उत्तराखंड टूरिस्ट विलेज सारी, ग्रामीण पर्यटन का अद्भुत उदाहरण

रुद्रप्रयाग जिले में तुंगनाथ, चोपता ट्रैक पर मौजूद सारी गांव उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में ग्रामीण पर्यटन और स्वरोजगार की मिसाल कायम कर रहा है। सारी गांव में इस वक्त करीब 50 होम स्टे संचालित हो रहे हैं, जिसमें ढाई सौ से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष -अप्रत्यक्ष रोजगार मिल रहा है।
सारी गांव में होम स्टे की शुरुआत, 1999 में माउंटेन गाडड मुरली सिंह नेगी ने की, तब उन्होंने अपने पुराने घर की मरम्मत करते हुए, इस क्षेत्र में ट्रैकिंग के लिए आने वाले पयर्टकों को ठहरने और खाने की सुविधा प्रदान की। चूंकि यहां वर्ष भर पयर्टकों की आवाजाही रहती है, इस कारण जल्द ही अन्य लोगों ने भी अपने परम्परागत घरों के दरवाजे पयर्टकों के लिए खोल दिए। ग्रामीण शुरुआत से ही, पयर्टकों को पहाड़ी जीवनशैली के अनुरूप आवास और भोजन उपलब्ध कराते थे, जो पर्यटकों को नया अनुभव देता था। अब वर्तमान में यहां होम स्टे की संख्या 50 तक पहुंच गई है, जिसमें से 41 पर्यटन विभाग के पास पंजीकृत हैं, कई लोगों ने प्रदेश सरकार की दीन दयाल उपाध्याय पयर्टक होम स्टे योजना के तहत भी होम स्टे शुरु किए हैं। इसके अलावा 30 लोगों को ट्रेकिंग ट्रक्शन सेंटर होम-स्टे योजनान्तर्गत के तहत अनुदान मिला है।

स्थानीय ग्रामीण जीएस भट्ट बताते हैं कि गत वर्ष गांव में करीब सात हजार पर्यटक ठहरने के लिए आए। स्वरोजगार के चलते गांव में पलायन बहुत कम है, साथ ही अन्य गांवों के विपरीत सारी गांव पूरी तरह जीवंत बना हुआ है।

मुख्यमंत्री धामी ने भी किया रात्रि विश्राम
दिसंबर माह में रुद्रप्रयाग जिले के दौरे पर पहुंचे सीएम पुष्कर सिंह धामी ने भी सारी गांव पहुंच कर होम स्टे में रात्रि विश्राम किया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने गांव में पर्यटन और स्वरोजगार के मॉडल की सराहना करते हुए कहा कि इसे अन्य लोगों को भी प्रेरणा मिलेगी। इस दौरान मुख्यमंत्री ने ग्राम वासियों के साथ ही भोजन भी किया। रुद्रप्रयाग से सारी गांव की दूरी लगभग 60 किलोमीटर है।

ट्रैकिंग रूट
तुंगनाथ ट्रैक सारी से तुंगनाथ ट्रैक की दूरी लगभग 30 किलोमीटर है। यह ट्रैक आपको तुंगनाथ मंदिर तक ले जाता है, जो भगवान शिव को समर्पित है।

चोपता ट्रैक सारी गांव से चोपता ट्रैक की दूरी लगभग 25 किलोमीटर है। यह ट्रैक आपको चोपता घाटी तक ले जाता है, जो इन दिनों लाल बुरांश से सजा हुआ है।

देवरिया ताल ट्रैक- सारी गांव से ही देवरिया ताल ट्रैक भी शुरू होता है, जिसकी दूरी करीब तीन किमी है।

सफलता के आंकड़े
191 परिवार वर्तमान में निवासरत हैं सारी गांव में
1200 करीब की आबादी है गांव की
50 से अधिक होम स्टे संचालित हो रहे हैं गांव में
250 करीब लोगों को मिला हुआ है स्वरोजगार

सरकार होमस्टे को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं चल रही है। अच्छी बात यह है कि उत्तराखंड के ग्रामीण क्षेत्रों में अब होमस्टे का कारोबार खूब फल फूल रहा है, जो ग्रामीणों की आर्थिक की का भी बड़ा जरिया बन रहा है।
– पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री उत्तराखंड।

सरकारी नौकरी मात्र नौकरी नहीं बल्कि सामाजिक उत्तरदायित्वः धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री आवास के मुख्य सेवक सदन में आयोजित कार्यक्रम में 112 नवचयनित परिवहन आरक्षियों को नियुक्ति पत्र प्रदान किये। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने चारधाम यात्रा मार्ग पर सड़क सुरक्षा के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से 2 प्रचार वाहनों को भी रवाना किया।

नियुक्ति पत्र प्राप्त करने वाले नव चयनित अभ्यर्थियों को शुभकामनाएं देते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि यह सफलता न केवल चयनित युवाओं के परिश्रम, अनुशासन और संकल्प का परिणाम है, बल्कि इसमें उनके परिवारजनों के सहयोग, त्याग और आशीर्वाद की भी महत्वपूर्ण भूमिका है।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि परिवहन विभाग में परिवहन आरक्षी का पद अत्यंत महत्वपूर्ण है, चाहे यात्री सेवाओं का सुचारू संचालन हो, सड़क सुरक्षा की निगरानी हो, वाहन पंजीकरण की प्रक्रिया हो या प्रदूषण नियंत्रण हो, प्रत्येक व्यवस्था में इनकी अहम भूमिका हैं। इसलिए आपकी यह नौकरी मात्र एक सरकारी नौकरी नहीं, बल्कि एक सामाजिक उत्तरदायित्व भी है।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि नवनियुक्त परिवहन आरक्षियों से अपेक्षा करता हूँ कि आप न केवल अपने कार्यस्थल पर कर्तव्यनिष्ठा और अनुशासन बनाए रखेंगे, बल्कि आमजन के साथ संवाद और सहयोग की भावना से भी कार्य करेंगे। प्रयास होना चाहिए कि आमजन का कार्य ऑटो मोड पर हो उन्हें अनावश्यक न भटकना पड़े। सरकार भ्रष्टाचार की कार्य संस्कृति को जड़ से समाप्त करने के लिए संकल्पबद्ध है। टोल फ्री नम्बर 1064 पर भ्रष्टाचार की शिकायतों की प्रभावी सुनवाई हो रही है।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि परिवहन विभाग प्रदेश में सुगम और सुरक्षित सेवाएं प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। लेकिन हम सभी जानते हैं कि जैसे जैसे राज्य में वाहनों की संख्या में वृद्धि हुई है, सड़क दुर्घटनाओं की संख्या में भी चिंताजनक बढ़ोत्तरी हुई है। इसलिए राज्य में दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए हमने फरवरी 2025 में ’’नई उत्तराखण्ड सड़क सुरक्षा नीति 2025’’ लागू की है। इस नीति के अन्तर्गत सभी संबंधित विभागों की जिम्मेदारियां निर्धारित करते हुए वर्ष 2030 तक सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मृत्यु दर को 50 प्रतिशत तक कम करने का लक्ष्य रखा गया है। मुझे पूर्ण विश्वास है कि आप सभी पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ हमारे इस लक्ष्य को प्राप्त करने में सहयोग करेंगे।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि हमारी सरकार का संकल्प है कि प्रदेश के योग्य, परिश्रमी और प्रतिभावान युवाओं को उनकी काबिलियत के आधार पर पारदर्शी तरीके से समान अवसर प्राप्त हों। पारदर्शी तरीके से होने वाली भर्ती और पदोन्नति युवाओं में भरोसा जगाती है। यह पारदर्शिता बेहतर तरीके से उन्हें प्रतियोगिता में उतरने के लिए प्रेरित करती है, हमारी सरकार इसी दिशा में निरंतर काम कर रही है। पूर्व की सरकारों की और से भर्ती प्रक्रियाओं पर लगाये गए कलंक को मिटाने के लिए ही हमने राज्य में देश का सबसे कठोर ’’नकल विरोधी कानून’’ लागू किया है। इस कानून के लागू होने के पश्चात प्रदेश में सभी परीक्षाएं पारदर्शी तरीके से सकुशल संपन्न हो रही हैं, इसी का नतीजा है कि हम पिछले 3 वर्षों में 23 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरी देने में सफल रहे हैं।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि पूर्व की सरकारों में नौकरी में भाई भतीजावाद के साथ ही भ्रष्टाचार भी अपने चरम पर था। हम प्रदेश में भ्रष्टाचार रूपी इस दीमक को जड़ से समाप्त करने के लिए ’‘ज़ीरो टॉलरेंस’’ की नीति के तहत कार्य कर रहे हैं। इसी का परिणाम है कि पिछले तीन वर्षों में हमने भ्रष्टाचार में लिप्त करीब 200 से अधिक लोगों को जेल की सलाखों के पीछे पहुँचाया है और हमारा ये अभियान लगातार जारी है।

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी, राज्य सभा सांसद नरेश बंसल, विधायक खजान दास, सचिव बृजेश कुमार संत, अपर सचिव रीना जोशी सहित परिवहन विभाग के अधिकारी एवं सभी नवचयनित अभ्यर्थी मौजूद रहे।

सरकारी भूमि से अवैध अतिक्रमण हटाने की निरंतर कार्यवाही की जाएः सीएम

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री आवास में उच्चाधिकारियों को निर्देश दिये कि भ्रष्टाचार के विरूद्ध निरंतर अभियान चलाया जाए। टोल फ्री नम्बर 1064 का व्यापक स्तर पर प्रचार किया जाए। मुख्यमंत्री ने धर्मांतरण से संबंधित मामलों में की गई कार्रवाई की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सभी जनपदों में सत्यापन अभियान लगातार जारी रखने के साथ ही संदिग्ध गतिविधि अथवा व्यक्ति की जानकारी मिलने पर तत्काल और सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिये हैं कि आधार कार्ड और अन्य सरकारी दस्तावेजों को बनाते समय उनका सही प्रकार से सत्यापन किया जाए। गलत दस्तावेज जारी करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि अतिक्रमण के विरुद्ध चल रहे अभियान को निरंतर जारी रखा जाए। यह सुनिश्चित किया जाए कि जो भूमि अतिक्रमण से मुक्त कराई जा चुकी है, वहां दोबारा अतिक्रमण न हो। शत्रु संपत्तियों पर हुए अतिक्रमण का भी विस्तृत आंकलन कर उसकी जानकारी प्रस्तुत की जाए।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सरकारी भवनों के निर्माण कार्यों में स्थानीय श्रमिकों को प्राथमिकता देने के साथ ही भवनों के निर्माण में राज्य की सांस्कृतिक पहचान और पारंपरिक पर्वतीय वास्तुशैली को प्रमुखता दी जाए। अधिकारियों को बॉर्डर क्षेत्रों में भी सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करते हुए सघन चेकिंग अभियान चलाने के निर्देश भी उन्होंने दिए हैं।

बैठक में प्रमुख सचिव आर. मीनाक्षी सुंदरम, अपर पुलिस महानिदेशक वी.मुरूगेशन, ए.पी. अंशुमन, सचिव विनोद कुमार सुमन, उपाध्यक्ष एमडीडीए बंशीधर तिवारी उपस्थित थे।

गौरव के पलः उत्तराखण्ड के तीन एनसीसी कैडेट्स ने माउंट एवरेस्ट की चोटी पर किया आरोहण

साहस, दृढता और अनगिनत चुनौतियों को पार करने की अदभुत मिसाल पेश करते हुए उत्तराखण्ड के तीन युवा राष्ट्रीय कैडेट कोर के कैडेट्स ने दुनिया की सबसे ऊॅंची चोटी माउंट एवरेस्ट पर सफलतापूर्वक आरोहण की है। इन युवाओं ने यह ऐतिहासिक उपलब्धि 18 मई 2025 को प्राप्त की जो यह सिद्ध करती है कि जब सपनों में विश्वास और कठिन परिश्रम होता है तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं होता।

इन साहसी युवा पर्वतारोहियों-कैडेट वीरेन्द्र सामन्त, 29 उत्तराखण्ड वाहिनी राष्ट्रीय कैडेट कोर, देहरादून, कैडेट मुकुल बंगवाल, 4 उत्तराखण्ड वाहिनी राष्ट्रीय कैडेट कोर, पौडी, कैडेट सचिन कुमार, 3 उत्तराखण्ड वाहिनी राष्ट्रीय कैडेट कोर, उत्तरकाशी ने दुनिया की सबसे ऊॅंची पर्वत चोटी पर चढ़ाई कर न केवल अपने व्यक्तिगत साहस को परखा, बल्कि यह संदेश भी दिया कि भारत के युवा अगर ठान लें तो कोई भी चुनौती उनके रास्ते में नहीं आ सकती।

इस सफलता पर कैडेट वीरेन्द्र सामन्त ने कहा कि यह हमारी जीत नहीं है, यह हर उस युवा की जीत है जो सपने देखता है। हमने कड़ी चुनौतियों का सामना किया लेकिन हर कदम पर हमें अपने आप पर, अपनी टीम पर और इस सपने को पूरा करने पर विश्वास था।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने युवा कैडेट्स को उनकी सफलता पर बधाई देते हुये उन्हें भविष्य के लिए शुभकामनाएं दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह उपलब्धि केवल इन कैडेट्स की नहीं बल्कि पूरे प्रदेश की है। उनका साहस और समर्पण देश के युवाओं के लिए एक नई प्रेरणा का स्रोत बनेगा। उनकी सफलता एन0सी0सी के मूल्यों, अनुशासन, टीमवर्क और उत्कृष्टता की ओर निरंतर प्रयास का प्रतीक है।

उत्तराखण्ड एन0सी0सी0 के अपर महानिदेशक, मेजर जनरल रोहन आनन्द, सेना मेडल ने कहा कि यह अभियान एन0सी0सी0 के द्वारा आयोजित किया गया था, जिसका उद्देश्य भारतीय युवाओं को साहसिक खेलों, नेतृत्व और आत्मनिर्भरता के प्रति प्रेरित करना है। इस कठिन यात्रा में इन कैडेट्स ने न केवल विपरीत मौसम का सामना किया, बल्कि मानसिक और शारीरिक थकावट को भी पार किया। फिर भी उनके अथक प्रयासों और टीमवर्क ने उन्हें सफलता की ऊंचाइयों तक पहुंचाया।

उन्होंने कहा कि एन0सी00सी0 में हम हमेशा कहते हैं कि नेतृत्व कठिन समय में ही पैदा होता है। इन युवा पर्वतारोहियों ने इस सिद्धांत को अपने कार्यों से साबित किया है। इन कैडेट्स ने जो किया है वह भावी पीढ़ी को प्रेरित करेगा, ताकि वे अपने डर को पार कर सकें और असाधारण उपलब्धियां हासिल कर सकें। उन्होंने कहा, यह सफलता सिर्फ इन कैडेट्स की नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र की है। उनकी यात्रा हमारे युवा शक्ति, एकता की ताकत और असंभव को संभव बनाने की अदम्य इच्छा का प्रतीक है।

इस यात्रा में इन कैडेट्स को अनुभवी पर्वतारोहियों, प्रशिक्षकों और एन0सी0सी0 के मार्गदर्शकों का पूरा सहयोग प्राप्त था। इसके अलावा, उत्तराखण्ड पर्यटन विकास बोर्ड, भारतीय सेना की पर्वतारोहण टीम और स्थानीय संगठनों ने इस अभियान की सफलता में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया।

भारत दर्शन योजना में इस वर्ष छात्रों की संख्या का लक्ष्य 1000, अगले वर्ष के लिए दिया 5000 का लक्ष्य

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने सचिवालय में शिक्षा विभाग की समीक्षा की। मुख्य सचिव ने विभाग के क्रियाकलापों पर अधिकारियों के साथ विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत परीक्षा पैटर्न एवं अन्य प्राविधानों को समाहित करने के लिए व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाएं।

मुख्य सचिव ने माध्यमिक शिक्षा के अंतर्गत भारत दर्शन योजना को विस्तारित किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इस वर्ष कम से कम 1 हजार बच्चों को भारत दर्शन यात्रा करायी जाए, जिसे अगले वर्ष बढ़ाकर 5000 करने का लक्ष्य रखा जाए। यह बच्चों के अन्वेषण एवं कौशल के लिए एक महत्त्वपूर्ण योजना है। उन्होंने भारत दर्शन यात्रा के दिवसों को बढ़ाकर 7 दिन किए जाने के भी निर्देश दिए। कहा कि भारत के प्रतिष्ठित विज्ञान एवं तकनीकी संस्थानों के साथ ही सैन्य प्रतिष्ठानों के भ्रमण कार्य आयोजित कराए जाएं।

क्लस्टर स्कूल भवनों के लिए डीपीआर एक माह में तैयार करने के दिए निर्देश
मुख्य सचिव ने प्रस्तावित 559 क्लस्टर विद्यालयों के निर्माण में तेजी लाए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने अगले एक माह में सभी चिन्हित क्लस्टर विद्यालय भवनों की डीपीआर तैयार कर प्रस्तुत किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने बैठक के दौरान ही फोन के माध्यम से शिक्षा विभाग द्वारा चयनित कार्यदायी संस्थाओं के विभागाध्यक्षों को एक माह में डीपीआर तैयार किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने स्मार्ट क्लासेज एवं कम्प्यूटर लैब निर्माण कार्यों की डीपीआर भी एक माह में तैयार किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने निर्माण कार्यों में तेजी लाए जाने के लिए विभागीय निदेशकों को जिलाधिकारियों एवं कार्यदायी संस्थाओं से समन्वय के लिए जनपदों का दौरा किये जाने के निर्देश भी दिए। उन्होंने जनपदों के भ्रमण कार्यक्रमों के दौरान क्लस्टर स्कूलों में वाहन भाड़ा के लिए जिलाधिकारी की अध्यक्षता वाली जिला स्तरीय समितियों की बैठकें शीघ्र आयोजित कर ऐसे मामलों के निस्तारित किए जाने के भी निर्देश दिए।

प्रत्येक कार्य के लिए की जाए टाइम लाइन निर्धारितः मुख्य सचिव
मुख्य सचिव ने विद्यालयों के लिए सभी प्रस्तावित हॉस्टल फैसिलिटी की डीपीआर भी एक माह में तैयार किये जाने के निर्देश दिए। उन्होंने स्मार्ट क्लासेज हेतु कम्प्यूटर लैब के लिए एक समर्पित हैड खोले जाने के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्यों में देरी न हो इसके लिए प्रत्येक कार्य की समयसीमा निर्धारित की जाए, साथ ही सचिव, अपर सचिव एवं महानिदेशक स्तर पर लगातार कार्यों की समीक्षा की जाए। उन्होंने कहा कि प्रदेश के भीतर आवासीय विद्यालयों को बढ़ाए जाने पर भी फोकस किया जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि आवासीय विद्यालयों में एक वाहन उपलब्ध कराया जाए, ताकि मेडिकल इमरजेंसी एवं अन्य आपातकालीन परिस्थितियों में होने वाली समस्याओं से बचा जा सके।

इस अवसर पर सचिव रविनाथ रमन एवं अपर सचिव रंजना राजगुरू सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री ने तृतीय पर्वतारोहण अभियान ‘शौर्य’ का किया फ्लैग ऑफ

मुख्यमंत्री ने खुशी जाहिर करते हुए एनडीआरएफ के जवानों को तृतीय पर्वतारोहण अभियान जाने पर शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा निश्चित ही हमारे जवान इस अभियान में सफल होंगे एवं इस ट्रैक पर आने वाले अन्य पर्वतारोहियों को भी मार्गदर्शन देंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में साहसिक पर्यटन की अपार संभावनाओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने के लिए राज्य सरकार कार्य कर रही है। उन्होंने कहा विभिन्न क्षेत्रों में साहसिक गतिविधियों और खेलों को बढ़ावा दिया जा रहा है।

युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत हैं एनडीआरएफ के जवान
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार, राज्य में एंगलिंग, साइक्लिंग, राफ्टिंग, ट्रेकिंग, पैराग्लाइडिंग जैसी अनेक साहसिक गतिविधियों को प्रोत्साहित दे रही है। राज्य में प्रतिवर्ष टिहरी वाटर स्पोर्ट्स, नयार महोत्सव जैसी अनेकों प्रतियोगिताएं आयोजित हो रही हैं। मुख्यमंत्री ने कहा एनडीआरएफ के जवान आपदा प्रबंधन में अपनी सेवाएँ देने के साथ साहसिक गतिविधियों में भाग लेकर अपने कौशल का विस्तार और युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बन रहे हैं। उन्होंने कहा राज्य में आने वाली हर आपदा में एन.डी.आर.एफ के जवान ग्राउंड जीरो पर रहते हैं।

राज्य में आपदा प्रबंधन की मजबूती की दिशा में हो रहे हैं अनेक काम
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार आपदा प्रबंधन की मजबूती के लिए निरंतर कार्य कर रही है। आपदा प्रबंधन को आवश्यक संसाधनों, अत्याधुनिक उपकरणों और नवीनतम तकनीक से जोड़ा जा रहा है। जवानों को आधुनिक एवं तकनीकी रूप से दक्ष बनाने के लिए प्रशिक्षण केंद्रों की भी स्थापना की जा रही है। एसडीआरएफ और पुणे की इंडियन रेस्क्यू एकेडमी के बीच समझौता किया गया है। केंद्र सरकार के सहयोग से राज्य सरकार ने उत्तराखंड डिजास्टर प्रीपेयर्डनेस एंड रेसीलियेंट प्रोजेक्ट योजना को मंजूरी दी है। जिसके अंतर्गत लगभग 1480 करोड़ रुपए की राशि आपदा प्रबंधन तंत्र को मजबूत करने के लिए स्वीकृत की गई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्य में साहसिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए मुखवा भ्रमण के दौरान कई साहसिक खेलों के प्रतिभागियों को स्वयं फ्लैग ऑफ कर रवाना किया था। प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन और सहयोग से राज्य सरकार राज्य को साहसिक खेलों और ईको-टूरिज्म के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करने का कार्य कर रही है। उन्होंने कहा अक्टूबर 2022 में प्रधानमंत्री ने माणा गांव से देश के सभी सीमांत के गांवों को देश के पहले गांव की संज्ञा दी थी।

डी.जी एनडीआरएफ पीयूष आनंद ने बताया कि ट्रैकिंग का यह अभियान उच्च हिमालय क्षेत्रों में रेस्क्यू करने के लिए भी सहायक सिद्ध होगा। इससे हमारे जवान उच्च हिमालय क्षेत्रों में रेस्क्यू अभियान करने के लिए सक्षम बनेंगे। उन्होंने कहा जब भी राज्य को एनडीआरएफ की आवश्कता पड़ती है, हम हमेशा तैयार रहते हैं। उन्होंने कहा टाइम ऑफ रेस्पॉन्ड को भी कम किया जा रहा है। इस अभियान में 44 सदस्यों का दल देहरादून, उत्तरकाशी, गंगोत्री, चिरबासा, भोजवासा, तपोवन तथा कीर्ति ग्लेशियर होते हुए लगभग 6,832 मीटर ऊँची ’केदार डोमश’ चोटी को फतह करने के लिए जा रहे हैं। इस चुनौतीपूर्ण ट्रैक में दुर्गम पर्वतीय रास्ते और हिमनद हैं।

इस अवसर पर मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन, डीजीपी दीपम सेठ, आपदा प्रबंधन सलाहकार समिति के उपाध्यक्ष विनय रोहेला, सचिव विनोद सुमन मौजूद रहे।

सीएम हेल्पलाइन की सक्रियता जांचने के क्रम में सीएम ने शिकायतकर्ताओं से की बातचीत

सीएम हेल्पलाइन 1905 पर दर्ज होने वाली शिकायतों के निस्तारण के लिए दिए जाने वाले निर्देशों पर विभाग कितनी तत्परता से काम कर रहे हैं, यह जांचने के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कई आवेदकों से बातचीत कर फीडबैक लिया। इस दौरान सभी शिकायतकर्ताओं ने बताया कि मुख्यमंत्री के पिछले दिशा-निर्देश के बाद अब उनकी शिकायतों का निस्तारण हो चुका है। इसके लिए उन्होंने मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गत दिनों सीएम हेल्पलाइन की समीक्षा की थी। इसमें कुछ प्रकरण ऐसे थे, जिनमें मुख्यमंत्री ने विभागों को तय समय सीमा के भीतर निस्तारण के निर्देश दिए थे। इन्हीं प्रकरणों में विभागों के स्तर से क्या कार्रवाई की गई, यह जानने के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री आवास में उच्चाधिकारियों के साथ बैठक के दौरान कई शिकायतकर्ताओं से बातचीत की। पहले मामले में उत्तरकाशी निवासी लक्ष्मी देवी ने शिक्षा विभाग से पारिवारिक पेंशन नहीं लग पाने की शिकायत की थी। सीएम से बातचीत में उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री के पिछले दिशा-निर्देश के बाद विभाग ने उनकी पारिवारिक पेंशन स्वीकृत कर दी है। इसी तरह रुद्रप्रयाग निवासी जगदम्बा प्रसाद नौटियाल ने शिक्षा विभाग से मेडिकल बिलों का भुगतान नहीं हो पाने की शिकायत की थी। बुधवार को उन्होंने भी सीएम पुष्कर सिंह धामी को बताया कि मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप के बाद लंबित बिलों का भुगतान हो गया है। इसी तरह उद्यान विभाग से रिटायर्ड नैनीताल निवासी बहादुर सिंह बिष्ट ने भी सीएम पुष्कर सिंह धामी को बताया कि सीएम के गत दिशा-निर्देशों के क्रम में विभाग ने उनका जीपीएफ का भुगतान कर लिया है। सभी शिकायतकर्ताओं ने इसके लिए सीएम पुष्कर सिंह धामी का आभार व्यक्त किया है।

सीएम ने दिखाई संवेदनशीलता
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी न सिर्फ सीएम हेल्पलाइन पर दर्ज होने वाली शिकायतों की समीक्षा कर रहे हैं, बल्कि वह बैठकों के बाद होने वाली कार्रवाई पर भी संवेदनशीलता के साथ नजर बनाए हुए हैं। इसी क्रम में सीएम अब पुनः शिकायतकर्ताओं से वास्तविक फीडबैक ले रहे हैं। इससे विभागों पर भी शिकायतों के निस्तारण में तत्परता दिखाने का दबाव बन रहा है।

इस अवसर प्रमुख सचिव आर. के सुधांशु, सचिव शैलेश बगोली, अपर पुलिस महानिदेशक ए.पी.अंशुमन, गढ़वाल कमिश्नर विनय शंकर पांडेय, उपाध्यक्ष एमडीडीए बंशीधर तिवारी उपस्थित थे।

सीएस ने की ई-ऑफिस लागू करने में जनपद पौड़ी के प्रदर्शन की सराहना

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन की अध्यक्षता में सचिवालय में सचिव समिति की बैठक आयोजित हुई। बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने सभी सचिवों को अपने-अपने विभागों में ई-ऑफिस लागू किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सभी विभागों एवं जनपदों में ई-ऑफिस लागू किया जाए।

मुख्य सचिव ने ई-ऑफिस लागू करने में जनपद पौड़ी के प्रदर्शन की सराहना करते हुए बाकी जनपदों विशेषकर देहरादून, नैनीताल एवं हरिद्वार जनपद को भी शीघ्रातिशीघ्र ई-ऑफिस के माध्यम से कार्यों को किए जाने पर जोर दिया। उन्होंने ई-ऑफिस सिस्टम के अंतर्गत शासन एवं निदेशालय के मध्य समन्वय मैकेनिज्म को सरल किए जाने की बात भी कही।

मुख्य सचिव ने कहा कि सभी सचिवगण अपने-अपने विभागों की वेबसाइट भी अपडेट कराना सुनिश्चित करें। उन्होंने आईटीडीए के माध्यम से तैयार नए फॉर्मेट में विभागीय वेबसाईटों को अपडेट किए जाने पर जोर दिया। उन्होंने निर्देश दिए कि ई-ऑफिस की दैनिक गतिविधियों में विभागीय कार्मिकों को आ रही समस्याओं के निराकरण के लिए आईटी विभाग द्वारा विभागीय कार्मिकों को ई-ऑफिस एवं वेबसाइट अपडेट के लिए तकनीकी सहायता एवं प्रशिक्षण उपलब्ध कराए जाए।

इस अवसर पर प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु, एल. फैनई, विशेष प्रमुख सचिव अमित सिन्हा, सचिव शैलेश बगोली, नितेश कुमार झा, राधिका झा, डॉ. बी.वी.आर.सी. पुरूषोत्तम, रविनाथ रमन, डॉ. पंकज कुमार पाण्डेय, डॉ. रंजीत कुमार सिन्हा, चंद्रेश कुमार यादव, डॉ. आर. राजेश कुमार, डॉ. नीरज खैरवाल, दीपेन्द्र कुमार चौधरी, विनोद कुमार सुमन एवं रणवीर सिंह चौहान सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री ने विद्या मंदिर, मांडूवाला में छात्रावास शिलान्यास कार्यक्रम में किया प्रतिभाग

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मांडूवाला, देहरादून स्थित सरस्वती विद्या मंदिर में छात्रावास के शिलान्यास कार्यक्रम में प्रतिभाग किया।

मुख्यमंत्री ने छात्रावास के शिलान्यास के अवसर पर सभी विद्यार्थियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह छात्रावास, छात्रों को आवासीय सुविधा प्रदान करने के साथ उनके सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने कहा भारत की स्वतंत्रता के बाद सांस्कृतिक मूल्यों, राष्ट्रवाद की भावना को पुनर्स्थापित करने के लिए सरस्वती शिशु मंदिर की स्थापना की गई। मुख्यमंत्री ने सरस्वती विद्या मंदिर मांडूवाला के विद्यार्थियों द्वारा हाल ही में संपन्न हुई 10वीं और 12वीं की परीक्षाओं में शत-प्रतिशत परिणाम प्राप्त करने पर शुभकामनाएं दी।

प्रधानमंत्री के नेतृत्व में देश में शिक्षा व्यवस्था में हुए व्यापक सुधार
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार किए गए हैं। प्रदेश सरकार ने देश में सर्वप्रथम नई शिक्षा नीति को लागू किया। प्रदेश में 141 पीएम श्री विद्यालय तथा नेताजी सुभाष चन्द्र बोस आवासीय विद्यालयों का निर्माण किया जा रहा है। प्रदेश के 13 जनपदों के 500 विद्यालयों में वर्चुअल क्लासरूम की व्यवस्था भी की गई है। क्वालिटी एजुकेशन सुनिश्चित करने के लिए सभी सरकारी विद्यालयों में एन.सी.ई.आर.टी. पुस्तके अनिवार्य की गई हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा उत्तराखण्ड के सरकारी और अशासकीय स्कूलों के छठवीं से 12वीं कक्षा तक के मेधावी छात्र-छात्राओं को, मुख्यमंत्री मेधावी छात्र प्रोत्साहन छात्रवृत्ति योजना के तहत छात्रवृत्ति दी जा रही है। राज्य में बच्चों के व्यक्तित्व विकास के लिए प्रत्येक विकासखण्ड के 10वीं और 12वीं के मेधावी छात्रों को भारत भ्रमण पर भेजने की शुरुआत भी की गई है। राज्य में मुख्यमंत्री बालाश्रय योजना भी प्रारंभ की गई है। स्कूली शिक्षा व्यवस्था की गुणवत्ता और परिणामों में सुधार लाने के उद्देश्य से राज्य में विद्या समीक्षा केंद्र की स्थापना भी की गई है।

प्रदेश के सभी निजी विद्यालयों को भी विद्या समीक्षा केंद्र से जोड़ा जाएगा
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के विद्या समीक्षा केंद्र के गुजरात मॉडल को लागू करने वाला उत्तराखंड देश का पहला राज्य बन गया है। राज्य के लगभग 16 हजार विद्यालय इस नवाचार से जोड़े जा चुका है। शीघ्र ही प्रदेश के सभी निजी विद्यालयों को भी विद्या समीक्षा केंद्र से जोड़ा जाएगा। जिससे इन विद्यालयों से संबंधित शिक्षकों, छात्रों तथा समस्त शैक्षिक गतिविधियों की जानकारी एक केंद्रीकृत प्रणाली के माध्यम से सरकार के पास उपलब्ध रहेगी। मुख्यमंत्री ने कहा राज्य सरकार प्रदेश में शिक्षा के साथ खेलों पर भी विशेष ध्यान दे रही है।

राष्ट्रीय स्तर में मेडल लाने वाले खिलाड़ियों को सरकारी नौकरी देने की ऐतिहासिक शुरुआत
मुख्यमंत्री ने कहा राज्य सरकार ने प्रदेश में करोड़ों रूपए की लागत से स्टेडियम एवं खेल सुविधाओं का निर्माण करवाया गया है 8 वर्ष की उम्र से ही प्रतिभावान खिलाड़ियों को छात्रवृत्ति दी जा रही है। प्रदेश के आवासीय स्पोर्ट्स कॉलेजों के खिलाड़ियों को निःशुल्क प्रशिक्षण, शिक्षा, आवास, भोजन व किट आदि भी प्रदान किए जा रहे हैं। राष्ट्रीय स्तर की किसी भी प्रतियोगिता में मेडल लाने वाले खिलाड़ियों को सरकारी नौकरी देने की ऐतिहासिक शुरुआत भी की है। उन्होंने कहा हाल ही में आयोजित हुए 38वें राष्ट्रीय खेलों के भव्य एवं सफल आयोजन में प्रदेश के खिलाड़ियों ने 100 से अधिक मेडल लाकर इतिहास रचा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि विद्या भारती द्वारा संपूर्ण भारत में 12 हजार से अधिक विद्यालय संचालित किए जा रहे हैं जिनमें लगभग 35 लाख से अधिक छात्र-छात्राएं शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। इन विद्यालयों में आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान की जा रही है। इसके साथ ही राष्ट्रभक्ति, नैतिक मूल्यों, भारतीय संस्कृति, संस्कारों और समाज के प्रति उत्तरदायित्व के बोध की भावना को विकसित करने का किया जाता है। विद्या भारती द्वारा संचालित विद्यालयों में चरित्र निर्माण और संस्कार सेवा भाव को महत्व दिया जाता है।

इस अवसर पर अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल के सदस्य सुरेश सोनी, राज्यसभा सांसद नरेश बंसल, विधायक सहदेव पुंडीर, अखिल भारतीय संगठन मंत्री शिवकुमार, क्षेत्रीय संगठन मंत्री विद्या भारती (पश्चिमी उत्तर प्रदेश) डोमेश्वर साहू, अध्यक्ष विद्यालय परिसर सुरेंद्र, डॉ. सुषमा अग्रवाल, कुलपति दून विश्वविद्यालय प्रो. सुरेखा डंगवाल, नगर पालिका अध्यक्ष नीरू देवी, अध्यक्ष बाल आयोग गीता खन्ना एवं अन्य लोग मौजूद रहे।

सीएम ने निकायों के कार्यालयों को डिजिटल करने, रजत जयंती पार्क बनाने, वेंडिंग जोन बनाने की घोषणा की

सीएम धामी ने राज्य के सभी नगर निकायों के जनप्रतिनिधियों को नसीहत दी है कि वे अपनी भूमिका को केवल एक पद के रूप में न देखें, बल्कि इसे जनसेवा के एक मिशन के रूप में अपनाएं। सभी को यह सुनिश्चित करना होगा कि हमारी ट्रिपल इंजन सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं और कार्यों का लाभ समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक पहुंचे। आप सभी अपने-अपने निकाय कार्यालय को केवल एक प्रशासकीय इकाई ही नहीं, बल्कि उसे एक सेवा केंद्र के रूप में विकसित करें, जहाँ प्रत्येक नागरिक बिना झिझक के पूरे विश्वास के साथ आएं। आप सभी पारदर्शिता, जवाबदेही और ईमानदारी को अपनी कार्यशैली का मूल मंत्र बनाएं। आप लोग नियमित रूप से विशेषकर उन कार्यों की मॉनिटरिंग स्वयं करें, जिनमें भ्रष्टाचार की संभावना अधिक रहती है, क्योंकि प्रशासनिक स्तर पर आपकी सतर्कता ही सुशासन की सबसे बड़ी गारंटी बन सकती है। भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाएं और अपने अधीनस्थ अधिकारियों-कर्मचारियों को ये स्पष्ट संदेश दें कि किसी भी स्तर पर भ्रष्ट आचरण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मेरा मानना है कि हमारी जिम्मेदारी केवल सत्ता में बने रहने की ही नहीं है, बल्कि हमारी असल जिम्मेदारी जनता की सेवा करने की है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आज मुख्य सेवक सदन में शहरी विकास विभाग द्वारा आयोजित शहर से संवाद कार्यक्रम में राज्य के सभी नगर निगम एवं नगर पालिकाओं के जनप्रतिनिधियों से संवाद किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने शहरी विकास विभाग द्वारा महिला स्वयं सहायता समूहों की सहायता हेतु तैयार तीन वेब पोर्टल लॉन्च किए।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने नगर निकायों के कार्यालयों को डिजिटल करने, रजत जयंती पार्क बनाने, नगर निकायों में वेंडिंग जोन बनाने, भारत सरकार से टाइड फंड को अनटाइड करने का अनुरोध करने की तथा राज्य की प्रत्येक नगर निगम में 10, नगर पालिका में 5 तथा नगर पंचायत में 3 ही-टेक हेयर सैलून/पार्लर स्थापित करने हेतु स्थानीय महिला एवं पुरुषों हेतु प्रशिक्षण का कार्यक्रम चलाने की घोषणा की। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने सभी नगर निगम के महापौर एवं नगर पालिकाओं के अध्यक्षों सहित विभिन्न स्थानीय जनप्रतिनिधियों की समस्याओं को सुना तथा नोट किया।

नगर निकाय शहरों की आत्माः सीएम
नगर निकायों के जनप्रतिनिधियों से बातचीत के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि शहरी सरकार नगर निगम और नगर पालिकाएं किसी भी शहर की आत्मा हैं। यह न केवल बुनियादी सुविधाएं जनता तक पहुँचाने का कार्य करती हैं, बल्कि किसी शहर की दिशा और दशा तय करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

मुख्यमंत्री ने याद दिलाई नगर निकायों की जिम्मेदारियां
मुख्यमंत्री ने कहा कि अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी है, कई नगरों में जल निकासी की समस्या बनी हुई है। साथ ही शहरों में कचरा प्रबंधन की व्यवस्था को और अधिक सशक्त करने की आवश्यकता है। ट्रैफिक जाम अब शहरों में एक आम चुनौती बन चुका है, जिसे नियंत्रित करने के लिए स्थानीय निकायों को भी को विशेष प्रयास करने होंगे। इसके साथ ही हमें पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी प्राथमिकता के साथ कार्य करना होगा।

शहरी सरकार से सीएम धामी के विशेष अनुरोध
सभी नगर निकायों से अनुरोध करते हुए मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि आप लोगों को सरकार के साथ कंधे से कंधा मिलाकर इन सभी चुनौतियों का सामना करने के लिए संकल्पित होकर प्रयास करने होंगे। मैं आपको आश्वस्त करना चाहता हूँ कि हमारी सरकार नगर निकायों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास के सिद्धांत पर चलते हुए भारत को विकास और समृद्धि की नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया है।

स्वच्छ भारत मिशन के माध्यम से आज देश के लाखों शहरों, कस्बों और नगरों में साफ-सफाई की एक नई संस्कृति विकसित हुई है। अमृत योजना के द्वारा शहरी बुनियादी ढांचे जैसे जल आपूर्ति, सीवरेज और हरित स्थानों को सशक्त किया गया है। स्मार्ट सिटी मिशन द्वारा शहरी विकास को तकनीक और नागरिक सुविधा के साथ जोड़ते हुए एक आदर्श नगर विकास का मॉडल प्रस्तुत करने का प्रयास किया जा रहा है। प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत लाखों गरीब परिवारों को अपने स्वयं के पक्के घर प्राप्त हुए हैं।

राज्य सरकार उत्तराखंड के विकास को एक नई दिशा देने के लिए प्रयासरत
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन और सहयोग से हमारी राज्य सरकार भी उत्तराखंड के विकास को एक नई दिशा देने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। हमारी सरकार ने राज्य में केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने का काम किया है। स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत प्रत्येक नगर में ठोस कचरा प्रबंधन और सफाई व्यवस्था को सुदृढ़ किया जा रहा है। स्मार्ट सिटी मिशन, पीएम स्वनिधि योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, अमृत मिशन जैसी विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ उत्तराखंड के प्रत्येक नागरिक को देने का प्रयास किया गया है। इसके साथ ही “विकास भी, विरासत भी” के मूल मंत्र के साथ राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित और संवर्धित करने की दिशा में भी निरंतर कार्य किए जा रहे हैं। राज्य की मातृ शक्ति द्वारा प्रदेशभर में उत्कृष्ट कार्य किया जा रहा है। उनके बनाए उत्पाद मल्टीनेशनल कंपनियों के उत्पादों से भी बेहतर है। मातृ शक्ति राज्य की सबसे बड़ी ताकत है। उत्तराखंड को अग्रणी राज्य बनाने में माताओ-बहनों की सबसे बड़ी भूमिका है।

ट्रिपल इंजन सरकार लिख रही विकास का नया अध्याय
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि इन्हीं प्रयासों का परिणाम है कि आज हमारा राज्य नीति आयोग की ैक्ळ इंडेक्स रिपोर्ट में सतत विकास के लक्ष्यों को प्राप्त करने में पूरे देश में प्रथम स्थान पर पहुंचा है। साथ ही, युवाओं को रोजगार देने में भी हम अग्रणी राज्य बनकर उभरे हैं। हमने एक वर्ष में बेरोजगारी दर में रिकॉर्ड 4.4 प्रतिशत की कमी लाने में सफलता प्राप्त की है, जो राष्ट्रीय औसत से भी ज्यादा है। हमारी सरकार विकास कार्यों के साथ ही देवभूमि उत्तराखंड के सांस्कृतिक मूल्यों और डेमोग्राफी को संरक्षित रखने के प्रति भी पूर्ण रूप से संकल्पबद्ध है। साथ ही, प्रदेश में सख्त दंगा रोधी और धर्मांतरण विरोधी कानूनों को भी लागू किया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमने प्रदेश में एक सख्त भू-कानून भी लागू कर दिया है, जिससे राज्य के मूल स्वरूप के साथ खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। इतना ही नहीं हमने जहां एक ओर राज्य में समान नागरिक संहिता कानून लागू कर एक समरस समाज के निर्माण की दिशा में मजबूत कदम बढ़ाया है। सख्त नकल कानून द्वारा नकल माफिया की रीढ़ तोड़ने का काम किया है, जिसके परिणामस्वरूप आज राज्य के 23 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरी प्राप्त हुई है। हम भ्रष्टाचार रूपी दीमक को जड़ से समाप्त करने के लिए ‘ज़ीरो टॉलरेंस’ की नीति के तहत कार्य कर रहे हैं। इसी का परिणाम है कि पिछले तीन वर्षों में हमने भ्रष्टाचार में लिप्त करीब 200 से अधिक लोगों को जेल की सलाखों के पीछे पहुँचाया है।

इस अवसर पर मेयर देहरादून सौरभ थपलियाल, सहित सभी नगर निगमों के मेयर, नगर पालिकाओं के अध्यक्ष, सचिव नितेश कुमार झा, नगर आयुक्त नमामि बंसल, शहरी विकास विभाग के अधिकारी तथा विभिन्न स्थानीय निकायों के 100 से अधिक जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।