पुष्कर सिंह धामी के रूप में उत्तराखंड को मिला 11वां सीएम


देहरादून। उत्तराखंड के नए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी बनाये गए हैं। राज्य को 11वां मुख्यमंत्री मिला है। बीजेपी विधायक दल की बैठक में उनके नाम पर मुहर लगी है।

दो बार बीजेपी युवा मोर्चा के अध्यक्ष रहे धामी

2017 के बाद उत्तराखंड को मिले तीसरे मुख्यमंत्री

पुष्कर सिंह धामी

जीवन परिचय, मा0 विधायक, पुष्कर सिंह धामी, 70 विधान सभा क्षेत्र, खटीमा, ऊधमसिंह नगर (उत्तराखण्ड)

देव भूमि उत्तराखण्ड प्रदेश के अति सीमान्त जनपद पिथौरागढ की ग्राम सभा टुण्डी, तहसील डीडी हाट में जन्म हुआ। सैनिक पुत्र होने के नाते राष्ट्रीयता, सेवा भाव एवं देशभक्ति को ही धर्म के रूप में अपनाया। आर्थिक आभाव में जीवन यापन कर सरकारी स्कूलों से प्राथमिक शिक्षा ग्रहण की। तीन बहनों के पश्चात अकेला पुत्र होने के नाते परिवार के प्रति जिम्मेदारियाॅ हमेशा बनी रही।

1.विधान सभा का नाम 70, विधान सभा क्षेत्र, खटीमा

2.माता का नाम विश्ना देवी

3.पत्नी का नाम गीता धामी

4.शैक्षिक योग्यता (क) शैक्षणिक योग्यता – स्नातकोत्तर
(ख) व्यावसायिक – मानव संसाधन प्रबंधन और औद्योगिक संबंध के मास्टर

5.जन्म तिथि 16.09.1975

6.राजनितिक दल का नाम भारतीय जनता पार्टी

प्रारंभिक जीवन- माता जी का एक धर्मपरायण, मृदुभाषी एवं अपने परिवार के प्रति समर्पित धरेलू महिला होने तथा पिता की सैनिक होने के कारण देश की सरहद पर हर पल तन-मन न्यौछावर करने की दशा भक्ति की प्ररेणा से ओत-प्रोत वाल्य मन-मस्तिष्क में सदैव देश एवं प्रदेश के लिए कुछ कर गुजरने की ललक के कारण बचपन से ही स्काउट गाइड, एन0सी0सी0, एन0एस0एस0 इत्यादी शाखाओं में प्रतिभाग एवं समाजिक कार्यो को करने की भावना तथा ’’संधे शक्ति कलयुगें’’ के मूलमंत्र के आधार पर छात्र शक्ति को उनके हकों एवं उत्थान के लिए एक जुट करने के लिए अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुडने के मुख्य कारक रहे हैं। लखनऊ विश्वविद्यालय में छात्रों को एक जुट करके निरन्तर संधर्षशाील रहते हुए उनके शैक्षिणक हितों की लडाई लडते हुए उनके अधिकार दिलाये गये तथा शिक्षा व्यवस्था के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी। राजनितिक दल भारतीय जनता पार्टी से जुडने का कारण भी राष्ट्रीयता, देशभक्ति, कमजोर एवं युवा बेरोजगार के प्रति कुछ कर गुजरने की भावना रही। यही राजनिति में आने का उदे्श्य रहा।

राजनीतिक जीवन

राजनितिक यात्राः- सन् 1990 से 1999 तक जिले से लेकर राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर तक अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद में विभिन्न पदों में रहकर विद्यार्थी परिषद में कार्य किया है। इसी दौरान अलग-अलग दायित्वों के साथ-साथ प्रदेश मंत्री के तौर पर लखनऊ में हुये अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के राष्ट्रीय सम्मेलन में संयोजक एवं संचालन कर प्रमुख भूमिा निभाई।

राज्य की भौगोलिक परिस्थियों को नजदीक से समझते हुए क्षेत्रीय समस्याओं की समझ और उत्तराखण्ड राज्य गठन के उपरान्त पूर्व मुख्यमंत्री जी के साथ एक अनुभवी सलाहकार के रूप में 2002 तक कार्य किया। कुशल नेतृत्व क्षमता, संधर्षशीलता एवं अदम्य सहास के कारण दो बार भारतीय जनता युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष रहते हुए सन 2002 से 2008 तक छः वर्षो तक लगातार पूरे प्रदेश में जगह-जगह भ्रमण कर युवा बेरोजगार को संगठित करके अनेकों विशाल रैलियां एवं सम्मेलन आयोजित किये गये। संधर्षो के परिणाम स्वरूप तत्कालीन प्रदेश सरकार से स्थानीय युवाओं को 70 प्रतिशत आरक्षण राज्य के उद्योगों में दिलाने में सफलता प्राप्त की। इसी क्रम में दिनांक 11.01.2005 को प्रदेश के 90 युवाओं को जोड़कर विधान सभा का धेराव हेतु एक ऐतिहासिक रैली आयोजित की गयी जिसे युवा शक्ति प्रदर्शन के रूप में उदाहरण स्वरूप आज भी याद किया जाता है।

कुशल नेतृत्व क्षमता तथा शैक्षिणिक एवं व्यावसायिक योग्यता के कारण पूर्ववर्ती भा0ज0पा0 सरकार में वर्ष 2010 से 2012 तक शहरी विकास अनुश्रवण परिषद के उपाध्यक्ष के रूप में कार्यशील रहते हुए क्षेत्र की जनता की समस्याओं का समाधान कराने में आशातीत सफलता प्राप्त की जिसका प्रतिफल जनता द्वारा 2012 के विधान सभा विधान सभा चुनाव में ’’विजयश्री’’ दिलाते हुए अपने जनप्रिय विधायक के रूप में विधान सभा मंे पहुॅचाकर उनकी आवाज को और भी अधिक बुलन्दी के साथ सरकार के समक्ष उठाते हुए क्षेत्रीय जनता को उनके मौलिक अधिकारों एवं जीवन यापन के हकों को दिलवाने के लिए उनके विधानसभा प्रतिनिध होने का गौरव प्राप्त हुआ है।

विधान सभा के मुख्य मुद्देः-

(क) राज्य स्तरीयः-
1. शिक्षित बेरोजगार युवक आज राज्य की प्रमुख समस्या है। राज्य के युवाओं को अपने लिये रोजगार के अवसर प्राप्त हो, गाॅवों से पलायन रूके यही मुख्य समस्या है।
2. आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को भी रोजगार परक शिक्षा और तकनीकी शिक्षा यह राज्य सरकार दे, जिससे सभी वर्गो को जीवन यापन एवं विकास के समान अवसर प्राप्त हो एवं प्रचलित शिक्षा का बाजारीकरण बंद हो, जिसके लिए बहुत कार्य किया जाना है।
3.बुनियादी जरूरतों में स्वच्छ पानी तक प्रदेश की जनता को प्राप्त नही पा रहा है। स्वच्छ पेय जल लोगों तक निःशुल्क पहुॅचे आज एक प्रमुख मुद्दा है।

(ख) क्षेत्रीय स्तरीयः-

विधान सभा क्षेत्र खटीमा एक सीमान्त पिछड़ा, तराई जनजातिय बहुल्य क्षेत्र है। स्वच्छ पानी से लेकर शिक्षा तक अनेकों क्षेत्र में अत्यधिक कार्य किया जाना है।
2. नेपाल से लगा हुआ सीमान्त क्षेत्र होने के कारण अनेकों समस्याएं जैसेः- माओवाद, तस्करी इत्यादी समस्याओं के सामाधान हेतु अनेंको कार्य जानेे हैं।
3. जनजाति एवं गैरजनजाति जमीनों के विवादों का समाधान।
4. कृषि आधारित क्षेत्रों में बाढ की समस्या एवं भूमि का कटानों का समाधान।
5. पाॅलिटेक्निक का निर्माण।
6. आई0टी0आई0 का निर्माण।
7. निर्माणधीन सरकारी अस्पताल का यथा शीध्र निर्माण कार्य पूर्ण करवाना।
8. रोडवेज बस स्टेशन का निर्माण कार्य।
9. खटीमा शहर में बाईपास का निर्माण।
10. खटीमा में 4-लेन सड़क का निर्माण कार्य।
11. सीमान्त बग्गा चैवन ग्राम सभा को राजस्व ग्राम धोषित करवान एवं सम्पर्क मार्ग से जोडना।
12. स्पोर्टस स्टेडियम का निर्माण।
13. डिग्री कालेज में अन्य पाठ्यक्रमों को शुरू करवाना।
14. लम्बे समय से जीर्ण क्षीर्ण सड़क बगिया धाट से चकरपुर तक निर्माण करवाना।
15. परवीन नदी पर यथा शीध्र पुल का निर्माण।
16. खटीमा क्षेत्र में आन्दोलकारीयों का चिन्ह्ीकरण एवं शहीद स्मारक का निर्माण।
17. उधोगों की स्थापना कर नौजवानों को रोजगार उपलब्ध कराना।
18. किसानों से जुड़ी समस्याओं का समाधान।
19. सभी ग्राम सभाओं में मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध करवाना है।

समाधान हेतु प्रयासः- राज्यों से शिक्षित बेरोजगारों का पलायन रूके इसके लिए आवश्यक है राज्य में अधिक से अधिक उद्योगों की स्थापना, पर्यटन के क्षेत्र का विकास, जल स्रोतों का वैज्ञानिक सोच के साथ उचित दोहन कर बिजली उत्पादन, हाॅटी कल्चर, फ्लोरी कल्चर, उद्यान, फल उत्पादन, जड़ी बूटी उत्पादन एवं फूल उत्पादन इत्यादी क्षेत्रों में बेरोजगारी युवकों को प्रशिक्षण देकर राज्य में ही पहाड़ों की जवानी का प्रयोग किया जाए जिससे पलायन रूके तथा युवा शक्ति का सदुपयोग प्रदेश के चहुॅमुखी विकास में हो सकें।
विजनः- चॅूकि समस्त युवा बेरोजगारों को सरकारी नौकरी उपलब्ध कराना वर्तमान में चुनौतीपूर्ण है इसलिए आवश्यकता है कि सरकार अपने प्रयासों से सभी वर्गो को सरकारी विद्यालय एवं महाविद्यालयों में से ऐसी तकनीकी, रोजगार परक शिक्षा एवं प्रशिक्षण प्रदान करे जिससे कि युवा वर्ग के लोगों को ड्रिगी प्राप्त करने के पश्चात तकनीकी रूप से स्वरोजगार के अवसरांे का लाभ उठाने हेतु कुशल बने एवं रोजगार प्राप्त हो सकंे। यह प्रशिक्षण राज्य सरकार अनेकों क्षेत्रों जैसेेंः- उद्योगों, पर्यटन के क्षेत्र में बिजली उत्पादन, हाॅटी कल्चर, फ्लोरी कल्चर, उद्यान, फल उत्पादन, जड़ी बूटी उत्पादन, एवं फूल उत्पादन इत्यादि क्षेत्रों में दे सकें। इन सभी के साथ-साथ एक महत्वपूर्ण विजन यह भी रहेगा कि जनसंख्या वृद्वि रोक जाने हेतु परिवार नियोजन, जन जागरण एवं जनता को सचेत किया जाना।

जनता के प्रति आपका सन्देशः- क्षेत्र एवं राज्य की जनता से मेरा यही विनम्र निवेदन है कि अपनी समस्याओं के समय-समय पर अवगत कराते रहें जिससे मैं उन्हे विधानसभा में सरकार के सम्मुख प्रमुखता से उठाते हुए उनका निराकरण आपके सहयोग से समय पर करा सकूॅ। मेरे द्वारा सदैव आपके स्वागत के लिए खुल हैं। सभी लोग, सभी वर्ग, सभी क्षेत्रों में जाति-धर्म के विचार से ऊपर उठकर सामाजिक उत्थान के लिए मिलजुलकर कार्य करें। अपने अधिकारों एवं कर्तव्यों के प्रति संजग रहते हुए सकारात्मक एवं प्रगतिशील सोच के साथ कार्य करें जिससे हमारा राज्य प्रगति एवं विकास के मार्ग पर अग्रसर हों।

देवस्थानम बोर्ड को समाप्त करने की मांग कर तीर्थपुरोहितों ने गृहमंत्री को भेजी चिठ्ठी


देवस्थानम बोर्ड को समाप्त करने की मांग को लेकर चार धाम तीर्थ पुरोहित हक हकूक धारी महापंचायत ने भारत के गृह मंत्री अमित शाह से निवेदन किया है। गृह मंत्री को महापंचायत ने इस आशय का भेजा है।

चार धाम तीर्थ पुरोहित हक हकूक धारी महापंचायत के महामंत्री हरीश डिमरी ने बताया महापंचायत की ओर से मंगलवार को गृह मंत्री को पत्र भेज कर उत्तराखंड सरकार द्वारा बनाये चार धाम देवस्थानम बोर्ड को तुरन्त भंग करने की मांग की गई है । हरीश डिमरी ने बताया कि चार धाम तीर्थ पुरोहित हक हकूक धारी महापंचायत और श्रद्धालु सरकार के निर्णय से सहमत नहीं है । कहा मंदिरों की ब्यवस्थाओं को सरकार द्वारा अपने अधीनस्थ लेना संविधान विरोधी है । चार धाम तीर्थ पुरोहित हक हकूक धारी महापंचायत के महामंत्री हरीश डिमरी ने बताया कि महा पंचायत के अध्यक्ष कृष्ण कान्त कोटियाल समेत पूरी महापंचायत ने गृह मंत्री को भेजे पत्र में चार धाम देवस्थानम प्रबंधकीय विधेयक 2019 को भंग कर 27 नवम्बर 2019 से पूर्व की स्थिति को पुन रू बहाल करने की मांग की है ।

बीआरओ द्वारा पुलों के लोकार्पण कार्यक्रम में शामिल हुए सीएम तीरथ

मुख्यमंत्री तीरथ सिह रावत ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह द्वारा लेह से देश मे बीआरओ द्वारा दूरस्थ एवं दुर्गम क्षेत्रों में बनाये गये पुलों (ब्रिजों) का लोकार्पण कार्यक्रम में वचुर्वल प्रतिभाग किया।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने लेह से बीआरओ द्वारा देश मे बनाये गये 63 पुलों एवं सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण सडकों का लोकार्पण कर राष्ट्र को समर्पित किये। जिसमें उत्तराखण्ड में 1928.74 लाख की लागत से कुल 06 पुलों का लोकार्पण किया गया। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सम्बोधित करते हुये कहा कि देश के दुर्गम क्षेत्रों में पुल, सडक निर्माण कर कनेक्टीविटी देना सामरिक दृष्टि से अति महत्वपूर्ण है। उन्होंने बीआरओ को दुर्गम क्षेत्रों मे पुल, सडक निर्माण करने पर बधाई दी व कार्यो की सराहना की। रक्षा मंत्री ने कहा कि पुल व सडकें देश के विकास की गति बढाते हैं तथा सडकें विकास, पर्यटन के साथ ही देश रक्षा की दृष्टि से भी अति महत्वपूर्ण है। उन्होने कहा कि हम समृद्व-सशक्त देश निर्माण मे तेजी से आगे बढ रहे है।

लोकार्पण कार्यक्रम मे मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने रामनगर से वचुर्वल प्रतिभाग किया। उन्होने कहा कि प्रदेश मे 06 पुलों का लोकार्पण किया गया है। उत्तराखण्ड में जोशीमठ -मलार रोड पर रानी पुल लागत 348.12 लाख, ऋषिकेश- धरासू सडक पर खादी पुल लागत 513.00 लाख, जौलजीबी-मुनस्यारी रोड पर कुरकुटिया ब्रिज लागत 142.00 लाख, जौलजीबी-मुनस्यारी सडक पर जुनालीगढ ब्रिज लागत 649.62 लाख, तवाघाट-घाटियाबागढ सडक पर जुंटीगढ ब्रिज लागत 156.00 लाख तथा मुनस्यारी- बगडियार-मिलन सडक पर लास्पा पुल लागत 120.00 लाख के पुलों का लोकापर्ण किया।

उन्होने कहा कि दुर्गम क्षेत्रों मे पुल सडक निर्माण सामरिक दृष्टि से अति महत्वपूर्ण है। बीआरओ ने दुर्गम क्षेत्रों मे दिन-रात ठंड व बर्फबारी मे भी लगातार काम कर पुलों का निर्माण किया यह बहुत ही सराहनीय व साहसिक कार्य है। उन्होने कहा इन पुलों के निर्माण से क्षेत्रीय जनता के साथ ही सैन्य गतिविधियों के लिये बहुत सुविधा मिलेगी।

वर्चुवल लोकार्पण मे सांसद अजय टम्टा ने भी प्रतिभाग किया।

श्री गंगा सभा घाटों की रिपेयरिंग में जुटी, मलबा से अटा आरती स्थल

बीते दिनों 18 जून को त्रिवेणी घाट का सम्पूर्ण परिसर एवं आरती स्थल को काफी नुकसान पहुंचा। यहां तक की बाढ़ के साथ आये मलबे ने आरती स्थल पर लगी रेलिंग बारोड को काफी नुकसान पहुंचाया है इसके चलते गंगा आरती में काफी दिक्कतें आ रही हैं, आरती स्थल को पुनः दुरुस्त करने मलवा हटाने की दिशा में श्री गंगा सभा जोर-शोर से जुट गई है।

महासभा के महामंत्री धीरेंद्र जोशी ने बताया कि नुकसान की मरम्मत के लिए कुशल कारीगरों की सहायता से रिपेयरिंग का कार्य आरंभ किया गया है ताकि कोरोना काल के बाद आरती स्थल में पुनः मां गंगा की सांध्य कालीन आरती आर्मी की जा सके। उन्होंने बताया कि बाढ़ के साथ आए मलबे ने चेंजिंग रूम को भी नुकसान पहुंचाया है। इसके अलावा घाट परिसर पर लगे सीसीटीवी कैमरे, विद्युत व्यवस्था को भी क्षतिग्रस्त किया है। कहा कि संपूर्ण घाट परिसर को दुरुस्त किया जा रहा है।

लोकसभा अध्यक्ष के दो वर्ष के कार्यकाल पूर्ण होने पर देशभर से पीठासीन अधिकारियों की हुई वर्चुअल बैठक

देहरादून। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला जी के दो साल का कार्यकाल पूर्ण होने पर लोक सभा, दिल्ली द्वारा देश भर के पीठासीन अधिकारियों के साथ वर्चुअल बैठक का आयोजन किया गया।इस बैठक के दौरान लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला द्वारा अपने दो साल के कार्यकाल में किए गए कार्यों की जानकारी दी गयी। वहीं सभी राज्यों के पीठासीन अधिकारियों ने भी अपने -अपने कार्यकाल के अनुभव को भी साझा किया गया।

लोक सभा अध्यक्ष अध्यक्षता में आयोजित वर्चुअल बैठक के दौरान उत्तराखंड विधानसभा अध्यक्ष ने भी प्रतिभाग किया। विधानसभा अध्यक्ष प्रेम चंद अग्रवाल ने अपने चार साल के कार्यकाल के कार्यों को डिजिटल पटल के माध्यम से बैठक में रखा। इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि लोकसभा अध्यक्ष के कुशल मार्गदर्शन एवं नेतृत्व में संसदीय लोकतंत्र की कार्यवाहियों को मजबूती प्रदान हुई है। इस अवसर पर विधानसभाध्यक्ष ने लोकसभा अध्यक्ष को उनके दो वर्ष का सफलतम कार्यकाल पूर्ण होने पर अपने बधाई एवं शुभकामनाएं दी। वर्चुअल बैठक के दौरान देश भर के सभी राज्यों के पीठासीन अधिकारी ऑनलाइन माध्यम से जुड़े रहे।

इस अवसर पर लोक सभा अध्यक्ष द्वारा सभी राज्यों में कोरोना की वर्तमान स्थिति के बारे में भी जानकारी ली गई। वहीं लोकसभा अध्यक्ष द्वारा सभी राज्यों के विधानसभा सत्र संचालन से संबंधित विषयों पर भी वार्ता की गई ।

विश्व संगीत दिवस पर सुमधुर गीतों का कार्यक्रम

विश्व संगीत दिवस यानी 21 जून को विश्वभर के संगीतज्ञ एक साथ एक मंच पर जुटेंगें। यह कार्यक्रम संगम कला ग्रुप की ओर से अपने फेसबुक पेज पर आयोजित किया जाएगा।

संगम कला ग्रुप के क्षेत्रीय समन्वयक डॉ. धीरेंद्र रांगड़ ने बताया कि ग्रुप के ग्लोबल अध्यक्ष वी.एस.के. सूद की ओर से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गीत और संगीत के भव्य कार्यक्रम का आयोजन फेसबुक पेज पर किया जा रहा है। यह कार्यक्रम शाम छह बजे आरंभ होगा, जो देर रात्रि 12 बजे तक आयोजित होगा। इसमें 101 नवोदित वाद स्थापित गायक अपना वीडियो संगम कला ग्रुप के फेसबुक पेज पर अपलोड कर या क्षेत्रीय समन्वयक को व्हाट्सएप कर कार्यक्रम में सम्मिलित हो सकते है। कोरोना महामारी के चलते स्टेज प्रोग्राम के स्थान पर ऑनलाइन ‘सिंह एंड सेलिब्रेट’ कार्यक्रम की घोषणा की गई।

ग्रुप के अध्यक्ष सूद ने बताया कि यह ग्रुप पिछले 42 वर्षों से निरंतर राष्ट्रीय स्तर पर गायन प्रतियोगिताओं का आयोजन करता आ रहा है। प्रसिद्ध पार्श्व गायक सोनू निगम, हरदीप कौर, सुनिधि चैहान, श्रेया घोषाल, आनंद राज आनंद, तोशी आदि गायकों ने संगम कला ग्रुप से ही अपने कैरियर की शुरुआत की।उन्होंने कहा कि संगम कला ग्रुप गायकी के दीवानों को राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा दिखाने और प्रसिद्धि पाने का महत्वपूर्ण मंच है।

कार्यक्रम आयोजकों में नंदा मेमन, देहरादून के समन्वयक जगदीश बाबला, मसूरी के समन्वयक रूपचंद गुरुजी व सचिव जय मोहन, रूद्राक्ष आदि प्रमुख हैं।

शहीद तारा सिंह थापा की स्मृति में स्मृतिद्वार बनवाने को विस अध्यक्ष को सौंपा ज्ञापन


27 अक्टूबर 1965 को भारत और पाकिस्तान के बीच हुए युद्ध में देश की हिफाजत करते हुए अपने प्राणों की आहूति देने वाले तीर्थनगरी के शहीद राइफलमैन तारा सिंह थापा की स्मृति में स्मृति द्वार बनवाने की मांग उठने लगी है।
आज शहीद के छोटे भाई खड़क सिंह थापा ने ऋषिकेश में उनके पैतृक निवास नेहरू ग्राम में उनकी स्मृति में स्मृति द्वार व स्मारक बनवाने को विधानसभा अध्यक्ष प्रेम चन्द अग्रवाल को ज्ञापन सौंपा। कहा कि सरकार उनके भाई शहीद तारा सिंह थापा के बलिदान का सम्मान करते हुए उनकी याद में स्मृति द्वार व स्मारक बनाए।

इस पर विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल ने उचित एवं त्वरित कार्यवाही का आश्वासन दिया है। ज्ञापन देने वालों में पार्षद शिव कुमार गौतम, खड़क सिंह थापा, रमेश थापा, देवम थापा, रवि थपलियाल, एडवोकेट राकेश पारछा आदि मौजूद रहे।

ऋषिकेशः नशे के रोगियों को मिल सकेगा उच्चस्तरीय उपचार, एम्स में शुरू हुआ एटीएफ

सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा वर्ष-2019 में किए गए एक शोध में यह पाया गया कि उत्तराखंड में तम्बाकू के अलावा सबसे ज्यादा इस्तेमाल किए जाने वाले नशे के प्रकारों में शराब, कैनाबिस उत्पाद (भांग/गांजा/चरस), ओपिऑइड्स (स्मैक/हेरोइन/कोकेन/ डोडा आदि ) व इन्हेलन्ट्स भी प्रमुखरूप से शामिल है।
इस सर्वे रिपोर्ट में बताया गया है कि उत्तराखंड में विभिन्न प्रकार का नशा करने वाले मौजूदा पुरुष उपभोगकर्ताओं की संख्या शराब से 38.1 प्रतिशत, कैनाबिस उत्पाद से 1.4 प्रतिशत, ओपिऑइड्स से 0.8 प्रतिशत और इन्हेलन्ट्स का इस्तेमाल करने वाले 10 से 17 वर्ष तक के बच्चों की संख्या 1.7 फीसदी है। देशभर में हर पांच में से एक व्यक्ति शराब और हर 11 में से एक व्यक्ति कैनाबिस नशे का रोगी है, जिन्हें तत्काल उपचार की नितांत आवश्यकता है।
इसके अलावा लगभग 77 लाख भारतियों को ओपिऑइड्स नशे के लिए शीघ्र इलाज शुरू करने की जरुरत है। आजकल देखा गया है कि वयस्क लोग ही नहीं बल्कि बच्चे भी नशे के रोगी बनते जा रहे हैं। इसकी एक अहम वजह है लोगों के जीवन में स्ट्रेस बहुत बढ़ गया है। कोरोना पान्डेमिक के चलते भी इस स्ट्रेस में बहुत बड़ा इजाफा हुआ है। ऐसे लोगों में आम धारणा बन गई है कि नशा करना स्ट्रेस से जूझने और निपटने का एक आसान तरीका है, मगर यह स्ट्रेस को कम अथवा समाप्त करने का सबसे गलत तरीका है।
नशे की शुरुआत आमतौर पर खुद व्यक्ति की इच्छा से, प्रयोग करने की उत्सुकता, दोस्तों के दबाव, पारिवारिक परेशानियों, काम का स्ट्रेस व अन्य परेशानियों से होने की वजह से होती है। मगर एक बार इससे ग्रसित होने पर यह नशे का रोग बन जाता है। नशे की बीमारी केवल एक आदत, इच्छाशक्ति में कमी या कमज़ोरी का कम होना नहीं बल्कि एक काम्प्लेक्स तरीके की दिमागी बीमारी है। नशे से व्यक्ति के दिमाग में अस्थायी एवं स्थायी बायोकैमिकल बदलाव आते हैं, जिसके लिए इलाज की जरुरत पड़ती है।

नशा ग्रस्त व्यक्ति का दिमाग उसका साथ नहीं दे पाता अथवा वह इस नशे की बीमारी से अपने आप कभी भी बाहर नहीं आ पाता। नशे के रोग से बहुत से लोगों का घर- परिवार खराब हो जाता है और प्रतिवर्ष लाखों लोग अपने जीवन से हाथ धो बैठते हैं। इसके साथ ही पीड़ित व्यक्ति के आर्थिक, सामाजिक जीवन व रोजमर्रा की जिंदगी पर भी इसका बहुत हद तक दुष्प्रभाव पड़ता है। निदेशक प्रोफेसर रवि कांत के निर्देशन में शुरू की गई एटीएफ सर्विस ऐसे लोगों के लिए वरदान साबित हो सकती है और वह फिर से मुख्यधारा से जुड़कर अपने अमूल्य जीवन को संवार सकते हैं।
एम्स निदेशक ने बताया कि रोगियों को नशे की समस्याओं से दूर करने के लिए एम्स ऋषिकेश ने एडिक्शन ट्रीटमेंट फैसिलिटी (ए.टी.एफ.) की शुरुआत की है, जिसमें नशावृत्ति के शिकार रोगियों को परामर्श व उपचार की सभी प्रकार उच्चस्तरीय सुविधाएं नि:शुल्क उपलब्ध कराई जाएंगी। उन्होंने बताया कि संस्थान में इस सुविधा को ए.टी.एफ. एन. डी. डी.टी.सी. एम्स दिल्ली द्वारा समन्वित तथा भारत सरकार के सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय की सहायता से शुरू किया गया है। इस सेवा के शुरू किए जाने का उद्देश्य प्रदेश में नशे से ग्रस्त रोगियों को मुफ्त एवं उच्चस्तरीय उपचार मुहैय्या कराना है। संस्थान के मनोचिकित्सा विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर एवं ए.टी.एफ. के नोडल ऑफिसर डा. विशाल धीमान ने बताया कि एम्स में संचालित ए.टी.एफ के तहत, ओपीडी OPD और एडमिशन (IPD) दोनों तरह से इलाज की सुविधाएं उपलब्ध हैं।
अस्पताल में सभी मरीजों के लिए बिस्तर की सुविधा, सभी प्रकार की आवश्यक दवाएं, अत्याधुनिक उपचार प्रणाली निशुल्क उपलब्ध कराने के साथ ही रोगियों की काउंसलिंग भी की जाएगी। जिसमें उन्हें नशे की तलब को कंट्रोल करने की अलग-अलग तकनीकें बताई जाएंगी, साथ ही रोगियों की मोटिवेशनल इंटरव्यूइंग भी की जाएगी।

नशा छोड़ने के इच्छुक लोग इस नंबर से लें सहायता
संस्थान के मनोचिकित्सा विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर एवं ए.टी.एफ. के नोडल ऑफिसर डा. विशाल धीमान जी ने बताया कि नशा छोड़ने के इच्छुक लोगों के लिए एम्स के मनोचिकित्सा विभाग द्वारा हेल्पलाइन नंबर 7456897874 (टेली-एडिक्शन सर्विस) भी जारी किया गया है, जिसमें सोमवार प्रातः 9:00 बजे से शुक्रवार शाम 4:00 बजे तक और शनिवार सुबह 9:00 बजे से दोपहर 1:00 बजे तक चिकित्सकीय परामर्श लिया जा सकता है। ए.टी.एफ प्रोजेक्ट का उद्देश्य उत्तराखंड और इसके आसपास के क्षेत्रों को नशखोरी के विरुद्ध लोगों को जागरुक करना और इससे ग्रसित रोगियों को मुफ्त इलाज उपलब्ध कराना है, जिससे वह समाज की मुख्यधारा से जुड़कर अपनी उन्नति के साथ सामान्य जीवन जी सकें।

देवस्थानम बोर्ड को लेकर तस्वीर साफ करें सीएम तीरथ सिंह रावत

उत्तराखंड में नेतृत्व परिवर्तन के बाद मुख्यमंत्री बनें तीरथ सिंह रावत ने तीर्थ पुरोहित हक हकूकधारियों को भरोसा दिया था कि सरकार देवस्थानम बोर्ड पर पुर्नविचार करेगी। मगर, ऐसा होता नहीं दिख रहा है। इस पर चारधाम तीर्थ पुरोहित हक हकूकधारी महापंचायत के अध्यक्ष ने सवाल किए हैं।

उन्होंने कहा कि सरकार को देवस्थानम बोर्ड पर स्टैंड क्लीयर करना चाहिए। सरकार को बताना चाहिए कि आखिर मुख्यमंत्री का पुर्नविचार से संबंधित आश्वासन का क्या हुआ। कोटियाल ने कहा कि एक ओर सरकार पुर्नविचार का आश्वासन देती है और दूसरी ओर बोर्ड को पूरा आकार देने में जुटी हुई है। कहा कि चारधाम तीर्थ पुरोहित हक हकूकधारी महापंचायत का स्टैंड क्लीयर है।

महापंचायत चार धामों में पहले जैसी व्यवस्था चाहती है। धामों में सरकार के बहुत अधिक दखल के पक्ष मे ंनहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार के इस तर्क में कोई दम नहीं है कि इससे विकास होगा। उन्होंने सवाल किया कि धामों के विकास के लिए तीर्थों की व्यवस्था में छेड़छाड़ ठीक नहीं है।

महापंचायत के अध्यक्ष कोटियाल ने दो टूक कहा कि गांधीवादी तरीके से सरकार के सम्मुख पक्ष रखा जा चुका है। तीर्थ पुरोहित हक हकूकधारी याचक कतई नहीं बनेंगे। संघर्ष जारी रखेंगे। कहा कि सरकार की उन्हें थकाने की स्ट्रेटजी कामयाब होने वाली नहीं है।

पीएम मोदी से मिले सीएम, ग्रामीण इलाकों में समय पर वैक्सीन पहुंचाने के लिए अतिरिक्त कोटे की भी मांग


मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से भेंट की। आधा घंटे चली मुलाकात में मुख्यमंत्री ने देश में 18 वर्ष की आयु से ऊपर वाले समस्त भारतीयों का कोरोना टीकाकरण मुफ्त किए जाने पर प्रधानमंत्री का आभार व्यक्त किया। साथ ही 80 करोड़ लोगों को मुफ्त अनाज देने के लिए भी प्रधानमंत्री का आभार व्यक्त किया, राज्य को ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल-लाईन की सौगात देने हेतु आभार व्यक्त किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के अभूतपूर्व वीजन के तहत राज्य के चारधामों में सड़कों का कार्य तीव्र गति से चल रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड के वित्तीय संसाधन अत्यन्त सीमित है, इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री को कंडाली की जैकेट भी भेंट की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कोविड-19 से लड़ने हेतु राज्य को भारत सरकार की ओर से हर प्रकार की सहायता मिली है, इसके तहत प्रधानमंत्री के निर्देशों के क्रम में डी0आर0डी0ओ0 के द्वारा निर्मित अस्पताल, जो क्रमशः ऋषिकेश एवं हल्द्वानी में बनाये गये हैं, जिससे समस्त जनमानस को अत्यधिक लाभ मिला है, इसके लिए भी उन्होंने प्रधानमंत्री को धन्यवाद दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री की दूरदर्शी सोच का नतीजा है कि श्री केदारनाथ धाम का भव्य रूप विकसित हो गया है एवं श्री बद्रीनाथ धाम के सम्बन्ध में भी रूपरेखा तैयार हो रही है। मुख्यमंत्री ने स्थिति सामान्य होने पर प्रधानमंत्री को बद्री-केदार डेवलपमेंट प्रोजेक्ट के लोकार्पण के लिए न्यौता दिया। मुख्यमंत्री ने राज्य को भारत सरकार द्वारा तीन डॉप्लर रडार की स्वीकृति देने के प्रति आभार व्यक्त करते हुए वैली हेतु 10 छोटे डाप्लर रडार उपलब्ध कराने का अनुरोध किया। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री से राज्य के कुमाऊँ क्षेत्र में ‘एम्स’ की स्थापना या ऋषिकेश ऐम्स की शाखा स्थापित करने का भी अनुरोध किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड एक हिमालयी पर्वतीय राज्य हैं। इसको सम्पूर्ण रूप से ऑर्गेनिक प्रदेश के रूप में विकसित किये जाने हेतु भारत सरकार से विशेष अनुदान का अनुरोध है। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड का पर्यावरण अत्यन्त संवेदनशील है, अतः सम्पूर्ण हिमालयी क्षेत्र में हिमनद का अध्ययन तथा जल सो्रतों को किस प्रकार सुरक्षित रखना है, इसके सम्बन्ध में सम्पूर्ण अध्ययन करने हेतु उत्तराखण्ड में ‘हिमनद एवं जल संसाधन शोध केन्द्र’ की स्थापना की जाए।

मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री से राज्य में मानसून व आपदा के दौरान सड़के बंद होने की स्थिति में ग्रामीण इलाकों में समय पर वैक्सीन पहुंचाने के लिए अतिरिक्त कोटे की भी मांग की।