रैंजर्स कालेज मैदान की भूमि राज्य सरकार को हस्तांतरित करने की मांग

वन भूमि हस्तांतरण में 5 हैक्टेयर तक की स्वीकृति प्रदान करने का अधिकार राज्य सरकार को दिया जाए। राज्य सरकार की परियोजनाओं में क्षतिपूर्ति वृक्षारोपण के लिए डिग्रेडेड फारेस्ट लैंड को अनुमन्य किया जाए। सोमवार को मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने नई दिल्ली में केंद्रीय पर्यावरण, वन व जलवायु मंत्री प्रकाश जावड़ेकर से भेंट कर उत्तराखण्ड से संबंधित विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की। मुख्यमंत्री ने कैम्पा के अंतर्गत 2019-20 की वार्षिक कार्ययोजना को अनुमोदित करने, रैंजर्स कालेज मैदान की रिक्त भूमि को राज्य सरकार को हस्तांतरित करने का अनुरोध किया।
मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि आपदा क्षेत्रों में पुनर्निर्माण कार्यों की तात्कालिकता, चारधाम आलवेदर रोड़, पीएमजीएसवाई, ग्रामीण विद्युतिकरण आदि महत्वाकांक्षी परियोजनाओं के लिए वन भूमि हस्तांतरण विषयों पर जल्द निर्णय लिए जाने की आवश्यकता होती है। इसलिए कार्यहित में 5 हैक्टेयर तक के प्रकरणों में स्वीकृति का अधिकार राज्य सरकार को दिया जाए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बीआरओ की सड़क परियोजनाओं, केंद्र सरकार व केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों की परियोजनाओं के लिए क्षतिपूर्ति वृक्षारोपण, डिग्रेडेड फारेस्ट लैंड पर किए जाने की अनुमति प्रदान की गई है। परंतु केंद्र पोषित परियोजनाओं व राज्य सरकार की समस्त परियोजनाओं में क्षतिपूर्ति वृक्षारोपण के लिए दोगुनी मात्रा में सिविल भूमि की अनिवार्यता की गई है। राज्य में अधिकांश भाग वनाच्छादित व पर्वतीय है। यहां सिविल भूमि की सीमितता को देखते हुए केंद्र पोषित, बाह्य सहायतित व राज्य पोषित समस्त परियोजनाओं के लिए भी डिग्रेडेड फारेस्ट लैंड पर क्षतिपूर्ति वृक्षारोपण की अनुमति प्रदान की जाए।
उत्तराखण्ड सरकार द्वारा भारत सरकार से कार्ययोजना के प्राविधानों के अनुसार 1000 मीटर से ऊपर स्थित प्रौढ़ वृक्षों के पातन का समय-समय पर अनुरोध किया गया है। वन अनुसंधान संस्थान, देहरादून द्वारा भी एक वैज्ञानिक अध्ययन के बाद ऐसे पातन के लिए संस्तुति की गई है। मुख्यमंत्री ने केन्द्रीय मंत्री से इसकी अनुमति दिए जाने का अनुरोध किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्व में विभिन्न औद्योगिक गतिविधियों पर वाटर सैस एकत्र कर भारत सरकार के कोष में जमा किया जाता था, जिसका 80 प्रतिशत भारत सरकार द्वारा राज्य प्रदूषण बोर्ड को उपलब्ध कराया जाता था। परंतु जीएसटी एक्ट के बाद यह व्यवस्था समाप्त हो गई है। इससे राज्य सरकार को औसतन 3 करोड़ 25 लाख रूपए की वार्षिक आय बंद हो गई है। भारत सरकार के निर्देशानुसार राज्य के 5 नगरों में नियमित एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग स्टेशन, एनवायरमेंटल डाटा सेंटर व एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग के लिए 142 अतिरिक्त स्टेशन स्थापित करने के लिए कुल 20 करोड़ रूपए की लागत संभावित है। यह राशि राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को भारत सरकार द्वारा उपलब्ध कराई जाए।
देहरादून में रेंजर्स कालेज का संचालन वन एवं पर्यावरण मंत्रालय भारत सरकार के अधीन है। यहां काफी रिक्त भूमि है जिसका उपयोग निकट भविष्य में स्मार्ट सिटी देहरादून की योजना को क्रियान्वित करने, नेशनल गेम्स आदि कार्यक्रम आयोजित करने में किया जा सकता है। इसलिए रेंजर्स कालेज की रिक्त भूमि राज्य सरकार को हस्तांतरित की जाए।

जल पुलिस के जवानों के पास नहीं हैं सुरक्षा उपकरण, फिर भी बचा रहे लोगों को

ऋषिकेश के त्रिवेणी घाट पर गंगा में डूबने से बचाने के लिए 40वीं वाहिनी पीएससी की ई कंपनी तैनात है। लोगों की सुरक्षा के लिए तैनात इन जवानों के पास खुद के बचाव के बुनियादी उपकरण नहीं हैं। हालात यह है कि लोगों को बचाने में इन जवानों को सड़ चुके लाइफ जैकेट के सहारे गंगा की लहरों जूझना पड़ रहा है।

ऋषिकेश के त्रिवेणी घाट पर प्रतिदिन करीब 15 से 20 हजार लोग गंगा स्नान, पितृ तर्पण के लिए पहुंचते हैं। इस घाट पर प्रतिदिन टिहरी डैम से पानी भी छोड़ा जाता है। इससे यहां पानी का बहाव बढ़ जाता है। कई बार गंगा स्नान के दौरान लोग दुर्घटना का शिकार हो जाते हैं। किसी भी अप्रिय घटना से बचाने के लिए इस घाट पर उत्तराखंड पुलिस की एक जल चौकी भी है। यहां नौ जवान हर समय मुस्तैद रहते हैं, लेकिन गंभीर बात यह है कि इन जवानों के पास जरूरी सुरक्षा उपकरण नहीं हैं। वर्ष 2010 में मिलीं लाइफ जैकट अभीतक बदली नहीं गई हैं। फिलवक्त लाइफ जैकेट की हालात काफी खराब हो चुकी है। जैकेट के अंदर का फॉम गल चुका है। सिलाई उधड़ चुकी है। अमूमन लाइफ जैकेट की मियाद दो साल होती है। इसके बाद निष्प्रयोज्य मान ली जाती है। बहरहाल यात्रियों के साथ किसी दुर्घटना की स्थिति में जल पुलिस के जवानों को इन्हीं सड़ चुकीं लाइफ जैकेट के सहारे गंगा की लहरों से जूझना पड़ता है। जल पुलिस के हेड कांस्टेबल मदन सिंह चौहान ने बताया कि जल चौकी पर नौ जवान हैं। कांवड़ यात्रा के दौरान जवानो की संख्या बढ़ाई जाती है।

यह सामान है उपलब्ध
सामान संख्या
लाइफ जैकेट्स 12
लाइफ ब्वाय 02
थ्रो बैग 02
सर्चिंग कांटा 02
साइकिल 02

इन सामानों की है दरकार
सामान संख्या
लाइफ जैकेट्स 10
लाइफ बाय 03
थ्रो बैग 03
सर्चिंग कांटा 02
राफ्ट 01
डीप डाइवर 01
40वीं वाहनी पीएससी ई-कंपनी के कंपनी कमांडर वीरेन्द्र सिंह चौहान का कहना है कि विभागीय मुख्यालय देहरादून को जरूरी उपकरणों की सूची भेजी गई है। इसके अलावा जरूरत पड़ने पर राफ्ट हरिद्वार तथा मुनिकीरेती कार्यालय से रेस्क्यू के लिए भेजी जाती है।

ध्यान रहे कि जलापूर्ति निर्बाध रुप से जारी रहेः मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने सचिवालय में सिंचाई व पेयजल विभाग की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिये कि ग्रीष्मकाल में प्रदेश में कही भी पानी की किल्लत न हो, इसका ध्यान रखा जाए। उन्होंने प्रदेश में पानी की कमी वाले स्थानों पर टेंकरों के माध्यम से पेयजल की अतिरिक्त व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। मुख्यमंत्री ने यात्रा मार्गों तथा प्रमुख पर्यटन स्थलों पर पर्यटकों व श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या के दृष्टिगत जलापूर्ति की समुचित व्यवस्था के भी निर्देश दिये है। उन्होंने इसके लिये सिंचाई, पेयजल व जल संस्थान को आपसी समन्वय से कार्य करने के भी निर्देश दिये।

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मुख्यमंत्री ने पेयजल योजनाओं की प्राथमिकता स्थानीय जरूरतों को ध्यान में रखते हुए निर्धारित करने के भी निर्देश दिये। उन्होंने जमरानी व सोंग बांध के साथ ही सूर्यधार व मलढुंग झील से सम्बन्धित योजनाओं की प्रगति की भी जानकारी प्राप्त की। देहरादून बनने वाला सोंग बांध देश का मॉडल बांध बने इस दिशा में प्रयास किये जाए तथा इसके निर्माण में जल संवर्धन जलाधारित अवस्थापना सुविधाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर ध्यान देने को कहा। उन्होंने सूर्यधार व मलढुंग झीलों के निर्माण की प्रगति पर संतोष प्रकट करते हुए गैरसेण, गगास, खरकोट, ल्वाली व लोहाघाट आदि मे बनने वाली झीलों के निर्माण में भी तेजी लाने को कहा। उन्होंने इन स्थलों को पर्यटन की दृष्टि से भी विकसित करने के निर्देश दिये।

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मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को भैरवगढ़ी पेयजल योजना का लाभ लैंसडाउन की अधिक से अधिक आबादी को उपलब्ध हो इस पर ध्यान देने को कहा। उन्होंने पेयजल आपूर्ति के साथ ही सीवरेज से सम्बन्धित एडीबी द्वारा संचालित योजनाओं के रख-रखाव की भी प्रभावी कार्य योजना बनाने को कहा। मुख्यमंत्री ने विभागीय कार्यों में पारदर्शिता एवं गुणवत्ता के विकास पर ध्यान देने के निर्देश देते हुए कहा कि अपने कार्य के प्रति उदासीन ऐसे कार्मिकों जो काफी लम्बे अर्से से एक ही स्थान पर तैनात है, उनकी अन्यत्र तैनाती की व्यवस्था की जाए। मुख्यमंत्री ने विभागीय अधिकारियों को आय के संसाधनों के विकास पर भी ध्यान देने के निर्देश दिये। बैठक में उपाध्यक्ष राज्य स्तरीय पेयजल अनुश्रवण समिति रिपुदमन सिंह रावत, सचिव डा. भूपेन्दर कौर औलख, मुख्य महाप्रबंधक जल संस्थान सुधीर शर्मा, मुख्य अभियन्ता सिंचाई ए.के.दिनकर व संबंधित विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।

नेपाल में बैठे युवक ने पत्नी को दिया मोबाइल पर तलाक, एसएसपी ने की ये कार्रवाई

एक व्यक्ति ने नेपाल में बैठकर अपनी पत्नी को मोबाइल पर तीन बार तलाक बोल दिया। इससे पीड़िता की शिकायत पर हरिद्वार एसएसपी जन्मेजय प्रभाकर खंडूडी ने पति के ससुराल पक्ष पर मुकदमा दर्ज कर लिया।

ज्वालापुर क्षेत्र के गांव सराय निवासी सलीम की बेटी फरजाना का निकाह मई 2016 में सउद उर्फ सोनू अंसारी पुत्र मसूद निवासी गांव लंढौरा से हुआ था। आरोप था कि निकाह के बाद से ही ससुराल पक्ष के लोग दहेज कम मिलने की बात कहकर प्रताड़ित करते थे। जैसे तैसे उसके पिता, भाई ने कई लाख की रकम ससुराल पक्ष को दी थी लेकिन वह संतुष्ट नहीं हुए। आरोप था कि नवंबर 2018 में गांव पदार्था पथरी में उसकी रिश्तेदारी में निकाह था।

निकाह संपन्न होने के बाद उसके ससुराल पक्ष ने कहा कि उसका पति सउद किसी काम से नेपाल गया हुआ है और जब वह आ जाएगा तब ससुराल चली आना। आरोप है कि कुछ दिन बाद ससुराल पक्ष ने दहेज में कार और एक लाख की रकम न मिलने पर मायके आकर उसके साथ मारपीट कर दी थी। इतना ही नहीं जनवरी 2019 में उसके पति सउद ने नेपाल से मोबाइल फोन पर संपर्क साधकर उसे तीन बार तलाक बोलकर तलाक देने की बात कही और धमकी भी दी कि यदि फिर से उसके घर आने की कोशिश की तो गंभीर परिणाम भुगतना होगा।

पीड़िता ने ज्वालापुर पुलिस से शिकायत की थी लेकिन मामले को महिला हेल्प लाइन ट्रांसफर किया गया था। महिला हेल्प लाइन में हुई काउंसिलिंग के दौरान पीड़िता के आरोप के आधार पर मुकदमा दर्ज करने की संस्तुति की गई। कोतवाली प्रभारी मनोज मैनवाल ने बताया कि पति, ससुर मकसूद, सास कौसर जहां और ननद रूकसार के खिलाफ प्रभावी धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।

दिव्यांगों के लिए रैंप न होने से हो रही परेशानी

उत्तराखंड की प्रसिद्ध चार धाम यात्रा के प्रवेश द्वार के रेलवे स्टेशन पर ही दिव्यांगों के लिए रैंप जैसी कोई व्यवस्था ही नहीं है। इससे दिव्यांग यात्रियों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। आलम यह है कि एक दिव्यांग को प्लेटफार्म से दूसरे प्लेटफार्म तक ले जाने के लिए कम से कम तीन लोगों की जरूरत पड़ती है। शुक्रवार को तीर्थनगरी की पैरा ओलंपिक खिलाड़ी नीरजा गोयल रेलवे स्टेशन पर दिव्यांगों के लिए रैंप की व्यवस्था हो, इसके लिए ज्ञापन सौंपने स्टेशन अधीक्षक के कार्यालय पहुंची।

उनका कहना है कि वह पूर्व में भी इस संदर्भ में स्टेशन अधीक्षक के यहां आ चुकी हैं, लेकिन वह मिलते ही नहीं हैं। नीरजा गोयल ने कहा कि एक ओर देश के प्रधानमंत्री दिव्यांगों के उत्थान की बात करते हैं, दूसरी ओर रेलवे स्टेशन पर रैंप की व्यवस्था नहीं है। शुक्रवार को नीरजा को हरिद्वार जाना था। वह ट्रेन से हरिद्वार जाने के लिए रेलवे स्टेशन पहुंची। व्हील चेयर से एक प्लेट फार्म से दूसरे प्लेट फार्म जाने के लिए रैंप की व्यवस्था न होने के कारण उन्हें मजबूरन लोगों की मदद लेकर पटरियां पार करनी पड़ीं। इसी मुद्दे को लेकर नीरजा गोयल शुक्रवार को ज्ञापन देने पहुंची थीं। फिलहाल स्टेशन अधीक्षक से मुलाकात नहीं हो पाई।

वहीं, स्टेशन अधीक्षक राजपाल मीना का कहना है कि दिव्यांगों को व्हील चेयर के लिए प्रस्ताव भेजा गया है। ज्ञापन देने आई दिव्यांग नीरजा गोयल के साथ फोन पर बात हुई। मैं किसी बैठक में था। लिहाजा नीरजा को सलाह दी थी कि वे स्टेशन मास्टर को ज्ञापन सौंप दें या फिर डीआरएम को फैक्स के जरिए शिकायत भेज सकती हैं।

राफ्टिंग का काम कर घर लौट रहे युवक की डंपर से कुचलकर मौत

ऋषिकेश स्थित हीरालाल मार्ग पर नो एंट्री जोन में गुजर रहे एक डंपर ने बाइक सवार युवक को अपनी चपेट में ले लिया। इससे युवक की घटनास्थल पर ही मौत हो गई। पुलिस ने युवक के परिजनों को सूचित कर शव को पोस्टमार्टम के लिए एम्स ऋषिकेश भेज दिया है।

बुधवार दोपहर साढ़े 12 बजे हीरालाल मार्ग पर राफ्टिंग का काम करके गली नंबर 04 सुमन विहार बापू ग्राम निवासी दिनेश सिंह बिष्ट पुत्र रंजीत सिंह बिष्ट बाइक से अपने घर लौट रहा था। इस दौरान एक बेकाबू डंपर ने दिनेश सिंह को अपनी चपेट में ले लिया। हादसे में दिनेश की मौके पर ही मौत हो गई। हादसा देख स्थानीय लोग घटनास्थल की ओर दौड़े और डंपर चालक को पकड़ लिया। घटनास्थल पर पहुंची पुलिस के सामने लोगों ने नो एंट्री में डंपर घुसने पर भी विरोध जताया। पुलिस ने किसी तरह लोगों को शांत कराया। इसके बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए एम्स भेज दिया।

कोतवाल रितेश शाह ने बताया कि डंपर और चालक हुकुम चंद्र पुत्र दुमनो राम निवासी धगरास थाना सुंदरनगर जिला मंडी हिमाचल प्रदेश को हिरासत में ले लिया गया है। हुकुम चंद्र देहरादून रोड ऋषिकेश स्थित गैरोला कॉम्पलेक्स के एसएन डोभाल के यहां काम करता है।

पिछले गड्ढों को बिना भरे हो रहा था आगे का निर्माण, पुलिस ने रोकी जेसीबी

ऋषिकेश पुलिस ने बैराज मार्ग पर जाम की समस्या से निपटने के लिए नमामि गंगे परियोजना के प्रोजेक्ट का निर्माण कार्य रुकवा दिया। पुलिस टीम ने यहां ग्रेविटी लाइन बिछाने के लिए गड्ढे खोद रही जेसीबी को रोक दिया है।

कोतवाल रितेश शाह के मुताबिक नमामि गंगे प्रोजेक्ट के तहत गड्ढे खोदे जा रहे हैं। पिछले गड्ढों को बिना ढके या उनमें मिट्टी को बिना समतल किए कार्य चल रहा है। इस कारण आए दिन जाम की स्थिति हो रही है। साथ ही दुर्घटनाएं भी हो रही हैं। इसी को देखते हुए बुधवार को निर्माण कार्य रुकवाया गया है। ठेकेदार विप्लब घोष को पहले गड्ढों में मिट्टी भरकर उसे समतल करने को कहा गया है। साथ ही निर्माण कार्य रात में करने को कहा है। जब तक ठेकेदार इस पर अमल नहीं करता, तब तक दिन में निर्माण कार्य पर रोक रहेगी।

गौरतलब है कि 157 करोड़ की लागत से ऋषिकेश में नमामि गंगे परियोजना के तहत प्रोजेक्ट कार्य चल रहा है। इसमें लक्कड़घाट में 26 एमएलडी सीवर ट्रीटमेंट प्लांट लगाया जा रहा है। इस एसटीपी प्लांट के लिए नगर में सड़क किनारे गड्ढे खोदकर इन दिनों ग्रेविटी लाइन बिछाने का कार्य चल रहा है। इसमें क्षेत्र में तीन जगह पर पंपिंग स्टेशन बनाए जाने हैं, जो चंद्रेश्वर घाट, सर्वहारा नगर और बापूग्राम में बनाए जाएंगे। अभी वर्तमान में वीरभद्र मार्ग पर ग्रेविटी लाइन बिछाने का कार्य चल रहा है। जिसे पुलिस टीम ने रुकवा दिया है।

रंभा नदी के संरक्षण को लेकर प्राधिकरण का गठन करने की मांग

रंभा नदी के संरक्षण को लेकर प्राधिकरण के गठन की मांग करते हुए नमामि गंगे के सदस्यों ने ऋषिकेश मेयर अनिता ममगाईं को ज्ञापन सौंपा हैं।

नमामि गंगे के जिला क्रियान्वयन समिति के सदस्य विनोद जुगलान के नेतृत्व में सभी सदस्यों ने नगर निगम कार्यालय में एकत्रित होकर मेयर अनिता ममगाईं को ज्ञापन सौंपा। उन्होंने कहा कि तीर्थनगरी में बहने वाली रंभा नदी का स्कंद पुराण के केदार खंड में वर्णन है। यह नदी कालेकीढाल के पास रंभा कुंड संजय झील से शुरू होकर वीरभद्र महादेव मंदिर के समीप गंगा में मिलती है। यह तीर्थनगरी के लिए विशेष महत्व प्रदान करती है।

प्राचीन काल में ऋषिकेश आने वाले तीर्थयात्री इसकी प्ररिक्रमा कर काशी के पंच कोसी यात्रा की तरह लाभ प्राप्त करते थे। हिंदुओं की इस धार्मिक मान्यता को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के सर्वेक्षण से भी बल मिलता है। वर्तमान में रंभा नदी की स्थिति दयनीय बनी हुई है जो वह एक नाले में तब्दील हो चुकी है। जिसे सरकार की नमामि गंगे परियोजना में गंदा नाला माना गया है।
सभी गंगा भक्तों ने रंभा नदी और सरस्वती नदी केे संरक्षण के लिए आम सहमति से पांच बिंदुओं को क्रियान्वित करने और करवाने का निर्णय लिया है। उन्होंने मेयर से रंभा नदी और सरस्वती नदी के संरक्षण के लिए सरस्वती संरक्षण प्राधिकरण का गठन करने की मांग की है।

घर में लगी आग से लाखों रूपए का सामान स्वाहा

मुनिकीरेती क्षेत्रांतर्गत एक घर के फ्रिज का कंप्रेशर फटने से आग लग गई। इससे घर के कमरे में रखा सारा सामान खाक में तब्दील हो गया। वहीं घर के सदस्यों को हल्की चोटें आईं है।

मुनिकीरेती के शीशमझाड़ी वार्ड नंबर तीन, गली संख्या 21 में माया देवी वर्मा पत्नी स्व. जगदीश वर्मा अपने तीन बेटों सोनू, सचिन और पवन के साथ दो मंजिले भवन में रहती है। बीते शनिवार की रात्रि करीब नौ बजे उनके दूसरे नंबर के बेटे सचिन का बेटा पलंग से नीचे गिर गया। इस कारण सचिन की पत्नी और अन्य सदस्य निचली मंजिल पर चले गए। इस दौरान सचिन के कमरे में रखे फ्रिज का कंप्रेशर फट गया। इससे आग की लपटें निकलने लगी।

धमाका और आग की लपटें देख परिवार सहित आसपास के लोगों में चीख पुकार मच गई। स्थानीय लोगों की मदद से परिवारजनों ने आग पर काबू पाया। मगर, तब तक लाखों रुपए का नुकसान हो चुका था। तीसरे नंबर के बेटे पवन वर्मा ने बताया कि आग लगने से बड़े भाई सचिन के कमरे में रखा एलईडी टीवी, एसी, फ्रीज, कूलर, फर्नीचर, आलमारी, कपड़े आदि सामान जल गए। अगले दिन पहुंचे विद्युतकर्मी ने बताया कि आग लगने का कारण फ्रीज का कंप्रेशर फटना रहा।

डीएनए रिपोर्ट में हुआ खुलासा, बेटा की जगह बेटी ही हुई थी

देहरादून के दून महिला अस्पताल में बच्चा बदले जाने के कथित मामले में अस्पताल प्रशासन ने राहत की सांस ली है। इस मामले में डीएनए रिपोर्ट आ गई है। रिपोर्ट से स्पष्ट हो गया है कि महिला का बच्चा बदलने का इल्जाम झूठा है। उसकी बेटी ही हुई थी।

विदित हो कि पिछले माह अस्पताल में एक ही नाम की दो महिलाओं ने बच्चों को जन्म दिया था। दोनों के प्रसव के बीच करीब डेढ़ घंटे का अंतर रहा। इनमें एक महिला ने बेटे और दूसरी ने बेटी को जन्म दिया था। शाम ढलते ही अस्पताल में बेटा-बेटी का मामला उलझ गया। इनमें डोभालवाला निवासी आरती पत्नी उमेश ने आरोप लगाया कि उनका बेटा हुआ था। लेकिन अस्पताल में तैनात स्टाफ ने उन्हें शाम को बताया कि बेटा नहीं बेटी हुई है। बच्ची को दूध पिलाने तक से उसने इन्कार कर दिया था।

मामला प्रकाश में आने के बाद अस्पताल प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए। वहीं उत्तराखंड बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने भी इसका संज्ञान लिया। अगले दिन आयोग की अध्यक्ष ऊषा नेगी अस्पताल पहुंच गईं। उनके हस्तक्षेप पर महिला ने बच्ची को दूध पिलाया। इस मामले में शहर कोतवाली में भी तहरीर दी गई थी। शिकायतकर्ता दंपती बच्चों का डीएनए टेस्ट करने की मांग कर रहे थे।

बीती 12 मार्च को बाल आयोग की अध्यक्ष ऊषा नेगी, दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. केके टम्टा, महिला अस्पताल की सीएमएस डॉ. मीनाक्षी जोशी व पुलिस की मौजूदगी में डीएनए जांच के लिए दोनों दंपती व बच्चों के सैंपल लिए गए। अब सवा माह बाद डीएनए की जांच रिपोर्ट आई है। दून अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. केके टम्टा ने जांच रिपोर्ट मिलने की पुष्टि की है।