बुलंदशहर में कल्याण सिंह की निकली अंतिम यात्रा, सीएम धामी भी हुए सम्मिलित


मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आज नरोरा, बुलंदशहर जाकर उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री, राजस्थान के निवर्तमान राज्यपाल कल्याण सिंह के अंतिम संस्कार में शामिल होकर उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि स्व. कल्याण सिंह योग्य प्रशासक एवं कुशल राजनीतिज्ञ थे, वे हम सभी के लिये हमेशा प्रेरणास्रोत रहेंगे।

मुख्यमंत्री के साथ ही केन्द्रीय रक्षा एवं पर्यटन राज्य मंत्री अजय भट्ट, कैबिनेट मंत्री डॉ. धन सिंह रावत, विधायक एवं भाजपा प्रदेश अक्ष्यक्ष मदन कौशिक ने भी स्व. कल्याण सिंह को श्रद्धांजलि अर्पित की।

11 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित है इंजीनियरिंग का नायाब नमूना गरतांग गली की सीढ़ियां

भारत-तिब्बत व्यापार की गवाह रही उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले की नेलांग घाटी में स्थित ऐतिहासिक गरतांग गली की सीढ़ियों का देश-विदेश के पर्यटक दीदार करने लगे हैं। गरतांग गली की सीढ़ियों का पुनर्निर्माण कार्य जुलाई माह में पूरा किया जा चुका है। इसके बाद से ही ऐसे में रोमांचकारी जगहों पर जाने के शौकीन पर्यटकों के लिए यह जगह एक शानदार विकल्प है।

गरतांग गली की करीब 150 मीटर लंबी सीढ़ियां अब नए रंग में नजर आने लगी हैं। करीब 11 हजार फीट की ऊंचाई पर बनी गरतांग गली की सीढ़ियां इंजीनियरिंग का नायाब नमूना है। इंसान की ऐसी कारीगरी और हिम्मत की मिसाल देश के किसी भी अन्य हिस्से में देखने के लिए नहीं मिलेगी।

1962 भारत-चीन युद्ध के बाद इस लकड़ी की सीढ़ीनुमा पुल को बंद कर दिया गया था, अब करीब 59 सालों बाद वह दोबारा पर्यटकों के लिए खोला गया है। कोरोना गाइडलाइन और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए एक बार में दस ही लोगों को पुल में भेजा जा रहा है। पेशावर से आए पठानों ने 150 साल पहले इस पुल का निर्माण किया था। आजादी से पहले तिब्बत के साथ व्यापार के लिए उत्तकाशी में नेलांग वैली होते हुए तिब्बत ट्रैक बनाया गया था। यह ट्रैक भैरोंघाटी के नजदीक खड़ी चट्टान वाले हिस्से में लोहे की रॉड गाड़कर और उसके ऊपर लकड़ी बिछाकर रास्ता तैयार किया था। इसके जरिए ऊन, चमड़े से बने कपड़े और नमक लेकर तिब्बत से उत्तरकाशी के बाड़ाहाट पहुंचाया जाता था। इस पुल से नेलांग घाटी का रोमांचक दृश्य दिखाई देता है। यह क्षेत्र वनस्पति और वन्यजीवों के लिहाज से काफी समृद्ध है और यहां दुर्लभ पशु जैसे हिम तेंदुआ और ब्लू शीप यानी भरल रहते हैं।

सामरिक दृष्टि से संवेदनशील है नेलांग घाटी
नेलांग घाटी सामरिक दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्र है। गरतांग गली भैरव घाटी से नेलांग को जोड़ने वाले पैदल मार्ग पर जाड़ गंगा घाटी में मौजूद है। उत्तरकाशी जिले की नेलांग घाटी चीन सीमा से लगी है। सीमा पर भारत की सुमला, मंडी, नीला पानी, त्रिपानी, पीडीए और जादूंग अंतिम चौकियां हैं।

वहीं, सतपाल महाराज पर्यटन मंत्री उत्तराखंड कहा ने भारत सरकार ने पर्यटकों की आवाजाही पर लगाई थी रोक। वर्ष 1962 में भारत-चीन युद्ध के बाद बने हालात को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार ने उत्तरकाशी के इनर लाइन क्षेत्र में पर्यटकों की आवाजाही पर प्रतिबंध लगा दिया था। यहां के ग्रामीणों को एक निश्चित प्रक्रिया पूरी करने के बाद साल में एक ही बार पूजा अर्चना के लिए इजाजत दी जाती रही है। इसके बाद देश भर के पर्यटकों के लिए साल 2015 से नेलांग घाटी तक जाने के लिए गृह मंत्रालय भारत सरकार की ओर से इजाजत दी गई।

पर्यटन सचिव ने बताया कि दिलीप जावलकर उत्तराखंड धरोहर संरक्षण के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। इसके तहत नेलांग घाटी में स्थित ऐतिहासिक गरतांग गली की सीढ़ियों का 64 लाख रुपये की लागत से पुनर्निर्माण कार्य पूरा करने के बाद पर्यटकों के लिए खोल दिया गया है। गरतांग गली के खुलने के बाद स्थानीय लोगों और साहसिक पर्यटन से जुड़े लोगों को फायदा मिल रहा है। ट्रैकिंग के शौकीनों के लिए यह एक मुख्य केंद्र बन रहा है।

वहीं, मयूर दीक्षित, जिलाधिकारी, उत्तरकाशी ने कहा के पुनर्निर्माण कार्यों में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। पुरानी शैली में पुननिर्माण कार्यों को जुलाई माह में पूरा कर लिया गया था। कोरोना नियमों और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए एक बार में दस पर्यटकों को ही प्रवेश दिया जा रहा है।

नेलांग घाटी के आसपास-हर्षिल
हर्षिल, हिमालय की तराई में बसा एक गांव, जो अपनी प्राकृतिक सुंदरता से पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है। यहां से गंगोत्री की दूरी मात्र 21 किलो मीटर ही बचती है, जो कि हिन्दुओं के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक है। गंगोत्री तक रास्ता अपने आप में इतना मनमोहक है कि एक बार से आपका मन नहीं भरेगा।

केदारताल
केदारताल उत्तराखंड में सबसे खूबसूरत झीलों में से एक ताल है। यह गंगोत्री से 18 किमी की दूरी पर स्थित, गढ़वाल हिमालय में दूर केदार ताल निश्चित रूप से साहसिक और प्रकृति प्रेमियों के लिए एक आदर्श स्थान है। केदारताल से केदारगंगा निकलती है जो भागीरथी की एक सहायक नदी है।

अफगानिस्तान में उत्तराखंड के लोग भी फंसे, सरकार हुई सक्रिय

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि अफगानिस्तान में उत्तराखण्ड के जो लोग फंसे हुए हैं, उन्हें वापिस सकुशल लाने के लिए राज्य सरकार हर सम्भव प्रयास कर रही है। ये लोग जल्द ही सकुशल अपने घर वापस आ जाएंगे।
मुख्यमंत्री ने आज ही इस संबंध में भारत सरकार के विदेश मंत्रालय में भी बात कर आवश्यक कार्यवाही करने का अनुरोध किया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हम केन्द्र सरकार के लगातार सम्पर्क में हैं। केन्द्र सरकार द्वारा अफगानिस्तान से प्रत्येक भारतीय की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित की जा रही है।

इंडियन आइडल 12 के विजेता बने पवनदीप राजन, उत्तराखंड में खुशी की लहर

इंडियन आइडल 12 को अपना फाइनली विनर मिल गया है। इस सीजन की जीत का सेहरा पवनदीप राजन के सिर पर बंधा है। वहीं, दूसरे नंबर पर अरुणिता कांजीलाल रही हैं। इंडियन आइडल 12 का फिनाले रविवार को दोपहर 12 बजे से रात 12 बजे चला। इस सीजन का विनर मिलने से पहले कई शानदार परफॉर्मेंस देखने को मिली।
पवनदीप राजन को इंडियन आइडल 12 की ट्रॉफी के साथ 25 लाख रुपये का चेक और एक कार इनाम के तौर पर मिली है। पवनदीप राजन के पहले और अरुणिता कांजीलाल के दूसरे नंबर के अलावा सायली कांबले, मोहम्मद दानिश, निहाल तारो और शनमुखप्रिया क्रमशः तीसरे, चौथे, पांचवे और छठे स्थान पर रहे।
गौरतलब है कि पवनदीप राजन, अरुणिता कांजीलाल, सायली कांबले, मोहम्मद दानिश, शनमुखप्रिया और निहाल तारो इंडियन आइडल 12 फिनाले के छह कंटेस्टेंट थे। शो में हिमेश रेशमिया, सोनू कक्कड़ और अनु मलिक जज किया। जबकि फिनाले को आदित्य नारायण के अलावा जय भानुशाली ने होस्ट किया।
सिंगिंग रियलिटी शो इंडियन आइडल का 12वां सीजन खत्म हो चुका है। शो के फिनाले में विनर की घोषणा से पहले जावेद अली, मनोज मुंतशिर, उदित नारायण और कुमार सानू और अल्का याग्निक जैसे कई दिग्गज शामिल हुए।

मुख्यमंत्री ने वंदना को 25 लाख रूपये का चेक और तीलू रौतेली पुरस्कार से किया सम्मानित

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भारतीय महिला हॉकी खिलाड़ी वन्दना कटारिया के रोशनाबाद, हरिद्वार स्थित आवास पर जाकर टोक्यो ओलंपिक में वंदना के शानदार प्रदर्शन पर उन्हें बधाई दी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वन्दना कटारिया को 25 लाख रूपये का चेक प्रदान किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने वन्दना कटारिया को तीलू रौतेली पुरस्कार से भी सम्मानित किया। इसके तहत उन्हें 31 हजार रूपये का चेक एवं प्रशस्ति पत्र प्रदान किया। वंदना कटारिया को महिला सशक्तीकरण के तहत ‘‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान’’ का ब्रांड एम्बेसडर भी बनाया गया है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि वन्दना कटारिया ने टोक्यो ओलंपिक में अपने शानदार प्रदर्शन से प्रदेश का मान-सम्मान बढ़ाया है। उत्तराखण्ड की बेटी ने एक मैच में हैट्रिक बनाकर अपनी अलग पहचान बनाई। उन्होंने वन्दना को आगे भी इसी मनोबल से खेलने के लिए प्रेरित किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि खिलाड़ियों को अधिक से अधिक सुविधाएं मिल सके, इसके लिए राज्य में नई खेल नीति बनाई जा रही है। उन्होंने वंदना कटारिया के उज्ज्वल भविष्य की कामना की है।
इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री डॉ. धन सिंह रावत, यतीश्वरानन्द, विधायक आदेश चौहान, देशराज कर्णवाल, सचिव हरि चन्द्र सेमवाल एवं वंदना कटारिया के परिवारजन मौजूद थे।

ओलंपिक में 13 साल बाद भारत को मिला गोल्ड

भारतीय जैवलिन थ्रोअर नीरज चोपड़ा ने टोक्यो ओलंपिक के जैवलिन थ्रो फाइनल में इतिहास रच दिया है। उन्होंने टोक्यो ओलंपिक में गोल्ड मेडल हासिल किया है। नीरज ने 87.58 की सर्वश्रेष्ठ दूरी तय करते हुए गोल्ड पर कब्जा किया। क्वालिफिकेशन राउंड में भी नीरज अपने ग्रुप में टॉप पर रहे थे। बता दें कि 2008 बीजिंग ओलंपिक के बाद ये भारत का पहला गोल्ड मेडल है।

नीरज ने रचा इतिहास
जैवलिन थ्रो के फाइनल में नीरज चोपड़ा शुरुआत से ही सबसे आगे रहे। उन्होंने अपनी पहली ही कोशिश में 87.03 मीटर की दूरी तय की है। वहीं दूसरी बार में उन्होंने 87.58 की दूरी तय करी। इसी के साथ उन्होंने अपने क्वालिफिकेशन रिकॉर्ड से भी ज्यादा दूर भाला फेंका है। जैवलिन थ्रो में ये भारत का अब तक का सबसे पहला मेडल है। इतना ही नहीं एथलेटिक्स में भी ये भारत का पहला ही मेडल है।

13 साल बाद मिला गोल्ड
ओलंपिक खेलों में ये भारत का 13 साल बाद पहला गोल्ड मेडल है। नीरज चोपड़ा से पहले बीजिंग ओलंपिक में शूटिंग में अभिनव बिंद्रा ने गोल्ड मेडल जीता था। ये ओलंपिक में भारत का कुल दूसरा व्यक्तिगत गोल्ड है। इससे पहले भारत ने हॉकी में 8 गोल्ड मेडल जीते हैं।

पूरे देश को थी गोल्ड की उम्मीद
नीरज चोपड़ा से पूरे देश को आज गोल्ड मेडल की उम्मीद थी और वो सबकी उम्मीदों पर खरे उतरे। ऐसा इसलिए है क्योंकि उन्होंने क्वालिफिकेशन राउंड में 86.65 की दूरी तय करते हुए पहला नंबर हासिल किया था। नीरज भारत को टोक्यो में पहला गोल्ड मेडल जितवाने के सबसे बड़े दावेदार थे।

अब तक भारत के 7 मेडल
टोक्यो ओलंपिक में भारत अब 1 गोल्ड 2 सिल्वर और 4 कांस्य सहित कुल 6 मेडल जीत चुका है। नीरज चोपड़ा के अलावा भारत की ओर से मीराबाई चानू (वेट लिफ्टिंग) और रवि दहिया (कुश्ती) ने सिल्वर मेडल जीता है। वहीं पीवी सिंधु, बजरंग पूनिया, लवलीना और भारतीय हॉकी टीम ने भारत के लिए ब्रॉन्ज जीता।

वंदना को राज्य सरकार देगी 25 लाख और तीलू रौतेली पुरस्कार

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वर्चुअल माध्यम से टोक्यो ओलंपिक में प्रतिभाग करने वाली भारतीय हॉकी खिलाड़ी वंदना कटारिया से बात कर शानदार प्रदर्शन के लिए वंदना एवं महिला हॉकी टीम में प्रतिभाग करने वाली सभी खिलाड़ियों को बधाई दी। उन्होंने सभी खिलाड़ियों को मनोबल बनाए रखने को कहा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वंदना कटारिया के शानदार प्रदर्शन से प्रदेश का मान सम्मान बढ़ा है। मुख्यमंत्री ने वंदना को टोक्यो से वापस आते ही मुख्यमंत्री आवास में मिलने हेतु आमंत्रित किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि खेलों को प्रोत्साहित करने के लिए राज्य में नई खेल नीति बनाई जा रही है। जिसमें विभिन्न खेलों में प्रतिभाग करने वाले खिलाड़ियों को हर संभव सुविधा दी जाएगी।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भारतीय महिला हॉकी टीम की खिलाङी वंदना कटारिया को 25 लाख रुपए दिये जाने की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि वंदना कटारिया को तीलू रोतेली पुरस्कार से भी सम्मानित किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने वंदना कटारिया के भाई सौरभ कटारिया से भी फोन से वार्ता कर वंदना के शानदार प्रदर्शन पर बधाई दी।
भारतीय महिला हॉकी खिलाड़ी वंदना कटारिया ने उनके उत्साह वर्धन पर मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर सचिव हरि चंद्र सेमवाल भी उपस्थित थे।

अब मेजर ध्यानचंद के नाम से जाना जायेगा खेल का सबसे बड़ा सम्मान, पीएम ने की घोषणा

भारत में खेल के क्षेत्र में दिया जाने वाले सबसे बड़े सम्मान राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार का नाम अब हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद के नाम पर कर दिया गया है। इस बात की जानकारी खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट करके दी है। पीएम मोदी ने कहा कि लोगों की भावनाओं को देखते हुए इस अवार्ड का नाम अब मेजर ध्यानचंद के नाम पर किया जा रहा है।

पीएम मोदी ने क्या ट्वीट किया?

पीएम मोदी ने कहा है, देश को गर्वित कर देने वाले पलों के बीच अनेक देशवासियों का ये आग्रह भी सामने आया है कि खेल रत्न पुरस्कार का नाम मेजर ध्यानचंद जी को समर्पित किया जाए। लोगों की भावनाओं को देखते हुए इसका नाम अब मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार किया जा रहा है। जय हिंद

ओलंपिक्स में हॉकी खिलाड़ियों का प्रदर्शन आने वाली पीढ़ियों के लिए बहुत बड़ी प्रेरणा- मोदी

एक अन्य ट्वीट में पीएम मोदी ने कहा, ओलंपिक खेलों में भारतीय खिलाड़ियों के शानदार प्रयासों से हम सभी अभिभूत हैं। विशेषकर हॉकी में हमारे बेटे-बेटियों ने जो इच्छाशक्ति दिखाई है। जीत के प्रति जो ललक दिखाई है, वो वर्तमान और आने वाली पीढ़ियों के लिए बहुत बड़ी प्रेरणा है।

खेल रत्न का इतिहास

इस अवार्ड को 1991-92 में शुरू किया गया था। तब इसका नाम देश के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के नाम पर रखा गया था। इस अवार्ड की स्थापना का मुख्य उद्देश्य खेल के क्षेत्र में सराहना और जागरूकता फैलाना है साथ ही खिलाड़ियों को सम्मानित कर उनकी प्रतिष्ठा बढ़ाना है, ताकि वह समाज में और ज्यादा सम्मान प्राप्त कर सकें।

भारत के सर्वोच्च खेल सम्मान खेल रत्न पुरस्कार का नाम राजीव गांधी खेल रत्न की जगह मेजर ध्यानचंद खेल रत्न रखने के फैसले का खेल जगत ने स्वागत किया है। ध्यानचंद को महानतम हॉकी खिलाड़ी माना जाता है। हॉकी के इस जादूगर ने अपने 1926 से 1949 तक के करियर के दौरान 1928, 1932 और 1936 में ओलंपिक का शीर्ष खिताब हासिल किया था। उनकी जयंती के उपलक्ष्य में 29 अगस्त को देश का राष्ट्रीय खेल दिवस भी मनाया जाता है।

विश्व चैंपियनशिप में भारत की एकमात्र एथलेटिक्स पदक विजेता और यह पुरस्कार 2003 में हासिल करने वाली अंजू बॉबी जॉर्ज ने कहा कि खेल पुरस्कारों के नाम खिलाड़ियों के नाम पर रखे जाने चाहिए। उन्होंने कहा, यह सही समय है जब हम अपने खेल पुरस्कारों का नाम अपने खेल के दिग्गजों के नाम पर रखें। यह सही कदम है. ध्यानचंद हमारे खेल नायक और हॉकी के दिग्गज हैं और हॉकी हमारा राष्ट्रीय खेल है. यह उचित ही है कि देश के सर्वोच्च खेल पुरस्कार का नाम ध्यानचंद के नाम पर ऐसे समय रखा गया है जब भारत ने 41 साल बाद हॉकी में ओलंपिक पदक जीता है।

इस फैसले की सराहना करते हुए पूर्व हॉकी कप्तान अजीतपाल सिंह ने कहा कि पहचान देर से मिली लेकिन देर आये दुरुस्त आये। उन्होंने कहा, यह एक स्वागत योग्य कदम है। यह एक अच्छा फैसला है जो प्रधानमंत्री ने लिया है। खेल पुरस्कार हमेशा खिलाड़ियों के नाम पर होने चाहिए और ध्यानचंद जी से बड़ा देश में कोई खिलाड़ी नहीं है। यह मान्यता देर से मिली, लेकिन कभी नहीं से बेहतर है कि देर से मिली।

ओलंपिक कांस्य पदक मुक्केबाज विजेन्दर सिंह ने कहा कि ध्यानचंद जी को सम्मान देना अच्छी बात है लेकिन यह देश में खेलों के स्तर को उठाने के लिए काफी नहीं है। उन्होंने कहा, इस कदम के खिलाफ कुछ भी नहीं है, क्योंकि हम सभी ध्यानचंद जी के अपार योगदान का सम्मान करते हैं । लेकिन सरकार को खिलाड़ियों का समर्थन करने के लिए इससे कुछ ज्यादा करना चाहिए। उन्हें बुनियादी स्तर पर सुविधाओं की जरूरत है, जब तक हम ऐसा नहीं कर सकते, केवल पुरस्कारों का नाम बदलने से कोई खास फर्क नहीं पड़ेगा।

बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को यह घोषणा की कि देशवासियों की भावनाओं का सम्मान करते हुए खेल रत्न पुरस्कार को अब मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार कहा जाएगा। टोक्यो ओलंपिक में भारतीय हॉकी टीमों के शानदार प्रदर्शन के बाद इस सम्मान का नाम महान हॉकी खिलाड़ी के नाम पर रखने का फैसला लिया गया।

केन्द्रीय खेल मंत्री अनुराग ठाकुर ने कहा कि ध्यानचंद खेलों में भारत के सबसे बड़े नायक रहे हैं। उन्होंने कहा, मेजर ध्यानचंद जी ने अपने असाधारण खेल से विश्व पटल पर भारत को एक नई पहचान दी और अनगिनत खिलाड़ियों के प्रेरणास्रोत बने। जनभावना को देखते हुए खेल रत्न पुरस्कार को मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार करने पर प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी का हार्दिक धन्यवाद।

भारत के पूर्व क्रिकेट खिलाड़ी से सांसद बने गौतम गंभीर कहा, किसी (खेल) नायक का नाम पुरस्कार को और प्रतिष्ठित बनाता है। वहीं ओलंपिक पदक विजेता पहलवान योगेश्वर दत्त ने भी इस कदम के लिए प्रधानमंत्री का शुक्रिया करते हुए कहा, खेल के सबसे बड़े पुरस्कार खेल रत्न को देश के श्रेष्ठ खिलाड़ी और हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद खेल रत्न रखने के फैसले के लिए मैं भारत सरकार और आदरणीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का हार्दिक धन्यवाद करता हूं।

सीएम की घोषणा, वंदना को 25 लाख रुपये देंगे

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भारतीय महिला हाॅकी टीम की खिलाङी वंदना कटारिया को 25 लाख रुपये दिये जाने की घोषणा की है। मुख्यमंत्री ने कहा हमें गर्व है कि टोक्यो ओलिंपिक खेलों में भारतीय महिला हॉकी टीम के शानदार प्रदर्शन में उत्तराखंड की बेटी वंदना कटारिया का शानदार योगदान रहा है।
शीघ्र ही हमारे राज्य में एक नई एवं आकर्षक खेल नीति लागू की जाएगी। इस नीति में विशेष रूप से हमारे युवाओं में अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतिभा का विकास करने हेतु उचित आर्थिक प्रोत्साहन का प्रावधान होगा। हमारा प्रयास होगा कि प्रदेश के कोने कोने में वंदना जैसी प्रतिभा के द्वीप प्रज्ज्वलित हों!

भूकम्प एलर्ट एप बनाने वाला उत्तराखंड पहला राज्य

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सचिवालय में मोबाइल एप्लीकेशन ‘‘उत्तराखण्ड भूकंप अलर्ट’’ एप का शुभारम्भ किया। उत्तराखण्ड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, आपदा प्रबंधन विभाग एवं भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, रूड़की के सौजन्य से बनाये गये इस एप के माध्यम से भूकम्प से पूर्व चेतावनी मिल जायेगी।
उत्तराखण्ड यह एप बनाने वाला पहला राज्य है। इससे जन सुरक्षा में मदद मिलेगी। इस एप के माध्यम से भूकंप के दौरान लोगों की लोकेशन भी प्राप्त की जा सकती है। भूकंप अलर्ट के माध्यम से भूकंप से क्षतिग्रस्त संरचनाओं में फँसे होने पर सूचना दी जा सकती है। उत्तराखण्ड भूकंप अलर्ट एप को गूगल प्ले स्टोर से डाउनलोड कर सकते हैं।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखण्ड भूकंप की दृष्टि से संवेदनशील राज्य है। इस एप के माध्यम से लोगों को भूकंप पूर्व चेतावनी मिल सके, इसके लिए इस एप की लोगों को जानकारी दी जाय। विभिन्न माध्यमों से व्यापक स्तर पर इसका प्रचार प्रसार किया जाय। आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा इसकी लघु फिल्म बनाकर जन-जन तक पहुंचाया जाय। स्कूलों में भी बच्चों को लघु फिल्म के माध्यम से इस एप के बारे में जानकारी दी जाय।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन लोगों के पास एंड्राइड फोन नहीं है, उनको भी भूकंप से पूर्व चेतावनी मैसेज पहुंच जाय, इस एप के माध्यम से यह सुविधा भी प्रदान की जाय। भूकंप पूर्व चेतावनी में सायरन एवं वायस दोनों माध्यमों से अलर्ट की व्यवस्था की जाय। भूकंप पूर्व चेतावनी के लिए सायरन टोन अलग से हो। मुख्यमंत्री ने कहा कि भूकंप पूर्व चेतावनी के लिए यह एक अच्छी पहल है।
इस अवसर पर आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास मंत्री डॉ. धन सिंह रावत, मुख्य सचिव डॉ. एस.एस.संधु, अपर मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन, सचिव आपदा प्रबंधन एस.ए. मुरूगेशन, आई.आई.टी. रूड़की के प्रो. कमल एवं आपदा प्रबंधन विभाग के अधिकारी उपस्थित थे।