गुणवत्ताहीन निर्माणधीन आईटीआई भवनों के मामले में यूपी राजकीय निर्माण निगम को नोटिस

मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम (यूपीआरएनएन) को आधी-अधूरी एवं गुणवत्ताहीन निर्माणधीन आईटीआई भवनों के मामले में तत्काल नोटिस जारी करने के निर्देश दिए हैं। सीएस ने यूपीआरएनएन को आधी-अधूरी एवं गुणवत्ताहीन निर्माण कार्यों के कारण भुगतान वापसी हेतु नोटिस जारी करने तथा नोटिस का अनुपालन नही होने की दशा में उनके विरूद्ध प्राथिमिकी रिपोर्ट (एफआईआर) दर्ज करने के सख्त निर्देश दिए हैं।

इसके साथ ही मुख्य सचिव ने उत्तराखण्ड पेयजल निगम को आईटीआई सुरक्षा निर्माण सहित सभी निर्माण कार्याे में दीर्घ अवधि के विजन तथा हॉलिस्टिक अप्रोच के साथ कार्य करने की कड़ी हिदायत दी है। उन्होंने आईटीआई के सुरक्षा निर्माण कार्याे के साथ ही ड्रेनेज सिस्टम तथा बाउण्ड्री वॉल पर भी कार्य करने के निर्देश दिए हैं।

सचिवालय में आईटीआई नारसन (हरिद्वार) में सुरक्षा निर्माण कार्याे के सम्बन्ध में व्यय वित्त समिति (ईएफसी) की बैठक की अध्यक्षता के दौरान मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने 187.30 लाख रूपये के प्रोजेक्ट लागत पर अनुमोदन देते हुए उत्तराखण्ड पेयजल निगम को निर्माण कार्यों में गुणवत्ता एवं समयबद्धता पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए हैं। आईटीआई में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं की सुरक्षा के दृष्टिगत मुख्य सचिव रतूड़ी ने इस प्रोजेक्ट की 10 दिन के भीतर सिंचाई विभाग से टेक्नीकल परीक्षण करवाने के बाद निर्माण कार्य आरम्भ करवाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने अगले मानसून से पहले निर्माण कार्यों को पूरा करने तथा आईटीआई कैम्पस की सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

बैठक में अपर सचिव सी रविशंकर सहित पेयजल निगम एवं संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।

मुख्यमंत्री धामी से राज्य भर से आए ब्लॉक प्रमुखों एवं प्रधान संगठन के पदाधिकारियों ने की मुलाकात

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से सचिवालय में राज्य भर से आए ब्लॉक प्रमुखों एवं प्रधान संगठन के विभिन्न पदाधिकारियों ने मुलाकात की। उन्होंने मुख्यमंत्री से जिला पंचायतों में अध्यक्षों को ही प्रशासक बनाये जाने की भांति ब्लाक प्रमुखों एवं ग्राम प्रधानों को भी ब्लाकों एवं ग्राम सभाओं में प्रशासक के रूप में नामित किये जाने का अनुरोध किया। मुख्यमंत्री ने इस सम्बन्ध में आवश्यक कार्यवाही का आश्वासन दिया है।

इस अवसर पर इंदर रावत – ब्लॉक प्रमुख रामनगर, हरीश बिष्ट – ब्लॉक प्रमुख भीमताल, दर्शन दानु – ब्लॉक प्रमुख देवायल, महेन्द्र राणा – ब्लॉक प्रमुख पौड़ी, भास्कर सम्बल – प्रदेश ग्राम प्रधान संघ अध्यक्ष रवि कन्याल ब्लॉक प्रमुख कोटाबाग, दीपक भण्डारी ब्लॉक प्रमुख, गोविंद दानु ब्लॉक प्रमुख कपकोट, मठुरसिंह ब्लॉक प्रमुख कालसी, रणजीतसिंह ब्लॉक प्रमुख खटीमा आदि उपस्थित थे।

सीएम ने 61 व्यक्तियों को वितरित की ऑनलाइन वृद्धावस्था पेंशन

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सचिवालय में सितंबर-2024 से अक्टूबर-2024 के मध्य प्रदेश में 60 वर्ष की आयु पूर्ण करने वाले कुल 61 व्यक्तियों को ऑनलाइन माध्यम से वृद्धावस्था पेंशन का वितरण किया। मुख्यमंत्री के निर्देश पर राज्य में पहली बार 60 वर्ष की आयु पूर्ण करते ही राज्य के व्यक्तियों को वृद्धावस्था पेंशन स्वीकृत किए जाने की कार्यवाही प्रारम्भ की गई है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशों पर समाज कल्याण विभाग के पेंशन पोर्टल पर अब 59 वर्ष 6 माह की आयु पूर्ण करने के पश्चात भी वृद्धावस्था पेंशन हेतु आवेदन प्राप्त किए जा सकेंगे। आवेदक का फॉर्म स्वीकृति पश्चात जिस माह आवेदक 60 वर्ष की आयु पूर्ण करेंगे, उस माह के अंत से उनकी वृद्धावस्था पेंशन प्रारंभ कर दी जाएगी। इससे बुजुर्गों को समय से वृद्धावस्था पेंशन का लाभ मिल सकेगा।

मुख्यमंत्र ने कहा कि वृद्धावस्था पेंशन स्वीकृत किए जाने की व्यवस्था का सलीकरण किये जाने से अब हमारे वृद्धजनों को समय से वृद्धावस्था पेंशन का लाभ मिल सकेगा। उन्होंने कहा राज्य सरकार ने वृद्धावस्था पेंशन को 1200 से बढ़ाकर 1500 किया है। अब पति पत्नी दोनों वृद्ध दंपति को पेंशन का लाभ दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि हमारा उदेश्य समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक विकास और सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाना है, जिसके लिए लगातार प्रयास हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि राज्य के सभी वृद्धजन उनके अभिभावक के समान है, जिनकी सेवा में वे हमेशा तत्पर रहेंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बाबा केदारनाथ की भूमि से 21वीं सदी का तीसरा दशक उत्तराखंड का दशक बताया था। जिसपर राज्य सरकार निरंतर कार्य कर रही है। उत्तराखंड विकास के पथ पर निरंतर आगे बढ़ रहा है। हर क्षेत्र में राज्य सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर रहा है। नीति आयोग द्वारा जारी सतत विकास के लक्ष्यों की सूची में उत्तराखंड प्रथम स्थान में आया। राज्य में बेरोजगारी दर घटी है। ईज ऑफ लिविंग में भी राज्य ने बेहतर प्रदर्शन किया है। उन्होंने कहा बीते 3 सालों में लगभग 19000 युवाओं को सरकारी विभागों में नियुक्ति प्रदान की गई है। राज्य में रिक्त पड़े सभी पदों को तेजी से भरे जाने के प्रयास निरन्तर जारी है।

इस अवसर पर सचिव समाज कल्याण नीरज खैरवाल ने बताया कि दिनांक 25-सितंबर-2024 से 15 अक्टूबर-2024 के मध्य विभाग द्वारा जनपदों में 60 वर्ष की आयु पूर्ण करने वाले व्यक्तियों के चिन्हीकरण हेतु राज्य के समस्त जनपदों में वृहद अभियान संचालित किया गया। विभाग द्वारा ऐसे 12 हजार व्यक्तियों को अभियान के दौरान चिन्हित किया गया। अभियान के अंतर्गत ऐसे व्यक्तियों का डाटा एकत्रित किया गया जो दिनांक 01-अक्टूबर-2024 को 60 वर्ष की आयु पूर्ण कर चुके हैं एवं वृद्धावस्था पेंशन हेतु पात्र हैं। इसके अतिरिक्त ऐसे व्यक्तियों का डाटा भी एकत्रित किया गया जो 59 वर्ष 6 माह की आयु पूर्ण कर चुके हैं और वृद्धावस्था पेंशन हेतु पात्रता रखते हैं।

इस अवसर पर अपर सचिव गौरव कुमार, निदेशक एवं आयुक्त दिव्यांगजन प्रकाश चंद्र सहित अन्य लोग उपस्थित थे।

विश्व दिव्यांग दिवसः सीएम ने दक्ष दिव्यांगजनों को प्रदान किये राज्य स्तरीय दक्षता पुरस्कार

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विश्व दिव्यांग दिवस के अवसर पर सुभाष रोड स्थित वैडिंग प्वाइंट में आयोजित दिव्यांग राज्य स्तरीय दक्षता पुरस्कार वितरण कार्यक्रम में 89 दक्ष दिव्यांग कर्मचारियों, खिलाड़ियों एवं स्वतः रोजगार रत दिव्यांगजनों व उनके सेवायोजकों को राज्य स्तरीय दक्षता पुरस्कार प्रदान कर सम्मानित किया, जिसमें 25 दक्ष दिव्यांग कर्मचारी, 32 दक्ष दिव्यांग खिलाड़ी, 30 स्वतः रोजगार रत दिव्यांगजन एंव 2 दिव्यांगजनों के सेवायोजक सम्मिलित थे।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने आगामी विश्व दिव्यांग दिवस तक सभी दिव्यांगजनों को उनकी आवश्यकतानुसार सभी जिलों में स्पेशल कैंप लगाकर नि शुल्क उपकरण उपलब्ध कराए जाने एवं दिव्यांग विद्यार्थियों को निःशुल्क ऑनलाइन आई.ए.एस कोचिंग की व्यवस्था कराए जाने की घोषणा की।

मुख्यमंत्री ने विश्व दिव्यांग दिवस के अवसर पर पुरस्कृत होने वाले सभी उत्कृष्ट एवं दक्ष दिव्यांगजनों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि सकारात्मक ऊर्जा और उत्साह का ये माहौल हम सभी के लिए किसी भी प्रेरणा से कम नहीं हैं। उन्होंने कहा कि हम आज प्रदेश के उन दिव्यांग नायकों को सम्मानित कर रहे हैं, जिन्होंने अपने आत्मविश्वास, धैर्य और साहस से न केवल अपना जीवन बदला है बल्कि दिव्यांगों के प्रति समाज की सोच और दृष्टिकोण को भी बदलने का काम किया है। सभी दिव्यांगजनों ने अपनी शारीरिक परिस्थिति को एक चुनौती के रूप में लेकर न केवल अपने सपनों को साकार किया है, बल्कि समाज को प्रेरित करने का कार्य भी किया है।

दिव्यांगजनों के साहस व समर्पण की सराहना करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि आज सरकारी दफ्तरों से लेकर खेल के मैदान तक प्रत्येक जगह हमारे दिव्यांग भाई-बहन अपनी क्षमता का लोहा मनवा रहे हैं। यही नहीं सभी ने अपनी लगन और मेहनत के बल पर इस कविता की ये पंक्ति सार्थक की है कि…… ‘‘लहरों से डर कर नौका पार नहीं होती, कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।’’

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आज देश में दिव्यांगजनों के लिए अनेकों कार्य किए जा रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने देश में ‘दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016’ को लागू किया, जिसमें दिव्यांगता के प्रकारों को 7 से बढ़ाकर 21 किया गया। आज इस ऐतिहासिक परिवर्तन से दिव्यांगजनों के दैनिक जीवन में सकारात्मक परिणाम देखने को मिल रहे हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार भी प्रदेश में दिव्यांगजनों के लिए प्रत्येक स्तर पर सुविधाओं को बढ़ाने का काम कर रही है। आज जब भी हम कोई अस्पताल, बस अड्डा जैसी सार्वजनिक इमारत बनाते हैं तो उसमें इसका विशेष ध्यान रखा जाता है कि हमारे दिव्यांग भाई-बहनों को आने जाने में किसी भी प्रकार की कोई असुविधा ना हो।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा दिव्यांगजनों को अलग-अलग कैटेगरी में विभिन्न प्रकार की पांच पेंशने दी जा रही है, जिनके माध्यम से प्रदेश के करीब एक लाख दिव्यांगजन लाभान्वित हो रहे हैं। वर्तमान में प्रदेश में दिव्यांगजनों को प्रतिमाह 1500 रुपये पेंशन तथा जन्म से दिव्यांग बच्चों के माता-पिता को 18 वर्ष तक प्रतिमाह 700 रुपए का भरण-पोषण अनुदान दिया जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि कार्य करने के दौरान दुर्घटनावश दिव्यांग हो जाने पर 1200 रूपए प्रतिमाह की पेंशन दी जा रही है। 21 वर्ष की आयु होने के बावजूद 4 फीट से कम लंबाई वाले व्यक्तियों को भी 1200 रूपए प्रतिमाह पेंशन दी जा रही है। दिव्यांगजनों को विशिष्ट पहचान पत्र जारी कर सरकारी कल्याणकारी योजनाओं की पहुँच सुनिश्चित की जा रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में दिव्यांगजन से विवाह करने पर 25 हजार रुपए की धनराशि दिव्यांग दंपत्ति को प्रोत्साहन स्वरूप प्रदान की जा रही है। यही नहीं कक्षा एक से कक्षा आठ तक के दिव्यांग बच्चों अथवा दिव्यांग अभिभावकों के बच्चों को भी छात्रवृत्ति प्रदान की जा रही है। 40 प्रतिशत से अधिक दिव्यांगता वाले दिव्यांगजनों को कृत्रिम अंग या उपकरण खरीदने के लिए 7 हजार रुपए की धनराशि भी एकमुश्त प्रदान की जा रही है। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार दिव्यांगजनों को आर्थिक लाभ देने के साथ ही उन्हें आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने की दिशा में भी प्राथमिकता के साथ कार्य कर रही है। दिव्यांगजनों के स्वरोजगार हेतु जनपद टिहरी, नैनीताल व पिथौरागढ़ में प्रशिक्षण केंद्र संचालित किए जा रहे हैं, जिसमें दिव्यांगजनों को निःशुल्क प्रिंटिंग प्रेस, सिलाई कटाई आदि का प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि दिव्यांगों को बहुआयामी सेवायें प्रदान किये जाने हेतु प्रत्येक जनपद में जिला दिव्यांग पुनर्वास केंद्रों की भी स्थापना की गयी है। दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016 के अंतर्गत राज्य में ‘‘दिव्यांग सलाहकार बोर्ड’’ का गठन भी किया गया है। दिव्यांगजनों के अधिकारों के संरक्षण और संचालित योजनाओं के क्रियान्वयन हेतु राज्य में न्यायालय आयुक्त की स्थापना की गयी है, साथ ही प्राप्त शिकायतों के निस्तारण हेतु ऑनलाइन सुनवाई की सुविधा भी प्रारम्भ की गयी है। राज्य में मानसिक रूप से दिव्यांग महिलाओं हेतु देहरादून में एक विशेष ‘‘नारी निकेतन’’ संचालित किया जा रहा है। इसी प्रकार हरबर्टपुर क्षेत्र में मानसिक रूप से दिव्यांग महिलाओं को सबल बनाये जाने हेतु ‘‘हाफ वे होम’’ संचालित किया जा रहा है। जहां एक ओर स्वास्थ्य विभाग द्वारा देहरादून में ‘मानसिक स्वास्थ्य संस्थान’ संचालित किया जा रहा है वहीं ऊधमसिंहनगर में ‘विशेष मानसिक पुनर्वास गृह’ का निर्माण भी किया जा रहा है।

इस अवसर पर विधायक खजान दास, उमेश शर्मा काऊ, सचिव समाज कल्याण नीरज खैरवाल, निदेशक एवं आयुक्त दिव्यांगजन प्रकाश चंद्र, अपर सचिव गौरव कुमार सहित बडी संख्या में अन्य लोग मौजूद रहे।

गौ सदनों के संचालन एवं रखरखाव की निरंतर मॉनिटरिंग की जाएगीः मुख्य सचिव

उत्तराखण्ड में निराश्रित गोवंशीय पशुओं को गोद लेने वालों को दिया जाने वाले मानदेय देशभर के अन्य राज्यों की अपेक्षा सर्वाधिक है। यह प्रतिदिन 80 रुपये प्रति पशु है। इसके बावजूद आमजन को सड़कों पर निराश्रित गौवंशीय पशुओं की समस्या से पूरी तरह से निजात दिलवाने को लेकर मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने सचिव शहरी विकास को नगर पालिकाओं द्वारा प्रत्येक माह शहरी क्षेत्रों में सड़कों में पाए जाने वाले निराश्रित गौवंशीय पशुओं की संख्या की समीक्षा, मॉनिटरिंग एवं उन्हें गौसदनों में भेजने की पुख्ता व्यवस्था करने के निर्देश दिए हैं।

सचिवालय में आयोजित उत्तराखण्ड एनिमल वेल्फेयर बोर्ड की गौसदनों के निर्माण से सम्बन्धित बैठक में सीएस राधा रतूड़ी ने शहरी विकास विभाग द्वारा शहरी क्षेत्रों स्थापित किए जाने वाले 36 गौसदनों के निर्माण कार्य को जल्द पूरा करने के निर्देश दिए हैं। शहरी विकास विभाग द्वारा राज्य के 13 जिलों में 36 गौसदनों हेतु भूमि चिन्हित कर ली गई है तथा 13 गौसदनों का निर्माण कार्य जारी है। मुख्य सचिव ने पंचायती राज विभाग को राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में स्थापित किए जाने वाले 26 गौसदनों के निर्माण कार्य को भी शीघ्र आरम्भ करने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए विभाग को मिसिंग लिंक के माध्यम से 10 करोड़ की धनराशि पहले ही जारी की जा चुकी है। इस सम्बन्ध में पंचायती राज विभाग द्वारा भूमि चिन्हीकरण का कार्य पूरा किया जा चुका है।

बेसहारा गौवंशीय पशुओं की समस्या के दीर्घकालीन समाधान में आधुनिक तकनीकी व आईटी के उपयोग पर बल देते हुए मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने राज्य के सभी गौवंशीय पशुओं की अनिवार्य जियोटैगिंग के साथ ही इस सम्बन्ध जल्द लॉन्च होने वाले ऐप एवं डैशबोर्ड में प्रत्येक गौवंशीय पशु की आयु, चिकित्सा व अन्य जानकारी से सम्बन्धित डाटा एनालिसिस के निर्देश दिए हैं। उन्होंने निराश्रित पशुओं की देखभाल में गौसेवक योजना को महत्वपूर्ण बताया तथा इसके अधिकाधिक विस्तार के निर्देश दिए हैं।

निर्माणधीन एवं पहले से ही संचालित गौसदनों के संचालन एवं रखरखाव की निरन्तर मॉनिटरिंग की सख्त हिदायत देते हुए मुख्य सचिव रतूड़ी ने गौसदनों में गौवंश हेतु चारा, भूसा, प्रकाश, चिकित्सा, सुरक्षा एवं दवाईयों की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित करने निर्देश दिए हैं। उन्होंने गौ सदनों के नियमित निरीक्षण के भी निर्देश दिए हैं।

उत्तराखण्ड पशु कल्याण बोर्ड द्वारा जानकारी दी गई है कि राज्य में वर्तमान में निराश्रित गोवंशीय पशुओं की संख्या 20887 है।

इस अवसर पर सचिव डा0 बीवीआरसी पुरुषोत्तम, नितेश झा, चंद्रेश कुमार, वी षणमुगम सहित संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।

देहरादून में 12 से 15 दिसंबर के बीच होगा नेशनल आरोग्य एक्सपोः 2024

देहरादून में 12 से 15 दिसंबर के बीच होने जा रहे 10वें विश्व आयुर्वेद कांग्रेस और आरोग्य एक्सपो- 2024 में 40 से अधिक देशों के विशेषज्ञों सहित छह हजार से अधिक डेलीगेट्स शामिल होंगे। आयोजन में आयुर्वेद, योग, यूनानी, सिद्धा और होम्योपैथी जैसी परंपरागत चिकित्सा पद्धतियों को लोकप्रिय बनाने पर विचार विमर्श किया जाएगा।

हिमालय और गंगा दृ यमुना जैसी सदानीरा नदियों के चलते उत्तराखंड हमेशा से योग साधकों के साथ ही आयुर्वेद व अन्य परंपरागत चिकित्सा पद़धतियों के शोधार्थियों के लिए अहम पड़ाव रहा है। अब इसी क्रम में उत्तराखंड में 12 से 15 दिसंबर के बीच वर्ल्ड आयुर्वेद फाउंडेशन की ओर से ‘10वां विश्व आयुर्वेद कांग्रेस और आरोग्य एक्सपो- 2024’ का आयोजन किया जा रहा है। इस आयोजन को 40 देशों के 20 अंतराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त स्पीकर के साथ ही विभिन्न सत्रों में 150 से अधिक वक्ता संबोधित करेंगे। आयोजन में छह हजार से अधिक डेलीगेट्स के सामने परंपरागत चिकित्सा पद्धतियों पर आधारित 900 से अधिक पेपर प्रस्तुत किए जाएंगे। इसके साथ ही आयुर्वेद, यूनानी, सिद्धा और होम्योपैथी में निवेश और व्यापार को बढ़ावा देने के लिए, आयुष ड्रग्स निर्माता के साथ ही बॉयर सेलर मीट का भी आयोजन किया जाएगा। अपर सचिव विजय जोगदंडे ने बताया कि आयुष मंत्रालय के सहयोग से देहरादून के परेड ग्राउंड में होने जा रहे इस एक्सपो में आम लोगों के लिए फ्री आयुष क्लीनिक का आयोजन किया जाएगा, जिसमें डायबिटीज, महिला और बाल स्वास्थ्य, वृद्धावस्था, न्यूरोलॉजी, आंकोलॉजी, प्रिवेंटिव कार्डियोलॉजी पर निशुल्क परामर्श दिया जाएगा। यह आयोजन एक तरह से आयुर्वेद, योग, यूनानी, सिद्धा और होम्योपैथी का समग्र मेला साबित होगा। जिसमें प्रदेशभर से तीन लाख लोगों के सामने होने की उम्मीद है।
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देहरादून में 10वां विश्व आयुर्वेद कांग्रेस और आरोग्य एक्सपो- 2024 का आयोजन किया जाना पूरे उत्तराखंड के लिए गौरव की बात है। इस आयोजन के जरिए, प्रदेश के आयुष और अन्य परंपरागत दवा निर्माताओं को खासकर लाभ होगा। साथ ही प्रदेश में परंपरागत चिकित्सा के जरिए भी जागरूकता पैदा होगी।
– पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री

सीएम ने पहली जौनसारी फीचर फिल्म “मैरै गांव की बाट“ का प्रोमो और पोस्टर लांच किया

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पहली जौनसारी फीचर फिल्म “मैरै गांव की बाट“ का प्रोमो और पोस्टर लांच किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि राज्य सरकार क्षेत्रीय संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए आंचलिक फिल्मों के निर्माण और प्रचार प्रसार में पूरा सहयोग दे रही है।

मुख्यमंत्री आवास में आयोजित समारोह में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि राज्य गठन के बाद अब पहली जौनसारी फीचर फिल्म बनकर तैयार हो गई है। इस फिल्म के जरिए जौनसार की समृद्ध संस्कृति, विरासत, रीति रिवाजों को देखने जानने का मौका मिलेगा। उन्होंने दर्शकों से फिल्म देखने की अपील करते हुए कहा कि, राज्य सरकार की तरफ से क्षेत्रीय बोली भाषाओं में बनी फिल्मों के निर्माण और प्रचार प्रसार में हर संभव मदद दी जा रही है। इसी क्रम में सरकार नई फिल्म नीति लेकर आई है। सरकार का मत है कि हर क्षेत्र में उत्तराखंड के स्थानीय लोग आगे बढ़ सकें। उन्होंने अभिनेता अभिनव चौहान को बधाई देते हुए कहा कि उनकी गढ़वाली फिल्म असगार भी सुपरहिट रही थी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार हनोल मंदिर का मास्टर प्लान बना रही है, इसके बाद से यह क्षेत्र तीर्थयात्रियों और पयर्टकों के लिए बड़ा डेस्टिनेशन बनकर उभर रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी को हनोल मंदिर की प्रतिकृति प्रदान की थी।

इस मौके पर कैबिनेट गणेश जोशी, पद्मश्री प्रेमचंद शर्मा, सचिव एचसी सेमवाल, कमिश्नर विनय शंकर पांडेय, अपर सचिव रणवीर सिंह चौहान, सूचना महानिदेशक बंशीधर तिवारी, अपर सचिव अतर सिंह, मुख्य अभिनेता अभिनव चौहान और अभिनेत्री प्रियंका, निर्माता आयुष गोयल, प्रस्तुत कर्ता केएस चौहान, रतन सिंह रावत, जयपाल सिंह, अनिल दत्त, श्रीचंद शर्मा, भारत चौहान, प्रीतम तोमर, अनिल सिंह तोमर, रविंद्र चौहान, मतवार सिंह रावत, सुमित्रा चौहान, रीना चौहान, आकृति जोशी मधुबाला सिंह, काजल शाह, लता राय, गुड्डी चौहान, ममता तोमर, साक्षी रावत आदि सहित अनेक लोग उपस्थित थे। फिल्म की परिकल्पना केएस चौहान ने की है, फिल्म के निर्देशक अनुज जोशी हैं।

पेयजल मामलों में शिकायत निवारण में सुधार को लेकर मुख्य सचिव गंभीर, आमजन में विशेषकर महिलाओ के फीडबैक को बताया महत्वपूर्ण

जल आपूर्ति योजनाओं के सोशल ऑडिट को प्रभावी बनाने तथा पेयजल योजनाओं में महिलाओं के फीडबैक को सर्वाधिक महत्वपूर्ण बताते हुए मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने सोशल ऑडिट में जल उपभोक्ताओं ¼consumers½ में विशेषकर स्थानीय महिलाओं को शामिल करने के सख्त निर्देश दिए हैं। पेयजल सम्बन्धित मामलों पर आम नागरिकों की संतुष्टि को शीर्ष प्राथमिकता देने की कड़ी हिदायत देते हुए मुख्य सचिव रतूड़ी ने इस क्षेत्र में बेस्ट प्रेक्टिसेज को अपनाने तथा शिकायत निवारण तंत्र को मजबूत करने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही सचिवालय में अर्द्ध शहरी क्षेत्रों में विश्व बैंक से सहायता प्राप्त उत्तराखण्ड जल आपूर्ति कार्यक्रम की 11वीं उच्चाधिकार प्राप्त समिति ¼HPC½की बैठक में सीएस राधा रतूड़ी ने पेयजल विभाग एवं अन्य सम्बन्धित अधिकारियों को जल जीवन मिशन के समयसीमा विस्तार हेतु भारत सरकार को तत्काल पत्र प्रेषित करने के निर्देश दिए हैं।

आमजन को अबाध जलापूर्ति के साथ ही पेयजल की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देने के निर्देश देते हुए मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने बेस्ट प्रैक्टिसेज के तहत यूजर फ्रेण्डली डैशबोर्ड पर स्टेट ऑफ आर्ट एमआईएस में सभी मुख्य परफोर्मेन्स इण्डिकेटर्स को दर्ज करने की हिदायत दी है। मुख्य सचिव ने सर्विस डिलीवरी में गैप आने पर सम्बन्धित इंजीनियरों को एसएमएस के माध्यम से ऑटो एलर्ट भेजकर शिकायत निवारण तंत्र को मजबूत करने तथा 48 घण्टे के भीतर शिकायतों के निवारण के भी निर्देश दिए हैं। मुख्य सचिव ने उपभोक्ताओं के संतुष्टिकरण के प्रतिशत को बढ़ाने के लिए निरन्तर कार्य करने के निर्देश दिए हैं।

बैठक में मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने उत्तराखण्ड जल आपूर्ति कार्यक्रम हेतु प्रोजेक्ट मेनेजमेंट कन्सलटेन्सी फर्म की समयसीमा विस्तार तथा इस कार्यक्रम के इन्वायरमेंट ऑडिट पर प्रशासनिक एवं वित्तीय का अनुमोदन दिया। इसके साथ ही उन्होंने उत्तराखण्ड जल आपूर्ति कार्यक्रम के लिए Implementations Completion and Result Report ¼ICR½ हेतु कन्सलटेन्सी सेवाओं की नियुक्ति हेतु प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति दी। सीएस ने उत्तराखण्ड पेयजल निगम की मोहोलिया तथा उमरूखुर्द जलापूर्ति योजनाओं के समयसीमा विस्तार पर भी अनुमोदन दिया।

बैठक में जानकारी दी गई कि 975 करोड़ रूपये लागत की विश्व बैंक से सहायता प्राप्त उत्तराखण्ड जल आपूर्ति कार्यक्रम में देहरादून, टिहरी, हरिद्वार, नैनीताल एवं उधमसिंह नगर के 22 अर्द्ध शहरी क्षेत्रों में 100 प्रतिशत वॉल्यूमीटरिंग के साथ 16 घण्टे अबाध प्रतिदिन जलापूर्ति की जा रही है। इसके तहत 106202 वाटर कनेक्शन के साथ बड़ी आबादी लाभान्वित हो रही है। उत्तराखण्ड जल आपूर्ति कार्यक्रम के तहत संचालित कुल 22 अर्द्ध शहरी योजनाओं में सभी योजनाएं पूर्ण हो चुकी हैं। योजना पर विश्व बैंक द्वारा भी संतुष्टि व्यक्त की गई है।

इस अवसर पर सचिव दिलीप जावलकर, शैलेश बगौली सहित सम्बन्धित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।

डाट काली मंदिर देहरादून में सीएम ने किया दिल्ली दून एक्सप्रेस वे का निरीक्षण

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने डाट काली मंदिर देहरादून में दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेस वे के निर्माण कार्यों का स्थलीय निरीक्षण किया। इस अवसर पर उन्होंने एक्सप्रेस वे के निर्माण में इस्तेमाल हो रही आधुनिक तकनीकों और पर्यावरणीय सुरक्षा उपायों के बारे में अधिकारियों से जानकारी प्राप्त की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि देहरादून में दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेस वे का कार्य अन्तिम चरण में हैं। इस एक्सप्रेसवे का तेजी से निर्माण होने पर मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी मोदी एवं केन्द्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी का आभार भी व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इस एक्सप्रेस वे के पूर्ण होने पर देहरादून से दिल्ली का सफर मात्र दो से ढ़ाई घण्टे में पूर्ण हो जायेगा। इससे जहां लोगों का आवागमन सरल होगा। चारधाम यात्रा के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को और सुगमता होगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड की आर्थिकी को बढ़ाने, पयर्टन और व्यावसायिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए भी यह प्रोजेक्ट सहायक सिद्ध होगा। इस प्रोजेक्ट में इकोलॉजी और इकोनॉमी का समन्वय करते हुए एशिया का सबसे बड़ा वाइल्डलाइफ कॉरिडोर भी बनाया गया है, जो वन्यजीवों की सुरक्षा एवं उनकी आवाजाही को मुक्त और पूर्ण तरीके से सुरक्षित बनाएगा।

50वां खलंगा मेला स्मारिका पुस्तक का सीएम ने किया विमोचन

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सागरताल नालापानी, देहरादून में बलभद्र खलंगा विकास समिति द्वारा आयोजित ‘50वाँ खलंगा मेला’ में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने खलंगा मेला आयोजन समिति को 5 लाख रुपए दिए जाने की घोषणा की। ‘50वाँ खलंगा मेला स्मारिका’ का विमोचन भी मुख्यमंत्री द्वारा किया गया।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने संबोधन में कहा कि खलंगा मेला पूर्वजों की वीरता और अदम्य साहस को स्मरण करने का अवसर है। उन्होंने महान सपूत सेनानायक कुंवर बलभद्र थापा और उनके वीर साथियों, वीरांगनाओं को भी नमन किया। उन्होंने कहा खलंगा की वीरभूमि में वर्ष 1814 के एंग्लो-गोरखा युद्ध में सेनानायक कुंवर बलभद्र थापा और उनके वीर सैनिकों ने मातृभूमि की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दी थी। इस युद्ध में कुंवर बलभद्र थापा और उनके वीर सैनिकों ने ब्रिटिश सैनिकों की विशाल सेना का सामना करते हुए अपनी वीरता और रणनीतिक कौशल से ब्रिटिश सेना को खदेड़ दिया था।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ये युद्ध हमारे वीर गोरखा योद्धाओं के अदम्य साहस और मातृभूमि के प्रति उनके असीम प्रेम का प्रतीक है, जो हमेशा हमें देशभक्ति की प्रेरणा देता रहेगा। खलंगा की गाथा हमारे वीर पूर्वजों के अप्रतिम साहस का एवं हमारी गौरवशाली विरासत का प्रतीक है। उन्होंने कहा ये मेला हमारी समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं को सहेजते हुए उसे अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का भी एक माध्यम है। हमारे देश की ऐतिहासिक धरोहरें हमारे गौरवमयी अतीत की पहचान होने के साथ हमारे संस्कृति रूपी वट वृक्ष की मजबूत जड़ें भी हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हमारी संस्कृति को मजबूत करने का कार्य पूरे देश में किया जा रहा है। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में विकास के साथ विरासत को भी आगे बढ़ाया जा रहा है। खलंगा युद्ध स्मारक को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के संरक्षण में रखना, इसका बड़ा उदाहरण है। उन्होंने कहा राज्य सरकार गोरखा समाज के उत्थान के प्रति पूर्णतः प्रतिबद्ध है और उनके विकास व कल्याण के लिए निरंतर प्रयासरत है। निश्चित ही ऐसे आयोजनों से नई पीढ़ी को इन गोरखा समाज की परंपराओं को संजोए रखने तथा अपने पूर्वजों की वीरता और बलिदान को याद रखने में सहायक सिद्ध होंगे।

इस अवसर पर विधायक उमेश शर्मा काऊ, बलभद्र ख़लंगा विकास समिति के अध्यक्ष कर्नल विक्रम सिंह थापा, कुलदीप बुटोला, विश्वास डाबर, विजय बलूनी, पदम सिंह, ब्रिगेडियर राम सिंह थापा एंव लोग मौजूद रहे।