युवा संवाद में सीएम बोले, युवा शक्ति ही विकसित भारत और विकसित उत्तराखंड की सबसे बड़ी ताकत

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रुड़की में आयोजित युवा संवाद कार्यक्रम में प्रदेश के युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि उत्तराखंड का युवा प्रदेश और राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य का आधार है। उन्होंने कहा कि आज भारत विश्व का सबसे युवा देश है और युवाओं की ऊर्जा, नवाचार तथा प्रतिभा ही विकसित भारत के निर्माण की सबसे बड़ी शक्ति है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में युवाओं को वोट बैंक नहीं, बल्कि विकसित भारत का सबसे सशक्त स्तंभ मानते हुए उनकी शिक्षा, कौशल, नवाचार और स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए अनेक ऐतिहासिक पहल की गई हैं। उन्होंने कहा कि स्टार्टअप इंडिया, स्टैंडअप इंडिया, डिजिटल इंडिया, स्किल इंडिया, खेलो इंडिया तथा प्रधानमंत्री मुद्रा योजना जैसी पहलें युवाओं को आत्मनिर्भर और रोजगार सृजक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य ऐसा उत्तराखंड बनाना है, जहाँ युवाओं को अवसरों के लिए पलायन न करना पड़े, बल्कि उन्हें अपने ही प्रदेश में रोजगार, उद्यम और नवाचार के पर्याप्त अवसर उपलब्ध हों। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना, युवा प्रोत्साहन योजना, दीनदयाल उपाध्याय योजना, एक जनपद-दो उत्पाद योजना तथा श्हाउस ऑफ हिमालयाजश् जैसे प्रयास स्थानीय उत्पादों और युवाओं को राष्ट्रीय एवं वैश्विक पहचान दिला रहे हैं। स्टेट मिलेट मिशन, एप्पल मिशन, कीवी मिशन, नई पर्यटन नीति, होम-स्टे, वेड इन उत्तराखंड और सौर स्वरोजगार जैसी पहलें भी रोजगार के नए अवसर सृजित कर रही हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार की प्रभावी नीतियों के परिणामस्वरूप उत्तराखंड की बेरोजगारी दर में 4.4 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है, जो राष्ट्रीय औसत से बेहतर है। साथ ही नीति आयोग के सतत विकास में उत्तराखंड देश में प्रथम स्थान पर है। उन्होंने कहा कि अब राज्य में रिवर्स माइग्रेशन का सकारात्मक वातावरण बन रहा है और युवा अपने अनुभव एवं कौशल के साथ उत्तराखंड लौटकर स्वरोजगार एवं उद्यमिता को बढ़ावा दे रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार युवाओं के हितों की रक्षा के लिए पूरी प्रतिबद्धता से कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में लागू देश के सबसे सख्त नकल विरोधी कानून के कारण प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित हुई है तथा पिछले साढ़े चार वर्षों में 33 हजार से अधिक युवाओं को निष्पक्ष एवं पारदर्शी प्रक्रिया के माध्यम से सरकारी सेवाओं में नियुक्ति मिली है।

उन्होंने कहा कि प्रदेश में 20 मॉडल कॉलेजों की स्थापना, महिला छात्रावास, आधुनिक आईटी लैब, परीक्षा भवनों का निर्माण तथा उच्च शिक्षा के बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ करने के साथ नए महाविद्यालयों की स्थापना की दिशा में तेजी से कार्य किया जा रहा है। वहीं पिछले साढ़े चार वर्षों में प्रदेश में 20 हजार से अधिक नए उद्योग स्थापित हुए हैं, जिससे रोजगार और निवेश के नए अवसर विकसित हुए हैं।

मुख्यमंत्री ने युवाओं से बड़े लक्ष्य निर्धारित करने, नवाचार को अपनाने तथा आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने का आह्वान करते हुए कहा कि राज्य सरकार प्रत्येक युवा के सपनों को साकार करने के लिए हर कदम पर उनके साथ खड़ी है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि उत्तराखंड का युवा विज्ञान, तकनीक, अनुसंधान और नवाचार के माध्यम से प्रदेश को देश का अग्रणी एवं सर्वश्रेष्ठ राज्य बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने युवा शक्ति संवाद कार्यक्रम में युवाओं से सीधा संवाद किया तथा उनके विभिन्न प्रश्नों का सरल, स्पष्ट एवं सारगर्भित उत्तर दिया। कार्यक्रम में पहला प्रश्न भुनेश गोयल ने किया। उन्होंने युवाओं के सशक्तिकरण, सुरक्षा तथा शासन-प्रशासन में उनकी भागीदारी को लेकर सरकार की योजनाओं के संबंध में जानकारी चाही।

मुख्यमंत्री ने कहा कि रुड़की विज्ञान, अनुसंधान एवं नवाचार की भूमि है। उन्होंने युवा संवाद कार्यक्रम में उपस्थित सभी प्रतिभाशाली युवाओं का स्वागत करते हुए कहा कि राज्य सरकार युवाओं को रोजगार एवं स्वरोजगार से जोड़ने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। स्टार्टअप को प्रोत्साहन एवं वित्तीय सहायता प्रदान की जा रही है तथा विभिन्न स्वरोजगार योजनाओं का प्रभावी संचालन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा लागू किए गए सख्त नकल विरोधी कानून के परिणामस्वरूप भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता आई है और अब तक 33 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी सेवाओं में नियुक्ति प्रदान की जा चुकी है।

रीया वंदना ने सोशल मीडिया के माध्यम से फैल रही अफवाहों एवं भ्रामक सूचनाओं पर सरकार की कार्ययोजना के संबंध में प्रश्न किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज सोशल मीडिया जनसंचार का एक अत्यंत प्रभावी माध्यम बन चुका है। किसी भी सूचना का प्रसार कुछ ही क्षणों में लाखों लोगों तक हो जाता है। पहले लोगों को समाचारों के लिए मुख्य रूप से समाचार पत्रों एवं टेलीविजन पर निर्भर रहना पड़ता था, जबकि आज प्रत्येक व्यक्ति अपनी बात सीधे समाज तक पहुंचा सकता है। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया के दुरुपयोग पर प्रभावी निगरानी के लिए साइबर सेल सक्रिय रूप से कार्य कर रही है तथा अफवाह फैलाने एवं सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने का प्रयास करने वाले लोगों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

सोनालिका ने वर्ष 2027 में आयोजित होने वाले कुंभ मेले की तैयारियों के संबंध में प्रश्न किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार वर्ष 2027 के कुंभ मेले को दिव्य, भव्य, सुरक्षित एवं सुव्यवस्थित बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। इसके लिए भीड़ प्रबंधन, यातायात व्यवस्था, विभिन्न घाटों के निर्माण एवं विस्तारीकरण सहित श्रद्धालुओं की सुरक्षा के व्यापक प्रबंध किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि कुंभ मेले के दौरान आधुनिक तकनीक का उपयोग करते हुए ड्रोन एवं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित निगरानी व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाएगी।

कार्यक्रम के आयोजक गौरव कौशिक ने मुख्यमंत्री का पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत किया तथा सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया।

इस अवसर पर राज्यसभा सांसद कल्पना सैनी, परिवहन मंत्री प्रदीप बत्रा, जिला पंचायत अध्यक्ष किरण चौधरी, भाजपा जिलाध्यक्ष मधु सिंह, रुड़की नगर निगम की महापौर अनीता अग्रवाल, श्यामवीर सैनी, आदेश सैनी, शोभाराम प्रजापति, भाजपा ओबीसी मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष राकेश गिरी, जिलाधिकारी मयूर दीक्षित, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक नवनीत सिंह भुल्लर, संयुक्त मजिस्ट्रेट दीपक रामचंद्र सेठ, अपर जिलाधिकारी जितेंद्र कुमार, पुलिस अधीक्षक (देहात) शेखर सुयाल, एचआरडीए सचिव प्रत्यूष सिंह, उपजिलाधिकारी भगवानपुर देवेंद्र सिंह नेगी सहित बड़ी संख्या में युवा उपस्थित रहे।

देवसंस्कृति विश्वविद्यालय में आयोजित दधीचि अंगदान संकल्प अभियान में केंद्रीय मंत्री, सीएम संग सैकड़ों लोगों ने लिया अंगदान का संकल्प

देवसंस्कृति विश्वविद्यालय, शांतिकुंज हरिद्वार में दधीचि अंगदान संकल्प अभियान के अंतर्गत राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जे.पी. नड्डा की उपस्थिति में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर देशभर से आए विशेषज्ञों, चिकित्सकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं साधकों ने अंगदान के महत्व पर विचार रखे तथा अनेक लोगों ने मानव सेवा के लिए अंगदान का संकल्प लिया।

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जे.पी. नड्डा ने कहा कि अंगदान मानव सेवा का सर्वाेच्च कार्य है, जिसके माध्यम से गंभीर रूप से जरूरतमंद लोगों को नया जीवन प्रदान किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि अंगदान को वैज्ञानिक और आध्यात्मिक दोनों दृष्टियों से समझने की आवश्यकता है। भारत सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ, प्रभावी और जन-केंद्रित बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में स्वास्थ्य क्षेत्र में व्यापक सुधार हुए हैं। अंगदान एवं प्रत्यारोपण व्यवस्था को मजबूत करने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर संस्थागत ढांचे को विकसित किया गया है और राज्यों में भी अंगदान से जुड़े संगठनों को सक्रिय किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि अंगदान के प्रति जागरूकता बढ़ने से देश में अंगदान की संख्या में वृद्धि हुई है और जनभागीदारी से इसे एक व्यापक जनआंदोलन बनाया जा सकता है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि भारत की सनातन संस्कृति त्याग, समर्पण, सेवा और परमार्थ की महान परंपरा पर आधारित रही है। महर्षि दधीचि के त्याग का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि उन्होंने मानवता और धर्म की रक्षा के लिए अपनी अस्थियों तक का दान कर दिया था। इसी प्रकार राजा शिवि द्वारा एक पक्षी की रक्षा के लिए अपने शरीर का अंश अर्पित करने की कथा भारतीय संस्कृति में करुणा और परोपकार की भावना को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि मृत्यु के बाद भी यदि शरीर का कोई अंग किसी जरूरतमंद व्यक्ति को नया जीवन दे सकता है, तो इससे बड़ा मानव कल्याण का कार्य कोई नहीं हो सकता।

मुख्यमंत्री ने कहा कि देश में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार, चिकित्सा ढांचे के विकास और आयुष्मान भारत जैसी योजनाओं के माध्यम से अंतिम व्यक्ति तक स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने के लिए ऐतिहासिक कार्य किए जा रहे हैं। उत्तराखंड में भी स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ बनाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि राज्य में अंगदान और प्रत्यारोपण व्यवस्था को मजबूत करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। इसके लिए सरकारी एवं निजी अस्पतालों, प्रशासन, पुलिस, परिवहन विभाग तथा संबंधित संस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जाएगा। दून मेडिकल कॉलेज में राज्य के प्रथम सरकारी ऊतक प्रत्यारोपण केंद्र के निर्माण सहित अंग प्रत्यारोपण केंद्रों, अंग बैंक और जिला स्तरीय अंगदान केंद्रों के नेटवर्क को विकसित किया जा रहा है, ताकि जरूरतमंदों को समय पर अंग उपलब्ध हो सकें।

मुख्यमंत्री ने गायत्री परिवार द्वारा एक शताब्दी से आध्यात्मिक चेतना, नैतिक मूल्यों और सामाजिक जागरूकता के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों की सराहना की। उन्होंने कहा कि पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य ने आध्यात्मिक चिंतन और वैज्ञानिक दृष्टिकोण को सरल रूप में जन-जन तक पहुंचाने का कार्य किया है। उनका संदेश “हम बदलेंगे तो युग बदलेगा” समाज में सकारात्मक परिवर्तन की प्रेरणा देता है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पण्ड्या ने कहा कि यज्ञ भारतीय संस्कृति का मेरुदण्ड है। यज्ञ केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि त्याग, सहयोग, कर्तव्यबोध और लोकमंगल की भावना को जागृत करने वाली जीवन पद्धति है। उन्होंने कहा कि समाज के कल्याण के लिए अपने समय, श्रम और संसाधनों का समर्पण ही यज्ञ की वास्तविक भावना है।

इससे पूर्व अतिथियों ने दीप प्रज्वलित कर संगोष्ठी का शुभारंभ किया। कार्यक्रम में आपदा प्रबंधन मंत्री मदन कौशिक, रामकृष्ण मिशन के सचिव स्वामी दयामूर्त्यानंद, डॉ. अनिल कुमार, पद्मश्री नीलेश मांडलेवाला, डॉ. विजय धस्माना सहित अनेक विशेषज्ञों ने अंगदान के वैज्ञानिक, सामाजिक एवं कानूनी पहलुओं पर विचार व्यक्त किए। शांतिकुंज के आचार्यों ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ प्रतिभागियों को अंगदान का संकल्प दिलाया।

इस अवसर पर राज्य मंत्री ओमप्रकाश जमदग्नि, प्रो. मीनू सिंह, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी, चिकित्सक, पत्रकार, गणमान्य नागरिक एवं देशभर से आए साधक उपस्थित रहे।

रिस्पना नदी के पुनर्जीवन को मिली नई गति, डीएम ने गठित कराई टास्कफोर्स, 7 दिन में मांगा विस्तृत एक्शन प्लान

जिलाधिकारी डॉ0 आशीष चौहान ने आज ऋषिपर्णा सभागार, कलेक्ट्रेट में रिस्पना नदी के पुनर्जीवन, संरक्षण एवं सौंदर्यीकरण के संबंध में एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित कर संबंधित विभागों के अधिकारियों को प्रभावी कार्यवाही सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। जिलाधिकारी ने कहा कि रिस्पना नदी का पुनर्जीवन केवल सरकारी अभियान नहीं, बल्कि जनसहभागिता से जुड़ा एक व्यापक पर्यावरणीय मिशन है।

बैठक में जिलाधिकारी ने नगर निगम को निर्देशित किया कि रिस्पना नदी के लगभग 15 किलोमीटर क्षेत्र में गिरने वाले सभी नालों एवं गार्बेज प्वाइंट्स का चिन्हीकरण किया जाए। साथ ही संपूर्ण क्षेत्र का ड्रोन सर्वे एवं स्ट्रेचवार सर्वे कराकर प्रत्येक स्थान पर कूड़े की मात्रा, सफाई व्यवस्था तथा आवश्यक कार्ययोजना का विस्तृत प्रस्ताव तैयार कर 07 दिवस के भीतर प्रस्तुत किया जाए।

उन्होंने सिंचाई विभाग को नदी तटों पर घाट निर्माण, सौंदर्यीकरण एवं नदी किनारे विकसित किए जाने वाले स्थलों की विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। लोक निर्माण विभाग को प्रस्तावित एलिवेटेड रोड निर्माण के अंतर्गत नदी क्षेत्र में आने वाले पिलर्स एवं अन्य संरचनाओं का समुचित तकनीकी प्लान प्रस्तुत करने को कहा।

जिलाधिकारी ने मुख्य विकास अधिकारी को रिस्पना नदी के पुनर्जीवन अभियान के लिए विभिन्न विभागों के समन्वय से एक प्रभावी टास्कफोर्स गठित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि नदी में कूड़ा गिरने की समस्या का स्थायी समाधान तभी संभव है जब आमजन के व्यवहार में सकारात्मक परिवर्तन लाया जाए। इसके लिए व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाया जाए तथा स्थानीय नागरिकों, स्वयंसेवी संगठनों एवं विभिन्न संस्थाओं की सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित की जाए।

उन्होंने नगर पालिका मसूरी को निर्देश दिए कि मसूरी क्षेत्र में रिस्पना नदी के अंतर्गत आने वाले हिस्सों में नियमित सफाई व्यवस्था बनाए रखी जाए तथा किसी भी प्रकार का अपशिष्ट नदी में न जाने दिया जाए। वहीं वन विभाग को नदी के पुनरुद्धार एवं पर्यावरण संरक्षण के दृष्टिगत व्यापक वृक्षारोपण एवं हरित पट्टी विकसित करने की विस्तृत योजना तैयार करने के निर्देश दिए।

बैठक में जिलाधिकारी ने कहा कि रिस्पना नदी के पुनर्जीवन के लिए शॉर्ट टर्म एवं लॉन्ग टर्म रणनीति के अनुरूप कार्य किए जाएं। शॉर्ट टर्म योजना के अंतर्गत नदी एवं उसके आसपास जमा कूड़े का तत्काल उठान, गार्बेज प्वाइंट्स का उन्मूलन, नदी में कूड़ा फेंकने पर रोक तथा जनजागरूकता अभियान को प्राथमिकता दी जाए। वहीं लॉन्ग टर्म योजना के तहत घाट निर्माण, नदी तटों का सौंदर्यीकरण, हरित विकास, आधारभूत संरचनाओं का विकास तथा नदी संरक्षण के लिए स्थायी एवं समग्र कार्ययोजना तैयार कर चरणबद्ध रूप से क्रियान्वित किया जाए। उन्होंने सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ कार्य पूर्ण करने के निर्देश देते हुए कहा कि रिस्पना नदी का पुनर्जीवन देहरादून की पर्यावरणीय धरोहर के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है, जिसे मिशन मोड में आगे बढ़ाया जाएगा।

बैठक में मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह, प्रभागीय वनाधिकारी नीरज शर्मा, नगर मजिस्टेªट आशीष तिवारी, नगर निगम, सिंचाई विभाग, लोक निर्माण विभाग, वन विभाग, नगर पालिका मसूरी तथा अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

रूद्रपुर में 369.66 करोड़ रूपए की विकास योजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास, किसानों के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं

गांधी मैदान, रुद्रपुर में कृषि विभाग द्वारा आयोजित खेत बचाओ अभियान कार्यक्रम का शुभारंभ केंद्रीय कृषि एवं कृषक कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, कृषि एवं कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी तथा जनपद प्रभारी मंत्री एवं परिवहन एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री प्रदीप बत्रा ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया।

इस अवसर पर ₹46.32 करोड़ की लागत से निर्मित 9 विकास कार्यों का लोकार्पण तथा ₹323.34 करोड़ की लागत के 32 विकास कार्यों का शिलान्यास किया गया। इस प्रकार कुल ₹369.66 करोड़ की विकास योजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास किया गया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केन्द्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि जब खेत बचेंगे तो जमीन बचेगी, जमीन बचेगी तो पृथ्वी बचेगी और पृथ्वी बचेगी तो जीवन सुरक्षित रहेगा। उन्होंने किसानों से मृदा संरक्षण, संतुलित उर्वरक उपयोग तथा प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण का आह्वान करते हुए कहा कि भूमि केवल उत्पादन का माध्यम नहीं, बल्कि हमारी धरती माता है, जिसका संरक्षण हम सभी का दायित्व है। उन्होंने कहा कि कृषि मंत्री का दायित्व किसानों के प्रथम सेवक के रूप में कार्य करना है तथा किसानों की सेवा ही उनकी सर्वाेच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत आज चावल उत्पादन में विश्व में प्रथम स्थान पर है तथा कृषि क्षेत्र में निरंतर नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है।

केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि जलवायु परिवर्तन वर्तमान समय की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है, किंतु प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में देश प्रत्येक चुनौती का सफलतापूर्वक सामना करेगा। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड कृषि एवं बागवानी के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है और निकट भविष्य में हॉर्टिकल्चर हब के रूप में नई पहचान स्थापित करेगा। इस दिशा में भारत सरकार हरसंभव सहयोग प्रदान करेगी।

केंद्रीय मंत्री ने घोषणा करते हुए कहा कि सेब, अखरोट एवं बादाम सहित उच्च गुणवत्ता वाले फलदार पौधों के उत्पादन हेतु मुक्तेश्वर में ₹100 करोड़ की लागत से क्लीन प्लांट सेंटर स्थापित किया जाएगा। बड़ी नर्सरी स्थापित करने वालों को ₹4 करोड़ तथा छोटी नर्सरी स्थापित करने वालों को ₹2 करोड़ तक की सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। उन्होंने बताया कि चौबटिया (अल्मोड़ा) में ₹15 करोड़ की लागत से सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किया जाएगा। इसके अतिरिक्त न्यूजीलैंड के सहयोग से उत्तराखंड में कीवी उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए ₹15 करोड़ की विशेष कार्ययोजना तैयार की जा रही है।

उन्होंने कहा कि जंगली जानवरों से फसलों की सुरक्षा के लिए घेरबाड़ (फेंसिंग) कार्य हेतु ₹65 करोड़ उपलब्ध कराए जाएंगे। साथ ही प्रदेश में ऑटोमैटिक वेदर स्टेशन स्थापित करने के लिए ₹104 करोड़ की धनराशि स्वीकृत की जा रही है, जिससे किसानों को मौसम की सटीक जानकारी समय पर उपलब्ध हो सकेगी तथा प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का लाभ और अधिक प्रभावी ढंग से मिल सकेगा।

केंद्रीय कृषि मंत्री चौहान ने किसानों से प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का अधिकाधिक लाभ लेने तथा मृदा परीक्षण के आधार पर ही उर्वरकों का संतुलित उपयोग करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक एवं जैविक खेती को बढ़ावा देकर भूमि की उर्वरा शक्ति को संरक्षित किया जा सकता है तथा आने वाली पीढ़ियों के लिए उपजाऊ भूमि सुरक्षित रखी जा सकती है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि स्वस्थ किसान, स्वस्थ मिट्टी तथा स्वस्थ कृषि व्यवस्था ही विकसित भारत और विकसित उत्तराखंड की सशक्त नींव है। उन्होंने कहा कि ष्खेत बचाओ अभियानष् केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य का जनआंदोलन है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने कृषि क्षेत्र को सशक्त बनाने के लिए अनेक ऐतिहासिक निर्णय लिए हैं।प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, प्राकृतिक खेती, कृषि अवसंरचना तथा डिजिटल कृषि मिशन जैसी योजनाओं से किसानों को व्यापक लाभ मिल रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि किसान देश की खाद्य सुरक्षा एवं अर्थव्यवस्था की आधारशिला हैं। यदि मिट्टी का स्वास्थ्य प्रभावित होगा तो कृषि उत्पादन के साथ-साथ मानव स्वास्थ्य पर भी गंभीर प्रभाव पड़ेगा। इसलिए किसानों को नियमित मृदा परीक्षण कराकर वैज्ञानिक सलाह के अनुसार उर्वरकों का उपयोग करना चाहिए तथा प्राकृतिक एवं जैविक खेती को अपनाना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार किसानों को ₹3 लाख तक का ब्याजमुक्त कृषि ऋण उपलब्ध करा रही है। नहरों से सिंचाई की सुविधा निःशुल्क प्रदान की जा रही है तथा फार्म मशीनरी बैंक योजना के अंतर्गत कृषि यंत्रों पर 80 प्रतिशत तक अनुदान दिया जा रहा है।पर्वतीय क्षेत्रों में वर्षा आधारित खेती को सशक्त बनाने के लिए रेनफेड फार्मिंग परियोजना भी स्वीकृत की गई है।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार फल, सब्जी एवं बागवानी उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन कर रही है। पॉलीहाउस, कोल्ड स्टोरेज, कोल्ड चेन, सीए स्टोरेज तथा मेगा फूड पार्क जैसी आधुनिक सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है, जिससे किसानों को अपनी उपज का बेहतर मूल्य प्राप्त हो सके। स्थानीय कृषि उत्पादों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजार उपलब्ध कराने के लिए भी निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार योजनाएं एवं संसाधन उपलब्ध करा सकती है, किंतु कृषि क्षेत्र में स्थायी परिवर्तन किसानों की सक्रिय भागीदारी से ही संभव है। उन्होंने किसानों से मिट्टी के स्वास्थ्य की रक्षा करने, प्राकृतिक खेती अपनाने तथा आने वाली पीढ़ियों के लिए उपजाऊ भूमि का संरक्षण करने का संकल्प लेने का आह्वान किया।

कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने सभी अतिथियों एवं किसानों का स्वागत करते हुए घेरबाड़ के लिए ₹65 करोड़, जैविक खेती के लिए ₹10 करोड़ की सहायता उपलब्ध कराने तथा मंडुवा एवं झंगोरा के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) घोषित करने का अनुरोध किया।

कार्यक्रम में सांसद अजय भट्ट, विधायक शिव अरोरा, त्रिलोक सिंह चीमा, बंशीधर भगत, जिला पंचायत अध्यक्ष अजय मौर्य, मेयर विकास शर्मा, दीपक बाली, दर्जा मंत्री अनिल कपूर डब्बू, हुकम सिंह कुंवर, रणजीत सिंह नामधारी, उत्तम दत्ता, जिलाध्यक्ष कमल जिंदल, मनोज पाल, सचिव डॉ. एस.एन. पांडे, जिलाधिकारी नितिन सिंह भदौरिया, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अजय गणपति, मुख्य विकास अधिकारी दिवेश शासनी, अपर जिलाधिकारी कौस्तुभ मिश्रा, पंकज उपाध्याय सहित अनेक जनप्रतिनिधि, अधिकारी, कृषक एवं आमजन उपस्थित रहे।

पंतनगर विश्वविद्यालय परंपरा, आधुनिकता और अनुसंधान का त्रिवेणी संगमः शिवराज चौहान

पंडित गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, पंतनगर में आयोजित दो दिवसीय पूर्व छात्र सम्मेलन का शुभारंभ केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी तथा कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया।

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि वे हरित क्रांति की पावन भूमि पंतनगर में आकर धन्य हुए हैं। उन्होंने कहा कि पंतनगर विश्वविद्यालय भारतीय कृषि के इतिहास का गौरवशाली केंद्र है, जिसने देश को वैज्ञानिक, नीति-निर्माता, कृषि उद्यमी तथा उत्कृष्ट मानव संसाधन प्रदान कर कृषि एवं ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा दी है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन तथा मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड देश ही नहीं, बल्कि विश्व की आध्यात्मिक राजधानी बनने की ओर अग्रसर है।

चौहान ने पंतनगर विश्वविद्यालय को परंपरा, आधुनिकता और अनुसंधान का त्रिवेणी संगम बताते हुए कहा कि देश आज लगभग 377 मिलियन टन खाद्यान्न उत्पादन कर रहा है। देश के अन्न भंडार पूरी तरह भरे हुए हैं तथा चावल उत्पादन में भारत, चीन को पीछे छोड़कर विश्व में प्रथम स्थान पर पहुंच चुका है। उन्होंने कहा कि गेहूं का उत्पादन भी अधिशेष है तथा भारतीय गेहूं एवं बासमती चावल की मांग विश्वभर में लगातार बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि इस उपलब्धि में पंतनगर विश्वविद्यालय का योगदान अतुलनीय है और इसलिए वे इस पावन भूमि को बार-बार नमन करते हैं।

केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि कृषि मंत्री के रूप में धरातल से जुड़े रहना अत्यंत आवश्यक है और उन्हें सौभाग्य प्राप्त हुआ कि उन्होंने पंतनगर में विद्यार्थियों एवं विशेषज्ञों के साथ संवाद किया। उन्होंने कहा कि उन्होंने केवल विद्यार्थियों से नहीं, बल्कि भारतीय कृषि के भविष्य से संवाद किया है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यहां से शिक्षा प्राप्त करने वाले विद्यार्थी देश और दुनिया में भारत का नाम रोशन करेंगे।

उन्होंने कहा कि वे पंतनगर सिखाने नहीं, बल्कि सीखने आए हैं। पंतनगर विश्वविद्यालय ने केवल डिग्रियां नहीं बांटीं, बल्कि देश को वैज्ञानिक, नीति-निर्माता, उद्योग जगत के नेतृत्वकर्ता तथा कृषि उद्यमी दिए हैं, जिन्होंने भारतीय कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

केंद्रीय मंत्री चौहान ने कहा कि वर्तमान समय में भारतीय कृषि जलवायु परिवर्तन जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना कर रही है। बढ़ता तापमान, गिरता भूजल स्तर, बदलता मौसम, मिट्टी का बिगड़ता स्वास्थ्य तथा रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध प्रयोग जैसी समस्याओं का समाधान वैज्ञानिक अनुसंधान और नवाचार से ही संभव है। उन्होंने कहा कि उत्पादन के क्षेत्र में देश ने नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं, लेकिन भविष्य की चुनौतियों का समाधान खोजने में कृषि वैज्ञानिकों और विश्वविद्यालयों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होगी।

केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में कृषि उत्पादों से संबंधित जितने भी अंतरराष्ट्रीय समझौते किए गए हैं, वे किसानों और राष्ट्रहित को सर्वाेच्च प्राथमिकता में रखकर किए गए हैं। उन्होंने दोहराया कि विकसित भारत के निर्माण का संकल्प तभी साकार होगा, जब कृषि विकसित होगी और किसान समृद्ध होंगे।

पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए केन्द्रीय मंत्री चौहान ने कहा कि वे प्रतिदिन एक पौधा लगाते हैं। उन्होंने सभी से अपील की कि यदि प्रतिदिन पौधा लगाना संभव न हो, तो कम से कम अपने जन्मदिन पर अवश्य एक पौधा लगाएं, क्योंकि पर्यावरण संरक्षण समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पारंपरिक फसलों के संरक्षण पर बल देते हुए फल एवं विविध कृषि उत्पादों के उत्पादन को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताई। साथ ही उन्होंने कृषि उत्पादन से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए विश्वविद्यालय के पूर्व छात्रों एवं विशेषज्ञों की समिति बनाकर ठोस सुझाव देने का आह्वान किया, ताकि उन पर गंभीरता से विचार किया जा सके।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि विकसित उत्तराखंड के निर्माण में विश्वविद्यालयों के पूर्व छात्रों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने पूर्व छात्रों से आह्वान किया कि वे अपने ज्ञान, अनुभव और विशेषज्ञता को राज्य के विकास से जोड़ते हुए कृषि, अनुसंधान, नवाचार, स्टार्टअप और युवाओं के मार्गदर्शन में सक्रिय योगदान दें।

मुख्यमंत्री ने गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, पंतनगर में आयोजित पूर्व छात्र कार्यशाला ब्रेन 3.0 (बूस्टिंग रिसर्च, एकेडमिक, इनोवेशन एंड नेटवर्किंग) को संबोधित करते हुए कहा कि विकसित उत्तराखंड के निर्माण में विश्वविद्यालयों के पूर्व छात्रों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि पंतनगर विश्वविद्यालय केवल एक शिक्षण संस्थान नहीं, बल्कि भारत की हरित क्रांति का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। इस विश्वविद्यालय ने देश को ऐसे वैज्ञानिक, प्रशासक, उद्यमी और कृषि विशेषज्ञ दिए हैं, जिन्होंने राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। उन्होंने कहा कि ष्ब्रेन 3.0ष् केवल एक कार्यशाला नहीं, बल्कि ज्ञान, अनुभव, नवाचार और भविष्य की संभावनाओं को जोड़ने वाला प्रभावी मंच है।
उन्होंने कहा कि किसी भी संस्थान की वास्तविक पहचान उसकी इमारतों से नहीं, बल्कि वहां से निकले विद्यार्थियों की उपलब्धियों से होती है। पूर्व छात्र विश्वविद्यालय की सबसे बड़ी शक्ति और उसकी गौरवशाली परंपरा के सशक्त प्रतिनिधि हैं। उन्होंने कहा कि जीवन में सफलता प्राप्त करना महत्वपूर्ण है, लेकिन उससे भी अधिक महत्वपूर्ण है उस सफलता और अनुभव को समाज तथा आने वाली पीढ़ियों के साथ साझा करना।

मुख्यमंत्री ने पूर्व छात्रों से युवाओं के लिए मेंटरशिप कार्यक्रम चलाने, अनुसंधान कार्यों में सहयोग देने, नवाचार और स्टार्टअप संस्कृति को बढ़ावा देने तथा शिक्षा जगत और उद्योगों के बीच मजबूत सेतु बनने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि आज का युवा केवल रोजगार खोजने वाला नहीं, बल्कि नवाचार और उद्यमिता के माध्यम से परिवर्तन का नेतृत्व करने वाला युवा है। ऐसे में अनुभवी पूर्व छात्रों का मार्गदर्शन युवाओं को नई दिशा और नई ऊंचाइयां प्रदान कर सकता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान समय कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), ड्रोन तकनीक, डेटा एनालिटिक्स, जैव प्रौद्योगिकी और डिजिटल कृषि जैसी आधुनिक तकनीकों का युग है। इन क्षेत्रों में तेजी से हो रहे बदलावों के अनुरूप विश्वविद्यालयों और पूर्व छात्रों को भी अपनी भूमिका और अधिक प्रभावी बनानी होगी।

उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की पर्वतीय कृषि आज छोटे एवं बिखरे खेतों, जंगली जानवरों से फसलों को होने वाले नुकसान, युवाओं के पलायन, सीमित बाजार पहुंच तथा जलवायु परिवर्तन जैसी अनेक चुनौतियों का सामना कर रही है। इन समस्याओं का समाधान केवल सरकारी योजनाओं से नहीं, बल्कि ज्ञान, अनुसंधान, नवाचार और सामूहिक सहभागिता से संभव है। उन्होंने पूर्व छात्रों से आधुनिक कृषि तकनीकों, जैविक एवं प्राकृतिक खेती, कृषि प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन, डिजिटल मार्केटिंग तथा कृषि उद्यमिता के क्षेत्र में किसानों और युवाओं का मार्गदर्शन करने का आह्वान किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में उत्तराखंड समग्र एवं संतुलित विकास की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। राज्य सरकार का लक्ष्य केवल आर्थिक विकास नहीं, बल्कि ऐसा समावेशी विकास है, जिसमें गांव, गरीब, किसान, महिलाएं और युवा सभी समान रूप से सहभागी बनें। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार नई स्टार्टअप नीति, कौशल विकास कार्यक्रमों और नवाचार आधारित पहलों के माध्यम से युवाओं को आगे बढ़ने के अवसर प्रदान कर रही है। विशेष रूप से कृषि, बागवानी, खाद्य प्रसंस्करण, जैविक खेती, ड्रोन तकनीक और कृषि आधारित स्टार्टअप के क्षेत्र में अपार संभावनाएं मौजूद हैं। युवाओं को स्थानीय समस्याओं के समाधान खोजकर अपने नवाचारों को वैश्विक मंच तक पहुंचाना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ष्विकल्प रहित संकल्पष् के मंत्र के साथ विकसित उत्तराखंड के निर्माण के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि पंतनगर विश्वविद्यालय और उसके पूर्व छात्रों का सहयोग इस अभियान को और अधिक गति देगा।

उन्होंने पूर्व छात्रों से आग्रह किया कि वे उत्तराखंड को केवल अपनी जन्मभूमि या कर्मभूमि के रूप में न देखें, बल्कि उसके विकास के प्रति अपनी जिम्मेदारी भी समझें और जहां भी कार्यरत हों, अपने ज्ञान एवं अनुभव का एक हिस्सा उत्तराखंड के विकास के लिए अवश्य समर्पित करें।

मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि पंतनगर विश्वविद्यालय का पूर्व छात्र परिवार आने वाले वर्षों में न केवल विश्वविद्यालय के विकास, बल्कि उत्तराखंड और राष्ट्र निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

इससे पहले, केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान तथा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पंतनगर संग्रहालय एवं स्वयं सहायता समूह की महिलाओं द्वारा लगाए गए स्टॉलों का निरीक्षण किया तथा कृषि विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों से संवाद किया। उन्होंने विद्यार्थियों के साथ धान की फसल की रोपाई भी की। केंद्रीय कृषि मंत्री चौहान ने पंतनगर विश्वविद्यालय परिसर में पौधरोपण भी किया।

कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने हरित क्रांति की जननी पंतनगर विश्वविद्यालय में उपस्थित सभी अतिथियों एवं पूर्व छात्रों का स्वागत एवं अभिनंदन करते हुए कहा कि राज्य गठन के बाद हमारी कृषि भूमि अवश्य कम हुई है, लेकिन कृषि उत्पादन में 3 लाख टन की वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि माननीय मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में प्रदेश का चहुंमुखी विकास हो रहा है। उन्होंने पंतनगर विश्वविद्यालय को हेरिटेज विश्वविद्यालय घोषित किए जाने का अनुरोध किया।

पंतनगर विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. एस. के. कश्यप ने सभी अतिथियों का स्वागत एवं अभिनंदन किया। कार्यक्रम में सांसद अजय भट्ट, विधायक शिव अरोरा, त्रिलोक सिंह चीमा, बंशीधर भगत, दर्जा मंत्री अनिल कपूर डब्बू, हुकम सिंह कुंवर, रणजीत सिंह नामधारी, सचिव डॉ. एस. एन. पांडे, जिलाधिकारी नितिन सिंह भदौरिया, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अजय गणपति, कुलसचिव दीपा विनय सहित अनेक अधिकारी एवं पूर्व छात्र उपस्थित रहे।

मंत्री बहुगुणा की प्रेसवार्ताः पिथौरागढ़ की तीन सहकारी समितियों ने नेपाल को पांच मीट्रिक टन मछलियां की सप्लाई

देहरादून। राज्य निर्माण के बाद पहली बार उत्तराखंड की मछली इंटरनेशनल मार्केट में पहुंची हैं। पिथौरागढ़ जिले की तीन सहकारी समितियों ने राज्य सरकार के सहयोग से नेपाल को पांच मीट्रिक टन मछलियां सप्लाई की हैं। अच्छी खबर ये भी है कि उत्तराखंड आने वाले दिनों में करीब 30 टन मछलियों के निर्यात की तैयारी कर रहा है।

राज्य सचिवालय के मीडिया सेंटर में मत्स्य विकास मंत्री सौरभ बहुगुणा ने प्रेस कॉफ्रेंस में यह जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि पिथौरागढ़ के धारचूला एवं मुनस्यारी क्षेत्र की तीन मत्स्य जीवी सहकारी समितियों ने ये मछलियां तैयार की थीं। कोल्ड-चेन बनाए रखते हुए मछली को गुजरात के वेरावल भेजा गया, जहां प्रसंस्करण के बाद 23 जून 2026 को नेपाल के अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसका सफलतापूर्वक निर्यात किया गया। इससे 33 मत्स्य पालकों को लगभग ₹23.50 लाख की आय प्राप्त हुई है।

कैबिनेेट मंत्री के अनुसार-उत्तराखंड के इस पहले निर्यात को प्रोत्साहित करने हेतु मत्स्य विभाग ने हार्वेस्टिंग, पैकेजिंग एवं परिवहन के लिए ₹5.40 लाख की गैप फंडिंग सहायता प्रदान की। उन्होंने कहा कि दुबई में आयोजित गल्फ फूड एक्सपो के दौरान अंतरराष्ट्रीय खरीदारों एवं हितधारकों से स्थापित संपर्काे का यह सकारात्मक परिणाम है। विभाग अब यूरोप, मध्य-पूर्व तथा दक्षिण-पूर्व एशिया के अन्य बाजारों में भी निर्यात की संभावनाओं पर कार्य कर रहा है। इस क्रम में आने वाले दिनों में करीब 30 टन मछली का निर्यात विदेशों में किए जाने की तैयारी की जा रही है।

धामी सरकार की नीति से सकारात्मक परिवर्तन
-मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और उनकी सरकार ने मत्स्य पालन के क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर खोलने के लिए ठोस कदम उठाए हैं। इस संबंध में धामी सरकार की नीति से सकारात्मक परिवर्तन दिखाई देने लगे हैं। मत्स्य पालन मंत्री सौरभ बहुगुणा के अनुसार-मत्स्य पालकों को विपणन सहायता उपलब्ध कराने हेतु वर्ष 2024 में भारत-तिब्बत सीमा पुलिस के साथ एमओयू किया गया, जिसके अंतर्गत अब तक ₹2.10 करोड़ मूल्य की 45.10 मीट्रिक टन ट्राउट मछली की आपूर्ति की जा चुकी है।

मत्स्य क्षेत्र का दायरा बढ़ा, निरंतर हो रही प्रगति
-राज्य में मत्स्य क्षेत्र निरंतर प्रगति कर रहा है। विभागीय मंत्री सौरभ बहुगुणा ने बताया कि वर्ष 2022 तक जहां राज्य में मात्र 10,011 मत्स्य पालक थे, वहीं अब यह संख्या बढ़कर 15,657 हो गई है। इनमें 3,584 महिला मत्स्य पालक शामिल हैं। मत्स्य उत्पादन वृद्धि दर वर्ष 2012-17 में जहां मात्र दो प्रतिशत थी, वह बढ़कर वर्ष 2022-26 में 11 प्रतिशत हो गई है। वर्ष 2026-27 में राज्य अंतर्गत 11,805 मीट्रिक टन मत्स्य उत्पादन हुआ, जिसका मूल्य लगभग ₹165 करोड़ है।

विभाग का बजट भी बढ़ा, नौकरी के अवसर भी
-श्री बहुगुणा के अनुसार, मत्स्य विभाग का वार्षिक बजट वर्ष 2021-22 में ₹55.76 करोड़ से बढ़ कर वर्ष 2026-27 में ₹261.41 करोड़ हो गया है। पिछले चार वर्षों में मत्स्य पालन क्षेत्र में 5,646 मत्स्य पालकों हेतु स्वरोजगार के अवसर सृजित किए गए। विभाग में 33 नियमित नियुक्तियां की गई हैं।

सरकार की योजनाएं हो रहीं गेम चेंजर साबित
-मत्स्य पालन मंत्री ने कहा कि सरकार के स्तर पर शुरू की गईं नवीन ट्राउट प्रोत्साहन योजना, मुख्यमंत्री मत्स्य संपदा योजना आदि के सकारात्मक परिणाम प्राप्त हो रहे है। मत्स्य क्षेत्र वर्तमान में राज्य की अर्थव्यवस्था के तीव्र गति से विकसित होने वाले प्रमुख क्षेत्रों में से एक बन चुका है। साथ ही, ग्रामीण आजीविका, रोजगार सृजन में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। प्रेस कॉफ्रेंस में निदेशक मत्स्य चंद्र सिंह धर्मशक्तू भी उपस्थित रहे।

राज्य सरकार लोकतंत्र सेनानियों के सम्मान एवं कल्याण के लिए निरंतर कार्य कर रहीः धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने संविधान हत्या दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में लोकतंत्र सेनानियों एवं उनके परिजनों का सम्मान करते हुए कहा कि 25 जून 1975 को लगाया गया आपातकाल भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का एक काला अध्याय था। उन्होंने कहा कि तत्कालीन सरकार द्वारा सत्ता बचाने के लिए नागरिक स्वतंत्रताओं का हनन किया गया, प्रेस की स्वतंत्रता पर अंकुश लगाया गया तथा संविधान की मूल भावना को आघात पहुंचाया गया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि लोकतंत्र सेनानियों के त्याग, साहस और संघर्ष के कारण ही देश में लोकतांत्रिक व्यवस्था पुनः स्थापित हो सकी। उन्होंने सभी लोकतंत्र सेनानियों को नमन करते हुए कहा कि उनका योगदान वर्तमान एवं भावी पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की रक्षा के लिए किए गए उनके संघर्ष को सदैव स्मरण रखा जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत का संविधान प्रत्येक नागरिक को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता एवं लोकतांत्रिक अधिकार प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि आपातकाल के दौरान इन मूल अधिकारों को कुचलने का प्रयास किया गया, किंतु देश की जागरूक जनता ने लोकतांत्रिक माध्यमों से इसका जवाब देते हुए लोकतंत्र की पुनर्स्थापना की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने सेवा, सुशासन एवं गरीब कल्याण को केंद्र में रखकर विकास की नई ऊंचाइयों को प्राप्त किया है। उन्होंने कहा कि अंत्योदय, राष्ट्र प्रथम तथा सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास के मूलमंत्र के आधार पर समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुंचाया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार लोकतंत्र सेनानियों के सम्मान एवं कल्याण के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2023 में लोकतंत्र सेनानियों की सम्मान निधि को 16 हजार रुपये से बढ़ाकर 20 हजार रुपये प्रतिमाह किया गया है। साथ ही, आपातकाल के दौरान जेल गए लोकतंत्र सेनानियों एवं उनके आश्रित जीवनसाथियों को विशेष पहचान-पत्र भी जारी किए गए हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि लोकतंत्र सेनानियों के योगदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने आह्वान किया कि लोकतंत्र की रक्षा, संविधान के सम्मान तथा राष्ट्र प्रथम की भावना को सर्वाेपरि रखते हुए विकसित भारत और श्रेष्ठ उत्तराखंड के निर्माण में सभी अपना योगदान दें। कार्यक्रम में लोकतंत्र सेनानियों को सम्मानित किया गया तथा उनके संघर्ष और योगदान का स्मरण करते हुए कृतज्ञता व्यक्त की गई।

इस अवसर पर राज्यसभा सांसद नरेश बंसल, कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी, खजान दास, विधायक सविता कपूर, उमेश शर्मा काऊ, भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष शैलेन्द्र बिष्ट, भाजपा के प्रदेश महामंत्री कुंदन परिहार, महानगर अध्यक्ष सिद्धार्थ अग्रवाल मौजूद थे।

पीएम आवास शहरी के तहत रूद्रपुर में साकार हो रहा 1872 परिवारों का आशियाने का सपना, जल्द सौंपी जाएंगी चाबियां

गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को सम्मानजनक जीवन देने के संकल्प के साथ उत्तराखंड सरकार और भारत सरकार मिलकर एक ऐसी आवासीय परियोजना को अंतिम रूप दे रही हैं, जो हजारों लोगों के जीवन में बड़ा बदलाव लाने वाली है। प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के अंतर्गत रुद्रपुर के ग्राम बागवाला में 1872 ईडब्ल्यूएस (आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग) आवासों का निर्माण कार्य लगभग पूरा हो चुका है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दिशा-निर्देशों के अनुरूप सचिव आवास डॉ. आर. राजेश कुमार की सतत निगरानी में विकसित यह परियोजना राज्य में गरीब परिवारों के लिए सुरक्षित और आधुनिक आवास उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है। जिला स्तरीय विकास प्राधिकरण (उधमसिंह नगर) द्वारा संचालित इस महत्वाकांक्षी योजना का उद्देश्य ऐसे परिवारों को अपना घर उपलब्ध कराना है, जिनके पास अब तक पक्का मकान नहीं है। परियोजना के पूर्ण होने के बाद हजारों लोगों का वर्षों पुराना सपना साकार होने जा रहा है।

गरीब परिवारों के लिए उम्मीद की नई बस्ती
‘अपना घर, अपना स्वाभिमान’ की भावना के साथ तैयार की गई इस परियोजना में कुल 1872 आवासों का निर्माण किया गया है। इनमें से 832 फ्लैट पूरी तरह तैयार हो चुके हैं, जबकि 512 अतिरिक्त फ्लैटों में अंतिम चरण के छोटे-मोटे कार्य तेजी से चल रहे हैं। सरकार की योजना शीघ्र ही परियोजना का लोकार्पण कर लाभार्थियों को उनके नए घरों की चाबियां सौंपने की है। सबसे बड़ी बात यह है कि छह लाख रुपये लागत वाले इन आधुनिक फ्लैटों के लिए लाभार्थी को मात्र तीन लाख रुपये ही देने होंगे। शेष राशि भारत सरकार और उत्तराखंड सरकार द्वारा डेढ़-डेढ़ लाख रुपये की सब्सिडी के रूप में वहन की जाएगी। इससे सीमित आय वाले परिवारों को भी सम्मानजनक आवास प्राप्त करने का अवसर मिलेगा।

आधुनिक सुविधाओं से लैस आवासीय परिसर
करीब 6.0281 हेक्टेयर भूमि पर विकसित इस आवासीय परियोजना का निर्माण क्षेत्रफल लगभग 39,220 वर्ग मीटर है। योजना में कुल 23 बहुमंजिला आवासीय ब्लॉक बनाए गए हैं, जिनमें आधुनिक शहरी सुविधाओं का विशेष ध्यान रखा गया है। प्रत्येक फ्लैट में एक बेडरूम, ड्राइंग रूम, किचन, टॉयलेट, बाथरूम और बरामदा उपलब्ध कराया गया है। लगभग 28 वर्ग मीटर क्षेत्रफल वाले इन आवासों को इस प्रकार डिजाइन किया गया है कि छोटे परिवारों को पर्याप्त सुविधा और बेहतर जीवन स्तर मिल सके। परियोजना की विशेषता यह है कि सभी भवन भूकंपरोधी तकनीक से निर्मित किए गए हैं। इसके साथ ही चौड़ी सड़कों, पर्याप्त पार्किंग, पेयजल, विद्युत आपूर्ति और स्वच्छ वातावरण की व्यवस्था भी सुनिश्चित की गई है।

पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास पर विशेष जोर
बागवाला आवासीय परियोजना को केवल मकानों का समूह नहीं, बल्कि एक आधुनिक और टिकाऊ आवासीय परिसर के रूप में विकसित किया गया है। परिसर में वर्षा जल संचयन (रेन वाटर हार्वेस्टिंग), सीवरेज सिस्टम और अत्याधुनिक एसटीपी (सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट) की व्यवस्था की गई है।परियोजना में हरे-भरे पार्क, बच्चों के लिए सुरक्षित खेल क्षेत्र और सौंदर्यीकरण के व्यापक कार्य भी पूरे किए जा चुके हैं। हॉर्टिकल्चर का कार्य पूर्ण होने से परिसर का वातावरण आकर्षक और पर्यावरण अनुकूल बन गया है।

बेहतर कनेक्टिविटी से बढ़ेगी सुविधा
आवासीय परिसर का स्थान भी इसकी सबसे बड़ी विशेषताओं में शामिल है। बागवाला स्थित यह परियोजना मुख्य बाजार और प्रमुख मार्ग से लगभग तीन किलोमीटर की दूरी पर है। बस स्टेशन छह किलोमीटर और रेलवे स्टेशन आठ किलोमीटर दूर स्थित है। बेहतर सड़क संपर्क और शहर के प्रमुख क्षेत्रों से नजदीकी के कारण यहां रहने वाले परिवारों को शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और अन्य आवश्यक सुविधाओं तक आसानी से पहुंच मिल सकेगी।

पारदर्शी होगी आवंटन प्रक्रिया
सरकार ने आवास आवंटन प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाने का निर्णय लिया है। पात्र लाभार्थियों का चयन कंप्यूटर आधारित रैंडमाइजेशन लॉटरी प्रणाली के माध्यम से किया जाएगा। आवेदन के लिए आवेदक का प्रधानमंत्री आवास योजना के एमआईएस पोर्टल पर पंजीकृत होना आवश्यक है। साथ ही आवेदक को 17 जून 2015 से पूर्व का उत्तराखंड निवासी होना चाहिए तथा उसकी वार्षिक आय तीन लाख रुपये या उससे कम होनी चाहिए। आवेदक या उसके परिवार के किसी सदस्य के नाम देश में कहीं भी पक्का मकान नहीं होना चाहिए। मात्र पांच हजार रुपये जमा कर आवेदन प्रक्रिया शुरू की जा सकती है। शेष राशि के भुगतान के लिए बैंकों के माध्यम से ऋण सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी।

सुरक्षा और गुणवत्ता के मानकों पर खरा परिसर
परियोजना में सुरक्षा और गुणवत्ता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। परिसर में आरसीसी बाउंड्री वॉल और मुख्य प्रवेश द्वार का निर्माण पूरा हो चुका है। सभी ब्लॉकों में विद्युत कार्य पूर्ण कर लिए गए हैं तथा यूपीसीएल द्वारा इलेक्ट्रिकल सेफ्टी जांच भी पूरी की जा चुकी है। इसके अलावा फायर डिपार्टमेंट द्वारा फायर फाइटिंग सिस्टम का सफल परीक्षण किया जा चुका है। जलापूर्ति व्यवस्था के लिए अंडरग्राउंड टैंक और ओवरहेड टैंक स्थापित किए गए हैं, जबकि एसटीपी भी परीक्षण चरण में पहुंच चुका है।

धामी सरकार की समावेशी विकास सोच का उदाहरण
प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत विकसित बागवाला परियोजना उत्तराखंड में समावेशी विकास और सामाजिक सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार लगातार ऐसी योजनाओं को गति दे रही है, जिनका सीधा लाभ आम नागरिकों और विशेष रूप से आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को मिल रहा है। सचिव आवास डॉ. आर. राजेश कुमार की निगरानी में तेजी से आगे बढ़ी यह परियोजना अब अपने अंतिम चरण में है। आने वाले दिनों में जब हजारों परिवार अपने नए घरों में प्रवेश करेंगे, तब यह केवल मकानों का हस्तांतरण नहीं होगा, बल्कि आत्मसम्मान, सुरक्षा और बेहतर भविष्य की एक नई शुरुआत होगी। बागवाला की यह आवासीय बस्ती उत्तराखंड में गरीब परिवारों के जीवन स्तर को बदलने वाली एक नई पहचान बनने जा रही है।

सचिव आवास डॉ. आर. राजेश कुमार का बयान
सचिव आवास एवं आवास आयुक्त डॉ. आर. राजेश कुमार ने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के अंतर्गत रुद्रपुर के बागवाला में विकसित की गई यह परियोजना आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने वाली है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के मार्गदर्शन में राज्य सरकार प्रत्येक पात्र परिवार को सम्मानजनक आवास उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। परियोजना में गुणवत्ता, सुरक्षा और आधुनिक सुविधाओं का विशेष ध्यान रखा गया है। सभी कार्य निर्धारित मानकों के अनुरूप पूरे किए गए हैं। शीघ्र ही पात्र लाभार्थियों को आवासों का आवंटन कर चाबियां सौंपी जाएंगी, जिससे हजारों परिवारों का अपने घर का सपना साकार होगा।

ई ऑफिस प्रणाली को प्रभावी बनाने को दून जनपद में हुआ प्रशिक्षण कार्यक्रम

जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान के निर्देशों के अनुपालन में जनपद देहरादून के समस्त कार्यालयों में शासकीय कार्यों का संचालन पूर्णतः ई-ऑफिस प्रणाली के माध्यम से सुनिश्चित किए जाने की दिशा में कार्यवाही तेज कर दी गई है। इसी क्रम में आज एनआईसी सभागार, कलेक्ट्रेट देहरादून में ई-ऑफिस कार्यप्रणाली के सफल क्रियान्वयन हेतु प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

प्रशिक्षण कार्यक्रम में विभिन्न विभागों के अधिकारियों एवं कर्मचारियों को ई-ऑफिस प्रणाली के संचालन, फाइल प्रबंधन, पत्राचार, नोटशीट तैयार करने, फाइलों के ऑनलाइन अग्रसारण, डिजिटलीकरण एवं अन्य महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं की विस्तृत जानकारी प्रदान की गई। प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य कार्यालयी कार्यों को अधिक पारदर्शी, समयबद्ध, कागजरहित एवं प्रभावी बनाना है।

जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने निर्देश दिए हैं कि जनपद के सभी विभागों में शासकीय कार्यों का निष्पादन ई-ऑफिस प्लेटफॉर्म के माध्यम से किया जाना सुनिश्चित किया जा रहा है। इसी के दृष्टिगत अधिकारियों एवं कर्मचारियों की क्षमता वृद्धि तथा तकनीकी दक्षता विकसित करने के लिए यह प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया।

प्रशिक्षण सत्र में जिला सूचना विज्ञान अधिकारी (छप्ब्) अंकुश पाण्डेय एवं ई-डिस्ट्रिक्ट मैनेजर हरेंद्र शर्मा द्वारा प्रतिभागियों को वर्चुअल एवं फिजिकल माध्यम से प्रशिक्षण प्रदान किया गया। उन्होंने ई-ऑफिस पोर्टल पर लॉगिन प्रक्रिया, ई-फाइल निर्माण, दस्तावेज अपलोड, डिजिटल हस्ताक्षर, फाइल ट्रैकिंग तथा ऑनलाइन अनुमोदन प्रक्रिया का व्यवहारिक प्रदर्शन कर प्रतिभागियों की जिज्ञासाओं का समाधान भी किया।

प्रशिक्षकों ने बताया कि ई-ऑफिस प्रणाली के माध्यम से कार्यों के निष्पादन से न केवल कार्यालयों में कार्य संस्कृति अधिक सुव्यवस्थित होगी, बल्कि निर्णय प्रक्रिया में भी तेजी आएगी तथा अभिलेखों का सुरक्षित एवं सुगम रख-रखाव सुनिश्चित होगा। उन्होंने सभी विभागों से अपेक्षा की कि वे निर्धारित समयावधि में ई-ऑफिस प्रणाली को पूर्ण रूप से अपनाते हुए शासन की मंशा के अनुरूप डिजिटल प्रशासन को मजबूत करें।

प्रशिक्षण कार्यक्रम में विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं कर्मचारी वर्चुअल तथा प्रत्यक्ष रूप से जुड़े रहे तथा ई-ऑफिस प्रणाली के प्रभावी संचालन हेतु आवश्यक तकनीकी जानकारी प्राप्त की। जिला प्रशासन द्वारा आगामी दिनों में भी आवश्यकता अनुसार ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, ताकि जनपद के सभी कार्यालयों में ई-ऑफिस प्रणाली का शत-प्रतिशत क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा सके।

विदेश रोजगार प्रकोष्ठ से रोजगार पाई सपना राणा ने सीएम धामी से की मुलाकात

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुख्यमंत्री आवास में सपना राणा ने मुलाकात की। सपना राणा द्वारा राज्य सरकार की मुख्यमंत्री कौशल उन्नयन एवं वैश्विक रोजगार योजना के अन्तर्गत जर्मन भाषा का प्रशिक्षण प्राप्त कर भाषा परीक्षा उर्तीण की गई, जिसके उपरान्त उनको जर्मनी के हैमबर्ग शहर के शॉन क्लीनिक हॉस्पिटल में 3060 यूरो (₹ 3,30,000) प्रतिमाह के वेतन पर नियुक्ति प्राप्त हुई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार की मुख्यमंत्री कौशल उन्नयन एवं वैश्विक रोजगार योजना के अन्तर्गत कौशल विकास एवं सेवायोजन विभाग के अन्तर्गत गठित विदेश रोजगार प्रकोष्ठ द्वारा अन्तराष्ट्रीय स्तर पर उपलब्ध रोजगार के अवसरों से राज्य के युवाओं को जोड़े जाने हेतु निरन्तर प्रयास किए जा रहे हैं। वर्तमान में विदेश रोजगार प्रकोष्ठ द्वारा राज्य के युवाओं को जापान एवं जर्मनी में सेवायोजित किये जाने हेतु भाषा प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है। अब तक करीब 65 युवाओं को जापान में सेवायोजित किया जा चुका है।

कैबिनेट मंत्री सौरभ बहुगुणा ने बताया कि जर्मनी में नर्सिंग क्षेत्र में युवाओं हेतु रोजगार के अवसर उपलब्ध है। जिसके दृष्टिगत प्रकोष्ठ द्वारा जर्मन भाषा का प्रशिक्षण संचालित किया जा रहा है। इसी प्रशिक्षण को प्राप्त करने के उपरान्त टिहरी गढवाल की नर्सिंग प्रशिक्षित युवा महिला सपना राणा का जर्मनी में नर्स के रूप में चयन हुआ है। सुश्री सपना द्वारा अपनी स्कूली शिक्षा जवाहर नवोदय विद्यालय पोखाल टिहरी गढवाल से तथा नर्सिंग की शिक्षा स्टेट नर्सिंग कॉलेज देहरादून से प्राप्त की गई। सपना द्वारा राज्य सरकार की मुख्यमंत्री कौशल उन्नयन एवं वैश्विक रोजगार योजना के अन्तर्गत जर्मन भाषा का प्रशिक्षण प्राप्त कर जर्मनी के हैमबर्ग शहर के शॉन क्लीनिक हॉस्पिटल में नियुक्ति प्राप्त हुई है।

इस अवसर पर सचिव सी. रविशंकर भी मौजूद रहे।