राज्य आपदा परिचालन केंद्र पहुंचे सीएम, लिया प्रदेश में बारिश की स्थिति का जायजा

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आईटी पार्क देहरादून स्थित राज्य आपदा परिचालन केन्द्र का औचक निरीक्षण किया। उन्होंने प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में हो रही बारिश की स्थिति का जायजा लेते हुए अधिकारियों को हर समय अलर्ट मोड में रहने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने सचिव आपदा प्रबंधन को निर्देश दिये कि वे निरन्तर जिलाधिकारियों से समन्वय बना कर रखें। नदियों के जल स्तर पर नियमित निगरानी बनाए रखें।

मुख्यमंत्री ने राज्य आपदा परिचालन केन्द्र से जिलाधिकारी नैनीताल, बागेश्वर, टिहरी, रुद्रप्रयाग, पौड़ी, देहरादून से फोन के माध्यम से वार्ता कर बारिश की स्थिति, सड़कों की स्थिति, विद्युत और पेयजल की उपलब्धता तथा जलभराव के बारे में जानकारी ली। उन्होंने जिलाधिकारियों को निर्देश दिये कि अतिवृष्टि के कारण यातायात बाधित न हो, सड़कों के क्षतिग्रस्त होने की स्थिति में उन्हें शीघ्र खुलवाया जाए। जल भराव की स्थिति में निकासी की उचित व्यवस्था रखी जाए। उन्होंने निर्देश दिये कि नदियों के जल स्तर बढ़ने की स्थिति में नदी किनारे एवं अन्य संवेदनशील इलाकों में रहने वाले लोगों को जागरूक किया जाए।

मुख्यमंत्री ने सचिव आपदा प्रबंधन को निर्देश दिये कि हर जिले की अतिवृष्टि की स्तिथि पर निरन्तर नज़र बनाए रखें। जिलों के साथ परस्पर समन्वय स्थापित करें, ताकि किसी भी आपातकाल स्थिति से निपटा जा सके। राज्य के विभिन्न संवेदनशील इलाकों, अत्यधिक बारिश एवं आपदा ग्रस्त वाले इलाकों को लेकर भी विशेष नज़र बनाए रखें। मुख्यमंत्री ने कहा कि आपदा को लेकर किसी भी प्रकार की सूचना प्राप्त होने पर तत्काल कार्यवाही की जाए। रिस्पांस टाईम कम से कम रखने के निर्देश मुख्यमंत्री ने दिये।

इस अवसर सचिव आपदा प्रबंधन विनोद कुमार सुमन, अपर सचिव आनन्द स्वरूप एवं संबंधित अधिकारीगण उपस्थित रहे।

जीवन की प्रथम गुरू माता, उनके नाम पर पौधारोपण करना सौभाग्य की बातः सीएम

गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ’एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के अंतर्गत अपनी माताजी के साथ पौधारोपण किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि जीवन में व्यक्ति की सबसे पहली गुरू मां ही हैं। ऐसे में मां के नाम पौधारोपण अभियान में शामिल होना किसी सौभाग्य से कम नहीं है।

कैनाल रोड स्थित गंगोत्री विहार में रिस्पना नदी के किनारे खाली भूमि पर मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण के तत्वावधान में पौधारोपण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपनी माताजी विशना देवी के नाम से पौधारोपण किया। इस अवसर पर उनकी माताजी भी मौजूद रहीं।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ’एक पेड़ माँ के नाम’ लगाने की देशवासियों से अपील की थी। राज्य में इसे अभियान के रूप में लिया गया है। मुख्यमंत्री ने सभी प्रदेशवासियों से आह्वाहन किया है कि इस मानसून सीजन में एक पेड़ माँ के नाम जरूर लगाएं। उन्होंने कहा कि सभी के जीवन में माँ पहली गुरु होती हैं। गुरु पूर्णिमा की भी उन्होंने प्रदेशवासियों को शुभकामना दी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हरेला पर्व से 15 अगस्त तक राज्य में बृहद स्तर पर वृक्षारोपण अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान से सामाजिक संस्थाओं, पर्यावरण के क्षेत्र में कार्य करने वाले लोगों, स्वयं सहायता समूहों को भी जोड़ा गया है। राज्य से ग्राम पंचायत स्तर वृक्षारोपण अभियान चलाया जा रहा है।

इस अवसर पर एमडीडीए उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने कहा कि जिस भूमि पर यह पौधारोपण किया जा रहा है, यहां आने वाले दिनों में पार्क का निर्माण किया जाएगा। उन्होंने बताया कि शुरुआती चरण में भूमि की चारों ओर से फेंसिंग कराई जाएगी ताकि जानवर पौधों को नुकसान न पहुँचा सकें। साथ ही यहाँ पर पैदल ट्रैक के निर्माण के साथ ही इस तरह के पौधों को लगाया जाए जिससे यहां बायो डाइवर्सिटी को भी बढ़ावा मिल सके। इस अवसर पर उपाध्यक्ष ने अपनी माताजी सावित्री देवी जी के नाम से भी पौधारोपण किया।

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री डा. प्रेमचंद अग्रवाल, गणेश जोशी, निवर्तमान मेयर सुनील उनियाल गामा, सचिव आर. मीनाक्षी सुंदरम, शैलेश बगोली ने भी पौधरोपण किया।

पंजीकृत निर्माण श्रमिकों के बच्चों को मोबाइल लर्निग स्कूल की सुविधा को बसों का शुभारंभ

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय में मुख्यमंत्री विद्यार्थी कल्याण योजना-2024 का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने उत्तराखण्ड भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड के अन्तर्गत पंजीकृत निर्माण श्रमिकों के बच्चों को मोबाइल लर्निंग स्कूल की सुविधा के लिए दो बसों का शुभारंभ भी किया।

मुख्यमंत्री द्वारा उत्तराखण्ड भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड के अंतर्गत पंजीकृत निर्माण श्रमिकों के बच्चों को जनपद हरिद्वार और जनपद उधमसिंह नगर के लिए मोबाइल लर्निंग स्कूल के लिए एक-एक बस का फ्लैग ऑफ किया गया। इससे पहले देहरादून और नैनीताल जनपदों के लिए इस पहल की शुरूआत की गई थी, जिसके तहत 314 बच्चे प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड द्वारा पंजीकृत निर्माण श्रमिकों के 75 बच्चों का प्रतिवर्ष चयन कर रुद्रपुर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में उच्च तकनीकि शिक्षा प्रदान की जायेगी। इन बच्चों को मेकेनिकल, सिविल, इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियरिंग जैसे विषय में 03 वर्ष का तकनीकि प्रशिक्षण प्रदान कर उनके रोजगार के लिए प्लेसमेंट की व्यवस्था भी की जायेगी। इन बच्चों के प्रशिक्षण का खर्चा सरकार द्वारा वहन किया जायेगा। उन्होंने कहा कि पंजीकृत निर्माण श्रमिकों के बच्चों को इस तरह के प्रशिक्षण प्रदान करने से उन्हें अपने कार्यक्षेत्र में आगे आने का अवसर मिलेगा।

इस अवसर पर विधायक सविता कपूर, अध्यक्ष उत्तराखण्ड भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड आर.मीनाक्षी सुंदरम, सचिव उत्तराखण्ड भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड दीप्ति सिंह एवं संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री के निर्देश पर अग्निवीरों को नियोजित करने को ठोस कार्यक्रम को दिया जा रहा है फाइनल टच

उत्तराखण्ड सरकार अग्निवीरों के सुरक्षित भविष्य के लिए उन्हें नियोजित करने का ठोस कार्यक्रम तैयार करने जा रही है। इसमें सेना में अग्निवीर का चार साल पूरा करने वाले जवानों को उत्तराखण्ड पुलिस व राज्य के अन्य सरकारी विभागों में भर्ती होने के लिए कोटा देने का प्रस्ताव शामिल है। इसके अलावा राज्य में कौशल प्रशिक्षण योजना भी लागू किए जाने की तैयारी है जिसके जरिए रिटायर्ड अग्निवीरों को कई क्षेत्रों में रोजगार सम्बंधित प्रशिक्षण दिया जाएगा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस सम्बंध में जल्द से जल्द प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश अधिकारियों को दिए हैं। आवश्यकता होने पर आगामी विधानसभा सत्र मे प्रस्ताव भी लाया जा सकता है।

चार साल सेना की नौकरी के बाद वापस आने वाले अग्निवीर अपने सुरक्षित भविष्य को लेकर आशंकित न रहें इसके लिए मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने ठोस योजना तैयार करने के निर्देश अधिकारियों को दिए हैं। धामी ने कहा है कि उत्तराखण्ड सैनिक बाहुल्य प्रदेश है। यहां के युवा बड़े पैमाने पर भारतीय सेना में भर्ती होते हैं। लिहाजा, सेना में चार साल की सेवा पूरी करने के बाद रिटायर्ड जवानों को नियोजित करने में राज्य सरकार अपनी तरफ से कोई कसर बाकी नहीं रखेगी। सरकार चाहती है कि सेना में 4 साल पूरे होने के बाद भी अग्निवीरों को राज्य में नौकरी व रोजगार के भरपूर अवसर मिलें। रिटायर्ड अग्निवीरों का राज्य की सेवा में भरपूर उपयोग किया जाएगा ताकि उनके नियोजित होने के साथ ही वे भी राज्य के विकास में सहभागी बन सकें। सैनिक कल्याण विभाग इस सम्बंध में प्रस्ताव तैयार करने में जुट गया है।

अग्निवीरों के समायोजन को लेकर गंभीरता से कार्य कर रही हमारी सरकार- मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कैनाल रोड पर आयोजित कार्यक्रम के उपरांत मीडिया से अनौपचारिक बातचीत में अग्निवीरों के समायोजन को लेकर कहा कि इस दिशा में हमारी सरकार गंभीरता से कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि मैं खुद एक सैनिक परिवार में पैदा हुआ हूँ। जब देश में यह योजना आई थी, उस समय भी हमने राज्य के बहुत सारे सैनिक अफसरों, सेना के लोगों के साथ, जवानों के साथ, जो सेना में अपना पूरा जीवन लगाकर आए हैं, सबके साथ हमने बैठक की थी और मैंने जून 2022 को तभी कहा था कि पुलिस समेत जितने भी हमारे राज्य के अंदर काम करने वाले विभाग हैं, जिन-,जिन विभागों में देश सेवा के बाद जो अग्निवीर आएंगे हम उनको विभागों में समायोजित करेंगे, उनको प्राथमिकता देंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि अगर अग्निवीरों के लिए आरक्षण का प्रावधान करना होगा तो मंत्रिमंडल में निर्णय करके हम आरक्षण का प्रावधान करेंगे और अगर कोई एक्ट वगैरह बनाना होगा तो वह भी हम विधानसभा में जरूर लेकर आएंगे।

सीएस ने पेयजल की गुणवता की मॉनिटरिंग में आमजन की भागीदारी बढ़ाने के लिए नागरिकों को प्रशिक्षण देने के दिए निर्देश

सीएस राधा रतूड़ी ने भारत नेट प्रोजेक्ट के तहत राज्य में 697 ग्राम पंचायत में से अवशेष 227 ग्राम पंचायत भवनों में समयबद्धता से विद्युतीकरण के निर्देश दिए हैं ताकि इनमें जल्द से जल्द ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी दी जा सके। मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने निर्देश दिए कि राज्य की कठिन भौगोलिक स्थिति, सामरिक महत्व और प्राकृतिक आपदाओं के प्रति संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए भारतनेट प्रोजेक्ट को समयबद्ध तरीके से क्रियान्वित किया जाना चाहिए।

मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने सचिवालय में पीएम प्रगति पोर्टल के तहत भारतनेट, दिल्ली देहरादून एक्सप्रेस-वे, देवबंद रुड़की रेलवे लाइन प्रोजेक्ट तथा AMRUT 2.0 (Atal Mission For Rejuvenation & Urban Transformation 2.0) vkSj (PM –ABHIM) PM- Ayushman Bharat Health Infrastructure Mission कार्यक्रमों की समीक्षा की।

बैठक में राज्य में भारतनेट प्रोजेक्ट की प्रगति के सम्बन्ध में जानकारी दी गई कि 697 ग्राम पंचायतों में से 339 को स्थायी कनेक्शन के साथ विद्युतीकृत कर दिया गया है। 173 ग्राम पंचायतों ने विद्युतीकरण के लिए यूपीसीएल को आवश्यक शुल्क का भुगतान कर दिया है। 43 ग्राम पंचायतों को शहरी क्षेत्र में स्थानांतरित कर दिया गया है, जहां 33 के विद्युतीकरण की प्रक्रिया पूरी हो गई है और शेष 10 साइटों को विद्यालयी शिक्षा और महिला एवं बाल विकास विभाग को हस्तांतरित किया जा रहा है। 98 ग्राम पंचायतों को बिना ग्राम पंचायत भवन की श्रेणी में सूचीबद्ध किया गया है, जो अनिश्चित स्थिति में है। जीपीओएन उपकरण को स्थानांतरित करने के लिए वैकल्पिक साइटों की पहचान की जा रही है। शेष 44 ग्राम पंचायतें बिजली कनेक्शन के लिए आवेदन करने और भुगतान करने की प्रक्रिया में हैं।

मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने दिल्ली देहरादून एक्सप्रेस वे तथा देवबंद रुड़की रेलवे लाइन प्रोजेक्ट्स के त्वरित क्रियान्वयन के निर्देश दिए हैं। उन्होंने इस संबंध में उत्तर प्रदेश शासन से प्रभावी समन्वय के भी निर्देश दिए हैं।
मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने सचिव शहरी विकास के माध्यम से AMRUT 2.0 कार्यक्रम के तहत संचालित प्रोजेक्ट्स की नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही मुख्य सचिव ने पेयजल की गुणवता की मॉनिटरिंग में आमजन की भागीदारी बढ़ाने के लिए नागरिकों को प्रशिक्षण देने के निर्देश दिए हैं। मुख्य सचिव ने विशेष रूप से महिला स्वयं सहायता समूहों को वॉटर टेस्टिंग की ट्रेनिंग तथा वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट के संचालन के संबंध में जानकारी देने के निर्देश दिए हैं।

मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने PM- ABHIM (PM Ayushman Bharat Health Infrastructure Mission) के तहत विभिन्न गतिविधियों के लिए टाइमबाउंड एक्शन प्लान तैयार करने के निर्देश दिए हैं।
मुख्य सचिव ने PMS पोर्टल पर उक्त सभी प्रोजेक्ट्स की मैपिंग, प्रगति, फोटो तथा व्यय की जानकारी नियमित रूप से अपडेट करने के निर्देश दिए हैं।

अभाविप ने प्रतिभा सम्मान समारोह में नगर के मेधावियों को सम्मानित किया


मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने डी.ए.वी पी.जी कॉलेज में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद द्वारा आयोजित महानगर छात्र सम्मेलन में बतौर मुख्य अतिथि प्रतिभाग किया। इस अवसर पर उन्होंने प्रतिभा सम्मान समारोह के दौरान हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षा में उत्कृष्ट अंक प्राप्त करने वाले मेधावी छात्र-छात्राओं को सम्मानित भी किया। मुख्यमंत्री ने डी.ए.वी.पी.जी. कॉलेज देहरादून में अटल बिहारी बाजपेयी उत्कृष्ट शैक्षणिक ब्लॉक के 06 नये कक्षा कक्षों के निर्माण के लिए 01 करोड़ की धनराशि प्रदान करने की भी घोषणा की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जब भी वे कॉलेजों के कार्यक्रमों में शामिल होते हैं, तो उनके मन में ऊर्जा का नया संचार होता है। उन्होंने कहा कि लखनऊ विश्वविद्यालय में शिक्षा ग्रहण करने के दौरान वे अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़े रहे। मुख्यमंत्री ने कहा कि एबीवीपी स्वामी विवेकानन्द के आदर्शों पर चलने वाला संगठन है, जो छात्रहित और राष्ट्रहित के लिये कार्य करता है। उन्होंने कहा कि आज वे समाज के लिए जो योगदान दे पा रहे हैं, उसमें विद्यार्थी जीवन का महत्वपूर्ण योगदान है। उन्होंने कहा कि आज शिक्षा के मन्दिर से देश की सीमा तक विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ता अपना योगदान दे रहे हैं। अनेक अवसरों पर विद्यार्थी परिषद द्वारा सामाजिक सरोकारों से संबंधित कार्य किये जाते रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि युवाओं को हर क्षेत्र में कार्य करने का मौका मिले इसके लिए राज्य सरकार द्वारा निरंतर प्रयास किये जा रहे हैं। प्रदेश में सख्त नकल विरोधी कानून लागू किया गया है। इसके लागू होने के बाद से सभी भर्ती प्रक्रियाएं पूर्ण पारदर्शिता के साथ हुई हैं। नकल विरोधी कानून लागू होने के बाद मेहनत करने वाले अभ्यर्थियों का चयन अनेक परीक्षाओं में हो रहा है। परीक्षा के दिन अभ्यर्थियों को रोड़बेज की बसों में किराये में 50 प्रतिशत की छूट दी जा रही है। उन्होंने सभी विद्यार्थियों से अपील की कि इस मानसून सीजन में एक-एक पौधा अवश्य लगाये जाने की भी अपील की।

इस अवसर पर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की प्रदेश अध्यक्ष डॉ. ममता सिंह, क्षेत्रीय संगठन मंत्री मनोज निखरा, राकेश ओबेरॉय अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से अंकित शुक्ल, ऋषभ रावत, अंकित सुन्दरियाल, आयुषी पैन्यूली एवं अन्य पदाधिकारी उपस्थित थे।

मैराथन बैठक में विभागीय मंत्री ने अधिकारियों को दिये कार्यों में तेजी के निर्देश

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) की विभिन्न स्वास्थ्य योजनाओं का लाभ सूबे के प्रत्येक व्यक्ति को मिले। जिसके लिये योजनाओं के क्रियान्वयन एवं मॉनिटिरिंग के साथ ही प्रचार-प्रसार पर विशेष ध्यान दिया जायेगा। जनपद स्तर पर मुख्य चिकित्साधिकारी समय-समय पर योजनाओं की समीक्षा करेंगे।

चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने आज स्वास्थ्य महानिदेशालय स्थित एनएचएम सभागार में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की समीक्षा बैठक ली। जिसमें उन्होंने केन्द्र सरकार द्वारा वित्त पोषित विभिन्न स्वास्थ्य योजनाओं की विस्तृत समीक्षा की। डॉ. रावत ने कहा कि केन्द्र व राज्य सरकार द्वारा सूबे की स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ आमजन तक पहुचाने के दृष्टिगत विभिन्न योजनाएं संचालित की जा रही है। जिनके धरातल पर क्रियान्वयन, मॉनिटिरिंग व प्रचार-प्रसार पर विशेष ध्यान दिये जाने की आवश्यकता है। इसके लिये परियोजना से जुड़े सभी अधिकारियों एवं कार्मिकों को अपने दायित्वों का निर्वहन पूरी निष्ठा के साथ करना होगा। उन्होंने कहा कि राज्य स्तर के साथ-साथ जनपद स्तर पर भी विभिन्न योजनाओं की समय पर मॉनिटिरिंग अति आवश्यक है। जिसके लिये उन्होंने सभी जनपदों के मुख्य चिकित्साधिकारियों एवं परियोजना के डीपीएम को निर्देश दिये हैं। विभागीय मंत्री ने कहा कि एनएचएम के अंतर्गत राज्य में लगभग 28 स्वास्थ्य परियोजनाएं संचालित की जा रही हैं, जिसमें मोतियाविंद का निःशुल्क उपचार एवं चश्मा वितरण, टीबी उन्मूलन, जनन सुरक्षा, राष्ट्रीय बाल सुरक्षा, राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम, एनसीडी एवं कृमि मुक्त कार्यक्रम, संस्थागत प्रसव, तम्बाकू उन्मूलन, निःशुल्क जांच एवं औषधि वितरण तथा आशा कार्यक्रम आदि प्रमुख है। जिनका लाभ शत-प्रतिशत प्रदेश के अंतिम गांव के लोगों तक पहुंचाना सरकार की जिम्मेदारी है। इसके लिये विभागीय अधिकारियों को विभिन्न योजनाओं एवं कार्यक्रमों की गाइडलाइन के अनुरूप शत-प्रतिशत परिणाम देना होगा। साथ ही उन्होंने कहा कि जननी सुरक्षा योजना के अंतर्गत प्रदेश में शत-प्रतिशत संस्थागत प्रसव के लिये रोड़मैप तैयार करने की आवश्यकता है। इसके अतिरिक्त खुशियों की सवारी कार्यक्रम के तहत वाहनों की संख्या बढ़ाई जायेगी जिसके लिये प्रत्येक जनपद से सीएमओ प्रस्ताव उपलब्ध करायेंगे।

समीक्षा बैठक में दौरान विभिन्न स्वास्थ्य कार्यक्रमों एवं परियोजनाओं से जुड़े अधिकारियों द्वारा योजना के संबंध में पावर प्वाइंट प्रजेंटेशन दिया गया। इस दौरान विभागीय मंत्री ने कई योजनाओं की प्रगति पर असंतोष व्यक्त करते हुये अधिकारियों को फटकार लगाते हुये कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिये। प्रस्तुति के दौरान अधिकारियों द्वारा बताया गया कि टीबी उन्मूलन एवं राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम में प्रदेश का राष्ट्रीय स्तर पर चौथा स्थान है जबकि जननी सुरक्षा योजना एवं संस्थागत प्रसव कार्यक्रमों की प्रगति को सभी संतोषजनक बताया गया।

बैठक में राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य एवं अनुश्रवण परिषद उत्तराखंड के उपाध्यक्ष सुरेश भट्ट, कुलपति उत्तराखंड मेडिकल यूनिवर्सिटी प्रो. एम.एल. ब्रह्म भट्ट, एमडी एनएचएम स्वाती भदौरिया, सलाहकार एनएचएम डॉ. तृप्ति बहुगुणा, अपर सचिव वित्त अमिता जोशी, महानिदेशक स्वास्थ्य डॉ. तारा आर्य, निदेशक डॉ. सुनीता टम्टा, डॉ. मीतू शाह, वित्त नियंत्रक एनएचएम दिपाली भरने, सीएमओ देहरादून डॉ. संजय जैन, डॉ. आर.के.सिंह, डॉ. तुहिन कुमार, डॉ. पंकज सिंह, डॉ. महेन्द्र मौर्य सहित अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे जबकि सभी जनपदों के मुख्य चिकित्साधिकारी व डीपीएम ने बैठक में वर्चुअल माध्यम से प्रतिभाग किया।

सीएम ने विभिन्न शासकीय भवनों में स्थापित सोलर पावर प्लांटों का किया लोकार्पण

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री कैम्प कार्यालय स्थित मुख्य सेवक सदन में उरेडा द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं का लोकार्पण एवं शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने सोलर वाटर हीटर अनुदान योजना में आवेदन एवं अनुदान निर्गत किये जाने के लिए पोर्टल www.uredaonline.uk.gov.in का शुभारम्भ किया गया। प्रदेश के राजकीय भवनों पर स्थापित सोलर पावर प्लान्ट एवं सोलर वाटर हीटर, 27 भवनों पर 1.26 मे.वा. क्षमता के सोलर पावर प्लान्ट तथा 44 राजकीय भवनों पर स्थापित 48400 लीटर क्षमता के सोलर वाटर हीटर सयंत्रों का लोकार्पण किया। कार्यक्रम के मुख्यमंत्री सौर स्वरोजगार योजना के 47 लाभार्थियों को परियोजना आवंटन पत्र प्रदान किये गये तथा 04 संख्या लाभार्थियों को पी0एम0 सूर्यघर योजना के अन्तर्गत राज्य अनुदान के चेक प्रदान किये गये।

मुख्यमंत्री ने कहा कि नवीकरणीय ऊर्जा का महत्व पूरे देश में तेजी से बढ़ा है। नवीकरणीय ऊर्जा के स्रोत पांरपरिक जीवाश्म आधारित ईंधन के एक बेहतर विकल्प के रूप में उभरे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भारत से कार्बन उत्सर्जन को खत्म करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए पंचामृत कार्य योजना के तहत भारत में वर्ष 2030 तक 500 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा का उत्पादन करने का लक्ष्य रखा गया है। 2070 तक देश को कार्बन न्यूट्रल बनाने का लक्ष्य रखा गया है। प्रधानमंत्री कुसुम योजना के तहत किसानों को सौर पंप और सौर ऊर्जा संयंत्रों की स्थापना के लिए सब्सिडी और समर्थन प्राप्त हो रहा है, जिससे कृषि क्षेत्र में नवीकरणीय ऊर्जा का उपयोग भी बढ़ रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड में सौर ऊर्जा एवं जल विद्युत के क्षेत्र में काफी संभावनाएं हैं। राज्य में सौर ऊर्जा को तेजी से बढ़ावा देने के लिए नई सौर ऊर्जा नीति बनाई गई है। वर्ष 2026 तक राज्य के सभी शासकीय भवनों पर सोलर पावर प्लांट स्थापित करने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए 100 करोड़ रूपये की धनराशि का प्राविधान किया गया है। रूफटॉप सोलर प्लांट को बढ़ावा देने के लिए केन्द्र एवं राज्य सरकार की ओर से संयुक्त रूप से 70 प्रतिशत की सब्सिडी दी जा रही है। पी.एम. सूर्यघर योजना के तहत रूफटॉप सोलर पावर प्लांट की स्थापना के लिए राज्य में अभी तक 734 लाभार्थियों को 3.72 करोड़ रूपये का अनुदान दिया जा चुका है। घरेलू और गैर घरेलू उपभोक्ताओं के लिए सोलर वाटर हीटर संयंत्र की स्थापना पर 30 से 50 प्रतिशत तक का अनुदान प्रदान करने का निर्णय लिया गया है। मुख्यमंत्री सौर स्वरोजगार योजना के तहत सोलर पावर प्लांट की स्थापना के माध्यम से अब तक 750 विकासकर्ताओं को 133 मेगावाट क्षमता के सोलर पावर प्लांट दिये गये हैं। इस योजना के माध्यम से 2026 तक 250 मेगावाट की क्षमता वाले सोलर प्लांट की स्थापना का लक्ष्य रखा गया है।

कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि सौर ऊर्जा के क्षेत्र में राज्य में अनेक संभावनाएं हैं। स्वरोजगार को बढ़ावा देने में सौर ऊर्जा महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। ऊर्जा आधारित प्रदेश उत्तराखण्ड की मूल अवधारणा में था। उत्तराखण्ड में ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा देने में सौर ऊर्जा महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

इस अवसर पर विधायक बंशीधर भगत, सचिव ऊर्जा आर मीनाक्षी सुन्दरम, निदेशक उरेडा रंजना राजगुरू, एमडी पिटकुल पी.सी ध्यानी, उप महानिर्देशक एनआईसी अशेष कुमार अग्रवाल, महाप्रबंधक पंजाब नेशनल बैंक सचिदानंद दुबे, मुख्य परियोजना अधिकारी उरेडा मनोज कुमार, उप-मुख्य परियोजना अधिकारी, अखिलेश कुमार शर्मा, संदीप भट्ट, वंदना उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री ने किया उत्तराखंड सकल पर्यावरण उत्पाद सूचकांक लांच

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सचिवालय में पारिस्थितिकी को अर्थव्यवस्था से जोड़ने के लिए ‘‘उत्तराखण्ड सकल पर्यावरण उत्पाद सूचकांक’’ (जी.ई.पी) लॉच किया। जी.ई.पी का शुभारम्भ करने वाला उत्तराखण्ड पहला राज्य है। उत्तराखण्ड सकल पर्यावरण उत्पाद सूचकांक का आंकलन 04 मुख्य घटकों जल, वायु, वन और मृदा के आधार पर किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जी.ई.पी के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए एक प्रकोष्ठ बनाया जायेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में जी.ई.पी लागू होने से इकोलॉजी और इकोनॉमी के बीच बेहतर सामंजस्य स्थापित होगा। इस सूचकांक के परिणामों के विश्लेषण से भविष्य में पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में लक्ष्य निर्धारित करने में मदद मिलेगी। पर्यावरण संरक्षण के प्रति लोगों में और जागरूकता बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड में प्रकृति प्रदत्त अनेक प्रकार की वन संपदा है, आवश्यकता है इनके सदुपयोग की। हमें वृक्षारोपण के साथ जल स्रोतों के पुनर्जीवीकरण की दिशा में तेजी से आगे बढ़ना है। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड दुनिया को पर्यावरण के क्षेत्र में दिशा देने का कार्य करता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जल संरक्षण की दिशा में राज्य में तेजी से कार्य किये जा रहे हैं। राज्य में अमृत सरोवरों की संख्या में तेजी से वृद्धि की जा रही है। जिलाधिकारियों, वन विभाग, सारा और अन्य कार्यदाई संस्थाओं को इनके संरक्षण और जल स्तर बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास करने के निर्देश दिये हैं। उन्होंने कहा कि 16 जुलाई से 15 अगस्त तक राज्य में बृहद स्तर पर वृक्षारोपण अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के तहत 01 लाख 64 हजार पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया है। हरेला पर्व के दिन 50 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया था। जनसहभागिता से भी वृक्षारोपण किया जा रहा है।
बैठक में हैस्को संस्था के प्रमुख पद्मभूषण डॉ. अनिल प्रकाश जोशी ने सकल पर्यावरण उत्पाद सूचकांक का प्रस्तुतीकरण करते हुए अवगत कराया गया कि विभिन्न विकासपरक योजनाओं, औद्योगिक प्रक्रियाओं व सरकार द्वारा बनाये गये नियमों इत्यादि के अनुपालन का जो परिणाम है वह सकल रूप से हमारी स्थानीय पर्यावरणीय गुणवत्ता पर देखने को मिलता है। पर्यावरणीय कारकों में हवा, पानी, मिट्टी, जंगल और अन्य कारकों में अगर सुधार हो रहा हो तो जीईपी सूचकांक में वृद्धि देखने को मिलती है। इससे ज्ञात होता है कि हमारा सिस्टम पर्यावरण के अनुकूल है और विकासात्मक गतिविधियों के बावजूद भी यह स्थिर और सुधारात्मक है। यदि हमारी पर्यावरणीय गुणवत्ता में सुधार नहीं हो रहा है और उसमें कोई गिरावट दिखायी दे रही है या उसमें कोई नकारात्मकता दिखायी दती है तो इससे जीईपी सूचकांक में गिरावट देखने को मिलती है।
इस अवसर पर वन मंत्री सुबोध उनियाल, उपाध्यक्ष अवस्थापना अनुश्रवण परिषद विश्वास डाबर, मुख्य सचिव राधा रतूड़ी, प्रमुख सचिव आर. के सुधांशु, प्रमुख वन संरक्षक डॉ. धनंजय मोहन, विशेष सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते, महानिदेशक यूकॉस्ट प्रो. दुर्गेश पंत एवं संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।

मानव वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए वन विभाग प्रभावी प्रयास करेंः सीएम

मानव वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए वन विभाग द्वारा और प्रभावी प्रयास किये जाएं। इसके निवारण के लिए सुनियोजित नीति बनाते हुए इस पर गंभीरता से कार्य किया जाए। मानव-वन्यजीव संघर्ष में मृतकों के परिजनों और घायलों को यथाशीघ्र अनुमन्य सहायता उपलब्ध करवाई जाए। जंगलों से लगते जो स्थान बायो फेंसिंग से वंचित रह गए हैं, उन स्थानों को अतिशीघ्र बायो फेंसिंग से आच्छादित किया जाए। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ये निर्देश सचिवालय में उत्तराखंड राज्य वन्यजीव बोर्ड की 20 वीं बैठक की अध्यक्षता करते हुए दिये।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मानव वन्यजीव संघर्ष की रोकथाम हेतु चिन्हित हॉट स्पॉट क्षेत्रों में वन कर्मियों की गश्त बढ़ाई जाए एवं वन कर्मियों को पर्याप्त मात्रा में उपकरण कैमरा ट्रैप, एनाईडर, ट्रैक्यूलाइज गन आदि दी जाए। साथ ही आधुनिक उपकरण जैसे ड्रोन के माध्यम से भी जंगली जानवरों पर नज़र रखी जाए। जिन प्रभागों में मानव वन्यजीव संघर्ष के ज्यादा मामले आ रहे हैं उन स्थानों पर विशेष नजर रखी जाए।

मुख्यमंत्री ने हल्द्वानी में प्रस्तावित जू एंड सफारी के मास्टर प्लान पर जल्द डीपीआर बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने राजाजी टाइगर रिजर्व के अन्तर्गत चौरासी कुटिया का अन्तर्राष्ट्रीय मानकों के अनुसार विकास एवं उच्चीकरण अति शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने राज्य में वन्य जीव आधारित पर्यटन को बढ़ावा देने हेतु विभिन्न नेशनल पार्कों के व्यापक प्रचार प्रसार के लिए वाइल्डलाइफ आधारित डॉक्यूमेंट्री, फिल्म बनाने के भी निर्देश दिए। साथ ही विभिन्न स्थानों पर बर्ड वाचिंग कैंप का आयोजन भी किये जाने को कहा। उन्होंने कहा कि वन क्षेत्रों में प्रस्तावित विकास योजनाओं को नियमों के दायरे में रहकर जल्द पूरा किया जाए, ताकि आमजन को सहूलियत मिल सके।

बैठक में जानकारी दी गई कि जमरानी बाँध बहुउद्देशीय परियोजना के लिए नेशनल बोर्ड फॉर वाइल्डलाईफ से स्वीकृति मिल चुकी है। जनपद-पौड़ी गढ़वाल के विकासखण्ड यमकेश्वर में किमसार-भोगपुर मोटर रोड के लिए नेशनल बोर्ड फॉर वाइल्डलाईफ से स्वीकृति प्राप्त हो गई है। जिसका निर्माण जल्द किया जाएगा। 9 सालों से लंबित राजाजी टाइगर रिजर्व हेतु टाइगर कंजरवेशन फॉउण्डेशन का गठन कर लिया गया है। राज्य में वन्यजीव प्रबन्धन के समस्त बिन्दुओं को सम्मिलित करते हुये फॉरेस्ट लैण्डस्केप रीस्टोरेशन के 10 वर्षीय प्रस्ताव को तैयार किया जा रहा है। जिसके लिए वित्तीय वर्ष 2024-25 में 32 करोड़ की धनराशि भारत सरकार से स्वीकृत हो गई है। प्रदेश में मानव वन्यजीव संघर्ष की रोकथाम हेतु वित्तीय वर्ष 2023-24 में आधुनिक उपकरणों के क्रय हेतु वन प्रभागों को 10 करोड़ 50 लाख रूपये की धनराशि आवंटित की गई है।

बैठक में बताया गया कि वर्ष 2009 के पश्चात राज्य में वन विश्राम भवनों की दरों को पुनरीक्षित किया गया है। केन्द्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण, भारत सरकार द्वारा हल्द्वानी जू एण्ड सफारी, हल्द्वानी के मास्टर प्लान को स्वीकृति प्रदान की गयी। प्रदेश में बंदर बंध्याकरण का कार्य मिशन मोड में किया जा रहा है, जिसमें जुलाई 2023 से 31 मार्च 2024 तक 39,398 बंदरों का बंध्याकरण किया चुका है। मानव वन्यजीव संघर्ष की रोकथाम के लिए 05 वन प्रभागों (गढ़वाल, टिहरी, पिथौरागढ़, बागेश्वर एवं नरेन्द्रनगर) के अन्तर्गत “लिविंग विद लैपर्ड“ कार्यक्रम चलाया जा रहा है। मानव वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं की त्वरित रोकथाम के लिये 31 वन प्रभागों के अन्तर्गत 65 त्वरित प्रतिक्रिया दल का गठन किया गया है।

बैठक में वन मंत्री सुबोध उनियाल, विधायक बंशीधर भगत, दीवान सिंह बिष्ट, सुरेश सिंह चौहान, मुख्य सचिव राधा रतूड़ी, प्रमुख सचिव आर.के सुधांशु, प्रमुख वन संरक्षक डॉ. धनंजय मोहन, प्रमुख वन संरक्षक, वन्यजीव डॉ. समीर सिन्हा, विशेष सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते, एडीजी ए.पी अंशुमन एवं बोर्ड के सदस्य उपस्थित थे।