सीएस करेंगे निर्माणाधीन विद्युत जेनरेशन प्लांट व विद्युत सब स्टेशन की क्षेत्रीय विजिट

मुख्य सचिव आनंद बर्धन की अध्यक्षता में सचिवालय सभागार में पिटकुल (पावर ट्रांसमिशन कारपोरेशन ऑफ उत्तराखंड लिमिटेड) की समीक्षा बैठक आयोजित की गई।

मुख्य सचिव ने पिटकुल को निर्देश दिए कि मानसून के दौरान पारेषण तंत्र के सुचारू रूप से संचालन के लिए एसओपी का पूर्णतः पालन करें तथा लाइन ब्रेकडाउन की स्थिति में ब्रेकडाउन एनालिसिस करते हुए विद्युत आपूर्ति को निर्बाध रूप से संचालित करना सुनिश्चित करें।

उन्होंने कहा कि इस बात को सुनिश्चित किया जाए कि सभी तरह के प्रोजेक्ट निर्धारित समय अवधि में ही पूरे हों तथा इसकी लागत भी किसी भी दशा में बढ़नी नहीं चाहिए।

उन्होंने कहा कि जो भी मास्टर प्लान बनता है उसकी पहले एक बार सीईए (सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी ) से जरूर समीक्षा करा ली जाए।

मुख्य सचिव ने लाइन विस्तारीकरण और सब स्टेशन की स्थापना के लिए भूमि अधिग्रहण से संबंधित नए मानक के अनुरूप सरकार को प्रस्ताव प्रेषित करने को कहा।

उन्होंने कहा कि वे स्वयं भी निर्माणाधीन विद्युत जेनरेशन प्लांट व विद्युत सब स्टेशन की क्षेत्रीय विजिट करेंगे।

बैठक में प्रबंध निदेशक पिटकुल पी सी ध्यानी ने अवगत कराया कि पिटकुल की रेटिंग 2024 – 25 में ए से ए$$ हुई है। इससे पिटकुल को मिलने वाले लोन में 0.50 प्रतिशत की छूट प्राप्त होगी जिसका प्रदेश के उपभोक्ताओं को भी रियायती ऊर्जा दरों के रूप में लाभ प्राप्त होगा।

उन्होंने कहा कि बाह्य सहायतित परियोजनाओं के अंतर्गत एडीबी पोषित 6 गतिमान प्रोजेक्ट 220 केवी सेलाकुई, 132 केवी खटीमा, 132 केवी लोहाघाट चंपावत, 132 केवी धौलाखेड़ा नैनीताल, 132 केवी आराघर और 220 केवी मंगलौर ये सभी प्रोजेक्ट 2026 तक कंप्लीट हो जाएंगे। इससे लो वोल्टेज और बार-बार ट्रिप की समस्या से निजात मिलेगी तथा उद्योग और उपभोक्ताओं को बड़े पैमाने पर इसका लाभ मिलेगा।

इस दौरान बैठक में प्रमुख सचिव आर मीनाक्षी सुंदरम, मुख्य अभियंता, अनुपम सिंह, इला पंत व कमलकांत, महाप्रबंधक वित्त मनोज कुमार आदि बैठक में उपस्थित थे।

केन्द्र सरकार ने कृषि एवं बागवानी विकास की विभिन्न योजनाओं को 3800 करोड़ रुपए करने पर दी सैद्धांतिक सहमति

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नई दिल्ली में केंद्रीय कृषि, ग्राम्य विकास एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान से भेंट कर प्रदेश की कृषि एवं उससे जुडी विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन एवं विसतार के संबंध में चर्चा की। मुख्यमंत्री ने राज्य के पर्वतीय एवं मैदानी क्षेत्रों की कृषि एवं बागवानी आवश्यकताओं तथा किसानों की आर्थिक सुदृढ़ता हेतु राज्य सरकार द्वारा तैयार की गई प्रस्तावित योजनाओं पर भी चर्चा की। मुख्यमंत्री ने अवगत कराया कि उत्तराखण्ड सरकार ने कृषि एवं बागवानी क्षेत्र के समग्र विकास एवं किसानों को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से लगभग 3800 करोड़ रुपये की व्यापक योजनाएं तैयार की हैं। इन योजनाओं में नवाचार, यंत्रीकरण, तकनीकी समावेशन एवं पारम्परिक कृषि को बढ़ावा देने जैसे विविध पहलुओं को शामिल किया गया है। केन्द्रीय कृषि मंत्री द्वारा राज्य की कृषि संबधि योजनाओं हेतु 3800 करोड की सैद्धांतिक सहमति प्रदान करने पर मुख्यमंत्री ने उनका आभार जताया। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सहयोग राज्य के कृषि क्षेत्र को आत्मर्निभर और आधुनिक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम सिद्ध होगा।

मुख्यमंत्री ने केंद्रीय मंत्री को अवगत कराया कि राज्य में पर्वतीय क्षेत्रों की फसलों को जंगली जानवरों से बचाने हेतु कृषि बाड़ निर्माण के लिए 1,052.80 करोड़ रुपये की आवश्यकता चिह्नित की गई है। इसके अतिरिक्त राज्य में 10,000 फार्म मशीनरी बैंक स्थापित करने हेतु 400 करोड़ रुपये की योजना प्रस्तावित की गई है, जिससे लघु, सीमांत किसान एवं महिलाएं लाभान्वित होंगी। पारम्परिक पोषक फसलों को बढ़ावा देने के लिए स्टेट मिलेट मिशन के अंतर्गत 134.89 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। बीज उत्पादन में आत्मनिर्भरता हेतु राज्य को सीड हब के रूप में विकसित करने के लिए 5 करोड़ रुपये की योजना भी तैयार की गई है। सेब उत्पादन को प्रोत्साहन, भंडारण और विपणन तंत्र को सुदृढ़ बनाने हेतु 1,150 करोड़ रुपये की योजना प्रस्तावित है। नकदी फसलों जैसे कीवी के संवर्धन एवं खेती को वन्यजीवों से संरक्षित करने हेतु 894 करोड़ रुपये की आवश्यकता दर्शाई गई है। कृषि व बागवानी क्षेत्र में नवाचार और स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने के लिए 885.10 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है। ड्रैगन फ्रूट जैसी कम जोखिम वाली फसलों को प्रोत्साहित हेतु 42 करोड़ रुपये की योजना भी तैयार की गई है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि खाद्य प्रसंस्करण एवं मूल्य संवर्धन के क्षेत्र में राज्य सरकार सक्रियता से कार्य कर रही है। जैविक खेती को बढ़ावा देने हेतु विश्लेषण प्रयोगशालाओं की स्थापना के लिए 36.50 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। भूमि अभिलेखों के आधुनिकीकरण और डिजिटल सर्वेक्षण के लिए के अंतर्गत 378.50 करोड़ रुपये की योजना प्रस्तावित की गई है। इसके साथ ही पंतनगर विश्वविद्यालय के माध्यम से युवाओं को कृषि क्षेत्र में दक्ष बनाने हेतु 14 करोड़ रुपये तथा एग्रीटूरिज्म स्कूल की स्थापना हेतु 14 करोड़ रुपये की योजना तैयार की गई है। उत्तराखंड औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, भरसार में माइक्रोबायोलॉजी प्रयोगशाला की स्थापना के लिए 16.11 करोड़ रुपये की व्यवस्था प्रस्तावित है।

इसके अतिरिक्त मुख्यमंत्री ने प्रदेश में सेब उत्पादन के दृष्टिगत उच्च गुणवत्ता की नर्सरी, कोल्ड स्टोरेज, सॉर्टिंग व ग्रेडिंग यूनिट की स्थापना, कीवी व ड्रैगन फ्रूट मिशन को बढ़ावा देने, सुपर फूड्स (मशरूम व एग्जॉटिक वेजिटेबल्स) हेतु सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना तथा पंतनगर कृषि विश्वविद्यालय में एग्रो टूरिज्म स्कूल की स्थापना के लिए भी केंद्रीय सहायता का अनुरोध केन्द्रीय मंत्री से किया।

मुख्यमंत्री के अनुरोध पर केन्द्रीय मंत्री द्वारा पर प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पी.एम.जी.एस.वाई) 1 व 2 के अवशेष कार्यों की समय सीमा बढ़ाने की सैद्धांतिक सहमति प्रदान की गई। साथ ही पी.एम.जी.एस.वाई 4 के प्रस्ताव पर भी सैद्धांतिक सहमति प्रदान करने का आश्वासन दिया। केन्द्रीय मंत्री ने उत्तराखंड सरकार द्वारा कृषि एवं ग्रामीण विकास के विभिन्न क्षेत्रों में किये जा रहे उत्कृष्ट कार्यों की सराहना की।

केंद्रीय कृषि मंत्री ने मुख्यमंत्री द्वारा प्रस्तुत प्रस्तावों पर सकारात्मक प्रतिक्रिया देते हुए आश्वस्त किया कि उत्तराखण्ड की कृषि आवश्यकताओं को प्राथमिकता के आधार पर संज्ञान में लिया जाएगा तथा राज्य के किसानों की समृद्धि हेतु हरसंभव सहयोग प्रदान किया जाएगा।

बैठक में भारत सरकार के कृषि सचिव देवेश चतुर्वेदी, भारत सरकार के ग्रामीण विकास सचिव सैलेश कुमार सिंह तथा उत्तराखंड के स्थानिक आयुक्त अजय मिश्रा उपस्थित रहे।

कुमाऊं में हाई अल्टीट्यूड अल्ट्रा मैराथन गुंजी से आदि कैलाश और गढ़वाल में नीति माणा से लेकर मलारी तक होगी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उच्चस्तरीय बैठक के दौरान अधिकारियों को पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से हाई अल्टीट्यूड अल्ट्रा मैराथन की शुरुआत करने के निर्देश दिए। कुमाऊं क्षेत्र में यह मैराथन गुंजी से आदि कैलाश और गढ़वाल में नीति माणा से लेकर मलारी तक आयोजित की जाए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि इस आयोजन को वार्षिक पर्यटन कैलेंडर में शामिल किया जाए और हर वर्ष निर्धारित तिथि पर इसका नियमित आयोजन सुनिश्चित किया जाए।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को आपदा प्रबंधन तंत्र को अधिक सशक्त बनाने के साथ ही तय समय पर प्रभावितों को सहायता राशि उपलब्ध कराने के भी निर्देश दिए। सीमांत एवं पर्वतीय क्षेत्रों में फसलों की सुरक्षा के लिए घेरबाड़/सोलर फेंसिंग के संबंध में विस्तृत योजना बनाने के निर्देश दिए।

बैठक में प्रमुख सचिव आरके सुधांशु, आर मीनाक्षी सुंदरम, सचिव शैलेश बगोली और अपर सचिव बंशीधर तिवारी उपस्थित थे।

दून से मसूरी रूट पर चलेंगे 10 नये वातानुकूलित टेम्पो ट्रैवलर, सीएम ने किये रवाना

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उत्तराखण्ड परिवहन निगम द्वारा संचालित की जा रही 20 नई वातानुकूलित यूटीसी मिनी (टेम्पो ट्रैवलर) का फ्लैग ऑफ किया। इनमें से 10 टेम्पो ट्रैवलर वाहन देहरादून-मसूरी और 10 टेम्पो ट्रेवलर वाहन हल्द्वानी नैनीताल रूट पर चलेंगे। इससे नैनीताल- हल्द्वानी और देहरादून – मसूरी के बीच जाम की समस्या में भी कमी आयेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पहल सफल रही तो, इस तरह की सेवाओं की संख्या और बढ़ाई जायेगी। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कैम्प कार्यालय से जीटीसी हेलीपैड तक टैम्पो ट्रेवलर से सफर भी किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वातानुकुलित टैम्पो ट्रैवलर राज्य के परिवहन तंत्र को सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होंगे। इनसे यात्रियों को सुरक्षित, सुगम और किफायती यात्रा की सुविधा मिल सकेगी तथा प्रदेश की आर्थिक और पर्यटन गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास है कि राज्य के प्रत्येक क्षेत्र को बेहतर सड़क नेटवर्क और विश्वसनीय परिवहन सेवाओं से जोड़ा जाए। आज डिजिटल टिकटिंग, ऑनलाइन बुकिंग, ट्रैकिंग सिस्टम जैसी सेवाओं द्वारा परिवहन विभाग जनता को सुलभ यात्रा उपलब्ध करा रहा है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड परिवहन निगम को मजबूत बनाने की दिशा में निरंतर कार्य किये जा रहे हैं। इसके परिणामस्वरूप लगातार तीन वर्षों से परिवहन निगम मुनाफे में हैै।

मुख्यमंत्री ने कहा कि परिवहन निगम के बस बेड़े में जल्द ही इलेक्ट्रिक बसों का भी समावेश किया जायेगा, जिसके लिए बसों की खरीद की प्रक्रिया गतिमान है। सरकार ने अपने कर्मचारियों और चालक-परिचालकों की कई समस्याओं का समाधान किया है। डीए में बढ़ोतरी करना हो, 7वें वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू करना हो या निगम में भर्तियों के माध्यम से मानव संसाधन बढ़ाना हो, पूरी प्रतिबद्धता के साथ उनके कल्याण के लिए कार्य किये जा रहे हैं।

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी, राज्यसभा सांसद नरेश बंसल, प्रमुख सचिव एवं अध्यक्ष उत्तराखण्ड परिवहन निगम एल. फैनई, एमडी परिवहन निगम रीना जोशी और परिवहन विभाग के अधिकारी उपस्थित थे।

दलाई लामा के 90वें जन्मदिवस के अवसर पर सीएम ने किया प्रतिभाग, की घोषणाएं

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दलाई लामा के 90वें जन्मदिवस के अवसर पर क्लेमेनटाउन, देहरादून में आयोजित कार्यक्रम में प्रतिभाग करते हुए समस्त देशवासियों और तिब्बती समाज को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि बुद्धा टेंपल मार्ग का चौड़ीकरण किया जाएगा और तिब्बती श्मशान घाट के टिन शेड का निर्माण किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि परम पूज्य दलाई लामा ने पूरी दुनिया को शांति, अहिंसा और करुणा का मार्ग दिखाया है। उनकी शिक्षाएं आज के समय में और भी अधिक प्रासंगिक हैं, जब विश्व अनेक चुनौतियों का सामना कर रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि दलाई लामा स्वयं कहते हैं। “मेरा धर्म करुणा है” यही विचार उन्हें विश्व का सच्चा आध्यात्मिक गुरु बनाता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड ने हमेशा से तिब्बती समाज को प्रेम, सम्मान और सुरक्षा प्रदान की है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार तिब्बती समुदाय के हितों की रक्षा करने के साथ-साथ उनके सांस्कृतिक, शैक्षिक और सामाजिक विकास के लिए हर संभव सहयोग करती रहेगी।

मुख्यमंत्री ने ईश्वर से प्रार्थना करते हुए कहा कि परम पूज्य दलाई लामा जी को उत्तम स्वास्थ्य और दीर्घायु प्रदान हो ताकि वे आने वाली पीढ़ियों को भी अपने अमूल्य विचारों और शिक्षाओं से मार्गदर्शन करते रहें।

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज, विधायक विनोद चमोली, वक्फ़ बोर्ड के अध्यक्ष शादाब शम्स, पूर्व मुख्य सचिव सुभाष कुमार, सांगयम सोनम पालडन, डॉ. त्सावांग फुंटसोक, तेनजिंग चोएफेल, महेश पांडे, सरदार इंद्रपाल कोहली, राजेश मित्तल और तिब्बती समुदाय के लोग मौजूद थे।

सीएम ने लिया जंगल सफारी का लुत्फ, एक पेड़ मां के नाम अभियान के तहत किया पौधारोपण

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आज कार्बेट नेशनल पार्क में जंगल सफारी के दौरान वन्यजीवन की अद्भुत और रोमांचकारी झलक का अनुभव किया। उन्होंने कहा कि यह अनुभव केवल प्रकृति की सुंदरता को देखने का नहीं, बल्कि जैव विविधता और प्रकृति की अनमोल विरासत से जुड़ने का अवसर भी है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार के निरंतर प्रयासों के फलस्वरूप जंगल सफारी पर्यटन को आज एक नई पहचान मिली है। देश-विदेश से बड़ी संख्या में पर्यटक उत्तराखण्ड आ रहे हैं, जिससे राज्य की पर्यटन आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है। इसके साथ ही स्थानीय लोगों के लिए स्वरोजगार और आजीविका के नए द्वार भी खुले हैं।

इस अवसर पर ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के अंतर्गत वन विभाग, स्थानीय समुदाय और पर्यावरण प्रेमियों के सहयोग से 1000 से अधिक पौधों का सामूहिक रोपण किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह महज एक पौधा रोपण नहीं, बल्कि मातृत्व और प्रकृति के प्रति सम्मान का भावपूर्ण प्रतीक है।

मुख्यमंत्री ने वन विभाग की टीम से भी भेंट की और उनके द्वारा वनों व वन्यजीवों की सुरक्षा हेतु किए जा रहे कार्यों की सराहना की। उन्होंने विभाग की प्रतिबद्धता और समर्पण को राज्य की हरियाली और जैव विविधता के संरक्षण हेतु अत्यंत महत्वपूर्ण बताया।

सरकारी योजनाओं का गलत लाभ उठाने का मामला, सीएम धामी के निर्देश पर हुए मुकदमें

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सरकारी योजनाओं का गलत तरीके से लाभ उठाने के मामले में कड़ा रुख अपनाया है। इस मामले में मुख्यमंत्री के निर्देश पर कोतवाली नगर और थाना राजपुर में दो अलग-अलग मुकदमे दर्ज कराए गए हैं। संबंधित अधिकारियों से कहा गया है कि ऐसे अपात्र लोगों को कतई बख्शा न जाए और उनके खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई अमल में लाई जाए।

मामले में जिला पूर्ति अधिकारी देहरादून और आयुष्मान विभाग की ओर से वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक देहरादून को तहरीर दी गई। बताया गया कि सरकार की ओर से पांच लाख से कम सालाना आय वाले लोगों के राशन कार्ड बनाए जाते हैं। अपात्र लोगों की ओर से राशन कार्ड बनाए जाने की शिकायत मिलने पर पूर्ति विभाग ने राशन कार्डाे की जांच की तो कई लोगों के राशन कार्ड फर्जी पाए गए। इसी आधार पर यह लोग अपने आयुष्मान कार्ड बनाते हुए अनुचित रूप से स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ ले रहे थे।

मुख्यमंत्री के निर्देश पर एसएसपी देहरादून ने मामले में कोतवाली नगर तथा थाना राजपुर को तत्काल मुकदमे दर्ज करवाए हैं। दोनों मामलों में पुलिस गहनता से विवेचना कर रही है। ऐसे सभी लोगों को चिन्हित किया जा रहा है, जिन्होंने फर्जी दस्तावेज तैयार कर सरकारी योजनाओं का लाभ लिया है।

टनकपुर से कैलाश मानसरोवर यात्रा के पहले दल को सीएम ने किया रवाना, दिखाई हरी झंडी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने टनकपुर स्थित पर्यटन आवास गृह से कैलाश मानसरोवर यात्रा के पहले दल को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने यात्रियों का पारंपरिक रूप से स्वागत किया तथा उत्तराखंड की सांस्कृतिक धरोहर से जुड़े स्मृति चिह्न भेंट किए।

मुख्यमंत्री ने 11 राज्यों से आए सभी श्रद्धालुओं से संवाद कर उनका देवभूमि उत्तराखंड में हार्दिक स्वागत किया। मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि कैलाश मानसरोवर की यात्रा करने का सौभाग्य हर किसी को नहीं मिलता, यह केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आत्मिक और आध्यात्मिक जागरण का मार्ग है। उन्होंने कहा श्रद्धालु इस अद्वितीय यात्रा के सहभागी बनकर केवल यात्रा नहीं, बल्कि समर्पण की अनुभूति लेकर जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड की पवित्र धरती के कण-कण में भगवान शिव का वास है। यह यात्रा अब केवल भौगोलिक मार्ग नहीं रही, बल्कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के दूरदर्शी नेतृत्व और दृढ़ संकल्प से यह सीमाओं को लांघते हुए शिव से साक्षात्कार का सशक्त माध्यम बन गई है। पहले जिस यात्रा में सात दिन या उससे अधिक का समय लगता था, अब वह कुछ ही घंटों में संभव हो सकी है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड सरकार इस यात्रा को सुगम, सुरक्षित और सुविधाजनक बनाने के लिए पूरी तरह समर्पित है। प्रत्येक पड़ाव पर स्वास्थ्य, आवास, भोजन, सुरक्षा और अन्य आवश्यक सुविधाएं सुदृढ़ की गई हैं, जिससे श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। मुख्यमंत्री ने भगवान भोलेनाथ से सभी यात्रियों की सफल, मंगलमय और सुरक्षित यात्रा की कामना की।

इस अवसर पर सभी श्रद्धालुओं ने चम्पावत वासियों के आत्मीय व्यवहार के लिए आभार व्यक्त किया और यात्रा को स्मरणीय व सुरक्षित बनाने के लिए उत्तराखंड सरकार की उत्कृष्ट व्यवस्थाओं की सराहना की।

इस दौरान आयुक्त कुमाऊं मंडल दीपक रावत, आईजी आईटीबीपी और जन सम्पर्क अधिकारी कैलाश मानसरोवर यात्रा संजय गुंजियाल, पुलिस महानिरीक्षक कुमाऊं मंडल रिद्धिम अग्रवाल,प्रबंध निदेशक कुमाऊं मंडल विकास निगम विनीत तोमर, जिलाधिकारी चम्पावत मनीष कुमार, जिलाधिकारी पिथौरागढ़ विनोद गोस्वामी, पुलिस अधीक्षक चम्पावत अजय गणपति मौजूद थे।

किसानों के श्रम को नमन करने का सीएम का तरीका, खेत में की धान रोपाई

खटीमा के नगरा तराई क्षेत्र में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने खेत में धान की रोपाई कर किसानों के परिश्रम, त्याग और समर्पण को नमन किया। उन्होंने कहा कि खेतों में उतरकर पुराने दिनों की यादें ताजा हो गईं। मुख्यमंत्री ने कहा कि अन्नदाता न केवल हमारी अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं, बल्कि वे हमारी संस्कृति और परंपराओं के संवाहक भी हैं।

इस मौके पर मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत “हुड़किया बौल” के माध्यम से भूमि के देवता भूमियां, जल के देवता इंद्र और छाया के देवता मेघ की वंदना भी की। मुख्यमंत्री के इस सांस्कृतिक जुड़ाव और कृषकों के साथ आत्मीय सहभाग ने क्षेत्रीय जनता को गहरे स्तर पर प्रेरित किया।

मुख्यमंत्री धामी की यह पहल उत्तराखंड की ग्रामीण संस्कृति, कृषकों की अहमियत और पारंपरिक लोक कलाओं के संरक्षण की दिशा में एक प्रेरणादायक कदम है।

नया रिकार्ड, वर्तमान वित्तीय वर्ष की पहली तिमाही में खनन से रू. 331.14 करोड़ का राजस्व प्राप्त

प्रदेश में खनन के क्षेत्र में किए गए सुधारों एवं अवैध खनन पर रोक लगाने के कारगर प्रयासों के फलस्वरूप खनन से राजस्व प्राप्ति के नित नए रिकॉर्ड बन रहे हैं। वर्तमान वित्तीय वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही में खनन विभाग ने रू. 331.14 करोड़ का राजस्व अर्जित कर नया रिकॉर्ड कायम किया है, जो गत वर्ष की तुलना से 22.47 प्रतिशत अधिक है। गत वित्तीय वर्ष 2024-25 में भी राज्य में खनन से राजस्व प्राप्ति के पिछले सारे रिकॉर्ड तोड़ कुल रू. 1040.57 करोड़ राजस्व का अर्जन किया गया था।

राज्य में खनन के माध्यम से वित्तीय वर्ष 2022-23 के प्रथम तिमाही में रू. 146.18 करोड़, वित्तीय वर्ष 2023-24 के प्रथम तिमाही में रू. 177.27 करोड़ तथा वित्तीय वर्ष 2024-25 के प्रथम तिमाही में रू. 270.37 करोड़ का राजस्व प्राप्त हुआ था। जबकि वर्तमान वित्तीय वर्ष 2025-26 की प्रथम तिमाही में खनन से रू. 331.14 करोड़ का राजस्व की प्राप्ति हुई है, जो विगत वर्ष की तुलना से 22.47 प्रतिशत अधिक है तथा अन्य वर्षों की अपेक्षा कई गुना अधिक है।

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार के द्वारा प्रदेश के विकास के लिए आवश्यक वित्तीय संसाधनों की व्यवस्था हेतु राजस्व वृद्धि के उपायों पर विशेष ध्यान केन्द्रित किया गया है। जिनके उल्लेखनीय परिणाम सामने आ रहे हैं। राज्य सरकार द्वारा खनन से राजस्व वृद्धि के लिए उपखनिज परिहार नियमावली और उत्तराखण्ड खनिज (अवैध खनन, परिवहन एवं भण्डारण का निवारण) नियमावली में सरलीकरण करने के साथ ही नये खनिज लॉटो का चिन्हीकरण कर ई-निविदा सह-ई नीलामी के माध्यम से आवंटित करने की व्यवस्था की गई है। अवैध रूप से किए जाने वाले खनन, परिवहन एवं भण्डारण पर प्रभावी रोकथाम के लिए खनन निदेशालय के स्तर पर गठित प्रवर्तन दलों के माध्यम से निरन्तर कार्रवाई करने के साथ ही जिला स्तर पर भी अवैध खनन रोकने के लिए त्वरित व प्रभावी कार्रवाई करने की व्यवस्था की गई है। मुख्यालय स्तर पर ई-रवन्ना पोर्टल की समय-समय पर निगरानी करते हुए ई-रवन्ना पोर्टल को उन्नत करने, पट्टा धनराशि की समय से व पूरी वसूली सुनिश्चित करने जैसे अनेक महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं।

राज्य सरकार ने खनन कार्य को और अधिक पारदर्शी व सुदृढ बनाये जाने तथा अवैध खनन व अवैध परिवहन की प्रभावी रोकथाम तथा राजस्व वृद्धि हेतु आधुनिक खनन डिजिटल सुधार एवं निगरानी प्रणाली (एमडीटीएसएस) विकसित किये जाने हेतु राज्य सरकार के द्वारा कुल 45 माईन चौक गेट्स स्थापित किये जाने की कार्यवाही भी की जा रही है।
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राज्य की आर्थिक मजबूती के लिए राजस्व प्राप्ति के संसाधनों में वृद्धि किया जाना आवश्यक है। राज्य के हित में खनिज संसाधनों का समुचित और युक्तिसंगत तरीके से उपयोग करने पर ध्यान देने के साथ ही अवैध खनन पर सख्त नियंत्रण, पारदर्शी व्यवस्था, ठोस निगरानी और नियमों के सख्त अनुपालन पर जोर दिया गया है। आधुनिक प्रौद्योगिकी का उपयोग कर खनन प्रक्रियाओं को बेहतर बनाया गया है, जिससे खनिज संपदा का समुचित दोहन हो और राज्य की आय में बढ़ोतरी हो। इसके अलावा खनन उद्योग से जुड़े रोजगार के अवसरों को भी बढ़ावा देने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।
– पुष्कर सिंह धामी
मुख्यमंत्री उत्तराखंड सरकार।

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उत्तराखंड कैम्पा की उल्लेखनीय सफलता, भारत सरकार ने प्रस्तावित 439.50 करोड़ की कार्य योजना को दी मंजूरी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नई दिल्ली में राष्ट्रीय कैंपा की कार्यकारी समिति की बैठक में उत्तराखण्ड़ राज्य की रुपये 439.50 करोड़ की कार्य योजना को शत प्रतिशत मंजूरी दिये जाने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुये प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री का आभार व्यक्त किया।

राष्ट्रीय कैम्पा की कार्यकारी समिति की बैठक में उत्तराखंड के अवशेष प्रस्तावों पर विचार किया गया तथा सभी को स्वीकृति प्रदान की गई। कैम्पा की राष्ट्रीय समिति ने पाया कि उत्तराखंड के द्वारा प्रस्तावित सभी कार्य मानकों के अनुरूप थे तथा उनसे संबंधित समस्त अपेक्षित विवरण भी समिति के समक्ष स्पष्टता से प्रस्तुत किया गया। इस प्रकार इस वर्ष राज्य हित में कैम्पा के अंतर्गत एक बड़ी धनराशि विभिन्न कार्यों के लिए समय से उपलब्ध हो सकेगी। उत्तराखंड के प्रमुख वन संरक्षक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. समीर सिन्हा ने बैठक में प्रतिभाग कर अवगत कराया कि यह प्रथम अवसर है जब राज्य द्वारा प्रस्तावित वार्षिक योजना को पूरी तरह स्वीकृति मिली है।

ज्ञातव्य है कि वर्ष 2025-26 के लिए उत्तराखंड राज्य कैम्पा की मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित संचालन समिति ने 439.50 करोड रुपए की कार्य योजना अनुमोदित कर भारत सरकार को स्वीकृति हेतु प्रेषित की थी। प्रथम चरण में इसके सापेक्ष भारत सरकार द्वारा 235.30 करोड़ रुपए की धनराशि की स्वीकृति मई 2025 में जारी की गई थी। इसके सापेक्ष राज्य सरकार द्वारा वन विभाग को प्रथम किश्त की धनराशि भी जारी कर दी गई है।
प्रदेश के वन मंत्री सुबोध उनियाल ने भी इस हेतु डॉ समीर सिन्हा की अगुवाई में उत्तराखंड कैंपा की पूरी टीम को बधाई देते हुए यह अपेक्षा की है कि उत्तराखंड वन विभाग इस धनराशि से राज्य हित में निर्धारित समय एवं मानकों के अनुरूप योजनाओं का क्रियान्वयन करेगा।

मुख्य कार्यकारी अधिकारी उत्तराखण्ड कैम्पा ने बताया कि प्रतिकरात्मक वनरोपण निधि अधिनियम 2016 के अन्तर्गत स्थापित उत्तराखण्ड प्रतिकरात्मक वनरोपण निधि प्रबंधन और योजना प्राधिकरण (कैम्पा) के तहत प्रदेश को वर्ष 2023-24 में 424.46 करोड़ रुपये की वार्षिक कार्याेजना के सापेक्ष 383.25 करोड़ रुपये की स्वीकृति प्राप्त हुई, वर्ष 2024-25 में 408 करोड़ रुपए की वार्षिक कार्ययोजना के सापेक्ष 369.25 करोड़ रुपये की स्वीकृति भारत सरकार से प्राप्त हुई थी।