समग्र विकास के लिये हम सभी को नई कार्य संस्कृति के साथ आगे बढ़ना हैः सीएम

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सचिवालय में न्याय विभाग से संबंधित विभिन्न विषयों पर आयोजित समीक्षा बैठक के दौरान कहा कि सर्वाेच्च न्यायालय और उच्च न्यायालय में राज्य से जुड़े विभिन्न विषयों में ठोस पैरवी की जाए। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड युवा राज्य है। राज्य के समग्र विकास के लिए हम सबको नई कार्य संस्कृति के साथ आगे बढ़ना है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि न्यायालयों से संबंधित मामलों में कार्यवाही में तेजी लाने के लिए डिजिटल माध्यमों का अधिकतम उपयोग किया जाये। यह सुनिश्चित किया जाए राज्य से जुड़े विभिन्न विषयों पर पैरवी मजबूती के साथ हो। राज्य की विकास यात्रा में सबको सहयात्री बनकर कार्य करना है। सभी को अपने कार्यों और दायित्वों का पूरे मनोयोग से निर्वहन करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि कार्य संस्कृति में नवाचार जरूरी है, परम्परा से हटकर हमें अभिनव प्रयोग पर अधिक ध्यान दिया जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के जनहित से जुड़े विभिन्न विषयों पर बेहतर पैरवी के लिए शासन और सरकारी अधिवक्ताओं के बीच नियमित समन्वय होना जरूरी है। कार्यों के सफल क्रियान्वयन के लिए परफोर्मेंस आधारित दृष्टिकोण होना जरूरी है। उन्होंने कहा कि किसी भी कार्यों में सुधार की संभावनाएं हमेशा रहती है, समस्याओं को कम कर समाधान की ओर विशेष ध्यान दिया जाए।

बैठक में उपाध्यक्ष अवस्थापना अनुश्रवण परिषद विश्वास डाबर, एडवोकेट जनरल एस.एन. बाबुलकर, प्रमुख सचिव न्याय प्रदीप पंत, प्रमुख सचिव आर.के सुधांशु, शासकीय अधिवक्ता अमित भटट, जी.एस रावत, जी.एस. रावत, सचिव शैलेश बगोली एस. एन पाण्डेय, अपर सचिव जे.सी. काण्डपाल एवं न्याय विभाग से जुड़े अधिकारी उपस्थित थे।

घोड़ाखाल सैनिक विद्यालय में सिंथेटिक ट्रैक युक्त स्टेडियम और कृत्रिम घास युक्त फुटबॉल मैदान बनाने की सीएम ने की घोषणा

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सैनिक विद्यालय घोड़ाखाल के वार्षिक समारोह को वर्चुअल माध्यम से संबोधित किया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने सैनिक विद्यालय में प्रशिक्षण और खेल अवस्थापना से जुड़ी हुई 2 घोषणाएं की। उन्होंने कहा कि सैनिक स्कूल में सिंथेटिक ट्रैक युक्त स्टेडियम बनाया जाएगा तथा कृत्रिम घास युक्त फुटबॉल मैदान का निर्माण भी किया जाएगा।

विद्यालय द्वारा 10वीं बार राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (एनडीए) में सर्वाधिक प्रविष्टियां देने का रिकॉर्ड बनाने तथा 10वीं बार रक्षा मंत्री ट्रॉफी जीतने के लिए मुख्यमंत्री ने शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह ऐतिहासिक विद्यालय राष्ट्र और समाज के कर्मठ, लगनशील, अनुशासित और दृढ़ संकल्पित नागरिक तैयार करता है। उन्होंने कहा कि इस विद्यालय से शिक्षा प्राप्त करने के पश्चात बहुत से लोग आज देश की सेना में तथा अन्य क्षेत्रों में उच्च पदों पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि देवभूमि वैसे भी वीरों की भूमि है-सैनिकों की भूमि है। हमारी सरकार सैनिकों के समर्पण और जज्बे का हमेशा सम्मान करती है। सैन्य सुधार के अंतर्गत वन रैंक वन पेंशन, सेना का पुनर्गठन, स्वदेशी रक्षा तकनीक को बढ़ावा देना, सेना का आधुनिकीकरण जैसे कार्य उच्च प्राथमिकता से किए हैं। इसी का परिणाम है कि आज भारत अपनी रक्षा जरूरतों का आयात कम करते हुए बहुत से देशों को रक्षा सामग्री निर्यात भी करता है।

प्रदेश सरकार भी सैनिकों और शहीदों के परिजनों के कल्याण के लिए कृत संकल्पित हैं। हमने शहीद परिजनों को मिलने वाली अनुग्रह राशि 5 गुना बढ़ाई है। शहीद के परिजन को सरकारी नौकरी हो या पूर्व सैनिकों की तरह उनको छूट देना। प्रदेश के बलिदानों की स्मृति के लिए सैन्यधाम का निर्माण किया जा रहा है।

उन्होंने सैनिक विद्यालय के प्रधानाचार्य ग्रुप कैप्टन विजय सिंह और उनके स्टाफ की भी प्रशंसा करते हुए कहा कि उनके कड़े परिश्रम के चलते देश को आगे भी अनुशासित और समर्पित नागरिक मिलते रहेंगे।

नजरियाः सौर ऊर्जा क्रांति से पलायन में लगेगी रोक, मिलेगा स्वरोजगार

गंगा- यमुना और बदरी – केदार की धरती में खामोशी के साथ सौर ऊर्जा क्रांति की नींव पड़ चुकी है। मुख्यमंत्री सौर स्वरोजगार योजना के जरिए सैकड़ों लोग अपने सोलर प्लांट सफलता पूर्वक संचालित कर रहे हैं। उत्तराखण्ड में इस समय करीब 600 मेगावाट की सौर ऊर्जा पैदा हो रही है, साथ ही 174 मेगावाट क्षमता के नए सोलर पावर प्लांट का भी आवंटन हो चुका है।

प्रदेश में पलायन रोकने के साथ ही स्वरोजगार के साधन विकसित करने के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सरकार सीएम सौर स्वरोजगार योजना संचालित कर रही है। योजना के तहत एक परिवार का एक व्यक्ति 20, 25, 50, 100 या 200 किलोवॉट का एक सोलर प्लांट लगा सकता है। जिसकी पूरी उत्पादित बिजली यूपीसीएल खरीदता है। इसके लिए उन्हें मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना और उद्योग विभाग की एमएसएमई पॉलिसी के तहत मिलने वाली सभी छूट का लाभ प्रदान किया जा रहा है। सोलर प्लांट के लिए प्रदेश के स्थायी निवासी ही पात्र होते हैं, प्लांट की स्थापना अपनी निजी भूमि के साथ ही लीज की जमीन पर भी की जा सकती है। प्लांट लगाने के लिए सहकारी बैंक के साथ ही अन्य बैंकों के जरिए भी लोन प्रदान किया जा रहा है।

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’’उत्तराखण्ड को धूप का उपहार प्रकृति से मिला है, यहां सर्दियों में भी धूप खिली रहती है। इस कारण उत्तराखण्ड राज्य सौर ऊर्जा के लिए आदर्श है। इसीलिए सरकार सोलर प्रोजेक्ट का बढ़ावा दे रही है। इसके लिए उद्यमियों को तमाम तरह से प्रोत्साहन दिया जा रहा है। सोलर प्रोजेक्ट से पलायन रोकथाम के साथ ही, गांवों की आर्थिकी बढ़ाने में कारगर साबित हुई है।’’

पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री
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सफलता की कहानी 01

उत्तरकाशी जिले में चिन्यालीसौड़ के पास टिपरी गांव निवासी आमोद पंवार ने सोलर पावर प्रोजेक्ट, खेती- बागवानी के साथ ही मत्स्य और मधुमक्खी पालन का एक सफल स्वरोजगार मॉडल खड़ा किया है। आमोद बताते हैं कि पहले ग्रिड की बिजली सप्लाई होने से, गांव में बिजली आपूर्ति अनियमित होती थी, उनका गांव टिहरी झील के ठीक सामने है। ऐसे में टिहरी बांध का गांव वालों के लिए सांकेतिक महत्व ही था, लेकिन अब सोलर प्रोजेक्ट के चलते गांव की बिजली आपूर्ति भी सुधर गई है। आमोद पंवार के मुताबिक पहाड़ में सर्दियों के दिनों में भी अच्छी धूप रहती है, इस कारण सोलर प्रोजेक्ट पहाड़ के लिए आदर्श हैं, अन्य युवाओं को भी इस दिशा में आगे आना चाहिए।

सफलता की कहानी 02

टिहरी जिले में देवप्रयाग विकासखंड के निवासी प्रताप सिंह रावत ने 2020 में खुद के नाम 400 किलोवाट का प्लांट लगाया, इसके बाद पत्नी के नाम 200 किलोवाट का प्लांट लिया। इन दोनों प्रोजेक्ट का सफलतापूर्वक रन करने के बाद वो इसी साल सीएम सौर स्वरोजगार योजना के तहत बेटे के नाम भी 200 किलोवाट की एक और अन्य परियोजना शुरु कर चुके हैं। इस तरह उनके परिवार में कुल तीन लोग हैं और तीनों के पास अपना अपना सोलर प्रोजेक्ट है। रावत कहते हैं कि इस प्रोजेक्ट की लाइफ करीब 25 साल है, इस तरह सरकार ने उन्हें घर बैठे 25 साल का रोजगार दे दिया है। उन्होंने देहरादून से वापसी अपने गांव की ओर रिवर्स पलायन कर लिया है।

मुख्य सचिव ने स्किल डेवलपमेंट एण्ड एम्पलॉयमेंट कॉनक्लेव की तैयारियों के सम्बन्ध में समीक्षा की

उत्तराखण्ड के युवाओं के लिए कौशल विकास एवं रोजगार के बेहतर अवसर प्रदान करने के रोडमैप के सम्बन्ध में स्किल डेवलपमेंट एण्ड एम्पलॉयमेंट कॉनक्लेव का आयोजन नवम्बर माह में देहरादून में किए जाने से सम्बन्धित बैठक में आज सचिवालय में मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने इस सम्बन्ध में सभी विभागों को आंकडों के साथ वर्किंग प्लान एक सप्ताह में प्रेषित करने के निर्देश दिए हैं। सीएस राधा रतूड़ी ने कहा है कि उक्त वर्किंग प्लान के आधार पर स्किल डेवलपमेंट एण्ड एम्पलॉयमेंट कॉनक्लेव में राज्य सरकार के एक स्पष्ट एवं प्रभावी एक्शन प्लान को अन्तिम रूप दिया जा सकेगा।

स्किल डेवलपमेंट एण्ड एम्पलॉयमेंट कॉनक्लेव के महत्व को रेखांकित करते हुए मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने कहा कि इस कॉनक्लेव का मुख्य उद्देश्य राज्य के युवाओं को सशक्त बनाना, प्रौद्योगिकी का लाभ उठाना तथा समावेशी विकास को बढ़ावा देने के लिए उत्तराखण्ड के शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में रोजगार की चुनौतियों का समाधान करना है।

कॉनक्लेव में विभिन्न विभागों की सक्रिय भागीदारी से तैयार किया जाएगा रोडमैप

मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने निर्देश दिए कि उक्त कॉनक्लेव में कौशल विकास एवं रोजगार विभाग, उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा, महिला एवं बाल विकास, श्रम, सूचना प्रौद्योगिकी विकास एजेंसी (आईटीडीए), पर्यटन, शहरी विकास, ग्रामीण विकास, उद्योग, समाज कल्याण, वन, ऊर्जा, कृषि एवं संबद्ध विभागों के समन्वित प्रयासों से कौशल विकास एवं रोजगार का रोडमैप बनाया जाएगा।

मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने कहा कि इस कॉनक्लेव में नीति आयोग, यूएनडीपी, इन्टरनेशनल लेबर ऑर्गेनाइजेशन, मानव विकास संस्थान, भारतीय उद्यमिता विकास संस्थान व यूनिसेफ का सहयोग प्राप्त होगा।

वर्तमान में विभागों में स्किलिंग ईकोसिस्टम पर जानकारी मांगी

मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने सम्बन्धित विभागों को कौशल विकास के क्षेत्र में गैप, केस स्टडीज तथा बेस्ट प्रैक्टिसेज को उजागर करने के निर्देश दिए हैं। मुख्य सचिव ने विभागों की आन्तरिक व्यवस्था में वर्तमान में कौशल विकास हेतु क्या ईकोसिस्टम मौजूद है, इस पर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने विभागीय प्रशिक्षण के माध्यम से सर्टिफिकेशन, विभागों के ट्रेनिंग इंफ्रास्ट्रक्चर ,विभागों के प्रशिक्षण केन्द्रों का सामान्य कौशल विकास हेतु उपयोग, ट्रेनिंग मोड्स ( ऑनलाइन, ऑफलाइन, हाइब्रिड), फण्ड की व्यवस्था, अन्य विभागों का राज्य के कौशल एवं रोजगार विभाग के साथ समन्वय, कौशल विकास प्रशिक्षण की चुनौतियों पर स्पष्ट जानकारी देने के निर्देश दिए हैं।
मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने विभागों से स्किल डेवलपमेंट को और अधिक प्रभावी बनाने के सम्बन्ध में सुझाव भेजने के भी निर्देश दिए हैं।

बैठक में सेतु आयोग के उपाध्यक्ष राजशेखर जोशी, विनय शंकर पाण्डेय सहित सभी संबंधित विभागों के सचिव, अपर सचिव एवं अधिकारी मौजूद रहे।

दीपावली पर आगजनी से बचने को अग्निशमन वाहनों की व्यवस्था पर्याप्त होः सीएम

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अधिकारियों को निर्देश दिये कि आगामी दीपावली और राज्य स्थापना दिवस के दृष्टिगत प्रदेशभर में स्वच्छता, सुरक्षा, स्वास्थ्य, यातायात की बेहतर व्यवस्थाएं सुनिश्चत की जाएं।

सचिवालय में बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने निर्देश दिये कि दीपावली के पर्व पर यातायात प्रबंधन का विशेष ध्यान रखा जाए। यह सुनिश्चित किया जाए कि आवागमन में लोगों को किसी भी प्रकार से परेशानी न हो। अग्निशमन विभाग द्वारा दीपावली पर आगजनी घटनाओं से बचाव के लिए अग्निशमन वाहनों की पर्याप्त व्यवस्था की जाए। स्वास्थ्य विभाग को सभी आपतकालीन व्यवस्था रखने के साथ ही बर्न यूनिट 24 घण्टे सुचारू अवस्था में रखें। त्योहारों में खाद्य पदार्थों में मिलावटखोरी को रोकने के लिए खाद्य पदार्थों की नियमित सैंपलिंग करने के भी निर्देश मुख्यमंत्री ने दिये हैं। उन्होंने कहा कि खाद्य पदार्थों में मिलावट, थूकने की घटनाओं और गुणवत्ता में कमी पाये जाने पर संबंधितों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।

राज्य स्थापना दिवस की तैयारियों को लेकर मुख्यमंत्री ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिये कि जनपदों के सभी शहरी और ग्रामीण क्षेत्र में स्वच्छता के लिए विशेष अभियान चलाया जाए। इसमें जनसहयोग भी लिया जाए। स्वच्छता के साथ ही ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में सौन्दर्यीकरण की दिशा में कार्य किये जाएं। उन्होंने कहा कि स्वच्छता को जनता का कार्यक्रम बनाया जाए। राज्य स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में 06 से 12 नवम्बर तक प्रदेश में विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जायेगा। उन्होंने निर्देश दिये कि दीपावली और राज्य स्थापना दिवस के दृष्टिगत प्रदेश के अन्तरराज्यीय और अन्तरराष्ट्रीय सीमाओं पर सुरक्षा की पुख्ता व्यवस्था की जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि हम राज्य की रजत जयंती वर्ष में प्रवेश कर रहे हैं। उत्तराखण्ड को देश के अग्रणी राज्यों की श्रेणी में लाने के लिए हम सबको टीम उत्तराखण्ड की भावना से कार्य करना है।

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री डा. प्रेमचंद अग्रवाल, उपाध्यक्ष अवस्थापना अनुश्रवण परिषद विश्वास डाबर, मुख्य सचिव राधा रतूड़ी, अपर मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन, प्रमुख सचिव आर.के सुधांशु, सचिव शैलेश बगोली, नितेश झा, चन्द्रेश यादव, एडीजी ए.पी अंशुमन, गढ़वाल कमिश्नर विनय शंकर पाण्डेय, वर्चुअल माध्यम से सभी जिलाधिकारी एवं एसएसपी उपस्थित थे।

धामी कैबिनेट के फैसले से उत्तराखंड की संवरेगी आर्थिकी

कैबिनेट के फैसले को लेकर मत्स्य उत्पादकों में भारी उत्साह है। उन्होंने कहा कि धामी सरकार का यह फैसला उनकी आर्थिकी को संवारने में मील का पत्थर साबित होगा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पर्वतीय जिलों की अर्थव्यवस्था को सुधारने के लिए कई जनकल्याणकारी योजनाओं को मंजूरी दी है। इसी क्रम में स्थानीय किसानों और पशुपालकों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए विशेष अनुदान आधारित योजनाएं शुरू की गई हैं। कैबिनेट फैसले के अनुसार स्थानीय पशुपालक, कुक्कुट पालक और मत्स्य पालक अपनी भेड़, बकरी, कुक्कुट और मछली आईटीबीपी को बेच सकेंगे। इससे जहां स्थानीय ग्रामीणों को अपने उत्पादों के लिए घर के पास ही बाजार मिलेगा, वहीं वह अच्छी आय भी अर्जित कर सकेंगे।

उत्तराखंड में मत्स्य पालन की बेहतर संभावनाएं हैं। प्रदेश सरकार मत्स्य पालन को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए विभिन्न योजनाएं संचालित कर रही है। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के साथ ही मुख्यमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत 200 करोड रूपये़ की योजनाएं संचालित की जा रही हैं। योजना के तहत राज्य के सभी पर्वतीय जिलों में कोल्ड रनिंग वाटर में ट्राउट मछली का उत्पादन बढ़ाया जाएगा। रेनबो ट्राउट मछली की विशेषता है कि यह ठंडे पानी में उत्पादित होती है। पानी का तापमान 12 से 15 डिग्री सेल्सियस के बीच होना चाहिए। मत्स्य विभाग इसके लिए किसानों को प्रशिक्षित करता रहा है।

रेनबो ट्राउट मछली की मार्केटिंग पर जोर
रेनबो ट्राउट जिसे आमतौर पर हिमालयन मछली भी कहा जाता है, के उत्पादन और मार्केटिंग पर सरकार खास जोर दे रही है। इस मछली का उत्पादन मुख्य रूप से चमोली, उत्तरकाशी, रूद्रप्रयाग, टिहरी, बागेश्वर में किया जाता है। रेनबो ट्राउट महंगी होने से स्थानीय बाजारों में इसकी मांग कम है, लेकिन महानगरों में अच्छी डिमांड है। अब देश के दूसरे राज्यों में इसकी मार्केटिंग पर जोर दिया जा रहा है। इससे मत्स्य उत्पादक भी अच्छी आय अर्जित कर सकेंगे। राज्य सरकार ने मत्स्य सहकारी समितियों के माध्यम से मत्स्य उत्पादन को बढ़ाने और मार्केटिंग के लिए उत्तरा फिश की स्थापना की है। उत्तरा फिश हिमालयी ट्राउट और अन्य स्थानीय मछलियों को बाजार दिलाने के लिए काम कर रही है।

हमारे प्रदेश में मत्स्य पालन की असीम संभावनाएं हैं। मत्स्य पालन को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए विभिन्न योजनाएं शुरू की गई हैं। अधिक से अधिक मत्स्य पालकों को प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना और मुख्यमंत्री मत्स्य संपदा योजना से जोड़ा जा रहा है।

-पुष्कर सिंह धामी
मुख्यमंत्री, उत्तराखंड

मुख्य सचिव रतूड़ी ने जल जीवन मिशन की समीक्षा की

जिलाधिकारियों को जल जीवन मिशन के प्रभावी क्रियान्वयन की व्यक्तिगत जिम्मेदारी
जिलाधिकारियों को जल जीवन मिशन के कार्यों की प्रत्येक सप्ताह अनिवार्यतः समीक्षा के कड़े निर्देश देते हुए मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने जेजेएम के तहत योजनाओं की भौतकीय प्रगति, वित्तीय समापन, एक्शन टेकन रिपोर्ट, गांवों की हर घर जल प्रमाणीकरण की रिपोर्ट तलब की है। जल जीवन मिशन के तहत कार्यों की गुणवत्ता को लेकर विशेष सतर्कता बरतने की सख्त हिदायत देते हुए सीएस राधा रतूड़ी ने जिलाधिकारियों को फील्ड कार्यों की लगातार मॉनिटरिंग व निरीक्षण हेतु प्रशासनिक मशीनरी के साथ टेक्नीकल टीम को सक्रिय करने करने निर्देश दिए हैं। जेजेएम के तहत कार्यों की गुणवत्ता के मुद्दे का गम्भीरता से संज्ञान लेते हुए मुख्य सचिव ने इस सम्बन्ध में अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करते हुए कड़ी कार्यवाही के निर्देश दिए हैं।

मुख्य सचिव राधा रतूड़ी आज सचिवालय में जल जीवन मिशन के कार्यों की समीक्षा कर रही थी। उन्होंने जल जीवन मिशन के तहत अपेक्षाकृत कम प्रदर्शन करने वाले जनपदों की रिपोर्ट पर कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए सम्बन्धित जिलाधिकारियों को योजना की नियमित मॉनिटरिंग तथा प्रत्येक सप्ताह समीक्षा कर एटीआर, हर घर जल प्रमाणीकरण, वित्तीय समापन की रिपोर्ट जल्द से जल्द शासन को उपलब्ध करवाने के निर्देश दिए हैं।

जिलाधिकारियों को जल जीवन मिशन के प्रभावी क्रियान्वयन की व्यक्तिगत जिम्मेदारी लेने की नसीहत देते हुए मुख्य सचिव रतूड़ी ने सीडीओ, बीडीओ तथा फील्ड अधिकारियों के माध्यम से योजना का नियमित निरीक्षण करवाने के निर्देश जारी किए हैं। मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया है कि जल संस्थान या जल मिशन द्वारा किसी भी स्थिति में जिलाधिकारी के अनुमति के बिना रोड कटिंग के कार्यों को नहीं किया जाएगा।

बैठक में सचिव शैलेश बगौली, अपर सचिव नितिन भदौरिया सहित पेयजल, सिंचाई, वित्त विभाग के अधिकारी तथा वर्चुअल माध्यम से सभी जिलाधिकारी मौजूद रहे।

मुख्य सचिव ने शहरों के सीवर सिस्टम मैप पर रिपोर्ट की तलब

सचिवालय में केन्द्रपोषित योजना अमृत 2.0 के तहत गठित हाई पावर्ड स्टीयरिंग कमेटी की अध्यक्षता करते हुए मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने शहरों में सीवर लाइन के पूरी तरह से संचालन आरम्भ होने के सम्बन्ध में रिपोर्ट तलब की है। इस सम्बन्ध में सीएस राधा रतूड़ी ने सम्बन्धित सचिव द्वारा तत्काल इस विषय में समीक्षा करवाने के निर्देश दिए हैं। मुख्य सचिव ने विशेषरूप से देहरादून का सीवर सिस्टम मैप तत्काल प्रस्तुत करने के निर्देश दिए है।
देहरादून जैसे शहरों में सरकारी आवासीय कॉलोनियों में सीवर सिस्टम की स्थिति एवं एसटीपी से कनेक्टिविटी के सम्बन्ध में मुख्य सचिव ने जल संस्थान को तत्काल रिपोर्ट देने के निर्देश दिए हैं।

अमृत 2.0 जैसी सभी केन्द्रपोषित योजनाओं का पूरा लाभ राज्य को मिले इसके लिए मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने समयबद्धता से योजनाओं के डीपीआर बनाने तथा डीपीआर तैयारी के दौरान स्पष्ट मापदण्डों का अनुपालन करने के निर्देश दिए हैं। इस सम्बन्ध में विलम्ब पर सख्त नाराजगी जाहिर करते हुए मुख्य सचिव रतूड़ी ने योजनाओं के क्रियान्वयन में लापरवाही पर सख्त कार्यवाही के निर्देश दिए हैं। मुख्य सचिव रतूड़ी ने आज अमृत 2.0 के तहत गठित हाई पावर्ड स्टीयरिंग कमेटी बैठक में अमृत 2.0 (ट्रान्च-2) हेतु 356.52 करोड़ रूपये के स्टेट वॉटर एक्शन प्लान, अमृत 2.0 (ट्रान्च-2) के स्टेट वॉटर एक्शन प्लान में अनुमोदित 08 योजनाओं के पुनरीक्षित आगणनों पर अनुमोदन, अमृत 2.0 के घटक ‘ अमृत सरोवर’ के तहत एसएलटीसी में अनुमोदित नगर पंचायत दिनेशपुर की 02 योजनाओं पर अनुमोदन प्रदान किया।

बैठक में सचिव नितेश झा सहित वित्त, सिंचाई, पेयजल विभाग के अधिकारी मौजूद रहे।

सीएम बोले, प्रधानमंत्री मोदी के वचन तीसरा दशक उत्तराखंड का तेजी से कर रहे हैं चरितार्थ

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने न्यूज 18 के इंडिया डायमंड स्टेट्स समिट उत्तराखंड कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। उन्होंने कहा कि हम प्रधानमंत्री मोदी के वचन तीसरा दशक उत्तराखंड का, को तेजी से चरितार्थ करने की ओर तेजी से अग्रसर हो रहे हैं। नीति आयोग तथा अनेक राष्ट्रीय- अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों ने भी उत्तराखंड के प्रयासों को सराहा है।

सकल राज्य का घरेलू उत्पाद (जी.एस.डी.पी.) में हमने काफी वृद्धि की है। तेजी से बेरोजगारी दर घटाने में सफल हुए हैं। सख्त नकल विरोधी कानून, धर्मांतरण रोकथाम कानून, समान नागरिक संहिता, सरकारी नौकरी में महिला आरक्षण इत्यादि वैधानिक प्रावधानों के माध्यम से सभी को एकसमान कानून की परिधि में लाते हुए सुशासन व्यवस्था स्थापित करने का मार्ग प्रशस्त किया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जमीन और मातृशक्ति की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हमने बड़े और कड़े कानूनी प्रावधान किए हैं। अब उत्तराखंड में कोई भी व्यक्ति किसी भी तरह की धोखाधड़ी व अपराध करने की हिम्मत नहीं कर पाएगा।

उत्तराखंड के विकास से संबंधित उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य में पर्यावरणीय आपदाओं, जंगल और वन्य जीवों की बहुल्यता, पर्वतीय क्षेत्रों में निर्माण कार्यों के इंप्लीमेंटेशन करने की लागत में वृद्धि, फ्लोटिंग पॉपुलेशन प्रबंधन लागत इत्यादि दबाव के बावजूद भी उत्तराखंड का राष्ट्रीय- अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चमकदार स्टेट के रूप में उभरना बड़ी बात है। यही कारण है कि आज हर कोई अपना इन्वेस्टमेंट यहां करना चाहता है और उत्तराखंड के विकास में भागीदार बनना चाहता है।

उन्होंने कहा कि केदारनाथ घाटी आज भव्य और दिव्य रूप में डेवलप होकर उभरी है। हमने अवसंरचनात्मक विकास, बागवानी एविएशन, तीर्थाटन के क्षेत्र में भी बेहतर कार्य किए हैं।

कार्यक्रम के अंत में मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड की संस्कृति, रीति-नीति और परंपरा का सबसे उपयुक्त परिचय कराने वाले गीत बेडू पाको बारहमासा की पंक्ति गाकर सभी का दिल जीत लिया।

इस दौरान राज्यसभा सांसद नरेश बंसल, महानिदेशक सूचना बंशीधर तिवारी, न्यूज 18 इंडिया के एडिटर ज्योति कमल व ग्रुप एडिटर राहुल जोशी सहित अन्य लोग उपस्थित थे।

सीएम ने राज्य कर्मचारियों को दीपावली से पहले वेतन की मिली स्वीकृति

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर दीपावली पर्व के दृष्टिगत राज्य कर्मियों, पेंशन एवं पारिवारिक पेंशनरों को दीपावली से पूर्व वेतन एवं पेंशन भुगतान की स्वीकृति शासन द्वारा प्रदान की गयी है।

इस संबंध में अपर मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन द्वारा सभी विभागाध्यक्षों, जिलाधिकारियों, निदेशक कोषागार पेंशन एवं हकदारी तथा सभी वरिष्ठ कोषाधिकारियों को संबोधित शासनादेश में स्पष्ट किया गया है, कि दिनांक 31.10.2024 को दीपावली का त्यौहार होने के कारण समस्त राज्य कर्मचारियों, सहायता प्राप्त शिक्षण एवं प्राविधिक शिक्षण संस्थाओं, शहरी स्थानीय निकायों तथा कार्यप्रभारित कर्मचारियों को वेतन एवं उत्तराखण्ड के कोषागारों से पेंशन प्राप्त करने वाले पेंशनरों/पारिवारिक पेंशनरों को माह अक्टूबर, 2024 का पेंशन/पारिवारिक पेंशन का भुगतान दिनांक 30.10.2024 से पूर्व किये जाने की स्वीकृति प्रदान करने का निर्णय लिया गया है। उन्होने सभी संबंधित से उपरोक्त निर्णय का तत्परता से अनुपालन सुनिश्चित करने की भी अपेक्षा की है।