एक्सप्रेस-वे के उद्घाटन कार्यक्रम में प्रधानमंत्री मोदी ने पहाड़ी बोली भाषा के शब्दों को दी अपने भाषण में जगह

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली-दून इकोनॉमिक कॉरिडोर के शुभारंभ पर उत्तराखंडवासियों से सीधे कनेक्ट किया। उन्होंने सिर पर ब्रहमकमल टोपी, भाषण के शुरूआत में गढ़वाली-कुमाऊंनी के छोटे-छोटे वाक्य रखे। मौके पर प्रधानमंत्री ने अपने चिर परिचित अंदाज में एक बार फिर साबित किया कि उत्तराखंड की प्रगति से उनका खास वास्ता है।

उन्होंने कहा एक्सप्रेस वे के निर्माण में मां डाटकाली के आशीर्वाद का प्रधानमंत्री ने खास तौर पर जिक्र किया। ये भी जोड़ा कि देहरादून पर मां डाटकाली की कृपा है। उत्तराखंड से लगे उत्तर प्रदेश के क्षेत्र में स्थित संतला माता मंदिर का भी उन्होंने स्मरण किया। प्रधानमंत्री ने हरिद्वार कुंभ, नंदा राजजात से लेकर पंच बदरी, पंच केदार, पंच प्रयाग का भी प्रभावपूर्ण जिक्र कर जबरदस्त लोकल कनेक्ट किया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नेे जसवंत सिंह आर्मी ग्राउंड, गढ़ी कैंट में आयोजित समारोह में 210 किमी लंबे, दिल्ली -देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर का रिमोट बटन दबाकर लोकार्पण किया। इससे पहले प्रधानमंत्री ने गढ़ी कैंट तक 12 किलोमीटर लंबे रोड शो में प्रतिभाग करने के साथ ही डाटकाली मंदिर में दर्शन करने के उपरांत पूजा भी की।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गढ़ी कैंट में आयोजित, समारोह में अपने संबोधन की शुरुआत देशवासियों को बैसाखी और बिहू पर्व की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि आने वाले कुछ दिनों में उत्तराखंड में स्थित पवित्र चार धामों की भी यात्रा शुरु होने वाली है, जिसका देशभर के आस्थावान लोग प्रतीक्षा करते हैं। दिल्ली- देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर बनने से चारधाम के यात्रियों को भी सुविधा होगी। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड राज्य अपने स्थापना के 26वें प्रवेश कर चुका है, अब राज्य की प्रगति में दिल्ली देहरादून एक्सप्रेस-वे भी शामिल हो गया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि कुछ साल पहले उन्होंने बाबा केदार की धरती पर अनायास ही कहा था कि इस शताब्दी का तीसरा दशक उत्तराखंड के नाम होने जा रहा है, उन्हें यह देखकर बेहद खुशी हो रही है कि डबल इंजन वाली सरकार की नीतियों और उत्तराखंड के लोगों के परिश्रम से उत्तराखंड तेजी से इस राह पर बढ़ रहा है।

उत्तराखंड ने देश को दिखाई राह
प्रधानमंत्री ने संविधान निर्माता बाबा साहेब डॉ बीआर अंबेडकर को उनकी जयंती पर श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए कहा कि बीते एक दशक से उनकी सरकार ने जो भी निर्णय लिए वो देश के संविधान की गरिमा को बढ़ाने वाले साबित हुए हैं। उन्होंने कहा कि कश्मीर में धारा 370 की समाप्ति और देश से माओवाद खत्म होने के बाद आज पूरे देश में भारत का संविधान लागू हो गया है। उन्होंने कहा कि, उत्तराखंड ने संविधान की भावना के अनुरूप, समान नागरिक संहिता लागू कर, पूरे देश को नई राह दिखाई है। उन्होंने कहा कि बाबा साहेब का जीवन गरीबों, वंचितों और शोषितों को न्याय पूर्ण व्यवस्था देने के लिए समर्पित रहा है, केंद्र सरकार भी इसी भावना के साथ हर गरीब को सामाजिक न्याय दिलाने के लिए प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि देश का संतुलित विकास, सबको सुविधा और सबकी समृद़धि ही सामाजिक न्याय का माध्यम बन सकती है। इसलिए बाबा साहेब भी औद्योगिकरण और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर की भरपूर वकालत करते थे।

सड़कें बनेगी भविष्य की रेखा
प्रधानमंत्री ने देश के विकास में सड़क, रेलवे, रोपवे और वाटरवे की भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि कुछ लोग, भविष्य जानने के लिए हाथ की रेखाओं को दिखाने के लिए ज्योतिष शास्त्र की शरण में जाते हैं। आज इसी तरह सड़कें, राष्ट्र की भाग्य रेखाएं बनती जा रही हैं। उन्होनें कहा कि बीते एक दशक से सरकार विकसित भारत के लिए ऐसी ही भाग्यरेखाओं के निर्माण में जुटी हुई है। ये भाग्य रेखाएं, सिर्फ आर्थिकी का आधार नहीं बनेगी, बल्कि आने वाली पीढ़ी की समृद्धि की गारंटी भी बनेगी और यही मोदी की गारंटी भी है। उन्होंने कहा कि बीते एक दशक में सरकार ने इन विकास रेखाओं के निर्माण में अभूतपूर्व निवेश किया है। वर्ष 2014 तक, पूरे देश के इंफ्रा प्रोजेक्ट पर दो लाख करोड़ भी खर्च नहीं हो पाते थे, जबकि आज यह राशि छह गुना अधिक बढ़कर 12 लाख करोड़ के पार पहुंच चुकी है। इस दौरान अकेले उत्तराखंड में ही, सवा दो लाख करोड़ रुपए के इंफ्रा प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि कभी उत्तराखंड के गांवों में सड़कों के इंतजार में पीढ़ियां बूढ़ी हो जाती थी, आज डबल इंजन की सरकार के कारण गांव गांव सड़क पहुंच रही है। इससे वीरान गांव फिर जीवंत हो रहे हैं। चारधाम महामार्ग परियोजना, रेल परियोजना, केदारनाथ, हेमकुंड रोपवे जैसे परियोजनाएं उत्तराखंड की भाग्य रेखाएं बन रही हैं।

नए भारत में स्पीड और स्केल पर जोर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि 21वीं सदी का भारत जिस स्पीड और स्केल पर काम कर रहा है, उसकी चर्चा दुनियाभर में हो रही है। उन्होने कहा कि बीते कुछ महीनों के भीतर ही दिल्ली मेट्रो का विस्तार हुआ है, साथ ही मेरठ तक मेट्रो पहुंची है, नोएडा में एयरपोर्ट शुरु हुआ है और अब दिल्ली देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर भी शुरु हो चुका है। इतने छोटे से क्षेत्र में इतना सबकुछ हो रहा है तो आप देशभर की प्रगति का आंकलन कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि आज देश में कई इकोनॉमिक कॉरिडोर पर काम चल रहा है। ये इकोनॉमी कॉरिडार प्रगति के नए द्वार बनने जा रहे हैं जिनसे हमारी उम्मीदों की डोर भी जुड़ी हुई है। उन्होंने कहा कि दिल्ली दृ देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर से जहां लोगों का आने जाने में समय बचेगा, वहीं ईंधन की खपत कम होने से किराया और माल भाड़ा भी बचेगा। साथ ही किसानों को अपने उत्पाद, तेजी से बड़ी मंडियों तक पहुंचाने की सुविधा मिलेगी। इस शानदार एक्सप्रेस वे का सर्वाधिक लाभ उत्तराखंड के पर्यटन को मिलेगा ।

बारामासी पर्यटन की ओर बढ़ा उत्तराखंड
प्रधानमंत्री ने उत्तराखंड सरकार द्वारा विंटर टूरिज्म, विंटर स्पोर्ट्स और वेड इन उत्तराखंड जैसे अभियानों को बढ़ावा दिए जाने के लिए जारी प्रयासों की प्रशंसा करते हुए कहा कि, अब उत्तराखंड बारामासी पर्यटन की तरफ बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री ने 2023 में अपनी आदि कैलाश- ओमपर्वत यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि, पहले यहां साल में कुछ सौ लोग ही आते थे, जबकि 2025 में यह संख्या 40 हजार के पार पहुंच गई है। इसी तरह उत्तराखंड में शीतकालीन यात्रा में आने वाले पयर्टकों और तीर्थयात्रियों की संख्या भी 80 हजार से बढ़कर डेढ़ लाख पहुंच गई है। प्रधानमंत्री ने कहा कि विकसित भारत के लिए, प्रगति, प्रकृति और संस्कृति को साथ रखा जाना जरूरी है। इसलिए आज हर निर्माण का इस त्रिवेणी को ध्यान में रखकर किया जा रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि हमें ध्यान देना होगा कि इंसानों के लिए होने वाले विकास कार्यों से वन्य जीवों को कोई कष्ट न हो। इसलिए दिल्ली देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर पर 12 किमी लंबा एलिवेट रोड बनाया गया है।

उत्तराखंड की पवित्रता का करें पालन
प्रधानमंत्री ने उत्तराखंड के लोगों के साथ ही यहां आने वाले पयर्टकों से अपील करते हुए कहा कि वो देवभूमि की धरोहर बहुत पवित्र है, ऐसे स्थानों का साफ सुधरा रखना हम सबका कर्तव्य है। यहां जगह -जगह कूड़ा डालने, प्लास्टिक की बोतलें फेंकने से देवभूमि की पवित्रता को ठेस पहुंचती है। इसलिए देवभूमि के तीर्थ स्थलों को स्वच्छ और सुंदर रखना हम सबकी जिम्मेदारी है। प्रधानमंत्री ने कहा कि अगले साल हरिद्वार में दिव्य, भव्य और स्वच्छ कुंभ मेले का आयोजन होगा, इसी के साथ उत्तराखंड में जल्द ही नंदा देवी राजजात भी आयोजित होने वाली है। ये यात्रा उत्तराखंड की विशिष्ट सांस्कृतिक चेतना का भी उदाहरण है, जिसमें मां नंदा को बेटी मानकर सम्मान के साथ विदा किया जाता है। उन्होंने कहा कि वो मां नंदा को प्रणाम करते हुए, विकसित भारत के निर्माण में माताओं बहनों की बड़ी भूमिका है।

2029 में आधी आबादी को मिलेगा पूरा हक
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि महिलाओं को राजनैतिक प्रतिनिधित्व प्रदान करने के लिए, संसद ने चार दशक के बाद नारी शक्ति वंदन अधिनियम पारित कर दिया है, इससे लोकसभा और विधानसभाओं में 33 प्रतिशत महिला आरक्षण तय हो गया है। अब इसे लागू करने में देर नहीं होने चाहिए, 2029 के लोकसभा और इससे आगे के विधानसभा चुनावों में इसे लागू किया जाना चाहिए। देश की इसी भावना के अनुरूप 16 अप्रैल से संसद का विशेष सत्र आयोजित किया जा रहा है। उन्होंने सभी दलों से इस संसोधन अधिनियम को समर्थन देने की अपील करते हुए कहा कि, 2029 में देश की पचास प्रतिशत आबादी को उनका हक मिलकर रहेगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उत्तराखंड की सैन्य परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि देश, 1962 में शहीद हुए बाबा जसवंत सिंह के शौर्य को भुला नहीं सकता। सैनिकों के सम्मान के क्रम में केंद्र सरकार ने वन रैंक, वन पेंशन लागू करते हुए पूर्व सैनिकों के खाते में सवा लाख करोड़ से अधिक की धनराशि जमा की है। जिसका लाभ उत्तराखंड के हजारों परिवारों को भी मिला है। सरकार देशभक्ति, देवभक्ति और प्रगति को जोडते हुए विकसित भारत का संकल्प सच करने का प्रयास कर रही है।

पीएम-सीएम की फिर दिखी मजबूत बांडिंग
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की मजबूत बांडिंग एक बार फिर प्रदर्शित हुई। अपने संबोधन में प्रधाानमंत्री मोदी ने मुख्यमंत्री के लिए लोकप्रिय, कर्मठ और युवा जैसे शब्दों का प्रयोग किया। जिस वक्त केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी जनसभा को संबोधित कर रहे थे, उस दौरान मोदी-धामी के बीच किसी विषय पर वार्तालाप हुआ। मुख्यमंत्री की बात को गौर से सुनते हुए प्रधानमंत्री दिखाई दिए।

अब रफ्ता-रफ्ता नहीं, पूरी रफ्तार के साथ आगे बढ़ रहा है भारतः धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का उत्तराखंड आगमन पर स्वागत करते हुए कहा कि उनका प्रत्येक दौरा उत्तराखंड के लिए नई ऊर्जा और विकास की नई सौगात लेकर आता है। उन्होंने कहा आज प्रधानमंत्री के नेतृत्व में देश और उत्तराखंड को ₹12 हजार करोड़ की लागत से बने एशिया के सबसे लंबे ऐलिवेटेड वाइल्डलाइफ कॉरिडोर की सौगात मिल रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज का दिन कई मायनों में विशेष है। एक ओर जहां दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर के रूप में उत्तराखंड की विकास यात्रा को नई गति मिल रही है, वहीं यह अवसर भीमराव अंबेडकर की जयंती का भी है। उन्होंने बाबा साहेब को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि बाबा साहेब ने सामाजिक सौहार्द एवं समरसता को मजबूत करने के लिए वंचित वर्ग को समाज की मुख्य धारा से जोड़ने का काम किया है।

मुख्यमंत्री ने देशवासियों को बैसाखी और सिख नव वर्ष की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह पर्व हमारे सांस्कृतिक वैभव और कृषि परंपराओं का प्रतीक हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में देश ने बीते वर्षों में अभूतपूर्व प्रगति की है। 2014 के बाद भारत ने आधारभूत संरचना, अर्थव्यवस्था, महिला सशक्तिकरण, राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे हर क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छुआ है।

मुख्यमंत्री ने कहा प्रधानमंत्री ने 21वीं सदी का तीसरा दशक, उत्तराखंड का दशक बताकर सभी का उत्साहवर्धन किया। प्रधानमंत्री ने सीमांत गांव माणा में आकर उसे देश का प्रथम गांव घोषित किया, इन्वेस्टर समिट के उद्घाटन पर वेड इन उत्तराखंड का संदेश दिया। आदि-कैलाश का दर्शन कर इस तीर्थ को विश्व पटल पर नई पहचान दिलाई, राष्ट्रीय खेलों के उद्घाटन से देवभूमि को खेलभूमि के रूप पहचान दिलाई, हर्षिल मुखबा से शीतकालीन पर्यटन को बढ़ावा दिया एवं रजत जयंती वर्ष के अवसर पर अगले 25 वर्षों के लिए राज्य को एक नया विजन दिया।

मुख्यमंत्री ने कहा राज्य सरकार, प्रधानमंत्री के नेतृत्व में उत्तराखंड देश का श्रेष्ठ राज्य बनने के लिए अपने विकल्प रहित संकल्प के साथ ष्विकास भी और विरासत भी’’ की अवधारणा के अनुरूप प्रत्येक क्षेत्र में कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन का समापन ष्अब रफ्ता-रफ्ता नहीं, पूरी रफ्तार के साथ आगे बढ़ रहा है भारत अब नक्सलवाद, उग्रवाद और आतंकवाद से जीत रहा है भारत अब अर्थव्यवस्था, महिला सशक्तिकरण, स्वरोजगार के साथ-साथ नवाचार में भी कीर्तिमान बना रहा है भारत कविता से किया। मुख्यमंत्री ने कविता के माध्यम से प्रधानमंत्री के नेतृत्व, विकास कार्यों और जनसेवा के प्रति उनके समर्पण को सराहा और आभार व्यक्त किया।

इससे पहले, मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री को नंदा राजजात यात्रा पर आधारित स्मृति चिन्ह भेंट किया, जिसमें मां नंदा की डोली, यात्रा की अगुवाई करते खाड़ू तथा स्थानीय लोगों का सुंदर चित्रण किया गया है।


उत्तराखंड में एक लाख 30 हजार करोड़ के प्रोजेक्ट पर चल रहा कामः गडकरी

सड़क परिवहन, राजमार्ग मंत्री नितिन गड़करी ने रखा विकास परियोजनाओं का विवरण
केन्द्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री श्री नितिन गड़करी ने अपने संबोधन में कहा कि दिल्ली देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर उत्तराखण्ड के विकास को नई गति प्रदान करेगा। उन्होने कहा कि केंद्र सरकार के सहयोग से उत्तराखण्ड में करीब एक लाख 30 हजार करोड़ के प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है।

गडकरी ने कहा कि सहारनपुर बाईपास से हरिद्वार तक 51 किलोमीटर छह लेन रोड़ का भी जून में उद्घाटन होने जा रहा है। इसी तरह 1650 करोड़ के लागत से पौंटा साहिब से देहरादून फोर लेन मार्ग अगले महीने तक शुरु हो जायेगा। 1600 करोड़ की लागत से हरिद्वार में फोर लेन ग्रीन फील्ड बाईपास फेज-1 अक्टूबर, 2026 तक पूरा हो जायेगा, जिससे हरिद्वार और ऋषिकेश जाने में ट्रेफिक जाम की समस्या हल होगी। इसके साथ ही केंद्र सरकार ने 1100 करोड़ की लागत से ऋषिकेश बाईपास परियोजना को भी मंजूरी प्रदान कर दी है, जिस पर अगस्त तक काम शुरू हो जायेगा।

उन्होंने कहा कि 1050 करोड़ की लागत से 21 किमी. लम्बा रूद्रपुर में फोरलेन बाईपास इसी साल अक्टूबर और 936 करोड़ की लागत से 15 किमी. लम्बा काशीपुर से फोरलेन बाईपास दिसंबर 2026 में पूरा होगा। साथ ही 716 करोड़ की लागत से 12 किमी. लम्बा देहरादून – झाझरा – आशारोड़ी फोर लेन एलिवेडेट रोड़ अगले साल अप्रैल और 745 करोड़ की लागत से 20 किमी. लम्बा भानियावाला, जौलीग्रांट से ऋषिकेश तक फोर लेन मार्ग अप्रैल 2028 तक पूरा होगा। साथ ही साथ 800 करोड़ की लागत से श्रीनगर में भी टू लेन बाईपास की भी डीपीआर बन रही है।

उन्होंने कहा कि पहले हमें मानसरोवर यात्रा के लिए नेपाल और चीन से होकर जाना पड़ता था। लेकिन अब 5200 करोड़ रूपये की लागत से टनकपुर-पिथौरागढ़ होकर लिपुलेख तक मार्ग बनाया जा रहा है। 370 किमी लंबे इस प्रोजेक्ट में से करीब 200 किमी. का कार्य पूरा हो चुका है।इसी तरह 12 हजार करोड़ की लागत से निर्माणाधीन 825 किमी लंबी चारधाम सड़क परियोजना में 640 किमी. का काम पूरा हो चुका है। 1300 करोड़ की लागत से रूद्रप्रयाग से गौरीकुंड तक का कार्य दिसम्बर 2026 तक शुरू किया जायेगा। इसके साथ-साथ गंगोत्री धाम जाने के लिए 142 किमी का काम पूरा हुआ है और बाकी 100 किमी. का काम चरणबद्ध तरीके से हो रहा है। यमुनोत्री धाम में 2500 करोड़ की लागत से धरासू से यमुनोत्री तक 46 किमी. का काम पूरा हो चुका है तथा 30 किमी. का काम अप्रैल, 2028 तक पूरा हो जाएगा। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि केंद्र सरकार सोनप्रयाग – केदारनाथ रोपवे और गोंविदघाट से हेमकुंड साहिब पर भी काम कर रही है। प्रदेश में अनेक जगहों पर टनल भी बनाई जा रही है।

कार्यक्रम में प्रदेश के राज्यपाल ले.ज (सेवानिवृत्त) गुरमीत सिंह, केंद्रीय राज्य मंत्री अजय टम्टा, राज्यसभा सांसद एवं भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट, विधानसभा अध्यक्ष रितु खंडूरी भूषण, पूर्व सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत, विजय बहुगुणा, डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक, तीरथ सिंह रावत, कैबिनेट मंत्री कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल, गणेश जोशी, रेखा आर्य, खजान दास, डॉ. धन सिंह रावत, सौरभ बहुगुणा, मदन कौशिक, राम सिंह कैड़ा, भरत चौधरी, प्रदीप बत्रा, सांसद अनिल बलूनी, अजय भट्ट, माला राज्यलक्ष्मी शाह, नरेश बंसल उपस्थित हुए। वहीं, उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता वर्चुअल माध्यम से शामिल हुईं।

देवभूमि में प्रधानमंत्री का भव्य स्वागत, 12 किमी लंबे रोड शो में बड़ी संख्या में पहुंचे लोग

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर के लोकार्पण के अवसर पर देहरादून पहुंचे, जहां उनका भव्य और ऐतिहासिक स्वागत हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत प्रधानमंत्री ने प्रसिद्ध डाट काली मंदिर में पूजा-अर्चना से की, जहां उन्होंने देश और उत्तराखंड की सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना की।

इसके बाद प्रधानमंत्री ने देहरादून कैंट स्थित सभा स्थल तक लगभग 12 किलोमीटर लंबा रोड शो किया। यह रोड शो कई मायनों में खास रहा, क्योंकि बताया जा रहा है कि प्रधानमंत्री द्वारा किया गया यह अब तक का सबसे लंबा रोड शो है।

रोड शो के दौरान सड़कों के दोनों ओर हजारों की संख्या में युवा, महिलाएं और आमजन मौजूद रहे। “भारत माता की जय” के नारों से पूरा वातावरण गूंज उठा। लोगों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला और हर कोई प्रधानमंत्री की एक झलक पाने को उत्सुक नजर आया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी हाथ जोड़कर और हाथ हिलाकर लोगों का अभिवादन स्वीकार किया। जनता के इस अपार प्रेम और समर्थन से वे बेहद प्रसन्न और उत्साहित दिखाई दिए।

अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने इस अभूतपूर्व स्वागत का जिक्र करते हुए कहा कि देवभूमि उत्तराखंड से उन्हें हमेशा विशेष ऊर्जा मिलती है। उन्होंने कहा कि यहां के लोगों का स्नेह और आशीर्वाद उन्हें देश के विकास के लिए और अधिक प्रेरित करता है, और वे इस बार भी उत्तराखंड से नई ऊर्जा लेकर जा रहे हैं।

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में रोड शो में उमड़े जन सैलाब और लोगों के प्यार पर आभार जताया। उन्होंने कहा कि 12 किलोमीटर लंबे रोड शो में जनता का प्यार देखते हुए वह तेजी से वाहन चलवाकर जनसभा में नहीं पहुंच पाए । लोगों का अभिवादन करने के लिए उनके वाहन को हल्के हल्के चलाया गया और इस कारण जनसभा में पहुंचने में एक घंटे से अधिक का विलंब हो गया। इसके लिए उन्होंने जनसभा में उपस्थित लोगों से क्षमा मांगी ।

यह भव्य रोड शो न केवल इकोनॉमिक कॉरिडोर के महत्व को दर्शाता है, बल्कि उत्तराखंड की जनता और प्रधानमंत्री के बीच गहरे जुड़ाव को भी प्रदर्शित करता है।

सीएम ने महिला आरक्षण के मुद्दे पर व्यापक सहमति बनाने और संसद में सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने का किया आह्वान

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आगामी 16 अप्रैल से संसद में प्रस्तावित नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर विशेष सत्र से पहले एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए राज्य के सभी सांसदों और विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रदेश अध्यक्षों को पत्र भेजा है। इस पत्र के माध्यम से उन्होंने महिला आरक्षण के मुद्दे पर व्यापक सहमति बनाने और संसद में सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने का आह्वान किया है।

अपने पत्र में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि आगामी 16 अप्रैल से संसद में नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर एक विशेष विमर्श हेतु एक विशेष सत्र आयोजित होने जा रहा है। यह अवसर हमारे लोकतांत्रिक मूल्यों को और सुदृढ़ करने के साथ-साथ देश की आधी आबादी को निर्णय-निर्माण की प्रक्रिया में अधिक प्रभावी रूप से शामिल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम प्रस्तुत करता है। एक समावेशी समाज का निर्माण तभी संभव है जब उसकी महिलाएँ समान अवसरों के साथ आगे बढ़ें और नेतृत्व की भूमिकाएँ निभाएँ। आज देश की बेटियाँ स्पेस से लेकर स्पोर्ट्स तक, सशस्त्र बलों से लेकर स्टार्ट-अप्स तक हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का परिचय दे रही हैं और अपनी मेहनत व संकल्प से नए मानक स्थापित कर रही हैं। सार्वजनिक जीवन में उनकी बढ़ती भागीदारी हमारे समाज में हो रहे सकारात्मक परिवर्तन का प्रतीक है।

मुख्यमंत्री ने कहा है कि वर्ष 2023 में सभी दलों के सांसदों ने एकजुट होकर नारी शक्ति वंदन अधिनियम का समर्थन किया था, जो भारतीय लोकतंत्र की एक ऐतिहासिक उपलब्धि के रूप में दर्ज है। इसके क्रियान्वयन को लेकर संसद में विचार हुआ था और सभी दलों ने इस बात पर सहमति व्यक्त की थी कि इसके प्रावधानों को यथाशीघ्र लागू किया जाना चाहिए। विशेषज्ञों, संवैधानिक विद्वानों और राजनीतिक दलों से प्राप्त सुझावों के आधार पर यह स्पष्ट हो चुका है कि अब इस अधिनियम को उसकी पूर्ण भावना के साथ लागू करने का समय आ गया है। इसी क्रम में यह निर्णय लिया गया है कि 2029 के लोकसभा चुनाव तथा आगामी विधानसभा चुनाव महिला आरक्षण के प्रावधानों को पूर्ण रूप से लागू करने के बाद ही संपन्न हों, जिससे लोकतांत्रिक संस्थाओं में नई ऊर्जा का संचार होगा और शासन व्यवस्था में व्यापक भागीदारी सुनिश्चित होगी।

अपने पत्र में मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड के संदर्भ में यह कदम इसलिए और भी महत्वपूर्ण है क्योंकि हमारा राज्य सामाजिक-सांस्कृतिक रूप से सदैव मातृशक्ति को सम्मान देने की परम्परा का पालन करता आया है। पर्वतीय क्षेत्रों में महिलाएँ परिवार, आजीविका और सामुदायिक जीवन की मुख्य आधारशिला रही हैं, और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बीच वे निरंतर जिम्मेदारियों का निर्वहन करती रही हैं। नारी शक्ति वंदन अधिनियम उत्तराखण्ड की उन बेटियों के लिए नए अवसर खोलेगा जो राजनीति, समाज सेवा, शिक्षा, उद्यमिता और सार्वजनिक जीवन में तेजी से आगे बढ़ रही हैं।

राज्य में पंचायती राज संस्थाओं, नगर निकायों और सहकारी संस्थाओं में महिला आरक्षण के सफल क्रियान्वयन ने सक्षम महिला नेतृत्व की एक सशक्त पंक्ति तैयार की है, जो अब राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर भी अपनी भूमिका निभाने के लिए तैयार है। मुख्यमंत्री धामी ने विश्वास व्यक्त किया कि संसद और विधानसभाओं में महिलाओं की बढ़ी हुई भागीदारी न केवल लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करेगी, बल्कि समाज की वास्तविक आवश्यकताओं को और अधिक संवेदनशीलता से समझने और संबोधित करने में भी सहायक होगी।

मुख्यमंत्री ने सभी से इस विषय पर व्यापक सहमति स्थापित करने का प्रयास करने का अनुरोध करते हुए कहा कि यह मुद्दा किसी दल या व्यक्ति विशेष का नहीं, बल्कि देश की माताओं-बहनों बेटियों के सम्मान तथा आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित और सशक्त भविष्य से जुड़ा हुआ है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हम सब मिलकर इस ऐतिहासिक परिवर्तन को साकार करेंगे और देश की नारी शक्ति को वह सम्मान और अवसर प्रदान करेंगे जिसकी वे हकदार हैं।

वन मंत्री सुबोध उनियाल ने बताई दिल्ली-दून एक्सप्रेस वे पर बने एलिवेटेड कारिडोर की खासियत

दिल्ली-दून एक्सप्रेस-वे पर बना एलिवेटेड वाइल्ड लाइफ कारिडोर वन्य जीवों का सुरक्षा कवच बनेगा। यही नहीं, इसके निर्माण से मानव-वन्य जीव संघर्ष में कमी की प्रबल संभावना है। इस 12 किलोमीटर लंबे एशिया के संबसे लंबे एलिवेटेड कारिडोर को विकास और पारिस्थितिकी के संतुलन का बेहतरीन उदाहरण माना जा रहा है।
दिल्ली-दून एक्सप्रेस-वे और उससे जुडे़ वन और वन्य जीवों के विषय को लेकर सोमवार को वन मंत्री सुबोध उनियाल ने प्रेस कान्फ्रेंस की। वन मुख्यालय में मीडिया से बातचीत में उन्होंने इस कॉरिडोर से वन एवं वन्य जीवों को होने वाले लाभों के विषय में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस परियोजना का आखिरी 20 किलोमीटर भाग उत्तर प्रदेश के शिवालिक वन प्रभाग एवं उत्तराखंड के राजाजी टाइगर रिजर्व व देहरादून वन प्रभाग के घने वन क्षेत्रों से होकर गुजरता है। यह परियोजना विकास एवं पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करने का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।
वन मंत्री ने जानकारी दी कि उत्तराखंड व उत्तर प्रदेश में इस परियोजना के अंतर्गत वन भूमि के हस्तांतरण के सापेक्ष व्यापक स्तर पर प्रतिपूरक वृक्षारोपण किया गया है। कुल 165.5 हेक्टेयर क्षेत्र में प्रतिपूरक वृक्षारोपण कार्य किया गया है, जिसमें 1.95 लाख पेड़ लगाए गए हैं। सुप्रीम कोर्ट मॉनिटरिंग कमेटी के निर्देशन में 40 करोड़ की अतिरिक्त धनराशि से वन एवं वन्य जीव सरंक्षण हेतु इको रेस्टोरेशन के विभिन्न कार्य भी संपादित किए जा रहे हैं।
उन्होंने बताया कि इस राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना में एशिया का सबसे लंबा लगभग 12 किलोमीटर का एलिवेटेड वाइल्ड लाइफ कॉरिडोर निर्मित किया गया है, जो विशेष रूप से वन्यजीवों के सुरक्षित आवागमन हेतु विकसित किया गया है। इसमें हाथी अंडरपास एवं अन्य वन्यजीवों पास का भी निर्माण किया गया है, जिससे वन्यजीवों की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित हो सके। उन्होंने बताया कि परियोजना के निर्माण के दौरान वन्य जीवों की सुरक्षा को सर्वाेच्च प्राथमिकता देते हुए सभी आवश्यक एहतियाती उपाय अपनाए गए हैं। इसके अंतर्गत साउंड बैरियर एवं लाइट बैरियर जैसी व्यवस्थाएं की गई हैं, जिससे वन्यजीवों पर शोर एवं प्रकाश प्रदूषण का न्यूनतम प्रभाव ही पडे़।
वन मंत्री ने जोर देते हुए कहा कि इस एलिवेटेड कॉरिडोर के निर्माण से मानव-वन्यजीव संघर्ष में कमी आएगी तथा वन्यजीवों के सुरक्षित एवं सुगम आवागमन को बढ़ावा मिलेगा। इससे विभिन्न प्रजातियों के बीच बेहतर आनुवंशिक आदान-प्रदान संभव होगा, जो जैव विविधता के संरक्षण के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
उन्होंने बताया कि कॉरिडोर के निर्माण से अगले 20 वर्षों में 240 मिलियन टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी आएगी, जो कि लगभग 60-68 लाख पेड़ों के द्वारा किए जाने वाले कार्बन डाइऑक्साइड के अवशोषण के समान है। साथ ही 19 प्रतिशत ईंधन की बचत भी होगी।
वन मंत्री ने कहा कि यह परियोजना वन्य जीवों के लिए सुरक्षित प्रवास के साथ समय में कमी लाएगी। साथ ही, पर्यटन, व्यापार एवं स्थानीय रोजगार के अवसरों को भी बढ़ावा देगी, जिससे क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी । प्रेस कान्फ्रेंस में वन विभाग के पीसीसीएफ ( हॉफ ) आर के मिश्रा व अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे।

तकनीक ने बचा लिए 33,840 पेड़
-दिल्ली-दून एक्सप्रेस-वे परियोजना के निर्माण के दौरान पहले 45 हजार पेड़ काटने की आवश्यकता बताई गई थी, लेकिन वैज्ञानिकों की कुशलता और तकनीक के बेहतर इस्तेमाल से 33,840 पेड़ कटने से बच गए। वन मंत्री के अनुसार-इस परियोजना के निर्माण 11,160 पेड़ों को काटना पड़ा, जबकि पूर्व में 45 हजार पेड़ काटे जाने की बात थी।

सीएम ने अधिकारियों को राज्य सरकार के मूल मंत्र “सरलीकरण, समाधान, निस्तारण और संतुष्टि” के आधार पर कार्य करने के निर्देश दिए

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सचिवालय में विधानसभा क्षेत्र डीडीहाट, गंगोलीहाट, कपकोट एवं बागेश्वर से संबंधित मुख्यमंत्री घोषणाओं की विस्तृत समीक्षा की। बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए कि जिन घोषणाओं पर अभी तक शासनादेश जारी नहीं हुए हैं, उनके संबंध में त्वरित कार्यवाही सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि लंबित घोषणाओं पर अधिकतम 20 दिनों के भीतर शासनादेश जारी कर दिए जाएं, ताकि योजनाओं के क्रियान्वयन में किसी प्रकार की देरी न हो।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को राज्य सरकार के मूल मंत्र “सरलीकरण, समाधान, निस्तारण और संतुष्टि” के आधार पर कार्य करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जनहित से जुड़े कार्यों में आने वाली समस्याओं का त्वरित समाधान किया जाए। योजनाओं के क्रियान्वयन में आने वाली समस्याओं का संबंधित क्षेत्र के विधायकगणों के साथ समन्वय स्थापित कर उनका प्रभावी समाधान निकाला जाए, ताकि विकास कार्यों की गति बनी रहे।

मुख्यमंत्री ने बैठक में सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिए कि वन भूमि स्थानांतरण से जुड़े मामलों की जनपद स्तर पर नियमित समीक्षा की जाए। उन्होंने कहा कि वन भूमि से संबंधित प्रक्रियाओं में तेजी लाकर विकास कार्यों में बाधा को दूर किया जाए। साथ ही, इस विषय में विभागीय समन्वय को और अधिक सुदृढ़ बनाने पर भी बल दिया गया।

मुख्यमंत्री ने मुख्य सचिव को निर्देश दिए कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) के अंतर्गत निर्मित सड़कों के रख-रखाव के लिए संबंधित विभागों की एक समन्वय समिति गठित की जाए। उन्होंने कहा कि इस समिति द्वारा सड़कों के मेंटिनेंस कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग की जाए, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन सुगम और सुरक्षित बना रहे।

बरसात के मौसम को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी सड़कों के पैच वर्क का कार्य वर्षाकाल से पूर्व अनिवार्य रूप से पूर्ण कर लिया जाए। मुख्यमंत्री ने खेल अवसंरचना के विकास पर भी विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिन स्थानों पर खेल मैदानों के लिए भूमि उपलब्ध हो चुकी है, वहां 15 दिनों के भीतर आवश्यक धनराशि जारी की जाए, ताकि निर्माण कार्य शीघ्र प्रारंभ हो सके और युवाओं को बेहतर खेल सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें।

बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने कनालीछीना से पिपली बगड़ीगांव तक मोटर मार्ग के चौडीकरण की कार्यवाही में तेजी लाने के निर्देश दिये। उन्होंने कपकोट के राजकीय आदर्श प्राथमिक विद्यालय कपकोट के साथ पूर्व माध्यमिक स्कूल संचालित करने की कार्यवाही के साथ मरीजों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए बागेश्वर जिला अस्पताल में सभी आवश्यक व्यवस्थाएं करने के निर्देश भी मुख्यमंत्री ने दिये।

मुख्यमंत्री ने बैठक में सभी अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे जनहित से जुड़े कार्यों को सर्वाेच्च प्राथमिकता दें और समयबद्ध तरीके से सभी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश के समग्र विकास के लिए प्रतिबद्ध है और इसमें किसी प्रकार की शिथिलता स्वीकार नहीं की जाएगी।

बैठक में विधायक डीडीहाट बिशन सिंह चुफाल, विधायक कपकोट सुरेश गड़िया, विधायक बागेश्वर पार्वती दास, वर्चुअल माध्यम से विधायक गंगोलीहाट फकीर राम, मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन, प्रमुख सचिव आर. मीनाक्षी सुंदरम, विशेष प्रमुख सचिव अमित सिन्हा, सचिव शैलेश बगौली, एस.एन.पाण्डेय, संबंधित विभागीय सचिव, वर्चुअल माध्यम से कुमांऊ कमिश्नर दीपक रावत, जिलाधिकारी पिथौरागढ़ आशीष भटगांई, जिलाधिकारी बागेश्वर आकांक्षा कोण्डे मौजूद थे।

बाबा के जीवन पर बनी फिल्म श्रद्धा भक्ति और मानवता के उच्च आदर्शों को समाज तक पहुंचाने का सराहनीय प्रयासः धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री आवास में श्री बाबा नीब करौरी महाराज पर आधारित फिल्म के प्रोमो और पोस्टर का लोकार्पण किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह फिल्म केवल एक सिनेमाई प्रस्तुति नहीं है, बल्कि श्रद्धा, भक्ति और मानवता के उच्च आदर्शों को समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुँचाने का एक सराहनीय प्रयास है। उन्होंने कहा कि बाबा नीब करौरी महाराज जी का दिव्य जीवन आज भी करोड़ों लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उनकी शिक्षाएँ सरलता, करुणा, सेवा और भक्ति के मार्ग पर चलने का संदेश देती हैं, जो वर्तमान समय में अत्यंत प्रासंगिक हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस प्रकार के आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक विषयों पर आधारित प्रयास भारतीय संस्कृति और सनातन मूल्यों के संरक्षण एवं प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने आशा व्यक्त की कि यह फिल्म समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करेगी और नई पीढ़ी को अपने सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक मूल्यों से जोड़ने में सहायक सिद्ध होगी।

मुख्यमंत्री ने फिल्म से जुड़े सभी कलाकारों, निर्देशक एवं निर्माता दल को इस सराहनीय एवं आध्यात्मिक प्रयास के लिए हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ दीं।

इस अवसर पर योगगुरु स्वामी रामदेव एवं स्वामी चिदानंद सरस्वती महाराज, फिल्म निर्देशक शरद सिंह ठाकुर एवं अन्य कलाकार मौजूद थे।

तीर्थ पुरोहितों, होटल एवं ट्रैवल संगठनों ने मुख्यमंत्री धामी का जताया आभार

राज्य सरकार द्वारा उत्तराखंड के चारों धामों में यात्रियों की संख्या सीमित न किए जाने के निर्णय पर चारों धामों से जुड़े तीर्थ पुरोहितों, पुजारियों, हितधारकों, चार धाम होटल एसोसिएशन, ट्रैवल एजेंसियों एवं विभिन्न संगठनों ने मुख्यमंत्री आवास में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का आभार व्यक्त किया है। इस अवसर पर चारों धामों से जुड़े तीर्थ पुरोहितों और हितधाकरकों ने मुख्यमंत्री को कपाट खुलने के अवसर पर आमंत्रित भी किया।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि राज्य सरकार श्रद्धालुओं की आस्था का सम्मान करते हुए चार धाम यात्रा को और अधिक सुगम एवं सुलभ बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। राज्य में दर्शन के लिए आने वाले सभी श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा और बेहतर व्यवस्थाएं सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता हैं। उन्होंने कहा कि सभी संबंधित विभागों को समन्वय के साथ कार्य करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि यात्रा के दौरान किसी प्रकार की असुविधा न हो।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने हेतु निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि चारधाम यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो, इसको ध्यान में रखते हुए अधिकारियों को सभी मतूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिये गये हैं। उन्होंने देवभूमि उत्तराखण्ड की चारधाम यात्रा के सफल संचालन के लिए सभी को सहभागी बनने की अपील की।

चार धाम यात्रा से जुड़े संगठनों ने कहा कि सरकार का यह निर्णय प्रदेश की आस्था, अर्थव्यवस्था तथा पर्यटन गतिविधियों को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे स्थानीय व्यापारियों, होटल व्यवसायियों, परिवहन क्षेत्र तथा अन्य संबंधित सेवाओं को भी व्यापक लाभ प्राप्त होगा। इस अवसर पर उन्होंने चारधाम यात्रा पर आने वाले यात्रियों और शीतकालीन यात्रा के लिए श्रद्धालुओं के लिए ऑनलाईन पंजीकरण हमेशा खुला रखने का आग्रह किया।

सभी प्रतिनिधियों ने विश्वास व्यक्त किया कि राज्य सरकार यात्रा व्यवस्थाओं को सुचारु, सुरक्षित एवं सुव्यवस्थित बनाए रखने के लिए निरंतर आवश्यक कदम उठाती रहेगी। उन्होंने प्रशासन द्वारा की जा रही व्यवस्थाओं, सुविधाओं के विस्तार तथा यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के प्रयासों की भी सराहना की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री के गढ़वाल समन्वयक किशोर भट्ट, भाजपा के मीडिया प्रभारी मनवीर चौहान भी मौजूद थे।

इस दौरान उत्तराखण्ड चारधाम तीर्थ पुरोहित महापंचायत के अध्यक्ष पं. सुरेश सेमवाल, महासचिव बृजेश सती, ब्रह्मपाल तीर्थ पुरोहित पंचायत समिति के अध्यक्ष उमेश सती, यमुनोत्री धाम मंदिर समिति के सचिव सुनील उनियाल, उपाध्यक्ष संजीव उनियाल, पुरूषोत्तम उनियाल, चारधाम होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेश मेहता, सचिव निखिलेश सेमवाल, यमुना घाटी होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष सोबन सिह राणा, गौरव उनियाल, सन्दीप राणा, अध्यक्ष उत्तरकाशी होटल एसोसिएशन शैलेन्द्र मटूड़ा, अध्यक्ष श्री केदार घाटी होटल एसोसिएशन धर्मेन्द्र नौटियाल, अध्यक्ष श्री बद्रीनाथ धाम होटल एसोसिएशन शैलेश ध्यानी, प्रशान्त डिमरी, अशोक सेमवाल एवं अन्य पदाधिकारी उपस्थित थे।

पीएम मोदी 14 को पहुंचेंगे देहरादून, आयोजन स्थल का सीएम ने किया निरीक्षण

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के देहरादून में 14 अप्रैल 2026 को प्रस्तावित कार्यक्रम के सफल आयोजन के दृष्टिगत गढ़ी कैंट स्थित जसवंत ग्राउंड एवं मां डाट काली मंदिर तक सड़क मार्ग से स्थलीय निरीक्षण कर विभिन्न व्यवस्थाओं का विस्तृत जायजा लिया।

निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम स्थल पर सुरक्षा, यातायात प्रबंधन, पार्किंग व्यवस्था, पेयजल, विद्युत आपूर्ति, स्वच्छता एवं अन्य आधारभूत सुविधाओं की तैयारियों की अधिकारियों से जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी व्यवस्थाएं समयबद्ध एवं उच्च गुणवत्ता के साथ सुनिश्चित की जाएं, ताकि कार्यक्रम में आने वाले आमजन को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद रखने के निर्देश देते हुए कहा कि सभी एजेंसियों के बीच समन्वय स्थापित कर कार्य किया जाए। उन्होंने यातायात प्रबंधन की सुव्यवस्थित योजना तैयार करने एवं आपातकालीन सेवाओं की त्वरित उपलब्धता सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया।

जसवंत ग्राउंड में मंच, दर्शक दीर्घा एवं अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं के संबंध में अधिकारियों से विस्तृत जानकारी लेते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि कार्यक्रम की गरिमा के अनुरूप सभी तैयारियां पूरी की जाएं। उन्होंने साफ-सफाई एवं सौंदर्यीकरण कार्यों को प्राथमिकता देने के निर्देश भी दिए।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने मां डाट काली मंदिर में पूजा-अर्चना कर प्रदेश की सुख-समृद्धि एवं कार्यक्रम की सफलता के लिए प्रार्थना की। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह कार्यक्रम राज्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी, राज्यसभा सांसद एवं भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट, पार्टी पदाधिकारी, सचिव शैलेश बगौली, गढ़वाल कमिश्नर विनय शंकर पाण्डेय, आईजी गढ़वाल राजीव स्वरूप, जिलाधिकारी देहरादून सविन बंसल, अपर सचिव बंशीधर तिवारी, एसएसपी देहरादून प्रमेन्द्र डोभाल एवं विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद थे।

उत्तराखंड को मिला ‘मोस्ट फिल्म फ्रेंडली स्टेट’ का राष्ट्रीय पुरस्कार

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से आज मुख्यमंत्री आवास में प्रख्यात फिल्म निर्माता-निर्देशक मधुर भंडारकर ने शिष्टाचार भेंट की। इस दौरान उत्तराखंड को फिल्म निर्माण के क्षेत्र में एक अग्रणी गंतव्य के रूप में विकसित करने, निवेश को आकर्षित करने तथा राज्य की सांस्कृतिक पहचान को वैश्विक मंच पर स्थापित करने के विषय में विस्तार से चर्चा की गई।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड अपनी अद्वितीय प्राकृतिक सुंदरता, विविध भौगोलिक परिस्थितियों, समृद्ध सांस्कृतिक विरासत एवं शांत वातावरण के कारण फिल्म निर्माण के लिए अत्यंत उपयुक्त राज्य है। राज्य सरकार का स्पष्ट लक्ष्य है कि उत्तराखंड को देश-विदेश के फिल्म निर्माताओं की पहली पसंद बनाया जाए और इसे एक सशक्त फिल्म शूटिंग हब के रूप में स्थापित किया जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा लागू की गई आधुनिक एवं उद्योगोन्मुख फिल्म नीति के अंतर्गत फिल्म निर्माताओं को आकर्षक सब्सिडी, टैक्स छूट तथा विभिन्न प्रकार की सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं। साथ ही सिंगल विंडो सिस्टम के माध्यम से शूटिंग से संबंधित सभी अनुमतियों को सरल, पारदर्शी और समयबद्ध बनाया गया है, जिससे फिल्म निर्माण प्रक्रिया को अत्यधिक सुगम बनाया जा सका है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड में फिल्म उद्योग को बढ़ावा देने के लिए अब तक व्यापक स्तर पर कार्य किए गए हैं। राज्य में अनेक हिंदी फिल्मों, क्षेत्रीय फिल्मों, टीवी धारावाहिकों एवं वेब सीरीज़ की शूटिंग सफलतापूर्वक संपन्न हुई है, जिससे उत्तराखंड देश के प्रमुख फिल्म निर्माण स्थलों में तेजी से उभरकर सामने आया है। यहां की वादियां, झीलें, धार्मिक स्थल एवं ऐतिहासिक लोकेशन फिल्म निर्माताओं को विशेष रूप से आकर्षित कर रही हैं।

मुख्यमंत्री ने यह भी उल्लेख किया कि उत्तराखंड को फिल्म निर्माण के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्यों के लिए “मोस्ट फिल्म फ्रेंडली स्टेट” का राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त हो चुका है, जो राज्य सरकार की नीतियों और व्यवस्थाओं की सफलता का प्रमाण है। यह उपलब्धि दर्शाती है कि राज्य ने फिल्म इंडस्ट्री के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने में उल्लेखनीय प्रगति की है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में फिल्म शूटिंग के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचे को निरंतर सुदृढ़ किया जा रहा है। प्रदेश के विभिन्न जनपदों में लोकेशन बैंक तैयार किया गया है, जिसमें पर्वतीय क्षेत्र, झीलें, वन क्षेत्र, ऐतिहासिक स्थल एवं धार्मिक धाम शामिल हैं। इससे फिल्म निर्माताओं को विविध और आकर्षक लोकेशन एक ही मंच पर उपलब्ध हो रही हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि फिल्म उद्योग के माध्यम से स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित हो रहे हैं। राज्य सरकार द्वारा स्थानीय कलाकारों, तकनीशियनों एवं युवाओं को फिल्म निर्माण प्रक्रिया से जोड़ने के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। साथ ही फिल्म एवं मीडिया से संबंधित प्रशिक्षण कार्यक्रमों को भी बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे युवाओं को इस क्षेत्र में करियर बनाने के अवसर प्राप्त हो रहे हैं।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि उत्तराखंड में फिल्म सिटी के विकास की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है, जिससे फिल्म निर्माण की संपूर्ण प्रक्रिया को राज्य के भीतर ही संचालित किया जा सके। इसके साथ ही फिल्म महोत्सवों एवं सांस्कृतिक आयोजनों को प्रोत्साहित कर राज्य की पहचान राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और अधिक सशक्त बनाई जा रही है।

इस अवसर पर मधुर भंडारकर ने उत्तराखंड की प्राकृतिक सुंदरता एवं अनुकूल वातावरण की सराहना करते हुए कहा कि राज्य में फिल्म निर्माण की अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने राज्य सरकार द्वारा फिल्म उद्योग को प्रोत्साहन देने के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए भविष्य में उत्तराखंड में फिल्म शूटिंग करने की इच्छा भी व्यक्त की।

मुख्यमंत्री धामी ने विश्वास व्यक्त किया कि फिल्म उद्योग के क्षेत्र में किए जा रहे ये प्रयास न केवल राज्य की अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करेंगे, बल्कि पर्यटन को भी नई ऊंचाइयों तक ले जाएंगे। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड सरकार फिल्म निर्माताओं को हर संभव सहयोग प्रदान करने के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है।

उपलब्धि: उत्तराखंड के फिल्मकारों ने NHRC में जीता राष्ट्रीय सम्मान

उत्तराखंड के युवा फिल्मकारों शुभम शर्मा और रवि कर्णवाल ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) की ‘ह्यूमन राइट्स शॉर्ट फिल्म प्रतियोगिता’ में अपनी डॉक्युमेंट्री ‘सेकंड चांस’ के साथ राष्ट्रीय पुरस्कार जीतकर प्रदेश का नाम रोशन किया है। देशभर से आई 526 प्रविष्टियों और 24 भाषाओं के बीच, कठोर तीन-चरणीय चयन प्रक्रिया के बाद केवल सात फिल्मों को पुरस्कृत किया गया — जिनमें ‘सेकंड चांस’ भी शामिल रही।
शुभम शर्मा रुड़की, जिला हरिद्वार के मूल निवासी हैं और वर्तमान में देहरादून में कार्यरत हैं। उनके सहनिर्माता रवि कर्णवाल भी उत्तराखंड में ही सक्रिय हैं। यह पुरस्कार NHRC अध्यक्ष न्यायमूर्ति वी. रामसुब्रमण्यन, सदस्य न्यायमूर्ति (डॉ.) बिद्युत रंजन सारंगी और सदस्य श्रीमती विजया भारती सयानी की उपस्थिति में प्रदान किया गया।
सुद्दोवाला जेल की दीवारों से उठी आवाज़
‘सेकंड चांस’ देहरादून की सुद्दोवाला जेल में बंद कैदियों के जीवन, उनके पुनर्वास और मानवाधिकारों की संवेदनशील पड़ताल है — क्या समाज उन्हें दूसरा मौका देता है? NHRC अध्यक्ष ने कहा कि ऑडियो-विजुअल माध्यम अवचेतन मन को छूने की अद्भुत क्षमता रखता है। NHRC के वरिष्ठ अधिकारियों ने देहरादून जेल प्रशासन और उत्तराखंड सरकार के सहयोग की भी विशेष सराहना की, जिसके चलते यह डॉक्युमेंट्री बन सकी और प्रदेश को राष्ट्रीय मंच पर पहचान मिली।
“यह पुरस्कार हमें नहीं, उन हजारों कैदियों को मिला है जिनकी ज़िंदगी को हमने अपनी फिल्म में दिखाने की कोशिश की।”
— शुभम शर्मा और रवि कर्णवाल
फिल्म की टीम
निर्देशक: हर्षित मिश्रा | DOP: निवान प्राचुर्या | निर्माता: दीपा धामी
फिल्मकारों का परिचय
शुभम शर्मा NSD और FTII पुणे से प्रशिक्षित हैं तथा रंगमंच एवं फिल्म निर्देशन में स्नातकोत्तर में स्वर्णपदक विजेता हैं। ‘कश्मीर फाइल्स’, ‘बधाई दो’ जैसी फिल्मों में अभिनय कर चुके शुभम ने निर्देशन और प्रोडक्शन में भी अपनी पहचान बनाई है।

रवि कर्णवाल पद्मश्री निरंजन गोस्वामी के शिष्य, प्रशिक्षित अभिनेता, लेखक और अभिनय कोच हैं। दोनों की साझा फिल्मों — ‘अलार्मघड़ी’, ‘चप्पल’, ‘सेकंड चांस’, ‘डस्टर’, ‘अल्पविराम’ सहित अनेक लघुफिल्मों — ने देशभर के 50 से अधिक पुरस्कार अर्जित किए हैं।
दीपा धामी (निर्माता) — संक्षिप्त परिचय
दीपा धामी एक संवेदनशील और सामाजिक सरोकारों से जुड़ी फिल्म निर्माता हैं, जिनका मुख्य उद्देश्य सिनेमा के माध्यम से समाज के महत्वपूर्ण मुद्दों को सामने लाना है। वे मानती हैं कि फिल्म केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि जागरूकता और परिवर्तन का सशक्त उपकरण भी है।

उन्होंने एम.जेपी. रुहेलखंड विश्वविद्यालय से विधि (LLB) की शिक्षा प्राप्त की है, जिसने उन्हें सामाजिक न्याय और मानवाधिकारों के विषय में गहरी समझ प्रदान की। इसी दृष्टिकोण के साथ उन्होंने ‘सेकंड चांस’ जैसी डॉक्युमेंट्री के निर्माण में विशेष योगदान दिया, जो जेल में बंद कैदियों के पुनर्वास और उनके अधिकारों पर एक संवेदनशील दृष्टि प्रस्तुत करती है।
दीपा धामी का समर्पण और दृष्टिकोण इस फिल्म की आत्मा को मजबूती प्रदान करता है, और समाज में सकारात्मक बदलाव की दिशा में उनके प्रयास सराहनीय हैं।

रुड़की और उत्तराखंड की गलियों से निकलकर नई दिल्ली के NHRC सभागार तक — शुभम और रवि की यह यात्रा प्रदेश के हर उस युवा के लिए प्रेरणा है जो बड़े सपने देखता है। उत्तराखंड सरकार और सुद्दोवाला जेल प्रशासन को भी इस राष्ट्रीय सम्मान में साझीदार होने का गौरव प्राप्त हुआ है। सिनेमा ही हमारी साधना है, कहानी ही हमारी पूजा है।