श्री गंगा सभा घाटों की रिपेयरिंग में जुटी, मलबा से अटा आरती स्थल

बीते दिनों 18 जून को त्रिवेणी घाट का सम्पूर्ण परिसर एवं आरती स्थल को काफी नुकसान पहुंचा। यहां तक की बाढ़ के साथ आये मलबे ने आरती स्थल पर लगी रेलिंग बारोड को काफी नुकसान पहुंचाया है इसके चलते गंगा आरती में काफी दिक्कतें आ रही हैं, आरती स्थल को पुनः दुरुस्त करने मलवा हटाने की दिशा में श्री गंगा सभा जोर-शोर से जुट गई है।

महासभा के महामंत्री धीरेंद्र जोशी ने बताया कि नुकसान की मरम्मत के लिए कुशल कारीगरों की सहायता से रिपेयरिंग का कार्य आरंभ किया गया है ताकि कोरोना काल के बाद आरती स्थल में पुनः मां गंगा की सांध्य कालीन आरती आर्मी की जा सके। उन्होंने बताया कि बाढ़ के साथ आए मलबे ने चेंजिंग रूम को भी नुकसान पहुंचाया है। इसके अलावा घाट परिसर पर लगे सीसीटीवी कैमरे, विद्युत व्यवस्था को भी क्षतिग्रस्त किया है। कहा कि संपूर्ण घाट परिसर को दुरुस्त किया जा रहा है।

लोकसभा अध्यक्ष के दो वर्ष के कार्यकाल पूर्ण होने पर देशभर से पीठासीन अधिकारियों की हुई वर्चुअल बैठक

देहरादून। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला जी के दो साल का कार्यकाल पूर्ण होने पर लोक सभा, दिल्ली द्वारा देश भर के पीठासीन अधिकारियों के साथ वर्चुअल बैठक का आयोजन किया गया।इस बैठक के दौरान लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला द्वारा अपने दो साल के कार्यकाल में किए गए कार्यों की जानकारी दी गयी। वहीं सभी राज्यों के पीठासीन अधिकारियों ने भी अपने -अपने कार्यकाल के अनुभव को भी साझा किया गया।

लोक सभा अध्यक्ष अध्यक्षता में आयोजित वर्चुअल बैठक के दौरान उत्तराखंड विधानसभा अध्यक्ष ने भी प्रतिभाग किया। विधानसभा अध्यक्ष प्रेम चंद अग्रवाल ने अपने चार साल के कार्यकाल के कार्यों को डिजिटल पटल के माध्यम से बैठक में रखा। इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि लोकसभा अध्यक्ष के कुशल मार्गदर्शन एवं नेतृत्व में संसदीय लोकतंत्र की कार्यवाहियों को मजबूती प्रदान हुई है। इस अवसर पर विधानसभाध्यक्ष ने लोकसभा अध्यक्ष को उनके दो वर्ष का सफलतम कार्यकाल पूर्ण होने पर अपने बधाई एवं शुभकामनाएं दी। वर्चुअल बैठक के दौरान देश भर के सभी राज्यों के पीठासीन अधिकारी ऑनलाइन माध्यम से जुड़े रहे।

इस अवसर पर लोक सभा अध्यक्ष द्वारा सभी राज्यों में कोरोना की वर्तमान स्थिति के बारे में भी जानकारी ली गई। वहीं लोकसभा अध्यक्ष द्वारा सभी राज्यों के विधानसभा सत्र संचालन से संबंधित विषयों पर भी वार्ता की गई ।

विश्व संगीत दिवस पर सुमधुर गीतों का कार्यक्रम

विश्व संगीत दिवस यानी 21 जून को विश्वभर के संगीतज्ञ एक साथ एक मंच पर जुटेंगें। यह कार्यक्रम संगम कला ग्रुप की ओर से अपने फेसबुक पेज पर आयोजित किया जाएगा।

संगम कला ग्रुप के क्षेत्रीय समन्वयक डॉ. धीरेंद्र रांगड़ ने बताया कि ग्रुप के ग्लोबल अध्यक्ष वी.एस.के. सूद की ओर से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गीत और संगीत के भव्य कार्यक्रम का आयोजन फेसबुक पेज पर किया जा रहा है। यह कार्यक्रम शाम छह बजे आरंभ होगा, जो देर रात्रि 12 बजे तक आयोजित होगा। इसमें 101 नवोदित वाद स्थापित गायक अपना वीडियो संगम कला ग्रुप के फेसबुक पेज पर अपलोड कर या क्षेत्रीय समन्वयक को व्हाट्सएप कर कार्यक्रम में सम्मिलित हो सकते है। कोरोना महामारी के चलते स्टेज प्रोग्राम के स्थान पर ऑनलाइन ‘सिंह एंड सेलिब्रेट’ कार्यक्रम की घोषणा की गई।

ग्रुप के अध्यक्ष सूद ने बताया कि यह ग्रुप पिछले 42 वर्षों से निरंतर राष्ट्रीय स्तर पर गायन प्रतियोगिताओं का आयोजन करता आ रहा है। प्रसिद्ध पार्श्व गायक सोनू निगम, हरदीप कौर, सुनिधि चैहान, श्रेया घोषाल, आनंद राज आनंद, तोशी आदि गायकों ने संगम कला ग्रुप से ही अपने कैरियर की शुरुआत की।उन्होंने कहा कि संगम कला ग्रुप गायकी के दीवानों को राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा दिखाने और प्रसिद्धि पाने का महत्वपूर्ण मंच है।

कार्यक्रम आयोजकों में नंदा मेमन, देहरादून के समन्वयक जगदीश बाबला, मसूरी के समन्वयक रूपचंद गुरुजी व सचिव जय मोहन, रूद्राक्ष आदि प्रमुख हैं।

शहीद तारा सिंह थापा की स्मृति में स्मृतिद्वार बनवाने को विस अध्यक्ष को सौंपा ज्ञापन


27 अक्टूबर 1965 को भारत और पाकिस्तान के बीच हुए युद्ध में देश की हिफाजत करते हुए अपने प्राणों की आहूति देने वाले तीर्थनगरी के शहीद राइफलमैन तारा सिंह थापा की स्मृति में स्मृति द्वार बनवाने की मांग उठने लगी है।
आज शहीद के छोटे भाई खड़क सिंह थापा ने ऋषिकेश में उनके पैतृक निवास नेहरू ग्राम में उनकी स्मृति में स्मृति द्वार व स्मारक बनवाने को विधानसभा अध्यक्ष प्रेम चन्द अग्रवाल को ज्ञापन सौंपा। कहा कि सरकार उनके भाई शहीद तारा सिंह थापा के बलिदान का सम्मान करते हुए उनकी याद में स्मृति द्वार व स्मारक बनाए।

इस पर विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल ने उचित एवं त्वरित कार्यवाही का आश्वासन दिया है। ज्ञापन देने वालों में पार्षद शिव कुमार गौतम, खड़क सिंह थापा, रमेश थापा, देवम थापा, रवि थपलियाल, एडवोकेट राकेश पारछा आदि मौजूद रहे।

ऋषिकेशः नशे के रोगियों को मिल सकेगा उच्चस्तरीय उपचार, एम्स में शुरू हुआ एटीएफ

सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा वर्ष-2019 में किए गए एक शोध में यह पाया गया कि उत्तराखंड में तम्बाकू के अलावा सबसे ज्यादा इस्तेमाल किए जाने वाले नशे के प्रकारों में शराब, कैनाबिस उत्पाद (भांग/गांजा/चरस), ओपिऑइड्स (स्मैक/हेरोइन/कोकेन/ डोडा आदि ) व इन्हेलन्ट्स भी प्रमुखरूप से शामिल है।
इस सर्वे रिपोर्ट में बताया गया है कि उत्तराखंड में विभिन्न प्रकार का नशा करने वाले मौजूदा पुरुष उपभोगकर्ताओं की संख्या शराब से 38.1 प्रतिशत, कैनाबिस उत्पाद से 1.4 प्रतिशत, ओपिऑइड्स से 0.8 प्रतिशत और इन्हेलन्ट्स का इस्तेमाल करने वाले 10 से 17 वर्ष तक के बच्चों की संख्या 1.7 फीसदी है। देशभर में हर पांच में से एक व्यक्ति शराब और हर 11 में से एक व्यक्ति कैनाबिस नशे का रोगी है, जिन्हें तत्काल उपचार की नितांत आवश्यकता है।
इसके अलावा लगभग 77 लाख भारतियों को ओपिऑइड्स नशे के लिए शीघ्र इलाज शुरू करने की जरुरत है। आजकल देखा गया है कि वयस्क लोग ही नहीं बल्कि बच्चे भी नशे के रोगी बनते जा रहे हैं। इसकी एक अहम वजह है लोगों के जीवन में स्ट्रेस बहुत बढ़ गया है। कोरोना पान्डेमिक के चलते भी इस स्ट्रेस में बहुत बड़ा इजाफा हुआ है। ऐसे लोगों में आम धारणा बन गई है कि नशा करना स्ट्रेस से जूझने और निपटने का एक आसान तरीका है, मगर यह स्ट्रेस को कम अथवा समाप्त करने का सबसे गलत तरीका है।
नशे की शुरुआत आमतौर पर खुद व्यक्ति की इच्छा से, प्रयोग करने की उत्सुकता, दोस्तों के दबाव, पारिवारिक परेशानियों, काम का स्ट्रेस व अन्य परेशानियों से होने की वजह से होती है। मगर एक बार इससे ग्रसित होने पर यह नशे का रोग बन जाता है। नशे की बीमारी केवल एक आदत, इच्छाशक्ति में कमी या कमज़ोरी का कम होना नहीं बल्कि एक काम्प्लेक्स तरीके की दिमागी बीमारी है। नशे से व्यक्ति के दिमाग में अस्थायी एवं स्थायी बायोकैमिकल बदलाव आते हैं, जिसके लिए इलाज की जरुरत पड़ती है।

नशा ग्रस्त व्यक्ति का दिमाग उसका साथ नहीं दे पाता अथवा वह इस नशे की बीमारी से अपने आप कभी भी बाहर नहीं आ पाता। नशे के रोग से बहुत से लोगों का घर- परिवार खराब हो जाता है और प्रतिवर्ष लाखों लोग अपने जीवन से हाथ धो बैठते हैं। इसके साथ ही पीड़ित व्यक्ति के आर्थिक, सामाजिक जीवन व रोजमर्रा की जिंदगी पर भी इसका बहुत हद तक दुष्प्रभाव पड़ता है। निदेशक प्रोफेसर रवि कांत के निर्देशन में शुरू की गई एटीएफ सर्विस ऐसे लोगों के लिए वरदान साबित हो सकती है और वह फिर से मुख्यधारा से जुड़कर अपने अमूल्य जीवन को संवार सकते हैं।
एम्स निदेशक ने बताया कि रोगियों को नशे की समस्याओं से दूर करने के लिए एम्स ऋषिकेश ने एडिक्शन ट्रीटमेंट फैसिलिटी (ए.टी.एफ.) की शुरुआत की है, जिसमें नशावृत्ति के शिकार रोगियों को परामर्श व उपचार की सभी प्रकार उच्चस्तरीय सुविधाएं नि:शुल्क उपलब्ध कराई जाएंगी। उन्होंने बताया कि संस्थान में इस सुविधा को ए.टी.एफ. एन. डी. डी.टी.सी. एम्स दिल्ली द्वारा समन्वित तथा भारत सरकार के सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय की सहायता से शुरू किया गया है। इस सेवा के शुरू किए जाने का उद्देश्य प्रदेश में नशे से ग्रस्त रोगियों को मुफ्त एवं उच्चस्तरीय उपचार मुहैय्या कराना है। संस्थान के मनोचिकित्सा विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर एवं ए.टी.एफ. के नोडल ऑफिसर डा. विशाल धीमान ने बताया कि एम्स में संचालित ए.टी.एफ के तहत, ओपीडी OPD और एडमिशन (IPD) दोनों तरह से इलाज की सुविधाएं उपलब्ध हैं।
अस्पताल में सभी मरीजों के लिए बिस्तर की सुविधा, सभी प्रकार की आवश्यक दवाएं, अत्याधुनिक उपचार प्रणाली निशुल्क उपलब्ध कराने के साथ ही रोगियों की काउंसलिंग भी की जाएगी। जिसमें उन्हें नशे की तलब को कंट्रोल करने की अलग-अलग तकनीकें बताई जाएंगी, साथ ही रोगियों की मोटिवेशनल इंटरव्यूइंग भी की जाएगी।

नशा छोड़ने के इच्छुक लोग इस नंबर से लें सहायता
संस्थान के मनोचिकित्सा विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर एवं ए.टी.एफ. के नोडल ऑफिसर डा. विशाल धीमान जी ने बताया कि नशा छोड़ने के इच्छुक लोगों के लिए एम्स के मनोचिकित्सा विभाग द्वारा हेल्पलाइन नंबर 7456897874 (टेली-एडिक्शन सर्विस) भी जारी किया गया है, जिसमें सोमवार प्रातः 9:00 बजे से शुक्रवार शाम 4:00 बजे तक और शनिवार सुबह 9:00 बजे से दोपहर 1:00 बजे तक चिकित्सकीय परामर्श लिया जा सकता है। ए.टी.एफ प्रोजेक्ट का उद्देश्य उत्तराखंड और इसके आसपास के क्षेत्रों को नशखोरी के विरुद्ध लोगों को जागरुक करना और इससे ग्रसित रोगियों को मुफ्त इलाज उपलब्ध कराना है, जिससे वह समाज की मुख्यधारा से जुड़कर अपनी उन्नति के साथ सामान्य जीवन जी सकें।

देवस्थानम बोर्ड को लेकर तस्वीर साफ करें सीएम तीरथ सिंह रावत

उत्तराखंड में नेतृत्व परिवर्तन के बाद मुख्यमंत्री बनें तीरथ सिंह रावत ने तीर्थ पुरोहित हक हकूकधारियों को भरोसा दिया था कि सरकार देवस्थानम बोर्ड पर पुर्नविचार करेगी। मगर, ऐसा होता नहीं दिख रहा है। इस पर चारधाम तीर्थ पुरोहित हक हकूकधारी महापंचायत के अध्यक्ष ने सवाल किए हैं।

उन्होंने कहा कि सरकार को देवस्थानम बोर्ड पर स्टैंड क्लीयर करना चाहिए। सरकार को बताना चाहिए कि आखिर मुख्यमंत्री का पुर्नविचार से संबंधित आश्वासन का क्या हुआ। कोटियाल ने कहा कि एक ओर सरकार पुर्नविचार का आश्वासन देती है और दूसरी ओर बोर्ड को पूरा आकार देने में जुटी हुई है। कहा कि चारधाम तीर्थ पुरोहित हक हकूकधारी महापंचायत का स्टैंड क्लीयर है।

महापंचायत चार धामों में पहले जैसी व्यवस्था चाहती है। धामों में सरकार के बहुत अधिक दखल के पक्ष मे ंनहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार के इस तर्क में कोई दम नहीं है कि इससे विकास होगा। उन्होंने सवाल किया कि धामों के विकास के लिए तीर्थों की व्यवस्था में छेड़छाड़ ठीक नहीं है।

महापंचायत के अध्यक्ष कोटियाल ने दो टूक कहा कि गांधीवादी तरीके से सरकार के सम्मुख पक्ष रखा जा चुका है। तीर्थ पुरोहित हक हकूकधारी याचक कतई नहीं बनेंगे। संघर्ष जारी रखेंगे। कहा कि सरकार की उन्हें थकाने की स्ट्रेटजी कामयाब होने वाली नहीं है।

पीएम मोदी से मिले सीएम, ग्रामीण इलाकों में समय पर वैक्सीन पहुंचाने के लिए अतिरिक्त कोटे की भी मांग


मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से भेंट की। आधा घंटे चली मुलाकात में मुख्यमंत्री ने देश में 18 वर्ष की आयु से ऊपर वाले समस्त भारतीयों का कोरोना टीकाकरण मुफ्त किए जाने पर प्रधानमंत्री का आभार व्यक्त किया। साथ ही 80 करोड़ लोगों को मुफ्त अनाज देने के लिए भी प्रधानमंत्री का आभार व्यक्त किया, राज्य को ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल-लाईन की सौगात देने हेतु आभार व्यक्त किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के अभूतपूर्व वीजन के तहत राज्य के चारधामों में सड़कों का कार्य तीव्र गति से चल रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड के वित्तीय संसाधन अत्यन्त सीमित है, इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री को कंडाली की जैकेट भी भेंट की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कोविड-19 से लड़ने हेतु राज्य को भारत सरकार की ओर से हर प्रकार की सहायता मिली है, इसके तहत प्रधानमंत्री के निर्देशों के क्रम में डी0आर0डी0ओ0 के द्वारा निर्मित अस्पताल, जो क्रमशः ऋषिकेश एवं हल्द्वानी में बनाये गये हैं, जिससे समस्त जनमानस को अत्यधिक लाभ मिला है, इसके लिए भी उन्होंने प्रधानमंत्री को धन्यवाद दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री की दूरदर्शी सोच का नतीजा है कि श्री केदारनाथ धाम का भव्य रूप विकसित हो गया है एवं श्री बद्रीनाथ धाम के सम्बन्ध में भी रूपरेखा तैयार हो रही है। मुख्यमंत्री ने स्थिति सामान्य होने पर प्रधानमंत्री को बद्री-केदार डेवलपमेंट प्रोजेक्ट के लोकार्पण के लिए न्यौता दिया। मुख्यमंत्री ने राज्य को भारत सरकार द्वारा तीन डॉप्लर रडार की स्वीकृति देने के प्रति आभार व्यक्त करते हुए वैली हेतु 10 छोटे डाप्लर रडार उपलब्ध कराने का अनुरोध किया। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री से राज्य के कुमाऊँ क्षेत्र में ‘एम्स’ की स्थापना या ऋषिकेश ऐम्स की शाखा स्थापित करने का भी अनुरोध किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड एक हिमालयी पर्वतीय राज्य हैं। इसको सम्पूर्ण रूप से ऑर्गेनिक प्रदेश के रूप में विकसित किये जाने हेतु भारत सरकार से विशेष अनुदान का अनुरोध है। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड का पर्यावरण अत्यन्त संवेदनशील है, अतः सम्पूर्ण हिमालयी क्षेत्र में हिमनद का अध्ययन तथा जल सो्रतों को किस प्रकार सुरक्षित रखना है, इसके सम्बन्ध में सम्पूर्ण अध्ययन करने हेतु उत्तराखण्ड में ‘हिमनद एवं जल संसाधन शोध केन्द्र’ की स्थापना की जाए।

मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री से राज्य में मानसून व आपदा के दौरान सड़के बंद होने की स्थिति में ग्रामीण इलाकों में समय पर वैक्सीन पहुंचाने के लिए अतिरिक्त कोटे की भी मांग की।

पर्यावरणविद सुंदरलाल बहुगुणा ने ली अंतिम सांसे, पूर्णानंद घाट पर हुआ अंतिम संस्कार


कई दिनों से एम्स में भर्ती मशहूर पर्यावरणविद् सुंदरलाल बहुगुणा ने आज अपनी अंतिम सांसे ली। उनके निधन की खबर से प्रदेशभर में शोक की लहर फैल गई। राज्यपाल बेबीरानी मौर्य, मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत और स्पीकर उत्तराखंड प्रेमचंद अग्रवाल ने अपनी-अपनी संवेदनाए व्यक्त की। वहीं, राजकीय सम्मान के साथ मुनिकीरेती स्थित पूर्णानंद घाट पर उनका अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान उनके कार्याें को स्मरण कर उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि भी अर्पित की गई।

हिमालय रक्षक, चिपको आंदोलन के प्रणेता सुंदरलाल बहुगुणा का अंतिम संस्कार मुनिकीरेती के पूर्णानंद घाट पर राजकीय सम्मान के साथ हुआ। स्पीकर प्रेमचंद अग्रवाल ने सुंदरलाल बहुगुणा के पार्थिव शरीर पर पुष्प चक्र अर्पित कर अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। कहा कि आज हमने देश के एक बहुमूल्य रत्न को खो दिया। हिमालय की रक्षा और पर्यावरण की सुरक्षा के लक्ष्य को सदैव सर्वोपरि रखने वाले बहुगुणा जी ने सर्वोदय आंदोलन, चिपको आंदोलन से लेकर स्वतंत्रता संग्राम में अपना ऐतिहासिक योगदान दिया। कहा कि उनका सौभाग्य है कि कई विषयों पर बहुगुणा जी के साथ उनकी चर्चा होती थी और वह हमेशा मार्गदर्शक की भूमिका अदा करते थे। कहा कि उनके जाने से एक युग की समाप्ति हुई है।

इस दौरान देहरादून के जिला अधिकारी आशीष श्रीवास्तव, ऋषिकेश के उप जिलाधिकारी वरुण चैधरी, कोतवाल रितेश शाह कई लोग मौजूद रहे।

विश्वप्रसिद्ध श्री बदरीनाथ धाम के खुले कपाट, अखंड ज्योति के हुए दर्शन


श्री बदरीनाथ धाम के कपाट आज मंगलवार को वैदिक मंत्रोचार एवं शास्त्रोक्त विधि-विधान से आज मेष लग्न पुष्य नक्षत्र में प्रातः 4 बजकर 15 मिनट पर खोल दिये गये है। ग्रीष्म काल में निरंतर भगवान बदरीविशाल की पूजा- अर्चना होगी।

मंदिर तथा मंदिर मार्ग को श्री बदरी-केदार पुष्प सेवा समिति द्वारा लगभग 20 क्विंटल फूलों से सजाया गया था‌। प्रातः तीन बजे से ही कपाट खुलने की प्रक्रिया शुरू हो गयी श्री कुबेर जी बामणी गांव से लक्ष्मी द्वार से मंदिर प्रांगण पहुंचे। श्री उद्धव जी भी मुख्य द्वार से अंदर पहुंचे। ठीक प्रातः 4 बजकर 15 मिनट पर श्री बदरीनाथ धाम के कपाट खुले इस अवसर पर कुछ ही लोग अखंड ज्योति के गवाह बने। रावल द्वारा गर्भगृह में प्रवेशकर मां लक्ष्मी को उनके परिक्रमा स्थित मंदिर में विराजमान किया तत्पश्चात भगवान के सखा उद्धव जी एवं देवताओं के खजांची श्री कुबेर मंदिर गर्भगृह में विराजमान हो गये। डिमरी पंचायत प्रतिधियों द्वारा भगवान बदरीविशाल के अभिषेक हेतु राजमहल नरेन्द्र नगर से लाये गये तेल कलश( गाडू घड़ा) को गर्भ गृह में समर्पित किया।

इसके साथ ही भगवान को माणा गांव के महिला मंडल द्वारा शीतकाल में कपाट बंद करते समय औढाया गया घृतरू कंबल उतारा गया तथा प्रसाद स्वरूप बांटा गया। भगवान के निर्वाण दर्शन के बाद अभिषेक किया गया। तत्पश्चात भगवान बदरीविशाल का श्रृंगार किया गया। इस तरह निर्वाण दर्शन से श्रृंगार दर्शन की प्रक्रिया पूरी होती है। इस संपूर्ण पूजा प्रक्रिया में रावल, डिमरी भीतरी वडुवा, आचार्यों, हक हकूकधारियों, तीर्थ पुरोहितों की भूमिका रही।
श्री बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने पर प्रथम महाभिषेक प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नाम से जनकल्याण एवं आरोग्यता की भावना से समर्पित किया गया है। श्री बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने पर मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने सभी श्रद्धालुजनों को बधाई दी है तथा सभी के आरोग्यता की कामना की। कहा कि लोग अपने घरों में रहकर पूजापाठ करें।

पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने कपाट खुलने पर प्रसन्नता जताई कहा कि कोरोना की समाप्ति के बाद चारधाम यात्रा पुनः शुरू होगी।

पर्यटन सचिव दिलीप जावलकर ने श्री बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने के अवसर पर बधाई दी है कहा कि श्री बदरीनाथ धाम को आध्यात्मिक हब के रूप में विकसित करने हेतु शासन के स्तर पर प्रयास जारी है। कई संस्थाये इसके लिए आगे आ रही है।

गढ़वाल आयुक्त व उत्तराखंड चारधाम देवस्थानम प्रबंधन बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी रविनाथ रमन ने कहा कि श्री बदरीनाध धाम के कपाट खुलने के साथ ही चारों धामों के कपाट खुलने पर प्रसन्नता जताई। कहा अभी यात्रियों को यात्रा की अनुमति नहीं है लेकिन स्थितियां सामान्य होने पर यात्रा को चरणबद्ध तरीके से शुरू किया जा सकता है।
कपाट खुलने के अवसर पर रावल ईश्वरीप्रसाद नंबूदरी, देवस्थानम बोर्ड के अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी बी.डी.सिंह, उपजिलाधिकारी कुमकुम जोशी, धर्माधिकारी भुवन चंद्र उनियाल, पुलिस अधीक्षक यशवंत सिंह चैहान, उप मुख्य कार्याधिकारी सुनील तिवारी, डिमरी पंचायत पदाधिकारी आशुतोष डिमरी, विनोद डिमरी, तहसील दार चंद्रशेखर वरिष्ठ पुलिस जिला प्रशासन आईटीबीपी, सेना के अधिकारी मौजूद रहे।

देवस्थानम बोर्ड के अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी बी. डी. सिंह ने बताया कि देवस्थानम बोर्ड द्वारा मंदिर परिसर,बस टर्मिनल तथा स्वागत कार्यालय, आवासों में पर्याप्त सेनिटाईजेशन किया है, कपाट खुलने के दौरान कोविड बचाव मानकों का पालन हुआ मास्क पहनना, सोशियल डिस्टेंसिंग, सेनिटाईजर, थर्मल स्क्रीनिंग का प्रयोग हो रहा है।
देवस्थानम बोर्ड के मीडिया प्रभारी डा. हरीश गौड़ ने जानकारी दी कि श्री बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने के साथ ही मंदिर परिक्रमा स्थित मंदिरों माता लक्ष्मी मंदिर, हनुमान जी, गणेश जी, श्री आदि केदारेश्वर, श्री शंकराचार्य मंदिर, माता मूर्ति मंदिर माणा तथा पंच बदरी में एक श्री भविष्य बदरी मंदिर के कपाट भी खुल गये है जबकि चारधामों में से श्री यमुनोत्री धाम के कपाट 14 मई, श्री गंगोत्री धाम के 15 मई, श्री केदारनाथ धाम के कपाट 17 मई को खुल चुके है। तृतीय केदार तुंगनाथ जी एवं चतुर्थ केदार रूद्रनाथ जी के कपाट भी 17 मई को खुल गये है। द्वितीय केदार श्री मदमहेश्वर के कपाट 24 मई को खुल रहे हैं जबकि श्री हेमकुंड गुरूद्वारा साहिब तथा लोकपाल श्री लक्ष्मण मंदिर के कपाट खुलने की तिथि अभी तय नहीं है।

कल खुलने जा रहे बदरी विशाल के कपाट, मुख्यमंत्री ने दी शुभकामनायें

आदि गुरू शंकराचार्य की गद्दी, उद्धव, कुबेर रावल ईश्वरीय प्रसाद नंबूदरी एवं श्री डिमरी धार्मिक केंद्रीय पंचायत के प्रतिनिधि तेल कलश गाडू घड़ा सहित श्री योगध्यान बदरी मंदिर पांडुकेश्वर से श्री बदरीनाथ धाम पहुंचे।

कल ब्रह्म मुहुर्त 4 बजकर 15 मिनट में श्री बदरीनाथ धाम के कपाट खुलेंगे। इस अवसर हेतु श्री बदरी-केदार पुष्प सेवा समिति ने श्री बदरीनाथ धाम को फूलों से सजाया है।

मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने श्रद्धालुओं को शुभकामनायें देते हुए घर से ही पूजा अर्चना करने का आग्रह किया है।

देवस्थानम बोर्ड के मीडिया प्रभारी डा. हरीश गौड़ ने बताया कि कपाट खुलने की तैयारिया पूर्ण कर दी गयी है। आदिगुरू शंकराचार्य की जयंती पर आज श्री नृसिंह मंदिर जोशीमठ में सादगी पूर्वक आदि गुरू शंकराचार्य का स्मरण किया गया। रावल ईश्वरी प्रसाद नंबूदरी ने आदि गुरू शंकराचार्य महाराज की वैदिक परंपराओं को अक्षुण बनाये रखने का आवह्वान किया।
इस अवसर पर उप मुख्य कार्याधिकारी सुनील तिवारी, धर्माधिकारी भुवन चंद्र उनियाल, डिम्मर उम्मटा डिमरी पंचायत अध्यक्ष आशुतोष डिमरी, डिमरी केंद्रीय पंचायत अध्यक्ष विनोद डिमरी आदि मौजूद रहे।