नए संभावित स्थलों की पहचान कर वहां आवश्यक सुविधाओं, इवेंट्स एवं पर्यटन उत्पादों के विकास की समग्र योजना की जाए तैयार

उत्तराखण्ड में शीतकालीन पर्यटन को नई गति देने और राज्य के पर्यटन स्थलों को वर्षभर पर्यटकों के लिए आकर्षक बनाने के उद्देश्य से मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन की अध्यक्षता में सचिव पर्यटन के साथ बैठक आयोजित की गई। मुख्य सचिव ने कहा कि उत्तराखण्ड को वर्षभर पर्यटन का प्रमुख गंतव्य बनाने के लिए नए डेस्टिनेशन, नए पर्यटन उत्पाद और स्थानीय सहभागिता पर विशेष फोकस किया जाए, ताकि पर्यटन का लाभ राज्य के दूरस्थ क्षेत्रों और स्थानीय समुदायों तक भी प्रभावी रूप से पहुंच सके। बैठक में राज्य में विंटर टूरिज्म की संभावनाओं, नए पर्यटन स्थलों के विकास तथा पर्यटन गतिविधियों के विस्तार को लेकर विस्तृत चर्चा की गई।

मुख्य सचिव ने कहा कि उत्तराखण्ड में पर्यटन को केवल कुछ पारंपरिक एवं अधिक पर्यटक दबाव वाले स्थलों तक सीमित न रखते हुए नए डेस्टिनेशन और पर्यटन सर्किट विकसित किए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि नैनीताल एवं मसूरी जैसे प्रमुख स्थलों पर पर्यटकों के दबाव को कम करने के लिए नए एवं कम ज्ञात पर्यटन स्थलों को विकसित कर उन्हें प्रभावी ढंग से प्रचारित किया जाए।

मुख्य सचिव ने कहा कि जीएमवीएन, केएमवीएन एवं पर्यटन से जुड़े स्टैक होल्डर्स सहित संबंधित विभागों से इनपुट लेकर राज्यभर में विंटर टूरिज्म की संभावनाओं वाले क्षेत्रों की पहचान की जाए। प्रत्येक संभावित डेस्टिनेशन की विशेषता और यूएसपी निर्धारित करते हुए वहां उपयुक्त पर्यटन उत्पाद एवं गतिविधियां विकसित की जाएं। उन्होंने नए ट्रैकिंग रूट्स विकसित करते हुए, हाई-अल्टीट्यूड मैराथन, बर्ड वॉचिंग, नेचर एवं एडवेंचर टूरिज्म जैसी गतिविधियों को बढ़ावा दिए जाने के निर्देश दिए। कहा कि संभावित स्थलों की पहचान कर वहां आवश्यक सुविधाओं, इवेंट्स एवं पर्यटन उत्पादों के विकास की समग्र योजना तैयार की जाए।

मुख्य सचिव ने स्थानीय स्टेकहोल्डर्स, टूर ऑपरेटर्स एवं स्थानीय समुदायों को पर्यटन विकास की प्रक्रिया में सक्रिय रूप से शामिल करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि स्थानीय लोगों के साथ निरंतर संवाद स्थापित कर उनके सुझावों को योजनाओं में शामिल किया जाए, ताकि पर्यटन से स्थानीय रोजगार के अवसर बढ़ाने के साथ-साथ रिवर्स माइग्रेशन को भी प्रोत्साहन मिल सके।

मुख्य सचिव ने कहा कि नए पर्यटन स्थलों के विकास के लिए वैश्विक स्तर पर सफल मॉडलों का अध्ययन किया जाए। उत्तराखण्ड की भौगोलिक एवं मौसमी परिस्थितियों से मिलती-जुलती परिस्थितियों वाले विदेशी पर्यटन स्थलों से सीख लेकर राज्य की परिस्थितियों के अनुरूप नए पर्यटन उत्पाद विकसित किए जा सकते हैं।

मुख्य सचिव ने पर्यटन सर्किटों को एक पैकेज के रूप में विकसित करने पर भी विशेष जोर दिया गया। उन्होंने कहा कि जागेश्वर, कसार देवी एवं सूर्य मंदिर जैसे प्रमुख स्थलों को जोड़कर समेकित पैकेज टूर विकसित करने तथा इनकी पब्लिसिटी का कार्य समय रहते शुरू किए जाएँ। उन्होंने नए पर्यटन प्रोजेक्ट्स तलाशने एवं संभावनाओं की समीक्षा के लिए 15 दिन के भीतर पुनः बैठक आयोजित करने के निर्देश दिए। साथ ही, राज्य में विंटर टूरिज्म एवं नए पर्यटन उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए एक पर्यटन कॉन्क्लेव आयोजित किए जाने की बात भी कही।

इस अवसर पर सचिव धीराज सिंह गर्ब्याल सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

सीएस बर्द्धन से विश्व बैंक के एमडी एवं प्रतिनिधिमंडल की शिष्टाचार भेंट

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन के साथ विश्व बैंक के मैनेजिंग डायरेक्टर एवं चीफ नॉलेज ऑफिसर पास्कल डोनोहोई एवं उनकी टीम ने सचिवालय में शिष्टाचार भेंट की। इस दौरान उत्तराखण्ड के समग्र एवं दीर्घकालिक विकास, शहरीकरण, जलवायु परिवर्तन, जल प्रबंधन, आपदा प्रबंधन तथा राज्य की उत्तराखण्ड/2047 की विकास रणनीति सहित विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई।

मुख्य सचिव ने कहा कि उत्तराखण्ड को वर्ष 2047 तक एक सशक्त, समृद्ध, टिकाऊ और आपदा- प्रतिरोधी राज्य के रूप में विकसित करने के लिए दीर्घकालिक दृष्टिकोण के साथ, विभिन्न क्षेत्रों में कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक जिले में नदियों के पुनर्जीवन एवं जल स्रोतों के संरक्षण की दिशा में कार्य किया जा रहा है। उन्होंने इस क्षेत्र में विश्व बैंक से वित्तीय एवं तकनीकी सहयोग का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड के भविष्य के विकास के लिए जल, जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण संरक्षण महत्वपूर्ण क्षेत्र हैं। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में जल वैश्विक स्तर पर एक महत्वपूर्ण चुनौती बनने जा रहा है, इसलिए राज्य में वर्षा जल के संरक्षण एवं अधिक से अधिक रेन वाटर हार्वेस्टिंग को बढ़ावा देने की दिशा में विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस दिशा में विश्व बैंक के साथ वित्तीय एवं तकनीकी सहयोग को और मजबूत किया जा सकता है।

मुख्य सचिव ने कहा कि राज्य में स्थानीय स्तर पर रोजगार एवं आजीविका के पर्याप्त अवसर सृजित कर पलायन को नियंत्रित करने तथा आवश्यकतानुसार रिवर्स माइग्रेशन को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया जा रहा है। स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और युवाओं के लिए बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के दृष्टिगत राज्य के दीर्घकालिक विकास पर फोकस किया जा रहा है।

शिक्षा क्षेत्र में भी विश्व बैंक के सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा करते हुए मुख्य सचिव ने कहा कि स्कूली शिक्षा एवं तकनीकी शिक्षा में सुधार तथा आधुनिक आवश्यकताओं के अनुरूप शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षा के साथ ही आजीविका एवं पलायन के क्षेत्र में भी विश्व बैंक से वित्तीय एवं तकनीकी सहयोग की आवश्यकता है। बैठक में विभागीय अधिकारियों द्वारा राज्य के ऊर्जा, वित्त एवं पेयजल के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों एवं परियोजनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई।

विश्व बैंक के मैनेजिंग डायरेक्टर एवं चीफ नॉलेज ऑफिसर पास्कल डोनोहोई ने राज्य की विकास प्राथमिकताओं को समझते हुए भविष्य में रणनीतिक एवं फ्लैगशिप परियोजनाओं के माध्यम से सहयोग की संभावनाओं पर भी विचार-विमर्श किया। विश्व बैंक की ओर से उत्तराखंड के विकास के लिए दीर्घकालिक सहयोग एवं तकनीकी सहायता उपलब्ध कराने की प्रतिबद्धता व्यक्त की गई। बैठक में ‘विजन उत्तराखंड/2047’ के तहत राज्य की रणनीतिक विकास प्राथमिकताओं पर विशेष रूप से विचार-विमर्श किया गया। राज्य में तेजी से हो रहे शहरीकरण को ध्यान में रखते हुए भविष्य की शहरी आवश्यकताओं, आधारभूत सुविधाओं तथा सतत एवं सुनियोजित शहरी विकास पर भी चर्चा हुई। विश्व बैंक के सहयोग से राज्य की प्राथमिकताओं के अनुरूप भविष्य की विकास परियोजनाओं को आगे बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की गई।

इस अवसर पर प्रमुख सचिव आर. के. सुधांशु, आर. मीनाक्षी सुंदरम, विश्व बैंक से जोहांस जट्ट, सचिव डॉ. रणवीर सिंह चौहान, अपर सचिव नरेंद्र सिंह भंडारी, रोहित मीणा एवं नवनीत पाण्डे सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

बाला गौरिया फिल्म उत्तराखंड की समृद्ध लोक संस्कृति और लोक देवताओं की परंपरा को आगे पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगीः सीएम

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री आवास में उत्तराखंड की लोक संस्कृति एवं लोक आख्यानों पर आधारित बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘बाला गौरिया’ के टीजर एवं पोस्टर का लोकार्पण किया। ‘हिमाद्रि प्रोडक्शंस’ के बैनर तले निर्मित की जा रही यह फिल्म उत्तराखंड के लोक में न्याय देवता के रूप में प्रतिष्ठित गोलज्यू के बाल जीवन पर आधारित है। फिल्म का निर्देशन नितिन तिवारी तथा निर्माण मनोज चंदोला द्वारा किया जा रहा है। फिल्म अक्टूबर के प्रथम सप्ताह में रिलीज होने की संभावना है।

मुख्यमंत्री ने फिल्म के टीजर एवं पोस्टर के लोकार्पण पर पूरी टीम को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि उत्तराखंड की लोक संस्कृति, लोक परंपराएं, लोकगाथाएं और लोक देवताओं की समृद्ध विरासत हमारी विशिष्ट पहचान हैं। ‘बाला गौरिया’ जैसी फिल्में हमारी सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी से जोड़ने के साथ ही देश-दुनिया के सामने उत्तराखंड की लोक संस्कृति को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने का कार्य करेंगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड सरकार राज्य में फिल्म निर्माण और फिल्म पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। राज्य की प्राकृतिक सुंदरता, समृद्ध लोक संस्कृति और विविध भौगोलिक परिस्थितियां फिल्म निर्माण के लिए उत्तराखंड को विशिष्ट बनाती हैं। सरकार का प्रयास है कि देश-विदेश के फिल्म निर्माताओं को उत्तराखंड में शूटिंग के लिए बेहतर वातावरण, आवश्यक सुविधाएं और अनुकूल व्यवस्थाएं उपलब्ध कराई जाएं। उत्तराखंड पर्यटन नीति में भी फिल्म पर्यटन को बढ़ावा देने, फिल्म शूटिंग के लिए प्रोत्साहन एवं तेज अनुमति व्यवस्था विकसित करने तथा विभिन्न स्थानों पर फिल्म सिटी विकसित करने की दिशा में प्रावधान किए गए हैं।

उन्होंने कहा कि उत्तराखंड को फिल्म शूटिंग के लिए पसंदीदा डेस्टिनेशन बनाने के साथ-साथ स्थानीय युवाओं को फिल्म निर्माण से जुड़े रोजगार और स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराना राज्य सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। इससे प्रदेश की आर्थिकी को गति मिलने के साथ ही उत्तराखंड की कला, संस्कृति, बोली-भाषा, लोक परंपराओं और पर्यटन स्थलों को भी देश-दुनिया में पहचान मिलेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड के लोक देवताओं और लोक आख्यानों में हमारी सदियों पुरानी सांस्कृतिक चेतना, परंपराएं और जीवन मूल्य समाहित हैं। इनका संरक्षण और नई पीढ़ी तक पहुंचाना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने फिल्म निर्माताओं से उत्तराखंड की अन्य लोकगाथाओं, लोक देवताओं और सांस्कृतिक परंपराओं पर भी फिल्म निर्माण के लिए आगे आने का आह्वान किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार उत्तराखंड की लोक संस्कृति और स्थानीय प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने के लिए फिल्म निर्माताओं को हरसंभव सहयोग प्रदान करेगी। उन्होंने कहा कि ‘बाला गौरिया’ जैसी फिल्मों के माध्यम से उत्तराखंड की लोक थातियों को व्यापक मंच मिलने के साथ ही प्रदेश के पर्यटन को भी नई पहचान मिलेगी।

इस अवसर पर फिल्म के निर्माता मनोज चंदोला सहित फिल्म से जुड़े अन्य कलाकार एवं टीम के सदस्य उपस्थित रहे।

मुख्यमंत्री ने पांच वर्षों की उपलब्धियों पर आधारित विशेष एल्बम गीत का किया विमोचन

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पंचवटी फिल्म्स प्रोडक्शन एवं आदर्श औद्योगिक स्वायत्त सहकारिता (आदर्श संस्था) द्वारा मुख्यमंत्री के पांच वर्षों के कार्यकाल की उपलब्धियों पर आधारित विशेष एल्बम गीत का विमोचन किया। मुख्यमंत्री ने एल्बम से जुड़े निर्माता-निर्देशक, गीतकार, संगीतकार, गायक एवं अन्य कलाकारों के साथ ही आदर्श संस्था के पदाधिकारियों को इस प्रयास के लिए शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड की विकास यात्रा और राज्य में हो रहे सकारात्मक बदलावों को गीत-संगीत के माध्यम से जन-जन तक पहुंचाने का यह प्रयास सराहनीय है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार उत्तराखण्ड के समग्र विकास के लिए निरंतर कार्य कर रही है। रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर बढ़ाने, पर्यटन को प्रोत्साहित करने, महिलाओं को सशक्त बनाने और युवाओं के लिए नए अवसर सृजित करने की दिशा में विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। राज्य की समृद्ध संस्कृति, परंपराओं और देवभूमि की विशिष्ट पहचान के संरक्षण एवं संवर्धन के साथ विकास कार्यों को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है।

इस अवसर पर आदर्श संस्था की अध्यक्ष आशा कोठारी ने मुख्यमंत्री को शॉल ओढ़ाकर एवं स्मृति चिह्न भेंट कर उनका स्वागत किया। उन्होंने मुख्यमंत्री के नेतृत्व में राज्य में हुए विकास कार्यों तथा जनहित में लिए गए विभिन्न महत्वपूर्ण निर्णयों की सराहना की। मुख्यमंत्री ने एल्बम के निर्माता उत्तम सिंह भंडारी, गायक विक्रम भंडारी एवं शिवानी नेगी, संगीतकार विजयपाल कलूड़ा सहित एल्बम से जुड़े कलाकारों को सम्मानित किया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता आशा कोठारी ने की तथा संचालन संस्था के सचिव हरीश कोठारी ने किया। इस अवसर पर युवा मोर्चा पछवादून के जिलाध्यक्ष विनायक नौटियाल, प्रदीप दुग्गल, विजय असवाल, शोभित उनियाल, गिरीश भट्ट, लक्ष्मी नारायण नवानी, आदित्य नौटियाल, सहदेव सिंह बिष्ट, सपना जवाड़ी सहित अन्य गणमान्य उपस्थित थे।

स्थानीय उत्पादों, संस्कृति, परंपराओं और विशिष्ट मेलों को वैश्विक पहचान बनाने में करें कार्यः बर्द्धन

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने सचिवालय में वन डिस्ट्रिक्ट वन फेस्टिवल तथा उत्तराखण्ड के स्थानीय उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने के सम्बन्ध में जिलाधिकारियों के साथ बैठक की। उन्होंने सभी जनपदों को अपने स्थानीय उत्पादों, संस्कृति, परंपराओं और विशिष्ट मेलों को वैश्विक पहचान दिलाने के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने कहा कि प्रत्येक जनपद अपने किसी एक विशिष्ट पर्व अथवा मेले को वन डिस्ट्रिक्ट वन फेस्टिवल के रूप में विकसित करे। इसके लिए प्रत्येक जिले का वार्षिक इवेंट कैलेंडर तैयार किया जाए। उन्होंने स्थानीय स्टेकहोल्डर्स की भागीदारी सुनिश्चित की जाने पर जोर दिया। कहा कि ऐसे आयोजनों में उत्तराखण्ड के प्रवासी एवं नॉन-रेजिडेंट उत्तराखंडियों को भी जोड़ा जाए, ताकि राज्य के स्थानीय उत्पादों और सांस्कृतिक विरासत को देश-दुनिया तक पहुंचाया जा सके। उन्होंने कहा कि मेलों एवं उत्सवों को इंस्टीट्यूशनलाइज्ड किया जाना जरूरी है, ताकि आने वाले वर्षों में उनकी स्थायी पहचान और ब्रांड वैल्यू विकसित हो सके।

मुख्य सचिव ने चमोली के रम्माण फेस्टिवल को बड़े स्तर पर आयोजित करने एवं उत्तरकाशी के बटर फेस्टिवल जैसे यूनिक आयोजनों को भी व्यापक स्तर पर बढ़ावा दिए जाने पर जोर दिया। उन्होंने पौड़ी और चमोली में आयोजित होने वाले शरदोत्सव, हरिद्वार महोत्सव, नैनीताल विंटर कार्निवल और मसूरी विंटर कार्निवल को भी और अधिक आकर्षक एवं व्यवस्थित रूप से आयोजित करने पर जोर दिया गया। उन्होंने चम्पावत में आयोजित होने वाले इंटरनेशनल एंगलिंग मीट को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने तथा उत्तरायणी मेले में एडवेंचर गतिविधियों को बढ़ाने के निर्देश दिए।

बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने जनपदवार निर्यात की संभावनाओं की समीक्षा भी की। उन्होंने प्रत्येक जनपद के लिए बेसलाइन डेटा तैयार करने और उसके आधार पर निर्यात संवर्धन की कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए गए। उन्होंने निर्यात संवर्धन के लिए प्रमुख सचिव नियोजन की अध्यक्षता में एक स्थायी समिति गठित किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा इस समिति में सचिव उद्योग, सचिव वन, सचिव आयुुष सहित अन्य हितधारकों को शामिल किया जाए।

मुख्य सचिव ने स्थानीय उत्पादों की पहचान कर उनकी प्रोसेसिंग, पैकेजिंग, गुणवत्ता, ब्रांडिंग और मार्केटिंग पर विशेष ध्यान दिए जाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि जीआई टैग प्राप्त उत्पादों की संभावनाओं का अधिकतम उपयोग करने तथा प्रत्येक जनपद के उत्पादों की यूएसपी विकसित किए जाने की दिशा में कार्य किया जाए।

मुख्य सचिव ने जिलाधिकारियों से कहा कि विभिन्न जनपदों के सफल प्रयोगों और अनुभवों को आपस में साझा किया जाए, ताकि एक जनपद की अच्छी पहल को दूसरे जनपद में भी लागू किया जा सके। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड के स्थानीय उत्पादों और पारंपरिक आयोजनों को केवल स्थानीय बाजार तक सीमित न रखते हुए उन्हें राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय बाजार से जोड़ने की दिशा में समन्वित प्रयास किए जाएं।

इस अवसर पर प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु, आर. मीनाक्षी सुन्दरम, सचिव शैलेश बगौली, श्रीधर बाबू अद्दांकी, युगल किशोर पंत, डॉ. अहमद इकबाल एवं राजेंद्र कुमार सहित अपर सचिव अभिषेक रोहिला एवं जनपदों से जिलाधिकारी उपस्थित थे।

मेरे सपनों का उत्तराखंड अभियान में आए पर्यटन, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, तकनीक पर्यावरण सहित आठ प्रमुख विषयों पर सुझाव

‘मेरे सपनों का उत्तराखंड’ अभियान को प्रदेश के युवा विद्यार्थियों का उत्साहपूर्ण समर्थन मिला है। राज्य की कक्षा 11वीं और 12वीं के 2,67,744 विद्यार्थियों ने अपने विचार एवं विजन साझा करते हुए निबंध मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को प्रेषित किए हैं। मुख्यमंत्री धामी ने 10 अगस्त को आयोजित ‘मुख्यमंत्री युवा विद्यार्थी मंथन’ कार्यक्रम में विद्यार्थियों का आह्वान किया था कि वे 24 अगस्त तक अपने विचार साझा कर उन्हें पोर्टल पर अपलोड करें।

पोर्टल पर प्राप्त जानकारी के अनुसार राज्य में कक्षा 11वीं और 12वीं में कुल 2,96,426 विद्यार्थी सरकारी एवं गैर-सरकारी विद्यालयों में अध्ययनरत हैं। इनमें से बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने इस अभियान में प्रतिभाग कर उत्तराखंड के भविष्य को लेकर अपने विचार और सुझाव साझा किए हैं।

विद्यार्थियों ने पर्यटन, रोजगार, सामाजिक विकास, वन एवं पर्यावरण, शिक्षा, स्वास्थ्य, तकनीक सहित आठ प्रमुख विषयों पर अपने सुझाव और नए विचार प्रस्तुत किए हैं। खास बात यह है कि ये निबंध केवल लेखन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उत्तराखंड की नई पीढ़ी की आकांक्षाओं और भविष्य के प्रदेश को लेकर उनकी सोच का दस्तावेज भी हैं।

प्राप्त आंकड़ों के अनुसार रुद्रप्रयाग, पिथौरागढ़, चंपावत, ऊधमसिंह नगर और चमोली जिलों में कक्षा 11वीं और 12वीं के शत-प्रतिशत विद्यार्थियों ने अपने निबंध पोर्टल पर अपलोड किए हैं। वहीं पौड़ी में 98.82 प्रतिशत, अल्मोड़ा में 97.46 प्रतिशत, हरिद्वार में 91.77 प्रतिशत, टिहरी में 91.57 प्रतिशत, बागेश्वर में 89.26 प्रतिशत, नैनीताल में 85.89 प्रतिशत तथा उत्तरकाशी में 84.93 प्रतिशत विद्यार्थियों ने इस अभियान में भागीदारी की है। देहरादून जिले में कक्षा 11वीं और 12वीं के कुल 63,666 विद्यार्थियों में से 47,358 विद्यार्थियों ने अपने निबंध प्रस्तुत किए हैं।

अब प्राप्त निबंधों एवं विचारों का मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के साथ विशेषज्ञों की टीम द्वारा अवलोकन एवं मूल्यांकन किया जा रहा है। चयनित श्रेष्ठ विचारों के परिणाम 16 सितंबर को घोषित किए जाएंगे।

पहली बार विद्यार्थियों से विकास के विजन पर वैचारिक मंथन
‘मेरे सपनों का उत्तराखंड’ अभियान के माध्यम से मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेश के युवा विद्यार्थियों को सीधे राज्य के विकास और नीति निर्माण की प्रक्रिया से जोड़ने की अभिनव पहल की है। राज्य के 2.67 लाख से अधिक विद्यार्थियों की भागीदारी इस अभियान की व्यापकता और विद्यार्थियों के उत्साह को दर्शाती है।

अभियान के अंतर्गत श्रेष्ठ 140 विचारों का चयन किया जाएगा। चयनित विद्यार्थियों को शासन के वरिष्ठ अधिकारियों एवं सचिवों के साथ अपने विचारों पर चर्चा करने का अवसर मिलेगा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी स्वयं भी इन विद्यार्थियों से संवाद कर उनके विजन, अनुभवों और सुझावों को सुनेंगे।

इसके साथ ही श्रेष्ठ विचार प्रस्तुत करने वाले विद्यार्थियों को करियर एवं प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में सहयोग सहित अन्य प्रोत्साहन एवं पुरस्कार प्रदान किए जाने की व्यवस्था की गई है।

प्रत्येक सहभागी को मिला डिजिटल प्रमाण पत्र
पोर्टल पर निबंध जमा करने वाले प्रत्येक विद्यार्थी को डिजिटल प्रमाण पत्र भी प्रदान किया गया है। अभियान के तहत राज्य के प्रत्येक ब्लॉक, विद्यालय और विद्यार्थी से संबंधित विवरण का डेटा संकलित किया गया है, जिससे अभियान की प्रक्रिया को पारदर्शी एवं व्यवस्थित बनाया गया है।

अभियान के संयोजक डॉ. राहुल अग्रवाल ने बताया कि नई पीढ़ी को सीधे राज्य की विकास प्रक्रिया और नीति निर्माण की सोच से जोड़ने की यह एक अभिनव पहल है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक अपने विचार साझा किए हैं।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा, “हमारे विद्यार्थी केवल उत्तराखंड का भविष्य नहीं हैं, बल्कि उनके विचार आज के उत्तराखंड को भी नई दिशा देने की क्षमता रखते हैं। ‘मेरे सपनों का उत्तराखंड’ के माध्यम से हम नई पीढ़ी की सोच को सुन रहे हैं। युवाओं के अच्छे और व्यावहारिक सुझावों को प्रदेश के विकास में स्थान दिया जाएगा। हमारा संकल्प है कि युवा जिस उत्तराखंड का सपना देख रहे हैं, उसे साकार करने में उन्हें भी सहभागी बनाया जाए।”

सीएम धामी ने सशक्त बहना उत्सव के अंतर्गत स्वयं सहायता समूहों के स्टालों से खरीदे स्थानीय उत्पाद

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सचिवालय में सशक्त बहना उत्सव के अंतर्गत स्वयं सहायता समूहों द्वारा लगाए गए स्टालों से विभिन्न स्थानीय उत्पादों की खरीदारी की। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर प्रदेशवासियों से आगामी त्योहारों में स्थानीय उत्पादों को प्राथमिकता देने और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘वोकल फॉर लोकल’ के संकल्प को आगे बढ़ाने में सहभागी बनने का आह्वान किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड की मातृशक्ति द्वारा स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से तैयार किए जा रहे उत्पाद हमारी स्थानीय संस्कृति, परंपरा और हुनर की पहचान हैं। इन उत्पादों को खरीदकर हम न केवल स्थानीय उत्पादों को प्रोत्साहित करते हैं, बल्कि उनसे जुड़ी महिलाओं की आजीविका को सशक्त बनाने और उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने में भी योगदान देते हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि त्योहारों का समय स्थानीय उत्पादों को प्रोत्साहित करने का महत्वपूर्ण अवसर है। प्रदेशवासी त्योहारों पर उपहार एवं दैनिक उपयोग की वस्तुओं की खरीद में स्थानीय उत्पादों को अधिक से अधिक प्राथमिकता दें। हमारे द्वारा स्थानीय स्तर पर तैयार किए गए उत्पाद की प्रत्येक खरीद किसी परिवार की आय बढ़ाने, किसी महिला के स्वरोजगार को मजबूती देने और राज्य की स्थानीय अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने में सहायक बनती है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में ‘वोकल फॉर लोकल’ अभियान ने देश में स्थानीय उत्पादों के प्रति एक नया विश्वास पैदा किया है। राज्य सरकार भी महिला स्वयं सहायता समूहों, स्थानीय कारीगरों और उद्यमियों के उत्पादों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से अपील की कि इस त्योहारी सीजन में स्थानीय उत्पाद खरीदें, दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करें और ‘वोकल फॉर लोकल’ को जन-अभियान बनाने में अपना योगदान दें। स्थानीय उत्पादों को अपनाने से ही आत्मनिर्भर उत्तराखण्ड और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को और अधिक मजबूती मिलेगी।

मानसून के बाद सड़क सुधार के कार्य युद्धस्तर पर शुरू करने के लिए निविदा प्रक्रिया समय से पूर्ण करने पर जोर

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में सचिवालय में आयोजित कैबिनेट बैठक में प्रदेशभर की सड़कों की स्थिति और उनके सुधार के संबंध में विस्तृत विचार-विमर्श किया गया। बैठक में नगर निगम, नगर पालिका परिषद एवं नगर पंचायत क्षेत्रों के साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों की सड़कों को दुरुस्त करने के लिए व्यापक स्तर पर कार्य करने पर चर्चा हुई।

मुख्यमंत्री ने कहा कि लोक निर्माण विभाग और प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) सहित विभिन्न विभागों एवं संस्थाओं के अधीन आने वाली सड़कों को दुरुस्त करने के लिए प्रभावी कार्ययोजना बनाई जाए। बैठक में पीएमजीएसवाई के अंतर्गत निर्मित ऐसी पुरानी सड़कों, जिनकी अनुरक्षण अवधि समाप्त हो चुकी है और जिनका नियमित रखरखाव नहीं हो पा रहा है, को दुरुस्त करने के लिए राज्य सरकार की ओर से आवश्यक धनराशि उपलब्ध कराने के संबंध में भी विचार-विमर्श किया गया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मानसून समाप्त होते ही प्रदेशभर में सड़क सुधार के कार्य एक साथ युद्धस्तर पर शुरू किए जाने चाहिए। इसके लिए संबंधित विभाग अभी से आवश्यक तैयारियां सुनिश्चित करते हुए निविदा प्रक्रिया समय से पूर्ण कर लें, ताकि बारिश समाप्त होने के बाद निर्माण एवं मरम्मत कार्य शुरू करने में किसी प्रकार का विलंब न हो।

बैठक में शहरी क्षेत्रों की सड़कों की स्थिति में सुधार के लिए स्थानीय निकायों को आवश्यक धनराशि उपलब्ध कराने पर भी चर्चा की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि नगर निगमों, नगर पालिका परिषदों एवं नगर पंचायतों को सड़क सुधार के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए जाएं, ताकि शहरी क्षेत्रों की सड़कों को भी प्राथमिकता के आधार पर दुरुस्त किया जा सके।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वे अक्टूबर माह से प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों का सड़क मार्ग से भ्रमण करेंगे। उन्होंने संबंधित विभागों को आपसी समन्वय से सड़कों के सुधार के लिए ठोस कार्ययोजना बनाकर समयबद्ध रूप से कार्य करने को कहा। उन्होंने कहा कि प्रदेश में शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों की सड़कों को बेहतर और सुगम बनाने के लिए सभी संबंधित विभागों को समन्वित प्रयास करने होंगे।

इसके अलावा धामी कैबिनेट में 17 अहम बिंदुओं पर सहमति मिली। इसके अलावा शहीदों को लेकर भी कैबिनेट में बड़ा अच्छा निर्णय लिया गया है। कैबिनेट द्वारा लिये गये अहम निर्णय यह रहे-
1- राष्ट्रीय सहकारी नीति, 2025 के अनुरूप राज्य में सहकारिता क्षेत्र के विकास हेतु उत्तराखण्ड राज्य सहकारी नीति, 2026 प्रख्यापित किये जाने के सम्बन्ध में।

सहकारिता मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा ‘सहकार से समृद्धि‘ की परिकल्पना को साकार करते हुए सतत् सहकारी विकास तथा देशभर में सहकारी आन्दोलन को नई दिशा प्रदान करने के लिए राष्ट्रीय सहकारी नीति, 2025 तैयार की गयी है। इसी परिप्रेक्ष्य में राज्य की भौगोलिक, सामाजिक एवं आर्थिक परिस्थितियों के अनुरूप सहकारिता क्षेत्र को सुदृढ़, प्रभावी बनाने जाने तथा राज्य के अन्तर्गत सहकारिता क्षेत्र के सतत् विकास हेतु राष्ट्रीय सहकारी नीति 2025 के अनुरूप राज्य में एक सहकारिता नीति तैयार की जा रही है, जो सहकारी संस्थाओं को अधिक पारदर्शी, उत्तरदायी, तकनीक सक्षम एवं व्यावसायिक रूप से सक्षम बनाने हेतु मार्गदर्शक दस्तावेज का कार्य करेगी।

भारत सरकार द्वारा दिनांक 24 जुलाई, 2025 को राष्ट्रीय सहकारिता नीति-2025 का अनावरण किया गया, जिसका उद्देश्य ‘सहकार से समृद्धि‘ के दृष्टिकोण को व्यवहारिक रूप देने के साथ-साथ सहकारिता क्षेत्र को विकसित भारत-2047 के लक्ष्य से जोड़ना है। नीति के माध्यम से जहाँ एक ओर सहकारी संस्थाओं को अधिक सशक्त, पारदर्शी, पेशेवर, प्रतिस्पर्धी एवं प्रौद्योगिकी-सक्षम बनाना है वहीं दूसरी ओर इसके माध्यम से ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में रोजगार एवं आय के नए अवसरों को सृजित कर समावेशी विकास के लक्ष्य को प्राप्त करना है। उक्त प्रस्तावित सहकारिता नीति का मुख्य उद्देश्य सहकारी संस्थाओं को आर्थिक एवं तकनीकी रूप से सक्षम एवं सुदृढ़ बनाना, पारदर्शी एवं व्यावसायिक रूप से आत्मनिर्भर बनाते हुए कृषि एवं सम्बद्ध क्षेत्रों में मूल्य-श्रृंखला विकास, महिला एवं युवा सशक्तिकरण, रोजगार सृजन, वित्तीय समावेशन तथा पलायन से पुर्नवास की दिशा में ठोस पहल करना है।

उत्तराखण्ड राज्य सहकारिता नीति को राष्ट्रीय सहकारिता नीति, 2025 के अनुरूप राज्य की आवश्यकताओं एवं स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है। प्रस्तावित नीति में प्रमुख रूप से सात रणनीतिक मिशन निर्धारित किये गये है, जिसमें नींव का सशक्तीकरण, जीवंतता को प्रोत्साहित करना, सहकारी संस्थाओं को भविष्य के लिए तैयार करना, समावेशिता तक पहुँच का विस्तार करना, नये एवं उभरते क्षेत्रों में सहकारिता का विस्तार करना, युवा पीढ़ी को सहकारी विकास हेतु तैयार करना तथा आर्थिक व्यवहार्यता एवं विविधीकरण शामिल है। अतः इन समस्त उद्देश्यों को पूर्ण किये जाने हेतु राज्य स्तर पर ‘उत्तराखण्ड राज्य सहकारिता नीति, 2026‘ को प्रख्यापित किये जाने का निर्णय लिया गया है।

2- वित्त (वे०आ०-सा०नि०) अनुभाग-07 की अधिसूचना संख्या-290/XXVII (7) 50(16) दिनांक 28 दिसम्बर, 2016 के द्वारा राज्य सरकार के अधीन कार्यरत सरकारी सेवकों के वेतन निर्धारण हेतु प्रख्यापित ‘उत्तराखण्ड सरकारी सेवक वेतन नियम, 2016‘ के साथ संलग्न अनुसूची-1 में वेतन मैट्रिक्स की तालिकायें निर्गत की गयी थी। प्रचलित वेतन मैट्रिक्स की तालिकाओं में लेवल-13 क के उपरान्त सीधे लेवल-15 एवं लेवल-16 का प्रावधान है, जबकि भारत सरकार में वेतन लेवल-13 क के पश्चात वेतन लेवल-14 एवं वेतन लेवल-15 अंकित है।

अतः उत्तराखण्ड सरकारी सेवक वेतन नियम, 2016 के अनुसूची-1 में वेतन मैट्रिक्स में उल्लिखित वेतनमान रू0 1,44,200-2,18,200 के लिए वेतन लेवल-15 के स्थान पर वेतन लेवल-14 एवं वेतनमान रू0 1,82,200-2,24,100 के लिए वेतन लेवल-16 के स्थान पर वेतन लेवल-15 संशोधित किया जाना है। साथ ही विभागीय पदीय संरचनाओं / सेवा नियमावलियों में उपरोक्तानुसार जहां-जहां वेतन लेवल-15 एवं 16 अंकित है, के स्थान पर क्रमशः वेतन लेवल-14 एवं 15 समझा / पढ़ा जायेगा।

3-उत्तराखण्ड मोटरयान कराधान सुधार अधिनियम, 2003 की धारा-4 की उपधारा (5) के अधीन मोटर यान पर ग्रीन सेस हेतु निर्गत अधिसूचना में सेस की छूट को समाप्त किये जाने के संबंध में। तथा सी०एन०जी० वाहनों को देय ग्रीन

उत्तराखण्ड मोटरयान कराधान सुधार अधिनियम एवं नियमावली, 2003 के अन्तर्गत वर्तमान में श्प्रवेश उपकरश् तथा ‘ग्रीन सेस‘ की दरों को सम्मिलित करते हुए उत्तराखण्ड राज्य में पंजीकृत एवं राज्य में प्रवेश करने वाले अन्य राज्य के व्यवसायिक एवं निजी वाहनों हेतु ग्रीन सेस की दरें निर्धारित की गयी हैं। हाईब्रिड अथवा सी०एन०जी० चालित परिवहन यानों को प्रोत्साहित किए जाने हेतु तत्समय देय मोटरयान कर से छूट प्रदान की गई है। वर्तमान में अधिकांश हानि, सी०एन०जी० तथा सामान्य वाहन यथा ICE (Internal Combustion Engine) वाहन ही हैं, जिनके द्वारा संचालन के दौरान ईधन खपत के साथ-साथ बैटरी का भी उपयोग किया जाता है, जिससे तथा सी०एन०जी० प्रकार के यानों की लोकप्रियता में बढोत्तरी हुई है। वर्तमान में अधिकांश हाईब्रिड तथा सी०एन०जी० प्रकार के वाहन ही बाजार में प्रचलन में आ रहे हैं। ऐसी परिस्थितियों में तथा सी०एन०जी० प्रकार के वाहनों को मोटरयान कर से छूट प्रदान किए जाने पर राजस्व पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है, जिसके दृष्टिगत उपरोक्त प्रकार के वाहनों को क्रमबद्ध तरीके से कराधान में लाया जाना आवश्यक है।

4- ‘उत्तराखण्ड चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण सांख्यिकीय संवर्ग समूह क, ख एवं ग सेवा नियमावली 2026‘ के सम्बन्ध में।
उत्तराखण्ड चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभागान्तर्गत सांख्यिकीय संवर्ग के अन्तर्गत सेवा में भर्ती और उसमें नियुक्त व्यक्तियों की सेवा शर्तों को विनियमित किये जाने के उद्देश्य से ‘उत्तराखण्ड चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण सांख्यिकीय संवर्ग समूह क, ख एवं ग सेवा नियमावली 2026‘ के प्रख्यापन का प्रस्ताव है।

5- प्रदेश में आम जनमानस को शीघ्र स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ प्रदान करने और विभागीय स्तर पर विशेषज्ञ उपलब्ध न होने को दृष्टिगत रखते हुए औषधियों, सर्जिकल सामग्री, रसायन, उपकरण एवं इंप्लांटस की समयबद्ध एवं पारदर्शी अधिप्राप्ति हेतु उत्तराखण्ड मेडिकल सप्लाईज कॉर्पाेरेशन का गठन का प्रस्ताव मंत्रिमण्डल के विचारार्थ प्रस्तुत किया गया है जिस पर मंत्रिमण्डल ने विभागीय प्रस्ताव पर सहमति की गयी है।

6- उत्तराखण्ड राज्य में एन०सी०डी०सी० (राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र) शाखा की स्थापना से राज्य में रोग निगरानी, प्रकोप महामारी की जांच और प्रकोप से निपटाने के लिए त्वरित प्रतिक्रिया की क्षमता और दक्षता में और वृद्धि होगी। राज्य स्तर पर निदान सुविधाओं को बढ़ावा मिलेगा और प्रत्येक शाखा में बी०एस०एल०-3 स्तर की सुविधाए उपलब्ध होंगी। राज्यों / केंद्र शासित प्रदेशों में प्रस्तावित शाखाएं मुख्यालय के साथ-साथ अन्य राज्य की शाखाओं और क्षेत्रीय केंद्रों से जुड़ी होंगी। राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (NCDC) नई दिल्ली, भारत सरकार को राजकीय मेडिकल कॉलेज, हरिद्वार में अवस्थित 65 एकड भूमि में से 01 एकड़ भूमि को 99 वर्ष की लीज (रू0 01) पर लीज पर दिये जाने के प्रस्ताव पर मा० मंत्रिमण्डल द्वारा सहमति प्रदान की गयी।

7-‘उत्तराखण्ड कारागार उप कारापाल अधीनस्थ (अराजपत्रित) सेवा (संशोधन) नियमावली, 2026‘ का प्रख्यापन।

कारागार प्रशासन एवं सुधार विभाग, उत्तराखण्ड की संरचना में अधीनस्थ कारागारों हेतु उप कारापाल के पद पर 25 प्रतिशत पदोन्नति कोटे के पदों पर 90 प्रतिशत प्रधान बन्दीरक्षक एवं 10 प्रतिशत महिला बन्दीरक्षक से पदोन्नति कोटा निर्धारित किये जाने का प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया। प्रस्तावित सेवा नियमावली विभागीय एवं कर्मचारी हित में प्रख्यापित की जानी आवश्यक है। अतः कार्मिको के ष्उत्तराखण्ड कारागार उप कारापाल अधीनस्थ (अराजपत्रित) सेवा (संशोधन) नियमावली, 2026ष् के प्रख्यापन के प्रस्ताव पर सहमति प्रदान की गयी।

8-उत्तराखण्ड लोकायुक्त खोजबीन समिति (Search Committee) के कार्यकलापों का निर्धारण नियमावली, 2026

उत्तराखण्ड लोकायुक्त अधिनियम, 2014 एवं लोकायुक्त अधिनियम (संशोधन) 2014 की धारा 4 की उपधारा (5) के प्रावधानों के अधीन लोकायुक्त संस्था के अध्यक्ष एवं सदस्य पद हेतु उपयुक्त नामों का पैनल तैयार कर चयन समिति को उपलब्ध कराये जाने हेतु उक्त अधिनियम की धारा 4 की उपधारा (3) में निर्दिष्ट खोजबीन समिति की कार्यवधि, उसके सदस्यों को संदेय भत्ते तथा नामों के पैनल के चयन की रीति निर्धारित करने के उद्देश्य से उत्तराखण्ड लोकायुक्त खोजबीन समिति (Search Committee) के कार्यकलापों का निर्धारण नियमावली, 2026 तैयार किया जाना है।

9-‘उत्तराखण्ड आबादी सर्वेक्षण और अभिलेख संक्रिया नियमावली, 2026‘ के प्रख्यापन के सम्बन्ध में।

भूमि संसाधन विभाग, ग्रामीण विकास मंत्रालय, भारत सरकार नई दिल्ली द्वारा दिनांकः 25 सितम्बर, 2024 को डिजिटल इंडिया लैण्ड रिकार्ड मार्डनाईजेशन प्रोग्राम (DILRMP) के अंतर्गत नक्शा (शहरी आबादी क्षेत्रों का राष्ट्रीय भू-स्थानिक ज्ञान-आधारित भूमि सर्वेक्षण) कार्यक्रम की शुरूआत की है, जिसका उद्देश्य शहरी भू-अभिलेखों के निर्माण और प्रबंधन में कांतिकारी बदलाव लाना है।

नक्शा कार्यक्रम अन्तर्गत स्वामित्व योजना की भांति शहरी भूमि अभिलेखों के लिए एक व्यापक और सटीक भू-स्थानिक डेटाबेस तैयार करना है। हवाई और ग्राउण्ड सर्वेक्षणों को उन्नत जी०आई०एस० तकनीक के साथ एकीकृत करके, यह कार्यक्रम भूमि प्रशासन में दक्षता बढ़ायेगा, संपत्ति स्वामित्व अभिलेखों को सुव्यवस्थित करेगा और शहरी नियोजन को सुगम बनाने में उपयोगी होगा। सटीक भू-स्थानिक डेटा बेहतर निर्णय लेने, कुशल भूमि उपयोग नियोजन और संपत्ति लेनदेन को सुगम और निश्चित बनाने में भी उपयोगी एवं सहायक होगा।

अतएव प्रदेश के अन्य क्षेत्रों / सम्पूर्ण प्रदेश की राजस्व अभिलेखों में अभिलिखित आबादी क्षेत्रों में भूमि का आधुनिक विधि से सर्वेक्षण किये जाने हेतु ‘उत्तराखण्ड आबादी सर्वेक्षण और अभिलेख संक्रिया नियमावली, 2026‘ को प्रख्यापित किया जाना प्रस्तावित है।

10- उत्तराखण्ड सीड्स एण्ड तराई डेवलपमेन्ट कारपोरेशन लि० में कार्यरत तृतीय एवं चुतर्थ श्रेणी के कार्मिकों को अन्य विभागों में सेवा स्थानान्तरण पर भेजने के सम्बन्ध में।

उत्तराखण्ड सीड्स एण्ड तराई डेवलपमेन्ट कारपोरेशन लि० में अधिकांश तृतीय श्रेणी एवं चतुर्थ श्रेणी के कार्मिकों के कार्य की उपयोगिता सीजनल (माह फरवरी से माह मार्च एवं माह अगस्त से माह दिसम्बर तक) है। तृतीय एवं चुतर्थ श्रेणी के कार्मिकों को अन्य विभागों में सेवा स्थानान्तरण पर भेजने से निगम के बीज उत्पादन के लागत में कमी आयेगी, जिससें उत्तराखण्ड राज्य के कृषि विभाग एवं कृषकों को कम मूल्य पर गुणवत्तायुक्त बीज की आपूर्ति एवं अन्य राज्यों में अन्य बीज संस्थाओं से प्रतिस्पर्द्धा की जा सकेगी तथा बीज आपूर्ति में वृद्धि हो सकेगी। निगम के कार्मिकों के वेतन मद एवं प्रशासनिक व्यय में कमी होने से निगम को हो रहे प्रतिवर्ष घाटे को रोकने में मदद होगी। इसके कारण निगम में कार्यरत तृतीय श्रेणी के 22 एवं चतुर्थ श्रेणी के 63 कार्मिकों को जनपद ऊधमसिंहनगर एवं अन्य निकटस्थ जनपदों के विभिन्न विभागों में अधिकतम 10 वर्ष अथवा कार्मिकों की सेवानिवृत्ति की तिथि से 3 माह पूर्व, जो पहले हो, तक के लिये सेवा स्थानांतरण के आधार पर भेजा जाना प्रस्तावित है। कार्मिकों का सेवानिवृत्तिक लाभ निगम के द्वारा ही प्रदान किया जाएगा। सेवा स्थानांतरण पर अन्य विभागों में भेजे गए कार्मिकों को निगम में देय वेतन के आधार पर ही सम्बन्धित विभाग द्वारा वेतन देय होगा।

11- रिस्पना नदी के किनारे बसी मलिन बस्ती से चयनित लाभार्थियों को काठबंगला में निर्मित आवासों का आबंटन विषयक।
उत्तराखण्ड राज्य के नगर निकायों में नदियों के किनारे अवैध रूप से बसी मलिन बस्तियों का सुव्यवस्थित और सुविचारित रूप से विस्थापन किये जाने के उद्देश्य से काठबंगला में 116 आवासों का निर्माण कार्य पूर्ण कर लिया गया है। काठबंगला के निकट रिस्पना नदी के किनारे बसी मलिन बस्ती में निवासरत् परिवारों में से, नगर निगम, देहरादून द्वारा चयनित लाभार्थियों को उक्त आवास आबंटित किये जाने संबंधी प्रस्ताव पर सहमति प्रदान कर दी गई है।

12- यू०यू०एस०डी०ए० के संरचनात्मक ढ़ाचे का पुनर्गठन किये जाने विषयक।

उत्तराखण्ड राज्य के नगर निकायों यथा-कोटद्वार, चम्पावत, टनकपुर, किच्छा, पिथौरागढ़, रूद्रपुर, काशीपुर एवं सितारगंज में ए०डी०बी० एवं ई०आई०बी० के माध्यम से वित्त पोषित परियोजना के अन्तर्गत सीवरेज एवं पेयजल का कार्य किया जाना है तथा ऋषिकेश शहर में के०एफ०डब्लू० (KFW) के माध्यम से वित्त पोषित परियोजना के अन्तर्गत राड़क निर्माण, सिवरेज, स्ट्रीट लाईट, सार्वजनिक परिवहन (ई बस), पेयजल, घाटों का सौन्दर्यकरण, एस०डब्लू०एम०, एल०डी०डी० स्क्रीन संबंधी कार्य किये जाने हैं। उक्त परियोजनाओं में किये जाने वाले कार्यों के सुचारू संचालन के दृष्टिगत यू०यू०एस०डी०ए० के संरचनात्मक ढ़ाचे का पुनर्गठन करते हुए कुल 94 अस्थाई (निःसंवर्गीय) पदों का सृजन किये जाने संबंधी प्रस्ताव पर सहमति प्रदान कर दी गई है।

13-अंत्योदय फाउंडेशन के पक्ष में Gift Deed किये जाने पर स्टाम्प शुल्क में छूट प्रदान किये जाने विषयक।

मनोहर लाल, अध्यक्ष, अंत्योदय फाउण्डेशन, कनाट प्लैस, नई दिल्ली द्वारा कैंसर रोगियों के लिये Hospice Care Center स्थापित किये जाने हेतु देवेंद्र नाथ सक्सेना और माधुरी सक्सेना की मौजा वीरभद्र (पुराना), ऋषिकेश स्थित सम्पत्ति को Antyodaya Foundation, जो कि एक पंजीकृत धर्मार्थ ट्रस्ट है के पक्ष में Gift Deed किए जाने पर स्टाम्प ड्यूटी में छूट प्रदान किये जाने का अनुरोध किया गया है। प्रश्नगत सम्पत्ति की लागत रू0 1,77,41,000/- है, जिस पर निर्धारित 5 प्रतिशत की दर रू0 8,87,050/- (₹ आठ लाख सत्तासी हजार पचास मान्त्र) की स्टाम्प ड्यूटी आकलित है। मनोहर लाल, अध्यक्ष, अंत्योदय फाउण्डेशन, नई दिल्ली के अनुरोध पर विचार किये जाने पर उक्त वर्णित / आकलित की धनराशि₹ 8,87,050/- की राजस्व हानि होगी।

भारतीय स्टाम्प अधिनियम, 1899 की धारा-9 में श्शुल्क को घटाने, माफ करने या प्रशमन करने की शक्तिश् विषयक प्रावधान है। मनोहर लाल, अध्यक्ष, अंत्योदय फाउण्डेशन, नई दिल्ली द्वारा किये गये अनुरोध के कम में धर्मार्थ एवं जनकल्याणकारी कार्याे को प्रोत्साहित किये जाने के दृष्टिगत् उक्त वर्णित / आकलित स्टाम्प शुल्क की धनराशि ₹ 8,87,050/- से छूट प्रदान किये जाने के संबंध में मंत्रिमंडल द्वारा विचार किया जाना है।

14-उत्तराखण्ड निजी विश्वविद्यालय अधिनियम, 2023 की धारा-36 के प्राविधानानुसार उत्तरांचल विश्वविद्यालय जनपद देहरादून से सम्बन्धित या उससे आनुषांगिक विषयों का उपबन्ध एवं नियमन करने के लिए परिनियम के प्रख्यापन के संबंध में।

राज्य सरकार द्वारा उत्तराखण्ड राज्य में स्थापित निजी विश्वविद्यालयों के कृत्यों को विनियमित किये जाने और संबंधित या आनुषांगिक विषयों की व्यवस्था करने हेतु उत्तराखण्ड निजी विश्वविद्यालय अधिनियम, 2023 (अधिनियम 02 वर्ष 2024) अधिनियमित है, जिसकी धारा-36 के प्राविधानानुसार संबंधित विश्वविद्यालय के परिनियमों को राज्य सरकार द्वारा अनुमोदित किया जाना होता है।
उक्त के कम में उत्तरांचल विश्वविद्यालय परिनियम, 2026 का प्रख्यापन किया जा रहा है।

15- विषय-उपनल कार्मिकों के समान कार्य हेतु समान वेतन प्रदान किये जाने के संबंध में।

मंत्रिमण्डल द्वारा निम्नलिखित बिन्दुओं पर अपनी सहमति प्रदान की गयी है-
(1) उपनल कार्मिकों को समान कार्य हेतु समान वेतन का लाभ तीन चरणों में प्रदान किया जायेगा, जिसके प्रथम चरण में 01.01.2016 से पूर्व के नियोजित कार्मिकों के संबंध में वर्तमान में कार्यवाही की जा रही है। द्वितीय चरण में 01.01. 2016 से 12.11.2018 तक के नियोजित कार्मिकों को समान कार्य समान वेतन हेतु विचार किया जायेगा जिस पर कार्यवाही दिनांक 09.11.2026 से तथा तृतीय चरण में 13.11.20218 से 15.10.2024 तक के नियोजित कार्मिकों को समान कार्य हेतु समान वेतन की कार्यवाही 01 अप्रैल, 2027 से प्रारम्भ की जायेगी।

(2) उपनल के माध्यम से कार्याेजित कार्मिकों की सेवा में दिये गये कृत्रिम ब्रेक (व्यवधान) के दृष्टिगत सैनिक कल्याण विभाग, उत्तराखण्ड शासन के शासनादेश दिनांक 20.02.2026 में उल्लिखित निरन्तर योजित शर्त / प्रतिबन्ध को विलोपित करते हुये दिनांक 01.01.2016 से पूर्व कार्य कर रहे उपनलकर्मी जो वर्तमान में भी कार्यरत हों, को शासनादेश दिनांक 03.02.2026 (यथासंशोधित) के अधीन न्यूनतम वेतन व महँगाई भते का लाभ प्रदान किया जायेगा।

(3) यदि किसी विभाग में सृजित/स्वीकृत पदों के सापेक्ष अतिरिक्त उपनल कार्मिक कार्य कर रहें हों तो उस स्थिति में समान कार्य समान वेतन के लाभ हेतु उपनल से नियुक्ति की तिथि का संज्ञान लेते हुये नियुक्ति तिथि (डेट ऑफ ज्वॉइनिंग) की वरीयता क्रम में कार्मिकों को सर्वप्रथम सृजित/स्वीकृत पदों के सापेक्ष नियोजित माना जायेगा। शेष उपनल कार्मिकों को स्वीकृत पद के सापेक्ष कार्याेजित होने तक उसी विभाग/कार्यालय में संवर्ग के प्रारम्भिक (सीधी भर्ती के) पद के सापेक्ष वेतनमान के आधार पर कार्याेजित किया जा सकेगा, जिसके लिए वह न्यूनतम अर्हता धारित करते हों। पद उपलब्ध न होने की स्थिति में अधिसंख्य पदों का सृजन/समायोजन करवाया जाएगा। इस प्रकार के समायोजन/अधिसंख्य पद सृजन पर त्वरित निर्णय लिए जाने हेतु शासन स्तर पर एक पृथक व्यवस्था (समिति) गठित की जायेगी।

(4) इस श्रेणी में आने वाले पूर्व उपनलकर्मी जिन्हें उच्च न्यायालय के आदेशों के क्रम में प्रत्यक्ष अनुबन्ध पर कार्याेजित किया जा रहा है, उन्हें वेतनमान का न्यूनतम एवं परिवर्तनीय महंगाई भत्ता का लाभ प्रदान किया जायेगा।

(5) न्यायालय के आदेशों के अनुपालन में सैनिक कल्याण विभाग द्वारा निर्गत आदेशों में उल्लिखित शर्तों एवं प्रतिबन्धों के अधीन रहते हुए विभिन्न निगमों, परिषदों एवं स्वायतशासी संस्थाओं द्वारा इस संबंध में स्वयं के स्तर पर निर्णय लिया

16- मुख्यमंत्री द्वारा घोषणा संख्या-778/2025 ‘सेवामुक्त होकर लौटने वाले अग्निवीरों को राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए एक समर्पित सेल की स्थापना की जायेगी‘ के क्रियान्वयन हेतु राज्य सरकार के स्तर पर सेवामुक्त अग्निवीरों से संबंधित विषयों के लिए एक समर्पित प्रकोष्ठ स्थापित किए जाने तथा प्रकोष्ठ के प्रभावी कार्यान्वयन हेतु संविदा के आधार पर निम्नलिखित कुल-06 पदों के सृजन के प्रस्ताव पर मा० मंत्रिमण्डल द्वारा सहमति प्रदान की गयी है-
उप निदेशक – 01
सहायक निदेशक 02
कनिष्ठ सहायक 02
डाटा इंट्री ऑपरेटर 01

17-उत्तराखण्ड पावर कॉर्पाेरेशन लिमिटेड (UPCI) द्वारा ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने और विश्वसनीय बेस-लोड बिजली की आपूर्ति हेतु राज्य सरकार को प्रस्तुत 1320 मेगावाट कोयला आधारित बिजली खरीद के संबंध में न्यूनतम बोलीदाता (L1) अडानी पावर लिमिटेड से ₹5.746 प्रति यूनिट के कुल टैरिफ पर 25 वर्षों के लिए 1320 मेगावाट (1234 मेगावाट अनुबंधित क्षमता) कोयला आधारित बिजली की खरीद को स्वीकृति प्रदान किये जाने एवं उत्तराखण्ड पावर कारपोरेशन लि० को अडानी पावर लिमिटेड के साथ बिजली आपूर्ति समझौते (PSA) एवं अन्य सम्बन्धित अभिलेखों पर हस्ताक्षर करने, आवश्यक शर्तों को पूरा करने और नियामक आयोग (UERC) से वैधानिक स्वीकृतियां प्राप्त करने के लिए अधिकृत किये जाने के प्रस्ताव पर मा० मंत्रिमण्डल द्वारा स्वीकृति प्रदान की गयी है।

शहीद सैनिकों की स्मृति में गांवों में स्थापित होंगी मूर्तियां
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में उत्तराखंड के शहीद सैनिकों के सम्मान में महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। राज्य के शहीद सैनिकों की मूर्तियां उनके पैतृक गांवों में स्थापित की जाएंगी। सरकार का उद्देश्य शहीदों की वीरता और बलिदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाना तथा उनके परिजनों के प्रति सम्मान व्यक्त करना है। इस पहल से शहीद सैनिकों की स्मृतियां सदैव जीवंत रहेंगी और युवाओं को राष्ट्रसेवा की प्रेरणा मिलेगी।

सीएम निर्देश, आवश्यक वस्तुओं की कालाबाजारी, जमाखोरी और मुनाफाखोरी के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शासन के वरिष्ठ अधिकारियों को प्रदेश में आवश्यक वस्तुओं के मूल्यों पर प्रभावी नियंत्रण बनाए रखने तथा आम जनता को उचित दरों पर आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि कालाबाजारी, जमाखोरी और मुनाफाखोरी के माध्यम से कृत्रिम रूप से कीमतें बढ़ाने वालों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाए।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग सहित संबंधित विभाग बाजार में आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता एवं उनके मूल्यों की नियमित निगरानी करें। यह सुनिश्चित किया जाए कि किसी भी स्तर पर आवश्यक वस्तुओं की कृत्रिम कमी पैदा कर आम जनता से अधिक मूल्य न वसूला जाए। उन्होंने कहा कि बाजार में मांग और आपूर्ति की स्थिति पर भी लगातार नजर रखी जाए तथा आवश्यकता के अनुसार समयबद्ध और प्रभावी कदम उठाए जाएं।

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि सभी जनपदों में प्रशासन द्वारा नियमित रूप से बाजारों का निरीक्षण किया जाए। आवश्यक वस्तुओं के निर्धारित एवं प्रचलित बाजार मूल्यों की जांच के साथ ही स्टॉक की स्थिति पर भी नजर रखी जाए। कालाबाजारी, जमाखोरी अथवा निर्धारित मानकों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार आम जनता के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। आवश्यक वस्तुओं के मूल्यों में अनावश्यक वृद्धि का सीधा प्रभाव आम नागरिकों के घरेलू बजट पर पड़ता है, इसलिए मूल्य नियंत्रण से संबंधित सभी व्यवस्थाएं प्रभावी और पारदर्शी होनी चाहिए। उन्होंने शासन और जिला प्रशासन के अधिकारियों को आपसी समन्वय से कार्य करते हुए बाजार की स्थिति पर सतत निगरानी रखने तथा किसी भी प्रकार की अनियमितता की शिकायत मिलने पर तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश दिए।

धामी सरकार की बागेश्वर को बड़ी सौगात, पहाड़ की पहचान से सजेगा राज्य अतिथि गृह

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दिशा-निर्देशों पर राज्य में सरकारी परिसंपत्तियों के विकास और निर्माण कार्यों को गुणवत्ता एवं उपयोगिता के साथ आगे बढ़ाया जा रहा है। इसी क्रम में सोमवार को सचिव राज्य संपत्ति एवं आवास डॉ. आर. राजेश कुमार ने बागेश्वर में प्रस्तावित राज्य अतिथि गृह के निर्माण कार्य की समीक्षा की। सचिव की अध्यक्षता में उनके कार्यालय कक्ष में विभागीय व्यय वित्त समिति की बैठक आयोजित हुई। बैठक में राज्य अतिथि गृह निर्माण कार्य योजना के ₹1930.11 लाख के संस्तुत विस्तृत आगणन पर विस्तार से चर्चा की गई।

स्थानीय पहाड़ी वास्तुशैली में बनेगा भवन
बैठक में कार्यदायी संस्था प्रान्तीय खंड, लोक निर्माण विभाग, बागेश्वर की ओर से प्रस्तावित कार्ययोजना का विस्तृत प्रस्तुतीकरण किया गया। प्रस्तुतीकरण के बाद सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने अधिकारियों को निर्माण से जुड़े कई महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रस्तावित राज्य अतिथि गृह का भवन आकर्षक स्थानीय पहाड़ी वास्तुशैली पर आधारित होना चाहिए, ताकि भवन अपनी उपयोगिता के साथ बागेश्वर की स्थानीय पहचान और वास्तुकला को भी प्रदर्शित करे। सचिव ने भवन के प्रवेश द्वार और मुख्य भवन पर राज्य अतिथि गृह का लोगो एवं साइनेज आकर्षक, स्पष्ट और प्रमुखता से प्रदर्शित करने के निर्देश दिए। उनका कहना था कि सरकारी भवनों के निर्माण में आधुनिक सुविधाओं के साथ स्थानीय परिवेश और वास्तुशैली का भी विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए।

डोरमेट्री में 20 लोगों की क्षमता
बैठक में अतिथि गृह में प्रस्तावित डोरमेट्री कक्ष की क्षमता को लेकर भी निर्देश दिए गए। सचिव ने डोरमेट्री कक्ष को 20 व्यक्तियों के अनुरूप विकसित करने को कहा। साथ ही उपलब्ध अतिरिक्त क्षेत्रफल का बेहतर उपयोग करते हुए उसमें एक स्टोर कक्ष प्रस्तावित करने के निर्देश दिए गए। इससे भवन की उपयोगिता और व्यवस्थाओं को और बेहतर किया जा सकेगा। सचिव ने कार्यदायी संस्था को निर्देश दिए कि बैठक में दिए गए सभी सुझावों और आवश्यक संशोधनों को कार्ययोजना में शामिल किया जाए। संशोधित प्रस्ताव तैयार कर शासन के समक्ष प्रस्तुत करने को कहा गया, ताकि निर्माण कार्य को निर्धारित प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ाया जा सके। बैठक में अपर सचिव एवं राज्य संपत्ति अधिकारी अभिषेक रुहेला, संयुक्त सचिव राज्य संपत्ति विभाग सुरेंद्र सिंह रावत, नियोजन विभाग के प्रतिनिधि अयाज अहमद तथा कार्यदायी संस्था की ओर से अधिशासी अभियंता ऋषिराज वर्मा उपस्थित रहे। अधिकारियों ने प्रस्तावित राज्य अतिथि गृह से संबंधित विभिन्न तकनीकी एवं उपयोगिता पक्षों पर चर्चा की।

डॉ. आर. राजेश कुमार ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशों के अनुरूप राज्य में सरकारी परिसंपत्तियों के निर्माण में गुणवत्ता, उपयोगिता और स्थानीय परिस्थितियों को प्राथमिकता दी जा रही है। बागेश्वर में प्रस्तावित राज्य अतिथि गृह का भवन केवल एक सरकारी आवासीय सुविधा तक सीमित न रहे, बल्कि क्षेत्र की स्थानीय पहचान और पहाड़ी वास्तुशैली को भी प्रदर्शित करे, इसका विशेष ध्यान रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि भवन में आने वाले अतिथियों के लिए आवश्यक सुविधाएं सुनिश्चित करने के साथ उपलब्ध भूमि और क्षेत्रफल का बेहतर उपयोग किया जाना चाहिए। डोरमेट्री की क्षमता 20 व्यक्तियों के अनुरूप रखने और अतिरिक्त क्षेत्र में स्टोर की व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं। बैठक में दिए गए सभी सुझावों को कार्ययोजना में शामिल कर संशोधित रिपोर्ट शासन को प्रस्तुत करने के निर्देश कार्यदायी संस्था को दिए गए हैं।