लाइब्रेरी चौक से लाल टिब्बा तक प्रस्तावित स्टेशनों का सचिव आवास ने किया निरीक्षण, तकनीकी और पर्यावरणीय पहलुओं की हुई समीक्षा

पर्यटन नगरी मसूरी में लगातार बढ़ रही पर्यटकों की संख्या और बढ़ते यातायात दबाव को कम करने के उद्देश्य से प्रस्तावित मसूरी मेट्रो रोपवे परियोजना को आगे बढ़ाने की दिशा में सरकार ने तैयारियां तेज कर दी हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दिशा-निर्देशों के क्रम में शुक्रवार को सचिव आवास डॉ. आर. राजेश कुमार ने उत्तराखंड मेट्रो रेल कॉर्पाेरेशन, जिला प्रशासन, नगर पालिका मसूरी तथा अन्य संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ प्रस्तावित रोपवे टर्मिनल स्टेशनों, और संबंधित भूमि का विस्तृत स्थलीय निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान परियोजना की तकनीकी व्यवहार्यता, पर्यावरणीय संतुलन और यातायात प्रबंधन से जुड़े विभिन्न पहलुओं की समीक्षा करते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।

लाइब्रेरी चौक में रोपवे परियोजना को लेकर हुई चर्चा
सचिव आवास डॉ. आर. राजेश कुमार की अगुवाई में अधिकारियों की टीम मसूरी के लाइब्रेरी चौक पर एकत्रित हुई। इस दौरान संबंधित अधिकारियों ने उन्हें प्रस्तावित रोपवे परियोजना की विस्तृत जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि प्रस्तावित रोपवे का मार्ग लाइब्रेरी चौक क्षेत्र से होकर गुजरेगा, जिसके मद्देनजर परियोजना से संबंधित आवश्यक भूमि और अन्य व्यवस्थाओं पर विचार-विमर्श किया गया। सचिव आवास ने मौके पर उपलब्ध भूमि की संभावनाओं का आकलन करते हुए आवश्यक निर्देश दिए। इस दौरान परियोजना के तकनीकी पहलुओं और भविष्य की आवश्यकताओं पर भी चर्चा हुई।

रोपवे टर्मिनल स्टेशन के संभावित स्थलों का किया निरीक्षण
इसके बाद सचिव आवास डॉ आर राजेश कुमार के नेतृत्व में टीम ने पिक्चर पैलेस (चिक चॉकलेट) तथा गढ़वाल मंडल विकास निगम (मॉल रोड) के निकट प्रस्तावित रोपवे टर्मिनल स्टेशन के संभावित स्थानों का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने यात्रियों की आवाजाही, पहुंच मार्ग, सुरक्षा, तकनीकी व्यवहार्यता तथा यातायात प्रबंधन से जुड़े विभिन्न बिंदुओं पर विस्तार से विचार-विमर्श किया।

भनौत एस्टेट और लाल टिब्बा क्षेत्र का भी लिया जायजा
निरीक्षण के अगले चरण में अधिकारियों ने आईएनआई डिस्पेंसरी एवं भनौत एस्टेट क्षेत्र की प्रस्तावित भूमि का निरीक्षण किया। इसके बाद नहाटा एस्टेट (लाल टिब्बा) में प्रस्तावित अपर रोपवे टर्मिनल स्टेशन के आसपास स्थित चार दुकानों वाले क्षेत्र का भी बारीकी से निरीक्षण किया गया। इस दौरान स्थल की भौगोलिक स्थिति, निर्माण की व्यवहार्यता तथा भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए चर्चा की गई।

चार दुकान क्षेत्र में वैकल्पिक स्थान तलाशने के निर्देश
सचिव आवास डॉ. आर. राजेश कुमार ने निरीक्षण के दौरान पाया कि चिक चॉकलेट/चार दुकान क्षेत्र में प्रस्तावित स्टेशन के लिए उपलब्ध स्थान सीमित है और वहां की भौगोलिक परिस्थितियां भी चुनौतीपूर्ण हैं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि स्टेशन के लिए अधिक सुरक्षित एवं उपयुक्त वैकल्पिक स्थान का चयन करते हुए भू-तकनीकी (जियो-टेक्निकल) अध्ययन के आधार पर नया प्रस्ताव तैयार किया जाए, ताकि भविष्य में किसी प्रकार की तकनीकी अथवा सुरक्षा संबंधी समस्या उत्पन्न न हो।

पर्यावरण संरक्षण और पर्यटन विकास के बीच रहेगा संतुलन
निरीक्षण के दौरान इस बात पर विशेष बल दिया गया कि परियोजना को विकसित करते समय मसूरी की प्राकृतिक सुंदरता, पर्यावरणीय संतुलन और ऐतिहासिक पहचान से किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि निर्माण कार्य के दौरान पर्यावरणीय मानकों का पूर्ण पालन सुनिश्चित किया जाए और परियोजना को पर्यटन हितैषी स्वरूप में विकसित किया जाए।

पर्यटकों और स्थानीय लोगों को मिलेगा सीधा लाभ
मसूरी मेट्रो रोपवे परियोजना के क्रियान्वयन से पर्यटन सीजन में लगने वाले लंबे जाम से राहत मिलने की उम्मीद है। इसके साथ ही स्थानीय नागरिकों और पर्यटकों को सुरक्षित, तेज, सुविधाजनक और पर्यावरण अनुकूल परिवहन सुविधा उपलब्ध होगी। परियोजना के पूरा होने से पर्यटन गतिविधियों को भी नई गति मिलने की संभावना है।

सचिव आवास की मौजूदगी में हुआ व्यापक निरीक्षण
सचिव आवास डॉ आर राजेश कुमार की मौजूदगी में अधिकारियों ने परियोजना के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा करते हुए स्थल की भौगोलिक परिस्थितियों और निर्माण संबंधी संभावनाओं का भी आकलन किया। निरीक्षण दल में उत्तराखंड मेट्रो रेल कॉर्पाेरेशन के प्रबंध निदेशक ब्रिजेश कुमार मिश्रा, उप जिलाधिकारी मसूरी राहुल आनंद, संयुक्त महाप्रबंधक (सिविल) जय नंदन सिन्हा, नगर पालिका मसूरी के अधिशासी अधिकारी गौरव भसीन, रेंज अधिकारी महेंद्र नेगी, प्रबंधक सिविल अभिषेक त्यागी, सेक्शन इंजीनियर सौरभ पटवाल, अशोक डोभाल, वरिष्ठ सर्वेयर कुंदन सिंह अधिकारी तथा वरिष्ठ सर्वेयर हरिओम सिंह सहित कई अधिकारी मौजूद रहे।

सचिव आवास डॉ. आर. राजेश कुमार का बयान
सचिव आवास डॉ. आर. राजेश कुमार ने कहा, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार उत्तराखंड में आधुनिक, सुरक्षित और पर्यावरण अनुकूल परिवहन व्यवस्था विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है। मसूरी मेट्रो रोपवे परियोजना पर्यटन नगरी में बढ़ते यातायात दबाव का दीर्घकालिक समाधान उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। हमारा प्रयास है कि परियोजना तकनीकी रूप से मजबूत, सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल हो, ताकि स्थानीय लोगों और देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को बेहतर आवागमन की सुविधा मिल सके तथा मसूरी की प्राकृतिक और ऐतिहासिक पहचान भी अक्षुण्ण बनी रहे।

सीएस ने सचिवालय में यूएनडीपी की भारत में डिप्टी रेजिडेंट रिप्रेजेंटेटिव ईजाबेल का किया स्वागत

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन से सचिवालय में संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) की भारत में डिप्टी रेजिडेंट रिप्रेजेंटेटिव ईजाबेल ने शिष्टाचार भेंट की। इस अवसर पर उत्तराखण्ड सरकार एवं यूएनडीपी के मध्य चल रहे विभिन्न कार्यक्रमों पर चर्चा हुयी।

मुख्य सचिव ने उत्तराखण्ड में ईजाबेल एवं उनकी टीम का स्वागत किया। कुछ विशेष क्षेत्रों की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए मुख्य सचिव ने कहा कि स्किल एवं रोजगार, कार्बन क्रेडिट, डिजीटाईजेशन एवं ऑनलाईन सिस्टम का विकास एवं बच्चे के जन्म से ट्रेकिंग सिस्टम लागू करने के लिए यूएनडीपी द्वारा उनकी विशेषज्ञता का लाभ प्रदेश को हो सकता है। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड की साक्षरता दर बहुत अच्छी है, यहां युवाओं को कौशल विकास पर कार्य करने की आवश्यकता है। उन्होंने यूएनडीपी से प्रदेश में कौशल विकास के साथ आजीविका के क्षेत्र में कार्य किए जाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि उत्तरखण्ड में कौशल विकास एवं रोजगार पर विशेष फोकस किए जाने की आवश्यकता है।

मुख्य सचिव ने यूएनडीपी से कार्बन क्रेडिट के क्षेत्र में भी सहयोग किए जाने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड एक हिमालयी राज्य है, जिसमें 70 प्रतिशत फॉरेस्ट लैण्ड है। यह पर्यावरण की दृष्टि से काफी महत्त्वपूर्ण है। उन्होंने प्रदेश में डिजिटल और ऑनलाइन सिस्टम को बढ़ाने एवं बच्चे के जन्म से ही ट्रैकिंग सिस्टम लागू करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। उन्होंने इन दोनों क्षेत्रों में यूएनडीपी से सहयोग की बात कही।

यूएनडीपी से सुश्री ईजाबेल ने बताया कि यूएनडीपी प्रदेश में सार्वजनिक नीति और सुशासन (सीपीपीजीजी) के साथ ही सतत् विकास लक्ष्य को तेजी से बढ़ाने की दिशा में कार्य कर रहा है। यूएनडीपी प्रदेश में सतत विकास लक्ष्य का स्थानीयकरण और एकीकरण, निगरानी और मूल्यांकन, सार्वजनिक नीति, उत्पादक अर्थव्यवस्था और उद्यमिता, आईटी और एमआईएस, संचार और क्षमता निर्माण के साथ ही सीएसआर और निजी क्षेत्र में तकनीकी सहयोग उपलब्ध करा रहा है। राज्य सरकार एवं यूएनडीपी के मध्य एक व्यापक समझौता ज्ञापन हुआ है, जो जलवायु परिवर्तन, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, ऊर्जा, जैव विविधता संरक्षण, आपदा जोखिम में कमी और लचीलापन, आजीविका, कौशल विकास (जिसमें सर्कुलर इकोनॉमी भी शामिल है), सिस्टम को मज़बूत करना एवं ज्ञान प्रबंधन के क्षेत्र में तकनीकी सहायता उपलब्ध कराएगा।

इस अवसर पर प्रमुख सचिव आर. मीनाक्षी सुन्दरम, अपर सचिव नरेन्द्र सिंह भण्डारी, यूएनडीपी से सत्यन चौहान एवं प्रदीप मेहता भी उपस्थित थे।

नियुक्ति पत्र देकर सीएम धामी बोले, यह पत्र जनसेवा का संकल्प और सवा करोड़ राज्य की जनता के विश्वास का प्रतीक

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय स्थित मुख्य सेवक सदन में आयोजित कार्यक्रम में उत्तराखंड लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित पीसीएस मुख्य परीक्षा-2024 में चयनित 182 अभ्यर्थियों तथा कृषि एवं कृषक कल्याण विभाग में वैयक्तिक सहायक के पद पर चयनित 5 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र प्रदान किए।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने सभी नवचयनित अभ्यर्थियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह नियुक्ति पत्र केवल सरकारी सेवा में प्रवेश का दस्तावेज नहीं, बल्कि सवा करोड़ उत्तराखंडवासियों के विश्वास, अपेक्षाओं और जनसेवा के संकल्प का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि अब प्रत्येक अधिकारी की पहचान उसके पद से नहीं, बल्कि उसकी कार्यशैली, संवेदनशीलता और जनसेवा के प्रति समर्पण से होगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड पीसीएस मुख्य परीक्षा-2024 के लिए लगभग डेढ़ लाख अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था तथा 71 हजार से अधिक अभ्यर्थी परीक्षा में सम्मिलित हुए, जिनमें से केवल 182 अभ्यर्थियों का चयन हुआ। उन्होंने कहा कि यह सफलता चयनित अभ्यर्थियों की प्रतिभा, कठिन परिश्रम, अनुशासन और दृढ़ संकल्प का परिणाम है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि लोकतंत्र में पद का अर्थ शासन करना नहीं, बल्कि जनता की सेवा करना है। राज्य सरकार सरलीकरण, समाधान, निस्तारीकरण एवं संतुष्टि के मंत्र के साथ कार्य कर रही है। उन्होंने नवचयनित अधिकारियों का आह्वान किया कि वे समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक शासन की योजनाओं और सेवाओं का लाभ संवेदनशीलता एवं पारदर्शिता के साथ पहुंचाना सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि दूरस्थ क्षेत्रों से आने वाले प्रत्येक नागरिक को सरकारी कार्यालय में सम्मान, विश्वास और समयबद्ध समाधान का अनुभव होना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने भर्ती प्रक्रियाओं में पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए देश का सबसे कठोर नकल विरोधी कानून लागू किया। इसके परिणामस्वरूप भर्ती परीक्षाओं के प्रति युवाओं का विश्वास सुदृढ़ हुआ है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने बीते साढ़े चार वर्षों में 34 हजार से अधिक युवाओं को पूर्ण पारदर्शिता एवं निष्पक्षता के साथ सरकारी सेवाओं में नियुक्ति प्रदान की है। आज 187 और युवाओं के इस अभियान से जुड़ने के साथ राज्य सरकार की युवा हितैषी प्रतिबद्धता और अधिक मजबूत हुई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य उत्तराखंड के प्रत्येक युवा को उसकी प्रतिभा और योग्यता के अनुरूप अवसर उपलब्ध कराना है, ताकि रोजगार की तलाश में युवाओं को राज्य से बाहर जाने के लिए विवश न होना पड़े। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार पहाड़ के पानी और पहाड़ की जवानी, दोनों को उत्तराखंड के विकास की सबसे बड़ी शक्ति बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बाबा केदार की पावन भूमि से 21वीं सदी के तीसरे दशक को उत्तराखंड का दशक बताया है। इस संकल्प को साकार करने में नवचयनित अधिकारियों की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। उन्होंने कहा कि सरकार नीतियां बनाती है, लेकिन उन्हें प्रभावी ढंग से धरातल पर उतारने का दायित्व अधिकारियों और कर्मचारियों का होता है। उन्होंने सभी अधिकारियों से विकसित उत्तराखंड के निर्माण के लिए पूर्ण निष्ठा, ईमानदारी और समर्पण के साथ कार्य करने का आह्वान किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ईमानदारी और निष्पक्षता से कार्य करने वाले प्रत्येक अधिकारी एवं कर्मचारी के साथ राज्य सरकार पूरी मजबूती से खड़ी रहेगी। उन्होंने अधिकारियों से आह्वान किया कि वे किसी भी प्रकार के दबाव से मुक्त होकर संविधान, कानून और जनहित को सर्वाेच्च प्राथमिकता देते हुए अपने दायित्वों का निर्वहन करें।

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी, डॉ. धन सिंह रावत, रामसिंह कैड़ा, विधायक सविता कपूर, गोरखा कल्याण परिषद की अध्यक्ष ज्योति कोटिया, प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु, सचिव शैलेश बगौली, दिलीप जावलकर, रविनाथ रमन, चंद्रेश कुमार, बृजेश कुमार संत, विनय शंकर पांडेय, एस.एन. पाण्डेय, डीजी होमगार्ड डॉ. पी. वी. के प्रसाद, डीजी अभिसूचना एवं सुरक्षा अभिनव कुमार, एडीजी डॉ. वी. मुरुगेशन, अपर सचिव नवनीत पाण्डेय एवं संबंधित विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।

आपदा प्रबंधन को जोखिम न्यूनीकरण, पूर्व तैयारी तथा तकनीक आधारित प्रबंधन पर विशेष बल देंः धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आईटी पार्क, देहरादून में आयोजित राज्य स्तरीय मानसून पूर्व मॉक ड्रिल में अधिकारियों को प्रभावी आपदा प्रबंधन के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड जैसे संवेदनशील राज्य में आपदा प्रबंधन केवल प्रशासनिक दायित्व नहीं, बल्कि सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि मानसून के दौरान संभावित आपदाओं से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए पूर्व तैयारी, त्वरित निर्णय, बेहतर समन्वय तथा आधुनिक तकनीकों का समुचित उपयोग अत्यंत आवश्यक है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य स्तरीय मॉक ड्रिल आपदा प्रबंधन तंत्र की क्षमता को और अधिक सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। यह केवल एक अभ्यास नहीं, बल्कि विभिन्न विभागों के बीच समन्वय, संचार व्यवस्था, संसाधनों की उपलब्धता तथा राहत एवं बचाव तंत्र की वास्तविक क्षमता का व्यापक परीक्षण है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि आपदा प्रबंधन को केवल राहत एवं बचाव तक सीमित न रखकर जोखिम न्यूनीकरण, पूर्व तैयारी तथा तकनीक आधारित प्रबंधन पर विशेष बल दिया जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में एआई आधारित अर्ली वार्निंग सिस्टम, डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम, ड्रोन सर्विलांस, जीआईएस मैपिंग, सैटेलाइट मॉनिटरिंग तथा डेटा आधारित जोखिम आकलन जैसी आधुनिक तकनीकों को आपदा प्रबंधन से जोड़ा जा रहा है, जिससे संभावित खतरों का समय रहते सटीक आकलन कर जन-धन की हानि को न्यूनतम किया जा सके।
उन्होंने कहा कि आपातकालीन परिस्थितियों में त्वरित राहत एवं बचाव सुनिश्चित करने के लिए रैपिड रिस्पॉन्स टीमों को सशक्त बनाया गया है तथा अर्ली वार्निंग सिस्टम को लगातार मजबूत किया जा रहा है, ताकि दूरस्थ एवं संवेदनशील क्षेत्रों तक समय पर चेतावनी पहुंचाई जा सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि जल स्रोत संरक्षण, ग्लेशियर अध्ययन, पौधारोपण, पर्यावरण संरक्षण तथा जन-जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र को सुरक्षित रखने की दिशा में निरंतर कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण ही आपदा जोखिम को कम करने का सबसे प्रभावी माध्यम है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में संचालित विभिन्न राहत एवं बचाव अभियानों ने वैज्ञानिक सोच, आधुनिक तकनीकों, त्वरित निर्णय क्षमता तथा टीमवर्क की उत्कृष्ट मिसाल प्रस्तुत की है। उन्होंने निर्देश दिए कि मॉक ड्रिल के दौरान प्राप्त अनुभवों एवं कमियों का गंभीरता से विश्लेषण किया जाए तथा सभी जनपद 72 घंटे के भीतर अपनी विस्तृत समीक्षा रिपोर्ट उत्तराखण्ड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण को उपलब्ध कराएं। उन्होंने कहा कि प्रत्येक नागरिक को आपदा सुरक्षा उपायों, आपातकालीन संपर्क नंबरों एवं प्राथमिक सावधानियों की जानकारी उपलब्ध कराने के लिए व्यापक जन-जागरूकता अभियान संचालित किए जाएं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य केवल आपदा के बाद राहत पहुंचाना नहीं, बल्कि आपदा जोखिम को न्यूनतम करना, जन-धन की सुरक्षा सुनिश्चित करना तथा उत्तराखण्ड को देश का सबसे सक्षम, तकनीक-सक्षम एवं जनभागीदारी आधारित आपदा प्रबंधन मॉडल बनाना है। उन्होंने सभी से पूर्व तैयारी, आधुनिक तकनीक, प्रभावी समन्वय एवं जनभागीदारी के बल पर उत्तराखण्ड को आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में देश का सर्वश्रेष्ठ राज्य बनाने के लिए कार्य करने का आह्वान किया।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने उत्तराखण्ड राज्य आपदा प्रबंधन योजना तथा राज्य के सभी 13 जनपदों की जिला आपदा प्रबंधन योजनाओं का विमोचन भी किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि एसडीएमपी राज्य स्तर पर आपदा जोखिम न्यूनीकरण, पूर्व तैयारी, पूर्व चेतावनी, राहत, बचाव, पुनर्वास एवं पुनर्निर्माण के लिए सभी विभागों की भूमिका, दायित्व एवं समन्वय व्यवस्था निर्धारित करती है। वहीं डीडीएमपी प्रत्येक जनपद की स्थानीय परिस्थितियों, संभावित आपदाओं, उपलब्ध संसाधनों एवं त्वरित कार्रवाई की विस्तृत कार्ययोजना उपलब्ध कराती है, जिससे आपदा की स्थिति में जिला प्रशासन प्रभावी एवं समन्वित ढंग से कार्य कर सके। आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के प्रावधानों के अनुरूप तैयार की गई ये योजनाएं राज्य एवं जनपद स्तर पर बेहतर समन्वय, आधुनिक तकनीक के उपयोग, प्रभावी पूर्व चेतावनी प्रणाली, समुदाय आधारित आपदा प्रबंधन तथा त्वरित एवं सुनियोजित आपदा प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण मार्गदर्शक दस्तावेज सिद्ध होंगी।

मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर एसडीआरएफ, एनडीआरएफ एवं अग्निशमन विभाग द्वारा लगाए गए आधुनिक राहत एवं बचाव उपकरणों की प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया। उन्हें उपकरणों के संचालन, उपयोगिता एवं आपदा के दौरान उनकी भूमिका की विस्तृत जानकारी दी गई। प्रदर्शनी में विशेष रूप से एनडीआरएफ द्वारा सीबीआरएनई (रासायनिक, जैविक, रेडियोलॉजिकल, परमाणु एवं विस्फोटक) आपदाओं में उपयोग किए जाने वाले अत्याधुनिक उपकरण आकर्षण का केंद्र रहे। इसके अतिरिक्त डीप डाइविंग सेट, नाइट विजन कैमरा, थर्मल इमेजिंग कैमरा, विभिन्न प्रकार के हाइड्रोलिक कटर, अंडरवाटर कम्युनिकेशन सिस्टम, अंडरवाटर ड्रोन तथा सोनार सिस्टम सहित अनेक आधुनिक उपकरणों का प्रदर्शन किया गया।

इस अवसर पर आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास मंत्री मदन कौशिक, आपदा प्रबंधन सलाहकार समिति के उपाध्यक्ष विनय रुहेला, लेफ्टिनेंट कर्नल (से.नि) रघुवीर सिंह भण्डारी, सचिव विनोद सुमन, गढ़वाल मंडल आयुक्त आनंद स्वरूप, आईजी अग्निशमन विम्मी सचदेव, अपर सचिव प्रकाश चंद्र, अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं डीआईजी राजकुमार नेगी, संयुक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी दिनेश कुमार पुनेठा सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

उत्तराखंड में अब विकसित भारत जी राम जी योजना हुई आरंभ

ग्रामीण विकास मंत्रालय, भारत सरकार के दिशा-निर्देशों के क्रम में राज्य में महात्मा गांधी नरेगा योजना के स्थान पर विकसित भारत – जी राम जी योजना दिनांक 1 जुलाई 2026 से प्रारम्भ कर दी गई है। योजनान्तर्गत अकुशल श्रमिकों को वित्तीय वर्ष में 125 दिन का श्रम रोजगार दिये जाने का प्राविधान है। योजनान्तर्गत 318 कार्य अनुमन्य कार्यों की सूची में सम्मिलित किये गये हैं जिसमें जल संरक्षण के 107, मुख्य ग्रामीण अवसंरचना के 88, ग्रामीण आजीविका के 86 एवं आपदा न्यूनीकरण के 37 कार्य हैं। भारत सरकार द्वारा दिनांक 1 जुलाई 2026 से राज्य हेतु रु. 300/- प्रतिदिन मजदूरी दर निर्धारित की गई है।

इस संबंध में सचिव ग्राम्य विकास श्री धीराज गर्ब्याल ने बताया कि प्रदेश में 91.57 प्रतिशत सक्रिय श्रमिकों की ई0-के0वाई0सी0 की जा चुकी है। शेष सभी जॉब कार्ड धारक परिवारों/श्रमिकों से अपेक्षा की जाती है कि वे सम्बन्धित ग्राम पंचायत/विकासखण्ड कार्यालय में एक सप्ताह के भीतर उपस्थित होकर ई0-के0वाई0सी0 करवा लें ताकि योजनान्तर्गत आसानी से अकुशल श्रम रोजगार प्राप्त हो सके। महात्मा गांधी नरेगान्तर्गत जिन सक्रिय श्रमिकों की ई0-के0वाई0सी0 की जा चुकी है उनके जॉब कार्ड विकसित भारत – जी राम जी योजनान्तर्गत ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्ड बनने तक वैध रहेंगे।

उन्होंने बताया कि राज्य में महात्मा गांधी नरेगान्तर्गत वर्तमान में गतिमान कार्यों को विकसित भारत – जी राम जी योजना में अनुमन्य कार्यों के आधार पर समाहित किया जायेगा। इसके लिये समस्त ग्राम पंचायत प्रतिनिधियों के क्षमता विकास हेतु जनपद स्तर पर कार्यशाला का आयोजन किया जायेगा।

प्रदेश में प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के अन्तर्गत सर्वेक्षण सूची को दिया जा रहा अन्तिम रूप सचिव ग्राम्य विकास धीराज गर्ब्याल ने जानकारी दी है कि राज्य में ग्रामीण विकास मंत्रालय, भारत सरकार के निर्देशों के क्रम में समस्त ग्राम पंचायतों में प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के अन्तर्गत पीएमएवाई-जी 2.0 सर्वेक्षण सूची का अन्तिमीकरण किए जाने हेतु ग्राम सभा की खुली बैठकें आयोजित करायी जा रही है, जिसकी अन्तिम तिथि 10 जुलाई, 2026 ग्रामीण विकास मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा निर्धारित की गयी है। उक्त बैठकों में सर्वेक्षण में चिन्हित लाभार्थियों की पात्रता का निर्धारण सम्बन्धित ग्राम सभा द्वारा किया जा रहा है। साथ ही यदि ग्राम सभा की खुली बैठक में किसी पात्र व्यक्ति/परिवार के सर्वे से वंचित/छूटने का प्रकरण संज्ञान में आने पर विकासखण्ड स्तरीय अधिकारियों द्वारा वंचित/छूटे परिवारों की सूची जनपद को प्रेषित की जाएगी। जनपदों द्वारा उक्त सूची दिनांक 06 जुलाई, 2026 तक शासन को प्रेषित की जानी है, ताकि उक्त सूची ससमय आवश्यक कार्यवाही हेतु भारत सरकार को प्रेषित की जा सकें।

औचक निरीक्षण करने पहुंचे डीएम ने कोरोनेशन अस्पताल के वार्डों में गंदगी देख दिए सख्त कार्रवाई के निर्देश

जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने बुधवार की रात ठीक 8ः00 बजे जिला कोरोनेशन अस्पताल का औचक निरीक्षण किया। अचानक हुए इस निरीक्षण से अस्पताल प्रशासन में हड़कंप मच गया। निरीक्षण के दौरान अस्पताल में लापरवाही, गंदगी और घोर अनियमितताओं की परतें खुलती चली गईं, जिस पर नाराजगी जताते हुए जिलाधिकारी ने दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। उन्होंने मुख्य चिकित्सा अधिकारी (ब्डव्) और मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (ब्डै) की एक संयुक्त समिति गठित कर तत्काल रिपोर्ट तलब की है।

आईसीयू में उमस, रजिस्टर खाली और पीआरओ पर गिरी गाज
जिलाधिकारी जब सबसे पहले आईसीयू वार्ड में पहुंचे, तो वहां की स्थिति बेहद चौंकाने वाली थी। जीवन रक्षक माने जाने वाले आईसीयू में मानक के विपरीत एयर कंडीशन बंद पड़ा था, जिससे मरीज उमस और सफोकेशन (घूटन) से बेहाल थे। हैरान करने वाली बात यह रही कि अस्पताल के पीआरओ (च्त्व्) को कई बार कहने के बाद भी एसी चालू नहीं कराया गया, जिस पर डीएम ने पीआरओ के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के निर्देश देते हुए सीएमएस से जवाब मांगा है। इसके अलावा, आईसीयू के स्टॉक रजिस्टर में 29 जून से दवाओं का कोई विवरण नहीं था और सिस्टर इंचार्ज आकस्मिक अवकाश पर पाई गईं। कार्मिकों के उपस्थिति रजिस्टर में भी भारी खामियां मिलीं।

गंभीर मरीज को अनावश्यक रेफर करने पर जताई नाराजगी
अस्पताल के बाल रोग कक्ष, पुरुष, महिला और सर्जरी वार्डों का हाल भी बदतर मिला। पुरुष वार्ड में लीवर की बीमारी से पीड़ित एक ऐसे मरीज को रेफर करने की तैयारी थी, जो अस्पताल में ही रिकवर हो सकता था। इस अनावश्यक रेफरल पर डीएम ने सख्त आपत्ति जताई। यही नहीं, मरीज को ओढ़ने के लिए फटी हुई कंबल दी गई थी, जिस पर अस्पताल मैटर्न से स्पष्टीकरण मांगते हुए सभी फटे कंबलों को तत्काल कंडम (नष्ट) करने का आदेश दिया गया।

अस्पताल की लिफ्ट में चारों तरफ पान की पीक और गंदगी पसरी थी, जबकि सुरक्षा के लिहाज से लिफ्ट में सीसीटीवी कैमरा तक नहीं लगा था। महिला शौचालय में पुरुष यूरिनल लगा देख जिलाधिकारी ने व्यवस्था पर भारी नाराजगी व्यक्त की।

लावारिस मरीज के लिए देवदूत बने जिलाधिकारी
सर्जरी वार्ड में जिलाधिकारी एक लावारिस मरीज के लिए साक्षात देवदूत बनकर पहुंचे। उस वक्त मरीज की हालत बेहद नाजुक थी और उसका शुगर लेवल 40 से भी कम हो चुका था, लेकिन उसकी सुध लेने वाला कोई नहीं था। मरीज के पास गंदगी का अंबार था और बासी खाने की प्लेटें छूटी हुई थीं। जिलाधिकारी की सक्रियता के चलते मरीज को तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई गई। प्रशासनिक अमले के पहुंचने की भनक लगते ही डीएम के आने से महज पांच मिनट पहले वार्ड में आनन-फानन में पोछा लगाया जा रहा था।

जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने सीएमओ और सीएमएस को संयुक्त रूप से अस्पताल की इन सभी परिलक्षित कमियों और व्यवस्थागत खामियों को तत्काल दूर करने के कड़े निर्देश जारी किए हैं, ताकि आम जनता को बेहतर और सम्मानजनक स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकें।

इस दौरान जिलाधिकारी ने वार्ड में मरीजों से बात करते हुए उनका हाल जाना और अस्पताल से मिल रही सुविधाओं का फीडबैक भी लिया। निरीक्षण के दौरान आकस्मिक चिकित्सा अधिकारी मनीष शर्मा सहित अस्पताल के अन्य चिकित्सा अधिकारी मौजूद थे।

उत्तराखंड में स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण को लेकर उत्तराखंड सरकार प्रतिबद्धः धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इंडियन मेडिकल एसोसिएशन, देहरादून शाखा द्वारा चकराता रोड देहरादून स्थित स्थानीय होटल में नेशनल डॉक्टर्स डे के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने प्रदेश के चिकित्सकों, स्वास्थ्य कर्मियों और चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े सभी लोगों को डॉक्टर्स डे की शुभकामनाएं दीं तथा उत्कृष्ट चिकित्सकों को सम्मानित किया।

मुख्यमंत्री ने भारत रत्न डॉ. बिधान चंद्र रॉय की जयंती एवं पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनका जीवन चिकित्सा सेवा, मानव कल्याण और राष्ट्र निर्माण के प्रति समर्पण की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि चिकित्सक केवल रोगों का उपचार करने वाले विशेषज्ञ नहीं होते, बल्कि वे समाज में विश्वास, उम्मीद और जीवन की नई ऊर्जा का संचार करते हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय संस्कृति में चिकित्सकों को विशेष सम्मान दिया गया है। चिकित्सक अपनी सेवा, संवेदना और समर्पण से मानवता की सबसे बड़ी सेवा करते हैं। उन्होंने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड में चिकित्सक कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बीच भी जनसेवा कर रहे हैं और पर्वतीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य व्यवस्था की मजबूती के महत्वपूर्ण आधार हैं।

उन्होंने कोरोना महामारी के दौरान चिकित्सकों, नर्सिंग स्टाफ, पैरामेडिकल कर्मियों और समस्त स्वास्थ्य योद्धाओं के योगदान को याद करते हुए कहा कि संकट के उस दौर में स्वास्थ्य कर्मियों ने अपने कर्तव्य को सर्वाेच्च प्राथमिकता दी। अनेक चिकित्सकों ने मानव जीवन की रक्षा के लिए अपने प्राणों का बलिदान तक दिया, उनका त्याग सदैव प्रेरणादायी रहेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश और प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं का लगातार विस्तार किया जा रहा है। उत्तराखंड में आयुष्मान भारत योजना के माध्यम से लाखों जरूरतमंद परिवारों को कैशलेस उपचार की सुविधा मिल रही है। प्रदेश में अब तक 62 लाख से अधिक आयुष्मान कार्ड बनाए जा चुके हैं तथा लगभग 12 लाख से अधिक मरीजों को 2300 करोड़ रुपये से अधिक का निःशुल्क उपचार उपलब्ध कराया गया है।

उन्होंने कहा कि राज्य में स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने के लिए मेडिकल कॉलेजों, नर्सिंग संस्थानों और आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। वर्तमान में प्रदेश में पांच मेडिकल कॉलेज संचालित हैं जबकि दो मेडिकल कॉलेज निर्माणाधीन हैं। इसके साथ ही नर्सिंग शिक्षा को भी मजबूत किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि देहरादून, हल्द्वानी और श्रीनगर मेडिकल कॉलेजों में सुपर स्पेशियलिटी सेवाओं को बढ़ाया जा रहा है। हल्द्वानी में आधुनिक कैंसर संस्थान का निर्माण प्रगति पर है। जिला अस्पतालों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को आधुनिक सुविधाओं से लैस किया जा रहा है। किच्छा में एम्स के सेटेलाइट सेंटर का निर्माण भी अंतिम चरण में है।

उन्होंने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के लिए टेलीमेडिसिन सेवाओं का विस्तार किया गया है। इसके साथ ही आपातकालीन परिस्थितियों में हेली एंबुलेंस सेवा भी लोगों के लिए जीवनरक्षक साबित हो रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार चिकित्सकों, नर्सिंग अधिकारियों और स्वास्थ्य कर्मियों की नियुक्तियों पर विशेष ध्यान दे रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि चिकित्सकों की सुरक्षा, सम्मान और उनके बेहतर कार्य वातावरण को सुनिश्चित करना राज्य सरकार की प्राथमिकता है। किसी भी चिकित्सक के साथ हिंसा या अभद्र व्यवहार को स्वीकार नहीं किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक जैसे डिजिटल हेल्थ, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और टेलीमेडिसिन स्वास्थ्य सेवाओं में नए अवसर लेकर आई हैं, लेकिन स्वास्थ्य व्यवस्था की सबसे बड़ी ताकत समर्पित मानव संसाधन ही है। मरीज के लिए चिकित्सक उपचार के साथ विश्वास और संवेदना का प्रतीक होता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार, चिकित्सा संस्थानों, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन और समाज के सामूहिक प्रयासों से उत्तराखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि दुर्गम क्षेत्रों में सेवा दे रहे चिकित्सकों का योगदान विशेष रूप से सराहनीय है।

मुख्यमंत्री ने सभी चिकित्सकों से अपने स्वास्थ्य का भी ध्यान रखने का आह्वान किया और कहा कि स्वस्थ चिकित्सक ही स्वस्थ समाज के निर्माण में प्रभावी भूमिका निभा सकता है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का संकल्प है कि उत्तराखंड का प्रत्येक नागरिक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ सके और सभी के सहयोग से एक स्वस्थ, सशक्त एवं आत्मनिर्भर उत्तराखंड का निर्माण किया जाएगा।

इस अवसर पर विधायक सविता कपूर सहित अन्य जनप्रतिनिधि, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के पदाधिकारी, चिकित्सा क्षेत्र के विशेषज्ञ डॉक्टर, स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी एवं अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

किताब-कॉपी और कौशल से सशक्त होगा अल्पसंख्यक समाज, शिक्षा को बनाया विकास का आधारः धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री आवास में आयोजित कार्यक्रम में उत्तराखण्ड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने विभिन्न अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों को मान्यता प्रमाण पत्र भी वितरित किए।

मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर अल्पसंख्यक विद्यालयों के विद्यार्थियों को एन.सी.ई.आर.टी. की पुस्तकें भी भेंट कीं और कहा कि गुणवत्तापूर्ण एवं आधुनिक शिक्षा की दिशा में यह पहल विद्यार्थियों के भविष्य को मजबूत आधार प्रदान करेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड देवभूमि होने के साथ-साथ ज्ञान, शिक्षा और आध्यात्म की समृद्ध परंपरा वाली भूमि रही है। इस पवित्र धरती ने सदियों से विश्व को ज्ञान और संस्कार का संदेश दिया है। ऐसे में राज्य की जिम्मेदारी है कि शिक्षा के क्षेत्र में उत्तराखण्ड देश के लिए एक आदर्श मॉडल के रूप में स्थापित हो।

उन्होंने कहा कि इसी उद्देश्य के साथ राज्य सरकार ने समाज के सभी वर्गों को गुणवत्तापूर्ण, आधुनिक और संस्कारयुक्त शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए 1 जुलाई 2026 से उत्तराखण्ड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण की स्थापना की है। इसके साथ ही मदरसा बोर्ड को समाप्त कर नई व्यवस्था लागू की गई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह केवल एक संस्था की शुरुआत नहीं, बल्कि राज्य के प्रत्येक बच्चे के उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव रखने वाला निर्णय है। सरकार का लक्ष्य है कि प्रत्येक बच्चे को समान अवसर मिले और वह आधुनिक शिक्षा, तकनीक एवं कौशल के माध्यम से आगे बढ़ सके।

उन्होंने कहा कि वर्तमान समय ज्ञान, नवाचार और तकनीक का युग है। एआई, मशीन लर्निंग, डिजिटल तकनीक और नए कौशल भविष्य की दिशा तय कर रहे हैं। ऐसे में आवश्यक है कि उत्तराखण्ड का कोई भी बच्चा विकास की इस यात्रा से पीछे न छूटे।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण की स्थापना किसी समुदाय की पहचान या परंपराओं को प्रभावित करने के लिए नहीं, बल्कि सभी वर्गों को बेहतर शैक्षणिक अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से की गई है। सरकार का प्रयास है कि बच्चे अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहते हुए विज्ञान, गणित, कंप्यूटर, कौशल विकास और आधुनिक शिक्षा में दक्ष बनें।

उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल रोजगार प्राप्त करने का माध्यम नहीं है, बल्कि समाज को सशक्त, आत्मनिर्भर और जागरूक बनाने का सबसे प्रभावी साधन है। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से युवा न केवल अपने जीवन को बेहतर बनाते हैं बल्कि राष्ट्र निर्माण में भी महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि नई व्यवस्था के तहत सभी अधिसूचित अल्पसंख्यक समुदायों को समान अवसर प्रदान किए जाएंगे। पहले की व्यवस्थाओं में जिन वर्गों को पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं मिल पाया, उन्हें भी अब शिक्षा के क्षेत्र में बराबरी का अवसर मिलेगा।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लागू राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 ने देश की शिक्षा व्यवस्था को नई दिशा दी है। यह नीति केवल डिग्री तक सीमित नहीं है, बल्कि कौशल, नवाचार, अनुसंधान, उद्यमिता और रोजगार से जोड़ने पर बल देती है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड सरकार डिजिटल शिक्षा, स्मार्ट कक्षाओं, कौशल विकास, स्टार्टअप और आधुनिक प्रशिक्षण को बढ़ावा दे रही है ताकि राज्य का युवा भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार हो सके।

उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण केवल मान्यता देने वाली संस्था नहीं होगा, बल्कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, शिक्षक प्रशिक्षण, पारदर्शी व्यवस्था और राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन का मजबूत माध्यम बनेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज जिन संस्थानों को मान्यता प्रदान की जा रही है, वे केवल प्रमाण पत्र प्राप्त नहीं कर रहे, बल्कि शिक्षा के क्षेत्र में नई सोच और नई व्यवस्था के सहभागी बन रहे हैं। इन संस्थानों की जिम्मेदारी है कि वे ज्ञानवान, संस्कारित, संवेदनशील और राष्ट्र के प्रति समर्पित नागरिक तैयार करें।

उन्होंने कहा कि भारत की सबसे बड़ी ताकत उसकी विविधता में एकता है। अलग-अलग भाषाओं, संस्कृतियों और परंपराओं के बावजूद भारतीयता सभी को जोड़ने वाली शक्ति है। राज्य सरकार इसी भावना के साथ सभी वर्गों के विकास के लिए कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले वर्षों में यह प्राधिकरण हजारों बच्चों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाएगा और उत्तराखण्ड को गुणवत्तापूर्ण एवं समावेशी शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणी राज्य बनाएगा। उन्होंने धर्मगुरुओं, शिक्षाविदों, शिक्षण संस्थाओं और समाज के प्रबुद्ध नागरिकों से इस पहल को सफल बनाने में सहयोग की अपील की।

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी, विधायक प्रदीप बत्रा, विधायक उमेश शर्मा काउ, विशेष सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते, उत्तराखण्ड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के अध्यक्ष डॉ. सुरजीत सिंह सहित जनप्रतिनिधिगण, विभिन्न अल्पसंख्यक समुदायों के धर्मगुरु, शिक्षाविद एवं शिक्षण संस्थाओं के प्रबंधक उपस्थित रहे।

जनपद में मानसून को लेकर अलर्ट, डीएम ने आपदा कंट्रोलरूम का निरीक्षण कर दिए सभी विभागों को हाई अलर्ट पर रहने के निर्देश

जनपद में हुई वर्षा एवं संभावित आपदा की परिस्थितियों को देखते हुए जिलाधिकारी डॉ0 आशीष चौहान ने आज आपदा कंट्रोल रूम का निरीक्षण कर वहां की व्यवस्थाओं, संचार प्रणाली तथा आपदा से संबंधित तैयारियों का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि कंट्रोल रूम 24×7 सक्रिय रहे तथा किसी भी सूचना पर तत्काल प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

इसके उपरांत जिलाधिकारी ने एनआईसी सभागार से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सभी संबंधित विभागों के अधिकारियों एवं उप जिलाधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। बैठक में सड़कों की स्थिति, पेयजल आपूर्ति, विद्युत व्यवस्था, जलभराव, आपदा प्रबंधन तथा अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं की विस्तार से समीक्षा करते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

जिलाधिकारी ने सभी निर्माणदायी संस्थाओं को निर्देश दिए कि निर्माण कार्यों के लिए खोदी गई सड़कों की तत्काल मरम्मत कर उन्हें सुरक्षित एवं सुगम बनाया जाए। उन्होंने कहा कि किसी भी सड़क पर गड्ढे या असुरक्षित स्थिति नहीं रहनी चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि विभागीय लापरवाही के कारण कोई दुर्घटना होती है तो संबंधित अधिकारी एवं संस्था की जिम्मेदारी तय करते हुए कठोर कार्रवाई की जाएगी।

बैठक में जिलाधिकारी ने सभी उप जिलाधिकारियों को निर्देशित किया कि अपने-अपने क्षेत्रों में संचालित स्टोन क्रशरों की स्थिति का सत्यापन कर यह प्रमाणित करें कि वे वर्तमान में संचालित नहीं हैं तथा नदियों में किसी प्रकार की खनन गतिविधि नहीं हो रही है। उन्होंने कहा कि 01 जुलाई से 30 सितंबर तक नदियों में किसी भी प्रकार की खनन गतिविधि पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगी। यदि इस अवधि में खनिज परिवहन करते हुए कोई वाहन पाया जाता है तो उसके विरुद्ध विधिक कार्रवाई करते हुए संबंधित वाहन को सीज करने की कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

जिलाधिकारी ने नदी किनारे स्थित पर्यटन स्थलों पर सुरक्षा व्यवस्था सुदृढ़ करने के निर्देश देते हुए कहा कि वहां वार्निंग सायरन एवं सीसीटीवी कैमरे स्थापित किए जाएं, ताकि जलस्तर बढ़ने अथवा आपदा की स्थिति में पर्यटकों एवं स्थानीय लोगों को समय रहते सतर्क किया जा सके।

मुख्य चिकित्सा अधिकारी को निर्देशित करते हुए जिलाधिकारी ने कहा कि दुर्गम क्षेत्रों में रहने वाली ऐसी गर्भवती महिलाओं, जिनकी आगामी एक सप्ताह से दस दिनों के भीतर प्रसव संभावित है, उन्हें पूर्व से ही सुरक्षित स्थान अथवा अस्पताल के निकट ठहराने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, जिससे आपात स्थिति में किसी प्रकार की कठिनाई उत्पन्न न हो।

उन्होंने नगर निगम देहरादून, ऋषिकेश सहित सभी नगर निकायों को निर्देश दिए कि डेंगू एवं मलेरिया की रोकथाम के लिए नियमित फॉगिंग कराई जाए। साथ ही खराब स्ट्रीट लाइटों को तत्काल ठीक कराया जाए तथा जिन क्षेत्रों में स्ट्रीट लाइट उपलब्ध नहीं है, वहां सुरक्षा की दृष्टि से प्राथमिकता के आधार पर नई स्ट्रीट लाइटें स्थापित की जाएं।

जिलाधिकारी ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि नदी एवं नालों के किनारे रहने वाले लोगों का चिन्हीकरण कर उनकी सूची तैयार की जाए तथा भारी वर्षा अथवा बाढ़ की स्थिति में उन्हें सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित करने की पूर्व तैयारी सुनिश्चित की जाए। ज्ञातब्य है कि संभावित आपदा के दृष्टिगत जलभराव एवं नदी किनारे वाले ऐसे 29 क्षेत्र नगर निगम ने चिन्हित किए हैं, जिनमें 3700 परिवार एवं 900 घर है जिन्हे प्रशासन द्वारा मॉनिटर किया जा रहा है।

बैठक में बारिश के दौरान सड़क निर्माण कार्यों की प्राप्त शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी ने लोक निर्माण विभाग, पीएमजीएसवाई एवं राष्ट्रीय राजमार्ग के अधिकारियों को निर्देशित किया कि वर्षा के दौरान मानकों के विपरीत सड़क निर्माण अथवा मरम्मत संबंधी शिकायत प्राप्त होने पर संबंधित अधिकारियों एवं कार्यदायी संस्थाओं के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी।

बैठक में अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) के. मिश्रा, अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) स्मृता परमार, उप जिलाधिकारी अपूर्वा सिंह, जिला सूचना विज्ञान अधिकारी अंकुश पांडेय तथा ई-डिस्ट्रिक्ट मैनेजर हरेंद्र शर्मा उपस्थित रहे। जबकि जनपद के समस्त उप जिलाधिकारी एवं विभिन्न विभागों के अधिकारी वर्चुअल माध्यम से बैठक में सम्मिलित हुए।

उत्तराखंडः एक बार फिर आपके द्वार पहुंच रही आपकी धामी सरकार

जन समस्याओं के निराकरण के लिए गत वर्ष चलाए गए ‘जन जन की सरकार-जन जन के द्वार’ कार्यक्रम की सफलता को देखते हुए, प्रदेश सरकार एक बार फिर जनता के द्वार पहुंच रही है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 4 जुलाई से 15 दिन का इस विशेष अभियान संचालित करने के निर्देश दिए हैं। इसमें जिला, ब्लॉक और तहसील स्तर पर विशेष शिविरों का आयोजन किया जाएगा, जिसमें संबंधित विभागों अधिकारी- कर्मचारी शामिल होकर, जन समस्याओं का निराकरण करेंगे।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी लगातार इस बात पर जोर दे रहे हैं कि लोगों को जन समस्याओं के समाधान के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़े, बल्कि विभाग अधिकारी कर्मचारी खुद लोगों के पास पहुंच शिकायतों का निस्तारण करें। मुख्यमंत्री की इसी सोच को केंद्र में रखते हुए प्रदेश सरकार ने गत दिसंबर माह से 45 दिन का ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ अभियान शुरु किया था। अब मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के कार्यकाल के सफल पांच वर्ष पूरे होने के अवसर पर एक बार फिर ये अभियान शुरु होने जा रहा है। इस बार 4 जुलाई से मनाए जा रहे सेवा पखवाड़ा (15 दिवस) के तहत यह कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। जिसके तहत जिला, ब्लॉक और तहसील स्तर पर शिविर आयोजित करते हुए, जन समस्याओं का निराकरण किया जाएगा, साथ ही लोगों को विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ भी दिया जाएगा।

पिछली बार 5 लाख से अधिक की थी जनभागीदारी
दिसंबर माह में शुरु किए गए 45 दिन के ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ अभियान के तहत 681 शिविरों का आयोजन किया गया, जिसमें 5,33,452 नागरिकों ने प्रत्यक्ष तौर पर भागीदारी निभाई, यही नहीं इस दौरान करीब 33 हजार जन शिकायतों का त्वरित समाधान किया गया। इस अभियान को गवर्नेंस की बेस्ट प्रैक्टिस के रूप भी सराहा गया।

लोगों को बिना किसी भागदौड़ के सरकारी सेवाएं मिली, यही सुशासन की पहली सीढ़ी है। इसी क्रम में सभी जनपदों में ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ अभियान का दूसरा चरण शुरु किया जा रहा है। इसमें सभी सक्षम अधिकारियों, कर्मचारियों को उपस्थित रहने के निर्देश दिए गए हैं।
पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री उत्तराखंड