राज्य सरकार के फैसले से महंगाई बढ़ने के आसार!

केंद्र सरकार के बाद अब उत्तराखंड सरकार ने पेट्रोल और डीजल महंगा कर दिया है। प्रदेश मंत्रिमंडल ने पेट्रोल पर पूर्व में दी गई ढाई रुपये और डीजल एक रुपये प्रति लीटर की छूट को वापस ले लिया है। ये छूट सरकार ने अक्टूबर 2018 में दी थी। नई दरें लागू होने के बाद राजधानी देहरादून में पेट्रोल 75.08 रुपये और डीजल 66.73 रुपये प्रति लीटर हो जाएगा।
बुधवार को मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की अध्यक्षता में उनके आवास पर हुई बैठक में 12 में से 11 प्रस्तावों पर मुहर लगी। कैबिनेट ने गैरसैंण में भूमि खरीदने पर लगे प्रतिबंध को भी हटा दिया है। कैबिनेट मंत्री व शासकीय प्रवक्ता मदन कौशिक ने कहा कि 2012 में तत्कालीन सरकार गैरसैंण में भूमि खरीदने पर रोक लगाई थी। लेकिन रोक के बावजूद वहां स्टांप पेपर पर भूमि खरीदी व बेची जा रही है, जिससे कई तरह के कानूनी वाद पैदा हो रहे हैं। इन सारी बाद पर विचार करने के बाद कैबिनेट में भूमि खरीद पर रोक हटाने का फैसला लिया। कैबिनेट ने सभी तरह के अवैध निर्माण को नियमित कराने के लिए वन टाइम सेटलमेंट योजना को तीन माह के लिए बढ़ा दिया है। सरकार ने इस योजना को एक जनवरी से छह माह के लिए लागू किया था।

मंत्रिमंडल के अन्य फैसले
1.गुर्जर परिवारों के लिए विस्थापन मार्गदर्शक नियमावली को मंजूरी। वन मंत्री की अध्यक्षता में बनाई गयी उपसमिति के आधार पर बनायी गयी यह नियमावली कार्बेट में झिरना, ढेला रेंज के 57 गुर्जर परिवारों से संबंधित है। इसके अंतर्गत प्रत्येक परिवार को पांच लाख परिवार रुपये एवं सामुदायिक कार्य के लिए सामूहिक रूप से प्रत्येक परिवार के लिए एक एकड़ के आधार पर 57 एकड़ की भूमि देने का प्रावधान किया गया है।
2. पेट्रोल और डीजल पर सेस लगाया। इसके बाद अब पेट्रोल पर 2.50 रुपये और डीजल पर सेस एक रुपये बढ़ाया गया।
3. गैरसैंण तहसील के आदि बदरी, सिलबाटा, पंचाली, महाचैरी पटवारी क्षेत्र के 27 गांवों से भूमि क्रय का प्रतिबंध हटा। 2012 में विजय बहुगुणा की कांग्रेस सरकार ने भूमि की अनियंत्रित खरीद फरोख्त को रोकने का तर्क देते हुए यह प्रतिबंध लगाया था।
4. उत्तराखंड भवन निर्माण विकास निधि विनिमय 2011 में संशोधन।
5.महायोजना के अंतर्गत सड़क चैड़ीकरण के अंतर्गत नागरिक द्वारा दी गई भूमि के अनुपात में राज्य सरकार भवनों के ऊपरी तल के विस्तार की अनुमति देगी। यदि तीन मीटर भवन के अग्रभाग में सड़क के लिए छोड़ा जाता है तो उसका 125 प्रतिशत भवन के ऊपर विस्तार किया जा सकता है।
6. केंद्र के स्तर पर जीएसटी में हुए संशोधनों को मंजूरी। राज्य सरकार विधानसभा के पटल पर इन संशोधनों को रखेगी। ये संशोधन समाधान योजना, ई कामर्स रिटर्न फाइलिंग और व्यापारियों की ओर से टैक्स रिटर्न फाइल करने से संबंधित हैं।
7.उत्तराखंड सचिवालय विनियमितीकरण नियमावली में संशोधन करते हुए निगम कार्यालयों के 91 कार्मिकों को सचिवालय संवर्ग के लिए स्वीकार किया जाएगा।
8. उत्तराखंड परिवहन विभाग प्रवर्तन कर्मचारी वर्ग की सेवा नियमावली में संशोधन। प्रवर्तन सिपाही के लिए शैक्षिक अर्हता हाईस्कूल से इंटर की गई।
9.राष्ट्रीय राजमार्ग में कई स्वामित्व के लोगों की भूमि अवैध मानी गई थी। कैबिनेट ने ऐसे लोगों की ओर से 12 साल का भूमि से संबंधित रिकार्ड जमा करने पर भवन का मुआवजा देने के प्रस्ताव को संस्तुति दी।
10. उत्तराखंड निजी सुरक्षा अभिकरण नियमावली को मंजूरी। भारत सरकार की नियमावली का नियम 25 के आधार पर राज्य सरकार ने नियमावली बनाई है।
11. उत्तराखंड राजकीय प्राथमिक शिक्षा सेवा नियमावली 2012 में शिक्षामित्र की पात्रता के संबंध में संशोधन किया गया।

फर्जी क्लेम पाने को प्राईवेट अस्पताल कर रहे सरकार से धोखाधड़ी

अटल आयुष्मान उत्तराखंड योजना में सूचीबद्ध प्राईवेट अस्पताल फर्जीवाड़े से बाज नही आ रहे है। फर्जी ढंग से क्लेम हड़पने की होड़ में सभी हदें पार कर सरकार के साथ धोखाधड़ी कर रहे है। नया मामला काशीपुर स्थित एमपी मेमोरियल अस्पताल से जुड़ा है।
जहां योजना में बड़े स्तर पर फर्जीवाड़ा सामने आया है। यहां डिस्चार्ज होने के बाद भी मरीज कई-कई दिन तक अस्पताल में भर्ती दिखाए गए। इतना ही नहीं आइसीयू में भी क्षमता से अधिक रोगियों का उपचार दर्शाया गया है। ताज्जुब ये कि डायलिसिस एमबीबीएस डॉक्टर द्वारा किया जा रहा है। वह भी क्षमता से कई अधिक। फर्जीवाड़ा यहीं नहीं रुका। ऐसे भी प्रकरण हैं जहां बिना इलाज क्लेम प्राप्त किया गया है। जिसकी मरीज को भनक तक नहीं है।
यह सारी अनियमितताएं उजागर होने पर तमाम भुगतान पर रोक लगाते हुए अस्पताल की सूचीबद्धता तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दी गई है। मुख्य कार्यकारी अधिकारी युगल किशोर पंत के अनुसार राष्ट्रीय स्वास्थ्य अभिकरण के सिस्टम पर अस्पताल की लॉगइन आइडी भी ब्लॉक की गई है। वहीं, अस्पताल को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। इसका उसे 15 दिन के भीतर जवाब देना होगा।

डिस्चार्ज होने के बाद भी रिकॉर्ड में भर्ती रहे मरीज
अस्पताल में एकाध नहीं कई स्तर पर गड़बडियां पकड़ में आई हैं। अभिलेखों के परीक्षण में 85 मामले ऐसे पाए गए हैं जिनमें मरीज जितने दिन वास्तव में अस्पताल में भर्ती रहे हैं, उससे ज्यादा दिनों के लिए मरीजों को अस्पताल में भर्ती दिखाकर अधिक धनराशि का क्लेम प्रस्तुत किया गया। 22 मामले ऐसे मिले जिनमें मरीज को डिस्चार्ज करने के बाद प्री-ऑथ इनीशियेट किया गया है।

दस बेड का आइसीयू, 20 मरीज भर्ती
अस्पताल में आइसीयू में उपचारित 263 मरीजों के भर्ती व डिस्चार्ज तिथि का अध्ययन करने पर चैंकाने वाली तस्वीर सामने आई है। आइसीयू में दस बेड हैं, पर विभिन्न दिवसों पर 11 से 20 मरीजों तक का उपचार करना दिखाया गया है। उस पर आइसीयू में केवल अटल आयुष्मान उत्तराखंड योजना के मरीज भर्ती दिखाए गए हैं। जबकि काशीपुर का क्षेत्र उप्र से लगा हुआ है और वहां से भी मरीज उपचार के लिए यहां आते हैं। ऐसे में इस बात पर भी संदेह जताया गया है कि योजना से इतर आइसीयू में किसी अन्य का उपचार ही नहीं किया गया।

क्षमता से कई अधिक डायलिसिस
अस्पताल में सबसे बड़ी खामी डायलिसिस को लेकर सामने आई है। यहां दो मरीजों की एक दिन में दो बार डायलिसिस होना दर्शाया गया है। जबकि ऐसा संभव नहीं है। तीन अक्टूबर 2018 से नौ जून 2019 तक यहां कुल 1773 डायलिसिस होना दर्शाया गया है। अस्पताल में पांच डायलिसिस मशीन हैं। जिनमें मानकों के अनुसार प्रति दिन दस मरीजों का ही डायलिसिस किया जा सकता है। पर डायलिसिस इससे कई अधिक दिखाए गए हैं।

एमबीबीएस कर रहे डायलिसिस, दर्शाया एमडी
अस्पताल में डायलिसिस कर रहे डॉक्टर न तो नेफ्रोलॉजिस्ट हैं, न एमडी और न इसके विशेषज्ञ हैं। यानी एक ऐसे व्यक्ति द्वारा डायलिसिस किया जा रहा है जो इसके योग्य ही नहीं हैं। अस्पताल ने सूचीबद्धता के अपने आवेदन में भी किसी नेफ्रोलॉजिस्ट का उल्लेख नहीं किया था। उक्त डॉक्टर को एमडी मेडिसिन दर्शाया गया है। जबकि उत्तराखंड मेडिकल काउंसिल में वह केवल एमबीबीएस डॉक्टर के रूप में पंजीकृत हैं।

अनुबंध में पांच, नौ विशेषज्ञताओं में कर रहे इलाज
अस्पताल के अनुबंध में केवल जनरल मेडिसिन, स्त्री एवं प्रसूति रोग, हड्डी रोग, जनरल सर्जरी व नियोनेटोलॉजी का ही उल्लेख है। पर इन पांच विशेषज्ञता से अलग 29 अन्य मरीजों का उपचार भी यहां किया गया। जिनमें यूरोलॉजी, पीडियाट्रिक सर्जरी, पोलीट्रॉमा और प्लास्टिक व रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी के मामले शामिल हैं।

सारे नियम किए दरकिनार
अस्पताल ने सूचीबद्धता के आवेदन में हॉस्पिटल रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट कॉलम में एनए अंकित किया गया है। यानी हॉस्पिटल को चलाने के लिए प्रासंगिक कानूनध्नियम के अंतर्गत सर्टिफिकेट भी नहीं है। नेशनल काउंसिल फॉर क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट द्वारा तय न्यूनतम मानकों के अनुसार अस्पताल में प्रत्येक विशेषज्ञता के लिए न्यूनतम एक एमबीबीएस डॉक्टर 24 घंटे अस्पताल में उपलब्ध होना चाहिये। पर अस्पताल इस नियम का भी पालन नहीं कर रहा है।

सरकारी चिकित्सक भी दे रहे सेवा
अस्पताल में एक चिकित्सक डॉ. एके सिरोही द्वारा भी इलाज करना दर्शाया गया है। जबकि वह प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र महुआखेड़ागंज ऊधमसिंहनगर में पूर्णकालिक संविदा चिकित्सक हैं। इनका सूचीबद्धता के आवेदन में कहीं भी उल्लेख नहीं किया गया था।

बिना इलाज ले लिया क्लेम
एमपी मेमोरियल अस्पताल में एक से बड़े एक फर्जीवाड़े अंजाम दिए गए हैं। अस्पताल ने एक मोहल्ले में स्वास्थ्य शिविर लगाया था। जहां लोगों को अल्ट्रासाउंड में छूट प्रदान की गई। इनमें एक महिला को दिक्कत बता भर्ती होने की सलाह दी गई। जहां उसकी फोटो खींचकर कुछ जांचें लिख दी गई और उसे घर भेज दिया। आयुष्मान कार्ड की फोटो खींचकर उसे वापस कर दिया गया। अगले दिन वह रिपोर्ट लेने आई तो कहा गया कि भर्ती होने की आवश्यकता नहीं है। जबकि उसे एंट्रिक फीवर के इलाज के लिए इमरजेंसी में भर्ती दिखाया गया। गलत ढंग से उसका क्लेम प्रस्तुत किया गया।

जान ले आपकी ट्रेन का समय तो नही बदला

रेलवे की नई समय सारिणी में कई ट्रेनों का समय बदला गया है। इसकी जानकारी यात्रियों को नहीं होने के कारण तमाम परेशानियों का सामना करना पड़ा। सोमवार को फिरोजपुर से धनबाद जाने वाली धनबाद एक्सप्रेस ट्रेन शाम 6.25 बजे की बजाय शाम को 4.15 बजे रवाना कर दी गई।
इस कारण करीब 50 यात्रियों की ट्रेन छूट गई। उक्त यात्रियों ने इसकी शिकायत रेल अधिकारियों से की और टिकट बुकिंग पर क्लर्कों से कहासुनी भी हुई। मंगलवार को रेल डिवीजन फिरोजपुर के अधिकारियों ने धनबाद एक्सप्रेस ट्रेन को पुराने समय 6.25 बजे रवाना किया। एक जुलाई से रेलवे ने नई समय सारिणी जारी की है। इसमें कई ट्रेनों का समय बदला गया है। इसके अलावा कुछेक ट्रेनों को रेगुलर किया है और कई ट्रेनें जो रेगुलर चलती थी, उन्हें सप्ताह में दो दिन किया गया है। यात्रियों का कहना है कि रेलवे ने नई समय सारिणी जारी करने के बाद अपनी वेबसाइट पर अपलोड नहीं की। उत्तर रेलवे ने 267 ट्रेनों का समय बदला है। रेलवे ने नई दिल्ली-चंडीगढ़ और नई दिल्ली-लखनऊ के बीच दो नई तेजस एक्सप्रेस की शुरुआत की है।

पनियाली नाले में आए उफान से मलबा फैला, करंट फैलने से तीन की मौत

पनियाली नाले में आए उफान से कौडिया के एक घर में मलबा घुसने के बाद करंट फैल गया। इसकी चपेट में आने से तीन लोगों की मौत हो गई। यह तीनों उस वक्त कमरों से सामान बाहर निकाल रहे थे। बरसाती नाले का पानी और इसके साथ आया मलबा आमपड़ाव और कौडिया के आधा दर्जन से ज्यादा घरों में घुसा। गुजरे तीन सालों से पनियाली नाला आसपास के इलाकों में कहर बरपा रहा है, लेकिन सिंचाई विभाग यहां बाढ़ सुरक्षा प्रबंध नहीं कर पाया। इससे नाराज क्षेत्रवासियों ने मंगलवार को सिंचाई विभाग के कार्यालय में तालाबंदी की।
कोटद्वार में सुबह सात बजे से शुरू हुई मूसलाधार बारिश करीब डेढ़ घंटे चली। इससे आसपास के इलाकों के नदी-नाले उफान पर आ गए। पनियाली नाले के पानी के साथ काफी मात्रा में मलबा आम पड़ाव और कौडिया स्थित कुछ घरों में घुस गया। इस नाले में सुरक्षा दीवार बनाने के लिए यहां से निकाला गया मलबा वहीं नाले के दोनों किनारों पर एकत्र किया गया था, यही मलबा पानी के बहाव के साथ लोगों के घरों तक पहुंचा। तेज हवाएं चलने और बारिश होने के चलते उस वक्त पूरे इलाके में बिजली भी गुल हो गई।
अफरा-तफरी में लोग घरों को छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर चले गए। इसी दरम्यान कौडिया निवासी रणजीत सिंह (30) पुत्र बलवीर अपने घर से सामान बाहर निकाल रहा था। उसकी मदद के लिए पड़ोस में रहने वाले अरुण (28) पुत्र कमल और शाकुन (23) पुत्र गुलशन भी वहां पहुंचे थे। तीनों कमरों से सामान निकाल ही रहे थे, तभी इलाके में बिजली की आपूर्ति बहाल हो गई। घर में मलबा भर जाने की वजह से रणजीत के घर में करंट फैल गया। तीनों लोग इसकी चपेट में आ गए। उन्हें तत्काल बेस चिकित्सालय कोटद्वार ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
रणजीत बैंक में कार्यरत था। हादसे में मारे जाने वाले अन्य दोनों युवकों में अरुण मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले के ढाकी (नजीबाबाद) और शाकुन इसी जिले सिकरौड़ा नवादा का रहने वाला था। अरुण भारत इलेक्ट्रानिक्स लिमिटेड की कोटद्वार इकाई में कार्यरत था, जबकि शाकुन कोटद्वार में नगर निगम के ट्रेचिग ग्राउंड में कूड़ा निस्तारण के कार्य करता था।

शिकयतों पर गंभीर रहे अधिकारी, 7 दिनों में करे समाधानः मुख्यमंत्री

जनता मिलन कार्यक्रम में प्राप्त शिकायतों व समस्याओं पर सात दिन के भीतर आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित की जाए। बिजली के झूलते तारों को अविलम्ब ठीक किया जाए। ऐसे सभी अतिक्रमणों को हटाना सुनिश्चित किया जाए, जिनके कारण जलभराव की समस्या उत्पन्न हो रही हो। मंगलवार को मुख्यमंत्री आवास स्थित जनता दर्शन हॉल में आयोजित जनता मिलन कार्यक्रम में मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने लगभग 170 लोगों की शिकायतों व समस्याओं का मौके पर निस्तारण किया। इनमें 49 आवेदन आर्थिक सहायता से संबंधित थे जिन्हें स्वीकृत करने के निर्देश दिए गए।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्राप्त शिकायतों व समस्याओं पर सात दिन के भीतर आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित की जाए और की गई कार्यवाही से आवेदक व मुख्यमंत्री कार्यालय को अनिवार्य रूप से अवगत कराया जाए। किसी भी स्तर पर जनता द्वारा की जाने वाली शिकायतों को गम्भीरता से लिया जाए और यथासम्भव राहत पहुंचाने की कोशिश की जाए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आवेदकों द्वारा न केवल अपनी शिकायतें व समस्याएं दर्ज कराई गई हैं बल्कि बहुत से लोगों ने सुझाव भी दिए हैं। इन सभी सुझावों पर गम्भीरता से विचार किया जाएगा और राज्यहित में पाए जाने पर इनको क्रियान्वित भी किया जाएगा।
जनता मिलन कार्यक्रम में प्राप्त शिकायतों में अधिकांशतः सड़क निर्माण, पेयजल, सीवर, छात्रवृत्ति, जलभराव, अतिक्रमण आदि से संबंधित थीं। बड़कोट के संजय थपलियाल के क्षतिग्रस्त सड़क की मरम्मत के आवेदन पर लोक निर्माण विभाग को इसके लिए कार्यवाही करने के निर्देश दिए गए। यमकेश्वर में काफी समय से वन संबंधी आपत्तियों के कारण सड़क का निर्माण रूके होने के संबंध में वन विभाग को इसकी स्टेटस रिपोर्ट देने को कहा गया। सुखबीर बुटोला द्वारा चन्द्रबनी, देहरादून में पानी की समस्या बताए जाने पर पेयजल विभाग को जरूरी कार्यवाही करने के निर्देश दिए गए। त्यूनी के समीप अणु में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बंद होने की शिकायत पर स्वास्थ्य विभाग को इसकी जांच कर रिपोर्ट देने को कहा गया। मुख्यमंत्री ने मदन मोहन नेगी द्वारा आयुष्मान कार्ड नहीं मिलने की शिकायत को गम्भीर बताते हुए स्वास्थ्य विभाग को इस मामले की जांच कर मुख्यमंत्री कार्यालय को अवगत कराने के निर्देश दिए। श्याम सिंह तोमर द्वारा स्कूल बाउंड्री के कारण सम्पर्क मार्ग बंद होने की शिकायत पर शिक्षा विभाग को इसका मौका मुआयना करने को कहा गया। यूनूस द्वारा झगड़े में गलत मेडिकल लगाए जाने की शिकायत पर जांच करने के निर्देश दिए गए। केवल चैहान द्वारा भूटाणु उत्तरकाशी में सड़क की समस्या बताए जाने पर मुख्यमंत्री ने समुचित कार्यवाही के प्रति आश्वस्त किया। विमल द्वारा बताया गया कि वे भूमिहीन हैं परंतु सरकारी कागजों में दिखा दिया गया है कि उन्हें भूमि मिल चुकी है। इस पर मुख्यमंत्री ने जांच के आदेश दिए। बच्चन सिंह नेगी ने शिकायत की कि उनकी जमीन पर किसी ने कब्जा कर लिया है। इस पर एसडीएम को जांच कर तुरंत कार्यवाही करने के निर्देश दिए गए।
इस अवसर पर विधायक गणेश जोशी, मेयर देहरादून सुनील उनियाल गामा, डीएम देहरादून सी.रविशंकर, अपर सचिव मुख्यमंत्री डा. मेहरबान सिंह बिष्ट सहित सभी विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।

सतपाल महाराज ने उत्तराखंड के विकास में केन्द्र का सहयोग मांगा

विज्ञान भवन नई दिल्ली में केन्द्रीय वित्तमंत्री निर्मला सीतारमन की अध्यक्षता में आयोजित “प्री-बजट कंसल्टेशन” संबंधी बैठक में उत्तराखण्ड के पर्यटन, तीर्थाटन एवं संस्कृति मंत्री सतपाल महाराज ने प्रतिभाग किया। बैठक में केबिनेट मंत्री सतपाल महाराज ने प्रदेश की वित्तीय स्थिति एवं अर्थव्यवस्था से संबंधित विषयों पर चर्चा करते हुए कहा कि हरिद्वार में 2021 में आयोजित होने वाले महाकुम्भ के लिए अब लगभग 1 वर्ष 7 माह का ही समय शेष है, जिसके दृष्टिगत कुम्भ मेले के आयोजन से संबंधित स्थायी प्रकृति के कार्यों की स्वीकृतियां प्राथमिकता के आधार पर निर्गत की जानी आवश्यक होगी, ताकि कुम्भ मेले के आयोजन से पूर्व ही माह अक्टूबर/नवम्बर 2020 तक समस्त कार्य पूर्ण कराया जाना सम्भव हो सके। हरिद्वार में आगामी महाकुम्भ मेला का अयोजन माह जनवरी 2021 के प्रथम सप्ताह से प्रारम्भ हो जायेगा। इस महत्वपूर्ण आयोजन के लिये उन्होंने रूपये 5000 करोड़ की वित्तीय सहायता उपलब्ध कराये जाने का अनुरोध किया।
केबिनेट मंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड को 38वें राष्ट्रीय खेल के आयोजन का अवसर प्रदान किया गया है। जिसे वर्ष 2021 में आयोजित किया जाना है। राष्ट्रीय खेलों में 38वें संस्करण के 39 खेल विधाओं में खेल प्रतियोगितायें आयोजित की जायेंगी। खेलों के आयोजन हेतु परिसम्पतियों के निर्माण में समय लगेगा। इसलिए राष्ट्रीय खेलों को राज्य में सफलतापूर्वक आयोजित किये जाने एवं अवस्थापना विकास हेतु रूपये 682 करोड़ की धनराशि वर्ष 2019-20 में उपलब्ध कराई जाये।

सतपाल महाराज ने बताया कि राज्य की दुर्गम भौगोलिक स्थिति के दृष्टिगत निर्माण सामग्री को निर्माण स्थल तक पहुचाने में ढुलान आदि पर अत्याधिक व्यय होने के कारण हिमालयी राज्यों हेतु प्रधानमंत्री आवास योजनान्तर्गत आवास निर्माण हेतु प्रति लाभार्थी रूपये 1.30 लाख को बढ़ाकर प्रति लाभार्थी रूपये 2 लाख की सहायता राशि का प्रावधान किया जाय। साथ ही प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के लाभार्थी परिवार हेतु 30 अतिरिक्त मानव दिवस स्वीकृत कर युगपतिकरण के अन्तर्गत मनरेगा के तहत अकुशल श्रमांश के दिवसों को 95 दिन से बढ़ाकर 125 दिन किया जाये। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी नरेगा में पर्वतीय क्षेत्र होने के कारण उत्तराखण्ड में सामग्री ढुलान अत्यन्त मंहगा होता है, जिससे दूरस्थ क्षेत्रों में पहुचने पर सामग्री की वास्तविक लागत में काफी बढ़ोत्तरी हो जाती है। इस कारण महात्मा गांधी नरेगा अन्तर्गत टिकाऊ प्रवृत्ति के कार्य कराने में कठिनाई होती है। इसलिऐ पर्वतीय राज्यों हेतु श्रम सामग्री अनुपात 60ः40 के बजाय 50ः50 किया जाना गुणवत्तापूर्ण स्थायी परिसम्पत्तियों के निर्माण में सहायक सिद्व होगा।
सतपाल महाराज ने कहा कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अन्तर्गत वर्तमान में योजना के दिशा-निर्देशों के अनुसार पर्वतीय राज्यों में 250 से अधिक आबादी की पात्र बसावटों को ही संयोजित किये जाने का लक्ष्य है, जबकि पर्वतीय राज्य की भौगोलिक परिस्थितियों एवं जनसख्यां के विरल घनत्व को दृष्टिगत रखते हुए योजनान्तर्गत 250 के स्थान पर 150 किया जाय।
सतपाल महाराज ने यह भी सुझाव दिया कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना का नाम प्रधानमंत्री सम्पर्क सड़क योजना रखा जाये जिससे रोपवे सेक्टर में भी इसका लाभ उठाया जा सके क्योंकि गर्मी के दौरान सभी पहाड़ी राज्यों में पर्यटकों की भारी आवाजाही होती है इससे लंबे टै्रफिक जाम और भारी प्रदूषण का खतरा पैदा होता है। इसके अलावा, पहाड़ियों में रोपवे लोगां को माल ढोने तथा परिवहन का बहुत अच्छा साधन हो सकता है जो यात्रा के समय को कम कर सकता है और साथ ही दुर्घटनाओं में भी कमी ला सकता है, उन्होंने भारत सरकार से रोपवे सैक्टर में गौरीकुण्ड से केदारनाथ, नैनीताल रोपवे, गोविन्दघाट से हेमकुण्ड के लिए एक अलग केन्द्र सहायतित योजना शुरू करने का अनुरोध किया।

कैबिनेट मंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड राज्य में वर्तमान में कुल 7797 ग्राम पंचायतें है जिसमें 1599 ग्राम पंचायतों ऐसी हैं जिनके पास अपना कोई भी भवन नहीं है। पंचायत भवन ग्रामीण क्रियाकलापों का महत्वपूर्ण केन्द्र है। भविष्य में ग्राम पंचायतों को ई-पंचायत के रूप में भी विकसित किया जाना है तथा सभी पंचायतों का डिजिटलाईजेशन भी किया जाना है। पंचायतीराज मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा एक पंचायत भवन की लागत रूपये 20 लाख निर्धारित की गयी है। इस प्रकार 1449 पंचायत भवनों पर रू. 28980 लाख की आवश्यकता होगी, जिसे चरणबद्व रूप से तीन चरणों में निर्मित किये जाने का प्रस्ताव है। प्रथम चरण के रूप में वित्तीय वर्ष 2019-20 में 483 पंचायत भवनों का निर्माण का किया जायेगा, जिस पर एक वर्ष में रूपये 20 लाख प्रति पंचायत भवन की दर से 483 पंचायत भवनों के निर्माण हेतु कुल रूपये 9660 लाख की आवश्कता होगी।
उन्होंने कहा कि पहाड़ी राज्यों में जनसंख्या का घनत्व कम होता है तथा क्षेत्रफल ज्यादा है, जहां तक उत्तराखण्ड का सवाल है राज्य से नेपाल तथा चीन की अर्न्तराष्ट्रीय सीमाऐं जुड़ी हुई है, तथा इन क्षेत्रों में अवस्थापना सुविधाओं का विकास अन्य क्षेत्रों के मुकाबले कम हुआ है जिसके कारण यहां से लोगों का पलायन हो रहा है जो कि सुरक्षा की दृष्टि से अनुकूल नहीं है अतः हिमालयी राज्य हेतु सीमान्त क्षेत्र विकास कार्यक्रम के अर्न्तगत भारत सरकार द्वारा दिये जाने वाले आंवटन को बढ़ाया जाये।
केबिनेट मंत्री सतपाल महाराज ने प्रदेश में समग्र शिक्षा योजना में राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा के अन्तर्गत संचालित विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों के वेतन की सम्पूर्ण धनराशि का वहन पूर्व की भांति भारत सरकार एवं राज्य सरकार द्वारा 90ः10 के अनुपात में किये जाने के साथ ही भारत सरकार द्वारा वर्तमान में वृद्वावस्था पेंशन प्रति लाभार्थी रूपये 200 की दर से दिया जा रहा है, जिसे बढ़ाकर अधिकतम रूपये 1000 या कम से कम 500 रूपये किये जाने का भी अनुरोध किया है।
बैठक में केन्द्रीय वित्त और कॉरपोरेट कार्य राज्यमंत्री अनुराग सिंह ठाकुर व अन्य राज्यों के मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री, वित्तमंत्री एवं केन्द्र व राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

उत्तराखंड के पर्वतीय जिलों के लिए विशेष फंड की व्यवस्था होः बलूनी

उत्तराखंड से राज्यसभा सदस्य और भाजपा के राष्ट्रीय मीडिया प्रमुख अनिल बलूनी ने उत्तराखंड में हो रहे भारी पलायन की समस्या के निदान के उद्देश्य से उत्तराखंड के दस पर्वतीय जिलों के लिए आगामी बजट में विशेष फंड के प्रावधान की माग की है। बलूनी ने इस सिलसिले में नई दिल्ली में मंगलवार को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से भेंट की।
सासद बलूनी ने केंद्रीय वित्त मंत्री से भेंट के दौरान कहा कि उत्तराखंड में पलायन के कारण सैकड़ों गाव निर्जन (घोस्ट विलेज) घोषित हो चुके हैं और यह क्रम अब भी तेजी से जारी है। इस भयावह समस्या के समाधान के लिए केंद्र सरकार के सहयोग की आवश्यकता है ताकि मूलभूत सुविधाओं और सामान्य से रोजगार के लिए होने वाले पलायन के उन्मूलन के लिए धरातल पर व्यवहारिक नीति बन सके और ठोस कार्य हो सके। उत्तराखंड के पौड़ी, टिहरी, उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, बागेश्वर, अल्मोड़ा, चंपावत, पिथौरागढ़ तथा नैनीताल जिलों का पर्वतीय क्षेत्र पलायन की समस्या से अत्यधिक ग्रस्त है।
सासद बलूनी ने कहा की आगामी बजट में अगर उत्तराखंड के पर्वतीय जिलों के लिए विशेष फंड की व्यवस्था होती है तो यह राज्य के लिए मील का पत्थर साबित होगा और सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण इस हिमालयी राज्य के लिए जीवनदान भी होगा। उन्होंने कहा कि वह इस क्रम में विभिन्न मंत्रालयों और महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों से संवाद कर इस कड़ी को आगे बढ़ाएंगे। उन्होंने कहा कि अगर ढाचागत अवस्थापना विकास के साथ बेरोजगारी उन्मूलन की नीति बनती है तो वह पलायन रोकने में कारगर होगी। उन्होंने आशा व्यक्त की कि केंद्र सरकार इस विषय में गंभीरता से विचार करेगी।

मौसम विभाग का अलर्ट, तेज आंधी के आसार

अगले 12 घंटों के दौरान प्रदेश के ज्यादातर क्षेत्रों में बारिश होने का अनुमान है। पहाड़ी इलाकों में ओले गिरने और तेज बौछारें पड़ने के आसार हैं। मैदानी इलाकों में 70 किमी की गति से आंधी चल सकती है। इसे देखते हुए मौसम विभाग ने अलर्ट जारी किया है।
मौसम विभाग के अनुसार बुधवार से 12 घंटे तक प्रदेश के ज्यादातर क्षेत्रों में बादल छाये रहने का अनुमान है। अधिकांश इलाकों में गरज-चमक के साथ बारिश की भी संभावना है। पहाड़ी क्षेत्रों में बारिश की संभावना ज्यादा है। राज्य के लगभग सभी पहाड़ी इलाकों में बारिश होगी।
कुछ इलाकों में ओले भी गिर सकते हैं। दूसरी ओर मैदानी इलाकों में 50 से 60 किमी प्रति घंटे तक की रफ्तार से आंधी चलेगी। आंधी की अधिकतम रफ्तार 70 किमी प्रति घंटे तक भी पहुंच सकती है।

बदरीनाथ, हेमकुंड साहिब की चोटियों पर हुई बर्फबारी
राजधानी दून में बादल छाये रहने का अनुमान है। दिनभर में कुछ दौर की बारिश और तेज रफ्तार आंधी चल सकती है। मौसम केंद्र के अनुसार अगले कुछ दिनों में अधिकतम तापमान में दो से तीन डिग्री की कमी हो सकती है। इससे अधिकतम तापमान सामान्य से कम हो जाएगा।
बदरीनाथ धाम और हेमकुंड साहिब की ऊंची चोटियों पर मंगलवार को तड़के बर्फबारी हुई। जबकि निचले क्षेत्रों में बारिश होने से मौसम में ठंडक आ गई है। सोमवार को देर रात बारिश शुरु हो गई थी, जो मंगलवार को सुबह पांच बजे थमी। बदरीनाथ धाम में भी बारिश होने से ठंड बढ़ गई है। मौसम में आए परिवर्तन से स्थानीय लोगों के साथ ही तीर्थयात्रियों को गरमी से राहत मिल गई है।
बारिश के कारण बदरीनाथ हाईवे पर ऑल वेदर रोड परियोजना निर्माण से उड़ रही धूल भी फिलहाल थम गई है। मंगलवार को दिनभर आसमान में बादल छाए रहे। हालांकि शाम पांच बजे धूप खिलने के साथ ही मौसम सामान्य हो गया।

भाजपा की कमेटी देखेगी विस अध्यक्ष और राज्यमंत्री कोठारी का मामला

विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल और गन्ना एवं चीनी विकास बोर्ड के अध्यक्ष भगतराम कोठारी के मध्य उपजे विवाद प्रकरण की भाजपा ने जांच कराने का निर्णय लिया है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट के अनुसार जल्द ही जांच कमेटी घोषित की जाएगी।
विस अध्यक्ष अग्रवाल और दायित्वधारी कोठारी के मध्य तब विवाद हो गया था, जब हाल में ही केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत नमामि गंगे के कार्यों के निरीक्षण को ऋषिकेश पहुंचे थे। इस दौरान चंद्रभागा पुल के नजदीक परिचय कराने को लेकर दोनों के मध्य हुआ विवाद नोकझोंक तक जा पहुंचा। बाद में विस अध्यक्ष अग्रवाल और दायित्वधारी कोठारी ने ऋषिकेश पहुंचे भाजपा के राष्ट्रीय सह महामंत्री संगठन शिवप्रकाश से अलग-अलग मुलाकात की।
अब भाजपा का प्रदेश नेतृत्व भी इस विवाद को लेकर गंभीर हुआ है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट ने कहा कि विस अध्यक्ष और दायित्वधारी के मध्य विवाद के मद्देनजर जांच बैठाई जा रही है। जल्द ही जांच कमेटी गठित की जाएगी। इस बारे में पार्टी के प्रांतीय पदाधिकारियों से विमर्श किया जा रहा है।
गौरतलब है कि कुछ समय से भाजपा विधायकों कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन और देशराज कर्णवाल के मध्य विवाद चला आ रहा है। दोनों विधायकों के मध्य छिड़ी जुबानी जंग ने पार्टी को असहज स्थिति में ला दिया था। सरकार और संगठन के हस्तक्षेप के बाद भी जब बात नहीं बनी तो पार्टी ने प्रकरण की जांच के लिए कमेटी गठित की। यह कमेटी अपनी रिपोर्ट प्रदेश अध्यक्ष भट्ट को सौंप चुकी है, लेकिन अभी कोई निर्णय नहीं लिया गया है। प्रदेश अध्यक्ष भट्ट ने बताया कि जांच रिपोर्ट आधी उन्होंने पढ़ ली है। जल्द ही इस पर फैसला लिया जाएगा।

पलायन आयोग की रिपोर्ट में खुलासा, अल्मोड़ा की रिपोर्ट से पलायन का सच आया सामने

उत्तराखंड के पर्वतीय जनपदों से मूलभूत सुविधाओं के अभाव से लोग पलायन कर रहे हैं। अल्मोड़ा जनपद में वर्ष 2001 से 2011 तक दस सालों में करीब 70 हजार लोग पैतृक गांव से पलायन कर गए। 646 पंचायतों से 16207 लोगों ने स्थायी रूप से गांव छोड़ दिया है। इसका खुलासा पलायन आयोग की रिपोर्ट में हुआ है।
सोमवार को मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की अध्यक्षता में सीएम आवास पर पलायन आयोग की दूसरी बैठक आयोजित की गई। इसमें मुख्यमंत्री ने अल्मोड़ा जनपद की पलायन रिपोर्ट का विमोचन किया। रिपोर्ट के अनुसार पिछले दस सालों में सल्ट, भिकियासैंण, चैखुटिया, स्याल्दे विकासखंड से सबसे ज्यादा लोगों ने पलायन किया है। इन ब्लाकों के कई गांवों में सड़क, पेयजल, बिजली, स्वास्थ्य और आजीविका के साधन नहीं है, जिससे लोग जनपद मुख्यालय और प्रदेश के अन्य शहरी क्षेत्रों में जाकर बस गए हैं।
वर्ष 2001 से 2011 तक जनपद के 1022 ग्राम पंचायतों में 53611 लोगों ने पूर्ण रूप से पलायन नहीं किया है। ये लोग समय-समय पर अपने पैतृक गांव आते हैं। जबकि 646 पंचायतों में 16207 लोगों ने स्थायी रूप से पलायन किया है। अब इन लोगों के दोबारा वापस गांव लौटने की संभावनाएं नहीं हैं। आयोग की रिपोर्ट में कहा गया कि जनपद की 11 विकासखंडों से 7.13 प्रतिशत लोगों ने गांव के नजदीकी शहरी क्षेत्रों में पलायन किया है।
जबकि 13 प्रतिशत ने जनपद मुख्यालय, 32.37 प्रतिशत ने प्रदेश के अन्य जनपदों में, 47.08 प्रतिशत लोग राज्य से बाहर पलायन कर चुके हैं। देश से बाहर पलायन करने वाले की संख्या 0.43 प्रतिशत है। 2011 के बाद जनपद के 80 गांवों में मूलभूत सुविधाओं के अभाव में 50 प्रतिशत आबादी कम हुई है। वहीं, 63 गांवों में सड़क, 11 गांवों में बिजली, 34 गांवों में एक किलोमीटर के दायरे में पेयजल और 71 गांवों में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की सुविधा न होने से 50 प्रतिशत आबादी घटी है।

रिपोर्ट पर एक नजर ….

– 2011 की जनगणना के अनुसार अल्मोड़ा की 6 लाख 22 हजार 506 आबादी
– 89 प्रतिशत आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करती है।
– 3189 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल में फैला है अल्मोड़ा जनपद
– जनपद में रहने वाले परिवारों की संख्या एक लाख 40 हजार 577
– दस वर्षों में शहरी क्षेत्रों की आबादी में 25 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी