आरटीओ ऑफिस के आस-पास कॉमन सर्विस सेंटर की व्यवस्था की जाएः सीएम

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सचिवालय में परिवहन विभाग की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिये कि यह सुनिश्चत किया जाए कि लोगों को लाइसेंस के लिए आवेदन करने और स्लॉट मिलने में परेशानी न हो। आरटीओ ऑफिस के आस-पास कॉमन सर्विस सेंटर की व्यवस्था की जाए। मुख्यमंत्री ने शासन के वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देश दिये कि वे समय-समय पर जन सुविधाओं से जुड़े कार्यालयों का औचक निरीक्षण करें। उन्होंने कहा कि सभी विभाग पिछले तीन सालों में किये गये 10 महत्वपूर्ण कार्यों और जुलाई 2026 तक विभागों को 10-10 कौन से महत्वपूर्ण कार्य पूर्ण करने हैं, इसका स्पष्ट ब्यौरा उपलब्ध करायें।
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिये कि बेहतर एवं सुगम नागरिक केन्द्रित सेवाओं पर विशेष ध्यान दिया जाए। ऑनलाईन सेवाओं को व्यावहारिक बनाने की दिशा में और प्रयास किये जाने, सड़क सुरक्षा के प्रति लोगों को निरंतर जागरूक किये जाने, ऑनलाईन माध्यम से चालान की प्रक्रियाओं पर अधिक ध्यान दिये जाने के साथ यातायात के नियमों का अनुपालन सुनिश्चत किये जाने के निर्देश मुख्यमंत्री ने दिये, उन्होंने सड़क दुर्घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण के लिए सभी संबंधित विभागों को समन्वय के साथ कार्य करने, परिवहन निगम की बसों के बेड़े के सुदृढ़ीकरण पर विशेष ध्यान दिये जाने को कहा। पुरानी बसों के स्थान पर नई बसों की व्यवस्था के साथ ही मैदानी मार्गों में सीएनजी और इलेक्ट्रिक बसों की पर्याप्त व्यवस्था रखी जाने की बात मुख्यमंत्री ने कही।
बैठक में जानकारी दी गई कि राज्य में वाहनों की फिटनेस के लिए 04 आटोमेटिड टेस्टिंग स्टेशन की स्थापना की गई है, जबकि 07 पर कार्यवाही गतिमान है। सड़क सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए 13 इन्टरसेप्टर वाहनों एवं 30 बाईक स्क्वैड की तैनाती की गई है। हलद्वानी में चालक प्रशिक्षण संस्थान की स्थापना की जा रही है। राज्य में 04 ऑटोमेटेड ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक की स्थापना की जा चुकी है, जबकि 07 पर प्रक्रिया गतिमान है।
बैठक में उपाध्यक्ष अवस्थापना अनुश्रवण परिषद विश्वास डाबर, मुख्य सचिव राधा रतूड़ी, प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु, सचिव आर. मीनाक्षी सुंदरम एवं परिवहन विभाग के अधिकारी उपस्थित थे।

डोर स्टेप डिलीवरी सिस्टम के सफल प्रयोग के बाद इसे प्रदेश के शहरी स्थानीय निकायों तक ले जायो जाएः सीएम

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सचिवालय में सूचना प्रौद्योगिकी एवं गुड गवर्नेंस की बैठक लेते हुए अधिकारियों को निर्देश दिये कि सभी विभाग यह सुनिश्चित करें की उनकी विभागीय वेबसाइट अपडेट हो। बैठक में जानकारी दी गई कि अपुणि सरकार पोर्टल के माध्यम से 886 सेवाएं ऑनलाईन माध्यम से दी जा रही हैं। ऑनलाइन माध्यम से दी जाने वाली सेवाओं में प्राप्त आवेदनों पर समयबद्धता के साथ 93 प्रतिशत निस्तारण किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने इसे शत प्रतिशत करने के निर्देश दिये। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार जनता के द्वार की भावना को साकार करने के लिए अधिकांश जन सुविधाएं लोगों को उनके घर तक पहुंचाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि देहरादून में विभिन्न प्रमाण पत्र लोगों के घरों तक उपलब्ध कराये जाने के लिए चलाये गये पायलट प्रोजेक्ट के तहत डोर स्टेप डिलीवरी सिस्टम के सफल प्रयोग के बाद इसे प्रदेश के शहरी स्थानीय निकायों तक ले जाने के मुख्यमंत्री ने निर्देश दिये।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सूचना क्रांति के इस दौर में ऑनलाइन सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ ही डाटा सिक्योरिटी का भी विशेष ध्यान रखा जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी विभाग यह सुनिश्चित करें कि विभिन्न योजनाओं के लाभार्थियों को प्रदान की जाने वाली धनराशि का वितरण डीबीटी के माध्यम से हो। उन्होंने निर्देश दिये कि पी.एम गतिशक्ति उत्तराखण्ड के तहत योजनाओं का त्वरित क्रियान्वयन हो इसके लिए संबंधित प्रस्तावों पर निर्धारित बिन्दुओं के अनुसार कार्यवाही की जाए। बैठक में जानकारी दी गई कि ई-ऑफिस प्रणाली के तहत 89 प्रतिशत लक्ष्य प्राप्त कर लिया गया है। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिये कि सीएम डैशबोर्ड प्रक्रिया के तहत सभी विभाग एक माह के अन्दर की-परर्फामेंस इंडिकेटर (के.पी.आई) बनाना सुनिश्चत करें।

बैठक में जानकारी दी गई कि सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में कौशल विकास के अंतर्गत विशेष रूप से पर्वतीय क्षेत्रों में 2026 तक 10 हजार से अधिक युवाओं को प्रशिक्षण दिया जायेगा। इसके तहत 09 कोर्स शामिल किये गये हैं। ये सभी कोर्स राष्ट्रीय व्यावसायिक शिक्षा एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईवीटी) से संबद्ध हैं। जबकि आईटीडीए- सीएससी के तहत 60 हजार से अधिक छात्रों को प्रशिक्षण दिया गया। जिसमें 25 प्रकार के कोर्स शामिल रहे हैं।
बैठक में उपाध्यक्ष अवस्थापना अनुश्रवण परिषद विश्वास डाबर, अपर मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन, प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु, सचिव शैलेश बगोली, अपर सचिव विजय जोगदंडे, निदेशक आईटीडीए नीतिका खंडेलवाल और संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।

राजस्व न्यायालयों में सप्ताह में दो दिन सुनवाई अनिवार्य किया जाएः सीएम

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सचिवालय में राजस्व विभाग की समीक्षा बैठक के दौरान अधिकारियों को निर्देश दिये कि यह सुनिश्चित किया जाए कि खतौनी की अधिकृत प्रति के लिए लोगों को तहसील जाने की जरूरत न पड़े। इसके लिए ऑनलाईन माध्यम से निर्धारित शुल्क की व्यवस्था कर 15 जुलाई तक खतौनी की ऑनलाईन अधिकृत प्रति उपलब्ध कराये जाने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि राजस्व न्यायालयों में सप्ताह में दो दिन सुनवाई अनिवार्य किया जाए। यदि कोई मजिस्ट्रेट किसी कारणवश तिथि को में न्यायालय में नहीं बैठ पाये तो, इसका उन्हें कोर्ट डायरी में स्पष्ट उल्लेख करना आवश्यक होगा।

मुख्यमंत्री ने सख्त निर्देश दिये कि जमीन के दाखिल खारिज की कार्यवाही निर्धारित समयावधि में पूर्ण की जाए। उन्होंने गढ़वाल और कुमांऊ कमिश्नर को निर्देश दिये कि दाखिल खारिज और राजस्व न्यायालयों के वादों को निस्तारण के सबंध में नियमित समीक्षा करें। उन्होंने निर्देश दिये कि ‘अपुणि सरकार पोर्टल’ के तहत सेवा के अधिकार में जो सेवाएं दी जा रही हैं, वह लोगों को निर्धारित समयावधि में मिले, इसमें लापरवाही करने वाले अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाए। उन्होंने कहा कि राजस्व विभाग की अधिक से अधिक सेवाएं पोर्टल से जोड़ी जाय। तहसीलों में आने वाले लोगों के लिए बैठने, पेयजल एवं अन्य मूलभूत सुविधाओं की व्यवस्था की जाए। मुख्यमंत्री ने गढ़वाल और कुमांऊ आयुक्त तथा जिलाधिकारियों को समय-समय पर तहसीलों की विभिन्न व्यवस्थाओं का निरीक्षण करने के भी निर्देश दिये हैं।

मुख्यमंत्री ने खतौनी पुनरीक्षण/अद्यतन किये जाने और खतौनी में दर्ज खातेदारों/सह खातेदारों का नवीन डाटाबेस तैयार किये जाने की प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दिये। उन्होंने राजस्व अभिलेखें में दर्ज सम्पूर्ण भूमि का आधुनिक विधि से जल्द सर्वे किये जाने के निर्देश दिये।

बैठक में उपाध्यक्ष अवस्थापना अनुश्रवण परिषद विश्वास डाबर, अपर मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन, प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु, सचिव शैलेश बगोली, चन्द्रेश यादव, अपर सचिव विजय जोगदंडे, और संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।

नए कानून न्याय की अवधारणा को करेंगे मजबूतः धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पुलिस मुख्यालय देहरादून में आयोजित कार्यक्रम में प्रतिभाग करते हुए भारतीय न्याय व्यवस्था में लागू हुए तीन नए आपराधिक कानूनों का राज्य में औपचारिक शुभारंभ किया। उल्लेखनीय है कि संपूर्ण देश में आज से तीन नए आपराधिक कानून, भारतीय न्याय संहिता 2023, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 और भारतीय साक्ष्य अधिनियम 2023“ लागू हो गए हैं। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने तीन नए कानूनों पर आधारित आईओ एप्लीकेशन का शुभारंभ एवं विवेचक पुलिसकर्मियों को टैबलेट वितरित किए।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भारतीय न्याय व्यवस्था में तीन नए कानून के लागू होने पर सभी को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि आज भारतीय न्याय व्यवस्था के लिए ऐतिहासिक दिन है। अंग्रेजों के जमाने से चले आ रहे विभिन्न पुराने और गैर जरूरी कानूनों को हटाकर वर्तमान परिस्थिति के हिसाब से नए आपराधिक कानून लागू हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं गृहमंत्री अमित शाह के नेतृत्व में नए कानून न्याय की अवधारणा को मजबूत करेंगे और न्याय मिलने की प्रक्रिया को अधिक सरल और सुलभ बनाने में पुलिस और न्यायालयों की वृहद स्तर पर मदद करेंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि अनुशासन, निष्पक्षता और न्याय हमारे देश की पुरानी परंपरा रही है। ये तीनों कानून देश के हर नागरिक की स्वतंत्रता, मानव अधिकार और सबके साथ समान व्यवहार को सुनिश्चित करेंगे। ये कानून गुलामी की मानसिकता को मिटाने और औपनिवेशिक कानूनों से मुक्ति दिलाने की मोदी सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। नए कानून आजादी के अमृत महोत्सव के बाद के कालखंड में देश को एक नई दिशा दिखाने का कार्य करेगा। अब हमारी न्याय प्रणाली पूरी तरह से स्वदेशी होगी जो भारत द्वारा, भारत के लिए और भारतीय संसद द्वारा बनाए गए कानूनों के अनुसार संचालित होगी। नए कानून नागरिकों के अधिकारों की रक्षा के साथ कानून व्यवस्था को भी और अधिक सुदृढ़ करेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि नए कानूनों में ई- एफ.आई.आर की सुविधा शुरू की गई है। अब न्यायालय पीड़ित को सुनवाई का अवसर दिए बिना मुकदमा वापस लेने की सहमति नहीं देगा। नए कानूनों में टेक्नोलॉजी के प्रयोग और फॉरेंसिंक विज्ञान को बढ़ावा दिया गया है। नई न्याय प्रणाली सभी को पारदर्शी और त्वरित न्याय देने के लिए अत्याधुनिक तकनीकों को बढ़ावा देने का कार्य करेगी। नए कानूनों में ऑनलाइन व्यवस्था पर भी बल दिया गया है। नए कानूनों में सब कुछ स्पष्ठता और सरलीकरण के साथ समाहित किया गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वतंत्र भारत के इतिहास में पहली बार हमारे कानून आतंकवाद, संगठित अपराधों और आर्थिक अपराधों को पूरी तरह परिभाषित करेंगे। नए कानूनों में मॉब लिंचिंग को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है, भगोड़ों की गैरमौजूदगी में भी मुकदमा चलाने के लिए स्पष्ट प्रावधान किए गए हैं। साथ ही बहुत छोटे अपराधों के लिये सजा के रूप में सामुदायिक सेवा की शुरुआत एक क्रांतिकारी कदम है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार उत्तराखण्ड की जनता को न्याय दिलाने एवं उनके अधिकारों के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है। नए कानूनों को लागू किये जाने हेतु राज्य सरकार ने पृथक रूप से 20 करोड़ रूपए की धनराशि का प्राविधान किया है। उन्होंने कहा आगे भी इन कानूनों के क्रियान्वयन कर्ता विभागों को इसके लिए राज्य सरकार से आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। उन्होंने कहा निश्चित ही तीनों कानूनों को उत्तराखंड पुलिस पूरी प्रतिबद्धता के साथ लागू करेगी।

कार्यक्रम के दौरान विभिन्न जनपदों से अधिवक्ताओं, पुलिस अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों ने भी तीन नए कानूनों पर विस्तार से जानकारी दी।

इस अवसर पर मुख्य सचिव राधा रतूड़ी, पुलिस महानिदेशक अभिनव कुमार, सचिव शैलेश बगौली, सचिव गृह दिलीप जावलकर, निदेशक अभियोजन डॉ पीवीके प्रसाद, अपर पुलिस महानिदेशक डा. वी मुरुगेशन, अमित सिन्हा, अपर महानिदेशक कानून व्यवस्था एपी अंशुमन, आईजी स्तर के अधिकारियों के अलावा वर्चुअल माध्यम से विभिन्न जिलों के एसएसपी, एसपी अन्य अधिकारीगण मौजूद रहे।

लालतप्पड़ में बनने वाले कन्वेंशन सेंटर का कार्य जुलाई, 2026 तक पूर्ण करेंः धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सचिवालय में उद्योग विभाग एवं सिडकुल की बैठक के दौरान अधिकारियों को निर्देश दिये कि राज्य में जिन परियोजनाओं पर कार्य किया जा रहा है, उनके पूर्ण होने तक कार्यों का पूरा कैलेंडर बनाया जाए। जिन परियोजनाओं को 02 साल में पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है, उनका टाईमलाईन सहित स्पष्ट ब्यौरा जल्द प्रस्तुत किया जाए। उन्होंने कहा कि लालतप्पड़ में बनने वाले कन्वेंशन सेंटर का कार्य जुलाई, 2026 तक पूर्ण किया जाए। लगभग 57 एकड़ में कन्वेंशन सेंटर बनाया जाना है। मुख्यमंत्री ने कहा कि देहरादून में बनने वाली फिल्म सिटी के निर्माण की कार्यवाही भी जल्द शुरू की जाए। इसके लिए 107 एकड़ की भूमि चिन्हित की गई है। उन्होंने कहा कि हरिद्वार के अलावा उधम सिंह नगर और सेलाकुई में फ्लैटेड फैक्ट्री के निर्माण की कार्यवाही की जाए। हरिद्वार में 05 लाख वर्गफीट भूमि पर फ्लैटेड फैक्ट्री के निर्माण की कार्यवाही गतिमान है।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिये कि अवस्थापना विकास और तकनीकि दक्षता से संबंधित विभागों को एक ही क्षेत्र में रखा जाए। आईटी पार्क की स्थापना जिन उद्देश्यों की पूर्ति की लिए की गई थी, उस हिसाब से कार्य किये जाएं। पर्वतीय क्षेत्रों में उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए विशेष प्रयास किये जाएं। उन्होंने निर्देश दिये कि प्राइवेट इंडस्ट्रियल एस्टेट पॉलिसी के तहत ऐसी व्यवस्था की जाए कि भू-उपयोग परिवर्तन के लिए धारा 143 कराने की अलग से जरूरत न पड़े, ताकि कार्यों में अनावश्यक देरी न हो। उन्होंने कहा कि नगरीय क्षेत्रों के अलावा पर्वतीय क्षेत्रों में भी उद्योगों को तेजी से बढ़ावा दिया जाए। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिये कि पर्वतीय क्षेत्रों में रूरल बिजनेस इंक्यूबेटर को तेजी से बढ़ावा दिया जाए। युवाओं और महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने में इनकी महत्वपूर्ण भूमिका होगी।
बैठक में जानकारी दी गई कि मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के तहत लगभग 50 हजार लोगों को रोजगार मिला है। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिये कि इस योजना को लोगों को अधिक से अधिक फायदा मिले, इसका व्यापक स्तर पर प्रचार-प्रसार किया जाए। मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना नैनो को भी मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना में जोड़ दिया जाए। सीएम स्वरोजगार योजना के तहत बजट बढ़ाने की आवश्यकता है, तो इसके लिए प्रस्ताव लाया जाए। 2028 तक राज्य की जीडीपी दुगुना करने के लिए विनिर्माण क्षेत्र में 2028 तक 90 हजार करोड़ के निवेश का लक्ष्य रखा गया है, जबकि 01 लाख 26 हजार करोड़ का लक्ष्य हासिल होने की संभावना है। मुख्यमंत्री ने कहा कि औद्योगिक विकास के लिए अन्य राज्यों की बेस्ट प्रैक्टिस के आधार पर भी कार्य किये जाएं।
बैठक में उपाध्यक्ष अवस्थापना अनुश्रवण परिषद् विश्वास डाबर, मुख्य सचिव राधा रतूड़ी, अपर मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन, प्रमुख सचिव आर. के. सुधांशु, सचिव उद्योग विनय शंकर पाण्डेय, अपर सचिव विजय जोगदंडे, महानिदेशक उद्योग रोहित मीणा और संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।

मन की बात में पीएम ने किया पौधारोपण का जिक्र, पर्यावरण रहेगा संतुलितः धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बौद्ध, मठ क्लेमनटाउन में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मन की बात का 111 वां संस्करण सुना। मन की बात कार्यक्रम के बाद मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि प्रधानमंत्री ने मन की बात में पौधरोपण को बढ़ावा देने की बात कही। विश्व पर्यावरण दिवस पर ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान की शुरूआत की गई। उन्होंने सभी प्रदेशवासियों से आह्वाहन किया कि इस मानसून सीजन में अधिक से अधिक पौधरोपण कर पर्यावरण के संरक्षण और संर्वद्धन में अपना योगदान अवश्य दें। पौधरोपण के साथ जल संचय की दिशा में भी योगदान देने के लिए उन्होंने प्रदेश की जनता से आह्वाहन किया है।

मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में तिब्बती समुदाय के लोगों से भी अनुरोध किया कि पौधरोपण और जल संचय के अभियान में वे भी सक्रिय भागीदार बनकर पर्यावरण संरक्षण में अपना योगदान दें। उन्होंने कहा कि जल स्रोतों के पुनर्जीवीकरण की दिशा में सबको सामूहिक प्रयास करने होंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने योग को वैश्विक स्तर पर पहुंचाने का कार्य किया। 10वें अन्तरराष्ट्रीय योग दिवस पर अनेक देशों में योग के बड़े कार्यक्रमों का आयोजन हुआ। दुनिया में योग करने वालों की संख्या में तेजी से वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड की भूमि योग और आयुर्वेद की भूमि है। स्वस्थ जीवन के लिए योग को अपनी दिनचर्या में शामिल करना जरूरी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा कर्मयोगी के रूप में भारत को हर क्षेत्र में आगे बढ़ाने का कार्य किया जा रहा है। भारत की सोच हमेशा से विश्व बंधुत्व की रही है।

इस अवसर पर विधायक विनोद चमोली, भाजपा के महानगर अध्यक्ष सिद्धार्थ अग्रवाल एवं अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित थे।

सीएम ने जानी जन समस्याएं, अधिकारियों को मौके पर दिए निराकरण के निर्देश


मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय स्थित मुख्य सेवक सदन में जन समस्याएं सुनी। उन्होंने मुख्यमंत्री कार्यालय के अधिकारियों को निर्देश दिये कि जन समस्याओं के जल्द निराकरण के लिए समस्या या शिकायत जिस विभाग से संबंधित है, शीघ्र संबंधित विभाग को भेजकर उस पर की गई कार्यवाही की भी जानकारी ली जाय। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिये कि जिस समस्या का समाधान थाना, तहसील एवं जिला स्तर पर हो सकता है, वे समस्याएं अनावश्यक रूप से शासन स्तर पर न आये। इस प्रकार की शिकायते आने पर उन्होंने संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने के भी निर्देश दिये हैं।

मुख्यमंत्री के समक्ष लोगों ने स्वास्थ्य, सड़क, पेयजल, आर्थिक सहायता, विद्युत, जमीन से संबंधित मामलों एवं अन्य समस्याएं रखी। मुख्यमंत्री ने सभी समस्याओं के निराकरण के लिए अधिकारियों को शीघ्र कार्यवाही करने के निर्देश दिये। मुख्यमंत्री ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिये हैं, कि वे नियमित तहसील दिवस और बीडीसी की बैठकों का आयोजन करवायें। इन बैठकों में सभी वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति सुनिश्चित की जाए। जिलाधिकारियों को प्रत्येक कार्यदिवस में 01 घण्टा जन समस्याओं को सुनने के भी निर्देश मुख्यमंत्री द्वारा दिये गये हैं।

इस अवसर पर आईजी गढ़वाल केएस नगन्याल, अपर सचिव संजय टोलिया, अपर जिलाधिकारी देहरादून जय भारत सिंह एवं अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

अपनी मांगों को लेकर राज्य आंदोलनकारियों ने की सीएम से मुलाकात

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुख्यमंत्री आवास में जगमोहन सिंह नेगी के नेतृत्व में उत्तराखण्ड राज्य आंदोलनकारी मंच के सदस्यों ने भेंट की। उन्होंने उत्तराखण्ड में भू-कानून, मूल निवास एवं राज्य आंदोलनकारियों के क्षैतिज आरक्षण से संबंधित विभिन्न विषयों से संबंधित ज्ञापन मुख्यमंत्री को सौंपा। मुख्यमंत्री ने उत्तराखण्ड राज्य आंदोलनकारी मंच के सदस्यों द्वारा प्रस्तुत ज्ञापन पर आवश्यक कार्यवाही का आश्वासन दिया।

इस अवसर पर पूर्व राज्य मंत्री धीरेन्द्र प्रताप, प्रदेश महामंत्री रामलाल खण्डूरी, प्रदेश प्रवक्ता प्रदीप कुकरेती सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित थे।

170 अभ्यर्थियों को मुख्यमंत्री ने प्रदान किये नियुक्ति पत्र

सहायक अभियंता, सिविल अभियंत्रण (ग्रामीण निर्माण विभाग) के पद पर 24, सहायक अभियंता, सिविल अभियंत्रण (सिंचाई विभाग) के पद पर 44, सहायक अभियंता, सिविल अभियंत्रण (उत्तराखण्ड जल संस्थान) के पद पर 20, सहायक अभियंता, सिविल अभियंत्रण (लोक निर्माण विभाग) के पद पर 41, सहायक अभियंता, सिविल अभियंत्रण (आवास विभाग) के पद पर 14, सहायक अभियंता, यांत्रिक अभियंत्रण (सिंचाई विभाग) के पद पर 10, सहायक अभियंता, कृषि अभियंत्रण (लघु सिंचाई विभाग) के पद पर 06, सहायक अभियंता, सिविल अभियंत्रण ( लघु सिंचाई विभाग) एवं सहायक विद्युत निरीक्षक, (ऊर्जा विभाग) के पद पर 02-02 एवं सहायक अभियंता, विद्युत /यांत्रिक अभियंत्रण (लोक निर्माण विभाग) एवं सहायक अभियंता, विद्युत /यांत्रिक अभियंत्रण (ग्रामीण निर्माण विभाग) के पद पर 01-01 अभ्यर्थी को नियुक्ति पत्र प्रदान किया गया।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नियुक्ति पत्र प्राप्त करने वाले सभी अभ्यर्थियों को शुभकामना देते हुए आशा व्यक्त की कि नियुक्ति प्राप्त करने वाले अभ्यर्थियों को जिस भी क्षेत्र में सेवा करने का अवसर मिल रहा है, वे कर्तव्यनिष्ठा और समर्पण भाव से जन सेवा करेंगे। उन्होंने कहा कि आज नियुक्ति देने का मुख्य उद्देश्य है कि, सभी अभ्यर्थियों को चयन वर्ष का लाभ प्राप्त हो सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड को देश के अग्रणी राज्यों की श्रेणी में लाने के लिए राज्य सरकार हर क्षेत्र में तेजी से कार्य कर रही है। उन्होंने सभी चयनित अभ्यर्थियों से अपेक्षा की किअपने क्षेत्र में बेहतर कार्य कर उत्तराखण्ड को श्रेष्ठ राज्य बनाने में सभी चयनित अभ्यर्थी अपना योगदान देंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि सबको अपने कार्यक्षेत्र में शत प्रतिशत योगदान देकर अपने माता-पिता और राज्य का गौरव बढ़ाने का कार्य करना है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले 03 सालों में राज्य सरकार का प्रयास रहा है कि हर क्षेत्र में युवाओं को रोजगार और स्वरोजगार से जोड़ा जाए। इन 03 वर्षों में लोक सेवा आयोग, उत्तराखण्ड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग और मेडिकल चयन बोर्ड के माध्यम से कुल 14 हजार 800 नियुक्तियां प्रदान की गई हैं। राज्य में सख्त नकल विरोधी कानून लागू किया गया है। नकल विरोधी कानून लागू होने के बाद से सभी भर्ती परीक्षाएं पूर्ण पारदर्शिता के साथ सम्पन्न हुई हैं। इस कानून के तहत दोषियों पर सख्त कार्रवाई के प्राविधान किये गये हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने विश्वविद्यालय से ही युवा राजनीति में कार्य किया है, युवा वर्ग हमेशा उनकी प्राथमिकता में रहा है।

कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज ने सभी चयनित अभ्यर्थियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए आशा व्यक्त की कि सभी सहायक अभियंता अपने कार्यक्षेत्र में उत्कृष्टता के साथ कार्य कर उत्तराखण्ड को विकसित राज्य बनाने में योगदान देंगे। उन्होंने कहा कि सभी चयनित अभ्यर्थी मन में यह भाव लेकर चलें कि कार्यक्षेत्र में हर समय नई चीजें, सीखने को मिलेगी, उनको आत्मसात करते हुए आगे बढ़ना है।

कैबिनेट मंत्री प्रेमचन्द अग्रवाल ने चयनित सभी अभ्यर्थियों को बधाई देते हुए कहा कि चयनित अभ्यर्थियों के लिए यह जीवन की नई पारी की शुरुआत है। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड में कई समय से सहायक अभियंताओं की कमी थी। नई नियुक्तियों से कार्यों में और तेजी आयेगी। उन्होंने कहा कि राज्य के 09 जिलों में विकास प्राधिकरण हैं, जिनमें सहायक अभियंताओं को नियुक्ति मिलेगी। राज्य में प्राधिकरण बनाने का मुख्य उद्देश्य है कि क्षेत्रों का नियोजित विकास हो सके।

इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन, प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु, सचिव आर. मीनाक्षी सुंदरम, डॉ. पंकज कुमार पाण्डेय, डॉ. आर. राजेश कुमार, विनय शंकर पाण्डेय, एस.एन. पाण्डेय, उपाध्यक्ष एमडीडीए बंशीधर तिवारी, अपर सचिव विनीत कुमार, कर्मेन्द्र सिंह एवं संबंधित विभागों के विभागाध्यक्ष उपस्थित थे।

नये कानूनों के लागू होते ही सही रूप में क्रियान्वयन किया जाएः सीएम

01 जुलाई 2024 से लागू होने वाले तीन नए कानून भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता एवं भारतीय साक्ष्य अधिनियम के संबंध में पुलिस महानिदेशक अभिनव कुमार द्वारा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के समक्ष प्रस्तुतिकरण दिया गया। प्रस्तुतिकरण में विस्तारपूर्वक नए कानूनों की आवश्यकता, इन्हें बनाने हेतु किये गये प्रयासों और इनकी विशेषताओं के बारे में जानकारी दी गई। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने उत्तराखण्ड पुलिस हस्तपुस्तिका का विमोचन भी किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि नये कानूनों में जो प्राविधान किये गये हैं, इन कानूनों के लागू होने के बाद प्रदेश में इनका सही तरीके से क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए। इन कानूनों की जानकारी के लिए प्रशिक्षण की पर्याप्त व्यवस्था की जाए और आम जन को इन कानूनों की जानकारी हो इसके लिए विभिन्न माध्यमों से कानूनों का प्रचार-प्रसार किया जायेगा। इनके प्रचार-प्रसार के लिए सूचना विभाग का सहयोग लिया जाए।

पुलिस महानिदेशक द्वारा नये कानूनों की आवश्यकता के बारे में अवगत कराया गया। उन्होंने कहा कि पूर्व के कानून बहुत जटिल थे, जिसके कारण भारतीय नागरिकों को न्याय पाना एवं आवाज उठाना पाना कठिन था। सहिंता का उद्देश्य ब्रिटिश शासन को बढ़ावा देना तथा भारतीय नागरिकों का दमन करना था। पूर्ववर्ती कानूनों के फलस्वरूप न्यायालय में लंबित मामलों की बड़ी संख्या, दोषसिद्धि की कम दर, पीड़ित की असंतुष्टि एवं अपराधी पर अपूर्ण कार्यवाही रहा। इसी के मद्देनजर नए कानूनों को बनाने की आवश्यकता महसूस की गई। 25 दिसंबर 2023 को नए आपराधिक कानूनों के बिल को राष्ट्रपति की स्वीकृति मिली।

पुलिस महानिदेशक ने जानकारी दी कि देश में 1 जुलाई 2024 से इन्हें लागू किया जाना प्रस्तावित है। कानून के गठन हेतु 18 राज्य, 6 केंद्र शासित प्रदेशों, सुप्रीम कोर्ट, 16 उच्च न्याययियों, 5 न्यायिक अकादमियों, 22 कानून विवि, 142 संसद सदस्यों, लगभग 270 विधायकों को जनता द्वारा दिये गए सुझावों के आधार पर 4 वर्ष में गहन परीक्षण कर इन्हें तैयार किया गया है। नए कानूनों का तीन मुख्य तथ्यों न्याय, समानता एवं निष्पक्षता को केंद्रित कर गठन किया गया है। भारतीय न्याय सहिंता 2023 में कुल 358 धाराएं होंगी जबकि वर्तमान कानून में यह 511 हैं। जिसमे 21 नई धाराओं को जोड़ा गया है, 41 धाराओं में सजा को बढ़ाया गया है। 82 धाराओं में फाईन को बढ़ाया गया है। 25 धाराओं में न्यूनतम सजा का प्राविधान, 06 धाराओं में सामुदायिक अपराधों को जोड़ा गया है एवं 19 धाराओं को हटाया गया है। भारतीय नागरिक सुरक्षा सहिंता 2023 में 531 धाराएं होंगी जबकि वर्तमान कानून में यह 484 है। भारतीय साक्ष्य अधिनियम 2023 में कुल 170 धाराएं हैं, वर्तमान कानून में 166 धाराएं हैं।

पुलिस महानिदेशक ने प्रस्तुतिकरण में अवगत कराया कि नए कानून पीड़ित को अधिक अधिकार प्रदान करने के साथ ही शीघ्र न्याय, आपराधिक न्याय विंग प्रणाली के सभी विंग को अधिक जवाबदेह बनाने पर जोर देता है। राज्य में नए कानूनों को लागू करने के लिए 6 कमेटियों का गठन किया गया है जिनमें जनशक्ति, प्रशिक्षण, इन्फ्रास्ट्रक्चर, सीसीटीएनएस, राज्य में लागू एक्ट में नये कानून के अन्तर्गत परिवर्तन व जागरूक समिति शामिल हैं। नए कानूनों के लागू होने पर राज्य में लागू अधिनियमों में आवश्यक संशोधन प्रस्तावित हैं। जिनमें उत्तराखंड राज्य के कुल 434 स्थानीय अधिनियमों का अवलोकन कर 74 अधिनियमों में संशोधन के प्रस्ताव के अतिरिक्त उत्तर प्रदेश के 343 अधिनियमों का अवलोकन कर 116 अधिनियम मंस संशोधन के प्रस्ताव एवं केंद्र के कुल 228 अधिनियमों का अवलोकन कर संशोधन का प्रस्ताव है। उन्होंने जानकारी दी कि भारतीय न्याय संहिता कि कुछ धाराओं में बदलाव किये गये हैं।

इस अवसर पर मुख्य सचिव राधा रतूड़ी, अपर मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन, प्रमुख सचिव आर.के सुधांशु, सचिव दिलीप जावलकर, चन्द्रेश यादव, एडीजी अमित कुमार सिन्हा, ए.पी. अंशुमन, आईजी विम्मी सचदेवा, केवल खुराना, विमला गुंज्याल, विशेष सचिव रिद्धिम अग्रवाल एवं पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।