चम्पावत के कमल गिरी से लीजिए स्वरोजगार की प्रेरणा, बने हैं सफल उद्यानपति

आदर्श जनपद चम्पावत के निवासी 35 वर्षीय, कमल गिरी, चार साल पहले तक गांव में ही छोटी सी दुकान चलाते थे। अब कमल गिरी 35 नाली जमीन पर सेब, कीवी, आडू, खुमानी और सब्जियां उगा रहे हैं। कमल गिरी ने राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं का लाभ लेकर, खुद को स्वरोजगार के क्षेत्र में स्थापित किया है। अब अन्य लोग भी उनसे प्रेरणा लेकर, सेब उत्पादन के लिए आगे आए हैं।
चम्पावत जिला मुख्यालय से पांच किमी दूर दूधपोखरा गांव के कमल गिरी को एक दिन सेब की जल्दी पैदावर देने वाली प्रजाति की जानकारी मिली, वो इसका पता करने के लिए भीमताल स्थित नर्सरी पहुंच गए। जहां से उन्हें उद्यान विभाग की एप्पल मिशन योजना की जानकारी मिली, जिसमें आवेदन करने के बाद उन्हें सब्सिडी पर सेब के 500 पौधे मिले। इसी के साथ उन्होंने कीवी मिशन के तहत 10 नाली जमीन में कीवी के भी पौधे लगाए। इसी तरह पांच नाली जमीन पर तेज पत्ता, बड़ी इलाईची लगाने के साथ ही मधु मक्खी पालन का भी शुरू कर दिया। बीते कुछ साल की मेहतन के बाद उनके पास अब कुल 35 नाली का उद्यान हो चुका है। जिसमें वो पॉलीहाउस के जरिए सब्जियां भी लगा रहे हैं। सहायक गतिविधि के रूप में मधुमक्खी पालन, मशरूम उत्पादन भी शुरू कर चुके हैं।
सरकारी योजनाओं का लाभ
कमल गिरी बताते हैं कि एप्पल मिशन के तहत उन्हें 60 प्रतिशत सब्सिडी पर पौधे मिले, इसी तरह 80 प्रतिशत सब्सिडी पर उन्होंने पॉलीहाउस भी बनवा लिया है। विभाग ने कीवी मिशन और तारबाड़ में भी उन्हें सहयोग दिया है। इन्हीं सब प्रयासों से जंगल के बीच में होने के बावजूद उनकी फसल जंगली जानवरों से सुरक्षित रह सकी। अब उनकी मेहनत कामयाब होने लगी है, पिछले सीजन में उन्होंने 21 कुंतल सेब बेचा, इस सीजन में कीवी का भी उत्पादन शुरू हो गया है। साथ ही 15 कुंतल तेज पत्ता भी तैयार हो गया है। पॉलीहाउस के जरिए वो नियमित सब्जियां भी बेचते हैं।
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उत्तराखंड के गावों की आर्थिकी बढ़ाने के लिए औद्यानिकी बेहद जरूरी है। इसके लिए सरकार एप्पल मिशन, कीवी मिशन सहित कई योजनाएं चला रही हैं, जिसके परिणाम अब आने लगे हैं। खासकर पर्वतीय क्षेत्रों में किसानों की आय बढ़ने से पलायन की समस्या का भी ठोस समाधान हो सकेगा।
– पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री

यात्रा मार्गों में संवेदनशील स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे की पर्याप्त व्यवस्था होगीः सीएम

सुरक्षित, सुगम और सुव्यवस्थित चारधाम यात्रा के लिए यात्रा शुरू होने से एक सप्ताह पहले सभी व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाएं। यात्रा मार्गों पर पार्किंग की व्यवस्था ऐसे स्थानों पर की जाए जिनके निकट, होटल, धर्मशाला, होमस्टे और अन्य मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध हों। धामों के दर्शन के लिए स्लॉट मैनेजमेंट सिस्टम और बेहतर बनाया जाए। यात्रा मार्गों में संवेदनशील स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे की पर्याप्त व्यवस्था की जाए। अधिक ट्रैफिक वाले क्षेत्रों की रियल टाइम निगरानी की जाए। ये निर्देश मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को सचिवालय में चारधाम यात्रा की तैयारियों के दृष्टिगत यातायात प्रबंधन की बैठक के दौरान दिये।

मुख्यमंत्री ने कहा कि चारधाम यात्रा के दौरान यातायात प्रबंधन की चुनौतियों का सामना करने के लिए पुलिस द्वारा बेहतर प्लान के साथ कार्य किया जाए। यह सुनिश्चित किया जाए कि यात्रा प्रबंधन में पिछले साल जो समस्याएं आई थी उनकी पुनरावृत्ति न हो। जाम की स्थिति वाले स्थानों की रियल टाइम जानकारी सोशल मीडिया पर और अन्य माध्यमों साझा की जाए। पुलिस व प्रशासन के सोशल मीडिया हैंडल्स पर यातायात और मौसम की जानकारी नियमित अपडेट की जाए। यात्रा मार्गों पर पार्किंग स्थलों की जानकारी श्रद्धालुओं को गूगल मैप से मिल जाए, इसकी व्यवस्था की जाए।

मुख्यमंत्री ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि रजिस्ट्रेशन करने के बाद ही उत्तराखण्ड की चारधाम यात्रा पर आयें, श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा के लिए रजिस्ट्रेशन की व्यवस्था की गई है। चारधाम यात्रा के लिए 60 प्रतिशत ऑन लाइन और 40 प्रतिशत ऑफ लाइन रजिस्ट्रेशन की व्यवस्था की गई। सुव्यवस्थित यात्रा संचालन के लिए यात्रा मार्गों से जुड़े सभी हितधारकों के साथ निरंतर समन्वय बनाया जाए और उनके सुझावों को गंभीरता से लिया जाए। सरकार द्वारा चारधाम यात्रा के लिए की गई तैयारियों की जानकारी भी हितधारकों के साथ साझा किया जाए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिये कि चारधाम यात्रा के वैकल्पिक मार्गों को भी सुदृढ़ किया जाए। यात्रा मार्गों पर अस्थाई पार्किंग विकसित करने के लिए भुगतान के आधार पर स्थानीय लोगों से भी संपर्क किया जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि श्रद्धालुओं की सुविधा के दृष्टिगत यात्रा मार्ग पर पुलिस सहायता डेस्क स्थापित किये जाएं। यात्रा मार्गों पर आपदा संभावित क्षेत्रों और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में ड्रोन कैमरों की मदद से निगरानी और आपदा की दृष्टि से संवेदनशील स्थानों पर आवश्यक उपकरणों की पर्याप्त व्यवस्था रखी जाए। यात्रा मार्गों पर आवश्यकतानुसार क्रैश बैरियर लगाए जाएं। पुलिस और परिवहन विभाग द्वारा वाहनों की सघन चेकिंग अभियान चलाया जाए और वाहनों की फिटनेस का विशेष ध्यान रखा जाए। यात्रा मार्गों पर विभिन्न जानकारियों के लिए साइनेज की पर्याप्त व्यवस्था की जाए।

डीजीपी दीपम सेठ ने चारधाम यात्रा को लेकर की गई तैयारियों की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पिछले साल लगभग 48 लाख श्रद्धालुओं ने सकुशल यात्रा की। इस साल की सुरक्षित और व्यवस्थित यात्रा के लिए 50 थाने, 79 रिपोर्टिंग पुलिस चौकी, 5850 पुलिस बल, 38 सीजनल (अस्थाई) चौकियां रहेगी। ट्रैफिक के बेहतर प्रबन्धन हेतु तीन प्लान तैयार किए गए जिन्हें वाहनों के दबाव एवं जाम की स्थिति को देखते हुए लागू किया जाएगा। पुलिस महानिरीक्षक, गढ़वाल रेंज के अधीन चारधाम कंट्रोल रूम की स्थापना की गयी है, जिसके प्रभारी एसपी ट्रैफिक देहरादून लोकजीत सिंह रहेंगे। पुलिस महानिरीक्षक अपराध एवं कानून व्यवस्था के अधीन पुलिस मुख्यालय स्तर पर चारधाम सेल गठित होगा, जो कि लगातार नियंत्रण एवं मॉनिटरिंग की व्यवस्था करेगा। सम्पूर्ण यात्रा मार्ग को 15 सुपर जोन, 41 जोन और 137 सेक्टर में बांटा गया है। चारधाम यात्रा के साथ ही लंबे वीकेंड के लिए भी विस्तृत यातायात प्लान तैयार किया गया है।

डीजीपी ने बताया कि चारधाम यात्रा मार्ग के 54 बॉटलनेक्स, 198 दुर्घटना संभावित स्थल, 49 ब्लैक स्पॉट और 66 लैंड स्लाइडिंग क्षेत्रों को पुलिस विभाग ने चिन्हित कर लिया है। जिसमें सम्बन्धित विभाग द्वारा यात्रा से पूर्व समस्त उपाय कर लिए जाएंगे। पिछले साल 113 पार्किंग स्थल चिन्हित थे जिनमें 33295 छोटे और 3554 बड़े वाहनों की व्यवस्था थी। इस साल 17 पार्किंग स्थलों को और चिन्हित किया गया है। कुल 130 चिन्हित पार्किंग स्थलों में 43416 छोटे और 7855 बड़े वाहनों के पार्क की व्यवस्था रहेगी।

बैठक में उपाध्यक्ष अवस्थापना अनुश्रवण परिषद विश्वास डाबर, सचिव शैलेश बगोली, नितेश झा, सचिन कुर्वे, डा. बी.वी.आर पुरुषोत्तम, डा. पंकज पांडेय, बृजेश कुमार संत, सचिव एवं गढ़वाल कमिश्नर विनय शंकर पाण्डेय, एडीजी वी मुरुगेशन, ए पी अंशुमन, आई जी गढ़वाल राजीव स्वरूप, आईजी नीलेश आनंद भरणे और संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।

चिंतन शिविर के सत्रों में शिक्षा, आर्थिक, सामाजिक सुरक्षा और पहुंच पर हुई बात

सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के चिंतन शिविर में कमजोर वर्ग की चिंता है, तो मजबूती के लिए चार मंत्रों पर सबसे ज्यादा जोर है। ये चार मंत्र हैं-शिक्षा, आर्थिक विकास, सामाजिक सुरक्षा और योजनाओं व सुविधाओं की वंचित वर्ग तक सीधे पहुंच। यानी वंचित वर्ग की शिक्षा, उसके आर्थिक विकास, उसकी सामाजिक सुरक्षा के ठोस इंतजाम करते हुए यह सुनिश्चित किया जाए कि सुविधाओं और तमाम योजनाओं की उस तक सीधी पहुंच हो जाए।

चिंतन दिन के पहले दिन के विभिन्न सत्रों का यही निचोड़ रहा है, जहां केंद्र सरकार की तमाम कल्याणकारी योजनाओं के आलोक में राज्यों की सहभागिता से वंचित वर्ग के सशक्तिकरण का संकल्प लिया गया है। चितंन शिविर के दूसरे दिन यानी आठ अप्रैल को समापन सत्र के अलावा दो अन्य सत्र भी आयोजित किए जाने हैं। इनमें से एक, सामाजिक सशक्तिकरण पर केंद्रित होगा, तो दूसरा सत्र तकनीकी होगा।

छात्रवृत्ति केे प्रस्ताव भेजने में न करें देर
सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग के सचिव अमित यादव ने राज्यों से जोर देकर कहा है कि अनुसूचित जाति व अन्य पिछड़ा वर्ग के बच्चों की छात्रवृत्ति से जुडे़ प्रस्ताव भेजने में देरी न करें। उन्होंने कहा कि बच्चों की पढ़ाई के शुरूआती समय में ही छात्रवृत्ति मिल जाए, तो बेहतर रहेगा। उन्होंने कहा कि सरकार के पास फंड की कमी नहीं है।

दिव्यांग हित में उड़ीसा-गोवा के उदाहरण
दिव्यांग सशक्तिकरण विभाग के सचिव राजेश अग्रवाल ने दिव्यांगों के कल्याण के लिए गोवा और उड़ीसा में किए गए प्रयासों का खास तौर पर जिक्र किया। उन्होंने कहा कि गोवा में समाज के कई वर्गों को साथ लेकर अच्छा काम किया गया। वहीं, उड़ीसा में आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों और आशा वर्करों का बेहतर उपयोग करते हुए कार्य किया गया है।

नशा मुक्ति अभियान में उत्तराखंड की चर्चा
केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री डॉ वीरेंद्र कुमार ने नशा मुक्ति अभियान के बारे में बात करते हुए उत्तराखंड की चर्चा की। उन्होंने कहा कि वह जगह और नौजवान का नाम नहीं बताएंगे, लेकिन उत्तराखंड में नशे की चपेट में आए इस नौजवान को जब ट्रीटमेंट दिया गया, तो उसकी स्थिति सुधर गई। इस नौजवान ने नशामुक्ति अभियान के साथ अपने को जोड़कर बुराई के खात्मे का संकल्प लिया है।

साइन लैग्वेंज में चिंतन शिविर की बातें
चिंतन शिविर के पहले दिन में दिव्यांग सशक्तिकरण के लिए एक विशेष सत्र आयोजित किया गया, जिसमें विभाग से जुड़ी तमाम बातें हुईं। पूरे कार्यक्रम के दौरान एनआईवीएच के उन एक्सपर्ट की तरफ भी प्रतिभागियों का ध्यान गया, जिन्होंने मंच पर कही जाने वाली एक-एक बात को साइन लैंग्वेज में साझा किया।

चिंतन से क्या हासिल, होगी समीक्षा
दो दिनी चिंतन शिविर में आयोजित विभिन्न सत्रों में चर्चा से क्या महत्वपूर्ण बातें उभरकर सामने आई हैं, इस पर आठ अप्रैल को बात होगी। केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री डॉ वीरेंद्र कुमार समापन समारोह पर इस पर विस्तार से बात करेंगे। साथ ही, उनका मीडिया से भी बातचीत का कार्यक्रम प्रस्तावित है।

मास रैपिड ट्रांसिट सिस्टम तकनीक दून की बढ़ती यातायात समस्याओं के समाधान को जरूरीः सीएम

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की उपस्थिति में मैसर्स हेस ग्रीन मोबिलिटी द्वारा उत्तराखण्ड में मास रैपिड ट्रांसिट सिस्टम तकनीक पर आधारित प्रस्तुतिकरण दिया गया। मास रैपिड ट्रांसिट सिस्टम टैक्नोजलॉजी को उत्तराखण्ड में बढ़ावा देने के मकसद से उत्तराखण्ड मेट्रो रेल कारपोरेशन एवं हेस ग्रीन मोबिलिटी, कैरोसेरी हेस एजी व एसएसबी सॉरवीन एंड शेफ़र बाउ एजी के बीच एक एम.ओ.यू हस्ताक्षर किया गया। मुख्यमंत्री ने इस कार्ययोजना को धरातल पर उतारे जाने की अपेक्षा करते हुए ऐसे प्रयासों को देहरादून की बढ़ती यातायात समस्याओं के समाधान के लिए जरूरी प्रयास बताया।

बैठक में बताया गया कि मैसर्स हेस एजी द्वारा लाइट ट्रॉम विकसित किया गया है, जो फ्लैश चार्जिंग तकनीक का उपयोग करते हुए एक उच्च क्षमता वाला जन परिवहन समाधान है, जिसे पूरी तरह से एलिवेटेड कॉरिडोर पर इलेक्ट्रिक रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (ई-आरटी) के रूप में उत्तराखंड की शहरी परिवहन आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए डिजाइन किया जा रहा है तथा प्रथम चरण में देहरादून शहर के 2 कॉरिडोर्स में आई.एस.बी.टी से गांधी पार्क एवं एफ.आर.आई से रायपुर तक कुल 22.5 कि.मी, जिसमें 25 स्टेशन प्रस्तावित हैं।

बैठक में प्रमुख सचिव डॉ. आर. मीनाक्षी सुंदरम, प्रबंध निदेशक उत्तराखण्ड मेट्रो रेल कारपोरेशन ब्रजेश कुमार मिश्रा, निदेशक वित्त उत्तराखण्ड मेट्रो रेल कारपोरेशन संजीव मेहता, एलेक्स नेफ, सी.ई.ओ कैरोसेरी हेस एजी, बुराक सेंसर, जनरल मैनेजर एसएसबी सॉरवीन एंड शेफ़र बाउ एजी, यवेस सीग्रिस्ट, कैरोसेरी हेस एजी, एवं अन्य लोग मौजूद रहे।

राज्य की गोल्डन जुबली 2050 तक का विजन डॉक्यूमेंट बनाएं सेतु आयोगः धामी

सेतु आयोग द्वारा राज्य की गोल्डन जुबली 2050 तक का विजन डॉक्यूमेंट बनाया जाए। आगामी 25 सालों में राज्य के सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरणीय विकास के लिए सुनियोजित प्लान बनाकर उसका क्रियान्वयन किया जाए। प्रवासी उत्तराखण्डियों को राज्य की विकास यात्रा से जोड़ने और राज्य में निवेश के लिए उन्हें प्रेरित करने की दिशा में भी कार्य किये जाएं। सेतु आयोग द्वारा विभागों की पॉलिसी का विस्तृत विश्लेषण किया जाए और विभागों के कार्यों को बेहतर क्रियान्वयन के लिए सहयोग दिया जाए। यह बात मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सचिवालय में सेतु आयोग की नीतिगत निकाय की प्रथम बैठक के दौरान कही।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य को सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने के लिए सेतु आयोग का महत्वपूर्ण योगदान होगा। सेतु आयोग द्वारा 02 वर्ष का अल्पकालिक, 10 वर्ष का मध्यकालिक और 25 वर्ष की दीर्घकालिक योजना बनाई जाए। उन्होंने कहा कि योजना बनाने के साथ ही उनके क्रियान्वयन और अनुश्रवण पर विशेष ध्यान दिया जाए। राज्य में बागवानी और डेरी क्षेत्र में कार्य की अपार संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए सेतु आयोग के विशेषज्ञों द्वारा इस क्षेत्र में विशेष ध्यान दिया जाए। युवाओं के कौशल विकास और आधुनिक प्रशिक्षण की दिशा में कार्य किये जाएं। उन्होंने कहा कि सेतु आयोग को विभागों के उत्प्रेरक (कैटलिस) की भूमिका में कार्य करना होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में विभिन्न क्षेत्रों में संभावनाओं पर विषय विशेषज्ञों द्वारा संक्षिप्त रिपोर्ट बनाई जाए, जिससे विभागों को आगे कार्य करने के लिए सही दिशा मिले। उन्होंने कहा कि राज्य में कृषि, बागवानी, पर्यटन, ऊर्जा, औषधीय उत्पादों के क्षेत्र में कार्य करने की अनेक संभावनाएं हैं।

कैबिनेट मंत्री डॉ धन सिंह रावत ने कहा कि राज्य की भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखकर नीति बनाई जा रही है ताकि उनका धरातल पर बेहतर तरीके से क्रियान्वयन हो सके। इसी का परिणाम है कि सीएम छात्रवृत्ति योजना लागू होने के बाद विद्यालयों में छात्रों की संख्या बढ़ी है। बेहतर स्वास्थ्य योजनाओं से स्वास्थ्य सुविधाओं में अनेक सुधार हुए हैं, संस्थागत प्रसव में तेजी से वृद्धि हुई है।

कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि राज्य में कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों के उत्पादों की मार्केटिंग बेहतर हो सके। इसके लिए सप्लाई चेन के साथ ही स्थानीय स्तर पर क्लस्टर खेती को और अधिक प्रोत्साहित करने की आवश्यकता है।

सेतु आयोग के उपाध्यक्ष राजशेखर जोशी ने अब तक आयोग द्वारा किए गए और भविष्य में किए जाने वाले कार्यों की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि विकसित और सशक्त उत्तराखंड की दृष्टि से राज्य की नीति कैसी होनी चाहिए, इसके लिए विभागों के साथ समन्वय कर उन नीतियों को बेहतर तरीके से क्रियान्वयन कराना सेतु आयोग का मुख्य उद्देश्य है जिससे योजनाओं का लाभ पात्र व्यक्ति को मिल सके। उन्होंने बताया कि उत्तराखंड राज्य के समग्र विकास के लिए विभागों के साथ मिलकर रणनीति तैयार की जा रही है। इससे धरातल में योजनाओं की स्वीकार्यता बढ़ेगी और क्रियान्वयन में भी आसानी होगी। तकनीकी का अधिकतम उपयोग, इकोनॉमी और इकोलॉजी में संतुलन और प्रभावी अनुश्रवण किया जाएगा। टाटा ट्रस्ट, बिल गेट्स फाउंडेशन, नैस्कॉम, आई टी सी, महिंद्रा जैसी संस्थाओं के साथ मिलकर कृषि, उच्च शिक्षा, पशुपालन, स्वास्थ्य, उद्योग, कौशल विकास, आई टी व अन्य क्षेत्रों में कार्य किया जाएगा। इसके साथ ही राज्य की बंजर भूमि को खेती योग्य बनाने, कृषि उत्पादक संगठन, डेयरी क्षेत्र को सशक्त करने की दिशा में कारगर प्रयास किए जा रहे है।

मुख्य कार्यकारी अधिकारी शत्रुघ्न सिंह ने बताया सेतु आयोग का सुचारू रूप से संचालन हो रहा है। आयोग का मुख्य उद्देश्य राज्य के सामाजिक आर्थिक विकास को सशक्त बनाया है। एक माह के भीतर आयोग के कार्यों के आउटपुट राज्य के भीतर देखने को मिलेंगे।

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या, प्रमुख सचिव आर मीनाक्षी सुंदरम, सचिव शैलेश बगोली, दिलीप जावलकर, सलाहकार वित्त हनुमंत पंत, अनुश्रवण एवं मूल्यांकन विशाल पराशर, सामाजिक कल्याण भावना सहित आयोग के सदस्य मौजूद रहे।

प्रभु श्री राम मर्यादा, भक्ति, त्याग, और धर्म के पथ प्रदर्शकः सीएम

रामनवमी के अवसर पर आज मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पिथौरागढ़ स्थित पांखू के माँ कोकिला कोठग्याड़ी मंदिर में आयोजित अखंड रामायण पाठ को मुख्यमंत्री आवास से वर्चुअली संबोधित किया।
प्रदेश वासियो को राम नवमी की शुभकामनाएँ देते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रभु श्रीराम से समस्त उत्तराखंड वासियों के सुख एवं समृद्धि की कामना की।

कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि रामायण कोई साधारण ग्रंथ नहीं, बल्कि हमारे जीवन का दर्पण है, मर्यादा, भक्ति, त्याग, और धर्म का पथ प्रदर्शक है। भगवान श्रीराम के जीवन से हमें सीखने को मिलता है कि किस प्रकार से विषम परिस्थितियों में भी धर्म और मर्यादा का पालन किया जाता है। माता सीता की पवित्रता, लक्ष्मण की सेवा भावना, भरत का त्याग, हनुमान जी की भक्ति ये सभी आदर्श हमें सदाचरण की प्रेरणा देते हैं।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि रामायण जैसे पवित्र धर्म ग्रंथो के अखंड पाठ के आयोजन हमारी आत्मा को शुद्ध करने के साथ-साथ वातावरण को सात्त्विक बनाने और समाज को जोड़ने का कार्य करते हैं।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि हम सभी के लिए यह अत्यंत गर्व एवं हर्ष का विषय है कि 500 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद दूसरी बार रामनवमी का पर्व प्रभु श्रीराम लला अयोध्या में अपने भव्य मंदिर में विराजमान होकर मना रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हम सभी का सौभाग्य है कि हमें आदरणीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रूप में एक ऐसे प्रधान सेवक मिले हैं जिनके अटूट संकल्प और अथक प्रयासों से अयोध्या में भगवान श्रीराम के भव्य मंदिर का हमारा सपना साकार हुआ है।

समस्त प्रदेश वासियों से आग्रह करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि हम प्रभु श्री राम के आदर्शों को स्वयं में धारण कर समाज में ईमानदारी, प्रेम, सेवा और सद्भावना के साथ रहने का संकल्प ले।

कार्यक्रम में फकीर राम टम्टा विधायक, गंगोलीहाट, गिरीश जोशी, जिलाध्यक्ष, भाजपा पिथौरागढ़, मनोज कार्की, भाजपा मण्डल अध्यक्ष ग्रामीण, डॉ. स्वामी वीरेन्द्रानंद महाराज महामण्डलेश्वर, पंचदश नाम जूना अखाडा, कल्पना देवलाल, महापौर नगर निगम, पिथौरागढ़, दीपिका बोहरा, प्रशासक, जिला पंचायत पिथौरागढ़, शशिकला सत्याल, जिला संयोजक शिक्षिका प्रकोष्ठ तथा अन्य स्थानीय गणमान्य उपस्थित थे।

उत्तराखंडः खाद्य संरक्षा और औषधि प्रशासन विभाग ने हरित चारधाम यात्रा थीम पर शुरू किया अभियान

चारधाम यात्रा मार्ग के होटल- ढाबों में इस बार तीर्थयात्रियों को ना सिर्फ स्वच्छ और शुद्ध भोजन मिलेगा, बल्कि होटल कारोबारी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील के अनुसार भोजन में तेल, नमक और चीनी का प्रयोग भी कम करने का प्रयास करेंगे। साथ ही सिंगल यूज प्लास्टिक रोकथाम के लिए भी तीर्थ यात्रियों को प्रोत्साहित करेंगे। इसके लिए खाद्य संरक्षा औषधि प्रशासन विभाग ने यात्रा प्रारंभ होने से पहले ही यात्रा मार्ग के होटल और खाद्य कारोबारियों के साथ व्यापक स्तर संवाद और प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस बार सभी विभागों को हरित चारधाम यात्रा की थीम पर, यात्रा संचालित करने के निर्देश दिए हैं। इसी क्रम में खाद्य संरक्षा औषधि प्रशासन विभाग, यात्रा मार्ग के प्रमुख शहरों में होटल और खाद्य कारोबारियों के साथ प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित कर रहा है। आयुक्त खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन डॉ आर राजेश कुमार ने बताया कि इन कार्यशालाओं में होटल कारोबारियों से अपने भोजन में तेल, नमक और चीनी का उपयोग कम करने की अपील की जा रही है। इससे खासकर मधुमेह और उच्च रक्तचाप की समस्या से पीड़ित यात्रियों को सुविधा रहेगी। साथ ही ईट राइट अभियान के क्रम में होटलों को खाद्य तेल को तीन बार से अधिक इस्तेमाल करने के बजाय इसे बायोफ्यूल बनाने के लिए उपलब्ध कराने के लिए कहा जा रहा है। डॉ आर राजेश कुमार ने बताया कि होटल कारोबारियों को पानी की बोतल, रैपर जैसे सिंगल यूज प्लास्टिक के उपयोग को भी हतोत्साहित करते हुए, पर्यावरण संरक्षण में सहयोग के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। उपायुक्त मुख्यालय गणेश कंडवाल ने बताया कि विभागीय निर्देशों के क्रम में अब तक ऋषिकेश, श्रीनगर, रुद्रप्रयाग में होटल कारोबारियों के साथ ही संबंधित विभागीय अधिकारियों के साथ प्रशिक्षण कार्यक्रम सम्पन्न किया जा चुका है। यात्रा शुरु होने से पहले उत्तरकाशी, चंबा और हरिद्वार सहित कुछ और स्थानों पर प्रशिक्षण कार्यक्रम सम्पन्न किया जाएगा। साथ ही मिलेट्स को बढ़ावा देने के लिए स्थानीय खाद्य उत्पादों को भी उपलब्ध कराने को कहा जा रहा है।

इस बार हम हरित चारधाम यात्रा का संकल्प लेकर तैयारी कर रहे हैं। हमारा प्रयास है कि ना सिर्फ तीर्थ यात्रियों को शुद्ध भोजन और स्वच्छ वातावरण मिले, बल्कि यात्रा के चलते हमारे पवित्र तीर्थस्थलों पर सिंगल यूज प्लास्टिक की समस्या भी पैदा न हो, हम सिंगल यूज प्लास्टिक का रिड्यूस, रीयूज और रिसाइकिल के सिद्धांत पर काम कर रहे हैं। इसमें हमें तीर्थ यात्रियों- खाद्य कारोबारियों से लेकर स्थानीय लोगों तक सभी का सहयोग चाहिए।

सीएम उवाचः विभागों द्वारा माह दिसम्बर तक बजट का 80 प्रतिशत तक खर्च किया जाए

राज्य के समावेशी विकास के लिए नये संसाधन जुटाने की दिशा में प्रयास किये जाएं। विभागों द्वारा माह दिसम्बर तक बजट का 80 प्रतिशत तक खर्च किया जाए। लक्ष्य के हिसाब से बजट प्राप्ति और खर्च की सचिव अपने स्तर पर नियमित समीक्षा करें। हर माह मुख्य सचिव और तीन माह में मुख्यमंत्री स्वयं इसकी समीक्षा करेंगे। बजट खर्च की नियमित मॉनिटरिंग के लिए डिजिटल सिस्टम लागू किया जाए। जीएसटी कलक्शन और बढ़ाने की दिशा में कार्य किये जाएं। ये निर्देश मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सचिवालय में वित्त विभाग की समीक्षा के दौरान दिये।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राजस्व प्राप्ति की दिशा में और प्रभावी प्रयास किये जाएं। केंद्र पोषित योजनाओं पर विशेष ध्यान दिया जाए। जिन योजनाओं में केन्द्रांश और राज्यांश क्रमशः 90 और 10 के अनुपात तथा 70 और 30 के अनुपात की योजनाओं को शीर्ष प्राथमिकताओं में रखा जाए। विभागों द्वारा बजट का ससमय और सही तरीके से उपयोग हो इसके लिए नियोजन विभाग और वित्त विभाग अन्य विभागों के साथ नियमित बैठक करें। राज्य की आर्थिक व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए मध्यकालिक और दीर्घकालिक योजना पर कार्य किया जाए। आगामी 10 सालों और 2050 में राज्य की गोल्डन जुबली वर्ष तक राज्य की सुदृढ़ अर्थव्यवस्था के लिए सुनियोजित प्लान पर कार्य किया जाए। नवाचार और एआई की दिशा में विशेष ध्यान दिया जाए। उन्होंने कहा कि विकसित भारत के विजन को साकार करने के लिए राज्य की अर्थव्यवस्था को बढ़ाने के साथ मानव संसाधन की क्षमता विकास, शिक्षा स्वास्थ्य और खेल में निवेश करना होगा। सरकार द्वारा दी जा रही सब्सिडी के सामाजिक और आर्थिक प्रभाव का विश्लेषण करने के साथ यह भी सुनिश्चित किया जाए कि सब्सिडी पात्र लोगों को ही मिले।

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिये कि राजस्व के प्रमुख स्रोत राज्य कर, वन, ऊर्जा, जल कर की नियमित समीक्षा कर बजट लक्ष्यों की प्राप्ति की जाए। जल जीवन मिशन और अटल आयुष्मान योजनाओं के बेहतर संचालन के लिए इनका प्रभावों का विश्लेषण किया जाए। बाजार से उधार को कम करने के साथ ही अवस्थापना विकास पर अधिक ध्यान दिया जाए।

बैठक में जानकारी दी गई कि पिछले तीन वर्षों में राज्य की जीएसडीपी वृद्धि दर लगातार 13 प्रतिशत से अधिक रही। इस वित्तीय वर्ष में खनन राजस्व में लगभग 400 करोड़ की वृद्धि हुई है। पूंजीगत व्यय में 11 हजार करोड़ से अधिक का व्यय हुआ है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में बजट के सापेक्ष व्यय प्रतिशत 90 प्रतिशत रहा।

बैठक में उत्तराखण्ड अवस्थापना अनुश्रवण परिषद के उपाध्यक्ष विश्वास डाबर, मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन, प्रमुख सचिव आर. के सुधांशु, सचिव शैलेश बागेली, दिलीप जावलकर, अपर सचिव हिमांशु खुराना और मनमोहन मैनाली उपस्थित थे।

सीएस ने देहरादून सहित सभी रेलवे स्टेशनों के अपग्रेडेशन की स्थिति भी स्पष्ट करने के दिए निर्देश

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने राज्य में रेल सुविधाओं के विकास के सम्बन्ध में बैठक ली

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने परिवहन विभाग को राज्य में प्रस्तावित सभी रेल परियोजनाओं की स्थिति पर अपडेट देने एवं वर्तमान में संचालित रेल परियोजनाओं में आ रही बाधाओं व समस्याओं पर बिन्दुवार रिपोर्ट देने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने देहरादून सहित सभी रेलवे स्टेशनों के अपग्रेडेशन की स्थिति भी स्पष्ट करने को कहा है। इसके साथ ही सीएस ने राज्य में प्रस्तावित एवं संचालित रेल प्रोजेक्ट्स से संबंधित मुद्दों पर रेल मंत्रालय, आरवीएनएल सहित संबंधित संस्थाओं से प्रभावी समन्वय के निर्देश दिए हैं।

मुख्य सचिव ने कहा कि राज्य दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों का रेल नेटवर्क से संयोजन, राज्य के औद्योगिक आर्थिक एवं सामाजिक विकास, विश्व प्रसिद्ध धामों, तीर्थ में वर्ष भर श्रद्धालुओं के सुगम आवागमन तथा सामरिक महत्व के दृष्टिगत रेलवे का अवसंरचना का राज्य हेतु अत्यंत महत्व है।

परिवहन विभाग द्वारा जानकारी दी गई कि राज्य में कुल पांच रेल परियोजनाएं हैं जिनमें तीन प्रस्तावित एवं ऋषिकेश-कर्णप्रयाग सहित दो परियोजनाएं वर्तमान में संचालित की जा रही है। गंगोत्री यमुनोत्री रेल परियोजना जिसकी कुल दूरी 121.76 किमी है तथा 10 स्टेशन हैं। इसका सर्वेक्षण कार्य पूरा हो चुका है तथा डीपीआर रेलवे बोर्ड को उपलब्ध करा दी गई है। इस पर अनुमोदन प्रतीक्षित है। टनकपुर बागेश्वर रेल परियोजना जिसकी कुल दूरी 170.70 किमी है तथा 12 स्टेशन हैं। इसका सर्वेक्षण कार्य पूरा हो चुका है तथा डीपीआर रेलवे बोर्ड को उपलब्ध करा दी गई है। इस पर अनुमोदन प्रतीक्षित है। देहरादून -सहारनपुर रेल परियोजना जिसकी कुल दूरी 92.60 किमी है तथा इसमें 8 स्टेशन है। इसका सर्वेक्षण कार्य गतिमान है।

बैठक में सचिव परिवहन, अपर सचिव परिवहन, सचिव एमडीडीए सहित संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।

सीएस ने सिंचाई विभाग को रिस्पना एवं बिंदाल नदियों के पुनर्जीवीकरण की स्थिति पर अपडेट करने के निर्देश

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने विभिन्न विषयों पर शहरी विकास एवं सिंचाई विभाग के साथ बैठक की।

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने शहरी विकास विभाग को राज्यभर में मलिन बस्तियों में निवासरत जरूरतमंदों के पुर्नवास हेतु चरणबद्ध कार्ययोजना पर प्रभावी पहल के निर्देश दिए हैं। सीएस ने पहले चरण में शहरी विकास विभाग एवं नगर निगम को देहरादून की मलिन बस्तियों के पुनर्वास के ठोस एवं प्रभावी वर्किंग प्लान पर तत्काल कार्य करने की हिदायत दी है। इसके साथ ही मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने सिंचाई विभाग को रिस्पना एवं बिंदाल नदियों के पुनर्जीवीकरण की स्थिति पर अपडेट देने के साथ वर्किंग प्लान पर तत्परता से कार्य करने के निर्देश दिए हैं।

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन आज सचिवालय में शहरी विकास एवं सिंचाई विभाग सहित विभिन्न विभागों के साथ मलिन बस्तियों की स्थिति एवं रिस्पना व बिन्दाल के पुनर्जीवीकरण पर समीक्षा कर रहे थे।

मुख्य सचिव ने शहरी विकास विभाग को मलिन बस्तियों की सूचना, चिन्हीकरण की अद्यतन स्थिति, निवासरत लोगों की सूची पर अपडेट तैयार करने के निर्देश दिए हैं। मुख्य सचिव ने वांछित सूचना प्राप्ति के बाद मलिन बस्तियों के पुनर्वास एवं पुनर्व्यवस्थापन की प्रभावी कार्ययोजना पर कार्य करने के निर्देश दिए हैं। सीएस ने अधिकारियों को स्लम फ्री उत्तराखण्ड के विजन के साथ कार्य करने के निर्देश दिए हैं।

मुख्य सचिव ने निर्देश दिए हैं कि मलिन बस्तियों में रहने वाले परिवारों के जीवन स्तर में सुधार, पुनर्वास एवं पुनरुद्धार पर शीर्ष प्राथमिकता पर कार्य किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि मलिन बस्तियों के विषय को सामाजिक समस्या की तरह देखा जाना चाहिए तथा इस पर पूर्ण संवेदनशीलता एवं मानवीयता से कार्य किया जाना चाहिए।

बैठक में प्रमुख सचिव वन, सचिव शहरी विकास, सिंचाई, स्वास्थ्य, सहित संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।