जहरीली शराब के सेवन से शराबबंद बिहार में मौत

कहने को तो बिहार में शराबबंदी है, लेकिन यहां अक्सर शराब पाये जाने के किस्से सुने जाते है। साथ ही कई लोग शराब पीने से अपनी जान तक गंवा बैठते है। बिहार के रोहतास में जहरीली शराब पीने से 5 लोगो की मौत हो गई है और 4 लोगों की हालत गंभीर बताई जा रही है।
डीआईजी शाहाबाद मो रहमान ने इस बात की पुष्टि की है। साथ ही जहरीली शराब पीने से मौत मामले में शाहाबाद रेंज के डीआईजी के सख्त तेवर भी अपनाए हैं। सूत्रों के अनुसार एसएचओ पर निलंबन की कार्रवाई की गई है। साथ ही एक्ससाइज अधिकारियों पर भी कार्रवाई हो सकती है।

पुलिस अधीक्षक मानवजीत सिंह ढिल्लों ने बताया कि शुक्रवार रात को संदिग्ध जहरीली शराब पीने से पांच लोगों की मौत होने और कुछ के बीमार पड़ने की सूचना मिली है। जिसकी जांच की जा रही है। ढिल्लों ने बताया कि इस मामले में फिलहाल कछवा थाना अध्यक्ष मुकेश कुमार को निलंबित कर दिया गया है। इनपर आरोप है कि यह पैसा लेकर दारू बेचवाते थे।

शाहाबाद प्रक्षेत्र के पुलिस उपमहानिरीक्षक मोहम्मद रहमान, जिलाधिकारी अनिमेष कुमार सिंह और पुलिस अधीक्षक मानवजीत सिंह ढिल्लों घटनास्थल पर पहुंच गए हैं। पुलिस मौत के कारणों का पता लगाने के लिए शवों को अपने कब्जे में लेने के साथ ही हादसे में बीमार लोगों के बारे में भी पता लगाने के प्रयास कर रही है।

रोहतास के दनवर इलाके में इस हादसे से कई परिवारों में शोक व्याप्त है। आपको बता दें कि पिछले साल बिहार के गोपालगंज जिले में जहरीली शराब पीने से 16 लोगों की मौत हो गई थी। इसके बाद इस इलाके के नगर थाना प्रभारी सभी 25 पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया था।

घटना के बाद स्थानीय ग्रामीण आक्रोशित हैं। इन लोगों का कहना है कि प्रतिबंध के बावजूद इलाके में अवैध रूप से शराब बिक रहा है जिस कारण आज इस तरह की घटना हुई है। मृतकों में सभी दनवार के ही हैं। मरनेवालों में कमलेश सिंह, हरिहर सिंह, धनजी सिंह और उदय सिंह शामिल हैं। इस घटना से पूरे इलाके में आक्रोश है। लोगों का कहना है कि शराब बिकने में पुलिस प्रशासन की मिली भगत है। उनपर कार्रवाई होनी चाहिए।

अप्रैल 2016 को बिहार में पूर्ण शराबबंदी लागू हुई थी और इसके सेवन और उत्पादन और कारोबार पर प्रतिबंध लगा हुआ है। जिसके बाद से ही इससे जुड़ा कानून बहस का विषय बना हुआ है। कुछ माह पहले ये खबर आई थी कि राजधानी पटना के थानों में जब्त की हुई शराब चूहों ने पी ली है। इस खबर को लेकर सरकार की बहुत किरकिरी हुई थी, हालांकि बाद में बिहार पुलिस मुख्यालय ने इस खबर को खारिज कर दिया था।

योगी सरकार ने श्रीकृष्ण की जन्मभूमि को किया तीर्थस्थल घोषित

यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मथुरा के वृंदावन और बरसाना को पवित्र तीर्थस्थल बनाने का ऐलान किया है।
योगी आदित्यनाथ की यह सारी कवायद उत्तर प्रदेश में पर्यटन को और खासकर हिंदू धर्मस्थलों को बढ़ावा देने की दिशा में उठाए गए कदम के तौर पर भी देखा जा रहा है।

मांस-मदिरा का क्रय-विक्रय, सेवन प्रतिबंधित
वृंदावन और बरसाना को धार्मिक नगरी का दर्जा देने का मतलब होगा कि अब कृष्ण भक्तों की इस नगरी में मांस-मदिरा का न तो क्रय विक्रय हो सकेगा और न ही इनका सेवन किया जा सकेगा, बल्कि इसे अपराध माना जाएगा। कृष्ण लीला की इस नगरी को धार्मिक नगरी घोषित करने से कृष्ण भक्तों की बड़ी तादाद खुश है, क्योंकि यहां के लगभग सभी वैष्णव संगठन इसकी मांग करते रहे थे।
तीन दिन पहले ही योगी आदित्यनाथ ने चंदौली में कहा था कि उत्तर प्रदेश में सामान्य पर्यटन के साथ-साथ स्पिरिचुअल टूरिज्म की भी अपार संभावनाएं हैं और सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले दिनों में यूपी में पर्यटकों की संख्या में दस गुना बढ़ोत्तरी हो।

अधिसूचना जारी

मथुरा और वृंदावन को पवित्र तीर्थस्थल घोषित कर योगी ने यूपी को स्पिरिचुअल टूरिज्म स्टेट बनाने की दिशा में पहलकदमी शुरू भी कर दी है। इसके लिए सरकार ने अधिसूचना जारी कर दी है। साथ ही धर्मार्थ कार्य विभाग को भी अवगत करा दिया है।

इस बात की जानकारी देते हुए राज्य सरकार के प्रवक्ता ने बताया कि मथुरा जिले का वृंदावन क्षेत्र भगवान कृष्ण की जन्मस्थली एवं भगवान कृष्ण तथा उनके बड़े भाई बलराम की क्रीड़ा स्थली के रूप में विश्वविख्यात है। साथ ही बरसाना राधा रानी की जन्मस्थली एवं क्रीड़ास्थली भी है। इन पवित्र स्थानों पर देश विदेश से लाखों की संख्या में श्रद्धालु दर्शन करने एवं पुण्यलाभ के लिए आते हैं. इन तीर्थस्थलों के पौराणिक एवं पर्यटन की दृष्टि से इनके अत्यधिक महत्व को देखते हुए तीर्थस्थल घोषित किया गया है।
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जानिए किन छोटी-छोटी बातों के ध्यान रखने से शनि की साढ़ेसाती से बचा जा सकता है

न्याय के देवता शनि ने 26 अक्टूबर को धनु राशि में प्रवेश किया है, शनि यहां पर 23 जनवरी 2020 तक रहेगा। इसके पहले यह वक्री होने के कारण वृश्चिक राशि में था। अब शनि लंबे समय तक धनु राशि में बने रहेंगे। अलग-अलग राशियों पर इस राशि परिवर्तन का प्रभाव भी अलग ही पड़ने वाला है। कुछ राशियों की साढ़साती खत्म हो रही है तो कुछ की शुरू. हम आपको बताएंगे कि कहां आप लाभ उठा सकते हैं और कहां आपको बेहद सावधान रहना होगा। साथ ही किन उपायों से शनि के प्रकोप से बच सकते हैं।
तुला राशि की साढ़ेसाती समाप्त हो जायेगी। मकर राशि पर साढ़ेसाती का पहला चरण शुरू हो जाएगा।
वृश्चिक राशि पर साढ़ेसाती जारी रहेगी। धनु राशि पर साढ़ेसाती का मध्य रहेगा।
वृश्चिक राशि से साढ़ेसाती उतरती शुरू हो जायेगी। मेष राशि और सिंह राशि से ढैया उतर जायेगी।

मेष राशि के लिए शनि मध्यम रहेगा, नौकरी और धन के मामले में आपको खूब सफलताएं देगा लेकिन हड्डियों, पेट और मूत्र विकार की समस्या पर विशेष ध्यान देना जरूरी है। नियमित रूप से शनि मंत्र का जाप करने से लाभ होगा।
वृष राशि के लिए भी शनि का प्रभाव मध्यम ही रहेगा। शनि संपत्ति और वाहन का सुख देगा लेकिन दांपत्य जीवन में मतभेद बढ़ेगा। आंखों और वाणी की समस्या पर ध्यान दें।
मिथुन राशि के लोगों को शनि शुरुआत में बाधाएं देगा और बाद में लाभ। कड़ी मेहनत और संघर्ष करना पड़ सकता है। वैवाहिक जीवन के तालमेल पर ध्यान देना जरूरी है।
कर्क राशि वालों को शनि की कृपा मिलती रहेगी। विवाह, संतान और आर्थिक मामलों में सफलता मिलेगी। नौकरी में सफलता के योग हैं लेकिन विवाह में देरी हो सकती है।
सिंह राशि वालों को थोड़ी मानसिक चिंताएं हो सकती हैं लेकिन समाधान भी मिलेगा। चोट-चपेट और हड्डियों की समस्या से सावधान रहें।
कन्या राशि वाले लोगों को शनि कृपा से रिश्ते, नौकरी, कारोबार में सफलता मिलेगी। पुरानी समस्याएं दूर होंगी, नए लोग जीवन में जुड़ेंगे। बेवजह के मुकदमे और वाद-विवाद से बचें।
तुला राशि पर शनि की कृपा रहेगी। जीवन की तमाम रुकावटें दूर होंगी। संतान और करियर के मामले में लाभ होगा लेकिन बड़े अवसरों को हाथ से बिल्कुल न जाने दें।
वृश्चिक राशि वालों की शनि परीक्षा ले सकते हैं। नौकरी में समस्याएं और पद-प्रतिष्ठा पर आंच आ सकती है। ऐसे में सेहत पर ध्यान दें और अपयश से बचें।
धनु राशि वालों को यश और धन मिलेगा, लेकिन भागदौड़ काफी ज्यादा होगी। शनि आपका स्थान परिवर्तन भी जरूर कराएंगे। प्रेम और विवाह के मामलों में सावधान रहें।
मकर राशि को शुभ फल मिलेगा। आपके जीवन में बड़े बदलाव की शुरुआत होगी। शनि के कारण संपत्ति, धन और बेहतरीन करियर मिलेगा। जोड़ों के दर्द और वाणी पर विशेष ध्यान दें।
कुम्भ राशि वालों को शनि धन भी देगा और समस्याओं से राहत भी। करियर में आप बुलंदियों पर पहुंचेंगे, अचानक संपत्ति और वाहन का लाभ भी मिल सकता है।
मीन राशि वाले करियर के मामले में लाभ उठाएंगे, कई बड़े अवसर मिलेंगे। अतिविश्वास से बचें और बुजुर्गों की सलाह मानें. आगे जानिए कैसे शनि के प्रकोप से बच सकते हैं।
कुछ छोटी-छोटी बातों का ख्याल रखने से शनि की साढ़ेसाती या ढैया के बुरे परिणामों से बचा जा सकता हैं। जल्दी सोने और जल्दी उठने की आदत डालें और मांस-मदिरा से परहेज करें। नाखून और बालों की सफाई पर विशेष ध्यान दें। रोज सुबह और शाम से समय शनि मन्त्र का जाप करें। शनिवार को पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं। एक लोहे का छल्ला बाएं हाथ की मध्यमा अंगुली में पहनें। अपनी आय का कुछ हिस्सा जरूर दान करते रहें।

हूबहू सौ व पचास के नकली नोट देख रह गयी पुलिस दंग

महाराष्ट्र पुलिस ने मध्य प्रदेश के पुलिस के साथ मिलकर बीड शहर मे एक ऐसे कारखाने का भंडाफोड़ किया है जहां 100 और 50 रुपये के नोट छापने का अवैध धंधा चल रहा था। प्राप्त जानकारी के अनुसार बीड शहर में कई महीने से 100 और 50 रुपये के हुबहु नोट छापने का काम चल रहा था। जाली नोट छापने के लिए पेपर औरंगाबाद से लाया जा रहा था।

सैयद शुकूर शब्बीर नामक आरोपी को हिरासत में लिया गया है। पुलिस के मुताबिक बीड शहर के पेठ बीड थाना क्षेत्र के गांधी नगर में एक व्यक्ति 50 व 100 रुपये मूल्य की नकली नोट अवैध रूप से छपा रहा है, ऐसी जानकारी मध्य प्रदेश पुलिस मिली। उन्होंने तत्काल बीड पुलिस से संपर्क कर इसकी सूचना दी। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस अधीक्षक जी. श्रीधर इनके निर्देश पर पेठ बीड थाने के पुलिस निरीक्षक अनिल जाधव ने शेख शकूर के मकान पर छापा मारकर नकली नोट छापने की किताबें व डेढ़ लाख रुपए मूल्य के 50 व 100 के के नोट जब्त किए। पुलिस ने शेख शकूर को गिरफ्तार कर लिया है। शेख शकूर से किस-किस के संबंध हैं, पुलिस जांच में जुट गई है।

शेख शकूर बीड तहसील के नालवंडी गांव का रहने वाला है। दो साल पहले उसे एक अपने रिश्तेदार की लड़की के साथ जबरन बलात्कार के मामले में अरेस्ट किया गया था। वह औरंगाबाद के हर्सूल जेल में सजा काट रहा था। उसी दौरान शकूर की मुलाकात एक कैदी से हुई जो नकली नोट छापने के मामले में सजा काट रहा था। शकूर जब जेल से रिहा हुआ तो वह भी नकली नोट बनाने का कारोबार करने लगा। केवल आठवीं पास शकूर की करतूत से दोनों राज्यों की पुलिस सन्न रह गई है।

एक सप्ताह के भीतर मोदी ने किया दूसरी बार उत्तराखंड दौरा

प्रधानमंत्री नरेंन्द्र मोदी ने पहाड़ों की रानी मंसूरी पहुंच कर देश की सर्वोच्च प्रशासनिक सेवा के 369 प्रशिक्षुओं से मुलाकात कर संवाद कायम किया। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री मोदी दो दिन के दौरे पर मंसूरी में आए है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सात दिन के भीतर दूसरी दफा उत्तराखंड आए। इसी माह बीती 20 अक्टूबर को केदारनाथ में उन्होंने आपदा से प्रभावित क्षेत्र में नई केदारपुरी के कार्यों का शिलान्यास किया था। इस बार मोदी दो दिनी दौरे पर गुरुवार को मसूरी स्थित एलबीएसएनएए पहुंचे हैं।

मोदी इस दौरान अकादमी में छह माह के 92वें फाउंडेशन कोर्स में प्रशिक्षण ले रहे 369 प्रशिक्षु आइएएस, आइपीएस एवं आइआरएस के साथ ही अपना अधिकतर वक्त बिताएंगे। गुरुवार दोपहर करीब दो बजे उन्होंने अकादमी पहुंचते ही सबसे पहले पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री एवं लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की मूर्तियों पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके बाद उन्होंने पौधारोपण किया। परिसर में ही अकादमी के फैकल्टी सदस्यों और प्रशिक्षु अधिकारियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ फोटो खिंचवाए।

सरकार उच्च शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणी बनाने के लिए प्रतिबद्ध

राज्यपाल डॉ. कृष्ण कांत पाल, मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत व उच्च शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत ने दून विश्वविद्यालय में आयोजित प्रथम ‘‘इंटर यूनिवर्सिटी स्पोर्ट्स मीट’’ का शुभारम्भ किया। 26 अक्टूबर से 29 अक्टूबर तक आयोजित स्पोर्ट्स मीट के लिए आयोजक दून विश्वविद्यालय को बधाई देते हुए राज्यपाल ने कहा कि राज्य के विश्वविद्यालयों को क्वालिटी एजुकेशन, उच्च स्तरीय व मौलिक शोध व स्पोर्ट्स का सेंटर बनाने के लिए अनेक पहल की गई हैं। प्रयास किया जा रहा है कि विश्वविद्यालयों के छात्रछात्राओं के बहुमुखी व्यक्तित्व का विकास हो। राज्यपाल ने कहा कि अभी पहला आयोजन होने के कारण इस प्रतियोगिता में कम इवेंट्स शामिल की गई हैं। अगले वर्षों में इसमें और भी खेलों को शामिल किया जाएगा। राज्य में पहली बार ‘‘इंटर यूनिवर्सिटी स्पोर्ट्स मीट’’ आयोजित की गई है। शुरूआत छोटी जरूर है परंतु मजबूत शुरूआत है। प्रतिभागी खिलाड़ियों के जोश में कोई कमी नहीं दिख रही है। राज्यपाल ने कार्यक्रम में उपस्थित मुख्यमंत्री व उच्च शिक्षा मंत्री को प्रदेश में अंतर महाविद्यालय 2020 क्रिकेट प्रतियोगिता कराए जाने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि इससे बड़ी संख्या में राज्य की प्रतिभाएं उभर कर सामने आएंगी। राज्यपाल ने कहा कि शिक्षा व खेल एक दूसरे के पूरक हैं। चरित्र निर्माण में जितना महत्व शिक्षा का है उतना ही महत्व खेलों का भी है। राज्यपाल ने ओलम्पियन मनीष रावत का उदाहरण देते हुए कहा कि खिलाड़ी भी युवाओ के लिए रोल मॉडल हैं। उŸाराखण्ड की भौगोलिक स्थितियां खिलाड़ियों के स्टेमिना केा बढ़ाने में सहायक है। राज्य में खेल प्रतिभाओं की कमी नहीं है। इन्हें समुचित प्लेटफार्म उपलब्ध करवाए जाने की जरूरत है। इसके लिए सरकार प्रयासरत भी है। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने प्रथम अंतर विश्वविद्यालय खेल प्रतियोगिता के आयोजन के लिए राज्यपाल डॉ. के.के.पाल की पहल पर आभार व्यक्त करते हुए प्रतियोगिता के लिए 11 लाख रूपए दिए जाने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि खेलों से शारीरिक और मानसिक विकास ही नहीं बल्कि टीम भावना और सामूहिकता की भावना का विकास भी होता है। यह खेल प्रतियोगिता, युवा छात्र छात्राओं के लिए एक बढ़िया अवसर है। खिलाड़ियों द्वारा किए गए मार्च पास्ट की सराहना करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि मार्च पास्ट में खिलाड़ियों के जज्बे और रुचि की झलक दिखाई दी। उन्होंने आशा व्यक्त की कि युवा खिलाड़ी आज विश्वविद्यालय, कल प्रदेश और फिर देश के लिए खेलेंगे। कार्यक्रम में उच्च शिक्षा राज्य मंत्री धन सिंह रावत ने कहा कि सरकार प्रदेश को उच्च शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणी बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने उच्च शिक्षा के क्षेत्र में उठाए जा रहे विभिन्न कदमों की जानकारी देते हुए कहा कि सभी विश्वविद्यालय अखिल भारतीय स्वच्छता रैंकिंग में अनिवार्य रूप से प्रतिभाग करें। इसी प्रकार सभी विश्वविद्यालय और महाविद्यालय एनएसी रैंकिंग हेतु भी अनिवार्य रूप से आवेदन करें। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड ऐसा पहला स्टेट हो गया है जहां सभी डिग्री कॉलेज में शतप्रतिशत प्राचार्यों की तैनाती है। अब सरकार ने प्राचार्यों को असिस्टेंट प्रोफेसर की कमी की स्थिति में गेस्ट फैकल्टी की सेवाएं लेने का अधिकार भी दे दिया है। सरकार उच्च शिक्षा की गुणवत्ता पर पूरा ध्यान दे रही है। इससे पूर्व राज्यपाल और मुख्यमंत्री ने सभी प्रतिभागी टीमों के खिलाड़ियों के मार्च पास्ट की सलामी ली। उन्होंने रंग बिरंगे गुब्बारे हवा में छोड़कर प्रतियोगिता का औपचारिक उद्घाटन किया। राज्यपाल और मुख्यमंत्री ने प्रतियोगिता के पहले उद्घाटन मैच के खिलाड़ियों से मुलाकात कर उन्हें शुभकामनाएं दी।

सीएम ने आईपीएस की कविता “ख्वाबों के खत“ का किया विमोचन

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने मुख्यमंत्री आवास स्थित जनता मिलन हॉल में आयोजित एक कार्यक्रम में तृप्ति भट्ट द्वारा रचित “ख्वाबों के खत“ नामक कविता संकलन का विमोचन किया। इस अवसर पर प्रख्यात कवि डॉ.हरिओम पंवार, प्रख्यात अदाकारा और कलाकार शबाना आजमी, कवि असीम शुक्ल और प्रदेश के पुलिस महानिदेशक अनिल कुमार रतूड़ी भी उपस्थित थे। ज्ञातव्य है कि तृप्ति भट्ट एक आईपीएस अधिकारी हैं और वर्तमान में चमोली जनपद की पुलिस अधीक्षक भी हैं। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने तृप्ति भट्ट की सराहना की कि एक पुलिस अधिकारी के रूप में अपने व्यस्त दिनचर्या के बीच भी वे लेखन और कला के लिए समय निकालती हैं। उन्होंने कहा कि लेखन सदैव ही मानवीय संवेदनाओं को स्पर्श करता है और एक पुलिस अधिकारी के रूप में लेखन करना यह दर्शाता है कि अधिकारी एक संवेदनशील अधिकारी है। मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई द्वारा पुस्तक विमोचन के कुछ संस्मरणों को भी सुनाया। डॉ.हरिओम पंवार ने कहा कि यदि पुलिस अधिकारी एक कवि है तो उसके हाथों कभी अन्याय नहीं हो सकता और ऐसा अधिकारी कभी किसी दुर्बल को नहीं सताएगा। शबाना आजमी ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए भट्ट के कविता लेखन की सराहना की और जिस प्रकार से कविता संकलन में विभिन्न विषयों को स्पर्श किया गया है उसकी प्रशंसा भी की। पुलिस महानिदेशक ने कहा कि पुलिस अधिकारियों को उनके कार्य क्षेत्र की एकरसता से बचाने और अपनी आत्मा पर से धूल झाड़ने के लिए कला से बेहतर कोई मौका नहीं मिलता। उन्होंने एसपी तृप्ति भट्ट की प्रशंसा की थी। उन्होंने अपने कैरियर के बहुत प्रारंभिक चरण में ही अपने कार्य के साथसाथ लेखन के क्षेत्र को भी चुना है।

जल्द भारतीय वायुसेना को मिल सकते है अमेरिकी ड्रोन, ट्रंप सरकार ले सकती है फैसला

खबर आई है कि अमेरिका भारतीय वायु सेना को ड्रोन देने पर विचार कर रहा है। जिससे भारत इन ड्रोन्स को अपनी वायु सेना में शामिल कर सकेगा। अमेरिका के एक शीर्ष अधिकारी ने बताया है कि ट्रंप सरकार भारत के हथियारों से लैस ड्रोन की मांग पर गहराई से विचार कर रहा है।

भारतीय वायु सेना का मानना है कि इन ड्रोन्स के मिलने से उसकी रक्षा क्षमता काफी मजबूत हो जाएगी। इसी साल की शुरूआत में भारतीय वायु सेना ने अमेरिकी सरकार के सामने जनरल एटमिक्स प्रीडेटर सी एवेंजर्स एयरक्राफ्ट खरीदने का प्रस्ताव रखा था। यह सर्वविदित है कि भारतीय वायुसेना को लगभग 80 से 100 इकाइयों की आवश्यकता है और यह सौदा लगभग 8 अरब डॉलर का होगा। इसी वर्ष 26 जून को व्हाइट हाउस में पीएम मोदी और ट्रंप के बीच हुई सफल बैठक के बाद से ही ट्रंप प्रशासन इस डील पर गंभीरता से विचार कर रहा है।

इस मुलाकात के बाद अमेरिका ने भारत को 22 अनआर्मड गार्डियन ड्रोन बेचने की घोषणा की थी, जो हिंद महासागर क्षेत्र में निगरानी करने की भारतीय नौसेना की क्षमताओं में वृद्धि करेगी। वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने बताया, श्विदेश मंत्रालय के संदर्भ में खरीद पर जल्द निर्णय हो सकता है, लेकिन हमें यह भी देखना होगा कि कैसे हमारे रिश्ते और मजबूत तथा गहरे हो सकते हैं। आपको बता दें कि पूर्ववर्ती ओबामा सरकार ने भारत को मुख्य रक्षा साझीदार का दर्जा दिया था और ट्रंप प्रशासन भी भारतीय अनुरोध को आगे बढ़ा रहा है।

पिछले हफ्ते ही अमेरिकी रक्षा मंत्री रेक्स टिलरसन ने अपने बयान में कहा था कि डोनॉल्ड ट्रंप प्रशासन भारत और अमेरिका के बीच साझेदारी को और मजबूत बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। टिलरसन ने चीन और पाकिस्तान को आड़े हाथ लेते हुए कहा था कि पेइचिंग की उकसावे वाली कार्रवाई उन अंतरराष्ट्रीय कानूनों व तरीकों के खिलाफ है जिनके भारत और अमेरिका पक्षधर हैं और साथ ही स्पष्ट किया था कि वॉशिंगटन यह आशा करता है कि पाकिस्तान अपनी सीमा के अंदर सक्रिय आतंकवादी समूहों के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई करेगा।

स्मृति दिवस पर सीएम ने दी शहीद पुलिसकर्मियों को श्रद्धांजलि

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने शनिवार को पुलिस लाईन में पुलिस स्मृति दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में पुलिस कार्मिकों के लिए और अधिक आवासीय भवनों के निर्माण की घोषणा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि पुलिस बल का मनोबल और उनकी कार्य क्षमता बनाए रखने के लिए यह आवश्यक है कि उन्हें अच्छी आवासीय व्यवस्था उपलब्ध हो। भारत सरकार से अनुरोध करने के साथ-साथ राज्य सरकार के बजट से भी पुलिस कार्मिकों की आवासीय व्यवस्था को पूरा करने के लिए हर संभव प्रयास किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में पुलिसकर्मियों की आवासीय व्यवस्था 18 प्रतिशत है जबकि राष्ट्रीय औसत 25 प्रतिशत है, अतः राज्य सरकार पुलिसकर्मियों की आवासीय व्यवस्था में सुधार करने हेतु प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री ने हरिद्वार में गोवंश तस्करी के बढ़ते मामलों की शिकायत पर पुलिस महानिदेशक को हरिद्वार के लिए एक विशेष स्क्वायड गठित करने का निर्देश दिया। पुलिस स्मृति दिवस के अवसर पर शहीद पुलिस जवानों को श्रद्धांजलि देने पहुंचे मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने शहीद स्मारक पर पुष्पचक्र अर्पित किया और वीर शहीदों को श्रद्धा सुमन अर्पित किए। मुख्यमंत्री ने वीर शहीदों के परिजनों के प्रति भी अपनी संवेदनाएं व्यक्त की। मुख्यमंत्री ने स्मृति दिवस के अवसर पर आयोजित परेड की सलामी भी ली। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इस वर्ष पुलिसकर्मियों के कल्याणार्थ सरकार ने कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। पुलिस विभाग की कार्य क्षमता को बढ़ाने और कंपल्सिव करप्शन को जड़ से समाप्त करने के लिए थाना स्तर पर विभिन्न कामों हेतु 03 करोड़ की धनराशि का स्पेशल फंड बनाया गया है। पुलिस विभाग के कार्मिकों को विशिष्ट वीरता का प्रदर्शन करते समय वीरगति प्राप्त होने पर पूर्व में दी जाने वाली राशि को रुपए 10 लाख से बढ़ाकर रुपए 15 लाख कर दिया गया है। हेड कांस्टेबल और कांस्टेबल स्तर के समस्त पुलिसकर्मियों को दिया जाने वाला मोटर साईकल भत्ता रू.400 से बढ़ाकर रू.1200 प्रतिमाह करने की स्वीकृति दी गई है। पुलिस प्रशिक्षण केंद्र, नरेंद्र नगर और सशस्त्र प्रशिक्षण केंद्र, हरिद्वार में नियुक्त प्रशिक्षकों को मूल वेतन का 15 प्रतिशत प्रशिक्षण भत्ता अनुमन्य किया गया है। कानून व्यवस्था को सुदृढ़ करने और मादक पदार्थों की रोकथाम हेतु 02 नए थाने और एक रिपोर्टिंग पुलिस चौकी की स्थापना की जा रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पुलिस बल “सभी को न्याय“ और “कानून के समक्ष समानता“ के आधार पर काम करें। सभी पुलिसकर्मी, पुलिस विभाग की ऐसी छवि बनाएं कि वर्दी में खड़े किसी कर्मी को देख पर्यटक और जनता अपने को सुरक्षित महसूस करें। अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने नक्सलवाद और आतंकवाद की चुनौतियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत में यह खतरा कुछ संगठित आतंकवादी संगठनों से है जिनसे निपटने के लिए पुलिस विभाग को हर समय सतर्क रहने की आवश्यकता है। मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में गत वर्ष संपूर्ण भारत में कुल 379 शहीद पुलिस कर्मियों का भाव पूर्ण स्मरण करते हुए उन्हें अपनी श्रद्धांजलि दी। इन शहीद पुलिसकर्मियों में उत्तराखंड के एक निरीक्षक और 06 कॉन्स्टेबल भी सम्मिलित हैं। उत्तराखंड पुलिस के जिन 07 पुलिस कर्मचारियों-अधिकारियों ने ड्यूटी के दौरान अपने प्राणों की आहुति दी है उनमें कॉन्स्टेबल नरेंद्र सिंह, कांस्टेबल कलम सिंह, कॉन्स्टेबल नरेंद्र कुमार, कांस्टेबल रविंद्र सिंह कुंवर, कॉन्स्टेबल सत्येंद्र सिंह नेगी, कॉन्स्टेबल नीतीश कुमार और निरीक्षक राम कुमार जुयाल शामिल है। पुलिस महानिदेशक अनिल कुमार रतूड़ी ने बताया कि देश में शहीद हुए अधिकांश पुलिसकर्मी नक्सली, आतंकवादी और उग्रवादी घटनाओं में शहीद हुए हैं। राज्य सरकार द्वारा पुलिस कर्मियों और उनके परिवारों के लिए कई कल्याणकारी योजनाएं चलाई जा रही हैं। इस वर्ष चिकित्सा प्रतिपूर्ति के अंतर्गत कुल 392 कार्मिकों के लिए एक करोड़ 83 लाख की धनराशि का भुगतान किया गया। व्यक्तिगत बीमा योजना के अंतर्गत मृत पुलिसकर्मिकों के आश्रितों के लिए रु. 12.5 लाख का भुगतान किया गया। 29 मृतक आश्रितों को कांस्टेबल और 3 मृतक आश्रितों को चतुर्थ श्रेणी पद पर नियुक्त किया गया। कार्यक्रम में उपस्थित सभी पुलिस अधिकारियों और अतिथियों ने शहीद स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित कर शहीदों को श्रद्धांजलि दी।

जाने, गूगल किसकी जयंती मना रहा है?

उत्तराखंड के नैन सिंह को गूगल ने श्रद्धांजलि दी है। गूगल ने डूडल के जरिये उनके कार्य को सराह रहा है। रायल ज्योग्रेफिकल सोसायटी एवं सर्वे ऑफ इंडिया के लिए पं. नैन सिंह रावत भीष्म पितामह के रूप में माने जाते हैं। कहते हैं नैन सिंह रावत ही दुनिया के पहले शख्स थे जिन्होंने लहासा की समुद्र तल से ऊंचाई कितनी है, बताई। उन्होंने अक्षांश और देशांतर क्या हैं, बताया। इस दौरान करीब 800 किमी तक पैदल यात्रा की और दुनिया को ये भी बताया कि ब्रह्मपुत्र और स्वांग एक ही नदी है।

भारत चीन सीमा पर स्थित मुनस्यारी तहसील के अंतिम गांव मिलम निवासी पं. नैन सिंह का जन्म 21 अक्टूबर 1830 को अमर सिंह मिलव्वाल के घर हुआ था। यह परिवार सामान्य परिवार था। अलबत्ता नैन सिंह के दादा धाम सिंह रावत को कुमाऊं के राजा दीप चंद ने 1735 में गोलमा और कोटल गांव जागीर में बख्शे थे। पं. नैन सिंह रावत की शिक्षा प्राथमिक स्तर तक ही हुई थी। बाद में इसी विद्यालय में वह शिक्षक हो गए थे। शिक्षक बनने पर उन्हें लोगों ने पंडित की उपाधि दे दी। उन्हें इसी नाम से जाना जाता है। इनके चचेरे भाई स्व. किशन सिंह रावत भी शिक्षक थे। दोनों भाइयों को पंडित की उपाधि मिली थी।
पं. नैन सिंह रावत ने अपने जीवन में उपलब्धि वर्ष 1955-56 से प्रारंभ की। लाघ -इट-वाइट बंधुओं के साथ दुभाषिए तथा सर्वेक्षक के रूप में तुर्किस्तान की यात्रा कर चुके थे। तिब्बती भाषा का ज्ञान और इनकी कार्यकुशलता से प्रभावित जर्मन बंधु इन्हें अपने साथ यूरोप ले जाना चाहते थे। नैन सिंह रावत रावलपिंडी तक तो पहुंचे परंतु अपनी माटी की याद आते ही वापस लौट आए। वर्ष 1863 में उन्हें देहरादून बुलाया, जहां पर सुपरिडेंटेंट कर्नल जेटी वाकर द्वारा ग्रेट ट्रिग्नोमेट्रिक सर्वे में एक अन्वेषक के रूप में की गई और उन्हें भारतीय सीमा के बाहरी क्षेत्रों में कार्य करने के लिए टापोग्राफिकल आवजर्वेशन का प्रशिक्षण दिया गया।
भ्रमण करने का था शौक
बिट्रिश भारत के दौरान अंग्रेजों ने गुप्त रूप से तिब्बत और रूस के दक्षिणी भाग का सर्वेक्षण की योजना बनाई। इस कार्य के लिए अंग्रेजों को पं. नैन सिंह रावत का नाम सुझाया। अंग्रेजों ने उन्हें नाप जोख का कार्य सौंपा। उन्हें ब्रह्मपुत्र घाटी से लेकर यारकंद इलाके तक की नाप जोख करनी थी। इस कार्य के लिए उनके भाई किशन सिंह रावत और पांच लोग शामिल किए गए। यह कार्य गुप्त होने से नाप जोख खुले आम नहीं कर सकते थे।

पंडित नैन सिंह द्वारा वर्ष 1865 से 1885 के मध्य लिखे गए यात्रा वर्णन में हिमालय तिब्बत तथा मध्य एशिया की तत्कालीन भाषा के साथ अनेक एशिसाई समाजों की दुलर्भ झलक मिलती है। इस दौरान उन्होंने 1865-66 में काठमांडू-ल्हासा-मानसरोवर, 1967 सतलज सिंधु उद्गम व थेक जालुंग, 1870 डगलस फोरसिथ का पहला यारकंद-काशगर मिशन, 1873 डगलस फोरसिथ का दूसरा यारकंद-काशगर मिशन, 1874-75 लेह-ल्हासा, तवांग थी।
पं. नैन सिंह रावत द्वारा तीन पुस्तकें ठोक-ज्यालुंग की यात्रा, यारकंद यात्रा और अक्षांस दर्पण पुस्तकें 1871 से 73 के मध्य प्रकाशित हुई थी। बताया जाता है कि उन्होंने अपनी जीवनी भी लिखी थी, लेकिन वह खो गई। तिब्बत की राजधानी ल्हासा का इसमें सुंदर वर्णन था। वर्ष 1890 में उनका देहांत हो गया।
कम्पेनियन इंडियन इम्पायर अवार्ड से हुए थे सम्मानित
1200 मील पैदल चल कर सर्वे करने वाले पं. नैन सिंह रावत को अंग्रेजी हुकूमत ने कोलकाता में सीआईएस (काम्पेनियन इंडियर अवार्ड) से सम्मानित किया था। तब एक भारतीय को अंग्रेजों द्वारा इतने बड़े सम्मान से सम्मानित किए जाने पर कोलकाता में जश्न मना था। भारतीयों ने इसका स्वागत अपने घरों में घी के दीये जलाकर किया था।
आज गूगल नैन सिंह की जयंती मना रहा है
सर्च इंजन गूगल ने नैन सिंह रावत का डूडल बनाया है, जिन्हें बिना किसी आधुनिक उपकरण के पूरे तिब्बत का नक्शा तैयार करने का श्रेय जाता है। कहा जाता है कि अंग्रेजी हुकूमत के लोग भी उनका नाम पूरे सम्मान के साथ लेते थे। उस समय तिबब्त में किसी विदेशी शख्स के जाने पर सख्त मनाही थी। अगर कोई चोरी छिपे तिब्बत पहुंच भी जाए तो पकड़े जाने पर उसे मौत तक की सजा दी सकती थी। ऐसे में स्थानीय निवासी नैन सिंह रावत अपने भाई के साथ रस्सी, थर्मामीटर और कंपस लेकर पूरा तिब्बत नाप आए। दरअसल 19वीं शताब्दी में अंग्रेज भारत का नक्शा तैयार कर रहे थे लेकिन तिब्बत का नक्शा बनाने में उन्हें परेशानी आ रही थी। तब उन्होंने किसी भारतीय नागरिक को ही वहां भेजने की योजना बनाई। जिसपर साल 1863 में अंग्रेज सरकार को दो ऐसे लोग मिल गए जो तिब्बत जान के लिए तैयार हो गए।