मुख्यमंत्री ने 39वें राष्ट्रीय खेलों के लिए अभी से तैयारी शुरू करने को कहा

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने, 38वें राष्ट्रीय खेलों में राज्य के खिलाड़ियों के शानदार प्रदर्शन पर बधाई देते हुए कहा है कि, अब हमें 39वें राष्ट्रीय खेलों की तैयारी में जुटना होगा। उन्होंने कहा कि राज्य में, राष्ट्रीय खेलों के लिए तैयार किए गए खेल इंफ्रास्ट्रक्चर के भी दीर्घ कालिक इस्तेमाल की योजना बनाई जाएगी।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि, 38वें राष्ट्रीय खेल उत्तराखंड को आयोजन के साथ ही खेल प्रदर्शन को लेकर शानदार यादें देकर गया है। उत्तराखंड की मेजबानी को राष्ट्रीय स्तर पर सराहा गया है, उत्तराखंड ने इस आयोजन के जरिए लंबी लकीर खींचने का काम किया है। इसी तरह उत्तराखंड के खिलाड़ियों ने भी अपने शानदार प्रदर्शन से, इस आयोजन को अविस्मरणीय बना दिया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि अब हमें मेघालय में प्रस्तावित 39वें राष्ट्रीय खेलों की तैयारी में जुटना होगा, इसके लिए खिलाड़ियों, प्रशिक्षकों से लेकर विभाग को तक प्रयास करने होंगे। सरकार इस काम में पूरा सहयोग देगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय खेलों के जरिए उत्तराखंड के विभिन्न शहरों में शानदार खेल इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध हो गया है। इसका इस्तेमाल खेल प्रतिभाओं को निखारने में किया जाएगा। सरकार खेल सुविधाओं के दीर्घकालिक इस्तेमाल के लिए योजना बनाएगी।

पांच अनधिकृत कॉलोनियों पर एचआरडीए की नजर, जेसीबी चलाकर की ध्वस्त

हरिद्वार रूड़की विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष आईएएस अंशुल सिंह ने बताया कि प्राधिकरण क्षेत्र के अंतर्गत पांच ऐसे लोगों पर कार्रवाई की गई है, जो अवैध तरीके से कॉलोनियों को बसाने की फिराक में थे। बताया कि जेसीबी के जरिए कॉलोनियों की प्लांटिंग को ध्वस्त किया गया है। साथ ही मानचित्र स्वीकृत कराने के बाद निर्माण व विकास कार्य करने के लिये संबंधितों को निर्देशित भी किया गया है।

आईएएस अंशुल सिंह ने बताया कि प्राधिकरण क्षेत्रांतर्गत बेडपुर क्षेत्र, धनौरी रोड पर पांच अनाधिकृत कॉलोनियों को मौके पर ध्वस्त किया गया, जिनकी पहचान नदीम व शहजाद, महकार, हितबद्ध व्यक्ती, अनीश, राव शहजाद के रूप में हुई है। बताया कि बिना मानचित्र स्वीकृत किये कॉलोनियों का निर्माण कार्य किया जा रहा था। जिन्हें मोके पर जाकर प्राधिकरण की टीम ने ध्वस्त किया है।

आने वाले राष्ट्रीय खेलों के लिए लंबी लकीर खींच गया उत्तराखंड

उत्तराखंड में आयोजित 38वें राष्ट्रीय खेल इस बार व्यवस्थाओं से लेकर आयोजन तक लेकर लंबी लकीर खींचने वाले साबित हुए हैं। इस बार के राष्ट्रीय खेल पर्यावरण हितैषी कदमों से लेकर खिलाड़ियों की सुविधाओं और स्वास्थ्य की देखभाल को लेकर चर्चाओं मे रहे।

01 – पदक तालिका में प्रदर्शन
38 वें राष्ट्रीय खेलों से पहले इस आयोजन में उत्तराखंड का इतना शानदार प्रदर्शन कभी नहीं रहा। राज्य स्थापना के बाद जब-जब उत्तराखंड ने राष्ट्रीय खेलों में भाग लिया, तब-तब उसे मिलने वाले पदकों की संख्या दस से लेकर 19 तक रही है। इसी तरह, पदक तालिका में वह 13 वें स्थान से लेकर 26 वें स्थान के बीच में कहीं रहा है। यही हाल स्वर्ण पदकों का भी रहा है, जिसकी संख्या एक से लेकर अधिकतम पांच तक रही है। अब 38 वें राष्ट्रीय खेलों की बात कर लें, तो क्या कुल पदक, क्या स्वर्ण और क्या पदक तालिका की स्थिति, सभी में आमूलचूल परिवर्तन हुआ है। पदकों की कुल संख्या 103 पर पहुंची है। पदकों का सैकड़ा जड़ कर उत्तराखंड ने सबको चकित कर दिया है। इसी तरह, स्वर्ण पदकों की संख्या 24 रही है। पदक तालिका में सातवें स्थान पर आना, सचमुच कमाल का अनुभव है। पश्चिम बंगाल, पंजाब, ओडिसा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, गुजरात, आंध्र, जम्मू कश्मीर जैसे बडे़ राज्य पदक तालिका में उत्तराखंड से पीछे हैं।

02 – छोटे राज्य ने दिखाया दम
उत्तराखंड जैसे अपेक्षाकृत छोटे राज्य को राष्ट्रीय खेलों की तैयारी के लिए बहुत कम समय मिला। सफल आयोजन किसी चुनौती से कम नहीं था, क्योंकि उत्तराखंड को राज्य बने सिर्फ 25 वर्ष हुए हैं। जिस पड़ोसी पर्वतीय राज्य हिमाचल के मॉडल को अपनाने की अक्सर बातें होती हैं, उसे राष्ट्रीय खेलों की मेजबानी कभी नहीं मिली। मणिपुर और असम के बाद उत्तराखंड राष्ट्रीय खेल कराने वाला तीसरा हिमालयी राज्य बन गया है। वर्ष 2000 में उत्तराखंड के साथ राज्य का दर्जा हासिल करने वाले झारखंड ने वर्ष 2011 में राष्ट्रीय खेल कराए हैं, जबकि छत्तीसगढ़ मेजबानी मिलने के बावजूद इसका आयोजन नहीं करा पाया था। उत्तराखंड ने 38 वें राष्ट्रीय खेलों के लिए मजबूत आधारभूत ढांचा तैयार किया। अत्याधुनिक उपकरण मंगवाए। इस वजह से कई रिकार्ड भी टूटे। दस हजार खिलाड़ियों के लिए जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई।

03 – ग्रीन गेम्स
राष्ट्रीय खेलों में सबसे अहम हरित पहल रही। ग्रीन गेम्स की थीम को अमल में लाने के लिए कई कदम उठाए गए। रायपुर में 2.77 हेक्टेयर जमीन पर खेल वन तैयार किया गया, जहां पर पदक विजेताओं के नाम के 1600 पौधे लगाए जा रहे हैं। खेलों में जीतने वाले खिलाड़ियों के लिए पदक हों या मेहमानों के लिए आमंत्रण पत्र, सभी ई-वेस्ट से तैयार कराए गए। शुभंकर राज्य पक्षी मोनाल को बनाया गया। हरित जागरूकता के लिए स्पोर्ट्स वेस्ट मटीरियल के प्रतीक चिन्ह आयोजन स्थल पर प्रदर्शित किए गए। आयोजन स्थल पर एक स्थान से दूसरे स्थान तक आवाजाही के लिए ई-रिक्शे, साइकिल प्रयोग किए गए। इसके अलावा, सोलर पैनल के प्रयोग से लेकर पानी के लिए रीयूसबल वाटर बॉटल की व्यवस्था की गई। हरित पहल से इतर महिला स्वास्थ्य का संदेश देने के लिए महिला खिलाड़ियों को वैलकम किट में सेनेटरी नैपकीन व अन्य जरूरी सामान दिए गए। तीन बार इस्तेमाल किए जा चुके 250 लीटर तेल को बायो डीजल बनाने के लिए भेजा गया।

38 वें राष्ट्रीय खेलों की मेजबानी को हमने पहले ही दिन से अपने लिए बड़ी उपलब्धि माना। इस आयोजन को भव्य रूप देने के लिए पूरे प्रयास किए गए। आधारभूत ढांचा तैयार किया गया और उच्चस्तरीय सुविधाएं जुटाई गईं। निश्चित तौर पर उत्तराखंड राष्ट्रीय खेलों के आयोजन के बाद खेल के क्षेत्र में मजबूत होकर उभरा है। मै सफल आयोजन के लिए सभी को बधाई देता हूं।
पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री।

गौलापार स्पोर्ट्स स्टेडियम का सीएम ने किया निरीक्षण, शुक्रवार को नेशनल गेम्स का होना है समापन

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हल्द्वानी गौलापार स्पोर्ट्स स्टेडियम में आयोजित 38 वें राष्ट्रीय खेलों की विभिन्न व्यवस्थाओं का निरीक्षण कर समापन कार्यक्रम हेतु अंतिम रूप से की जा रही तैयारियों का जायजा लिया।

मुख्यमंत्री ने समापन समारोह को भव्यता पूर्वक सम्पन्न कराए जाने हेतु की जा रही विभिन्न तैयारियां मंच निर्माण, साज सज्जा, बैठने की व्यवस्था आदि व्यवस्थाओं का निरीक्षण कर, की जा रही सभी तैयारियां की जानकारी ली।

मुख्यमंत्री ने राष्ट्रीय खेलों के समापन समारोह की पूर्व तैयारियां का स्थलीय निरीक्षण करते हुए स्टेडियम के ऑडिटोरियम में अधिकारियों के साथ बैठक कर समापन समारोह की तैयारियों के संबंध में अधिकारियों से जानकारी लेते हुए आवश्यक निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि यह राज्य के लिए एक ऐतिहासिक अवसर है इस समापन कार्यक्रम को भव्यता से सम्पन्न करना है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कार्यक्रम के दौरान सुरक्षा, दर्शक दीर्घा, और अन्य सभी सुविधा बेहतर हो इसका विशेष ध्यान रखा जाय। मुख्यमंत्री ने कहा कि 38 वें राष्ट्रीय खेलों के अंतर्गत सभी प्रतियोगिताएं उत्तराखंड राज्य के भीतर ही सम्पन्न हुई, राज्य के बाहर नहीं जाना पड़ा। इस हेतु सभी इंफ्रास्ट्रक्चर यहाँ तैयार किया गया। आने वाले समय में राज्य के युवाओं को इसका बेहतर लाभ प्राप्त होगा और यहाँ के खिलाड़ी राष्ट्रीय एवं अंतराष्ट्रीय स्तर पर राज्य का नाम रौशन करेंगे। उन्होंने कहा कि पहले उत्तराखंड राज्य 25 स्थान पर था आज पदक जीतकर 7 वें स्थान पर है।

इस दौरान मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि कार्यक्रम के दौरान किसी भी प्रकार की कोई भी समस्या न हो इस हेतु सभी व्यवस्थाएं चाक चौबंद हो। इस अवसर पर मुख्यमंत्री धामी ने फैनसिंग के प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय प्रतिभागियों से परिचय प्राप्त कर उन्हें मेडल प्रदान कर सम्मानित किया गया। उन्होंने निशानेबाजी प्रतिभागियों का मनोबल बढाते हुये उत्साहवर्धन किया।

इस अवसर पर खेल मंत्री रेखा आर्या, जिलाध्यक्ष प्रताप बिष्ट,डा0 अनिल कपूर डब्बू, दिनेश आर्य, एशियन फैनसिंग फैडरेशन के महासचिव राजीव मेहता, सचिव खेल अमित सिन्हा, आयुक्त/सचिव मुख्यमंत्री दीपक रावत, आईजी डा. योगेन्द्र रावत, जिलाधिकारी वंदना निदेशक खेल प्रशान्त आर्या, ले. जनरल (सेनि) हरपाल सिंह के साथ ही अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

नेशनल गेम्स के उद्घाटन समारोह की तरह ही होगा समापन का भव्य व विराट आयोजन

38 वें राष्ट्रीय खेलों का समापन शुक्रवार 14 फरवरी को हल्द्वानी में होने जा रहा है। उद्घाटन समारोह में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह मुख्य अतिथि होंगे। 28 जनवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देहरादून के महाराणा प्रताप स्पोर्ट्स कॉलेज में राष्ट्रीय खेलों का शुभारंभ किया था। हल्द्वानी के अंर्तराष्ट्रीय स्पोर्ट्स कॉम्पलेक्स में आयोजित होने वाले समापन समारोह को भी उसी स्तर का भव्य व विराट बनाने की तैयारी है।

राष्ट्रीय खेलों में इस बार 35 खेलों की स्पर्धाएं आयोजित की गईं, जिनमें से दो को छोड़कर बाकी सभी मेडल टेली के खेल थे। देहरादून राष्ट्रीय खेलों का प्रमुख आयोजन स्थल रहा। इसके बाद हल्द्वानी, हरिद्वार, रूद्रपुर जैसे शहरों में सबसे ज्यादा खेल स्पर्धाएं आयोजित की गईं। आयोजन की खूबसूरती यह भी रही कि खटीमा, टनकपुर, अल्मोड़ा, टिहरी जैसे ठेठ पर्वतीय क्षेत्रों में भी खेल गतिविधियां संचालित की गईं।

राष्ट्रीय खेलों का समापन समारोह शुक्रवार 14 फरवरी को हल्द्वानी के अंर्तराष्ट्रीय स्पोर्ट्स कॉम्पलेक्स में दोपहर दो बजे से शुरू होगा। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह मुख्य अतिथि बतौर उपस्थित रहेंगे। इसके अलावा, केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मांडविया, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, मेघालय के मुख्यमंत्री कोंगकल संगमा, केंद्रीय सड़क एवं परिवहन राज्य मंत्री अजय टम्टा, केंद्रीय खेल एवं युवा मामले की मंत्री रक्षा निखिल खडसे, खेल मंत्री उत्तराखंड रेखा आर्या, नैनीताल सांसद अजय भट्ट, भारतीय ओलंपिक संघ की अध्यक्ष व सांसद डा पीटी ऊषा इस मौके पर विशेष रूप से उपस्थित रहेंगे।

राष्ट्रीय खेलों की पदक तालिका में उत्तराखंड ने छुआ 101 का शुभ आंकड़ा

38 वें राष्ट्रीय खेलों के समापन से कुछ घंटे पूर्व ही उत्तराखंड ने पदकों का शतक लगाकर इतिहास रच दिया है। ऐसा पहले कभी नहीं हुआ था। कभी इतने पदक उत्तराखंड की झोली में आकर नहीं गिरे थे। उत्तराखंड का यह प्रदर्शन चमत्कारिक है और खेलों की दुनिया में असल वसंत खिलने का आभास करा रहा है। गोवा में आयोजित 37 वें राष्ट्रीय खेलों में सिर्फ 24 पदक उत्तराखंड ने जीते थे और पदक तालिका में वह 25 वें स्थान पर रहा था। इस बार पदकों की संख्या और पदक तालिका में उत्तराखंड की स्थिति दोनों में ही जबरदस्त उछाल आ गया है। गुरूवार की शाम को पदक तालिका में उत्तराखंड कुल 101 पदकों के साथ सातवें नंबर पर नजर आया।

अपने घरेलू मैदान में मेजबान उत्तराखंड के खिलाड़ियोें ने शानदार प्रदर्शन किया है। पिछले राष्ट्रीय खेलों में जहां सिर्फ तीन स्वर्ण पदक उत्तराखंड ने देखे थे, वहीं इस बार स्वर्णिम सफलता की बयार चली है। उत्तराखंड ने 24 स्वर्ण पदक झटके हैं। इसके अलावा, 35 रजत और 42 कांस्य पदकों के साथ कुल 101 पदक अपने खाते में डाल दिए हैं। पदकों के मामले में देखा जाए, तो तालिका में उत्तराखंड से सिर्फ सर्विसेज, महाराष्ट्र, हरियाणा ही आगे हैं। इस लिहाज से उत्तराखंड का चौथा नंबर है, लेकिन स्वर्ण पदकों की कुल संख्या से होने वाले आंकलन के चलते उसका सातवां नंबर बना है। स्वर्ण पदक ज्यादा होने के कारण कर्नाटक, मध्य प्रदेश व तमिलनाडू जैसे राज्य पदक तालिका में उत्तराखंड से आगे हैं।

इस प्रदर्शन से उत्तराखंड का उत्साह सातवें आसमान पर है। खिलाड़ियों की अथक मेहनत और सरकार के प्रयासों ने मिलकर ऐसा रंग जमाया, कि उत्तराखंड में खेलों का असल वसंत अब दिखाई दे रहा है। पदकों के लिहाज से उत्तराखंड ने इतिहास रच दिया है। उत्तराखंड के खिलाड़ियों को उसके घरेलू मैदान के अलावा सरकार की तमाम उन योजनाओं ने आगे बढ़ने में मदद की, जो उनके कल्याण से सीधे जुड़ी हैं।

खिलाड़ियों के दमदार प्रदर्शन ने उत्तराखंड का मान बढ़ाया है। 101 पदक जीतकर उत्तराखंड ने इतिहास रच दिया है। इससे पहले कभी उत्तराखंड पदकों के शतक तक नहीं पहुंचा था। निश्चित तौर पर यह उत्तराखंड के खेलभूमि बनने की तरफ ऊंची छलांग है। हम खेल विकास के लिए प्रतिबद्ध हैं। मैं देशभर से आए खिलाड़ियों और अन्य मेहमानों के प्रति भी आभार प्रकट करता हूं, जिन्होंने इस आयोजन को सफल बनाने में योगदान किया है।

– पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री।

आईआईपी को बायो फ्यूल बनाने के लिए भेजा ढाई सौ लीटर रि-यूज्ड तेल

राष्ट्रीय खेलों के लिए शुरू की गई हरित पहल खूब फल फूल रही है। इस क्रम में खाद्य सुरक्षा विभाग ने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोलियम (आईआईपी) को ढाई सौ लीटर तेल बायो फ्यूल बनाने के लिए भेजा है। यह तेल तीन बार इस्तेमाल किया जा चुका था। खाद्य सुरक्षा विभाग ने विभिन्न स्थानों से इसे कब्जे में लेकर आईआईपी को भेजा है।

राष्ट्रीय खेलों की थीम पहली बार ग्रीन गेम्स की रखी गई है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर कई नई पहल राष्ट्रीय खेलों के दौरान की गई हैं। खाद्य सुरक्षा विभाग भी सरकार की हरित पहल को सफल बनाने में योगदान कर रहा है। खाद्य सुरक्षा विभाग के उपायुक्त (मुख्यालय) जीसी कंडवाल के अनुसार-राष्ट्रीय खेलों के दौरान तीन सचल खाद्य विश्लेषण शाला के माध्यम से खाद्य पदार्थों की जांच की गई। यह जांच उन जगहों पर की गई, जहां पर राष्ट्रीय खेलों की प्रतियोगिताएं आयोजित की जा रही थीं। खिलाड़ियों के लिए बनने वाले खाद्य पदार्थों के अलावा संबंधित शहरों के बाजारों में भी कई दुकानों को चेक किया गया।

कंडवाल के मुताबिक-खाद्य पदार्थों की चेकिंग के दौरान कई जगहों से ऐसा खाने का तेल बरामद किया गया, जो कि तीन बार इस्तेमाल हो चुका था। खाने का तेल तीन बार से ज्यादा इस्तेमाल करने से उसके कुल पोलर कंपाउंड बढ़ जाते हैं, जो कि स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होते हैं। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय खेलों में हरित पहल के तहत यह तय किया गया था कि ऐसा तेल आईआईपी को दिया जाएगा, ताकि उसका बायो फ्यूल या बायो डीजल बनाने में इस्तेमाल हो सके। इस क्रम में ढाई सौ लीटर इस्तेमाल किया गया तेल जब्त कर आईआईपी को भेज दिया गया है।

राष्ट्रीय खेलों के दौरान हरित पहल के अंतर्गत कई कदम उठाए गए। सभी विभागों, संगठनों और लोगों का इस पहल में सहयोग मिला है। आने वाले दिनों में भी यह क्रम जारी रखने की आवश्यकता है, ताकि दूरगामी सुखद परिणाम देखने को मिले।
– पुष्कर सिंह धामी
मुख्यमंत्री उत्तराखंड सरकार।

वनाग्नि पर नियंत्रण के लिए जन भागीदारी सुनिश्चित करेंः सीएम

राज्य में वनाग्नि की चुनौतियों से समाधान के लिए वनाग्नि की पिछली घटनाओं में आई समस्याओं का ध्यान में रखते हुए आगे की योजनाएं बनाई जाए। वनाग्नि पर नियंत्रण के लिए जन भागीदारी सुनिश्चित की जाए। सभी विभागों के साथ ही सामाजिक संगठनों, गैर सरकारी संगठनों, महिला मंगल दलों, युवक मंगल दलों और वन पंचायतों का भी वनाग्नि की घटनाओं को रोकने में सहयोग लिया जाए। वनों में आग लगाने वाले असामाजिक तत्वों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाए। ये निर्देश मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आई.टी.पार्क देहरादून स्थित राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण में वनाग्नि नियंत्रण के लिए राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, गृह मंत्रालय भारत सरकार तथा उत्तराखण्ड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा आयोजित मॉक ड्रिल के दौरान अधिकारियों को दिये।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वनाग्नि पर प्रभावी नियंत्रण के लिए सभी विभागों को एकजुटता से कार्य करना होगा। उन्होंने अपर मुख्य सचिव आर.के. सुधांशु को निर्देश दिये कि वनाग्नि की घटनाओं को रोकने के लिए सभी विभागों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए पत्र जारी किया जाए। वनाग्नि को रोकने के लिए शीतलाखेत मॉडल के साथ ही चाल-खाल, तलैया और अन्य प्रभावी उपायों पर कार्य किये जाएं। इसके लिए जलागम विभाग का भी सहयोग लिया जाए। आधुनिक तकनीक के प्रयोग पर अधिक बल दिया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि वनाग्नि से राज्य को अनेक चुनौतियों से जूझना पड़ता है। वन संपदा के नुकसान के साथ ही पशु हानि भी होती है। उन्होंने कहा कि वनाग्नि पर नियंत्रण के लिए व्यापक स्तर पर नियमित जागरूकता अभियान चलाये जाए। नवाचारों पर विशेष ध्यान दिया जाए। उन्होंने सभी प्रदेशवासियों से भी अपील की है कि वनाग्नि की घटनाओं को रोकने में सक्रिय भागीदारी निभाएं।

वनाग्नि पर नियंत्रण के लिए संयुक्त रूप से आयोजित इस मॉक ड्रिल में 06 जनपदों के 16 स्थान चिन्हित किये गये। वनाग्नि के कारण विभिन्न परिस्थितियों का किस तरह समाधान करना है, रिस्पांस टाइम कम करने, वनाग्नि को रोकने के लिए जन सहयोग और अन्य प्रभावी उपायों पर मॉक ड्रिल की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस तरह की मॉक ड्रिल से जरूर वनाग्नि के समय उस पर नियंत्रण पाने में मदद मिलेगी। केन्द्रीय गृह मंत्रालय द्वारा वनाग्नि को रोकने के लिए राज्य को आधुनिक उपकरण देने पर भी मुख्यमंत्री ने आभार व्यक्त किया।

इस अवसर पर राज्य सलाहकार समिति आपदा प्रबंधन विभाग के उपाध्यक्ष विनय कुमार रुहेला, प्रमुख सचिव आरके सुधांशु, सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन, आईजी फायर मुख्तार मोहसिन, एनडीएमए के सीनियर कंसल्टेंट आदित्य कुमार, अपर सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास आनंद स्वरूप, अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी क्रियान्वयन डीआईजी राजकुमार नेगी, अपर सचिव विनीत कुमार, अपर प्रमुख वन संरक्षक निशांत वर्मा, संयुक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी मोहम्मद ओबेदुल्लाह अंसारी और वर्चुअल माध्यम से संबंधित जिलाधिकारी उपस्थित थे।

विभिन्न विस क्षेत्रों में विभिन्न योजनाओं के लिये सीएम ने प्रदान की वित्तीय स्वीकृति

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री घोषणा के अंतर्गत विधानसभा क्षेत्र पिथौरागढ़ के अंतर्गत “डोलमा से बिर्थी तराली तक सम्पर्क मार्ग का कार्य किए जाने की घोषणा हेतु ₹ 65.10 लाख (रू० पैसठ लाख दस हजार मात्र) की धनराशि की स्वीकृति प्रदान करते हुए ₹ 39.06 लाख (उन्चालीस लाख छः हजार) की धनराशि स्वीकृत किए है। विधानसभा क्षेत्र धारचूला के अंतर्गत ’ग्राम सभा निर्ताेली में शिव मंदिर मेला स्थल का विकास किए जाने की घोषणा के अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2024-25 में ₹ 59.64 लाख (रू० उनसठ लाख चौसठ हजार मात्र) की धनराशि की स्वीकृति प्रदान करते हुए ₹ 35.784 लाख (रू० पैंतीस लाख अठहत्तर हजार चार सौ मात्र) की धनराशि स्वीकृत प्रदान की गई है।

मुख्यमंत्री ने विधानसभा क्षेत्र पिथौरागढ़ में,“निर्ताेली लोक निर्माण विभाग गेस्ट हाउस से बुरानी तक सी०सी० मार्ग का कार्य किए जाने के अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2024-25 में ₹ 66.82 लाख (रू० छियासठ लाख बयासी हजार मात्र) की धनराशि की स्वीकृति प्रदान करते हुए ₹ 40.092 लाख (चालीस लाख नौ हजार दो सौ मात्र) की धनराशि स्वीकृत प्रदान की है।

मुख्यमंत्री ने कुमाऊँ विश्वविद्यालय में कार्यरत शिक्षक/शिक्षणेत्तर कर्मचारियों के सामान्य भविष्य निधि (जी.पी.एफ) खातों में जमा धनराशि पर अर्जित ब्याज हेतु ₹ 6,40,19,014.00 (रू० छः करोड़ चालीस लाख उन्नीस हजार चौदह मात्र) को चालू वित्तीय वर्ष 2024-25 में स्वीकृति प्रदान की है।

मुख्यमंत्री ने भवन रहित शहरी स्थानीय निकायों के कार्यालय भवन निर्माण की योजना के अन्तर्गत जनपद उधमसिंहनगर की नगर पंचायत शक्तिगढ एवं लालपुर को उनके कार्यालय भवन निर्माण हेतु वित्तीय एवं प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान करते हुए चालू वित्तीय वर्ष 2024-25 में मुख्यमंत्री द्वारा उक्त योजना हेतु ₹ 195.64 लाख (रू० एक करोड पिचान्बबे लाख चौसठ हजार मात्र) की धनराशि की स्वीकृति प्रदान करते हुए ₹ 117.38 लाख (रू० एक करोड़ सत्रह लाख अड़तीस हजार मात्र) की धनराशि प्रदान की है।

पीएम की प्रस्तावित यात्रा को लेकर तैयारियां तेज

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आगामी 27 फरवरी को शीतकालीन यात्रा पर उत्तरकाशी जिले के हर्षिल-मुखवा क्षेत्र के भ्रमण पर आ सकते हैं। प्रधानमंत्री की प्रस्तावित यात्रा को लेकर शासन-प्रशासन के स्तर पर तैयारियां तेज कर दी गई हैं। इस सिलसिले में मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने अधिकारियों की बैठक लेकर प्रस्तावित कार्यक्रम की रूपरेखा एवं तैयारियों की समीक्षा की। मुख्य सचिव ने अधिकारियों के निर्देश दिए कि इस कार्यक्रम को लेकर संबंधित विभाग अपनी तैयारियों का समय रहते पूरा करें और सौंपी गई जिम्मेदारियों को त्रुटिरहित ढंग से संपादित कर सभी व्यवस्थाओं का तय समय के भीतर चाक-चौबंद कर लें।

मुख्य सचिव रतूड़ी ने कहा कि प्रधानमंत्री का यह भ्रमण उत्तराखंड में शीतकालीन पर्यटन को प्रोत्साहित करने का अमूल्य अवसर प्रदान करेगा, लिहाजा इस दौरान आयोजित होने वाले कार्यक्रमों में राज्य के शीतकालीन पर्यटन की संभावनाओं व क्षमताओं को उजागर करने पर विशेष ध्यान दिया जाय।

मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि प्रधानमंत्री के हर्षिल-मुखवा में प्रस्तावित कार्यक्रमों के दौरान तय प्रोटोकॉल और सुरक्षा प्रबंधों को ध्यान में रख सभी तैयारियां समय से सुनिश्चित की जाय। मुख्य सचिव ने कहा कि अधिकारियों के साथ वह स्वयं हर्षिल-मुखवा जाकर तैयारियों का स्थलीय निरीक्षण करेंगी और सभी व्यवस्थाओं को परखेंगी। मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि प्रधानमंत्री द्वारा मुखवा मंदिर में दर्शन-पूजन सहित हर्षिल में जनसभा के प्रस्तावित कार्यक्रम की उपयुक्त व्यवस्था की जाय और पार्किंग व परिवहन व्यवस्था को लेकर भी कारगर इंतजाम किए जाय। उन्होंने सचिव पर्यटन को हर्षिल में उत्तराखंड के शीतकालीन पर्यटन स्थलों की प्रदर्शनी आयोजित करने के निर्देश देने के साथ ही कहा कि इस अवसर पर राज्य के स्थानीय उत्पादों पर आधारित प्रदर्शनी भी लगाई जाय।

बैठक में सचिव विनोद कुमार सुमन ने प्रस्तावित कार्यक्रमों एवं अपेक्षित व्यवस्थाओं के बारे में प्रस्तुतिकरण देते हुए कहा कि सभी संबंधित विभाग तुरंत सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर लें।

इस अवसर पर जिलाधिकारी उत्तरकाशी डॉ. मेहरबान सिंह बिष्ट ने बताया कि प्रस्तावित कार्यक्रम को लेकर जिले में सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जा रही हैं। हर्षिल में उद्यान विभाग के परिसर में प्रधानमंत्री के कार्यक्रम के लिए समतलीकरण का कार्य कराया जा चुका है। मुखवा में मंदिर व गांव के भवनों का सौंदर्यीकरण करने साथ ही मंदिर के लिए सुविधाजनक व सुरक्षित रास्ते का निर्माण किया गया है। हर्षिल-मुखवा क्षेत्र की सड़कों को दुरस्त किया जा रहा है। हर्षिल में बगोरी हेलीपैड तक सड़क का निर्माण कार्य अंतिम चरण में है और निकटवर्ती अन्य हेलीपैड भी चाक-चौबंद किए जा रहे हैं। हर्षिल व मुखवा में पार्किंग निर्माण करने के साथ ही गंगोत्री राजमार्ग पर भी पार्किग के इंतजाम किए जा रहे हैं। शीतकाल में पानी जमने के कारण पेयजल लाईनों के क्षतिग्रस्त होने की समस्या के समाधान के लिए इस क्षेत्र में लगभाग पांच कि.मी. लंबाई के एचडीपीई पाईप बिछाकर पेयजल आपूर्ति की व्यवस्था की गई है। इस क्षेत्र में बिजली की लाईनों की मरम्मत व पोल बदलने के साथ ही सोलर हाईमास्ट लाईट्स एवं स्ट्रीट लाई्टस स्थापित की गई हैं। इस क्षेत्र में तीन नये स्मार्ट टॉयलेट्स बनाए जा रहे हैं। जिलाधिकारी ने कार्यक्रम से जुड़ी अन्य तमाम व्यवस्थाओं का ब्यौरा प्रस्तुत करते हुए बताया कि सभी तैयारियां अंतिम चरण में हैं।

बैठक में पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ, प्रमुख सचिव आर के सुधांशु, सचिव शैलेश बगौली सहित शासन एवं पुलिस विभाग, जिला प्रशासन के अधिकारियो ने भी प्रतिभाग किया।