भूरीमाई धर्मशाला में रह रहे 65 परिवारों को सात दिन का समय

मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में शिकायत के बाद भूरीमाई धर्मशाला को लावारिश पाते हुए नगर निगम अपने कब्जे में लेने के लिए तैयारी कर रहा है। निगम ने धर्मशाला का निरीक्षण कर यहां रह रहे 65 लोगों को कब्जे संबंधी दस्तावेज सात दिन में प्रस्तुत करने को कहा है।

बता दें कि आदर्श नगर स्थित करीब 4.39 हेक्टेअर में बनी भूरीमाई धर्मशाला का संपत्ति स्वामी न होने को लेकर सीएम हेल्पलाइन पर शिकायत की गई थी। सीएम हेल्पलाइन से नगर निगम को मामले में जांच करने को कहा गया। इसी क्रम में मंगलवार को नगर आयुक्त नरेन्द्र सिंह क्वीरियाल के निर्देशन पर सहायक नगर आयुक्त विनोद लाल, टैक्स इंस्पेक्टर निशात अंसारी और रमेश रावत धर्मशाला का निरीक्षण करने पहुंचे। इस दौरान उन्होंने यहां 65 परिवार ऐसे पाए, जो अवैध रूप से रह रहे हैं। इस संबंध में उन्होंने धर्मशाला में निवास कर रहे परिवारों से भी वार्ता की। नगर आयुक्त नरेन्द्र सिंह क्वीरियाल ने बताया धर्मशाला को लेकर सीएम पोर्टल में शिकायत की गई थी। इसी क्रम में सहायक नगर आयुक्त के नेतृत्व में संपत्ति का मौका मुआयना कराया गया।

जांच में पता चला कि इस समय भूरीमाई धर्मशाला का कोई दावेदार नहीं है। इस कारण धर्मशाला को निगम के अधीन करने की शुरुआती प्रक्रिया की गई है। इसी क्रम में धर्मशाला में रह रहे परिवारों से उनके कब्जे सबंधी दस्तावेज पेश करने को कहा गया है। उन्होंने बताया कि सभी के दस्तावेज आने के बाद जिलाधिकारी देहरादून को संपूर्ण रिपोर्ट से अवगत कराया जाएगा। इसके बाद जो भी निर्देश होंगे कार्रवाई की जाएगी।

कुंभ कार्यों को समय और गुणवत्ता के साथ संपन्न करांए अधिकारीः त्रिवेन्द्र

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने हरिद्वार में कुम्भ 2021 के सम्बन्ध में अखाड़ा परिषद के संत महात्माओं के साथ विचार विमर्श किया। बैठक के दौरान मेलाधिकारी दीपक रावत ने कुम्भ मेले हेतु किए जा रहे कार्यों की अद्यतन जानकारी दी।

मुख्यमंत्री ने सभी महात्माओं का माल्यार्पण कर स्वागत करते हुए कहा कि कुंभ की परंपरा में संतों के आशीर्वाद की आवश्यकता रहती है। संत महात्माओं ने मुख्यमंत्री के आश्वासन पर संतोष व्यक्त करते हुए मेले के सफल आयोजन के लिए अपना पूरा सहयोग देने का आश्वासन दिया।

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र ने श्री गंगा सभा हरिद्वार द्वारा कुम्भ महापर्व 2021 की प्रमुख स्नान तिथियों में से सभी अखाड़ों के संत महात्माओं की उपस्थिति में उनकी सर्वसम्मति से आगामी कुंभ मेले में आयोजित होने वाले चार शाही स्नानों की घोषणा की कुंभ मेले में होने वाले शाही स्नान में 11 मार्च 2021 (महाशिवरात्रि), 12 अप्रैल 2021 सोमवती अमावस्या, 14 अप्रैल 2021 बैसाखी कुम्भ स्नान एवं 27 अप्रैल 2021 चौत्र पूर्णिमा स्नान आयोजित होंगे। इसके साथ ही 6 पर्व स्नान 14 जनवरी 2021 (मकर संक्रान्ति), 11 फरवरी 2021 (मौनी अमावस्या), 16 फरवरी 2021 (बसंत पंचमी), 27 फरवरी 2021 (माघ पूर्णिमा), 13 अप्रैल 2021 (नव सम्वत् सर) एवं 21 अप्रैल 2021 (राम नवमी) को आयोजित होंगे।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को सख्त निर्देश देते हुए कहा कि वे कुंभ कार्यों को समयबद्धता एवं गुणवत्ता के साथ संपन्न कराएं। इसमें जिन विभागों को कोई भी समस्या हो, उसे मेलाधिकारी के संज्ञान में लाएं। यदि स्वीकृति शासन स्तर से की जानी हो तो उसकी भी व्यवस्था की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने जल संस्थान के अधिकारियों को सीवर के कार्यों में तेजी लाते हुए निर्धारित समय पर कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने एनएचएआई को भी कुम्भ क्षेत्र में नेशनल हाइवे के कार्यों को पूरा करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने निर्माण कार्यों को दिन रात करते हुए युद्ध स्तर पर करने के निर्देश देते हुए कहा कि राज्य सरकार की ओर से हर संभव सहायता दी जाएगी। उन्होंने सभी आवश्यक अधिकारी तैनात किए जाने के भी निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रमुख संतों को आवश्यक सुरक्षा एवं अखाड़ों से लगातार संपर्क कर कुंभ मेले हेतु कार्य किए जाएं। उन्होंने कहा कि अतिक्रमण हटाने के लिए समयबद्धता के साथ कार्य किया जाए। कुंभ क्षेत्र में निर्माण कार्यों के लिए निर्माण सामग्री की आवश्यकता के अनुसार विभागों को पट्टे आबंटित किए जाएंगे। इसके लिए दिन रात कार्य करने हेतु परमिट दिया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि कुंभ मेले के सफल आयोजन हेतु सभी अखाड़ों के संत महात्माओं का सहयोग आवश्यक है।

बैठक में कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक, विधायक सुरेश राठौर, अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरी महाराज, महामंत्री हरिगिरी महाराज, रविन्द्र पुरी महाराज, महंत प्रेम गिरी महाराज, महंत धर्म दास, महंत राजेन्द्र दास, मुखिया मंहत भगत राम, महन्त जसविंदर सिंह, महंत साधना नन्द, मंहत देवेंद्र सिंह शास्त्री, महंत राम दास आदि उपस्थित रहे।

एम्स ऋषिकेश में उत्तरकाशी की महिला ने दिया चार बच्चों को जन्म

ऋषिकेश के गाइनी डिपार्टमेंट में भर्ती उत्तरकाशी निवासी महिला ने चार बच्चों को जन्म दिया है। महिला को उत्तरकाशी जिला अस्पताल से दून अस्पताल रेफर किया गया था, हाई रिस्क केस होने की वजह से महिला को बीते रविवार को दून अस्पताल से एम्स ऋषिकेश में रेफर किया गया था।

गाइनी विभाग की डा. अनुपमा बहादुर के अनुसार महिला का हिमोग्लोबिन काफी कम था, टीएसएच 13 था, लिहाजा ऐसी स्थिति में डिलीवरी में नवजात शिशु आईसीयू नीकु की आवश्यकता पड़ सकती थी, लिहाजा दून में यह सुविधा उपलब्ध नहीं होने के कारण उसे एम्स भेजा गया था। जहां अल्ट्रासाउंड के जरिए पता चला कि महिला के पेट में चार बच्चे हैं। लिहाजा महिला को तीन यूनिट रक्त चढ़ाया गया। साथ ही बच्चों के फेफड़ों की मैच्योरटी के लिए महिला को इंजेक्शन लगाया गया। इसके बाद ऑपरेशन से शनिवार को दोपहर में महिला ने चार बच्चों को जन्म दिया। जिनमें दो लड़के व दो लड़कियां हैं। चिकित्सकों के अनुसार सभी बच्चे स्वस्थ हैं। जिनका वजन क्रमशरू 1.6 किग्रा, 1.5 किग्रा., 1.35 किग्रा. तथा 1.1 किलोग्राम है।

खासबात यह है कि उन्हें वेंटीलेटर की आवश्यकता नहीं पड़ी। हाईरिस्क केस होने की वजह से चिकित्सकों के दल में नवजात शिशु विभाग की विभागाध्यक्ष डा. श्रीपर्णा बासू व डा. पूनम व गाइनी विभाग की प्रमुख डा. जया चतुर्वेदी, डा. अनुपमा बहादुर व डा. राजलक्ष्मी मुंदरा शामिल थे। एम्स निदेशक पद्मश्री प्रोफेसर रवि कांत जी ने बताया कि एम्स ऋघ्षिकेश उत्तराखंड में नवजात शिशु मृत्युदर कम करने को लेकर गंभीर है, लिहाजा हम हाईरिस्क प्रेग्नेंसी के मामलों को प्राथमिकता देते हैं। एम्स निदेशक प्रो. रवि कांत ने बताया कि इसके लिए संस्थान में सभी विश्वस्तरीय वार्ड, संसाधन, उपकरण एवं विशेषज्ञ चिकित्सक उपलब्ध हैं।

राज्य के समग्र विकास के प्रति हमारी प्रतिबद्धताः सीएम

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने शनिवार को सहस्त्रधारा में विश्वबैंक पोषित यूडीआरपी योजना के अन्तर्गत काली-रो नदी पर 688 लाख लागत से निर्मित होने वाले 48 मीटर स्पान के स्टील ट्रस सेतु तथा 219.91 लाख की लागत से निर्मित होने वाले 30 मीटर स्पान के स्टील गर्डर मोटर सेतु का शिलान्यास किया। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने इस अवसर पर सहस्त्रधारा में बस अड्डे, सरोणा स्कूलका उच्चीकरण के साथ ही सहस्त्रधारा चामासारी मोटरमार्ग के डामरीकरण की घोषणा की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इन पुलो के निर्माण से इस क्षेत्र की 13 हजार की आबादी लाभान्वित होगी। उन्होंने कहा कि राज्य के समग्र विकास के प्रति हमारी प्रतिबद्धता है। राज्य में सड़क, रेल व हवाई सेवाओं के विस्तार पर ध्यान दिया जा रहा है ताकि राज्य के लोगों के साथ ही पर्यटकों को भी सुविधा हो। उन्होंने कहा कि पर्यटन हमारी आर्थिकी का आधार है। पर्यटन व साहसिक खेलों को बढ़ावा देने से देश व दुनिया के लोग यहां आयेंगे। ओली में शुरू हुई नेशनल स्कीइंग एंड स्नोबोर्ड चैम्पियनशिप में विभिन्न देशों के प्रतिभागी शामिल हुए हैं। गोचर चिन्यालीसौड के लिये हेली सर्विस शुरू की गई है।

देहरादून से दिल्ली जयपुर व अन्य शहरों के लिये अतिरिक्त हवाई सुविधा उपलब्ध करायी जा रही है। उन्होंने युवाओं से पर्यटन से जुड़ी स्वरोजगार योजनाओं पर ध्यान देने को कहा। उन्होंने कहा कि 5000 होम स्टे बनाने का हमारा लक्ष्य है। अब तक 2200 रजिस्टर्ड हो चुके हैं।

बिचैलिये का खेल खत्म नही हुआ तो सीबीआई जांच करायेगी सरकार

बजट सत्र के सातवां दिन भी सदन में काफी शोर शराबा रहा। राहुल गांधी के बयान को लेकर पक्ष और विपक्ष के बीच हंगामे की वजह से दो बार लोकसभा स्थगित करनी पड़ी। तीसरी बार जब कार्यवाही शुरू हुई तो फिर दोनों पक्षों ने हंगामा किया इसके बाद स्पीकर ओम बिरला ने कल तक के लिए लोकसभा की कार्यवाही स्थगित कर दी।
इसी बीच केंद्र सरकार ने संसद में बताया कि एक देश एक राशन कार्ड योजना के तहत पूरे देश में एक जून से एक राशन कार्ड लागू कर दिया जाएगा। यह योजना अभी 12 राज्यों में लागू है। उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्री रामविलास पासवान ने राज्यसभा में प्रश्नकाल के दौरान एक पूरक प्रश्न के जवाब में बताया कि गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वालों को देश में कहीं भी राशन लेने की सुविधा देने के लिये ‘एक देश एक राशन कार्ड’ योजना को एक आगामी एक जून से लागू कर दिया जायेगा।
केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि 2013 में 11 राज्यों में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून लागू होने के बाद अब इसके दायरे में सभी राज्य आ गए हैं। उन्होंने बताया कि इस योजना के अगले चरण में सरकार ने पूरे देश के लिये एक ही राशन कार्ड जारी करने की पहल गत एक जनवरी को 12 राज्यों (आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, महाराष्ट्र, गुजरात, केरल कर्नाटक, राजस्थान, हरियाणा, त्रिपुरा गोवा, झारखंड और मध्य प्रदेश) से शुरू कर दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि एक देश एक राशन कार्ड के लिये नए कार्ड की जरूरत नहीं होगी। साथ ही पासवान ने नए कार्ड जारी किए जाने की अफवाहों के प्रति आगाह करते हुए कहा कि यह बिचैलियों का खेल है, अगर यह खेल नहीं रुका तो मंत्रालय इसकी सीबीआई जांच कराने से भी पीछे नहीं हटेगा।
पासवान ने एक अन्य पूरक प्रश्न के जवाब में बताया कि मंत्रालय ने एक जून से पूरे देश में एक देश एक राशन कार्ड लागू करने का लक्ष्य तय किया है। इस समयसीमा से सिर्फ पूर्वोत्तर राज्यों को अलग रखा गया है। उन्होंने बताया कि इस योजना के तहत सभी राशन की दुकानों को फिंगर प्रिंट पहचान मशीन (पॉश मशीन) से लैस करने और राशन कार्ड को आधार से लिंक करने की अनिवार्यता को देखते हुए पूर्वोत्तर राज्यों को इस समय सीमा से मुक्त रखा गश है।
राशन कार्ड पर मिलने वाले खाद्यान्न की कीमत सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में भेजने (डीबीटी) की योजना के बारे में पासवान ने बताया कि तीन केन्द्र शासित क्षेत्र (पुदुचेरी, चंडीगढ़ और दादर नगर हवेली) में पायलट प्रोजेक्ट पूरा नहीं हो पाया है। इसके लिए उन्होंने पुड्डुचेरी सरकार की असहमित को मुख्य वजह बताते हुए कहा कि राज्य सरकारों की सहमति के बिना राशन कार्ड योजना को डीबीटी से नहीं जोड़ा जा सकता है। इसलिये फिलहाल एक देश एक राशन कार्ड योजना को लागू करने पर ही सरकार ने ध्यान केन्द्रित किया है।

मुख्यमंत्री की पहल से कुपोषण से मुक्त हुए बच्चें, बेहतर परिणाम से सरकार खुश

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत की पहल पर अतिकुपोषित बच्चों को गोद लेने की योजना के अच्छे परिणाम मिलने लगे हैं। प्रदेश के जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और सामाजिक संस्थाओं द्वारा गोद लिए गए कुपोषित बच्चों के स्वास्थ्य में लगातार सुधार हो रहा है। विगत वर्ष सितम्बर माह में ‘‘कुपोषण मुक्ति हेतु गोद अभियान’’ की शुरूआत की गई थी। मुख्यमंत्री सहित मंत्रीगणों, जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने चिन्हित अति कुपोषित बच्चों को गोद लिया था। कुपोषित बच्चों को न केवल गोद लिया गया बल्कि संबंधित जनप्रतिनिधि व अधिकारी, इन बच्चों के अभिभावकों के लगातार सम्पर्क में रहे। इसके सार्थक परिणाम भी मिल रहे हैं। 6 बच्चे कुपोषण से मुक्त हो चुके हैं, जबकि 11 बच्चों की ग्रेड में सुधार हुआ है और 207 बच्चों के वजन में वृद्धि हुई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि, ‘‘कुपोषित बच्चों को गोद लेकर उनकी जिम्मेवारी लेने की पहल की गई थी। इसके सुखद परिणाम मिलने लगे हैं। बच्चे हमारे देश का भविष्य हैं। हमारा उद्देश्य प्रदेश को कुपोषण से पूरी तरह से मुक्त करना है। लगभग सभी गोद लिए गए बच्चों के वजन में संतोषजनक वृद्धि हुई है। मुझे पूरा विश्वास है कि सभी गोद लिए बच्चे कुपोषण से मुक्त होंगे।’’

जनता की समस्याओं के समाधान के लिए राज्य सरकार संकल्पबद्धः मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने “आपकी सरकार आपके द्वार“ के तहत डोईवाला विधानसभा क्षेत्र के अन्तर्गत वन विभाग से संबंधित समस्याओं के समाधान हेतु आयोजित जनता मिलन कार्यक्रम में शामिल हुए। इस अवसर पर वन्यजीव संघर्ष के मामलों में राहत वितरण निधि के चेक वितरित किए गए।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि वन विभाग से संबंधित क्षेत्र के लोगों की समस्याओं के समाधान पूरी पारदर्शिता के साथ किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि समस्या का समाधान समय से हो तभी उसका सही लाभ मिल पाता है। राज्य सरकार आपकी समस्याओं के निराकरण के लिए संकल्पबद्ध है। उन्होंने कहा कि हमारी कोशिश है कि प्रदेश को अच्छी सुविधाएं और अच्छी सेवाएं प्रदान की जाएं। क्षेत्र में जनसंख्या का दबाव लगातार बढ़ रहा है। सूर्यधार योजना के तैयार होने के बाद 29 गावों को ग्रेविटी बेस्ड पानी उपलब्ध होगा। सौंग का कार्य भी लगभग अंतिम चरण में है। उन्होंने कहा कि हमारी कोशिश है कि सुस्वा नदी को बारह मास साफ पानी उपलब्ध कराया जा सके और रिस्पना नदी को भी पुनर्जीवित करना सरकार की प्राथमिकताओं में है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मनुष्य होने के नाते पशुओं के प्रति हमारा नैतिक कर्तव्य है। पशुधन का उपयोग करने के बाद हमें उन्हें छोड़ना नहीं चाहिए। पशु पक्षी पेड़ पौधे हमारे सिस्टम का ही हिस्सा है। प्रकृति का संरक्षण करते हुए जैविक खेती को बढ़ावा दिया जाना बहुत ही आवश्यक है।

मुख्यमंत्री से जुड़ें फेसबुक लाइव में और बताएं कैसा हो बजट

नये बजट के स्वरूप को लेकर मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत मुख्यमंत्री आवास में फेसबुक लाईव के माध्यम से जनता से करेंगे सीधा संवाद।
प्रदेश के आगामी बजट में जन सुझावों पर भी ध्यान दिया जायेगा। इसके लिए आपका बजट आपका सुझाव कार्यक्रम के तहत मुख्यमंत्री आम जनता से शनिवार 8 फरवरी, 2020 को मुख्यमंत्री आवास में सांय 6ः30 बजे से 7ः30 बजे तक फेसबुक लाईव द्वारा जन-संवाद करेंगे। हर साल राज्य सरकार द्वारा बजट पर लोगों के सुझाव प्राप्त किये जाते हैं। सुझाव जनहित में पाए जाने पर बजट में शामिल भी किए जाते रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता जन आकांक्षाओं के अनुरूप प्रदेश का विकास है। उन्होंने सरकार में जनभागीदारी को भी जरूरी बताया है। मुख्यमंत्री ने प्रदेश की जनता से फेसबुक लाईव में शामिल होकर अपने अमूल्य सुझाव देने का आग्रह किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उपयोगी सुझावों को अमल में लाया जाएगा। प्रदेश के बजट को अंतिम रूप देने से पहले समाज के सभी वर्गों से सुझाव आमंत्रित किये जाने से समावेशी बजट की अवधारणा को भी मजबूती मिलेगी।
ज्ञातव्य है कि पहले यह कार्यक्रम 8 फरवरी को पूर्वाह्न 11ः00 बजे वीर चन्द्र सिंह गढ़वाली सभागार सचिवालय में निर्धारित था जिसे अब संशोधित कर मुख्यमंत्री आवास में शनिवार को सांय 6ः30 बजे से 7ः30 बजे निर्धारित किया गया है।

मुख्यमंत्री के प्रयास हुए सफल, राज्य के अनुरोध को 15वें वित्त आयोग ने स्वीकारा

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत की 15 वें वित्त आयोग के समक्ष राज्य के हक में की गई पैरवी आयोग की सिफारिशों में देखने को मिल रही हैं। 15वें वित्त आयोग द्वारा उत्तराखण्ड राज्य को राजस्व घाटा अनुदान दिये जाने की संस्तुति की गई है, जिसके फलस्वरूप राज्य को प्रतिवर्ष लगभग न्यूनतम रू 2000 करोड़ का लाभ होगा। आयोग की सिफारिशों में केन्द्रीय करों में राज्य का अंश 1.052 से बढ़ाकर 1.104 कर दिया गया है, जिससे राज्य को प्रतिवर्ष लगभग रू. 300 से 400 करोड़ का लाभ होगा। डिवोलेशन फार्मूला में वनों का अंश 7.50 प्रतिशत से बढ़ाकर 10 प्रतिशत कर दिया गया है, जिसे राज्य के अंश में वृद्धि हुई है। राज्य आपदा राहत निधि के अंश में 787 करोड़ रूपए वृद्धि पर सहमति दी गई है। शहरी स्थानीय निकायों एवं पंचायतीराज संस्थाओं के अनुदान में भी 148 करोड़ रूपए की वृद्धि हुई है।
मुख्यमंत्री ने उत्तराखण्ड के पक्ष को स्वीकारने के लिए 15 वें वित्त आयोग का जताया आभार
15 वें वित आयोग की सिफारिशों पर मुख्यमंत्री ने कहा कि, 15वें वित्त आयोग के समक्ष राज्य के पक्ष को तार्किक ढंग से बहुत ही स्पष्ट एवं सक्षम तरीके से प्रस्तुत किया गया। उसी का परिणाम है कि विभिन्न बिंदुओं पर आयोग ने अपनी सहमति देते हुए राज्य के पक्ष में संस्तुतियां की हैं। उत्तराखण्ड के दृष्टिकोण को समझने और तद्नुसार संस्तुतियां देने के लिए 15 वें वित आयोग का आभार व्यक्त करते हैं। इससे उत्तराखण्ड विकास के पथ पर और तेजी से आगे बढ़ेगा।
उत्तराखण्ड द्वारा दी जा रही पर्यावरणीय सेवाओं को किया स्वीकार
15 वें वित्त आयोग को संदर्भित विषयों एवं राज्य की विभिन्न समस्याओं के संबंध में मुख्यमंत्री के नेतृत्व में मैमोरेण्डम प्रस्तुत किया गया था। उत्तराखण्ड द्वारा मैमोरेण्डम में विभिन्न बिन्दुओं को स्पष्ट एवं विश्वसनीय तरीके से प्रस्तुत किया गया, जिसे आयोग द्वारा स्वीकार किया गया। उत्तराखण्ड राज्य के परिदृश्य में आयोग द्वारा स्वीकार किया गया है कि राज्य द्वारा पूरे देश को बहुमूल्य ईको-सिस्टम सेवायें प्रदान की जा रही हैं। इसके लिये 15 वें वित्त आयोग से डिवोलेशन फार्मूला में वनों का अंश बढ़ाये जाने का अनुरोध किया गया था, जिसे ग्रीन बोनस भी कह सकते हैं। 15वें वित्त आयोग द्वारा डिवोलेशन फार्मूला में वनों का अंश 7.50 प्रतिशत से बढ़ाकर 10 प्रतिशत कर दिया गया है, जिससे राज्य के अंश में वृद्धि हुई है।
उत्तराखण्ड को मिलेगा राजस्व घाटा अनुदान
मुख्यमंत्री ने सांवैधानिक व्यवस्था के अनुरूप 15 वें वित्त आयोग के समक्ष राज्य के हक की पुरजोर पैरवी करते हुये कहा था कि 14वें वित्त आयोग द्वारा राजस्व घाटा अनुदान को समाप्त कर दिया था, जिसके कारण राज्य को अत्यधिक नुकसान उठाना पड़ा। 15वें वित्त आयोग ने इस बात को स्वीकार करते हुए उत्तराखण्ड राज्य को राजस्व घाटा अनुदान दिये जाने की संस्तुति की है, जिसके फलस्वरूप राज्य को प्रतिवर्ष लगभग न्यूनतम रू 2000 करोड़ का लाभ होगा।
आपदा राहत निधि में बढ़ोतरी
आपदा प्रबन्धन के अन्तर्गत राज्य को राज्य ‘‘आपदा राहत निधि’’ के अंश के रूप में गतवर्ष लगभग रू. 254 करोड़ की धनराशि प्राप्त होती थी। उत्तराखण्ड राज्य में होने वाली प्राकृतिक आपदाओं से निटने के लिये आवश्यक सहायता दिये जाने का विषय आयोग के समक्ष प्रस्तुत किया गया। राज्य से सहमत होते हुये 15वें वित्त आयोग द्वारा राज्य आपदा राहत निधि के अंश में वृद्धि करते हुये, इसे प्रतिवर्ष लगभग रू 1041 करोड़ कर दिया गया है।
शहरी स्थानीय निकायों और पंचायतीराज संस्थाओं के अनुदान में वृद्धि
14वें वित्त आयोग द्वारा वित्तीय वर्ष 2019-20 में मूल अनुदान के अन्तर्गत शहरी स्थानीय निकायों एवं पंचायतीराज संस्थाओं हेतु कुल रू 704.10 करोड़ की धनराशि संस्तुति की गई थी। 15वें वित्त आयोग द्वारा शहरी स्थानीय निकायों एवं पंचायतीराज संस्थाओं हेतु अनुदान में वृद्धि करते हुये वित्तीय वर्ष 2020-21 हेतु कुल रू 852.00 करोड़ की धनराशि संस्तुत की गई है, जिसमें लगभग 21 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

शरजील पीएफआई के संपर्क में था, फंडिंग की जांच में जुटी पुलिस

देशद्रोह के आरोप में गिरफ्तार जेएनयू के स्कॉलर शरजील इमाम से पूछताछ में पुलिस को चैंकाने वाली जानकारियां मिल रही हैं। पता चला है कि शरजील पीएफआई के नौ लोगों के संपर्क में था। इनसे उसकी लगातार बातचीत होती थी। ये सभी व्हाट्स ऐप ग्रुप ‘मुस्लिम स्टूडेंट ऑफ जेएनयू’ और ‘मुस्लिम स्टूडेंट ऑफ जामिया’ से जुड़े थे।
वहीं, शरजील के मोबाइल की जांच के बाद पुलिस ने जामिया और अलीगढ़ विश्वविद्यालय के 15 छात्रों की पहचान की है। ये शरजील के संपर्क में थे। पुलिस ने इनको पूछताछ के लिए नोटिस दिया है। शरजील का रिमांड सोमवार को खत्म होने के बाद उसे साकेत कोर्ट के चीफ मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट के घर पेश किया गया। वहां उसका रिमांड तीन दिन और बढ़ा दिया गया है। हालांकि पुलिस को उसके किसी आतंकी संगठन से जुड़े होने का कोई प्रमाण नहीं मिला है।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, शरजील के लैपटॉप और डेस्कटॉप की जांच के दौरान पता चला है कि शरजील ने जामिया हिंसा से पूर्व उर्दू और अंग्रेजी में कुछ भड़काऊ पोस्टर बनाए थे। इनको उसने विभिन्न व्हाट्स ऐप ग्रुप पर पोस्ट किया था। दूसरी ओर, उसके बैंक खातों की जांच के दौरान किसी बाहरी फंडिंग की अभी जानकारी नहीं मिली है।
पुलिस खातों की डिटेल की जांच कर रही है। पुलिस ने शरजील के मोबाइल का डिलीट डाटा भी बरामद कर लिया है। मोबाइल से मिले कई वीडियो में शरजील भड़काऊ भाषण देता दिखा है। शरजील को भड़काऊ बातें बोलने में महारथ हासिल है। उसने अपनी बातचीत के जरिये पुलिस को भी गुमराह करने की कोशिश की थी।
मोबाइल से मिले वीडियो में शरजील लोगों से सीएए और एनआरसी के खिलाफ लामबंद होने के लिए कह रहा है। जामिया मिल्लिया और शाहीन बाग में प्रदर्शन शुरू होने के बाद वह देश के दूसरे शहरों में भी इसी तरह के प्रदर्शन खड़े करने की कोशिश कर रहा था।