के लिए कार्य किया है और यह प्रक्रिया आगे और गति पकड़ेगी। हमारी सरकार पुरानी धारणाएँ तोड़ने की कोशिश कर रही है-हम स्वरोजगार को विकास का माध्यम बना रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने घी संक्रांति के पावन अवसर पर उत्तराखंडवासियों से अनुरोध कि सभी अपने अपने गाँवों की तरफ रूख करेंगे और वहां के अपने घरों का बेहतर रख-रखाव करेंगे।

ऑल वेदर रोड परियोजना के निर्माण कार्य की गति बढ़ाने के निर्देश

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने सचिवालय में ऑल वेदर रोड परियोजना की समीक्षा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह परियोजना राष्ट्रीय एवं सामरिक महत्व की महत्वपूर्ण परियोजना है, इसके क्रियान्वयन मे आ रही कठिनाइयों का प्राथमिकता के आधार पर समयबद्धता के साथ निराकरण किया जाय। उन्होने कहा कि चार धाम ऑल वेदर रोड योजना राज्य सरकार के साथ ही भारत सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में है। इस योजना को निर्धारित अवधि के अन्दर पूर्ण किया जाना है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि 889 कि0मी0 की लगभग 11700 करोड़ की यह योजना राज्य के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है। योजना के पूर्ण होने पर चारधाम यात्रा मार्ग पर आवागमन में सुविधा होने के साथ ही सीमान्त क्षेत्रों तक आवाजाही में आसानी होगी। यह योजना इस क्षेत्र के विकास की नई राह भी प्रशस्त करेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि सड़क निर्माण में आ रही कठिनाइयों को नियमित रूप से सभी सम्बन्धित विभाग नियमित रूप से समीक्षा कर उनका निराकरण करें। इस सम्बन्ध में भारत सरकार के स्तर से जो स्वीकृतियां प्राप्त की जानी है। उन्हें सन्दर्भित किया जाय। भारत सरकार द्वारा पूरा सहयोग दिया जा रहा है इसके लिए धनराशि की भी कोई कमी नही है। मुख्यमंत्री ने उर्जा विभाग को सड़क निर्माण में बाधक विद्युत लाईनों को तुरन्त शिफ्ट करने के भी निर्देश दिये। उन्होंने कार्यदायी संस्थाओं को सभी आवश्यक सहयोग एवं सुविधाये भी दिये जाने को कहा है। मुख्यमंत्री ने पेयजल विभाग को पेयजल लाइन शिफ्ट करने के भी निर्देश दिये। सड़क निर्माण में बाधक वृक्षों के कटान की स्वीकृति के लिए भी शीघ्र कार्यवाही करने के निर्देश मुख्यमंत्री ने दिये हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भागीरथी इको सेंसिटिव जोन के अन्तर्गत सड़क निर्माण के लिए 15 दिन के अन्दर इन्वायरमेंट इम्पेक्ट एसेसमेंट की व्यवस्था की जाय। ताकि इस क्षेत्र में बनने वाली सड़क निर्माण में भी तेजी आ सके। मुख्यमंत्री ने चारधाम सड़क मार्ग पर किये जाने वाले वृक्षारोपण की योजना भी तैयार करने को कहा। इसके साथ ही सड़को के आस-पास स्थापित किये जाने वाले पेट्रोल पंप, विश्राम स्थलों, इको पार्को के लिए भी स्थान चिन्हित किये जाय। उन्होंने अतिरिक्त भूमि पर महिला स्वयं सहायता समूहो के लिए कियोस्क बनाये जाने की भी बात कही। मुख्यमंत्री ने भूमि अधिग्रहण का मुवाअजा प्राप्त करने वाला कोई भी व्यक्ति छूटने न पाये इसका भी ध्यान रखने को कहा। कार्यदायी संस्थाओं को निर्माण सामाग्री नियमित रूप से उपलब्ध होती रहे इसकी भी व्यवस्था की जाय।
समीक्षा बैठक में आल वेदर रोड निर्माण के लिये कार्यदायी संस्थाओं में लोक निर्माण विभाग द्वारा ऋषिकेश-रूद्रप्रयाग (140कि0मी0), एन.एच.आई.डी.सी.एल एवं बीआरओ द्वारा रूद्रप्रयाग-माणा (160 कि0मी0), बीआरओ एवं पीआईयू ऋषिकेश-धरासू (144 कि0मी0), एनएचआईडीसीएल एवं बीआरओ धरासू-गंगोत्री (124 कि0मी0), एनएचआईडीसीएल एवं पीडब्लूडी धरासू-यमुनोत्री (95 कि0मी0), पीडब्लूडी रूद्रप्रयाग-गौरीकुंड (76 कि0मी0), पीडब्लूडी टनकपुर-पिथौरागढ़ (150 कि0मी0) में सात पैकेजों पर चल रहे निर्माण कार्यों पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में बताया गया कि 672 की0मी0 के 40 स्वीकृत कार्यों पर निर्माण कार्य तेजी से किया जा रहा है। अन्य अवशेष सड़को के निर्माण हेतु स्वीकृति प्रक्रिया गतिमान है।
बैठक में मुख्य सचिव ओम प्रकाश, प्रमुख सचिव आनन्द वर्धन, सचिव आर0के0सुधांशु, नीतेश झा, सुशील कुमार, अपर सचिव नीरज खेरवाल, डॉ. मेहरबान सिंह बिष्ट आदि उपस्थित थे।

सुधारवादी नेता के चलते यमकेश्वर विधायक खंडूड़ी फेम इंडिया पोस्ट में चयनित

देशभर में 50 उम्दा विधायकों का सर्वे कर उनकी लोकप्रियता, कार्यशैली, सामाजिक सरोकार, जनता से लगाव, जनहित कार्य, विधायक निधि खर्च का आंकलन करने वाली संस्था फेम इंडिया-एशिया पोस्ट में यमकेश्वर विधायक को सुधारवादी बताया गया है।

विधायक ऋतु खंडूड़ी के मीडिया प्रभारी अलकेश कुकरेती ने बताया कि फेम इंडिया एशिया पोस्ट के लिए देशभर से 50 उम्दा विधायकों का सर्वे हुआ था, इसमें विधायकों का चयन उनकी लोकप्रियता, कार्यशैली, प्रतिबद्धता, सामाजिक सरोकार, प्रभाव, जनता से जुड़ाव, जनहित के कार्य, छवि के साथ ही शून्यकाल, प्रस्तुत विधेयक, विधायक निधि के खर्च आदि के विश्लेषणात्मक रिपोर्ट के परिणामों के आधार पर किया गया था। इसमें विधायक ऋतु खंडूड़ी को फेम इंडिया पोस्ट में सुधारवादी चुना गया है, जबकि विकास नगर के विधायक मुन्ना सिंह चौहान को फेम इंडिया पोस्ट में उद्देश्यपूर्ण के लिए चुना गया है।

मुख्यमंत्री के निर्देश पर खाते में आयेंगे एक-एक हजार, जानिए किसे मिलेगी धनराशि

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने प्रदेशवासियों को रक्षाबंधन की हार्दिक बधाई व शुभकामनाएं दी हैं। इस अवसर पर उन्होंने कहा है कि रक्षाबंधन हमारी भावनाओं से जुड़ा हुआ त्यौहार है। हम प्रतिवर्ष इस त्यौहार को बड़ी खुशी के साथ व बड़ी आत्मीयता के साथ मनाते आ रहे हैं। इस दिन सभी को अपनी बहनों का इंतजार रहता है।
मुख्यमंत्री ने रक्षा बन्धन के अवसर पर प्रत्येक आंगनबाड़ी और आशा कार्यकत्री के खाते में एक-एक हजार रूपए की सम्मान राशि दिये जाने की घोषणा की। इससे लगभग 50 हजार आंगनबाड़ी और आशा कार्यकत्री बहनें लाभान्वित होंगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज रक्षाबंधन के अवसर पर कोरोना कि कारण जब हम इकट्ठा नहीं हो पा रहे हैं, सामूहिक रूप से अपने त्यौहार नहीं मना पा रहे हैं। ऐसे में भी हमारी हजारों आगनबाड़ी बहने, आशा बहने फ्रंट लाइन में रह करके और कोरोना से बचने के लिए और बचाने के लिए अपने आप को जोखिम में डालकर इस काम को कर रही है। हमें सतर्क करने का काम कर रही हैं। उन्होंने कहा कि मेरी उन सभी बहनों के लिए बहुत ही शुभकामनाएं हैं, वो सब स्वंय भी स्वस्थ रहें तभी वे औरों के स्वास्थ्य का ख्याल रख सकती है।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री निवास पर भी विगत वर्षों तक बड़ी संख्या में हमारी बहनें रक्षासूत्र बांधने आती थी और अपना आशीर्वाद व अपनी शुभकामनाएं मुझे प्रदान करती थी, परन्तु इस वर्ष कोरोना महामारी के कारण परिस्थितियां बदली है। सैकड़ों बहनों की राखियां मुझे पहुंची है, निश्चित रूप से उनका आशीर्वाद राखियों के साथ मुझे प्राप्त हुआ है। उन्होंने कहा कि मैं सभी बहनों का बहुत-बहुत धन्यवाद करता हूं और इस अवसर पर उनके स्वस्थ और दीर्घायु जीवन की कामना करता हूं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि महिलाओं की सुविधा के लिये रक्षाबंधन के अवसर पर उन्हें उत्तराखण्ड परिवहन निगम की बसों में मुफ्त यात्रा करने की सुविधा प्रदान की गई है। इसके साथ ही जो हमारी किशोरियां हैं उनके लिए हम बहुत जल्दी सेनेटरी नैपकिन योजना ला रहे हैं। आज हमारी सैकड़ों बहने बद्रीनाथ, केदारनाथ, जागेश्वर धाम, गर्जिया मन्दिर, चंडी देवी मंदिर और जो तमाम प्रसिद्ध मंदिर हैं वहां पर प्रसाद बनाकर अपनी आजीविका चला रही हैं। सरकार ने उन्हें मौका दिया है कि स्थानीय हमारे जो उत्पाद हैं उनसे हम प्रसाद तैयार करके और जो श्रद्धालु आते हैं वह उसे भगवान को उसका भोग चढ़ाएं। इसी तरह से हमने अपनी राज्य की महिलाओं के लिए और जो महिला समूह है उनके लिए 5 लाख रूपये तक का ऋण बिना ब्याज के दे रहे हैं ताकि हमारी बहने अपने पैरों में खड़ी हो सके और छोटी-मोटी मदद के लिए उनको किसी की आवश्यकता ना पड़े। उन्होंने कहा कि आज जब हम महिलाओं के उत्थान की बात करते हैं, महिलाओं के सशक्तिकरण की बात करते हैं तो बहुत जरूरी है कि हमारी बहनें शिक्षित हो, हमारी बेटियां शिक्षित हो और वह आर्थिक रूप से स्वावलंबी बने इसी दिशा में सरकार यह प्रयास कर रही है।

मानव अस्तित्व के लिए सरला बहन ने दिया था प्रकृति संरक्षण का मंत्र

केशव भट्ट (वरिष्ठ पत्रकार)
जंगल में जानवरों को भेजने की जगह खेतों में चारा लगाओ। छोटे पेड़ बचाओ। पत्तियां न तोड़ो ,पेड़ों से प्रेम करो, प्रकृति की चाल के साथ चलो। पर्यावरण संरक्षण शब्द की रचियता और जिन्होंने अपना पूरा जीवन प्रकृति में आत्मसात करके जिया और प्रकृति पर आने वाले संकट के प्रति सचेत किया और दर्शन भी विश्व को प्रदान किया। शोर से दूर हिमालय के आगोश में शांत वातावरण में विश्व पर्यावरण के संरक्षण पर गहन चिंतन और मनन करने वाली सरला बहन के जन्मदिन 5 अप्रैल को उनकी कहीं और लिखी एक एक बात मार्ग दर्शक की तरह विकास की सही दिशा की ओर आज ही इशारा करती है।
गांधी जी ने कुछ सोच कर सरला बहन को कौसानी भेजा होगा। उनको सरला बहन में एक बड़ी संभावना दिखी होगी। सरला बहन ने कौसानी से ही स्त्री शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण और जय जगत को सिद्ध करने के लिए अपना जीवन आहूत किया।
प्रथम विश्व युद्ध की विभीषिका और पागलपन को देख उन्होंने शांति और अहिंसा का मार्ग खोजने की अपनी यात्रा में गांधी जी को एक अडिग पड़ाव ही नही मंजिल के रूप में पाया। युद्ध और विकास के उफनते उन्मांद और युद्ध रोमांस से दुनिया विनाश की उस नाव में बैठी हुई है, जिसका चप्पू उनके हाथ के नियंत्रण से बेकाबू होने के कगार पर होता जा रहा है। प्रकृति की अपनी एक चाल होती है। सतत और निरंतर, कोई जल्दबाजी नही, उतावलापन नही जीत और हार की रेस से परे केवल चलते जाना ही है। गांधी ने इस चाल को अनुभव किया और उसकी चाल और उससे निकल रहे संगीत को समझा और उसकी चाल में कदम मिलाकर ग्राम स्वराज्य का मॉडल निर्मित किया। शिक्षा की नई तालीम में इन सब को पिरो दिया। प्रकृति ने जो दिया है, उसकी चाल के साथ सतत चला जा सकता है। प्रकृति के इर्द गिर्द ही मानव अपना विकास कर सकता है। मानव अस्तित्व के लिए प्रकृति का विनाश नही अपितु संरक्षण ही मंत्र हो सकता है। शिक्षा प्रकृति के अनुसार होनी चाहिए, उसके विरुद्ध नही। प्रकृति के परे कोई मार्ग हो ही नही सकता।
गांधी के जीवन दर्शन और जीवन ने ये सब एक सूत्र में सरला बहन ने विश्व को प्रदान किया। विश्व युद्ध की विभीषिका को देख कैथरीन, उनका असली नाम, संमझा की युद्ध जीतने वाला और युद्ध हारने वाला दोनों ही हारते है। केवल मानव के भीतर दम्भ और दूसरे को हराने का उन्माद जो विनाश का पर्याय है, ही जीतता है। आज ये सब हमारे सामने चरितार्थ हो रहा है।
सरला बहन के जन्मदिन पर उनकी हिमदर्शन की धार पर बैठना और प्रकृति के संरक्षण की गहन चिंतन करना मानव को एक दिशा प्रदान करता है। लक्ष्मी आश्रम का सतत परिवेश आज ही एक आशा प्रदान तो करता ही है। हालांकि विश्व में बेतरतीव भागता विकास सब कुछ लील लेने को अंधी दौड़ में चारो ओर भाग रहा है। उसकी अंधी दौड़ को रोक पाना संभव नही है। लेकिन गांधी के ग्राम स्वराज्य में अभी भी गांव को गांव बनाने की दिशा और मार्ग संरक्षित है। पुरखों की सतत और मेहनत के परिचायक खेत और गांव आज भी मानव सभ्यता को अमरता प्रदान करने की असीम क्षमता है।

सरला बहन ने लक्ष्मी आश्रम को एक मॉडल के रूप में विकसित किया। ये गांधी का ही जीवित मॉडल है। दूसरी और हिमदर्शन कुटीर को चिंतन स्थली के रूप में सरला बहन ने विश्व को प्रदान किया।
आज विकास के बेतरतीव मॉडल को मानव ही नही वन्य प्राणियों की सहज और नीरव जीवन शैली को भी प्रभावित किया है। विकास की तुरत गति ने सतत गति को बाधित ही किया है। वन्य प्राणियों का जंगल से बाहर आना इसका संकेत है। पर्यावरण संरक्षण ही इसका एक मात्र समाधान हो सकता है।
विश्व में जल संकट का गहराता भयावह रूप प्रकृति की चाल को बाधित करने वाले तुरत विकास का ही परिणाम है। मुट्ठी भर लोग दुनियां को तेजी से भागना चाहते है, इस भागमभाग में वो न जाने किस मंजिल को छूना चाहते है और पूरी मानव जाति को इस चाल में अपने अंधकूप में झोंकना चाह रहे है। ये आज प्रकृति के विनाश से संमझा जा सकता है। जब महानगर की चकाचैंध में सांस लेना कठिन हो जाती है, उस वक्त सब बेमानी लगता है। खाने के स्वाद में तेजी से आये बदलाव, विश्व में पिघलते ग्लेशियर, भारत में गंगा नदी समेत सारी नदियों को नालों में परिवर्तित होते देख प्रकृति की सतत चाल को समझना भी कहाँ रह गया है, संभव।
ये सब सहसा सरला बहन के जन्मदिन पर याद हो चला। कृत्रिम शोर से दूर प्रकृति के संगीत के साथ कैसे सुरताल मिल कर चला जा सकता है। ये सरला बहन के जीवन दर्शन और उनकी यादों में आज भी कौसानी के लक्ष्मी आश्रम और उनकी चिंतन स्थली हिमदर्शन में खोजा जा सकता है, बस प्रकृति की चाल के संग चलने मात्र से, जंगल के संगीत में सराबोर हुए, आज भी तमाम कोलाहल के बावजूद भी पक्षियों का कलरव ध्यान खींच ही लेता है। हिमालय की बर्फानी चोटियां अपनी ओर आकर्षित आज भी करती है। घाटियों से आती हवा एक संगीत ही तो है। घने जंगल में अनहद का संगीत तनिक एकाग्र होने से सुना जा सकता है। आज भी सूर्यास्त की लालिमा, रात का सन्नाटा, चन्द्रमा का प्रकाश अपने होने का अहसास छोड़ ही जाता है। ये सब सतत और निरंतर ही है। तुरत विकास की अवधारणा से ये कब तक रहेगा, इस पर चिंतन तो करना ही होगा, ये तय है।

अटकलों पर विराम, मुख्यमंत्री ने वरिष्ठ आईएएस को बनाया मुख्य सचिव

1987 बैच उत्तराखंड कैडर के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी ओम प्रकाश को राज्य का नया मुख्य सचिव बनाया गया है। वह मुख्य सचिव पद से सेवानिवृत्त हो रहे उत्पल कुमार सिंह के स्थान पर शुक्रवार शाम पांच बजे विधिवत कार्यभार ग्रहण करेंगे। अपर मुख्य सचिव (कार्मिक एवं सतर्कता) राधा रतूड़ी ने उनकी नियुक्ति के आदेश जारी किये है।
वहीं, आदेश जारी होने के बाद आईएएस ओम प्रकाश मुख्यमंत्री के आवास गए और मुख्यमंत्री को पुष्प गुच्छ देकर आभार व्यक्त किया। सूत्रों की मानें तो ओम प्रकाश को मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के करीबियों में माना जाता है। उनका त्रिवेन्द्र सिंह रावत के साथ काम करने का पुराना अनुभव है। जब त्रिवेन्द्र सिंह रावत कृषि मंत्री थे, तब ओम प्रकाश उनके सचिव हुआ करते थे। उत्पल कुमार के सेवानिवृत्त होने से नए मुख्य सचिव को लेकर हालांकि तमाम तरह की अटकलें लगाई जा रही थीं, लेकिन मुख्यमंत्री ने साफ कर दिया था कि वरिष्ठता के आधार पर दो अपर मुख्य सचिवों में से एक को मुख्य सचिव बनाया जाएगा। बुधवार को कैबिनेट बैठक के दौरान उन्होंने ओम प्रकाश को मुख्य सचिव बनाए जाने के संकेत भी साफ कर दिए थे।
मुख्य सचिव के आदेश जारी होने के बाद ओम प्रकाश ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की प्राथमिकता वाली योजनाओं पर खास फोकस करेंगे। उन्होंने कहा कि चारधाम आलवेदर रोड परियोजना, ऋषिकेश कर्णप्रयाग रेल परियोजना, केदारनाथ में पुनर्निर्माण कार्य व वाह्य साहयतित योजनाओं के तहत अवस्थापनाओं के कार्यों को समय से पूरा कराया जाएगा। कोविड-19 महामारी और अनलॉक के दौर में राज्य के समक्ष चुनौतियों के प्रश्न पर उन्होंने कहा कि इस दिशा में सरकार के स्तर पर प्रयास चल रहे है। ओम प्रकाश ने कहा कि वह कृषि और उद्यानिकी के क्षेत्र को सर्वोच्च प्राथमिकता देंगे। राज्य सरकार ने खेती को स्वरोजगार से जोड़ने की कई योजनाएं बनाई हैं, जिन्हें लोगों तक पहुंचाया जाएगा।

एक नजर मुख्य सचिव तक का सफर तय करने तक …
-ओम प्रकाश का जन्म 14 मई 1962 को बौंसी, जिला बाँदा (बिहार) में हुआ।
-बीएससी फिजिक्स-ऑनर्स। पटना साइंस कॉलेज। 
-एमएससी-थेऔरोटिकल फिजिक्स। सेंट स्टीफेंस कॉलेज, दिल्ली यूनिवर्सिटी।
-एम फिल-सीएसआईआर फेलोशिप। 
-1987 बैच के आईएएस अफसर। 
-1985 तक इनकम टैक्स में जॉब।
-ट्रेनिंग जौनपुर यूपी।
-एसडीएम-खुर्जा बुलंदशहर।
– सीडीओ-फतेहपुर।
-डीएम-मऊ, गाजीपुर, बांदा, हाथरस और देहरादून।
-2012 में प्रमुख सचिव। 
-2017 में अपर मुख्य सचिव। 

 

मुख्यमंत्री ने 300 बेड के कोविड अस्पताल में 320 लाख रुपये की योजनाओं को लोकार्पण किया

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने रूद्रपुर में पंडित राम सुमेर शुक्ल राजकीय मेडिकल कालेज में 1012.33 लाख लागत के 300 बेड के कोविड-19 हॅास्पिटल भवन का लोकार्पण किया। मुख्यमंत्री ने इसके साथ ही राजकीय मेडिकल कालेज रूद्रपुर के अन्तर्गत 299.76 लाख की लागत से रेस्पिरेटरी एण्ड स्किन डिजीज ब्लाक, 537.23 लाख की लागत से रेडियोलॉजी ब्लॉक तथा विश्व बैंक पोषित 90.35 लाख की लागत से ऑक्सीजन सप्लाई पाइप लाइन कार्य का भी लोकार्पण किया।
मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर सीएसआर के तहत टाटा प्रोजेक्टस लि0 के वित्तीय सहयोग से 320 लाख की लागत से 300 बेड कोविड हॉस्पिटल रूद्रपुर मे मेडिकल उपकरण की आपूर्ति एवं अधिष्ठान कार्यो का लोकार्पण के साथ ही प्लान इंडिया व रैकिट बैंकाइजर (इंडिया) प्रा0लि0 के सौजन्य से 50 लाख की लागत से सामुदायिक स्वास्थ केन्द्र किच्छा के आधुनिकीकरण कार्य, पालीप्लेक्स कॉरपोरेशन लिमिटेड बाजपुर वित्तीय सहयोग से 60 लाख की लागत से सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र बाजपुर के आधुनिकीकरण कार्य, पालीप्लेक्स कॉरपोरेशन लिमिटेड खटीमा के वित्तीय सहयोग से 125 लाख की लागत से सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र खटीमा के आधुनिकीकरण कार्य, बालाजी एक्शन बिल्डवेल सितारगंज के वित्तीय सहयोग से 200 लाख की लागत से सामुदायिक स्वास्थ केन्द्र के आधुनिकीकरण कार्य, बजाज ऑटो लिमिटेड पंतनगर एवं जानकी देवी बजाज ग्राम विकास संस्था के वित्तीय सहयोग से 300 लाख की लागत से पं0ज0ला0ने0 जिला चिकित्सालय, रूद्रपुर के आधुनिकीकरण कार्य, नैनी पेपर्स मिल काशीपुर मे वित्तीय सहयोग से 200 लाख की लागत से सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र काशीपुर के आधुनिकीकरण कार्यों का शिलान्यास किया।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने राज्य योजना के अन्तर्गत विधानसभा क्षेत्र रूद्रपुर मे लोनिवि की 684.44 लाख लागत की विभिन्न सीसी मार्गां का लोकार्पण तथा 385.47 लाख की लागत से विभिन्न सडको के पुनर्निर्माण कार्यों के शिलान्यास के साथ ही नगर निगम रूद्रपुर के वार्ड नम्बर 25 फाजलपुर महरौला में स्थित 08 एकड भूमि मे जैविक ठोस अपशिष्ट से 50 मिट्रिक टन प्रतिदिन क्षमता के कम्पोस्ट बायोगैस प्लान्ट का शिलान्यास के साथ ही ग्राम्य विकास विभाग द्वारा संचालित 28 लाख लागत के सरस मार्केट सेंटर रूद्रपुर एवं 194.39 लाख की लागत से क्षेत्रीय विधि विज्ञान प्रयोगशाला का लोकार्पण किया।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूती के लिये प्रदेश में स्थापित किये जा रहे ग्रोथ सेन्टरों के अंतर्गत 65.84 लाख लागत के विकास खण्ड रूद्रपुर मे बेकरी ग्रोथ सेंटर, 48 लाख लागत के मत्स्य ग्रोथ सेंटर काशीपुर, 18 लाख लागत के गोविन्दपुर मसाला ग्रोथ सेंटर गदरपुर, 24.10 लाख लागत के मेघावाला दुग्ध ग्रोथ सेंटर जसपुर एवं 20 लाख लागत के पहेनिया हस्तशिल्प ग्रोथ सेंटर खटीमा का लोकार्पण किया।
इस अवसर पर अध्यक्ष जिला पंचायत रेनू गंगवार, कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक, विधायक राजकुमार ठुकराल, हरभजन सिंह चीमा, पुष्कर सिंह धामी, राजेश शुक्ला, मेयर रामपाल सिंह, अरविन्द सिंह हयांकी, आईजी कुमायूं अजय रौतेला, प्रभारी सचिव स्वास्थ्य, पंकज कुमार पाण्डेय, जिलाधिकारी डाॅ. नीरज खैरवाल आदि उपस्थित थे।

कुछ पार्षदों का हंगामा, लेकिन विकास कार्यों पर बोर्ड ने दिखाई रुचि

8 माह बाद बुलाई गई नगर निगम की बोर्ड बैठक हंगामेदार रही। इस दौरान कई पार्षद आपस में उलझते नजर आए। यहां तक कि पार्षद रीना शर्मा और पार्षद राजेन्द्र प्रेम सिंह बिष्ट के बीच तीखी नोंकझोंक देखने को भी मिली। वहीं, हंगामेदार बैठक के बीच 101 प्रस्तावों को पास किया गया।
कोरोना संक्रमण के चलते निरंकारी सत्संग भवन में आयोजित बोर्ड बैठक शुरु होने पर पार्षद विकास तेवतिया और शिव कुमार गौतम ने बैठक को स्थगित करने को कहा। पार्षदों ने आरोप लगाते हुए कहा कि 10 जून को 28 पार्षदों ने पत्र के जरिए एमएनए को पत्र देकर बैठक आयोजित कराने को कहा था। मगर, इसके बाद भी हमारे प्रस्ताव नहीं लिए गए। इस पर एमएनए नरेन्द्र सिंह क्वीरियाल ने अगली बैठक से पूर्व प्रस्तावों को सभी पार्षदों से लेने पर सहमति जताई।
इसके बाद सदन की कार्रवाई से पूर्व पूरे 25 मिनट तक निगमकर्मी और फल विक्रेता प्रकरण का भी मामला उठा। पार्षद मनीष बनवाल ने मामला उठाते हुए कहा स्थिति स्पष्ट करने को कहा। इस पर अन्य पार्षद देवेन्द्र प्रजापति, रीना शर्मा, राकेश मियां, गुरविंदर, शिव कुमार गौतम, शारदा देवी ने भी निगमकर्मी पर कार्रवाई की मांग की। मेयर अनिता ममगाईं ने कहा कि उक्त प्रकरण में वह स्वयं 10 बार माफी मांग चुकी हैं। इसके बावजूद कुछ लोग मामले में राजनीति कर रहे है। लेकिन मेयर ने मामले की जांच के लिए एक समिति का गठन करने की बात कही। कहा कि जब‌ तक समिति गठित नहीं होती है तब तक मामले में संलिप्त दो कर्मचारियों को अवकाश पर भेजा जाएगा।
दोपहर 12ः22 मिनट पर प्रस्तावों पर चर्चा शुरू हुई। इसमें निर्माण संबं‌धी प्रस्तावों को ‌बगैर चर्चा के ही पास किया गया। एजेंडें में ऐसे भी प्रस्ताव देखने को मिले जो किसी भी आम व्यक्ति की ओर से बिना पार्षद की सहमति के पहुंचे। ऐसे प्रस्तावों को सदन के सदस्यों ने सिरे से खारिज कर दिया।

बोर्ड बैठक में यह प्रस्ताव भी हुए पास

– पूर्व पालिकाध्यक्ष पर पद का दुुरुपयोग करने व वित्तीय अनियमितता के आरोप में निगम स्तर से होगी जांच।

– पांच अगस्त से स्मृति वन में स्थित 250 वर्ग मीटर की जगह पर बनेगी कंपोस्ट खाद।

– नगर निगम परिसर में तीर्थनगरी के पांचों शहीदों की लगेगी प्रतिमा, बनेगा शहीद स्मारक।

– निगम क्षेत्र में सीसीटीवी के रखरखाव की जिम्मेदारी संबंधित ठेकेदार की होगी।

– रेलवे स्टेशन के समीप बद्री-केदार मंदिर समिति चैराहे पर बनेगा नेताजी सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा।

– निगम परिसर पर लगी राजीव गांधी की प्रतिमा का होगा सौंदर्यीकरण।

– चित्रगुप्त कृष्ण मंदिर गोपाल कुटी के पुजारी अनुसुइया प्रसाद कुकरेती की मासिक आय बढ़ाकर पांच हजार रुपये होगी।

– आईडीपीएल टाउनशिप को नगर निगम में शामिल करने के लिए शासन स्तर पर निगम पत्राचार करेगा।

– राजकीय प्राथमिक ‌विद्यालय मंशादेवी में अतिरिक्त कक्ष निर्माण को जिला शिक्षा अधिकारी से वार्ता की जाएगी।

– आवासीय संपत्तियों पर कर में 50 प्रतिशत से 75 प्रतिशत छूट प्रदान करने के सं‌दर्भ में शासन को पत्राचार करेगा निगम।

– 14वें वित्त आयोग के मद से निगम क्षेत्र में 10-10 लीटर के दो डस्टबिन निशुल्क दिए जाएंगे।

– 14वें वित्त आयोग के मद से कूड़ा निस्तारण को पांच छोटे कू्ड़ा वाहन और पांच ही ई-रिक्शा खरीदे जाएंगे।

– पूर्व में नगर पालिका से यूनिपोल लगाने को हुए 15 वर्ष के टेंडर को किया जाएगा निरस्त।

– कूड़ा कलेक्शन का कार्य आधुनिक जीपीएस मशीन जियो टैगिंग का कार्य आउटसोर्स से होगा।

– नगर के समस्त पार्कों, ड्रेनेज सिस्टम का अमृत योजना तथा आस्थापथ व घाटों का सौंदर्यीकरण नमामि गंगे के बजट से किया जाएगा।

– 2001-02 में डा. आरके गुप्ता द्वारा दी गई दो बीघा भूमि को किया जाएगा चिह्नित।

– नगर निगम के एक ठेकेदार रंगपाल को ब्लैक लिस्ट किया गया।

मुख्यमंत्री ने डोईवाला विधानसभा में करोड़ो रुपये के कार्यो का शिलान्यास किया

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने शहीद दुर्गामल्ल राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, डोईवाला में शहीद दुर्गामल्ल की मूर्ति का अनावरण किया। इस अवसर पर उन्होंने डिग्री कॉलेज में छात्रावास एवं तहसील डोईवाला के भवन का भूमि पूजन एवं शिलान्यास किया। डोईवाला डिग्री कॉलेज में छात्रावास 2 करोड़ 76 लाख 51 हजार एवं तहसील भवन 4 करोड़ 2 लाख 28 हजार की धनराशि से बनाया जायेगा।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि इस महाविद्यालय की जब शुरूआत हुई थी। तब लच्छीवाला में प्राइमरी स्कूल के दो कमरों में इसकी कक्षाएं चलती थी। बाद में स्थानीय लोगों ने महाविद्यालय को भूमि दान में दी। अनेक प्रयासों के बाद महाविद्यालय में भवन एवं कक्षा कक्षों का निर्माण हुआ। उन्होंने कहा कि यह अच्छा संकेत हैं कि वर्तमान में इस महाविद्यालय में 1600 से अधिक विद्यार्थी अघ्ययनरत है। जिसमें से छात्राओं की संख्या एक हजार से अधिक है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में 85 प्रतिशत सीएम घोषणाएँ पूर्ण की जा चुकी है। प्राथमिकताओं के आधार पर कार्य किये जा रहे हैं। डोईवाला में सीपैट खोला गया है। हमारा प्रयास है कि यहां पर विभिन्न प्रकार के कोर्स करायें जाय, ताकि युवाओं को अच्छे प्रशिक्षण के साथ रोजगार के अवसर बढ़ें। नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी भी जल्द राज्य में खुल जायेगी। हर्रावाला में कैंसर एवं जच्चा-बच्चा अस्पताल खोला जा रहा है। कोस्टगार्ड के रिक्रूटमेंट सेंटर की प्रक्रिया भी गतिमान है। उन्होंने कहा कि राज्य में जल्द ही नेशनल स्किल डेवलपमेंट सेंटर खोला जायेगा। यह सेंटर हंस फाउण्डेशन के सहयोग से बनाया जा रहा है। इसमें अत्याधुनिक सुविधाओं के साथ ही बेहतर प्रशिक्षकों की व्यवस्था की जायेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारा प्रयास है कि क्वान्टिटी के बजाय क्वालिटी पर अधिक ध्यान दिया जाय। राज्य में विज्ञान एवं तकनीकि पर आधारित एक रेजिडेंशियल विद्यालय खोलने की योजना बनाई जा रही है। हमारा प्रयास है कि प्रदेश के युवा साइंस एवं तकनीकि के क्षेत्र में देशभर में अपना योगदान दे सकें।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के 5 विश्वविद्यालयों एवं 104 महाविद्यालयों को ई-ग्रंथालय से जोड़ा गया है। 500 विद्यालयों में वर्चुअल क्लास शुरू की गई है। जल्द ही 700 और विद्यालयों में वर्चुअल क्लास शुरू की जा रही है। उन्होंने कहा कि सचिवालय के 16 ऑफिस ई-ऑफिस बन चुके हैं। देहरादून कलक्ट्रेट ई कलक्ट्रेट बन चुका है। देहरादून के सभी एसडीएम कार्यालय भी जल्द ई-कार्यालय बन जायेंगे। राज्य में ई-कैबिनेट का आयोजन किया जा रहा है। गैरसैंण विधानसभा को ई-विधानसभा बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने भ्रष्टाचार पर कड़ा प्रहार किया है। कार्य में पारदर्शिता के लिए जनता एवं जन प्रतिनिधियों के बीच विश्वास कायम होना जरूरी है।

उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि छात्रावास एवं डोईवाला तहसील भवन यहां की स्थानीय जनता को बड़ी सौगात मिली है। डोईवाला में यह छात्रावास एक साल के अन्दर बनकर तैयार हो जायेगा। इस छात्रावास में 100 छात्राओं के लिए निःशुल्क छात्रावास की सुविधा उपलब्ध होगी। उन्होंने कहा कि राज्य में सभी डिग्री कॉलेजों में शत प्रतिशत प्राचार्यों की नियुक्ति की गई है। 92 प्रतिशत फैकल्टी डिग्री कॉलेजों में जल्द ही कुछ और असिस्टेंट प्रोफेसर राज्य को मिल जायेंगे। एक माह के अन्दर सभी महाविद्यालयों में नेट कनेक्टिविटी उपलब्ध हो जायेगी।
इस अवसर पर मेयर वन पंचायत सलाहकार परिषद् के उपाध्यक्ष करन बोहरा, भाजपा के देहरादून जिलाध्यक्ष शमशेर सिंह पुण्डीर, प्रमुख सचिव उच्च शिक्षा आनन्द वर्द्धन, जिलाधिकारी देहरादून डॉ. आशीष श्रीवास्तव, निदेशक उच्च शिक्षा डॉ. कुमकुम रौतेला, प्राचार्य शहीद दुर्गामल्ल राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, डोईवाला डॉ. डी.सी नौटियाल आदि उपस्थित थे।

सैनिक और पूर्व सैनिकों के लिए सरकार चला रही कई कल्याणकारी योजनाएंः सीएम

कारगिल विजय दिवस (शौर्य दिवस) पर मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने गांधी पार्क में शहीद स्मारक पर कारगिल शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। मुख्यमंत्री ने भारतीय सेना के अदम्य साहस व शौर्य को नमन करते हुए कहा कि उत्तराखण्ड में सैनिकों की वीरता व बलिदान की लम्बी परम्परा रही है। देश की आजादी से पहले एवं आजादी के बाद उत्तराखंड के वीर सपूतों ने देश की रक्षा के लिए महत्वपूर्ण योगदान रहा है। कारगिल युद्ध में बड़ी संख्या में उत्तराखण्ड के सपूतों ने देश की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहूति दी। इस युद्ध में वीर भूमि उत्तराखंड के 37 जवानों को वीरता पदक भी मिले। इस अवसर पर उन्होंने प्रदेश की वीर माताओं का स्मरण भी किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय सैनिकों ने कारगिल युद्ध में जिस प्रकार की विपरीत परिस्थितियों में वीरता का परिचय देते हुए घुसपैठियों को सीमा पार खदेड़ा, उससे पूरे विश्व ने भारतीय सेना का लोहा माना। कारगिल युद्ध में देश की सीमाओं की रक्षा के लिए वीर सैनिकों के बलिदान को राष्ट्र हमेशा याद रखेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार पूर्व सैनिकों, शहीद सैनिकों के आश्रितों के कल्याण के प्रति वचनबद्ध है। शहीद सैनिकों के परिवार के एक सदस्य को उसकी योग्यता अनुसार सरकार द्वारा सेवायोजित किया जा रहा है। विशिष्ट सेवा पदक से अलंकृत सैनिकों को अनुमन्य राशि में कई गुना बढ़ोतरी की है। राज्य सरकार ने विशिष्ट सेवा पदक से अलंकृत सैनिकों को अनुमन्य राशि में कई गुना बढ़ोतरी की है। परम विशिष्ट सेवा मेडल पर 15 हजार से बढ़ाकर 2 लाख रूपए, अति विशिष्ट सेवा मेडल पर अनुमन्य एकमुश्त राशि को 7 हजार रूपए से बढ़ाकर 1 लाख 50 हजार रूपए किया गया है। सेना मेडल पर राशि पहले अनुमन्य नहीं थी। अब इसके लिए 1 लाख रूपए की राशि अनुमन्य है। इसी प्रकार विशिष्ट सेवा मेडल में एकमुश्त अनुमन्य राशि को 3 हजार रूपए से बढ़ाकर 75 हजार रूपए किया गया है। हमने द्वितीय विश्वयुद्ध पेंशन को भी दो गुना किया है। इसे 4 हजार रूपए प्रतिमाह से बढ़ाकर 8 हजार रूपए प्रतिमाह किया गया है। पूर्व सैनिकों/वीरांगनाओं और उनके आश्रितों को स्वावलम्बी बनाने के लिए सभी जिलों में कम्प्यूटर प्रशिक्षण दिया जा रहा है। पूर्व सैनिक के आश्रितों को प्रान्तीय, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलों में प्रतिभाग करने पर प्रोत्साहन अनुदान दिया जा रहा है। सैनिक कल्याण विभाग द्वारा चलाए जा रहे केंद्रों से भर्ती पूर्व प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले अभ्यर्थियों के सेना, अर्द्धसैनिक बल और राज्य पुलिस बल में भर्ती होने पर 20 हजार रूपए की धनराशि पुरस्कार के रूप में प्रदान की जाती है। एन.डी.ए., आई.एम.ए., ओ.टी.ए., एयर फोर्स अकादमी, नेवल अकादमी, सिविल सेवा, पी.सी.एस., एम.बी.बी.एस., आई.आई.टी., आई.आई.एम. में चयन होने पर उत्तराखण्ड के निवासी पूर्व सैनिक आश्रितों को कोचिंग व्यय की प्रतिपूर्ति की जाती है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्व सैनिकों द्वारा पुनर्वास हेतु लिए गए ऋण पर अनुदान में वृद्धि की है। 5 लाख रूपए तक के ऋण पर 10 प्रतिशत और 5 से 10 लाख रूपए तक के ऋण पर 5 प्रतिशत या अधिकतम 75 हजार रूपए का अनुदान दिया जा रहा है। पूर्णतया दिव्यांग पूर्व सैनिकों के पुनर्वास के चलाए जा रहे शिक्षण केंद्रों को प्रति वर्ष दी जाने वाली राशि को 30 हजार रूपए से बढ़ाकर 1 लाख रूपए कर दिया गया है। पूर्व सैनिकों के दैवीय आपदा में आवास क्षतिग्रस्त होने पर अनुदान की राशि को भी 30 हजार रूपए से बढ़ाकर 50 हजार रूपए किया गया है।