स्वामी सत्यमित्रानन्द गिरि महाराज का जीवन प्रेरणादायीः मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने राघव कुटीर भारत माता जनहित ट्रस्ट, हरिपुर कलां में निवृत्त जगद्गुरू शंकराचार्य पद्मभूषण ब्रह्मलीन पूज्य गुरूदेव स्वामी सत्यमित्रानन्द गिरि महाराज की दिव्य स्मृति में नवनिर्मित समाधि मन्दिर के शिलान्यास कार्यक्रम व श्री सद्गुरूदेव पुण्य स्मृति दर्शन सभागार के लोकार्पण कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। श्री सद्गुरूदेव पुण्य स्मृति दर्शन सभागार में स्वामी सत्यमित्रानन्द गिरि महाराज के जीवन से सम्बन्धित दुर्लभ चित्रों, महान हस्तियों की प्रतिमायें, ग्रन्थों व पुस्तकों के संकलन को बड़े ही व्यवस्थित ढंग से प्रत्येक के लिये निर्धारित स्थानों में प्रदर्शित किया गया है। इस अवसर पर सहकार्यवाह डॉ0 कृष्ण गोपाल सह सरकार्यवाह, भारत माता मन्दिर एवं समन्वय ट्रस्ट के अध्यक्ष जूनापीठाधीश्वर आचार्य महामण्डलेश्वर स्वामी अवधेशानन्द गिरि महाराज, विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचन्द्र अग्रवाल, शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक, विशिष्ट जन-प्रतिनिधि उपस्थित थे। मुख्यमंत्री ने स्वामी सत्यमित्रानन्द गिरि महाराज के जीवन से सम्बन्धित संकलित वस्तुओं का अवलोकन किया तथा उन्हें प्रेरणादायी बताया।
इस अवसर पर आचार्य महामण्डलेश्वर स्वामी अवधेशानन्द गिरि महाराज ने मुख्यमंत्री व उपस्थित विशिष्टजनों को अंगवस्त्रम् भेंटकर सम्मानित किया। आचार्य महामण्डलेश्वर स्वामी अवधेशानन्द गिरि महाराज ने कहा कि मुख्यमंत्री के कुशल नेतृत्व में महाकुम्भ सम्पन्न होगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वामी सत्यमित्रानन्द गिरि महाराज प्रेरणादायी व्यक्तित्व के धनी थे। उन्होंने भारत माता ट्रस्ट मन्दिर की स्थापना की। वह एक बहुत बड़े सन्त थे। उनको शंकराचार्य की उपाधि मिली और उन्होंने उसका परित्याग किया और जो धर्मदण्ड है, उसे उन्होंने मां गंगा को समर्पित किया। वे आध्यात्म व व्यवहार दोनों के समन्वयक थे। आज उनकी याद में स्मृति मन्दिर का शिलान्यास किया गया है, जो युगों-युगों तक हमारे आने वाली पीढ़ी को प्रेरणा देगा।
इस अवसर पर आई0डी0 शास्त्री, सचिव समन्वय सेवा ट्रस्ट एवं भारत माता जनहित ट्रस्ट, भारत माता मन्दिर, महामण्डलेश्वर गोविन्द गिरि महाराज, स्वामी ललितानन्द, स्वामी रामदेव, ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारी, स्वामी हरचेतनानन्द, सतपाल ब्रह्मचारी, लक्सर विधायक संजय गुप्ता, ज्वालापुर विधायक सुरेश राठौर, मेला अधिकारी दीपक रावत, जिलाधिकारी सी0 रविशंकर आदि उपस्थित थे।

गुरु नानक देव के विचार आज भी प्रासंगिकः महापौर

श्री गुरु नानक देव जी महाराज का प्रकाशोत्सव तीर्थ नगरी में श्रद्धा एवं उत्साह के साथ मनाया गया। गुरुद्वारा श्री सिंह सभा में दिन भर रागी जत्थों ने गुरु की महिमा का गुणगान किया। कोरोना काल के चलते बेहद सादगीपूर्ण माहौल में आयोजित हुए। गुरु पर्व के दौरान इस वर्ष गुरु महाराज का लंगर तो नही बरता गया लेकिन फिर भी गुरुद्वारे में अमृत संचार हुआ।
महापौर अनिता ममगाई ने भी संगतों सहित गुरुद्वारा परिसर में मत्था टेक शहर की खुशहाली के लिए अरदास कराई। इस मौके पर महापौर ने कहा कि सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक देव जी महाराज का प्रकाशोत्सव देेेश और दुनियाभर मेें सिर्फ सिख समाज ही नहीं बल्कि मानवता तथा इंसानियत को मानने वाले दुनिया भर के लोग आज मना रहे हैं। उन्होंनेे गुरु नानक जी को नमन करतेे हुए आमजनमानस सेे उनके बनाये गये सिद्धांतों व उनके आदर्शों पर चलने का आह्वान भी किया।
इससे पूर्व गुरुद्वारा परिसर पहुंची महापौर का गुरुद्वारा श्री सिंह सभा की ओर से सम्मान भी किया गया। गुरुद्वारे में आयोजित दोपहर के दीवान में सरदार गोविंद सिंह, गुरबचन सिंह, मंगा सिंह, सरदार इंद्रपाल सिंह, सरदार मक्खन सिंह, सरदार तेजिंदर सिंह, राजेंद्र सिंह, गुरमीत सिंह, कृपाल सिंह, बूटा सिंह, अजीत सिंह, देवेंद्र सिंह, जसविंदर सिंह, अमनदीप सिंह, प्रदीप सिंह आदि प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।

नरेश बंसल ने राज्य सभा सांसद के रुप में ली शपथ

आज नवनिर्वाचित सासंद राज्यसभा नरेश बंसल परिवारजनों के साथ संसद पहुंचे। वहां उन्होंने राज्यसभा के मुख्यहाॅल मे आयोजित नवनिर्वाचित राज्यसभा सांसदो के शपथग्रहण समारोह मे भाग लिया। कार्यक्रम में कर्नाटक, उत्तरप्रदेश के नवनिर्वाचित संसद सदस्यों के साथ उन्होंने पद एवं गोपनीयता की शपथ ली।
उत्तराखंड से अभी एक सीट खाली होने के चलते केवल नरेश बंसल ने शपथ ली। सभी को शपथ महामहिम उपराष्ट्रपति व सभापति राज्यसभा एम वैकंेया नायडू ने दिलाई। बंसल ने लगभग 12ः10 बजे मातृभाषा हिन्दी मे शपथ ली। उत्तरप्रदेश से नवनिर्वाचित सांसद व केन्द्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने भी नरेश बंसल के साथ शपथ ली। सभापति महोदय ने कहा कि सदन का सत्र कोरोना संकट काल मे कब होगा, यह अभी निश्चित नही है। राज्य सभा की समिति के महत्वपूर्ण कार्य चल रहे है, जिसकी समय से प्रगती हेतु नय सदस्यों की आवश्यकता है, जो उसमे प्रतिभाग कर समिति के कार्यो को आगे बढ़ाएगे। इसी हेतु सत्र से पहले यह शपथ कार्यक्रम आयोजित किया गया ताकि नए सदस्य समिति की बैठको मे भाग ले सके ।
महामहिम उपराष्ट्रपति व सभापति राज्यसभा एम वैकंया नायडू जी ने सभी को मास्क लगाने व दो गज की दुरी बनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने सभी को नवीन दायित्व के लिये बधाई और शुभकामनाएं दी व सभी अच्छा कार्य करे यह कमाना की। उन्होंने सभी सदस्यों को राज्य सभा के प्रोटोकोल से समबन्धित विभिन्न पुस्तकों को पढ़ने के लिए कहा जिससे नए सदस्य को राज्य सभा की कार्यवाही मे भाग लेने मे सुगमता हो सभी नियमों का ज्ञान हो। उन्होंने कहा कि सभी लोगों की राज्य सभा सदस्यो से बहुत अपेक्षा होती है, उनके आचरण, व्यवहार को युवा पीढ़ी फोलो करता है। उन्होंने सभी को सदन की मर्यादा कायम रखने के लिए कहा। उन्होंने कहा की किसी भी विषय पर वाद-विवाद, चर्चा व उसके बाद निर्णय होना चाहिए ।
इस अवसर पर नरेश बंसल ने कहा कि वह नव दायित्व को पूरी निष्ठा व ईमानदारी से निर्वाहन करेंगे व राज्य व देश हित मे कार्य करेंगे। उनका मंत्र सबका साथ सबका विकास व सबका विश्वास होगा। वह राज्य और केंद्र सरकार के बीच सेतु के रूप में कार्य करेंगे व उत्तराखंड राज्य मे विकास कैसे हो, केन्द्रीय योजनाओं का ज्यादा से ज्यादा लाभ प्रदेश को मिले यही उनका प्रयास होगा। उन्होंने कहा की केन्द्रीय नेतृत्व ने जो विश्वास उन पर दिखाया है वह उस पर खरा उतरेगे।
कार्यक्रम मे मुख्य रूप से नेता सदन डाॅ. थावरचंद गहलोत, केन्द्रीय संसदीय कार्यमंत्री प्रह्लाद जोशी, संसदीय कार्य राज्य मंत्री अर्जुन मेघवाल, वी मुरली धरन, केन्द्रीय शिक्षा मंत्री डाॅ. रमेश पोखरियाल निशंक, सांसद अजय भट्ट आदि उपस्थित रहे।

सुरेश भट्ट की एंट्री से कई भाजपाई बेचैन

भारतीय जनता पार्टी उत्तराखंड के प्रदेश अध्यक्ष बंशीधर भगत ने सुरेश भट्ट को भाजपा उत्तराखंड का प्रदेश महामंत्री नियुक्त किया है। बंशीधर भगत ने आशा व्यक्त की है कि सुरेश भट्ट के प्रदेश महामंत्री बनने से उत्तराखंड में संगठन को और गति मिलेगी व उनके अनुभव का लाभ प्रदेश भाजपा को प्राप्त होगा।
भाजपा मीडिया प्रभारी डॉ देवेंद्र भसीन ने बताया कि उत्तराखंड भाजपा में प्रदेश महामंत्री के तीन पद हैं। इनमें से एक पद बंशीधर भगत के अध्यक्ष रूप में पद ग्रहण करने व उनके द्वारा प्रदेश पदाधिकारियों व कार्यसमिति की घोषणा के बाद से ही रिक्त चल रहा था। इस रिक्त पद प्रदेश अध्यक्ष द्वारा सुरेश भट्ट की नियुक्ति की गई है। सुरेश भट्ट इससे पहले हरियाणा में भाजपा प्रदेश महामंत्री (संगठन) थे।
बतातें चले कि सुरेश भट्ट की एंट्री से प्रदेश भाजपा के कई नेताओं में भी हलचल देखी जा रही है। खासतौर से संघ के वो चेहरे जो आज भाजपा में बड़ा नाम बन चुके है। उनमें बैचेनी देखने को मिल रही है। अपने भविष्य को लेकर अब वह आंशकित देखे जा रहे है। गौरतलब है कि संघ के चेहरे के रुप में त्रिवेन्द्र सिंह रावत अभी वर्तमान में मुख्यमंत्री है। दूसरी लाइन के नेता भी भविष्य में मुख्यमंत्री का ख्वाब संजोये हुए थे। जो सुरेश भट्ट के आने के बाद धूमिल होती नजर आ रही है। मोदी के करीबी नेताओं में सुरेश भट्ट का नाम आता है। जाटलैंड यानि की हरियाणा में भाजपा की पकड़ बनाने में सुरेश भट्ट का महत्वपूर्ण योगदान है।

गंगा स्नान को प्रशासन ’ना’, गाइडलाइन का पालन करे

हरिद्वार में 30 नवंबर के कार्तिक पूर्णिमा (पूर्णमासी) के गंगा स्नान को प्रशासन ने कोरोना संक्रमण को देखते हुए रद कर दिया है। बाहरी राज्यों से आने वाले तीर्थ यात्रियों के लिए 29 और 30 नवंबर को हरिद्वार जिले की सीमाएं सील रहेंगी। हरकी पैड़ी पर स्नान पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया जाएगा। कार्तिक पूर्णिमा का गंगा स्नान रद्द होने के बाद हरकी पैड़ी पर कोई भी यात्री या फिर स्थानीय व्यक्ति स्नान को न पहुंच सके इसके लिए हरकी पैड़ी पर पुलिस का पहरा होगा। हरकी पैड़ी और आसपास के गंगा घाटों में पुलिसकर्मियों की ड्यूटी लगाई जाएगी। इसके लिए नगर कोतवाली पुलिस ने दो प्लाटून पीएसी के अलावा 20 दरोगा और 50 कांस्टबल की मांग की है।
हरिद्वार में 30 नंवबर को होने वाले कार्तिक पूणिमा के स्नान पर रद्द कर दिया गया है। साथ ही सीमाओं पर चैकसी बढ़ाने की तैयारी है। सीमाओं को सील किया जाएगा, ताकि कोई भी यात्री हरिद्वार में न आ सकें। स्थानीय लोगों के लिए भी हरकी पैड़ी पर प्रतिबंध किया गया है। उधर श्रीगंगा सभा और व्यापारी इसका विरोध कर चुके है। इनका कहना है कि हरकी पैड़ी को प्रतिबंध से मुक्त किया जाए। बीते बुधवार को प्रशासन के साथ हुई बैठक में व्यापारी और गंगा सभा के पदाधिकारियों ने अपनी नाराजगी जाहिर कर दी थी।
जिला प्रशासन के आदेशों के पालन के लिए पुलिस पूरी तरह तैयार हो गई है। हरकी पैड़ी पर स्नान के दिन पुलिस का पहरा रहेगा। हरकी पैड़ी, सीसीआर टॉवर समेत अन्य जगह बैरिकेडिंग भी की जाएगी। इसके लिए दो प्लाटून पीएसी के साथ ही 20 दरोगा और 50 पुलिसकर्मियों की मांग की है। यह पुलिसकर्मी स्नान के दिन ड्यूटी करेंगे। नगर कोतवाली प्रभारी अमरजीत सिंह ने बताया कि स्नान के रद्द होने के बाद पुलिसकर्मियों की अतिरिक्त ड्यूटी लगाई जाएगी। इसके लिए डिमांड भेज दी गई है।

अपने घरों में ही मां गंगा का स्मरण कर स्नान करें-अशोक कुमार
पुलिस महानिदेशक लाॅ एंड आर्डर उत्तराखंड अशोक कुमार ने कहा कोविड-19 के दृष्टिगत, 30 नवम्बर 2020 को कार्तिक पूर्णिमा के पावन पर्व पर सभी श्रद्धालुओं से विशेष अपील। उन्होंने कहा कृपया प्रशासन का सहयोग करें और कोरोना काल में अपने घरों में ही मां गंगा का स्मरण कर स्नान करें। आप सभी से अनुरोध है इस वर्ष 30 नवम्बर को कार्तिक पूर्णिमा पर्व पर स्नान करने हरिद्वार न आएं।

त्रिवेन्द्र की घोषणा 25 हजार करोड़ रुपये से होगा ग्रीष्मकालीन राजधानी का विकास

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने घोषणा की है कि गैरसैण परिक्षेत्र का ग्रीष्मकालीन राजधानी के अनुरूप विकास के लिए अगले दस वर्षों में 25 हजार करोड़ रूपए खर्च किये जाएंगे। यहां के सुनियोजित विकास के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में समिति बनाई जाएगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि गैरसैंण ग्रीष्मकालीन राजधानी है। राजधानी के लिये जो जरूरी अवस्थापनात्मक विकास जरूरी होता है, उसके लिये मैं घोषणा करता हूँ कि हम आने वाले 10 वर्षों में 25 हजार करोङ रूपए खर्च करेंगे। 25 हजार करोङ रूपए से ग्रीष्मकालीन राजधानी के पूरे परिक्षेत्र का विकास होगा।
उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण (भराडीसैंण) मे 21 वां राज्य स्थापना दिवस (20वीं वर्षगांठ) बडे हर्षोल्लास के साथ मनाई गई। भराडीसैंण विधानसभा परिसर में आईटीबीपी और पुलिस के जवानो की भव्य रैतिक सेरेमोनियल परेड के साथ रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण (भराडीसैंण) विधानसभा परिसर से पूरे प्रदेशवासियों को राज्य स्थापना दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं दी। यह पहला मौका है जब प्रदेश के किसी मुखिया ने ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित होने के बाद गैरसैंण मे राज्य स्थापना दिवस की सालगिरह मनायी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज उत्तराखण्ड 21 वें वर्ष में प्रवेश कर गया है। इस ऐतिहासिक अवसर पर ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैण के भराङीसैण स्थित विधानसभा परिसर में हम संकल्प लेते हैं कि हम अपनी एक-एक बहन के सिर से घास का बोझ हटा देंगे। इसके लिये व्यापक स्तर काम चल रहा है। हमारी माताएं और बहनें बहुत मेहनती हैं। हमारी कोशिश है कि इनका स्किल डेवलपमेंट कर आर्थिक तौर पर सशक्त किया जाए।

मुख्यमंत्री ने शहीद राज्य आंदोलनकारियों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए सभी राज्य आंदोलनकारियों को नमन किया। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी जी का स्मरण करते हुए कहा कि उन्होंने ही यहां की भावनाओं को समझते हुए उत्तराखण्ड राज्य का निर्माण किया था। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड का निर्माण दूरस्थ पर्वतीय क्षेत्रों के विकास के उद्देश्य से किया गया था। मैं बहुत से दूरस्थ और सीमांत गांवों में गया हूँ। जनभावनाओ का सम्मान करते हुए गैरसैंण को प्रदेश की ग्रीष्मकालीन बनाया है।
गैरसैंण प्रतीक है पहाङवासियों की पीड़ा का, दर्द का।
हमारी प्राथमिकता शुरू से ही दूरस्थ क्षेत्रों का विकास रहा है। इसी क्रम में हमने रूरल ग्रोथ सेंटर प्रारंभ किये। 104 को स्वीकृति दी जा चुकी है। 40 से अधिक शुरू भी हो गये हैं। बहनों को सशक्त करने के लिये हम महिला स्वयं सहायता समूहों को 5 लाख रूपये तक का ऋण बिना ब्याज के दे रहे हैं।
राज्य में प्रकृति ने जो भी हमें दिया है, उनमें रोजगार की अपार सम्भावनाएं हैं। हम स्वरोजगार को अभियान के तौर पर ले रहे हैं। मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना में ऋण और अनुदान की व्यवस्था है। जिलों में स्वरोजगार पर जिला योजना का 40 प्रतिशत खर्च करने के निर्देश दिये हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में 1 रुपये में पानी का कनेक्शन दे रहे हैं। कैम्पा में 10 हजार लोंगो को रोजगार देने पर काम कर रहे हैं। अटल आयुष्मान उत्तराखंड योजना में 5 लाख रूपये तक निशुल्क ईलाज की सुविधा दी गई है। महाविद्यालयों में 94 प्रतिशत फैकल्टी है। 500 स्कूलों में स्मार्ट क्लासेज हैं। 700 और स्कूलों में स्मार्ट क्लासेज शुरू की जाएंगीं। कालेजों में वाई फाई कनेक्टीवीटी दी जा रही है। हमने आशा कार्यकत्रियों के मानदेय और वृद्धावस्था, विधवा व विकलांग पेंशन में बढोतरी की है।
मुख्यमंत्री ने राज्य के लिए अनेक महत्वपूर्ण घोषणाएं करते हुए कहा कि राज्य के उत्पादों में स्वयं सहायता समूह को रू. 5.00 लाख तक प्रोक्योरमेंट में वरीयता दी जायेगी। लगभग 500 सर्वाधिक पलायन वाले ग्रामों में स्थित स्वयं सहायता समूह को ब्याज मुक्त ऋण दिया जायेगा।
आम जनमानस की कठिनाइयों के निराकरण हेतु जनपद स्तरीय विकास प्राधिकरणों द्वारा भवन निर्माण का मानचित्र पास करने की व्यवस्था की प्रक्रिया का सरलीकरण एवं शिथिलीकरण किया जायेगा।

शहरी इलाको में गरीब व्यक्तियों हेतु पेयजल कनेक्शन रू. 100 पर उपलब्ध कराया जायेगा। भ्रष्टाचार से लड़ने हेतु एक टोल फ्री हैल्प लाईन की स्थापना की जायेगी।
महिला एवं बच्चों हेतु मुख्यमंत्री सौभाग्यवती योजना प्रारम्भ की जायेगी। इसके अन्तर्गत को सौभाग्यवती किट दी जायेगी। राज्य की निर्यात नीति बनायी जायेगी। राज्य के सीमांत इलाकों में पुलिस आउटपोस्ट बनायी जायेगी।
अराजपत्रित श्रेणी के राज्य कर्मचारियों, राजकीय विभागों कें कार्यप्रभारित कर्मचारियों, सहायता प्राप्त शिक्षण एवं प्राविधिक शिक्षण संस्थाओं व स्थानीय निकायों, निगमों/उपक्रमों के कर्मचारियों तथा कैजुअल-दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों को बोनस दिया जायेगा।
राज्य के सभी जनपदों में वन विभाग द्वारा ‘‘स्वच्छ वन, स्वस्थ जीवन’’ कार्यक्रम के अन्तर्गत नगर वन/ईको पार्क/बायोडाईवर्सिटी पार्क की स्थापना की जायेगी। देहरादून में साइंस कॉलेज की स्थापना की जाएगी। सरकारी भवनों के निर्माण में स्थानीय वास्तु शैली के उपयोग को बढ़ावा दिया जायेगा।
मुख्यमंत्री ने गैरसैंण क्षेत्र के लिये भी अनेक घोषणाएं कीं। गैरसैंण में कौशल विकास योजना के अंतर्गत सेन्टर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना की जाएगी। नगर पंचायत गैरसैंण में आंतरिक मार्गों, नालों आदि के निर्माण को स्वीकृति। नगर पंचायत गैरसैंण के लिए 3500 लीटर क्षमता के ट्रैक्टर ट्राली और टैंकर क्रय करने की स्वीकृति। विकासखण्ड गैरसैंण में मशरूम कम्पोस्ट उत्पादन यूनिट की स्थापना की जाएगी।

राजकीय इंटर कॉलेज गैरसैंण में 2 मॉडर्न आदर्श लैब को स्वीकृति। बचपन प्रोजेक्ट में जिले के 40 आंगनबाड़ी केंद्रों को शामिल किया जाएगा। इस प्रोजेक्ट में मिनी सोलर प्लांट के माध्यम से बिजली, शौचालय, पानी, फर्नीचर, झूले, अलमारी, शिक्षाप्रद खिलौने, फ्लोर टाईलें, वॉल पेंटिंग, गैस कनेक्शन, यूनिफार्म की व्यवस्था की जाएगी।
ग्राम बड़ागांव के हनुमानशिला के समीप से औली पहुंचने के लिए वैकल्पिक मोटर मार्ग का नवनिर्माण किया जाएगा। पहले चरण में 15 किलोमीटर की स्वीकृति दी जाती है। सर्वे के बाद फिजीबिलीटी के आधार पर दुरमी में मत्स्य पालन, नौकायन, विद्युत उत्पादन आदि के लिए मल्टी परपज तालाब का निर्माण किया जाएगा।
राजकीय बालिका इंटर कॉलेज, गोपेश्वर में भूस्खलन के ट्रीटमेंट और पानी की निकासी की व्यवस्था के साथ ही 2 अतिरिक्त कक्षा कक्ष के निर्माण को स्वीकृति। क्लोनल रूट स्टाक पर आधारित उच्च तकनीक युक्त आदर्श सेब बागान की स्थापना की जाएगी। कर्णप्रयाग मण्डी, विकास खण्ड जोशीमठ के बड़ागांव और विकासखण्ड घाट के सलबगढ में कोल्ड स्टोरेज की स्थापना की जाएगी।
नाबार्ड के अंतर्गत विकासखण्ड घाट के मुख्य बाजार का बाढ़ सुरक्षा का कार्य किया जाएगा। पुरसाड़ी में विजयनगर ग्राम की बाढ़ सुरक्षा का कार्य किया जाएगा।

कर्णप्रयाग-नौटी पैठाणी मोटर मार्ग से ग्राम गैरोली तक मोटर मार्ग नव निर्माण के दूसरे चरण के 3 किलोमीटर को स्वीकृति। इससे ग्राम गैरोली संयोजित होगा।
जल जीवन मिशन के अंतर्गत विकासखण्ड गैरसैंण के कांसुवा ग्रामसभा पेयजल योजना के लिए धनराशि की स्वीकृति। जल जीवन मिशन के अंतर्गत विकासखण्ड गैरसैंण के रामड़ामल्ला ग्रामसभा पेयजल योजना के लिए धनराशि की स्वीकृति। जल जीवन मिशन के अंतर्गत विकासखण्ड गैरसैंण में गोल पेयजल योजना के लिए धनराशि की स्वीकृति। गैरसैंण एवं निकटवर्ती क्षेत्र की पम्पिंग पेयजल योजना को स्वीकृति।
इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक, उच्च शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत, महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्य, विधायक सुरेंद्र सिंह नेगी, महेंद्र भट्ट, मुन्नी देवी शाह, भरत सिंह चैधरी, भाजपा जिलाध्यक्ष रघुवीर सिंह बिष्ट, अन्य जनप्रतिनिधि सहित गणमान्य नागरिक, स्थानीय जनता, स्कूली बच्चे आदि मौजूद रहे।
इससे पूर्व मुख्यमंत्री ने भराडीसैंण स्थित मां भाराडी के मंदिर पहुंच कर विधिवत पूजा अर्चना भी की।

मुख्यमंत्री ने लांच किया रमेश भट्ट का गीत ‘मेरी शान उत्तराखंड’

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने रविवार को मुख्यमंत्री आवास में अपने मीडिया सलाहकार रमेश भट्ट के चर्चित गीत ’मेरी शान उत्तराखण्ड’ को लॉन्च किया। इस गीत की खासियत ये है कि इसमें उत्तराखंड के पहाड़ों की खूबसूरती और संस्कृति के दर्शन तो हैं ही, अपनी मेहनत से उत्तराखण्ड की तकदीर में बदलने में जुटे युवाओं की प्रेरक कहानियां भी हैं। मुख्यमंत्री श्री त्रिवेंद्र ने इस गीत की सराहना करते हुए कहा कि राज्य सरकार की महत्वपूर्ण योजनाओं के बारे में युवाओं को बताने तथा स्वरोजगार को प्रेरित करने की दिशा में यह गीत सराहनीय प्रयास है। इससे निश्चित रूप से हमारे युवाओं को रिवर्स माइग्रेशन की भी प्रेरणा मिलेगी।

मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार रमेश भट्ट ने बताया कि उनके द्वारा पिछले महीनों में स्वरोजगार यात्रा के दौरान प्रदेश के कई जिलों का भ्रमण कर स्वरोजगार की दिशा में उत्कृष्ट कार्य कर रहे लोगों से लगातार संवाद किया तथा उनके अनुभवों को जानते रहे। युवाओं को सरकार की योजनाओं की जानकारी देने के साथ साथ उनकी प्रेरक कहानियों को अपने सोशल मीडिया पर भी वे शेयर करते रहे हैं। उनके वीडियोज को सोशल मीडिया पर लाखों लोगों द्वारा देखा जाता है। इससे न सिर्फ स्वरोजगार के लिए अन्य युवाओं को प्रेरणा मिली, बल्कि स्वरोजगार के क्षेत्र में सरकारी योजनाओं की जानकारी भी युवाओं तक पहुंची।

कहा कि इसी अनुभव के आधार पर उन्होंने यह गीत तैयार किया है। जिसमें उत्तराखण्ड की प्राकृतिक सुंदरता और संस्कृति की झलक के साथ स्वरोजगार की दिशा में अच्छा काम कर रहे युवाओं को भी दिखाया गया है। गीत के माध्यम से उत्तराखंड की संस्कृति के बारे में तो बताया ही गया है साथ ही ये भी बताने का प्रयास किया गया है, कि किस तरह पहाड़ की विषम परिस्थितियों से निकल कर युवा, देश-विदेश में अपने हुनर का डंका बजा रहे हैं। मेरी शान उत्तराखण्ड गीत के बोल हिंदी में हैं। शिल्पा प्रोडक्शन के तहत बने इस गीत का निर्देशन अजय ढौंडियाल ने किया है, संगीत ईशान डोभाल ने जबकि कैमरा व संपादन सन्दीप कोठारी ने किया है।

इस अवसर पर सीएम के ओएसडी धीरेंद्र पंवार, अपर सचिव सुरेश जोशी, विशेष सचिव पराग मधुकर धकाते, मुख्य निजी सचिव विक्रम चैहान, वरिष्ठ प्रमुख निजी सचिव केके मदान, हेम चंद्र भट्ट, कपिल चैहान आदि उपस्थित थे।

जानिए कौन से हैं उत्तराखंड के कुमाऊँ व गढ़वाल क्षेत्रों के लोकप्रिय व्यंजन

अब उत्तराखण्ड के कई रेस्तरां भी अपने मेनू में राज्य के स्थानीय व्यंजनों को प्रमुखता से स्थान दे रहे हैं। दूसरे प्रकार के व्यंजनों से लेकर सैंडविच की दुकानों तक सभी प्रकार के विभिन्न रेस्तरांओं में भी पहाड़ी व्यंजन अपनी जगह बना रहे हैं। ये स्थानीय व्यंजन इन्हें सही मायने में प्रतिस्पर्धा से अलग खड़ा करने और पर्यटकों को इम्युनिटी बूस्टर के विदेशी स्रोतों के विकल्पों की पेशकश कर रहे हैं।

आइए कुछ विशेष लोकप्रिय व्यंजनों की खासियत समझते हैं-
काफुली -उत्तराखंड के कुमाऊँ व गढ़वाल क्षेत्र में प्रसिद्ध शाकाहारी पकवानों में से एक काफुली काफी स्वादिष्ट व्यंजन है जिसका आनंद ज्यादातर सर्दियों के मौसम में लिया जाता है। इसे पालक, लाई और मेथी के पत्तों से बनाया जाता है। लोहे की कड़ाही में पकाया जाने वाले इस स्थानीय व्यंजन को गर्म चावल के साथ खाने का आनंद ही अलग है। स्थानीय भाषा में इसे कापा भी कहा जाता है, यह एक पौष्टिक व्यंजन है जो आयरन, कैल्शियम, विटामिन सी और ई जैसे पोषक तत्वों से समृद्ध है।

पहाड़ी मसूर की दाल – मसूर की दाल उत्तराखंड के कुमाऊँ व गढ़वाल दोनों क्षेत्रों का प्रसिद्ध स्थानीय व्यंजन है। स्वास्थ्य लाभ के संदर्भ में, यह रक्त कोशिकाओं के स्तर को नियंत्रित करने में मदद करता है, हड्डियों को मजबूत और आंखों की दृष्टि शक्ति बढ़ाने में मदद करता है। देसी घी, चपातियों और चावल के साथ इस पहाड़ी मसूर दाल का आनंद लिया जाता है।

भट्ट के डूबके -भट्ट के डूबके कुमाऊँ क्षेत्र का एक पारंपरिक पकवान है। उच्च प्रोटीन और फाइबर के साथ समृद्ध, यह भट्ट या काले सोयाबीन के साथ बनाया जाता है। इस पारंपरिक पकवान को देखते हुए मुंह में पानी आने लगता है, भट्ट के डूबके पाचन में मदद करने के साथ ही रक्तचाप को कम करता है और विटामिन ई और अमीनो एसिड का एक बड़ा स्रोत भी है

झंगोरे की खीर -उत्तराखंड में पैदा होने वाला झंगोरा एक प्रकार का अनाज है जिससे गढ़वाल क्षेत्र में झंगोरे की खीर बनाई जाती है। यह एक स्वादिष्ट स्वीट डिश के रूप में उत्तराखंड में काफी लोकप्रिय है। झंगोरे की खीर में दूध को मिलाया जाता है जिससे एक अनूठा स्वाद आता है।

भांग की चटनी -उत्तराखंड के कुमाऊँ क्षेत्र में सबसे ज्यादा पसंद किए जाने वाले व्यंजनों में भांग की चटनी है। यह भुने हुए भांग के बीज और भुने जीरे के साथ नींबू का रस, मिर्च और हरी धनिया पत्ती से तैयार किया जाता है। स्वाद बढ़ाने के लिए अन्य व्यंजनों के साथ प्रोटीन से समृद्ध भांग की चटनी को खाने के लिए परोशा जाता है। भांग का प्रयोग सर्दियों में पहाड़घ्ी सब्जियों में भी किया जाता है।

कंडाली का साग -कंडाली का साग उत्तराखंड में तैयार किए जाने वाले लोकप्रिय गढ़वाली व्यंजनों में से एक है। उत्तराखंड के प्रसिद्ध स्थानीय पौधों में से एक कंडाली का उपयोग इस व्यंजन को तैयार करने में किया जाता है। कंडाली का साग आयरन, फॉर्मिक एसिड, विटामिन ए और फाइबर से समृद्ध होता है। पर्यटक राज्य में आकर चपाती या चावल के साथ इस व्यंजन का आनंद ले सकत हैं।

उत्तराखंड के पारंपरिक भोजन और व्यंजनों को लोकप्रिय बनाने के लिये किये जा रहे प्रदेश सरकार के प्रयासों का लाभ पर्यटकों को आकर्षित करने में मिलेगा। कोविड महामारी के दौरान लोगों के खानपान के व्यवहार में जो बदलाव आया है, उसका लाभ उत्तराखंड को उसके व्यंजनों की विविधता के चलते मिलना सुनिश्चित है। प्रदेश सरकार का मिशन और विजन उत्तराखंड को विश्व के पर्यटन मानचित्र पर अग्रणी पर्यटन स्थलों में से एक के रूप में स्थान दिलाना है।

करवा चौथ पर चांद का दीदार कर महिलाओं ने खोला व्रत

जो तुमको हो पसंद, वही बात करेंगे
तुम दिन को अगर रात कहो, रात कहेंगे
जो तुमको …

चाहेंगे, निभाएंगे, सराहेंगे आप ही को
आँखों में दम है जब तक, देखेंगे आप ही को
अपनी जुबान से आपके जजबात कहेंगे
तुम दिन को अगर रात कहो, रात कहेंगे
जो तुमको हो पसंद …

कदाचित् इस गीत की पंक्ति आज हर सुहागिनी महिला को अपने पति की ओर से सुनने को मिली होगी। करवा चौथ की सांझ को सुहागिनियों ने चांद का दीदार कर पति की दीर्घायु और सर्व गुण संपन्न होने की कामना की। तो वहीं, पतियों ने भी उन्हें हर समय साथ रहने और प्रत्येक परिस्थिति में साथ निभाने का वायदा किया। आज तीर्थनगरी के बाजारों में सिर्फ जोड़े ही देखने को मिले। एक साथ तीर्थनगरी के बाजारों में सुहागिनी महिलाओं को यूं सजा संवरा देख कर ऐसा प्रतीत हो रहा था मानों देवी और देवता एक साथ आ पहुंचे। इस मौके पर फोटोग्राफरों की भी धूम रहीं। ग्रुप फोटों खींच कर देकर उन्होंने भी चांदी बटोरी।

कोरोना काल पर सुहागिनियों की जीत हुई। तीर्थनगरी में वही जज्बे, उत्साह और उत्सव की भांति करवा चौथ का पर्व मनाया गया। सुबह से ही महिलाओं ने स्नान आदि कर निर्जल व्रत धारण किया। दोपहर बाद सामूहिक रूप से करवा चौथ की कथा, पार्वती माता, चैथ माता की कथा का श्रवण किया।

शाम ढलते ही सुहागिनियों ने दुल्हन की भांति तैयार और उनके पतियों ने दुल्हे की तरह परिधान पहने। इसके बाद गंगा तट पर मां का आशीर्वाद प्राप्त किया। यहां सामूहिक रूप से ग्रुप फोटो खिंचवाई। इसके बाद चांद आने पर छलनी की मदद से पति का चेहरा देखा। इसके बाद पतियों ने अपनी पत्नियों को जल पिलाकर व्रत खुलवाया। इसके बाद पूर्ण रूप से व्रत खोला गया। व्रती महिलाओं ने पति सहित परिवार के सभी बड़े लोगों के पैर छूकर आशीर्वाद लिया। साथ ही चांद से पति की लंबी उम्र की कामना भी की।

केदारनाथ स्थित ईशानेश्वर मंदिर के नव निर्माण में मुंबई के दानी मनोज सोलंकी ने जताई इच्छा

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत की अध्यक्षता में उत्तराखण्ड चारधाम देवस्थानम प्रबन्धन बोर्ड की बैठक हुई। बैठक में बोर्ड के संचालन से सम्बन्धित विषयों के साथ ही बोर्ड द्वारा तैयार किये विभिन्न ड्राफ्ट रूल को स्वीकृति प्रदान की गई, जिसे शासन को उपलब्ध कराया जायेगा। इसमें पुजारियों, न्यासी, तीर्थ पुरोहितो, पण्डो व हक हकूक धारियों के अधिकारों का विनिश्चय एवं संरक्षण से सम्बन्धित नियमावली भी शामिल है। इस अवसर पर देवस्थानम बोर्ड के लोगो (प्रतीक चिन्ह्) की डिजाइनों पर भी चर्चा हुई। जिनमें कतिपय संशोधन के पश्चात अन्तिम निर्णय लिया जायेगा।
बैठक में श्री बद्रीनाथ धाम में मन्दिर एवं समीपवर्ती स्थलों के विस्तारीकरण एवं सौन्दर्यीकरण के सम्बन्ध में निर्णय लिया गया कि बद्रीनाथ धाम में यात्रियों की संख्या में प्रतिवर्ष हो रही वृद्धि के कारण इस क्षेत्र का विस्तारीकरण एवं सौन्दर्यीकरण आवश्यक है ताकि भविष्य में यात्रियों को दर्शन, यातायात एवं ठहरने की समुचित व्यवस्था हो सके इसके लिए देवस्थानम बोर्ड को इसकी व्यवस्था सौंपे जाने पर विचार किया गया। बोर्ड के स्तर पर इससे सम्बन्धित कार्यवाही सुनिश्चित कर शीघ्र प्रस्ताव तैयार कर शासन को प्रेषित करने पर सहमति बनी। बोर्ड अपने स्तर पर इसके लिये तकनीकि एवं विषय विशेषज्ञों की व्यवस्था भी कर सकेगा। इसके साथ ही बैठक में तृतीय केदार श्री तुंगनाथ मन्दिर एवं सभा मण्डप आदि के जीर्णोद्धार पर भी सहमति बनी इसके लिये यू.एस.ए. के दानी पंकज कुमार द्वारा धनराशि व्यय करने की इच्छा जतायी है।
केदारनाथ स्थित ईशानेश्वर मन्दिर के नव निर्माण के लिये भी स्वीकृति प्रदान की गई इस मन्दिर के निर्माण के लिये मुम्बई के दानी मनोज सोलंकी ने इच्छा व्यक्त की है। श्री केदारनाथ मन्दिर के पूरब द्वार की मरम्मत पर भी सहमति बनी जिसके लिये धनराशि दानी हरियाणा के श्री यतिन घई ने दान की सहमति दी है।

बैठक में केदारनाथ मे रावल पुजारी आदि के कक्षों की मरम्मत भविष्य में ऊखीमठ मन्दिर के जीर्णोद्वार, बहुमूल्य पाण्डुलिपियों को डिजिटाइल किये जाने, कार्तिक स्वामी मन्दिर को देवस्थानम बोर्ड के अधीन लाये जाने तथा थैलीसैण्ड स्थित विन्देश्वर मन्दिर के जीर्णोद्वार किये जाने पर सहमति प्रदान की गई।
बैठक में मुख्यमंत्री एवं अध्यक्ष, उत्तराखण्ड देवस्थानम प्रबन्धन बोर्ड त्रिवेन्द्र ने यात्रा मार्गो सहित मन्दिर परिसरो में देवस्थानम बोर्ड के साइनेज होर्डिंग आदि लगाये जाने की बात कही। उन्होंने कहा कि बद्रीनाथ, केदारनाथ मन्दिरों के पुजारियों, पण्डों, पुरोहितों, वाद्य यंत्र वादको आदि का विवरण तैयार किया जाय ताकि जरूरत पड़ने पर इन लोगों को भी आर्थिक सहायता उपलब्ध करायी जा सके। उन्होंने कहा कि ये लोग हमारी संस्कृति के संवाहक हैं।
उत्तराखण्ड देवस्थानम प्रबन्धन बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी रविनाथ रमन ने बताया कि 25 अक्टूबर तक चारधाम में 1.72 लाख यात्री दर्शनार्थ आये हैं तथा 2 लाख द्वारा रजिस्ट्रेशन किया गया है, जबकि बद्रीनाथ मन्दिर को 7.55 करोड़ तथा केदारनाथ मन्दिर को 75 लाख की आय हुई है।
बैठक में कैबिनेट मंत्री एवं उपाध्यक्ष उत्तराखण्ड देवस्थानम प्रबन्धन बोर्ड सतपाल महाराज, विधायक महेन्द्र भट्ट, गोपाल रावत, सचिव पर्यटन दिलीप जावलकर, सचिव वित्त श्रीमती सौजन्या, अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी बीडी सिंह, देवस्थानम बोर्ड के अनिल ध्यानी, प्रमोद नोटियाल, डॉ0 हरीश गौड आदि उपस्थित थे।