देहरादून पहुंची बाबा बौखनाग की डोली, सीएम ने पूजा कर की खुशहाली की कामना

मुख्यमंत्री ने परेड ग्राउंड, देहरादून में आयोजित कार्यक्रम में बाबा बौखनाग की पूजा-अर्चना कर प्रदेश की खुशहाली की कामना की।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी परेड़ ग्राउण्ड में बाबा बौखनाग की डोली के अयोध्या धाम भ्रमण कार्यक्रम में शामिल हुए। उन्होंने बाबा की पूजा अर्चना कर प्रदेश की खुशहाली की कामना की तथा डोली को स्वयं कंधा देकर रवाना किया। मुख्यमंत्री ने बाबा बौखनाग डोली समिति के सदस्यों का स्वागत करते हुए कहा कि उनकी भी बाबा बौखनाग के प्रति गहरी आस्था है। बाबा की कृपा पूरे उत्तराखण्ड पर है। इसका उदाहरण सिलक्यारा सुरंग में फंसे श्रमिकों की सकुशल रिहाई है। जिनकी कृपा से यह असंभव कार्य संभव हो सका।

उन्होंने कहा कि इसके लिये प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी विशेषज्ञों के साथ इंदौर, चेन्नई, हैदराबाद आदि स्थानों से मशीनरी भेजी तथा विदेशों से भी विशेषज्ञ बुलाये, सिलक्यारा टनल में फंसे श्रमिकों की सकुशल वापसी में आ रहे अवरोध के समय हम सब विचलित हो रहे थे। उस समय हमें बाबा का स्मरण करने से रास्ता मिला और सभी लोग रेस्क्यू ऑपरेशन के अंतिम दिन तीन घंटे के बजाय आधे घंटे में ही बाहर आए। पूरे देश में इस घटना की चर्चा हुई और हमारे प्रयासों की तारीफ भी हुई, यह बाबा का आशीर्वाद रहा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मिशन सिलक्यारा की सफलता में बाबा बौखनाग जी की असीम कृपा और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कुशल मार्गदर्शन, प्रगाढ़ इच्छाशक्ति के साथ ही पग-पग पर उनके सहयोग से विभिन्न संस्थानों, सेना के जवानों, रेट माइनर्स और ग्राउण्ड जीरो पर राज्य सरकार के समेकित प्रयासों से सुरंग में फंसे मजदूरों को जीवन बचाने में हम सफल हो पाए।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि सिलक्यारा सुरंग हादसे में 41 श्रमिकों को सकुशल बाहर निकालना एक बड़ी उपलब्धि है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन के चलते ही यह बचाव अभियान सफलतापूर्वक पूरा हो सका। केन्द्र सरकार की ओर से भेजी गई विशेषज्ञ बचाव एजेंसियों की बदौलत हम श्रमिकों को सुरक्षित बाहर निकालने में कामयाब हो सके। 17 दिन 41 जिंदगियों के लिए पूरा देश प्रार्थना कर रहा था।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उस समय उन्होंने वहां पर बाबा बौखनाग के मंदिर निर्माण की घोषणा की थी, वह कार्य हो रहा है। शीघ्र ही मंदिर बन कर तैयार हो जायेगा। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने बड़कोट पंपिंग पेयजल योजना के शीघ्र समाधान का आश्वासन देते हुए बाबा बौखनाग मेले को राजकीय मेले के रूप में आयोजित किये जाने की बात कही।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बाबा की कृपा से आज हमारा राज्य नीति आयोग द्वारा जारी सतत् विकास लक्ष्यों की प्राप्ति में 10वें से पहले स्थान पर आया है। चारधाम यात्रा में भी रिकार्ड संख्या में श्रद्धालु आ रहे है। बाबा की कृपा से यमुनोत्री और गंगोत्री में भी श्रद्धालुओं की संख्या लाखों में बढ़ी है। गंगोत्री यमुनोत्री के साथ महासू देवता के स्थल हनोल का भी मास्टर प्लान बनाया जा रहा है। अस्कोट से आराकोट तक राज्य समग्र रूप में विकास की दृष्टि से आगे बढ़ रहा है, हमने राज्य हित में अनेक कठिन व कठोर निर्णय लिया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में समान नागरिक संहिता अधिनियम लागू कर हमने प्रदेश की जनता से किया वायदा पूरा किया है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि उत्तराखण्ड से निकलने वाली समान नागरिक संहिता की गंगा पूरे देश में जायेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि देवभूमि जैसे पवित्र भूमि पर लंबे समय से विभिन्न विभागों की सरकारी भूमि पर कब्जा किया जा रहा था। सरकार द्वारा अभियान चलाकर ऐसी 05 हजार हेक्टेयर भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि देवभूमि उत्तराखण्ड के मूल स्वरूप को बनाये रखने के लिये प्रदेश में किसी भी तरह का धर्मांतरण ना हो पाए इसके लिए सख्त कानून का प्रावधान किया गया है। सरकार संपत्ति को किसी भी तरह का नुकसान पहुंचाने वालों के विरुद्ध हमने सख्त कार्रवाई करते हुए दंगा निरोधक कानून बनाया है। जिसके अंतर्गत संसाधनों को नुकसान पहुंचाने वाले से ही उसकी वसूली की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले तीन साल में 15 हजार युवाओं को सरकारी नौकरी प्रदान की गई हैं। प्रदेश में नकल विरोधी कानून लागू कर युवाओं की प्रतिभा का सम्मान किया गया है। पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था से युवा एक साथ कई पदों के लिये पात्रता में आ रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्यटन, तीर्थाटन राज्य की आर्थिकी का मजबूत आधार है। सड़कों के विकास, हवाई यातायात एवं अन्य अवस्थापना सुविधाओं के विकास से चारधाम यात्रा में गत वर्ष की अपेक्षा दुगने तीर्थ यात्री प्रदेश में आये हैं।

इस अवसर पर विधायक दुर्गेश्वर लाल, समिति के अध्यक्ष जयेन्द्र सिंह रावत, पूर्व विधायक राजकुमार, मनवीर चौहान, विनोद डोभाल, दीपक बिजल्वाण, सतेन्द्र राणा, आलोक रावत, चण्डी प्रसाद, यशवंत सिंह, गोपाल सिंह रावत आदि उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री ने किया जागेश्वर धाम के प्रसिद्ध श्रावणी मेले का शुभारंभ

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रसिद्ध जागेश्वर धाम में एक महीने तक चलने वाले श्रावणी मेले का पूजा अर्चना कर शुभारंभ किया। उन्होंने जागेश्वर के भंडारा स्थल में पदम का वृक्ष लगाकर हरेला की शुभकामनाओं के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। मुख्यमंत्री ने मंदिर में पूजा अर्चना कर प्रदेशवासियों की सुख समृद्धि की कामना की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जागेश्वर धाम पौराणिक संस्कृति का अप्रतिम प्रतीक है। यहां आकर एक अलग ही शांति की अनुभूति मिलती है। भगवान जागेश्वर सभी श्रद्धालुओं पर अपनी कृपा रखते हैं। उन्होंने कहा कि यहां कोई अपनी मर्जी से नहीं बल्कि बाबा के बुलावे पर ही आता है। श्रावणी मेले को लेकर मुख्यमंत्री ने कहा कि श्रावणी मेला पौराणिक संस्कृति का जीता जागता उदाहरण है। श्रावणी मेला सदियों से श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रहा है।

मुख्यमंत्री ने प्रदेश वासियों को हरेला पर्व एवं श्रावणी मेले की शुभकामनाएं देते हुए डबल इंजन की सरकार उत्तराखंड के विकास को समर्पित सरकार है। इसी का परिणाम है कि नीति आयोग द्वारा जारी की गई सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति में उत्तराखंड प्रथम स्थान पर आया है। यह उत्तराखंड को देश का श्रेष्ठ राज्य बनाने की दिशा में सकारात्मक कदम है।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने जनपद के विकास को लेकर अनेक घोषणाएं भी की जिनमें सरयू (सेराघाट) से वृद्ध जागेश्वर सहित जागेश्वर क्षेत्र के लिए पेयजल पंपिंग योजना का निर्माण, भगततोला कपकोट मोटर मार्ग का डामरीकरण, मानसखंड मंदिर माला मिशन के अंतर्गत वृद्ध जागेश्वर को धार्मिक पर्यटन से जोड़ने, भिकियासेन में डाम का निर्माण, चमडखान में बैंक की स्थापना, भरतोली के प्राचीन देवायल मंदिर का जीर्णाेधार, डिप्टेश्वर महादेव एवं कोटेश्वर महादेव का जीर्णाेधार तथा सौंदर्यीकरण किये जाने, मर्चुला भिकियासेन मोटर मार्ग पर रामगंगा नदी पर मोटर पुल का निर्माण, महात्मा गांधी इंटर कॉलेज चनोदा सोमेश्वर के अपूर्ण भवन का निर्माण किये जाने, चायखन – थूवासीमल से ध्युली – धोनी व ध्यूली रौतेला चौना बैंड तक लिंक रोड का निर्माण किये जाने, सोमेश्वर के ग्राम सभा रहत में धूनी गैर नामक स्थान पर तथा शहर फाटक नंगधूनी मंदिर के पास मिनी स्टेडियम का निर्माण किये जाने, विकासखंड हवालबाग के गोविंदपुर स्थित देवडघाट के नानकोसी में मिनी बैराज का निर्माण के साथ जागेश्वर विधानसभा में 40 किमी डामरीकरण के प्रस्ताव आदि कार्यों की घोषणा शामिल है।

उन्होंने कहा कि उनकी सरकार राज्य के विकास को समर्पित सरकार है। अल्मोड़ा के कोसी से कौसानी तक साइकिल ट्रैक का निर्माण कार्य किया जा रहा है जिससे अल्मोड़ा जनपद के पर्यटन को गति मिलेगी। उन्होंने कहा कि अल्मोड़ा शहर के विस्तार की भी योजना बनायी जा रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जब से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जागेश्वर धाम में पूजा अर्चना की है तब से यहां श्रद्धालुओं की संख्या में गुणात्मक वृद्धि हुई है तथा लगातार श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि केंद्र में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार लगातार देश एवं प्रदेश में विकास के नए नए कीर्तिमान स्थापित कर रही है। प्रदेश के तीर्थाटन को बढ़ाने में भी राज्य सरकार लगातार प्रयासरत है। जिस प्रकार केदारनाथ एवं बदरीनाथ मंदिर के मास्टर प्लान के माध्यम से केदारनाथ एवं बदरीनाथ में श्रद्धालुओं की संख्या में बढ़ोतरी हुई है उसी प्रकार जागेश्वर धाम के मास्टर प्लान के माध्यम से भी यहां के लोगों के आजीविका के द्वार खुलेंगे। उन्होंने कहा कि जागेश्वर धाम के मास्टर प्लान के कार्य पूरा हो जाने के बाद प्रति वर्ष 10 लाख श्रद्धालुओं के यहां आने की उम्मीद है। इसके माध्यम से यहां के लोगों का जीवन खुशहाल होगा एवं जनपद की आर्थिकी में भी बढ़ोतरी होगी।

इस अवसर पर केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग राज्य मंत्री अजय टम्टा ने भी जनपद एवं प्रदेशवासियों को हरेला पर्व एवं श्रावणी मेले के शुभकनाएं दी। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार राज्य के विकास के लिए प्रयासरत है। इस दिशा में अनेक कार्य मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि उनके नेतृत्व में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का आयोजन सुदूर आदि कैलाश में कराकर योग दिवस को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मान दिलाया है। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में उत्तराखंड की सड़कों का कायाकल्प होगा एवं प्रदेश तेजी से मजबूत अर्थव्यवस्था को और अग्रसर होगा।

विधायक जागेश्वर मोहन सिंह मेहरा ने मुख्यमंत्री के जागेश्वर धाम आने के लिए उनका धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा लगातार प्रदेश एवं जनपद के लिए अहम फैसले लिए जा रहे हैं। जो प्रदेश के विकास की दिशा में मील का पत्थर साबित हो रहे हैं।

इस दौरान जिलाध्यक्ष भाजपा रमेश बहुगुणा, उपाध्यक्ष जागेश्वर मंदिर प्रबंधन समिति नवीन चंद्र भट्ट, जिला मजिस्ट्रेट विनीत तोमर, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक देवेंद्र पींचा, मुख्य विकास अधिकारी आकांक्षा कोंडे समेत अन्य विभागीय अधिकारी, जन प्रतिनिधि एवं आम जनमानस उपस्थित थे।

आईआईएम रोहतक ने प्रस्तुत की चारधाम यात्रा पर स्टडी रिपोर्ट

मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने चारधाम की धारण क्षमता ¼Carrying Capacity½ पर आईआईएम ¼IIM½ रोहतक की रिपोर्ट की समीक्षा कर सुगम सुरक्षित यात्रा का एक्शन प्लान बनाने के निर्देश दिए हैं।

मुख्य सचिव राधा रतूड़ी द्वारा सचिवालय में आईआईएम रोहतक के निदेशक व उनकी टीम द्वारा चारधाम यात्रा की Carrying Capacity तथा SOPs को सुधारने तथा श्रद्धालुओं हेतु यात्रा को अधिकाधिक सुखद, सुगम व सुरक्षित बनाने हेतु तैयार की गई अध्ययन रिपोर्ट पर गहन चर्चा की गई।

बैठक के दौरान मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने निर्देश दिए कि सुगम व सुरक्षित चारधाम यात्रा हेतु बनने वाले एक्शन प्लान के लिए चारों धामों की carrying Capacity के सटीक आकलन का प्रयास किया जाए। एक्शन प्लान में श्रद्धालुओं हेतु चिकित्सा एवं आपातकालीन सेवाओं की पुख्ता व्यवस्था, यात्रा के प्रभावी प्रबंधन एवं मॉनिटरिंग तथा स्थानीय इकोलॉजी को संरक्षित करते हुए स्थानीय आर्थिकी को मजबूत करने जैसे मुद्दों का विशेष ध्यान रखा जाए।

मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने एक्शन प्लान में सड़कों की स्थिति में सुधार, ट्रैफिक जाम, कपाट खुलने के बाद धामों में प्रथम 40 दिनों में ओवरक्राउडिंग की समस्या के समाधान, श्रद्धालुओं की फीडबैक की व्यवस्था को प्रमुखता से रखने के निर्देश दिए हैं।

बैठक में श्रद्धालुओं के रजिस्ट्रेशन की व्यवस्था को सरल बनाने के लिए Radio Frequency Identification (RFID) card based registration system तथा AADHAR based registration पर चर्चा की गई। इसके साथ ही चारधाम यात्रियों की सुरक्षा व सुविधा की दृष्टिगत एक SMS Weather Update System लागू करने, यात्रारुट पर पीपीपी मॉडल या CSR के तहत मेडिकल सुविधा प्रदान करने, धामों में भीड़ नियंत्रण हेतु Batch Wise दर्शन व्यवस्था को लागू करने और पार्किंग कैपेसिटी की समीक्षा करने पर भी चर्चा की गई।

बैठक में अपर मुख्य सचिव, सचिव पर्यटन, कमिश्नर गढ़वाल सहित अन्य अधिकारी तथा आईआईएम रोहतक के निदेशक व उनकी टीम मौजूद रहे।

सीएस ने दी प्रदेशवासियों को हरेला पर्व की बधाई, की अपील

उत्तराखंड के लोकपर्व हरेला के अवसर पर मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने देहरादून के भागीरथ पुरम में एमडीडीए द्वारा आयोजित कार्यक्रम में पौधरोपण किया। मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने अमलतास के पौधे का वृक्षारोपण किया।

इस अवसर पर हरेला पर्व की शुभकामनाएं देते हुए मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने प्रदेशवासियों से विशेषकर युवाओं से वृक्षारोपण की अपील की है। कार्यक्रम के दौरान सीएस रतूड़ी ने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड का यह लोकपर्व विश्व एवं मानव जगत को पर्यावरण संरक्षण एवं हरियाली से खुशहाली का संदेश देता है।

मुख्य सचिव ने सभी लोगों से हरेला पर्व के अवसर पर ‘एक पेड़ मां के नाम’ कार्यक्रम के तहत वृक्षारोपण करने तथा वृक्षारोपण की फोटो व जानकारी merilife.org पर अपलोड करने का अनुरोध किया है।

इस अवसर पर एमडीडीए के अधिकारी उपस्थित रहे।

मुख्यमंत्री ने हरेला पर्व पर किया शहीदों के नाम पौधरोपण

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हरेला पर्व के अवसर पर मालदेवता देहरादून में आयोजित ‘शहीदों के नाम पौधरोपण’ कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने वृक्षारोपण किया। कार्यक्रम के दौरान जम्मू के कठुआ में शहीद हुए उत्तराखण्ड के जवानों एवं बिनसर वन्यजीव विहार में वनाग्नि दुर्घटना में मृतक वन्य कर्मियों की स्मृति में श्रद्धांजलि स्वरूप पौधा रोपण किया गया। मुख्यमंत्री ने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में सराहनीय प्रयास करने वाले स्कूलों एवं वन पंचायतों को सम्मानित भी किया।

मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों को हरेला पर्व की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि हरेला पर्व सुख, समृद्धि, शान्ति, पर्यावरण और प्रकृति संरक्षण का प्रतीक है। यह पर्व जीवन को प्रकृति के साथ जोड़ने का कार्य करता है। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड प्राकृतिक रूप से समृद्ध राज्य है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी को प्रतिज्ञा लेनी होगी कि हम प्राकृतिक धरोहर एवं विरासत को संरक्षित कर भावी पीढ़ी को स्वच्छ पर्यावरण देंगे। इस बार राज्य में हरेला पर्व की थीम पर्यावरण की रखवाली, घर-घर हरियाली, लाये समृद्धि और खुशहाली निर्धारित की गई है। उन्होंने जल संरक्षण एवं संवर्द्धन की दिशा में सभी को योगदान देने के लिए अपील की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि तापमान में वृद्धि होना, सबके लिए चिंतन का विषय है। देवभूमि उत्तराखण्ड को प्रकृत्ति ने सब कुछ दिया है। हमारी जिम्मेदारी है कि प्रकृति प्रदत्त सम्पदाओं का सही तरह से उपयोग हो। वृक्षारोपण और जल संरक्षण की दिशा में सबको मिलकर प्रयास करने हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में हरेला पर्व पर 50 लाख पौधे रोपे जाने का लक्ष्य रखा गया है। इसमें सरकार के साथ जन सहयोग भी लिया जा रहा है। राज्य सरकार द्वारा 15 अगस्त तक बृहद स्तर पर वृक्षारोपण अभियान चलाया जायेगा। सरकार के साथ स्वयं सहायता समूहों, सामाजिक संगठनों, एनजीओ और जनसहयोग को इसमें लिया जायेगा। उन्होंने प्रदेशवासियों से अपील की कि जो भी वृक्षारोपण किये जा रहे हैं, उनका संरक्षण भी करना है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में पिछले 10 वर्षों में पर्यावरण संरक्षण की दिशा में अनेक कार्य किये गये हैं। उन्होंने विश्व पर्यावरण दिवस पर ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान की शुरूआत की थी। तब से अब तक देश में करोड़ों पौधे रोपे जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में प्रदेश में हर क्षेत्र में तेजी से कार्य हो रहे हैं। उत्तराखण्ड ने सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) के लिए देश में पहला स्थान हासिल किया है। यह उत्तराखण्ड के लिए गौरव का विषय है। हरेला पर्व के अवसर पर मुख्यमंत्री ने सभी विद्यालयों, कॉलेजों, निकायों, जनप्रतिनिधियों तथा सभी सरकारी एवं निजी संस्थानों से भी अपने परिसर में अधिक से अधिक पौधों का रोपण का आह्वाहन किया। मुख्यमंत्री ने मिश्रित वन के तहत पर्यावरण विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में ‘सिंगलास वन’ विकसित करने के लिए प्रयास कर रही रूद्रप्रयाग जनपद के कोट ग्राम पंचायत की मातृशक्ति के प्रयासों की भी प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि इनके द्वारा पर्यावरण संरक्षण के साथ जल संरक्षण के लिए भी कार्य किये जा रहे हैं, यह एक सराहनीय पहल है।

वन मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि हरेला पर्व के उपलक्ष्य में इस वर्ष प्रदेश में 01 करोड़ 64 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया है। यह अभियान 15 अगस्त तक चलेगा। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड की पहचान यहां का नैसर्गिक सौन्दर्य है। वन सम्पदा राज्य की आजीविका का महत्वपूर्ण संसाधन है। वन सम्पदाओं को बढ़ाने और जल संरक्षण की दिशा में हमें निरन्तर कार्य करने हैं। उन्होंने कहा कि ग्लोबल वार्मिंग और ग्लेशियरों का तेजी से पिघलना बड़ी चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि भावी पीढ़ी को शुद्ध वतावरण देने के लिए सबको वृक्षारोपण और जल संरक्षण की दिशा में कार्य करने होंगे।

इस अवसर पर राज्यसभा सांसद नरेश बंसल, विधायक उमेश शर्मा काऊ, प्रमुख सचिव आर.के सुधांशु, प्रमुख वन संरक्षक (हॉफ) डॉ. धनंजय मोहन, आईजी गढ़वाल के.एस नगन्याल, जिलाधिकारी देहरादून सोनिका, एसएसपी अजय सिंह एवं वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

सभी सरकारी व गैर सरकारी संगठनों को सख्ती से ठोस अपशिष्ट प्रबन्धन एवं मेडिकल वेस्ट डिस्पॉजल की पुख्ता व्यवस्था के कड़े निर्देश

उत्तराखण्ड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड उन सभी सरकारी विभागों को नोटिस जारी करने जा रहा हैं जिनके द्वारा अनुपयोगी पुराने कम्पयूटर, प्रिन्टर, स्कैनर व मोबाइल जैसे ई वेस्ट अनावश्यक रूप से एकत्रित किए जा रहे हैं। सचिवालय में उत्तराखण्ड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की बैठक में मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने ई वेस्ट मेनेजमेंट के सम्बन्ध में सख्त निर्देश दिए हैं। सीएस राधा रतूड़ी ने सभी सरकारी एवं गैर सरकारी संगठनों को सख्ती से ठोस अपशिष्ट प्रबन्धन एवं मेडिकल वेस्ट डिस्पॉजल की पुख्ता व्यवस्था के कड़े निर्देश दिए हैं। उन्होंने विशेषरूप से सरकारी विभागों को इस सम्बन्ध में किसी भी प्रकार की लापरवाही ना करने की सख्त हिदायत दी है। इसके साथ ही मुख्य सचिव ने निर्देश दिए हैं कि कूड़ा प्रबन्धन एवं निस्तारण के कार्य में लगे स्वच्छता कर्मियों को हाथों के दस्ताने, मास्क, गमबूट्स तत्काल उपलब्ध करवाएं जाए।

पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति निधि के उपयोग के सम्बन्ध में मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने ठोस अपशिष्ट प्रबन्धन के तहत ठोस अपशिष्ट के संग्रहण, भंडारण, परिवहन, प्रसंस्करण के लिए बुनयादी सुविधाएं तैयार करने, नाडेप पिट के माध्यम से जैव खादों के उत्पादन, सामूहिक सफाई अभियान को प्रोत्साहित करने, सेनेटरी वेस्ट एवं घरेलू खतरनाक अपशिष्ट के एकत्रीकरण व निपटान की व्यवस्था तथा सॉलिड वेस्ट मेनेजमेंट के सम्बन्ध में कचरा बीनने वाले लोगों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित करने के निर्देश दिए हैं।

मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने प्लास्टिक वेस्ट मेनेजमेंट के तहत औद्योगिक ईकाईयों के नियमित निरीक्षण के निर्देश दिए हैं। उन्होंने जब्त किए गए एसयूपी के परिवहन, रिसाइकिलिंग व निस्तारण के भी निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही सीएस ने ऐसे व्यक्तियों, गैर सरकारी संगठनों एवं संस्थानों को पुरस्कृत एवं प्रोत्साहित करने के निर्देश दिए हैं जो प्लास्टिक कूड़े के पर्यारवणीय हित में प्रबन्धन के लिए कार्य कर रहे हैं।

मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने बायोमेडिकल वेस्ट मेनेजमेंट के सम्बन्ध में एक प्रभावी सर्विलेंस सिस्टम विकसित करने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही उन्होंने निर्देश दिए हैं कि पेरामेडिकल कार्मिकों के लिए बायोमेडिकल वेस्ट के सेगरिगेशन, स्टोरेज व निस्तारण के सम्बन्ध में प्रशिक्षण एवं जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाए।

मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने खतरनाक अपशिष्ट प्रबन्धन के तहत ऐसे लोगो के लिए कौशल विकास एवं जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने के निर्देश दिए हैं जो खतरनाक अपशिष्ट की हैण्डिलिंग, रिसाईकिलिंग व प्री प्रोसेसिंग के कार्यों को करते हैं। उन्होंने संभावित खतरनाक अपशिष्ट दूषित स्थलों के आंकलन के भी निर्देश दिए हैं।

मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने कन्सट्रक्शन एण्ड डिमोलेशन वेस्ट मेनेजमेंट के तहत निर्माण एवं धवस्तीकरण अपशिष्ट की प्रोसेसिंग यूनिट की स्थापना एवं अपग्रेडेशन के निर्देश दिए हैं।

सीएस राधा रतूड़ी ने घरेलू अपशिष्ट जल के उपचार के सम्बन्ध में निर्देश दिए हैं कि डिसेन्ट्रलाइज वेस्टवाटर ट्रीटमेंट सिस्टम को अधिक से अधिक बढ़ावा दिया जाए। इसके साथ ही क्यूनिटी सेनेटरी कॉम्पलेक्स को भी प्रोत्साहित किया जाए। उन्होंने उपचारित जल का प्रयोग पीने के अलावा अन्य कार्यों में उपयोग हेतु प्रोत्साहित करने के निर्देश दिए हैं। औद्योगिक अपशिष्ट जल के सम्बन्ध में मुख्य सचिव ने निर्देश दिए हैं कि कॉमन ट्रीटमेंट प्लान्ट के स्थापना के लिए गैप फण्डिग का उपयोग किया जाए। जलस्रोतों के पुनर्जीवीकरण हेतु सीएस ने निर्देश दिए हैं कि बाढ़ वाले मैदानी क्षेत्रों में वृक्षारोपण को बढ़ावा दिया जाए। उन्होंने भूमिगत जल को रिचार्ज करने हेतु विशेष प्रयास के निर्देश दिए। इसके साथ ही मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने वायु प्रदूषण के प्रभावी नियंत्रण हेतु एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग नेटवर्क को सृदृढ़ करने के निर्देश दिए हैं।

बैठक में प्रमुख सचिव रमेश कुमार सुधांशु, उत्तराखण्ड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य एवं अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

सभी विभाग नीति आयोग की आगामी बैठक के लिए पूरी तरह से तैयारः राधा रतूड़ी

मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने सचिवालय में वर्चुअल माध्यम से कैबिनेट सेक्रेटरी, भारत सरकार की अध्यक्षता में आयोजित 9वीं गवर्निंग काउसिंल की बैठक में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर आगामी 27 जुलाई को नीति आयोग की बैठक के एजेंडा पर विस्तृत चर्चा की गई। विकसित भारत इसकी मुख्य थीम थी। मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने जानकारी दी कि राज्य सरकार के सभी विभाग इस बैठक के लिए पूर तरह से तैयार हैं।
इस अवसर पर सचिव आर मीनाक्षी सुन्दरम भी उपस्थित थे।

सीएम धामी ने केंद्रीय मंत्री को ऊर्जा जरूरतों से कराया अवगत

केन्द्रीय ऊर्जा एवं शहरी विकास मंत्री मनोहर लाल खट्टर एवं मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की उपस्थिति में मुख्यमंत्री आवास में आयोजित उच्च स्तरीय बैठक में राज्य की ऊर्जा एवं नगर विकास से संबंधित विभिन्न योजनाओं की समीक्षा की गई। बैठक में भारत सरकार के ऊर्जा एवं नगर विकास के उच्चाधिकारियों के साथ मुख्य सचिव सहित राज्य के संबंधित विभागों के उच्चाधिकारी उपस्थित थे।

बैठक में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने केन्द्रीय ऊर्जा मंत्री को प्रदेश की ऊर्जा जरूरतों से अवगत कराते हुए कहा कि 2123 मेगावॉट क्षमता की अलकनंदा एवं भागीरथी तथा उनकी सहायक नदियों पर विशेषज्ञ समिति द्वारा 21 जल विद्युत परियोजनाओं पर संस्तुति प्रदान की गई है। जिसमें 771 मेगावॉट की 11 परियोजनाओं पर किसी भी संस्था द्वारा कोई प्रतिबंध नहीं लगाया गया है तथा कुल 1352 मेगावॉट क्षमता की 10 जल विद्युत परियोजनाओं के निर्माण हेतु विशेषज्ञ समिति-2 द्वारा संस्तुति प्रदान की गई है, उन्होंने इन परियोजनाओं के क्रियान्वयन हेतु सकारात्मक निर्णय लिये जाने के साथ अनुमोदन प्रदान किये जाने की अपेक्षा की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में जल विद्युत उत्पादन क्षमता का 40 प्रतिशत ही उपयोग किया जा रहा है। राज्य को कुल चिन्हित 45 जल विद्युत परियोजनाओं में से पर्यावरण के दृष्टिगत 24 परियोजनाएं छोड दी गई है। जबकि 21 परियोजनाओं के लिये समिति द्वारा संस्तुति दी जा चुकी है। केन्द्रीय ऊर्जा मंत्री ने मुख्यमंत्री को आश्वस्त किया कि इस संबंध में शीघ्र ही दिल्ली में मुख्यमंत्री की उपस्थिति में ऊर्जा एवं जल शक्ति मंत्रालय के अधिकारियों के साथ बैठक आयोजित की जायेगी।

मुख्यमंत्री ने राज्य को जल विद्युत परियोजनाओं के निर्माण हेतु केन्द्रीय वित्तीय सहायता राज्य में विद्युत की कमी होने एवं शेष विद्युत क्षमता के त्वरित गति से विकास हेतु विद्युत मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा जारी ड्राफ्ट जल विद्युत नीति के अन्तर्गत उत्तराखण्ड राज्य को भी उत्तर पूर्वी राज्यों की तरह जल विद्युत परियोजनाओं के निर्माण हेतु केन्द्रीय वित्तीय सहायता प्रदान किये जाने की बात कही।

मुख्यमंत्री ने केन्द्रीय मंत्री से यह भी अपेक्षा की कि राज्य की वर्तमान एवं दीर्घकालिक बेस लोड विद्युत आवश्यकताओं की आपूर्ति को सुनिश्चित किये जाने के दृष्टिगत 1320 मे०वा० क्षमता के कोल आधारित विद्युत परियोजना के निर्माण हेतु कोल लिंकेज का त्वरित आवंटन किया जाना भी राज्य हित में होगा। साथ ही कोल आधारित परियोजनाओं से राज्य की बेस लोड विद्युत आवश्यकताओं की आपूर्ति हेतु 600 मेगावाट का अतिरिक्त आवंटन किये जाने की भी बात मुख्यमंत्री ने केन्द्रीय मंत्री के समक्ष रखी।

मुख्यमंत्री ने राज्य में प्राकृतिक आपदा से क्षतिग्रस्त हुई विद्युत संरचनाओं के मुआवजे हेतु प्रचलित मापदण्डों के स्थान पर विद्युत संरचनाओं के पुनर्निर्माण में हुए वास्तविक व्यय की प्रतिपूर्ति किये जाने का भी अनुरोध किया।

केन्द्रीय मंत्री द्वारा बैठक में निर्देश दिये गये कि राज्य की ऊर्जा जरूरतों एवं इस क्षेत्र में सुधार से संबंधित प्रस्तावों के साथ शहरी विकास से संबंधित प्रस्तावों को केन्द्र सरकार को प्रेषित किया जाय। उन्होंने राज्य हित से जुडे विषयों पर त्वरित कार्यवाही का भी आश्वासन मुख्यमंत्री को दिया।

इससे पूर्व मुख्य सचिव राधा रतूडी एवं अपर मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन के साथ शहरी विकास मंत्रालय भारत सरकार के अपर सचिव डी तारा, एसपी सिंह तथा संयुक्त सचिव ऊर्जा मंत्रालय शशांक मिश्रा एवं अफजाल, सचिव ऊर्जा आर. मीनाक्षी. सुन्दरम, सचिव चन्द्रेश यादव, अपर सचिव नितिन भदौरिया के साथ हुई बैठक में भी राज्य से संबंधित योजनाओं पर आपसी चर्चा की गई।

मुख्यमंत्री ने सुनी जन समस्या, अधिकारियों को दिए निर्देश

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री आवास स्थित मुख्य सेवक सदन में प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से आये लोगों की शिकायतों और समस्याओं को सुना। मुख्यमंत्री ने जनसमस्याओं के त्वरित समाधान के लिये अधिकारियों को निर्देश दिये। उन्होंने निर्देश दिये कि जो भी जन समस्याएं आ रही हैं, उनका समयबद्धता से निस्तारण किया जाए।

मुख्यमंत्री ने अधिकांश जन समस्याओं और शिकायतों का मौके पर निस्तारण किया। कुछ जन समस्याओं को संबंधित विभागों को कार्यवाही करने के निर्देश मुख्यमंत्री ने दिये हैं। जन समस्याओं का यथाशीघ्र समाधान के लिए विभिन्न विभागों को भेजे गये पत्रों पर क्या कार्रवाई हुई, इसकी मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा मॉनिटरिंग की जाती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जन समस्याओं का त्वरित समाधान करना सरकार की प्राथमिकता है। अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिये गये हैं कि जनहित के कार्यों को प्राथमिकता में रखा जाए। मुख्यमंत्री के समक्ष विभिन्न क्षेत्रों से आये लोगों ने सड़क, बिजली, पेयजल, स्वास्थ्य, आर्थिक सहायता एवं अपने क्षेत्रों की विभिन्न समस्याओं को रखा। मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी की समस्याओं का यथासंभव समाधान किया जायेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि लोगों को सरकारी कार्यालयों में अनावश्यक रूप से न आना पड़े, सरकार द्वारा अधिकांश सेवाएं ऑनलाईन माध्यम से दी जा रही है। विभिन्न सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों को धनराशि डीबीटी के माध्यम से दी जा रही है। उन्होंने प्रदेश की जनता से अपील की है कि अपुणि सरकार पोर्टल के माध्यम से दी जा रही विभिन्न ई-सेवाओं का लाभ उठायें। उन्होंने कहा कि सभी जिलाधिकारियों को तहसील दिवस और बीडीसी की नियमित बैठकें करने के निर्देश दिये गये हैं। इसका मुख्य उद्देश्य ब्लॉक, तहसील और जनपद स्तर पर ही जन समस्याओं का समाधान करवाना है। सभी जिलाधिकारियों को प्रत्येक कार्यदिवस में जनसुनवाई करने के निर्देश दिये गये हैं।

उच्च शिक्षा मंत्री ने कुलपतियों को दिए छात्रसंघ संविधान में संशोधन के निर्देश

देहरादूनः प्रदेश के राजकीय व अशासकीय महाविदयालय के साथ ही विश्वविद्यालय परिसर में होने वाले छात्रसंघ चुनाव में छात्राओं को पचास फीसद प्रतिनिधित्व दिया जाएगा। इसके साथ ही छात्रसंघ में मेधावी छात्र छात्राओं की भागीदारी भी सुनिश्चित की जाएगी। जिसके निर्देश विभागीय मंत्री डा धन सिंह रावत ने प्रदेश के सभी राजकीय विश्वविद्यालयों के कुलपतियों को दे दिए हैं।

उच्च शिक्षा मंत्री डा धन सिंह रावत ने बताया कि विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालयों के अंतर्गत छात्रसंघ एवं छात्र परिषदों में छात्राओं को 50 फीसदी प्रतिनिधित्व दिया जाएगा। इसके लिये सभी विश्वविद्यालयों के कुलपतियों को निर्देश जारी कर दिये गये हैं। उन्होंने बताया कि उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्रसंघ सिर्फ राजनीति के लिए नहीं अपितु रचनात्मक गतिविधियों एवं शैक्षिणिक माहौल तैयार करने का काम करेंगे। इसके लिए सभी विश्वविद्यालय परिसरों एवं महाविद्यालयों के छात्रसंघों एवं छात्र परिषदों में मेधावी छात्रों की भागीदारी सुनिश्चित की जायेगी।

विभागीय मंत्री ने बताया कि प्रदेश में उच्च शिक्षण संस्थानों में कुल 152387 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं जिसमें छात्राओं की संख्या 100272 जबकि छात्रों की संख्या 52115 है। यानी 65.8 फीसद छात्राएं हैं और 34.2 छात्र हैं। जिसमें से राजकीय महाविद्यालय परिसरों में कुल 97997 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं जिसमें 30130 छात्र व 67867 छात्राएं शामिल हैं। वहीं अशासकीय में 34590 में 14730 छात्र व 19860 छात्राएं हैं। विश्वविद्यालयी परिसरों में कुल 19800 विद्यार्थी हैं जिसमें 7255 छात्र व 12545 छात्राएं शामिल हैं।

डॉ रावत ने बताया कि सभी उच्च शिक्षण संस्थानों में लिंगदोह कमेटी की सिफारिशों के अनुरूप चुनाव कराए जाएंगे। विश्वविद्यालयों के छात्रसंघ संविधान में जो भी बदलाव अपेक्षित हैं उन्हें करने के लिए संबंधित संस्थानों के कुलपतियों को निर्देश दिए गए हैं।

मानचित्र स्वीकृति की प्रक्रिया होगी सुगम, सरकार कर रही विचार


अब विकास प्राधिकरण क्षेत्रांतर्गत किसी भी प्रकार के विकास के लिए मानचित्र स्वीकृत कराना अनिवार्य होगा। साथ की मानचित्र स्वीकृति की प्रक्रिया को सुगम बनाये जाने पर सरकार इस पर गंभीरता से विचार कर रही है। यह जानकारी आवास व शहरी विकास मंत्री डा. प्रेमचंद अग्रवाल ने दी।

आवास मंत्री डा. अग्रवाल ने बताया कि राष्ट्रीय राजमार्ग व राजकीय राजमार्ग तथा समस्त स्थानीय निकायों के मार्गों के दोनों किनारों से मार्ग के दोनों ओर पर्वतीय क्षेत्रों में 50 मीटर एवं मैदानी क्षेत्रों में 100 मीटर की हवाई दूरी तक सभी प्रकार के निर्माणों के मानचित्रों की स्वीकृति अनिवार्य किये जाने पर सरकार विचार कर रही है। साथ ही ऐसे मानचित्रों की स्वीकृति उपाध्यक्ष स्तर पर की जाएगी।

बताया कि ऐसे एकल आवासीय निर्माण, जिनका भूखंड क्षेत्रफल 250 वर्ग मीटर तक हो तथा अधिकतम ऊंचाई 9 मीटर तक हो, मानचित्र स्वीकृत स्वप्रमाणन अथवा शपथ पत्र के द्वारा किये जाने पर विचार किया जा रहा है। इसी तरह समस्त गैर एकल आवसीय निर्माण जिनका भूखंड क्षेत्रफल 50 वर्ग मीटर तक एवं ऊंचाई 6 मीटर तक हो, मानचित्र स्वीकृत स्वप्रमाणन अथवा शपथ पत्र के द्वारा करने पर विचार हो रहा है।

बताया कि एमडीआर, ओडीआर मार्ग जो संबंधित जिलाधिकारी एवं उपाध्यक्ष तथा शासन के प्रशासनिक विभाग द्वारा समय-समय पर मानचित्र स्वीकृति के लिए नियत किया जाएगा। बताया कि वर्ष 2016 के पूर्व के प्राधिकरण क्षेत्रों एवं विनियमित क्षेत्रों को छोड़कर नये सम्मिलित क्षेत्रों में प्राधिकरण को प्राप्त होने पर शुल्क, उप विभाजन शुल्क, विकास शुल्क पर्यवेक्षण शुल्क पर वर्तमान दरों के सापेक्ष 50 प्रतिशत की छूट प्रदान की जाएगी।

बताया कि इसमें देय लेबर सेस प्राधिकरण द्वारा नहीं लिया जायेगा, इसके विपरीत आवेदक द्वारा सीधे श्रम विभाग में जमा किया जाएगा तथा इसकी सूचना प्राधिकरण को दी जाएगी।