भारतीय निर्वाचन प्रक्रिया में बैलेट पेपर से चुनाव कराने की जनहित याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने किया ख़ारिज

उच्चत्तम न्यायालय ने दिनांक 26.11.2024 को भारतीय निर्वाचन प्रक्रिया में डा. केए पौल की बैलेट पेपर सिस्टम को फिर से लागू करने की मांग वाली जनहित याचिका को खारिज कर दिया। कोर्ट ने याचिकाकर्ता के ईवीएम से छेड़छाड़ के दावों को खारिज कर दिया, जिसमें उन नेताओं की असंगतता को उजागर किया गया जो ईवीएम की विश्वसनीयता पर तभी सवाल उठाते हैं जब वे चुनाव हार जाते हैं। ’याचिका को खारिज करते हुए पीठ ने टिप्पणी की है कि, “अगर आप चुनाव जीतते हैं तो ईवीएम से छेड़छाड़ नहीं होती है, और जब आप चुनाव हारते हैं तो ईवीएम से छेड़छाड़ होती है।’ न्यायालय ने अपने निर्णय में यह भी टिप्पणी की है कि, जब चंद्रबाबू नायडू हारे तो उन्होंने कहा कि ईवीएम से छेड़छाड़ हो सकती है। अब, इस बार जगन मोहन रेड्डी हारे तो उन्होंने कहा कि ईवीएम से छेड़छाड़ हो सकती है।”

न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और पी.बी. वराले की पीठ ने याचिकाकर्ता डॉ. कौल की दलीलों में कोई दम नहीं पाया। न्यायमूर्ति नाथ ने टिप्पणी की, “राजनीतिक दलों को इस प्रणाली से कोई समस्या नहीं है। याचिकाकर्ता को समस्या है।”

मुख्य सचिव के सख्त निर्देशों के बाद सघन अभियान चलाकर ईएसआई के सम्बन्ध में 15000 से अधिक ईकाईयों को नोटिस जारी

राज्य में संविदा व अन्य सामान्य श्रमिकों को ईएसआई कवरेज दिए जाने की कार्यवाही की धीमी प्रक्रिया पर सख्ती करते हुए मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने सचिवालय में सचिव शहरी विकास से नगर निगमों एवं नगर निकायों में दैनिक/संविदा कर्मचारियों को ईएसआई कवरेज दिए जाने के सम्बन्ध में अब तक की गई कार्यवाही की रिपोर्ट तलब की। उन्होंने सम्बन्धित सचिव को कड़े निर्देश दिए हैं कि सभी नगर पालिकाओं एवं निकायों की तत्काल समीक्षा की जाए तथा उनमें कार्यरत दैनिक/संविदा कर्मचारियों, श्रमिकों को कर्मचारी राज्य बीमा योजना से अनिवार्यतः आच्छादित करने के सम्बन्ध में त्वरित कार्यवाही की जाए।

मुख्य सचिव राधा रतूड़ी के सख्त निर्देशों के बाद अब तक श्रम विभाग द्वारा सघन अभियान चलाकर ईएसआई के सम्बन्ध में औचक जांच की गई तथा 15000 से अधिक ईकाईयों को नोटिस जारी किये गए, जिसमें से 10000 यूनिट द्वारा ईएसआई कवरेज के सम्बन्ध में कार्यवाही पूरी कर ली गई हैं। मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने आज की बैठक में एक बार ईएसआई कवरेज की जांच के सम्बन्ध में पुनः सघन अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं।

राज्य में संविदा एवं श्रमिकों को स्वास्थ्य एवं सामाजिक सुरक्षा चिकित्सा सहायता, दुर्घटना कवर व अन्य स्वास्थ्य लाभ प्रदान करने तथा कार्यस्थल पर उत्पन्न जोखिमों से कर्मियों को बचाने के साथ ही कर्मियों को बीमा योजना के लाभों व उनके अधिकारों के लाभों के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने सम्बन्धित अधिकारियों को इस पर शीर्ष प्राथमिकता एवं गम्भीरता से कार्य करने की हिदायत दी है।

मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने ग्रामीण विकास, युवा कल्याण, आपदा प्रबन्धन, वित्त, महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास विभाग के साथ ही विभिन्न एनजीओं में कार्यरत संविदा व सामान्य श्रमिकों को कर्मचारी राज्य बीमा योजना से आच्छादित करने के कार्यवाही हेतु जल्द से जल्द कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए हैं।

कर्मचारी राज्य बीमा योजना नियोक्ता तथा कर्मचारियों के अंशदान द्वारा वित्त पोषित है। नियोक्ता अंशदान 3.25 प्रतिशत है व कर्मचारियों के अंशदान 0.75 प्रतिशत है। इस प्रकार देय मजदूरी का कुल 4 प्रतिशत है। राज्य सरकार को योजना संचालन के 100 प्रतिशत में से वास्तविक व्यय की 87.5 प्रतिशत धनराशि की प्रतिपूर्ति निगम द्वारा की जाती है।

प्रदेश में बीमाधारकों की संख्या 7,34,343 है व उनके आश्रितों की संख्या लगभग तीस लाख है। योजना राज्य में 13 जनपद, 45 औषधालयों एवं 65 अनुबन्धित चिकित्सा संस्थानों में संचालित है। कर्मचारी राज्य बीमा अधिनियम, 1948 के अधीन कर्मचारी राज्य बीमा योजना एक अनूठी सामाजिक बीमा योजना है जो संगठित क्षेत्र के योजना में व्याप्त कामगारों एवं उनके आश्रितजनों को बीमारी, प्रसूति, रोजगार चोट के कारण हुई मृत्यु व अपंगता तथा व्यवसाय जनित रोग में सुरक्षा प्रदान करती हैं।

कर्मचारी राज्य बीमा अधिनियम 1948 के अंतर्गत, राज्य में स्थापित संगठित क्षेत्र में स्थापित औद्योगिक अवस्थापनाओं, व्यावसायिक प्रतिष्ठान इत्यादि में 10 या उससे अधिक कार्यरत ₹21,000 एवं दिव्यांगजन हेतु ₹25,000 की सीमा तक वेतन पाने वाले कामगारों को कर्मचारी राज्य बीमा निगम भारत सरकार द्वारा बीमित किया जाता है।

सचिवालय में आयोजित कर्मचारी राज्य बीमा योजना एवं श्रम चिकित्सा सेवाओं के सम्बन्ध में आयोजित समीक्षा बैठक में सचिव पंकज कुमार पाण्डेय सहित वित्त, श्रम, ईएसआई, उपनल, चिकित्सा सेवा विभाग के विभिन्न अधिकारी मौजूद रहे।

प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) साकार कर रही है घर का सपना

प्रधानमंत्री आवास योजना सबके लिए आवास (शहरी) के तहत उत्तराखंड में अब तक 34 हजार से अधिक आवास बन चुके हैं। अब राज्य सरकार ने योजना के दूसरे चरण के लिए भी भारत सरकार के साथ अनुबंध कर लिया है, जिसमें लाभार्थियों को अधिक आर्थिक अनुदान प्राप्त हो सकेगा।

प्रधानमंत्री आवास योजना सबके लिए आवास (शहरी) अंतर्गत शहरी क्षेत्र में रहने वाले सभी आवास विहीन परिवारों को आवास उपलब्ध कराया जाता है। इस योजना में 3.00 लाख से लेकर 18.00 लाख रुपए तक वार्षिक आय वाले आवास विहीन परिवारों को चार घटकों के तहत आवास निर्माण के लिए सब्सिडी / अनुदान उपलब्ध कराया जाता है।

योजना के प्रथम चरण के तहत राज्य में कुल 64391 आवासों की स्वीकृति भारत सरकार हो चुकी है। जिसमें लाभार्थी आधारित निर्माण घटक के तहत कुल स्वीकृत 25976 आवासों में से अक्टूबर माह तक 12222 आवासों का निर्माण पूरा किया जा चुका है, शेष आवासों पर कार्य गतिमान है। इसमें भारत सरकार द्वारा कुल रु 1.50 लाख प्रति आवास की दर से (कुल रु० 263.71 करोड़ लगभग) अनुदान उपलब्ध कराया गया है, तथा राज्य सरकार द्वारा 50 हजार की अनुदान राशि प्रति आवास उपलब्ध करायी जाती है।

योजना के अन्य घटक, किफायती आवास के अंतर्गत भारत सरकार से 15960 आवासों की मंजूरी मिल चुकी है, जिसमें से 11384 आवासों का आवंटन करते हुए, 1894 का निर्माण पूरा किया जा चुका है। इस श्रेणी में भारत सरकार द्वारा 1.50 लाख रुपए प्रति आवास की दर से कुल 161.96 करोड़ रुपए का अनुदान उपलब्ध कराया गया है। इस श्रेणी में राज्य सरकार द्वारा भी प्रति आवास 2.00 लाख रुपए की अनुदान राशि उपलब्ध करायी जाती है। इस तरह लाभार्थी अंशदान प्रति आवास 3.50 लाख रुपए ही पड़ता है। योजना के अन्य घटक ऋण आधारित निर्माण में भारत सरकार से मंजूर सभी 19919 आवासों का निर्माण पूरा हो चुका है, इस श्रेणी में बैंक के माध्यम से ब्याज सब्सिडी भी उपलब्ध करायी जा चुकी है।

अब मिलेगी अधिक सहायता
सचिव शहरी विकास नितेश झा ने बताया कि अब भारत सरकार ने इसी साल सितंबर में प्रधानमंत्री आवास योजना 2.0 की घोषणा की है। इसके लिए राज्य सरकार ने भारत सरकार से अनुबंध कर दिया है। इसके लिए भारत सरकार ने अब प्रति आवास केंद्रांश 1.50 लाख रुपए से बढ़ाकर रु० 2.25 लाख रुपए कर दी गई है। इस तरह अब योजना के तहत लाभार्थियों को अधिक सहायता प्राप्त होगी।

प्रधानमंत्री आवास योजना लाखों आवासहीन परिवारों को छत उपलब्ध करा रही है। उत्तराखंड में भी योजना के तहत हजारों लोगों के पक्के घर बन चुके हैं। इसमें केंद्र के साथ ही राज्य सरकार भी सहायता उपलब्ध करा रही है।

– पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री

राज्य के लोग कहीं भी जाएं, संस्कृति, लोक परंपरा को रखते हैं जीवितः धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रगति मैदान, नई दिल्ली में आयोजित 43वाँ भारत अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेले उत्तराखण्ड दिवस समारोह में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड के विभिन्न उत्पादों पर आधारित स्टालों का भी अवलोकन किया।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखंड के लोग देश विदेश, कहीं भी चले जाएं, वो अपनी संस्कृति लोक परंपरा खानपान अपनत्व की भावना को हमेशा जीवित रखते हैं। उनके घरों पर ऐपण और गंगा दशहरा हमेशा देखने को मिलता है। उन्होंने कहा यह अंतर्राष्ट्रीय मेला हमें अपनी संस्कृति हस्तशिल्प और समृद्ध विरासत को वैश्विक मंच पर लाने और प्रस्तुत करने का मौका देती है। मेले में लगे विभिन्न स्टालों में राज्य के बेहतरीन उत्पादों को लाया गया है। उत्तराखंड प्रवासी, राज्य के विकास में अपना योगदान दे सकें इसके लिए उत्तराखंड प्रवासी परिषद के गठन का भी निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री ने सभी प्रवासियों से उत्तराखंड के विकास में सहभागी बनने का आग्रह किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को 2047 तक विकसित भारत बनाने का संकल्प लिया है, जिसपर हमारा देश तेजी से आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री की दूरदर्शी सोच से देश नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है। बीते 10 वर्षों में देश हर क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ा है। मेक इन इंडिया, स्टार्टअप इंडिया जैसी अनेकों योजनाओं ने भारत को स्टार्टअप के हब के रूप में स्थापित किया है, जिससे देश में रोजगार स्वरोजगार पैदा हो रहे हैं। आज भारत दुनिया की 5वी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड स्थापना के 24 वर्ष पूर्ण कर चुका है। अब राज्य रजत जयंती में प्रवेश कर चुका है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केदारनाथ की भूमि से 21वीं सदी का तीसरा दशक उत्तराखंड का दशक बताया था। राज्य सरकार प्रधानमंत्री जी के उन शब्दों को धरातल में उतार रही है। हमारा राज्य हर क्षेत्र में आगे बढ़ रहा है। ऋषिकेश कर्णप्रयाग रेल लाइन के निर्माण से पहाड़ों में रेल पहुंचने का सपना पूरा हो रहा है। उड़ान योजना के तहत राज्य के अनेक स्थलों पर हेली सेवा प्रारंभ की जा रही है। हमारा राज्य सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य जैसे हर क्षेत्र में ऐतिहासिक कार्य कर रहा है। प्रदेश के मेडिकल कॉलेज के साथ 20 मॉडल कॉलेज की स्थापना की जा रही है। उधम सिंह नगर में एम्स का सैटेलाइट सेंटर भी बनाया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत करने के साथ स्थानीय उद्योगों को भी सशक्त बनाया जा रहा है। कृषि, बागवानी, हस्त शिल्प जैसे अनेकों क्षेत्र में आत्मनिर्भर बन रहा है। आत्मनिर्भर उत्तराखंड बनाने में राज्य की महिलाएं बढ़ चढ़कर भाग ले रही हैं। प्रदेश की महिलाएं अपने साथ अन्य लोगो को भी रोज़गार दे रही हैं। प्रदेश की तरक्की में महिला महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। प्रदेश में 1 लाख से अधिक महिलाएं लखपति दीदी बन गई हैं। राज्य में कई नीतियों के माध्यम से रोजगार के द्वार खोले जा रहे हैं।

केंद्रीय राज्य मंत्री अजय टम्टा ने कहा कि जिस उद्देश्य से राज्य निर्माण हुआ है, उस उद्देश्य को पूरा करने हेतु मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी जी निरंतर कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा इस तरह के कार्यक्रम के माध्यम से उत्तराखंड राज्य प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की विकसित भारत की कल्पना में अपना योगदान दे रहा है। उत्तराखंड के प्रोडक्ट आज देश विदेश तक जा रहें हैं। हमारा राज्य नया डेस्टीनेशन के रूप में निरंतर आगे बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री जी ने योग दिवस के अवसर पर आदि कैलाश में योग करके पूरी दुनिया के अंदर आदि कैलाश को पहुंचाया है।

पूर्व मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने कहा कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में यह भव्य मेला आयोजन हो रहा है। उन्होंने कहा प्रधानमंत्री के विजन अनुसार यहां लोकल उत्पादों को बढावा दिया गया है। आज देश विदेश में उत्तराखंड के उत्पादों की डिमांड लगातार बढ़ती जा रही है।

सचिव उद्योग विनय शंकर पांडे ने बताया कि भारत अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेले के बीते 7 दिनों में 1 करोड़ 16 लाख के उत्तराखंड के स्थानीय उत्पादों की बिक्री हुई है। इसके साथ 2 करोड़ के ऑर्डर भी हस्त शिल्पकारों को मिले हैं। देश में राज्य के उत्पादों की डिमांड लगातार बढ़ती जा रही है। उन्होंने कहा मुख्यमंत्री के नेतृत्व में उत्तराखंड राज्य को पर्यटन, कृषि, उद्योग, ग्रामीण विकास को सशक्त बनाने के साथ-साथ सांस्कृतिक धरोहरों का संरक्षण भी किया जा रहा है।

इस अवसर पर महानिदेशक उद्योग प्रतीक जैन, स्थानीय आयुक्त अजय मिश्रा, निदेशक संस्कृति विभाग बिना भट्ट, एवं अन्य लोग मौजूद रहे।

फिल्म दि साबरमती रिपोर्ट देख बोले सीएम, राज्य में होगी टैक्स फ्री

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हाथीबड़कला स्थित मॉल में भारतीय हिन्दी फिल्म ‘दि साबरमती रिपोर्ट’ का अवलोकन किया। यह फिल्म 27 फरवरी 2002 को गोधरा में साबरमती एक्सप्रेस ट्रेन में आग लगने की घटना पर आधारित है। मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘दि साबरमती रिपोर्ट’ फिल्म को उत्तराखण्ड में टैक्स फ्री किया जायेगा। इस अवसर पर फिल्म के अभिनेता विक्रान्त मैसी भी मौजूद थे।

इससे पहले मुख्यमंत्री आवास में ‘दि साबरमती रिपोर्ट’ फिल्म के अभिनेता श्री विक्रांत मैसी ने मुख्यमंत्री से शिष्टाचार भेंट की।

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री डा. प्रेमचंद अग्रवाल, गणेश जोशी, सुबोध उनियाल, राज्यसभा सांसद एवं भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष महेन्द्र भट्ट, लोकसभा सांसद माला राज्यलक्ष्मी शाह, विधायक खजान दास, उमेश शर्मा काऊ, सहदेव सिंह पुण्डीर, सविता कपूर एवं अन्य जन प्रतिनिधि उपस्थित थे।

कांग्रेस ने क्षेत्रवाद और जातिवाद को दी थी हवा, जनता ने निकाल दी हवाः सीएम

देहरादून। केदारनाथ उपचुनाव में मोदी फैक्टर और सीएम धामी की लोकप्रियता का जादू मतदाताओं के सिर चढ़कर बोला है। विपक्ष के ताबड़तोड़ नकारात्मक चुनाव प्रचार के बावजूद जनता ने कमल पर ही मुहर लगाई और भाजपा इस सीट पर अपना कब्जा बरकरार रखने में कामयाब रही। कांग्रेस ने ‘क्षेत्रवाद’ और ‘जातिवाद’ को हवा देकर मुख्यमंत्री धामी के खिलाफ माहौल बनाने का हर संभव प्रयास किया लेकिन मतदाताओं ने उनकी दलील को सिरे से खारिज कर दिया। श्रीराम की धरती अयोध्या और बदरीनाथ में लगातार दो हार के बाद शिवधाम केदारनाथ में मिली शानदार जीत से भाजपाईयों के चेहरे खिले हुए हैं। कार्यकर्ताओं का जोश आसमान छू रहा है।

केदारनाथ विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में भाजपा और कांग्रेस प्रत्याशी के बीच सीधा मुकाबला था। कांग्रेस ने शातिराना तरीके से अपना चुनाव कैंम्पेन आगे बढ़ाया। कांग्रेस प्रत्याशी मनोज रावत ने प्रचार के दौरान कहा कि यह मुकाबला उनके और भाजपा प्रत्याशी आशा नौटियाल के बीच नहीं बल्कि ‘धाम’ और ‘धामी’ के बीच है। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत और गणेश गोदियाल समेत भाजपा के तमाम नेता मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पर हमलावर रहे। उनकी ओर से प्रचारित किया गया कि धामी गढ़वाल के बजाए कुमाऊं को तरजीह देते रहे हैं इसलिए उन्होंने आपदा का बहाना बनाकर केदारनाथ की यात्रा को प्रभावित किया और यात्रियों का रुख कैंचीधाम को ओर मोड़ दिया। कहा यह भी गया कि धामी ने इसी सोच के चलते बुराड़ी दिल्ली में केदारनाथ मंदिर के निर्माण की नींव रखी। विकास और जनसरोकार के मुद्दों को हासिए पर रखकर कांग्रेस ने ‘धाम बनाम धामी’ का नेरेटिव क्रिएट कर दिया। इस कुप्रचार से मुख्यमंत्री धामी धबराये नहीं बल्कि वह विपक्ष पर आक्रामक हो गए। पलटवार करते हुए धामी ने पूछा कि क्या 2012 में तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत और बीकेटीसी के अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने मुम्बई में बदरीनाथ मंदिर का सिलान्यास नहीं किया था ?

उपलब्धियां गिनाते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि विधायक शैलारानी रावत के निधन के बाद उन्होंने आगे आकर उपचुनाव तक खुद को केदारनाथ सीट का विधायक माना और क्षेत्र के विकास के लिए लगभग 700 करोड़ की घोषणाएं कीं जिनके शासनादेश भी जारी हो चुके हैं। कांग्रेस प्रत्याशी मनोज रावत को स्लो बताते हुए उन्होंने कहा कि जब वह विधायक थे तो अपनी विधायक निधि खर्च नहीं कर पाए जिससे क्षेत्र के विकास के लिए मिले 6 करोड़ रुपए लैप्स हो गए। अपने कैम्पेन में धामी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के केदार प्रेम को सबसे आगे रखा। उन्होंने बताया कि वर्ष 2013 में जलप्रलय से ध्वस्त हो चुकी केदारपुरी को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने किस तरह संवारा और आज केदारनाथधाम नये स्वरूप में दिखाई दे रहा है। वर्ष 2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेन्द्र मोदी की 7 बार केदारनाथ की यात्रा का जिक्र उन्होंने अपने हर भाषण में किया।

भाजपा के प्रदेश संगठन ने भी कंधे से कंधा मिलाकर मुख्यमंत्री धामी का पूरा साथ दिया। पार्टी ने कैबिनेट मंत्रियों समेत पार्टी के सभी विधायकों का चुनाव प्रचार में बखूबी उपयोग किया। कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस के निगेटिव नेरेटिव को तोड़ने में अपनी पूरी ताकत झोंक दी। टीम धामी योद्धा की तरह लड़ी। इस जीत से धामी के विरोधियों को भी जोर का झटका लगा है।

ब्रांड धामी ने केदारघाटी से लेकर महाराष्ट्र तक संभाला चुनावी मोर्चा, पार्टी को हर जगह मिली सफलता

देहरादून। केदारनाथ विधानसभा के उपचुनाव में भाजपा को मिली जीत से साबित हो गया है कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पर जनता का विश्वास बढ़ता जा रहा है। ब्रांड मोदी के साथ साथ ब्रांड धामी तेजी से लोगों के दिलों में जगह बना रहे हैं। इस उपचुनाव में विरोधियों ने मुख्यमंत्री धामी के खिलाफ कुप्रचार करके निगेटिव नेरेटिव क्रिएट किया और पूरे चुनाव को धाम बनाम धामी बना दिया। कांग्रेस के शीर्ष नेता और तमाम विरोधी एकजुट होकर मुख्यमंत्री पर हमलावर रहे। बावजूद इसके धामी सरकार की उपलब्धियों और चुनावी कौशल से विपक्ष के मंसूबे कामयाब नहीं हो पाए। धामी के कामकाज पर जनता ने दिल खोलकर मुहर लगाई।

आज प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी केवल नाम भर नहीं है, बल्कि एक ब्रांड हैं। मोदी के हर क्रियाकलाप का प्रभाव जनता के बड़े हिस्से को प्रभावित करता है इसलिए पिछले दो दशकों से वह देश के सबसे भरोसेमंद ब्रांड बने हुए हैं। ब्रांड मोदी की बदौलत केन्द्र ही नहीं राज्यों में भी भाजपा चुनाव जीतती चली आ रही है। उनके साथ ही राज्यों में भी भजपा के कुछ नेता हैं जो एक ब्रांड के रूप में अपनी पार्टी के लिए फयादेमंद साबित हो रहे हैं। तेजी से उभर रहे ऐसे नेताओं में से एक हैं उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी। सादगी, सरल स्वभाव, संवेदनशीलता और सख्त निर्णय लेने की क्षमता, ये वो तमाम गुण हैं जिनकी बदौलत पुष्कर सिंह धामी लोकप्रिय बनते जा रहे हैं। धामी ने उत्तराखण्ड में अपने कम समय के कार्यकाल में कई बड़े और कड़े फैसले लिए, जिससे देशभर में उनकी लोकप्रियता में इजाफा हुआ। खासकर यूसीसी, नकलरोधी कानून, लैंड जिहाद, दंगारोधी कानून, महिला आरक्षण आदि निर्णयों से वह देश में नजीर पेश की चुके हैं। उनकी लोकप्रियता का दायरा उत्तराखण्ड तक ही सीमित नहीं है वह पूरे देश में उनकी छवि एक ‘डायनेमिक लीडर’ की बन चुकी है। उनकी लोकप्रियता को देखकर ही भाजपा हाईकमान ने उत्तर ही नहीं बल्कि दक्षिण के राज्यों में भी उन्हें बतौर युवा स्टार प्रचारक लोकसभा चुनाव के प्रचार में भेजा, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आए। बीते लोकसभा चुनाव में उत्तराखण्ड की पांचों लोकसभा सीटों पर भी धामी ने ताबड़तोड़ जनसभाएं, रैली और रोड शो किए। प्रदेश के भीतर 90 से अधिक चुनावी सभाएं, रोड शो और सीधा जनसंवाद करके धामी ने पार्टी के पांचों प्रत्याशियों को कंफर्ट जोन में खड़ा करने में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया। सभी पांचों सीटें भाजपा की झोली में गईं। अन्य चरणों के चुनाव में उत्तर प्रदेश, दिल्ली, झारखण्ड, पश्चिमी बंगाल, राजस्थान और मध्यप्रदेश जैसे बढ़े राज्यों में अब उन्हें प्रचार के लिए भेजा गया। महाराष्ट्र और झारखण्ड में हुए विधानसभा चुनाव में भी धामी ने कई जनसभाएं कीं। उत्तराखण्ड में धामी से पहले किसी राजनैतिक दल का शायद ही कोई ऐसा मुख्यमंत्री रहा हो जिसका पार्टी के चुनाव प्रचार में इतना व्यापक उपयोग किया गया हो। यहां तक कि नारायण दत्त तिवारी, हरीश रावत और भुवन चंद खण्डूड़ी जैसे दिग्गज भी प्रचार के लिहाज से दिल्ली और उत्तर प्रदेश तक ही सीमित रहे।

केदारनाथ विधानसभा में हमें मिली ये जीत जनता की जीतः धामी

बाबा केदार को प्रणाम करते हुए मैं, आप सभी के माध्यम से केदारनाथ विधानसभा की देवतुल्य और राष्ट्रवादी जनता को भारतीय जनता पार्टी से हमारी लोकप्रिय उम्मीदवार श्रीमती आशा नौटियाल जी को विजयी बनाने के लिए धन्यवाद देता हूं।

केदारनाथ विधानसभा में हमें मिली ये जीत जनता की जीत है, हमारी ये जीत संगठन की जीत है, हमारी ये जीत कार्यकर्ताओं की जीत है, हमारी ये जीत मोदी जी की जीत है, हमारी ये जीत विकास की जीत है, हमारी ये जीत राष्ट्रवाद की जीत है और हमारी ये जीत सनातन की जीत है।

इतना ही नहीं हमारी ये जीत क्षेत्रवाद की हार है, हमारी ये जीत जातिवाद की हार है और हमारी ये जीत मुझ पर और मेरी सरकार पर विपक्ष द्वारा लगाए गए झूठे और बेबुनियाद इल्जामों की भी हार है।

हम केदारनाथ विधानसभा सहित समस्त उत्तराखंड में विकास की अलख जगाने का अपना कार्य इसी प्रकार जारी रखेंगे और उत्तराखंड को देश का श्रेष्ठ राज्य बनाने के अपने विकल्प रहित संकल्प को पूर्ण करने के लिए निरंतर कार्य करते रहेंगे।

पौड़ी जिले की चुनखेत पंपिंग योजना की खराब गुणवत्ता पर अधिशासी अभियंता निलंबित

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सचिवालय में जल जीवन मिशन की समीक्षा बैठक की।

बैठक में मुख्यमंत्री ने जल जीवन मिशन की प्रगति की समीक्षा करते हुए घरों में नलों के साथ पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा अगले एक महीने के अंदर ऐसे स्थान जहां पानी न पहुंच रहा हो, वहां पानी की व्यवस्था हेतु डी.पी.आर. बनाकर योजना पर कार्य करें। मुख्यमंत्री ने एक महीने के अंदर प्रदेश भर में जल जीवन मिशन के अंतर्गत लगाए गए नलों के सत्यापन करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा ऐसे सभी घरों को चिन्हित किया जाए जहां किसी भी कारण से नल लगने के बावजूद पानी की आपूर्ति नहीं हो पा रही है। ऐसे स्थानों की जिओ टैगिंग के साथ पानी की आपूर्ति न होने के कारणों को भी स्पष्ट कर शासन को अवगत करवाने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाए कि जल जीवन मिशन के अंतर्गत लाभार्थियों तक पीने योग्य पानी पहुंचे। उन्होंने विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों, जिला अधिकारियों एवं अधिशासी अभियंताओ को भी योजनाओं का स्थलीय निरीक्षण करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने जल जीवन मिशन के अंतर्गत ग्रामीणों को जल संरक्षण हेतु कराई गई ट्रेनिंग एवं जागरूकता के संबंध में जाँच के आदेश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा जांच में ट्रेनिंग करवाने वाली संस्थाओं एवं उन्हें जारी धनराशि की भी जांच की जाए।

बैठक के दौरान मुख्यमंत्री के समक्ष विभिन्न योजनाओं का प्रस्तुतीकरण दिया गया। मुख्यमंत्री ने उक्त प्रस्तुतीकरण के दौरान जल जीवन मिशन के अंतर्गत बनी पौड़ी जिले की चुनखेत योजना के कार्य में खराब गुणवत्ता पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने चुनखेत योजना की खराब गुणवत्ता पर तत्काल प्रभाव से संबंधित गैर जिम्मेदार अधिकारियों को सस्पेंड करने के निर्देश दिए। उन्होंने संबंधित ठेकेदार पर भी कार्यवाही करने के निर्देश दिए हैं। इसके अतिरिक्त मुख्यमंत्री ने पिथौरागढ़ जिले की वासुकीनाग पंपिंग योजना की खराब गुणवत्ता पर उक्त योजना को श्रमदान घोषित कर योजना के पुर्ननिर्माण के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा जल जीवन मिशन के अंतर्गत होने वाले सभी कार्यों का विशेष रूप से सत्यापन करवाया जाए। यदि कहीं भी लापरवाही या खराब गुणवत्ता पाई जाती है, तो उसपर कठोर कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा राज्य में जनहित के कार्यों में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में हर घर जल ग्राम प्रमाणीकरण भी तेजी से किया जाए। शासन से जिला समिति एवं शासन से स्वीकृत हो चुकी योजनाओं को तय समय में धरातल पर उतारा जाए। उन्होंने कहा जल जीवन मिशन में तय मानकों के अनुसार ही कार्य हो। मुख्यमंत्री ने वन भूमि के कारण बाधित कार्यों हेतु अलग से बैठक कर उनके निस्तारण के भी निर्देश दिए। मुख्यमंत्री जी ने कहा यह सुनिश्चित हो कि राज्य सरकार प्रदेश के हर नागरिक तक शुद्ध पेयजल पहुंचाने की व्यवस्था करें।

बैठक में बताया गया कि जल जीवन मिशन के अतर्गत अबतक कुल 14.05 लाख परिवारों को जल संयोजन से जोड़ा गया है। प्रदेश में हर घर जल ग्राम प्रमाणीकरण के तहत अब तक कुल 6795 ग्रामों को प्रमाणित किया जा चुका है।

बैठक के पहले पूरी तैयारी करके आएं अधिकारी- मुख्यमंत्री

जल जीवन मिशन की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को फटकार लगाते हुए कहा कि बैठक के पहले अधिकारी पूरा होमवर्क करके आए। विभागाध्यक्ष हर प्रकार के आकड़े अपने पास रखें। मुख्यमंत्री ने कहा विभाग से संबंधित हर प्रकार के आंकड़े, विश्लेषण अधिकारियों के पास होने चाहिए।

बैठक में उपाध्यक्ष अवस्थापना परिषद विश्वास डाबर, अपर मुख्य सचिव आनंद बर्धन, प्रमुख सचिव आर. के सुधांशु, विभागीय सचिव शैलेश बगौली, गढ़वाल कमिश्नर विनय शंकर पांडे, महानिदेशक यूकास्ट प्रो. दुर्गेश पंत, अपर सचिव रणवीर सिंह चौहान, विभिन्न जिलों के जिलाधिकारी (वर्चुअल) व अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

पर्वतीय व दुर्गम क्षेत्रों में निर्धारित सेवा पूरी करने वाले चिकित्सकों को मिलेगा लाभ, लंबे समय की जा रही थी एसडीएसीपी की मांग

उत्तराखंड स्वास्थ्य विभाग ने दन्त चिकित्साधिकारियों को एस०डी०ए०सी०पी० की बड़ी सौगात दी है। इसका लाभ प्रान्तीय चिकित्सा सेवा संवर्ग के उन चिकित्साधिकारियों को मिलेगा जिन्होंने पर्वतीय व दुर्गम क्षेत्रों में अपनी निर्धारित सेवा अवधि पूरी कर ली है। स्वास्थ्य सचिव डॉ आर राजेश कुमार ने कहा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी व स्वास्थ्य मंत्री डॉ धन सिंह रावत स्वास्थ्य विभाग से जुड़े सभी कार्मिकों के हितों को लेकर लगातार गंभीर रहते हैं। जिसका परिणाम है कि चिकित्सकों की वर्षों पुरानी मांग पूरी हो गई है। उन्होंने इस संबंध में आदेश जारी करते हुए एस०डी०ए०सी०पी० से लाभान्वित होने वाले दंत चिकित्सकों को शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने कहा लंबे समय से दंत चिकित्सकों की एस०डी०ए०सी०पी० देने की मांग थी। स्वास्थ्य सचिव ने कहा स्क्रीनिंग कमेटी द्वारा की गयी संस्तुति के आधार पर शासन स्तर पर प्रांतीय चिकित्सा सेवा संवर्ग के चिकित्साधिकारियों को एस०डी०ए०सी०पी० का लाभ दिये जाने के आदेश जारी कर दिये गये हैं।

71 दन्त चिकित्साधिकारियों को मिलेगा लाभ

स्वास्थ्य सचिव ने कहा 04 वर्ष की संतोषजनक सेवा व 02 वर्ष की पर्वतीय/दुर्गम सेवा पूर्ण करने वाले प्रांतीय चिकित्सा सेवा संवर्ग के 63 दंत चिकित्सकों को इसका लाभ मिलेगा। इसके साथ ही 09 वर्ष की संतोषजनक सेवा व 05 वर्ष की पर्वतीय/दुर्गम सेवा पूर्ण करने वाले प्रांतीय चिकित्सा सेवा संवर्ग के 05 चिकित्सकों को इसका लाभ मिलेगा। इसके साथ ही वहीं 20 वर्ष की संतोषजनक सेवा व 09 वर्ष की पर्वतीय/दुर्गम सेवा पूर्ण करने वाले प्रांतीय चिकित्सा सेवा संवर्ग के 03 चिकित्सकों को इसका लाभ मिलेगा।

चिकित्सकों की हर न्यायोचित मांग का होगा समाधान-डॉ आर राजेश कुमार

स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर राजेश कुमार ने कहा चिकित्सकों की मांगों को लेकर सरकार हमेशा गंभीर रही है। उन्होंने कहा हर न्यायोचित मांग का समाधान करने के लिए शासन लगातार प्रयासरत है। उन्होंने कहा चिकित्सकों की मांगों को प्राथमिकता के आधार पर और सभी पहलुओं पर गंभीरता पूर्वक विचार कर पूरा किया जा रहा है। उन्होंने सभी चिकित्सकों से अपील करते हुए कहा कि वह पूरे मनोयोग व निष्ठा के साथ कार्य करते रहें, उनकी मांगों के समाधान और सुरक्षा की जिम्मेदारी सरकार की है।