पदक विजेताओं को सम्मानित कर बोले सीएम, राज्य के खिलाड़ियों ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर बढ़ाया उत्तराखंड का गौरव

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आज मुख्यमंत्री आवास में ग्लासगो, स्कॉटलैंड में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर उत्तराखंड का गौरव बढ़ाने वाले खिलाड़ियों और उनके प्रशिक्षकों को सम्मानित किया। मुख्यमंत्री ने सभी पदक विजेताओं, प्रशिक्षकों एवं उनके परिजनों का अभिनंदन करते हुए कहा कि इन खिलाड़ियों की उपलब्धियाँ पूरे उत्तराखंड के लिए गर्व और प्रेरणा का विषय हैं।

सम्मानित होने वालों में पैरा एथलीट शुभम जुयाल (रजत पदक विजेता, रुड़की), जूडो खिलाड़ी उन्नति शर्मा (कांस्य पदक विजेता, देहरादून), शुभम जुयाल के प्रशिक्षक राकेश सिंह रावत (पौड़ी), उन्नति शर्मा के प्रशिक्षक सतीश चन्द्र शर्मा तथा पुनेश कुमार सिंह (देहरादून), भारतीय बॉक्सिंग टीम के प्रशिक्षक खीमानन्द बेलवाल (हल्द्वानी) शामिल रहे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड के खिलाड़ियों ने कठिन परिश्रम, अनुशासन और समर्पण के बल पर अंतरराष्ट्रीय मंच पर राज्य और देश का सम्मान बढ़ाया है। उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों की सफलता के पीछे उनके प्रशिक्षकों का मार्गदर्शन, परिवार का सहयोग और वर्षों की सतत साधना होती है, इसलिए प्रशिक्षकों का सम्मान भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार खेल और खिलाड़ियों के समग्र विकास के लिए प्रतिबद्ध है। सरकार का उद्देश्य उत्तराखंड को देश के अग्रणी खेल राज्यों में स्थापित करना है। इसी दृष्टि से राज्य में आधुनिक खेल अवसंरचना विकसित की जा रही है, जिला और ब्लॉक स्तर पर खेल सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है तथा प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को प्रशिक्षण, उपकरण, पोषण और प्रतियोगिताओं में भागीदारी के लिए आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने खिलाड़ियों के प्रोत्साहन के लिए खेल नीति को और अधिक प्रभावी बनाया है। अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को आकर्षक पुरस्कार राशि, सरकारी सेवाओं में अवसर, छात्रवृत्ति तथा विशेष प्रशिक्षण सुविधाएँ प्रदान की जा रही हैं। महिला खिलाड़ियों, दिव्यांग खिलाड़ियों और ग्रामीण क्षेत्रों की उभरती प्रतिभाओं को विशेष रूप से प्रोत्साहित किया जा रहा है, ताकि राज्य के प्रत्येक प्रतिभाशाली खिलाड़ी को अपनी क्षमता के अनुरूप आगे बढ़ने का अवसर मिल सके।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड की युवा शक्ति में अपार संभावनाएँ हैं और सरकार खेलों को रोजगार, स्वास्थ्य और व्यक्तित्व विकास से जोड़ते हुए आगे बढ़ रही है। खेल विश्वविद्यालय, खेल अकादमियों के सुदृढ़ीकरण, प्रशिक्षकों के क्षमता विकास तथा राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं की तैयारी के लिए बेहतर संसाधन उपलब्ध कराने की दिशा में निरंतर कार्य किया जा रहा है।

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में पदक जीतने वाले खिलाड़ी और उनके प्रशिक्षक आने वाली पीढ़ी के लिए प्रेरणा स्रोत बनेंगे तथा उत्तराखंड के अनेक युवा खेलों के क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित करेंगे। मुख्यमंत्री ने सभी सम्मानित खिलाड़ियों और प्रशिक्षकों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि राज्य सरकार हर कदम पर उनके साथ खड़ी है और उत्तराखंड की खेल प्रतिभाओं को वैश्विक मंच तक पहुँचाने के लिए हरसंभव सहयोग प्रदान करती रहेगी।

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या, विशेष प्रमुख सचिव अमित सिन्हा व खेल विभाग के अधिकारी उपस्थित रहे।

उत्तराखंड सरकार वोकल फॉर लोकल’ और ‘लोकल टू ग्लोबल’ के संकल्प को आगे बढ़ा रहीः धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्य सेवक सदन में उत्तराखंड हथकरघा एवं हस्तशिल्प विकास परिषद द्वारा आयोजित 12वें राष्ट्रीय हथकरघा दिवस समारोह में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर उन्होंने बिच्छू घास (नेटल फाइबर) से निर्मित पारंपरिक वस्त्र खरीदकर स्थानीय उत्पादों और शिल्पकारों को प्रोत्साहन दिया तथा उत्कृष्ट बुनकरों एवं हस्तशिल्प कारीगरों को सम्मानित किया।

मुख्यमंत्री ने राष्ट्रीय हथकरघा दिवस की शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि यह दिवस उन समर्पित बुनकरों और शिल्पकारों के सम्मान का प्रतीक है, जो अपनी कला, परिश्रम और कौशल से देश की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं को जीवंत बनाए हुए हैं। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के कारीगर केवल वस्त्र या उत्पाद नहीं बनाते, बल्कि उनमें प्रदेश की संस्कृति, लोकजीवन और परंपराओं की आत्मा भी समाहित होती है।

उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की बुनाई और हस्तशिल्प परंपरा अपनी विशिष्टता, गुणवत्ता और विविधता के कारण देश-विदेश में पहचान बना रही है। हर्षिल की ऊनी शॉल, मुनस्यारी और धारचूला की थुलमा, अल्मोड़ा की ट्वीड, छिनका की पंखी, रंगवाली पिछौड़ा, रिंगाल शिल्प तथा बिच्छू घास से बने उत्पाद राज्य की समृद्ध लोक विरासत के प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि इन पारंपरिक उत्पादों की मांग अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी लगातार बढ़ रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘लोकल टू ग्लोबल’ जैसे अभियान देश के स्थानीय उत्पादों और कारीगरों को नई पहचान दिला रहे हैं। प्रधानमंत्री स्वयं विभिन्न राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उत्तराखंड के पारंपरिक परिधान और हस्तशिल्प उत्पादों को धारण कर राज्य की सांस्कृतिक धरोहर को वैश्विक पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यदि उत्तराखंड के पारंपरिक उत्पादों की प्रभावी ब्रांडिंग और विपणन किया जाए, तो राज्य के बुनकरों और शिल्पकारों की प्रतिभा विश्व स्तर पर और अधिक स्थापित होगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार हथकरघा एवं हस्तशिल्प क्षेत्र को सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के अंतर्गत अब तक 278 बुनकरों और शिल्पियों को लगभग चार करोड़ रुपये से अधिक का ऋण तथा एक करोड़ रुपये से अधिक की सब्सिडी प्रदान की जा चुकी है, जिससे लगभग 834 लोगों को रोजगार प्राप्त हुआ है। इसके साथ ही राष्ट्रीय हथकरघा विकास कार्यक्रम और समग्र हस्तशिल्प क्लस्टर विकास योजना के माध्यम से आधुनिक मशीनें, डिजाइन, प्रशिक्षण, कॉमन फैसिलिटी सेंटर और विपणन सुविधाएँ उपलब्ध कराई जा रही हैं।

उन्होंने कहा कि अनुसूचित जाति एवं जनजाति वर्ग के बुनकरों को प्रशिक्षण देकर आत्मनिर्भर बनाने, वरिष्ठ शिल्पकारों को शिल्पकार पेंशन योजना के माध्यम से आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने तथा उत्कृष्ट कारीगरों को ‘उत्तराखंड राज्य शिल्प रत्न’ सहित विभिन्न पुरस्कारों से सम्मानित करने की दिशा में भी प्रभावी कार्य किया जा रहा है। ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म, मेलों और प्रदर्शनियों के माध्यम से उत्तराखंड के हस्तशिल्प उत्पादों को देश और विदेश के बाजारों तक पहुँचाने के प्रयास भी लगातार किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि राज्य के अनेक पारंपरिक उत्पादों को जीआई टैग मिलने से उत्तराखंड की ब्रांड पहचान और अधिक मजबूत हुई है।

मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से स्थानीय और स्वदेशी उत्पादों को प्राथमिकता देने का आग्रह करते हुए कहा कि जब भी कोई वस्तु खरीदी जाए, तो उसके स्थानीय विकल्प पर अवश्य विचार किया जाना चाहिए। उनका कहना था कि हथकरघा या हस्तशिल्प का कोई उत्पाद खरीदना केवल एक वस्तु खरीदना नहीं, बल्कि किसी बुनकर परिवार की आजीविका, किसी शिल्पकार के स्वाभिमान और अपनी सांस्कृतिक विरासत का सम्मान करना है।

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री भरत चौधरी, विधायक सविता कपूर, सचिव विनय शंकर पाण्डेय सहित बड़ी संख्या में बुनकर, हस्तशिल्पी, उद्यमी एवं महिला शिल्पकार उपस्थित रहे।

ऋषिकेश गंगा कॉरिडोर को लेकर मुख्य सचिव ने दिए ये निर्देश…

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने सचिवालय में प्रदेश के मेगा प्रोजेक्ट्स की समीक्षा की। मुख्य सचिव ने प्रदेश के भीतर सभी बड़े प्रोजेक्ट्स का निर्माण कार्य नियमित समय पर पूर्ण किए जाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने मासिक एवं त्रैमासिक लक्ष्य निर्धारित करते हुए सभी कार्यों की नियमित निगरानी किए जाने पर जोर दिया।

मुख्य सचिव ने ऊर्जा विभाग के अंतर्गत उत्तराखण्ड जल विद्युत निगम, पावर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन एवं यूपीसीएल के बड़े प्रोजेक्ट्स की प्रगति की जानकारी ली। उन्होंने लॉस रिडक्शन वर्क्स के वित्तीय एवं भौतिक लक्ष्य निर्धारित करते हुए लगातार मॉनिटरिंग की जाए एवं निर्धारित समय सीमा के अंतर्गत कार्य पूर्ण किया जाए। उन्होंने वाइब्रेंट विलेज का विद्युतीकरण कार्य भी निर्धारित समय पर पूर्ण किए जाने हेतु मासिक लक्ष्य निर्धारित किए जाएं।

मुख्य सचिव ने प्रदेश के विभिन्न स्थानों पर निर्माणाधीन मेडिकल कॉलेजों के शीघ्र संचालित किए जाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि रुद्रपुर एवं पिथौरागढ़ मेडिकल कॉलेजों को निर्माण कर शीघ्र से शीघ्र पूर्ण करते हुए कक्षाएं शुरू की जाएं। उन्होंने हरिद्वार मेडिकल कॉलेज के निर्माण कार्य में तेजी लायी जाए।

मुख्य सचिव ने शारदा घाट कार्य में हो रही देरी पर गहरी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि कार्यदायी संस्था यूपीडीसीसी को मजबूत किए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने ऋषिकेश गंगा कॉरिडोर का कार्य भी आगामी कुंभ-2027 को ध्यान में रखते हुए, उतना की कार्य शुरू किए जाने के निर्देश दिए, जितना विभाग दिसंबर 2026 तक पूर्ण कर सकें। उन्होंने महिला एवं बाल कल्याण विभाग के तहत् निर्माणाधीन कामकाजी महिला छात्रावास के संचालन के लिए मैकेनिज्म तैयार किए जाने के निर्देश दिए।

इस अवसर पर प्रमुख सचिव आर. मीनाक्षी सुन्दरम, विशेष प्रमुख सचिव अमित कुमार सिन्हा, सचिव नितेश कुमार झा, दिलीप जावलकर, चंद्रेश कुमार यादव, सी. रविशंकर एवं विनोद कुमार सुमन सहित विभागीय वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

सचिवालय में हुई कौशल विकास एवं रोजगार से संबंधित योजनाओं की समीक्षा बैठक

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन की अध्यक्षता में सचिवालय में कौशल विकास एवं रोजगार से संबंधित योजनाओं की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में कौशल विकास से संबंधित विभिन्न योजनाओं, प्रशिक्षण कार्यक्रमों, रोजगार एवं प्लेसमेंट की स्थिति तथा आगामी कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा की गई।

मुख्य सचिव ने कहा कि कौशल विकास कार्यक्रमों को उद्योगों की वर्तमान एवं भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार किया जाए। साथ ही युवाओं की रुचि एवं स्थानीय रोजगार की आवश्यकताओं के अनुरूप गुणवत्तापरक प्रशिक्षण उपलब्ध कराने तथा प्रशिक्षण प्राप्त युवाओं को रोजगार एवं स्वरोजगार से जोड़ने को कहा गया।

मुख्य सचिव ने कहा कि कौशल विकास से संबंधित सभी विभाग एक प्लेटफॉर्म पर काम करें, ताकि युवाओं को सुविधा मिल सके। उन्होंने प्रदेश को स्किल हब बनाने के लिए सचिव, कौशल विकास को सेतु आयोग की राय लेते हुए तथा सभी स्टैक होल्डर को शामिल करते हुए एक डैशबोर्ड तैयार किए जाने के निर्देश दिये।

सचिव कौशल विकास एवं सेवायोजन सी. रविशंकर ने बताया कि समग्र कौशल विकास के लिए स्कूल, उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं चिकित्सा शिक्षा के सहयोग से उद्योगों के मानकों के अनुसार आईटीआई को अपग्रेड किया जाना है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में 119 आईटीआई क्रियाशील है। नब्बे आईटीआई को पोर्टल पर मैप किया जा चुका है। टाटा टेक्नोलॉजीज, आईटीआई में शॉर्ट-टर्म ट्रेनिंग कोर्स के लिए शुरू कर दिया है।

सचिव ने बताया कि युवाओं को विदेश में नौकरी पाने के लिए स्कील इण्डिया इंटरनेशनल सेंटर में वैश्विक मानकों के अनुसार प्रशिक्षण, भाषा ज्ञान और अन्य जरूरी दक्षता प्रदान करने के लिए तीन एजेंसियों से बात की गई है। उन्होंने बताया कि रोजगार प्रयाग पोर्टल पर निजी नियोक्ताओं का भी पंजीकरण किया जा रहा है। अब तक कुल 162 नियोक्ताओं को पोर्टल पर जोड़ा जा चुका है, युवाओं को रोजगार दिया जा

बैठक में सेवायोजन विभाग के उच्चाधिकारी भी उपस्थित रहे।

उत्तराखंड में यात्रियों की सुविधा और ट्रैफिक प्रबंधन मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दिशा-निर्देशों के अनुरूप चारधाम यात्रा को अधिक सुरक्षित, सुव्यवस्थित और सुगम बनाने की दिशा में राज्य सरकार लगातार आधारभूत सुविधाओं का विस्तार कर रही है। इसी कड़ी में गुरुवार को आवास विभाग के सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार की अध्यक्षता में कर्णप्रयाग एवं सिमली पार्किंग परियोजनाओं की विस्तृत वित्तीय समिति (डीएफसी) की बैठक आयोजित हुई। बैठक में दोनों महत्वपूर्ण परियोजनाओं के वित्तीय, तकनीकी और निर्माण संबंधी पहलुओं की गहन समीक्षा करते हुए अधिकारियों को समयबद्ध तरीके से सभी औपचारिकताएं पूरी कर निर्माण कार्य शीघ्र प्रारंभ कराने के निर्देश दिए गए। इन परियोजनाओं के धरातल पर उतरने से चारधाम यात्रा के दौरान बढ़ते यातायात दबाव को नियंत्रित करने के साथ स्थानीय नागरिकों और व्यापारियों को भी बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।

चारधाम यात्रा के लिए तैयार होगा मजबूत पार्किंग नेटवर्क
आवास विभाग के सभागार में आयोजित बैठक में जिला स्तरीय विकास प्राधिकरण चमोली के अधिकारियों ने परियोजनाओं का विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अपर जिलाधिकारी एवं सचिव जिला स्तरीय विकास प्राधिकरण, अधिशासी अभियंता सहित अन्य अधिकारी भी जुड़े। बैठक में परियोजनाओं के उद्देश्य, स्थल चयन, यातायात सर्वेक्षण, पार्किंग क्षमता, निर्माण लागत, डिजाइन और तकनीकी मानकों पर विस्तार से चर्चा की गई। अधिकारियों ने बताया कि दोनों परियोजनाएं भविष्य में चारधाम यात्रा के दौरान यातायात व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।

कर्णप्रयाग में बाजार को मिलेगी बड़ी राहत
बैठक में बताया गया कि कर्णप्रयाग पार्किंग परियोजना की अनुमानित लागत 373.75 लाख रुपये निर्धारित की गई है। परियोजना के पूरा होने पर यहां 22 चारपहिया वाहनों की पार्किंग सुविधा उपलब्ध होगी। पार्किंग के प्रथम तल पर एक आधुनिक कमर्शियल हॉल भी प्रस्तावित किया गया है, जिससे स्थानीय व्यापारिक गतिविधियों को नया आयाम मिलेगा तथा परियोजना के संचालन से राजस्व सृजन भी होगा। अधिकारियों ने बताया कि वर्तमान में कर्णप्रयाग मुख्य बाजार में सड़क किनारे अनियोजित पार्किंग के कारण अक्सर जाम की स्थिति बन जाती है। विशेषकर चारधाम यात्रा के दौरान वाहनों का दबाव कई गुना बढ़ जाता है। नई पार्किंग सुविधा बनने से बाजार क्षेत्र में यातायात अधिक व्यवस्थित होगा और यात्रियों को भी सुविधाजनक पार्किंग उपलब्ध हो सकेगी।

सिमली बनेगा ट्रैफिक प्रबंधन का नया केंद्र
बैठक में सिमली पार्किंग परियोजना की भी विस्तार से समीक्षा की गई। इस परियोजना की अनुमानित लागत 398.85 लाख रुपये है तथा इसमें 30 चारपहिया वाहनों के लिए पार्किंग क्षमता विकसित की जाएगी। सिमली राष्ट्रीय राजमार्ग-07 पर स्थित एक अत्यंत महत्वपूर्ण जंक्शन है, जहां से चारधाम यात्रा मार्ग, श्री नंदा देवी राजजात यात्रा तथा गैरसैंण की ओर जाने वाला मार्ग जुड़ता है। यात्रा सीजन और विशेष अवसरों पर यहां भारी संख्या में वाहनों का आवागमन होता है, जिससे जाम की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। नई पार्किंग सुविधा विकसित होने के बाद सड़क किनारे वाहनों की पार्किंग में कमी आएगी तथा यातायात संचालन अधिक सुचारु और सुरक्षित हो सकेगा।

समयबद्ध निर्माण पर रहेगा विशेष फोकस
बैठक के दौरान सचिव आवास ने परियोजनाओं के वित्तीय एवं तकनीकी पहलुओं पर आवश्यक सुझाव दिए और संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि सभी प्रशासनिक एवं तकनीकी औपचारिकताओं को निर्धारित समय सीमा में पूरा किया जाए। उन्होंने कहा कि परियोजनाओं के क्रियान्वयन में गुणवत्ता और समयबद्धता दोनों सर्वाेच्च प्राथमिकता होनी चाहिए, ताकि यात्रियों और स्थानीय लोगों को जल्द से जल्द बेहतर सुविधाएं मिल सकें। इन पार्किंग परियोजनाओं को राज्य सरकार की उस व्यापक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसके तहत चारधाम यात्रा मार्गों पर ट्रैफिक प्रबंधन, यात्री सुविधाओं और शहरी आधारभूत ढांचे को लगातार मजबूत किया जा रहा है।

सचिव आवास डॉ. आर. राजेश कुमार का बयान
सचिव आवास डॉ. आर. राजेश कुमार ने कहा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार चारधाम यात्रा मार्गों पर आधुनिक एवं टिकाऊ आधारभूत सुविधाओं के विकास के लिए प्रतिबद्ध है। कर्णप्रयाग और सिमली पार्किंग परियोजनाएं केवल पार्किंग निर्माण तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ये बेहतर यातायात प्रबंधन, यात्रियों की सुविधा और स्थानीय आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल हैं। सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि परियोजनाओं से जुड़ी वित्तीय, तकनीकी एवं प्रशासनिक प्रक्रियाएं समयबद्ध ढंग से पूरी करें। गुणवत्ता के साथ शीघ्र निर्माण सुनिश्चित करना हमारी सर्वाेच्च प्राथमिकता है।

पुलिस विभाग मादक पदार्थों की सप्लाई चैन तोड़े जाने के लिए महत्त्वपूर्ण कदम उठाएंः बर्द्धन

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन की अध्यक्षता में सचिवालय में राज्य स्तरीय नेशनल कोआर्डिनेशन सेंटर फॉर ड्रग लॉ एनफोर्समेंट की 12वीं बैठक संपन्न हुयी। बैठक के दौरान उन्होंने जनपद स्तरीय एनकॉर्ड बैठकों का निर्धारित समय सीमा पर नियमित रूप से आयोजित किए जाने के निर्देश दिए हैं।

मुख्य सचिव ने मादक पदार्थों से सम्बन्धित सभी मामलों के शीघ्र निस्तारण के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि व्यवसायिक मात्रा में पकड़े गए मादक पदार्थों के मामलों को गंभीरता से लेते हुए लगातार फॉलोअप किया जाए, ताकि दोषियों पर यथोचित कार्रवाई की जा सके। उन्होंने पुलिस विभाग को मादक पदार्थों की सप्लाई चौन तोड़े जाने के लिए महत्त्वपूर्ण कदम उठाये जाने की बात कही। उन्होंने नशीले पदार्थों की तस्करी और अवैध व्यापार को रोके जाने को लेकर जिलाधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों से बात कर जनपदों की स्थिति की जानकारी भी ली।

मुख्य सचिव ने ड्रग डिटेक्शन किट्स के लिए पैरामीटर्स बनाए जाने पर जोर दिया। उन्होंने प्रदेश में डी एडिक्शन सेंटर्स की स्थिति की जानकारी भी ली। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग एवं समाज कल्याण विभाग के अंतर्गत ऐसे डी एडिक्शन सेंटर्स जो किसी कारण से ऑपरेशनल नहीं हैं, को उनकी समस्याओं का निस्तारण करते हुए सक्रिय किया जाए। उन्होंने कहा कि जिला अस्पतालों में डी एडिक्शन सेंटर्स के लिए बेड डेडिकेट किए जाएँ
साथ ही, सभी मेडिकल कॉलेज और उप जिला अस्पतालों में भी डेडिकेटेड बेड्स की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

मुख्य सचिव ने स्वास्थ्य विभाग को प्रदेश के अन्य स्थानों पर भी डी एडिक्शन सेंटर खोले जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जहाँ विकसित करने हैं करें फंडिंग की कोई समस्या नहीं होने दी जाएगी। उन्होंने ज़िलाधिकारियों को प्राइवेट डी एडिक्शन सेंटर्स का निरीक्षण कर मानकों को पूरा करने वाले प्राइवेट डी एडिक्शन सेंटर का रजिस्ट्रेशन और सर्टिफिकेशन अनिवार्य रूप से कराए जाने के निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने आमजन विशेषकर स्कूली बच्चों में ड्रग्स के प्रति जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने शिक्षण संस्थानों में एंटी ड्रग क्लब बनाने और शिक्षण संस्थानों के 100 मीटर के दायरे में गुटखा-तम्बाकू आदि की बिक्री पर रोक को प्रभावी रूप से लागू किए जाने की बात कही। उन्होंने प्रदेश में मादक पदार्थाे के उपयोग पर एक सर्वे कराए जाने की आवश्यकता पर जोर दिया ताकि मादक पदार्थों के जाल को जड़ से उखाड़ा जा सके।

इस अवसर पर डीजी इंटेलीजेंस अभिनव कुमार, सचिव शैलेष बगौली, आईजी डॉ. नीलेश आनन्द भारणे, अपर सचिव गृह तृप्ति भट्ट, एसएसपी एसटीएफ अजय सिंह सहित जनपदों से जिलाधिकारी एवं एसएसपी उपस्थित थे।

रेल मंत्री ने बनबसा स्टेशन पर अछनेरा-टनकपुर एक्सप्रेस रूकने की दी स्वीकृति

केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मुख्यमंत्री के अनुरोध पर बनबसा रेलवे स्टेशन पर गाड़ी संख्या 15093/15094 अछनेरा-टनकपुर एक्सप्रेस के ठहराव को स्वीकृति प्रदान कर दी है। इस संबंध में रेल मंत्री ने मुख्यमंत्री को आधिकारिक पत्र भेजकर जानकारी दी है।

रेल मंत्री ने जनसुविधा के दृष्टिगत बनबसा रेलवे के संबंध में मुख्यमंत्री के सिफारिश पर सकारात्मक निर्णय लेते हुए रेलवे ने बनबसा स्टेशन पर अछनेरा-टनकपुर एक्सप्रेस के नियमित ठहराव को मंजूरी दे दी है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस निर्णय पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इससे सीमांत क्षेत्र के लोगों, व्यापारियों, विद्यार्थियों, सैनिक परिवारों तथा श्रद्धालुओं को बड़ी सुविधा मिलेगी।

बनबसा रेलवे स्टेशन पर इस ट्रेन के ठहराव से कुमाऊँ क्षेत्र की रेल कनेक्टिविटी और अधिक मजबूत होगी तथा स्थानीय लोगों को आवागमन में सुविधा होगी।

बारिश के कारण उत्पन्न स्थिति की समीक्षा कर सीएस ने दिए बंद सड़कों को शीघ्र खोलने के निर्देश

देहरादून। मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र पहुंचकर प्रदेश में लगातार हो रही वर्षा तथा बारिश के कारण उत्पन्न स्थिति की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि जनजीवन की सुरक्षा राज्य सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता है और किसी भी संभावित आपदा से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए सभी विभाग पूर्ण समन्वय के साथ 24×7 अलर्ट मोड पर कार्य करें।

मुख्य सचिव ने सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन से राज्यभर में वर्षा की स्थिति, नदियों के जलस्तर, बंद सड़कों, भूस्खलन से प्रभावित क्षेत्रों, राहत एवं बचाव कार्यों, विद्युत एवं पेयजल आपूर्ति, संचार व्यवस्था तथा अन्य आवश्यक सेवाओं की विस्तृत जानकारी ली। उन्होंने विभिन्न जिलों में हुई वर्षा, संभावित मौसम पूर्वानुमान तथा आगामी दिनों की तैयारियों की समीक्षा करते हुए निर्देश दिए कि प्रत्येक स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जाए और किसी भी आपात परिस्थिति में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

उन्होंने राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र को सभी जनपदों के साथ निरंतर समन्वय बनाए रखने के निर्देश दिए। समीक्षा के दौरान उन्होंने विभिन्न जिलाधिकारियों से दूरभाष पर वार्ता कर उनके जनपदों की स्थिति की जानकारी ली तथा आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बंद सड़कों को प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र खोला जाए तथा भूस्खलन संभावित एवं संवेदनशील स्थानों पर पर्याप्त मशीनरी पहले से तैनात रखी जाए। जलभराव वाले क्षेत्रों में जलनिकासी की प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित करने के साथ-साथ पंप एवं अन्य आवश्यक उपकरण भी पर्याप्त संख्या में उपलब्ध रहें।

मुख्य सचिव ने कहा कि प्रदेश सरकार मानसून की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है। सभी जिलाधिकारी नियमित रूप से फील्ड भ्रमण करें, संवेदनशील क्षेत्रों का स्वयं निरीक्षण करें तथा राहत एवं बचाव व्यवस्थाओं की निरंतर मॉनिटरिंग करें। बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने चारधाम यात्रा, कांवड़ यात्रा तथा कैलाश मानसरोवर यात्रा की व्यवस्थाओं की भी विस्तार से समीक्षा की। उन्होंने चारधाम यात्रा मार्गों की स्थिति, भूस्खलन संभावित क्षेत्रों, यात्रियों की संख्या, विभिन्न धामों में उपलब्ध सुविधाओं तथा यातायात व्यवस्था की जानकारी प्राप्त की। उन्होंने कहा कि चारधाम यात्रा राज्य की आस्था और अर्थव्यवस्था दोनों से जुड़ी हुई है, इसलिए यात्रियों की सुरक्षा, सुगम आवागमन, चिकित्सा सुविधाएं, पेयजल, स्वच्छता तथा यातायात प्रबंधन में किसी प्रकार की कमी नहीं होनी चाहिए।

उन्होंने निर्देश दिए कि मौसम की वास्तविक स्थिति को ध्यान में रखते हुए ही यात्रा का संचालन किया जाए। यदि अत्यधिक वर्षा अथवा मार्ग अवरुद्ध होने जैसी परिस्थितियां उत्पन्न होती हैं तो यात्रियों को सुरक्षित स्थानों पर रोककर आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं तथा परिस्थितियां सामान्य होने के बाद ही उन्हें आगे भेजा जाए। उन्होंने सभी विभागों को निर्देश दिए कि वे आपसी समन्वय के साथ पूरी सतर्कता एवं संवेदनशीलता से कार्य करें, ताकि किसी भी आपदा की स्थिति में तत्काल और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।

बैठक में एससीईओ क्रियान्वयन डीआईजी राजकुमार नेगी, जेसीईओ दिनेश कुमार पुनेठा, ड्यूटी आफिसर कलम सिंह चौहान, श्री भवानी राम आर्या आदि उपस्थित रहे।

पानी छोड़ने पर सीमावर्ती राज्यों को भी भेजें अलर्ट
देहरादून। मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने नदियों के जलस्तर पर चौबीसों घंटे निगरानी बनाए रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि नदी तटीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को लगातार जागरूक किया जाए तथा खतरे की आशंका होने पर उन्हें समय रहते सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि डैम एवं बैराजों से पानी छोड़े जाने की स्थिति में डाउनस्ट्रीम क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को पूर्व सूचना देकर सतर्क किया जाए। साथ ही, आवश्यकता पड़ने पर सीमावर्ती राज्यों को भी समय रहते अलर्ट किया जाए, ताकि किसी भी संभावित जोखिम को न्यूनतम किया जा सके।

संचार, बिजली, पेयजल सेवाओं की त्वरित बहाली सुनिश्चित हो
देहरादून। मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि यदि किसी भी क्षेत्र में भारी वर्षा अथवा भूस्खलन के कारण संचार व्यवस्था बाधित होती है तो वैकल्पिक संचार प्रणाली तत्काल सक्रिय की जाए। उन्होंने सभी सैटेलाइट फोन को हर समय क्रियाशील स्थिति में रखने तथा प्रतिदिन उनके माध्यम से एसईओसी एवं डीईओसी के बीच संपर्क सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बिजली, पेयजल एवं संचार सेवाओं की बहाली सर्वाेच्च प्राथमिकता पर की जाए। यदि कहीं भी ये सेवाएं प्रभावित होती हैं तो अतिरिक्त टीमें तत्काल भेजी जाएं और वैकल्पिक व्यवस्थाएं लागू कर आमजन को आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। किसी भी परिस्थिति में नागरिकों को लंबे समय तक मूलभूत सुविधाओं से वंचित नहीं रखा जाना चाहिए।

अंतिम छोर तक समय पर पहुंचे मौसम संबंधी अलर्ट
देहरादून। मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने निर्देश दिए कि मौसम संबंधी सभी चेतावनियां और अलर्ट अंतिम छोर पर रहने वाले व्यक्ति तक भी समय पर पहुंचना सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि समय पर सूचना ही लोगों को सुरक्षित निर्णय लेने का अवसर देती है, इसलिए सूचना प्रसारण में किसी भी प्रकार की देरी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने राज्य स्तर से लेकर जनपद, ब्लॉक, तहसील और ग्राम स्तर तक सूचना प्रसारण तंत्र को और अधिक मजबूत एवं सक्रिय बनाने के निर्देश दिए, ताकि प्रत्येक नागरिक तक समयबद्ध एवं विश्वसनीय चेतावनी पहुंच सके और संभावित आपदाओं के दौरान जनहानि को न्यूनतम किया जा सके।

उत्तराखण्ड में एनसीसी के विस्तार एवं आधुनिक आधारभूत संरचना के विकास पर हुई महत्वपूर्ण चर्चा

राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी) के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल वीरेन्द्र वत्स, YSM, SM, VSM ने नई दिल्ली स्थित उत्तराखण्ड निवास में मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी से शिष्टाचार भेंट की। इस अवसर पर उत्तराखण्ड में राष्ट्रीय कैडेट कोर के विस्तार, सीमांत एवं दुर्गम क्षेत्रों तक एनसीसी की प्रभावी पहुंच सुनिश्चित करने तथा संगठन की आधुनिक एवं सुदृढ़ आधारभूत संरचना के विकास से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा हुई।

बैठक के दौरान महानिदेशक एनसीसी ने राज्य के अधिकाधिक युवाओं को एनसीसी से जोड़ने के उद्देश्य से सीमावर्ती एवं दूरस्थ क्षेत्रों में नई एनसीसी इकाइयों के गठन एवं विस्तार की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने राज्य में आधुनिक प्रशिक्षण अवसंरचना के विकास, प्रशिक्षण सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण तथा प्रस्तावित एनसीसी अकादमी की स्थापना सहित विभिन्न भावी योजनाओं की रूपरेखा से मुख्यमंत्री को अवगत कराया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड सरकार युवाओं के सर्वांगीण विकास, राष्ट्रभक्ति, अनुशासन, नेतृत्व क्षमता तथा सेवा-भाव को प्रोत्साहित करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय कैडेट कोर युवाओं में राष्ट्रीय चरित्र, नेतृत्व क्षमता, आत्मविश्वास एवं सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना विकसित करने वाला देश का एक प्रतिष्ठित संगठन है, जिसकी राष्ट्र निर्माण में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका है।

मुख्यमंत्री ने राज्य में एनसीसी के विस्तार तथा प्रस्तावित आधारभूत संरचना विकास से संबंधित सभी पहलों के लिए राज्य सरकार की ओर से पूर्ण सहयोग का आश्वासन देते हुए कहा कि इन परियोजनाओं के प्रभावी एवं समयबद्ध क्रियान्वयन के लिए हरसंभव सहयोग प्रदान किया जाएगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इन प्रयासों से राज्य के युवाओं को व्यक्तित्व विकास, नेतृत्व प्रशिक्षण एवं राष्ट्र सेवा के अधिक अवसर उपलब्ध होंगे।

सचिव आवास की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक, निर्माण एजेंसियों को गुणवत्ता और समय से कार्य पूरा करने के निर्देश

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दिशा-निर्देशों के क्रम में प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के तहत राज्य में निर्माणाधीन आवासीय परियोजनाओं की प्रगति की विस्तृत समीक्षा के लिए बुधवार को सचिवालय में उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता सचिव आवास डॉ. आर. राजेश कुमार ने की। इसमें विभिन्न कार्यदायी संस्थाओं, विकासकों, आवास विभाग तथा संबंधित अधिकारियों ने योजनाओं की वर्तमान स्थिति, निर्माण की प्रगति और लंबित कार्यों की जानकारी प्रस्तुत की।

बैठक में प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के अंतर्गत संचालित सभी परियोजनाओं की बिंदुवार समीक्षा की गई। सचिव आवास ने कहा कि यह योजना केवल भवन निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि आर्थिक रूप से कमजोर एवं जरूरतमंद परिवारों के अपने घर के सपने को साकार करने का माध्यम है। इसलिए प्रत्येक परियोजना को निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरा करना सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने सभी कार्यदायी संस्थाओं और विकासकों को स्पष्ट निर्देश दिए कि 30 सितंबर 2026 तक सभी लंबित आवासीय परियोजनाओं का निर्माण हर हाल में पूरा किया जाए। उन्होंने कहा कि किसी भी स्तर पर अनावश्यक देरी, लापरवाही या गुणवत्ता से समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। सभी एजेंसियां निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप कार्य करें और निर्माण कार्यों में गुणवत्ता, पारदर्शिता तथा तकनीकी मानकों का पूर्ण पालन सुनिश्चित करें।

6,464 आवासों का निर्माण पूरा

समीक्षा बैठक में बताया गया कि प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के तहत राज्य में अब तक 6,464 आवासों का निर्माण कार्य पूर्ण किया जा चुका है। इन आवासों के कब्जा हस्तांतरण की प्रक्रिया भी तेजी से आगे बढ़ाई जा रही है, ताकि पात्र लाभार्थियों को जल्द से जल्द अपने पक्के घरों की सौगात मिल सके। विभाग का लक्ष्य है कि सभी पूर्ण हो चुके आवासों का आवंटन और हस्तांतरण निर्धारित समय के भीतर संपन्न कराया जाए।

नियमित होगी परियोजनाओं की मॉनिटरिंग

बैठक में लंबित परियोजनाओं की प्रगति पर विशेष चर्चा की गई। सचिव आवास ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जिन परियोजनाओं में कार्य अपेक्षित गति से नहीं चल रहा है, वहां निर्माण में तेजी लाई जाए और नियमित रूप से स्थलीय निरीक्षण कर प्रगति की निगरानी की जाए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक परियोजना की साप्ताहिक समीक्षा की जाएगी तथा जहां भी किसी प्रकार की बाधा सामने आएगी, उसका तत्काल समाधान किया जाएगा ताकि परियोजनाएं समय पर पूरी हो सकें। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि लाभार्थियों के हितों को सर्वाेच्च प्राथमिकता देते हुए निर्माण की गुणवत्ता, आधारभूत सुविधाओं और पारदर्शिता पर विशेष ध्यान दिया जाए। सरकार का उद्देश्य केवल मकान बनाना नहीं, बल्कि लोगों को सुरक्षित, सुविधाजनक और सम्मानजनक आवास उपलब्ध कराना है।

सचिव आवास डॉ. आर. राजेश कुमार का बयान

सचिव आवास डॉ. आर. राजेश कुमार ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) को पूरी गंभीरता और प्रतिबद्धता के साथ आगे बढ़ा रही है। उन्होंने कहा, ष्हमारा लक्ष्य केवल निर्धारित संख्या में आवासों का निर्माण करना नहीं, बल्कि प्रत्येक पात्र परिवार को समय पर गुणवत्तापूर्ण और सुरक्षित आवास उपलब्ध कराना है। सभी कार्यदायी संस्थाओं एवं विकासकों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि 30 सितंबर तक लंबित परियोजनाओं को हर हाल में पूरा करें। विभाग प्रत्येक परियोजना की नियमित मॉनिटरिंग करेगा और किसी भी प्रकार की देरी या गुणवत्ता में कमी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। हमारा प्रयास है कि पात्र लाभार्थियों को शीघ्र उनके सपनों का अपना घर मिले और केंद्र एवं राज्य सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे।ष्

बैठक में रहे उपस्थित

बैठक में संयुक्त मुख्य प्रशासक दिनेश प्रताप सिंह, उप सचिव आवास रजनीश जैन, अधिशासी अभियंता विनोद कुमार चौहान, सहायक अभियंता आकाश चौहान, आवास विशेषज्ञ रोहित रंजन, विभिन्न कार्यदायी संस्थाओं एवं विकासकों के प्रतिनिधि तथा एचआरडीए और डीएलडीए के अधिकारी उपस्थित रहे। बैठक में सभी अधिकारियों ने निर्धारित समयसीमा के भीतर कार्य पूर्ण करने और योजना के सफल क्रियान्वयन के लिए समन्वित रूप से कार्य करने का भरोसा दिलाया।