जिला आपदा कंट्रोल रूम का लगातार निरीक्षण करें सभी डीएमः सीएम

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिये हैं कि प्रदेश में अतिवर्षा की संभावनाओं के दृष्टिगत किसी भी चुनौती से निपटने के लिए सभी व्यवस्थाएं चाक-चौबंद रखी जाय। उन्होंने कहा कि मौसम विभाग के भारी वर्षा के पूर्वानुमान को देखते हुए विशेष सतर्कता की जरूरत है।

मुख्यमंत्री ने सभी जिलाधिकारियों को किसी भी प्रकार के आपदा के लिए सतर्क रहने एवं शीघ्र रिस्पाँस करने को कहा है। आपदा प्रभावितों को अनुमन्य सहायता राशि भी शीघ्र उपलब्ध कराने के निर्देश दिये हैं।

मुख्यमंत्री ने सभी जिलाधिकारियों को यह भी निर्देश दिये हैं कि जिला आपदा कंट्रोल रूम का भी लगातार निरीक्षण करते रहें। ड्यूटी के प्रति लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों एवं कर्मचारियों पर सख्त कार्यवाही की जाए। उन्होंने जिलाधिकारियों को आपदा के दृष्टिगत निरन्तर जनप्रतिनिधियों के सम्पर्क में रहने के भी निर्देश दिये हैं। उन्होंने कहा कि स्थानीय स्तर पर भी जनप्रतिनिधियों के फोन नम्बर की लिस्ट भी अपडेट रखी जाए, ताकि किसी भी प्रकार की घटना होने पर शीघ्र सम्पर्क किया जा सके।

मुख्यमंत्री की पहल पर उत्तराखंड को भी मिलेंगे मोबाइल पेट्रोल पंप

भविष्य में चार धाम यात्रा मार्गों के साथ ही राज्य के दूरदराज के क्षेत्रों में लोगों को पेट्रोल-डीजल की किल्लत से नहीं जूझना पड़ेगा। इसके लिए मोबाइल पेट्रोल पंप (पेट्रोल-डीजल डिस्पेंसर) स्थापित किए जाएंगे। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत से मुलाकात के बात केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने यह संकेत दिए। उन्होंने कहा कि मोबाइल पेट्रोल पंप के लिए नियमावली तैयार हो रही है। इसके बाद यहां भी चारधाम समेत दूरस्थ क्षेत्रों के मार्गों पर ये सुविधा मिलने लगेगी।
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत में बताया कि केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से राज्य में पीएनजी व सीएनजी के विस्तार समेत विभिन्न मसलों पर वार्ता की गई थी। इस दौरान यात्रा मार्गों के साथ ही दूरस्थ क्षेत्रों में पेट्रोल-डीजल की उपलब्धता सुनिश्चित कराने पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री के अनुसार केंद्रीय मंत्री ने यह भरोसा दिलाया कि ऑल वेदर रोड के निर्माण के दौरान तैयार डंपिंग जोन से मिलने वाली 60 हेक्टेयर भूमि पर भी मोबाइल पेट्रोल पंप समेत अन्य सुविधाएं विकसित की जाएंगी।
केंद्रीय मंत्री ने देहरादून और हल्द्वानी में सीएनजी-पीएनजी के बारे में जानकारी ली और कहा कि इसके विस्तार में केंद्र सरकार हरसंभव मदद करेगी। केंद्रीय मंत्री ने हरिद्वार महाकुंभ के आयोजन में भी मदद का भरोसा भी दिलाया। उन्होंने महाकुंभ के दौरान हरिद्वार, ऋषिकेश व देहरादून में सीएनजी युक्त वाहन चलाने और इसके लिए 20-25 सीएनजी स्टेशन खोलने को कहा। उन्होंने कहा कि यह ग्रीन कुंभ के आयोजन को बड़ी पहल होगी। मुख्यमंत्री ने उन्हें बताया कि हरिद्वार महाकुंभ के लिए मास्टर प्लान बनाया जा रहा है। उन्होंने हरिद्वार में सती घाट को विकसित करने पर भी विशेष जोर दिया।
केंद्रीय मंत्री प्रधान ने चारधाम में अवस्थापना सुविधाओं के लिए हरसंभव मदद का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि गंगोत्री व यमुनोत्री में गैस अथोरिटी आफ इंडिया द्वारा नागरिक एवं अवस्थापना सुविधाओं के कार्य किए जाएंगे। केदारनाथ में ओएनजीसी के जरिये विभिन्न कार्य किए जाएंगे। उन्होंने कार्यों में तेजी लाने के लिए दोनों संस्थानों और राज्य के अधिकारियों के मध्य बेहतर समन्वय पर बल दिया।

जम्मू कश्मीर में फहरेगा तिरंगा, अनुच्छेद 370 को केंद्र सरकार ने किया खत्म

सोमवार को मोदी सरकार ने जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 को निरस्त करने के साथ ही राज्यसभा में राज्य पुनगर्ठन बिल के जरिए सूबे को दो हिस्सों (जम्मू-कश्मीर और लद्दाख) में बांट कर इन्हें केंद्रशासित प्रदेश घोषित करने का प्रस्ताव रखा है। इनमें जम्मू कश्मीर को विधायिका शक्ति वाला तो लद्दाख को बिना विधायिका शक्ति वाला केंद्रशासित प्रदेश बनाने का प्रस्ताव है।

बिल पर राज्यसभा ने सोमवार को ही मुहर लगा दी है। अब मंगलवार को लोकसभा में बिल पर मुहर लगते ही जम्मू कश्मीर न सिर्फ विशेष राज्य का दर्जा खो देगा, बल्कि पूर्ण राज्य के रूप में इसका अस्तित्व भी खत्म हो जाएगा। सोमवार को जब गृह मंत्री अमित शाह ने अनुच्छेद 370(1) में निहित शक्तियों का उपयोग करते हुए इस अनुच्छेद के अन्य सभी खंडों को निरस्त करने का संकल्प पेश किया तो पूरा सदन हक्का बक्का रह गया।

इसके साथ ही जब शाह ने राज्य पुनगर्ठन बिल के जरिए राज्य को दो हिस्सों में बांटने, पूर्ण राज्य की जगह इन्हें केंद्रशासित प्रदेश घोषित करने संबंधी प्रस्ताव रखा तो सदन में एकबारगी भूचाल आ गया। शाह ने संकल्प और बिल पेश करते हुए कहा कि अनुच्छेद 370 में समय समय में संशोधन होता रहा है। अब जरूरी है कि राज्य से आतंकवाद के खात्मे और विकास के लिए इसे निरस्त किया जाना चाहिए।

ये होंगे महत्वपूर्ण बदलाव
जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में भी लागू होगी भारतीय दंड संहिता
राज्य का अपना अलग संविधान खत्म
राज्य का अलग झंडा भी नहीं रहेगा
छह साल की जगह अन्य राज्यों की तरह 5 साल का होगा विधानसभा का कार्यकाल
पूर्ण राज्य और विशेष राज्य का दर्जा होगा खत्म
दो नए केंद्रशासित प्रदेशों का होगा उदय
पूर्ण राज्य की संख्या 29 से घट कर होगी 28
चंडीगढ़ की तरह बिना विधायिका शक्ति वाला केंद्रशासित प्रदेश होगा लद्दाख

इन्होंने किया समर्थन
राज्य पुनगर्ठन बिल का राजग के इतर बीजेडी, वाईएसआर कांग्रेस, बसपा और आम आदमी पार्टी ने समर्थन किया।

इन्होंने किया वाकआउट
कांग्रेस, डीएमके ने किया विरोध तो सहयोगी जदयू, सपा ने किया वाकआउट।

लक्ष्मणझूला पुलः वैकल्पिक पुल को मिले तीन करोड़ रूपए

राज्य सरकार ने विश्व प्रसिद्ध लक्ष्मण झूला के पास वैकल्पिक पुल का निर्माण कराने के लिए प्रथम चरण के तहत वित्तीय प्रावधान कर दिया है। शासन ने शुक्रवार को सेतु निर्माण के लिए 3.360 करोड़ रुपये की प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति प्रदान कर दी। नया वैकल्पिक पुल 150 मीटर का होगा। लोनिवि के उपसचिव जीवन सिंह ने वित्तीय स्वीकृति का शासनादेश जारी किया।

प्रदेश सरकार पुराने और जर्जर हो चुके लक्ष्मण झूला पुल से आवाजाही पहले ही प्रतिबंधित कर चुकी है। आवाजाही पर रोक लगाने के बाद मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने लोक निर्माण विभाग को जल्द से जल्द वैकल्पिक झूला पुल तैयार करने के निर्देश दिए थे।

उनके निर्देश पर लोक निर्माण विभाग की टीम स्थलीय निरीक्षण करने के बाद सर्वेक्षण में जुट गई। विभाग ने शासन को प्राथमिक आगणन रिपोर्ट सौंपी थी। जिस पर वित्तीय स्वीकृति जारी कर दी गई है। अब वित्तीय प्रावधान करने के बाद लोक निर्माण विभाग को झूला पुल निर्माण की एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार करनी होगी। इस रिपोर्ट के आधार पर शासन अगले चरण की वित्तीय स्वीकृति प्रदान करेगा।

भरत मंदिर का फैसला 19 एकड़ में फैले लोग नहीं होंगे बेदखल, मगर ये शर्ते होंगी लागू

श्री भरत मंदिर ने बनखंडी में बसे करीब पांच हजार लोगों को न हटाने का फैसला लिया है। मगर, इसकी एवज में कुछ औपचारिक शर्तें भी रखी है। शर्तों के मुताबिक बनखंडी में रह रहे लोगों को बसी जमीनों का आजीवन पट्टा दिया जाएगा। पट्टे की एवज में सक्षम लोग 500 रुपए वर्ग गज के हिसाब से शुल्क अदा करेंगे। इसके अलावा पट्टाधारकों को 10 रुपए सालाना शुल्क अदा करना होगा।

विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल ने लोगों से राय मशविरा करके प्रस्ताव श्री भरत मंदिर के सामने रखा। गरीबों को जमीन मुफ्त में दान का प्रस्ताव भी था, जिसे श्री भरत मंदिर की ओर से स्वीकार कर लिया गया। समझौते के बाद श्रीभरत मंदिर की ओर से हर्षवर्धन शर्मा ने कहा कि बनखंडी को उजाड़ने की मंशा कभी नहीं रही। यही वजह है कि रामलीला की भूमि को भी दान दे दिया गया है। प्रस्ताव पर अमल के लिए दो माह का समय दिया गया है।

यह भी फैसला किया गया है कि भरत मंदिर की 19 एकड़ जमीन पर जो लोग बस चुके है, उन्हें बेघर नहीं किया जाएगा। ट्रस्ट को जमीन बेचने का अधिकार नहीं होता, लिहाजा लोगों को जमीनों का पट्टा होगा। श्री भरत मंदिर ने यह भी साफ किया कि किसी भी निवासी पर जबरन निर्णय नहीं थोपा जाएगा। पट्टे की एवज में लोगों को 10 रुपए सालाना शुल्क देना होगा। रात करीब नौ बजे समझौता होने के बाद लोगों ने राहत की सांस ली।

इससे पहले कोर्ट के आदेशों के मुताबिक शुक्रवार को बनखंडी में बेदखली की कार्रवाई होनी थी। इन्हीं आशंकाओं और भय के चलते लोग सिफारिशों में जुटे रहे। मेयर अनिता ममगाई बुधवार को मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत से भी मिलीं और उन्हें पूरे घटनाक्रम से अवगत कराया। मेयर के मुताबिक मुख्यमंत्री ने लोगों से धैर्य बनाए रखने की अपील की है। समझौते के दौरान पूर्व पालिकाध्यक्ष दीप शर्मा, बार एसोसिएशन अध्यक्ष राजेन्द्र सिंह सजवाण सहित शहर के गणमान्य लोग और बनखंडी निवासी उपस्थित रहे।

समझौता न मानने वालों के खिलाफ दायर होगा अलग से मामला
श्री भरत मंदिर ने यह भी फैसला लिया है कि जो लोग मालिकाना हक के फैसले को नहीं मानेंगे, उनके खिलाफ अलग से मामला दायर किया जाएगा। इसी के तहत बृहस्पतिवार को कोर्ट में भरत मंदिर की ओर से बनखंडीवासियों को बेदखल न करने का प्रार्थना पत्र दाखिल किया जाएगा। कोर्ट से अनुमति भी मांगी जाएगी कि जो लोग समझौते के दायरे में नहीं आ रहे है, उनके खिलाफ नए सिरे से मुकदमा दायर करने की मंजूरी दी जाए। समझौता वार्ता के दौरान कई लोगों ने सवाल उठाया कि जो लोग अपनी जमीन बेचना चाहते हैं, भविष्य में उन्हें क्या दिक्कतें हो सकती हैं। इस पर भरत मंदिर की ओर से हर्षवर्धन शर्मा ने बताया कि यदि कोई निवासी अपना घर या भूूखंड भविष्य में बेचना चाहता है तो उसे ट्रस्ट की ओर से एनओसी की कोई जरूरत नहीं होगी। अलबत्ता, बेची गई जमीन पर सालाना शुल्क 10 रुपए की बजाए 20 रुपए देय होगा।

माल्या को सुप्रीम कोर्ट से चाहिए राहत, अर्जी दाखिल की

भारतीय बैंकों का कर्जदार और देश छोड़कर भागे कारोबारी विजय माल्या ने अपने और अपने रिश्तेदारों के स्वामित्व वाली संपत्तियों को कुर्क किए जाने पर रोक लगाने के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। माल्या ने अपनी याचिका में कहा कि सिर्फ किंगफिशर कंपनी से संबंधित संपत्ति ही कुर्क की जाए। सुप्रीम कोर्ट 29 जुलाई यानी कि सोमवार को इस मामले की सुनवाई करेगा। अपनी दलील में माल्या ने कहा है कि उसकी निजी संपत्ति और परिवार के अन्य सदस्यों क संपत्ति जब्त नहीं की जाए।

माल्या पर भारतीय बैंकों का नौ हजार करोड़ रुपये लोन लेने और बिना चुकाए फरार होने का आरोप है। शराब कारोबारी विजय माल्या को 11 जुलाई को झटका लगा था। बंबई हाई कोर्ट ने इससे पहले विजय माल्या की इसी याचिका को खारिज कर दिया था। इस याचिका के जरिए माल्या ने सरकारी एजेंसियों द्वारा उसकी संपत्ति को जब्त करने की प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग की थी।

फर्जी मोटर इंश्योरेंस पॉलिसी का शिकार होने से बचें, अपनाइए ये तरीके

देश में फर्जी मोटर इंश्योरेंस पॉलिसी की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है। भारतीय बीमा नियामक और विकास प्राधिकरण (इरडा) के आंकड़ों के मुताबिक पिछले दो सालों में 53.7 करोड़ रुपये की फर्जी मोटर इंश्योरेंस पॉलिसी बिकी हैं, वहीं ऐसे मामलों की संख्या 498 से बढ़ कर 1,192 तक पहुंच गई है।

नकली पाॅलिसी की संख्या बढ़ी
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद सत्र की शुरुआत में बताया था कि इरडा की फ्रॉड मॉनिटरिंग सेल के आंकड़ों के मुताबिक 2016-17 में 498 नकली पॉलिसी बिकीं, वहीं 2017-18 में ये संख्या बढ़ कर 823 हो गई। जबकि साल 2018-19 में यह संख्या बढ़ कर 1192 को पार गई है।

क्लेम की धनराशि में नही मिली
इनमें सबसे ज्यादा फर्जी पॉलिसी ट्रक वालों और दो-पहिया वाहन रखने वालों को दी गईं। वहीं ये पॉलिसी उन लोगों ने खरीदी, जो सड़क पर पुलिस की चेकिंग के दौरान जांच से बचना चाहते थे। एक असली मोटर इंश्योरेंस पॉलिसी की कीमत जहां 10 हजार रुपये पड़ती है, वहीं नकली पॉलिसी 5 से 6 हजार रुपये में मिल जाती हैं। वहीं ग्राहक ये अच्छे से जानते हैं कि ऐसी पॉलिसी की मदद से आप केवल पुलिस चेकिंग से बच सकते हैं, लेकिन कोई दुर्घटना होने पर उससे कोई क्लेम नहीं ले सकते।

बिना इंश्योरेंस के चल रहे वाहन
वहीं देश में तकरीबन 70 फीसदी वाहन बिना इंश्योरेंस के चल रहे हैं। इरडा का कहना है कि उन्हें 2016 में ।ज्ञब्च्स् जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड और 2019 में गोन जनरल और मैरींस टेक्नोलॉजी की फर्जी इंश्योरेंस पॉलिसी बेचने की शिकायते मिलीं हैं। वहीं इनमें से ज्यादातर पॉलिसी सेकंड हैंड गाड़ियों के लिए खरीदी गई थीं, ताकि ट्रैफिक चालान वगैरहा से बचा जा सके।

अन्तरराष्ट्रीय गिरोह सक्रिय
इसके अलावा वाहन मालिकों को फंसाने के लिये बकायदा गैंग बना कर लोगों को ठगा जा रहा है। फरवरी में मुंबई पुलिस के हत्थे एक ऐसा गैंग चढ़ा था, जो दो सालों में 800 से अधिक नकली मोटर इंश्योरेंस पॉलिसी टू-व्हीलर मालिकों को बेच चुका था। ये जालसाज कम कीमत वाली श्सस्तीश् पॉलिसी की पेशकश कर लोगों को अपने जाल में फंसाने की कोशिश करते थे।

छूट का ऑफर देकर फंसाते है
ये लोग टू-व्हीलर मालिकों को फोन करके मोटर इंश्योरेंस एजेंट होने का दावा कर पॉलिसी रिन्यू कराने पर प्रीमियम और एड-ऑन कवर पर भारी छूट का वादा करते थे। प्रीमियम का चेक मिलने के बाद पॉलिसी जारी हो जाती थी, लेकिन जब बीमाधारक क्लेम दाखिल करता था, तो उसे इंश्योरेंस कंपनी से पता चलता है कि पॉलिसी नकली है और एजेंट लापता है।

पॉलिसी रिन्यू कराने वाले होते हैं टारगेट में
आमतौर पर ये फर्जीवाड़ा उन टू-व्हीलर मालिकों के साथ होता है, जिनकी पॉलिसी रिन्यू होने वाली होती है। आरटीओ के डेटाबेस के जरिये लोगों को फंसाते हैं और फेक पॉलिसी इश्यू करने के लिए जाली लेटर हेड और स्टैम्प का इस्तेमाल करते हैं।

ध्यान रखें कि पॉलिसी खरीदने के लिये चेक या ऑनलाइन ट्रांजेक्शन ही करें। केवल कंपनी के नाम पर ही चेक काटें, किसी निजी व्यक्ति के नाम पर चेक देने से बचें।
वहीं अगर आपने किसी थर्ड पाटी या व्यक्ति से पॉलिसी ली है, तो आपके ईमेल पर उसकी डिटेल आएंगी। यदि नहीं आई हैं, तो इंश्योरेंस कंपनी के कॉल सेंटर पर फोन करके पॉलिसी को वेरिफाई करें।
किसी अंजान कंपनी से पॉलिसी खरीदने से बचें। अगर आपको कोई शक हो रहा है कि इरडा की वेबसाइट पर जाकर लाइसेंस वाली कंपनियों की लिस्ट में उस कंपनी का नाम चेक कर सकते हैं। साथ ही स्वीकृत पॉलिसी की डिटेल भी आपको वहीं मिल जाएगी।
प्त्क्।प् ने कुछ साल पहले बीमा कंपनियों के लिए वाहन बीमा पॉलिसी पर एक फत् कोड प्रिंट करना जरूरी कर दिया है, इससे आप पॉलिसी की डिटेल्स क्यूआर कोड के जरिये मोबाइल पर चेक सकते हैं। भारत में दिसंबर 2015 के बाद बिकने वाली मोटर बीमा पॉलिसियों में आम तौर पर एक क्यूआर कोड होता है।

लक्ष्मण झूला पुल का विकल्प तलाशन में जुटी सरकार, जल्द तैयार होगा नया पुल

ऋषिकेश में लक्ष्मण झूला पुल को बंद किए जाने के फैसले पर राज्य सरकार अडिग है। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि जन सुरक्षा सरकार के लिए सवरेपरि है। इसीलिए लक्ष्मण झूला पुल पर किसी भी तरह की आवाजाही तुरंत रोकने का निर्णय लिया गया है। उन्होंने कहा कि सरकार लक्ष्मण झूला पुल का विकल्प जल्द ही तैयार कर लेगी। वहां वैकल्पिक पुल बनाने का निर्णय लिया गया है। लक्ष्मण झूला पुल को धरोहर के तौर पर संरक्षित रखने की कार्ययोजना भी बनाई जाएगी। वहीं, पुल पर पैदल आवाजाही जारी रखने से आम जन को राहत है। उधर, इस का असर अब रामझूला पुल पर पड़ने वाला है। रामझूला पुल पर अब दोगुना भार पड़ जाएगा, जो सुरक्षा की दृष्टि से इस पुल के लिए भी चिंता का विषय है।
शासन ने शुक्रवार को लक्ष्मण झूला पुल पर आवाजाही रोकने के आदेश जारी किए, लेकिन स्थानीय लोगों के भारी विरोध के कारण आवाजाही पर प्रतिबंध नहीं लग पाया है। इस बीच शनिवार को यमकेश्वर क्षेत्र की विधायक ऋतु खंडूड़ी ने लक्ष्मण झूला पुल के संबंध में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत से मुलाकात की।
मुख्यमंत्री रावत ने कहा कि छह माह पहले आइआइटी रुड़की के विशेषज्ञों से लक्ष्मण झूला पुल की फिजिबिलिटी पर अध्ययन कराया गया। विशेषज्ञों की रिपोर्ट के अनुसार इस झूला पुल की स्थिति ऐसी नहीं है कि लोगों की आवाजाही को अनुमति दी जा सके। उन्होंने कहा कि कांवड़ मेले में भारी भीड़ को देखते हुए इस पर आवाजाही जारी रखना उचित नहीं होता।
उन्होंने कहा कि जनसुरक्षा के दृष्टिगत लक्ष्मण झूला पुल पर किसी भी तरह की आवाजाही को तुरंत रोकने का निर्णय किया गया है। साथ ही झूलापुल का विकल्प जल्द से जल्द तैयार करने के निर्देश अधिकारियों को दिए गए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि लक्ष्मण झूला पुल एक सांस्कृतिक धरोहर है। यह ऋषिकेश का प्रमुख आकर्षण का केंद्र और देश-विदेश में इसकी ख्याति है। कई फिल्मों का फिल्मांकन भी यहां हुआ है। उन्होंने कहा कि लक्ष्मण झूला पुल का समुचित रखरखाव करते हुए इसे धरोहर के तौर पर संरक्षित किया जा सकता है। इसके लिए विशेषज्ञों की राय से कार्ययोजना बनाई जाएगी।
उधर, शासन ने भले ही लक्ष्मण झूला पुल पर आवाजाही पर रोक लगा दी हो, मगर शनिवार को भी इस पर लगातार आवाजाही होती रही। हालांकि, प्रशासन की ओर से शासन के फैसले का विरोध कर रहे लोगों को समझाने की कोशिशें की गईं, मगर यह परवान नहीं चढ़ पाईं। वहीं, माना जा रहा है कि इस झूला पुल के बंद होने से रामझूला पर अधिक दबाव बढ़ेगा। यही नहीं, तीन दिन बाद कांवड़ यात्रा भी शुरू होने जा रही है। ऐसे में कांवड़ में उमड़ने वाली भीड़ को नियंत्रित करने के साथ ही लक्ष्मण झूला पुल की सुरक्षा सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती होगी।

रोडवेज की सवारी कृपया ध्यान दें, छाता लेकर सफर करना सुनिश्चित करें

अगर आप उत्तराखंड रोडवेज की बसों में सफर कर रहे हैं तो बारिश की बूंदों से बचने का इंतजाम साथ लेकर चलें। यहां सड़कों पर आयु सीमा पूरी करने के बावजूद दौड़ रही निगम की जर्जर बसों की स्थिति यही है। स्थानीय मार्गों पर ही नहीं, बल्कि लंबी दूरी के लखनऊ जैसे मार्ग पर बसों की छत टपक रही और यात्री खड़े होकर सफर करने को मजबूर हो रहे। बसें कहां दम तोड़कर खड़ी हो जाएं, कोई गारंटी नहीं। कमोवेश यह स्थिति हर डिपो की है।
रोडवेज की करीब 450 बसें आयु सीमा पूरी कर चुकी हैं मगर प्रबंधन इन्हें रास्ते पर दौड़ाए जा रहा। लंबे अर्से से इन बसों की जर्जर हालात ठीक करने की मांग कर्मचारी उठाते रहे हैं, लेकिन प्रबंधन एवं सरकार की उदासीनता से बसों की हालत ठीक नहीं हो पा रही है। सरकार पिछले आठ माह से सूबे में 300 नई बसें लाने का दावा कर रही है, मगर बसें कब आएंगी, इसका कुछ मालूम नहीं। मौजूदा समय में प्रदेश में बारिश की वजह से रोडवेज के बस अड्डे तो पानी से जलमग्न हो ही रहे, बसें भी इसमें पीछे नहीं हैं।
कहीं बसों में खिड़कियों से पानी अंदर आ रहा तो कहीं छतों के जरिए। देहरादून से पांवटा, ऋषिकेश, सहारनपुर, हरिद्वार आदि स्थानीय मार्गों पर चलने वाली बसों में छत टपकना तो आम बात है ही, अब लखनऊ जाने वाली ग्रामीण डिपो की साधारण सेवा में छत टपकने की शिकायतें आ रहीं। दून के ग्रामीण डिपो से ज्यादातर मैदानी मार्गों पर साधारण बसों का संचालन होता है और इसी डिपो की हालत सबसे जर्जर है। लखनऊ जाने वाली 3043 नंबर की बस की पूरी छत गुरूवार को टपकने लगी। यह हालात बने कि यात्रियों को सीट से उठकर खड़े होकर सफर करना पड़ा। सामान तक भीग गया। ग्रामीण डिपो समेत हरिद्वार और रुड़की, ऋषिकेश, कोटद्वार, काशीपुर तक में जर्जर बसों की समस्या से यात्रियों को भारी मुसीबतों का सामना करना पड़ रहा। सबसे ज्यादा मुसीबत उस वक्त खड़ी होती है जब बस में जगह नहीं होती और रास्ते में बारिश होने लगती है।

वाइपर भी नही, ऐसे कैसे सुरक्षित सफर करेंगे यात्री
तेज बारिश में वाइपर की कमी चालकों को खटक रही है। बसों में वाइपर लगाने के नाम पर कितना पैसा पानी में बहा यह तो प्रबंधन जाने, लेकिन चालकों का कहना है कि डिपो कार्यशाला के जिम्मेदार उन्हें मौत के मुंह में ढकेलने का पूरा इंतजाम किए हुए हैं। बसों की मरम्मत के नाम पर कागजों में काम हो रहा है। चालकों ने बताया कि पुरानी बसों में शीशे के फ्रेम भी खराब हैं, जिससे खिड़की रास्ते पानी बसों के अंदर आता है। बसों में वाइपर नहीं होने से तेज बरसात में हादसे का खतरा बना रहता है।

अगले माह तक मिलेंगी 300 नई बसें
रोडवेज के महाप्रबंधक दीपक जैन के मुताबिक, आयु सीमा पूरी कर चुकी ज्यादातर बसों को हटाया जा चुका है। मार्गों पर जिन बसों को भेजा जाता है, वह कार्यशाला से जांच के बाद जाती हैं। जिन पुरानी बसों में छतों के टपकने की शिकायत आ रही, उन्हें ठीक कराया जाएगा। निगम की 300 नई बसें अगले माह तक पहुंच जाएंगी।

लक्ष्मणझूला पुल पर खतरा बढ़ा, समय रहते नही जागी सरकार

ऋषिकेश में लक्ष्मणझूला पुल की मियाद खत्म हो चुकी है, लिहाजा इस पर बड़ी संख्या में लोगों की आवाजाही अब खतरे से खाली नहीं है। इस बात का खुलासा पीडब्ल्यूडी की सर्वे रिपोर्ट में हुआ है। विभाग ने यह रिपोर्ट शासन को भेज दी है।
मामला इसलिए और अहम है, क्योंकि एक सप्ताह बाद ही कांवड़ यात्रा शुरू होने वाली है। प्रशासन से कांवड़ियों के नीलकंठ जाने के लिए लक्ष्मणझूला के जरिये ही रूट तय किया है। लक्ष्मणझूला पुल का निर्माण 1929 में हुआ था, जिसे आवाजाही के लिए 1930 में खोला गया था। करीब 90 साल पुराने इस पुल समेत 1986 में बने रामझूला पुल का पीडब्ल्यूडी के डिजाइनर पीके चमोली ने कुछ दिन पहले तकनीकी सर्वे किया था।
इसमें पुल की लोडिंग क्षमता और आयु आदि की जांच की गई थी। रिपोर्ट के मुताबिक 89 साल पहले के डिजाइन और क्षमता के हिसाब से पुल आज इस स्थिति में नहीं है कि इस पर अब बड़ी संख्या में लोग आवाजाही कर सकें।

रामझूला पुल सुरक्षित
पुराने समय में झूला पुलों का निर्माण करते हुए पुल की क्षमता का ध्यान नहीं रखा जाता था, जबकि वर्तमान में 500 किलोग्राम प्रति स्क्वायर मीटर की क्षमता के झूला पुल बनाए जाते हैं।
सर्वे रिपोर्ट से स्थानीय पुलिस को भी अवगत करा दिया गया है। पीडब्ल्यूडी (नरेंद्रनगर डिवीजन) के एक्सईएन मोहम्मद आरिफ खान का कहना है कि शासन के निर्देशानुसार अगला कदम उठाया जाएगा। पीडब्ल्यूडी ने अपने सर्वे में हालांकि आवाजाही के लिहाज से रामझूला पुल को सुरक्षित पाया है। इससे आवाजाही की जा सकती है। बता दें कि इस पुल को बने हुए भी 33 साल हो चुके हैं।
वहीं, नरेंद्र नगर के विधायक सुबोध उनियाल ने बताया कि बोर्ड बैठक में यह मामला पीडब्ल्यूडी अधिकारियों ने उठाया था। अपर मुख्य सचिव, पीडब्ल्यूडी और डीएम पौड़ी को पुल के दोनों ओर बेरिकेडिंग लगाने को कहा गया है, ताकि एक बार में अधिक संख्या में लोग पुल पर न चढ़ें।