एम्स छात्र से लूट कर भाग रहे युवक को अज्ञात वाहन ने कुचला

एम्स के छात्र से स्कूटी व पर्स आदि लूट कर भाग रहे तीन युवकों को अज्ञात वाहन ने टक्कर मार दी। जिसमें एक युवक की मौत हो गई। वहीं अन्य दो युवक भाग खड़े हुये। पुलिस युवक की पहचान में जुट गई है। साथ ही भागे गये युवकों की तलाश में भी जुट गई है।

बुधवार रात करीब दस बजे एक स्कूटी पर सवार तीन युवक रायवाला से ऋषिकेश की ओर जा रहे थे। शराब ठेके के पास उनकी स्कूटी अज्ञात वाहन की चपेट में आ गई। इस हादसे में एक युवक की मौके पर ही मौत हो गई। जबकि उसके साथ स्कूटी पर सवार दो अन्य युवक वहां से भाग गए। प्रत्यक्षदर्शियों ने पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने बताया कि मृतक युवक की जेब से एम्स ऋषिकेश के छात्र का आइकार्ड बरामद हुआ है। जो किसी कमलदीप (25) निवासी ब्वायज हॉस्टल, एम्स, वीरभद्र रोड, ऋषिकेश व कोर्स एमबीबीएस का है। इस कार्ड में वैधता अवधि एक अप्रैल 2015 से 31 जनवरी 2018 लिखी हुई है। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है

एम्स के छात्र कमलदीप से लूटी थी स्कूटी
हादसे के बाद रात को ही एक युवक अपने दोस्तों के साथ ऋषिकेश कोतवाली पहुंचा। उसने बताया कि उसकी स्कूटी लूट ली गई है। साथ ही बदमाश उसका पर्स भी ले गए हैं। युवक ने अपनी पहचान कमलदीप के रूप में दी। कहा कि रात करीब साढ़े नौ बजे वह हॉस्टल के बाहर अपने सीनियर्स के पास जा रहा था। तभी बैराज पशुलोक मार्ग पर तीन लोगों ने उसकी स्कूटी और पर्स छीन लिया। घटना की सूचना उसने उसी वक्त पुलिस कंट्रोल रूम को भी दी। कमलदीप ने दुर्घटना में मृत युवक से मिले आइकार्ड को भी अपना बताया। कोतवाली प्रभारी निरीक्षक रितेश शाह ने बताया कि उन्हें कंट्रोल रूम से स्कूटी लूट की सूचना मिली थी। छात्र की शिकायत की जांच की जा रही है। उन्होंने बताया कि संभवतः जो युवक दुर्घटना में मारा गया है, वह स्कूटी लूट में शामिल था। फिलहाल शव की शिनाख्त नहीं हो पाई है।

जांच पक्ष में करने की एवज में मांगी घूस, विजिलेंस ने पकड़ा

विजिलेंस टीम ने ऋषिकेश के नायब तहसीलदार मुन्ना सिंह चौहान को रंगेहाथ 50 हजार की घूस लेते हुये पकड़ा है। किसी मामले की जांच को उसके पक्ष में करने के लिये नायब तहसीलदार ने 50 हजार की घूस एडवांस में मांगी थी। बाकी रकम जांच पूरी होने के बाद देनी थी। रायवाला ग्राम सभा की ग्राम प्रधान राखी गिरि की शिकायत पर यह कार्यवाही की गयी। आरोपी मुन्ना सिंह चौहान को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया।

मंगलवार को विजिलेंस ने कार्यवाही की और 50 हजार रुपए रिश्वत ले रहे नायब तहसीलदार को उसके एक आश्रम में स्थित निजी कक्ष से पकड़ा। बता दें कि रायवाला की ग्राम प्रधान राखी गिरि ने गत 27 अक्टूबर को पुलिस अधीक्षक, सतर्कता सैक्टर देहरादून को एक शिकायती पत्र दिया। जिसमें उन्होंने बताया कि ग्राम पंचायत रायवाला में दिनांक 14 अक्टूबर 2014 को आयोजित खुली बैठक में यूकेलिप्टिस के ऐसे पेड़ों को काटने का प्रस्ताव पारित किया गया था जो कि पंचायत भवन व आसपास के अन्य भवनों के लिए खतरा बने हुए थे। इससे प्राप्त राजस्व को ग्राम विकास कार्यो पर खर्च किया जाये।

ग्राम प्रधान ने उक्त प्रस्ताव के क्रम में पेड़ों को कटवाकर नीलामी से प्राप्त रूपयों को विधिवत ग्राम पंचायत के बैंक खाते में जमा करवाया। ग्राम पंचायत रायवाला के उपप्रधान कैलाश भट्ट द्वारा पेड़ों की कटाई व नीलामी के सम्बन्ध में एक प्रार्थना पत्र सीडीओ देहरादून को दिया गया। जांच में ग्राम प्रधान के विरूद्व कोई त्रुटि नहीं पाई गयी। गत 12 अक्टूबर को जब वह किसी कार्य से तहसील ऋषिकेश गई तो वहां पर उसे नायब तहसीलदार मुन्ना सिंह चौहान ने कहा कि आपके विरूद्व ग्राम पंचायत के पेड़ों के कटान एवं नीलामी के सम्बन्ध में उपप्रधान कैलाश भट्ट द्वारा एक शिकायती प्रार्थना पत्र जिलाधिकारी देहरादून को दिया गया है। जिसकी जांच मैं कर रहा हूॅ। आपकी जांच के सम्बन्ध में आपको ‘‘साढे चार लाख रुपये की पेनल्टी लगेगी। इस पर जब नायब तहसीलदार को पेड़ों के कटान व नीलामी के सम्बन्ध में एडीओ पंचायत डोईवाला एवं एसडीएम ऋषिकेश द्वारा पूर्व में जांच हो चुकने और कोई त्रुटि न पाए जाने की बात बताई तो नायब तहसीलदार ने कहा कि उन लोगों ने इस फाईल पर जांच पूरी नहीं की है। अब जांच को आपके पक्ष में करना है तो बदले में 50-60 हजार रूपये दो। बाकी जांच के बाद बताऊंगा कि कितने और देने है। यह भी कहा कि अगर पैंसे नहीं दोगे तो आपका बस्ता जमा हो जायेगा।

रिश्वत का पैसा देने के लिए मंगलवार 30 अक्टूबर का दिन तय किया और पहली किश्त के रूप में 50-60 हजार रूपये लेकर त्रिवेणी घाट के पास स्थित एक आश्रम के कमरा नं0 49 में सुबह 9ः30 बजे से पहले बुलाया। वहीं पुलिस अधीक्षक, सतर्कता सैक्टर देहरादून द्वारा शिकायतकर्ती ग्राम प्रधान राखीं गिरि केे शिकायती प्रार्थना पत्र की गोपनीय जांच में आरोप सही पाते हुये नियमानुसार ट्रैप संचालन के लिए ट्रैप टीम का गठन किया गया।

टीम ने मंगलवार सुबह करीब नौ बजे मौके से आरोपी मुन्ना सिंह चौहान पुत्र श्री खड़ग सिंह, निवासी ग्राम रसूलपुर, विकासनगर देहरादून, हाल नायब तहसीलदार ऋषिकेश को रिश्वत के 50 हजार रूपये लेते रंगे हाथ पकड़ लिया। इस दौरान जिलाधिकारी देहरादून के निर्देश पर दो गवाह भी मौजूद रहे। आरोपी के विरूद्व थाना सतर्कता सैक्टर देहरादून में सम्बंधित धारा के तहत मुकदमा पंजीकृत किया गया है। निदेशक, सतर्कता द्वारा ट्रैप टीम के प्रभारी निरीक्षक रमेश तनवार व सदस्य निरीक्षक विभा वर्मा, निरीक्षक प्रकाश दानू एवं आरक्षी अश्वनी कुमार, गौरव चौधरी, नीरज रावत, भगवती को बधाई देते हुए उत्साह वर्धन हेतु 10,000 रूपये नकद पारितोषिक देने की घोषणा की है।

किरायेदार के सत्यापन में नहीं काटेगी पुलिस मालिक का सीधा चालान

पुलिस महानिदेशक ने सेवा का अधिकार आयोग के निर्देश के क्रम में सभी जिलों को जारी किए दिशा निर्देश के तहत अब पुलिस सत्यापन के दौरान सीधे मकान मालिक का चालान नहीं करेगी। पहले नोटिस जारी कर सत्यापना की स्थिति स्पष्ट करेगी।

देहरादून की पटेलनगर पुलिस ने सत्यापन के दौरान आइएसबीटी के पास एमडीडीए आवासीय परियोजना निवासी जनार्दन प्रसाद ध्यानी का चालान काट दिया था। जबकि उन्होंने पहले से किरायेदार का सत्यापन करा रखा था। इस कार्रवाई के विरोध में ध्यानी ने सेवा का अधिकार आयोग में शिकायत दर्ज कराई थी। प्रकरण पर सुनवाई करते हुए आयोग के मुख्य आयुक्त आलोक कुमार जैन ने पाया कि पुलिस की लापरवाही के चलते मकान मालिक को सीजेएम कोर्ट में एक हजार रुपये खर्च करने पड़े और आर्थिक, मानसिक परेशानी से भी गुजरना पड़ा।

आयोग ने पुलिस की इस कार्रवाई पर द्वितीय अपीलीय अधिकारी वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से जवाब तलब किया था। आयोग ने पूछा था कि क्या सत्यापन के दौरान पुलिस के पास मकान मालिकों के आवेदन का विवरण नहीं रहता है। हालांकि, उनकी तरफ से चौंकाने वाला जवाब मिला कि संबंधी थाना पुलिस के लिए यह संभव नहीं है कि वह सत्यापन रजिस्टर को साथ लेकर चले। इस उत्तर को आयोग ने वाजिब नहीं पाया और पुलिस महानिदेशक को पत्र लिखा कि सत्यापन के विवरण के बिना इस तरह मकान मालिकों का चालान किया जाना उचित नहीं है। जब शासकीय तंत्र के पास सूचना है तो नागरिकों को परेशान किया जाना किसी भी दशा में ठीक नहीं।

लिहाजा, दिशा-निर्देश जारी किए जाने चाहिए कि जिन मकान मालिकों ने सत्यापन करा लिया है, उनका चालान न किया जाए। इसी क्रम में पुलिस महानिदेशक ने जिलों को दिशा-निर्देश जारी किए और यह आदेश प्रदेशभर के लिए नजीर भी बन गया है।

यूपी और उत्तराखंड की बसों के अस्थाई परमिट की व्यवस्था हुई खत्म, दोनों सरकारों ने लिया फैसला

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पारस्परिक परिवहन समझौते पर हस्ताक्षर किये। इस मौके पर सीएम त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि इस समझौते के बाद अब यूपी और उत्तराखंड की जनता को परिवहन में बेहतर सुविधा मिलेगी। पिछले 18 सालों से चला आ रहा इंतजार अब खत्म हो गया है।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि दोनों राज्यों की सरकारें समाधान में विश्वास करती हैं। दोनों ही सरकारें राज्य के विकास के लिये निरंतर कार्यरत है। इस दौरान उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्रशंसा भी की। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के बीच परिवहन समझौता होने से दोनों राज्यों के बीच बसों का आवागमन बढ़ जाएगा। उन्होंने कहा कि हम सब साझी विरासत का हिस्सा है। इसलिए आने वाले दिनों में हमारे संबंध और अधिक प्रगाढ़ होंगे।

इस समझौते से अब यूपी परिवहन निगम की बसें उत्तराखंड में 216 मार्गों पर एक लाख 39 हजार किलोमीटर चलेंगी। वहीं उत्तराखंड की बसें यूपी में 335 मार्गों पर दो लाख 52 हजार किलोमीटर हर रोज चलेंगी।

उल्लेखनीय है कि मौजूदा समय में यूपी से उत्तराखंड जा रहीं और वहां से यूपी आ रहीं बसों का संचालन अस्थाई परमिट के आधार पर हो रहा है। परमिट की अवधि खत्म हो जाने के बाद दोनों राज्य एक-दूसरे की सीमा में प्रवेश करने वाली बसों को रोक दिया जाता है। इसके चलते बस यात्रियों को अत्यंत परेशानियों का सामना करना पड़ता था। इस समझौते के होने के बाद दोनों राज्यों को अपनी बस चलाने के लिए किसी परमिट की जरूरत नहीं पड़ेगी। इसके साथ ही अस्थाई परमिट की व्यवस्था खत्म हो जाएगी। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश के परिवहन मंत्री स्वतंत्र देव सिंह व उत्तराखण्ड के परिवहन मंत्री यशपाल आर्य भी उपस्थित थे।

कोर्ट में पेश होने पर उमेश कुमार बोला, मेरे खिलाफ हुई साजिश

उत्तराखंड में स्टिंग के जरिये राजनेताओं और नौकरशाहों को ब्लैकमेलिंग करने के आरोप में अपर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी तृतीय रिंकी साहनी की अदालत ने समाचार प्लस चैनल के मालिक उमेश कुमार को आठ नवंबर तक न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है। वहीं, उमेश शर्मा पर पत्रकार आयुष गौड़ ने आरोपों को फिर से दोहराकर कई नई बातें बताई।

समाचार प्लस चैनल के सीईओ उमेश जे कुमार को रविवार को उप्र के गाजियाबाद में एटीएस एडवांटेज सोसायटी के टावर नंबर 19 से गिरफ्तार किया गया था। उमेश पर उसके ही चैनल के कर्मचारी आयुष गौड़ ने उत्तराखंड के नेताओं और नौकरशाहों का स्टिंग करने का दबाव बनाने का आरोप लगाते हुए मुकदमा दर्ज कराया था। मुख्य आरोपित उमेश जे कुमार को लेकर पुलिस टीम रविवार रात करीब तीन बजे देहरादून पहुंची। यहां पुलिस अधिकारियों ने उससे पांच घंटे तक पूछताछ की।

सोमवार पूर्वाह्न् करीब 11 बजे पुलिस उसे लेकर अदालत पहुंची। पुलिस ने अदालत में अभी तक की जांच रिपोर्ट रखी। इसके बाद अदालत ने आरोपित का पक्ष भी सुना। हालांकि बचाव पक्ष ने दिल्ली से अपने वकील को बुला रखा था, लेकिन अदालत में आरोपित ने खुद ही अपना पक्ष रखा। करीब चार घंटे तक दोनों पक्ष अदालत में मौजूद रहे। उनका पक्ष सुनने के बाद अदालत ने आरोपी को आठ नवंबर तक न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेजने के आदेश दिए। पेशी के दौरान कचहरी परिसर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे।

उमेश कुमार ने कहा मेरे खिलाफ हुई साजिश
उमेश कुमार ने अदालत में अपनी पैरवी करते हुए साजिश के तहत फंसाये जाने की बात कही। उसने यह भी कहा कि सरकार उसके पीछे पड़ी है और उसे और उसके परिवार को जान का खतरा हो सकता है।

ये अभी भी बाहर घूम रहे
नेताओं और नौकरशाहों का स्टिंग करने की साजिश के मामले में देहरादून के राजपुर थाने में रिपोर्ट दर्ज है। इस मुकदमे में उत्तराखंड आयुर्वेदिक विवि के निलंबित कुल सचिव मृत्युंजय मिश्र के साथ ही प्रवीण साहनी, सौरभ साहनी और राहुल भाटिया भी नामजद हैं। ये चारों अभी गिरफ्त से बाहर हैं।

आत्मविश्वास जागृत करने पर बच्चें बहुत कुछ करने में सक्षम

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने पुरकल गांव में पुरकल यूथ डेवलपमेंट सोसायटी के 08वें वाषिकोत्सव कार्यक्रम में प्रतिभाग कर सोसायटी के अटल टिंक्ंिरग प्रयोगशाला का उद्घाटन किया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने छात्र-छात्राओं द्वारा किये जा रहे विभिन्न भौतिक, रासायनिक व जैवीय प्रयोगों का अवलोकन भी किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सोयायटी द्वारा शैक्षणिक कार्यों के साथ ही बच्चों का कौशल विकास भी किया जा रहा है, यह सराहनीय प्रयास है। बच्चों को यदि प्रोत्साहित किया जाए तो, वे तेजी से तरक्की कर सकते हैं। यह इसका प्रत्यक्ष प्रमाण है। बच्चों के अन्दर आत्मविश्वास जागृत किया जाए तो वे बहुत कुछ करने में सक्षम हो सकते हैं। सोसायटी द्वारा अधिकांश गरीब परिवारों के बच्चों को यहां पर शैक्षिक गतिविधियों के साथ कौशल विकास पर बल दिया जा रहा है। जिसके आधार पर बच्चों द्वारा अधिकांश निष्प्रयोज्य का प्रयोग कर अनेक उपकरण बनाये गये हैं। वेस्ट को बैस्ट में बदलने का यह प्रयास निश्चित रूप से सराहनीय है। उन्होंने कहा कि ये बच्चे अपने हुनर के बल पर भविष्य में उन्नति के पथ पर अग्रसर होंगे तथा अपने कौशल व अनुभव से जरूरतमंदों की भी मदद करेंगे।

समाचार प्लस के मालिक उमेश जे कुमार को पुलिस ने किया गिरफ्तार, राज्य में स्टिंग को लेकर थी ये मंशा

उत्तराखंड की राजनीति में भूचाल लाने के उद्देश्य से एक पत्रकार पर स्टिंग ऑपरेशन करने का दबाव बनाने वाले एक निजी चैनल के मालिक उमेश जे कुमार को उत्तखंड और उत्तर प्रदेश पुलिस ने गाजियाबाद स्थित घर से दबोच लिया। यहां से पुलिस ने 39 लाख रुपये नगदी के साथ ही विदेशी मुद्रा और स्टिंग के उपकरण भी बरामद किए हैं। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक देहरादून निवेदिता कुकरेती ने बताया कि इस सिलसिले में उत्तराखंड आयुर्वेदिक विवि के निलंबित कुल सचिव मृत्युंजय मिश्र और चैनल के तीन कर्मचारियों के खिलाफ भी प्राथमिकी दर्ज है।

शिकायतकर्ता आयुष गौड़ के मुताबिक आरोपितों ने मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव, अपर मुख्य सचिव और कुछ अन्य नेताओं को भी फंसाने का षडयंत्र रचा था। गिरफ्तार आरोपित ने वर्ष 2016 में उत्तराखंड में तत्कालीन सीएम हरीश रावत का स्ंिटग कर राजनीतिक हलचल मचा दी थी। गाजियाबाद के इंदिरापुरम थाने की पुलिस और उत्तराखंड पुलिस ने एटीएस एडवांटेज सोसायटी के टावर नंबर 19 के टॉप फ्लोर पर स्थित आरोपित उमेश के फ्लैट पर छापा मारा। टीम की वहां तैनात सीआरपीएफ जवानों से नोकझोंक भी हुई। घर की तलाशी के बाद पुलिस टीम ने आरोपित को गिरफ्तार कर लिया। अभी आरोपित से इंदिरापुरम थाने में पूछताछ की जा रही है।

ये सामान मिला फ्लैट से
39,73000 रुपये नगद, 116,279 अमेरिकी डालर, 11,030 थाई मुद्रा, कई मोबाइल फोन, हार्ड डिस्क, पेन ड्राइव, मेमोरी कार्ड, आईपैड, लैपटॉप, कैमरा व डीवीडी।
उक्त प्रकरण के सामने आने पर कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक ने कहा कि यह सब जांच का विषय है और जांच के बाद देखा जाएगा कि और क्या हो सकता है। किसी भी रूप में लोकतंत्र को कमजोर करने का प्रयास किसी भी स्तर पर नहीं होना चाहिए। लोकतंत्र के सभी अंगों को समाज की बेहतरी के लिए कार्य करना चाहिए। एडीजी लॉ एंड ऑर्डर, उत्तराखंड अशोक कुमार ने कहा कि निजी चौनल के मालिक समेत साजिश में शामिल सभी आरोपितों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। मुख्य आरोपी उमेश जे कुमार को गिरफ्तार कर लिया गया है। अन्य की तलाश की जा रही है।

पूरी तैयारी के साथ गिरफ्तार करने पहुंची पुलिस
मुख्य आरोपी उमेश जे कुमार की गिरफ्तारी के लिए उत्तराखंड पुलिस पूरी तैयारी के साथ रविवार सुबह गाजियाबाद पहुंची। हाईप्रोफाइल मामला होने के चलते वह अपने साथ कोर्ट से सर्च और गैर जमानती गिरफ्तारी वारंट लेकर गई थी।

ऐसे आया मामला सामने
समाचार प्लस चैनल के मुलाजिम आयुष गौड़ ने बीती 10 अगस्त को देहरादून में राजपुर थाने में चैनल के सीईओ के साथ ही उत्तराखंड आयुर्वेदिक विवि के पूर्व कुल सचिव मृत्युंजय मिश्र, प्रवीण साहनी, सौरभ साहनी और राहुल भाटिया के खिलाफ तहरीर दी थी। आयुष का आरोप था कि उस पर वरिष्ठ नौकरशाहों और नेताओं का स्टिंग करने का दबाव बनाया जा रहा है, जान से मारने की धमकी जा रही है। करीब ढाई महीने की जांच के बाद पुलिस ने रविवार को इसमें बड़ी कार्रवाई की।

वहीं शासन ने विवादित अधिकारी डॉ. मृत्युंजय कुमार मिश्र को उनका नाम मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत व अपर मुख्य सचिव ओमप्रकाश समेत अन्य अधिकारियों के स्टिंग के प्रयास को लेकर दर्ज एफआइआर में आने के बाद निलंबित कर दिया है। हालांकि, शासन ने अधिकारिक तौर पर निलंबन का आधार उत्तराखंड आयुर्वेदिक विश्वविद्यालय में बतौर कुलसचिव उनके विरुद्व सतर्कता विभाग में चल रही खुली जांच व अन्य जांच को बनाया है। सचिव आयुष शैलेश बगौली द्वार जारी निलंबन आदेश में कहा गया है कि आयुर्वेदिक विश्वविद्यालय के कुलपति ने यह अंदेशा जताया है कि मृत्युंजय मिश्र के आयुर्वेदिक विश्वविद्यालय के कुलसचिव पद पर बने रहने से जांच प्रभावित हो सकती है। इस कारण उन्हें तत्काल प्रभावित से निलंबित किया गया है।

वेबसाइट्स पर पोर्न वीडियो दिखाई गयी तो होगी आईटी एक्ट के तहत कानूनी कार्यवाही

केंद्र सरकार पोर्न वेबसाइट्स पर लगातार नजर रख रही है। यदि पोर्न वेबसाइट्स द्वारा वीडियों दिखायी जाएंगी तो आईटी एक्ट के तहत कानूनी कार्यवाही हो पाएगी। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने नेशनल क्राइम रिकार्ड ब्यूरो के अधीन (डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यू डॉट साइबरक्राइम डॉट जीओवी डॉट इन) नाम से साइबर क्राइम पोर्टल लांच किया है। जिसमें साइबर क्राइम की शिकायत या सूचना दर्ज की जा सकती है। गुरूवार को उच्च न्यायालय नैनीताल में दूरसंचार विभाग की ओर से इस मामले में हलफनामा भी पेश किया गया। विभाग की ओर से 827 पोर्न वेबसाइट्स को बंद करने के आदेश दिए गये है।

हाईकोर्ट नैनीताल के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति राजीव शर्मा व न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की खंडपीठ के समक्ष केंद्रीय दूरसंचार विभाग की ओर से हलफनामा प्रस्तुत किया गया। जिसमें हाई कोर्ट की ओर से पारित आदेश के क्रियान्वयन को लेकर जानकारी दी गई। हलफनामे में बताया गया है कि अश्लीलता परोस रही इन वेबसाइट्स पर लगातार नजर रखने के विभाग को निर्देश दिए गए हैं। शपथ पत्र में यह भी बताया गया है कि 30 अन्य वेबसाइट्स की जांच में अश्लीलता फैलाने की पुष्टि नहीं हुई है। इसके अलावा कुछ विदेशी वेबसाइट भी हैं, जिन पर इंटरपोल व ब्रिटेन इंटरनेट वॉच फाउंडेशन नजर रखता है, जो भारत की केंद्रीय जांच एजेंसी सीबीआइ से सूचनाओं का आदान-प्रदान करते हैं।

कठोरता से अश्लीलता पर रोक लगाएगी सरकार
केंद्र सरकार के हलफनामे के आधार पर खंडपीठ ने उम्मीद जताई कि सरकार अश्लीलता पर कठोरता से रोक लगाएगी, ताकि बच्चों को यौन अपराध से बचाया जा सके। कोर्ट ने साइबर क्राइम पोर्टल का 24 घंटे में प्रिंट व इलेक्ट्रानिक मीडिया में प्रचार-प्रसार करने के निर्देश दिए हैं। ज्ञातव्य है कि पिछले माह दून में अश्लील वीडियो देखकर चार नाबालिग बच्चों ने एक नाबालिग छात्रा के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया था। इस घटना के बाद कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने राज्य व केंद्र सरकार को अश्लीलता रोकने के दिशा-निर्देश जारी किए थे। इस मामले में अगली सुनवाई अब 26 नवंबर को होगी।

उत्तराखंड के मुख्य न्यायाधीश होंगे आंध्र प्रदेश एचसी के वरिष्ठ न्यायधीश रमेश रंगनाथन

उत्तराखंड के नैनीताल स्थित हाईकोर्ट के मुख्य न्यायधीश आंध्र प्रदेश व तेलंगाना के वरिष्ठ न्यायधीश रमेश रंगनाथन होंगे। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की ओर से नियुक्ति के बादकेंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्रालय की ओर से अधिसूचना जारी कर दी गई है। वहीं उत्तराखंड हाई कोर्ट के वरिष्ठ न्यायाधीश न्यायमूर्ति विजय कुमार सिंह बिष्ट सिक्किम हाई कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश होंगे।

हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति केएम जोसफ के सुप्रीम कोर्ट का न्यायाधीश नियुक्त होने के बाद मुख्य न्यायाधीश का पद रिक्त चल रहा था और वरिष्ठ न्यायाधीश राजीव शर्मा को कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश बनाया गया था। सुप्रीम कोर्ट के कोलेजियम की बैठक में आंध्र प्रदेश-तेलंगाना के वरिष्ठ न्यायाधीश रमेश रंगराथन को उत्तराखंड हाई कोर्ट का मुख्य न्यायाधीश व उत्तराखंड हाई कोर्ट के वरिष्ठ न्यायाधीश न्यायमूर्ति वीके बिष्ट को सिक्किम हाई कोर्ट का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त करने की सिफारिश की गई थी।

कोलेजियम की सिफारिश स्वीकार करने के बाद केंद्र सरकार ने राष्ट्रपति को प्रस्ताव भेज दिया था। राष्ट्रपति ने प्रस्ताव स्वीकार करते हुए जस्टिस रंगनाथन की नियुक्ति उत्तराखंड मुख्य न्यायाधीश के रूप में कर दी है। बुधवार को केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्रालय के संयुक्त सचिव राजेंद्र कश्यप की ओर से इस संबंध में अधिसूचना जारी कर दी गई, जो उत्तराखंड हाई कोर्ट पहुंच गई है, जिसमें बताया गया है कि राष्ट्रपति ने संविधान के अनुच्छेद-217 के तहत प्राप्त शक्ति का उपयोग करते हुए जस्टिस रंगनाथन को उत्तराखंड हाई कोर्ट का मुख्य न्यायाधीश व नैनीताल हाई कोर्ट के वरिष्ठ न्यायाधीश न्यायमूर्ति वीके बिष्ट को सिक्किम हाई कोर्ट का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया है।

900 छात्रों ने छोड़ा संस्थान, राष्ट्रपति सहित मुख्य न्यायधीश को किया सूचित

एनआईटी (राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान) में स्थायी कैंपस पुख्ता इंतजाम न होने के कारण यहां के करीब 900 छात्र-छात्राओं ने संस्थान छोड़कर अपने घरों का रूख किया। छात्रों ने कहा कि स्थायी कैंपस और पुख्ता सुरक्षा इंतजाम होने पर ही वह संस्थान में वापस लौटेंगे। छात्रों ने मेल, फैक्स आदि के माध्यम से राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और मानव संसाधन मंत्री के साथ ही उत्तराखंड के राज्यपाल और मुख्यमंत्री को अपने निर्णय की सूचना दी है।

स्थायी परिसर का निर्माण जल्द शुरू कराने और तब तक अस्थायी परिसर अन्यत्र शिफ्ट करने की मांग को लेकर संस्थान में पढ़ रहे विभिन्न पाठ्यक्रमों के छात्र-छात्रएं 19 दिनों से कक्षाओं का बहिष्कार कर रहे थे। मंगलवार सुबह ये सभी हास्टल में अपने कमरों पर ताले डालकर घर चले गए।

छात्र-छात्रओं ने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री, राज्यपाल और मुख्यमंत्री को भेजे पत्र में उल्लेख किया है कि सामूहिक चर्चा के बाद उन्होंने यह निर्णय लिया है। अब वे संस्थान में तभी लौटेंगे, जब उनकी मांगों पर कार्रवाई शुरू हो जाएगी। इधर, एनआइटी के कुलसचिव कर्नल सुखपाल सिंह का कहना है कि निदेशक डॉ. श्याम लाल सोनी ने घटनाक्रम से मानव संसाधन मंत्रलय के उच्चाधिकारियों को अवगत करा दिया गया है।

एनआईटी की कक्षाएं दो परिसरों में संचालित हो रही है। प्रयोगशाला और प्रशासनिक भवन पुराने आईटीआई की जमीन पर बनाए गए हैं, जबकि कक्षाएं यहां से दो सौ मीटर दूरी पर पालीटेक्निक भवन में संचालित की जा रही हैं। हॉस्टल के लिए संस्थान ने यहां से कुछ दूरी पर होटल किराये पर ले रखे हैं। छात्र-छात्रएं इस व्यवस्था से खफा हैं। उनका कहना है कि ये सब एक ही कैंपस में होना चाहिए। मौजूदा व्यवस्था में सुरक्षा को लेकर भी बच्चे सशंकित रहते हैं, इसी महीने की शुरुआत में एक से दूसरे कैंपस में जाते वक्त दो छात्रएं वाहन की चपेट में आकर गंभीर रूप से घायल हो गई थी। इनमें एक का अभी उपचार चल रहा है।