रिमोट एरिया में एक भी विलेज और एक भी कस्बा इंटरनेट कनेक्टिविटी से वंचित नहीं रहेः सीएस

मुख्य सचिव आनंद बर्धन की अध्यक्षता में टेलीकम्युनिकेशन विभाग के तत्वाधान में आठवीं राज्य स्तरीय ब्रॉडबैंड समिति की बैठक आयोजित की गई।

बैठक में टेलीकम्युनिकेशन विभाग, मोबाइल कम्युनिकेशन प्रदाता फर्म और संबंधित अधिकारियों द्वारा भारत सरकार की संचार और इंटरनेट कनेक्टिविटी से संबंधित परियोजनाओं और कार्यक्रमों के क्रियान्वयन में विभिन्न विभागों से संबंधित विभिन्न मुद्दों और उसके समाधान पर व्यापक विचार- विमर्श किया गया।

बैठक में विभिन्न मोबाइल कम्युनिकेशन प्रदाता फर्म द्वारा रिमोट एरिया में उच्च तीव्रता की इंटरनेट कनेक्टिविटी प्रोवाइड करने में कुछ क्षेत्रों में सड़क संपर्क का ना होना बताया। जिस पर मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि रिमोट एरिया में एक भी विलेज अथवा एक भी कस्बा इंटरनेट कनेक्टिविटी से वंचित नहीं होना चाहिए। यदि कुछ जगह सड़क संपर्क मार्ग ना हो तो वहां पर हवाई ट्रांसपोर्ट द्वारा उपकरणों को पहुंचाया जाए और इंटरनेट कनेक्टिविटी प्रदान की जाए।

मुख्य सचिव ने कहा कि पिटकुल के पास 617 किलोमीटर की फाइबर ऑप्टिकल लाइन बिछी हुई है उसको विभिन्न टेलीकॉम कंपनियां रेंट पर लेकर उसका उपयोग सकती हैं।

मुख्य सचिव ने कहा कि चूंकि राज्य में आरओडब्ल्यू (राइट ऑफ वे) रूल्स 2014 पहले से ही लागू हैं। इसलिए उसके अनुसार ही इंटरनेट कनेक्टिविटी से संबंधित सेवाएं देना सुनिश्चित करें।

मुख्य सचिव ने पुराने टेलीकॉम टॉवर्स को नियमित करने तथा कॉमन डक्ट और एरियल केबल पॉलिसी बनाने के लिए सचिव आईटी को आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने लोक निर्माण विभाग, यूपीसीएल, पिटकुल, फॉरेस्ट, बीएसएनल तथा संबंधित विभागों को निर्देशित किया कि इंटरनेट कनेक्टिविटी और संचार कनेक्टिविटी योजनाओं के क्रियान्वयन से संबंधित जो भी इश्यू उनसे संबंधित हैं उनका त्वरित निराकरण करें। इसके लिए संबंधित जिला प्रशासन, टेलीकॉम डिपार्टमेंट और संबंधित टेलीकॉम सेवा प्रदाता कंपनी के साथ आपसी समन्वय स्थापित करते हुए उनका समाधान निकालें।

उन्होंने सभी मोबाइल कम्युनिकेशन प्रदाता कंपनियों को निर्देशित किया कि शहरों और कस्बों में भी जहां पर कनेक्टिविटी का पर्याप्त इंफ्रास्ट्रक्चर मौजूद हैं फिर भी अनेक बार कॉल ड्रॉप की समस्याएं झेलनी पड़ती हैं। इसके लिए सभी कम्युनिकेशन प्रदाता कंपनियां अपने-अपने रिसोर्सेस का पुनः सर्वे कर लें तथा कॉल ड्रॉप या कनेक्टिविटी में अवरोध जैसी समस्याओं का स्थाई समाधान करना सुनिश्चित करें।

टेलिकॉम विभाग ने अवगत कराया कि भारतनेट स्कीम के अंतर्गत राज्य में 6590 कनेक्शन दिए जा चुके हैं।

राज्य के 30 विकासखंडों की 1819 ग्राम पंचायतों में जिसमें ग्राम पंचायत कार्यालय, पीएससी (प्राथमिक सर्विस सेंटर) इत्यादि में कनेक्टिविटी उपलब्ध कराई गई है। इनमें 13576 कनेक्शन दिए जा चुके हैं।

अवगत कराया कि केंद्र के गति शक्ति जीआईएस पोर्टल पर वर्तमान समय तक राज्य के तीन लाख से अधिक स्ट्रीट फर्नीचर (कनेक्टिविटी से संबंधित विद्युत खंबे, टावर इत्यादि इक्विपमेंट्स) मैप कर दिए गए हैं।

बैठक में प्रमुख सचिव एल एल फैनई, राज्य में ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी के नोडल (सचिव आईटी नितेश कुमार झा तथा निदेशक आईटीडीए गौरव कुमार), सचिव सी रविशंकर, डिपार्टमेंट ऑफ़ टेलीकम्युनिकेशन से एडीजी वेस्ट यूपी आर एस परमार व डीजीपी रूरल देहरादून राजीव बंसल के अतिरिक्त बीएसएनल, एयरटेल, जिओ, इंडस टावर तथा संबंधित विभागों व फर्म के अधिकारी व प्रतिनिधि बैठक में उपस्थित थे।

हरिद्वार के मुख्य धार्मिक केंद्रों का पैदल मार्ग का सर्किट प्लान बनाएंः बर्द्धन

मुख्य सचिव आनंद बर्धन की अध्यक्षता में उत्तराखंड औद्योगिक निवेश एवं विकास बोर्ड (यूआईआईडीबी) की कार्यकारी समिति (Ex C) की समीक्षा बैठक आयोजित की गई।

बैठक में उत्तराखंड नियोजन विभाग के अंतर्गत गठित यूआईआईडीबी द्वारा हरिद्वार गंगा कॉरिडोर परियोजना के अंतर्गत हरिद्वार शहर के संपूर्ण डेवलपमेंट और 2027 में हरिद्वार कुंभ मेला की आवश्यकता से संबंधित विभिन्न प्रोजेक्ट का प्रस्तुतीकरण दिया गया।

प्रस्तुतीकरण में हरिद्वार शहर का सुगम मोबिलिटी प्लान, सौंदर्यीकरण, सैनिटेशन, सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट, तीर्थ यात्री फ्रेंडली एक्सेस डेवलपमेंट, ट्रांसपोर्ट, सुरक्षा, पब्लिक सुविधाओं का विकास, भीड़ प्रबंधन, कल्चरल हब डेवलपमेंट, पार्किंग, सती कुण्ड डेवलपमेंट, 10 जंक्शंस का ज्यामितीय इंप्रूवमेंट, मल्टी मॉडल टूरिज्म एक्टिविटी, सीसीटीवी कैमरा व पब्लिक ऐड्रेसिंग सिस्टम, तीर्थ यात्री फ्रेंडली सुविधाओं, चंडी देवी, मनसा, देवी, माया देवी व विलकेश्वर मंदिर से जुड़े डेवलपमेंट कार्यों पर आगामी 2027 के कुंभ मेला के दृष्टिगत व्यापक विचार- विमर्श किया गया।

हरिद्वार के मुख्य लैंडमार्क (धार्मिक केंद्रों) का पेडेस्ट्रियन वे (पैदल मार्ग) सर्किट प्लान बनाएं

मुख्य सचिव ने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि मनसा देवी, चंडी देवी, माया देवी, दक्ष मंदिर, हर की पैड़ी, भारत माता मंदिर, दक्षिणेश्वर काली इत्यादि हरिद्वार के मुख्य धार्मिक केंद्रों का पेडेस्ट्रियन वे सर्किट प्लान बनाएं।

उन्होंने कहा कि तीर्थ यात्रियों का पैदल मार्ग ऐसा हो जिसमें उनको कहीं पर भी थोड़े समय के लिए भी रुकना ना पड़े (कोई भी अवरोध ना हो) तथा ऐसा पेडेस्ट्रियन मार्ग वन वे हो जिसमें सुरक्षा के भी सभी वैकल्पिक इंतजाम हो।
उन्होंने मेलाधिकारी, स्थानीय प्रशासन, नगर निगम, संबंधित कंसल्टेंट एजेंसी और संबंधित स्टेकहोल्डर को आपसी समन्वय से 15 दिवस के भीतर इसका प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए।

हर की पैड़ी में आरती पॉइंट पर व्यवस्थित एंट्री – एग्जिट प्लान बनाने के निर्देश

मुख्य सचिव ने मेला अधिकारी, पुलिस विभाग, स्थानीय प्रशासन, और संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि हरकी पैड़ी का आरती पॉइंट सबसे अधिक भीड़ – भाड़ वाला स्थान रहता है तथा यहां पर क्राउड मैनेजमेंट करना सबसे बड़ी चुनौती भी रहती है। इसको दृष्टिगत रखते हुए व्यवस्थित प्रवेश और निकासी का दुरुस्त प्लान बनाएं ताकि श्रद्धालुओं को किसी भी तरह की असुविधा का सामना न करना पड़े।

हरिद्वार में फॉरेस्ट से सटे क्षेत्रों में डेवलपमेंट हेतु राजाजी पार्क प्रशासन होगी कार्यदाई एजेंसी

मुख्य सचिव ने निर्देशित किया कि विभिन्न धार्मिक केंद्रों, पब्लिक सुविधाओं के विकास और अन्य डेवलपमेंट से संबंधित ऐसे कार्य जो राजाजी पार्क प्रशासन के क्षेत्र के निकट हैं अथवा आंशिक रूप से उनके क्षेत्र से संबंधित हों उन कार्यों के क्रियान्वयन के लिए राजाजी पार्क प्रशासन को कार्यदाई एजेंसी बनाया जाए ताकि डेवलपमेंट से जुड़े कार्य तेजी से पूरे हो सके।

सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट, सैनिटेशन, पार्किंग, भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा प्रबंधन को रखें उच्च प्राथमिकता में

मुख्य सचिव ने निर्देशित किया कि जो कार्य अधिक महत्वपूर्ण प्रकृति के हैं और शीघ्रता से पूरे किए जाने हैं उनको उच्च प्राथमिकता में रखें।

उन्होंने सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट, सैनिटेशन, पार्किंग, भीड़ प्रबंधन, सुरक्षा के आपातकालीन उपाय इत्यादि कार्यों को उच्च प्राथमिकता में रखने के निर्देश दिए।

जहां जरूरी हो तो संबंधित स्थानीय निकाय, ट्रस्ट, गंगा सभा, स्थानीय प्रतिनिधि आदि हितधारकों को विश्वास में लेकर कार्य संपादित करें

मुख्य सचिव ने निर्देशित किया कि विभिन्न कार्यों को संपादित करते समय इस बात का ध्यान रखें कि जहां पर स्थानीय लोकल बॉडी, प्रतिनिधि अथवा स्थानीय ट्रस्ट आदि का इन्वॉल्वमेंट जरूरी हो वहां पर उनके समन्वय से कार्य करना सुनिश्चित करें।

उन्होंने सभी संबंधित अधिकारियों और स्टेकहोल्डर को हरिद्वार के डेवलपमेंट के संबंध में संयुक्त रूप से संपूर्ण शहर का विजिट करने के निर्देश दिए और डेवलपमेंट प्लान में जहां पर कुछ और प्रावधान किए जाने की आवश्यकता हो तो उनको भी प्लान में शामिल करने हेतु प्रस्ताव बनाने को कहा।

इस दौरान बैठक में प्रमुख सचिव एल एल फैनई व आर मीनाक्षी सुंदरम, सचिव नितेश कुमार झा, दिलीप जावलकर व डॉ पंकज कुमार पांडेय, विशेष सचिव अजय मिश्रा, कुंभ मेला अधिकारी हरिद्वार श्रीमती सोनिका सहित संबंधित अधिकारी बैठक में उपस्थित थे।

नजरियाः श्री कैंचीधाम मंदिर ट्रस्ट ने सीएम आपदा राहत कोष को दिए 2.5 करोड़

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कैंची धाम मन्दिर ट्रस्ट द्वारा प्रदेश में आपदा पीड़ित परिवारों को मदद के लिये मुख्यमंत्री राहत कोष में 2.50 करोड़ की आर्थिक सहायता प्रदान करने के लिए ट्रस्ट के प्रयासों की सराहना की है। मुख्यमंत्री ने कहा कि कैंची धाम मन्दिर ट्रस्ट द्वारा आपदा पीड़ितों की मदद के साथ ही शिक्षा व स्वास्थ्य के क्षेत्र में किया जाने वाला सहयोग मानवता की बड़ी सेवा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कैंची धाम में प्रतिवर्ष श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या के दृष्टिगत यातायात की सुगमता के लिये कैंची धाम बाईपास के लिए वन भूमि प्रस्ताव को केन्द्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय से सैद्धांतिक स्वीकृति मिलने के बाद उक्त सड़क का तेजी से निर्माण किया जा सकेगा, जिससे क्षेत्रीय लोगों एवं पर्यटकों को आवाजाही में सुविधा मिलेगी साथ ही कैंची धाम और भवाली के पास लगने वाले जाम से भी मुक्ति मिलेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि कैंची धाम में आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के लिये अन्य कई योजनायें भी क्रियान्वित की जा रही हैं।

ज्ञातव्य है कि गुरुपूर्णिमा के अवसर पर विश्व प्रसिद्ध कैंचीधाम मंदिर में आयोजित एक सूक्ष्म कार्यक्रम में मंदिर ट्रस्ट द्वारा प्रदेश में प्राकृतिक आपदा के दौरान प्रभावित परिवारों को मदद प्रदान करने हेतु मुख्यमंत्री राहत कोष में आर्थिक मदद हेतु 2.5 करोड़ (ढाई करोड़ ) की धनराशि का चौक जिले की मुख्य विकास अधिकारी अनामिका को प्रदान किया गया।

कैंचीधाम मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष ओमप्रकाश बिंद्रा ने कहा कि कैंची धाम मंदिर ट्रस्ट सामाजिक क्षेत्र में लंबे समय से कार्य व योगदान करते आ रहा है। उन्होंने कहा कि मंदिर ट्रस्ट द्वारा शिक्षा स्वास्थ्य, आपदा प्रबंधन इन क्षेत्रों में हर संभव सहयोग किया जा रहा है। ट्रस्ट द्वारा प्रत्येक वर्ष 3000 बच्चों को दी जा रही छात्रवृत्ति को बढ़ाकर 5000 किया गया है।

उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन के सहयोग से कैंची धाम मंदिर ट्रस्ट द्वारा मुख्य रूप से शिक्षा, चिकित्सा के क्षेत्र में सहयोग हेतु हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने विगत 15 जून को आयोजित कैंची धाम मंदिर स्थापना दिवस को सफलतापूर्वक संपन्न कराए जाने हेतु मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी तथा जिला प्रशासन का सहयोग हेतु आभार व्यक्त किया है।

रायपुर में अतिवृष्टि से हुए नुकसान का सीएम ने लिया जायजा, स्थानीयों से की वार्ता

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देहरादून में रायपुर क्षेत्र के अंतर्गत अतिवृष्टि से प्रभावित क्षेत्रों का स्थलीय निरीक्षण किया।

मुख्यमंत्री ने किरसाली चौक, आई.टी पार्क, ननूरखेड़ा, आमवाला, तपोवन, शांति विहार में स्थानीय लोगों से मुलाकात कर उनकी समस्याओं को सुनते हुए कहा कि जनता की सुरक्षा राज्य सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता है।

मुख्यमंत्री ने निरीक्षण के दौरान जिला प्रशासन को प्रभावित लोगों को हर संभव मदद पहुंचाने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने नियमित रूप से नालियों की सफाई करने और जलभराव वाले क्षेत्रों में ड्रेनेज की समुचित व्यवस्था किए जाने के निर्देश देते हुए कहा कि संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष सावधानी बरतते हुए चेतावनी बोर्ड भी लगाए जाएं।

मुख्यमंत्री ने स्थानीय पुलिस बलों, सभी विभागों को भी अलर्ट मोड पर रहने के निर्देश देते हुए कहा कि किसी भी आकस्मिकता की स्थिति में त्वरित कार्यवाही सुनिश्चित की जाए। साथ ही रिस्पॉन्स समय को कम से कम रखते हुए प्रभावित लोगों की जान माल की सुरक्षा के लिए हर संभव प्रयास करें।

इस अवसर पर राज्यसभा सांसद नरेश बंसल, आपदा प्रबंधन सलाहकार समिति के उपाध्यक्ष विनय रुहेला, विधायक उमेश शर्मा काऊ एवं जिला प्रशासन के अधिकारी मौजूद रहे।

ग्राउंडिंग सेरेमनी से स्थानीय उद्यमिता को प्रोत्साहन और राज्य की आर्थिक समृद्धि के नए द्वार खुलेंगेः सीएम

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री आवास में उच्च स्तरीय बैठक के दौरान अधिकारियों को रुद्रपुर में प्रस्तावित 1 लाख करोड़ रूपये की ग्राउंडिंग सेरेमनी के सफल आयोजन के लिए तैयारियाँ समयबद्ध रूप से पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम भव्य और प्रभावशाली स्वरूप में आयोजित किया जाए, जिससे राज्य की औद्योगिक प्रगति को नई गति और पहचान मिले।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस भव्य आयोजन में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह मुख्य अतिथि होंगे। यह आयोजन राज्य के औद्योगिक भविष्य को नई दिशा देगा तथा उत्तराखंड के युवाओं को रोजगार के व्यापक अवसर प्रदान करेगा। वर्ष 2023 में आयोजित ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के दौरान राज्य सरकार को ₹3.5 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए थे। इनमें से ₹1 लाख करोड़ की ग्राउंडिंग हो चुकी है, जो उत्तराखंड के औद्योगिक विकास के प्रति निवेशकों के विश्वास को दर्शाता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह आयोजन स्थानीय उद्यमिता को प्रोत्साहन देगा और राज्य की आर्थिक समृद्धि के नए द्वार खोलेगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि आयोजन से जुड़ी सभी व्यवस्थाएं सजगता और समन्वय के साथ सुनिश्चित की जाएं, जिससे राज्य की सकारात्मक छवि और निवेश-अनुकूल वातावरण को देश-दुनिया के समक्ष सशक्त रूप से प्रस्तुत किया जा सके।

बैठक में प्रमुख सचिव आर.के.सुधांशु, आर.मीनाक्षी सुंदरम, सचिव शैलेश बगोली, विनय शंकर पाण्डेय, अपर पुलिस महानिदेशक ए.पी.अंशुमन, विशेष सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते, अपर सचिव बंशीधर तिवारी, प्रबंध निदेशक उद्योग सौरभ गहरवार उपस्थित थे।

धामी मंत्रिमंडल की बैठक में छह प्रस्तावों को मिली मंजूरी, पढ़िए…

आज धामी मंत्रिमंडल की बैठक में छह महत्वपूर्व प्रस्तावों पर मुहर लगी है। जिसमें जियो थर्मल नीति पर लगी कैबिनेट की मुहर, पुलों की क्षमता बढ़ाने के लिए प्रोजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट को मिली मंजूरी, सतर्कता विभाग के ढांचे में 20 पद बढ़ाए, 132 से 156 हुई संख्या, जीएसटी विभाग के ढांचे में भी पदों की संख्या बढ़ी, नए खनिजों के लिए जिला व प्रदेश में खनन न्यास बनेंगे। इसके अलावा अब पुत्र 18 साल का होने पर बंद नहीं होगी वृद्धावस्था पेंशन, कैबिनेट ने प्रस्ताव में संशोधन को दी मंजूरी।

नंदा देवी यात्रा से संचालन को जिलाधिकारी चमोली संबंधित विभागों से समन्वय कर एसओपी तैयार करेंः सीएस

मुख्य सचिव आनंद बर्धन की अध्यक्षता में आगामी 2026 में प्रस्तावित नंदा देवी राजजात यात्रा के तैयारियों की समीक्षा बैठक आयोजित की गई।

मुख्य सचिव ने जिलाधिकारी चमोली को निर्देशित किया कि संबंधित विभागों और स्टेक होल्डर्स के साथ समन्वय स्थापित करते हुए संपूर्ण यात्रा को व्यवस्थित तरीके से संचालित करने हेतु एसओपी ( मानक संचालन प्रक्रिया) तैयार करें।
कहा कि एसओपी में यात्रा से संबंधित सभी बातों (व्यवस्था, सुरक्षा, संचालन, नियंत्रण इत्यादि) का समावेश होना चाहिए।

उन्होंने संबंधित अधिकारियों को पूरी यात्रा का वेस्ट मैनेजमेंट प्लान, सेप्टिक मैनेजमेंट और सेनिटेशन मैनेजमेंट प्लान बनाने के भी निर्देश दिए ताकि यात्रा में भागीदारी करने वाले लोगों को सुविधा मिले तथा पर्यावरण को किसी भी तरह की क्षति भी ना पहुंचे।

मुख्य सचिव ने निर्देशित किया कि विभिन्न विभागों के द्वारा जो भी कार्य किए जाने हैं उन सभी को स्थाई और अस्थाई प्रकृति में सेपरेट करते हुए उसका तदनुसार प्रस्ताव बनाएं।
कार्यों को पूरा करने के लिए यदि सप्लीमेंट्री बजट की आवश्यकता हो तो उसकी डिमांड करें तथा मेंटेनेंस अथवा रूटीन वर्क विभाग अपने बजट से पूरे करना सुनिश्चित करें।

उन्होंने निर्देशित किया कि जो कार्य तत्काल किए जाने हैं उसको प्राथमिकता में लेते हुए अति शीघ्र प्रारंभ करें।

मुख्य सचिव ने पर्यटन विभाग को निर्देशित किया कि यात्रा की ऐतिहासिकता, विशिष्टता और मान्यता को दृष्टिगत रखते हुए इसका डॉक्यूमेंटेशन करें तथा इसकी डॉक्यूमेंट्री भी तैयार करें।

उन्होंने कहा कि यात्रा की मौलिकता बनी रहे इसका ध्यान रखा जाए।

मुख्य सचिव ने जिलाधिकारी चमोली तथा जिलाधिकारी अल्मोड़ा, बागेश्वर, नैनीताल और पिथौरागढ़ से भी यात्रा से संबंधित फीडबैक प्राप्त करते हुए यात्रा की तैयारी से संबंधित उनकी आवश्यकताओं की भी जानकारी ली।

बैठक में प्रमुख सचिव आर मीनाक्षी सुंदरम, सचिव दिलीप जावलकर, सचिन कुर्वे, डॉ. पंकज कुमार पांडेय, विनोद कुमार सुमन, धीरज गर्ब्याल, पुलिस महानिरीक्षक के एस नगन्याल सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।

उत्तराखंड से हिमाचल प्रदेश जाएगा यूएसडीएमए का विशेषज्ञ दल

उत्तराखण्ड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण का एक विशेषज्ञ दल हिमाचल प्रदेश में अतिवृष्टि के चलते उत्पन्न स्थितियों तथा इन हालातों से निपटने के लिए हिमाचल में शासन-प्रशासन द्वारा किए जा रहे कार्यों को देखने तथा उनका अध्ययन करने के लिए जाएगा। मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन को इसके निर्देश दिए हैं।

उत्तराखण्ड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण स्थित राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र में प्रदेश में वर्षा से उत्पन्न स्थिति की समीक्षा के दौरान मुख्य सचिव श्री आनंद बर्द्धन ने कहा कि उत्तराखण्ड और हिमाचल प्रदेश न सिर्फ पड़ोसी राज्य हैं, बल्कि दोनों प्रदेशों की भौगोलिक परिस्थितियां भी एक जैसी हैं। इस वर्ष हिमाचल प्रदेश में बारिश से काफी नुकसान हुआ है। इन स्थितियों से निपटने के लिए हिमाचल प्रदेश में किस प्रकार आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में कार्य किया जा रहा है, शासन-प्रशासन द्वारा किस तरह इन स्थितियों में प्रतिक्रिया की जा रही है, इसे जानने और समझने की आवश्यकता है ताकि अगर ऐसे ही हालात उत्तराखण्ड में भी उत्पन्न हों तो हिमाचल के अनुभवों के आधार पर एक प्रभावी रणनीति बनाई जा सके।

मुख्य सचिव आनंद वर्द्धन ने राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र पहुंचकर प्रदेश में हो रही वर्षा से उत्पन्न स्थिति की जानकारी ली तथा आपदा प्रबंधन विभाग के अधिकारियों को जरूरी दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने वर्तमान में प्रदेश में मानसून की स्थिति, आने वाले दिनों में मौसम का पूर्वानुमान, अब तक हुई बारिश तथा प्रदेश भर में भूस्खलन के चलते बंद सड़कों की समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिए कि बंद सड़कों को जल्द से जल्द खोलने की कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में सभी आवश्यक संसाधन तथा उपकरण तैनात किए जाएं। यह सुनिश्चित किया जाए की 15 मिनट के भीतर जेसीबी तथा अन्य सभी आवश्यक उपकरण घटनास्थल पर पहुंच जाए। उन्होंने ग्रामीण सड़कों को भी तत्परता के साथ खोलने के निर्देश दिए।

सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन ने बताया कि देहरादून, नैनीताल तथा बागेश्वर में मौसम विभाग द्वारा ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। सात दिवसीय पूर्वानुमान के अनुसार सभी जनपदों में बुधवार से येलो अलर्ट है। उन्होंने बताया कि जून में सामान्य से कम बारिश हुई थी, जबकि जुलाई में सामान्य से अधिक वर्षा का पूर्वानुमान व्यक्त किया गया है। पूरे मानसून सीजन में सामान्य से 108 फीसदी अधिक वर्षा का पूर्वानुमान व्यक्त किया गया है। उन्होंने बताया कि अभी तक प्रदेशभर में 317.1 मिमी बारिश हुई है। सबसे अधिक बागेश्वर में 765.5, चमोली में 428.2, रुद्रप्रयाग 388.8 तथा देहरादून 380.4 मिमी बारिश हो चुकी है।

इस अवसर पर सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन, अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रशासन आनंद स्वरूप, अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी क्रियान्वयन डीआईजी राजकुमार नेगी, संयुक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी मो0 ओबैदुल्लाह अंसारी, ड्यूटी आफिसर उप सचिव आलोक कुमार, यूएसडीएमए के विशेषज्ञ मनीष भगत, रोहित कुमार, डॉ. पूजा राणा, डॉ, वेदिका पंत, हेमंत बिष्ट तथा तंद्रीला सरकार आदि उपस्थित थे।

2853 परिवारों का पुनर्वास

सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन ने बताया कि राज्य में वर्ष 2012 से वर्तमान में दिनांक 08.07.2025 तक प्राकृतिक आपदा से प्रभावित कुल 258 ग्रामों के 2853 परिवारों का पुनर्वास किया गया। विस्थापन हेतु कुल बजट प्राविधान रु0 20.00 करोड़ रुपये है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में आपदा प्रभावित ग्रामों के पुनर्वास/विस्थापन हेतु कुल बजट प्राविधान रूपये बीस करोड़ के सापेक्ष वर्तमान तक 24 ग्रामों के कुल 337 आपदा प्रभावित परिवारों के पुनर्वास/विस्थापन हेतु कुल रू0 12,16,70,300/- की धनराशि निर्गत की गयी है। उन्होंने बताया कि राज्य आपदा मोचन निधि तथा राज्य सेक्टर से कुल 175.50 करोड़ रुपये की धनराशि आवंटित की जा चुकी है। राज्य आपदा मोचन निधि से जनपदों को कुल 165 करोड़ की धनराशि आवंटित की गई है।

सचेत ऐप, 112, 1070, 1077 हों सभी के फोन में

मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने कहा कि सचेत एप आपदाओं से बचाव की दिशा में काफी मददगार साबित हो सकता है। उन्होंने कहा कि यह एक ऐसा ऐप है, जिसमें न सिर्फ मौसम तथा बारिश के एलर्ट प्राप्त होते हैं बल्कि आपदाओं से बचाव की भी जानकारी प्राप्त की जा सकती है। उन्होंने राज्य के सभी नागरिकों से इस ऐप को डाउनलोड करने की अपील की है। साथ ही उन्होंने सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन को ईआरएसस 112, 1070, 1077 का व्यापक स्तर पर प्रचार-प्रसार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ये तीन नंबर सभी लोगों के फोन में होने चाहिए ताकि आपदा के समय या किसी मुश्किल घड़ी में लोग इन नम्बरों पर कॉल कर मदद मांग सकें।

तहसील स्तर पर व्हाट्सएप ग्रुप बनाने के निर्देश

मुख्य सचिव आनंद वर्द्धन ने कहा कि आम जनता तक मौसम संबंधी विभिन्न प्रकार की चेतावनियों तथा अन्य जानकारियों को कम से कम समय में पहुंचाया जाए, ताकि लोग समय रहते सुरक्षात्मक कदम उठा सकें। उन्होंने कहा कि विभिन्न अलर्ट जारी करने वाले एजेंसियों से जो भी अलर्ट मिलते हैं, वह एसईओसी तथा डीईओसी के माध्यम से 15 मिनट के भीतर लोगों तक पहुंच जाएं। उन्होंने कहा कि सूचनाओं तथा चेतावनियों के आदान-प्रदान में बिलकुल भी विलंब नहीं होना चाहिए। उन्होंने प्रत्येक व्यक्ति तक अलर्ट तथा अन्य सूचनाओं को पहुंचाने के लिए तहसील स्तर पर व्हाट्सएप ग्रुप बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि रियल टाइम सूचनाओं का आदान-प्रदान कुशल तथा प्रभावी आपदा प्रबंधन के लिए बेहद जरूरी है। इस अवसर पर उन्होंने एसईओसी में विभिन्न विभागों के वायरलेस सेटों, सेटेलाइट फोन की सक्रियता भी परखी।

एसईओसी की अपनी एसओपी बनेगी

मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने राज्य तथा जनपद आपातकालीन परिचालन केंद्र की अपनी स्वयं की एसओपी बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि कंट्रोल रूम में किस अधिकारी/कर्मचारी की क्या भूमिका तथा दायित्व हैं, इसमें किसी भी प्रकार भ्रम की स्थिति नहीं रहनी चाहिए। साथ ही उन्होंने कंट्रोल रूम की भी मॉक ड्रिल कराने के निर्देश दिए।

72 घंटे में दी जाए अहेतुक सहायता

मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने आपदा प्रभावितों को अहेतुक सहायता वितरित करने में विलंब न करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रभावित को हर हाल में 72 घंटे के भीतर अहेतुक सहायता उपलब्ध करा दी जाए। साथ ही उन्होंने आपदा में क्षतिग्रस्त संपत्ति के नुकसान का सर्वे भी शीघ्रता से करने के निर्देश दिए ताकि प्रभावित लोगों को जल्द से जल्द सहायता मिल जाए और वह दोबारा सामान्य जीवन की ओर अग्रसर हो सकें।

सीएम बोले, रिवर्स पलायन में गुंज्याल और नेगी ने की मिशाल पेश

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पूर्व पुलिस महानिरीक्षक (आई.जी.) बिमला गुंज्याल के सीमांत जनपद पिथौरागढ़ की गुंजी ग्राम पंचायत तथा पूर्व कर्नल यशपाल सिंह नेगी के जनपद पौड़ी की बिरगण ग्राम पंचायत के निर्विरोध ग्राम प्रधान निर्वाचित होने पर हार्दिक बधाई दी है। मुख्यमंत्री ने इसे रिवर्स पलायन का एक प्रेरणादायक और सुखद उदाहरण बताया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इन दोनों सेवानिवृत्त वरिष्ठ अधिकारियों का ग्राम प्रधान चुना जाना पंचायती राज व्यवस्था को मजबूती देगा और उनके अनुभव से ग्रामीण विकास को नई दिशा मिलेगी। उन्होंने आशा व्यक्त की कि गुंजी और बिरगण ग्राम पंचायतें मॉडल ग्राम के रूप में उभरेंगी।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि इस प्रकार के उदाहरण दर्शाते हैं कि रिटायरमेंट के बाद भी व्यक्ति अपने अनुभव और सेवा भावना से गांव की प्रगति में अहम भूमिका निभा सकता है। राज्य सरकार ऐसे सभी प्रयासों को पूर्ण सहयोग देने के लिए प्रतिबद्ध है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ग्रामीण आजीविका, कृषि, बागवानी और स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए सतत कार्य कर रही है ताकि गांव आत्मनिर्भर बनें और रिवर्स पलायन की यह परंपरा मजबूत हो सके।

नई दिल्ली में ‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ आउटलेट का सीएम ने किया उद्घाटन

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नई दिल्ली स्थित उत्तराखण्ड निवास परिसर में ‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ के आउटलेट का उद्घाटन किया। यह आउटलेट उत्तराखण्ड की पारंपरिक धरोहर और जैविक उत्पादों को राष्ट्रीय राजधानी में संगठित रूप में प्रस्तुत करने का एक सशक्त माध्यम बनेगा। इसके माध्यम से न केवल राज्य की समृद्ध लोक संस्कृति को देश के सामने लाया जाएगा, बल्कि स्थानीय उत्पादों को नए बाजार भी प्राप्त होंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पहल राज्य सरकार की उस दूरदृष्टि का परिणाम है, जिसका उद्देश्य पर्वतीय अंचलों में उत्पादित प्राकृतिक और हस्तनिर्मित वस्तुओं को वैश्विक पहचान दिलाना है। यह कदम ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देगा और साथ ही स्थानीय कारीगरों व शिल्पकारों को नए अवसर प्रदान करेगा।

चारधाम यात्रा को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार द्वारा स्थानीय उत्पादों की ब्रिकी को बढ़ावा देने हेतु 13 से अधिक प्रमुख स्थानों पर आकर्षक फ्लोर स्टैंडिंग यूनिट्स और रिटेल कार्ट्स नैनी सैनी एयरपोर्ट, पंतनगर एयरपोर्ट, देहरादून हेलीपैड, जीएमवीएन श्री केदारनाथ, बद्रीनाथ, हर्षिल, गुप्तकाशी, कौडियाला, मसूरी, परमार्थ निकेतन (ऋषिकेश), स्नो क्रेस्ट (बद्रीनाथ), एटीआई (नैनीताल) एवं सेंट्रिया मॉल जैसे तीर्थ और पर्यटक स्थलों पर स्थापित किए गए हैं। ये रिटेल कार्ट्स श्रद्धालुओं और पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बन रहे हैं। इसके अतिरिक्त, मैरियट मसूरी, ताज देहरादून, एफआरआई व एलबीएसएनएए एवं राष्ट्रीय राजधानी स्थित दिल्ली हाट जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में भी रिटेल कार्ट्स की स्थापना प्रक्रिया प्रगति पर है। यह पहल न केवल स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पहचान दिला रही है, बल्कि उत्तराखण्ड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और शिल्प कौशल को भी सशक्त रूप से प्रस्तुत कर रही है।

सचिव ग्रामीण विकास राधिका झा ने बताया कि ‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ ब्रांड ने कम समय में अपनी गुणवत्ता के बल पर विशेष पहचान बनाई है। इसके उत्पाद ीवनेमवीिपउंसंलंे.बवउ के साथ-साथ अमेज़न और ब्लिंकिट जैसे प्रमुख ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर भी उपलब्ध हैं। अब यह ब्रांड प्रमुख होटल श्रृंखलाओं में भी अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहा है। उत्तराखण्ड की सांस्कृतिक और पारंपरिक पहचान को बढ़ावा देने तथा उच्च श्रेणी के पर्यटकों को स्थानीय उत्पादों से जोड़ने के उद्देश्य से ताज (ऋषिकेश, रामनगर), हयात सेंट्रिक, हयात रीजेंसी (देहरादून), मैरियट (रामनगर), वेस्टिन (नरेन्द्रनगर) और जेपी ग्रुप (मसूरी) जैसे प्रतिष्ठित होटलों के साथ रणनीतिक साझेदारी की गई है। इस पहल के तहत राज्य के विभिन्न प्रमुख होटलों में ‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ के रिटेल कार्ट्स स्थापित किए गए हैं, जो पर्यटकों को उत्तराखण्ड के विशिष्ट हस्तनिर्मित एवं जैविक उत्पादों की सीधी उपलब्धता प्रदान कर रहे हैं। यह कदम न केवल स्थानीय उत्पादकों और कारीगरों को आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में प्रोत्साहित कर रहा है, बल्कि सतत पर्यटन और आत्मनिर्भर उत्तराखण्ड की ओर भी एक महत्वपूर्ण पहल है।

‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ ब्रांड की अवधारणा को पहली बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2023 के दौरान प्रस्तुत किया गया था। इस ब्रांड के अंतर्गत उत्तराखण्ड के विशिष्ट उत्पाद जैसे बुरांश का शरबत, जंगली शहद, पहाड़ी दालें, पारंपरिक मसाले, हस्तनिर्मित वस्त्र एवं अन्य जैविक सामग्री अब एक सुव्यवस्थित रूप में देश के प्रमुख शहरों तक पहुंच सकेंगी।

इस अवसर पर सचिव ग्रामीण विकास राधिका झा, उत्तराखण्ड के स्थानिक आयुक्त अजय मिश्रा आदि अधिकारीगण उपस्थित रहे।