मुख्यमंत्री धामी ने लोकगायक नरेंद्र सिंह नेगी के गीतों के अंग्रेजी अनुवाद की पुस्तक का किया विमोचन

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोशल बलूनी स्कूल, हरिद्वार बाईपास, देहरादून में लोकगायक नरेंद्र सिंह नेगी के जन्मदिवस के अवसर पर आयोजित ‘नरेंद्र सिंह नेगी संस्कृति सम्मान समारोह’ में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने नरेंद्र सिंह नेगी के गीतों के अंग्रेजी अनुवाद पर आधारित पुस्तक “Mountain Melodies of Narendra Singh Negi” का विमोचन किया तथा अरुणाचल प्रदेश के प्रख्यात अभिनेता, रंगकर्मी और नाटककार श्री ताई तुगुंग को ‘नरेंद्र सिंह नेगी संस्कृति सम्मान-2026’ प्रदान किया।

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में नरेंद्र सिंह नेगी को जन्मदिवस की हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए उनके उत्तम स्वास्थ्य एवं दीर्घायु की कामना की। उन्होंने कहा कि नेगी उत्तराखंड की लोक संस्कृति के ऐसे पुरोधा हैं, जिन्होंने अपने गीतों और संगीत के माध्यम से राज्य की सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विशिष्ट प्रतिष्ठा दिलाई है। उन्होंने कहा कि नेगी जी के गीतों में उत्तराखंड के जनजीवन, प्रकृति, संघर्ष, संवेदनाओं और सामाजिक सरोकारों की सशक्त अभिव्यक्ति देखने को मिलती है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि नरेंद्र सिंह नेगी के नाम पर दिया जाने वाला यह प्रतिष्ठित सम्मान हिमालयी राज्यों में संस्कृति, साहित्य, कला और सामाजिक सरोकारों के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले व्यक्तित्वों को समर्पित है। उन्होंने श्री ताई तुगुंग को सम्मान प्राप्त होने पर बधाई देते हुए कहा कि उन्होंने न्यीशी भाषा, अरुणाचली हिंदी, रंगकर्म, नाटकों और सिनेमा के माध्यम से अरुणाचल प्रदेश की लोक संस्कृति और परंपराओं को व्यापक पहचान दिलाई है। उनका चर्चित नाटक ‘लप्या’ और फिल्म ‘संगी माई’, जिसका प्रदर्शन कांस फिल्म फेस्टिवल में भी हुआ, उनकी रचनात्मक यात्रा के महत्वपूर्ण उदाहरण हैं।

मुख्यमंत्री ने पुस्तक “Mountain Melodies of Narendra Singh Negi” के विमोचन को उत्तराखंड की लोकभाषा और लोकसंस्कृति के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताया। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह पुस्तक आने वाली पीढ़ियों को नरेंद्र सिंह नेगी के जीवन, व्यक्तित्व और दशकों लंबी संगीत यात्रा से परिचित कराएगी तथा राज्य की सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक परिप्रेक्ष्य में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड की लोक संस्कृति अत्यंत समृद्ध और विविधतापूर्ण है। जागर, बेड़ा, मांगल, खुदेड़, छोपाटी जैसे पारंपरिक गीत तथा ढोल, दमाऊ, हुड़का, मशक, तुर्री और भंकोरा जैसे लोक वाद्य हमारी सांस्कृतिक पहचान के आधार हैं। उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त की कि प्रदेश के अनेक युवा आधुनिक संगीत के साथ लोकगीतों को नए कलेवर में प्रस्तुत कर उन्हें नई पहचान देने का कार्य कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में राज्य सरकार लोकभाषाओं, लोककलाओं, साहित्य और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि लोक कलाकारों को सम्मान और अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से सूचीबद्धकरण की प्रक्रिया को सरल बनाया गया है तथा अब तक 275 सांस्कृतिक दलों और 226 एकल कलाकारों को सूचीबद्ध किया जा चुका है, जिससे उन्हें अपनी प्रतिभा के प्रदर्शन के साथ-साथ रोजगार के अवसर भी प्राप्त हो रहे हैं।

उन्होंने कहा कि ढोल-दमाऊ जैसे पारंपरिक वाद्ययंत्रों और उनसे जुड़े कलाकारों को प्रोत्साहित करने के लिए पात्र कलाकारों को प्रतिवर्ष निःशुल्क वाद्ययंत्र एवं वेशभूषा उपलब्ध कराई जा रही है। साथ ही लोककला और साहित्य को जीवन समर्पित करने वाले वृद्ध एवं आर्थिक रूप से कमजोर कलाकारों, साहित्यकारों और लेखकों की मासिक पेंशन 3 हजार रुपये से बढ़ाकर 6 हजार रुपये प्रतिमाह की गई है, जिसका लाभ वर्तमान में 180 कलाकार प्राप्त कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि गुरु-शिष्य परंपरा को जीवंत बनाए रखने के लिए लोक कलाकारों के माध्यम से छह माह की प्रशिक्षण कार्यशालाओं का आयोजन किया जा रहा है, ताकि नई पीढ़ी अपनी लोककलाओं और परंपराओं को सीखकर आगे बढ़ा सके। उन्होंने बताया कि वर्ष 2025 में ‘दीर्घकालीन साहित्य सेवी सम्मान’ की शुरुआत की गई, जिसके अंतर्गत 5 लाख रुपये की सम्मान राशि प्रदान की जाती है। इसके अतिरिक्त ‘उत्तराखंड साहित्य गौरव सम्मान’ के माध्यम से अब तक हिंदी सहित विभिन्न भाषाओं के 57 साहित्यकारों को सम्मानित किया जा चुका है तथा ‘साहित्य भूषण पुरस्कार’ की भी शुरुआत की गई है, जिसकी सम्मान राशि 5 लाख 51 हजार रुपये निर्धारित की गई है। वर्ष 2022 से अब तक 102 लेखकों की पुस्तकों के प्रकाशन के लिए आर्थिक अनुदान भी प्रदान किया गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार लोकभाषाओं और बोलियों के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए विभिन्न स्तरों पर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य उत्तराखंड को केवल पर्यटन की दृष्टि से ही नहीं, बल्कि साहित्य और संस्कृति के राष्ट्रीय केंद्र के रूप में स्थापित करना है। इसी उद्देश्य से प्रदेश में दो ‘साहित्य ग्राम’ विकसित करने की योजना पर कार्य किया जा रहा है, जहाँ साहित्यकारों के लिए आवास, पुस्तकालय, अध्ययन केंद्र और संगोष्ठी जैसी सुविधाएँ उपलब्ध होंगी। देहरादून में हिमालय सांस्कृतिक केंद्र, आर्ट गैलरी और संग्रहालय जैसी पहलें भी इसी सांस्कृतिक दृष्टि का हिस्सा हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और लोक परंपराओं के संरक्षण के लिए ‘विकल्प रहित संकल्प’ के मूलमंत्र के साथ निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि समाज, कलाकारों और साहित्यकारों के सहयोग से उत्तराखंड की सांस्कृतिक धरोहर और अधिक सशक्त, समृद्ध और प्रेरणादायी बनेगी।

इस अवसर पर लोकगायक नरेंद्र सिंह नेगी, साहित्यकार, कलाकार, संस्कृति प्रेमी, विभिन्न सांस्कृतिक संगठनों के प्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने उत्तराखंड के ‘पूर्ण साक्षर राज्य’ बनने पर सीएम धामी को दी बधाई

केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने उत्तराखंड कोे ‘उल्लास-नव भारत साक्षरता कार्यक्रम’ के तहत ‘पूर्ण साक्षर राज्य’ घोषित किये जाने पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी तथा प्रदेशवासियों शुभकामनाएं दी हैं। ज्ञातव्य है कि उत्तराखंड को यह उपलब्धि 08 जुलाई 2026 को प्राप्त हुई।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को भेजे गये बधाई पत्र में केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा कि यह महत्वपूर्ण उपलब्धि मुख्यमंत्री के दूरदर्शी नेतृत्व, प्रशासनिक प्रतिबद्धता तथा प्रदेशवासियों के सामूहिक प्रयासों का परिणाम है। उन्होंने कहा कि कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद उत्तराखंड ने पूर्ण साक्षरता के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल कर देश के समक्ष एक प्रेरणादायी उदाहरण प्रस्तुत किया है।

केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने कहा कि जहाँ समग्र शिक्षा बाल्यावस्था की प्रारंभिक शिक्षा से लेकर बालवाटिका, पूर्व-प्राथमिक शिक्षा और कक्षा 12 तक स्कूली शिक्षा को सुदृढ़ करते हुए सभी के लिए शिक्षा की पहुँच, समानता और गुणवत्ता सुनिश्चित करती है। वहीं उल्लास उन वयस्क शिक्षार्थियों को सशक्त बनाता है, जो औपचारिक शिक्षा से वंचित रह गए हैं। यह उन्हें आधारभूत साक्षरता, जीवन कौशल और डिजिटल दक्षता भी प्रदान करता है।

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि उत्तराखंड की यह उपलब्धि अन्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी तथा वे समावेशी और समानतापूर्ण साक्षरता के लक्ष्य को प्राप्त करने के अपने प्रयासों को और अधिक गति देंगे।

केन्द्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि सतत शिक्षा, जीवन कौशल और व्यावसायिक प्रशिक्षण के माध्यम से नव-साक्षरों के समग्र सशक्तीकरण तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के उद्देश्यों को आगे बढ़ाने में उत्तराखंड की भूमिका महत्वपूर्ण रहेगी।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उत्तराखंड का ‘पूर्ण साक्षर राज्य’ बनना प्रदेश के लिए गौरव का विषय है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि राज्य सरकार, शिक्षा विभाग के अधिकारियों, शिक्षकों, स्वयंसेवकों और प्रदेशवासियों की सामूहिक प्रतिबद्धता एवं जनभागीदारी का परिणाम है। राज्य सरकार का लक्ष्य साक्षरता तक सीमित न रहकर प्रत्येक नागरिक को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, डिजिटल साक्षरता और आजीवन सीखने के अवसर उपलब्ध कराना है।

मुख्यमंत्री ने जल जीवन मिशन की प्रगति की समीक्षा की

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सचिवालय में जल जीवन मिशन की प्रगति, वित्तीय स्थिति, योजनाओं के संचालन एवं रख-रखाव तथा आगामी कार्ययोजना की समीक्षा की। बैठक में जलापूर्ति योजनाओं की प्रगति, ग्रामीण परिवारों तक नल से जल की पहुंच एवं सत्यापन, जल गुणवत्ता, वित्तीय प्रबंधन तथा योजनाओं के नियमित संचालन से संबंधित विभिन्न विषयों पर चर्चा की गई।

मुख्यमंत्री ने हर घर जल का लक्ष्य शत-प्रतिशत पूरा करने तथा शेष पात्र ग्रामीण परिवारों को निर्धारित समयसीमा में नल कनेक्शन से जोड़ने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जल जीवन मिशन की सफलता केवल नल कनेक्शन की संख्या से नहीं, बल्कि प्रत्येक घर तक नियमित, पर्याप्त, सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण पेयजल पहुंचने से तय होगी। पूर्ण हो चुकी योजनाओं का स्थलीय सत्यापन भी कराया जाए।

मुख्यमंत्री ने निर्माणाधीन एवं लंबित पेयजल योजनाओं को मिशन मोड में निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरा करने तथा जिलाधिकारियों को संबंधित विभागों के साथ समन्वय कर शीघ्र समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि प्रत्येक योजना की भौतिक एवं वित्तीय प्रगति की नियमित समीक्षा की जाए।

मुख्यमंत्री ने पर्वतीय क्षेत्रों में पेयजल स्रोतों के संरक्षण एवं पुनर्जीवीकरण, वर्षा जल संचयन तथा जल स्रोतों के पुनर्भरण पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। प्रत्येक जनपद में जलापूर्ति संबंधी तकनीकी समस्याओं के त्वरित समाधान की व्यवस्था विकसित करने तथा योजनाओं के संचालन एवं रख-रखाव की स्थायी व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिये। मुख्यमंत्री ने जनपदवार लक्ष्य, समयसीमा और जवाबदेही तय करने तथा अनावश्यक विलंब पाए जाने पर संबंधित कार्यदायी संस्था एवं जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने के भी निर्देश दिये।

बैठक में बताया गया कि राज्य में जल जीवन मिशन के अंतर्गत 16,555 योजनाओं में से 15,540 योजनाएं पूरी हो चुकी हैं। राज्य की औसत प्रगति 92.46 प्रतिशत है तथा 1,015 योजनाएं प्रगति पर हैं। ग्रामीण परिवारों तक नल से जल की पहुंच की समीक्षा के दौरान बताया गया कि 14.48 लाख में से 14.20 लाख परिवारों को कनेक्शन दिये जा चुके हैंं। बैठक में जानकारी दी गई कि 14,979 गांवों में से 9,796 गांव में हर नल से जल का सत्यापन हो चुका है।

सीएम धामी के प्रयासों से रूस में फंसे उत्तराखण्ड के दो भाइयों की सुरक्षित वतन वापसी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी जी के हस्तक्षेप और राज्य सरकार के निरंतर प्रयासों से रूस में करीब 97 दिनों से फंसे पिथौरागढ़ निवासी दो भाई आनंद सिंह कार्की एवं भूपेंद्र सिंह कार्की सुरक्षित अपने घर लौट आए हैं।

दोनों भाइयों की सकुशल वापसी के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उनसे दूरभाष पर वार्ता कर उनकी कुशलक्षेम जानी। मुख्यमंत्री ने दोनों युवकों और उनके परिजनों से बातचीत करते हुए पूरे घटनाक्रम की जानकारी भी ली। लंबे समय बाद दोनों बेटों के सुरक्षित घर लौटने पर परिवार ने राहत व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री जी के संवेदनशील हस्तक्षेप एवं त्वरित प्रयासों के लिए आभार जताया।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, दोनों भाइयों को सितारगंज स्थित एक ट्रैवल एजेंसी के माध्यम से विदेश में बेहतर रोजगार दिलाने का भरोसा दिया गया था। परिवार का आरोप है कि रोजगार के नाम पर उनसे करीब ₹8 लाख लिए गए, जिसके बाद दोनों भाइयों को रूस भेज दिया गया।

दोनों भाई 5 मई 2026 को भारत से रवाना हुए और 6 मई को मॉस्को पहुंचे। परिजनों के अनुसार, रूस पहुंचने के बाद उन्हें उस कार्य में नहीं लगाया गया, जिसके लिए उन्हें विदेश भेजा गया था। इसके बजाय उनसे उनकी इच्छा के विपरीत अन्य कार्य कराए गए और उसका पारिश्रमिक भी नहीं दिया गया।

परिवार के मुताबिक, दोनों युवकों को स्वतंत्र रूप से आने-जाने की अनुमति भी नहीं थी और कार्य करने से मना करने पर उन्हें धमकाया जाता था। लंबे समय तक नियमित संपर्क नहीं हो पाने के कारण परिजनों की चिंता लगातार बढ़ती गई। अंतिम संपर्क के दौरान युवकों ने जिस परिसर में उन्हें रखा गया था, उसके आसपास ड्रोन अथवा मिसाइल हमले की जानकारी भी परिवार को दी थी, जिसके बाद उनकी सुरक्षा को लेकर चिंता और गहरा गई।

मामला संज्ञान में आते ही मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए संबंधित अधिकारियों को दोनों युवकों की सुरक्षित और शीघ्र वापसी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री के निर्देश पर राज्य सरकार के अधिकारियों ने विदेश मंत्रालय एवं रूस स्थित भारतीय दूतावास के साथ लगातार संपर्क और समन्वय स्थापित कर दोनों भाइयों की सुरक्षित वापसी के प्रयास तेज किए।

निरंतर प्रयासों के फलस्वरूप दोनों भाइयों की सुरक्षित भारत वापसी सुनिश्चित हुई और करीब 97 दिनों के लंबे इंतजार के बाद वे सकुशल अपने घर पहुंच सके।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी जी ने कहा कि उत्तराखण्ड का कोई भी नागरिक दुनिया के किसी भी हिस्से में संकट में हो, राज्य सरकार उसकी सहायता के लिए हरसंभव प्रयास करेगी। प्रदेशवासियों की सुरक्षा, सम्मान और हितों की रक्षा हमारी सर्वाेच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में राज्य सरकार केंद्र सरकार, विदेश मंत्रालय एवं संबंधित भारतीय मिशनों के साथ समन्वय स्थापित कर हरसंभव सहायता सुनिश्चित करती है।

दोनों युवकों की सुरक्षित वापसी के प्रयासों में यूकेडी के वरिष्ठ नेता काशी सिंह ऐरी एवं समाजसेवी रामदेव वर्मा ने भी परिवार के साथ लगातार संपर्क बनाए रखा तथा सरकार एवं संबंधित अधिकारियों के स्तर पर समन्वय में सहयोग किया।

दोनों भाइयों की सकुशल घर वापसी पर परिजनों ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, विदेश मंत्रालय, भारतीय दूतावास, राज्य सरकार के अधिकारियों एवं इस प्रयास में सहयोग करने वाले सभी लोगों का आभार व्यक्त किया।

उत्तराखंड के युवाओं को निशुल्क ऑनलाइन कोचिंग कराएगी धामी सरकार

उत्तराखंड के युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए बेहतर अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में राज्य सरकार की महत्वपूर्ण पहल ‘मुख्यमंत्री युवा भविष्य निर्माण योजना-2026’ अब धरातल पर उतरने जा रही है। योजना को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पहले ही अनुमोदन प्रदान कर चुके हैं। योजना का शीघ्र ही मुख्यमंत्री द्वारा विधिवत शुभारंभ किया जाएगा।

युवाओं को विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए गुणवत्तापूर्ण मार्गदर्शन एवं अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराने तथा इस दिशा में एक समर्पित योजना शुरू करने का निर्णय लिया गया था। इसी निर्णय के क्रम में मुख्यमंत्री युवा भविष्य निर्माण योजना-2026 को स्वीकृति दी गई है।

योजना के तहत राज्य के विश्वविद्यालयों तथा शासकीय एवं अशासकीय सहायता प्राप्त महाविद्यालयों में उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे विद्यार्थियों को विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए निःशुल्क ऑनलाइन कोचिंग उपलब्ध कराई जाएगी।

इसमें सिविल सर्विसेज (UPSC/PSC), रक्षा सेवाओं (CDS), बैंकिंग, रेलवे, SSC सहित अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं तथा प्रतिष्ठित उच्च शिक्षण संस्थानों में प्रवेश और पात्रता निर्धारण के लिए आयोजित होने वाली CAT, MAT, GATE, NET और CSIR-NET जैसी परीक्षाओं की तैयारी शामिल है।

योजना के माध्यम से राज्य के युवाओं को घर बैठे गुणवत्तापूर्ण कोचिंग और मार्गदर्शन उपलब्ध हो सकेगा। विशेष रूप से दूरस्थ पर्वतीय क्षेत्रों में अध्ययन कर रहे विद्यार्थियों के लिए यह पहल महत्वपूर्ण साबित होगी। इससे आर्थिक संसाधनों की कमी के कारण महंगी कोचिंग का लाभ नहीं उठा पाने वाले विद्यार्थियों को भी प्रतियोगी परीक्षाओं की बेहतर तैयारी का अवसर मिलेगा।

मुख्यमंत्री धामी द्वारा योजना के विधिवत शुभारंभ के लिए जल्द ही तिथि निर्धारित की जाएगी। शुभारंभ के साथ ही योजना के तहत विद्यार्थियों को ऑनलाइन कोचिंग उपलब्ध कराने की प्रक्रिया प्रारंभ होगी।

उत्पादन संबंधित योजनाओं को लेकर बोले सीएस, कृषि विज्ञान केंद्रों के उपयोग को बढ़ाएं

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन की अध्यक्षता में सचिवालय में सेब, कीवी, ड्रैगन फ्रूट आदि से उत्पादन सम्बन्धित योजनाओं को लेकर जिलाधिकारियों के साथ वीडियोकॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक हुई। बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने जनपदों में वर्तमान में उगाई जा रही फसलों की जानकारी ली।

मुख्य सचिव ने सभी जिलाधिकारियों को किसानों से फीडबैक लेते हुए उन्हें आ रही समस्याओं और सुझावों को साझा किए जाने की बात कही। उन्होंने कहा कि यदि योजना में कहीं पर सुधार की आवश्यकता है तो जिलाधिकारी लिखित में अवगत करा सकते हैं, ताकि योजना को बेहतर तरीके से लागू किया जा सके। उन्होंने कहा कि जिलाधिकारी मिशन के निर्धारित पीरियड के लिए उत्पादन क्षेत्र एवं उत्पादकता बढ़ाये जाने के लक्ष्य निर्धारित कर सकते हैं, ताकि मिशन को फोकस्ड वे लागू किया जा सके। उन्होंने इसके लिए कृषि विज्ञान केंद्रों के उपयोग को भी बढ़ाए जाने की बात कही।

मुख्य सचिव ने कहा कि प्रदेश के भीतर फलोत्पादन को बढ़ावा देने के लिए इकोसिस्टम विकसित करना होगा। उन्होंने कोल्ड स्टोरेज चेन, ट्रांसपोर्टेशन, रोपवे सुविधा एवं मार्केटिंग के साथ ही प्रोसेसिंग यूनिट्स के विकास पर फोकस किए जाने पर जोर दिया। उन्होंने जिलाधिकारियों को ट्रांसपोर्टेशन, कोल्ड स्टोरेज और प्रोसेसिंग यूनिट्स के प्रोजेक्ट्स भी शामिल किए जाने की बात कही।

मुख्य सचिव ने कहा कि सेब, कीवी, ड्रैगन फ्रूट के उत्पादन में क्लस्टर आधारित खेती पर फोकस किए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि सेब एवं कीवी की सघन खेती को बढ़ावा देने के लिए इनकी नई एवं गुणवत्तापूर्ण किस्मों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि किसानों से फीडबैक भी लिया जाए एवं उनके सुझावों को गंभीरता से लेते हुए शामिल करने के प्रयास किए जाएं। उन्होंने जनपद विशेष योजनाओं पर फोकस किए जाने की बात कही। कहा कि नए क्षेत्रों को जोड़ते हुए क्षेत्र विस्तार किया जाए। इसके लिए हाई डेंसिटी वैरायटी की अत्याधुनिक नर्सरियों को विकसित किया जाए।

मुख्य सचिव ने कहा कि पॉलीहाउस स्थापना के लिए प्रत्येक जनपद के लिए 3-3 वेंडर्स एंपैनल्ड किए गए हैं। किसानों को योजना का अधिक से अधिक लाभ देने के लिए उनको हैंड होल्डिंग करायी जाए। साथ ही कम उत्पादकता वाले पुराने क्षेत्रों को हाई डेंसिटी की नई फसलों से रिप्लेस किए जाए। नए विकसित क्षेत्रों को फलोत्पादन शुरू होने तक इंटरक्रॉप को भी शामिल किया जा सकता है ताकि किसानों को इससे नुकसान ना हो।

रूद्रेश्वर महादेव मंदिर के सौंदर्यीकरण की घोषणा करने पर सीएम का आभार जताने पहुंचे पुरोला के नागरिक

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुख्य सेवक सदन में विधायक पुरोला दुर्गेश्वर लाल ने भेंट की। उन्होंने विल्ला नौगांव, विधानसभा पुरोला के अंतर्गत 65 गांवों के आराध्य देवता श्री रुद्रेश्वर महादेव के डांडा देवराणा मंदिर, के सौंदर्यीकरण के लिए मुख्यमंत्री घोषणा के तहत ₹1.79 करोड़ की धनराशि स्वीकृत किए जाने पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का आभार व्यक्त किया।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रदेश सरकार उत्तराखंड की धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के लिए निरंतर कार्य कर रही है। राज्य के प्रमुख धार्मिक स्थलों के साथ ही स्थानीय स्तर पर आस्था और परम्परा से जुड़े मंदिरों एवं मेलों के विकास पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की समृद्ध संस्कृति और परम्परायें उत्तराखंड की विशिष्ट पहचान हैं तथा इनके संरक्षण एवं संवर्धन के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के सभी क्षेत्रों का समग्र विकास हमारी प्राथमिकता है।

विधायक दुर्गेश्वर लाल ने कहा कि डांडा देवराणा स्थित रुद्रेश्वर महादेव मंदिर क्षेत्र के 65 गांवों की आस्था का प्रमुख केंद्र है। मंदिर से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की धार्मिक एवं सांस्कृतिक आस्थाएं जुड़ी हुई हैं। मंदिर के सौंदर्यीकरण एवं अवस्थापना सुविधाओं के विकास से क्षेत्र में आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होंगी तथा क्षेत्र की धार्मिक एवं सांस्कृतिक पहचान को और मजबूती मिलेगी।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री धामी के नेतृत्व में प्रदेश सरकार धार्मिक एवं सांस्कृतिक स्थलों के संरक्षण और विकास के साथ-साथ स्थानीय आस्था से जुड़े महत्वपूर्ण स्थलों के विकास को प्राथमिकता दे रही है। रुद्रेश्वर महादेव मंदिर के सौंदर्यीकरण के लिए स्वीकृत धनराशि से मंदिर परिसर में विभिन्न विकास एवं सौंदर्यीकरण कार्य किए जा सकेंगे, जिससे क्षेत्र के लोगों एवं श्रद्धालुओं को लाभ मिलेगा।

उन्होंने पूर्व में मुख्यमंत्री द्वारा डांडा देवराणा रुद्रेश्वर महादेव मेले को राजकीय मेला घोषित किए जाने के लिए भी उनका धन्यवाद ज्ञापित किया। उन्होंने कहा कि राजकीय मेले का दर्जा मिलने से इस ऐतिहासिक एवं धार्मिक मेले को व्यापक पहचान मिलेगी और क्षेत्र की लोक संस्कृति, परंपराओं तथा धार्मिक विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन को नई गति प्राप्त होगी।

इस अवसर पर रुद्रेश्वर मंदिर समिति के केंद्रीय अध्यक्ष एवं मंदिर समिति के सदस्य तथा पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष नारायण सिंह चौहान, भाजपा नेता जगनमोहन चंद, सरदार सिंह राणा, पूर्व मंडल अध्यक्ष बचन चौहान एवं वर्तमान मंडल अध्यक्ष अनिल चौहान सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।

चारधाम यात्रा 2026ः पिछले वर्ष के मुकाबले यात्रियों की संख्या 4.68 लाख अधिक

देहरादून। उत्तराखण्ड में मानसून की बाधाओं और चुनौतियों के बावजूद चारधाम यात्रा नया रिकॉर्ड बनाने की ओर अग्रसर है। प्रदेश सरकार श्रद्धालुओं की सुरक्षा को सर्वाेपरि रखते हुए यात्रा को नियंत्रित और आवश्यकता के अनुसार रोककर संचालित कर रही है, लेकिन तीर्थयात्रियों की आस्था में कोई कमी नहीं आई है। 114 दिनों में ही दर्शनार्थियों की संख्या 47 लाख के पार पहुंच चुकी है। यह आंकड़ा पिछले वर्ष की तुलना में साढ़े चार लाख से अधिक है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर श्रद्धालुओं की सुरक्षा को सर्वाेच्च प्राथमिकता देते हुए यात्रा को बेहद सतर्कता और निगरानी के साथ संचालित किया जा रहा है। मानसून की सक्रियता को देखते हुए सुरक्षित और सुविधाजनक यात्रा के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी खुद राज्य आपदा कंट्रोल रूम के माध्यम से आपदा प्रबंधन पर नजर रखे हुए हैं। चारों धामों और यात्रा पड़ावों में यात्रियों के ठहरने, खाने और अन्य सभी जरूरी इंतजाम किए गए हैं। भूस्खलन की दृष्टि से संवेदनशील स्थानों पर यात्रियों की मदद के लिए सुरक्षा जवानों की तैनाती की गई है।

प्रदेश सरकार के बेहतर आपदा प्रबंधन और इंतजामों के चलते यात्रा नया कीर्तिमान बनाने की ओर बढ़ रही है। इस वर्ष 19 अप्रैल को गंगोत्री एवं यमुनोत्री धाम के कपाटोद्घाटन के साथ चारधाम यात्रा का आगाज हुआ था। सोमवार 10 अगस्त तक इस यात्राकाल के 114 दिनों में कुल 47 लाख 02 हजार 703 श्रद्धालु चारधाम दर्शन कर चुके हैं, जबकि बीते वर्ष 2025 में इतनी ही अवधि में 42 लाख 34 हजार 147 यात्री चारधाम दर्शन को पहुंचे थे। यह आंकड़ा पिछले वर्ष की तुलना में 04 लाख 68 हजार 556 अधिक है। चारों धामों में अब तक की कुल संख्या की बात करें तो बद्रीनाथ में 16 लाख 12 हजार 112, केदारनाथ में 14 लाख 50 हजार 116, गंगोत्री में 07 लाख 37 हजार 629 और यमुनोत्री धाम में 06 लाख 62 हजार 347 यात्री दर्शन कर चुके हैं। जबकि हेमकुंट साहिब में 02 लाख 40 हजारे 499 श्रद्धालु शीश नवा चुके हैं।

चारों धामों में एक दिन में पहुंचे 15 हजार से अधिक श्रद्धालु
मौसम लगातार खराब होने और प्रशासनिक अलर्ट के बावजूद सोमवार को 15 हजार 376 श्रद्धालु चारधाम दर्शन को पहुंचे। इनमें सर्वाधिक 9559 यात्री बद्रीनाथ धाम पहुंचे। जबकि केदारनाथ में 4170, गंगोत्री में 1204 और यमुनोत्री धाम में 443 श्रद्धालुओं न दर्शन किए।

बद्रीनाथ पहुंचे 16.12 लाख से अधिक श्रद्धालु
भगवान बद्रीविशाल के दर्शनों को श्रद्धालुओं में खासा उत्साह है। 23 अप्रैल से शुरू हुई यात्रा सोमवार 10 अगस्त को 110 दिन की अवधि पूर्ण कर चुकी है। इस दौरान 16 लाख 12 हजार 112 श्रद्धालु बद्रीनाथ धाम में शीश नवा चुके हैं। पिछले वर्ष की तुलना में इस बार 03 लाख 50 हजार 192 अधिक तीर्थयात्री दर्शनों को पहुंच चुके हैं। पिछले वर्ष 04 मई 2025 को बद्रीनाथ यात्रा का श्रीगणेश हुआ था। तब 21 अगस्त यानी 110 दिन में यह आंकड़ा 12 लाख 61 हजार 280 था।
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चारधाम यात्रियों की सुरक्षा हमारी सर्वाेच्च प्राथमिकता है। मानसून की सक्रियता को देखते हुए आपदा प्रबंधन विभाग को चौबीसों घंटे अलर्ट मोड पर रखा गया है। जिलाधिकारियों को सतर्क रहने को कहा गया है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में राहत और बचाव कार्य तत्काल शुरू हो सके। भूस्खलन या अन्य किसी भी प्रकार की आपदा की स्थिति में श्रद्धालुओं को सुरक्षित स्थानों पर ठहराने के निर्देश दिए गए हैं। श्रद्धालुओं को मौसम के मिजाज को देखकर ही यात्रा करने की सलाह दी जा रही है।

– पुष्कर सिंह धामी
मुख्यमंत्री, उत्तराखण्ड

मुख्यमंत्री ने प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से आए लोगों की जानी समस्याएं

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री आवास स्थित मुख्य सेवक सदन में प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से आए लोगों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं। जनसुनवाई के दौरान प्रदेश के अलग-अलग जिलों से पहुंचे लोगों ने अपनी समस्याओं से मुख्यमंत्री को अवगत कराया।

मुख्यमंत्री ने लोगों की समस्याओं को एक-एक कर सुना और संबंधित प्रकरणों की जानकारी लेते हुए अधिकारियों को आवश्यक कार्यवाही के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधि और सरकार के बीच आमजन का सीधा संवाद लोकतांत्रिक व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाता है। जनसुनवाई के माध्यम से लोगों को अपनी बात सीधे सरकार तक पहुंचाने का अवसर मिलता है और विभिन्न स्तरों पर लंबित मामलों के समाधान का मार्ग भी प्रशस्त होता है।

मुख्यमंत्री के समक्ष लोगों ने सड़क एवं संपर्क मार्ग, पेयजल, विद्युत, शिक्षा, स्वास्थ्य, राजस्व, सिंचाई, रोजगार, स्थानांतरण तथा स्थानीय विकास से जुड़े विभिन्न मामले रखे। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से प्रकरणों की स्थिति की जानकारी लेते हुए पात्रता एवं नियमों के अनुरूप आवश्यक कार्यवाही करने को कहा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जिन मामलों में विभागीय स्तर पर कार्रवाई संभव है, उनमें अनावश्यक विलंब न किया जाए तथा जिन प्रकरणों में शासन स्तर पर निर्णय अपेक्षित है, उन्हें आवश्यक प्रक्रिया के साथ प्रस्तुत किया जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार की प्राथमिकता प्रदेश के प्रत्येक नागरिक तक सुशासन का लाभ पहुंचाना है। सरकार की योजनाओं और नीतियों का प्रभाव तभी सार्थक होगा, जब उनका लाभ जरूरतमंद व्यक्ति तक समय पर पहुंचे। उन्होंने कहा कि संबंधित विभागों को भेजकर इन पर यथाशीघ्र कार्यवाही की जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार जनभावनाओं और जनअपेक्षाओं के अनुरूप कार्य करते हुए प्रदेश के समग्र विकास के लिए निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने अधिकारियों से अपेक्षा की कि आमजन से जुड़े मामलों में मानवीय दृष्टिकोण के साथ नियमों के अनुरूप समाधान सुनिश्चित किया जाए।

इस अवसर पर प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु, सचिव शैलेश बगोली, आयुक्त गढ़वाल आनंद स्वरूप, आईजी गढ़वाल राजीव स्वरूप, अपर सचिव जे.सी. काण्डपाल सहित मुख्यमंत्री कार्यालय के अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

चमोली आपदा पर सीएम धामी लगातार कर रहे मॉनिटरिंग, अधिकारियों को ग्राउंड जीरो पर पहुंचकर स्थिति का आकलन करने के निर्देश

देहरादून। चमोली जनपद के ज्योतिर्मठ-मलारी मोटर मार्ग पर तमकनाला में बेली ब्रिज बहने की घटना के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पूरे घटनाक्रम की लगातार मॉनिटरिंग कर रहे हैं। मंगलवार को भी मुख्यमंत्री ने जिलाधिकारी चमोली एवं गढ़वाल मंडल आयुक्त से स्थिति की जानकारी लेते हुए राहत-बचाव, आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति और कनेक्टिविटी बहाली को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रभावित क्षेत्रों में राशन, खाद्य सामग्री, दवाइयों एवं अन्य आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति किसी भी स्थिति में बाधित नहीं होनी चाहिए। आवश्यकता पड़ने पर वैकल्पिक मार्गों एवं अन्य उपलब्ध माध्यमों से ग्रामीणों तक जरूरी सामग्री पहुंचाना सुनिश्चित किया जाए।

मुख्यमंत्री ने ज्योतिर्मठ-मलारी मोटर मार्ग पर आवाजाही को जल्द से जल्द बहाल करने के लिए सभी संभावित विकल्पों पर तत्काल कार्य करने के निर्देश दिए। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को ग्राउंड जीरो पर पहुंचकर वास्तविक स्थिति एवं नुकसान का स्वयं आकलन करने को कहा, ताकि राहत और पुनर्व्यवस्था से जुड़े कार्यों में किसी प्रकार की देरी न हो।

बदलते मौसम और बढ़ते जलप्रवाह को देखते हुए मुख्यमंत्री ने निचले क्षेत्रों तथा नदी-नालों के आसपास विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि लोगों की सुरक्षा सर्वाेच्च प्राथमिकता है। संवेदनशील क्षेत्रों की लगातार निगरानी की जाए और आवश्यकता पड़ने पर लोगों को तत्काल सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की पूरी तैयारी रखी जाए।

राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र से भी चमोली सहित प्रदेश के सभी संवेदनशील क्षेत्रों पर 24×7 नजर रखी जा रही है। जिला प्रशासन एवं संबंधित विभागों के साथ लगातार समन्वय किया जा रहा है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में राहत एवं बचाव दलों को तत्काल सक्रिय किया जा सके।

सोमवार को चमोली जनपद के ज्योतिर्मठ-मलारी मोटर मार्ग पर तमकनाला में अचानक अत्यधिक जलप्रवाह बढ़ने के कारण 123 बीआरटीएफ, सुराईथोटा द्वारा निर्मित बेली ब्रिज बह गया था। तेज बहाव की चपेट में एक व्यक्ति और एक कैंपर वाहन के बहने की सूचना भी प्राप्त हुई थी।

घटना की सूचना मिलते ही मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने तत्काल संज्ञान लेते हुए सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास से पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली और राहत-बचाव कार्यों को सर्वाेच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। एसडीआरएफ एवं एनडीआरएफ की टीमों को तत्काल घटनास्थल के लिए रवाना किया गया। स्थानीय प्रशासन, पुलिस एवं संबंधित विभागों की टीमें भी मौके पर राहत एवं बचाव कार्यों में जुटी हैं।

संकट के बीच सरकार का फोकसकृसुरक्षा, राहत और कनेक्टिविटी

तमकनाला की घटना के बाद सरकार की प्राथमिकता केवल राहत एवं बचाव कार्यों तक सीमित नहीं है। प्रभावित क्षेत्रों में आवश्यक वस्तुओं की निर्बाध आपूर्ति, वैकल्पिक कनेक्टिविटी और आवाजाही की शीघ्र बहाली पर भी समान रूप से काम किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री धामी की लगातार मॉनिटरिंग और अधिकारियों को ग्राउंड जीरो पर पहुंचकर त्वरित निर्णय लेने के निर्देश राज्य सरकार की प्रो-एक्टिव आपदा प्रबंधन नीति को दर्शाते हैं। प्राकृतिक आपदाओं को रोका नहीं जा सकता, लेकिन समय पर सतर्कता, बेहतर समन्वय और त्वरित प्रशासनिक कार्रवाई से उनके प्रभाव को कम किया जा सकता है।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि कठिन परिस्थितियों में प्रत्येक नागरिक की सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ प्रभावित क्षेत्रों में जल्द से जल्द सामान्य स्थिति बहाल करना सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता है।