राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति को केन्द्रीय वित्त राज्य मंत्री ने दिए निर्देश

केन्द्रीय वित्त राज्य मंत्री डॉ. भागवत किशन राव कराड ने मंगलवार को सचिवालय में राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने सभी सरकारी एवं प्राइवेट सेक्टर के बैंकों को निर्देश दिए कि विभिन्न केंद्रीय योजनाओं के माध्यम से दिए जाने वाले ऋण आवेदनों को शीघ्र से शीघ्र निस्तारण किया जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि रिजेक्टेड आवेदनों को पुनः समीक्षा कर उनकी कमियों को दूर कर ऋण उपलब्ध कराने के प्रयास किए जाएं। दूरस्थ क्षेत्रों में बैंकों और प्रशासन द्वारा योजनाओं की जानकारी हेतु जन जागरूकता अभियान चलाए जाएं।
केन्द्रीय वित्त राज्य मंत्री ने निर्देश दिए कि बैंकों द्वारा आवेदनों के निस्तारित किए जाने की तय समय सीमा के अंतर्गत ही निस्तारित किया जाए। उन्होंने मुद्रा लोन के टारगेट को बढ़ाए जाने के भी निर्देश दिए। उन्होंने बैंकों द्वारा आउटरीच बढ़ाए जाने के निर्देश देते हुए कहा कि बैंकों को एक्टिव रोल निभाना होगा तभी टारगेट को प्राप्त किया जा सकेगा।
बैठक में जानकारी दी गई कि प्रधानमंत्री मुद्रा योजना अंतर्गत बैंकों द्वारा निर्धारित लक्ष्य 190000 के सापेक्ष 105352 इकाईयों को रु. 1365.86 करोड़ का ऋण स्वीकृत किया गया है, जो कि निर्धारित लक्ष्य का 55 प्रतिशत है तथा योजनान्तर्गत लगभग 150145 नागरिकों को रोजगार प्राप्त हुआ है। एन. आर. एल.एम योजना अंतर्गत निर्धारित लक्ष्य 10000 के सापेक्ष 9427 इकाईयों को रु. 156.20 करोड़ का ऋण स्वीकृत किया गया है, जो कि निर्धारित लक्ष्य का 94 प्रतिशत है।
इकाईयों को वित्तपोषित किया गया है, जो कि निर्धारित लक्ष्य का 78 प्रतिशत है तथा मार्जिन मनी वितरण हेतु निर्धारित वार्षिक लक्ष्य रु 51.71 करोड़ के सापेक्ष बैंकों द्वारा रु. 20.58 करोड़ की मार्जिन मनी वितरित की गयी है। मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना अंतर्गत 4102 लाभार्थियों को ऋण स्वीकृत तथा 2494 लाभार्थियों को ऋण वितरित किया गया है। पी.एम स्वनिधी योजना अंतर्गत 11082 ऋण आवेदन पत्र स्वीकृत तथा 10322 ऋण आवेदन पत्रों में ऋण वितरण किया गया है। एन.यू.एल. एम. योजना अंतर्गत 678 ऋण आवेदन पत्र स्वीकृत किये गये हैं तथा 651 को ऋण वितरित किया गया है।
मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना अति सूक्ष्म (नैनो) उद्यम योजना अंतर्गत 392 ऋण आवेदन पत्र स्वीकृत किये गये हैं तथा 102 आवेदकों को ऋण वितरित किया गया है। मुख्यमंत्री सौर स्वरोजगार योजना अंतर्गत 47 ऋण आवेदन पत्र स्वीकृत किये गये हैं तथा 28 आवेदकों को ऋण वितरित किया गया है। स्पेशल कम्पोनेन्ट प्लान योजना अंतर्गत अनुसूचित जाति मद में 561. अनुसूचित जनजाति मद में 63 तथा अल्पसंख्यक मद में 33 ऋण आवेदन पत्र स्वीकृत किये गये है।
वीर चन्द्र सिंह गढ़वाली स्वरोजगार योजना अंतर्गत वाहन मद में 102 तथा गैर-वाहन मद में 33 ऋण आवेदन पत्र स्वीकृत किये गये हैं तथा दीन दयाल उपाध्याय होम स्टे योजना अंतर्गत 92 ऋण आवेदन पत्र स्वीकृत किये गये हैं। किसान क्रेडिट कार्ड संतृप्तता योजना अंतर्गत कृषि एवं कृषि अनुषंगी गतिविधियों (।हतपबनसजनतम ंदक ।हतपबनसजनतम ंससपमक ंबजपअपजपमे) हेतु बैंकों द्वारा 120199 कृषकों को रु 2105.28 करोड़ का ऋण वितरित किया गया है। राज्य में दिनांक 31.11.2021 तक प्रधानमंत्री जन-धन योजना अंतर्गत 29,59,839 प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना अंतर्गत 21,30,899 प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना अंतर्गत 4,93,775 तथा अटल पेंशन योजना अंतर्गत 3,39,111 खाते खोले गये है।
प्रथम फेज में उत्तराखण्ड राज्य के समस्त जिलों के 16 ब्लाक में भारतीय स्टेट बैंक, पंजाब नेशनल बैंक तथा बैंक ऑफ बड़ौदा द्वारा ब्त्प्ैप्स् थ्वनदकंजपवद (छळव्) के सहयोग से वित्तीय साक्षरता केन्द्र स्थापित किये गये हैं, जहां पर विद्यार्थियों, वरिष्ट नागरिकों, स्वयं सहायता समूह के सदस्यों, किसानों एवं छोटे-छोटे उद्यमियों को वित्तीय साक्षरता विषयक जानकारी प्रदान की जा रही है। पूर्व में पायलट प्रोजेक्ट के तहत शत प्रतिशत डिजीटाईजेशन हेतु जिला अल्मोड़ा का चयन किया गया था तथा इसी अनुक्रम में डिजीटल लेनदेन को बढ़ावा देने हेतु एक अन्य जिला चमोली का चयन किया गया है।
इसके बाद केंद्रीय मंत्री ने राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति द्वारा होटल पैसिफिक में आयोजित क्रेडिट आउटरीच कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि प्रतिभाग किया। कार्यक्रम में स्टेट बैंक, पंजाब नेशनल बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, केनरा बैंक, उत्तराखंड ग्रामीण बैंक और राज्य के अन्य बैंक द्वारा हिस्सा लिया गया। कार्यक्रम में 18 स्वयं सहायता समूह के 112 सदस्यों को आमंत्रित किया गया तथा मुख्य अतिथि द्वारा उन्हें 7.25 करोड़ रुपये का लोन वितरित किया गया।

नाबार्ड द्वारा स्टेट क्रेडिट सेमिनार का आयोजन, जारी किया गया स्टेट फोकस पेपर

नाबार्ड द्वारा 2022-23 के लिए उत्तराखण्ड राज्य के प्राथमिकता वाले क्षेत्रों के लिए कुल ऋण क्षमता 28528 करोड़ रूपए का अनुमान लगाया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नाबार्ड द्वारा आयोजित ‘स्टेट क्रेडिट सेमिनार’ में स्टेट फोकस पेपर का विमोचन किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य की विकास यात्रा हम सभी की सामूहिक यात्रा है। इसमें सभी को पूरी तत्परता से अपनी जिम्मेवारी का निर्वहन करना है। ‘स्टेट क्रेडिट सेमिनार’ में बतौर मुख्य अतिथि सम्बोधित करते हुए कहा कि उत्तराखण्ड को श्रेष्ठ राज्य बनाने में नाबार्ड का महत्वपूर्ण सहयोग रहेगा। प्रधानमंत्री की प्रेरणा से वर्ष 2025 में उत्तराखण्ड को प्रत्येक क्षेत्र में श्रेष्ठ राज्य बनाने के लिए सभी को मिलकर काम करना होगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के विकास में नाबार्ड का महत्वपूर्ण योगदान है। आधारभूत संरचना से संबंधित योजनाओं के माध्यम से सड़कों, भण्डारण व्यवस्था, पेयजल, सिंचाई आदि में सुधार हुआ है। विशेष रूप से प्राथमिकता प्राप्त क्षेत्रों को मजबूत करने और महिला स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से आजीविका सृजन कर महिला सशक्तिकरण में भी नाबार्ड का येगदान रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा वर्ष 2025 में उत्तराखण्ड को देश का श्रेष्ठ राज्य बनाने का लक्ष्य दिया गया है। इसे हम सभी को मिलकर पूरा करना है। इसी क्रम में हमने बोधिसत्व विचार श्रृंखला जारी की है। इसमें विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों और प्रबुद्ध लोगों के साथ संवाद किया जा रहा है। प्राप्त सुझावों का संकलन किया जा रहा है। साथ ही सभी विभागों से अगले 10 वर्षों का रोडमैप भी लिया जा रहा है। इसके आधार पर राज्य के विकास की रूपरेखा बनाई जाएगी। हमारी विकास नीति का लक्ष्य अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक विकास योजनाओं का लाभ पहुंचाना है। छोटे किसानों और आम व्यक्ति को योजनाओं का लाभ मिले। खेती, बागवानी, उद्योगों में नवाचार की जरूरत है। नई तकनीक को अपनाना होगा। बेस्ट प्रैक्टिसेज का समावेश करना है। होम स्टे इसी प्रकार की बेस्ट प्रेक्टीस है। इससे एक ओर हमारे युवाओं को रोजगार मिल रहा है, वहीं दूसरी ओर देश विदेश के लोग उत्तराखण्ड की संस्कृति से परिचित हो रहे हैं। होमस्टे इकोलॉजी और इकोनॉमी दोनों में समन्वय का अच्छा उदाहरण है। योजनाएं बहुत सारी हैं। परंतु इसका आउटकम तभी मिलेगा जबकि सामान्य से सामान्य व्यक्ति को भी इनकी पूरी जानकारी हो।
नाबार्ड के मुख्य महाप्रबंधक अरुण प्रताप दास ने कहा कि नाबार्ड, ग्रामीण समृद्धि सुनिश्चित करने के अपने जनादेश के अनुरूप कृषि और ग्रामीण विकास के क्षेत्र में सभी हितधारकों को शामिल करते हुए सहभागी और परामशी दृष्टिकोण अपनाकर हर साल देश के प्रत्येक जिले के लिए संभावित लिंक्ड क्रेडिट प्लान (पीएलपी) तैयार करता है। पीएलपी राज्य के प्रत्येक जिले के लिए प्राथमिकता क्षेत्र के भीतर कृषि, संबद्ध और अन्य क्षेत्रों में ऋण क्षमता का अनुमान प्रदान करती है। ये अनुमान जिला स्तर पर अग्रणी बैंकों और राज्य स्तर पर एसएलबीसी के लिए वार्षिक ऋण योजना (एसीपी) तैयार करने के लिए एक आधार के रूप में भी काम करते हैं। स्टेट फोकस पेपर, पीएलपी के परिणामों की परिणति है, जिसमें सभी जिलों की संभावनाओं और अनुमानों को समग्र रूप से राज्य के लिए एक समेकित दस्तावेज में शामिल किया गया है। वर्ष 2022-23 के लिए राज्य फोकस पेपर में उत्तराखंड राज्य में प्राथमिकता वाले क्षेत्रों के लिए कुल ऋण क्षमता 28 हजार 528 करोड़ का अनुमान लगाया गया है, जो पिछले वर्ष के क्रेडिट योजना की तुलना में 5 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है।
स्टेट फोकस पेपर, भारत और राज्य सरकार दोनों की विभिन्न नीतिगत पहलों का भी संश्लेषण करता है। यह दस्तावेज 2022-23 के लिए नीतिगत पहल और बजट परिव्यय की प्राथमिकता के लिए राज्य सरकार के लिए मददगार साबित होगा। कार्यक्रम में सराहनीय कार्य करने वाले स्वयं सहायता समूहों, एनजीओ, सहकारी संस्थाओं, बैंकों व विभागों को सम्मानित किया गया। इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल, धन सिंह रावत, सचिव आर मीनाक्षी सुंदरम, आरबीआई के क्षेत्रीय निदेशक राजेश कुमार, भरसार विश्वविद्यालय के वीसी प्रो. अजीत कुमार कर्नाटक उपस्थित रहे।

खटीमा में सुरई ईकोटूरिज्म जोन में जंगल सफारी का शुभारंभ

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने खटीमा में सुरई ईकोटूरिज्म जोन में जंगल सफारी का शुभारंभ किया। इस दौरान उन्होंने जंगल सफारी भी की। सुरई ईकोटूरिज्म जोन प्रदेश का पहला ऐसा ईकोटूरिज्म जोन है, जहां पर्यटक जंगल सफारी का लुत्फ उठा सकेंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि खटीमा व आसपास के क्षेत्र को पर्यटन मानचित्र में ऊंचा स्थान दिलाना इस योजना का मुख्य उद्देश्य है। जैव विविधता और वन्य जीवों की मौजूदगी वाले तराई पूर्वी वन प्रभाग को योजनाबद्ध तरीके से विकसित कर उसके सुरई वन क्षेत्र को इको टूरिज्म जोन के रूप में तब्दील किया जाएगा, ताकि यहां के प्राकृतिक सौन्दर्य का उपयोग स्थानीय लोगों को प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रोजगार मुहैया करवाने में किया जा सके।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि वन कानून की जटिलताओं के कारण वनों के आसपास रहने वाले लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है, जिसमें उनकी खेती भी प्रभावित होती है। उन्होंने कहा कि इस कठिनाई को समझते हुए हमने निर्णय लिया है कि वन और वन्य जीवों को आर्थिकी से जोड़ते हुए स्थानीय लोगों को स्वरोजगार के अवसर मुहैया करवाए जाएंगे। इसी सोच के साथ हमने बीते 1 अक्टूबर 2021 को सीएम यंग ईकोप्रिन्योर योजना देहरादून में लॉच की थी। इस योजना का क्रियान्वयन शुरू कर दिया गया है। शुरुआत के तौर पर खटीमा में सुरई ईकोटूरिज्म जोन विकसित कर उसमें जंगल सफारी प्रारम्भ की जा रही है। ग्राम समितियों के जरिए इस योजना का संचालन किया जाएगा। जंगल सफारी शुरू होने से जिप्सी मालिक, चालक और गाइड के रूप में स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलेगा। इसके लिए वन विभाग ने 30 जिप्सी संचालकों के साथ करार किया है। गाइड की भूमिका का सही निर्वहन करने के लिए कई युवकों को वन विभाग इसका प्रशिक्षण दे चुका है। सुरई ईकोटूरिज्म जोन में पर्यटकों की आमद से स्थानीय लोगों को प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलेगा। पूरे प्रदेश में इस योजना को विस्तार दिया जाएगा ताकि वनों, वन क्षेत्रों और वन्य जीवों को हम अपनी कमजोरी नहीं ताकत बना सकें। उन्होंने कहा कि सीएम यंग ईको प्रिन्योर स्कीम के अंतर्गत नेचर गाइड, ड्रोन पायलट, वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर, ईकोटूरिज़्म, वन्यजीव टूरिज़्म आधारित कौशल को उद्यम में परिवर्तित किया जाएगा।

सुरई ईकोटूरिज्म जोन
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने घोषणा की थी कि सुरई वनों की समृद्ध जैव विविधता को देखते हुए इसे क्षेत्र को सुरई इको टूरिज्म जोन (सुरई पारिस्थितिकी पर्यटन क्षेत्र) का स्वरूप प्रदान किया जाएगा। इसके दो लाभ होंगे पहला यह कि जनसहभागिता सुनिश्चित करते हुए जैव विविधता के धनी इसे क्षेत्र को संरक्षित किया जाएगा और दूसरा, इसके वन मार्गों को जंगल सफारी के लिए विकसित किए जाने से यहां रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे। वन विभाग ने मुख्यमंत्री की इस घोषणा पर काम करते हुए सुरई वन क्षेत्र के वन मार्गों को जैव विविधता ट्रेल के रूप में विकसित कर दिया है। यह क्षेत्र 180 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है। जिसके सीमा में पूर्व दिशा में शारदा सागर डैम, पश्चिम में खटीमा नगर, उत्तर में मेलाघाट रोड तथा दक्षिण में पीलीभीत टाइगर रिजर्व क्षेत्र सटा हुआ है। प्राकृतिक रूप से बेहद खूबसूरत इस वन क्षेत्र में साल के वृक्षों, चारागाह और पानी की प्रचुर मात्रा है। इन तमाम वजहों से यहां बाघों की आवाजाही बनी रहती है। इसके अलावा स्तनधारी जानवरों की लगभग 125, पक्षियों की 150 से अधिक और सरीसृपों को तकरीबन 20 प्रजातियां भी इस वन क्षेत्र में पाई जाती हैं। यहां के वन मार्गों को विकसित कर लगभग 40 किलोमीटर का ट्रेल जंगल सफारी के लिए तैयार कर लिया गया है, जिसमें जिप्सी में बैठकर पर्यटक दुर्लभ वन्य जीवों (रॉयल बंगाल टाइगर, भालू, चीतल, सांभर, काकड़, पैंगोलिन, कोरल सांप, पांडा आदि) का दीदार करने के साथ ही सुरम्य जंगलों, घास के मैदानों, प्राचीन शारदा नहर और सुन्दर तालाबों का लुत्फ उठा सकेंगे।

उत्तराखंड में सरफ़ेस हाइड्रो कायनेटिक परियोजना का शुभारम्भ

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पवलगढ में सरफ़ेस हाइड्रो कायनेटिक परियोजना का शुभारम्भ किया। यह परियोजना पूर्ण रूप से स्वदेशी तकनीक पर आधारित है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विकास खण्ड कोटाबाग के पवलगढ में कहा कि देव भूमि उत्तराखंड सम्पूर्ण विश्व में अपने परम पावन चार धाम, माँ गंगा, जिम कॉर्बेट तथा हमारे राज्य की विशिष्ठ परम्पराओं, धार्मिक संस्कृति के लिए जाना जाता है। उन्होने कहा कि इस कार्यक्रम के बाद, उत्तराखंड सम्पूर्ण विश्व में पूर्ण स्वदेशी सरफ़ेस हाइड्रो कायनेटिक टरबाइन तकनीक का प्रथम उपयोगकर्ता के रूप में भी जाना जाएगा जो की मेरे साथ-साथ समस्त उत्तराखंडियों के लिए एक गर्व का विषय है। आज रामनगर वन प्रभाग में ऊर्जा उत्पादन की जो तकनीक संचालित हो रही है वो 100 प्रतिशत पर्यावरण प्रदूषण मुक्त है तथा छोटी से छोटी पहाड़ी गूल से लेकर उत्तराखंड से निकलने वाली बड़ी से बड़ी नदियों से बिना कोई बांध बनाए या पानी को रोके चौबीसों घंटे, सातों दिन, बारह महीने सतत विद्युत् उत्पादन, न्यूनतम लागत में करने में सक्षम है। उन्होने कहा कि मुझे बताया गया है कि मेकलेक पिछले 8 वर्षों से उत्तराखंड में कार्यरत है एवं उनके अनुसार उत्तराखंड की नदियों तथा प्रवाहित जल धाराओं से लगभग 1500 मेगावाट विद्युत का उत्पादन उनके द्वारा निर्मित स्वदेशी सरफ़ेस हाइड्रो कायनेटिक तकनीक के माध्यम से किया जा सकता है क्योकि भारत की अधिकांश बारहमासी नदियों का उद्गम उत्तराखंड से ही होता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उतराखंड सरकार ने युवाओं को स्वरोज़गार के लिए प्रेरित करने का हर सम्भव प्रयास किया है और ऐसी अनेकों अनुकरणीय योजनाओं का आरंभ किया है उसी के परिणाम स्वरूप उत्तराखंड का युवा आज कुछ अलग करने के जज्बे से मेहनत कर रहा है जिसका ही एक जीवंत उदाहरण आज हमारे बीच में है। उन्होंने कहा कि 15 किलोवाट विद्युत उत्पादन की सरफ़ेस हाइड्रो कायनेटिक परियोजना जिसका संचालन पवलगढ़ के ऐतिहासिक 111 वर्ष पुराने वन विश्राम भवन के प्रांगण में हुआ है, यह कोई साधारण जल विद्युत परियोजना का आरंभ मात्र नहीं है, यह देश के दो युवा वैज्ञानिकों नारायण तथा बलराम भारद्वाज की लगभग दस वर्षों के अथक परिश्रम से निर्मित पूर्णतः स्वदेशी तकनीक के माध्यम से नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में एक नए युग का आग़ाज़ है और मुझे पूर्ण विश्वास है कि वन विभाग उत्तराखंड सरकार के सहयोग से प्रारम्भ हुआ यह नवीन ऊर्जा का युग यहाँ रुकने वाला नहीं है। देश के हर राज्य के साथ-साथ सम्पूर्ण विश्व की सरकारें उत्तराखंड सरकार की इस पहल का अनुसरण करते हुए बिना किसी पर्यावरण प्रदूषण तथा नदियों एवं वन्य जीवन को बचाते हुए इस स्वदेशी तकनीक का उपयोग कर 100 प्रतिशत ग्रीन एनर्जी उत्पादित करने की योजना पर कार्य प्रारम्भ करेगी। उन्होने कहा कि पवलगढ़ में ही देख लीजिए, यह जो छोटी सी गूल यहाँ से बैल पड़ाव जा रही है ना जाने कितने किसानो के खेतों से हो कर जा रही है। अगर ऐसी छोटी-छोटी टरबाइन उस हर किसान को दे दी जाए जिसका खेत ऐसी नहर या नदी के आस-पास है तो में आशा करता हूँ वो हर किसान ऊर्जा के लिए आत्मनिर्भर हो जाएगा। हमारी सरकार, देश के यशस्वी प्रधान सेवक नरेंद्र भाई मोदी के “सबका साथ-सबका विकास” के सपने को साकार करने का हर संभव प्रयास उत्तराखंड की जनता के लिए करती आयी है और आगे भी करती रहेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड सरकार उत्तराखंड के मेरे किसान भाइयों तथा उन सभी पहाड़ी गावों के लिए इस स्वदेशी टरबाइन तकनीक का उपयोग कर एक ऐसी ऐतिहासिक योजना ले कर आएगी जिस से हर किसान के पास खुद का पावर प्लांट होगा और “हर किसान को पानी, हर घर को बिजली” उत्तराखंड राज्य की स्थापना से ले कर आज तक की सबसे कम दरों पर उपलब्ध होगा। मेरा मानना है कि सस्ती तथा अनवरत ऊर्जा की उपलब्धता हर क्षेत्र के विकास के लिए सबसे अहम संसाधन है। इसलिए आगामी योजनाओं में हमारी सरकार पहाड़ी गावों में भी नवीन उद्योगों का मार्ग प्रशस्त करने और रोज़गार के नवीन अवसर उत्पन्न करने के लिए “हर उद्यम के लिए सुगम ऊर्जा” योजना का प्रारूप तैयार करने के लिए कार्य करेगी जिसमें इस स्वदेशी तकनीक का भी समुचित उपयोग किया जाएगा। उन्होने कहा कि इस स्वदेशी तकनीक से उत्तराखंड वन विभाग को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की मुख्य वन्य जीव प्रतिपालक डॉ पराग मधुकर धकाते की पहल का में स्वागत करता हूँ ओर आशा करता हूँ कि वन विभाग उत्तराखंड इस तकनीक का उपयोग वन विभाग के अंतर्गत उन सभी स्थानो पर करेगा जहां इस तरह की बहती हुई जल धारायें उपलब्ध है। मेने ये अनुभव किया है कि उत्तराखंड के वनों में लगने वाली आग का एक बड़ा कारण जंगलों से हो कर जाने वाली बिजली की खुली तारों से हुए शॉर्ट सर्किट भी हो सकता है। आस पास की छोटी बड़ी नदियों नहरों से स्थानीय रूप से ही पर्यावरण तथा वन्य जीवों को बिना कोई नुक़सान पहुँचाये विद्युत उत्पादन की उत्तराखंड वन विभाग की यह पहल पूरी दुनिया के लिए एक उदाहरण प्रस्तुत करेगी और जंगलों से जाने वाली बिजली की तारों का उपयोग सीमित करेगी जिस से वन विभाग का राजस्व बचेगा, जंगल आग से बचेंगे और जंगली जानवर तथा वन कर्मी करेंट लगने के ख़तरे से बचेंगे। इस ऐतिहासिक विश्व प्रथम स्वदेशी सूक्ष्म जल विद्युत परियोजना को मूर्तरूप देने की दिशा में अपना सहयोग देने के लिए में समस्त मेकलेक टीम के साथ-साथ मुख्य वन संरक्षक (कुमाऊँ) तेजस्विनी पाटिल, वन संरक्षक (हल्द्वानी सर्कल) दीपचंद आर्या, प्रभागीय वन अधिकारी चंद्र शेखर जोशी, रेंज अधिकारी (देचौरी रेंज) ललित जोशी एंव समस्त वन कर्मियों को बधाई देता हूँ। जनप्रतिनिधियों व जनता द्वारा मुख्यमंत्री को ज्ञापन भी दिए गए। इसके उपरान्त मुख्यमंत्री द्वारा विश्राम गृह लाइब्रेरी का भी निरीक्षण किया।

रोजगार मेले में मुख्यमंत्री ने 42 युवाओं को दिए नियुक्ति पत्र

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, उच्च शिक्षा मंत्री डा. धन सिंह रावत एवं संसदीय कार्य, शहरी विकास मंत्री बंशीधर भगत ने संयुक्त रूप से वृहद कौशल एवं सेवायोजन रोजगार मेले का दीप प्रज्वलित कर शुभारम्भ किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने 42 युवाओं एवं युवतियों को नियुक्ति पत्र भी प्रदान किये।
कौशल रोजगार मेले मे जनपदों से आये युवाओं एवं युवतियों को सम्बोधित करते हुये मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी युवा ऊर्जावान हैं। युवा जिन क्षेत्रों में जायें वहां आपका नेतृत्व हो यही हमारी कामना है। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा पूरे प्रदेश के जनपदों में रोजगार मेले का आयोजन लगातार किया जा रहा है। इन मेलों से युवाओं को रोजगार के अवसर मिल रहे है। रोजगार मेले के लिए प्रदेश के बेरोजगार युवा घर बैठे पंजीकरण करा सकते है। मुख्यमंत्री ने कहा सरकार का मुख्य उद्देश्य रोजगार के साथ-साथ स्वरोजगार को बढाना है। उन्होंने कहा प्रदेश मे 3700 होम स्टे पंजीकृत हैं जिसके अन्तर्गत 8000 युवा एवं युवतियों को स्वरोजगार मिल रहा है। उन्होंने कहा प्रदेश मे लम्बे समय से पुलिस विभाग की भर्तियां नहीं निकली थी, सरकार ने 1764 पुलिस की भर्तियां निकाल दी हैं इसके साथ ही सभी विभागों की भर्तियां प्रारम्भ हो चुकी है। उन्होने कहा जिन विभागों में पद रिक्त है जल्दी से जल्दी भरने का कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा सरकार रोजगार के साथ-साथ स्वरोजगार के लिए वीर चन्द्र गढ़वाली योजना में धनराशि को 25 लाख तक बढ़ाने का प्रावधान किया है साथ ही होमस्टे में और सब्सिडी बढ़ाने का कार्य किया जा रहा है। उन्होने कहा सरकार ने सरकारी नौकरियों के लिए एक वर्ष की आयु सीमा बढ़ा दी है तथा प्रदेश में परीक्षा के फार्म के आवेदन शुल्क भरने के लिए आवेदक को कोई शुल्क नहीं देना होगा इसके साथ ही आईएएस, पीसीएस, एमबीबीएस, लोक सेवा आयोग की तैयारियों हेतु जो बच्चे प्री-क्वालीफाई कर देते है उन्हें आगे की तैयारियों हेतु 50 हजार रूपये सरकार द्वारा दिये जा रहे है।
मुख्यमंत्री ने कहा वोकल फॉर लोकल के लिए हमारी सरकार कटिबद्ध है। सरकार इसके लिए क्षेत्रीय उत्पादों को बाजार तक लाने के लिए स्वयं सहायता समूहों के द्वारा इसको बढ़ावा दे रही है। उन्होंने कहा सरकार का प्रयास है कि प्रदेश के सभी युवाओं को रोजगार व स्वरोजगार से जोड़ा जायेगा इसके लिए सरकार कृत संकल्प है।
एचएन इन्टर कॉलेज मे वृहद कौशल एवं सेवायोजन मेले में प्रदेश की 35 कंपनियों द्वारा प्रतिभाग किया गया। रोजगार मेले में विभिन्न जनपदों से आये 1150 युवा एवं युवतियों ने अपना रजिस्ट्रेशन कराया। इस अवसर पर तीन कम्पनियों द्वारा 162 युवाओं का वर्चुअल ऑनलाइन इंटरव्यू कर 7 लोगों की नियुक्ति दी गई।
इसके उपरांत मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने होटल क्रिस्टल परिसर में बतौर मुख्य अतिथि दीप प्रज्वलित करते हुये कार्यक्रम का शुभारम्भ कर प्रान्तीय उद्योग व्यापार मण्डल के नवनिर्वाचित पदाधिकारियों को शुभकामनाएं एवं बधाई दी। उन्होंने नवनिर्वाचित पदाधिकारियों को पद व गोपनीयता की शपथ दिलाई। व्यापार मण्डल द्वारा मुख्यमंत्री का स्मृति चिन्ह एवं शाल ओढ़ाकर सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि व्यापारियों की जो भी मांग है सरकार उनकी मांगों को पूरा करने का प्रयास करेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार प्रत्येक वर्ग के हित के लिए कार्य कर रही है। व्यापार प्रदेश के विकास के लिए अहम है। इस अवसर पर नवनिर्वाचित अध्यक्ष योगेश शर्मा, उपाध्यक्ष सचिन गुप्ता, महामंत्री मनोज,गीता काण्डपाल संदीप सक्सेना आदि मौजूद थे। कार्यक्रम का संचालन प्रदेश अध्यक्ष नवीन शर्मा द्वारा किया गया।
रोजगार मेले में महापौर डॉ जोगेन्द्र पाल सिंह रौतेला, अध्यक्ष जिला पंचायत बेला तोलिया, जिलाध्यक्ष भाजपा, प्रदीप बिष्ट, ब्लाक प्रमुख रूपा देवी, प्रकाश हर्बाेला, शंकर कोरंगा के अलावा आयुक्त दीपक रावत, डीआईजी नीलेश आन्नद भरणे, जिलाधिकारी धीराज सिंह गर्ब्याल,एसएसपी पंकज भटट,निदेशक सेवायोजन प्रशिक्षण विनोद गिरी गोस्वामी, संयुक्त निदेशक जेएम नेगी, उपनिदेशक चन्द्रकान्ता, स्मिता अग्रवाल, सहायक निदेशक वाई एस रावत, ममता चौहान, जिला सेवायोजन अधिकारी राजेश दुर्गापाल के साथ ही जनपदों से आये हजारों की संख्या में युवा एवं युवती रोजगार मेले में उपस्थित रहे।

सुरई ईकोटूरिज्म जोन में जंगल सफारी और ककरा क्रोकोडाइल ट्रेल का सीएम करेंगे लोकार्पण

वर्ष 2021 के जाते-जाते प्रदेश की धामी सरकार खटीमा विधानसभा क्षेत्र को एक बड़ी सौगात देने जा रही है। 29 दिसम्बर को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी खटीमा में ’सुरई ईकोटूरिज्म जोन’ और ’ककरा क्रोकोडाइल ट्रेल’ का लोकार्पण करेंगे। ’सुरई ईकोटूरिज्म जोन’ प्रदेश का पहला ऐसा ईकोटूरिज्म जोन होगा जहां पर्यटक जंगल सफारी का लुत्फ उठा सकेंगे। अब तक हमारे प्रदेश में सिर्फ नेशनल पार्क और बायोस्फीयर रिजर्व (संरक्षित क्षेत्र) में ही जंगल सफारी का चलन रहा है। इसके अलावा ’ककरा क्रोकोडाइल ट्रेल’ देश का पहला क्रोकोडाइल ट्रेल है जहां पर्यटक बेहद नजदीक जाकर मगरमच्छ की खतरनाक प्रजाति ’मार्श’ का सुरक्षित दीदार कर सकेंगे। यह दोनों योजनाएं मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की पूर्व में घोषित ’सीएम यंग ईकोप्रिन्योर स्कीम’ से जुड़ी हुई हैं जिसके तहत उत्तराखण्ड के स्थानीय लोगों की आर्थिकी को वनों और वन्य जीवों से जोड़कर स्वरोजगार के अवसर पैदा किए जा रहे हैं। इस स्कीम के अंतर्गत 1 लाख युवाओं को ईकोप्रिन्योर बनाने का लक्ष्य है।
तराई पूर्वी वन प्रभाग के डीएफओ संदीप कुमार ने बताया कि चारों ओर वन क्षेत्र से घिरे खटीमा के लोगों को पर्यावरण संरक्षण के साथ कैसे स्वरोजगार से जोड़ा जाए इसके लिए एक अभिनव योजना को धरातल पर उतारा जा रहा है। अब तक पर्यटन के लिहाज से पिछड़े रहे खटीमा व आसपास के क्षेत्र को पर्यटन मानचित्र में ऊंचा स्थान दिलाना इस योजना का मुख्य उद्देश्य है। मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी की सोच है कि जैव विविधता और वन्य जीवों की मौजूदगी वाले ’तराई पूर्वी वन प्रभाग’ को योजनाबद्ध तरीके से विकसित कर उसके सुराई वन क्षेत्र को इको टूरिज्म जोन के रूप में तब्दील किया जाए ताकि यहां के प्राकृतिक सौन्दर्य का उपयोग स्थानीय लोगों को प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रोजगार मुहैया करवाने में किया जा सके। इसी सिलसिले में पूर्व में उन्होंने ’तराई पूर्वी वन प्रभाग’ के सुरई व आसपास के वन क्षेत्र को पर्यटन की दृष्टि से विकसित करने की घोषणा (संख्या-359/2021) की थी। उसके बाद से ही वन महकमा उनकी इस घोषणा को साकार करने में जुटा हुआ है। योजना को चार भागों में बांटकर धरातल पर उतारा जा रहा है। इनमें सुरई ईकोटूरिज्म जोन, ककरा क्रोकोडाइल ट्रेल, खटीमा सिटी फॉरेस्ट और चुका प्रवासी पक्षी केन्द्र की स्थापना शामिल है। उन्होंने बताया कि सुरई ईकोटूरिज्म जोन और ककरा क्रोकोडाइल ट्रेल योजना का निर्माण और विकास कार्य पूरा हो चुका है। जबकि खटीमा सिटी फॉरेस्ट और चुका प्रवासी पक्षी केन्द्र के विकास की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। मुख्यमंत्री आगामी 29 दिसम्बर को सुरई ईकोटूरिज्म जोन में जंगल सफारी का शुभारम्भ और ककरा क्रोकोडाइल ट्रेल का लोकार्पण करने जा रहे हैं।

सुरई ईकोटूरिज्म जोन-
मुख्यमंत्री ने घोषणा की थी कि सुरई वनों की समृद्ध जैव विविधता को देखते हुए इसे क्षेत्र को सुरई इको टूरिज्म जोन (सुरई पारिस्थितिकी पर्यटन क्षेत्र) का स्वरूप प्रदान किया जाएगा। इसके दो लाभ होंगे पहला यह कि जनसहभागिता सुनिश्चित करते हुए जैव विविधता के धनी इसे क्षेत्र को संरक्षित किया जाएगा और दूसरा, इसके वन मार्गों को जंगल सफारी के लिए विकसित किए जाने से यहां रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे। वन महकमे ने मुख्यमंत्री की इस घोषणा पर रात-दिन काम करते हुए सुरई वन क्षेत्र के वन मार्गों को जैव विविधता ट्रेल के रूप में विकसित कर दिया गया है। यह क्षेत्र 180 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है। जिसके सीमा में पूर्व दिशा में शारदा सागर डैम, पश्चिम में खटीमा नगर, उत्तर में मेलाघाट रोड तथा दक्षिण में पीलीभीत टाइगर रिजर्व क्षेत्र सटा हुआ है। दिलचस्प बात यह है कि प्राकृतिक रूप से बेहद खूबसूरत इस वन क्षेत्र में साल के वृक्षों, चारागाह और पानी की प्रचुर मात्रा में है। इन तमाम वजहों से यहां बाघों की आवाजाही बनी रहती है। इसके अलावा स्तनधारी जानवरों की लगभग 125, पक्षियों की 150 से अधिक और सरीसृपों को तकरीबन 20 प्रजातियां भी इस वन क्षेत्र में पाई जाती हैं। यहां के वन मार्गों को विकसित कर लगभग 40 किलोमीटर का ट्रेल जंगल सफारी के लिए तैयार कर लिया गया है, जिसमें जिप्सी में बैठकर पर्यटक दुर्लभ वन्य जीवों (रॉयल बंगाल टाइगर, भालू, चीतल, सांभर, काकड़, पैंगोलिन, कोरल सांप, पांडा आदि) का दीदार करने के साथ ही सुरम्य जंगलों, घास के मैदानों, प्राचीन शारदा नहर और सुन्दर तालाबों का लुत्फ उठा सकेंगे।

ककरा क्रोकोडाइल ट्रेल-
सुरई ईकोटूरिज्म जोन की पश्चिमी सीमा पर ककरा नाला स्थित है। यह नाला क्रोकोडाइल (मार्श मगरमच्छ) का प्राकृतिक वास स्थल है। मीठे पानी के स्रोतों में पाई जाने वाली मगरमच्छ की यह प्रजाति भूटान और म्यांमार जैसे तमाम देशों में विलुप्त हो चुकी है। अंडा देने वाली यह प्रजाति बेहद खतरनाक मानी जाती है। मौजूदा समय में इस नाले में 100 से अधिक मार्श मगरमच्छ हैं। पर्यटक इन मगरमच्छों को आसानी से दीदार कर सकें इसके लिए 4 किलोमीटर लम्बे नाले को चौनलिंग फेंसिंग करके ’ककरा क्रोकोडाइल ट्रेल’ के रूप में विकसित किया गया है। यह राज्य का पहला क्रोकोडाइल ट्रेल है। ट्रेल में तीन व्यू प्वाइंट और कई वॉच टॉवर बनाए गए हैं ताकि मगरमच्छों का सुरक्षित तरीके से नजदीक से दीदार हो सके।

वन और वन्य जीव बनेंगे आर्थिकी का जरिया-मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का कहना है कि हमारे प्रदेश में वन बहुतायत में पाए जाते हैं। प्रदेश का 71 प्रतिशत (37999.53 वर्ग किलोमीटर) भूभाग वन क्षेत्र है। इसमें से 24418.67 वर्ग किलोमीटर वन क्षेत्र वन विभाग के अन्तर्गत है। वन कानून की जटिलताओं के कारण वनों के आसपास रहने वाले लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है, जिसमें उनकी खेती भी प्रभावित होती है। उन्होंने कहा कि इस कठिनाई को समझते हुए हमने निर्णय लिया है कि वन और वन्य जीवों को आर्थिकी से जोड़ते हुए स्थानीय लोगों को स्वरोजगार के अवसर मुहैया करवाए जाएंगे। इसी सोच के साथ हमने बीते 1 अक्टूबर 2021 को ’सीएम यंग ईकोप्रिन्योर योजना’ देहरादून में लॉच की थी। इस योजना का क्रियान्वयन शुरू कर दिया गया है। शुरुआत के तौर पर खटीमा में ’सुरई ईकोटूरिज्म जोन’ विकसित कर उसमें जंगल सफारी प्रारम्भ की जा रही है। ग्राम समितियों के जरिए इस योजना का संचालन किया जाएगा। जंगल सफारी शुरू होने से जिप्सी मालिक, चालक और गाइड के रूप में स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलेगा। इसके लिए वन विभाग ने 30 जिप्सी संचालकों के साथ करार किया है। गाइड की भूमिका का सही निर्वहन करने के लिए कई युवकों को वन विभाग इसका प्रशिक्षण दे चुका है। ’सुरई इकोटूरिज्म जोन’ में पर्यटकों की आमद से स्थानीय लोगों को प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलेगा। पूरे प्रदेश में इस योजना को विस्तार दिया जाएगा ताकि वनों, वन क्षेत्रों और वन्य जीवों को हम अपनी कमजोरी नहीं ताकत बना सकें। उन्होंने कहा कि सीएम यंगईकोप्रिन्योर स्कीम के अंतर्गत नेचर गाइड, ड्रोन पायलट, वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर, ईकोटूरिज़्म, वन्यजीव टूरिज़्म आधारित कौशल को उद्यम में परिवर्तित किया जाएगा।

प्रसंस्करण यूनिट की स्थापना के लिये 25 प्रतिशत सब्सिडी देने की घोषणा

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सोमवार को लाडपुर, रिंग रोड़ में आयोजित अन्तर्राष्ट्रीय पौष्टिक आहार महोत्सव में शामिल हुए। मुख्यमंत्री ने किसानों के व्यापक हित तथा पारम्परिक कृषि उत्पादों को बढ़ावा देने के लिये प्रदेश में एक जनपद एक उत्पाद के तहत प्रसंस्करण यूनिट की स्थापना के लिये 25 प्रतिशत सब्सिडी दिये जाने की घोषणा की। सब्सिडी की अधिकतम धनराशि 7 लाख रूपये होगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे पारम्परिक उत्पाद पौष्टिता से भरपूर है। किसानों की खुशहाली तथा उनकी आर्थिकी की मजबूती के लिये राज्य सरकार गंभीरता से प्रयासरत है। किसान एवं खेती की दशा को सुधार करना हमारी प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि आधुनिक ज्ञान विज्ञान एवं अनुसंधान का लाभ किसानों तक पहुंचाना भी हमारा लक्ष्य है। आधुनिक तकनीकि के बल पर खेती एवं कृषि उत्पादों को बढ़ावा देने में बड़ी मदद मिलेगी। कृषि उत्पादों को मार्केटिंग की सुविधा उपलब्ध कराकर उन्हें पहचान दिलाने के भी प्रयास किये जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों की खुशहाली तथा राज्य के पारम्परिक उत्पादों को बढ़ावा देने में केन्द्र सरकार द्वारा पूरा सहयोग दिया जा रहा है। प्रधानमंत्री द्वारा किसानों की आय को दुगुना करने तथा उनके जीवन स्तर में सुधार लाने के लिए अनेक योजनाएं संचालित की है, इससे किसानों के जीवन में क्रांतिकारी परिवर्तन आ रहा है। राज्य सरकार की जरूरतों को केन्द्र सरकार द्वारा प्राथमिकता प्रदान कर उन्हें पूरा किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कृषि के क्षेत्र में किये गये सकारात्मक प्रयासों के लिए केन्द्र सरकार द्वारा राज्य को पुरस्कृत भी किया गया है। उन्होंने कहा कि राज्य गठन के मूल में पर्यटन, ऊर्जा के साथ ही कृषि की अवधारणा भी शामिल रही है। हम इन क्षेत्रों में गंभीरता से प्रयासरत रहते हुए स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क, बिजली, पानी जैसी मूलभूत सुविधाओं के विकास के प्रति भी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रहे हैं। मडुआ, झंगोरा, गहत कोणी, बारा अनाज आदि हमारे पर्वतीय क्षेत्रों की पहचान रही है। हमारे ग्रामीण परिवेश से इन आहारों की औषधीय गुणवत्ता एवं पौष्टिकता की स्वीकार्यता सर्वविदित हैं। उन्होंने कहा अन्तर्राष्ट्रीय पौष्टिक आहार महोत्सव जैसे आयोजन देश व दुनिया में इनकी पहचान बनाने में मददगार होंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा पर्वतीय क्षेत्रों में निवेश के लिए टूरिज्म, आयुष, वेलनेस, आईटी, सौर ऊर्जा और सर्विस सेक्टर पर फोकस किया गया है। ग्रामोदय से राज्य उदय के मंत्र पर कार्य करते हुए हमारे द्वारा सभी न्याय पंचायतों में क्लस्टर बेस अप्रोच पर ग्रोथ सेंटर डेवलप किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जितना भी समय राज्य के मुख्य सेवक के रूप में उन्हें मिला है, उसका पल पल राज्य के विकास के लिए समर्पित किया है। हमारा संकल्प है कि जब राज्य स्थापना के 25 वर्ष पूर्ण होंगे तब हम उत्तराखण्ड को देश का सर्वश्रेष्ठ राज्य बना देंगे।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री द्वारा विजय गड़धारी की पुस्तक ‘‘उत्तराखण्ड की खाद्य प्रजातियां’’ तथा कृषि विभाग के लोगो का भी लोकार्पण किया। मुख्यमंत्री राज्य के पारम्परिक आहार के विविध व्यजंन बनाने वाले शेफ देवेन्द्र जोशी को भी सम्मानित किया।
इस अवसर पर कृषि मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि राज्य सरकार किसानों की आय को दुगनी करने की दिशा में कृषि एवं बागवानी के क्षेत्र में अनेक योजनाओं पर कार्य कर रही है जिसमें केन्द्र सरकार का पूरा सहयोग मिल रहा है। किसानों को खेती के लिये अनेक सहूलियत दी जा रही है। उनके उत्पादों को बेहतर मार्केटिंग की व्यवस्था की जा रही है। किसानों के उत्पादों के विपणन के लिये मण्डी परिषद् में रिवालिंग फण्ड की व्यवस्था दी गई हैं सहकारिता के माध्यम में भी उनके उत्पादों को क्रय की व्यवस्था की गई हैं। उत्पादों के विपणन के लिये 1380 आउटलेट विकसित करने का लक्ष्य रखा गया।
विधायक उमेश शर्मा ‘ काऊ’ द्वारा कार्यक्रम में उपस्थित सभी लोगों का आभार व्यक्त किया गया। इस अवसर पर औद्योगिकी विश्वविद्यालय के कुलपति के साथ ही कृषि विभाग के उच्चाधिकारी एवं बड़ी संख्या में किसान एवं कास्तकार उपस्थित रहे।

मुख्यमंत्री ने निभाया बेरोजगारों से किया वादा, पुलिस भर्ती के आदेश जारी

धामी सरकार ने बेरोजगार युवाओं को पुलिस विभाग में भर्ती के दरवाजे खोल दिए हैं। शासन ने सिपाहियों के 1521 और दरोगाओं के 197 पदों पर भर्ती की अनुमति दे दी है। इस सम्बंध में उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग अतिशीघ्र उत्तराखंड पुलिस भर्ती विज्ञप्ति जारी करने के आदेश दिए गए हैं।
बीते 4 जुलाई को मुख्यमंत्री का पदभार संभालते ही पुष्कर सिंह धामी ने कहा था कि युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना उनकी पहली प्राथमिकता है। सरकारी नौकरी के साथ स्वरोजगार मुहैया करवाकर ही पहाड़ी क्षेत्र से हो रहे पलायन को रोका जा सकता है। उन्होंने तुरंत विभिन्न सरकारी विभागों में रिक्त पड़े लगभग 24000 पदों पर नियुक्ति शुरू करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद अधिकांश विभागों ने अपने यहां रिक्त पदों के सापेक्ष भर्ती प्रक्रिया शुरू कर दी है। अब पुलिस विभाग के रिक्त पदों पर भर्ती के आदेश जारी किए गए हैं। सचिव डा. रंजीत कुमार सिन्हा की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि उत्तराखण्ड पुलिस के 1521 आरक्षी पदों और 197 उपनिरीक्षक पदों पर भर्ती का निर्णय शासन ने लिया है। उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग को इन पदों की भर्ती परीक्षा की विज्ञप्ति जारी करने और परीक्षा कार्यक्रम जारी करने के निर्देश दिए गए हैं। बताते चलें कि हाल ही में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ’देवभूमि बेरोजगार मंच’ के तहत रोजगार के लिए प्रदर्शन कर रहे युवाओं को आश्वासन दिया था कि अति शीघ्र पुलिस विभाग में भर्ती की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। बीते 17 दिसंबर को बेरोजगार युवाओं ने मुख्यमंत्री आवास कूच किया था। इस दौरान अधिकारियों के जरिए हुए वार्ता में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी दो दिन के भीतर पुलिस भर्ती प्रक्रिया शुरू करने का आश्वासन दिया था, जो आज पूरा हो चुका है।

सीएम के निर्देश पर अब जिला स्तर से ही मिलेगी 50 करोड़ तक के उद्योग प्रस्तावों को मंजूरी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर प्रदेश में उद्योगों की स्थापना के लिये वर्तमान में लागू व्यवस्था में प्राधिकृत समितियों की अधिकारिता के संबंध में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग के अंतर्गत उत्तराखण्ड उद्यम एकल खिडकी सुगमता एवं अनुज्ञापन नियमावली में संशोधन करते हुए अब प्लांट एवं मशीनरी मद में रू0 10.00 करोड़ के स्थान पर रू0 50.00 करोड तक के प्रस्ताव जनपद स्तरीय प्राधिकृत समिति एवं रू0 10.00 करोड़ से अधिक के स्थान पर रू0 50.00 करोड़ से अधिक के प्रस्ताव पर राज्य स्तरीय प्राधिकृत समिति को विचार कर अनुज्ञा/अनुमोदन प्रदान करने के लिये अधिकृत किये जाने की व्यवस्था की गई है। इस सम्बन्ध में सचिव सूक्ष्म लघु एवं मध्यम उद्यम अमित नेगी द्वारा शासनादेश भी निर्गत कर दिया गया है। इससे प्रदेश में उद्योगों को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी।

धामी सरकार की इन योजनओं से मिल रहा स्वरोजगार और आर्थिक मदद भी

उत्तराखंड में होम स्टे के तहत प्रदेश में दीन दयाल उपाध्याय होम स्टे योजना, ट्रैकिंग ट्रेक्सन सेंटर होम स्टे अनुदान योजना चलाई जा रही है। दीन दयाल उपाध्याय होम स्टे योजना के तहत होमस्टे का पंजीकरण कराना अनिवार्य है। लाभार्थी को 15 लाख रुपये तक पूंजी सहायता और डेढ़ लाख रुपये तक ब्याज सहायता दी गई है। पांच वर्षों के लिए राज्य जीएसटी की 100 प्रतिशत प्रतिपूर्ति की व्यवस्था भी सरकार ने की है। सीएम धामी ने बताया कि प्रदेश में अब तक 3700 से अधिक होम स्टे पंजीकृत हैं, जिन्हें 14 करोड़ 53 लाख रुपये पूंजी सहायता वितरित की जा चुकी है। होम स्टे से प्रदेश में आठ हजार से अधिक रोजगार सृजित हुए हैं।
सरकार, होम स्टे संचालकों को गांवों में पर्यटन के बुनियादी ढ़ाचे के विकास, निजी वेबसाईट पर होम स्टे विज्ञापित करने, सरकारी वेबसाइट के माध्यम से ऑनलाइन प्रचार, निशुल्क प्रशिक्षण, ट्रैवल मार्ट में निशुल्क भागीदारी और गुणवत्ता निर्धारण से ग्रेडिंग की सुविधाएं भी दे रही है। सीएम धामी ने बताया कि सीमांत क्षेत्रों से पलायन रोकने व पर्वतारोहण को बढ़ावा देने के लिए चलाई जा रही ट्रैकिंग ट्रेक्सन सेंटर होम स्टे अनुदान योजना के लिए भी अक्तूबर तक 120 लाभार्थियों को तीन करोड़ 20 लाख का अनुदान दिया जा चुका है।
आपको बता दें कि हाल ही में वाराणसी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुए सुशासन सम्मेलन (मुख्यमंत्री परिषद) में उत्तराखंड की होम स्टे योजना छा गई। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्वरोजगार के लिए इस योजना का प्रधानमंत्री मोदी के सामने प्रभावी प्रस्तुतिकरण दिया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने प्रस्तुतिकरण में बताया कि किस तरह प्रदेश में स्वरोजगार के नए अवसर प्रदान करने, नए पर्यटन स्थलों को विकसित करने के मकसद से होम स्टे पर सरकार विशेष ध्यान दे रही है।