मुख्यमंत्री बोले, सीएम हेल्पलाइन में शिकायतकर्ता के पूर्ण रूप से संतुष्ट होने के बाद ही शिकायत क्लोज की जाए

जन शिकायतों के त्वरित निस्तारण के लिए जब तक शिकायतकर्ता पूर्ण रूप से संतुष्ट नहीं हो जाता है, उनकी शिकायत फोर्सली क्लोज न की जाए, यदि कोई अधिकारी ऐसा कर रहे हैं तो उन पर सख्त कारवाई की जाए। यह निर्देश मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सचिवालय में सीएम हेल्पलाइन-1905 की समीक्षा के दौरान अधिकारियों को दिये। इस अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री जन समर्पण दिवस (सहयोग से समाधान की ओर) डिजिटाइजेशन प्रक्रिया द्वारा तहसील दिवस एवं जिलाधिकारी जनता दिवस पोर्टल का शुभारंभ किया। यह पोर्टल सीएम हेल्पलाइन 1905 से कनेक्ट होगा। इससे तहसील दिवस एवं जिलाधिकारी के समक्ष प्रत्येक माह प्राप्त शिकायतों एवं उनमें कितनों का समाधान किया गया इसकी पूरी जानकारी प्राप्त होगी। यह सभी जानकारी डिजिटल माध्यम से प्राप्त होगी। इसके लिए अलग से रजिस्टर मेंटेन करने की आवश्यकता नहीं होगी।
लोक निर्माण विभाग और नगर निगम में एक ही दिन में कई शिकायतों के निस्तारण होने पर मुख्यमंत्री ने सचिव लोक निर्माण विभाग एवं आयुक्त गढ़वाल मण्डल इसकी जॉच करने के निर्देश दिये हैं। मुख्यमंत्री ने सभी उच्चाधिकारियों को निर्देश दिये कि सीएम हेल्पलाईन पर आ रही शिकायतों के सबंध में शिकायतकर्ताओं से वार्ता कर उनका समाधान किया जाए। उन्होंने कहा कि अगली बैठकों में यह भी देखा जायेगा कि कौन अधिकारी शिकायतकर्ताओं से लगातार बातचीत कर रहे हैं और कौन लापरवाही बरत रहे हैं।

सतर्कता अधिष्ठान को मजबूत बनाने के लिए सभी विभाग नोडल अधिकारी नियुक्त करें।

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिये कि सभी विभाग सतर्कता अधिष्ठान को मजबूत बनाने के लिए अपने विभागों में एक-एक नोडल अधिकारी नियुक्त करें। सीएम हेल्पलाइन की पिछले माह हुई बैठक में सतर्कता अधिष्ठान को मजबूत करने के निर्देश दिये थे। इस सबंध में उन्होंने सभी जिलाधिकारियों से इस दिशा में किये जा रहे प्रयासों की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि सीएम हेल्पलाईन 1905 के सफल संचालन के लिए कार्य कर रहे लोगों को और अधिक प्रशिक्षित किया जाए। समय-समय पर विभागीय अधिकारियों को भी प्रशिक्षण दिया जाए।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अधिकारियों को निर्देश दिये जिन शिकायतों के समाधान में अधिक समय लगने की संभावना है। ऐसी शिकायतों पर शिकायतकर्ताओं से बात कर उनको जानकारी दी जाय और कार्य में लेट होने की स्पष्ट वजह भी बताई जाय।

सीएम हेल्पलाइन पर शिकायत करने वाले शिकायतकर्ताओं से मुख्यमंत्री ने फोन से बात कर वस्तुस्थिति जानी।

बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने कुछ शिकायतकर्ताओं से फोन से वार्ता की एवं उनकी समस्याओं की जानकारी ली। कुछ शिकायतों का समाधान किया जा चुका था। जिन समस्याओं का समाधान अभी नहीं हुआ था, मुख्यमंत्री ने सबंधित अधिकारियों को शीघ्र उनका समाधान करने के निर्देश दिये। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर देहरादून के श्री आलोक शर्मा, उत्तरकाशी के राहुल राणा, कमला चौहान, मारथा डेविड, मोहन चन्द्र उप्रेती एवं कुशलपाल सिंह राणा से बातचीत कर उनकी समस्याओं के बारे में जानकारी ली।
बैठक में अपर मुख्य सचिव राधा रतूड़ी, आनन्द बर्द्धन, डीजीपी अशोक कुमार, प्रमुख सचिव आर. के. सुधांशु, सचिव आर. मीनाक्षी सुंदरम, शैलेश बगोली, अरविन्द सिंह ह्यांकी, डॉ. पंकज कुमार पाण्डेय, सचिन कुर्वे, विनय शंकर पाण्डेय, निदेशक आईटीडीए नितिका खण्डेलवाल अपर सचिवगण, विभागीय एचओडी एवं वर्चुअल माध्यम से सभी जिलाधिकारी उपस्थित थे।

हरिद्वार जिले के बाढ़ प्रभावित क्षेत्र आपदाग्रस्त घोषित

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हरिद्वार में जलभराव की स्थिति की समीक्षा के बाद अनेक महत्वपूर्ण घोषणाएं की।
मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि जनपद हरिद्वार में जिन-जिन क्षेत्रों में भी विगत दिनों में भारी वर्षा से जलभराव हुआ है या बाढ़ आयी है, को आपदा क्षेत्र घोषित किया जायेगा।
आपदाग्रस्त क्षेत्रों में आगामी तीन माह तक विद्युत, जल, अन्य सरकारी देय एवं ऋणों की वसूली को स्थगित रखा जायेगा।
आपदाग्रस्त क्षेत्रों में सघनता से तीव्रता से व्यापक सर्वेक्षण कराकर मानकानुसार तत्काल राहत राशि का वितरण सुनिश्चित कराया जायेगा।
भविष्य में इस प्रकार की आपदा की पुनरावृत्ति रोकने एवं बचाव के लिए बाढ़ प्रबन्धन योजना पर कार्य किया जायेगा। जिसमें जल निकासी की व्यापक योजना तैयार कर कार्य कराना जाना एवं आवश्यकतानुसार छोटे पुलियों का निर्माण कराया जाना सम्मिलित है।
भविष्य में बाढ़ के खतरे को कम करने के लिए नदियों के चैनेलाईज कराने का कार्य कराये जाने के कदम उठाये जायेंगे।
आपदाग्रस्त क्षेत्रों में आवश्यकतानुसार स्थायी बाढ़ राहत केन्द्रों का निर्माण कराया जायेगा।

सीएम ने अधिकारियों को दिये जलभराव वाले क्षेत्रों में नजर रखने के निर्देश

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को डामकोठी में जनपद हरिद्वार में हुये जलभराव के सम्बन्ध में राहत एवं बचाव कार्यों की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने उच्चाधिकारियों के साथ इस सम्बन्ध में विचार-विमर्श कर निरंतर स्थिति पर नजर रखने को कहा।
मुख्यमंत्री ने बैठक में पेयजल, स्वास्थ्य, संचार, विद्युत आदि व्यवस्थाओं के सम्बन्ध में विस्तार से जानकारी प्राप्त की तथा निर्देश दिये कि जल भराव वाले क्षेत्रों में सभी व्यवस्थायें सामान्य रूप से संचालित हो, यह सुनिश्चित किया जाए।
मुख्यमंत्री ने जलभराव की वजह से फसलों को हुये नुकसान का आकलन करने के भी निर्देश दिये। उन्होंने किसानों की समस्याओं का त्वरित समाधान किये जाने पर भी ध्यान देने को कहा। मुख्यमंत्री ने कहा कि जलभराव के कारण पशुओं के लिये चारा आदि की पर्याप्त व्यवस्था की जाय तथा चारे का पर्याप्त स्टॉक भी रखा जाये।
बैठक में अतिक्रमण की वजह से भी कई जगह हुये जलभराव के सम्बन्ध में विस्तृत विचार-विमर्श हुआ। इस पर मुख्यमंत्री ने निर्देश दिये कि जहां पर भी अतिक्रमण की वजह से दिक्कतें सामने आ रही हैं, आपदा के अन्तर्गत उससे सख्ती से निपटा जाये।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को बैठक में जिलाधिकारी धीराज सिंह गर्ब्याल ने विगत दिनों जनपद के ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में कुल कितनी बरसात हुई, जिसके कारण जल भराव की स्थिति पैदा हुई, के सम्बन्ध में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि लक्सर, रूड़की आदि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव के कार्यों में एसडीआरएफ, जल पुलिस, राजस्व, फायर ब्रिगेट, पुलिस, विभागीय टीम तथा स्वैच्छिक संगठनों सहित 579 सदस्स्यों की कुल 34 टीमें निरन्तर कार्य कर रही हैं तथा बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य विभाग, स्थानीय निकाय, पंचायती राज विभाग द्वारा इन प्रभावित क्षेत्रों में महामारी फैलने से बचाव हेतु बड़े पैमाने पर कीट नाशक का छिड़काव किया जा रहा है, जो हमारे लिये चुनौती भी है। दवाओं का प्रोक्यूरमेंट हमने कर दिया है। उन्होंने कहा कि बाढ़ प्रभावित संवेदनशील क्षेत्रों में राहत किट, भोजन आदि वितरित किये जा रहे हैं।
जिलाधिकारी ने अवगत करया कि हरिद्वार, रूड़की, लक्सर तथा भगवानपुर के बाढ़ प्रभावित शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में प्रभावित परिवारों को गृह अनुदान, अनुग्रह अनुदान व अहेतुक मद से 860 लाभार्थियों को 36.27 लाख रूपये की आर्थिक सहायता दी जा चुकी है। उन्होंने बताया कि जनपद में जल भराव से 15796 व्यक्ति प्रभावित हुये हैं, जिनमें से कई लोग तो रिश्तेदारों व किराये के मकान में शिफ्ट हुये हैं तथा 81 परिवारों को राहत केन्द्र में शिफ्ट किया गया है।
जिलाधिकारी ने बैठक में बताया कि सबसे ज्यादा नुकसान लोक निर्माण विभाग की 52 सम्पत्तियों को हुआ है, जिनमें सभी जगह कार्य प्रारम्भ कर दिया गया है तथा कार्यदायी सभी संस्थाओं को एडवांस में धनराशि उपलब्ध करा दी गयी है। इसके अतिरिक्त मुख्यमंत्री राहत कोष, स्वयंसेवी संस्थाओं आदि के माध्यम से जल भराव वाले प्रभावित लोगों की पूरी मदद की जा रही है।
बैठक में मुख्यमंत्री को रूड़की विधायक प्रदीप बत्रा, भगवानपुर विधायक ममता राकेश, लक्सर विधायक शहजाद, रानीपुर विधायक आदेश चौहान, पूर्व विधायक लक्सर संजय गुप्ता, जिला पंचायत अध्यक्ष किरण चौधरी, भाजपा रूड़की जिला अध्यक्ष शोभाराम प्रजापति आदि ने अपने-अपने क्षेत्रों की स्थिति से अवगत कराया। इस अवसर पर हरिद्वार नगर विधायक मदन कौशिक, पूर्व कैबिनेट मंत्री यतीश्वरानन्द, भाजपा जिला अध्यक्ष हरिद्वार संदीप गोयल, पूर्व जिला अध्यक्ष डॉ0 जयपाल सिंह सहित सम्बन्धित विभागों के अधिकारीगण उपस्थित रहे।

मुख्यमंत्री ने शोक संतप्त परिजनों को सांत्वना दी, हर संभव मदद का दिलाया भरोसा

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने चमोली हादसे में हुई जनहानि पर गहरा दुःख व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री ने दिवंगत आत्मा की शांति की कामना करते हुए शोक संतप्त परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की है। साथ ही घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की भी कामना की है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी गुरुवार को चमोली पहुंचे। चमोली हादसे में हताहत लोगों के परिजनों से मिलकर मुख्यमंत्री काफी भावुक नजर आए। उन्होंने शोक संतप्त परिजनों को सांत्वना देते हुए हर संभव मदद का भरोसा दिलाया। पुलिस मैदान गोपेश्वर में मुख्यमंत्री ने चमोली हादसे में हताहत होमगार्ड के तीनों जवानों के पार्थिव शरीर पर पुष्पचक्र अर्पित करते हुए नम आंखों से श्रद्धांजलि दी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ये बहुत हृदयविदारक घटना है। हम ईश्वर से प्रार्थना करेंगे कि इस घटना में जो हताहत हुए हैं उन्हें अपने श्री चरणों में स्थान दें और उनके परिजनों को इस दुख को सहन करने की शक्ति प्रदान करें। राज्य सरकार की तरफ से मुआवजा, इलाज आदि से संबंधित सभी व्यवस्थाएं की गई हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि दुर्घटना के कारणों की गहन जांच की जायेगी और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जायेगी।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी चमोली में हुए हादसे में मृतकों के परिजनों से एक-एक कर मिले। उन्होंने सभी को सांत्वना दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि दुःख की इस घड़ी में राज्य सरकार उनके साथ है, सरकार द्वारा इनकी हर संभव मदद की जाएगी।
इस दौरान पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज, स्वास्थ्य मंत्री डा. धन सिंह रावत, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेन्द्र भट्ट, विधायकगण एवं अधिकारीगण मौजूद रहे।

विभाग बच नही पायेंगे अपनी जिम्मेदारी से, धामी सरकार तय करने जा रही जिम्मेदारी

कोटद्वार विधानसभा क्षेत्र के मालन नदी पर बने पुल के क्षतिग्रस्त होने की घटना को राज्य सरकार ने गंभीरता से लिया है। लोनिवि के सचिव पंकज पाण्डेय ने इसकी जांच के आदेश दिये है। लेकिन शासन के सूत्रों की मानें तो मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वर्ष 2010 में बनकर तैयार हुए पुल के बेहद कम समय में टूटने की घटना को बड़ी लापरवाही माना है। मुख्यमंत्री के द्वारा स्वयं पुल की घटना की जानकारी लेने पर शासन में खलबली देखने को मिली है। लगातार सोशल मीडिया में पुल की को लेकर कई सवाल किये गये है। इसमें बेहद गंभीर सवाल पुल के निर्माण में लापरवाही को लेकर किया गया है। कई टेक्निकल खामियां उजागर होने के बाद लोक निर्माण विभाग के इंजीनियरों में हड़ंकंप मचा हुआ है।
गौरतलब है कि कांग्रेस की तिवारी सरकार में स्वीकृत हुआ पुल भाजपा सरकार में बनकर तैयार हुआ था। कांग्रेस के समय स्वर्गीय इंदिरा हृदयेश लोक निर्माण मंत्री रही। उनके कार्यकाल में जमकर पुल और सड़क के निर्माण कार्य में धांधली और भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे लेकिन मुक्कमल कार्रवाई अमल में नही लाई गई। अहम सवाल है कि धामी सरकार मात्र 13 वर्ष में गिर गये पुल को लेकर जिम्मेदारी तय करना चाहती है और हो भी क्यो नही?
आपको याद होगा कि मुख्यमंत्री धामी ने पिछले वर्ष प्रदेशभर के पुलों का ब्यौरा जुटाने के निर्देश दिये थे जो डेंजर जोन में है। लेकिन विभागीय अधिकारियों ने इस ओर कितनी कार्रवाई की अब इस पर भी सवाल उठ रहे है। लोनिवि के सचिव रहे सुधांशु भी इस ओर सुस्त ही रहे। वरना समय रहते इस ओर कार्रवाई कर एक पुल को मात्र 13 वर्ष में ढहने से बचाया जा सकता था।
सूत्रों की मानें तो मुख्यमंत्री धामी जनहित से जुड़़े इन कार्यों में अब विभागीय अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने को लेकर बड़ी कार्य योजना बनाने का मन बना चुके है। मसलन अगर किसी संस्था और अधिकारी की देखरेख में इन निर्माण कार्यों को किया जा रहा है तो वह अपनी जिम्मेदारी से बच नही सकते है। आजतक ऐसी कार्यदायी संस्था और अधिकारियों पर कार्रवाई नही होने से ऐसी घटनाएं लगातार बढ़ती जा रही है। ऐसे में मुख्यमंत्री धामी की अगर इस ओर कार्ययोजना बनाते है तो उत्तराखंड के लिए बेहद कारगर सिद्ध होगी।

मुख्यमंत्री ने किया लक्सर क्षेत्र के जलभराव वाले क्षेत्रों का स्थलीय निरीक्षण

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बृहस्पतिवार को जनपद हरिद्वार की तहसील लक्सर के विभिन्न क्षेत्रों-लक्सर बजार मदारपुर, शाहपुर बस्ती, प्रहलादपुर, हस्तमौली में अतिवृष्टि एवं सोनाली नदी के कारण हुये जलभराव से प्रभावित क्षेत्रों का रेस्क्यू बोट एवं ट्रैक्टर में बैठकर स्थलीय निरीक्षण किया।
मुख्यमंत्री ने प्रभावितों से बातचीत कर उनका हालचाल जाना तथा राहत एवं बचाव कार्यों के सम्बन्ध में अधिकारियों को दिशा-निर्देश दिये। मुख्यमंत्री ने लक्सर क्षेत्र में सोनाली एवं अन्य नदियों से होने वाले जलभराव की स्थिति के प्रभावी रोकथाम के लिये फ्लड मैनेजमेंट प्लान तैयार करने के भी निर्देश दिये।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्थिति पर लगातार नजर बनाए रखने और प्रभावितों को तत्काल राहत पहुंचाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ये सुनिश्चित कर लिया जाय कि प्रभावितों को रहने खाने एवं अन्य आवश्यक सामग्री की पूर्ण उपलब्धता हो। पेयजल के साथ ही बच्चों को दूध की पर्याप्त व्यवस्था रखी जाए। जलभराव वाले क्षेत्रों से पानी की निकासी जल्द की जाए। जल जनित रोगों से बचाव के लिए भी सभी आवश्यक व्यस्थाएं की जाय।
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिये कि बारिश से पेयजल, विद्युत, सड़क एवं अन्य व्यवस्थाएं जो प्रभावित हुयी हैं, उन्हें शीघ्र सुचारू किया जाय। प्रभावित क्षेत्रों से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाने के साथ ही उनके लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाएं।
निरीक्षण के दौरान पूर्व विधायक लक्सर संजय गुप्ता, सचिव मुख्यमंत्री विनय शंकर पाण्डेय, जिलाधिकारी धीराज सिंह गर्ब्याल, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अजय सिंह, मुख्य विकास अधिकारी प्रतीक जैन सहित संबंधित पदाधिकारी एवं अधिकारीगण उपस्थित रहे।

सीएम धामी ने प्रभावितों के लिए सभी जरुरी व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के दिये निर्देश

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सचिवालय स्थित आपदा प्रबंधन कंट्रोल रूम में वरिष्ठ अधिकारियों के साथ प्रदेश में अतिवृष्टि से उत्पन्न स्थिति और आपदा राहत एवं बचाव कार्यों की समीक्षा की।
मुख्यमंत्री ने स्थिति पर लगातार नजर बनाए रखने और प्रभावितों को तत्काल राहत पहुंचाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ये सुनिश्चित कर लिया जाय कि प्रभावितों को रहने खाने एवं अन्य आवश्यक सामग्री की पूर्ण उपलब्धता हो। फूड पैकेट की पर्याप्त उपलब्धता रखी जाए। पेयजल के साथ ही बच्चों को दूध की पर्याप्त व्यवस्था रखी जाए। आवश्यकता पड़ने पर हेलीकॉप्टर से भी खाद्य सामग्री भेजी जाए। जलभराव वाले क्षेत्रों से पानी की निकासी जल्द की जाए। जल जनित रोगों से बचाव के लिए भी सभी आवश्यक व्यस्थाएं की जाय। सभी संबंधित विभाग प्रभावित क्षेत्रों में नुकसान का आकलन कर लें। बारिश से पेयजल, विद्युत, सड़क एवं अन्य व्यवस्थाएं जो प्रभावित हुए हैं, उन्हें शीघ्र सुचारू किया जाय।
सभी विभागीय सचिव अपने अपने विभागों से संबंधित व्यवस्थाएं देखें और अपने जिला स्तरीय अधिकारियों के निरंतर संपर्क में रहें। प्रभावित क्षेत्रों से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाने के साथ ही उनके लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाएं। उत्तर प्रदेश के सिंचाई विभाग से भी लगातार संपर्क में रहें। मुख्यमंत्री ने कहा कि राहत कार्यों के लिए पर्याप्त बजट है। संसाधनों की कमी नहीं आने दी जाएगी।
इस अवसर पर मुख्य सचिव डॉ. एस. एस संधू, अपर मुख्य सचिव राधा रतूड़ी, सचिव आर मीनाक्षी सुंदरम, शैलेश बगोली, सचिव आपदा प्रबन्धन डॉ. रंजीत कुमार सिन्हा, विनय शंकर पांडेय, विभिन्न विभागों के सचिव, अपर सचिव एवं विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं आपदा प्रबंधन विभाग के अधिकारी उपस्थित रहे।

एक फोन कॉल से दूर होगी देहरादून के नागरिकों की समस्याः सीएम

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री कैम्प कार्यालय में ‘अपणि सरकार’ नागरिक सेवाएं आपके द्वार योजना का फ्लैग ऑफ किया। देहरादून के नागरिकों को एक फोन कॉल पर अपणि सरकार पोर्टल की नागरिक सेवाएं उनके द्वार पर उपलब्ध होगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि नागरिकों को उनके घर पर जाकर जन सेवा केन्द्र के माध्यम से सेवाएं उपलब्ध कराये जाने की शुरूआत की गई है, यह सेवा जल्द ही राज्य के अन्य स्थानों पर भी शुरू की जायेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता है की नागरिक सेवाओं का लाभ आम जन को उनके घर पर ही मिल जाए। अभी तक 575 सेवाएं ऑनलाइन रूप से अपणि सरकार पोर्टल पर उपलब्ध करायी जा रही हैं।
वर्तमान में पायलट रूप में यह सेवा देहरादून शहर के 100 वार्डों में नजदीकी सी.एस.सी केंद्र के संचालकों द्वारा उपलब्ध करायी जाएगी। सूचना प्रौद्योगिकी, सुराज व विज्ञान प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत आई.टी.डी.ए ने “डोर स्टेप डिलीवरी” हेतु सी.एस.सी-एस.पी.वी को यह जिम्मेदारी सौंपी है। देहरादून शहर के सी.एस.सी संचालकों को पुलिस वेरिफिकेशन के उपरांत पहचान-पत्र जारी किए गए हैं। इस सेवा का लाभ उठाने के लिए नागरिक 18009110007 टोल फ्री नंबर पर फोन कर सकते हैं। नागरिकों की सुविधानुसार घर पर ही आवेदन लिया जाएगा तथा संबंधित प्रमाण पत्र / अभिलेख घर पर ही उपलब्ध कराया जाएगा।
सचिव शैलेश बगौली ने बताया कि इस सेवा की तीन माह की समीक्षा उपरांत पूरे प्रदेश में इस सेवा को उपलब्ध कराये जाने का लक्ष्य है। भविष्य में दूर दराज क्षेत्रों में निवास करने वाले वरिष्ठ नागरिकों को इस सेवा से विशेष लाभ होगा।
आई.टी.डी.ए. निदेशक नितिका खण्डेलवाल ने जानकारी दी कि सी.एस.सी. द्वारा केंद्र व राज्य की सरकारी सेवाओं के अलावा व्यावसायिक सेवाएँ जैसे बीमा, शिक्षण, बैंकिंग, पेंशन, डिजी पे, टेली-हेल्थ, टेली-लॉ भी नागरिकों को ग्राम स्तर तक उपलब्ध करायी जा रही हैं।
इस अवसर पर विधायक शिव अरोरा, सचिव विनोद कुमार सुमन, अपर निदेशक आई.टी.डी.ए. गिरीश चंद्र गुणवंत, व आईटीडीए एवं सीएससी-एसपीवी उत्तराखण्ड के अधिकारी उपस्थित थे।

मुख्य सचिव ने प्रदेश में बनाई जा रही पार्किंग्स की प्रगति जानीं

मुख्य सचिव डॉ. एस.एस. संधु ने बुधवार को सचिवालय में प्रदेश में बनायी जा रही विभिन्न प्रकार की पार्किंग की प्रगति की समीक्षा की। मुख्य सचिव ने अधिकारियों को पार्किंग निर्माण गतिविधियों में तेजी लाने के निर्देश दिए।
मुख्य सचिव ने कहा कि पर्यटन प्रदेश होने के कारण और लगातार पर्यटन गतिविधियों के बढ़ने से पर्यटकों की संख्या में तेजी से उछाल आया है। इससे प्रदेश के पर्वतीय पर्यटक स्थ्लों में पार्किंग की समस्या भी बढ़ी है। उन्होंने कहा कि पर्यटन स्थलों में आवश्यकता के अनुरूप छोटी-छोटी एवं ज्यादा संख्या में पार्किंग्स बनायी जानी चाहिए। कहा कि प्रदेश के हित में सबसे किफायती पार्किंग रोडसाईड पार्किंग हैं, जिन्हें रोड से 100-200 मीटर नई सड़क काटकर या सड़क को थोड़ा अधिक चौड़ा करके तैयार किया जा सकता है। यदि इसके लिए जगह उपलब्ध न हो तो अन्य प्रकार की पार्किंग्स पर फोकस किए जाने की आवश्यकता है। मुख्य सचिव ने अपर मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन को पार्किंग निर्माण कार्यों की प्रगति की समीक्षा पाक्षिक रूप से किए जाने के निर्देश दिए।
मुख्य सचिव ने कहा कि पार्किंग्स बनाते समय सुरक्षा के प्रबन्धों में किसी प्रकार की लापरवाही न की जाए। उन्होंने कहा कि पार्किंग स्थलों के एंट्री एवं एग्जिट पॉईंट पर डिजाईन में किसी प्रकार की खामियां न हों, जिससे पार्किंग शुरू होने के बाद वह स्थान जाम के लिए नया बोटलनेक न बने। मुख्य सचिव ने टनल पार्किंग की दिशा में भी तेजी से प्रयास किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि टनल पार्किंग पर्वतीय नगरों की जाम की समस्या से निजात दिला सकती है। उन्होंने कैम्पटी में बनायी जा रही प्रदेश की पहली टनल पार्किंग के निर्माण में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इसके निर्माण में तेजी लाने के लिए इसे स्टेट बजट से फंडिंग की जाएगी। उन्होंने टनल पार्किंग में सुरक्षा, पैदल चलने वालों की सुविधा और डिजाईन पर विशेष ध्यान दिए जाने के निर्देश दिए। कहा कि इसकी सफलता के बाद प्रदेश के विभिन्न पर्यटन स्थलों में इस प्रकार की पार्किंग का निर्माण किया जाएगा।
बैठक में बताया गया कि कैटेगरी ‘ए‘ एवं ‘बी‘ में कुल 169 पार्किंग्स चिन्हित की गई है, जिसमें से 113 की डीपीआर शासन को प्राप्त हो गयी हैं।
इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन, प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु एवं सचिव डॉ. पंकज कुमार पाण्डेय सहित अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

कड़ी मशक्त के बाद दमकल कर्मियों ने बुझाई आग, दो बसें जलकर हुई राख

संयुक्त यात्रा बस ट्रांजिट कंपाउंड में एक निजी बस में संदिग्ध परिस्थितियों में आग लग गई। आग की लपटें उठते ही कंपाउंड में अफरा-तफरी मच गई। आग की लपटें उठने से बगल में खड़ी दूसरी निजी बस भी चपेट में आ गई। अग्निशमन कर्मचारियों ने आधे घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। लेकिन तब तक दो बसें जलकर राख हो गई। जबकि पास खड़ी तीसरी बस को आग लगने से बचा लिया गया।
सोमवार दोपहर करीब ढाई बजे संयुक्त यात्रा बस ट्रांजिट कंपाउंड में रिपेयरिंग के दौरान एक बस ने आग पकड़ ली। मरम्मत में जुटे कर्मचारी आग लगते ही भाग खड़े हुए। तेजी से फैलती आग में बस धूं-धूं कर जली, तो उसकी लपटें बगल में खड़ी बस तक पहुंच गई, जिससे वह बस भी जलकर खाक हो गई। बसों में आग लगने से कैंपस में अफरा-तफरी फैल गई। आसपास खड़े लोगों ने तत्काल इसकी सूचना फायर ब्रिगेड को दी। अग्निशमन कर्मचारियों ने आधे घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। गनीमत रही कि पार्किंग में आग सिर्फ तीन बसों तक ही सीमित रही, जबकि बगल में ही दर्जनों की संख्या में और भी बसें खड़ी थी। हादसे में किसी के हताहत होने की अभी तक कोई जानकारी नहीं मिली है। अग्निशमन अधिकारी बीरबल सिंह ने बताया कि यह हादसा प्रथम दृष्टया बस में रिपेयरिंग के दौरान शॉर्ट सर्किट से हुआ। बताया कि बस मालिक हनीफ ने करीब पांच लाख रुपये का नुकसान होना बताया है। फिलहाल विभागीय टीम आग लगने से सही कारणों की जांच में जुटी है।